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                <title>Dainik Navjyoti - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title> शिक्षा, स्वास्थ्य और इन्फ्रास्ट्रक्चर में बढ़े बजट, रिसर्च एन्ड डवलपमेंट का बजट काफी कम, इसे बढ़ाना जरूरी</title>
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                        <![CDATA[प्राथमिक स्तर पर मेडिकल फैसिलिटी बढ़ाने पर हो जोर, ताकि जीवन बच सके, एजुकेशन पर जीडीपी का 4.4 फीसदी, इसे 6 प्रतिशत करने की जरूरत। ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/increased-budget-is-needed-for-education--health--and-infrastructure--the-budget-for-research-and-development-is-quite-low-and-needs-to-be-increased/article-141391"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/(1200-x-600-px)8.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। केन्द्र सरकार की ओर से एक दिन बाद बजट पेश किया जाना है। इस बजट में जहां सरकार की नीतियों व विजन को प्रदर्शित किया जाता है। वहीं देश के हर वर्ग को सरकार से उम्मीद रहती है कि उनके लिए कुछ नया व सुधारात्मक होगा। केन्द्र सरकार के बजट से कोटा व हाड़ौती संभाग के लोगों को क्या उम्मीदें हैं। इस संबंध में दैनिक नवज्योति कार्यालय में शुक्रवार को  बजट से आशा और अपेक्षा  विषय पर टॉक शो का आयोजन किया गया। जिसमें सभी वर्गों का प्रतिनिधित्म हुआ। उसमें सबसे महत्वपूर्ण तत्थ सामने आया ुकि शिक्षा और स्वास्थ्य के साथ ही मूलभूत सुविधाओं के लिए सरकार को बजट बढ़ाने की आवश्यकता है।  नए स्टार्टअप में निवेश करने वालों को प्रोत्साहन देने और स्वदेशी उत्पादों व रोजगार सृजन को बढ़ावा दिया जाएगा तो देश के युवाओं का विदेशों में होने वाले पयालन को रोका जा सकेगा और यहां की अर्थव्यवस्था भी सुदृढ़ होगी। </p>
<p><strong>रूरल हैल्थ सेक्टर में बजट बढ़ाने की आवश्कता</strong><br />देश के हैल्थ सेक्टर में जीडीपी का डेढ़ से दो फीसदी ही बजट दिया जाता है। जबकि विदेशों में यह 6 से 8 फीसदी तक है। ऐसे में इस क्षेत्र में कम से कम ढाई से तीन फीसदी बजट तो होना ही चाहिए। शहरी व ग्रामीण हैल्थ सेक्टर  के अंतर को समाप्त करना होगा। ग्रामीण में लोग अधिक व शहरों में डॉक्टर अधिक हैं। जैनेरिक व ब्रांडेड दवाओं में भेद समाप्त होना चाहिए। दवाओं की कीमत पर अंकुश लगना चाहिए। संभाग स्तर पर हैल्थ केयर सेंटर व काउंसर नियुक्त करने की जरूरत है। संविदा कर्मेी व न्यूनतम मजदूरी वालों को पे कमीशन में शामिल किया जाना चाहिए। स्कूलों की स्थिति में सुधार के लिए सीएसआर के तहत ही बजट का प्रावधान किया जाए। इसी तरह खेलों को बढ़ावा देने के लिए जनप्रतिनिधि अपने फंड से राशि दें।  <br /><strong>-डॉ. विजय सरदाना पूर्व प्राचार्य मेडिकल कॉलेज कोटा</strong><br /><strong> </strong><br /><strong>गुजरात मॉडल को अपनाते हुए जीएसटी स्लैब हो एक समान </strong><br />देश में जीएसटी के  स्लैब एक समाान होने चाहिए। हालांकि पहले की तुलना में इसमें सुधार हुआ है। लेकिन एक ही सेक्टर से जुड़े व्यवसायों में अभी भी कहीं 5 तो कहीं 18 फीसदी जीएसटी वसूल किया जा रहा है। कोटा  की अर्थव्यवस्था में सुधार के लिए यहां पर्यटन को बढ़ावा देने, पर्यटन स्थलों का प्रचार करने की जरूरत है। हाड़ौती के खाद्य पदार्थों को बढ़ावा देने की जरूरत है। ट्रम्प टैरिफ के बाद सरकार ने जिस तरह से स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा दिया है उसे पहले ही कर देना चाहिए था। उद्योगों को प्रोत्साहन के लिए गुजरात मॉडल को अपनाते हुए एकल विंडों पर ही सुविधाएं उपलध्ब करवाए जाने की जरूरत है। <br /><strong>-अशोक माहेश्वरी, संभाग अध्यक्ष होटल फैडरेशन आॅफ राजस्थान</strong></p>
<p><strong>बजट बढ़े तो मजबूत हो शिक्षा का संस्थागत ढांचा</strong><br />सरकारी स्कूलों की स्थिति में पहले से सुधार तो हुआ है लेकिन अभी भी शिक्षा के संस्थागत ढांचे को मजबूत करने की जरूरत है। यह तभी संभव है जब सरकार द्वारा स्कूल भवनों व शिक्षा में सुधार के लिए बजट को बढ़ाया जाए। झालावाड़ स्कूल हादसे के बाद जर्जर भवनों का सर्वे हुआ और एसडीआरएफ के तहत बजट भी मिला। इसके बाद काफी सुधार आया है।  लेकिन यह ऊंट के मुंह में जीरे के समान है।  स्कूल भवनों के लिए सरकार के साथ ही भामाशाहों को भी आगे आने की जरूरत है। साथ ही सरकारी स्कूलों को भी हाईटेक बनाने की जरूरत है। शिक्षा से ही उन्नति संभव होती है। <br /><strong>-स्नेहलता शर्मा चीफ ब्लॉक एजुकेशन आॅफिसर कोटा</strong></p>
<p><strong>8 वें पे कमीशन में पेंशन अधिनियम हो निरस्त</strong><br />सरकार द्वारा 8 वें पे कमीशन में जो पेंशन अधिनियम लागू किया जा रहा है। जिसकी  बजट में घोषणा होने वाली है। सरकार को उसे निरस्त करना चाहिए। इससे 2025 से पहले सेवानिवृत्त हुए करीब 69 लाख पेंशनर्स प्रभावित होंगे। इस अधिनियम में पेंशन व पारिवारिक पेंशन को बनद करने या उसमें कमी व परिवर्तन का प्रावधान है।  सरकारी कर्मचारियों के  सेवानिवृत्त होने के बाद कर्मचारियों व उनके परिवार के लिए पेंशन काफी सहारा होता है। इसे बंद करना गलत है। वहीं कौशल विकास के क्षेत्र में काम करने वालों को जो सरकार की तरफद्द से बजट दिया जाता है वह निजी क्षेत्र की तुलना में दसवा हिस्सा ही है। इसे बढ़ाकर समान किए जाने की जरूरत है। <br /><strong>-आर.पी. गुप्ता पेंशनर,चैयरमेन जन शिक्षण संस्थान</strong></p>
<p><strong>रिसर्च आधारित शिक्षा पर हो फोकस</strong><br />रिर्सच शिक्षा और नई तकनीक पर आधारित शिक्षा पर फोकस करते हुए उसके लिए बजट में प्रावधान करने की जरूरत है। जिससे विदेश जाने वाले युवाओं को यहीं रोका जा सके।  साथ ही शिक्षा के लिए  बजट बढ़ाया जाए जिससे प्राइमरी सहित अन्य एज्यूकेशन सेक्टर मजबूत होंगे। वैसे भारत अभी हर स्थिति में मजबूत है। अब अन्य देश भी भारत की तरफ  देख रहे है। ऐसी स्थिति में सरकार को आने वाले बजट में ट्रंप टैरिफ का मुकाबला करने के लिए जीएसटी में राहत देने की उम्मीद है। अभी यूरोप के साथ जो डील हुई है। उससे काफी फर्क पड़ा है। अभी जीडीपी का बजट में शिक्षा पर 4.6 प्रतिशत ही खर्च किया जा रहा है इसे बढ़ाकर 6 फीसदी किए जाने की आवश्यकता है। <br /><strong>-मीरा गुप्ता,सह आचार्य अर्थशास्त्रराजकीय कला कन्या महाविद्यालय कोटा </strong></p>
<p><strong>टैक्स में छूट मिले तो पूरी हो आम आदमी की जरूरतें</strong><br />वर्तमान में हर चीज को लग्जरी बना दिया गया है। जिससे बहुत सारी चीजें आम आदमी की पहुंच से दूर हो गई है। ऐसे में बजट में आम आदमी को ध्यान में रखते हुए प्रावधान किए जाने चाहिए। इनकम टैक्स में छूट का दायरा बढ़ाया जाना चाहिए। जिससे आम आदमी की जरूरतों को पूरा किया जा सके। शिक्षा क्षेत्र में बजट बढ़ाने की आवश्यकता है। इसके साथ शहर में प्रदूषण एक बड़ा मुद्दा है। प्रदूषण की वजह से मेडिकल खर्च बढ़ रहा है। आम आदमी को मेडिकल क्षेत्र में रिलीफ मिले बजट में ऐसे प्रावधान करना चाहिए। इसे कम करने और आम आदमी की मूलभूत जरूरतों को पृूरा करने  पर बजट में प्रावधान किया जाना चाहिए। <br /><strong>-आरती जनार्दन सोशल वर्कर व  गृहिणी</strong></p>
<p><strong>अदालतों का मजबूत हो इंफ्रास्ट्रक्चर</strong><br />बजट में सरकार को न्याय क्षेत्र के लिए भी विशेष बजट देना चाहिए। कुछ देशों में न्यायप्रणाली की व्यवस्था बहुत ही अच्छी हैं। इस तरह से सरकार को भी देश में त्वरित न्याय की व्यवस्था करनी चाहिए। जिससे पीड़ित को जल्दी राहत मिल सके।  साथ ही संभागीय मुख्यालय होने के बाद भी कोटा मेंं अदालतों का इंफ्रा स्ट्रक् चर मजबृूत नहीं है। मिनी सचिवालय में एक ही जगह पर सभी अदालतें हों। हाईकोर्ट की बैंच स्थापित की जाए। साथ ही जितनी भी करदाता हैं उन्हें विदेशों की तर्ज पर  सुविधाओं के रूप में रिटर्न देने की जरूरत है। युवाओं को विदेश जाने से रोकने के लिए यहां सुविधाएं उपलब्ध करवाने की जरूरत है। <br /><strong>-सोनल विजय, एडवोकेट </strong></p>
<p><strong>खिलाडियों के लिए हो बजट, सुविधाएं भी मिले</strong><br />राज्य व राष्ट्रीय स्तर पर चयनति व मैडल प्राप्त खिलाडियोंं के लिए अलग से बजट होना चाहिए। हालत यह है कि खिलाडियों को मिलने वाली पुरुस्कार राशि तो कई सालों से नहीं मिल रही। वहीं सुविधाओं के नाम पर भी नाम मात्र का बजट है। यहां तक कि  खिलाडियों  को स्वयं के खर्च पर ही प्रतिभा दिखानाी पड़ रही है। जबकि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को खेलों में आगे बढने में कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। खिलाडियों के  चोटिल होने पर सरकार की ओर से कोई सहायता नहीं दी जाती है। खिलाडियों ं को आर्थिक संबल प्रदान करने के लिए बजट में सरकार को प्रावधान करने होंगे। <br /><strong>-प्रियांशी गौतम, इटरनेशनल वुशु खिलाड़ी</strong></p>
<p><strong>इनकम टैक्स की सरल हो प्रक्रिया</strong><br />बजट में नया इनकम टैक्स नियम लागू हो और प्रक्रिया को सरल किया जाए। जिससे  टैक्स चोरी को कम किया जाए और अधिक से अधिक लोग टैक्स जमा करवा सकें। रिसर्च व विकास के लिए बजट दिया जाए। साथ ही युवाओं के लिए रिसर्च के साथ आय का जरिया भी मुहैया कराया जाए। जिससे युवा टेलेंट को विदेश जाने से रोका जा सके। युवा शिक्षा लेकर देश में ही काम करना तो चाहते हैं लेकिन उन्हें अपेक्षा अनुरूप सुविधाएं नहीं मिल पाती। कृषि प्रधान देश होने से कृषि क्षेत्र में टैक्स में छूट का प्रावधान बढ़ाया जाए। <br /><strong>-रितु बोहरा, चार्टर्ड एकाउंटेंट</strong></p>
<p><strong>स्टार्टअप में निवेशकों को मिले प्रोत्साहन</strong><br />एमएसएमई में लोन की गति तेज हुई है। लंबित भुगतान में हालांकि तेजी आई है। फिर भी हम  उद्यम  स्थापना के लिए लोगों को सलाह देते हैं कि पूरी तरह से लोन पर निर्भर नहीं रहें। सरकार की अपनी चाल होती है। सरकार काफी प्रयास कर रही है।   कोटा में भी अब पहले की तुलना में स्टार्टअप की संख्या बढ़ी है। आईआईटी के युवा आकर यहां स्टार्टअप शुरू कर रहे हैं। जिससे रोजगार के अवसर भी सृजित हो रहे हैं। लेकिन किसी भी नए उद्यम को स्थापित होने में ढाई से तीन साल का समय लगता है। ऐसे में स्टार्टअप में निवेश करने वालों को प्रोत्साहन देने की जरूरत है। साथ ही नए -नए स्टार्टअप व उद्यमों को भी और सुविधाएं देने की जरूरत है। <br /><strong>-कौस्तुभ भट्टाचार्य, स्टार्टअप सलाहकार</strong></p>
<p><strong>अकादमिक इनक्यूबेटर्स और रिसर्च गतिविधियां हो सशक्त</strong><br />16 जनवरी 2016 को स्टार्टअप नीति की स्थापना के एक दशक में हुई प्रगति को देखते हुए इस योजना को अधिक संस्थागत और नियमित किये जाने की आवश्यकता है ।  राज्य में  वर्तमान में करीब 8 हजार स्टार्टअप है जिनमे से हाड़ोती में करीब 500 की संख्या को देखते हुए और ट्रिपलआई की कोटा में भूमिका को देखते हुए क्षेत्रीय आधार पर हाड़ोती को विशेष बजट का भी प्रावधान संभाग को अधिक प्रगति प्रदान करेगा।  स्टार्टअप की संख्या व उनके प्रदर्शन स्तर को देखते हुए यह राज्यहित और छात्रों के हित में होगा कि कौशल विकास से जुड़े मेंटर्स के लिए नियमितीकरण की दिशा में प्रयास किए जाएं। साथ ही अकादमिक इनक्यूबेटर्स और रिसर्च गतिविधियों को भी सशक्त किया जाए। <br /><strong> -आयुष त्यागी, स्टार्टअप सलाहकार</strong></p>
<p><strong>शिक्षा में कम या समाप्त हो जीएसटी</strong><br />सरकार की ओर से शिक्षा व कोचिंग फीस पर भी जीएसटी लागू है।  यहां तक कि सरकारी विश्वविद्यालयों की फीस पर भी 30 फीसदी जीएसटी है। इसे कम या समाप्त किए जाने की जरूरत है।  डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने व कोचिंग सेक्टर को फिर से बूस्टअप करने की जरूरत है। मैंटल हैल्थ क्षेत्र में बजट देने, स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट को मजबूत करने व एयरपोर्ट की मांग को भी पूरी करने की आवश्यकता है। कोटा का शिक्षा के क्षेत्र में नाम है। यही कोटा को मजबूती देगा। इस क्षेत्र को फिर से मजबूती के लिए बजट में प्रावधान होने चाहिए। <br /><strong>-के.आर. चौधरी असिसट्ेंट प्रोफेसर अर्थशास्त्र कोटा यूनिवर्सिटी </strong></p>
<p><strong>कृषि उपकरणों को सस्ता करना चाहिए</strong><br />बजट ऐसा होना चाहिए जो कि नागरिकों की बेसिक जरूरत को पूरा करे। वहीं शिक्षा लोन कम ब्याज दर पर और आसानी से उपलब्ध हो  जिससे अधिक से अधिक बच्चे इसका लाभ लेकर उच्च शिक्षा प्राप्त कर सके।  अल्प संख्यक छात्रवृत्ति सरकार ने बंद कर दी है। जिससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चे उच्च शिक्षा नहीं ले पा रहे हैं।  वहीं सरकार को कृषि उपकरणों को सस्ता करना चाहिए। जिससे किसानों को राहत मिल सकेगी और किसानों के उत्पादनों की लागत कम आएंगी।  कृषि में रियायतें मिलेंगी तो खाद्य पदार्थ सस्ते होने से घरेलू बजट भी कम होने से लोगों को राहत मिलेगी। <br /><strong>- एडवोकेट सानिया खानम लीगल एड डिफेंस काउंसलर</strong></p>
<p><strong> बजट  में हो रोजगार सृजन पर  जोर</strong><br />रोजगार सृजन पर बजट में विशेष प्रावधान होने चाहिए। युवा बेरोजगार होकर बैठे हैं। सरकारी कार्यालयों व अस्पतालों में बड़ी संक्या में संविदा कर्मी बहुत कम मानदेय पर काम कर रहे हैं। तकनीकी रूप से सक्षम होने के बाद भी उनका मानदेय काफी कम है। ऐसे में सरकार को चाहिए कि  बजट मेंकार्मिकों का मानदेय बढ़ाने का प्रावधान किया जाए। साथ ही मेडिकल की पढ़ाई करने वाले बच्चों को छात्रवृत्रि दी जाए। <br /><strong>-अजय गोचर स्टूडेंट कामर्स कॉलेज कोटा</strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 31 Jan 2026 13:03:18 +0530</pubDate>
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                <title>दैनिक नवज्योति द्वारा आयोजित प्रतियोगिताओं के पुरस्कार वितरित</title>
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                        <![CDATA[पोस्टर और स्लोगन में राधिका, मेहंदी में शिखा चौहान व रंगोली में हिमांगी अग्रवाल रही प्रथम ।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/prizes-distributed-for-competitions-organized-by-dainik-navjyoti/article-136871"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/1200-x-600-px-(7)4.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। दैनिक नवज्योति द्वारा आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं के पुरस्कार सोमवार को कोटा कार्यालय में प्रदान किए गए। इन प्रतियोगिताओं में गणेशोत्सव पर पोस्टर और स्लोगन, करवाचौथ पर मेहंदी, और दीपावली पर रंगोली प्रतियोगिताएं शामिल थीं। इन प्रतियोगिताओं में भाग लेने वाले विजेताओं को दैनिक नवज्योति के निदेशक नरेंद्र चौधरी ने स्मृति चिह्न व सर्टिफिकेट प्रदान किए। सभी प्रतिभागियों को सर्टिफिकेट भी दिए गए।</p>
<p><strong>इन प्रतिभागियों को  मिले पुरस्कार-</strong><br /><strong>पोस्टर और स्लोगन प्रतियोगिता (गणेशोत्सव)</strong><br />1. प्रथम पुरस्कार: राधिका (अकलंक पब्लिक स्कूल, कक्षा 7 बी)<br />2. द्वितीय पुरस्कार: उर्वी जैन (कक्षा 7 ए)<br />3. तृतीय पुरस्कार: वेदांत शर्मा (कक्षा 8 बी)</p>
<p><strong>मेहंदी प्रतियोगिता (करवाचौथ)</strong><br />1. प्रथम पुरस्कार: शिखा चौहान<br />2. द्वितीय पुरस्कार: अंजली<br />3. तृतीय पुरस्कार: पूजा कुमारी कर्ण<br />4. सांत्वना पुरस्कार: शिवानी, पूजा बिरला, भावना गुप्ता</p>
<p><strong>रंगोली प्रतियोगिता (दीपावली)</strong><br />1. प्रथम पुरस्कार: हिमांगी अग्रवाल (राजकीय विधि महाविद्यालय, एलएलबी तृतीय वर्ष)<br />2. द्वितीय पुरस्कार: भूमिका वैष्णव (राजकीय कन्या कला महाविद्यालय, बीए तृतीय वर्ष)<br />3. तृतीय पुरस्कार: द्रोपती लोधा (एमए, राजकीय कन्या कला महाविद्यालय)<br />4. सांत्वना पुरस्कार: जाह्नवी शर्मा और अंजू देवी (बीए प्रथम वर्ष, राजकीय कन्या कला महाविद्यालय)</p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
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                <pubDate>Tue, 23 Dec 2025 12:41:27 +0530</pubDate>
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                <title>दैनिक नवज्योति की दशहरा थीम पर आयोजित ड्रॉइंग प्रतियोगिता के पुरस्कार वितरित</title>
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                        <![CDATA[प्रतियोगिता में  छह विद्यार्थी विजेता रहे। ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/prizes-distributed-in-the-dussehra-themed-drawing-competition-organized-by-dainik-navjyoti/article-135261"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/1200-x-600-px)-(1200-x-600-px)-(2)1.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। दशहरा के अवसर पर दैनिक नवज्योति ने श्री करनी नगर विकास समिति के बाल गृह के बच्चों के साथ दशहरा उत्सव मनाया था । इस उत्सव के दौरान समिति के बाल गृह के बच्चों के बीच दशहरा थीम पर ड्रॉइंग प्रतियोगिता का आयोजन किया गया था। इस प्रतियोगिता में कुल छह विद्यार्थी विजेता रहे। सोमवार को विजेता रहे विद्यार्थियों को दैनिक नवज्योति की तरफ से पुरस्कार व सर्टिफिकेट प्रदान किए गए। इस प्रतियोगिता के सभी प्रतिभागियों को भी दैनिक नवज्योति की तरफ से सर्टिफिकेट प्रदान किए गए ।</p>
<p><strong>इन्हें मिले पुरस्कार </strong><br />प्रतियोगिता में रोहित कुमार बैरवा (प्रथम वर्ष) ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। द्वितीय स्थान पर कान्हा जाटव (कक्षा 7) और तृतीय स्थान पर ललित बैरवा (कक्षा 9) रहे। इसके साथ ही, सांत्वना पुरस्कार प्राप्त करने वालों में रोहित सिंह (कक्षा 4), अंकित मेघवाल (कक्षा 8), और अंकित पांचाल (कक्षा 5) शामिल हैं।</p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 09 Dec 2025 14:31:07 +0530</pubDate>
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                <title>अग्रिम आदेशों तक टाइगर व लायन सफारी बंद : पर्यटकों की सुरक्षा को देखते हुए लिया गया निर्णय, दैनिक नवज्योति की खबर के बाद हरकत में आया विभाग</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क में स्थित टाइगर और लायन सफारी को गुरुवार से अग्रिम आदेशों तक पर्यटकों के लिए बंद कर दिया गया है। इस संबंध में डीसीएफ विजयपाल सिंह ने आदेश जारी किए हैं। वन विभाग ने यह कदम पर्यटकों की सुरक्षा और सफारी प्रबंधन को ध्यान में रखते हुए उठाया है।]]>
                    </description>
                
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/tiger-and-lion-safari-closed-till-further-orders-the-decision/article-131042"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-10/_4500-px)-(16).png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क में स्थित टाइगर और लायन सफारी को गुरुवार से अग्रिम आदेशों तक पर्यटकों के लिए बंद कर दिया गया है। इस संबंध में डीसीएफ विजयपाल सिंह ने आदेश जारी किए हैं। वन विभाग ने यह कदम पर्यटकों की सुरक्षा और सफारी प्रबंधन को ध्यान में रखते हुए उठाया है।</p>
<p><strong>दैनिक नवज्योति की खबर के बाद हरकत में आया विभाग</strong><br />इससे पहले दैनिक नवज्योति ने 29 और 30 अक्टूबर के अंक में टाइगर सफारी में वाहन के टायर धंसने की घटना को प्रमुखता से प्रकाशित किया था। रिपोर्ट में यह भी उजागर हुआ था कि घटना के दौरान पर्यटकों से वीडियो डिलीट करवाए गए थे। खबर प्रकाशित होने के बाद विभाग हरकत में आया और सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करते हुए सफारी को फिलहाल बंद करने का निर्णय लिया गया है। वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि सफारी क्षेत्र की जांच और आवश्यक सुधार कार्य पूरे होने के बाद ही इसे पुन: पर्यटकों के लिए खोला जाएगा। </p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 31 Oct 2025 12:18:27 +0530</pubDate>
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                <title>रचनात्मकता से सजी हथेलियां, करवाचौथ की थीम में ढलीं भावनाएं</title>
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                        <![CDATA[दैनिक नवज्योति कार्यालय में करवा चौथ पर मेहंदी प्रतियोगिता आयोजित।
]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/hands-adorned-with-creativity--emotions-woven-into-the-karva-chauth-theme/article-129285"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-10/_4500-px)-(2)2.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। करवाचौथ के पावन अवसर पर दैनिक नवज्योति, कोटा कार्यालय में मेहंदी प्रतियोगिता का आयोजन किया गया, जिसमें महिलाओं और लड़कियों ने बढ़-चढ़ कर भाग लिया। प्रतियोगिता की थीम ‘करवाचौथ’ थी, जिसके अनुरूप प्रतिभागियों ने पारंपरिक और आधुनिक डिजाइनों का ऐसा समावेश किया, जिससे न सिर्फ त्योहार की भावनाएं उभरकर सामने आर्इं, बल्कि रचनात्मकता और संस्कृति का भी सुंदर संगम देखने को मिला।</p>
<p><strong>चांद और छलनी की झलक</strong><br />प्रतियोगिता में कई प्रतिभागियों ने करवाचौथ की विशेष रस्म चांद को छलनी से देखने वाले दृश्य को अपने मेहंदी डिजाइनों में उतारा। कहीं महिला की आकृति थी जो चांद को निहार रही थी, तो कहीं पूजा की थाली, दीपक, करवा और श्रृंगार की वस्तुओं का सुंदर चित्रण था। कुछ डिजाइनों में पारंपरिक प्रतीक जैसे हाथी, बादल, फूल-पत्तियों आदि को भी रचा गया। थीम को ध्यान में रखते हुए कुछ प्रतिभागियों ने महिला व पुरुष  के प्रतीकों को भी अपने डिजाइन में शामिल किया। प्रतिभागियों ने पारंपरिक और मॉडर्न डिजाइनों का मेल करते हुए थीम को पूरी तरह जिया।</p>
<p><strong>प्रतियोगिता के परिणाम</strong><br />प्रतियोगिता के विजेताओं का चयन डिजाइनों की सफाई, रचनात्मकता और थीम से मेल के आधार पर किया गया। इस आयोजन को सफल बनाने में नगर निगम की सोशल डेवलपमेंट मैनेजर हेमलता गांधी और कम्युनिटी आॅर्गेनाइजर मीनाक्षी का विशेष सहयोग सराहनीय रहा।</p>
<p><strong>प्रथम पुरस्कार </strong><br />- शिखा चौहान</p>
<p><strong>द्वितीय पुरस्कार </strong><br />- अंजली</p>
<p><strong>तृतीय पुरस्कार </strong><br />- पूजा कुमारी करन</p>
<p><strong>सांत्वना पुरस्कार </strong><br />- शिवानी<br />- पूजा बिरला<br />- भावना गुप्ता</p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 10 Oct 2025 14:23:22 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>दैनिक नवज्योति ने पहले ही बता दिया : उच्च शिक्षा विभाग में 4,724 शैक्षणिक-गैर शैक्षणिक संविदा पदों पर होगी भर्ती</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[पांच वर्षो से काम कर रहे विधा सम्बल योजना के लगभग 4 हजार सहायक आचार्यों का क्या होगा?]]>
                    </description>
                
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/dainik-navjyoti-already-told-that-4724-academic-non-educational-contract-posts-will/article-125392"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-09/1ne1ws-(10).png" alt=""></a><br /><p>जयपुर।राज्य सरकार राज सेस महाविद्यालयों में 4,724 शैक्षणिक एवं गैरशैक्षणिक संविदा पदों पर भर्ती करेगी। साथ ही, 3,540 शैक्षणिक पदों पर यूजीसी मापदंडों के अनुरूप योग्य अभ्यर्थियों का नेट/ स्लेट/सेट/पीएचडी के माध्यम से भर्ती होगी। इन सभी पदों पर कार्मिकों का सेवाकाल पांच वर्ष रहेगा। इसके लिए राज्य सरकार राज सेस हायरिंग ऑफ  मैनपावर रूल्स -2023 में संशोधन करेगी। दैनिक नवज्योति ने  18 जुलाई के अंक में 'विद्या संबल योजना में भर्ती होने वाले असिस्टेंट प्रोफेसर पद समाप्त, अब टीचर असिस्टेंट की अनुबंध पर भर्ती की तैयारी' शीर्षक से प्रकाशित समाचार में बताया था कि सरकार संविदा पर भर्ती करेगी। समाचार के प्रकाशन के बाद विद्यासम्बल पर लगे शिक्षकों ने भी इसका विरोध किया था। </p>
<p>राज सेस महाविद्यालयों में भर्तियाें से विद्यार्थियों को मिलेगी बेहतर शिक्षा : उप मुख्यमंत्री डॉ. बैरवा ने बताया कि प्रदेश में राजस्थान कॉलेज एजुकेशन सोसाइटी (राज सेस) का गठन गत सरकार के समय वर्ष 2020 में किया गया था और इसके अंतर्गत 374 महाविद्यालय संचालित हैं। राज सेस के अन्तर्गत संचालित इन महाविद्यालयों में कुल 10,594 पद हैं, जिनमें 5,299 शैक्षणिक तथा 5,295 अशैक्षणिक पद हैं। ये सभी पद वर्तमान में रिक्त हैं तथा शिक्षण कार्य विद्या संबल द्वारा करवाया जा रहा है। </p>
<p><strong>विद्या सम्बल में काम कर रहे शिक्षकों ने उठाए सवाल  </strong><br /> पांच वर्षो से काम कर रहे विधा सम्बल योजना के लगभग 4 हजार सहायक आचार्यों का क्या होगा?<br /> शिक्षकों का न समायोजन, न भर्ती में बोनस अंक, शैक्षणिक अनुभव प्रमाण पत्र भी नहीं दिया गया।<br /> पहले चालीस हजार तक मासिक वेतन मिलता था,अब क्या मिलेगा कुछ भी स्पष्ट नहीं? <br /> 'सरकार की इस पांच वषोंर् की अस्थायी भर्ती का विरोध करते हैं। विधा सम्बल योजना में पांच वषोंर् तक काम करवा लिया, उसका क्या होगा? न समायोजन, न बोनस, न शैक्षणिक अनुभव प्रमाण पत्र। जल्दी ही इसके खिलाफ  जयपुर में प्रदर्शन करेंगे।<br />-डॉ रामसिंह सामोता, पूर्व अध्यक्ष शोध छात्र संघ राजस्थान विश्वविद्यालय </p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 01 Sep 2025 12:02:54 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>दुर्घटनाएं रोकने के कदम उठाने के निर्देश : दैनिक नवज्योति में प्रकाशित समाचारों पर कोर्ट ने संज्ञान लेकर की थी जनहित याचिका दायर</title>
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                        <![CDATA[जस्टिस कुलदीप माथुर एवं जस्टिस रवि चिरानिया की खंडपीठ के समक्ष सुनवाई के दौरान न्याय मित्र वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. सचिन आचार्य, प्रियंका बोराणा एवं हेली पाठक ने रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए तर्क दिए।]]>
                    </description>
                
                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jodhpur/instructions-to-take-steps-to-stop-accidents-were-filed-by/article-123344"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-08/1ne1ws-(12)2.png" alt=""></a><br /><p>जोधपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्यभर में आवारा कुत्तों और अन्य पशुओं के बढ़ते खतरे पर स्वत: संज्ञान लेते दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते कई सख्त निर्देश जारी करते राज्य सरकार को 8 सितंबर तक जवाब देने एवं निर्देशों की पालना के लिए आदेश दिया है। आवारा कुत्तों एवं अन्य पशुओं की वजह से होने वाली दुर्घटनाओं को लेकर दैनिक नवज्योति में प्रकाशित समाचारों पर कोर्ट ने संज्ञान लेते हुए जनहित याचिका दायर की थी। जस्टिस कुलदीप माथुर एवं जस्टिस रवि चिरानिया की खंडपीठ के समक्ष सुनवाई के दौरान न्याय मित्र वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. सचिन आचार्य, प्रियंका बोराणा एवं हेली पाठक ने रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए तर्क दिए।</p>
<p>न्यायमित्रों ने तर्क दिया कि शहर की सड़कों, राजमार्गों पर नागरिकों की स्वतंत्र और सुचारू आवाजाही में किसी भी प्रकार की बाधा, असुविधा, व्यवधान या असुविधा न हो, यह सुनिश्चित करने के लिए वैधानिक दायित्व होने के बावजूद संबंधित अधिकारियों की घोर लापरवाही और कर्तव्यों के पालन न करने के कारण, आवारा पशुओं द्वारा हमले और काटने की घटनाओं में कई गुना वृद्धि हुई है और इससे न केवल राज्य में मानव जीवन को खतरा पैदा हो रहा है। बल्कि राज्य की छवि भी खराब हो रही है। जहां न केवल पूरे देश से, बल्कि दुनिया भर के विभिन्न देशों से भी पर्यटक आते हैं। </p>
<p><strong>राजमार्गों से पशु हटाने के लिए नियमित गश्त हो</strong><br />नगर निगमों से यह भी अपेक्षा करते हैं कि वे एक टेलीफोन,मोबाइल नंबर,ई-मेल आईडी जारी करेंगे जहां उस क्षेत्र के नागरिक, निवासी आवारा पशुओं के संबंध में अपनी शिकायत दर्ज करा सकें। आमजन अपनी भावनाओं या धार्मिक विश्वासों या जानवरों के प्रति प्रेम के चलते उन्हें खाना खिलाना या उनकी देखभाल करना चाहते हैं, तो वे ऐसी गतिविधियां नगर पालिकाओं या निजी व्यक्ति, संगठन द्वारा संचालित कुत्ता आश्रयों और मवेशी तालाबों,गौशालाओं में करेंगे।</p>
<p>नगर निगम, जोधपुर अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान जोधपुर और जिला न्यायालय परिसर, जोधपुर के संबंध में तत्काल कदम उठाएगा, जहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग अपने उपचार कार्य के लिए आते हैं।  एम्स जोधपुर ने 10 अगस्त 2025 को न्यायमित्र अधिवक्ता प्रियंका बोराना को पत्र भेजकर अपने परिसर में आवारा कुत्तों की समस्या और मरीजों एवं स्टाफ पर हमलों की घटनाओं की जानकारी दी थी, जिसे कोर्ट ने संज्ञान में लिया। </p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जोधपुर</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jodhpur/instructions-to-take-steps-to-stop-accidents-were-filed-by/article-123344</link>
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                <pubDate>Tue, 12 Aug 2025 13:11:58 +0530</pubDate>
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                <title>बदलते जमाने की रंग बदलती होली</title>
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                        <![CDATA[दूर से फाल्गुन गीत और रसिया गाने वाले लोग नृत्य में शामिल होकर तारों की छांव में होली का आनंद मनाते थे। ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/holi-changing-color-of-changing-era/article-107285"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-03/257rtrer-(2)30.png" alt=""></a><br /><p>अब ऐसा लगता है कि लोग मौज-मस्ती करने के बजाय बहस करने में ज्यादा रुचि रखते हैं। होली एक ऐसा त्योहार है जिसे हर पृष्ठभूमि के लोग मनाते हैं, जिसमें दुश्मनी भुलाकर गले मिलते हैं। फाल्गुन की खुशियां अब दूर की यादों की तरह लगती हैं। आज हम जो होली मनाते हैं, वह पहले की होली से काफी अलग है। पहले, यह त्योहार लोगों के बीच अपार ख़ुशी और एकता लेकर आता था। उस समय प्यार की सच्ची भावना होती थी और दुश्मनी कहीं नहीं दिखती थी। परिवार और दोस्त मिलकर रंगों और हंसी-मजाक के साथ जश्न मनाते थे।  जैसे-जैसे समय बदला है, रिश्तों की गर्माहट फीकी पड़ती नजर आती है। आजकल होली की बधाई अक्सर मोबाइल या इंटरनेट के जरिए भेजे गए हैप्पी होली के साथ शुरू और खत्म होती है। पहले जैसा उत्साह और जश्न का माहौल अब नहीं रहा। पहले बच्चे हर मोहल्ले में होली के लिए समूह बनाकर होली का दान इकट्ठा करते थे और खुशी-खुशी किसी पर भी रंग फेंकते थे। यहां तक कि जब उन्हें चिढ़ाया या डांटा जाता था, तो वे हंसते थे। अब ऐसा लगता है कि लोग मौज-मस्ती करने के बजाय बहस करने में ज्यादा रुचि रखते हैं। होली एक ऐसा त्योहार है जिसे हर पृष्ठभूमि के लोग मनाते हैं, जिसमें दुश्मनी भुलाकर गले मिलते हैं। फाल्गुन की खुशियां अब दूर की यादों की तरह लगती हैं। होली के रंग, कुछ सालों में फीके पड़ गए हैं। बड़े-बुजुर्ग इस बात पर अफसोस जताते हैं कि अब हंसी-मजाक, उत्साह और वह जीवंत भावना नहीं रही जो कभी इस उत्सव की पहचान हुआ करती थी। पानी की बौछारों की आवाज और होली की जीवंतता ने कुछ ही घंटों के उत्सव के बाद एक शांत ले ली है। आओ राधे खेलें फाग, होली आई के हर्षोल्लास और उत्सव के इर्द-गिर्द होने वाली मस्ती-मजाक की आवाजें समय के साथ दबती जा रही हैं। फाल्गुन आते ही होली का उत्साह हवा में घुलने लगा। मंदिरों में फाग की ध्वनि गूंजने लगी और हर तरफ होली के लोकगीत सुनाई देने लगे। शाम होते ही ढप-चंग के साथ पारंपरिक नृत्यों ने होली के रंग चारों ओर बिखेर दिए। लोग ख़ुशी से एक-दूसरे पर पानी की छींटे मारते रहे और कोई कड़वाहट नहीं थी,  बस ख़ुशी थी। होली की तैयारियां वसंत पंचमी से ही शुरू हो जाती थीं और समुदाय के आंगन और मंदिर चंग की थाप से जीवंत हो उठते थे। रात में चंग की थाप के साथ नृत्य ने सभी को अपनी ओर आकर्षित कर लिया। दूर से फाल्गुन गीत और रसिया गाने वाले लोग नृत्य में शामिल होकर तारों की छांव में होली का आनंद मनाते थे। पहले के समय में पड़ोसियों की बहू-बेटियों को परिवार की तरह माना जाता था।</p>
<p>घर स्वादिष्ट व्यंजनों की ख़ुशबू से भर जाते थे और मेहमानों का खुले दिल से स्वागत किया जाता था। आज  समारोह ज्यादातर अपने घर तक ही सीमित रह गए हैं और समुदाय की भावना कम होती जा रही है। फोन पर एक साधारण होली मुबारक ने पहले के दिल से जुड़े रिश्तों की जगह ले ली है,  जिससे रिश्ते कम मधुर लगने लगे हैं। इस बदलाव के कारण परिवार अपनी बहू-बेटियों को दोस्तों या रिश्तेदारों से मिलने देने में हिचकिचाते हैं। पहले लड़कियां होली के दौरान ख़ुशी और हंसी-मजाक करती हुई खुली हवा में घूमती थीं, लेकिन अब अगर कोई लड़की किसी रिश्तेदार के घर ज्यादा देर तक रुकती है, तो उसके परिवार में चिंता पैदा हो जाती है। होली का त्योहार खुशियों का मौसम हुआ करता था, जिसकी शुरुआत होली के पौधे लगाने से होती थी। छोटी-छोटी लड़कियां गाय के गोबर से वलुडिया बनाती थीं, खूबसूरत मालाएं बनाती थीं, जिन पर आभूषण, नारियल, पायल और बिछिया होती थीं। दुख की बात है कि ये परंपराएं अब खत्म हो गई हैं। पहले घर पर ही टेसू और पलाश के फूलों को पीसकर रंग बनाया जाता था और महिलाएं होली के गीत गाती थीं। होली के दिन सभी लोग चंग की ताल पर नाचते हुए जश्न मनाते थे। बसंत पंचमी से ही फाग की धुनें गूंजने लगती थीं, लेकिन अब होली के गीत कुछ ही जगह सुनाई देते हैं। परंपरागत रूप से विभिन्न समुदायों के लोग ढोलक और चंग की थाप के साथ होली खेलने के लिए एकत्रित होते थे। अब वह जीवंत भावना कहां चली गई है। आज होली महज एक परंपरा की तरह लगती है। हाल के वर्षों में सामाजिक गुस्सा और विभाजन इतना बढ़ गया है कि कई परिवार इस त्योहार के दिन घर के अंदर ही रहना पसंद करते हैं। वैसे तो लोग सालों से होली का त्योहार उत्साह के साथ मनाते आ रहे हैं, लेकिन इस त्योहार का असली उद्देश्य भाईचारा बढ़ाना और नकारात्मकता को दूर करना है, जो अब कहीं खो गया है। समाज कई चुनौतियों का सामना कर रहा है और सामाजिक असमानता प्रेम, भाईचारे और मानवता के मूल्यों को खत्म कर रही है। एक समय था जब होली एक महत्वपूर्ण अवसर था, जब परिवार होलिका दहन देखने के लिए इकट्ठा होते थे और उसी दिन वे खुशी-खुशी एक-दूसरे पर रंग लगाते और अबीर फेंकते थे। समूह होली की खुशियां बांटने के लिए एक-दूसरे के घर जाते और भांग की भावना में डूबे हुए फगुआ गीत गाते थे। अब वास्तविकता यह है कि होली पर कुछ ही लोग घर से बाहर रहना पसंद करते हैं। ये उत्सव हमें उत्साहित करते हैं, हमारे दिलों में उम्मीद जगाते हैं और अकेलेपन की भावनाओं को दूर करते हैं, भले ही कुछ पल के लिए ही क्यों न हो। हमें इस त्योहारी भावना को संजोकर रखना चाहिए। <br />-प्रियंका सौरभ<br />(यह लेखक के अपने विचार हैं)</p>]]>
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                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 12 Mar 2025 11:32:09 +0530</pubDate>
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                <title>दैनिक नवज्योति का राष्ट्रीय कवि सम्मेलन 26 को, महाभारत सीरियल के श्रीकृष्ण देशराग में देंगे अपनी प्रस्तुति</title>
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                        <![CDATA[बीएम बिरला सभागार जयपुर में गुलाबी नगरवासी हास्य कविताओं से होंगे लोट-पोट, तो कॉमेडी से गुदगुदाएंगे]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/national-kavi-sammelan-of-dainik-navjyoti-will-give-his-presentation/article-101881"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-01/257rtrer-(1)35.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। देश ही नहीं दुनिया में धूम मचाने वाले महाभारत टीवी धारावाहिक में श्री कृष्ण की भूमिका निभाने वाले डॉ. नितीश भारद्वाज गुलाबी नगर जयपुर में गणतंत्र दिवस की संध्या पर अपनी प्रस्तुति देंगे। दैनिक नवज्योति की ओर से आयोजित होने वाले राष्ट्रीय कवि सम्मेलन में श्री कृष्ण अपनी श्रीमद् भगवद् गीता मोटिवेशन स्पीच भी देंगे। दैनिक नवज्योति के निदेशक हर्ष चौधरी ने बताया कि यह कवि सम्मेलन रविवार, 26 जनवरी को शाम छह बजे स्टेच्यू सर्किल स्थित बीएम बिड़ला सभागार में शुरू होगा, इसमें हिन्दी के वैश्विक प्रचार-प्रसार के लिए दैनिक नवज्योति की ओर से स्थापित अखिल भारतीय कप्तान दुर्गाप्रसाद चौधरी हिन्दी सेवा सम्मान-2025 महाभारत टीवी धारावाहिक में श्रीकृष्ण की भूमिका निभाने वाले अभिनेता, मोटिवेशनल स्पीकर और पूर्व सांसद डॉ. नितीश भारद्वाज को प्रदान किया जाएगा। नवज्योति काव्य कलश सम्मान से कोटा निवासी वरिष्ठ कवि कुंवर जावेद को प्रदान किया जाएगा। इस राष्ट्रीय कवि सम्मेलन में जाने माने वीर रस के कवि जगदीश सोलंकी (कोटा), गंभीर सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर मजेदार तरीके से सवाल उठाने वाले सुरेश अवस्थी (कानपुर), गीतकार कुंवर जावेद (कोटा), अपने अनोखे अंदाज में प्रहार करने वाले व्यंग्य के साथ हास्य समाहित कर विसंगतियों पर प्रहार करने वाले संजय झाला (जयपुर), लाफ्टर चैलेंज विजेता सुरेश अलबेला (कोटा) और मारवाड़ी में श्रोताओं को लोटपोट करने वाले सुनील व्यास (कांकरोली) अपनी प्रस्तुतियां देकर गुलाबीनगर की जनता को गुदगुदाएंगे।</p>
<p><strong>अब तक इनको मिल चुका है सम्मान</strong><br />दैनिक नवज्योति की ओर से 2012 में स्थापित अखिल भारतीय कप्तान दुर्गाप्रसाद चौधरी हिन्दी सेवा सम्मान से कई नामचीन कवियों को नवाजा जा चुका है। पहला सम्मान केन्द्रीय हिंदी संस्थान के पूर्व उपाध्यक्ष एवं चर्चित हास्य कवि अशोक चक्रधर को दिया गया था। वर्ष 2013 में इस सम्मान से हरियाणा साहित्य अकादमी के पूर्व उपाध्यक्ष एवं हास्य कवि एवं पद्मश्री सुरेन्द्र शर्मा को नवाजा गया था। वर्ष 2014 में उत्तरप्रदेश हिंदी संस्थान के कार्यकारी अध्यक्ष एवं प्रख्यात वयोवृद्ध गीतकार पद्मभूषण गोपाल दास नीरज को सम्मानित किया गया था। वर्ष 2015 में इस सम्मान से हिंदी फिल्म विवाह और प्रेम रतन धन पायो के संवाद लेखक तथा हास्य रत्न से सम्मानित राजस्थान के मूल निवासी आसकरण अटल को नवाजा गया था। इस प्रकार वर्ष 2016 में ख्याति प्राप्त हास्य व्यंग्य लेखक नागपुर निवासी मधुप पांडे को यह पुरस्कार दिया गया था। वर्ष 2017 में टीवी चैनल्स पर चर्चित व्यक्ति एवं वरिष्ठ कवि राजस्थान के मूल निवासी शैलेश लोढ़ा मुम्बई को इस पुरस्कार से नवाजा गया था। साल 2018 में प्रख्यात कवि मेरठ निवासी हरिओम पंवार को यह पुरस्कार प्रदान किया गया था। इसी प्रकार वर्ष 2019 प्रख्यात कवि गाजियाबाद निवासी डॉ. कुंवर बेचैन को दिया गया। वर्ष 2020 प्रख्यात कवि मुम्बई निवासी फिल्म गीतकार समीर अंजान को प्रदान किया गया। वर्ष 2022 में प्रख्यात हरियाणवी कवि अरुण जैमिनी को दिया गया। वर्ष 2024 में जयपुर के संजय झाला को दिया गया।</p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 24 Jan 2025 09:15:59 +0530</pubDate>
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                <title>पत्रकारिता का लक्ष्य पैसा कमाना नही, देश सेवा होनी चाहिए : मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी </title>
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                        <![CDATA[मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी सुशीला करनाणी ने कहा कि पत्रकारिता का लक्ष्य पैसा कमाना नही, बल्कि राष्ट्रीय सेवा करना है । पत्रकारिता एक धर्म है और दूसरी अपनी एक संस्कृति भी है]]>
                    </description>
                
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/tonk/the-goal-of-journalism-should-not-be-to-earn-money/article-98036"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-12/5554-(8)2.png" alt=""></a><br /><p>टोंक। मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी सुशीला करनाणी ने कहा कि पत्रकारिता का लक्ष्य पैसा कमाना नही, बल्कि राष्ट्रीय सेवा करना है । पत्रकारिता एक धर्म है और दूसरी अपनी एक संस्कृति भी है। सुशीला करनाणी बुधवार को घण्टाघर स्थित दैनिक नवज्योति ब्यूरों कार्यालय पर दैनिक नवज्योति के संस्थापक स्व. कप्तान दुर्गा प्रसाद चौधरी के 118वीं जयन्ति पर सम्बोधित कर रही थी। उन्होंने कहा कि देश की आजादी में अपनी अहम भुमिका निभाने वाले समाचार-पत्र दैनिक नवज्योति के सम्बद्ध कप्तान दुर्गा प्रसाद चौधरी से उनकी 1990 में जब मैं उस समय मिल पाई जब वह वनस्थली विद्यापीठ के एक कार्यक्रम में जाने से पूर्व मेरे भाई एवं रिपोर्टर राजकुमार करनाणी के साथ मिलने का अवसर मिला। एवं पुत्री एवं पोत्री की भांति कप्तान साहब ने पढ़ाई की जानकारी लेते हुए उज्जवल भविष्य का आशीर्वाद दिया। उन्होंने कहा कि वह बचपन से ही नवज्योति समाचार पत्र से जुडी रही। तथा आज गलाकाट प्रतिस्पर्धा में भी नवज्योति ने अपनी पहचान बनाए रखी है। पण्डित जगदम्बा प्रसाद शर्मा ने कहा कि कप्तान दुर्गा प्रसाद चौधरी का जीवन सदैव आजाद भारत के लिए संघर्ष करने के साथ-साथ पत्रकारिता के माध्यम से समाज में व्याप्त कुरूतियों को दूर करने के लिए प्रयासरत रही।</p>
<p>भाजपा के जिला उपाध्याय रमेश गढ़वाल ने कप्तान दुर्गा प्रसाद चौधरी के आजादी की लड़ाई में समाचार पत्र के माध्यम से किए गए संघर्ष को याद करते हुए श्रृद्धांजलि दी। कांग्रेस के महासचिव रसीद नद्दाफी ने कप्तान साहब का टोंक से लगाव पर अपने बुजुर्गो से सुने किस्सों को याद करते हुए कहा कि ऐसी बहुत शख्सियत बहुत बिरले ही होती है। पत्रकार समीर ने कप्तान साहब के संघर्ष एवं पत्रकार वजहात भाई ने कप्तान साहब की सहनता-सरलता को नई पीढ़ी के लिए मार्ग दर्शन बताया। टोंक जिले के वरिष्ठ पत्रकार लियाकत अली, विनोद शर्मा, पत्रकार नीरज राजोरिया, श्रमिक नेता रवि उपाध्याय, रोटरी क्लब के रोहित कुमावत ने भी कप्तान दुर्गा प्रसाद चौधरी के जीवन पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम आयोजक एवं वरिष्ठ पत्रकार डॉ. राजकुमार करनाणी ने सभी का आभार प्रकट करते हुए अपने जीवन के 40 वर्षो से नवज्योति से जुड़ाव के दौरान कप्तान साहब से मिले मार्गदर्शन पर विस्तृत चर्चा की। इससे पूर्व दिनभर घण्टाघर पर स्थित नवज्योति के ब्यूरों कार्यालय पर कप्तान दुर्गा प्रसाद चौधरी की जयन्ति के अवसर पर रखी तस्वीर पर कोहना प्रिसिंपल कृष्णा चौधरी, कमलेश चावडा, विशाल सैनी, शाहिद खान, राष्ट्रीय कवि प्रदीप पव्वार सहित अन्य लोगो ने पुष्पाजंलि की।</p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>टोंक</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 18 Dec 2024 18:53:49 +0530</pubDate>
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                <title>कप्तान दुर्गाप्रसाद चौधरी की 118वीं जयंती मनाई गई</title>
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                        <![CDATA[ स्वतंत्रता सेनानी एवं दैनिक नवज्योति के संस्थापक संपादक कप्तान दुर्गाप्रसाद चौधरी की 118वीं जयंती मनाई गई ]]>
                    </description>
                
                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/captain-durga-prasad-choudharys-118th-birth-anniversary-celebrated/article-97979"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-12/257rtrer37.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। स्वतंत्रता सेनानी एवं दैनिक नवज्योति के संस्थापक संपादक कप्तान दुर्गाप्रसाद चौधरी की 118वीं जयंती बुधवार को मनाई गई। कप्तान साहब ने अजमेर से ब्रिटिश साम्राज्य को उखाड़ फेंकने के लिए अखबार की शुरुआत की। अजमेर से ऐसा करना बेहद चुनौतीपूर्ण था, क्योंकि अजमेर में अंग्रेैजों का सीधा शासन था, जबकि राजस्थान के बाकी इलाकों में रजवाड़ों का राज था , जहां अखबार निकालना और पत्रकारिता करना तुलनात्मक रूप से आसान था। </p>
<p>कप्तान दुर्गाप्रसाद चौधरी की 118वीं जयंती के अवसर पर दैनिक नवज्योति के जयपुर, अजमेर, कोटा, जोधपुर और उदयपुर कार्यालयों में कार्यक्रम किए गए। जयपुर में रेलवे स्टेशन रोड पर जोबनेर बाग स्थित कार्यालय में दोपहर 12 बजे कार्यक्रम में कप्तान साहब को पुष्प अर्पित किए गए। विभिन्न जिलों में स्थित ब्यूरो कार्यालयों में भी कार्यक्रम कर कप्तान साहब के व्यक्तित्व और कृतित्व पर चर्चा की गई।  </p>
<p>देश के प्रख्यात स्वतंत्रता सेनानी, समाज सेवक एवं निर्भीक पत्रकारों में शामिल कप्तान साहब का जन्म 18 दिसम्बर, 1906 को सीकर जिले के नीमकाथाना में हुआ था। कप्तान साहब ने दो अक्टूबर, 1936 को अजमेर से नवज्योति समाचार पत्र की शुरुआत की थी। उनकी इस पहल से राजस्थान ही नहीं, समूचे उत्तर भारत की पत्रकारिता में निर्भीकता का दौर शुरू हुआ।</p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 18 Dec 2024 13:10:02 +0530</pubDate>
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                <title>नवज्योति के मुद्दा उठाने के बाद शहर में महीनों से खुदी पड़ी सड़कें अब होने लगीं दुरुस्त, मौके पर चल रहा काम</title>
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                        <![CDATA[जयपुर विकास प्राधिकरण की आयुक्त को जब यह जानकारी दैनिक नवज्योति के माध्यम से मिली तो उन्होंने तत्परता से यह काम करवाना शुरू कर दिया।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/after-raising-the-issue-of-navjyoti-the-roads-which-were/article-91888"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-09/630400-size-(13)5.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। शहर राजधानी होने के बावजूद सड़कों के मामले में लगातार उपेक्षा का शिकार है। पत्रकार कॉलोनी से जयसिंहपुरा हो या शहर के दूसरे इलाके, सड़कें टूटना तो एक बात है, लेकिन उन्हें खोदकर छोड़ देना एक अलग गंभीर लापरवाही है। ये मसले पिछले कुछ समय से दैनिक नवज्योति ने प्रभावी तरीके से उठाए हैं और इन्हें विकास एजेंसियों के सामने रखा है।</p>
<p>जयपुर विकास प्राधिकरण की आयुक्त को जब यह जानकारी दैनिक नवज्योति के माध्यम से मिली तो उन्होंने तत्परता से यह काम करवाना शुरू कर दिया। इस मामले में इलाके के लोगों ने निर्माण एजेंसियों के अधिकारियों और दैनिक नवज्योति का आभार व्यक्त किया। इस सड़क पर सात-आठ महीनों से एक तरफ पाइप लाइन के लिए गड्ढे कर दिए थे, जिनसे लोगों को भारी परेशानी उठानी पड़ रही थी।</p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 29 Sep 2024 14:00:34 +0530</pubDate>
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