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                <title>Political Crisis - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>Political Crisis RSS Feed</description>
                
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                <title>सरकारी ठेकों के मामले में अरूणाचल सीएम खांडू का सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका : सीबीआई जांच के आदेश, पढ़ें पूरा मामला</title>
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                        <![CDATA[अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। कोर्ट ने उनके परिवार से जुड़ी कंपनियों को 1,270 करोड़ रुपये के सरकारी ठेके देने के आरोपों की CBI जांच का निर्देश दिया है। 2015 से 2025 के बीच हुई अनियमितताओं की जांच 16 हफ्तों में पूरी होगी, जिससे राज्य की राजनीति में हड़कंप मच गया है।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/arunachal-pradesh-cm-khandu-gets-a-big-blow-from-the/article-149260"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/pema-khandu.png" alt=""></a><br /><p>अरूणाचल प्रदेश। अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू पर मुश्किलों के बादल मंडराने लगे है क्योंकि सरकारी ठेका आवंटन से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने उनको बड़ा झटका दिया है। दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने उनके परिवार से जुड़ी कंपनियों को सरकारी ठेके देने के आरोपों की जांच के लिए सीबीआई को निर्देश जारी किए हैं। बता दें कि यह विवाद करीब 1,270 करोड़ रुपये के ठेकों में कथित अनियमितताओं से जुड़ा है, जिसमें सीएम पेमा खांडू परिवार की चार कंपनियों के शामिल होने का आरोप है। </p>
<p>सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को एक नोडल अधिकारी नियुक्त करने और जांच एजेंसी के साथ पूरा सहयोग करने का आदेश जारी किया है और साथ ही मुख्य सचिव को समन्वय के लिए एक नोडल अधिकारी नियुक्त करने का भी आदेश दिया है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि किसी भी तरह का रिकॉर्ड नष्ट नहीं होना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार, सीबीआई नवंबर 2015 से 2025 के बीच दिए गए ठेकों और उनके क्रियान्वयन की प्रक्रिया की भी शुरूआत से जांच करेगी। कोर्ट ने आगे कहा कि इस दौरान सीबीआई विशेष रूप से उन मामलों की पड़ताल करेगी, जिनमें याचिकाकर्ताओं ने अनियमितताओं के आरोप लगाए हैं। </p>
<p>इसके लिए सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को एक सप्ताह के भीतर आदेश का पालन करने का भी आदेश जारी किया है। याचिका में दावा किया गया है कि इस अवधि में करीब 1,245 करोड़ रुपये के ठेके मुख्यमंत्री की पत्नी, माता और भतीजे से जुड़ी फर्मों को बिना उचित प्रक्रिया के दिए गए। इस याचिका में तवांग से विधायक त्सेरिंग ताशी की कंपनी का भी नाम शामिल है। कोर्ट ने सीबीआई को 16 सप्ताह के भीतर अपनी जांच रिपोर्ट देने के लिए कहा है, जिससे यह तय किया जा सके कि आगे स्वतंत्र जांच की आवश्यकता है या नहीं।</p>]]>
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                                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Mon, 06 Apr 2026 14:28:53 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Jaipur NM]]>
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                <title>क्या बदल जाएगा युवा कांग्रेस कार्यालय का पता? संपदा निदेशालय ने जारी किया 24 अकबर रोड़ स्थित कार्यालय खाली करने का नोटिस, 28 मार्च तक का दिया है समय</title>
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                        <![CDATA[संपदा निदेशालय ने कांग्रेस पार्टी को उसके ऐतिहासिक 24 अकबर रोड और युवा कांग्रेस कार्यालय को 28 मार्च तक खाली करने का अल्टीमेटम दिया है। राज्यसभा सांसद प्रमोद तिवारी ने इसे 'अलोकतांत्रिक' करार देते हुए कानूनी लड़ाई के संकेत दिए हैं। पार्टी अब इस बेदखली नोटिस के खिलाफ अदालत का रुख करने की योजना बना रही है।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/will-the-address-of-youth-congress-office-change-directorate-of/article-147839"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/delhi-congress-office.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। सरकार ने कांग्रेस पार्टी को उसके 24 अकबर रोड स्थित कार्यालय और पांच रायसीना रोड स्थित युवा कांग्रेस कार्यालय को ख़ाली करने को कहा है। सूत्रों के अनुसार संपदा निदेशालय ने नोटिस भेजकर कांग्रेस से ये दोनों कार्यालय 28 मार्च तक खाली करने को कहा है। कांग्रेस पार्टी ने पिछले वर्ष अपना मुख्यालय इंद्रा भवन में स्थानांतरित कर लिया था लेकिन वह 24 अकबर रोड़ पर अपना कार्यालय बनाये हुये है। नोटिस के संबंध में कांग्रेस के राज्यसभा सांसद प्रमोद तिवारी ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि यह नोटिस दुखद और दुर्भाग्यपूर्ण है। </p>
<p>उन्हाेंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी सरकार लोकतांत्रिक नहीं है। पार्टी इस मसले पर वैधानिक और राजनीतिक रूप से चर्चा कर आगे क़दम उठायेगी। पार्टी सूत्रों के अनुसार कांग्रेस इस मसले पर अदालत का रुख़ अख़्तियार करने की तैयारी कर रही है। गौरतलब है कि करीब 48 वर्षों से 24 अकबर रोड के बंगले में कांग्रेस का मुख्यालय है। इसी कार्यालय से कांग्रेस पार्टी के कई महत्वपूर्ण राजनीतिक निर्णय लिए गए।</p>]]>
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                                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Wed, 25 Mar 2026 15:12:01 +0530</pubDate>
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                <title>पुडुचेरी विधानसभा चुनाव: पीएमएमएमके ने 9 अप्रैल को होने वाले चुनावों का बहिष्कार करने का किया फैसला, केंद्र सरकार कार्रवाई करने में विफल</title>
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                        <![CDATA[पीएमएमएमके ने 9 अप्रैल को होने वाले पुडुचेरी विधानसभा चुनावों के पूर्ण बहिष्कार का ऐलान किया है। संस्थापक प्रो. एम. रामदास ने 14 वर्षों से स्थानीय निकाय चुनाव न होने, पूर्ण राज्य के दर्जे की कमी और चुनावी राजनीति में धनबल के प्रभाव को मुख्य कारण बताया। पार्टी ने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों और क्षेत्रीय पहचान की रक्षा के लिए एक कड़ा विरोध करार दिया है।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/puducherry-assembly-elections-pmmmk-decides-to-boycott-elections-to-be/article-147724"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/puducherry1.png" alt=""></a><br /><p>पुडुचेरी। पुडुचेरी मानिला मक्कल मुन्नेत्र कझगम (पीएमएमएमके) ने मंगलवार को केंद्र शासित प्रदेश में लोकतांत्रिक सिद्धांतों के लगातार हो रहे हनन के विरोध में नौ अप्रैल को होने वाले विधानसभा चुनावों का बहिष्कार करने का फैसला किया है। पीएमएमएमके के संस्थापक-अध्यक्ष प्रो. एम. रामदास ने यहाँ जारी एक बयान में कहा कि पुडुचेरी में जमीनी स्तर पर लोकतंत्र को सुनियोजित तरीके से कमजोर किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि स्थानीय निकायों जो शासन का तीसरा स्तर हैं, के चुनाव 2011 से अब तक नहीं कराए गए हैं। पिछले 14 वर्षों से एक के बाद एक आने वाली सरकारों ने लोगों को पंचायत और नगरपालिका स्तर पर अपने प्रतिनिधियों को चुनने के उनके संवैधानिक अधिकार से वंचित रखा है। पीएमएमएमके द्वारा लगातार विरोध प्रदर्शनों और आंदोलनों के बावजूद भी कोई कार्रवाई नहीं की गई।</p>
<p>रामदास ने कहा, "हमें मजबूर होकर उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाना पड़ा, जिसने हमारी याचिका स्वीकार कर ली और अधिकारियों से जवाब मांगा है। हालाँकि, अनुचित जल्दबाजी दिखाते हुए चुनाव आयोग ने अदालत को जवाब देने से पहले ही विधानसभा चुनाव का कार्यक्रम घोषित कर दिया। हमारा दृढ़ विश्वास है कि लोकतंत्र की शुरुआत जमीनी स्तर से होनी चाहिए और स्थानीय निकायों के चुनाव न कराना विधानसभा चुनाव को मौलिक रूप से दोषपूर्ण बना देता है।"</p>
<p>उन्होंने कहा कि दूसरी ओर, पुडुचेरी विधानसभा आज बिना किसी वास्तविक शक्ति के काम कर रही है। वर्तमान केंद्र शासित प्रदेश के ढांचे के तहत सत्ता केंद्र सरकार के हाथों में केंद्रित है और इसका प्रयोग उपराज्यपाल के माध्यम से किया जाता है। मुख्यमंत्री और मंत्रियों सहित चुनी हुई सरकार के पास वह स्वायत्तता नहीं है जो पूर्ण राज्यों को प्राप्त होती है। तीन दशकों से अधिक समय से राज्य का दर्जा दिए जाने की मांग को लेकर विधानसभा में 100 से अधिक प्रस्ताव पारित होने के बावजूद केंद्र सरकार कार्रवाई करने में विफल रही है।</p>
<p>रामदास ने आगे कहा, "ऐसे चुनाव में भाग लेना केवल उसी व्यवस्था को वैधता प्रदान करना होगा जो वास्तविक लोकतांत्रिक सत्ता से वंचित करती है। हमारा बहिष्कार राज्य का दर्जा और लोकतांत्रिक अधिकारों से लगातार वंचित रखे जाने के खिलाफ एक मजबूत विरोध है।" उन्होंने तीसरी बात कहते हुए कहा कि पुडुचेरी में चुनावी राजनीति अब पूरी तरह से पैसे के जोर पर चलने वाली कवायद बनकर रह गई है। चुनाव अब विचारों, नीतियों या जन कल्याण की प्रतिस्पर्धा नहीं रहे, बल्कि वित्तीय शक्ति की होड़ बन गए हैं। हम ऐसी व्यवस्था का हिस्सा बनने से इनकार करते हैं जहाँ जीत का फैसला पैसा करता हो। इसके बजाय हम लोगों के बीच जागरूकता पैदा करना चाहते हैं ताकि वे वोट खरीदने और भ्रष्टाचार को नकारें तथा सार्वजनिक जीवन में ईमानदारी और शुचिता को बनाए रखें।</p>
<p>रामदास ने यह भी कहा कि पुडुचेरी नागरिकता आदेश, 1962 के तहत केवल उन्हीं व्यक्तियों को जिनका 1962 से पहले पुडुचेरी के साथ जन्म, माता-पिता या निवास के आधार पर कोई वास्तविक जुड़ाव था, इस क्षेत्र के ऐतिहासिक और कानूनी संदर्भ में नागरिक के रूप में मान्यता दी जाती है।</p>
<p>हालांकि, व्यवहार में चुनाव आयोग इस सिद्धांत की अनदेखी करते हुए भारत के किसी भी राज्य के किसी भी नागरिक को पुडुचेरी में चुनाव लड़ने की अनुमति दे देता है। यह पुडुचेरी के लोगों की विशिष्ट राजनीतिक पहचान और अधिकारों को कमजोर करता है। हमारा दृढ़ मत है कि पुडुचेरी के साथ वैध और मान्यता प्राप्त जुड़ाव रखने वाले लोग ही यहाँ चुनाव लड़ने के पात्र होने चाहिए। रामदास ने कहा कि जब तक इस सिद्धांत का सम्मान और पालन नहीं किया जाता, तब तक चुनावी प्रक्रिया में भागीदारी को उचित नहीं ठहराया जा सकता। इन्हीं कारणों को देखते हुए हमारी पार्टी आगामी विधानसभा चुनावों का बहिष्कार करेगी।</p>]]>
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                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 24 Mar 2026 17:11:42 +0530</pubDate>
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                <title>बंगाल चुनाव: अपनों के विरोध से बेहाल तृणमूल और भाजपा, कहीं भूमिपुत्र की मांग तो कहीं चरित्र पर वार</title>
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                        <![CDATA[पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा और टीएमसी दोनों ही आंतरिक कलह से जूझ रही हैं। टिकट न मिलने से नाराज कार्यकर्ताओं ने बांकुड़ा से हावड़ा तक सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन किया। टीएमसी ने 74 मौजूदा विधायकों के टिकट काटे हैं, जिससे बागी नेताओं के निर्दलीय चुनाव लड़ने का खतरा बढ़ गया है, जो चुनावी नतीजों को प्रभावित कर सकता है।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/trinamool-and-bjp-are-troubled-by-the-opposition-of-their/article-147631"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/kalyan.png" alt=""></a><br /><p>कोलकाता। बंगाल विधानसभा चुनावों की रणभेरी बजते ही राज्य की दो प्रमुख प्रतिद्वंद्वी पार्टियों तृणमूल कांग्रेस और भाजपा के लिए बाहरी शत्रुओं से ज्यादा घर के विभीषण चुनौती बन गए हैं। टिकट बंटवारे से असंतुष्ट कार्यकर्ताओं का गुस्सा अब सड़कों पर पोस्टर, नारेबाजी और सामूहिक इस्तीफे के रूप में फूट रहा है। बांकुड़ा से लेकर हावड़ा तक, दोनों ही दल उम्मीदवार-कांटे से लहूलुहान नजर आ रहे हैं।</p>
<p><strong>तृणमूल: भीतरघात और पुराने चेहरों पर अविश्वास</strong></p>
<p>सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस के भीतर भी असंतोष की ज्वाला भड़क रही है। पूर्व बर्द्धमान जिले के खंडघोष और मंतेश्वर में पुराने बनाम नए की लड़ाई सड़क पर आ गई है। कई क्षेत्रों में नेताओं के करीबियों को टिकट मिलने से स्थानीय नेता खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। उत्तर 24 परगना और हुगली के कुछ क्षेत्रों में भी तृणमूल कार्यकर्ताओं ने उम्मीदवारों के चयन पर सवाल उठाते हुए विरोध प्रदर्शन किया है। कार्यकतार्ओं का तर्क है कि जो नेता पिछले पांच वर्षों में जमीन पर सक्रिय नहीं थे, उन्हें फिर से थोपना हार को निमंत्रण देना है। </p>
<p>हालांकि, पार्टी के कद्दावर नेता कल्याण बनर्जी ने दावा किया है कि ये छोटे-मोटे मतभेद हैं और पार्टी एकजुट होकर चुनाव लड़ेगी। तृणमूल ने इस बार पिछले चुनाव में जीते 74 विधायकों को टिकट नहीं दिया है। वे लोग अब निर्दलीय या फिर अन्य किसी दल से चुनाव लड़ने की तैयारी में है। बांकुड़ा जिले की छातना विधानसभा क्षेत्र में भाजपा को भारी विरोध का सामना करना पड़ रहा है। वर्तमान विधायक सत्यनारायण मुखोपाध्याय को दोबारा टिकट दिए जाने से स्थानीय कार्यकर्ता नाराज हैं। </p>]]>
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                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 24 Mar 2026 13:11:24 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Jaipur NM]]>
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            <item>
                <title>पुड्डुचेरी विधानसभा चुनाव: नामांकन का अंतिम दिन आज, सीट बंटवारे को लेकर द्रमुक-कांग्रेस में गतिरोध बरकरार </title>
                                    <description>
                        <![CDATA[इंडिया गठबंधन के भीतर पुड्डुचेरी विधानसभा चुनाव के लिए सीट बंटवारे पर पेंच फंस गया है। नेल्लीथोपे जैसी हॉट सीटों पर दावेदारी को लेकर विवाद के बाद, दोनों दलों के उम्मीदवार सभी 30 सीटों पर नामांकन दाखिल करेंगे। वी. नारायणसामी की नाराजगी और एम.के. स्टालिन के हस्तक्षेप के बावजूद 26 मार्च तक समझौते की कोशिशें जारी रहेंगी।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/last-day-of-puducherry-assembly-election-nominations-deadlock-continues-between/article-147542"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/puducherry.png" alt=""></a><br /><p>पुड्डुचेरी। केन्द्र शासित प्रदेश पु्ड्डुचेरी में आगामी नौ अप्रैल को होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि सोमवार को द्रविड़ मुनेत्र कडग़म (द्रमुक) और कांग्रेस के बीच इंडिया गठबंधन में सीट बंटवारे को लेकर जारी बातचीत अब तक किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंच सकी। चेन्नई में रविवार से शुरू हुई मैराथन बैठकें सोमवार तड़के तक चलीं लेकिन बिना किसी निष्कर्ष के अचानक समाप्त हो गईं।</p>
<p>हालांकि, दोनों दलों ने गठबंधन जारी रखने पर सहमति जताई है लेकिन सीटों के बंटवारे पर सहमति नहीं बन पाई है। स्थिति को देखते हुए दोनों दलों के संभावित उम्मीदवार आज अपराह्न तीन बजे तक सभी 30 विधानसभा सीटों पर नामांकन दाखिल करेंगे। बाद में 26 मार्च तक, जो नामांकन वापसी की अंतिम तिथि है, आपसी सहमति बनने पर उम्मीदवार अपने पर्चे वापस ले सकते हैं।</p>
<p>सूत्रों के अनुसार, दोनों दल गठबंधन का नेतृत्व करने और अधिक सीटों पर चुनाव लड़ने की मांग पर अड़े हुए हैं। इससे पहले, द्रमुक के चुनाव प्रभारी एस. जगतरक्षकन के नेतृत्व में पार्टी पदाधिकारी कांग्रेस नेताओं का इंतजार करते रहे लेकिन कोई नहीं पहुंचा। इसके बाद वे चेन्नई जाकर पार्टी नेतृत्व से मिले। मामले को सुलझाने के लिए वरिष्ठ कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम ने हस्तक्षेप किया और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एवं द्रमुक अध्यक्ष एम. के. स्टालिन से मुलाकात की। इस दौरान कनिमोझी भी मौजूद रहीं। खबरों के मुताबिक, एक प्रस्ताव के तहत द्रमुक 12 सीटों पर चुनाव लड़ने और सहयोगी दलों वीसीके और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) को एक-एक सीट देने पर सहमत हुई थी।</p>
<p>रविवार रात हालांकि, पुड्डुचेरी में स्थानीय स्तर पर हुई बैठक में विवाद फिर गहरा गया। कांग्रेस ने मन्नाडीपेट, कालापेट और नेल्लीथोपे सीटों की मांग की, जबकि द्रमुक मुथियालपेट सीट चाहती है। नेल्लीथोपे सीट को लेकर विशेष विवाद रहा, जहां पूर्व मुख्यमंत्री वी. नारायणसामी चुनाव लड़ना चाहते हैं, लेकिन द्रमुक इसे छोडऩे को तैयार नहीं है। ऐसा बताया जा रहा है कि इस मुद्दे पर नारायणसामी नाराज होकर बैठक से बाहर चले गए, जिससे गतिरोध और बढ़ गया।</p>
<p>पुड्डुचेरी प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष वी. वैथिङ्क्षलगम ने कहा कि बातचीत में कोई ठोस परिणाम नहीं निकला है और अंतिम फैसला पार्टी नेतृत्व से चर्चा के बाद लिया जाएगा।</p>]]>
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                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 23 Mar 2026 17:27:27 +0530</pubDate>
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                <title>कर्नाटक विधानसभा उपचुनाव: ज़मीर अहमद खान ने दावणगेरे दक्षिण से मुस्लिम उम्मीदवार को टिकट नहीं दिए जाने पर कांग्रेस से इस्तीफे की दी धमकी</title>
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                        <![CDATA[कर्नाटक के दावणगेरे दक्षिण उपचुनाव में कांग्रेस के भीतर दरार गहरी हो गई है। मंत्री ज़मीर अहमद खान ने मुस्लिम उम्मीदवार को टिकट न मिलने पर इस्तीफे की धमकी दी है। रणदीप सुरजेवाला ने गुटीय दबाव के बीच योग्यता को प्राथमिकता देने की बात कही है, जबकि समर्थ शमनूर के समय से पहले नामांकन ने विवाद को और बढ़ा दिया है।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/karnataka-assembly-by-election-zameer-ahmed-khan-threatens-to-resign-from/article-147367"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/karnataka-congress.png" alt=""></a><br /><p>बेंगलुरु। कांग्रेस की कर्नाटक इकाई को दावणगेरे दक्षिण विधानसभा उपचुनाव से पहले तीव्र आंतरिक दबाव का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि विधायक और मंत्री ज़मीर अहमद खान ने मुस्लिम उम्मीदवार को टिकट नहीं दिए जाने पर कथित तौर पर इस्तीफा देने की धमकी दी है।</p>
<p>पार्टी सूत्रों ने कहा, ज़मीर का एक मुस्लिम उम्मीदवार पर जोर देना चुनावी गणित और सामुदाय की अपेक्षाओं को दर्शाता है। ज़मीर की मांग और धमकी ऐसा संवेदनशील मुद्दा बन गया है, जिसने पार्टी नेतृत्व को काफी कठिन स्थिति में डाल दिया है। अंजुमन-ए-इस्लाम सोसाइटी जैसे मुस्लिम संगठनों ने भी वरिष्ठ नेता शमनूर शिवशंकरप्पा के निधन के बाद खाली हुई इस सीट पर कांग्रेस से समुदाय के लिए उचित प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने का आग्रह किया है। जवाब में कर्नाटक कांग्रेस प्रभारी रणदीप सिंह सुरजेवाला ने प्रतिस्पर्धी दबावों को संतुलित करने की कोशिश की है और इस बात पर जोर दिया है कि पार्टी किसी एक समूह के दबाव में झुकने के बजाय योग्यता और चुनावी व्यवहार्यता के आधार पर उम्मीदवार का चयन करेगी।</p>
<p>सुरजेवाला ने रेखांकित किया कि सभी समुदायों पर विचार किया जाएगा और निर्णय निर्वाचन क्षेत्र में पार्टी के व्यापक हितों के अनुसार लिया जाएगा। उपचुनाव में टिकट को लेकर यह विचार-विमर्श आंतरिक और संगठनात्मक परिस्थितियों के कारण और जटिल हो गया है। वरिष्ठ नेता और मंत्री एसएस मल्लिकार्जुन ने लंबे समय से सेवा कर रहे पार्टी कार्यकर्ताओं को पुरस्कृत करने की वकालत की, जबकि उनके बेटे समर्थ शमनूर, जो शमनूर शिवशंकरप्पा के पोते हैं, ने आधिकारिक टिकट घोषणा से पहले ही अपना नामांकन दाखिल कर दिया। इस कदम की मुस्लिम नेताओं ने आलोचना की है और सुरजेवाला ने भी समय से पहले नामांकन दाखिल करने के लिए समनूर को आगाह किया है।</p>]]>
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                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 21 Mar 2026 18:51:56 +0530</pubDate>
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                <title>पुडुचेरी चुनाव: कांग्रेस और द्रमुक के बीच सीट बंटवारे पर फंसा पेंच, किन​-किन ने दाखिल किया नामांकन  </title>
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                        <![CDATA[पुडुचेरी विधानसभा चुनाव के लिए नामांकन की अंतिम तिथि करीब है, लेकिन कांग्रेस और द्रमुक (DMK) के बीच सीट शेयरिंग पर सहमति नहीं बन पाई है। कांग्रेस 17 सीटों पर अड़ी है, जबकि द्रमुक पिछले प्रदर्शन के आधार पर अधिक हिस्सेदारी मांग रही है। गठबंधन में खींचतान के बीच कुछ उम्मीदवारों ने पर्चा दाखिल कर दिया है, जिससे राजनीतिक पारा गरमा गया है।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/puducherry-elections-stuck-on-seat-sharing-between-congress-and-dmk/article-147149"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/poducherry.png" alt=""></a><br /><p>पुडुचेरी। पुडुचेरी में नौ अप्रैल को होने वाले विधानसभा चुनावों के लिए नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि 23 मार्च में अब केवल कुछ ही दिन बचे हैं, लेकिन इंडिया गठबंधन के दो प्रमुख घटक दलों कांग्रेस और द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) के बीच सीट बंटवारे को लेकर अभी तक कोई समझौता नहीं हो सका है। दोनों पार्टियां अधिक सीटों पर चुनाव लड़ने की अपनी मांग पर अड़ी हुई हैं। कांग्रेस का कहना है कि केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी में पार्टी को कुल 30 सीटों में से कम से कम 17 पर चुनाव लड़ना चाहिए। उसका बाकी 13 सीटें द्रमुक और अन्य सहयोगियों के लिए छोड़ने का प्रस्ताव है। द्रमुक 2021 के चुनावों में कांग्रेस से बेहतर प्रदर्शन और हालिया राजनीतिक समीकरणों के आधार पर अधिक सीटों की मांग कर रही है। द्रमुक की एक टीम राज्य संयोजक आर. शिवा के नेतृत्व में बातचीत के लिए चेन्नई रवाना हो गई है।</p>
<p><strong>कुछ नामांकन पत्र दाखिल हुए:</strong> सीट बंटवारा फाइनल न होने के बावजूद, बुधवार को द्रमुक उम्मीदवार अनिबल केनेडी, संपत और डॉ. नीतीश के साथ-साथ कांग्रेस के पूर्व विधायक अनंत रमन ने अपने नामांकन पत्र दाखिल कर दिए हैं। हालांकि, उन्होंने अभी तक आधिकारिक पार्टी फॉर्म (ए और बी) जमा नहीं किए हैं। अगर द्रमुक कांग्रेस को 17 सीटें देने पर सहमत हो जाती है, तो गठबंधन फौरन ही उम्मीदवारों की घोषणा कर सकता है। समझौता न होने की स्थिति में दोनों दल अकेले चुनाव लड़ने पर भी विचार कर रहे हैं। दूसरी ओर, सत्ताधारी  एनडीए ने अपना फॉर्मूला तय कर लिया है, जिसके तहत सत्तारूढ़ ऑल इंडिया एन आर कांग्रेस (एआईएनआरसी) 16 और भारतीय जनता पार्टी 14 सीटों पर चुनाव लड़ेगी।</p>]]>
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                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 20 Mar 2026 10:39:23 +0530</pubDate>
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                <title>ओडिशा कांग्रेस का बड़ा फैसला: राज्यसभा चुनाव में क्रॉस-वोटिंग करने वाले तीन विधायक निलंबित, पार्टी ह्विप के उल्लंघन का लगाया आरोप</title>
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                        <![CDATA[ओडिशा राज्यसभा चुनाव में ह्विप के उल्लंघन और निर्दलीय प्रत्याशी दिलीप राय के पक्ष में क्रॉस-वोटिंग करने पर कांग्रेस ने अपने तीन विधायकों को निलंबित कर दिया है। सोफिया फिरदौस, रमेश जेना और दशरथी गमांग पर अनुशासनहीनता के आरोप लगे हैं। पीसीसी अध्यक्ष भक्त चरण दास ने विधानसभा अध्यक्ष से उनकी सदस्यता रद्द करने का अनुरोध करने की पुष्टि की है।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/big-decision-of-odisha-congress-three-mlas-suspended-for-cross-voting/article-146842"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/odisha-congress.png" alt=""></a><br /><p>भुवनेश्वर। कांग्रेस पार्टी ने ओडिशा में राज्यसभा चुनावों के बाद एक महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम में मंगलवार को अपने तीन विधायकों को पार्टी ह्विप की अवहेलना करने और निर्दलीय उम्मीदवार के पक्ष में क्रॉस-वोटिंग करने के आरोप में निलंबित कर दिया है। निलंबित विधायक सोफिया फिरदौस, रमेश जेना और दशरथी गमांग हैं। ओडिशा प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष और राज्य में सोमवार को हुए राज्यसभा चुनावों के लिए पार्टी के पोलिंग एजेंट भक्त चरण दास ने कहा कि तीनों विधायकों ने पार्टी ह्विप का उल्लंघन करते हुए क्रॉस-वोटिंग की थी।</p>
<p>दास ने कहा कि उन्होंने अखिल भारतीय कांग्रेस समिति (एआईसीसी) को तीनों विधायकों के क्रॉस-वोटिंग के बारे में पहले ही सूचित कर दिया था, जिसकी मदद से निर्दलीय उम्मीदवार और पूर्व केंद्रीय मंत्री दिलीप राय को चौथी राज्यसभा सीट सुरक्षित करने में मदद मिली। राय ने इस मुकाबले में बीजद-कांग्रेस के संयुक्त उम्मीदवार डॉ. दत्तेश्वर होता को हराया।</p>
<p>यहां कांग्रेस भवन में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में अनुशासनात्मक कार्रवाई की घोषणा करते हुए पार्टी की अनुशासनात्मक समिति के अध्यक्ष सुजीत कुमार पाढ़ी और मीडिया सेल के अध्यक्ष अरविंद दास ने कहा कि तीनों विधायकों ने पार्टी अनुशासन का उल्लंघन किया है और सोमवार को हुए राज्यसभा चुनावों के दौरान पार्टी विरोधी गतिविधियों में संलिप्त रहे।</p>
<p>कांग्रेस नेतृत्व ने स्पष्ट कर दिया कि इस तरह की अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं की जायेगी, इसीलिए पार्टी ने तीनों विधायकों को निलंबित कर दिया है। पाढ़ी ने यह भी कहा कि ओडिशा प्रदेश कांग्रेस कमेटी, ओडिशा विधानसभा की अध्यक्ष सुरमा पाढ़ी से निलंबित विधायकों की सदस्यता रद्द करने का अनुरोध करेगी। उन्होंने आगे कहा कि एआईसीसी से विस्तृत समीक्षा और उचित दिशा-निर्देशों के बाद विधायकों के खिलाफ आगे की कार्रवाई की जा सकती है।</p>]]>
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                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 17 Mar 2026 16:36:30 +0530</pubDate>
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                <title>जेकेसीए घोटाले में फारूक अब्दुल्ला को बड़ी राहत: अदालत ने गैर-जमानती वारंट वापस लिया, 30 मार्च को होगी अगली सुनवाई </title>
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                        <![CDATA[श्रीनगर की अदालत ने जेकेसीए घोटाले में पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला के खिलाफ जारी गैर-जमानती वारंट वापस ले लिया है। जम्मू में हुए हमले के कारण अब्दुल्ला सुनवाई में शामिल नहीं हो सके थे। सीबीआई द्वारा ₹43 करोड़ के गबन की जांच वाले इस मामले की अगली सुनवाई अब 30 मार्च को होगी।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/big-relief-to-farooq-abdullah-in-jkca-scam-court-withdraws/article-146360"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/farooq-abdullah.png" alt=""></a><br /><p>श्रीनगर। श्रीनगर की एक अदालत ने जम्मू-कश्मीर क्रिकेट एसोसिएशन (जेकेसीए) घोटाले के सिलसिले में पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला के खिलाफ पहले जारी किये गये गैर-जमानती वारंट को वापस ले लिया है। अदालत ने अब्दुल्ला के अधिवक्ता इश्तियाक खान द्वारा कार्यवाही में उनकी अनुपस्थिति का कारण बताते हुए एक आवेदन दायर करने के बाद यह निर्णय लिया। खान ने अदालत को बताया कि पूर्व मुख्यमंत्री एक दिन पहले जम्मू में उन पर हुए 'कातिलाना हमले' से सदमे के कारण सुनवाई में शामिल नहीं हो सके हैं।</p>
<p>खान ने दलील दी कि नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष इस घटना के बाद की स्थितियों के कारण शारीरिक रूप से या वर्चुअल मोड के माध्यम से पेश होने में असमर्थ थे। अधिवक्ता ने कहा कि उन्होंने शुरू में एक नियमित छूट का आवेदन दायर किया था, लेकिन जब अदालत ने गैर-जमानती वारंट जारी कर दिया, तो उन्होंने वारंट को वापस लेने की मांग करते हुए एक विस्तृत आवेदन दिया और अब्दुल्ला की अनुपस्थिति के पीछे की परिस्थितियों को स्पष्ट भी किया।</p>
<p>खान ने बताया कि अदालत ने दलील स्वीकार कर ली और तुरंत वारंट वापस ले लिया। उन्होंने यह भी जोड़ा कि इस तरह का रिकॉल उसी अदालत द्वारा किया जाना होता है जिसने वारंट जारी किया हो। अब इस मामले पर अगली सुनवाई निर्धारित तिथि 30 मार्च को होगी। श्रीनगर के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट तबस्सुम ने करोड़ों रुपये के जेकेसीए वित्तीय अनियमितता मामले में अब्दुल्ला के खिलाफ गुरुवार को गैर-जमानती वारंट जारी किया था। यह वारंट इसलिए जारी किया गया था क्योंकि वह व्यक्तिगत रूप से या ऑनलाइन अदालत में पेश होने में विफल रहे थे।</p>
<p>इस कथित घोटाले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) कर रही है, जिसने 2018 में श्री अब्दुल्ला और कई अन्य लोगों के खिलाफ भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) द्वारा जम्मू-कश्मीर क्रिकेट एसोसिएशन (जेकेसीए) को दिए गए अनुदान में से लगभग 43 करोड़ रुपये का कथित रूप से गबन करने के लिए आरोप पत्र दायर किया था।</p>]]>
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                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 13 Mar 2026 14:41:18 +0530</pubDate>
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                <title>असम सीएम हिमंत सरमा ने कांग्रेस के पूर्व नेता भूपेन कुमार बोरा के भाजपा में शामिल होने का दिया संकेत, कल दिया था पार्टी से इस्तीफा</title>
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                        <![CDATA[असम कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष भूपेन कुमार बोरा ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने उन्हें भाजपा में शामिल होने का खुला ऑफर देते हुए 'अंतिम हिंदू नेता' बताया।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/assam-cm-himanta-sarma-hinted-at-joining-bjp-former-congress/article-143571"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/1200-x-600-px)17.png" alt=""></a><br /><p>गुवाहाटी। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने मंगलवार को संकेत दिया कि प्रदेश कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष भूपेन कुमार बोरा के भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल होने की संभावना है। बोरा ने हालांकि पार्टी से इस्तीफे के बाद अपने अगले राजनीतिक कदम पर अभी तक स्थिति स्पष्ट नहीं की है। सीएम सरमा ने बोरा की प्रशंसा करते हुए कहा, मैं आज शाम उनसे मिलने जा रहा हूँ। वह असम में कांग्रेस के आखिरी हिंदू नेता हैं। उन्होंने असम में कांग्रेस को बचाने की ईमानदारी से कोशिश की।</p>
<p>मुख्यमंत्री ने बोरा के भाजपा में शामिल होने की संभावना का संकेत देते हुए कहा, मैंने आज उनसे बात की। मैं वास्तव में चाहता हूँ कि वह भाजपा में शामिल हों और हम यह सुनिश्चित करेंगे कि वह आगामी चुनाव जीतें। मैं अभी कार्बी आंगलोंग जा रहा हूँ, वहां से लौटने पर आज शाम मैं उनसे मिलूँगा। </p>
<p>असम प्रदेश कांग्रेस समिति (एपीसीसी) के अध्यक्ष पद से बोरा ने सोमवार को इस्तीफा दे दिया था। बाद में हालांकि मीडिया से उन्होंने कहा था कि अभी किसी भी पार्टी में शामिल होने का फैसला नहीं किया है।</p>
<p>एपीसीसी के वर्तमान अध्यक्ष गौरव गोगोई और अखिल भारतीय कांग्रेस समिति (एआईसीसी) के पर्यवेक्षक जितेंद्र सिंह सहित कई कांग्रेस नेताओं ने बोरा के आवास पर जाकर उनसे अपना इस्तीफा वापस लेने का आग्रह किया। सोमवार को बाद में बोरा ने एक संयुक्त मीडिया ब्रीफिंग में कहा कि वह अपने परिवार और उस निर्वाचन क्षेत्र के सदस्यों से बात करेंगे और मंगलवार को कोई निर्णय लेंगे। उन्होंने कहा, मैं बिहपुरिया और रोंगा नदी निर्वाचन क्षेत्र के लोगों के साथ रहा हूँ। मैं इस बार चुनाव लडऩे जा रहा हूँ। मेरे निर्वाचन क्षेत्र के लोग जो भी कहेंगे, मैं उसका पालन करूँगा।</p>
<p>आगामी विधानसभा चुनावों से पहले बोरा का इस्तीफा विपक्षी कांग्रेस के लिए प्रतिष्ठा का विषय बन गया है, जो असम में पिछले दो कार्यकाल से सत्ता से बाहर है। पिछले साल प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के रूप में गौरव गोगोई की नियुक्ति ने पार्टी के जमीनी कार्यकर्ताओं में काफी उम्मीदें जगाई थीं, लेकिन बोरा के इस्तीफे ने पार्टी के भीतर की गुटबाजी को उजागर कर दिया है।</p>]]>
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                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 17 Feb 2026 18:16:45 +0530</pubDate>
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                <title>असम चुनाव से पहले कांग्रेस को बड़ा नुकसान, पूर्व अध्यक्ष भूपेन बोरा ने पार्टी से इस्तीफा दिया, भाजपा में हो सकते हैं शामिल</title>
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                        <![CDATA[असम कांग्रेस के अध्यक्ष भूपेन बोरा ने चुनावों से ठीक पहले पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। 32 साल पार्टी को देने वाले बोरा ने अपने भविष्य के कदमों पर सस्पेंस बरकरार रखा है।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/big-loss-to-congress-before-assam-elections-former-president-bhupen/article-143370"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/1200-x-600-px)-(13)1.png" alt=""></a><br /><p>गुवाहाटी। असम कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष भूपेन बोरा ने चुनाव से कुछ ही महीने पहले पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। बोरा जुलाई 2021 से प्रदेश में पार्टी का नेतृत्व कर रहे थे, उन्होंने अपना इस्तीफा कांग्रेस के बड़े नेताओं जिनमें पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी शामिल हैं, को भेज दिया है। उन्होंने 2006 से 2016 तक असम विधानसभा में बिहपुरिया सीट का प्रतिनिधित्व किया था। पार्टी से इस्तीफा देने के बाद बोरा ने अपने सोशल मीडिया हैंडल से अपना नाम भी हटा दिया।</p>
<p>भूपेन बोरा का यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब असम में कांग्रेस ने राज्य भर के लोगों की जिंदगी को बेहतर बनाने के लिए बदलाव की यात्रा शुरू की थी। पूर्व प्रदेश अध्यक्ष रोंगानोडी सीट से कांग्रेस टिकट के एक बड़े दावेदार भी थे, वह प्रदेश पार्टी अध्यक्ष गौरव गोगोई के साथ परिवर्तन यात्रा में सक्रिय रूप से हिस्सा ले रहे थे।</p>
<p>भूपेन बोरा ने सोमवार को पत्रकारों से बातचीत में कहा, मैंने अपना इस्तीफ़ा कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खडग़े को भेज दिया है, और मैंने अपने कारण विस्तृत में बताये हैं। मैंने अपनी जिंदगी के 32 साल पार्टी को दिये हैं, और जाहिर है, मैंने राजनीति से रिटायरमेंट लेने के लिए इस्तीफ़ा नहीं दिया है। उन्होंने कहा कि इस पुरानी पार्टी के भविष्य को लेकर कुछ कारण हैं और उन्होंने पार्टी हाईकमान को अपने इस्तीफ़े के कारण बता दिये हैं। </p>
<p>यह पूछे जाने पर कि क्या वह भाजपा में शामिल होंगे, बोरा ने कहा कि उन्होंने अभी अपने भविष्य के कदम के बारे में कोई फ़ैसला नहीं किया है। उन्होंने कहा, मैंने आपको वह सब कुछ बता दिया है, जो मैं बता सकता था। हालांकि, अभी तक किसी भी पार्टी ने मुझे कुछ भी ऑफऱ नहीं किया है। मैं जो भी फ़ैसला लूंगा, मैं असम के लोगों को सही समय पर बता दूंगा। </p>
<p>पार्टी के अदंरूनी लोगों ने इशारा किया कि पार्टी के आम कार्यकर्ता के बीच राय में मतभेद हैं। हाल ही में, पार्टी हाईकमान ने हालांकि बोरा को दूसरी क्षेत्रीय राजनीतिक पार्टियों के साथ गठबंधन से जुड़े मामलों को देखने के लिए कहा था, लेकिन गौरव गोगोई के करीबी कुछ दूसरे पार्टी नेताओं के दखल से उन्हें नुकसान हुआ है। </p>]]>
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                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 16 Feb 2026 14:21:59 +0530</pubDate>
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                <title>तोशाखाना केस: इमरान-बुशरा को मिली 17-17 साल की सजा, कोर्ट ने जुर्माना भी लगाया</title>
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                        <![CDATA[पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान और बुशरा बीबी को तोशाखाना-2 भ्रष्टाचार केस में 17-17 साल की सजा और करोड़ों रुपए जुर्माना लगाया गया।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/toshakhana-case-imran-bushra-got-17-years-imprisonment-court-also-imposed/article-142399"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/11-(700-x-400-px)-(630-x-400-px)-(1)7.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान और उनकी पत्नी बुशरा बीबी को अदालत ने तोशाखाना-2 भ्रष्टाचार मामले में दोषी ठहराते हुए 17-17 साल की सजा सुनाई है। यह मामला विदेशी सरकार से मिले महंगे तोहफों को नियमों के खिलाफ बेचने से जुड़ा है। दोनों पर करोड़ों रुपए का जुमार्ना भी लगाया गया है।</p>
<p><strong>क्या है मामला?</strong></p>
<p>रावलपिंडी की हाई-सिक्योरिटी अदियाला जेल में स्थित विशेष अदालत ने शनिवार को यह फैसला सुनाया। जज शाहरुख अरजुमंद ने इमरान खान और बुशरा बीबी को कुल 17 साल की सजा दी। अदालत ने उन्हें पाकिस्तानी दंड संहिता की धारा 409 (आपराधिक विश्वासघात) के तहत 10 साल और भ्रष्टाचार निरोधक कानून की अलग-अलग धाराओं में 7 साल की सजा सुनाई। इसके अलावा दोनों पर 1 करोड़ 64 लाख पाकिस्तानी रुपए का जुर्माना भी लगाया गया। अदालत ने उम्र और महिला होने को देखते हुए सजा में कुछ नरमी बरतने की बात कही। यह मामला 2021 में सऊदी अरब सरकार से मिले महंगे तोहफों से जुड़ा है। आरोप है कि इनमें महंगी घड़ियां, हीरे और सोने के गहनों के सेट शामिल थे, जिन्हें नियमों के अनुसार तोशाखाना में जमा नहीं किया गया। </p>
<p>सरकार का कहना है कि इन तोहफों की असली कीमत करीब 7 करोड़ रुपए थी, लेकिन उनका मूल्यांकन सिर्फ 58-59 लाख रुपए दिखाया गया। आरोप है कि इमरान खान और बुशरा बीबी ने इन्हें बेहद कम कीमत पर खरीदने की कोशिश की। तोशाखाना कैबिनेट डिवीजन के तहत आने वाला विभाग है, जहां विदेशी नेताओं और गणमान्य व्यक्तियों से मिले तोहफे जमा किए जाते हैं। तय नियमों के तहत इन्हें बाद में खरीदा जा सकता है।</p>
<p><strong>कोर्ट की कार्यवाही</strong></p>
<p>इस केस में कुल 21 गवाहों ने अदालत में बयान दिए। फैसले के समय इमरान खान और बुशरा बीबी दोनों अदालत में मौजूद थे। इमरान खान ने आरोपों को राजनीतिक साजिश बताते हुए खारिज किया। इससे पहले अक्टूबर 2024 में बुशरा बीबी और नवंबर में इमरान खान को इस केस में जमानत मिली थी। हालांकि, दोनों पहले से ही अल-कादिर ट्रस्ट केस में सजा काट रहे हैं। दोनों दोषी हाईकोर्ट में इस फैसले के खिलाफ अपील कर सकते हैं। इमरान खान अगस्त 2023 से जेल में हैं और उनसे मुलाकात पर पिछले एक महीने से रोक लगी हुई है। संयुक्त राष्ट्र ने भी उनकी जेल में हालत को लेकर चिंता जताई है।</p>]]>
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                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 09 Feb 2026 11:37:27 +0530</pubDate>
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