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                <title>education system - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>education system RSS Feed</description>
                
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                <title>कांग्रेस का केंद्र सरकार पर तीखा हमला, बोलें एनसीईआरटी के पाठ्यक्रम में बदलाव पर स्पष्ट झलकता है बनावटीपन </title>
                                    <description><![CDATA[कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने एनसीईआरटी विवाद पर केंद्र सरकार के आक्रोश को 'डैमेज कंट्रोल' करार दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि पाठ्यपुस्तकों में बदलाव एक सुनियोजित वैचारिक अभियान है, जिसका रिमोट कंट्रोल नागपुर में है। कांग्रेस ने उच्चतम न्यायालय से मांग की है कि वह पाठ्यक्रम के राजनीतिकरण और ध्रुवीकरण की गहन जांच के आदेश दे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/congress-should-launch-a-sharp-attack-on-the-central-government/article-144805"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/ncert-disput-congress.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। एनसीईआरटी की पुस्तकों के पाठ्यक्रम में बदलाव को लेकर कांग्रेस ने कहा है कि केंद्र सरकार का गुस्सा बनावटी है और यदि उनका गुस्सा कृत्रिम नहीं है तो उन्हें पाठ्यक्रम बदलने से संबंधित पूरे मामले की जांच करवानी चाहिए। कांग्रेस संचार विभाग के प्रभारी जयराम रमेश ने शुक्रवार को एक बयान में आरोप लगाया कि केंद्र सरकार राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) की पुस्तकों के मुद्दे पर बनावटी आक्रोश जता रहे हैं। पाठ्यक्रम में बदलाव पर वह अपनी नाराजी का सिर्फ दिखावा कर रहे हैं।</p>
<p>उन्होंने पीएम मोदी की नाराजगी को स्थिति संभालने का प्रयास बताया और कहा स्पष्ट रूप से एक डैमेज कंट्रोल प्रयास के तहत यह संदेश दिया जा रहा है कि वे एनसीईआरटी की पाठ्यपुस्तकों में न्यायपालिका से जुड़े आलोचनात्मक उल्लेखों से बेहद नाखुश हैं। पिछले एक दशक में उन्होंने ऐसे शिक्षाविदों और झोलाछाप अकादमिकों के एक नेटवर्क की अगुवाई की है, जिन्होंने अपने विचारधारात्मक वायरस से पाठ्यपुस्तकों को संक्रमित कर गंभीर नुकसान पहुंचाया है। यह कोई आकस्मिक चूक नहीं, बल्कि एक सुनियोजित वैचारिक घुसपैठ अभियान का हिस्सा है।</p>
<p>कांग्रेस नेता ने केंद्र सरकार पर हमला किया और कहा कि पाठ्यक्रम कैसा होना चाहिए इसकी भूमिका संघ मुख्यालय नागपुर में बनती है जिससे केंद्र सरकार स्वयं सम्बद्ध हैं। उन्होंने कहा सत्ता पक्ष स्वयं नागपुर कॉम्युनल इकोसिस्टम फॉर रिराइटिंग टेक्सबुक असली एनसीईआरटी-को दिशा देते और आकार देते रहे हैं।</p>
<p>इसके आगे जयराम रमेश ने कहा कि उच्चातम न्यायालय को उद्वेलित करने वाली पाठ्यपुस्तकों से स्वयं को अलग दिखाने की उनकी कोशिश महज ढोंग है। अब उच्चतम न्यायालय के लिए अगला तार्किक कदम यह होना चाहिए कि वह इस बात की विस्तृत जांच कराए कि पाठ्यपुस्तकों को किस प्रकार दोबारा लिखा गया और वे किस तरह ध्रुवीकरण तथा राजनीतिक हिसाब-किताब चुकाने के औजार में बदल गईं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 27 Feb 2026 13:20:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>देश में शिक्षा के नाम पर ‘लूट की दुकान’ : यूजीसी ने जारी की लिस्ट, 12 राज्यों में 32 यूनिवर्सिटी फर्जी</title>
                                    <description><![CDATA[देश में शिक्षा माफिया के हौसले किस तरह से बुलंद है, इसका अंदाजा फैलते फर्जी विश्वविद्यालयों से लगाया जा सकता है। दो साल पहले तक जहां सिर्फ आठ राज्यों में फर्जी यूनिवर्सिटी हाना सामने आया था।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/loot-shop-in-the-name-of-education-in-the-country/article-143854"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/12200-x-600-px)-(4)7.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। देश में शिक्षा माफिया के हौसले किस तरह से बुलंद है, इसका अंदाजा फैलते फर्जी विश्वविद्यालयों से लगाया जा सकता है। दो साल पहले तक जहां सिर्फ आठ राज्यों में फर्जी यूनिवर्सिटी हाना सामने आया था, वहीं अब इसका जाल 12 राज्यों तक पहुंच गया है। फर्जी विश्वविद्यालयों की संख्या भी पिछले दो सालों में 20 से बढ़कर 32 तक पहुंच गई है।</p>
<p><strong>यूजीसी ने चेताया : पहले जांचे फिर लें प्रवेश :</strong></p>
<p>विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने छात्रों और अभिभावकों को ऐसे संस्थानों को लेकर सतर्क किया है। आयोग ने छात्रों और अभिभावकों को निर्देश दिया है कि किसी भी संस्थान में प्रवेश लेने से पहले यूजीसी की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध फर्जी विश्वविद्यालयों की सूची जरूर देखें।</p>
<p><strong>दिल्ली- 12 :</strong></p>
<p>    ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक एण्ड फिजिकल हेल्थ साइंस<br />    कर्मशियल यूनिवर्सिटी लिमिटेड<br />    यूनाइटेड नेशन्स यूनिवर्सिटी<br />    वोकेशनल यूनिवर्सिटी<br />    एडीआर सेंट्रिक ज्यूरिडिकल यूनिवर्सिटी<br />    इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एंड इंजीनियरिंग<br />    विश्वकर्मा ओपन यूनिवर्सिटी फार सेल्फ एम्प्लायमेंट<br />    अध्यात्मिक विश्वविद्यालय<br />    वर्ल्ड पीस ऑफ यूनाइटेड नेशनल यूनिवर्सिटी<br />    इंस्टीटूयूट ऑफ मैनेजमेंट एंड इंजीनियरिंग<br />    माउंटेन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एवं टेक्नालाजी<br />    नेशनल इंस्टीट्यूट आफ मैनेजमेंट सोल्यूशन</p>
<p><strong>यूपी -04 :</strong></p>
<p>    गांधी हिंदी विद्यापीठ, प्रयाग<br />    महामाया टेक्नीकल विश्वविद्यालय, नोएडा<br />    नेताजी सुभाष चंद्र बोस ओपन यूनिवर्सिटी, अलीगढ़<br />    भारतीय शिक्षा परिषद, लखनऊ</p>
<p><strong>प. बंगाल-02 :</strong></p>
<p>    इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ अल्टनेटिव मेडिसन<br />    इंस्टीट्यूट ऑफ अल्टनेटिव मेडिसन एंड रिसर्च</p>
<p><strong>कर्नाटक-02 :</strong></p>
<p>    ग्लोबल ह्यूमन पीस यूनिवर्सिटी, बेंगलुरु<br />    इसके अलावा एक अन्य फर्जी संस्थान  </p>
<p><strong>इन राज्यों में दो या एक यूनिवर्सिटी फर्जी :</strong></p>
<p>    हरियाणा-मैजिक एंड आर्ट यूनिवर्सिटी, फरीदाबाद<br />    झारखंड-दक्ष यूनिवर्सिटी, रांची<br />    महाराष्ट्र-राजा अरबी यूनिवर्सिटी, नागपुर। इसके अलावा एक और <br />    केरल-2 फर्जी विश्वविद्यालय <br />    आंध्र प्रदेश-2 फर्जी विश्वविद्यालय <br />    पुडुचेरी-2 फर्जी विश्वविद्यालय <br />    राजस्थान-1 फर्जी विश्वविद्यालय  <br />    अरुणाचल प्रदेश-1 फर्जी विश्वविद्यालय</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 20 Feb 2026 10:53:25 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur KD]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>शिक्षा विभाग में कम्प्यूटर अनुदेशकों के पदनाम बदलाव का कोई प्रस्ताव नहीं, जानें पूरा मामला </title>
                                    <description><![CDATA[माध्यमिक शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया कि 9862 बेसिक और 1182 वरिष्ठ कम्प्यूटर अनुदेशक पदों को शिक्षक ग्रेड-द्वितीय या व्याख्याता में समायोजित करने का कोई प्रस्ताव नहीं है। तकनीकी प्रकृति के कारण पदनाम अनुदेशक रखा गया है। इनके कार्यों में स्मार्ट क्लास, आईसीटी लैब संचालन और ऑनलाइन कार्य शामिल हैं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/there-is-no-proposal-to-change-the-designation-of-computer/article-143547"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/vidhan-sabha8.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। माध्यमिक शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि वर्तमान में विभाग के अंतर्गत कार्यरत 9862 बेसिक कम्प्यूटर अनुदेशक पदों को कम्प्यूटर शिक्षक ग्रेड-द्वितीय के रूप में सृजित कर समायोजित करने का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। इसी प्रकार 1182 वरिष्ठ कम्प्यूटर अनुदेशक पदों को व्याख्याता (कम्प्यूटर शिक्षा) के नए पद सृजित कर समायोजित करने की भी कोई प्रक्रिया प्रस्तावित नहीं है।</p>
<p>विधानसभा में सरकार ने बताया कि दोनों पदों के दायित्व कक्षा 1 से 12 तक विद्यार्थियों को कम्प्यूटर विषय का शिक्षण देना है, लेकिन विषय की तकनीकी प्रकृति को देखते हुए पदनाम “अनुदेशक” रखा गया है, न कि शिक्षक। कम्प्यूटर शिक्षा में प्रायोगिक प्रशिक्षण और तकनीकी दक्षता पर अधिक जोर होता है। इसी कारण इस विषय के अभ्यर्थियों को बी.एड. पाठ्यक्रम के लिए भी पात्र नहीं माना जाता।</p>
<p>कम्प्यूटर अनुदेशकों के जॉब चार्ट में स्मार्ट क्लास संचालन, शाला दर्पण व ऑनलाइन कार्यों में सहयोग, रोबोटिक्स व तकनीकी गतिविधियों में मार्गदर्शन, वेबकास्ट संपादन तथा आईसीटी लैब को कार्यशील रखना जैसे कार्य शामिल हैं।</p>
<p>माध्यमिक शिक्षा बोर्ड राजस्थान वर्ष 2001 से कक्षा 9-10 में कम्प्यूटर विषय पढ़ा रहा है। विभाग में कैडर विस्तार की प्रक्रिया जारी है, लेकिन कैडर पुनर्गठन या पदोन्नति लाभ का फिलहाल कोई प्रस्ताव नहीं है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 17 Feb 2026 16:26:30 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur KD]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>दूसरी कक्षा तक के बच्चों की पाठ्य पुस्तकें स्थानीय भाषा में होंगी, संस्कृत शिक्षा विभाग खोलेगा वैदिक स्कूल</title>
                                    <description><![CDATA[बाल वाटिका से दूसरी कक्षा तक के बच्चों को स्थानीय भाषा में पढ़ाने के लिए शब्दकोश बनाने का काम हो रहा है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><p>जयपुर। राजस्थान में सरकारी स्कूलों के दूसरी कक्षा तक के नन्हे बच्चों को शिक्षा विभाग प्रदेश की स्थानीय भाषा सिखाने के लिए इन्हीं में पाठ्य पुस्तकें लाने जा रहा है। प्रदेश में अलग-अलग हिस्सों में बोली जाने वाली भाषाओं के हिसाब से पुस्तकें तैयार होंगी। जैसे हाड़ौती, ढूंढाड़ी, शेखावटी, मेवाती, ब्रज इत्यादि भाषा में स्कूली किताबें लाने के लिए शिक्षा विभाग इसका शब्दकोश बनाने में लगा है। इसके कम्पलीट होने के बाद बाल वाटिका (नर्सरी) से दूसरी कक्षा तक पढ़ने वाले करीब 7 लाख बच्चों को स्थानीय भाषा में ही पढ़ाया जाएगा।</p>
<p>वहीं सरकार शिक्षा के साथ बच्चों को संस्कृति-धर्म का ज्ञान भी पढ़ाने की तैयारी है। इसके लिए संस्कृति शिक्षा विभाग की ओर से वेद विद्यालय खोले जाएंगे। इनमें छठीं कक्षा से ऊपर की कक्षाओं में वेद पढ़ाए जाएंगे। प्रदेश में हालांकि अभी 19 वेद विद्यालय हैं, जो विभिन्न निजी संस्थाओं के द्वारा संचालित हो रहे हैं। लेकिन अब सरकार अपने स्तर पर वेद शिक्षा के लिए ये स्कूल खोल रही है। वेद पारंगत शिक्षकों की भर्ती संस्कृत शिक्षा विभाग के द्वारा की जाएगी। स्कूलों में वेद के अलावा अन्य विषय भी पढ़ाए जाएंगे। अन्य विषयों के शिक्षक शिक्षा विभाग से लिए जाएंगे। </p>
<p>बाल वाटिका से दूसरी कक्षा तक के बच्चों को स्थानीय भाषा में पढ़ाने के लिए शब्दकोश बनाने का काम हो रहा है। संभवत: एक साल बाद के सत्र में पाठ्य पुस्तकें तैयार कर पढ़ाई शुरू करवाने की कार्य योजना है। ताकि उन्हें अपनी लोकल भाषा के प्रति भावनात्मक जुड़ाव हो सके।’<br />- मदन दिलावर, शिक्षा मंत्री, राजस्थान। </p>
<p>निजी संस्थाएं वेद विद्यालय चला रही हैं। अब संस्कृत शिक्षा विभाग वेद विद्यालय खोलेगा। इनमें वेद पारंगत शिक्षक भर्ती होंगे। अन्य शिक्षकों को शिक्षा विभाग से प्रतिनियुक्ति पर लिया जाएगा। इसका प्लान तैयार हो रहा है।’<br />- विश्राम मीणा, सचिव, संस्कृत शिक्षा विभाग।  </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>शिक्षा जगत</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 24 Mar 2025 09:00:40 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>शिक्षा का मंदिर बदहाल: हाथों में किताब, सिर पर खुला आसमां</title>
                                    <description><![CDATA[छत के सरिए निकले, दीवारों में आई दरारें।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jhalawar/the-temple-of-education-is-in-a-bad-state--books-in-hands--open-sky-above-the-head/article-106208"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-03/257rtrer-(2)7.png" alt=""></a><br /><p> कामखेड़ा। प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था को दूरुस्त करने के वादे किए जा रहे है, लेकिन राजकीय प्राथमिक विद्यालय खेजडा की तस्वीरें कुछ और हकीकत बयान कर रही हैं। ये  मामला मनोहरथाना ब्लॉक के राजकीय प्राथमिक विद्यालय खेजडा गांव के सरकारी स्कूल है। जमीन पर बैठे बच्चे, हाथों में किताब और सिर पर खुला आसमान... ये तस्वीर यह बताने के लिए काफी हैं कि यहां के सरकारी स्कूल में बच्चे किन हालातों में शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं।  राजकीय प्राथमिक विद्यालय खेजडा का भवन जर्जर होने के कारण स्कूल के बच्चे ं स्कूल के सामने खुले आसमान के नीचे बैठकर पढाई करने को मजबूर हैं। बताया जा रहा है कि स्कूल की बिल्डिंग पिछले एक सालों से जर्जर अवस्था में है। बिल्डिंग की छत में जगह जगह बड़ी-बड़ी दरारें पड़ चुकी हैं। वहीं छत में जगह जगह सरिया दिखाई देने लगा है, विद्यालय  के अंदर जाना किसी खतरे से कम नहीं है। वहीं विद्यालय के  संस्था प्रधान ने  स्कूल को खुले आसमान के नीचे संचालित करना शुरू कर दिया। हाल यह है कि  बारिश,सर्दी,गर्मी में बच्चे खुले आसमान के नीचे पढ़ाई करने को मजबूर हैं, जिससे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती नजर आ रही है। वहीं बच्चों को भविष्य अंधकार में डूबता नजर आ रहा है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं । </p>
<p><strong>जिम्मेदार नहीं दे रहे ध्यान</strong><br />राजकीय प्राथमिक विद्यालय खेजडा के स्कूल के भवन की हालत देखकर बच्चों के अभिभावक अब अपने बच्चों को पढ़ने भेजने से कतराने लगे हैं। इसके बाद भी क्षेत्र के जनप्रतिनिधि और शिक्षा विभाग इस ओर ध्यान नहीं दे रहे है। फिलहाल वे सिर्फ आश्वासन देकर औपचारिकता पूरी कर रहे हैं। स्कूल के संस्था प्रधान  ने बताया कि स्कूल भवन की छत जर्जर हो चुकी है और कभी भी बड़ा हादसा होने का खतरा बना हुआ है कई बार उच्च अधिकारियों को लिखित में  अवगत कराया। वही बैठक के माध्यम से भी प्रस्ताव उच्च अधिकारियों को भेज रखा है  लेकिन फिर भी कोई पहल नहीं की गई है। </p>
<p><strong>30 साल पुराना भवन, हादसों को दे रहा न्योता</strong><br />इस बारे में स्थानीय लोगों का कहना है कि 30 साल पुराने इस स्कूल की हालत बेहद जर्जर हो चुकी है। इस कारण यहां कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। छत का प्लास्टर जगह जगह निकला हुआ है, जिससे भवन के अंदर कमरों में सीमेंट के टुकड़े गिरते हैं। छत और दीवारों में दरारें पड़ गई हैं, यहां बच्चों को भेजना खतरे से खाली नहीं है। स्कूल की हालत इतनी खराब है कि शिक्षक बाहर  बैठाकर बच्चों को पढ़ा रहे हैं।</p>
<p>विद्यालय भवन में जगह जगह दरारें चल रही हैं, वहीं छत में जगह जगह सरिया दिखाई दे रहा है। बच्चों को विद्यालय भेजने में भी डर लगता है हमारी मांग है कि विद्यालय का नया भवन निर्माण कराया जाए। <br /><strong>- घनश्याम एसएमसी अध्यक्ष </strong></p>
<p>विद्यालय भवन जर्जर है वहीं दीवारों में दरारें भी चल रही, जिससे बच्चों को विद्यालय भेजने में भी डर लगता है। मैंने विद्यालय भवन को लेकर विधायक को भी अवगत करवाया उन्होंने भी आश्वाशन दिया।  <br /><strong>- गोलू नागर वार्ड पंच खेजड़ा </strong></p>
<p>पूरा विद्यालय भवन जर्जर है जगह जगह प्लास्टर उखड़ रहा है, किसी दिन बच्चों पर गिर जाए तो  जिम्मेदार कौन है, अब तो बच्चों को विद्यालय में भेजने में भी डर लगता है कि कही कोई हादसा नहीं हो जाए लेकिन विद्यालय भवन को लेकर कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं । <br /><strong>- ओमप्रकाश नागर खेजडा  </strong></p>
<p>हमारे विद्यालय की बिल्डिंग क्षतिग्रस्त है, विद्यालय में आने में बहुत डर लगता है, हम बाहर बैठते हैं तो बहुत धूप लगती है। हम विद्यालय नया बनवाने की मांग करते हैं । <br /><strong>- हेमराज छात्र कक्षा 5</strong></p>
<p>हमें जर्जर विद्यालय में आने में डर लगता है और बाहर बैठ कर पढ़ाई करते है, जिससे हमारी पढ़ाई भी नहीं होती है हमारी मांग है हमारा विद्यालय नया बनवाए जाए। <br /><strong>- राधिका छात्रा कक्षा 5</strong></p>
<p>विद्यालय में कुल नामांकन 21 बच्चों का है और 15 बच्चे आंगनबाड़ी के आते हैं। कुल 36 बच्चे पढ़ाई करते हैं। पूरा विद्यालय का भवन जर्जर है जगह जगह दरारें चल रही है। वहीं छत में जगह जगह सरिया दिखाई दे रहा है। कभी भी भवन गिर सकता है। ऊपर से आदेश है कि क्षतिग्रस्त भवन में बच्चों को नहीं  इस लिए बच्चों को बाहर बैठा कर पढ़ना पड़ रहा है, जिससे बच्चों को पढ़ाई प्रभावित होती है।  मैंने कई  बार उच्च अधिकारियों को अवगत कराया लेकिन कोई समाधान नहीं हुआ। <br /><strong>- सुरेश कुमार, संस्था प्रधान</strong></p>
<p>मेरे द्वारा विद्यालय का अवलोकन किया गया है, विद्यालय का भवन क्षतिग्रस्त है। इसको लेकर उच्च अधिकारियों को अवगत करवा रखा है । <br /><strong>- रामचरण मेहर,पीईईओ कामखेड़ा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>झालावाड़</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 03 Mar 2025 16:03:42 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>कही घी घणां कही न मुट्ठीभर चणा: गोरधनपुरा में 4 बच्चों को पढ़ा रहे 6 शिक्षक, गौणदी में 2 बच्चों पर दो शिक्षक </title>
                                    <description><![CDATA[शिक्षकों की कमी से अध्यापन बाधित। 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/somewhere-there-is-a-lot-of-ghee-and-somewhere-there-is-a-handful-of-chana/article-96227"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-11/257rtrer-(2)18.png" alt=""></a><br /><p>इटावा। इटावा में सरकारी शिक्षा का सिस्टम भी अलग ही इटावा ब्लॉक में शिक्षा व्यवस्था के लिए हालात इस कदर है कि कही नामांकन है छात्रों का लेकिन शिक्षक नहीं है और कही नामांकन नहीं है, लेकिन फिर भी शिक्षक है। ऐसी स्थिति में इटावा क्षेत्र में सरकारी सिस्टम की खामी नजर आती है जो शिक्षा व्यवस्था की पोल को खोल रही है। कही जर्जर भवन में स्कूल चल रहे है, कही विद्यार्थी भी नहीं होने के बाद भी स्कूल बन रहे हैं। क्षेत्र में हाड़ौती की वह कहावत चरितार्थ हो रही है कि कही घी घणों कही न मुट्ठी भर चना वाली हो रही है। इटावा ब्लॉक में 199 प्राथमिक, उच्च प्राथमिक और सीनियर सेकेंड्री स्कूल है। जिसमे 18773 बालक और बालिकाओं का नामांकन है और अध्ययन करती है। क्षेत्र के 199 स्कूलों में शिक्षकों के 1505 पद है जिसमे से 1223 कार्यरत है और 282 पद खाली चल रहे हैं। </p>
<p><strong>गोरधनपुरा में 4 बच्चों को पढ़ा रहे 6 शिक्षक</strong><br />इटावा ब्लॉक के खातौली ग्राम पंचायत के गोरधनपुरा गांव में करीब 50- 60 घरों की बस्ती है, लेकिन गांव के सरकारी उच्च प्राथमिक विद्यालय में सिर्फ 4 बच्चों का दाखिला है उनको पढ़ाने के लिए भी 6 शिक्षक कार्यरत है। यह स्थिति गोरधनपुरा की नहीं है, इस तरह के 17 विद्यालय है जिनमें बच्चों से ज्यादा शिक्षक हैं, तो कही बच्चे ही नहीं है, लेकिन स्कूल को खोलने के लिए ही शिक्षक है। </p>
<p><strong>इटावा उच्च प्राथमिक द्वितीय में नामांकन</strong><br />इटावा नगर के गेता रोड पर स्थित राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय द्वितीय में 285 बच्चों का नामांकन है । शिक्षा विभाग ने 14 पद स्वीकृत कर रखे लेकिन आधे पद खाली है। प्रधानाध्यापक  सहित 7 पद रिक्त है। ऐसे में विद्यालय में पढ़ाई  नहीं हो पाती जिसके चलते नामांकन बढ़ नहीं रहा। इटावा तरह राजकीय सीनियर विद्यालय इटावा में 1052 बच्चों का नामांकन है 44 पद स्वीकृत है लेकिन 30 ही नियुक्त है 14 पद रिक्त है। राजकीय सीनियर विद्यालय निमोला में 373 नामांकन है 17 पद स्वीकृत हैं लेकिन 10 ही कार्यरत हे 7 रिक्त है। यही स्थिति सीनियर विद्यालय पीपल्दा में 11 पद रिक्त है। इसी तरह  ढ़ीपरी चंबल, महात्मा गांधी करवाड़, सीनियर विद्यालय रामपुरिया धाबाई , बम्बुलियाकला,  डूंगरली विद्यालयों की है। इसके साथ संस्कृत विद्यालयों की भी यही स्थिति है जिसके चलते क्षेत्र में जहा नामांकन है वहां शिक्षकों की कमी होने के चलते पढ़ाई नहीं हो पा रही ।</p>
<p><strong>गौणदी में 2 बच्चों पर दो शिक्षक , डेढ़ दर्जन स्कूलों की यही हालत</strong><br />गणेशगंज ग्राम पंचायत की गौणदी राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय में सिर्फ 2 शिक्षक हैं। वही पढ़ाने के लिए भी सरकार ने दो अध्यापक लगा रखे है। इसके अलावा पुराना भवन जर्जर होने के चलते नया भवन का निर्माण भी चल रहा है। विद्यालय के शिक्षक रामगोपाल मीना बताते है कि विद्यालय का भवन जर्जर है, वही इटावा नजदीक होने के कारण ज्यादातर बच्चे इटावा पढ़ने जाते है। इसलिए विद्यालय में नामांकन नहीं बढ़ पा रहा है। इसी तरह फरेरा में 2 बच्चों पर 1 शिक्षक है। शेरगंज में 2 बच्चों पर 2 शिक्षक है। हनुमानपुरा में 4 बच्चे, शहनाहली में 4 नामांकन, माधोनगर 5, जयनगर में 7, खेड़ली नोनेरा में 7, सब्जीपुरा में 7, मीना रोहिली 8, आरामपुरा में 9, बम्बुलिया खुर्द 9, किशनपुरा में 10,कोल्हूखेड़ा में 10 बच्चों के स्कूलों में नामांकन है। </p>
<p><strong>स्कूल में किसी भी बच्चे का दाखिला नहीं</strong><br />ब्लॉक के शहनावदा ग्राम पंचायत के कंवरपुरा और निमोला ग्राम पंचायत के शेरगढ़ स्कूल में किसी भी बच्चे का दाखिला नहीं है। नामांकन शून्य है लेकिन फिर भी शिक्षक लगा रखे है।</p>
<p><strong>इनका कहना</strong><br />क्षेत्र में 1505 पद शिक्षकों के स्वीकृत हैं, जिनमें 282 रिक्त है। 18773 बच्चों का 199 स्कूलों में नामांकन है। जिन विद्यालयों में नामांकन कम है वहां नियुक्त शिक्षकों को नामांकन बढ़ाने के लिए निर्देशित किया हुआ है। अगर ऐसे विद्यालयों में नामांकन नहीं  बढ़े तो भविष्य में मर्ज होंगे। जहां शिक्षक कम है वहां नोडल प्रभारी को व्यवस्थार्थ लगाने को लेकर भी निर्देशित किया हुआ है । वही सभी विषयों से उच्च अधिकारियों को अवगत करा रखा है। <br /><strong>- इंदु हाडा, मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी इटावा ब्लॉक</strong></p>
<p><strong>क्या कहते हैं ग्रामीणं</strong><br />गौणदी गांव करीब 100 घरों की बस्ती है, लेकिन इस गांव के स्कूल भवन की बिल्डिंग जर्जर हो गई थी, जिसके चलते ग्रामीण बच्चे नहीं भेजते। नवीन भवन का कार्य चल रहा है, जल्द ही पूर्ण हो जाएगा। वही इटावा नजदीक होने के कारण ग्रामीण निजी विद्यालय में भेज देते हैं। अभी गत दिनों ग्रामीणों की बैठक लेकर नामांकन बढ़ाने को लेकर भी चर्चा की थी। <br /><strong>- हेमंत बैरवा, सरपंच गणेशगंज</strong></p>
<p>पीपल्दा विद्यालय में  400 के करीब बच्चे हैं, लेकिन 23 पद शिक्षकों के स्वीकृत होने के बाद भी 12 ही कार्यरत है, 11 रिक्त है जिसके चलते विद्यालय में अध्ययन नहीं हो पाता। रिक्त पदों को भरा जाए ताकि बच्चों की पढ़ाई हो सके और निजी विद्यालय में नहीं जाना पड़े।<br /><strong>- नरोत्तम विकट, पीपल्दा ग्रामीण</strong></p>
<p>गोर्वधनपुरा करीब 60-70 घरों की बस्ती है, लेकिन यहां से खातौली नजदीक है, सरकारी स्कूल में पढ़ाई कम होती है। अध्यापक भी समय पर नहीं आते ऐसे में लोग बच्चों को स्कूल में नहीं भेजते। साथ स्कूल के अंदर बाउंड्री में जंगली पेड़ पौधे लगे हुए हैं । <br /><strong>- महेंद्र नागर ग्रामीण  गोवर्धनपुरा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 29 Nov 2024 15:39:22 +0530</pubDate>
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                <title>समय से विद्यालय नहीं पहुंच रहे शिक्षक</title>
                                    <description><![CDATA[स्कूल में पंजीकृत कुल 1000 बच्चे हैं। समय पर शिक्षकों के स्कूल नहीं आने की वजह से बच्चे इधर-उधर खेलते-घूमते रहते हैं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/baran/teachers-not-reaching-school-on-time/article-88092"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-08/6633-copy11.jpg" alt=""></a><br /><p>कस्बाथाना। ग्रामीण क्षेत्र में शिक्षा व्यवस्था का बुरा हाल है। कई विद्यालयों में शिक्षकों का समय से नहीं पहुंचने का सिलसिला जारी है। जिससे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। इसके बाद भी लापरवाह शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई महज खानापूर्ति के लिए की जाती है। सरकार शिक्षा के प्रति सजग है और कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित ना रहे इसके लिए प्रयास कर रही है। कस्बाथाना  के राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में भी अध्यापक समय पर स्कूल नहीं पहुंचते हैं। यहां एक वाइस प्रधानाचार्य और शिक्षक पदस्थ हैं। स्कूल में पंजीकृत कुल 1000 बच्चे हैं। समय पर शिक्षकों के स्कूल नहीं आने की वजह से बच्चे इधर-उधर खेलते-घूमते रहते हैं। इन बच्चों का भविष्य अंधकारमय है। शासन-प्रशासन व जनप्रतिनिधि इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं। दो साल से यंहा पर प्रधानाचार्य भी नहीं हैं। शिक्षा विभाग की लापरवाही के कारण अभिभावकों को परेशानी हो रही है। बच्चों का भविष्य कोचिंग के भरोसे चल रहा हैं। ग्रामीण मनीस, राजकुमार, सोनू, मोहन, रानू , सुरज , पंकज, कालू,सहित दर्जनों ग्रामीणों ने मांग की है कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार किया जाए। </p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />समय पर शिक्षकों के स्कूल नहीं आने की वजह से बच्चे इधर-उधर खेलते-घूमते रहते हैं। इन बच्चों का भविष्य अंधकारमय है। <br /><strong>- राजकुमार, ग्रामीण। </strong></p>
<p>शिक्षा विभाग की लापरवाही के कारण अभिभावकों को परेशानी हो रही है। बच्चों का भविष्य कोचिंग के भरोसे चल रहा हैं। <br /><strong>- पंकज, अभिभावक। </strong> </p>
<p>कस्बाथाना विद्यालय में शिक्षक समय पर नहीं आने का मामला सामने आया है। ऐसा मामला सामने आता है तो कार्यवाही की जाती है। समय पर आने और विद्यालय के सभी शिक्षकों को निर्देश दिया जाएगा। <br /><strong>- पीयूष शर्मा, जिला शिक्षा अधिकारी, बारां।  </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बारां</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 19 Aug 2024 16:47:17 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>शिक्षा की राह हुई आसान, शिक्षकों ने बदली स्कूल की सूरत</title>
                                    <description><![CDATA[स्कूल में एडमिशन के लिए लगी रहती है कतार।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jhalawar/the-path-of-education-has-become-easier--teachers-have-changed-the-face-of-the-school/article-87551"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-08/4111u1rer-(2)19.png" alt=""></a><br /><p>मनोहरथाना। शिक्षक चाहे तो स्कूल का माहौल बदल सकते है। ऐसा ही कुछ प्रयास किया झालावाड़ के मनोहरथाना ब्लॉक के राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय बांसखेड़ी मेवातियां के एक सरकारी स्कूल के संस्था प्रधान ने और उसमें सहयोग दिया उनके शिक्षकों ने। सभी ने मिलकर स्कूल की तस्वीर ही बदल दी। स्कूल और शिक्षा व्यवस्थाओं सुधारने के जुनून के साथ इन्होने सरकारी स्कूल का कायाकल्प ही कर दिया। यह स्कूल है राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय बांसखेड़ी मेवातियां। इस स्कूल के हर कमरे में ना केवल सीसीटीवी कैमरे लगे हुए बल्की पूरा विद्यालय पेड़ पौधे से हरा भरा है। स्कूल के कार्यवाहक संस्था प्रधान सुनील शर्मा और यहां के शिक्षकों ने कोविड काल के बाद से एक सरकारी स्कूल को निजी स्कूलों से कहीं आगे ले जाकर खड़ा कर दिया है। यही वजह है कि स्कूल में एडमिशन के लिए कतार लगी रहती है।</p>
<p><strong>विद्यालय के हर क्लासरूम में सीसीटीवी</strong><br />निजी स्कूलों में सीसीटीवी कैमरे लगे होना कोई अचरज की बात नहीं लेकिन अगर हमें पता चले कि किसी सरकारी स्कूल में भी सीसीटीवी कैमरे हैं तो आश्चर्य होगा ही। विद्यालय के कार्यवाहक संस्था प्रधान सुनील शर्मा और भामाशाह अध्यापकों की मदद से पूरे विद्यालय में 27 सीसीटीवी कैमरे यहां लगाए गए हैं। वहीं विद्यार्थियों में पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने के लिए स्कूल में पौधे लगाए गए, जिससे स्कूल में हर तरफ हरियाली फैली हुई है। विद्यालय में अर्जुन, जामुन, शीशम, आम, नीम पीपल इत्यादि के बड़े वृक्ष व छोटे पौधों की बात हों तो गुलाब, रजनीगंधा चमेली, मोगरा, गुलदाँवदी, हजारा साथ ही एक किचन गार्डन हैं जिसमे मिर्ची, टमाटर बेंगन इत्यादि के पौधे लगे हैं। स्कूल की दशा सुधारने के लिए पहले पढ़ाई का माहौल बनाया गया। इसके बाद स्कूल में बदलाव का दौर शुरू हुआ। स्कूल में पानी की व्यवस्था तो थी लेकिन लगता था सालों से साफ सफाई ही नहीं हुई हो। पानी के नल इतने ऊंचे लगे थे कि छोटे बच्चों के लिए वहां तक पहुंचना संभव नहीं था। इसे ने स्कूल में पीने के पानी के लिए वाटर कूलर लगा कर छोटे बच्चों के लिए यहां अलग से नल लगवाए गए जिससे उनकी परेशानी खत्म हुई।</p>
<p><strong>एमडीएम में स्वच्छता का रखते विशेष ख्याल, परोसे जाते पौष्टिक आहार</strong><br />कई विद्यालयों में स्वच्छता का ख्याल नहीं रखा जाता है। कूड़े कचरों से भरा रसोई घर और चारों ओर फैली गंदगी ही देखने को मिलती है। जबकि  राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, बांसखेड़ी मेवातियां में स्वच्छता का विशेष ख्याल रखा जाता है और पौष्टिक भोजन परोसे जाते हैं। खासकर एमडीएम बनाने और परोसने साफ-सफाई पर विशेष ध्यान दिया जाता है। इस विद्यालय में रसोईया प्रति दिन रसोई घर की साफ सफाई  करते हैं। यहां बच्चों का मिड-डे मील बनाने के लिए पति पत्नी  रसोईया प्रतिनियुक्त हैं। विद्यालय में  मेन्यू के मुताबिक भोजन में परोसा जाता हैं। चावल बनाने से पहले उसकी अच्छी तरह से सफाई कर तीन बार पानी से चावल को धोए जाने की परंपरा है। बच्चों को गुरुवार को पौष्टिक आहार के रूप में केला, सेब परोसे जाते हैं। भोजन से पहले बच्चों को साबुन से हाथ की सफाई कराई जाती है। यानी कि यहां साफ सफाई पर विशेष ध्यान दिया जाता है। ताकि बच्चों में किसी भी तरह की बीमारी नहीं फैल सके।</p>
<p><strong>लाइब्रेरी के साथ कम्प्यूटर लैब की सुविधा भी</strong><br />स्कूल में विद्यार्थियों के लिए लाइब्रेरी की व्यवस्था की गई है। साथ ही प्रोजेक्टर के साथ कम्प्यूटर सिस्टम भी लगाए गए हैं। विद्यालय में बिजली जाने पर पढ़ाई बाधित नहीं हो इसलिए यूपीएस की व्यवस्था भी की गई है। खास बात यह है कि स्कूल के बदलते स्वरूप को देखते हुए विद्यालय में डिजिटल क्लास के माध्यम से बच्चो को पढ़ाए जाता है जिससे बच्चों को उच्च गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा मिल सके।  </p>
<p><strong>अध्यापकों की कमी के बाद भी बच्चों का परिणाम सबसे ज्यादा</strong><br />वैसे तो राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय बांसखेड़ी मेवातियान स्कूल में अभी 485 बच्चों का नामांकन है। साथ ही पूरे स्कूल में अनुशासन है। वहीं विद्यालय में कुल स्वीकृत पद 23 हैं, लेकिन अभी विद्यालय में कुल13 कार्यरत है, लेकिन उसके बाद भी बांसखेड़ी मेवातियान विद्यालय में हर साल कक्षा 10 व 12 मे ब्लॉक स्तर पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराने मे सफल रहा हैं। सत्र 2023- 24 में भी पुष्पेंद्र जोगी ने कक्षा 12 वी मे ब्लॉक स्तर पर सरकारी विद्यालयों में दूसरा स्थान प्राप्त किया। वही स्कूल मे 9 से 12 तक के हर कक्षा कक्ष मे संसार,भारत व राजस्थान के नक्शे लगे हैं ताकि छात्र छात्राएं इनके राजनैतिक स्वरूप की जानकारी लें सके।</p>
<p><strong>इनका कहना है...</strong><br />राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय बांसखेड़ी मेवातियान विद्यालय के कंगुरे हैं, विद्यालय  की नींव की ईंटे विद्यालय का स्टाफ हैं, उन्ही के सहयोग से ये बदलाव आ पाया हैं। 12 साल से स्टाफ साथी प्रताप सिँह का भी विद्यालय विकास मे बराबरी का योगदान हैं।<br /><strong>- सुनील कुमार शर्मा,कार्यवाहक प्रधानाचार्य, राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय बांसखेड़ी मेवातियां</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>झालावाड़</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 12 Aug 2024 17:50:01 +0530</pubDate>
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                <title>नालियां बंद होने से तालाब बना बालापुरा स्कूल</title>
                                    <description><![CDATA[विद्यालय परिसर में पानी भर जाने से बच्चों की शिक्षण व्यवस्था बाधित  हो रही है। 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/baran/balapura-school-became-a-pond-due-to-blocked-drains/article-57093"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-09/naliya-avrudh-hone-s-talab-bna-balapura-vidhyalaya...nahargar,-baran-news-14-09-2023.jpg" alt=""></a><br /><p>नाहरगढ़। नाहरगढ क्षेत्र में ग्राम पंचायत वार्ड एक बालापुरा के राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय परिसर में नालियों और बरसात का गंदा पानी विद्यालय परिसर में भर गया। जिससे विद्यालय में आने वाले विद्यार्थियों, अध्यापकों और अभिभावकों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। अभी विद्यालय के पास ही सड़क निर्माण कार्य चल रहा है। जिससे नालियां अवरूद्ध हो गई है। ठेकेदार द्वारा बरसात के पानी की निकासी की उचित व्यवस्था भी नहीं करने के कारण पूरा गंदा पानी विद्यालय परिसर में भर गया है। कारण विद्यार्थियों को विद्यालय में आने में बड़ी दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है और छोटे बच्चे तो स्कूल आने में भी कतराने लगे हैं। जल भराव होने से विद्यालय में कीचड़ हो गया है। जिससे कभी कभी तो विद्यार्थी फिसल कर कीचड़ में भी गिर जाते हैं और उन्हें वापस घर जाना पड़ जाता है। जिससे  उनकी पढ़ाई बाधित होती है।</p>
<p><strong>विद्यालय की पट्टियां भी टूटी, हादसे का अंदेशा</strong><br />विद्यालय में  एक भवन की पट्टियां भी टूटी हुई है। जिनको पाइपों के सहारे रोका गया है कब अनहोनी घटना हो जाए कुछ कहा नही जा सकता और दूसरे भवन की छत भी चलनी की तरह टपकती है, ऐसे में विधार्थियों और अध्यापकों की  जान पर हमेशा खतरा मंडराता रहता है ऐसे में करें तो क्या करें बड़ी विषम परिस्थिति है। अभिभावक भी अपने बच्चों को विद्यालय भेजने में कतराने लगे है। </p>
<p><strong>शिक्षण व्यवस्था भी हो रही बाधित</strong><br />विद्यालय परिसर में पानी भर जाने से बच्चों की शिक्षण व्यवस्था बाधित  हो रही है। विद्यालय परिसर में गंदा पानी भरने से कई प्रकार की मौसमी बीमारियों का खतरा भी  बढ़ गया है। इस समस्या को लेकर विद्यालय के शिक्षक ग्राम पंचायत में सरपंच को लिखित में  कई बार शिकायत भी  कर चुके है लेकिन कोई समाधान नहीं हुआ। </p>
<p>विद्यालय में पानी भरा हुआ है। जिससे बालकों को विद्यालय भेजने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। <br /><strong>- रामप्रसाद, अभिभावक। </strong></p>
<p>सड़क निर्माण के चलते नालियां अवरूद्ध हो गई है। जिससे विद्यालय परिसर में पानी भर गया है। जिसका खामियाजा विद्यार्थियों को भुगतना पड़ रहा है।<br /><strong>- रामलाल, ग्रामीण। </strong><br />    <br />अभी सड़क निर्माण का कार्य चल रहा है। जिससे नालियां अवरुद्ध हो गई हैं। समस्या को लेकर अधिकारियों को अवगत करा दिया है। <br /><strong>- बृजमोहन वर्मा, प्रधानाध्यापक , राअप्रावि बालापुरा। </strong></p>
<p>ग्रामीण और अभिभावकों ने समस्या से अवगत कराया है। जल्द ही समस्या का समाधान किया जाएगा। <br /><strong>- सोहनलाल सहरिया, सरपंच, नाहरगढ। </strong></p>
<p>अभी विद्यालय के पास ही सड़क निर्माण कार्य चल रहा है। जिससे नालियां अवरूद्ध हो गई है। ठेकेदार को समस्या के समाधान के निर्देश दिए है। जल्द ही विद्यालय में जलभराव की समस्या का समाधान हो जाएगा। <br /><strong>- रामकुमार सहरिया, ग्राम विकास अधिकारी, नाहरगढ। </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बारां</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 14 Sep 2023 16:32:17 +0530</pubDate>
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                <title>ठांडी गांव में पेयजल को तरसे बच्चे</title>
                                    <description><![CDATA[यहां बच्चो को पानी पिने के साथ साथ बनने के लिए पानी की व्यवस्था नहीं होने से बच्चे भी परेशान होते हे ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jhalawar/children-yearn-for-drinking-water-in-thandi-village/article-51392"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-07/thandi-gaanv-me-peyjal-ko-tarse-bachhe...chandipur,-jhalawar-news-10-07-2023.jpg" alt=""></a><br /><p>चंदीपुर। क्षेत्र के राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय टांडी में स्कूल में लगी ट्यूबवेल,हेडपंप खराब होने के कारण विद्यालय में पानी की समस्या के चलते छात्र-छात्राओं की शिक्षण व्यवस्था प्रभावित हो रही है जिसके कारण अध्यनरत बच्चों समेत एमडीएम भोजन के लिए भी पानी की विकट समस्या से गुजरना पड़ रहा है। विद्यालय में पेयजल समस्या के चलते कई छात्र-छात्राओं को स्कूल समय में पानी के लिए घर जाना पड़ता है, या फिर गांव में लगे हेडपंप पर बोटल लेकर जाना पड़ता है जिसके बच्चों की पढ़ाई भी बाधित हो रही है।   </p>
<p>टांडी स्कूल में 221 का नामंकन है, यहां बच्चो को पानी पिने के साथ साथ बनने के लिए पानी की व्यवस्था नहीं होने से बच्चे भी परेशान होते हे साथ ही एमडीएम भी लेट बनता है हमारे यहां ट्यूबवेल और हेड पम्प खराब होने के कारण बच्चों को पानी के लिए पुरे गांव में एक ही हेडपंप चालू है, उसी हेडपंप पर बच्चे पानी पिने जाते है जिससे बच्चों की पढ़ाई बाधित हो रही है। मैंने पानी की समस्या को लेकर कई बार सरपंच को भी अवगत करा दिया है लेकिन अभी तक स्कूल में इस ओर किसी ने ध्यान नहीं दिया वैसे तो टांडी गांव जलजीवन मिशन के अंतर्गत आता है लेकिन डेड साल बीत जाने के बाद भी यहां जलजीवन मिशन का काम अभी तक शुरू नहीं हुआ। <br /><strong>- रमेश चंद यादव, संस्था प्रधान टांडी </strong></p>
<p>जलजीवन मिशन का टांडी गांव में टेंडर हो चुका है जिससे जल्दी ही जलजीवन मिशन द्वारा स्कूल में कनेक्शन दे दिया जायेगा जिससे बच्चो की समस्या दूर हो जायेगी। <br /><strong>- अजय सिंह मीणा कनिष्ट अभियंता</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>झालावाड़</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 10 Jul 2023 17:45:32 +0530</pubDate>
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                <title>पैन-इंडिया हाइब्रिड एजुकेशन सिस्टम की शुरुआत करेगा एडुटेक फर्म उत्कर्ष क्लासेस</title>
                                    <description><![CDATA[सरकारी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करवाने वाले खंड को और मजबूत बनाने के लिए; टियर II और III शहरों में शिक्षकों को नियुक्त करेगा]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world-of-education/edutech-firm-utkarsh-classes-to-launch-pan-india-hybrid-education-system/article-16312"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-07/216.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। उत्कर्ष क्लासेस एंड एडुटेक प्रा. लि. ने 26 जुलाई, 2022 को अपनी हाइब्रिड शिक्षा प्रणाली में तेजी लाने हेतु बनाई योजना की घोषणा की जिसके तहत कंपनी ने हाल ही में जोधपुर में अपने 17वें ऑफलाइन सेंटर का उद्घाटन किया है। यह केंद्र सशस्त्र बलों में शामिल होने और संयुक्त रक्षा सेवा (सीडीएस) परीक्षा, वायु सेना, आम प्रवेश परीक्षा (एएफसीएटी), राष्ट्रीय रक्षा अकादमी और नौसेना अकादमी परीक्षा (एनडीए) तथा भारतीय तट रक्षा गार्ड नाविक टेस्ट (आई सी जी एन टी) जैसी परीक्षाओं में शामिल होने के इच्छुक अभ्यर्थियों की तैयारी करवाने में सक्रिय भूमिका में है।<br /><br />उत्कर्ष क्लासेस के संस्थापक और निदेशक डॉ. निर्मल गहलोत ने उत्साहित होकर बताया कि “हम अपने पाठ्यक्रमों में विस्तार करने की दिशा में अग्रसर हैं तथा ऑफलाइन और ऑनलाइन दोनों माध्यमों से विद्यार्थियों को विविध पाठ्यक्रम प्रदान कर रहे हैं। वर्तमान में, राजस्थान के जयपुर व जोधपुर में 17 केंद्रों के साथ हमारी सशक्त ऑफ़लाइन उपस्थिति है जिसे आगे बढ़ाते हुए हम अगले चरण में मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार और हरियाणा में भी अपनी ऑफ़लाइन उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं। इस योजना के अंतर्गत इन राज्यों में डिजिटल स्टूडियो को विस्तारित करते हुए टियर II और III शहरों में 100 से अधिक ऑफलाइन कोचिंग सेंटर खोलना शामिल है जोकि वहाँ के विद्यार्थियों एवं अभिभावकों तक ऑफलाइन पहुँच में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।<br /><br />एडुटेक उद्योग में छंटनी के मद्देनजर, उत्कर्ष क्लासेस ने वित्त वर्ष 2023 में विशेष रूप से टियर II और III शहरों में शिक्षक भर्ती की योजना बनाई है जिसके अंतर्गत अखिल भारतीय स्तर पर श्रेष्ठ शिक्षकों के चयन हेतु यूट्यूब पर 'टीचिंग टैलेंट हंट' अभियान की शुरुआत की है। शिक्षक वर्ग के अलावा कंपनी में वरिष्ठ नेतृत्व एवं अन्य कर्मचारियों सहित 500 सदस्यों की भर्ती करने की भी योजना है।<br /><br />उत्कर्ष क्लासेस में वर्ष 2018 में ऑनलाइन कोर्सेस में प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों की संख्या 6000 थी परन्तु वर्तमान में लगभग 1.5 मिलियन है और लगभग 27,000 ऑफ़लाइन विद्यार्थी हैं, जो विभिन्न पाठ्यक्रमों के साथ सरकारी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में जुटे हुए हैं। कंपनी ने किफायती दरों पर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए ऑनलाइन कोर्सेस लॉन्च कर रखा है  जिनका औसत वार्षिक शुल्क 2,500 रुपये है।<br /><br />डॉ. गहलोत ने कहा कि ”निकट भविष्य में एजुकेशन, हाइब्रिड मॉडल के साथ मौजूदा गति से और अधिक तेज होने की उम्मीद है क्योंकि वे विद्यार्थी और अभिभावक जो ऑफ़लाइन कोचिंग लेने में असमर्थ हैं, वे ऑनलाइन माध्यम का विकल्प चुन सकते हैं। हाइब्रिड लर्निंग मॉडल में स्टूडियो बनाकर कक्षाओं को अधिक आकर्षक, व्यावहारिक और सुलभ बनाकर विद्यार्थियों के सीखने की क्षमता को बढ़ाया सकता है। हम शिक्षा के तेजी से आगे बढ़ते युग में हैं जहाँ कक्षाओं या पाठ्यपुस्तकों से सीखने तक ही सीमित नहीं हैं और इसलिए हाइब्रिड लर्निंग एनवायरनमेंट शिक्षा का एक अभिन्न अंग बनता जा रहा है। जैसे-जैसे हम शिक्षा को सुलभ बनाने की कल्पना करते हैं तो देश भर के शिक्षक ऑनलाइन माध्यम से छात्रों से जुड़ने के सर्वोत्तम तरीकों की तलाश कर रहे हैं लेकिन पारंपरिक कक्षाओं में वापस जाने के बजाय, हम हमारे विद्यार्थियों की जरूरतों को पूरा करने के लिए विभिन्न शैक्षणिक मॉडल्स का निर्माण कर रहे हैं।” उत्कर्ष क्लासेस एंड एडुटेक प्रा. लि. ने विभिन्न ऑफलाइन और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स, जैसे- ऑफलाइन सेंटर, एप यूजर्स, यूट्यूब चैनल, टेलीग्राम, फेसबुक और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर 22 मिलियन से अधिक विद्यार्थियों को अपने साथ जोड़ा है।<br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>शिक्षा जगत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 26 Jul 2022 18:50:59 +0530</pubDate>
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