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                <title>US Federal Reserve - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>US Federal Reserve RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने ब्याज दरों का दायरा बढ़ाया, ट्रंप की मांग के खिलाफ किया फैसला </title>
                                    <description><![CDATA[अमरीकी फेडरल रिजर्व ने उच्च मुद्रास्फीति पर लगाम लगाने के लिए नीतिगत ब्याज दरों में 0.25% की बढ़ोतरी कर इसे 3.75% से 4% के बीच कर दिया है। राष्ट्रपति ट्रंप की दरें घटाने की मांग के विपरीत फेड के सभी 12 सदस्यों ने सर्वसम्मति से यह फैसला लिया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/us-federal-reserve-increased-the-range-of-interest-rates-decided/article-165812"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-09/111200-x-600-px)-(1)57.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने "लंबे समय से ऊंची मुद्रास्फीति" को देखते हुए नीतिगत ब्याज दरों के दायरे में 0.25 प्रतिशत की वृद्धि कर दी है। फेड की दो दिवसीय बैठक के बाद बुधवार को जारी बयान में बताया गया है कि संघीय मुक्त बाजार समिति (एफओएमसी) के सभी 12 सदस्यों ने ब्याज दरें एक-चौथाई प्रतिशत बढ़ाकर इसे 3.75 प्रतिशत से चार प्रतिशत के बीच करने के पक्ष में मतदान किया। नयी दरें 17 सितंबर से लागू होंगी।</p>
<p>साल 2023 के बाद फेड ने पहली बार ब्याज दरें बढ़ाई हैं। इससे पहले ब्याज दरों का दायरा 3.50 प्रतिशत से 3.75 प्रतिशत के बीच था। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लंबे समय से फेड से ब्याज दरों में कटौती की मांग कर रहे हैं, लेकिन फेड ने सर्वसम्मति से उनकी मांग के खिलाफ फैसला किया है। फेड के फैसले के बाद ट्रंप ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में उससे ब्याज दरों में कटौती की मांग की है, और जल्दी ऐसा करने की नसीहत दी है।</p>
<p>फेडरल रिजर्व के चेयरमैन केविन वॉर्श ने बाद में संवाददाताओं से कहा कि फेड ने गंभीर फैसला किया है, लेकिन यह जरूरी था। उन्होंने कहा, "बिल्कुल कोरा तथ्य यह है कि मुद्रास्फीति काफी ऊंची है, और यह लंबे समय से है।" फेड के बयान में कहा गया है कि मुद्रास्फीति की दर ऊंची बनी हुई है। आज (बुधवार) के फैसले से इसे समिति के दो प्रतिशत के लक्ष्य की तरफ वापस लाने में मदद मिलेगी।</p>
<p>ब्याज दर बढ़ाने के फैसले के बाद अमेरिकी शेयर बाजारों में गिरावट देखी गई। डाउ जोन्स 1.21 प्रतिशत और एसएंडपी 500 सूचकांक 0.45 प्रतिशत गिर गया। अमेरिका में खुदरा मुद्रास्फीति की दर कोरोना काल के बाद इस साल पहली बार तीन प्रतिशत से ऊपर रहने की पूरी संभावना है। यह साल 2024 में 2.6 प्रतिशत और 2025 में 2.8 प्रतिशत रही थी। फेड ने इसके इस साल 3.7 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है। उसने जून में इसके 3.6 फीसदी पर रहने की संभावना व्यक्त की थी।</p>
<p>फेड के आर्थिक अनुमानों में साल 2026 के लिए सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में वृद्धि का अनुमान 2.2 प्रतिशत से बढ़ाकर 2.3 प्रतिशत और बेरोजगारी दर का अनुमान 4.3 प्रतिशत से घटाकर 4.1 प्रतिशत कर दिया गया है। इन दोनों मोर्चों पर सुधार दिख रहा है, लेकिन महंगाई अब भी चिंता का कारण बनी हुई है। फेड ने अपने बयान में भू-राजनैतिक अनिश्चितता को लेकर भी चिंता जताई है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>बिजनेस</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 17 Sep 2026 11:30:43 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>शेयर बाजार में इस सप्ताह भी दबाव के आसार, कच्चा तेल-फेड का बयान और महंगाई आंकड़े तय करेंगे बाजार की दिशा</title>
                                    <description><![CDATA[पिछले सप्ताह गिरावट झेलने के बाद घरेलू शेयर बाजारों में आने वाले सप्ताह के दौरान कच्चे तेल की कीमतों, अमेरिकी फेडरल रिजर्व की बैठक और खुदरा व थोक महंगाई आंकड़ों पर प्रमुख नजर रहेगी। कच्चे तेल की तेजी और चौतरफा बिकवाली से सेंसेक्स 1,733 अंक तथा निफ्टी 499 अंक टूटा था।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/business/crude-oil-is-expected-to-be-under-pressure-in-the/article-165501"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/share-market4.png" alt=""></a><br /><p>मुंबई। घरेलू शेयर बाजारों में पिछले सप्ताह रही गिरावट के बाद आने वाले सप्ताह में कच्चे तेल के अलावा निवेशकों की निगाह अमेरिकी फेडरल रिजर्व के बयान और महंगाई के घरेलू आंकड़ों पर रहेगी। कच्चे तेल में बीते सप्ताह रही बड़ी तेजी के कारण शेयर बाजारों में गिरावट देखने को मिली। इस सप्ताह भी यह बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगा। इसके अलावा, फेड की मुक्त बाजार समिति की बैठक 15 और 16 सितंबर को होने वाली है। इसका असर दुनिया के दूसरे देशों के साथ भारतीय शेयर बाजारों पर भी होगा।</p>
<p>घरेलू स्तर पर खुदरा और थोक महंगाई के आंकड़े भी इसी सप्ताह आने वाले हैं। इस पर भी निवेशकों की नजर होगी। बीते सप्ताह बाजार में चौतरफा बिकवाली रही। बीएसई का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 1,733.67 अंक (2.27 प्रतिशत) की साप्ताहिक गिरावट के साथ शुक्रवार को 74,781.76 अंक पर बंद हुआ। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी-50 सूचकांक भी सप्ताह के दौरान 499.60 अंक यानी 2.09 प्रतिशत टूटकर 23,398.10 अंक पर आ गया। प्रमुख सूचकांकों के मुकाबले वृहत बाजार में दबाव कम रहा। निफ्टी मिडकैप-50 सूचकांक 1.09 फीसदी और स्मॉलकैप-100 सूचकांक 0.94 फीसदी लुढ़क गया।</p>
<p>सेंसेक्स की 30 कंपनियों में 25 में गत सप्ताह गिरावट रही। इंफोसिस को सबसे अधिक 8.12 प्रतिशत का नुकसान हुआ। एचसीएल टेक्नोलॉजीज का शेयर 6.72 फीसदी, रिलायंस इंडस्ट्रीज का 4.84, टीसीएस का 4.30, टेक महिंद्रा का 3.30, टाटा स्टील का 3.25, अल्ट्राटेक सीमेंट का 3.10 और आईसीआईसीआई बैंक का 3.08 प्रतिशत लुढ़क गया। आलोच्य सप्ताह में सन फार्मा का शेयर तीन प्रतिशत, बजाज फिनसर्व का 2.72 प्रतिशत, बजाज फाइनेंस का 2.48, एशियन पेंट्स और मारुति सुजुकी का 2.28 और हिंदुस्तान यूनीलिवर का 2.03 प्रतिशत टूटा।</p>
<p>भारतीय स्टेट बैंक का शेयर 1.97 प्रतिशत, महिंद्रा एंड महिंद्रा का 1.54, आईटीसी का 1.46, कोटक महिंद्रा बैंक का 1.45, ट्रेंट का 1.43 और एलएंडटी का 1.29 प्रतिशत नीचे बंद हुआ। एचडीएफसी बैंक का शेयर 0.72 प्रतिशत, भारती एयरटेल का 0.54, इंडिगो का 0.12 और टाइटन का 0.10 प्रतिशत गिर गया। अडानी पोर्ट्स का शेयर सबसे अधिक 3.28 फीसदी चढ़ा। पावरग्रिड में 1.17 प्रतिशत, एनटीपीसी में 0.21 और बीईएल में 0.07 प्रतिशत की तेजी रही।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 13 Sep 2026 10:33:17 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने रेपो रेट में नहीं की कोई कमी: तेल की कीमतों और मिडिल ईस्ट तनाव ने बढ़ाई चिंता, शेयर बाजार हुए लाल</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने महंगाई और पश्चिम एशिया संकट के बीच रेपो दरों को 3.5% से 3.75% पर स्थिर रखने का निर्णय लिया है। जेरोम पॉवेल ने स्पष्ट किया कि मुद्रास्फीति अब भी लक्ष्य से ऊपर है। इस फैसले से बाजार की कटौती की उम्मीदें टूट गईं, जिससे अमेरिकी शेयर बाजार 1.5% तक लुढ़क गए।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/us-federal-reserve-did-not-reduce-repo-rate-oil-prices/article-147000"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/repo-rate.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। पश्चिम एशिया संकट से उपजी वैश्विक अनिश्चितता और कच्चे तेल की कीमतों में आये भारी उछाल के बीच अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने बाजार की उम्मीद के विपरीत रेपो दरों में कोई कटौती नहीं की है। फेड की दो दिन चली बैठक के बाद बुधवार को जारी बयान में कहा गया है कि अर्थव्यवस्था की वृद्धि मजबूत बनी हुई है, लेकिन हाल के महीनों में नये रोजगार की रफ्तार सुस्त रही है और मुद्रास्फीति बढ़ी हुई है। साथ ही पश्चिम एशिया के घटनाक्रम के अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर प्रभाव में भी अनिश्चितता है।</p>
<p>अमेरिकी केंद्रीय बैंक ने बताया कि समिति ने दरों को 3.5 से 3.75 प्रतिशत के बीच स्थिर रखने का फैसला किया है। समिति के 12 में से 11 सदस्यों ने फैसले के पक्ष में वोट दिया जबकि स्टिफन माइरन एक-चौथाई प्रतिशत की कटौती के पक्ष में थे। बयान में कहा गया है कि फेड का लक्ष्य रोजगार को अधिकतम करना और महंगाई दर को दो प्रतिशत पर रखना है।</p>
<p>संवाददाताओं से बात करते हुए फेड के अध्यक्ष जेरोम पॉवेल ने कहा कि इस समय बेरोजगारी दर दीर्घावधि औसत के आसपास है और मुद्रास्फीति उससे एक प्रतिशत ऊपर है। उन्होंने कहा मुद्रास्फीति में जितनी कमी का अनुमान था उतनी देखने को नहीं मिली है। अनिश्चितताओं के बावजूद फेड के भविष्य के अनुमानों में इस साल चौथाई प्रतिशत कटौती की संभावना जतायी गयी है। हालांकि, महंगाई का अनुमान पहले की तुलना में बढ़ा दिया गया है।</p>
<p>रेपो दरों को स्थिर रखने का अमेरिकी केंद्रीय बैंक का फैसला शेयर बाजारों को रास नहीं आया। बाजार दरों में कटौती की उम्मीद लगाये बैठा था। फेड के फैसले के बाद अमेरिकी शेयर बाजार लगभग डेढ़ प्रतिशत टूट गये।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 19 Mar 2026 11:14:45 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अमेरिकी फेडरल रिजर्व के बयान के बाद लुढ़का शेयर बाजार, सेंसेक्स में 179 अंक और निफ्टी में 76 अंक की गिरावट</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों बढ़ोतरी की संभावना से घरेलू शेयर बाजारों में गुरुवार को लगातार दूसरे दिन गिरावट रही। बीएसई का 30 शेयरों वाला संवेदी सूचकांक सेंसेक्स 178.65 अंक लुढ़ककर 52,323.33 अंक और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 76.15 अंक की गिरावट के साथ 15,691.40 अंक पर बंद हुआ।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/business/%E0%A4%85%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%B0%E0%A4%BF%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%AB%E0%A5%87%E0%A4%A1%E0%A4%B0%E0%A4%B2-%E0%A4%B0%E0%A4%BF%E0%A4%9C%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%B5-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%AC%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%A8-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%AC%E0%A4%BE%E0%A4%A6-%E0%A4%B2%E0%A5%81%E0%A4%A2%E0%A4%BC%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%B6%E0%A5%87%E0%A4%AF%E0%A4%B0-%E0%A4%AC%E0%A4%BE%E0%A4%9C%E0%A4%BE%E0%A4%B0--%E0%A4%B8%E0%A5%87%E0%A4%82%E0%A4%B8%E0%A5%87%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B8-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-179-%E0%A4%85%E0%A4%82%E0%A4%95-%E0%A4%94%E0%A4%B0-%E0%A4%A8%E0%A4%BF%E0%A4%AB%E0%A5%8D%E0%A4%9F%E0%A5%80-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-76-%E0%A4%85%E0%A4%82%E0%A4%95-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%97%E0%A4%BF%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%B5%E0%A4%9F/article-773"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-06/000011.jpg" alt=""></a><br /><p>मुंबई। अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों बढ़ोतरी की संभावना से घरेलू शेयर बाजारों में गुरुवार को लगातार दूसरे दिन गिरावट रही। बीएसई का 30 शेयरों वाला संवेदी सूचकांक सेंसेक्स 178.65 अंक लुढ़ककर 52,323.33 अंक और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 76.15 अंक की गिरावट के साथ 15,691.40 अंक पर बंद हुआ। फेड ने वर्ष 2023 तक नीतिगत ब्याज दरों में 0.6 प्रतिशत वृद्धि की संभावना व्यक्त की है। उसने कहा है कि आने वाले समय में श्रम बाजार में सुधार और बेरोजगारी कम होने की उम्मीद है। आईटी, टेक और एफएमसीजी को छोड़कर अन्य क्षेत्र की कंपनियों में बिकवाली हावी रही। इससे मझौली और छोटी कंपनियों पर भी दबाव बना। बीएसई का मिडकैप 1.29 फीसदी लुढ़ककर 22,396.07 अंक पर बंद हुआ। छोटी कंपनियों का सूचकांक स्मॉलकैप भी 0.58 प्रतिशत टूटकर 24,868.93 अंक पर रहा। सेंसेक्स की 30 में से 20 कंपनियों के शेयर लाल निशान और शेष 10 के हरे निशान में रहे।<br /> <br /> विदेशों में अधिकतर शेयर बाजार लाल निशान में रहे। जापान का निक्केई 0.93 प्रतिशत और दक्षिण कोरिया का कोस्पी 0.42 प्रतिशत की गिरावट में बंद हुआ। वहीं, हांगकांग का हैंगसेंग 0.43 प्रतिशत और चीन का शंघाई कंपोजिट 0.21 प्रतिशत की बढ़त में रहा। यूरोप में शुरुआती कारोबार में ब्रिटेन का एफटीएसई 0.49 प्रतिशत और जर्मनी का डैक्स 0.13 प्रतिशत टूट गया। सेंसेक्स 379.73 अंक की बड़ी गिरावट के साथ 52,122.25 अंक पर खुला। आईटी और टेक कंपनियों में लिवाली के दम पर दोपहर से पहले कुछ देर के लिए यह हरे निशान में आया और करीब 22 अंक चढ़कर 52,523.88 अंक पर पहुंच गया। चौतरफा बिकवाली के दबाव में सेंसेक्स एक बार फिर लाल निशान में चला गया और पूरे दिन उबर नहीं सका। दोपहर बाद एक समय यह 52,040.51 अंक तक टूट गया था। अंत में बुधवार के मुकाबले 0.34 फीसदी नीचे 52,323.33 अंक पर बंद हुआ।<br /> <br /> बीएसई में कुल 3,360 कंपनियों के शेयरों में कारोबार हुआ। इनमें 1,383 कंपनियों के शेयर बढ़त के साथ और 1,822 के गिरावट के साथ बंद हुए जबकि शेष 155 कंपनियों के शेयर अपरिवर्तित रहे। निफ्टी की शुरुआत 119.25 अंक की गिरावट के साथ 15,648.30 अंक पर हुई। सेंसेक्स की तरह यह भी सुबह के समय कुछ देर के लिए हरे निशान में आया और 15,769.35 अंक तक पहुँच गया। हालांकि कुछ देर बाद ही एक बार फिर गिरावट में चला गया। दोपहर बाद एक समय निफ्टी 15,616.75 अंक तक टूट गया था। अंत में यह 0.48 प्रतिशत लुढ़ककर 15,691.40 अंक पर बंद हुआ। निफ्टी की 50 से 37 कंपनियों के शेयर टूट गए जबकि शेष 13 के मजबूती के साथ बंद हुए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 17 Jun 2021 17:49:09 +0530</pubDate>
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