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                <title>investigation committee - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>investigation committee RSS Feed</description>
                
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                <title>ईरान का बड़ा बयान: बिना गारंटी और हर्जाने के युद्ध का अंत संभव नहीं, नुकसान के लिए उठाई मुआवजे के भुगतान की भी मांग</title>
                                    <description><![CDATA[ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने युद्ध विराम के लिए हमलों की पुनरावृत्ति न होने की गारंटी और मुआवजे की शर्त रखी है। उन्होंने पड़ोसी देशों पर हमलों के लिए इज़रायल को जिम्मेदार ठहराते हुए संयुक्त जांच समिति का प्रस्ताव दिया। अराघची ने चेतावनी दी कि ऊर्जा केंद्रों पर हमला होने पर क्षेत्र में सक्रिय अमेरिकी कंपनियों को सीधा निशाना बनाया जाएगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/irans-big-statement-end-of-war-is-not-possible-without/article-146581"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/iran-foreign-minister-abbas-araghchi.png" alt=""></a><br /><p>तेहरान। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा है कि मौजूदा युद्ध का अंत तभी संभव है जब इस बात की पुख्ता गारंटी दी जाए कि हमले दोबारा नहीं दोहराए जाएंगे। अराघची ने एक प्रमुख अरबी समाचार पत्र से बातचीत के दौरान स्पष्ट किया कि युद्ध का अंत तभी संभव है जब इस बात की पुख्ता गारंटी दी जाए कि हमले दोबारा नहीं दोहराए जाएंगे। इसके साथ ही उन्होंने संघर्ष के दौरान हुए नुकसान के लिए हर्जाने या मुआवजे के भुगतान की मांग भी उठाई है। </p>
<p>अराघची ने क्षेत्रीय देशों के साथ मिलकर एक संयुक्त जांच समिति बनाने का प्रस्ताव भी दिया है जो क्षेत्र में हुए हमलों की बारीकी से जांच कर सके। ईरानी विदेश मंत्री ने अपने बयान में जोर देकर कहा कि तेहरान की सैन्य कार्रवाइयां केवल इस क्षेत्र में स्थित अमेरिकी ठिकानों और हितों तक ही सीमित रही हैं। उन्होंने इस बात का पुरजोर खंडन किया कि ईरान ने पड़ोसी देशों के किसी भी नागरिक या आवासीय क्षेत्र को निशाना बनाया है।  </p>
<p>अराघची ने आशंका जताई कि अरब देशों के नागरिक ठिकानों पर हुए हमलों के पीछे इजरायल का हाथ हो सकता है, जिसका उद्देश्य ईरान और उसके पड़ोसी अरब देशों के मधुर संबंधों में दरार पैदा करना है। अराघची ने यह भी सनसनीखेज दावा किया कि अमेरिका ने ईरान के शाहिद की तरह ही लुकास नामक एक नया ड्रोन बनाया है, जिसका उपयोग अरब देशों में ठिकानों को निशाना बनाने के लिए किया गया है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर ईरान के ऊर्जा केंद्रों या तेल सुविधाओं को निशाना बनाया गया, तो तेहरान इसका कड़ा जवाब देगा। ऐसी स्थिति में ईरान इस क्षेत्र में सक्रिय अमेरिकी कंपनियों की ठिकानों पर सीधा हमला करेगा।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 15 Mar 2026 17:31:03 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>संसदीय जांच समिति के गठन को चुनौती देने वाली न्यायमूर्ति वर्मा की याचिका काे उच्चतम न्यायालय ने किया खारिज, जानें पूरा मामला</title>
                                    <description><![CDATA[सुप्रीम कोर्ट ने न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा के खिलाफ महाभियोग जांच समिति के गठन को वैध ठहराते हुए उनकी याचिका को खारिज कर दिया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/the-supreme-court-rejected-justice-vermas-petition-challenging-the-formation/article-139813"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/judge-verma.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा की ओर से दायर उस रिट याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने न्यायाधीश (जांच) अधिनियम, 1968 के तहत जांच समिति गठित करने के लोकसभा अध्यक्ष के फैसले को चुनौती दी थी।</p>
<p>यह निर्णय न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने सुनाया। उल्लेखनीय है कि न्यायमूर्ति वर्मा के आधिकारिक आवास पर कथित तौर पर बेहिसाब नकदी मिलने के बाद उनके खिलाफ शुरू किए गए महाभियोग प्रस्ताव के संबंध में यह समिति गठित की गई थी।</p>
<p>न्यायमूर्ति वर्मा की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी और लोकसभा सचिवालय का प्रतिनिधित्व कर रहे भारत के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता की दलीलें सुनने के बाद आठ जनवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया गया था।</p>
<p>न्यायमूर्ति वर्मा ने जांच समिति के गठन को इस आधार पर चुनौती दी थी कि महाभियोग नोटिस लोकसभा और राज्यसभा दोनों में एक ही दिन (21 जुलाई) पेश किए गए थे, फिर भी लोकसभा अध्यक्ष ने राज्यसभा सभापति के निर्णय की प्रतीक्षा किए बिना या अनिवार्य संयुक्त परामर्श किए बिना एकतरफा रूप से समिति का गठन कर दिया।</p>
<p>याचिका में तर्क दिया गया कि अपनाई गई प्रक्रिया न्यायाधीश (जांच) अधिनियम, 1968 की धारा 3(2) के विपरीत थी। इसमें धारा 3(2) के प्रावधान का हवाला दिया गया, जो यह निर्धारित करता है कि जहाँ संसद के दोनों सदनों में एक ही दिन प्रस्ताव के नोटिस दिए जाते हैं, वहाँ कोई समिति तब तक गठित नहीं की जाएगी जब तक कि प्रस्ताव दोनों सदनों में स्वीकार न कर लिया जाए और यदि स्वीकार कर लिया जाता है, तो समिति का गठन लोकसभा अध्यक्ष और राज्यसभा के सभापति द्वारा संयुक्त रूप से किया जाना चाहिए।</p>
<p>गौरतलब है कि 21 जुलाई, 2025 को संसद के दोनों सदनों में न्यायमूर्ति वर्मा के महाभियोग की मांग करने वाले अलग-अलग प्रस्ताव पेश किए गए थे। उसी दिन, तत्कालीन राज्यसभा सभापति जगदीप धनखड़ ने अपना इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद, 11 अगस्त को राज्यसभा के उपसभापति ने उच्च सदन में पेश किए गए प्रस्ताव को खारिज कर दिया। एक दिन बाद, 12 अगस्त को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने उच्चतम न्यायालय के न्यायमूर्ति अरविंद कुमार, इलाहाबाद उच्च न्यायालय के मौजूदा मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति एम.एम. श्रीवास्तव और वरिष्ठ अधिवक्ता बी.वी. आचार्य की सदस्यता वाली एक जांच समिति के गठन की घोषणा की।</p>
<p>सुनवाई के दौरान रोहतगी ने तर्क दिया कि चूंकि प्रस्ताव दोनों सदनों में एक साथ पेश किए गए थे, इसलिए जांच समिति केवल अध्यक्ष और सभापति द्वारा संयुक्त रूप से गठित की जा सकती थी। उपसभापति के पास राज्यसभा के प्रस्ताव को खारिज करने का अधिकार नहीं था। सॉलिसिटर जनरल ने दलील दी कि समिति का गठन राज्यसभा के प्रस्ताव के खारिज होने के बाद ही किया गया था। पीठ ने टिप्पणी की कि उपसभापति सभापति की अनुपस्थिति में उनके कार्यों का निर्वहन करने के लिए सक्षम थे।</p>
<p>अदालत ने यह भी सवाल किया कि यदि समिति के गठन में कोई प्रक्रियात्मक कमी मान भी ली जाए, तो इससे न्यायमूर्ति वर्मा को किस तरह का नुकसान हुआ है। निर्णय के आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध होने के बाद और अधिक जानकारी मिल सकेगी। </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 16 Jan 2026 16:14:27 +0530</pubDate>
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                <title>संत विजयदास के आत्मदाह मामले की जांच के लिए भाजपा ने गठित की कमेटी</title>
                                    <description><![CDATA[यह समिति हादसे के स्थल का दौरा कर जानकारी एकत्रित करेगी। रिपोर्ट राष्ट्रीय अध्यक्ष को देगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/bjp-constituted-committee-to-investigation-the--case/article-15872"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-07/6545465.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। अवैध खनन व संत विजयदास के आत्मदाह मामले की जांच के लिए भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश ने 4 सदस्यीय उच्च स्तरीय कमेटी गठित की है। यह समिति हादसे के स्थल का दौरा कर जानकारी एकत्रित करेगी। रिपोर्ट राष्ट्रीय अध्यक्ष को देगी।</p>
<p>इस उच्चस्तरीय समिति में राष्ट्रीय महामंत्री एवं प्रदेश प्रभारी अरुण सिंह, सांसद स्वामी सुमेधानंद सरस्वती, पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं सांसद सत्यपाल सिंह, उत्तर प्रदेश के पूर्व पुलिस महानिदेशक एवं सांसद बृजलाल यादव को शामिल किया गया है, जो हादसे के स्थल का दौरा कर तथ्य एकत्रित करेंगे। राष्ट्रीय अध्यक्ष को रिपोर्ट देंगे। <br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 23 Jul 2022 16:08:49 +0530</pubDate>
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