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                <title>Jainism - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>महावीर जयंती: प्रधानमंत्री मोदी ने दी देशवासियों को महावीर जयंती की शुभकामनाएं, बोले-भगवान महावीर के महान विचार सदैव मानवता के पथ-प्रदर्शक बने रहेंगे </title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने महावीर जयंती के पावन अवसर पर देशवासियों को बधाई दी। उन्होंने भगवान महावीर की शिक्षाओं—सत्य, अहिंसा और करुणा—को मानवता का पथ-प्रदर्शक बताया। पीएम ने जोर दिया कि समानता और दया पर आधारित उनके आदर्श आज की वैश्विक चुनौतियों से निपटने और आध्यात्मिक उत्थान के लिए अत्यंत प्रासंगिक हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/prime-minister-modi-wished-the-countrymen-on-mahavir-jayanti-and/article-148521"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/pm-modi3.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को भगवान महावीर जन्म कल्याणक के पवित्र अवसर पर देशवासियों को शुभकामनाएं दीं और कहा कि सत्य, सद्भाव, सद्व्यवहार और समानता पर आधारित भगवान महावीर के संदेशों में अद्भुत प्रेरणा है और उनके महान विचार सदैव मानवता के पथ-प्रदर्शक बने रहेंगे। ‎पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट किए गए एक संदेश में कहा, "भगवान महावीर जन्म कल्याणक के पवित्र अवसर पर आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं। भगवान महावीर का जीवन और उनकी शिक्षाएं सत्य, अहिंसा और करुणा के मार्ग को निरंतर प्रकाशित करती रहेंगी।"</p>
<p>उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि महावीर के सिद्धांत न केवल आध्यात्मिक रूप से समृद्ध करने वाले हैं, बल्कि आज के ज़माने की चुनौतियों से निपटने में भी उनका गहरा महत्व है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, भगवान महावीर के आदर्श आध्यात्मिक रूप से उत्थान करने वाले हैं और आज की दुनिया में भी उनका गहरा महत्व है और साथ ही यह भी कहा कि समानता और दया पर दिया गया ज़ोर हमारी सामूहिक ज़िम्मेदारी की याद दिलाता है।</p>
<p>उन्होंने लिखा, "समानता और दया पर उनका ज़ोर हमें समाज के प्रति हमारी साझा ज़िम्मेदारी की याद दिलाता है।" ‎गौरतलब है कि, महावीर जयंती, जैन समुदाय के सबसे महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक है। यह जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर की जन्म वर्षगांठ के रूप में मनाई जाती है। इस दिन पूरे देश में भक्ति और श्रद्धा के साथ मनाए जाने वाले इस अवसर पर आमतौर पर प्रार्थनाएं, शोभायात्राएं, दान-पुण्य के कार्य और महावीर की शिक्षाओं पर चिंतन शामिल होता है।‎</p>
<p>भगवान महावीर का जन्म 6वीं शताब्दी ईसा पूर्व हुआ था, उनको जैन दर्शन को आकार देने वाली एक प्रमुख हस्ती माना जाता है। उनकी शिक्षाएं 'अहिंसा','अपरिग्रह' और 'अनेकांतवाद' पर केंद्रित थीं-ये ऐसे सिद्धांत हैं जो दुनिया भर में नैतिक और आध्यात्मिक विचारों को आज भी प्रभावित करते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 31 Mar 2026 14:02:56 +0530</pubDate>
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                <title>भगवान महावीर के संदेश 'जीओ और जीने दो' को करेगें सार्थक: राजस्थान जैन सभा के तत्वावधान में मार्च माह में 108 स्थानों पर लगेगें स्वैच्छिक रक्तदान शिविर, 2625 यूनिट रक्त एकत्रित करने का लक्ष्य</title>
                                    <description><![CDATA[भगवान महावीर के 2625वें जन्म कल्याणक पर राजस्थान जैन सभा 108 रक्तदान शिविर आयोजित करेगी। मार्च के प्रत्येक रविवार को आयोजित इन शिविरों में 2625 यूनिट रक्त संग्रह का लक्ष्य है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/lord-mahavirs-message-live-and-let-live-will-be-meaningful/article-143538"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/jaipur.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। जैन समाज का एक मात्र प्रादेशिक पंजीकृत प्रतिनिधि संगठन राजस्थान जैन सभा जयपुर के तत्वावधान में भगवान महावीर के 2625 वें जन्म कल्याणक महोत्सव (जन्म जयंती समारोह ) के अवसर पर  मानव सेवार्थ, धार्मिक एवं सामाजिक सेवा के कई कार्यक्रम किए जाएँगे। भगवान महावीर के 'जीओ और जीने दो' के सिद्धांत को सार्थक करने के लिए मार्च माह के प्रत्येक रविवार को- 01 मार्च से रविवार 29 मार्च के दौरान 108 स्थानों पर स्वैच्छिक रक्त शिविर आयोजित किए जाएंगे।</p>
<p>सभा के अध्यक्ष सुभाष चन्द जैन एवं महामंत्री मनीष बैद ने बताया कि भगवान महावीर का 2625 वां जन्म कल्याणक महोत्सव के दौरान मानव सेवार्थ 108 स्थानों पर आयोजित होने वाले रक्तदान शिविरों में 2625 युनिट रक्त एकत्रित करने का लक्ष्य रखा गया है। </p>
<p>एकत्रित रक्त को जरुरतमंद रोगियों को नि:शुल्क उपलब्ध करवाया जाएगा। इन रक्तदान शिविरों के बहुरंगीय पोस्टर का विमोचन एक सादा समारोह में दिगम्बर जैन अतिशय क्षेत्र श्री महावीर जी के अध्यक्ष सुधान्शु कासलीवाल ने किया। इस मौके पर सभा के अध्यक्ष सुभाष चन्द जैन, वरिष्ठ उपाध्यक्ष प्रदीप जैन, उपाध्यक्ष विनोद जैन कोटखावदा, महामंत्री मनीष बैद, रक्त दान शिविर मुख्य संयोजक राजीव पा सहित बडी संख्या में गणमान्य लोग शामिल हुए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 17 Feb 2026 15:51:19 +0530</pubDate>
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                <title>जैन धर्म की कठिन तपस्या का एक अनिवार्य हिस्सा और मूलगुण है केशलोच: मुनि अनुमान सागर</title>
                                    <description><![CDATA[जैन संत का केशलोंच कार्यक्रम कई बार तो पहले से ही निर्धारित होता है, लेकिन कई साधु इसे आकस्मिक भी करते हैं। साधु संत के केशलोंच कार्यक्रम को देखने के लिए दूर दूर से श्रद्धालु पहुंचते हैं। जैन साधु सिर, दाढ़ी व मूंछ के बालों को निकालते समय कंडे की राख का उपयोग करते हैं ताकि खून निकलने पर रोग न फैले।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/tonk/keshalocha-is-an-essential-part-and-fundamental-of-the-hard-penance-of-jainism--muni-anjan-sagar/article-16082"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-07/tonk-21.jpg" alt=""></a><br /><p>टोडारायसिंह। जैन धर्म की कठिन तपस्या का एक अनिवार्य हिस्सा और मूलगुण है केशलोंच। जैन साधु अपने आत्मसौंदर्य को बढ़ाने के लिए कठिन साधना करते हैं। जैन संत जब अपने हाथों से घास- फूस की तरह सिर, दाढ़ी व मूंछ के बाल को आसानी से उखाड़ देते हैं तो यह पल देखते ही कई श्रद्धालु भाव विभोर हो जाते हैं। इस कठिन तपस्या के जरिए जैन साधु में शरीर की सुंदरता का मोह खत्म हो जाता है।</p>
<p><br />यह बात मुनि अनुमान सागर केशलोच के वक्त प्रवचन मे कही। उन्होंने कहा कि जैन साधु जब केशलोंच करते है तो आत्मा की सुंदरता कई गुना बढ़ जाती है। यहीं से संत का संतत्व निखरकर कुंदन बनता है। ऐसा नहीं है कि अपने हाथों से सिर के बाल, मूंछ और दाढ़ी के बाल तोड़ना एक बार की विधि हो। साल में तीन से चार बार केशलोंच की परम्परा होती है। जैन संत अहिंसा व्रतों के पालन के साथ ही शरीर से राग भाव को भी हटाते है। दिगंबर जैन संत एक केशलोंच करने के बाद दूसरा केशलोंच दो माह व अधिकतम चार माह में करते हैं। यानी केश के बड़े होते ही वह लोंच कर देते हैं। जैन संतों की तपस्या का यह अनिवार्य हिस्सा है।</p>
<p>दीक्षा लेने के बाद हर साधु को इस कठिन तपस्या से गुजरना होता है। केशलोंच करने के पीछे एक कारण यह भी है कि साधु किसी पर अवलंबित नहीं होते हैं। वह स्वावलंबी होते है। साधु शरीर की सुंदरता को नष्ट करने और अहिंसा धर्म का पालन करने के लिए केशलोंच करते है। लेकिन जब यह केशलोंच करते है तो इनके चेहरे पर मुस्कुराहट देखने को मिलती है। वहीं दूसरी तरफ श्रद्धालुओं का चेहरा भाव विभोर हो जाता है। बालों को उखाड़ते समय संत को उफ तक करने की इजाजत नहीं है। जैन संत का केशलोंच कार्यक्रम कई बार तो पहले से ही निर्धारित होता है, लेकिन कई साधु इसे आकस्मिक भी करते हैं। साधु संत के केशलोंच कार्यक्रम को देखने के लिए दूर दूर से श्रद्धालु पहुंचते हैं। जैन साधु सिर, दाढ़ी व मूंछ के बालों को निकालते समय कंडे की राख का उपयोग करते हैं ताकि खून निकलने पर रोग न फैले। पसीने के दौरान हाथ फिसल न जाए। केशलोंच करने के दौरान बालों को हाथों से खींचकर निकाला जाता है। अपने हाथों से बालों को उखाड़कर दिगंबर जैन संत इस बात का परिचय देते हैं कि जैन धर्म कहने का नहीं, सहने का धर्म है। बालों को उखाड़ने से बालों में होने वाले जीवों का जो घात हुआ है। उन्हें जो कष्ट हुआ है, उसका प्रायश्चित भी संत करते हैं। आचार्य, उपाध्याय व साधु केशलोंच के दिन उपवास रहते हैं। इस दिन अन्न व जल का ग्रहण नहीं करते हैं। कई साधु केशलोंच के दिन मौन भी रखते हैं। जैन समाज प्रवक्ता मुकुल जैन ने बताया कि इस अवसर पर जैन समाज  अध्यक्ष संत कुमार जैन, पंडित संजीव कासलीवाल, धनराज जैन, अविनाश बाकलीवाल, जंबू जैन, मोनु जैन, चिराग, रजत, इगू, पिगू, अमन जैन, आर्जव वेद, सहित हजारों की संख्या मे महिला पुरुषों ने भाग लिया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>टोंक</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 25 Jul 2022 13:34:10 +0530</pubDate>
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