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                <title>opposition protest - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>राज्यसभा में प्रश्नकाल बाधित: राम मंदिर चढ़ावा चोरी विवाद पर विपक्ष का हंगामा, खड़गे पर पद का दुरुपयोग करने का आरोप</title>
                                    <description><![CDATA[राम मंदिर ट्रस्ट पर लगे आरोपों और चढ़ावा चोरी के मुद्दे को लेकर राज्यसभा में विपक्ष ने जबरदस्त हंगामा किया। सभापति सी.पी. राधाकृष्णन की अपीलों के बावजूद विपक्षी सांसद लगातार नारेबाजी करते रहे, जिससे प्रश्नकाल बाधित हुआ। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/question-hour-interrupted-in-rajya-sabha-opposition-ruckus-over-ram/article-161959"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-08/parliamentt.png" alt=""></a><br /><p>नई​ दिल्ली। चढ़ावा चोरी के मुद्दे पर विपक्ष के हंगामे के कारण राज्यसभा में मंगलवार को प्रश्नकाल बाधित रहा और सदन की कार्यवाही करीब 20 मिनट बाद पूरे दिन के लिए स्थगित कर दी गयी। इसी मुद्दे पर हंगामे के कारण शून्यकाल में भी सदन की कार्यवाही बीच में स्थगति करनी पड़ी थी। उसके बाद दोपहर 12 बजे जब प्रश्नकाल की कार्यवाही फिर से शुरू हुई तो विपक्षी सदस्यों का हंगामा जारी रहा। पहला प्रश्न राष्ट्रीय जनता दल के मनोज झा का था जो उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय से संबंधित था। लेकिन जब सभापति सी.पी. राधाकृष्णन ने पहला पूरक प्रश्न पूछने के लिए उनका नाम पुकारा तो उन्होंने कहा, "पूरा देश जानना चाहता है कि प्रधानमंत्री और गृह मंत्री लगातार सदन से अनुपस्थित क्यों हैं।"</p>
<p>इसके बाद सभापति ने विपक्षी सदस्यों के शोर-शराबे के बीच ही सदन की कार्यवाही जारी रखी। इस दौरान उन्होंने किसी भी विपक्षी सदस्य का नाम प्रश्न पूछने के लिए नहीं पुकारा। वह बीच-बीच में उनसे अपनी सीट पर जाने की अपील करते रहे जिसका हंगामा कर रहे सदस्यों पर कोई असर नहीं हुआ। उन्होंने चेतावनी भी दी कि यदि विपक्षी सदस्य हंगामा बंद नहीं करते हैं तो वह नाम लेकर उनके खिलाफ कार्रवाई कर सकते हैं। कभी-कभी सत्ता पक्ष के सदस्य भी खड़े होकर विपक्षी सदस्यों से कुछ कहते देखे गये।</p>
<p>करीब 20 मिनट तक प्रश्नकाल की कार्यवाही चलाने के बाद सभापति ने तमिलनाडु से द्रमुक के तिरुचि शिवा को बोलने का मौका दिया। सभापति के पहले ही आगाह कर देने के बाद भी शिवा ने राज्य विधानसभा में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से संबंधित मुद्दा उठाना चाहा जिसकी सभापति ने उन्हें अनुमति नहीं दी और सदन की कार्यवाही अपराह्न दो बजे तक के लिए स्थगित कर दी। इससे पहले, पूर्वाह्न 11 बजे सभापति सी.पी. राधाकृष्णन ने विधायी दस्तावेज सदन के पटल पर रखे जाने के बाद जैसे ही शून्यकाल की कार्यवाही शुरू करनी चाही तो विपक्षी सदस्यों ने अपनी जगह से उठकर तेज आवाज में राम मंदिर में चढ़ावा चोरी का मुद्दा उठाना शुरू कर दिया। </p>
<p>नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि राम मंदिर ट्रस्ट को बहुमूल्य भेंटों, जमीन की खरीद- फरोख्त और दान को लेकर गंभीर आरोप लगे हैं। उन्होंने कहा कि इस ट्रस्ट का गठन सरकार ने किया था और प्रधानमंत्री ने इस बारे में घोषणा की थी। राम मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा समारोह में भी मोदी मौजूद थे। इस सब को देखते हुए सरकार तथा प्रधानमंत्री की चढ़ावा चाेरी के मुद्दे पर जवाबदेही बनती है। उन्होंने कहा कि अब सीबीआई, ईडी और अन्य प्रवर्तन एजेंसियां कहां हैं, इस मामले की जांच क्यों नहीं करतीं। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ता पक्ष इस मुद्दे पर राजनीति कर रहा है और उसे लोगों से माफी मांगनी चाहिये। उनकी इस बात का सत्ता पक्ष के सदस्यों ने कड़ा विरोध किया। दोनों पक्षों के सदस्यों के बीच तीखी नोक- झोंक और नारेबाजी हुई।</p>
<p>संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के लोग सदन में भी और बाहर भी हंगामा करते हैं। उन्होंने खरगे पर अपने पद का दुरुपयोग करने का आरोप लगाते हुए कहा कि यह सदन केवल उनके लिए नहीं है और सदस्यों को भी अपनी बात रखने का मौका मिलना चाहिये। उन्होंने कहा कि खरगे को हर बार बोलने की अनुमति नहीं मिलनी चाहिये क्योंकि वह केवल अपनी बात करते हैं और दूसरे सदस्यों की बात नहीं सुनते।</p>
<p>रिजिजू ने आरोप लगाया कि कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के नेताओं ने हमेशा भगवान राम का अपमान किया है। ये भगवान राम और राम मंदिर के विरोधी हैं और अब राजनीति करने के लिए घड़ियाली आंसू बहा रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि ये भगवान राम का अस्तित्व नहीं मानते और इन्होंने राम मंदिर बनाये जाने का विरोध किया था। उन्होंने जोर देकर कहा कि विपक्ष चढ़ावा चोरी के नाम पर नाटक नहीं कर सकते और इस मुद्दे पर बात करने से पहले इन्हें माफी मांगनी चाहिये। इस बीच शिवा ने तमिलनाडु विधानसभा में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का मुद्दा उठाया। इस पर सभापति ने कहा कि यह राज्य का विषय है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 04 Aug 2026 14:25:43 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>कर्नाटक भर्ती विवाद में बढ़ा सियासी घमासान, गृह मंत्री के बयान पर विपक्ष ने खोला सरकार के खिलाफ मोर्चा</title>
                                    <description><![CDATA[कर्नाटक में सिविल पुलिस कांस्टेबल परीक्षा में कथित अनियमितताओं के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों पर गृह मंत्री प्रियांक खरगे की लाठीचार्ज संबंधी टिप्पणी से विवाद गहरा गया है। विपक्ष ने गृह मंत्री से तत्काल इस्तीफे और परीक्षा केंद्रों में हुई गड़बड़ियों की निष्पक्ष जांच की मांग की है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/political-turmoil-increases-in-karnataka-recruitment-controversy-opposition-opens-front/article-161880"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-08/111200-x-600-px)-(2)8.png" alt=""></a><br /><p>बेंगलुरु। कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खरगे ने सोमवार को यह कहकर राजनीतिक तूफान खड़ा कर दिया कि अगर प्रदर्शनकारी अभ्यर्थी अपना आंदोलन जारी रखते हैं, तो पुलिस उन पर 'लाठीचार्ज' कर सकती है। उनके इस बयान पर बवाल मच गया है और विपक्ष ने परीक्षा में धांधली को लेकर फिर से उनके इस्तीफे की मांग की है। अपने इस्तीफे की मांगों पर प्रतिक्रिया देते हुए श्री खरगे ने कहा, "पहले वे 25 दिनों तक उपवास करें। उन्हें भूख हड़ताल पर बैठने दें। इसके बाद भी अगर वे नहीं मानते हैं, तो हम एक बार लाठीचार्ज करेंगे और उसके बाद मैं इस्तीफा दे दूंगा।"</p>
<p>यह बयान रविवार को विजयपुरा जिले के टिकोटा स्थित एक केंद्र पर आयोजित सिविल पुलिस कांस्टेबल भर्ती परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर अभ्यर्थियों के विरोध-प्रदर्शन के बीच आया है। अभ्यर्थियों का दावा है कि प्रश्नपत्र लगभग 30 मिनट देर से बांटे गये थे और अलग-अलग कक्षाओं में अलग-अलग प्रक्रियाओं का पालन किया गया। पुनर्परीक्षा की मांग करते हुए कई अभ्यर्थी परीक्षा केंद्र से बाहर निकल आये। उनका आरोप था कि इन गड़बड़ियों के कारण उन्हें नुकसान हुआ है। वहीं परीक्षा अधिकारियों ने कहा है कि परीक्षा 'कर्नाटक परीक्षा प्राधिकरण' (केईए) के मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) के अनुसार आयोजित की गयी थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रश्नपत्र और ओएमआर शीट लेकर परीक्षा हॉल से बाहर जाने वाले अभ्यर्थियों को दोबारा प्रवेश करने की अनुमति नहीं दी गयी, क्योंकि उन्होंने नियमों का उल्लंघन किया था।</p>
<p>3,991 सिविल पुलिस कांस्टेबल पदों पर भर्ती के लिए पूरे कर्नाटक में 800 से अधिक केंद्रों पर आयोजित लिखित परीक्षा में लगभग 4.54 लाख अभ्यर्थी शामिल हुए। अधिकारियों ने बताया कि शिकायतें केवल कुछ केंद्रों तक ही सीमित थीं और पर्यवेक्षकों के निर्धारित प्रक्रिया स्पष्ट किये जाने के बाद बाकी जगह परीक्षा सामान्य रूप से संपन्न हुई। विपक्ष के नेता आर अशोक ने कांग्रेस सरकार पर प्रशासनिक विफलता का आरोप लगाया और श्री खरगे के इस्तीफे, प्रभावित केंद्र पर परीक्षा रद्द करने, संबंधित अभ्यर्थियों के लिए नये सिरे से परीक्षा आयोजित करने और स्वतंत्र जांच की मांग की। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि हावेरी और हासन जिलों से भी ऐसी ही अनियमितताओं की खबरें आयी हैं।</p>
<p>विपक्ष की मांग को खारिज करते हुए खरगे ने सवाल उठाया कि पिछली भाजपा सरकार के कार्यकाल में पुलिस सब-इंस्पेक्टर भर्ती घोटाले के दौरान तत्कालीन मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई और तत्कालीन गृह मंत्री अरागा ज्ञानेंद्र सहित भाजपा नेताओं ने इस्तीफा क्यों नहीं दिया था। खरगे ने विवाद को तूल न देने का प्रयास करते हुए कहा कि लाखों अभ्यर्थियों के शामिल होने के बावजूद केवल 120 के करीब अभ्यर्थियों ने ही आपत्तियां जतायी थीं। इन बयानों ने भर्ती प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक विवाद को और तेज कर दिया है, जहां विपक्ष ने गृह मंत्री पर अभ्यर्थियों के प्रति संवेदनहीन होने का आरोप लगाया है और नये सिरे से जांच की मांग की है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 03 Aug 2026 18:28:36 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>संसद परिसर में विपक्ष का अनोखा विरोध प्रदर्शन: पप्पू यादव बने पुजारी, राहुल गांधी ने डाला चंदा</title>
                                    <description><![CDATA[संसद के मानसून सत्र के दौरान मकर द्वार पर विपक्षी सांसदों ने राम मंदिर ट्रस्ट के चढ़ावा गबन आरोपों को लेकर अनूठा प्रदर्शन किया। सांसद पप्पू यादव ने पुजारी का वेश धारण कर दानपेटी रखी, जिसमें अन्य नेताओं ने प्रतीकात्मक रूप से पैसे डाले। विपक्ष ने मामले की निष्पक्ष जांच की पुरजोर मांग उठाई।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/unique-protest-by-opposition-in-parliament-complex-pappu-yadav-became/article-161561"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-07/rahul-gandhi4.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र के दौरान शुक्रवार को संसद परिसर में अनोखा विरोध प्रदर्शन देखा गया। यहां विपक्षी सांसदों ने राम मंदिर चंदा विवाद को लेकर एक नाटकीय विरोध प्रदर्शन किया। पूर्णिया के स्वतंत्र सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव ने पुजारी का वेश धारण किया और अपने सामने दानपेटी रखकर मकर द्वार के पास प्रदर्शन किया। इस दौरान पप्पू यादव भगवा वस्त्र और पगड़ी पहने दिखाई दिए। </p>
<p>लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी समेत कई विपक्षी सांसदों ने पप्पु यादव के विरोध प्रदर्शन का समर्थन करते हुए प्रतीकात्मक रूप से दानपेटी में पैसे डाले, जिसके बाद पप्पू यादव ने दानपेटी छीनकर भागने का अभिनय किया। पप्पु यादव और विपक्षी दलों ने विरोध प्रदर्शन के दौरान “चढ़ावा चोर, गद्दी छोड़”, “अमित शाह सदन में आओ” और “जवाब तुमको देना होगा” जैसे नारे लगाए गए। जानकारी के अनुसार, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और अन्य इंडिया गठबंधन के सांसद भी इस प्रदर्शन में शामिल रहे। </p>
<p>विपक्ष ने आरोप लगाते हुए कहा कि राम मंदिर ट्रस्ट में चढ़ावे के रूप में आए करीब 7 करोड़ रुपये के गबन के आरोप सामने आए हैं। विपक्ष इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की। बताया जा रहा है ​कि इस अनोखे विरोध प्रदर्शन का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा हैं। विपक्ष ने इस नुक्कड़ नाटक के जरिए अयोध्या राम मंदिर के चढ़ावे में कथित गबन का मुद्दा उठाया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 31 Jul 2026 15:00:46 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>‘महिला आरक्षण’ को लेकर संसद में टकराव संभव : विशेष सत्र में सरकार-विपक्ष होंगे आमने-सामने, महिला आरक्षण के विरोध में नहीं हैं, लेकिन इसे परिसीमन से जोड़ना गलत </title>
                                    <description><![CDATA[संसद के विशेष सत्र में महिला आरक्षण और सीटों की संख्या बढ़ाकर 815 करने वाले विधेयकों पर घमासान तय है। मोदी सरकार जहाँ इसे ऐतिहासिक कदम बता रही है, वहीं विपक्ष और दक्षिण भारतीय राज्य परिसीमन के प्रभाव को लेकर चिंतित हैं। किरेन रिजिजू ने आश्वस्त किया है कि यह बदलाव संतुलित और आनुपातिक विकास सुनिश्चित करेगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/clash-possible-in-parliament-over-womens-reservation-government-opposition-will-face/article-150602"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/111200-x-600-px)11.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। संसद के 16 से 18 अप्रैल तक बुलाए गए विशेष सत्र में महिला आरक्षण को लेकर जोरदार सियासी टकराव देखने को मिल सकता है। मोदी सरकार जहां ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ के तहत 33% महिला आरक्षण लागू करने के लिए संविधान संशोधन विधेयक लाने की तैयारी में है, वहीं विपक्ष ने इसके कई प्रावधानों पर कड़ा विरोध जताया है। विपक्ष का कहना है कि वे महिला आरक्षण के विरोध में नहीं हैं, लेकिन इसे परिसीमन से जोड़ना गलत है।</p>
<p>विशेष सत्र में मोदी सरकार तीन विवादास्पद विधायी प्रस्तावों को पारित कराने की कोशिश कर रही है, जिनके लिए संविधान संशोधन आवश्यक है, इन विधेयकों का उद्देश्य लोकसभा की सीटों को बढ़ाकर 815 करना, महिलाओं के लिए आरक्षण लागू करना और इस विस्तार के दायरे में केंद्र शासित प्रदेशों को शामिल करना है। ये तीन विधेयक हैं, संविधान (131वां संशोधनद्ध विधेयक)परिसीमन विधेयक और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक जिसे विपक्ष के रजामंदी के बिना संसद में पास करना मुमकिन नहीं है। कांग्रेस ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि विधेयक का उद्देश्य स्पष्ट नहीं है और इससे संसदीय लोकतंत्र को नुकसान हो सकता है। पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि सरकार की नीयत ठीक नहीं है। </p>
<p><strong>परिसीमन के मुद्दे पर कई गैर-बीजेपी मुख्यमंत्री खिलाफ</strong></p>
<p>वहीं, दक्षिण भारत के कई गैर-बीजेपी मुख्यमंत्रियों ने परिसीमन के मुद्दे पर केंद्र के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने चेतावनी दी कि यदि राज्य के हितों को नुकसान पहुंचा या उत्तरी राज्यों का राजनीतिक प्रभाव बढ़ाया गया, तो तमिलनाडु में व्यापक आंदोलन होगा। </p>
<p><strong>किसी राज्य के साथ नहीं होगा अन्याय: रिजिजू </strong></p>
<p>केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने लोकसभा सीटों के परिसीमन से दक्षिण के राज्यों को नुकसान होने की आशंका सिरे से खारिज कर दी। उन्होंने कहा कि संविधान संशोधन विधेयक के तहत लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाकर अधिकतम 850 किए जाने से दक्षिणी राज्यों को लाभ होगा, क्योंकि निर्वाचन क्षेत्रों की संख्या में आनुपातिक वृद्धि की जाएगी। संविधान संशोधन विधेयक पूरी तरह से संतुलित, सुविचारित है और प्रत्येक समुदाय, क्षेत्र और राज्य की आकांक्षाओं का ध्यान रखेगा। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 16 Apr 2026 11:13:36 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>नारी शक्ति वंदन बिल पर सरकार की मंशा संदिग्ध, विपक्ष को मसौदा तक नहीं मिला : सतीश पौल मुंजनी</title>
                                    <description><![CDATA[झारखंड कांग्रेस के मीडिया चेयरमैन सतीश पौल मुंजनी ने नारी शक्ति वंदन बिल की गोपनीयता पर केंद्र को घेरा है। उन्होंने आरोप लगाया कि 16 अप्रैल से सत्र शुरू होने के बावजूद विपक्ष को विधेयक का मसौदा नहीं दिया गया। कांग्रेस ने इसे लोकतांत्रिक परंपराओं के खिलाफ बताते हुए सरकार से राजनीतिक लाभ के बजाय स्वस्थ बहस की मांग की है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/governments-intention-on-nari-shakti-vandan-bill-doubtful-opposition-did/article-150393"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/satish-paul.png" alt=""></a><br /><p>रांची। झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मीडिया चेयरमैन सतीश पौल मुंजनी ने नारी शक्ति वंदन बिल (महिला आरक्षण बिल) को लेकर केंद्र सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। मुंजनी ने कहा कि 16 अप्रैल से शुरू हो रहे तीन दिवसीय विशेष सत्र में जिस महत्वपूर्ण बिल को पारित कराने की बात की जा रही है, उसका मसौदा आज 14 अप्रैल तक भी विपक्षी दलों को उपलब्ध नहीं कराया गया है। मुंजनी ने कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और लोकतांत्रिक परंपराओं के खिलाफ है। इतना महत्वपूर्ण और दूरगामी प्रभाव वाला विधेयक बिना पूर्व सूचना और बिना मसौदा साझा किए लाया जाना यह दर्शाता है कि सरकार स्वस्थ बहस और सार्थक विचार-विमर्श से बचना चाहती है। </p>
<p>उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार केवल दिखावटी तरीके से महिला सशक्तिकरण का संदेश देना चाहती है, जबकि वास्तविकता में वह विपक्ष को बिना तैयारी के सदन में लाकर बहस को सीमित करना चाहती है। मुंजनी ने कहा कि महिला आरक्षण जैसे महत्वपूर्ण विषय पर सभी दलों के बीच व्यापक चर्चा, सुझाव और सहमति आवश्यक है। लेकिन केंद्र सरकार की जल्दबाजी और गोपनीयता यह संकेत देती है कि उसकी प्राथमिकता पारदर्शिता नहीं, बल्कि राजनीतिक लाभ उठाना है।</p>
<p>सरकार की मंशा महिलाओं की हित में है तो तुरंत इस बिल का विस्तृत मसौदा सभी विपक्षी दलों को उपलब्ध कराए, ताकि सदन में सार्थक और ठोस बहस हो सके और देश की महिलाओं के हित में एक मजबूत और प्रभावी कानून बनाया जा सके। मुंजनी ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस पार्टी महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए प्रतिबद्ध है, लेकिन किसी भी महत्वपूर्ण कानून को बिना चर्चा और तैयारी के पारित करना लोकतंत्र की भावना के खिलाफ है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 14 Apr 2026 17:25:09 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>''विदेशी अंशदान विनियमन संशोधन विधेयक'' का विरोध : विपक्ष का संसद में प्रदर्शन, गैर सरकार संगठन-संस्थाओं को लाभ पहुंचाने का आरोप; सरकार से वापस लेने की मांग </title>
                                    <description><![CDATA[लोकसभा में पेश होने वाले विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक 2026 के खिलाफ कांग्रेस सहित विपक्षी दलों ने जोरदार विरोध जताया। सांसदों का आरोप है कि यह कानून एनजीओ और सामाजिक संस्थाओं को निशाना बनाने की मंशा से लाया गया है। विपक्ष ने सरकार से इस विवादित विधेयक को तत्काल वापस लेने की मांग करते हुए नारेबाजी की।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/oppositions-demonstration-in-parliament-against-the-foreign-contribution-regulation-amendment/article-148685"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/parliament.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस तथा अन्य कई विपक्षी दलों के सांसदों ने संसद भवन परिसर में बुधवार को लोकसभा में पेश होने वाले 'विदेशी अंशदान विनियमन संशोधन विधेयक 2026' के विरोध में प्रदर्शन किया और सरकार से इसे वापस लेने की मांग की। विपक्षी दलों के सांसदों ने हाथों में बैनर लेकर नारेबाजी की और कहा कि यह विधेयक गैर सरकार संगठन (एनजीओ) तथा संस्थाओं को लक्ष्य करने की मंशा से लाया जा रहा है इसलिए सरकार को इसे तत्काल वापस लेना चाहिए।</p>
<p>गौरतलब है कि, लोकसभा में आज विदेशी अंशदान विनियमन संशोधन विधेयक, 2026 पर चर्चा हो सकती है। यह विधेयक विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम 2010 में संशोधन करेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 01 Apr 2026 14:03:34 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>संसद में बजट संग्राम: राज्यसभा में चर्चा के दौरान विपक्ष ने लगाया बजट में जरूरतमंदों का ध्यान न रखने का आरोप, सत्तापक्ष ने कहा-आम लोगों की चिंता कर रही सरकार</title>
                                    <description><![CDATA[राज्यसभा में वित्त विधेयक 2026 पर तीखी बहस हुई। विपक्ष ने कॉरपोरेट टैक्स में कमी और आम जनता पर बढ़ते बोझ का आरोप लगाते हुए सरकार को घेरा। वहीं, भाजपा ने पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी कटौती को जनहितैषी बताया। तृणमूल और द्रमुक ने आर्थिक असमानता और चुनावी राजनीति पर सवाल उठाते हुए सब्सिडी में कटौती की आलोचना की।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/during-the-discussion-in-rajya-sabha-the-opposition-accused-the/article-148130"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/delhi-parliament.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। राज्यसभा में शुक्रवार को वित्त विधेयक, 2026 ओर विनियोग (संख्या-2) विधेयक, 2026 पर एक साथ चर्चा के दौरान विपक्ष ने सरकार पर बजट में जरूरतमंदों की अनदेखी करने का आरोप लगाया जबकि सत्तापक्ष ने कहा कि सरकार आम लोगों की चिंता कर रही है। गुजरात से कांग्रेस के शक्ति सिंह गोहिल ने चर्चा की शुरुआत करते हुए कहा कि वित्त विधेयक में सरकार ने जरूरतमंदों, किसानों और महिलाओं का ध्यान नहीं रखा है। वित्त वर्ष 2023-24 के आंकड़ों के हवाले से उन्होंने कहा कि जहां आयकर के प्राप्त राजस्व 26 प्रतिशत बढ़ा था वहीं सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के अनुपात में कॉरपोरेशन कर में कमी आयी है। इसका मतलब है कि कर का बोझ आम लोगों पर डाला जा रहा है और उद्योगों को राहत दी जा रही है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि वित्त विधेयक में साल 2047 तक गुजरात के गांधीनगर स्थित गिफ्टी सिटी को कर में छूट दी गयी है, जहां बड़े-बड़े लोग रहते हैं, लेकिन आम लोगों की, किसानों और महिलाओं को कोई राहत नहीं दी गयी है। कैग की रिपोर्ट का हवाला देते हुए श्री गोहिल ने आरोप लगाया कि सरकार उपकर और अधिभार लगाकर घोषित उद्देश्य से इतर उसका इस्तेमाल कर रही है। भाजपा के संजय सेठ ने कहा कि भारत इस समय सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था बन गया है। आज पूरी दुनिया में पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ा दिये गये हैं जबकि भारत में उत्पाद शुल्क कम करके इनके दाम नहीं बढ़ने दिये गये हैं। यह दिखाता है कि सरकार आम लोगों की चिंता कर रही है। उन्होंने कहा कि आयकर देने वालों की संख्या बढ़ रही है जो सरकार में लोगों के विश्वास को दिखाता है। सरकार ने "कर आतंकवाद" को समाप्त कर व्यवसायियों को कर मुक्त किया है।</p>
<p>तृणमूल कांग्रेस के साकेत गोखले ने आरोप लगाया कि उत्पाद शुल्क में कटौती इसलिए की गयी है कि क्योंकि चार राज्यों में चुनाव हैं। यदि सरकार आम लोगों के बारे में सोचती तो पिछले चार साल से रूस से कम कीमत पर कच्चा तेल की खरीद का लाभ उन्हें देती जो नहीं किया गया। उन्होंने वित्त मंत्री से इस बात का आश्वासन मांगा कि चुनाव समाप्त होने के बाद भी पेट्रोल-डीजल की कीमत नहीं बढ़ायी जायेगी। उन्होंने संसद का सत्र होने के बावजूद प्रधानमंत्री के बयान जारी करने के बाद संसद में पश्चिम एशिया की स्थिति पर चर्चा न करने पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि यदि सरकार को इतनी ही चिंता होती तो रसोई गैस सिलेंडर के दाम 60 रुपये नहीं बढ़ाये जाते।</p>
<p>तमिलनाडु से द्रमुक के पी. विल्सन ने कहा कि बजट में आर्थिक असमानता कम करने के लिए कोई उपाय नहीं किया गया है। एक तरफ धनाढ्य लोगों की संपत्ति बढ़ रही है और दूसरी तरफ भुखमरी की रैंकिंग में भारत लगातार नीचे गिर रहा है। खाद्य सब्सिडी, ईंधन पर सब्सिडी और उर्वरक सब्सिडी कम की जा रही है। उन्होंने कहा कि गरीब कल्याण पर खर्च कम करके और आम लोगों पर बोझ डालकर राजकोषीय घाटा कम करना गलत है। उन्होंंने कहा कि देश की आम गृहणी राजकोषीय घाटे का आंकड़ा नहीं देखती, वह चावल की कीमत  खती है।</p>
<p>उन्होंने केंद्र पर संसाधनों के आवंटन में तमिलनाडु के साथ भेदभाव का आरोप लगाते हुए कहा कि कई फंड सिर्फ कागज पर हैं, लेकिन राज्य सरकार को कोई पैसा नहीं मिला है। पिछले पांच साल में राज्य को कुछ भी नहीं दिया गया है जिसका जवाब विधानसभा चुनाव में जनता देगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 27 Mar 2026 17:16:41 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल विधेयक पर तृणमूल का राज्यसभा से बहिर्गमन: डेरेक ओ' ब्रायन का केंद्र सरकार पर कटाक्ष, बोले-सरकार पश्चिम बंगाल में कुछ ज्यादा ही व्यस्त</title>
                                    <description><![CDATA[तृणमूल कांग्रेस ने केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल विधेयक 2026 की प्रतियां समय पर न मिलने के विरोध में सोमवार को राज्यसभा से बहिर्गमन किया। डेरेक ओ'ब्रायन ने सरकार पर नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए कहा कि सदस्यों को 48 घंटे पहले दस्तावेज मिलने चाहिए थे। टीएमसी नेताओं ने तंज कसा कि सरकार पश्चिम बंगाल में अत्यधिक व्यस्त है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/trinamools-walkout-from-rajya-sabha-on-central-armed-police-forces/article-147514"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/tmc-mp-derek-obrien.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। राज्यसभा में विपक्षी दल तृणमूल कांग्रेस ने केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सामान्य प्रशासन) विधायक 2026 की प्रति सदस्यों को समय से उपलब्ध नहीं कराए जाने के विरोध में सोमवार को सदन से बहिर्गमन किया। तृणमूल कांग्रेस के नेता डेरेक ओ' ब्रायन ने जरूरी दस्तावेज सदन के पटल पर रखे जाने के बाद शून्यकाल शुरू होने से पहले यह मुद्दा उठाते हुए कहा कि सदन की आज की कार्य सूची में केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सामान्य प्रशासन) विधयेक 2026 सूचीबद्ध है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि नियमों के अनुसार सदन में पेश किए जाने वाले किसी भी विधायक की प्रति सदस्यों को कम से कम 48 घंटे पहले उपलब्ध कराई जानी चाहिए। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि सरकार पश्चिम बंगाल में कुछ ज्यादा ही व्यस्त है।</p>
<p>ब्रायन ने कहा कि उनकी पार्टी इस विधेयक की प्रति समय से उपलब्ध नहीं कराए जाने के विरोध में सदन सबसे बहिर्गमन कर रही है। इसके बाद तृणमूल कांग्रेस के सदस्य सदन से उठकर बाहर चले गए। सशस्त्र पुलिस बल विधेयक सदन में पेश किए जाने के लिए राज्यसभा की आज की कार्य सूची में शामिल है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 23 Mar 2026 14:03:09 +0530</pubDate>
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                <title>किरेन रिजिजू का विपक्ष पर हमला: राजनीतिक रोटी सेंकने के लिए लाया गया ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव </title>
                                    <description><![CDATA[संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव को 'राजनीतिक रोटी सेंकने' का प्रयास बताया। उन्होंने कहा कि बिरला ने रिकॉर्ड संसदीय उत्पादकता और निष्पक्षता से सदन चलाया है। रिजिजू ने राहुल गांधी पर कटाक्ष करते हुए कहा कि अध्यक्ष की अनुमति के बिना सदन में कोई नहीं बोल सकता, चाहे वह प्रधानमंत्री ही क्यों न हों।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/kiren-rijijus-attack-on-opposition-no-confidence-motion-against-om-birla/article-146009"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/kiren-rijiju.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ लाये गये अविश्वास प्रस्ताव को राजनीतिक रोटी सेंकने का प्रयास बताते हुए कहा कि सदन के अंदर के क्रियाकलापों के लिए हर सदस्य बिरला को धन्यवाद देता रहेगा क्योंकि उन्होंने सभी को समान मौका दिया है।</p>
<p>किरेन रिजिजू ने विपक्ष की ओर से सदन में पेश अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के विरोध में अपनी बात रखते हुए कहा कि संसदीय कार्य मंत्री सिर्फ सत्तारूढ दल का नहीं होता है। कांग्रेस के साठ साल के इतिहास को देखना चाहिए। संसदीय कार्य मंत्री पर टिप्पणी करने से पहले अपना इतिहास देखना चाहिए। सदन के संचालन का पूरा अधिकार अध्यक्ष का है। अध्यक्ष के निर्णय को कहीं भी चुनौती नहीं दी जा सकती है। अध्यक्ष का निर्णय अंतिम होता है। अध्यक्ष के निर्णय को किसी ने आज तक चुनौती नहीं दी है लेकिन विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कहा था कि सदन में बोलने के लिए उन्हें किसी से अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है। उन्हें पता होना चाहिए कि सदन में अध्यक्ष की अनुमति के बिना नहीं बोल सकते हैं। उन्होंने कहा कि चाहे वह प्रधानमंत्री हों, विपक्ष के नेता हों या कोई अन्य सांसद, लेकिन अध्यक्ष की अनुमति के बिना सदन में कोई नहीं बोल सकता है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि अध्यक्ष किसी को कभी भी बोलने की अनुमति दे सकता है यह उनका अधिकार है। अध्यक्ष के पास कुछ शक्तियां ऐसी है जो कार्यसूची में शामिल नहीं है। संसदीय परंपरा में कई चीजें पहली बार होती है तब भी अध्यक्ष को निर्णय लेना होता है। अध्यक्ष की भूमिका भी विपक्ष तय करना चाहते हैं, यह कैसे हो सकता है। उन्होंने कहा कि जो नियम में शामिल नहीं है तो उस पर निर्णय करने की शक्ति भी अध्यक्ष के पास होता है।</p>
<p>संसदीय कार्य मंत्री ने कहा कि भाजपा के नेताओं ने कभी कागज फाड़कर आसन की तरफ नहीं फेंका है। 1951 के बाद भाजपा के किसी सदस्य ने आसन की तरफ कागज फाड़कर नहीं फेंका है लेकिन विपक्ष आज सारी सीमाओं का लांघने का काम कर रहा है। चालीस साल बाद लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया गया है। कांग्रेस के सदस्यों ने अपने पुराने नेताओं को पढा नहीं है वरना उनको पता चलता। पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने कहा था कि इस सदन की महान परंपरा रही है कि अध्यक्ष की सदाशयता पर उंगली नहीं उठायी जा सकती। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को पूर्व प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू के बारे में जानकारी हासिल करनी चाहिए कि अविश्वास प्रस्ताव पर उन्होंने अध्यक्ष के लिए किस प्रकार का सम्मान व्यक्त किया था।</p>
<p>उन्होंने कहा कि कांग्रेस के कुछ सदस्य भी यह प्रस्ताव लाये जाने से दुखी है। विपक्ष के कम से कम पचास सांसद उनसे मिले हैं जो इस प्रस्ताव के पक्ष में नहीं है, वह मजबूरी में इसमें शामिल हुये हैं। अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाकर कितना गलत काम किया है। इनका नोटिस ही गलत था लेकिन फिर भी अध्यक्ष ने उनको बुलाकर नोटिस को ठीक करवाया। अध्यक्ष की महानता इस प्रकार की है। </p>
<p>किरेन रिजिजू ने कहा, मैं बहुत भारी मन से कह रहा हूं कि अध्यक्ष के बारे में जो बात कर रहे हैं बहुत सोच समझकर बोलना चाहिए। देश के आजाद होने के बाद एक अध्यक्ष का नाम बताना चाहिए जो सरकार के खिलाफ बयान देते हैं और काम करते हैं। अध्यक्ष को सरकार का अध्यक्ष बताना गलत है। विपक्ष का कहना अध्यक्ष सरकारी भाषा बोलते हैं इस प्रकार का आरोप लगाना गलत है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि बिरला के समय जो संसदीय कार्य प्रणाली में जो सुधार हुये हैं उसे कोई नकार नहीं सकता है। आज तक इतिहास में सबसे अधिक नियम 377  के तहत सदस्यों को अपने मुद्दे उठाने का मौका दिया गया है। उनकी अध्यक्षता में संसद को डिजिटल बनाया गया है। उन्होंने कहा कि संसद में भाषण के बाद सदस्यों को तुरंत वीडियो उपलब्ध करा दिया जाता है। सदस्यों के लिए ओम बिरला ने जो किया है वह हमेशा धन्यवाद देते रहेंगे। ओम बिरला सभी को मौका देते हैं। पुराने और अब के रिकार्ड को देख सकते हैं अंतर साफ दिख जाता है। ओम बिरला ने संसदीय लोकतंत्र को मजबूती से खड़ा किया है। 64 देशों का फ्रेंडशिप समूह बनाया है जिसके लिए उनको धन्यवाद देना चाहिए। उन्होंने कहा कि इंसान को किसी के प्रति इतना घृणा नहीं होना चाहिए कि अच्छे काम के लिए भी धन्यवाद नहीं दे सकते हैं। उन्होंने कहा कि बिरला के समय में संसद की उत्पादकता रिकार्ड रही है।</p>
<p>किरेन रिजिजू ने कहा कि हमारी संख्या अधिक है फिर भी सवाल पूछने के लिए विपक्ष को अधिक मौका देते हैं फिर भी पक्षपात का आरोप लगाया जाता है। विपक्ष को लगातार सदन में मौका देने का काम किया और उन्हीं के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लेकर आये हैं। रिजिजू ने कहा कि लोकसभा अध्यक्ष के पद को आज तक बचाकर रखा गया था लेकिन अब पता चला कि लोकतंत्र पर हमला करना है तो लोकसभा अध्यक्ष पर हमला करो। राहुल गांधी जब कोई विषय उठा रहे थे तब अध्यक्ष ने रूलिंग दे दी फिर भी उसे चुनौती दी गयी। विपक्ष का आरोप है कि विपक्ष के नेता को बोलने नहीं दिया जाता है लेकिन सत्र को दौरान वह विदेश चले जाते हैं। विपक्ष के नेता अपना भाषण देने के बाद सदन से बाहर चले जाते हैं जबकि उनको दूसरों की बात भी सुननी चाहिए। उन्होंने कहा विपक्ष का नेता कितना गंभीर है इससे पता चलता है कि गंभीर चर्चा चल रही है और वह दूसरे नेता को आंख मारते हैं। विपक्ष के नेता जिस प्रकार हल्कापन दिखाते हैं वही अन्य सदस्यों में दिखता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 10 Mar 2026 18:46:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>पश्चिम एशिया संकट पर विपक्ष के हंगामे के बीच लोकसभा की कार्यवाही तीन बजे तक स्थगित: सदन ने दी भारतीय क्रिकेट टीम को विश्व कप जीत की बधाई, जयशंकर ने दिया विस्तृत वक्तव्य </title>
                                    <description><![CDATA[लोकसभा में पश्चिम एशिया संघर्ष पर चर्चा की मांग को लेकर विपक्ष ने भारी हंगामा किया, जिसके कारण कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी। विदेश मंत्री एस जयशंकर के वक्तव्य के दौरान नारेबाजी जारी रही। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्ष के व्यवहार को 'गैर-जिम्मेदाराना' बताया। सदन ने भारतीय क्रिकेट टीम को विश्व कप जीत की बधाई भी दी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/amid-opposition-uproar-lok-sabha-proceedings-adjourned-till-3-pm/article-145828"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/lok-sabha.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष पर चर्चा कराने की मांग पर विपक्ष के हंगामे के कारण लोकसभा की कार्यवाही तीन बजे तक के लिए स्थगित कर दी गयी। सदन की कार्यवाही बारह बजे शुरु होते ही पीठासीन अधिकारी जगदंबिका पाल ने भारत की टी20 क्रिकेट विश्व कप में जीत की सदन को सूचना दी। सदन की ओर से भारतीय क्रिकेट टीम को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की गयी। उसके बाद कांग्रेस के सदस्यों में पश्चिम एशिया संघर्ष पर चर्चा कराने की मांग करते हुए सदन के बीचोंबीच आ गये और नारेबाजी करने लगे। हंगामे के बीच पीठासीन अधिकारी ने उसके बाद जरूरी कागजात सदन के पटल पर रखवाये। जगदंबिका पाल ने कहा कि विदेश मंत्री का वक्तव्य आ रहा है आप लोग अपने अपने स्थान पर चले जायें। शायद आप जो मांग कर रहे हैं उसका उत्तर मिल जाये। विपक्ष के भारी हंगामे और शोर-शराबे के बीच ही विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अपना वक्तव्य देना शुरू किया।</p>
<p>हंगामा बढने पर पीठासीन अधिकारी ने कहा कि विदेश मंत्री ने पश्चिम एशिया संकट पर विस्तृत वक्तव्य दिया है। विदेश मंत्री ने सारी बातों का जवाब दिया है। इस बीच संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि विपक्ष भ्रमित है उसे पता ही नहीं कि क्या करना है। लोक सभा अध्यक्ष के खिलाफ नोटिस देते हैं, फिर दोबारा नोटिस देते हैं। हम चर्चा के लिए तैयार हैं तो दूसरा नोटिस देने का क्या मतलब है। उन्होंने कहा कि इस तरीके का व्यवहार सदन में कभी नहीं देखा है। उन्होंने कहा कि एक आदमी देश का महाराजा है क्या, कि सिर्फ उनकी बात सुनी जाएगी। कांग्रेस के लोगों को अंतरआत्मा में झांककर देखना चाहिए। विपक्ष संसद की गरिमा को गिरा रहा है। वह जो अनावश्यक प्रस्ताव लाये हैं उस पर चर्चा करने के लिए तैयार हैं।</p>
<p>इस बीच पीठासीन अधिकारी ने हंगामा कर रहे सदस्यों से कहा कि आप के प्रस्ताव को एजेंडे में शामिल किया गया है और उस पर सरकार चर्चा के लिए तैयार है। अध्यक्ष ओम बिरला ने आपके नोटिस को स्वीकार कर लिया है। फिर भी आप उस पर चर्चा करने के लिए तैयार नहीं है। उन्होंने सदस्यों से बार बार शांत रहने का आग्रह किया और कहा कि क्या आप अपने प्रस्ताव पर नहीं बोलना चाहते हैं। हंगामा नहीं थमने पर सदन की कार्यवाही तीन बजे तक के लिए स्थगित कर दी गयी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 09 Mar 2026 14:28:44 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने अध्यक्ष उदय भानु चिब  और संगठन के अन्य लोगों की गिरफ्तारी के विरोध में किया शांतिपूर्ण सत्याग्रह, रिहाई की मांग की</title>
                                    <description><![CDATA[युवा कांग्रेस ने अध्यक्ष उदय भानु चिब की गिरफ्तारी के विरोध में दिल्ली में शांतिपूर्ण सत्याग्रह किया। पवन खेड़ा और देवेंद्र यादव जैसे वरिष्ठ नेताओं ने कार्यकर्ताओं की तुरंत रिहाई की मांग की। कांग्रेस ने सरकार पर जवाबदेही से बचने और लोकतांत्रिक आवाजों को दबाने का आरोप लगाते हुए इसे अन्याय के खिलाफ देशव्यापी आंदोलन बताया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/youth-congress-workers-protest-against-the-arrest-of-president-uday/article-144729"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/pawan-kheda.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। युवा कांग्रेस अध्यक्ष उदय भानु चिब तथा संगठन के अन्य कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी के विरोध में युवा कार्यकर्ताओं ने गुरुवार को यहां शांतिपूर्ण सत्याग्रह किया। युवा कांग्रेस के प्रवक्ता वरुण पांडे ने गुरुवार को बताया कि सत्याग्रह में देश भर से आए युवा कांग्रेस कार्यकर्ता और राष्ट्रीय कार्यकारणी के सदस्य तथा युवा कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष शामिल हुए। </p>
<p>वरूण पांडे ने बताया कि सत्याग्रह में कांग्रेस संचार विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा, पूर्व युवा कांग्रेस अध्यक्ष श्रीनिवास बी वी, दिल्ली प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष देवेंद्र यादव, कांग्रेस के दिल्ली के प्रभारी काजी निजामुद्दीन, पंजाब में कांग्रेस विधायक राणा गुरजीत सिंह, ओडिशा कांग्रेस प्रभारी अजय कुमार लल्लू, कांग्रेस सचिव अभिषेक दत्त, तौकीर आलम, समेत कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए।</p>
<p>उन्होंने बताया कि इस मौके पर सभी कांग्रेस नेताओं ने एकस्वर में जल्द से जल्द उदय भानु चिब और अन्य युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं की रिहाई की मांग की। उनका यह भी कहना था कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना अपराध नहीं है और युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने देश भर के युवाओं, किसानों और हर नागरिक कि आवाज उठाने का कार्य किया है। उन्होंने कहा कि जब समझौतावादी प्रधानमंत्री से जवाबदेही मांगा जाता है तो वह बदले में गिरफ्तारी का आदेश दिलवाते हैं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 26 Feb 2026 17:57:55 +0530</pubDate>
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                <title>4 फरवरी की घटना के बाद भाजपा महिला सांसदों ने विपक्ष के खिलाफ की सबसे कड़ी कार्रवाई की मांग, पीएम मोदी के नाम लिखा पत्र</title>
                                    <description><![CDATA[भाजपा की महिला सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के समर्थन में विपक्ष के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की। उन्होंने चार फरवरी की घटना को संसद की गरिमा के खिलाफ बताया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/after-the-february-4-incident-bjp-women-mps-wrote-a/article-142664"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/11-(700-x-400-px)-(630-x-400-px)-(11)8.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के समर्थन में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की महिला सांसदों ने मंगलवार को चार फरवरी की घटना को लेकर विपक्षी सांसदों के खिलाफ सबसे कड़ी कार्रवाई की मांग की है। भाजपा सांसदों का आरोप है कि राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान प्रधानमंत्री के सदन में आने से पहले विपक्ष की महिला सांसदों ने प्रधानमंत्री की सीट को घेर लिया था। </p>
<p>भाजपा महिला सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष को लिखे पत्र में कहा कि चार फरवरी को विपक्ष की महिला सांसदों ने न केवल प्रधानमंत्री की सीट को घेरा, बल्कि बाद में आक्रामक रुख अपनाते हुए अध्यक्ष के कक्ष तक पहुंचीं। उन्होंने इस घटना को दुर्भाग्यपूर्ण और खेदजनक बताते हुए कहा कि इससे संसद की गरिमा को ठेस पहुंची है। पत्र में कहा गया है कि यदि इस मामले में कार्रवाई नहीं की गयी तो यह एक खतरनाक मिसाल बनेगी और लोकतांत्रिक संस्थाओं में जनता का विश्वास कमजोर होगा। </p>
<p>यह पत्र कांग्रेस की महिला सांसदों द्वारा लगाए गए आरोपों के जवाब में सामने आया है, जिसमें उन्होंने सत्तारूढ़ दल पर उनके खिलाफ झूठे, निराधार और मान हानिकारक बातें कहने का आरोप लगाया था। भाजपा सांसदों ने अपने पत्र में दावा किया कि विपक्षी सदस्य सदन के वेल में आए, मेजों पर चढ़े, कागज फाड़े और उन्हें अध्यक्ष की ओर उछाला। उन्होंने कहा कि वरिष्ठ नेताओं के निर्देशों का पालन करते हुए वे संयमित रहीं और इस पूरे प्रकरण को संसदीय लोकतंत्र के इतिहास के सबसे काले क्षणों में से एक बताया। </p>
<p>लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने इससे पहले कहा था कि उन्होंने किसी भी अप्रिय घटना से बचने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सदन में न आने का अनुरोध किया था, क्योंकि उन्हें जानकारी मिली थी कि कुछ कांग्रेस सांसद प्रधानमंत्री की सीट तक पहुंचने की कोशिश कर सकते हैं। वहीं कांग्रेस की महिला सांसदों ने कहा कि उनका विरोध शांतिपूर्ण था और संसदीय परंपराओं के अनुरूप था, लेकिन उनके अनुसार उन्हें अभूतपूर्व तरीके से निशाना बनाया गया। </p>
<p>भाजपा के पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान विपक्ष के नेता राहुल गांधी को चार दिनों तक बार-बार बोलने का अवसर नहीं दिया गया। दूसरी ओर विपक्षी सांसद लोकसभा अध्यक्ष द्वारा राहुल गांधी को पूर्व सेना प्रमुख जनरल एम.एम. नरवणे की आत्मकथा से 2020 के भारत-चीन सीमा गतिरोध से जुड़े विवादित अंश पढऩे की अनुमति न दिए जाने के खिलाफ विरोध कर रहे हैं। भाजपा सदस्यों ने इस पर कड़ा ऐतराज जताते हुए आरोप लगाया कि राहुल गांधी सदन को गुमराह कर रहे हैं और सशस्त्र बलों का अपमान कर रहे हैं। लोकसभा अध्यक्ष ने व्यवधानों को पूर्व नियोजित और संसद की गरिमा के खिलाफ बताया है। </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 10 Feb 2026 18:18:52 +0530</pubDate>
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