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                <title>civil lines - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>मुख्यमंत्री ने सिविल सिविल लाइंस स्थित बंगला नंबर 8 में की पूजा अर्चना</title>
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                        <![CDATA[ मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने 4 महीने बाद शुक्रवार को  सिविल लाइंस स्थित बंगला नंबर 8 में विधिवत पूजा अर्चना की। ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/chief-minister-offered-prayers-in-bungalow-no-8-civil-lines/article-76019"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-04/t1rer-(3)1.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने 4 महीने बाद शुक्रवार को  सिविल लाइंस स्थित बंगला नंबर 8 में विधिवत पूजा अर्चना की। मुख्यमंत्री अब किसी भी समय इस बंगले में शिफ्ट हो सकते हैं।</p>
<p>फिलहाल मुख्यमंत्री का जवाहरलाल नेहरू मार्ग स्थित ओटीएस में अस्थाई मुख्यमंत्री निवास बना हुआ है, जहां सीएम पद की शपथ लेने के बाद से वहीं पर रह रहे हैं। सुरक्षा कारणों के चलते मुख्यमंत्री को सहकारी मार्ग स्थित गेस्ट हाउस से ओटीएस में शिफ्ट किया गया था। इसके बाद  से मुख्यमंत्री ओटीएस स्थित आवास में ही रह रहे हैं। पूर्व मुख्यमंत्री के सिविल लाइंस बंगला नंबर 8 खाली करने में हुई देरी के कारण मुख्यमंत्री इस बंगले में शिफ्ट नहीं हो सके थे।</p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 26 Apr 2024 19:11:10 +0530</pubDate>
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                <title>सीएम शर्मा को बंगला नंबर 8 का इंतजार</title>
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                        <![CDATA[अब उन पूर्व मंत्रियों को नोटिस की तैयारी, जिन्होंने खाली नहीं किए सरकारी आवास ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/cm-sharma-is-waiting-for-bungalow-number-8/article-71239"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-02/photo-(2)27.png" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">जयपुर। सिविल लाइंस स्थित बंगला नंबर आठ में अभी मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा शिफ्ट नहीं हुए हैं। पूर्व सीएम अशोक गहलोत ने बंगला खाली करने की शुरुआत तो कर दी है, लेकिन पूरी तरह से खाली नहीं हुआ है। ऐसे में मुख्यमंत्री भजनलाल ने अभी ओटीएस में ही अपना अस्थायी आवास बना रखा है, जो अभी कुछ समय वहीं और रह सकते हैं। वैसे तो सरकारी नियमों के तहत मुख्यमंत्री और मंत्रियों के इस्तीफे मंजूर होने के बाद 60 दिन में बंगला खाली करना होता है। बंगला खाली नहीं करने पर हर दिन 10,000 रुपए की पैनल्टी का प्रावधान है। यह नियम 2020 में बना। इससे पहले पांच हजार रुपए प्रतिमाह पैनल्टी थी। </p>
<p style="text-align:justify;">निवर्तमान सीएम व मंत्रियों के लिए बंगला खाली करने की 60 दिवस की अवधि तीन फरवरी को ही समाप्त हो चुकी है। अब सामान्य प्रशासन विभाग उन पूर्व मंत्रियों को नोटिस देने की तैयारी कर रहा है, जिन्होंने अभी तक बंगला खाली नहीं किया है। गहलोत को 49 नंबर का बंगला आवंटित किया गया है, जिसमें पूर्व विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी रह रहे थे। राजस्थान में पहली प्रजातांत्रिक व्यवस्था लागू होने के बाद प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री को यह आवास के तौर पर आवंटित किया गया। उसके बाद से इस बंगले को मुख्यमंत्री के निवास के रूप में ही पहचाना जाने लगा और जो भी मुख्यमंत्री बना, उसका आशियाना भी यहीं बंगला रहा। बंगले में परिस्थितियों के अनुसार नए काम होते रहे है, लेकिन पुराना स्वरूप वैसा ही है।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>शास्त्री-जोशी बंगले में नहीं रहे</strong><br />आजादी से पहले बने बंगला नंबर आठ से जुड़ी कई विचित्र रोचक घटनाएं हैं। इनसे प्रदेश के ज्यादातर लोग अनजान हैं। 1941 में बना यह बंगला राजस्थान के ज्यादातर मुख्यमंत्रियों का आवास रहा, लेकिन हीरालाल शास्त्री बंगले में नहीं रहे। उन्होंने खेजडों का रास्ता चांदपोल स्थित अपने घर को ही सीएम आवास घोषित किया। इस बंगले में पहली बार भाजपा के मुख्यमंत्री भैरोंसिंह शेखावत ने 1977 में रोजा इफ्तार कार्यक्रम किया। 1980 में जगन्नाथ पहाड़िया मुख्यमंत्री बने तो यहां रहे। हरिदेव जोशी मुख्यमंत्री बनने के बाद इस बंगले में नहीं रहे। वे अपने आवास पर ही रहते, लेकिन वे सुबह बंगले में आते और शाम को वापस अपने घर चले जाते। केवल दिन में ही बंगले पर रुकते और दूर-दराज से आए लोगों से इसी बंगले में मिलते थे। गहलोत तीनों बार इसी बंगले में रहे।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>तांत्रिकों के प्रभाव में पहाड़िया के समय 8 नंबर को कर दिया गया था 9 नंबर</strong><br />1980 में जगन्नाथ पहाड़िया के सीएम बनने के दौर में तांत्रिक का प्रभाव था। उस दौरान उन्हें बताया गया कि 3, 6 और 9 नंबर ही शुभ है। 8 नंबर अशुभ है। बगल का बंगला राज्यपाल के पास था। ऐसे में उन्हें सिविल लाइंस के 8 नंबर बंगले में बीच में दीवार लगाकर 9 नंबर करने को कहा गया। इसके चलते बंगले में बीच में दीवार लगा दी गई और बंगले के नंबर 9 कर दिए गए। उसके बाद वे 9 नंबर में रहे। उस दौरान उन्हें यह भी कहा गया कि सरकारी कामकाज के दौरान उनके पैर जमीन पर नहीं टिके। इसका समाधान निकालते हुए अपने ड्राइंग रूम में डैस बोर्ड लगवा दिया ताकि पैर जमीन पर नहीं टिक सके। नौ नंबर बंगले में रहते हुए उन्होंने दिल्ली का कृष्णा मेनन मार्ग पर स्थित 9 नंबर बंगला भी पास ही रखा।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>वसुंधरा दूसरे कार्यकाल में नहीं रही बंगले में</strong><br />वसुंधरा राजे दूसरी बार मुख्यमंत्री बनी तो वे 2013 से 2018 के बीच पांच साल तक इस बंगले में नहीं रहीं। यहां इस दौरान वीरानी छाई रही। तत्कालीन मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने अपने दूसरे कार्यकाल के दौरान पूर्व में आवंटित आवास नंबर 13 को ही उन्होंने सीएम आवास घोषित कर दिया और बंगला नंबर आठ को केवल गेस्ट हाउस के तौर पर रखा। वे अब भी इसी बंगले में रहती हैं।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>नियमानुसार कार्रवाई करेंगे, पैनल्टी वसूलेंगे</strong><br />आवास आवंटन के नियमों के तहत 60 दिन तक खाली करने की छूट हैं, उसके बाद पैनल्टी देय है। अभी जो बंगले खाली नहीं हुए हैं, उन्हें नियमानुसार नोटिस दिया जाएगा।<br /><strong>-मनमोहन गौड़, शासन उप सचिव, जीएडी</strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 27 Feb 2024 09:45:30 +0530</pubDate>
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                <title>भाजपा की पांचवी लिस्ट में सिविल लाइन और किशनपोल विधानसभा से चौंकाने वाले नाम, कोलायत से देवी सिंह भाटी की बहू का टिकट बदला</title>
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                        <![CDATA[भारतीय जनता पार्टी ने रविवार की दोपहर राजस्थान के 15 और प्रत्याशियों की सूची जारी की है। वही एक पूर्व घोषित कोलायत के प्रत्याशी को बदल गया है।]]>
                    </description>
                
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/in-the-fifth-list-of-bjp-the-ticket-of-devi/article-61386"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-11/bjp-(2)1.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। भारतीय जनता पार्टी ने रविवार की दोपहर राजस्थान के 15 और प्रत्याशियों की सूची जारी की है। वही एक पूर्व घोषित कोलायत के प्रत्याशी को बदल गया है। ऐसे में भाजपा के अब प्रदेश में 200 में से 197 उम्मीदवार मैदान में आ चुके हैं। तीन और सीटों पर प्रत्याशी तय होना बाकी है। जयपुर की जिन तीन सीटों पर भाजपा में नाम तय नहीं हो पा रहा था, उन तीनों सीटो पर भाजपा ने अब प्रत्याशी उतार दिए हैं।</p>
<p>आदर्श नगर विधानसभा क्षेत्र से पहले से ही पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अशोक परनामी का नाम काटकर टिकट रवि नय्यर को मिलने की चर्चाएं थी, वैसा ही हुआ है। पार्टी ने रवि नय्यर को यहां से अपना प्रत्याशी बनाया है। प्रणामी वसुंधरा राजे कैंप के बड़े सिपेहसालार माने जाते हैं। वही किशनपोल और सिविल लाइन विधानसभा क्षेत्र से भाजपा में ऐसे प्रत्याशियों को टिकट दिया है, जो दावेदारी की रेस में शामिल ही नहीं थे।</p>
<p>सांगानेर से टिकट मांग रहे गोपाल शर्मा को सिविल लाइन विधानसभा क्षेत्र में प्रत्याशी बनाया गया है। वहीं किशनपोल विधानसभा क्षेत्र में पूर्णतः नए चेहरे चंद्र मोहन बटवाड़ा को टिकट दिया गया है। हाल ही में कांग्रेस से भाजपा में आए ज्योति खंडेलवाल और सुरेश मिश्रा को कहीं से भी टिकट नहीं मिला है। हालांकि माना जा रहा था कि ज्योति को पार्टी ने किशनपोल विधानसभा से टिकट देना लगभग तय कर लिया है लेकिन अब उनका नाम काट दिया गया है। इसी तरह बीकानेर की कोलायत विधानसभा सीट से पहले पूर्व मंत्री देवी सिंह भाटी की बहू पूनम सिंह कर को टिकट दिया गया था। लेकिन अब उनका टिकट निरस्त करके उनकी जगह अंशुमान सिंह भाटी को प्रत्याशी बनाया गया है। इसके अलावा हनुमानगढ़ से अमित चौधरी, सरदारशहर से पूर्व मंत्री राजकुमार रिणवा, शाहपुरा से चौंकाते हुए पार्टी ने बेरोजगार संघर्ष समिति के नेता उपेन यादव, भरतपुर से विजय बंसल, राजाखेड़ा से नीरजा अशोक शर्मा, मसूदा से अभिषेक सिंह, शेरगढ़ से बाबू सिंह राठौड़, मावली से डॉ केजी पालीवाल, पीपल्दा से प्रेमचंद गोचर, कोटा उत्तर से प्रहलाद गुंजल और बारां अटरू से राधेश्याम बेरवा को भाजपा ने अपना प्रत्याशी बनाया है।</p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                            <category>राजस्थान विधानसभा चुनाव 2023</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 05 Nov 2023 14:14:13 +0530</pubDate>
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                <title>आज भी हर मापदण्डों पर खरा 80 साल पुराना सीएमआर </title>
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                        <![CDATA[ 1980 में जगन्नाथ पहाड़िया के सीएम बनने के दौर में तांत्रिक का प्रभाव था। उस दौरान उन्हें बताया गया कि 3,6 और 9 नंबर ही शुभ है। 8 नंबर अशुभ है। बगल का बंगला राज्यपाल के पास था, ऐसे में उन्हें सिविल लाइंस के 8 नंबर बंगले में बीच में दीवार लगाकर 9 नंबर करने को कहा गया। ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/even-today-80-years-old-cmr-true-to-every-parameter/article-20093"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-08/p-44.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। आजादी से पहले बने सिविल लाइंस के बंगला नंबर आठ को लेकर कई विचित्र रोचक घटनाए है। इनसे प्रदेश के ज्यादातर लोग अनजान है। 1941 में बना यह बंगला राजस्थान के ज्यादातर मुख्यमंत्री का निवास रहा, लेकिन हीरालाल शास्त्री बंगले में नहीं रहे। उन्होंने अपने खेजडों का रास्ता चांदपोल स्थित घर को ही सीएम आवास घोषित किया। इस बंगले में पहली बार भाजपा के मुख्यमंत्री भैरोंसिंह शेखावत ने 1977 में रोजा इफ्तार कार्यक्रम किया। 1980 में जगन्नाथ पहाड़िया ने आठ नंबर के प्रभाव में इस बंगले में दीवार लगाकर 9 नंबर कर दिया और उसी में रहे। मौजूदा परिस्थितियों के चलते देश में संसद भवन और राज्य में विधानसभा भवन की इमारतें भले ही नई तैयार कर दी गई हो, लेकिन सिविल लाइंस का बंगला नंबर आठ आज भी वर्तमान हालातों को देखते हुए आवश्यकताओं की पूर्ति करने में खरा साबित हो रहा है।<br /><br />आजादी के पहले बने इस बंगले का निर्माण अंग्रेजी हुकुमतों के दौरान किया गया था, लेकिन उस समय यह तय नहीं था कि इस बंगले का भविष्य में क्या उपयोग होगा? देश के आजाद होने के बाद राजस्थान में पहली प्रजातांत्रिक व्यवस्था लागू होने के बाद प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री को यह आवास के तौर पर आवंटित किया गया। उसके बाद से इस बंगले को मुख्यमंत्री के निवास के रूप में ही पहचाना जाने लगा और जो भी मुख्यमंत्री बना, उसका आसियाना भी यहीं बंगला रहा। बंगले में परिस्थितियों के अनुसार नए काम होते रहे है, लेकिन पुराना स्वरूप वैसा ही है।</p>
<p><strong>पैर जमीन पर नहीं टिके पहाड़िया ने वैसा ही किया<br /></strong>1980 में जगन्नाथ पहाड़िया के सीएम बनने के दौर में तांत्रिक का प्रभाव था। उस दौरान उन्हें बताया गया कि 3,6 और 9 नंबर ही शुभ है। 8 नंबर अशुभ है। बगल का बंगला राज्यपाल के पास था, ऐसे में उन्हें सिविल लाइंस के 8 नंबर बंगले में बीच में दीवार लगाकर 9 नंबर करने को कहा गया। इसके चलते बंगले में बीच में दीवार लगा दी गई और बंगले के नंबर 9 कर दिए गए। उसके बाद वे 9 नंबर में रहे। उस दौरान उन्हें यह भी कहा गया कि सरकारी कामकाज के दौरान उनके पैर जमीन पर नहीं टिके। इसका समाधान निकालते हुए अपने ड्राइंग रूम में डैस बोर्ड लगवा दिया ताकि पैर जमीन पर नहीं टिक सके। नौ नंबर बंगले में रहते हुए उन्होंने दिल्ली का कृष्णा मेनन मार्ग पर स्थित 9 नंबर बंगला भी अपने पास ही रखा।</p>
<p><strong>सुबह आते शाम को चले जाते<br /></strong>कुछ इसी तरह हरदेव जोशी भी मुख्यमंत्री बनने के बाद इस बंगले में नहीं रहे, लेकिन वे सुबह बंगले में आते और शाम को वापस अजमेर रोड स्थित अपने घर चले जाते। केवल दिन में ही बंगले पर रूकते थे। इसी तरह टीकाराम पालीवाल भी मंत्री और मुख्यमंत्री रहते हुए भी बंगले में नहीं रहे। वे न्यू कॉलोनी में कालाडेरा के एक सेठ के मकान में ही रहे वे इस बंगले में नहीं रहे।</p>
<p><strong>परिंदा भी पैर नहीं मार सकता<br /></strong>बंगले की सुरक्षा इस तरह चाक चौबंद है कि कोई भी परिंदा पैर नहीं मार सकता। सिविल लाइंस क्षेत्र में हमेशा धारा 144 लगी रहती है। मुख्यमंत्री आवास की सुरक्षा को लेकर चारों तरफ से शिफ्ट वाइज सुरक्षाकर्मी तैनात रहते है। बिना अनुमति के कोई भी अंदर नहीं जा सकता।</p>
<p><strong>पांच साल रहा वीरान<br /></strong>बंगले में पहले मुख्यमंत्री का आवास होने के बाद करीब 70 साल के इतिहास में हमेशा आबाद रहा, लेकिन पांच साल इस बंगले के लिए ऐसे निकले कि विरानी छाई रही। अर्थात मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने अपने दूसरे कार्यकाल के दौरान पूर्व में आवंटित आवास नंबर 13 को ही उन्होंने सीएम आवास घोषित कर दिया और बंगला नंबर आठ को केवल गेस्ट हाउस के तौर पर रखा। इसके अलावा हमेशा यह बंगला आबाद रहा।</p>
<p><strong>चारों तरफ से सुरक्षा<br /></strong>वैसे तो इस बंगले के बगल में राजभवन होने के कारण सुरक्षा वैसे ही पुख्ता रहती है, लेकिन पीछे और बगल में दूसरी तरफ निजी संपत्तियों के चलते भी सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम है। दिनभर सुरक्षाकर्मी अत्याधुनिक हथियारों के साथ हर पल हर तरह की गतिविधियों पर नजर रखें रहते हैं।</p>
<p><strong>बंगले का रिकॉर्ड भी लुप्त<br /></strong>वैसे तो सरकारी जमीन से लेकर सरकारी भवन का रिकॉर्ड कई सालों तक मौजूद रहता है, लेकिन बंगला नंबर आठ का रिकॉर्ड अब धीरे-धीरे लुप्त सा होने लगा है। जीएडी से लेकर पीडब्ल्यूडी तक इस बंगले के निर्माण का उद्देश्य फाइलों से गायब है। </p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
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                <pubDate>Tue, 23 Aug 2022 12:42:02 +0530</pubDate>
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                <title>असर खबर का - सिविल लाइंस में नाले की सफाई कर पानी की निकासी</title>
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                        <![CDATA[दैनिक नवज्योति की खबर का असर रविवार को बरसात वाली खबर में फोटो सहित प्रकाशित की थी।  जिसमें लिखा था कि सिविल लाइंस में भी पानी निकासी की व्यवस्था न होने से बरसात का पानी भर गया है। रविवार को नगर निगम की ओर से जेसीबी और उनके कर्मचारी आए  उन्होंने नाले की सफाई कर पानी की निकासी की। 
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/drainage-of-water-by-cleaning-the-drain-in-civil-lines/article-16079"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-07/asar-khaber-ka--civil-lines-mei-pani-ki-nikasi-kota-news-25.7.2022.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। सिविल लाइंस में नगर निगम ने जेसीबी से नाले की सफाई गहरा कर पानी की निकासी की व्यवस्था की । दैनिक नवज्योति की खबर का असर रविवार को बरसात वाली खबर में फोटो सहित प्रकाशित की थी।  जिसमें लिखा था कि सिविल लाइंस में भी पानी निकासी की व्यवस्था न होने से बरसात का पानी भर गया है।  स्थानीय लोगों ने बताया कि रविवार को नगर निगम की ओर से जेसीबी और उनके कर्मचारी आए थे उन्होंने नाले की सफाई और उसे गहरा कर पाइप डालकर पानी की निकासी की व्यवस्था की जिससे स्थानीय लोगों को राहत मिली है।</p>]]>
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                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 25 Jul 2022 13:15:55 +0530</pubDate>
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