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                <title>new building - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>असर खबर का - आयुर्वेद कॉलेज अब तलवंडी में बने नए भवन में शिफ्ट, कलक्टर के हस्तक्षेप से छात्रों की समस्या का किया समाधान</title>
                                    <description><![CDATA[अनुमति के अभाव में कॉलेज को नहीं किया था शिफ्ट । 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/impact-of-the-news---ayurveda-college-is-now-shifted-to-the-new-building-built-in-talwandi--students--problem-solved-with-the-intervention-of-the-collector/article-126753"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-09/11-(1)11.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। तलवंडी में स्थित राजकीय आयुर्वेद योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा महाविद्यालय को आखिरकार पुरानी किराए वाली बिल्डिंग से निजात मिल गई। अब  महाविद्यालय को नये परिसर में शिफ्ट कर दिया गया है। 1 सितंबर से कॉलेज का संचालन नए भवन में शुरू हो चुका है। पुराने भवन पर कॉलेज प्रशासन को हर माह करीब सवा दो लाख रुपए किराए के रूप में चुकाने पड़ रहे थे। वहीं बारिश के दिनों में छात्रों को आवागमन और पढ़ाई दोनों में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था। दैनिक नवज्योति में 3 अगस्त को अध्ययनरत विद्यार्थियों को आने-जाने में हो रही परेशानी शीर्षक से प्रकाशित खबर के बाद कलक्टर पीयूष समारिया ने मामले का संज्ञान लिया। इसके बाद डॉ. नित्यानंद शर्मा के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने कलक्टर से मिलकर छात्रों की समस्याएं रखीं। कलक्टर ने आरएसआरडीसी डायरेक्टर से चर्चा कर कॉलेज के लिए नए भवन में 10 कमरे आवंटित कर दिए। डॉ. नित्यानंद ने बताया कि नए भवन में कुछ कार्य अभी अधूरे हैं, जिन्हें जल्द ही पूरा कर लिया जाएगा। गौरतलब है कि तलवंडी स्थित जिला आयुर्वेद महाविद्यालय का भवन पहले ही तैयार हो चुका था, लेकिन अनुमति के अभाव में कॉलेज को वहां शिफ्ट नहीं किया जा सका। उस दौरान प्राचार्य की ओर से छात्रों की सुविधा को देखते हुए या तो नए भवन में शिफ्ट करने अथवा 10 कमरे उपलब्ध करवाने का प्रस्ताव रखा गया था, जिसे डायरेक्टर अजमेर को भी भेजा गया था।</p>
<p><strong>काउंसलिंग में छात्रों की कोटा पहली च्वॉइस</strong><br />इस महाविद्यालय को 2021 में मान्यता मिली तथा 2022 से बैच लगना शुरू हुआ। काउंसलिंग के दौरान विभिन्न जिलों के छात्र कोटा को ही पहली च्वॉइस रख रहे हैं। इस महाविद्यालय की सीटें 1. बीएएमएस में 60 तथा बीएनवाइएस में 30 सीटें हैं। कुल 90 सीटें हैं, इसमें सेंट्रल की 5 सीटें भी शामिल है। इस महाविद्यालय में हाइरैंक वाले भी अपनी च्वॉइस कोटा रख रहे है। राजस्थान के अधिकांश महाविद्यालय की अपेक्षा कोटा की सीटें जल्द ही भर जाती है। कोटा शिक्षा नगरी के रूप  में विख्यात होने के कारण हाईरैंक वाले भी विद्यार्थी यहां आना पसंद करते है। इस परीक्षा में हजारों की संख्या में छात्र-छात्राएं बैठते है।</p>
<p><strong>150 कर्मचारी रोजाना दे रहे अपनी सेवा</strong><br />इस महाविद्यालय में रोजाना 150 कर्मचारी अपनी सेवा दे रहे है। इस महाविद्यालय में छात्र-छात्राओं को सभी सुविधाएं उपलब्ध करवाई गई है। अभी प्रशासन की ओर से 10 कमरे आवंटन हुए है। जिनमें विद्यार्थियों की पढ़ाई चल रही है। इस नए भवन में सुव्यवस्थित लाइब्रेरी भी है। जिनमें विद्यार्थियों के अध्ययन के लिए ज्ञानवर्धक पुस्तकों का भी समावेश है।</p>
<p><strong>ग्राहक पंचायत ने एडीएम को सौंपा ज्ञापन </strong><br />कोटा। अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत कोटा महानगर ने शुक्रवार को न्यू मेडिकल कॉलेज परिसर में अवैध वाहन पार्किंग के नाम पर हो रही मनमानी वसूली को लेकर प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया। महानगर सचिव एडवोकेट सोनल विजयवर्गीय ने बताया कि पिछले 7 माह में मरीजों व तीमारदारों से पार्किंग के जरिये अवैध वसूली की गई। इस दौरान आमजन के साथ अभद्र व्यवहार की शिकायतें भी सामने आईं। इस संबंध में पंचायत प्रतिनिधिमंडल ने अतिरिक्त  जिला कलक्टर अनिल कुमार सिंघल को ज्ञापन सौंपा। इस पर एडीएम ने शीघ्र ही कार्रवाई का आश्वासन दिया। इस अवसर पर प्रमोद राठौर, खुशाल गुप्ता, ज्ञानेश लोहमी धीरेन्द्र धाकड़, पुष्पलता शामिल रहे। मालवीय, विधि आयाम प्रमुख दिनेश नाथावत, महिला आयाम प्रमुख भावना जैन, श्वेता विजय, कुंज बिहारी, गजेंद्र मेहता, सलोचना गुर्जर, अबरार खान सहित कई एडवोकेट व पदाधिकारी उपस्थित रहे।<br /> <br /><strong>इन छात्राओं ने बताया कोटा को पहली च्वॉइस</strong><br />कोटा को शिक्षा नगरी के रूप में जाना जाता है। यहां आकर पढ़ाई करना मेरे गर्व की बात है। मैंने काउंसलिंग को प्रथम च्वॉइस बताया।<br /><strong>- खुशबू चौधरी, सीकर</strong></p>
<p>शिक्षा के मामले में कोटा क्षेत्र का काफी नाम है। यहां पढ़ाई के साथ माहौल भी अच्छा मिलता है। काउंसलिंग के दौरान मैंने कोटा को ही चुना।<br /><strong>- तान्या चौधरी, जयपुर</strong></p>
<p>मैं छावनी क्षेत्र कोटा की ही रहने वाली हूं। इसलिए मैंने कोटा को ही अपनी पहली च्वॉइस रखा।<br /><strong>- नसरा अली, छावनी</strong></p>
<p>इस महाविद्यालय में नंबर आना मेरे लिए अच्छा है। मैं कोटा क्षेत्र के बंसत विहार में रहती हूं। कम सीटों में भी मेरा चयन हुआ।<br /><strong>- श्रेया औदिच, कोटा</strong></p>
<p><strong>अब बैच नए भवन में संचालित </strong><br /><strong>नवज्योति को दिया धन्यवाद </strong><br />मैं दैनिक नवज्योति को धन्यवाद दे रहा हूं। उन्होंने छात्रों के हितों को ध्यान में रखकर खबर को प्रकाशित किया था। बारिश के दौरान पुरानी बिल्डिंग में सीलन और पानी टपकने से छात्रों की पढ़ाई लगातार प्रभावित हो रही थी। कई बार कॉलेज प्रबंधन को समस्या से अवगत करवाने के बावजूद समाधान नहीं निकल पाया। आखिरकार छात्रों ने 25 अगस्त को कोटा कलक्टर पीयूष समारिया को ज्ञापन सौंपा। कलक्टर ने मामले को गंभीरता से लेते हुए आरएसआरडीसी डायरेक्टर से चर्चा की और कॉलेज के लिए नए भवन में 10 कमरे आवंटित कराए। इसके बाद 1 सितंबर से महाविद्यालय को नए भवन में शिफ्ट कर दिया गया। उन्होंने कहा कि अब बैच नए भवन में संचालित हो रहे हैं और विद्यार्थियों को बेहतर वातावरण मिल रहा है। <br /><strong>- डॉ. नित्यानंद शर्मा, राजकीय आयुर्वेद योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा महाविद्यालय </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 13 Sep 2025 16:24:42 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>असर खबर का - चौमहला सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र को मिला मॉडल अस्पताल का दर्जा  </title>
                                    <description><![CDATA[ दैनिक नवज्योति ने भी समय-समय पर इस मुद्दे को प्रमुखता से प्रकाशित किया था। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jhalawar/effect-of-news---chaumhala-community-health-center-gets-model-hospital-status/article-122916"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-08/oer4.png" alt=""></a><br /><p>चौमहला। राजस्थान सरकार ने चौमहला सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) को 30 बेड से बढ़ाकर 50 बेड का कर दिया है। इसके साथ ही चिकित्सक और नर्सिंग स्टाफ में भी बढ़ोतरी की गई है।  अब यह अस्पताल मॉडल सीएचसी के रूप में विकसित होगा। स्थानीय जनप्रतिनिधियों और व्यापार संघों द्वारा लंबे समय से की जा रही इस मांग को सरकार ने पूरा किया है। दैनिक नवज्योति ने भी समय-समय पर इस मुद्दे को प्रमुखता से प्रकाशित किया था। अस्पताल के उन्नयन से अब मरीजों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी और एक साथ 50 मरीज भर्ती किए जा सकेंगे। ब्लॉक चिकित्सा अधिकारी डॉ. विकास जैन ने बताया कि अस्पताल में अब तीन विशेषज्ञ डॉक्टर और चार नर्सिंग कर्मचारी लगाए जाएंगे। सरकार का यह कदम गंगधार क्षेत्र के सवा लाख से अधिक लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने में मददगार होगा।</p>
<p><strong>महिला चिकित्सक का पद अब भी रिक्त </strong><br />चौमहला सीएचसी पूरे गंगधार क्षेत्र का सबसे बड़ा अस्पताल है। बावजूद इसके महिला चिकित्सक का पद खाली होने के कारण महिलाओं को मामूली बीमारियों के लिए भी झालावाड़, भवानीमंडी या नजदीकी मध्यप्रदेश के अस्पतालों में जाना पड़ता है।अस्पताल में कई सालों से सोनोग्राफी सुविधा ठप पड़ी है। मशीन खराब है। इस वजह से गर्भवती महिलाओं, पथरी रोगियों और पेट दर्द से पीड़ित मरीजों को भारी परेशानी उठानी पड़ रही है। उन्हें आसपास के अन्य शहरों में भटकना पड़ता है। </p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />सरकार द्वारा चौमहला सीएचसी को 50 बेड का कर दिया गया है। डॉक्टर और नर्सिंग स्टाफ की बढ़ोतरी की जा रही है। महिला चिकित्सक और सोनोग्राफी सुविधा के प्रस्ताव उच्च अधिकारियों को भेजे गए हैं। <br /><strong>-डॉ. विकास जैन, ब्लॉक चिकित्सा अधिकारी, डग </strong></p>
<p> चौमहला सीएचसी को 50 बेड का बनाने के लिए लंबे समय से प्रयास जारी थे। सरकार ने स्वीकृति दे दी है। अब यह मॉडल सीएचसी बनेगी और नई बिल्डिंग का भी निर्माण होगा। <br /><strong>-कालूराम मेघवाल, विधायक, डग </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>झालावाड़</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 07 Aug 2025 14:00:45 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>असर खबर का - जर्जर कमरों से नए भवन में शिफ्ट हुए फुटबॉल खिलाड़ी</title>
                                    <description><![CDATA[सुरक्षित व व्यवस्थित आवास मिलने पर खिलाड़ियों ने नवज्योति के प्रयासों की सराहना करते हुए आभार जताया। 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/effect-of-news---football-players-shifted-from-dilapidated-rooms-to-new-building/article-87850"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-08/1rer7.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। राजकीय वोकेशनल स्कूल में संचालित फुटबॉल हॉस्टल के खिलाड़ियों को पुराने जर्जर सीलनभरे कमरों से नए हॉस्टल के कमरों में शिफ्ट कर दिया गया है। वहीं, स्कूल प्रशासन व फुटबॉल कोच द्वारा बिजली-पंखे की वैकल्पिक व्यवस्था की गई। साथ ही केडीए द्वारा स्कूल प्रशासन को हॉस्टल हैंड ओवर कर दिया गया। दैनिक नवज्योति में खबर प्रकाशित होने के बाद प्रदेशभर से आए खिलाड़ियों को व्यवस्थित व सुरक्षित आवास उपलब्ध हो सका। नए कमरों में आते ही खिल उठे चेहरे: जर्जर कमरों से नए कमरों में शिफ्ट होते ही खिलाड़ियों के चेहरे खुशी से खिल उठे। हॉस्टल के नए पांच कमरों में 20 खिलाड़ियों को ठहराया गया है। प्रत्येक कमरों में तीन बेड लगाकर 4 बच्चों को रखा गया है। सुरक्षित आवास मिलने से खिलाड़ियों को सीलन की बदबू और जहरीले जीव-जंतुओं के खतरे से निजात मिल सकी।</p>
<p><strong>धन्यवाद नवज्योति </strong><br />दैनिक नवज्योति ने 12 अगस्त के अंक में 97 लाख की चमक फीकी, जहरीले सांप और बीमारियों के शिकंजे में फंसी खिलाड़ियों की जान..., शीर्षक से खबर प्रकाशित कर अव्यवस्थाओं से शिक्षा व प्रशासनिक अधिकारियों का ध्यान आकर्षित किया था। जिसके बाद शिक्षा विभाग ने तुरंत कार्रवाई करते हुए खिलाड़ियों को पुराने जर्जर कमरों से नवनिर्मित हॉस्टल के नए कमरों में शिफ्ट करवाया। गौरतलब है कि पुराने दो कमरों में खिलाड़ी रह रहे थे। इन कमरों के पीछे झाड़-झंकाड़ होने से जहरीले जीव जंतुओं का खतरा बना रहता था। सुरक्षित व व्यवस्थित आवास मिलने पर खिलाड़ियों ने नवज्योति के प्रयासों की सराहना करते हुए आभार जताया। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 16 Aug 2024 11:53:52 +0530</pubDate>
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                <title>सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र छोटा होने से अव्यवस्थाओं की भरमार </title>
                                    <description><![CDATA[नए भवन निर्माण के लिए भूमि आवंटित हो तो मिले राहत।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/baran/community-health-center-is-small--due-to-which-there-is-lot-of-chaos/article-85323"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-07/111u1rer13.png" alt=""></a><br /><p>किशनगंज।  किशनगंज कस्बा मुख्यालय पर मौजूद सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र चिकित्सा सुविधाओं के लिहाज से बहुत छोटा होने से आदिवासी अंचल से रोजाना चिकित्सालय आने वाले सैंकडों मरीजों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। चिकित्सालय पहुंचने के रास्ते समेत चिकित्सा भवन,वाहन पार्किंग, इमरजेंसी,लेबर वार्ड,ओपीडी,एक दवा वितरण काउंटर हर जगह सकरी होने से लंबी लाइन लग जाने से रास्ता अवरुद्ध हो जाता है। जिससे चिकित्सालय में आने मरीजों एवं परिजनों को परेशानी झेलनी पड़ती है। चिकित्सा प्रभारी नामदेव ने बताया कि वर्तमान में चिकित्सालय में 25 चिकित्सक, 20 सविदाकर्मी कार्यरत है। जिनके लिए पर्याप्त कमरे चिकित्सालय में मौजूद नहीं हैं। ऐसे में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के लिए नया भवन निर्माण के लिए भूमि आवंटन हो तो कस्बे सहित क्षेत्रवासियों को राहत मिल सकती है।</p>
<p><strong>ओपीडी, इमरजेंसी, लेबर वार्ड, चिकित्सक कक्ष की कमी</strong><br />चिकित्सालय में आने वाले मरीजों को ओपीडी छोटी होने से कई बार लाइन चिकित्सालय से बाहर निकल जाती है। वहीं इमरजेंसी वार्ड के छोटे होने से दो से अधिक घायलों का इलाज एक साथ संभव नहीं है। कई बार दुर्घटना में घायल मरीजों को सीधे बारां रेफर करना पड़ता है।  गैलरी में ही प्राथमिक उपचार करना पड़ता है। यहीं हाल लेबर रूम का है। जहां एक दो से अधिक डिलेवरी एक साथ नहीं हो पाती। साथ ही चिकित्सकों के लिए कमरे छोटे होने के साथ ही कई परेशानियां बनी रहती है।</p>
<p><strong>जगह की कमी से वाहनों की अव्यवस्थित पार्किंग</strong><br />चिकित्सालय परिसर में ही मौजूद वाहन पार्किंग स्थल बहुत छोटा होने के चलते चिकित्सा स्टाप के वाहनों से ही भर जाता है। ऐसे में चिकित्सालय में मरीजों को लेकर आने वाली एंबुलेंस, परिजनों को वाहन खड़े करने में परेशानी खड़ी हो जाती है। पार्किंग भर जाने से लोग अपने वाहन इधर उधर अव्यवस्थित रूप से खड़े कर देते है। जिससे जाम के हालात बन जाते है। कई बार खुद एंबुलेंस चालको को मरीजों की जान पर खेलकर रास्ते में खड़े वाहनों को नीचे उतरकर हटाना पड़ता है।</p>
<p><strong>मुख्य रास्ता,पार्किंग स्थल छोटा, एंबुलेंस चालक परेशान</strong><br />किशनगंज बस स्टैंड से लेकर चिकित्सालय पहुंचने तक मार्ग बहुत ही सकड़ा होने मुख्य बाजार होने से कस्बे में आने वालों लोग अपने  वाहन अव्यवस्थित खड़े कर देते है। जिसे आए दिन जाम के हालात बने रहते है। मरीजों को समय पर चिकित्सालय पहुंचने एंबुलेंस चालको को परेशानी उठानी पड़ती है। </p>
<p>किशनगंज बस स्टैंड से लेकर चिकित्सालय पहुंचने तक मार्ग सकड़ा होने, वाहन अव्यवस्थित खड़े रहने से आए दिन जाम के हालात बने रहते है। मरीजों को समय पर चिकित्सालय पहुंचने में परेशानी बनी रहती है।<br /><strong>- योगेश नागर, एंबुलेंस चालक, किशनगंज। </strong></p>
<p>चिकित्सालय परिसर छोटा होने से मरीजों के साथ-साथ चिकित्सालय में आने वाले परिजनो को भी जगह कम होने से बैठने,खड़े रहने में भी परेशानी उठानी पड़ती है। <br /><strong>- डीके सैनी, कस्बेवासी। </strong></p>
<p>चिकित्सालय भवन आवश्यकता को देखते हुए बहुत छोटा है। जिसमे ओपीडी, इमरजेंसी में ज्यादा समस्या रहती है। नए भवन के लिए अधिकारियों को अवगत कराया हुआ है।<br /><strong>- प्रदीप नामदेव, चिकित्सा प्रभारी सीएचसी किशनगंज</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बारां</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 20 Jul 2024 17:38:42 +0530</pubDate>
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                <title>फिर लाल फीते में अटका कोटा उत्तर के नए भवन का निर्माण</title>
                                    <description><![CDATA[नगर निगम कोटा उत्तर के इस तीन मंजिला नए भवन का निर्माण कार्य पर करीब 50 करोड़ रुपए का खर्चा होगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/construction-of-new-building-of-north-kota-stuck-in-red-tape-again/article-54127"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-08/kota-news-h.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। नगर निगम कोटा उत्तर के नए भवन का निर्माण कार्य अभी तक टेंडर प्रक्रिया में ही अटका हुआ है। इसका निर्माण इस माह शुरू होने की संभावना है। कोटा में नगर निगम तो दो बन गए लेकिन जगह की कमी के चलते फिलहाल दोनों निगम निगम के वर्तमान राजीव गांधी प्रशासनिक भवन में ही संचालित हो रहे हैं। हालांकि दोनों निगमों के कामकाज का बटवारा होने से भवन को भी अलग-अलग दो ब्लॉक में बांटा गया है। लेकिन यह भवन कोटा दक्षिण निगम क्षेत्र में होने से कोटा उत्तर के नए भवन की आवश्यकता महसूस की  जा रही थी। स्वायत्त शासन मंत्री शांति धारीवाल के निर्देश पर नगर विकास न्यास के अतिक्रमण निरोधक दस्ते ने पुरानी सब्जीमंडी क्षेत्र स्घित ’वाला तोप के पास से अतिक्रमण हटाया था। करीब सौ करोड़ से अधिक की जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराया था। करीब 900 वर्ग मीटर क्षेत्रफल वाली इसी भूमि पर नगर निगम कोटा उत्तर का नया भवन बनना प्रस्तावित है। </p>
<p><strong>50 करोड़ का बजट प्रस्तावित</strong><br />नगर निगम कोटा उत्तर के इस तीन मंजिला नए भवन का निर्माण कार्य पर करीब 50 करोड़ रुपए का खर्चा होगा। इसके लिए बजट भी प्रस्तावित किया गया है। इसकी डीपीआर तैयार हो गई है। अब भवन का निर्माण किया जाना है। लेकिन यह काम अभी तक टेंडर प्रक्रिया में ही अटका हुआ है। </p>
<p><strong>तीन फर्मो ने किया आवेदन</strong><br />सूत्रों के अनुसार नगर निगम कोटा उत्तर की ओर से नए भवन के निर्माण का टेंडर जारी किया था। कई बार तिथि बढ़ने के बाद हाल ही में टेंडर खोले गए। जिसमें तीन फर्मो ने आवेदन किए हैं। अभी तकनीकी बिड़ खोली गई है। उसकी जांच के बाद वित्तीय बिड़ खुलेगी। उसमें एल वन आने वाली फर्म से नेगोशिएशन किया जाएगा। उसके बाद संबंधित फर्म को निर्माण का कार्यादेश जारी किया जाएगा। </p>
<p><strong>दो साल का समय निर्धारित</strong><br />नए भवन का निमाण कार्य शुरू होने के बाद उसे पूरा होने में करीब दो साल का समय लगेगा। जिसमें महापौर, उप महापौर, पार्षदों व अधिकारियों के बैठने के कक्ष के साथ ही बैठक के लिए 150 सीट का सभागार भी होगा। इस नए भवन में नगर निगम कोटा उत्तर का वर्तमान सब्जीमंडी स्थित फायर स्टेशन भी बनाया जाएगा। जबकि वर्तमान फायर स्टेशन के पुराना होने से उसे ध्वस्त किया जाएगा। </p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />कोटा उत्तर निगम के नए भवन का निर्माण कार्य  टेंडर प्रक्रिया में है। तकनीकी बिड खुल गई है। प्रयास है कि इसी महीने में कार्यादेश जारी कर दिया जाए। उसके बाद शिलान्यास कर निर्माण  कार्य भी शीघ्र ही इसी माह शुरू करने की संभावना है।  <br /><strong>- प्रेम शंकर शर्मा, मुख्य अभियंता नगर निगम कोटा उत्तर </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 09 Aug 2023 17:35:27 +0530</pubDate>
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                <title>मोदी ने पोर्ट ब्लेयर में वीर सावरकर हवाई अड्डे के नए भवन का अनावरण किया</title>
                                    <description><![CDATA[ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पोर्ट ब्लेयर में वीर सावरकर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के नए टर्मिनल भवन की पट्टिका का अनावरण किया। मोदी ने नए टर्मिनल भवन का अनावरण वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से किया। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/modi-unveils-new-building-of-veer-savarkar-airport-in-port/article-52117"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-07/black-futuristic-roadmap-your-story-(1)2.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पोर्ट ब्लेयर में वीर सावरकर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के नए टर्मिनल भवन की पट्टिका का अनावरण किया। मोदी ने नए टर्मिनल भवन का अनावरण वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से किया। प्रधानमंत्री कार्यालय के मुताबिक नए टर्मिनल भवन का निर्माण लगभग 710 करोड़ रुपये की लागत से हुआ है जो केन्द्रशासित प्रदेश अंडमान-नीकोबार के लिए संपर्क सुविधाओं के सुधार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इस नए टर्मिनल का निर्मित क्षेत्रफल लगभग 40,800 वर्गमीटर है और यह नया टर्मिनल भवन प्रति वर्ष लगभग 50 लाख यात्रियों के आवागमन को संभालने में सक्षम होगा।</p>
<p>वहां हवाई अड्डे पर 80 करोड़ रुपये  की लागत से दो बोइंग-767-400 और दो एयरबस-321 प्रकार के विमानों के लिए उपयुक्त एप्रन का भी निर्माण किया गया है, जिससे यह हवाई अड्डा अब एक समय में दस विमानों की पार्किंग करने में सक्षम हो गया है। यह टर्मिनल प्रकृति से प्रेरित है और इसका वास्तुशिल्प डिजाइन, समुद्र और द्वीपों को दर्शाते हुए एक शंख के आकार की संरचना जैसा दिखता है। नए हवाईअड्डा भवन में गर्मी को कम करने के लिए दोहरी इंसुलेटेड रूफिंग सिस्टम, प्राकृतिक रूप से सूर्य के प्रकाश का अधिक से अधिक प्रवेश कराने के लिए रोशनदानों की व्यवस्था, एलईडी लाइटिंग, गर्मी कम करने वाली ग्लेजिंग जैसी स्थिरता वाली कई विशेषताएं हैं। इस भवन में भूमिगत जल टैंक में वर्षा जल संग्रहण, शत-प्रतिशत शोधित अपशिष्ट जल को लैंडस्कैपिंग के लिए दोबारा उपयोग करने के साथ ऑन-साइट सीवेज शोधन संयंत्र तथा 500 किलोवाट क्षमता के सौर ऊर्जा संयंत्र की व्यवस्था भी की गयी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 18 Jul 2023 14:40:01 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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                <title>अतिक्रमण मुक्त जमीन की 6 माह में भी डीपीआर नहीं बनी </title>
                                    <description><![CDATA[अतिक्रमण मुक्त जमीन पर कोटा उत्तर निगम का भवन बनाने से पहले उसकी डीपीआर तैयार की जानी है। उस डीपीआर को बनाने के लिए नगर निगम द्वारा पूर्व में दो बार टेंडर किए गए। लेकिन दोनों बार ही जितनी भी फर्म टेंडर में शामिल हुई वे टेंडर की शर्तों को ही पूरा नहीं कर सकी। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/dpr-was-not-made-even-in-6-months-of-encroachment-free-land/article-32942"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-12/atikraman-mukt-zameen-ki-6-maah-mei-bhi-dpr-nahi-bani..kota-news..21.12.2022.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। राज्य सरकार ने कोटा में दो नगर निगम तो बना दिए लेकिन फिलहाल दोनों एक ही भवन में संचालित हो रहे हैं। कोटा उत्तर निगम का नया भवन बनाने के लिए जगह तो चिन्हित कर ली गई है लेकिन उस जमीन को अतिक्रमण मुक्त करवाने के 6 माह बाद तक उसकी डीपीआर तक नहीें बनी है। निगम को डीपीआर बनाने का ही टेंडर तीसरी बार करना पड़ा है। कोटा में दो नगर निगम बनने के बाद वर्तमान भवन नगर निगम कोटा दक्षिण के अधिकार क्षेत्र में है। ऐसे में कोटा उत्तर नगर निगम के नए भवन के लिए पहले तो जगह की तलाश की गई। लेकिन दो जगह फाइनल होने के बाद उसे निरस्त कर दिया गया। अब ’वाला तोप के पास पुरानी सब्जीमंडी की जगह को भवन के लिए चिन्हित किया गया है। उस जमीन पर पिछले कई सालों से अतिक्रमण हो रहा था। जिसे नगर विकास न्यास के अतिक्रमण निरोधक दस्ते ने 6 माह पहले जून में अतिक्रमण से मुक्त कराया था। करीब 25 हजार वर्ग मीटर जमीन की कीमत सौ करोड़ रुपए से अधिक है। अतिक्रमण से मुक्त होते ही इस जमीन को कोटा उत्तर नगर निगम के नए भवन के लिए चिन्हित कर दिया गया था।<br /> <br /><strong>6 माह में तीसरी बार किए डीपीआर के टेंडर</strong><br />अतिक्रमण मुक्त जमीन पर कोटा उत्तर निगम का भवन बनाने से पहले उसकी डीपीआर तैयार की जानी है। उस डीपीआर को बनाने के लिए नगर निगम द्वारा पूर्व में दो बार टेंडर किए गए। लेकिन दोनों बार ही जितनी भी फर्म टेंडर में शामिल हुई वे टेंडर की शर्तों को ही पूरा नहीं कर सकी। जिससे दोनों बार किए गए टेंडर निरस्त हो गए। निगम ने अब एक दिन पहले ही तीसरी बार फिर से डीपीआर के टेंडर जारी किए हैं। हालांकि इस बार शॉर्ट टर्म टेंडर किया गया है। साथ ही शर्तो में भी बदलाव किया है। </p>
<p><strong>डीपीआर के अनुसार ही बनेगा भवन</strong><br />नगर निगम सूत्रों के अनुसार कोटा उत्तर का नया भवन बहुमंजिला बनाया जाएगा। जिसकी लागत ही करोड़ों में होगी। ऐसे में उसकी डीपीआर(डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट) तैयार होने के बाद भी भवन की डिजाइन के हिसाब से भवन का काम शुरू होगा। लेकिन अभी तक तो डीपीआर ही नहीं बनी है। उसके बनने में ही महीनों लगेंगे। वह फाइनल होगी। उसके बाद भवन के टेंडर समेत अन्य प्रक्रिया व औपचारिकताएं की जाएंगी। जिसमें काफी समय लग जाएगा। ऐसे में विधानसभा चुनाव से पहले भवन का निर्माण कार्य शुरू हो पाना मुश्किल है। </p>
<p><strong>पहले टेंडर के बाद निरस्त करनी पड़ी डीपीआर</strong><br />गौरतलब है कि नगर निगम कोटा उत्तर के नए भवन के लिए पूर्व में स्टेशन रोड पर जगह प्रस्तावित की गई थी।  उसके लिए डीपीआर बनाने का टेंडर भी जारी हो गया था। करीब 16  लाख रुपए में डीपीआर बनाने का कार्यादेश भी जारी हो गया था। लेकिन कार्यादेश जारी होने के बाद बीच में ही उस जगह को कैंसिल करने के कारण डीपीआर ही निरस्त करनी पड़ी थी।  </p>
<p>कोटा उत्तर के नए भवन की डीपीआर का टेंडर दो बार जारी कर चुके हैं। लेकिन कोई भी फर्म उसकी तकनीकी बिड में ही पास नहीं हो पा रही है। जिससे प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही है। अब कुछ शर्तों में बदलाव के साथ तीसरी बार टेंडर जारी किया है। डीपीआर बनने के बाद ही अगली प्रक्रिया शुरू होगी। <br /><strong>- प्रेम शंकर शर्मा, मुख्य अभियंता नगर निगम कोटा उत्तर व दक्षिण </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 21 Dec 2022 16:20:56 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>सेना की आपत्ति से करीब आधी रह गई अदालत के नए भवन की जमीन </title>
                                    <description><![CDATA[नए भवन को बनाने के लिए करीब 200 करोड़ रुपए का बजट भी स्वीकृत हो गया। जिसकी वित्तीय स्वीकृति भी जारी हो गई थी। लेकिन कई साल पहले यह सब कुछ होने के बाद भी अदालत के नए भवन का काम शुरू नहीं हो सका। इसका कारण सेना द्वारा आपत्ती किया जाना बताया जा रहा है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/due-to-the-objection-of-the-army--the-land-for-the-new-building-of-the-court-was-almost-halved/article-32728"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-12/sena-ki-aapatti-se-kareeb-aadhi-reh-gai-adalat-ke-naye-bhawan-ki-zameen...kota-news....19.12.2022.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। अदालत परिसर के लिए प्रस्तावित नए भवन पर सेना की एक आपत्ति से वह  जमीन आधी रह गई है। जिससे उस जमीन पर अदालत बनाने का मकसद हल नहीं हो पा रहा है। ऐसे में इसका काम तो अटका हुआ है। साथ ही अब फिर से अदालत के लिए नई जगह की तलाश भी की जाने लगी है। कोटा में अदालत बरसों से एक ही भवन में संचालित हो रही है। वह भी उस समय से जब यहां गिनती के वकील और मुकदमें हुआ करते थे। उस समय के हिसाब से यह जगह पर्याप्त थी। लेकिन समय के साथ विकास व विस्तार होता गया। मुकदमों  की संखया बढ़ने के साथ ही अदालतें भी बढ़ती गई। वकील और पक्षकारों की संख्या में भी उसी अनुपात में वृद्धि हुई। लेकिन नहीं बढ़ा तो अदालत परिसर। अदालत का परिसर आज भी उतना ही है। हालांकि समय-समय पर इसी परिसर में विकास के कार्य करवाए जाते रहे हैं। वर्तमान में भी निर्माण कार्य किया जा रहा है। लेकिन जिस तरह से अदालतों की बढ़ती संख्या को देखते हुए इस परिसर में जगह की आवश्यकता है वह पूरी नहीं हो पा रही है। जिससे अदालत के नए भवन की मांग लम्बे समय से की जा रही है। राज्य सरकार व जिला प्रशासन के साथ ही न्याय विभाग द्वारा भी प्रयास किए गए। जिसके बाद सरकार ने अदालत के वर्तमान भवन के नजदीक ही स्वास्थ्य भवन के पास सिचाई विभाग की जगह को अदालत परिसर के नए भवन के लिए आवंटित कर दिया। जगह आवटित होते ही प्रशासन द्वारा यहां बने सिचाई विभाग के कार्यालय व स्टोर को खाली करवाकर न्याय विभाग व अदालत के नए भवन का निर्माण करने वाली एजेंसी सार्वजनिक निर्माण विभाग को सौंप दी। </p>
<p><strong>32 हजार वर्ग मीटर जगह, 200 करोड़ का बजट</strong><br />सरकार व प्रशासन द्वारा अदालत परिसर के लिए जो जगह आवंटित की गई वह 32 हजार वर्ग मीटर है। उस जमीन के हिसाब से उसका नक्शा तैयार किया गया। जी प्लस पांच मंजिला नक् शा बनने के बाद वह हाईकोर्ट रजिस्ट्रार के पास स्वीकृति के लिए भेजा गया। वहां से नक् शा स्वीकृत हो गया। नए भवन को बनाने के लिए करीब 200 करोड़ रुपए का बजट भी स्वीकृत हो गया। जिसकी वित्तीय स्वीकृति भी जारी हो गई थी। लेकिन कई साल पहले यह सब कुछ होने के बाद भी अदालत के नए भवन का काम शुरू नहीं हो सका। इसका कारण सेना द्वारा आपत्ती किया जाना बताया जा रहा है। </p>
<p><strong>सेना की आपत्ति से कम हुई जमीन</strong><br />न्याय विभाग के सूत्रों के अनुसार अदालत के नह भवन को जी प्लस 5 मंजिला बनाना है। जिसमें हर मंजिल पर अदालत, पीठासीन अधिकारी के चैम्बर व  अन्य व्यवस्था की जानी है। साथ ही ग्राउंड फ्लोर पर एडवोकेट चैम्बर व पार्किंग और अन्य जन सुविधाओं को विकसित किया जाना है। लेकिन जिस जगह पर अदालत का नया भवन बनना है वह जगह सेना की जगह से अड़ी हुई है। इस पर सेना के अधिकािरयों ने उनके पास की जमीन को छोड़ते हुए जी प्लस तीन मंजिल तक ही काम करने  की अनुमति दी है। ऐसे में सेना की आपत्ती को यदि माना जाए तो उससे जगह कम होकर 32 हजार वर्ग मीटर की जगह मात्र 19 हजार वर्ग मीटर ही रह गई है। इसमें न तो एडवोकेट चैम्बर बन सकेंगे और न ही पार्किंग व अन्य सुविधाएं। साथ ही अदालतें भी 5 मंजिल की जगह तीन मंजिल पर पूरी नहीं बन पाएंगी। जिससे सभी अदालतों को एक ही जगह पर ले जाने का मकसद भी हल नहीं हो रहा है। </p>
<p><strong>एक चौथाई अदालतें किराए के भवन व कलक्ट्री में संचालित</strong><br />कोटा जजशिप में करीब 63 अदालतें हैं। जिनमें मुंिसिफ से लेकर एसीजेएम, एडीजे, विशेष अदालतें शामिल हैं। उनमें से करीब 10 अदालतें ग्रामीण क्षेत्र में हैं। वहीं करीब एक चौथाई 16 अदालतें किराए के भवनों में व कलेक्ट्रेट परिसर में संचालित हो रही हैं। ऐसे में नए भवन का मकसद सभी अदालतों को एक ही जगह पर ले जाना है। लेकिन नए भवन की जमीन कम होने से ऐसा संभव नहीं हो पा रहा है। </p>
<p><strong>94 हजार से अधिक मुकदमें व 2 हजार से अधिक वकील</strong><br />कोटा जजशिप में वर्तमान में करीब 2 हजार से अधिक वकील अभिभाषक परिषद में पंजीकृत हैं। जबकि इनकी संख्या इससे कहीं अधिक है। उनमें से करीब आधे से अधिक वकील रोजाना अदालत परिसर में आ भी रहे हैं। वर्तमान में महिला वकीलों की संख्या भी काफी अधिक हो गई है। ऐसे में वकेीलों के बैठने के लिए न तो पर्याप्त जगह है और न ही पाटे। अधिकतर वकील तो एक ही पाटे पर खड़े होकर काम करने को मजबूर हैं। वर्तमान में अदालत परिसर में कोई भी जगह ऐसी नहीं हैं जहांं वकीलों के पाटे लगे हुए नहीं हों। फिर चाहे वह टीनशेड हो या सुलभ कॉम्पलेक्स के सामने। जानकारी के अनुसार कोटा में वर्तमान में करीब 94 हजार से अधिक मुकदमें लम्बित हैं। जिनमें फौजदारी मुकदमों की संख्या करीब 72 हजार व दीवानी मुकदमों की संख्या करीब 22 हजार है। हर साल मुकदमों की संख्या बढ़ती जा रही है।</p>
<p><strong>नए भवन के बारे में अधिक जानकारी नहीं है</strong><br /> अदालत के नए भवन के बारे में अधिक जानकारी तो नहीं है। लेकिन सेना की आपत्ति होने से काम अटका होने की सूचना है। वर्तमान में अदालत परिसर में निर्माण कार्य चल रहा है। उसके पूरा होने के बाद नए भवन के बारे में जानकारी कर उस काम को भी आगे बढ़वाने का प्रयास किया जाएगा। परिषद का प्रयास होगा कि जो भी बाधाएं या कमियां हैं उन्हें दूर कर जल्दी से जल्दी नया भवन बने। <br /><strong>- प्रमोद शर्मा, अध्यक्ष अभिभाषक परिषद कोटा </strong></p>
<p><strong>उच्च स्तर पर कर रहें पत्र व्यवहार</strong><br /> अदालत के नए भवन के लिए जो जमीन आवंटित हुई थी। उस पर सेना ने आपत्ती जताई है। जिससे अदालत के लिए जितनी जमीन की जरूरत है वह पर्याप्त नहीं बताई जा रही है। इस कारण से फिलहाल उसका काम अटका हुआ है।  न्याय विभाग द्वारा  अब अदालत के लिए नए भवन की तलाश के संबंध में उच्च स्तर पर पत्र व्यवहार किया जा रहा है। इस संबंध में अधिक जानकारी न्याय विभाग द्वारा ही दी जा सकती है। <br /><strong>- वीके. पोरवाल, एक्सईएन सार्वजनिक निर्माण विभाग</strong></p>
<p> नए भवन के लिए काफी प्रयास कर स्वास्थ्य भवन के पास जगह आवंटित करवाई थी। उसके लिए बजट भी स्वीकृत हो गया था। लेकिन परिषद की कार्यकारिणी ने उस दिशा में कोई प्रयास नहीं किए। अब उस पर सेना की आपत्ती होने की सूचना है। जिससे अदालत के नए भवन का काम अटका हुआ है। जबकि वर्तमान भवन वकीलों, पक्षकारों व अदालतों की बढ़ती संखया के हिसाब से काफी छोटा है। ऐसे में जितनी जल्दी संभव हो सके नया भवन बनाने का प्रयास होना चाहिए। <br /><strong>- मनोजपुरी, पूर्व अध्यक्ष, अभिभाषक परिषद कोटा </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 19 Dec 2022 14:41:57 +0530</pubDate>
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                <title>अब सेना की आपत्ति से अटका अदालत के नए भवन का निर्माण </title>
                                    <description><![CDATA[अदालत का नया वन जी प्लस पांच मंजिल का बनाया जाना है। लेकिन उस जगह के पास ही सेना के भी कार्यालय हैं। अदालत के नए भवन की इतनी अधिक मंजिल निर्माण होने की जानकारी मिलने पर सेना के अधिकारियों ने इस पर आपत्ती की। जिससे यह निमाण कार्य अटक गया। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/now-the-construction-of-the-new-building-of-the-court-stuck-due-to-the-objection-of-the-army/article-30810"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-11/ab-sena-ki-aapatti-se-atka-adalat-k-naye-bhavan-ka-nirman...kota-news...26.11.2022.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा । संभागीय मुख्यालय होने से यहां अदालत में मुकदमों की संख्या बढ़ने के साथ ही वकीलों व पक्षकारों की संख्या भी लगातार बढ़ रही है। ऐसे में वर्तमान अदालत परिसर छोटा होने से नए भवन बनाने की योजना है। लेकिन उस नए भवन के निर्माण  को सेना की आपत्ती ने अटका दिया है। कोटा में कलक्ट्रेट के सामने अदालत का पुराना भवन बना हुआ है। जिसमें उस समय के हिसाब से अदालतें बनी हुई हैं। लेकिन समय के साथ -साथ मुकदमों की संख्या और वकीलों की संख्या बढ़ने से अदालत परिसर छोटा पड़ने लगा है। ऐसे में अदालत के लिए नए परिसर की मांग  उठी तो जिला प्रशासन ने नई अदालत के लिए जगह भी आवंटित कर दी। लेकिन जगह आवंटित होने के चार साल बाद तक भी उस जगह पर निर्माण शुरू  नहीं हो सका है। इधर सार्वजनिक निर्माण विभाग के अभियंताओं का कहना है कि अदालत के नए भवन के लिए आवंटित जगह के निर्माण पर सेना की आपत्ती से काम अटका हुआ है। वहां से हरी झंडी मिलने के बाद ही काम शुरू हो सकेगा। फिलहाल काम रूका हुआ है। </p>
<p><strong>जी प्लस पांच मंजिल बनाने पर आपत्ति</strong><br />जिला प्रशासन द्वारा दरबार पेट्रोल पम्प के पीछे और स्वास्थ्य भवन के पास सिचाई विभाग के कार्यालयों की जगह को अदालत के नए भवन  के लिए आवंटित किया था। वर्ष 2018 में जगह आवंटित हो गई थी। साथ ही विभाग के कार्यालयों व खाली कमरों में जो भी सामान था उन्हें भी वहां से खाली कर शिफ्ट कर दिया था।  राज्य सरकार ने पिछले बजट में अदालत परिसर के निर्माण के लिए बजट भी स्वीकृत कर दिया था। जिसके आधार पर निर्माण का नक् शा बनाया गया था। अदालत का नया वन जी प्लस पांच मंजिल का बनाया जाना है। लेकिन उस जगह के पास ही सेना के भी कार्यालय हैं। अदालत के नए भवन की इतनी अधिक मंजिल निर्माण होने की जानकारी मिलने पर सेना के अधिकारियों ने इस पर आपत्ती की। जिससे यह निमाण कार्य अटक गया। अटका भी ऐसा कि अभी तक उसका कोई समाधान नहीं हो सका है। </p>
<p><strong>75 हजार से अधिक मुकदमे, 25 सौ वकील</strong><br />कोटा जजशिप में करीब 60 से अधिक अदालतें हैं। जिनमें फौजदारी व दीवानी करीब 75 हजार मुकदमें लम्बित हैं। वहीं वकीलों की संख्या भी बढ़कर वर्तमान में 25 सौ के पार हो गई है। हालत यह है कि अदालतों की संख्या बढ़ने के कारण व अदालत परिसर में जगह कम होने से कई अदालतें कलक्ट्रेट व उसके आस-पास किराए के भवनों में संचालित हो रही हैं। जिनका सरकार को लाखों रुपए  महीना किराया चुकाना पड़ रहा है। जबकि नया भवन तैयार होने से इस समस्या का समाधान हो जाएगा। </p>
<p><strong>सेना की आपत्ति से पहले भी कई काम अटके</strong><br />शहर में सेना की आपत्ती से पहले भी कई निर्माण काम अटके हुए हैं। नगर निगम द्वारा स्टेशन रोड स्थित जिंद बाबा के पीछे कोटा उत्तर निगम का गैराज व ट्रांसफर स्टेशन बनाया जाना था। लेकिन सेना की आपत्ती से वहां निर्माण रोकना पड़ गया। वहीं नगर निगम द्वारा ही माला रोड पर साइकिल ट्रेक बनाया जाना था। उस पर भी सेना की आपत्ती से वह काम भी अटक गया। </p>
<p><strong>दो करोड़ से चल रहा निर्माण कार्य</strong><br />एक तरफ तो नए अदालत परिसर के निर्माण की मांग की जा रही है। वहीं दूसरी तरफ वर्तमान अदालत परिसर में नगर विकास न्यास द्वारा करीब दो करोड़ रुपए से विकास कार्य करवाया जा रहा है। जिसमें अभिभाषक परिषद के सभोगार का नवीनीकरण करने और चैनल गेट के पास से  लाल चौक तक निर्माण कार्य कराया जा रहा है। </p>
<p>अदालत का वर्तमान परिसर छोटा पड़ने लगा है। ऐसे में नए परिसर के लिए परिषद ने जगह की मांग उठाई। जिस पर वर्ष 2018 में प्रशासन ने स्वास्थय भवन के पास सिचाई विभाग के खाली कार्यालयों की जगह को अदालत के नए भवन के लिए आवंटित कर दिया था। जिसके लिए पिछले साल सरकार ने बजट भी आवंटित कर दिया था। लेकिन उसके बाद से अभिभाषक परिषद के पदाधिकारियों ने उसकी जानकारी ही नहीं की। जिससे अभी तक भी अदालत के नए भवन का निर्माण शुरू नहीं हो सका है। <br /><strong>- एडवोकेट मनोजपुरी, पूर्व अध्यक्ष अभिभाषक परिषद कोटा </strong></p>
<p>अदालत के नए भवन के लिए परिषद को जगह आवंटित हो गई है। उसके लिए बजट भी आवंटित हो गया है। लेकिन नक् शे के अनुसार वहां जी प्लस पांच मंजिला का निार्मण किया जाना है।   जिसकी ऊंचाई अधिक होने पर सेना के अधिकारियों ने आपत्ती कर दी है। इस कारण से फिलहाल यह मामला अटका हुआ है। अब इस मामले में आगे की कार्रवाई की जानकारी की जाएगी। <br /><strong>- एडवोकेट प्रमोद शर्मा, अध्यक्ष अभिभाषक परिषद कोटा </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 26 Nov 2022 15:24:51 +0530</pubDate>
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