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                <title>indian festival - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>हर साल रावण का पुतला दहन करना ब्राह्मणों का अपमान, सनातन संस्कृति में एक बार होता है अंतिम संस्कार : शंकराचार्य</title>
                                    <description><![CDATA[शंकराचार्य की ओर से यहां जारी एक बयान में उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को रावण का पुतला दहन रोकने के लिए अध्यादेश जारी करना चाहिये। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/burning-the-effigy-of-ravana-every-year-is-an-insult-to-brahmins--the-last-rites-are-performed-once-in-sanatan-culture--shankaracharya/article-25366"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-10/dddddd.jpg" alt=""></a><br /><p>मथुरा। जगद्गुरु शंकराचार्य अधोक्षजानन्द देव तीर्थ ने दशहरा पर रावण का पुतला दहन करने की परंपरा को बन्द करने की सरकार से मांग की है। उनकी दलील है कि इससे न सिर्फ प्रदूषण होता है बल्कि भारत की सनातन संस्कृति में किसी व्यक्ति का एक ही बार अंतिम संस्कार करने की परंपरा का भी अपमान है। शंकराचार्य की ओर से यहां जारी एक बयान में उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को रावण का पुतला दहन रोकने के लिए अध्यादेश जारी करना चाहिये। जिसे बाद में संसद से पारित कराके कानूनी जामा पहनाकर लागू किया जा सकता है। उनकी दलील है कि बार बार रावण का पुतला दहन करना विद्वता का अपमान है।</p>
<p>उन्होंने बयान में कहा कि रावण ब्राह्मण था और न केवल बलवान था बल्कि वेदों का ज्ञाता भी था। उसकी विद्वता के कारण ही रामेश्वरम में समुद्र पर सेतु बनाने के लिए श्रीराम ने उससे पूजन कराया था। राम रावण युद्ध में उसकी मृत्यु के बाद श्रीराम ने लक्ष्मण को उसके अंतिम संस्कार में भाग लेने के लिए भेजा था और विभीषण की उपस्थिति में उसका अंतिम संस्कार किया गया था। शंकराचार्य ने कहा कि भारत की सनातन संस्कृति में किसी व्यक्ति का अंतिम संस्कार केवल एक बार किया जाता है। रावण का त्रेता युग में ही कर दिया गया था। अब हर साल उसका पुतला दहन करना न सिर्फ सनातन संस्कृति के प्रतिकूल है बल्कि ब्राह्मणों का भी अपमान है।  </p>
<p>उन्होंने कहा कि मनुष्य की कृति ऐसी है, जिसमें देवत्व भी है और असुरत्व भी है। वर्तमान समय की सबसे बड़ी आवश्यकता मनुष्य को अपने अन्दर मौजूद असुरत्व का दहन करने की है। आज के समाज के विघटन का भी मूल कारण मनुष्य द्वारा असुरत्व को महत्व देना है। इसी असुरत्व के कारण रूस और यूक्रेन का युद्ध रूकने का नाम नहीं ले रहा है। उनका कहना है कि रामलीला के आयोजकों को दशहरा पर अपने भीतर का असुरत्व समाप्त करने का संकल्प दिलाना चाहिए। मानव की आसुरी प्रवृत्ति जब हट जाएगी और दैवी प्रवृत्ति उसका स्थान ले लेगी तो यह धरती स्वर्ग बन जाएगी तथा सारे झगड़े समाप्त हो जाएंगे और सर्वे भवन्तु सुखिन: कथन चरितार्थ होने लगेगा।</p>
<p>शंकराचार्य ने कहा कि रावण के पुतले का दहन कर अनजाने में ही नई पीढ़ी को कुसंस्कार परोसा जा रहा है और एक विद्वान का अपमान करने की शिक्षा दी जा रही है। पुतला दहन से पर्यावरण भी प्रदूषित होता है। सरकार जिस प्रकार स्वच्छ पर्यावरण के लिए वाहनो में स्वच्छ ईंधन का प्रयोग करने या पराली जलाने से रोकने के लिए कानून का सहारा लेती है, उसी प्रकार पुतला दहन को रोकने के लिए भी समाजसेवियों के साथ ही सरकार को भी पहल करनी चाहिए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Tue, 04 Oct 2022 15:33:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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                <title>210 साल से हो रही थी रामलीला, एसडीएम ने इस बार नहीं दी परमिशन, महंत ने अन्न जल त्यागा</title>
                                    <description><![CDATA[बीते रविवार को देर रात तक किसी आयोजन की पूर्व अनुमति नहीं लिए जाने के कारण एसडीएम ने रामलीला को रुकवा दिया था। इससे नारज महंत और रामलीला कमेटी के अध्यक्ष स्थानीय लोगों के साथ धरने पर बैठ गए।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/ramlila-was-happening-for-210-years-sdm-did-not-give-permission-this-time-mahant-gave-up-food-and-water/article-25348"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-10/w-1.jpg" alt=""></a><br /><p>कानपुर देहात। उत्तर प्रदेश में कानपुर देहात के थाना शिवली में लगभग 210 साल से हो रही रामलीला के मंचन की अनुमति उपजिलाधिकारी (एसडीएम) ने नहीं दी, इससे नाराज एक महंत ने अन्न जल त्याग दिया। प्राप्त जानकारी के मुताबिक बीते रविवार को देर रात तक किसी आयोजन की पूर्व अनुमति नहीं लिए जाने के कारण एसडीएम ने रामलीला को रुकवा दिया था। इससे नारज महंत और रामलीला कमेटी के अध्यक्ष स्थानीय लोगों के साथ धरने पर बैठ गए।</p>
<p>इन लोगों ने जिलाधिकारी से लिखित शिकायत कर एसडीएम के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है। वहीं जिला प्रशासन ने मंगलवार को इलाके में स्थिति को तनावपूर्ण होते देख सुरक्षा की दृष्टि से पुलिस बल मौके पर तैनात कर दिया है। दरअसल कानपुर देहात के शिवली में साकेत धाम मंदिर पर हर साल की तरह इस साल भी 210वीं रामलीला का मंचन रविवार की देर रात हो रहा था। इस दौरान रात लगभग 12 से 1 के बीच मैथा के एसडीएम महेंद्र कुमार पहुंचे और रामलीला को बंद करवा दिया। इस दौरान क्षेत्रीय लोगों ने जब कारण पूछा तो एसडीएम ने अनुमति ना होने की बात कही। दूसरी ओर धार्मिक कार्यक्रम का हवाला देते हुए लोगों ने रामलीला को चालू रखने की बात कही, लेकिन एसडीएम ने महंत व क्षेत्रीय लोगों की बात को अनसुना कर दिया। इससे क्षेत्रीय लोगों में आक्रोश भड़क गया। स्थानीय लोगों की नाराजगी को बढ़ता देख एसडीएम स्थल से चले गए।</p>
<p>रामलीला समिति के अध्यक्ष वैभव तिवारी ने कहा कि 10 दिन पहले ही अनुमति मांगी गई थी। उनके आवेदन पर सभी जगह से आख्या लगकर एसडीएम कार्यालय में पहुंच भी गई थी। सभी विभागों की आख्या होने के बावजूद एसडीएम ने अनुमति पत्र पर दस्तखत ही नहीं किए। तिवारी ने बताया कि 210 साल से रामलीला हो रही है। इस स्थान को लीला मंचन की जन्मस्थली माना जाता है। उन्होंने कहा कि आज तक कभी भी किसी भी प्रकार की समस्या नहीं हुई और ना ही किसी ने रामलीला को रुकवाया है। पहली बार रामलीला का मंचन रुकवाया गया है। इससे नाराज होकर स्थानीय लोगों ने एसडीएम के विरुद्ध कार्रवाई करने की मांग की।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Tue, 04 Oct 2022 14:51:25 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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                <title>गरबा महोत्सव पर बारिश का दौर ना पड़ जाए भारी</title>
                                    <description><![CDATA[इस बार नवरात्रि में बारिश आने की चेतावनी ने गरबा कार्यक्रम बाधित हो सकते है। इस बार गरबा में भजन संध्या के लिए महंगे कलाकारों को बुक किया है, लेकिन बारिश का दौर चला तो कार्यक्रम में रद्द करना पड़ेगा कारण की सारे कार्यक्रम खुले मैदान में होंगे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/there-should-be-no-heavy-rain-on-garba-festival/article-24484"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-09/garba-mahotsav-par-barsih-ka-daur-na-pad-jae-bhari,-kota-news--26-09-2022.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। नवरात्रि शुरू होने में एक दिन शेष है और इधर मानसून अभी तक सक्रिय रहने से गरबा आयोजन मंडलों लिए महारास और डांडियों का आयोजन कराने के लिए मशक्कत करनी होगी। नवरात्रि तक मानसून के सक्रिय रहने से इस बार कई गरबा पांडालों ने तो वाटर प्रूफ पांडाल तैयार कराए है।  लेकिन शहर के अधिकांश पांडाल खुले मैदान में आयोजित कराते है। ऐसे में पहले से बुक कराए भजन संध्या के कार्यक्रमों और महारास के कार्यक्रम बाधित हो सकते है। शहर में करीब चार सौ से अधिक स्थानों पर पांडाल सजे है। वहीं  नौ दिवसीय  महोत्सव के दौरान होने वाले विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम बाधित होने की चिंता सता रही है। इस बार  देर तक बारिश दौर जारी रहने से करोड़ो रुपए महोत्सव बारिश का खतरा मंडरा रहा है।</p>
<p><strong>जगराता और महारास कार्यक्रम हो सकते है प्रभावित</strong><br />महाकाली गरबा नवयुवक मंडल के संचालक विजय कुमार ने बताया कि इस बार नवरात्रि में बारिश आने की चेतावनी ने गरबा कार्यक्रम बाधित हो सकते है। इस बार गरबा में भजन संध्या के लिए महंगे कलाकारों को बुक किया है, लेकिन बारिश का दौर चला तो कार्यक्रम में रद्द करना पड़ेगा कारण की सारे कार्यक्रम खुले मैदान में होंगे। इस बार जुनियर लक्खा सिंह सहित कई गरबा गायकों को नौ दिन के लिए बुक किया है। बारिश का दौर चला तो सारे कार्यक्रमों पर पानी फिर सकता है। </p>
<p><strong>बारिश का दौर चला तो तीन करोड़ का कारोबार होगा प्रभावित</strong><br />नवरात्रि के दौरान बारिश होने पर शहर में करीब तीन करोड़ का कारोबार प्रभावित हो सकता है। पांडालों में लगने वाले डीजे, डोल और कलाकारों के कार्यक्रम प्रभावित होने से आयोजकों के करीब तीन करोड़ रुपए का नुकसान हो सकता है। कई लोगों भजन संध्या, आर्केस्ट्रा की एडवांस बुकिंग करा रखी है।बारिश रंग में भंग डाल सकती है।</p>
<p><strong>देवी मंदिरों में तैयारियों को दिया अंतिम रूप<br /></strong>शहर के विभिन्न देवी मंदिरों में रंगरोगन और साफ सफाई का कार्य युद्ध स्तर पर चल रहा है। शहर के डाढदेवी मंदिर, आशापुरा माता मंदिर, दुर्गा मंदिर, करणी माता मंदिर, नवदुर्गा मंदिर में इन दिनों साफ सफाई और रंगरोगन के कार्यो को अंतिम रूप दिया जा रहा है। सोमवार को अभिजित मुहूर्त में घट की स्थापना होगी। इसको लेकर तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 26 Sep 2022 16:22:55 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>मोती डूंगरी गणेश मंदिर में हो रहा है गणेश जन्मोत्सव का मुख्य आयोजन</title>
                                    <description><![CDATA[ सुबह 4 बजे से भक्तों ने मंगला आरती से दर्शन करने शुरू कर दिए हैं। भक्तों को मंदिर में 5 लाइनों से प्रवेश दिया जा रहा है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/the-main-event-of-ganesh-janmotsav-is-being-held-in-moti-dungri-ganesh-temple/article-21101"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-08/465465465131.jpg" alt=""></a><br /><p>गणेश मंदिरों में कोरोना महामारी के दो साल बाद फिर से गणेश जन्मोत्सव पर भगवान के दर्शन के लिए भक्तों का तांता लग रहा है। काफी तादाद में भक्त भगवान गणेशजी के दर्शन करने के लिए आ रहे हैं। जय गणेश, जय श्री गणेश, गणपति बप्पा मोरिया के जयघोष लगाकर सबका मंगल होने की मंगलमूर्ति कामना की जा रही है। गणेश जन्मोत्सव का मुख्य आयोजन शहर के मोती डूंगरी गणेश मंदिर में हो रहा है जहां दिनभर में करीब 8 लाख भक्त गणपति के दर्शन करेंगे और भगवान को मोदक, दूर्वा, गुड़धानी का भोग लगा रहे हैं। मोती डूंगरी गणेश जी के दर्शन के लिए देर रात से ही करीब 1000 पद यात्री मंदिर आ चुके है और भक्त बारी-बारी से दर्शन कर रहे हैं। पुलिस भारी तादाद में आ रही भीड़ की निगरानी कर रही हैं।<br /><br /><strong>मंगला झांकी से कर रहे हैं दर्शन</strong><br />सुबह 4 बजे से भक्तों ने मंगला आरती से दर्शन करने शुरू कर दिए हैं। भक्तों को मंदिर में 5 लाइनों से प्रवेश दिया जा रहा है। वहीं 6 लाइनों से निकास हो रहा है। इसी तरह शहर के ब्रह्मपुरी माउंट रोड पर स्थित नहर के गणेश जी, नाहरगढ़ रोड पर स्थित गढ़ गणेशजी, बड़ी चौपड़ स्थित ध्वजाधीशजी, सूरजपोल स्थित श्वेत सिद्धि विनायक गणपति, परकोटा गणेश मंदिर चांदपोल,चौड़ा रास्ता स्थित वाले गणेश, खोले के हनुमान जी स्थित नृत्य गणेश, दिल्ली-जयपुर बाईपास स्थित बंगाली बाबा आश्रम के गणेशजी सहित गणेश मंदिरों में भक्तों का सैलाब गणपति की आराधना के लिए उमड़ रहा है।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 31 Aug 2022 13:19:37 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>31 अगस्त को मनाया जाएगा गणेशजी महाराज का जन्मोत्सव</title>
                                    <description><![CDATA[महोत्सव के तहत 25 अगस्त को गुरु पुष्य नक्षत्र पर गजानन महाराज के पंचामृत अभिषेक होगा। इस दिन 351 महिलाएं कलश लेकर आएगी, जल से भगवान का अभिषेक होगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/ganeshji-maharajs-birthday-will-be-celebrated-on-31st-august/article-19995"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-08/dfasashgjhd.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी पर 31 अगस्त को गणेशजी महाराज का जन्मोत्सव मनाया जाएगा। इससे पहले मोती डूंगरी गणेशजी मंदिर में जन्मोत्सव के कार्यक्रम 24 अगस्त से ही शुरू हो जाएंगे। इस दिन मोदकों की झांकी सजाई जाएगी। मुख्य आयोजन गणेश चतुर्थी को होगा। इसके एक दिन पहले 30 अगस्त को सिंजारा महोत्सव का आयोजन होगा। गणेशजी महाराज को सिंजारे की मेहंदी धारण करवाई जाएगी। वहीं जन्मोत्सव के दूसरे दिन गणेशजी महाराज की शोभायात्रा निकाली जाएगी। दो साल बाद भगवान गणेशजी महाराज जयपुर शहर भ्रमण पर निकलेंगे।</p>
<p>मंदिर महंत कैलाश शर्मा ने बताया कि गणेशजी महाराज के जन्मोत्सव को 31 अगस्त को मनाया जाएगा। इस उपलक्ष्य में कई कार्यक्रम होंगे। 24 अगस्त को गणेशजी महाराज के मोदकों की झांकी के दर्शन होंगे। झांकी के दर्शन सुबह 5 बजे से होंगे। इस दिन बाहर का प्रसाद नहीं चढ़ेगा। झांकी में 251 किलो के 2 मुख्य मोदक होंगे। इसके अलावा 5 मोदक 51 किलो के, 21 मोदक 21 किलो के और 1100 मोदक सवा किलो के साथ अन्य मोदक शामिल होंगे। इस दिन गजानन महाराज को माणक पन्ना युक्त मुकुट धारण करवाया जाएगा। भक्तों को शाम 6.30 बजे से रात 9 बजे तक नि:शुल्क प्रसाद वितरित किया जाएगा।</p>
<p><strong>25 अगस्त को गुरु पुष्य नक्षत्र पर होगा अभिषेक</strong><br />महोत्सव के तहत 25 अगस्त को गुरु पुष्य नक्षत्र पर गजानन महाराज के पंचामृत अभिषेक होगा। इस दिन 351 महिलाएं कलश लेकर आएगी, जल से भगवान का अभिषेक होगा। इसके अलावा 500 किलो दूध, 50 किलो बूरा, 100 किलो दही व 11 किलो घी व 11 किलो शहद से पंचामृत अभिषेक होगा। इस दिन ध्वज पूजन होगा। नवीन ध्वज धारण होंगे। मंदिर में महोत्सव के तहत 26 से 29 अगस्त तक सांस्कृतिक कार्यक्रम व भजन संध्या होगी। इसमें ध्रुवपद गायन, कत्थक नत्य व सुगम संगीत का आयोजन होगा।</p>
<p><strong>मेहंदी पूजन और सिंजारा महोत्सव 30 अगस्त को</strong><br />महंत कैलाश शर्मा ने बताया कि महोत्सव के तहत 30 अगस्त को गणेशजी महाराज का विशेष शृंगार किया जाएगा। गणेशजी महाराज का विशेष नौलड़ी का नोलखा हार के भाव जैसा शृंगार होगा। गणेशजी महाराज सिंजारे की मेहंदी धारण करेंगे, भक्तों को मेहंदी प्रसाद वितरित किया जाएगा। गणेशजी महाराज स्वर्ण मुकुट धारण करेंगे व चांदी के सिंहासन पर विराजमान होंगे। मेहंदी प्रसाद पांच स्थानों पर रात 8 बजे से वितरित किया जाएगा।</p>
<p><strong>गणेश चतुर्थी पर तड़के 4 बजे होंगे दर्शन</strong><br />गणेश चतुर्थी पर 31 अगस्त को गजानन महाराज का जन्मोत्सव मनाया जाएगा। इस दिन मंगला आरती सुबह 4 बजे होगी, वहीं शयन आरती रात 11.45 बजे होगी। भक्तों को मंदिर में 5 लाइनों से प्रवेश दिया जाएगा। वहीं 6 लाइनों से निकास होगा।</p>
<p><strong>दो साल बाद निकलेगी गजानन शोभायात्रा, 80 झांकियां होंगी शामिल</strong><br />गणेश चतुर्थी के दूसरे दिन एक सितंबर को गणेशजी की शेाभायात्रा निकाली जाएगी। कोरोना महामारी के कारण दो साल बाद निकल रही इस यात्रा में 80 झांकियां शामिल होंगी। जिसमें 25 इलेक्ट्रॉनिक झांकियां होगी। एक बड़ी झांकी में गणेशजी ढोल नगाड़ा बजाते हुए नजर आएंगे। शोभायात्रा में आजादी के अमृत महोत्सव की झलक देखने को मिलेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 22 Aug 2022 16:51:27 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>द्वारकाधीश मंदिर में जन्माष्टमी उत्सव की धूम, गोस्वामी कुमार ने परेड की सलामी ली</title>
                                    <description><![CDATA[मंदिर में शुक्रवार को नियमित दर्शन के बाद रात करीब साढे 8 बजे जागरण के दर्शन खुलेंगे जो साढे 11 बजे तक चलेंगे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/rajsamand/janmashtami-celebration-in-dwarkadhish-temple/article-19642"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-08/asdgsdg.jpg" alt=""></a><br /><p>राजसमंद जिला मुख्यालय पर स्थित श्री द्वारकाधीश मंदिर पर भी कृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव की धूम मची हुई है। सुबह करीब साढे 4 बजे प्रभु के पंचामृत स्नान के दर्शन के साथ ही जन्माष्टमी महोत्सव की शुरुआत हुई। वहीं दोपहर में राजभोग के दर्शन में श्रीनाथ बैंड की मधुर स्वर लहरियो पर श्रीनाथ गार्ड ने परेड की। गोस्वामी कुमार ने परेड की सलामी ली। मंदिर में शुक्रवार को नियमित दर्शन के बाद रात करीब साढे 8 बजे जागरण के दर्शन खुलेंगे जो साढे 11 बजे तक चलेंगे। इसके बाद प्रभु द्वारिकाधीश को 12 बजे जन्म के समय बंदूकों की सलामी दी जाएगी। इसके बाद मंदिर में जागरण के दर्शन खुलेंगे। शनिवार सुबह साढे 8 बजे बाद मंदिर में नंद महोत्सव मनाया जाएगा। मंदिर में दर्शन करने के लिए देशभर से श्रद्धालु राजसमंद पहुंच रहे हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>राजसमंद</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 19 Aug 2022 17:53:29 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>मुख्यमंत्री गहलोत ने दी जन्माष्टमी की शुभकामनाएं</title>
                                    <description><![CDATA[गहलोत ने युवाओं से आह्वान किया है कि श्रीकृष्ण के जीवन से प्रेरणा लें। रिश्तों को हर स्तर पर मर्यादापूर्वक निभाएं। अपनी क्षमताओं का उपयोग कर प्रदेश की उन्नति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/chief-minister-gehlot-wishes-janmashtami/article-19586"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-08/gov.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जयपुर। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर प्रदेशवासियों को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दी हैं। </span><span lang="hi" style="line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">गहलोत ने कहा कि श्रीकृष्ण का जीवन हमारे लिए प्रेरणास्त्रोत है। उनका जीवन हमें सकारात्मक रहने और कर्म करते रहने की सीख देता है। श्रीकृष्ण ने जिस तरह महाभारत के युद्ध में सत्य का साथ दिया</span><span style="line-height:115%;">, </span><span lang="hi" style="line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">उसी तरह हमें अपने जीवन में आगे बढ़ने के लिए सदैव सत्य के रास्ते पर चलना चाहिए। गहलोत ने युवाओं से आह्वान किया है कि श्रीकृष्ण के जीवन से प्रेरणा लें। रिश्तों को हर स्तर पर मर्यादापूर्वक निभाएं। अपनी क्षमताओं का उपयोग कर प्रदेश की उन्नति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएं। अन्याय का प्रतिकार करें। जरूरतमंद लोगों की निःस्वार्थ सेवा करें।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 19 Aug 2022 12:08:10 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>श्रीकृष्ण का जीवन दर्शन और लीलाएं</title>
                                    <description><![CDATA[ मथुरा के कारागार में वसुदेव की पत्नी देवकी के गर्भ से रात्रि 12 बजे श्रीकृष्ण ने जन्म लिया था। अपने बाल्याकाल में श्रीकृष्ण ने अनेकों लीलाएं कीं, जन्माष्टमी के अवसर पर ऐसी ही अनेक लीलाओं का मंचन किया जाता है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/life-philosophy-and-pastimes-of-shri-krishna/article-19581"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-08/p-61.jpg" alt=""></a><br /><p>सम्पूर्ण भारत में प्रति वर्ष भाद्रपक्ष कृष्णाष्टमी को भारतीय जनमानस के नायक योगेश्वर भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव के रूप में जन्माष्टमी पर्व बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। यह पर्व हमें प्रेरणा देता है कि हम अपनी बुद्धि और मन को निर्मल रखने का संकल्प लेते हुए अहंकार,ईर्ष्या, द्वेष रूपी मन के विकारों को दूर करें। माना जाता है कि इसी दिन मथुरा के कारागार में वसुदेव की पत्नी देवकी के गर्भ से रात्रि 12 बजे श्रीकृष्ण ने जन्म लिया था। अपने बाल्याकाल में श्रीकृष्ण ने अनेकों लीलाएं कीं, जन्माष्टमी के अवसर पर ऐसी ही अनेक लीलाओं का मंचन किया जाता है। उनकी दिव्य लीलाओं को समझना जहां पहुंचे हुए ऋषि-मुनियों और बड़े-बड़े विद्वानों के बूते से भी बाहर था, वहीं अनपढ़, गंवार माने जाते रहे निरक्षर और भोले-भाले ग्वाले और गोपियां उनका सानिध्य पाते हुए उनकी दिव्यता का सुख पाते रहे। वे महाभारत काल के ऐसे आध्यात्मिक और राजनीतिक दृष्टा रहे, जिन्होंने धर्म, सत्य और न्याय की रक्षा के लिए दुर्जनों का संहार किया। वे शांति, प्रेम एवं करूणा के साकार रूप थे। उनके आदर्श, उनके जीवन की विद्वत्ता, वीरता, कूटनीति, योगी सदृश उज्जवल, निर्मल एवं प्रेरणादायक पक्ष, सब हमारे लिए अनुकरणीय हैं। पाप-पुण्य, नैतिक-अनैतिक, सत्य-असत्य से परे पूर्ण पुरुष की अवधारणा को साकार करते श्रीकृष्ण भारतीय परम्परा के ऐसे प्रतीक हैं, जो जीवन का प्रतिबिम्ब हैं और सम्पूर्ण जीवन का चित्र प्रस्तुत करते हैं।<br /><br />जन्माष्टमी पर्व का भारतीय संस्कृति में इतना महत्व क्यों है, यह जानने के लिए कृष्ण के जीवन दर्शन और उनकी अलौकिक लीलाओं को समझना जरूरी है। दरअसल बाल्याकाल से लेकर बड़े होने तक श्रीकृष्ण की अनेक लीलाएं विख्यात हैं। श्रीकृष्ण ने अपने बड़े भाई बलराम का घमंड तोड़ने के लिए हनुमान जी का आव्हान किया था, जिसके बाद हनुमान ने बलराम की वाटिका में जाकर बलराम से युद्ध किया और उनका घमंड चूर-चूर कर दिया था। मथुरा के राजा और श्रीकृष्ण के मामा कंस ने उन्हें मारने के लिए अनेक प्रयास किए। श्रीकृष्ण को मौत के घाट उतारने के लिए अनेक राक्षसों को गोकुल भेजा गया किन्तु एक-एक कर सभी कृष्ण के हाथों मारे गए। एक बार कंस ने कृष्ण का वध कराने के लिए अपने खास निजी सेवक तृणावर्त नामक राक्षस को गोकुल भेजा। तृणावर्त बवंडर का रूप धारण कर गोकुल पहुंचा और उसी बवंडर में श्रीकृष्ण को अपने साथ आकाश में उड़ा ले गया। उस मायावी बवंडर के चलते पूरा गोकुल थोड़े समय के लिए अंधकारमय हो गया था, इसलिए गोकुलवासी कुछ भी देखने में असमर्थ थे। बवंडर शांत होने के पश्चात् जब माता यशोदा ने श्रीकृष्ण को आंगन से गायब पाया तो वह अत्यंत चिंतित होकर रोने लगी। उधर तृणावर्त अपने मायावी बवंडर में कृष्ण को अपने साथ लेकर आकाश में उड़ तो गया, किन्तु उसी दौरान कृष्ण ने अपना भार इतना बढ़ा दिया कि तृणावर्त उस भार को संभालने में असमर्थ हो गया। इस कारण तृणावर्त के मायावी बवंडर की गति एकाएक कम हो गई और तृणावर्त के लिए आगे बढ़ना मुश्किल हो गया। तभी कृष्ण ने तृणावर्त का गला इतनी जोर से पकड़ा कि वह लाख प्रयासों के बावजूद उनसे अपना गला नहीं छुड़ा पाया और अंतत: उस भयानक राक्षस तृणावर्त के प्राण पखेरू उड़ गए। श्रीकृष्ण को खोजने निकले गोकुलवासियों ने देखा कि एक भयानक राक्षस पास की एक विशाल चट्टान पर गिरा पड़ा है, जिसके सारे अंग चकनाचूर हो चुके थे और कृष्ण उसके शरीर पर बैठे हुए थे। कृष्ण को वहां सकुशल देखकर सभी बेहद प्रसन्न हुए किन्तु सब आश्चर्यचकित भी थे कि इतने विशालकाय राक्षस को इस छोटे से बालक ने कैसे मौत के घाट उतार दिया। यह श्रीकृष्ण की अलौकिक लीला ही थी कि महाभारत युद्ध से ठीक पहले दुर्योधन मदद की गुहार लेकर सबसे पहले श्रीकृष्ण के पास द्वारिका पहुंचा और अर्जुन दुर्योधन के बाद पहुंचे। दोनों जब द्वारिकाधीश के पास पहुंचे, उस समय वे सो रहे थे। दुर्योधन उनके सिर से पास बैठ गया जबकि अर्जुन पैरों की ओर। जब श्रीकृष्ण की नींद खुली तो उनकी दृष्टि पैरों की ओर बैठे अर्जुन पर पहले पड़ी। इसलिए उन्होंने अर्जुन से उनकी नारायणी सेना या स्वयं श्रीकृष्ण में से किसी को एक को चुनने के लिए कहा। दुर्योधन ने विरोध जताते हुए कहा कि पहले वो उनके पास आया है, इसलिए उनसे कुछ मांगने का अधिकार उसे ही मिलना चाहिए। श्रीकृष्ण के हां कहने के पश्चात् दुर्योधन ने उनकी विशाल नारायणी सेना मांगी और इस तरह अर्जुन को महाभारत युद्ध में भगवान श्रीकृष्ण का साथ मिला।श्रीकृष्ण को प्रेम एवं मित्रता के अनुपम प्रतीक के रूप में भी जाना जाता है। बचपन के निर्धन मित्र सुदामा को उन्होंने अपने राज्य में जो मान-सम्मान दिया, वह मित्रता का अनुकरणीय उदाकरण बना। महाभारत युद्ध के समय शांति के सभी प्रयास असफल होने पर उन्होंने संशयग्रस्त धनुर्धारी अर्जुन को ज्ञान का उपदेश देकर कर्त्तव्य मार्ग पर अग्रसर किया और अन्याय की सत्ता को उखाड़ने के लिए अपने ही कौरव भाइयों के साथ युद्ध करते हुए उन्हें अपने कर्मों का पालन करने के लिए गीता का उपदेश दिया। </p>
<p>-योगेश कुमार गोयल<br />(ये लेखक के अपने विचार हैं)</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 19 Aug 2022 11:53:50 +0530</pubDate>
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                <title>बहन ने भाई को दान की किडनी </title>
                                    <description><![CDATA[गंगानगर निवासी सोहन लाल पिछले कई दिनों से किडनी की बीमारी से ग्रसित थे। कई डॉक्टर्स को दिखाया पर फायदा नहीं हुआ। सभी ने किडनी ट्रांसप्लांट की सलाह दी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/sister-donated-kidney-to-brother/article-18689"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-08/kidney-transplant-copy.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। सीकर रोड स्थित एक निजी अस्पताल में 59 साल की बहन ने 45 साल के भाई को किडनी दान कर रक्षाबंधन पर भाई की जान बचाई और भाई-बहन के इस प्यार भरे त्योहार को चरितार्थ किया है। दरअसल गंगानगर निवासी सोहन लाल पिछले कई दिनों से किडनी की बीमारी से ग्रसित थे। कई डॉक्टर्स को दिखाया पर फायदा नहीं हुआ। सभी ने किडनी ट्रांसप्लांट की सलाह दी। भाई का जीवन बचाने के लिए बहन गुरुनाम कौर आगे आई और रक्षाबंधन पर भाई को किडनी देकर जीवन बचाने में कामयाब हुई। किडनी ट्रांसप्लांट की टीम में डॉ. जितेन्द्र गोस्वामी, डॉ. ज्योति बंसल, डॉ. डी. आर. धवन, डॉ. श्याम सुंदर नौवाल शामिल रहे।<br /><br />बहन ने मेरी रक्षा करके भाई-बहन के अमर रिश्ते को साबित किया है। मुझे नया जीवन देकर यह मेरी मां भी बन गई है।<br /><strong>- सोहन लाल, मरीज</strong><br /><br />भाई-बहन का त्योहार दोनों के साथ पूरा हॉस्पिटल मनाएगा यह हमारे लिए खुशी की बात है।<br /><strong>- रंजन ठाकुर, डायरेक्टर मणिपाल हॉस्पिटल</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 11 Aug 2022 12:30:27 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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                <title>बहनें, जिन्होंने भाइयों की रक्षा की और धर्म-इतिहास में नाम लिखवाया </title>
                                    <description><![CDATA[यह पंद्रहवीं सदी का सच्चा किस्सा है। करणी माता उन दिनों जीवित थीं और उनका बहुत सम्मान था। मुलतान का शासक हुसैन खां लंगा पूगल के राव शेखा को युद्ध में पराजित कर गिरफ्तार कर ले गया। राव शेखा के परिजन करणी माता से मिलकर मदद मांगने आए।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/sisters-who-protected-brothers-and-got-their-names-inscribed-in-history/article-18687"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-08/capture-copy1.jpg" alt=""></a><br /><p>रक्षाबंधन वैसे तो बहन की रक्षा के लिए सदैव तत्पर रहने वाले भाई के कर्तव्य की याद दिलाने वाला त्योहार है, लेकिन राजस्थान के जर्रे-जर्रे में ऐसी कहानियां भी बिखरी हुई हैं, जिनमें कुछ बहनों ने भाइयों की आगे बढ़कर रक्षा की। आइए, हम आज आपको ऐसी बहनों से मिलवाते हैं, जिन बहनों ने भाइयों की ऐसी रक्षा की कि उनके किस्से जानकर आप हैरान रह जाएंगे।</p>
<p><strong>करणी माता ने भाई पीरों की मदद से राव शेखा को रिहा करवाया, रिश्ता ऐसा कि 1947 तक मुस्लिम पीर मामा की सिलाड़ के रूप में प्रसाद भेजते थे</strong></p>
<p>यह पंद्रहवीं सदी का सच्चा किस्सा है। करणी माता उन दिनों जीवित थीं और उनका बहुत सम्मान था। मुलतान का शासक हुसैन खां लंगा पूगल के राव शेखा को युद्ध में पराजित कर गिरफ्तार कर ले गया। राव शेखा के परिजन करणी माता से मिलकर मदद मांगने आए। वजह थी करणी माता को मुलतान के पीर बहन मानते थे। वे गईं। भाइयों के घर जाकर बैठ गईं। पीरों ने हुसैन खां लंगा को आदेश दिया कि शेखा को सम्मान रिहा करें। हुसैन खां ने न केवल राव शेखा को रिहा किया, उनके साथ अपने दो सैनिक भी भेजे। राव शेखा को पूगल सुरक्षित छोड़कर जाने लगे तो राव ने दोनों के हाथ पकड़कर कहा, आप नहीं जाएंगे। यहीं रहेंगे। वे वहीं रहे। उन्हें बेहद सम्मान मिला। उनकी मृत्यु हुई तो राव शेखा ने उनके सम्मान में खानकाहें बनवाईं, जहां आज भी उनके सम्मान में पूजापाठ और कव्वालियां होती हैं। करणीमाता और पीरों का यह रिश्ता इतना मजबूत रहा कि 1947 तक यानी सरहद बनने तक मुलतान से मुस्लिम पीर मामा की सिलाड़ के रूप में करणी माता के भक्तों के लिए प्रसाद भेजते थे। करणी माता के हिन्दू भक्त उनके पुत्र के समान हुए तो मां के भाई यानी मुस्लिम पीर उनके मामा! ये रिश्ता नाखून और चमड़ी जैसा रहा है।</p>
<p><strong>जीण ने सिर्फ भाई हर्ष की ही नहीं, सभी समाजों के भाइयों की रक्षा की</strong><br />ऐसा ही एक और नाम है जीण माता का, जिनकी याद में आज भी सीकर में प्रसिद्ध मंदिर है। जीण बहन का भाई हर्ष की पत्नी से विवाद हुआ तो वह तपस्या करने लगी। यह तपस्या सिर्फ अपने भाई के लिए नहीं, सबके लिए हुई और जीण एक जाति विशेष के बजाय सभी धर्म और जातियों के लिए पूजनीय हो गई। जीण माता आज भी हर भाई की रक्षा के लिए तत्पर हैं।</p>
<p><strong>रोक्षन्ना ने राजा पुरु को राखी बांधकर सिकंदर को न मारने का वचन लिया</strong><br />यह बात ईसा से तीन सदी पहले की है, जिसमें सिकंदर भारत पर आक्रमण के लिए आया तो उसने भारतीय संस्कृति के उन पहलुओं का भी फायदा उठाया, जिसमें शत्रु के प्रति भी सदाशयता दिखाना कर्तव्य माना जाता था। सिकंदर की पत्नी रोक्षन्ना ने बड़ी ही चतुराई से पति के शत्रु पुरु को राखी बांधकर वचन ले लिया था कि युद्ध में अगर सिकंदर पराजित भी हो जाएं तो पुरु अपनी बहन को वैधव्य का कलंक नहीं देगा। पुरु ने इस बात को माना और एक मौके पर सिकंदर बचा भी। कहते हैं, बाद में सिकंदर ने भी पुरु के साथ गरिमापूर्ण व्यवहार किया और उन्हें शाासक ही रहने दिया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 11 Aug 2022 12:14:57 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>रक्षाबंधन पर बहनें नौ ग्रह से मांगती है भाई की खुशहाली</title>
                                    <description><![CDATA[ज्योतिषाचार्य और भविष्यवक्ता डॉ. अनीष व्यास ने बताया कि पूजा की थाली में कुमकुम, चावल अक्षत, नारियल, रक्षासूत्र (राखी), मिठाई, दीपक, जल से भरा कलश और उपहार अनिवार्य रूप से होनी चाहिए। इसके बाद नौ ग्रहों से प्रार्थना करें कि अपने भाई को अन्न धन लक्ष्मी के साथ दीघार्यु और शुभ फल प्राप्त हो।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/on-rakshabandhan-sisters-ask-for-brother-s-happiness-from-nine-planets/article-18527"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-08/54.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। रक्षाबंधन पर भाई की कलाई पर राखी बांधने के लिए बहनें पूजा की थाली सजाती हैं। इस पूजा की थाली में बहन नौ ग्रहों की सामग्री द्वारा भाई की खुशहाली मांगती है। भाई की कलाई पर रक्षासूत्र बांधकर बहनें उनकी दीघार्यु, सुख, समृद्धि की कामना करती है।  <br /><br /><strong>नौ ग्रह और पूजा की थाली</strong><br />ज्योतिषाचार्य और भविष्यवक्ता डॉ. अनीष व्यास ने बताया कि पूजा की थाली में कुमकुम, चावल अक्षत, नारियल, रक्षासूत्र (राखी), मिठाई, दीपक, जल से भरा कलश और उपहार अनिवार्य रूप से होनी चाहिए। इसके बाद नौ ग्रहों से प्रार्थना करें कि अपने भाई को अन्न धन लक्ष्मी के साथ दीघार्यु और शुभ फल प्राप्त हो।<br /><br /><strong>कुमकुम:</strong> बहन भाई को कुमकुम का तिलक लगाती हैं, जो सूर्य ग्रह से मिलता है और दुआ करती है कि आने वाले साल में भाई को हर प्रकार का यश और ख्याति प्राप्त हो।<br /><br /><strong>चावल-अक्षत:</strong> पूजा में चावल को सबसे शुभ माना जाता है। बहन भाई को कुमकुम के तिलक के ऊपर चावल लगाती हैं, जो शुक्र ग्रह से मिलता है। बहनें दुआ मांगती है कि मेरे भाई के जीवन में हर तरह की शुभता आए।<br /> <br /><strong>नारियल:</strong> इसको पूजा में श्रीफल कहा जाता है। यह राहु ग्रह से मिलता है। बहन जब भाई को श्रीफल देती है तो इसका अर्थ है कि आने वाले वर्ष में भाई को सभी प्रकार की सुख सुविधा मिले।<br /><br /><strong>रक्षासूत्र राखी :</strong> रक्षासूत्र हमेशा दाएं हाथ की कलाई पर बांधा जाता है। यह मंगल ग्रह से मिलता है, जो कहता है कि बहन की दुआएं हैं कि उसके भाई सभी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष मुश्किलों से उसकी रक्षा करे।<br /><br /><strong>मिठाई :</strong> बहन भाई को मिठाई खिलाती है, जो गुरु ग्रह से मिलता है और दुआ करती है कि उसके भाई पर लक्ष्मी की कृपा हमेशा रहे। भाई के संतान और वैवाहिक जीवन भी सुखद रहे।<br /> <br /><strong>दीपक :</strong> बहन भाई की दीपक से आरती करती है। यह शनि और केतु ग्रह से मिलता है और दुआ करती हैं कि मेरे भाई के जीवन में आने वाले रोग और कष्ट सभी दूर हों।<br /><br /><strong>जल से भरा कलश :</strong> जल से भरे कलश से भाई की पूजा करें, जो चंद्रमा से मिलता है जिसमें बहन मांगती है कि मेरे भाई के जीवन में मानसिक शांति हमेशा बनी रहे।<br /><br /><strong>उपहार :</strong> ऊपर की इन सात चीजों में बहन की दुआओं के साथ आप के 8 ग्रह शुभ होते हैं। अब रहा नवां ग्रह बुध। बुध ग्रह को बहन का कारक ग्रह माना गया है। इसलिए भाई बहन को जो उपहार देंगे उससे आपका बुध ग्रह शुभ होकर फल देगा। कहते हैं बुध ग्रह जो आपके व्यापार से मिलता है यदि बहन या भाई की दुआएं मिल जाए तो व्यापार में वृद्धि कर देता है।<br /> <br /><strong>भद्राकाल से पहले और बाद में राखी बांधना शुभ</strong><br />याज्ञिकरत्न आचार्य पंडित दिनेश त्रिवेदी के मुताबिक भद्राकाल समाप्ति के बाद इस बार रात 8 बजकर 51 मिनट के बाद राखी बांधना शास्त्र सम्मत है। रक्षाबंधन में रात्रि दोष भी नहीं होता। सूण मांडणा भद्रा पूर्व संगवकाल में सुबह 10 बजकर 38 मिनट तक करना शास्त्रों के अनुसार है। शास्त्रकारों ने होलिका दहन में भी भद्रा के पुच्छ और प्रदोष काल का मत भी विशेष परिस्थितियों में ही लिखा है। इसलिए 11 अगस्त को संगव काल भद्रा पूर्व सुबह 10 बजकर 38 मिनट तक सूण मांडना, उत्सर्ग, उपाकर्म एवं रात्रि में 8 बजकर 51 मिनट भद्रा समाप्ति काल के बाद सम्पूर्ण रात्रि राखी बांधी जा सकेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 10 Aug 2022 11:49:02 +0530</pubDate>
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                <title>सीमा पर जवानों को रक्षासूत्र बांधने जयपुर से रवाना होंगी बेटियां</title>
                                    <description><![CDATA[विभिन्न राज्यों से 50 बेटियां भारत-पाक और भारत-चीन सीमा पर जाकर रक्षाबंधन के दिन फौजी भाइयों को रक्षासूत्र बांधती हैं और राष्ट्र एवं अपनी ओर से कृतज्ञता ज्ञापित करती है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/daughters-will-leave-from-jaipur-to-tie-the-thread-to-the-soldiers-on-the-border/article-18376"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-08/rakhi.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। श्री शक्ति पीठ के तत्वावधान में नौ वर्षों से राष्ट्रीय रक्षा बंधन यात्रा का आयोजन हो रहा है, जिसमें विभिन्न राज्यों से 50 बेटियां भारत-पाक और भारत-चीन सीमा पर जाकर रक्षाबंधन के दिन फौजी भाइयों को रक्षासूत्र बांधती हैं और राष्ट्र एवं अपनी ओर से कृतज्ञता ज्ञापित करती है। शक्ति पीठ इस साल 10 वर्ष पूर्ण कर रहा है। इस वर्ष यह दल भारत चीन सीमा चिटकुल किन्नौर हिमाचल प्रदेश जा रहा है। यह दल मंगलवार को पूज्या साध्वी समदर्शी गिरी दीदी के पावन सानिध्य में वात्सल्य साधना केंद्र श्री शक्ति पीठ से रवाना होकर प्रात: 11:30 बजे अमर जवान ज्योति पर शहीदों को श्रद्धांजलि देकर एवं उपस्थित विशिष्ठजनों को रक्षासूत्र बांधकर राष्ट्र की सीमाओं की ओर अग्रसर होगा। इस वर्ष विद्यालयों और समाज से एकत्रित 35000 रक्षा सूत्रों को लेकर बेटियों के साथ सीमा की ओर अग्रसर होगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 09 Aug 2022 10:41:18 +0530</pubDate>
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