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                <title>education system - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>यूजीसी-नेट की तीन परीक्षाएं रद्द होने पर कांग्रेस का हमला, कहा- ‘पेपर लीक नक्सल’ देश के लिए बड़ा खतरा</title>
                                    <description><![CDATA[कांग्रेस ने यूजीसी-नेट की तीन परीक्षाएं रद्द करने को लेकर केंद्र सरकार और एनटीए पर निशाना साधा है। पार्टी ने 'पेपर लीक नक्सल' को देश का सबसे बड़ा खतरा बताते हुए परीक्षा व्यवस्था की जवाबदेही तय करने, गलती करने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई और प्रभावित छात्रों को मुआवजे देने की मांग की है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/congress-attacks-on-cancellation-of-three-ugc-net-exams-says-paper/article-163158"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-08/uday-bhanu.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस ने यूजीसी-नेट की तीन परीक्षाओं को करीब दो महीने बाद रद्द करने को लेकर केंद्र सरकार और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) पर सवाल उठाते हुए कहा है कि आज देश में 'पेपर लीक नक्सल' ही सबसे बड़ा खतरा बन गया है और इसको खत्म करने की जरूरत है। युवा कांग्रेस अध्यक्ष उदयभानु चिब तथा कांग्रेस की वरिष्ठ नेता डॉ. चयनिका उनियाल ने सोमवार को यहां पार्टी मुख्यालय में संवाददाता सम्मेलन में कहा कि यूजीसी-नेट परीक्षा होने के दो महीने बाद एनटीए को अपनी गलती का एहसास हुआ और अब तीन पेपर दोबारा कराने की बात कही जा रही है। उन्होंने कहा कि जब एनटीए को अपनी गलती पता लगाने में दो महीने लग गए तो न जाने और कितनी गलतियां होंगी, जिनसे छात्रों का भविष्य खतरे में पड़ सकता है।</p>
<p>युवा कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि छात्रों से परीक्षाओं के नाम पर बड़ा शुल्क लेने का कोई औचित्य नहीं है इसलिए छात्रों से सभी परीक्षाओं के आवेदन के लिए केवल एक रुपये शुल्क लिया जाना चाहिए। चिब ने कहा कि शायद भाजपा सरकार इन गलतियों को किस्तों में सामने लाना चाहती है, ताकि जेन-जी का गुस्सा केंद्र सरकार पर न फूटे। उन्होंने कहा कि जब जंतर-मंतर पर छात्र प्रदर्शन कर रहे थे तो कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा था कि धर्मेंद्र प्रधान का हटना पहला कदम है, आखिरी नहीं और आज वही हो रहा है। जब तक पूरे सिस्टम में जवाबदेही तय नहीं होगी ऐसी घटनाएं होती रहेंगी।</p>
<p>उन्होंने कहा कि देश के युवा जब केंद्र सरकार से जवाबदेही मांग रहे थे तब प्रधानमंत्री और गृहमंत्री 20 दिन तक सदन में नहीं आए। ऐसे में उनसे जवाबदेही की उम्मीद नहीं की जा सकती। उन्होंने कहा कि देश की शिक्षा व्यवस्था को ठीक करना उनकी क्षमता से बाहर है लेकिन जब देश की जमीन अपने मित्र अडानी को देने की बात आती है तो प्रधानमंत्री से कोई गलती नहीं होती लेकिन छात्रों के मुद्दे आते ही सरकार का प्रदर्शन शून्य हो जाता है।</p>
<p>डॉ.उनियाल ने कहा कि शिक्षा मंत्रालय को समझना होगा कि मामला सिर्फ प्रश्नपत्र और उत्तर पुस्तिका से जुड़ा नहीं है, बल्कि छात्रों के भावनात्मक और आर्थिक नुकसान से भी जुड़ा है। सवाल है कि तीन परीक्षाएं रद्द की गईं तो क्या ऐसी गंभीर गलती करने वाले अधिकारियों और विशेषज्ञों पर कार्रवाई होगी, क्या उनके नाम सार्वजनिक किए जाएंगे, क्या छात्रों को सरकार की ओर से हर्जाना दिया जाएगा और जिन छात्रों की प्रवेश की समय-सीमा निकल गई है, क्या उन्हें मुआवजा मिलेगा।</p>
<p>उन्होंने कहा कि जिस व्यवस्था से छात्रों का भविष्य बर्बाद हो रहा है, उस पर जवाब देना प्रधानमंत्री की जिम्मेदारी है। उनका कहना था कि एनटीए ने अपनी प्रेस विज्ञप्ति में स्वीकार किया है कि यूजीसी-नेट के प्रश्नपत्र में वैज्ञानिकों के नामों की वर्तनी, किताबों के शीर्षक और उच्चारण तक में गलतियां थीं। उन्होंने फिर सवाल किया कि प्रश्नपत्र तैयार करने वाले कौन थे, छात्रों के समय की कीमत कौन चुकाएगा, प्रश्नपत्र की जांच किसने की, उच्चारण का सत्यापन किसने किया और अंतिम मंजूरी किसने दी। उनका कहना था कि इसे महज एक भूल कहना उचित नहीं है और सवाल उठता है कि क्या पूरी परीक्षा प्रणाली ही विफल हो चुकी है। सरकार को इस पर जवाब देना चाहिए।</p>
<p>डॉ. उनियाल ने उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में छात्रों के प्रदर्शन का भी जिक्र किया और कहा कि जेन-अल्फा के बच्चे सड़क पर उतरकर अपने हक की मांग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि छात्राओं का आरोप है कि स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी है, बोर्ड परीक्षा की तैयारी नहीं कराई जा रही, बच्चों को खराब खाना दिया जाता है और बीमार पड़ने पर इलाज तक नहीं मिलता। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार दावे तो बहुत करती है, लेकिन स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं तक का अभाव है और बच्चों को शिक्षा के साथ मूलभूत सुविधाओं के लिए भी संघर्ष करना पड़ रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 17 Aug 2026 19:02:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>UGC-NET की 3 परीक्षाएं दोबारा कराने पर भड़के राहुल, बोले- धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा पहला कदम था,आखिरी नहीं ; NTA की गलती की सजा छात्र क्यों भुगतें</title>
                                    <description><![CDATA[यूजीसी-नेट की समाजशास्त्र, अंग्रेजी और वाणिज्य विषयों की परीक्षाएं दोबारा कराने के एनटीए के फैसले पर विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जवाब मांगा है। उन्होंने आरोप लगाया कि गलती एनटीए की है, लेकिन इसकी सजा छात्रों को भुगतनी पड़ रही है। राहुल ने शिक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए एनटीए की जवाबदेही तय करने की मांग की।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/angry-over-re-conducting-of-3-ugc-net-exams-rahul-said/article-163105"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/rahul-gandhi6.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष एवं लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने यूजीसी-नेट की समाजशास्त्र, अंग्रेजी और वाणिज्य विषयों की परीक्षा दोबारा कराने के एनटीए के फैसले पर केंद्र से जवाब मांगा है। राहुल गांधी ने सोशल मीडिया एक्स पर सोमवार को कहा कि इन तीन विषयों की यूजीसी-नेट परीक्षाएं 22 से 30 जून के बीच हुई थीं और करीब दो महीने बाद एनटीए ने स्वीकार किया है कि प्रश्नपत्रों में गंभीर खामियां थीं तथा पुराने प्रश्न दोहराए गए थे। अब हजारों छात्रों को सितंबर में फिर से इन विषयों की परीक्षा देनी होगी।</p>
<p>उन्होंने कहा, “हजारों छात्रों ने वर्षों तैयारी की, आवेदन किया, फीस भरी और दूर-दराज के परीक्षा केंद्रों तक यात्रा की। अब उन्हें यह सब दोबारा करना होगा। एनटीए गलती करता है, लेकिन सजा छात्र भुगतता है। अब शिक्षा व्यवस्था ऐसी व्यवस्था बन गई है जो छात्रों का पैसा, उनका समय, मानसिक स्वास्थ्य और आत्मविश्वास छीन लेती है, लेकिन बदले में कुछ नहीं देती। सवाल है कि एनटी यह क्यों नहीं बता रहा है कि क्या परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र लीक हुए थे।"</p>
<p>राहुल गांधी ने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा पहला कदम था, आखिरी नहीं। एनटीए के नेतृत्व की जवाबदेही भी तय होनी चाहिए। उन्होंने दोबारा परीक्षा देने वाले छात्रों से कहा कि वे समस्या नहीं हैं, बल्कि ऐसी व्यवस्था समस्या है जो परीक्षा भी ठीक से नहीं करा सकती और फिर छात्रों को दोष देती है। इस बीच, कांग्रेस संचार विभाग के प्रभारी जयराम रमेश ने भी ‘एक्स’ पर कहा कि एनटीए की गलती की सजा देश के छात्र क्यों भुगतें और जिन युवाओं का नुकसान हुआ है, उसकी भरपाई कौन करेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Mon, 17 Aug 2026 14:06:19 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>राजपुर के महात्मा गांधी राजकीय विद्यालय में रिक्त पदों ने बिगाड़ी शिक्षा व्यवस्था</title>
                                    <description><![CDATA[बारिश में टपकती छत व जलभराव से विद्यार्थियों की बढ़ी परेशानी
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/baran/vacant-posts-disrupt-education-system-at-rajpur-s-mahatma-gandhi-government-school/article-161559"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-07/111200-x-600-px)-(3)19.png" alt=""></a><br /><p>राजपुर। राजपुर कस्बे के महात्मा गांधी राजकीय विद्यालय में शिक्षकों की कमी और आधारभूत सुविधाओं के अभाव के चलते विद्यार्थियों की पढ़ाई कक्षा पहली से बारहवीं तक संचालित इस विद्यालय में 407 छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं, लेकिन शिक्षकों के स्वीकृत 22 पदों में से केवल 10 शिक्षक ही कार्यरत हैं। 12 पद लंबे समय से रिक्त होने के कारण कई विषयों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। वहीं बारिश के मौसम में भवन की खराब स्थिति और जलभराव की समस्या ने विद्यार्थियों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। शिक्षकों की कमी अब विद्यार्थियों के भविष्य पर असर डालने लगी है।<br /> <br />विद्यालय में कक्षा पहली से बारहवीं. तक बड़ी संख्या में विद्यार्थी अध्ययनरत हैं, लेकिन पर्याप्त शिक्षक नहीं होने से शिक्षण व्यवस्था प्रभावित हो रहीं है। कई कक्षाओं में एक ही कमरे में दो-दो कक्षाओं का संचालन करना पड़ रहा है, जिससे विद्यार्थियों को पढ़ाई में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। विद्यालय में कई महत्वपूर्ण विषयों के शिक्षक उपलब्ध नहीं हैं। इसके चलते कुछ कक्षाओं का पाठ्यक्रम समय पर शुरू नहीं हो पाया है। विद्यार्थियों और अभिभावकों का कहना है कि यदि जल्द ही रिक्त पदों पर शिक्षकों की नियुक्ति नहीं की गई तो इसका असर परीक्षा परिणाम और विद्यार्थियों की शैक्षणिक प्रगति पर पड़ सकता है।</p>
<p><strong>रिक्त पद भरने की मांग</strong><br />क्षेत्र के लोगों और अभिभावकों का कहना है कि विद्यालय में शिक्षकों के रिक्त पदों को जल्द भरा जाना चाहिए, ताकि विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके। अब सभी की नजर शिक्षा विभाग पर है कि कब तक इस समस्या का समाधान कर बच्चों को राहत दी जाती है।</p>
<p><strong>विद्यार्थियों ने बताई समस्याएं</strong><br />विद्यालय के छात्र-छात्राओं योगेश प्रजापति, सोनम सहरिया, चंदू ओझा, मुकेश ओझा, विशाल प्रजापत, बिट्ट कश्यप, पूजा कुमारी और चन्ना कश्यप सहित अन्य विद्यार्थियों ने बताया कि शिक्षकों की कमी के कारण कई विषयों की पढ़ाई नहीं हो पा रही है। उन्होंने बताया कि कई कक्षाओं का सिलेबस अभी तक पूरा शुरू नहीं हुआ है, जिससे परीक्षा की तैयारी को लेकर चिंता बनी हुई है।</p>
<p><strong>प्रिंसिपल के प्रयासों से सुविधाओं में हुआ सुधार</strong><br />विद्यार्थियों ने बताया कि विद्यालय में पहले पेयजल, सफाई और अन्य मूलभूत सुविधाओं की स्थिति संतोषजनक नहीं थी। लेकिन प्रधानाचार्य भूदेव व्यास के कार्यभार संभालने के बाद व्यवस्थाओं में सुधार हुआ है। विद्यालय में पेयजल व्यवस्था, साफ-सफाई और ऑनलाइन कक्षाओं जैसी सुविधाओं को बेहतर किया गया है।</p>
<p><strong>बारिश में टपकती छत, परिसर में जलभराव</strong><br />बरसात के दिनों में विद्यालय भवन की स्थिति और खराब हो जाती है। छत से पानी टपकने के कारण कक्षाओं में बैठना मुश्किल हो जाता है। वहीं परिसर में पानी भरने से विद्यार्थियों को आवागमन में परेशानी उठानी पड़ती है। पर्याप्त कक्षों की कमी के कारण भी शिक्षण कार्य प्रभावित हो रहा है और समय पर पाठ्यक्रम पूरा करने में दिक्कतें आ रही हैं।</p>
<p><strong>इनका कहना है </strong><br /> विद्यालय में अध्यापकों के रिक्त पदों के चलते शिक्षण कार्य प्रभावित हो रहा है। शिक्षा विभाग को विद्यालय में अध्यापक लगाने चाहिए।<br /><strong>-पूर्ति ओझा, छात्रा</strong></p>
<p>विद्यालय में कक्षा कक्षा का अभाव है। एक-एक भवन में दो-दो क्लास संचालित होती हैं। शिक्षण कार्य प्रभावित होता है।<br /><strong>- योगेश प्रजापति, छात्र</strong></p>
<p>विद्यालय में बारिश होते ही जलभराव होजाता है। प्रार्थना और खेलने में परेशानी होती है। पानी निकासी की समस्या है। अध्यापक भीलगाने चाहिए।<br /><strong>अंजली कुमारी जाटव,छात्रा</strong></p>
<p> विद्यालय में कई मूलभूत सुविधाओं काअभाव था। स्कूल प्रिंसिपल ने व्यवस्थाएं दुरुस्त कारवाई है लेकिन अध्यापकों के पद रिक्त होने के चलते शिक्षण व्यवस्था में बेपटरी हो रही है।<br /><strong>- मुकेश ओझा, छात्र</strong></p>
<p> शिक्षकों की कमी को लेकर शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारियों को प्रस्ताव भेजा जा चुका है फिलहाल कुछ शिक्षकों की वैकल्पिक व्यवस्था की गई है, लेकिन कई बार सरकारी बैठकों और अन्य प्रशासनिक कार्यों के कारण शिक्षकों को बाहर जाना पड़ता है, जिससे विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित होती है। विद्यालय में अध्यापकों के पद रिक्त हैं इस संबंध में शिक्षा विभाग की उच्च अधिकारियों को प्रस्ताव बनाकर भिजवा दिया है।<br /><strong>- भूदेव व्यास, प्रिंसिपल, महात्मा गांधी राजकीय विद्यालय, राजपुर</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
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                <pubDate>Fri, 31 Jul 2026 14:57:19 +0530</pubDate>
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                <title>कांग्रेस का केंद्र सरकार पर तीखा हमला, बोलें एनसीईआरटी के पाठ्यक्रम में बदलाव पर स्पष्ट झलकता है बनावटीपन </title>
                                    <description><![CDATA[कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने एनसीईआरटी विवाद पर केंद्र सरकार के आक्रोश को 'डैमेज कंट्रोल' करार दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि पाठ्यपुस्तकों में बदलाव एक सुनियोजित वैचारिक अभियान है, जिसका रिमोट कंट्रोल नागपुर में है। कांग्रेस ने उच्चतम न्यायालय से मांग की है कि वह पाठ्यक्रम के राजनीतिकरण और ध्रुवीकरण की गहन जांच के आदेश दे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/congress-should-launch-a-sharp-attack-on-the-central-government/article-144805"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/ncert-disput-congress.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। एनसीईआरटी की पुस्तकों के पाठ्यक्रम में बदलाव को लेकर कांग्रेस ने कहा है कि केंद्र सरकार का गुस्सा बनावटी है और यदि उनका गुस्सा कृत्रिम नहीं है तो उन्हें पाठ्यक्रम बदलने से संबंधित पूरे मामले की जांच करवानी चाहिए। कांग्रेस संचार विभाग के प्रभारी जयराम रमेश ने शुक्रवार को एक बयान में आरोप लगाया कि केंद्र सरकार राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) की पुस्तकों के मुद्दे पर बनावटी आक्रोश जता रहे हैं। पाठ्यक्रम में बदलाव पर वह अपनी नाराजी का सिर्फ दिखावा कर रहे हैं।</p>
<p>उन्होंने पीएम मोदी की नाराजगी को स्थिति संभालने का प्रयास बताया और कहा स्पष्ट रूप से एक डैमेज कंट्रोल प्रयास के तहत यह संदेश दिया जा रहा है कि वे एनसीईआरटी की पाठ्यपुस्तकों में न्यायपालिका से जुड़े आलोचनात्मक उल्लेखों से बेहद नाखुश हैं। पिछले एक दशक में उन्होंने ऐसे शिक्षाविदों और झोलाछाप अकादमिकों के एक नेटवर्क की अगुवाई की है, जिन्होंने अपने विचारधारात्मक वायरस से पाठ्यपुस्तकों को संक्रमित कर गंभीर नुकसान पहुंचाया है। यह कोई आकस्मिक चूक नहीं, बल्कि एक सुनियोजित वैचारिक घुसपैठ अभियान का हिस्सा है।</p>
<p>कांग्रेस नेता ने केंद्र सरकार पर हमला किया और कहा कि पाठ्यक्रम कैसा होना चाहिए इसकी भूमिका संघ मुख्यालय नागपुर में बनती है जिससे केंद्र सरकार स्वयं सम्बद्ध हैं। उन्होंने कहा सत्ता पक्ष स्वयं नागपुर कॉम्युनल इकोसिस्टम फॉर रिराइटिंग टेक्सबुक असली एनसीईआरटी-को दिशा देते और आकार देते रहे हैं।</p>
<p>इसके आगे जयराम रमेश ने कहा कि उच्चातम न्यायालय को उद्वेलित करने वाली पाठ्यपुस्तकों से स्वयं को अलग दिखाने की उनकी कोशिश महज ढोंग है। अब उच्चतम न्यायालय के लिए अगला तार्किक कदम यह होना चाहिए कि वह इस बात की विस्तृत जांच कराए कि पाठ्यपुस्तकों को किस प्रकार दोबारा लिखा गया और वे किस तरह ध्रुवीकरण तथा राजनीतिक हिसाब-किताब चुकाने के औजार में बदल गईं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 27 Feb 2026 13:20:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>देश में शिक्षा के नाम पर ‘लूट की दुकान’ : यूजीसी ने जारी की लिस्ट, 12 राज्यों में 32 यूनिवर्सिटी फर्जी</title>
                                    <description><![CDATA[देश में शिक्षा माफिया के हौसले किस तरह से बुलंद है, इसका अंदाजा फैलते फर्जी विश्वविद्यालयों से लगाया जा सकता है। दो साल पहले तक जहां सिर्फ आठ राज्यों में फर्जी यूनिवर्सिटी हाना सामने आया था।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/loot-shop-in-the-name-of-education-in-the-country/article-143854"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/12200-x-600-px)-(4)7.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। देश में शिक्षा माफिया के हौसले किस तरह से बुलंद है, इसका अंदाजा फैलते फर्जी विश्वविद्यालयों से लगाया जा सकता है। दो साल पहले तक जहां सिर्फ आठ राज्यों में फर्जी यूनिवर्सिटी हाना सामने आया था, वहीं अब इसका जाल 12 राज्यों तक पहुंच गया है। फर्जी विश्वविद्यालयों की संख्या भी पिछले दो सालों में 20 से बढ़कर 32 तक पहुंच गई है।</p>
<p><strong>यूजीसी ने चेताया : पहले जांचे फिर लें प्रवेश :</strong></p>
<p>विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने छात्रों और अभिभावकों को ऐसे संस्थानों को लेकर सतर्क किया है। आयोग ने छात्रों और अभिभावकों को निर्देश दिया है कि किसी भी संस्थान में प्रवेश लेने से पहले यूजीसी की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध फर्जी विश्वविद्यालयों की सूची जरूर देखें।</p>
<p><strong>दिल्ली- 12 :</strong></p>
<p>    ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक एण्ड फिजिकल हेल्थ साइंस<br />    कर्मशियल यूनिवर्सिटी लिमिटेड<br />    यूनाइटेड नेशन्स यूनिवर्सिटी<br />    वोकेशनल यूनिवर्सिटी<br />    एडीआर सेंट्रिक ज्यूरिडिकल यूनिवर्सिटी<br />    इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एंड इंजीनियरिंग<br />    विश्वकर्मा ओपन यूनिवर्सिटी फार सेल्फ एम्प्लायमेंट<br />    अध्यात्मिक विश्वविद्यालय<br />    वर्ल्ड पीस ऑफ यूनाइटेड नेशनल यूनिवर्सिटी<br />    इंस्टीटूयूट ऑफ मैनेजमेंट एंड इंजीनियरिंग<br />    माउंटेन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एवं टेक्नालाजी<br />    नेशनल इंस्टीट्यूट आफ मैनेजमेंट सोल्यूशन</p>
<p><strong>यूपी -04 :</strong></p>
<p>    गांधी हिंदी विद्यापीठ, प्रयाग<br />    महामाया टेक्नीकल विश्वविद्यालय, नोएडा<br />    नेताजी सुभाष चंद्र बोस ओपन यूनिवर्सिटी, अलीगढ़<br />    भारतीय शिक्षा परिषद, लखनऊ</p>
<p><strong>प. बंगाल-02 :</strong></p>
<p>    इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ अल्टनेटिव मेडिसन<br />    इंस्टीट्यूट ऑफ अल्टनेटिव मेडिसन एंड रिसर्च</p>
<p><strong>कर्नाटक-02 :</strong></p>
<p>    ग्लोबल ह्यूमन पीस यूनिवर्सिटी, बेंगलुरु<br />    इसके अलावा एक अन्य फर्जी संस्थान  </p>
<p><strong>इन राज्यों में दो या एक यूनिवर्सिटी फर्जी :</strong></p>
<p>    हरियाणा-मैजिक एंड आर्ट यूनिवर्सिटी, फरीदाबाद<br />    झारखंड-दक्ष यूनिवर्सिटी, रांची<br />    महाराष्ट्र-राजा अरबी यूनिवर्सिटी, नागपुर। इसके अलावा एक और <br />    केरल-2 फर्जी विश्वविद्यालय <br />    आंध्र प्रदेश-2 फर्जी विश्वविद्यालय <br />    पुडुचेरी-2 फर्जी विश्वविद्यालय <br />    राजस्थान-1 फर्जी विश्वविद्यालय  <br />    अरुणाचल प्रदेश-1 फर्जी विश्वविद्यालय</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 20 Feb 2026 10:53:25 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur KD]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>शिक्षा विभाग में कम्प्यूटर अनुदेशकों के पदनाम बदलाव का कोई प्रस्ताव नहीं, जानें पूरा मामला </title>
                                    <description><![CDATA[माध्यमिक शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया कि 9862 बेसिक और 1182 वरिष्ठ कम्प्यूटर अनुदेशक पदों को शिक्षक ग्रेड-द्वितीय या व्याख्याता में समायोजित करने का कोई प्रस्ताव नहीं है। तकनीकी प्रकृति के कारण पदनाम अनुदेशक रखा गया है। इनके कार्यों में स्मार्ट क्लास, आईसीटी लैब संचालन और ऑनलाइन कार्य शामिल हैं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/there-is-no-proposal-to-change-the-designation-of-computer/article-143547"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/vidhan-sabha8.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। माध्यमिक शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि वर्तमान में विभाग के अंतर्गत कार्यरत 9862 बेसिक कम्प्यूटर अनुदेशक पदों को कम्प्यूटर शिक्षक ग्रेड-द्वितीय के रूप में सृजित कर समायोजित करने का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। इसी प्रकार 1182 वरिष्ठ कम्प्यूटर अनुदेशक पदों को व्याख्याता (कम्प्यूटर शिक्षा) के नए पद सृजित कर समायोजित करने की भी कोई प्रक्रिया प्रस्तावित नहीं है।</p>
<p>विधानसभा में सरकार ने बताया कि दोनों पदों के दायित्व कक्षा 1 से 12 तक विद्यार्थियों को कम्प्यूटर विषय का शिक्षण देना है, लेकिन विषय की तकनीकी प्रकृति को देखते हुए पदनाम “अनुदेशक” रखा गया है, न कि शिक्षक। कम्प्यूटर शिक्षा में प्रायोगिक प्रशिक्षण और तकनीकी दक्षता पर अधिक जोर होता है। इसी कारण इस विषय के अभ्यर्थियों को बी.एड. पाठ्यक्रम के लिए भी पात्र नहीं माना जाता।</p>
<p>कम्प्यूटर अनुदेशकों के जॉब चार्ट में स्मार्ट क्लास संचालन, शाला दर्पण व ऑनलाइन कार्यों में सहयोग, रोबोटिक्स व तकनीकी गतिविधियों में मार्गदर्शन, वेबकास्ट संपादन तथा आईसीटी लैब को कार्यशील रखना जैसे कार्य शामिल हैं।</p>
<p>माध्यमिक शिक्षा बोर्ड राजस्थान वर्ष 2001 से कक्षा 9-10 में कम्प्यूटर विषय पढ़ा रहा है। विभाग में कैडर विस्तार की प्रक्रिया जारी है, लेकिन कैडर पुनर्गठन या पदोन्नति लाभ का फिलहाल कोई प्रस्ताव नहीं है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 17 Feb 2026 16:26:30 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur KD]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>दूसरी कक्षा तक के बच्चों की पाठ्य पुस्तकें स्थानीय भाषा में होंगी, संस्कृत शिक्षा विभाग खोलेगा वैदिक स्कूल</title>
                                    <description><![CDATA[बाल वाटिका से दूसरी कक्षा तक के बच्चों को स्थानीय भाषा में पढ़ाने के लिए शब्दकोश बनाने का काम हो रहा है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><p>जयपुर। राजस्थान में सरकारी स्कूलों के दूसरी कक्षा तक के नन्हे बच्चों को शिक्षा विभाग प्रदेश की स्थानीय भाषा सिखाने के लिए इन्हीं में पाठ्य पुस्तकें लाने जा रहा है। प्रदेश में अलग-अलग हिस्सों में बोली जाने वाली भाषाओं के हिसाब से पुस्तकें तैयार होंगी। जैसे हाड़ौती, ढूंढाड़ी, शेखावटी, मेवाती, ब्रज इत्यादि भाषा में स्कूली किताबें लाने के लिए शिक्षा विभाग इसका शब्दकोश बनाने में लगा है। इसके कम्पलीट होने के बाद बाल वाटिका (नर्सरी) से दूसरी कक्षा तक पढ़ने वाले करीब 7 लाख बच्चों को स्थानीय भाषा में ही पढ़ाया जाएगा।</p>
<p>वहीं सरकार शिक्षा के साथ बच्चों को संस्कृति-धर्म का ज्ञान भी पढ़ाने की तैयारी है। इसके लिए संस्कृति शिक्षा विभाग की ओर से वेद विद्यालय खोले जाएंगे। इनमें छठीं कक्षा से ऊपर की कक्षाओं में वेद पढ़ाए जाएंगे। प्रदेश में हालांकि अभी 19 वेद विद्यालय हैं, जो विभिन्न निजी संस्थाओं के द्वारा संचालित हो रहे हैं। लेकिन अब सरकार अपने स्तर पर वेद शिक्षा के लिए ये स्कूल खोल रही है। वेद पारंगत शिक्षकों की भर्ती संस्कृत शिक्षा विभाग के द्वारा की जाएगी। स्कूलों में वेद के अलावा अन्य विषय भी पढ़ाए जाएंगे। अन्य विषयों के शिक्षक शिक्षा विभाग से लिए जाएंगे। </p>
<p>बाल वाटिका से दूसरी कक्षा तक के बच्चों को स्थानीय भाषा में पढ़ाने के लिए शब्दकोश बनाने का काम हो रहा है। संभवत: एक साल बाद के सत्र में पाठ्य पुस्तकें तैयार कर पढ़ाई शुरू करवाने की कार्य योजना है। ताकि उन्हें अपनी लोकल भाषा के प्रति भावनात्मक जुड़ाव हो सके।’<br />- मदन दिलावर, शिक्षा मंत्री, राजस्थान। </p>
<p>निजी संस्थाएं वेद विद्यालय चला रही हैं। अब संस्कृत शिक्षा विभाग वेद विद्यालय खोलेगा। इनमें वेद पारंगत शिक्षक भर्ती होंगे। अन्य शिक्षकों को शिक्षा विभाग से प्रतिनियुक्ति पर लिया जाएगा। इसका प्लान तैयार हो रहा है।’<br />- विश्राम मीणा, सचिव, संस्कृत शिक्षा विभाग।  </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>शिक्षा जगत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 24 Mar 2025 09:00:40 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>शिक्षा का मंदिर बदहाल: हाथों में किताब, सिर पर खुला आसमां</title>
                                    <description><![CDATA[छत के सरिए निकले, दीवारों में आई दरारें।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jhalawar/the-temple-of-education-is-in-a-bad-state--books-in-hands--open-sky-above-the-head/article-106208"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-03/257rtrer-(2)7.png" alt=""></a><br /><p> कामखेड़ा। प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था को दूरुस्त करने के वादे किए जा रहे है, लेकिन राजकीय प्राथमिक विद्यालय खेजडा की तस्वीरें कुछ और हकीकत बयान कर रही हैं। ये  मामला मनोहरथाना ब्लॉक के राजकीय प्राथमिक विद्यालय खेजडा गांव के सरकारी स्कूल है। जमीन पर बैठे बच्चे, हाथों में किताब और सिर पर खुला आसमान... ये तस्वीर यह बताने के लिए काफी हैं कि यहां के सरकारी स्कूल में बच्चे किन हालातों में शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं।  राजकीय प्राथमिक विद्यालय खेजडा का भवन जर्जर होने के कारण स्कूल के बच्चे ं स्कूल के सामने खुले आसमान के नीचे बैठकर पढाई करने को मजबूर हैं। बताया जा रहा है कि स्कूल की बिल्डिंग पिछले एक सालों से जर्जर अवस्था में है। बिल्डिंग की छत में जगह जगह बड़ी-बड़ी दरारें पड़ चुकी हैं। वहीं छत में जगह जगह सरिया दिखाई देने लगा है, विद्यालय  के अंदर जाना किसी खतरे से कम नहीं है। वहीं विद्यालय के  संस्था प्रधान ने  स्कूल को खुले आसमान के नीचे संचालित करना शुरू कर दिया। हाल यह है कि  बारिश,सर्दी,गर्मी में बच्चे खुले आसमान के नीचे पढ़ाई करने को मजबूर हैं, जिससे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती नजर आ रही है। वहीं बच्चों को भविष्य अंधकार में डूबता नजर आ रहा है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं । </p>
<p><strong>जिम्मेदार नहीं दे रहे ध्यान</strong><br />राजकीय प्राथमिक विद्यालय खेजडा के स्कूल के भवन की हालत देखकर बच्चों के अभिभावक अब अपने बच्चों को पढ़ने भेजने से कतराने लगे हैं। इसके बाद भी क्षेत्र के जनप्रतिनिधि और शिक्षा विभाग इस ओर ध्यान नहीं दे रहे है। फिलहाल वे सिर्फ आश्वासन देकर औपचारिकता पूरी कर रहे हैं। स्कूल के संस्था प्रधान  ने बताया कि स्कूल भवन की छत जर्जर हो चुकी है और कभी भी बड़ा हादसा होने का खतरा बना हुआ है कई बार उच्च अधिकारियों को लिखित में  अवगत कराया। वही बैठक के माध्यम से भी प्रस्ताव उच्च अधिकारियों को भेज रखा है  लेकिन फिर भी कोई पहल नहीं की गई है। </p>
<p><strong>30 साल पुराना भवन, हादसों को दे रहा न्योता</strong><br />इस बारे में स्थानीय लोगों का कहना है कि 30 साल पुराने इस स्कूल की हालत बेहद जर्जर हो चुकी है। इस कारण यहां कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। छत का प्लास्टर जगह जगह निकला हुआ है, जिससे भवन के अंदर कमरों में सीमेंट के टुकड़े गिरते हैं। छत और दीवारों में दरारें पड़ गई हैं, यहां बच्चों को भेजना खतरे से खाली नहीं है। स्कूल की हालत इतनी खराब है कि शिक्षक बाहर  बैठाकर बच्चों को पढ़ा रहे हैं।</p>
<p>विद्यालय भवन में जगह जगह दरारें चल रही हैं, वहीं छत में जगह जगह सरिया दिखाई दे रहा है। बच्चों को विद्यालय भेजने में भी डर लगता है हमारी मांग है कि विद्यालय का नया भवन निर्माण कराया जाए। <br /><strong>- घनश्याम एसएमसी अध्यक्ष </strong></p>
<p>विद्यालय भवन जर्जर है वहीं दीवारों में दरारें भी चल रही, जिससे बच्चों को विद्यालय भेजने में भी डर लगता है। मैंने विद्यालय भवन को लेकर विधायक को भी अवगत करवाया उन्होंने भी आश्वाशन दिया।  <br /><strong>- गोलू नागर वार्ड पंच खेजड़ा </strong></p>
<p>पूरा विद्यालय भवन जर्जर है जगह जगह प्लास्टर उखड़ रहा है, किसी दिन बच्चों पर गिर जाए तो  जिम्मेदार कौन है, अब तो बच्चों को विद्यालय में भेजने में भी डर लगता है कि कही कोई हादसा नहीं हो जाए लेकिन विद्यालय भवन को लेकर कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं । <br /><strong>- ओमप्रकाश नागर खेजडा  </strong></p>
<p>हमारे विद्यालय की बिल्डिंग क्षतिग्रस्त है, विद्यालय में आने में बहुत डर लगता है, हम बाहर बैठते हैं तो बहुत धूप लगती है। हम विद्यालय नया बनवाने की मांग करते हैं । <br /><strong>- हेमराज छात्र कक्षा 5</strong></p>
<p>हमें जर्जर विद्यालय में आने में डर लगता है और बाहर बैठ कर पढ़ाई करते है, जिससे हमारी पढ़ाई भी नहीं होती है हमारी मांग है हमारा विद्यालय नया बनवाए जाए। <br /><strong>- राधिका छात्रा कक्षा 5</strong></p>
<p>विद्यालय में कुल नामांकन 21 बच्चों का है और 15 बच्चे आंगनबाड़ी के आते हैं। कुल 36 बच्चे पढ़ाई करते हैं। पूरा विद्यालय का भवन जर्जर है जगह जगह दरारें चल रही है। वहीं छत में जगह जगह सरिया दिखाई दे रहा है। कभी भी भवन गिर सकता है। ऊपर से आदेश है कि क्षतिग्रस्त भवन में बच्चों को नहीं  इस लिए बच्चों को बाहर बैठा कर पढ़ना पड़ रहा है, जिससे बच्चों को पढ़ाई प्रभावित होती है।  मैंने कई  बार उच्च अधिकारियों को अवगत कराया लेकिन कोई समाधान नहीं हुआ। <br /><strong>- सुरेश कुमार, संस्था प्रधान</strong></p>
<p>मेरे द्वारा विद्यालय का अवलोकन किया गया है, विद्यालय का भवन क्षतिग्रस्त है। इसको लेकर उच्च अधिकारियों को अवगत करवा रखा है । <br /><strong>- रामचरण मेहर,पीईईओ कामखेड़ा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>झालावाड़</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 03 Mar 2025 16:03:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कही घी घणां कही न मुट्ठीभर चणा: गोरधनपुरा में 4 बच्चों को पढ़ा रहे 6 शिक्षक, गौणदी में 2 बच्चों पर दो शिक्षक </title>
                                    <description><![CDATA[शिक्षकों की कमी से अध्यापन बाधित। 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/somewhere-there-is-a-lot-of-ghee-and-somewhere-there-is-a-handful-of-chana/article-96227"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-11/257rtrer-(2)18.png" alt=""></a><br /><p>इटावा। इटावा में सरकारी शिक्षा का सिस्टम भी अलग ही इटावा ब्लॉक में शिक्षा व्यवस्था के लिए हालात इस कदर है कि कही नामांकन है छात्रों का लेकिन शिक्षक नहीं है और कही नामांकन नहीं है, लेकिन फिर भी शिक्षक है। ऐसी स्थिति में इटावा क्षेत्र में सरकारी सिस्टम की खामी नजर आती है जो शिक्षा व्यवस्था की पोल को खोल रही है। कही जर्जर भवन में स्कूल चल रहे है, कही विद्यार्थी भी नहीं होने के बाद भी स्कूल बन रहे हैं। क्षेत्र में हाड़ौती की वह कहावत चरितार्थ हो रही है कि कही घी घणों कही न मुट्ठी भर चना वाली हो रही है। इटावा ब्लॉक में 199 प्राथमिक, उच्च प्राथमिक और सीनियर सेकेंड्री स्कूल है। जिसमे 18773 बालक और बालिकाओं का नामांकन है और अध्ययन करती है। क्षेत्र के 199 स्कूलों में शिक्षकों के 1505 पद है जिसमे से 1223 कार्यरत है और 282 पद खाली चल रहे हैं। </p>
<p><strong>गोरधनपुरा में 4 बच्चों को पढ़ा रहे 6 शिक्षक</strong><br />इटावा ब्लॉक के खातौली ग्राम पंचायत के गोरधनपुरा गांव में करीब 50- 60 घरों की बस्ती है, लेकिन गांव के सरकारी उच्च प्राथमिक विद्यालय में सिर्फ 4 बच्चों का दाखिला है उनको पढ़ाने के लिए भी 6 शिक्षक कार्यरत है। यह स्थिति गोरधनपुरा की नहीं है, इस तरह के 17 विद्यालय है जिनमें बच्चों से ज्यादा शिक्षक हैं, तो कही बच्चे ही नहीं है, लेकिन स्कूल को खोलने के लिए ही शिक्षक है। </p>
<p><strong>इटावा उच्च प्राथमिक द्वितीय में नामांकन</strong><br />इटावा नगर के गेता रोड पर स्थित राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय द्वितीय में 285 बच्चों का नामांकन है । शिक्षा विभाग ने 14 पद स्वीकृत कर रखे लेकिन आधे पद खाली है। प्रधानाध्यापक  सहित 7 पद रिक्त है। ऐसे में विद्यालय में पढ़ाई  नहीं हो पाती जिसके चलते नामांकन बढ़ नहीं रहा। इटावा तरह राजकीय सीनियर विद्यालय इटावा में 1052 बच्चों का नामांकन है 44 पद स्वीकृत है लेकिन 30 ही नियुक्त है 14 पद रिक्त है। राजकीय सीनियर विद्यालय निमोला में 373 नामांकन है 17 पद स्वीकृत हैं लेकिन 10 ही कार्यरत हे 7 रिक्त है। यही स्थिति सीनियर विद्यालय पीपल्दा में 11 पद रिक्त है। इसी तरह  ढ़ीपरी चंबल, महात्मा गांधी करवाड़, सीनियर विद्यालय रामपुरिया धाबाई , बम्बुलियाकला,  डूंगरली विद्यालयों की है। इसके साथ संस्कृत विद्यालयों की भी यही स्थिति है जिसके चलते क्षेत्र में जहा नामांकन है वहां शिक्षकों की कमी होने के चलते पढ़ाई नहीं हो पा रही ।</p>
<p><strong>गौणदी में 2 बच्चों पर दो शिक्षक , डेढ़ दर्जन स्कूलों की यही हालत</strong><br />गणेशगंज ग्राम पंचायत की गौणदी राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय में सिर्फ 2 शिक्षक हैं। वही पढ़ाने के लिए भी सरकार ने दो अध्यापक लगा रखे है। इसके अलावा पुराना भवन जर्जर होने के चलते नया भवन का निर्माण भी चल रहा है। विद्यालय के शिक्षक रामगोपाल मीना बताते है कि विद्यालय का भवन जर्जर है, वही इटावा नजदीक होने के कारण ज्यादातर बच्चे इटावा पढ़ने जाते है। इसलिए विद्यालय में नामांकन नहीं बढ़ पा रहा है। इसी तरह फरेरा में 2 बच्चों पर 1 शिक्षक है। शेरगंज में 2 बच्चों पर 2 शिक्षक है। हनुमानपुरा में 4 बच्चे, शहनाहली में 4 नामांकन, माधोनगर 5, जयनगर में 7, खेड़ली नोनेरा में 7, सब्जीपुरा में 7, मीना रोहिली 8, आरामपुरा में 9, बम्बुलिया खुर्द 9, किशनपुरा में 10,कोल्हूखेड़ा में 10 बच्चों के स्कूलों में नामांकन है। </p>
<p><strong>स्कूल में किसी भी बच्चे का दाखिला नहीं</strong><br />ब्लॉक के शहनावदा ग्राम पंचायत के कंवरपुरा और निमोला ग्राम पंचायत के शेरगढ़ स्कूल में किसी भी बच्चे का दाखिला नहीं है। नामांकन शून्य है लेकिन फिर भी शिक्षक लगा रखे है।</p>
<p><strong>इनका कहना</strong><br />क्षेत्र में 1505 पद शिक्षकों के स्वीकृत हैं, जिनमें 282 रिक्त है। 18773 बच्चों का 199 स्कूलों में नामांकन है। जिन विद्यालयों में नामांकन कम है वहां नियुक्त शिक्षकों को नामांकन बढ़ाने के लिए निर्देशित किया हुआ है। अगर ऐसे विद्यालयों में नामांकन नहीं  बढ़े तो भविष्य में मर्ज होंगे। जहां शिक्षक कम है वहां नोडल प्रभारी को व्यवस्थार्थ लगाने को लेकर भी निर्देशित किया हुआ है । वही सभी विषयों से उच्च अधिकारियों को अवगत करा रखा है। <br /><strong>- इंदु हाडा, मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी इटावा ब्लॉक</strong></p>
<p><strong>क्या कहते हैं ग्रामीणं</strong><br />गौणदी गांव करीब 100 घरों की बस्ती है, लेकिन इस गांव के स्कूल भवन की बिल्डिंग जर्जर हो गई थी, जिसके चलते ग्रामीण बच्चे नहीं भेजते। नवीन भवन का कार्य चल रहा है, जल्द ही पूर्ण हो जाएगा। वही इटावा नजदीक होने के कारण ग्रामीण निजी विद्यालय में भेज देते हैं। अभी गत दिनों ग्रामीणों की बैठक लेकर नामांकन बढ़ाने को लेकर भी चर्चा की थी। <br /><strong>- हेमंत बैरवा, सरपंच गणेशगंज</strong></p>
<p>पीपल्दा विद्यालय में  400 के करीब बच्चे हैं, लेकिन 23 पद शिक्षकों के स्वीकृत होने के बाद भी 12 ही कार्यरत है, 11 रिक्त है जिसके चलते विद्यालय में अध्ययन नहीं हो पाता। रिक्त पदों को भरा जाए ताकि बच्चों की पढ़ाई हो सके और निजी विद्यालय में नहीं जाना पड़े।<br /><strong>- नरोत्तम विकट, पीपल्दा ग्रामीण</strong></p>
<p>गोर्वधनपुरा करीब 60-70 घरों की बस्ती है, लेकिन यहां से खातौली नजदीक है, सरकारी स्कूल में पढ़ाई कम होती है। अध्यापक भी समय पर नहीं आते ऐसे में लोग बच्चों को स्कूल में नहीं भेजते। साथ स्कूल के अंदर बाउंड्री में जंगली पेड़ पौधे लगे हुए हैं । <br /><strong>- महेंद्र नागर ग्रामीण  गोवर्धनपुरा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 29 Nov 2024 15:39:22 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>समय से विद्यालय नहीं पहुंच रहे शिक्षक</title>
                                    <description><![CDATA[स्कूल में पंजीकृत कुल 1000 बच्चे हैं। समय पर शिक्षकों के स्कूल नहीं आने की वजह से बच्चे इधर-उधर खेलते-घूमते रहते हैं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/baran/teachers-not-reaching-school-on-time/article-88092"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-08/6633-copy11.jpg" alt=""></a><br /><p>कस्बाथाना। ग्रामीण क्षेत्र में शिक्षा व्यवस्था का बुरा हाल है। कई विद्यालयों में शिक्षकों का समय से नहीं पहुंचने का सिलसिला जारी है। जिससे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। इसके बाद भी लापरवाह शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई महज खानापूर्ति के लिए की जाती है। सरकार शिक्षा के प्रति सजग है और कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित ना रहे इसके लिए प्रयास कर रही है। कस्बाथाना  के राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में भी अध्यापक समय पर स्कूल नहीं पहुंचते हैं। यहां एक वाइस प्रधानाचार्य और शिक्षक पदस्थ हैं। स्कूल में पंजीकृत कुल 1000 बच्चे हैं। समय पर शिक्षकों के स्कूल नहीं आने की वजह से बच्चे इधर-उधर खेलते-घूमते रहते हैं। इन बच्चों का भविष्य अंधकारमय है। शासन-प्रशासन व जनप्रतिनिधि इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं। दो साल से यंहा पर प्रधानाचार्य भी नहीं हैं। शिक्षा विभाग की लापरवाही के कारण अभिभावकों को परेशानी हो रही है। बच्चों का भविष्य कोचिंग के भरोसे चल रहा हैं। ग्रामीण मनीस, राजकुमार, सोनू, मोहन, रानू , सुरज , पंकज, कालू,सहित दर्जनों ग्रामीणों ने मांग की है कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार किया जाए। </p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />समय पर शिक्षकों के स्कूल नहीं आने की वजह से बच्चे इधर-उधर खेलते-घूमते रहते हैं। इन बच्चों का भविष्य अंधकारमय है। <br /><strong>- राजकुमार, ग्रामीण। </strong></p>
<p>शिक्षा विभाग की लापरवाही के कारण अभिभावकों को परेशानी हो रही है। बच्चों का भविष्य कोचिंग के भरोसे चल रहा हैं। <br /><strong>- पंकज, अभिभावक। </strong> </p>
<p>कस्बाथाना विद्यालय में शिक्षक समय पर नहीं आने का मामला सामने आया है। ऐसा मामला सामने आता है तो कार्यवाही की जाती है। समय पर आने और विद्यालय के सभी शिक्षकों को निर्देश दिया जाएगा। <br /><strong>- पीयूष शर्मा, जिला शिक्षा अधिकारी, बारां।  </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बारां</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 19 Aug 2024 16:47:17 +0530</pubDate>
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                <title>शिक्षा की राह हुई आसान, शिक्षकों ने बदली स्कूल की सूरत</title>
                                    <description><![CDATA[स्कूल में एडमिशन के लिए लगी रहती है कतार।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jhalawar/the-path-of-education-has-become-easier--teachers-have-changed-the-face-of-the-school/article-87551"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-08/4111u1rer-(2)19.png" alt=""></a><br /><p>मनोहरथाना। शिक्षक चाहे तो स्कूल का माहौल बदल सकते है। ऐसा ही कुछ प्रयास किया झालावाड़ के मनोहरथाना ब्लॉक के राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय बांसखेड़ी मेवातियां के एक सरकारी स्कूल के संस्था प्रधान ने और उसमें सहयोग दिया उनके शिक्षकों ने। सभी ने मिलकर स्कूल की तस्वीर ही बदल दी। स्कूल और शिक्षा व्यवस्थाओं सुधारने के जुनून के साथ इन्होने सरकारी स्कूल का कायाकल्प ही कर दिया। यह स्कूल है राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय बांसखेड़ी मेवातियां। इस स्कूल के हर कमरे में ना केवल सीसीटीवी कैमरे लगे हुए बल्की पूरा विद्यालय पेड़ पौधे से हरा भरा है। स्कूल के कार्यवाहक संस्था प्रधान सुनील शर्मा और यहां के शिक्षकों ने कोविड काल के बाद से एक सरकारी स्कूल को निजी स्कूलों से कहीं आगे ले जाकर खड़ा कर दिया है। यही वजह है कि स्कूल में एडमिशन के लिए कतार लगी रहती है।</p>
<p><strong>विद्यालय के हर क्लासरूम में सीसीटीवी</strong><br />निजी स्कूलों में सीसीटीवी कैमरे लगे होना कोई अचरज की बात नहीं लेकिन अगर हमें पता चले कि किसी सरकारी स्कूल में भी सीसीटीवी कैमरे हैं तो आश्चर्य होगा ही। विद्यालय के कार्यवाहक संस्था प्रधान सुनील शर्मा और भामाशाह अध्यापकों की मदद से पूरे विद्यालय में 27 सीसीटीवी कैमरे यहां लगाए गए हैं। वहीं विद्यार्थियों में पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने के लिए स्कूल में पौधे लगाए गए, जिससे स्कूल में हर तरफ हरियाली फैली हुई है। विद्यालय में अर्जुन, जामुन, शीशम, आम, नीम पीपल इत्यादि के बड़े वृक्ष व छोटे पौधों की बात हों तो गुलाब, रजनीगंधा चमेली, मोगरा, गुलदाँवदी, हजारा साथ ही एक किचन गार्डन हैं जिसमे मिर्ची, टमाटर बेंगन इत्यादि के पौधे लगे हैं। स्कूल की दशा सुधारने के लिए पहले पढ़ाई का माहौल बनाया गया। इसके बाद स्कूल में बदलाव का दौर शुरू हुआ। स्कूल में पानी की व्यवस्था तो थी लेकिन लगता था सालों से साफ सफाई ही नहीं हुई हो। पानी के नल इतने ऊंचे लगे थे कि छोटे बच्चों के लिए वहां तक पहुंचना संभव नहीं था। इसे ने स्कूल में पीने के पानी के लिए वाटर कूलर लगा कर छोटे बच्चों के लिए यहां अलग से नल लगवाए गए जिससे उनकी परेशानी खत्म हुई।</p>
<p><strong>एमडीएम में स्वच्छता का रखते विशेष ख्याल, परोसे जाते पौष्टिक आहार</strong><br />कई विद्यालयों में स्वच्छता का ख्याल नहीं रखा जाता है। कूड़े कचरों से भरा रसोई घर और चारों ओर फैली गंदगी ही देखने को मिलती है। जबकि  राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, बांसखेड़ी मेवातियां में स्वच्छता का विशेष ख्याल रखा जाता है और पौष्टिक भोजन परोसे जाते हैं। खासकर एमडीएम बनाने और परोसने साफ-सफाई पर विशेष ध्यान दिया जाता है। इस विद्यालय में रसोईया प्रति दिन रसोई घर की साफ सफाई  करते हैं। यहां बच्चों का मिड-डे मील बनाने के लिए पति पत्नी  रसोईया प्रतिनियुक्त हैं। विद्यालय में  मेन्यू के मुताबिक भोजन में परोसा जाता हैं। चावल बनाने से पहले उसकी अच्छी तरह से सफाई कर तीन बार पानी से चावल को धोए जाने की परंपरा है। बच्चों को गुरुवार को पौष्टिक आहार के रूप में केला, सेब परोसे जाते हैं। भोजन से पहले बच्चों को साबुन से हाथ की सफाई कराई जाती है। यानी कि यहां साफ सफाई पर विशेष ध्यान दिया जाता है। ताकि बच्चों में किसी भी तरह की बीमारी नहीं फैल सके।</p>
<p><strong>लाइब्रेरी के साथ कम्प्यूटर लैब की सुविधा भी</strong><br />स्कूल में विद्यार्थियों के लिए लाइब्रेरी की व्यवस्था की गई है। साथ ही प्रोजेक्टर के साथ कम्प्यूटर सिस्टम भी लगाए गए हैं। विद्यालय में बिजली जाने पर पढ़ाई बाधित नहीं हो इसलिए यूपीएस की व्यवस्था भी की गई है। खास बात यह है कि स्कूल के बदलते स्वरूप को देखते हुए विद्यालय में डिजिटल क्लास के माध्यम से बच्चो को पढ़ाए जाता है जिससे बच्चों को उच्च गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा मिल सके।  </p>
<p><strong>अध्यापकों की कमी के बाद भी बच्चों का परिणाम सबसे ज्यादा</strong><br />वैसे तो राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय बांसखेड़ी मेवातियान स्कूल में अभी 485 बच्चों का नामांकन है। साथ ही पूरे स्कूल में अनुशासन है। वहीं विद्यालय में कुल स्वीकृत पद 23 हैं, लेकिन अभी विद्यालय में कुल13 कार्यरत है, लेकिन उसके बाद भी बांसखेड़ी मेवातियान विद्यालय में हर साल कक्षा 10 व 12 मे ब्लॉक स्तर पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराने मे सफल रहा हैं। सत्र 2023- 24 में भी पुष्पेंद्र जोगी ने कक्षा 12 वी मे ब्लॉक स्तर पर सरकारी विद्यालयों में दूसरा स्थान प्राप्त किया। वही स्कूल मे 9 से 12 तक के हर कक्षा कक्ष मे संसार,भारत व राजस्थान के नक्शे लगे हैं ताकि छात्र छात्राएं इनके राजनैतिक स्वरूप की जानकारी लें सके।</p>
<p><strong>इनका कहना है...</strong><br />राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय बांसखेड़ी मेवातियान विद्यालय के कंगुरे हैं, विद्यालय  की नींव की ईंटे विद्यालय का स्टाफ हैं, उन्ही के सहयोग से ये बदलाव आ पाया हैं। 12 साल से स्टाफ साथी प्रताप सिँह का भी विद्यालय विकास मे बराबरी का योगदान हैं।<br /><strong>- सुनील कुमार शर्मा,कार्यवाहक प्रधानाचार्य, राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय बांसखेड़ी मेवातियां</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>झालावाड़</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 12 Aug 2024 17:50:01 +0530</pubDate>
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                <title>नालियां बंद होने से तालाब बना बालापुरा स्कूल</title>
                                    <description><![CDATA[विद्यालय परिसर में पानी भर जाने से बच्चों की शिक्षण व्यवस्था बाधित  हो रही है। 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/baran/balapura-school-became-a-pond-due-to-blocked-drains/article-57093"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-09/naliya-avrudh-hone-s-talab-bna-balapura-vidhyalaya...nahargar,-baran-news-14-09-2023.jpg" alt=""></a><br /><p>नाहरगढ़। नाहरगढ क्षेत्र में ग्राम पंचायत वार्ड एक बालापुरा के राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय परिसर में नालियों और बरसात का गंदा पानी विद्यालय परिसर में भर गया। जिससे विद्यालय में आने वाले विद्यार्थियों, अध्यापकों और अभिभावकों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। अभी विद्यालय के पास ही सड़क निर्माण कार्य चल रहा है। जिससे नालियां अवरूद्ध हो गई है। ठेकेदार द्वारा बरसात के पानी की निकासी की उचित व्यवस्था भी नहीं करने के कारण पूरा गंदा पानी विद्यालय परिसर में भर गया है। कारण विद्यार्थियों को विद्यालय में आने में बड़ी दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है और छोटे बच्चे तो स्कूल आने में भी कतराने लगे हैं। जल भराव होने से विद्यालय में कीचड़ हो गया है। जिससे कभी कभी तो विद्यार्थी फिसल कर कीचड़ में भी गिर जाते हैं और उन्हें वापस घर जाना पड़ जाता है। जिससे  उनकी पढ़ाई बाधित होती है।</p>
<p><strong>विद्यालय की पट्टियां भी टूटी, हादसे का अंदेशा</strong><br />विद्यालय में  एक भवन की पट्टियां भी टूटी हुई है। जिनको पाइपों के सहारे रोका गया है कब अनहोनी घटना हो जाए कुछ कहा नही जा सकता और दूसरे भवन की छत भी चलनी की तरह टपकती है, ऐसे में विधार्थियों और अध्यापकों की  जान पर हमेशा खतरा मंडराता रहता है ऐसे में करें तो क्या करें बड़ी विषम परिस्थिति है। अभिभावक भी अपने बच्चों को विद्यालय भेजने में कतराने लगे है। </p>
<p><strong>शिक्षण व्यवस्था भी हो रही बाधित</strong><br />विद्यालय परिसर में पानी भर जाने से बच्चों की शिक्षण व्यवस्था बाधित  हो रही है। विद्यालय परिसर में गंदा पानी भरने से कई प्रकार की मौसमी बीमारियों का खतरा भी  बढ़ गया है। इस समस्या को लेकर विद्यालय के शिक्षक ग्राम पंचायत में सरपंच को लिखित में  कई बार शिकायत भी  कर चुके है लेकिन कोई समाधान नहीं हुआ। </p>
<p>विद्यालय में पानी भरा हुआ है। जिससे बालकों को विद्यालय भेजने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। <br /><strong>- रामप्रसाद, अभिभावक। </strong></p>
<p>सड़क निर्माण के चलते नालियां अवरूद्ध हो गई है। जिससे विद्यालय परिसर में पानी भर गया है। जिसका खामियाजा विद्यार्थियों को भुगतना पड़ रहा है।<br /><strong>- रामलाल, ग्रामीण। </strong><br />    <br />अभी सड़क निर्माण का कार्य चल रहा है। जिससे नालियां अवरुद्ध हो गई हैं। समस्या को लेकर अधिकारियों को अवगत करा दिया है। <br /><strong>- बृजमोहन वर्मा, प्रधानाध्यापक , राअप्रावि बालापुरा। </strong></p>
<p>ग्रामीण और अभिभावकों ने समस्या से अवगत कराया है। जल्द ही समस्या का समाधान किया जाएगा। <br /><strong>- सोहनलाल सहरिया, सरपंच, नाहरगढ। </strong></p>
<p>अभी विद्यालय के पास ही सड़क निर्माण कार्य चल रहा है। जिससे नालियां अवरूद्ध हो गई है। ठेकेदार को समस्या के समाधान के निर्देश दिए है। जल्द ही विद्यालय में जलभराव की समस्या का समाधान हो जाएगा। <br /><strong>- रामकुमार सहरिया, ग्राम विकास अधिकारी, नाहरगढ। </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
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                <pubDate>Thu, 14 Sep 2023 16:32:17 +0530</pubDate>
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