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                <title>Olympics 2024: खेलमंत्री राज्यवर्धन सिंह भी ओलंपिक में बन चुके हैं भारतीय दल के ध्वजवाहक</title>
                                    <description><![CDATA[भारत के ओलंपिक इतिहास में पूर्व हॉकी कप्तान बलवीर सिंह सीनियर अकेले ऐसे खिलाड़ी रहे हैं, जिन्हें दो बार ओलंपिक खेलों में ध्वजवाहक बनने का गौरव प्राप्त हुआ।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/khel/sports-minister-rajyavardhan-singh-has-also-become-the-flag-bearer/article-85177"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-07/111u1rer-(14)2.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान के खेलमंत्री कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़ प्रदेश के अकेले ऐसे खिलाड़ी हैं, जिन्हें प्रतिष्ठित ओलंपिक खेलों में भारतीय दल का ध्वजवाहक बनने का गौरव हासिल हुआ है। 2004 के एथेंस ओलंपिक खेलों में निशानेबाजी की डबल ट्रेप स्पर्धा में रजत पदक जीतने वाले राज्यवर्धन सिंह राठौड़ को 2008 के बीजिंग ओलंपिक खेलों में यह सम्मान मिला। राज्यवर्धन सिंह ने सौ से ज्यादा सदस्यों के भारतीय दल की अगुवाई की। भारतीय दल में तब 57 एथलीट और 42 अधिकारी और सपोर्ट स्टाफ के सदस्य शामिल थे। राज्यवर्धन सिंह वर्तमान में राजस्थान सरकार में खेलमंत्री हैं। वे केन्द्र सरकार में भी खेल मंत्रालय संभाल चुके हैं। </p>
<p><strong>भारत ने जीता पहला स्वर्ण<br /></strong>2008 के बीजिंग ओलंपिक खेल भारत के लिए ऐतिहासिक साबित हुए। राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने जहां निशानेबाजी में एथेंस में देश के लिए पहला व्यक्तिगत रजत पदक हासिल किया, वहीं बीजिंग में एक और निशानेबाज अभिनव बिन्द्रा ने पहला व्यक्तिगत स्वर्ण पदक जीत नया इतिहास रच दिया। बिन्द्रा ने पुरुषों की दस मीटर एयर राइफल स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीता। इसके अलावा पहलवान सुशील कुमार और मुक्केबाज विजेन्द्र सिंह ने अपनी- अपनी स्पर्धाओं में देश के लिए कांस्य पदक जीते। </p>
<p><strong>पेरिस में सिंधू और शरथ होंगे ध्वजवाहक</strong><br />ओलंपिक जैसे बड़े मंच पर अपने देश का ध्वजवाहक बनना किसी भी खिलाड़ी के लिए गौरव की बात होती है। पेरिस ओलंपिक खेलों के उद्घाटन समारोह में दो बार की ओलंपिक पदक विजेता बैडमिंटन खिलाड़ी पीवी सिंधू और देश के महान टेबल टेनिस खिलाड़ी अचंता शरथ कमल भारतीय दल के ध्वजवाहक होंगे। वहीं 2012 लंदन ओलंपिक के कांस्य पदक विजेता निशानेबाज गगन नारंग को पेरिस ओलंपिक के लिए भारतीय दल का शेफ-डे-मिशन चुना गया है। </p>
<p><strong>बलवीर सिंह बने हैं दो बार ध्वजवाहक<br /></strong>भारत के ओलंपिक इतिहास में पूर्व हॉकी कप्तान बलवीर सिंह सीनियर अकेले ऐसे खिलाड़ी रहे हैं, जिन्हें दो बार ओलंपिक खेलों में ध्वजवाहक बनने का गौरव प्राप्त हुआ। बलवीर सिंह 1952 और 1956 के ओलंपिक में भारत के ध्वजवाहक बने। 1920 में पूर्मा बनर्जी, 1932 में लाल शाह भोकारी, 1936 में मेजर ध्यानचंद, 1948 में तालिमेरेन, 1964 में गुरबचन सिंह रंधावा, 1972 में डेसमंड नेविल डिवाइन जोन्स, 1984 में जफर इकबाल, 1988 में करतार सिंह, 1992 में शाहिनी विल्सन, 1996 में परगट सिंह, 2000 में लिएंडर पेस, 2004 में अंजू बॉबी जॉर्ज,  2008 में राज्यवर्धन सिंह राठौड़, 2012 में सुशील कुमार, 2016 में अभिनव बिन्द्रा, 2020 ओलंपिक खेलों में मैरी कॉम और मनप्रीत सिंह भारत के ध्वजवाहक बने हैं।</p>
<p><strong>पेरिस ओलंपिक 2024 के ध्वजवाहक<br /></strong>पेरिस ओलंपिक का आयोजन 26 जुलाई से 11 अगस्त तक होगा, जिसमें पीवी सिंधू, ए. शरत कमल के साथ उद्घाटन समारोह में महिला ध्वजवाहक होंगी। गगन नारंग को भारतीय दल के शेफ-डी-मिशन के रूप में एमसी मैरी कॉम की जगह चुना गया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>खेल</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 19 Jul 2024 12:00:19 +0530</pubDate>
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                <title>पीवी सिंधु होगी भारत की ध्वज वाहक</title>
                                    <description><![CDATA[नीरज ने भारतीय ओलम्पिक संघ (आईओए) से आग्रह किया था कि वह बर्मिंघम खेलों में भारतीय दल के ध्वजवाहक नहीं बन पाएंगे। नीरज के हटने के बाद आईओए ने सिंधु को ध्वजवाहक बनाने का फैसला किया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/khel/sindhu-will-be-flag-bearer-of-india/article-16494"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-07/246654654.jpg" alt=""></a><br /><p>बर्मिंघम। ओलम्पिक पदक विजेता बैडमिंटन स्टार पीवी सिंधु बर्मिंघम राष्ट्रमंडल खेलों में भारतीय दल की ध्वजवाहक होगी। स्टार एथलीट नीरज चोपड़ा के चोट के कारण इन खेलों से हट जाने के बाद सिंधु को यह जिम्मेदारी दी गई है। नीरज ने भारतीय ओलम्पिक संघ (आईओए) से आग्रह किया था कि वह बर्मिंघम खेलों में भारतीय दल के ध्वजवाहक नहीं बन पाएंगे। नीरज के हटने के बाद आईओए ने सिंधु को ध्वजवाहक बनाने का फैसला किया।</p>
<p><strong>भारत में 29 जुलाई को तड़के 4 बजे देखा जा सकता है प्रसारण</strong><br />उद्घाटन समारोह बर्मिंघम में स्थानीय समयानुसार रात 11.30 बजे शुरू होगा। भारतीय समयानुसार 29 जुलाई सुबह चार बजे से इसका प्रसारण देखा जा सकता है। भारत में राष्ट्रमंडल खेलों के प्रसारण का अधिकार सोनी पिक्चर्स नेटवर्क के पास है। दूरदर्शन सिर्फ भारतीय खिलाड़ियों के मैचों का प्रसारण करेगा।</p>
<p><strong>दूसरी बार मौका</strong><br />सिंधु को ध्वज वाहक बनने का मौका लगातार दूसरी बार मिला है। वह पिछली बार ऑस्ट्रेलिया के गोल्ड कोस्ट में हुए खेलों में भी भारत की ध्वजवाहक थी। सिंधु के साथ भारोत्तोलक मीराबाई चानू और मुक्केबाज लवलीना बोर्गोहेन के नामों पर भी चर्चा हुई लेकिन आईओए के कार्यवाहक अध्यक्ष अनिल खन्ना, महासचिव राजीव मेहता, कोषाध्यक्ष आनंदेश्वर पांडे और राजेश भंडारी की चार सदस्यीय समिति ने तीन एथलीटों को शॉर्टलिस्ट किया। अंत में अनिल खन्ना और राजीव मेहता ने सिंधु को ध्वजवाहक के रूप में चुना।</p>
<p><strong>बर्मिंघम कर रहा है पहली बार मेजबानी</strong><br />राष्ट्रमंडल खेलों का यह 22वां संस्करण होगा। इसमें 72 देशों के 4500 से अधिक एथलीट 20 विभिन्न खेल स्पर्धाओं में पदक के लिए उतरेंगे। खेलों की शुरुआत एलेक्जेंडर स्टेडियम में होने वाले भव्य उद्घाटन समारोह के साथ होगी। बर्मिंघम शहर पहली बार इसकी मेजबानी कर रहा है। हालांकि इंग्लैंड में तीसरा बार इन खेलों का आयोजन हो रहा है। 19 खेलों में कुल 283 पदक दाव पर होंगे। <br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Thu, 28 Jul 2022 11:21:57 +0530</pubDate>
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