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                            <item>
                <title>पश्चिम बंगाल का असली चुनावी युद्ध : मतदाता सूची से करीब 91 लाख लोगों के नाम, सड़कों पर बख्तरबंद दौड़ रही गाड़ियाँ </title>
                                    <description><![CDATA[पश्चिम बंगाल में 'विशेष गहन पुनरीक्षण' के तहत 91 लाख नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं, जिससे राजनीतिक पारा चढ़ गया है। AI फिल्टर और तकनीकी विसंगतियों के कारण अल्पसंख्यकों, महिलाओं और SC समुदायों पर सबसे ज्यादा मार पड़ी है। ममता बनर्जी ने इसे जनता पर हमला बताया है, जबकि भाजपा ने इसे शुद्धिकरण की प्रक्रिया करार दिया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/the-real-electoral-war-of-west-bengal-focused-on-the/article-151319"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/111200-x-600-px)-(2)28.png" alt=""></a><br /><p>कोलकाता। पश्चिम बंगाल में इस बार 'विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर)' के नाम पर मतदाता सूची से लगभग 91 लाख लोगों के नाम हटा दिए गए हैं। इनमें से करीब 27 लाख लोगों के नाम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) जनित फिल्टर द्वारा "तार्किक विसंगतियों" के आधार पर हटाए गए। यह विसंगतियां उपनामों की वर्तनी में मामूली अंतर राय या रे जैसी छोटी बातों पर आधारित थीं। राज्य में चुनाव से पहले ग्रामीण सड़कों पर बख्तरबंद गाड़ियाँ दौड़ रही हैं और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल बाज़ारों में गश्त कर रहे हैं। राजमार्गों पर चेकपॉइंट्स बने हैं जहाँ नकदी और शराब की तलाशी ली जा रही है। चुनाव आयोग की यह अभूतपूर्व तैनाती राजनीतिक झड़पों और "वोट खरीदने" की कोशिशों को रोकने के लिए है।</p>
<p>लेकिन इस "युद्ध क्षेत्र" जैसे माहौल के बीच बंगाल की असली चुनावी लड़ाई सड़कों पर नहीं, बल्कि उन न्यायाधिकरणों में लड़ी जा रही है जो यह तय कर रहे हैं कि किसे वोट देने का अधिकार है और कौन भारतीय नागरिक है। बंगाली मुसलमानों के लिए, जिनमें से कई के पास कोई निश्चित उपनाम नहीं होता, इसका मतलब यह हुआ कि पूरे के पूरे गांव मतदाता सूची से बाहर हो गए हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, इन कटौतियों ने अल्पसंख्यकों, महिलाओं और गरीबों को सबसे ज्यादा प्रभावित किया है। मुस्लिम और दलित बहुल सीमावर्ती जिलों जैसे मालदा, मुर्शिदाबाद, उत्तर और दक्षिण 24 परगना में यह मार सबसे अधिक पड़ी है, जहाँ हटाए गए नामों की संख्या 2.2 लाख (दक्षिण 24 परगना) से लेकर 4.6 लाख (मुर्शिदाबाद) तक है।</p>
<p>यह शुद्धिकरण अभियान केवल गरीबों तक सीमित नहीं रहा है। इसने "विशेषाधिकार प्राप्त वर्ग" को भी अपनी चपेट में लिया है। कोलकाता के प्रसिद्ध आईआईएम की प्रोफेसर नंदिता रॉय ने पाया कि उनका नाम सूची से गायब है। उन्होंने कहा, "मेरे पिता सेवानिवृत्त वायुसेना अधिकारी हैं और मैं एक शिक्षाविद हूँ, जब मुझे इस संघर्ष का सामना करना पड़ रहा है, तो कल्पना कीजिए उन गरीब और अर्ध-शिक्षित लोगों की क्या स्थिति होगी जिन्हें अपने मताधिकार के लिए नौकरशाही से लड़ना पड़ रहा है।" इसी तरह, मुर्शिदाबाद के अंतिम नवाब के वंशज सैयद रजा अली मिर्जा, जिन्हें 'छोटा नवाब' भी कहा जाता है, ने भी अपना नाम मतदाता सूची से हटाए जाने पर गहरा रोष व्यक्त किया है।</p>
<p>राजनीतिक रूप से, टीएमसी को मालदा और मुर्शिदाबाद में मुस्लिम वोटों के ध्रुवीकरण से लाभ मिलता दिख रहा है, क्योंकि मतदाता "परिचित बुराई" के पक्ष में एकजुट हो रहे हैं। दूसरी ओर, हिंदुओं के बीच वोटों का जवाबी ध्रुवीकरण मुश्किल लग रहा है क्योंकि <br />'एसआईआर' अभियान ने अनुसूचित जातियों को भी बुरी तरह प्रभावित किया है। बंगाल के 25 से 30 लाख की आबादी वाले मतुआ समुदाय के बड़ी संख्या में नाम काटे गए हैं, जिससे वे काफी आक्रोशित हैं। मतुआ समाज के सचिव दिलीप मतुआ ने बताया कि उनके अकेले गांव से 200 नाम हटाए गए हैं। इसके अतिरिक्त, बिहार जैसे अन्य राज्यों से आकर बंगाल में बसे लोगों को भी पर्याप्त दस्तावेजों के बावजूद सूची से बाहर रखा गया है।</p>
<p>चुनाव आयोग के इस कदम पर पूर्व आईएएस अधिकारी जवाहर सरकार ने सवाल उठाते हुए कहा है कि आयोग के पास नागरिकता के सवाल तय करने का अधिकार नहीं है। वहीं, भाजपा के विचारक और उम्मीदवार स्वपन दासगुप्ता ने इस अभियान का बचाव करते हुए इसे मतदाता सूची से "फर्जी और मृत" वोटरों को निकालने की प्रक्रिया बताया है। दूसरी ओर, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इसे राज्य के लोगों पर हमला बताते हुए उच्चतम न्यायालय में गुहार लगाई है।</p>
<p>आंकड़ों का विश्लेषण यह भी बताता है कि इस अभियान ने महिलाओं को असमान रूप से प्रभावित किया है। पहले चरण के चुनावों वाले 152 विधानसभा क्षेत्रों में पुरुष-महिला अनुपात 952:1000 से गिरकर 950:1000 हो गया है। साबर संस्थान के विश्लेषण के अनुसार, विशेष रूप से एससी आरक्षित सीटों पर महिलाओं के नाम काटे जाने के मामले 52.4 प्रतिशत हैं, जो औसत से अधिक हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि 'एसआईआर' ने इस चुनाव के परिणामों की भविष्यवाणी करना अत्यंत कठिन बना दिया है, और यह देखना दिलचस्प होगा कि इसका अंतिम लाभ किस राजनीतिक दल को मिलता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 22 Apr 2026 15:36:48 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>अमित शाह ने टीएमसी पर बोला हमला : SIR के दौरान नाम हटाए जाने को लेकर ममता बनर्जी को ठहराया जिम्मेदार, गोरखा मतदाताओं के नाम काटने का लगाया आरोप</title>
                                    <description><![CDATA[अमित शाह ने सिलीगुड़ी में हुंकार भरते हुए ममता बनर्जी पर गोरखा मतदाताओं के नाम हटाने का आरोप लगाया। उन्होंने वादा किया कि भाजपा सत्ता में आते ही मतदाता सूची ठीक करेगी और चाय श्रमिकों की मजदूरी ₹500 पार ले जाएगी। साथ ही, क्षेत्र में AIIMS, IIT और बुलेट ट्रेन जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स से विकास को नई गति दी जाएगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/amit-shah-attacks-tmc-holds-mamata-banerjee-responsible-for-deletion/article-151226"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/amit-shah3.png" alt=""></a><br /><p>सिलीगुड़ी। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को पश्चिम बंगाल में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए जाने के लिए जिम्मेदार ठहराया है। अमित शाह ने सिलीगुड़ी के पास सुकना में दार्जिलिंग, कर्सियांग और कलिम्पोंग निर्वाचन क्षेत्रों से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) उम्मीदवारों के समर्थन में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए दावा किया कि राज्य सरकार की देखरेख में एसआईआर प्रक्रिया के दौरान कई गोरखा मतदाताओं के नाम काट दिए गए थे।</p>
<p>उन्होंने कहा कि राज्य में जैसे ही भाजपा सत्ता में आएगी, तो वैसे सभी नाम मतदाता सूची में वापस जोड़ दिए जाएंगे जिनके नाम काटे गए। केंद्रीय गृह मंत्री ने कांग्रेस, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के नेतृत्व वाली सरकारों पर दार्जिलिंग की उपेक्षा करने का आरोप लगाते हुए कहा कि भाजपा ही एक ऐसी पार्टी है जो इस क्षेत्र के मुद्दों का स्थायी समाधान कर सकती है। अमित शाह ने गोरखा मुद्दे का जिक्र करते हुए सुश्री बनर्जी पर आरोप लगाया कि बार-बार अनुरोध किए जाने के बावजूद उन्होंने इस मसले पर चर्चा करने को दिल्ली में हुई बैठकों में हिस्सा नहीं लिया। उन्होंने कहा कि एक वार्ताकार नियुक्त किया गया है और एक रिपोर्ट तैयार की गयी है, जिसके आधार पर भाजपा सरकार बनाने के बाद संवैधानिक ढांचे के भीतर गोरखा लोगों की आकांक्षाओं और मांगों को पूरा करेगी।</p>
<p>अमित शाह ने गोरखा आंदोलन के दौरान व्यक्तियों के खिलाफ दर्ज किए गए राजनीतिक रूप से प्रेरित सभी मामले वापस लिए जाने का भी आश्वासन दिया। उन्होंने कहा, "हम गोरखा मुद्दे को इस तरह से हल करेंगे कि लोगों को फिर से आंदोलन करने की जरूरत नहीं पड़ेगी।"<br />अमित शाह ने भाजपा के चुनावी घोषणापत्र पर बात करते हुए क्षेत्र के कई विकास पहलों की रूपरेखा प्रस्तुत की, जिसमें अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एआईआईएमएस), भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) और भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) की स्थापना शामिल है। उन्होंने गोरखा समुदाय को समर्पित एक खेल विश्वविद्यालय, एक जनजातीय विश्वविद्यालय और एक वन अनुसंधान संस्थान की योजनाओं की भी घोषणा की।</p>
<p>उन्होंने बुनियादी ढांचे के विकास के बारे में बात की, जिसमें न्यू जलपाईगुड़ी रेलवे स्टेशन का उन्नयन शामिल है। उन्होंने दावा किया कि भविष्य में बुलेट ट्रेन कनेक्टिविटी सिलीगुड़ी से काशी विश्वनाथ मंदिर तक की यात्रा के समय को कम कर देगी। श्री शाह ने चाय बागान का जिक्र करते हुए कहा कि भाजपा चाय बागानों को फिर से जिंंदा करेगी और चाय मजदूरों की रोजाना की मजदूरी बढ़ाकर 500 रुपये से अधिक कर देगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 21 Apr 2026 18:40:47 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>खड़गपुर सदर में कड़ा मुकाबला :  दिलीप घोष बनाम सरकार फिर आमने-सामने, जाति, समुदाय, मतदान प्रतिशत और अब मतदाताओं की अनुपस्थिति पर ध्यान केंद्रित </title>
                                    <description><![CDATA[खड़गपुर सदर में दिलीप घोष (भाजपा) और प्रदीप सरकार (TMC) के बीच कड़ा मुकाबला है। 44,000 मतदाताओं के नाम हटने से बूथ प्रबंधन निर्णायक हो गया है। गैर-बंगाली आबादी और औद्योगिक मुद्दों के कारण यहाँ का चुनावी मिजाज अक्सर राज्य की लहर के विपरीत रहता है, जिससे यह एक लो-मार्जिन सीट बन गई है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/tough-contest-in-kharagpur-sadar-ghosh-vs-government-again-face/article-151158"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/dilip-ghosh.png" alt=""></a><br /><p>खड़गपुर। पश्चिम बंगाल में खड़गपुर सदर विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र, जिसे जनसांख्यिकीय रूप से एक 'लघु भारत' कहा जा सकता है, शायद ही कभी मुख्य धारा के साथ चला है, और इसके परिणाम अक्सर पश्चिम बंगाल के अन्य हिस्सों में देखे जाने वाले रुझानों के विपरीत रहे हैं। चुनाव विश्लेषक इसे 'अल्प अंतर वाली सीट' कह सकते हैं। पश्चिम मेदिनीपुर जिले के इस निर्वाचन क्षेत्र के परिणाम अक्सर विजेताओं और हारने वालों के बीच मतों के बहुत कम अंतर से तय होते रहे हैं। खड़गपुर सदर,  दशकों तक, कांग्रेस का गढ़ रहा, और विशेष रूप से बंगाल की राजनीति के सम्मानित ‘चाचा’ - ज्ञान सिंह सोहनपाल का, जिन्होंने 1969 से 2011 के बीच 10 बार जीत दर्ज की, जब तक कि 2016 में अपने अंतिम चुनाव में वे भाजपा के दिलीप घोष से हार नहीं गये। भगवा दल ने 2021 में भी इस सीट पर अपना कब्जा बनाये रखा, जब उसने बंगाली फिल्म और टीवी अभिनेता हिरण चटर्जी को उम्मीदवार बनाया था।</p>
<p>जहां सोहनपाल की अधिकांश जीत तब हुई जब राज्य में वामपंथी मोर्चे ने भारी बहुमत प्राप्त किया था, वहीं 2016 और 2021 में तृणमूल कांग्रेस ने बंगाल की सत्ता पर प्रचंड बहुमत के साथ कब्जा किया। चूंकि राज्य विधानसभा चुनाव के पहले चरण में 23 अप्रैल को इस निर्वाचन क्षेत्र में मतदान होना है, यहां की राजनैतिक लड़ाई लहर के बजाय जाति, समुदाय, मतदान प्रतिशत और अब मतदाताओं की अनुपस्थिति पर अधिक केंद्रित है।</p>
<p>इस प्रतियोगिता के केंद्र में भाजपा के दिलीप घोष और तृणमूल कांग्रेस के प्रदीप सरकार के बीच एक बड़ा मुकाबला है, ये दो ऐसे नेता हैं जिनका खड़गपुर सदर में चुनावी इतिहास गहराई से जुड़ा हुआ है, लेकिन व्यक्तित्वों से परे, यह चुनाव तीन निर्णायक कारकों के आधार पर आकार ले रहा है: मतदाता सूची के 'विशेष गहन पुनरीक्षण' (एसआईआर) का प्रभाव, निर्वाचन क्षेत्र की जटिल जनसांख्यिकीय संरचना और औद्योगिक क्षमता एवं वास्तविक जीवन की परिस्थितियों के बीच निरंतर बना हुआ अंतर।</p>
<p>इस बार सबसे बड़ा प्रभाव डालने वाला कारक चुनाव आयोग के एसआईआर प्रक्रिया के बाद मतदाता सूची से लगभग 44,000 नामों का हटाया जाना है। जिस निर्वाचन क्षेत्र में 2021 का परिणाम केवल 3,771 मतों से तय हुआ हो, वहां यह कोई मामूली बदलाव नहीं,- बल्कि एक संरचनात्मक परिवर्तन है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि न तो भाजपा और न ही तृणमूल कांग्रेस आत्मविश्वास के साथ यह कह सकती है कि इन कटौतियों का सबसे ज्यादा असर कहां पड़ा है। खड़गपुर के एक स्थानीय राजनीतिक विश्लेषक ने कहा, “ यदि हटाये गये मतदाताओं का 10-15 प्रतिशत भी विशिष्ट क्षेत्रों में केंद्रित था, तो यह बूथ स्तर के समीकरणों को पलट सकता है। यह चुनाव लहर के बजाय इस बात पर निर्भर करेगा कि शेष मतदाताओं में से कौन मतदान प्रतिशत को बेहतर ढंग से प्रबंधित करता है।”</p>
<p>यह मुकाबला हालांकि केवल द्विध्रुवीय नहीं है। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के उम्मीदवार मधुसूदन रॉय और कांग्रेस की उम्मीदवार पापिया चक्रवर्ती इस दौड़ में और गहराई जोड़ते हैं, जिससे मतों के विभाजन की संभावना बढ़ जाती है। खड़गपुर के बार-बार राज्यव्यापी रुझान के विरुद्ध जाने का कारण आंशिक रूप से इसकी जनसांख्यिकीय बनावट में निहित है। खड़गपुर जंक्शन और आई.आई.टी. खड़गपुर की उपस्थिति के कारण यह एक रेलवे और औद्योगिक शहर है, जहां गैर-बंगाली और प्रवासी मूल की बड़ी आबादी, जैसे तेलुगु, हिंदी, मराठी और ओडिया भाषी समुदाय — निवास करती है। इनकी मतदान प्राथमिकताएं अक्सर ग्रामीण बंगाल से भिन्न होती हैं।</p>
<p>एक सेवानिवृत्त रेलवे कर्मचारी एस. नारायणन ने कहा, "रेलवे कॉलोनियों में लोग नौकरियों, तबादलों और पेंशन के बारे में बात करते हैं - स्थानीय राजनीति के बारे में नहीं। यहां बहुत से लोगों को लगता है कि राष्ट्रीय मुद्दे अधिक मायने रखते हैं, इसलिए भाजपा को लाभ मिलता है। लेकिन पुराने खड़गपुर और आस-पास के क्षेत्रों में तृणमूल का स्थानीय नेटवर्क मजबूत है।" यह दोहरी स्थिति वह पैदा करती है, जिसे राजनैतिक रणनीतिकार "विभाजित निर्वाचन क्षेत्र" कहते हैं, जहां राष्ट्रीय विमर्श और स्थानीय शासन एक साथ प्रतिस्पर्धा करते हैं और अक्सर एक-दूसरे के प्रभाव को शून्य कर देते हैं। भाजपा के लिए श्री घोष की वापसी रणनीतिक और प्रतीकात्मक दोनों है। 2016 में पहली बार कांग्रेस के गढ़ को तोड़ने वाले श्री घोष आज भी उन गिने-चुने नेताओं में से एक हैं जिनका व्यक्तिगत जनाधार सभी समुदायों में फैला है। उनका अभियान कानून-व्यवस्था, प्रवासन और पहचान की राजनीति के विषयों पर केंद्रित रहा है। साथ ही वे यह तर्क भी दे रहे हैं कि केंद्र के साथ तालमेल बिठाने से रुकी हुई बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में तेजी आ सकती है।</p>
<p>घोष ने मीडिया से कहा, "विकास की कमी एक प्रमुख मुद्दा है। सड़कें खस्ताहाल हैं। खराब जल निकासी व्यवस्था और अपर्याप्त पेयजल अन्य समस्याएं हैं। निर्वाचन क्षेत्र के विशाल क्षेत्रों में औद्योगिक प्रदूषण अधिक है। खड़गपुर एक ऐसा क्षेत्र है, जहां से हमें पिछले कुछ चुनावों में लगातार बढ़त मिली है। यहां तक कि 2024 के लोकसभा चुनावों में हम मेदिनीपुर से हार गये, लेकिन खड़गपुर सदर ने हमारे उम्मीदवार को बढ़त दी थी।" तृणमूल कांग्रेस ने प्रदीप सरकार की सुलभता और संगठनात्मक पहुंच पर केंद्रित एक स्थानीय रणनीति अपनायी है। 2021 में मामूली अंतर से हारने वाले सरकार का अभियान बूथ स्तर की मजबूती और जन कल्याणकारी योजनाओं पर केंद्रित है। मालंचा की निवासी शम्पा दास ने कहा, "वे यहीं रहते हैं, हम उन तक पहुंच सकते हैं। चुनाव के बाद भी वे हमसे जुड़े रहते हैं।"</p>
<p>खड़गपुर सदर जैसे बहुत कम निर्वाचन क्षेत्र विरोधाभासों को समेटे हुए हैं। यहां भारत के प्रमुख इंजीनियरिंग संस्थानों में से एक और महत्वपूर्ण रेलवे बुनियादी ढांचा है, फिर भी यह बुनियादी नागरिक समस्याओं से जूझ रहा है। निवासी बार-बार रुकी हुई परियोजनाओं, खराब जल निकासी, पानी की कमी और पास की फैक्ट्रियों से होने वाले प्रदूषण की ओर इशारा करते हैं। एन.एच.-16 के पास एक दुकानदार सलीम खान ने कहा, "फैक्ट्रियां रहें, लेकिन धूल और धुआं तो बंद हो।"</p>
<p>ऐसी धारणा भी बढ़ रही है कि राज्य और केंद्र के बीच राजनैतिक मतभेदों ने विकास की गति धीमी कर दी है। खड़गपुर कॉलेज के बाहर एक पहली बार मतदाता बने युवा ने कहा, "यदि एक ही दल सत्ता में हो, तो काम तेजी से हो सकता है।" पिछले रुझान बताते हैं कि 2026 का परिणाम संभवतः किसी बड़ी लहर के बजाय मामूली बढ़त,- जैसे बूथ प्रबंधन, मतदान प्रतिशत और अपने मूल मतदाताओं को बनाये रखते हुए प्रतिद्वंद्वी के आधार में सेंध लगाने की क्षमता - से तय होगा। फिलहाल, जमीन पर माहौल न तो निर्णायक रूप से सत्ता के पक्ष में है और न ही सत्ता विरोधी है। यह सतर्क और व्यावहारिक है। गोल बाजार के पास एक बुजुर्ग मतदाता ने कहा, “हर बार विजेता बदलता है, लेकिन हमारा जीवन नहीं बदलता।”</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Tue, 21 Apr 2026 12:13:09 +0530</pubDate>
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                <title>राष्ट्रीय लोक मोर्चा के संगठन चुनाव के लिये कार्यक्रम की घोषणा: 14 जून को होगा राष्ट्रीय अध्यक्ष का होगा चुनाव, नितिन भारती ने की पुष्टि</title>
                                    <description><![CDATA[राष्ट्रीय लोक मोर्चा (रालोमो) ने सदस्यता अभियान के बाद संगठन चुनावों की घोषणा कर दी है। 25 अप्रैल को मतदाता सूची जारी होगी, जिसके बाद पंचायत से लेकर जिला स्तर तक चुनाव होंगे। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष का चुनाव 8 जून और राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव 14 जून 2026 को संपन्न होगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/announcement-of-program-for-organization-elections-of-rashtriya-lok-morcha/article-151079"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/raloma.png" alt=""></a><br /><p>पटना। राष्ट्रीय लोक मोर्चा (रालोमो) के सघन सदस्यता अभियान के बाद पार्टी के संगठन चुनाव के लिये कार्यक्रम की घोषणा कर दी गई है।रालोमो के प्रदेश प्रवक्ता नितिन भारती ने सोमवार को बयान जारी कर बताया कि राष्ट्रीय लोक मोर्चा के संगठन चुनाव के लिये 25 अप्रैल 2026 को जिलावार मतदाता सूची का अंतिम रूप से प्रकाशन किया जाएगा। इसके बाद 26 अप्रैल 2026 से 15 मई 2026 तक सभी जिलों में पंचायत स्तरीय संगठन इकाई के लिये चुनाव सम्पन्न होंगे, जबकि 16 मई 2026 से 25 मई 2026 तक प्रखंड स्तरीय संगठन इकाई के चुनाव सम्पन्न होंगे।</p>
<p>इसके बाद 26 मई 2026 से 04 जून .2026 तक जिला स्तरीय संगठन इकाई के चुनाव होंगे। इस दौरान विभिन्न नगर निकाय स्तरीय संगठन इकाईयों के लिए भी चुनाव सम्पन्न होंगे। भारती ने बताया कि जिला स्तरीय संगठन चुनाव के बाद पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष का चुनाव 08 जून 2026 को जबकि राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव 14 जून 2026 को निर्धारित किया गया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 20 Apr 2026 14:28:21 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव : सीएम ममता ने भवानीपुर से दाखिल किया नामांकन, मतदाता सूची से नाम हटाये जाने के मुद्दे पर चुनाव आयोग पर बोला हमला</title>
                                    <description><![CDATA[मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भवानीपुर से नामांकन दाखिल करते हुए मतदाता सूची से 27 लाख नाम हटाए जाने पर कड़ा विरोध जताया। अलीपुर में भारी शक्ति प्रदर्शन और 'जय बांग्ला' के नारों के बीच उन्होंने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन बताया। ममता ने स्पष्ट संकेत दिए कि वे मतदाताओं को न्याय दिलाने हेतु पुनः अदालत का रुख करेंगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/west-bengal-assembly-elections-cm-mamata-filed-nomination-from-bhawanipur/article-149549"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/mamta.png" alt=""></a><br /><p>कोलकाता। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बुधवार को भवानीपुर विधानसभा सीट से अपना नामांकन पत्र दाखिल किया और मतदाता सूची से नाम हटाये जाने के मुद्दे पर गंभीर चिंता जताते हुए फिर से अदालत का रुख करने के संकेत दिये। उन्होंने सर्वे बिल्डिंग के बाहर मीडिया से बात करते हुए कहा कि 27 लाख से अधिक ऐसे मतदाताओं को मतदान से वंचित नहीं किया जाना चाहिए, जिनके नाम सूची से हटा दिये गये हैं। उनका कहना था कि न्यायिक प्रक्रिया के तहत आने वाले लोगों को भी वोट देने का अधिकार मिलना चाहिए।</p>
<p>उन्होंने उच्चतम न्यायालय के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि अदालत ने ऐसे मतदाताओं को वास्तविक माना है और उन्हें ट्रिब्यूनल में अपील का अधिकार दिया है। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा, “अगर उन्हें अभी वोट देने की अनुमति नहीं है, तो फिर ट्रिब्यूनल बनाने का क्या मतलब?” मुख्यमंत्री ने कहा कि वह ‘भारी मन’ से नामांकन दाखिल कर रही हैं। उनके अनुसार, करीब 1.2 करोड़ मतदाताओं में से केवल 32 लाख को ही पात्र घोषित किया गया है, जो चिंताजनक है। उन्होंने दावा किया कि यह स्थिति केवल अदालत में जाने के बाद ही स्पष्ट हो सकी।</p>
<p>इससे पहले, नामांकन दाखिल करने की प्रक्रिया शक्ति प्रदर्शन में बदल गयी। पूर्वाह्न करीब 10:30 बजे ममता बनर्जी अपने आवास से निकलीं और अलीपुर सर्वे बिल्डिंग तक पैदल मार्च किया। उनके साथ बड़ी संख्या में पार्टी नेता, कार्यकर्ता और समर्थक मौजूद थे। इस दौरान कोलकाता के मेयर और राज्य मंत्री फरहाद हकीम, उनके भाई स्वपन बनर्जी, कार्तिक बनर्जी और भाभी कजरी बनर्जी तथा पार्टी नेता संदीप बक्शी मौजूद रहे।</p>
<p>मार्ग के दोनों ओर सड़कों पर भारी भीड़ उमड़ पड़ी, जिसे नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने बैरिकेड लगाये। मुख्यमंत्री के आगे बढ़ने के दौरान समर्थक दोनों ओर खड़े होकर ‘जय बांग्ला’ के नारे लगाते रहे, जबकि वह हाथ हिलाकर अभिवादन स्वीकार करती रहीं। कोलकाता के मेयर फऱहाद हकीम समेत कई वरिष्ठ नेता इस दौरान उनके साथ रहे। रास्ते में ‘जय बांग्ला’ के नारों से माहौल गूंज उठा, जबकि महिला कार्यकर्ताओं ने शंखनाद और पारंपरिक उलूलध्वनि से उनका स्वागत किया। भवानीपुर की बहुसांस्कृतिक पहचान को दर्शाते हुए उनके प्रस्तावकों में विभिन्न समुदायों के लोग शामिल थे। इसे तृणमूल कांग्रेस की समावेशी राजनीति के संदेश के रूप में देखा जा रहा है। नामांकन पत्र फिलहाल जांच प्रक्रियाधीन हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 08 Apr 2026 14:57:31 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव: पहले चरण की मतदाता सूची फ्रीज; न्यायाधिकरण की पहुंच अभी भी अनिश्चित, 23 और 29 अप्रैल को होंगे मतदान</title>
                                    <description><![CDATA[पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले चरण की मतदाता सूची सोमवार मध्यरात्रि से फ्रीज कर दी गई है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज अग्रवाल के अनुसार, 60 लाख विचाराधीन नामों में से लगभग 27 लाख मतदाताओं के नाम हटाए जा सकते हैं। प्रभावित लोग न्यायाधिकरण में अपील कर सकेंगे, लेकिन इस चुनाव में मतदान नहीं कर पाएंगे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/west-bengal-assembly-elections-first-phase-voter-list-freeze-tribunals/article-149412"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/west-bengal-election-20261.png" alt=""></a><br /><p>कोलकाता। पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के पहले चरण की मतदाता सूची को सोमवार मध्यरात्रि से ‘फ्रीज’ कर दिया गया है। राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज अग्रवाल ने आज ही कूछ घंटे पहले संवाददाता सम्मेलन में घोषणा की कि राज्य विधानसभा चुनाव के पहले चरण की मतदाता सूची आज मध्य रात्रि को ‘फ्रीज’ कर दी जायेगी। यदि न्यायाधिकरण इस समय सीमा के बाद किसी मतदाता का नाम सूची में शामिल करने की मंजूरी देता है तो उसे सूची में शामिल किया जायेगा लेकिन वह इस चुनाव में मतदान नहीं कर पायेगा। यद्यपी ऐसे व्यक्ति को अगले चुनाव में मतदान करने की अनुमति होगी।</p>
<p>चुनाव आयोग के अनुसार, गहन मतदाता पुनरीक्षण प्रक्रिया के दौरान लगभग 60 लाख मतदाताओं के नाम विचाराधीन थे। इनमें से न्यायिक अधिकारियों ने लगभग 58 लाख मामलों का निपटारा कर दिया है। हालांकि, अग्रवाल ने हटाए गए नामों की सटीक संख्या नहीं बताई, लेकिन उन्होंने कहा कि निपटाए गए लगभग 45 प्रतिशत मामलों में अंततः मतदाता सूची से नाम हटाए जा सकते हैं, जिससे संकेत मिलता है कि लगभग 27 लाख मतदाताओं के नाम हटाए जा सकते हैं। हालांकि, प्रभावित व्यक्तियों के पास न्यायाधिकरणों के समक्ष अपील करने का विकल्प होगा। इसके बावजूद, आम जनता के लिए न्यायाधिकरण कब पूरी तरह से काम करना शुरू करेंगे, इस पर अनिश्चितता बनी हुई है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 07 Apr 2026 17:59:44 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>ट्रिब्यूनल का बड़ा फैसला, कांग्रेस उम्मीदवार मेहताब शेख का नाम मतदाता सूची में बहाल करने का आदेश</title>
                                    <description><![CDATA[एसआईआर ट्रिब्यूनल ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए मुर्शिदाबाद के कांग्रेस उम्मीदवार मेहताब शेख का नाम मतदाता सूची में जोड़ने का आदेश दिया है। दस्तावेजों की जांच के बाद ट्रिब्यूनल ने चुनाव आयोग को रविवार शाम तक नाम शामिल करने का निर्देश दिया। इस फैसले से शेख के लिए 6 अप्रैल को नामांकन दाखिल करने का रास्ता साफ हो गया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/big-decision-of-tribunal-order-to-restore-the-name-of/article-149182"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/west-bengal1.png" alt=""></a><br /><p>कोलकाता। पश्चिम बंगाल में एसआईआर ट्रिब्यूनल ने अपने गठन के बाद पहले ही फैसले में कांग्रेस उम्मीदवार मेहताब शेख का नाम मतदाता सूची में बहाल करने का निर्देश दिया है। यह मामला मुर्शिदाबाद के फरक्का विधानसभा क्षेत्र से जुड़ा है। विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया के दौरान शेख का नाम मतदाता सूची से हटा दिया गया था, जिसके चलते वह नामांकन दाखिल नहीं कर पा रहे थे, जबकि उन्हें कांग्रेस का आधिकारिक उम्मीदवार घोषित किया जा चुका था। एसआईआर ट्रिब्यूनल के अध्यक्ष. एस. शिवग्नानम , ने आदेश दिया कि शेख का नाम तुरंत प्रभाव से मतदाता सूची में फिर से जोड़ा जाए।</p>
<p>चुनाव आयोग ने 28 फरवरी को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की थी, जिसमें 60 लाख से अधिक मतदाताओं को शामिल किया गया था। उच्चतम न्यायालय के निर्देश पर न्यायिक अधिकारियों ने विवादित प्रविष्टियों की जांच और समाधान की प्रक्रिया शुरू की थी। शीर्ष अदालत ने यह भी कहा था कि जिन लोगों के नाम सूची से हटाए गए हैं, वे राहत के लिए ट्रिब्यूनल का रुख कर सकते हैं। मतदाता सूची से नाम हटने और ट्रिब्यूनल के कामकाज में देरी के कारण शुरुआत में वहां नहीं जा पाने पर, शेख ने तुरंत राहत के लिए उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। अदालत के निर्देश पर उन्होंने बाद में बिजन भवन स्थित ट्रिब्यूनल में याचिका दायर की।</p>
<p>सुनवाई के दौरान शेख ने आधार कार्ड, पासपोर्ट, ड्राइविंग लाइसेंस और अपने बच्चे का जन्म प्रमाणपत्र जैसे दस्तावेज प्रस्तुत किए, जिनमें उनका नाम दर्ज था। उनके वकील फिरदौस शमीम और सुश्री गोपा बिस्वास ने पक्ष रखा, जबकि सुश्री दिव्या मुरुगेसन ने निर्वाचन आयोग की ओर से दलीलें पेश कीं। ट्रिब्यूनल ने पाया कि शेख के पिता के विवरण से संबंधित विसंगतियों के कारण नोटिस जारी किया गया था, लेकिन यह भी स्पष्ट किया कि इससे शेख की पात्रता पर कोई असर नहीं पड़ता। ट्रिब्यूनल ने निर्देश दिया कि रविवार शाम 8 बजे तक उनका नाम पूरक मतदाता सूची में शामिल किया जाए।</p>
<p>इससे पहले शेख ने कलकत्ता उच्च न्यायालय का रुख किया था, लेकिन अदालत ने एसआईआर से जुड़े मामलों पर उच्चतम न्यायालय के अधिकार क्षेत्र का हवाला देते हुए सुनवाई से इनकार कर दिया था। इसके बाद उच्चतम न्यायालय ने उन्हें ट्रिब्यूनल जाने की अनुमति दी और निर्वाचन आयोग को सहयोग करने का निर्देश दिया। फरक्का में मतदान के पहले चरण की तारीख नजदीक होने और नामांकन की अंतिम तिथि 6 अप्रैल तय होने के बीच, ट्रिब्यूनल के इस आदेश से श्री शेख के लिए नामांकन दाखिल करने का रास्ता साफ हो गया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 05 Apr 2026 15:59:54 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव: हटाए गए मतदाताओं के लिए ट्रिब्यूनल पोर्टल शुरू, चुनाव आयोग ने ऑनलाइन पोर्टल किया शुरू</title>
                                    <description><![CDATA[सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर चुनाव आयोग ने मतदाता सूची से कटे नामों की बहाली हेतु 23 जिलों में स्पेशल ट्रिब्यूनल गठित किए हैं। प्रभावित 14 लाख मतदाता अब ऑनलाइन पोर्टल या ऑफलाइन माध्यम से अपील कर सकेंगे। आयोग ने तीसरी अनुपूरक सूची जारी कर 2 लाख नए नाम जोड़े हैं, जिससे चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित होगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/west-bengal-assembly-elections-tribunal-portal-launched-for-deleted-voters/article-148331"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/ec.png" alt=""></a><br /><p>कोलकाता। चुनाव आयोग ने मतदाता सूची से नाम हटाए जाने की शिकायतों के समाधान के लिए उच्चतम न्यायालय के निर्देश के बाद एक विशेष ट्रिब्यूनल प्रणाली और ऑनलाइन पोर्टल शुरू किया है, जिसके तहत प्रभावित मतदाता रविवार से अपील दर्ज कर सकेंगे। ट्रिब्यूनल जल्द ही काम करना शुरू करेंगे, जिससे जिन मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं, उन्हें औपचारिक रूप से शिकायत दर्ज कराने और निवारण का अवसर मिलेगा। इससे पहले आयोग ने राज्य के 23 जिलों में ट्रिब्यूनल गठित किए थे, जिनकी देखरेख के लिए 19 पूर्व न्यायाधीशों और न्यायिक अधिकारियों की नियुक्ति की गयी है।</p>
<p>मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) कार्यालय के अनुसार, जिन मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं, वे अब ऑनलाइन या ऑफलाइन दोनों माध्यमों से राहत के लिए आवेदन कर सकते हैं। ऑनलाइन आवेदन के लिए संबंधित व्यक्ति को निर्वाचन आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर "व्यक्तियों के लिए अपील प्रस्तुत करें (निर्णयाधीन)" विकल्प पर क्लिक करना होगा। इसके बाद मोबाइल नंबर या एपिक नंबर के माध्यम से लॉगिन कर हटाए गए मतदाता का विवरण, पूर्ण पता, अपील का संक्षिप्त विवरण और अपील के आधार भरकर आवेदन जमा करना होगा।</p>
<p>इसके अलावा, ऑफलाइन आवेदन के लिए जिला मजिस्ट्रेट, अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट या उपमंडल अधिकारी के कार्यालय में आवश्यक दस्तावेजों के साथ आवेदन प्रस्तुत किया जा सकता है। अधिकारियों के अनुसार, ट्रिब्यूनल की कार्यवाही शीघ्र शुरू होगी और शिकायतों का समयबद्ध निपटारा सुनिश्चित किया जाएगा। यह कदम मतदाता सूची से बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने को लेकर उठ रही चिंताओं के बीच उठाया गया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, दूसरी अनुपूरक सूची से करीब 45 प्रतिशत नाम हटाए गए हैं जो लगभग 14 लाख मतदाताओं के बराबर है, जिनमें बड़ी संख्या महिलाओं और अल्पसंख्यक वर्ग की बताई जा रही है।हालांकि, आयोग ने अभी तक अंतिम मतदाता सूची के कुल विस्तृत आंकड़े जारी नहीं किए हैं।</p>
<p>इस बीच, शनिवार देर रात आयोग ने तीसरी अनुपूरक मतदाता सूची जारी की, जिसमें दो लाख से अधिक नए नाम जोड़े जाने की जानकारी है। इसके साथ ही प्रतिदिन अनुपूरक सूची जारी करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है और चौथी सूची रविवार को जारी किए जाने की संभावना है। तीसरी सूची में शामिल और हटाए गए नामों के विस्तृत आंकड़े अभी सार्वजनिक नहीं किए गए हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 29 Mar 2026 15:02:19 +0530</pubDate>
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                <title>पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव: ममता बनर्जी ने बोला केंद्र सरकार पर हमला, लोगों के अधिकारों की रक्षा का दोहराया संकल्प, बोली-हमारी लड़ाई जारी रहेगी, आपके अधिकार किसी भी हाल में छीनने नहीं दूंगी</title>
                                    <description><![CDATA[कोलकाता में ईद सभा के दौरान ममता बनर्जी ने केंद्र और चुनाव आयोग पर तीखा हमला बोला। उन्होंने मतदाता सूची से नाम हटाए जाने को साजिश करार देते हुए "भाजपा हटाओ, देश बचाओ" का नारा दिया। मुख्यमंत्री ने संकल्प लिया कि वह बंगाल के लोगों के अधिकारों और सांप्रदायिक एकता की रक्षा के लिए आखिरी सांस तक लड़ेंगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/west-bengal-assembly-elections-mamata-banerjee-said-it-was-an/article-147331"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/cm-mamta-on-sir.png" alt=""></a><br /><p>कोलकाता। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने शनिवार को ईद के मौके पर कोलकाता में आयोजित कार्यक्रम के दौरान लोगों के अधिकारों की रक्षा का संकल्प दोहराया और केंद्र की भाजपा सरकार तथा चुनाव आयोग पर तीखा निशाना साधा। वार्षिक ईद सभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार बंगाल के लोगों के अधिकार किसी भी हाल में छीने नहीं जाने देगी। उन्होंने आरोप लगाया कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान मतदाता सूची से कई नाम हटाए गए हैं, हालांकि उन्होंने उम्मीद जताई कि लोगों की गरिमा सुरक्षित रहेगी।</p>
<p>उन्होंने कहा, "हमारी लड़ाई जारी रहेगी। हम बंगाल के हर व्यक्ति के साथ हैं और उनके अधिकारों को छीने नहीं जाने देंगे।" मुख्यमंत्री ने केंद्र के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि उनकी सरकार किसी भी दबाव के आगे नहीं झुकेगी। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा, "जो बंगाल को निशाना बनाएंगे, उनका अंजाम अच्छा नहीं होगा।" साथ ही उन्होंने "बीजेपी हटाओ, देश बचाओ" का नारा भी दोहराया।</p>
<p>यह बयान उस समय आया है जब राज्य में अंतिम एसआईआर सूची को लेकर विवाद जारी है, जिसमें लाखों नाम हटाए जाने और कई नामों के जांच के दायरे में होने की खबरें हैं। तृणमूल कांग्रेस लगातार आरोप लगा रही है कि चुनाव आयोग केंद्र सरकार के दबाव में काम कर रहा है।</p>
<p>इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री ने कहा कि वह पहले ही दिल्ली जाकर आयोग के सामने अपनी बात रख चुकी हैं और आगे भी संघर्ष जारी रखेंगी।<br />कार्यक्रम के दौरान बारिश को उन्होंने "ईश्वरीय आशीर्वाद" बताया और कहा कि यह उनके संघर्ष के समर्थन का प्रतीक है। साथ ही उन्होंने सभी धर्मों के बीच एकता और सौहार्द बनाए रखने पर जोर दिया। इस मौके पर मौजूद तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महसचिव अभिषेक बनर्जी ने भी लोगों से एकजुट रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि समाज को बांटने की कोशिश हो रही है, लेकिन बंगाल की सांप्रदायिक एकता कायम रहेगी। कार्यक्रम के बाद दोनों नेताओं ने शहर की एक मस्जिद में जाकर ईद की नमाज से जुड़े कार्यक्रमों में हिस्सा लिया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Sat, 21 Mar 2026 15:00:54 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव: शुक्रवार को जारी हो सकती है Updated Voter List, मतदाता सूची को लेकर हाईकोर्ट के मुख्य न्यायधीश की आज अहम बैठक</title>
                                    <description><![CDATA[पश्चिम बंगाल में 60 लाख से अधिक 'विचाराधीन' नामों की जांच के बाद शुक्रवार को संशोधित मतदाता सूची जारी होने की संभावना है। कलकत्ता उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश ने सुरक्षा स्थिति की समीक्षा हेतु शीर्ष अधिकारियों के साथ बैठक की। प्रशासन सूची प्रकाशन के बाद संभावित कानून-व्यवस्था की चुनौतियों को लेकर पूरी तरह सतर्क है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/west-bengal-assembly-elections-may-be-released-on-friday-updated/article-147049"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/west-bengal-sir.png" alt=""></a><br /><p>कोलकाता। पश्चिम बंगाल में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया के बाद  मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) कार्यालय की ओर से तैयार की गई अतिरिक्त मतदाता सूची से नामों का पहला सेट प्रकाशित किए जाने की संभावना है और ऐसे संकेत मिल रहे हैं कि अद्यतन मतदाता सूची शुक्रवार तक जारी की जा सकती है। यह घटनाक्रम संशोधित नामों के सार्वजनिक होने के बाद संभावित कानून-व्यवस्था संबंधी समस्याओं को लेकर बढ़ी हुई प्रशासनिक तैयारियों और चिंताओं के बीच सामने आया है।</p>
<p>स्थिति की गंभीरता को देखते हुए कलकत्ता उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश सुजॉय पॉल ने गृह सचिव संघमित्रा घोष, पुलिस महानिदेशक सिद्धनाथ गुप्ता और कोलकाता पुलिस आयुक्त अजय नंदा के साथ राज्य में मौजूदा सुरक्षा स्थिति का आकलन करने के लिए बैठक की। गुरुवार को सुबह 10 बजे बैठक शुरू हुई और लगभग आधे घंटे तक चली।  इस समीक्षा का समय महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि यह एसआईआर प्रक्रिया के बाद अतिरिक्त मतदाता सूची के प्रकाशन से ठीक पहले हो रही है। चुनाव आयोग ने इससे पहले 28 फरवरी को एक संशोधित मतदाता सूची जारी की थी, हालांकि इसे अपूर्ण माना गया था।</p>
<p>आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, उस सूची में 6,44,52,609 मतदाताओं को 'पात्र' के रूप में चिह्नित किया गया था, जबकि 60,06,675 नाम 'विचाराधीन' श्रेणी में रखे गए थे। इन लंबित नामों पर निर्णय लेने की प्रक्रिया में हाल के दिनों में तेजी आई है। बुधवार तक लगभग 23.3 लाख ऐसे मामलों पर निर्णय लिए जा चुके थे।</p>
<p>उच्च न्यायालय द्वारा नियुक्त 700 से अधिक न्यायिक अधिकारी वर्तमान में इन प्रविष्टियों की जांच में लगे हुए हैं। मुख्यमंत्री कार्यालय के अधिकारियों ने सुझाव दिया है कि यदि वर्तमान गति बनी रही, तो चुनाव से पहले सभी लंबित नामों का निपटारा पूरा हो सकता है। कुछ हलकों में आशंका बनी हुई है कि जब मतदाताओं की पहली सूची प्रकाशित होगी, तो कई नाम छूट सकते हैं। इससे राज्य के कुछ हिस्सों में सूची जारी होने के बाद संभावित कानून-व्यवस्था की गड़बड़ी की आशंका बढ़ गई है।</p>
<p>इस पृष्ठभूमि में, उच्च न्यायालय द्वारा सुरक्षा स्थिति की सक्रिय समीक्षा प्रशासन की सतर्कता को रेखांकित करती है। अधिकारी घटनाक्रम पर कड़ी नजर रख रहे हैं ताकि संशोधित मतदाता सूचियों के प्रकाशन से उत्पन्न होने वाले किसी भी दुष्प्रभाव को प्रभावी ढंग से नियंत्रित किया जा सके।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Thu, 19 Mar 2026 17:49:26 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने की बेलूर मठ एवं दक्षिणेश्वर काली मंदिर में पूजा-अर्चना, स्वामी गौतमानंदजी महाराज से लिया आशीर्वाद </title>
                                    <description><![CDATA[मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने मंगलवार को बेलूर मठ और दक्षिणेश्वर मंदिर में पूजा-अर्चना की। काले झंडे और विरोध के बीच उन्होंने पश्चिम बंगाल में हिंसा मुक्त एवं निष्पक्ष चुनाव का संकल्प दोहराया। आयोग की टीम चुनावी तैयारियों और मतदाता सूची प्रबंधन की समीक्षा के लिए अधिकारियों के साथ महत्वपूर्ण बैठकें कर रही है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/chief-election-commissioner-gyanesh-kumar-worshiped-at-belur-math-and/article-145947"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/gyanesh-kumar1.png" alt=""></a><br /><p>कोलकाता। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने पश्चिम बंगाल के अपने तीन दिवसीय दौरे के दौरान मंगलवार को बेलूर मठ और दक्षिणेश्वर काली मंदिर का दौरा किया तथा पूजा-अर्चना की। मुख्य चुनाव आयुक्त सुबह करीब 7:15 बजे रामकृष्ण मठ और रामकृष्ण मिशन के मुख्यालय पहुंचे और मुख्य मंदिर में पूजा-अर्चना की। अपनी यात्रा के दौरान, उन्होंने रामकृष्ण संघ के अध्यक्ष स्वामी गौतमानंदजी महाराज से भी मुलाकात की और उनका आशीर्वाद लिया। मुख्य चुनाव आयुक्त ने मठ में करीब 45 मिनट बिताए।</p>
<p>ज्ञानेश कुमार ने बेलूर मठ से बाहर आने के बाद मीडिया के सामने राज्य में स्वतंत्र, निष्पक्ष और शांतिपूर्ण चुनाव कराने के आयोग के संकल्प को दोहराया। उन्होंने कहा, चुनाव आयोग यह सुनिश्चित करने के लिए दृढ़ संकल्पित है कि चुनाव के दौरान कोई अप्रिय घटना न हो। हम पश्चिम बंगाल में हिंसा मुक्त और शांतिपूर्ण चुनाव कराने के लिए प्रतिबद्ध हैं।</p>
<p>बेलूर मठ की अपनी यात्रा पूरी करने के बाद, मुख्य चुनाव आयुक्त पूजा करने के लिए प्रसिद्ध दक्षिणेश्वर काली मंदिर के लिए रवाना हुए। हालांकि, प्रदर्शनकारियों के एक समूह ने मंदिर परिसर के बाहर उन्हें काले झंडे दिखाए। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों ने वापस जाओ के नारे भी लगाए।</p>
<p>प्रदर्शनकारियों का कहना था कि विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची से कथित तौर पर कई नाम हटा दिए गए थे, जिससे मतदाताओं के एक वर्ग में नाराजगी थी। ज्ञानेश कुमार ने हालांकि विरोध प्रदर्शन पर कोई टिप्पणी नहीं की। मुख्य चुनाव आयुक्त ने सोमवार को कालीघाट काली मंदिर का भी दौरा किया था, जहां इसी तरह का विरोध प्रदर्शन हुआ था।</p>
<p>मुख्य चुनाव आयुक्त वर्तमान में चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी के साथ पश्चिम बंगाल के तीन दिवसीय दौरे पर हैं। आयोग की पूर्ण पीठ आगामी चुनावों की तैयारियों की समीक्षा के लिए राज्य में प्रशासनिक अधिकारियों, पुलिस अधिकारियों और राजनीतिक दलों के साथ बैठकें कर रही हैं।</p>
<p>मंगलवार के कार्यक्रम के तहत, ज्ञानेश कुमार मतदाता सूची प्रबंधन और जमीनी स्तर की चुनावी तैयारियों की समीक्षा के लिए राज्य के बूथ स्तर के अधिकारियों (बीएलओ) के साथ बैठक भी करने वाले हैं। चुनाव आयोग का यह दौरा पश्चिम बंगाल में चुनाव कार्यक्रम की घोषणा से पहले हो रहा है, जिसमें आयोग की पीठ चुनाव प्रक्रिया के सुचारू संचालन को सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न हितधारकों के साथ चर्चा कर रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 10 Mar 2026 12:53:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>मतदाता सूची बदलाव को लेकर कोलकाता में टीएमसी और चुनाव आयोग में तीखी नोकझोंक, अपनी बात नहीं रखने का लगाया आरोप</title>
                                    <description><![CDATA[कोलकाता में चुनाव आयोग और तृणमूल कांग्रेस के बीच 'विशेष गहन पुनरीक्षण' (SIR) पर टकराव बढ़ गया है। मंत्री चंद्रिमा भट्टाचार्य ने मुख्य चुनाव आयुक्त पर अमर्यादित व्यवहार का आरोप लगाया, वहीं फिरहाद हकीम ने इस प्रक्रिया को नागरिकों का उत्पीड़न बताया। TMC ने आरोप लगाया कि केंद्र के प्रभाव में आकर असली मतदाताओं के नाम काटे जा रहे हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/heated-dispute-between-tmc-and-election-commission-in-kolkata-regarding/article-145867"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/sir.png" alt=""></a><br /><p>कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में सोमवार को चुनाव आयोग और राजनीतिक दलों के बीच हुई बैठक के दौरान मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर आयोग और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के बीच तीखी बहस हुई। बैठक के बाद तृणमूल प्रतिनिधिमंडल में शामिल सदस्यों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के बर्ताव पर गहरी नाराजगी जताई और आरोप लगाया कि उन्होंने उन्हें अपनी बात पूरी तरह से रखने की इजाजत नहीं दी। </p>
<p>तृणमूल की वरिष्ठ नेता एवं राज्य मंत्री चंद्रिमा भट्टाचार्य ने दावा किया कि उनसे चर्चा के दौरान अपनी आवाज ऊंची न करने के लिए कहा गया। उन्होंने कहा, मैं एक महिला हूँ और उन्होंने मुझसे कहा,'चिल्लाओ मत'। असल में उनके मन में महिलाओं के लिए कोई सम्मान नहीं है। इसीलिए महिलाओं के नाम भी मतदाता सूची से काटे जा रहे हैं। अगर मेरा नाम नहीं है, तो इसे साबित करना आपकी जिम्मेदारी है। मुझे कतार में क्यों खड़ा होना चाहिए? महिलाओं पर चिल्लाना आपका काम नहीं है। </p>
<p>तृणमूल के प्रतिनिधिमंडल के मुताबिक मुख्य चुनाव आयुक्त उनकी बातें सुनने को तैयार नहीं थे। उन्होंने आरोप लगाया, वह किसी की बात नहीं सुनना चाहते। वह खुद बोलते रहे और जब हमने बोलने की कोशिश की,तो उन्होंने अपनी आवाज ऊंची कर ली। ऐसा लगता है कि आयोग इसलिए नाराज है क्योंकि हमने उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाया।</p>
<p>आयोग के साथ ही बैठक में तृणमूल की ओर से फिरहाद हकीम, श्रीमती भट्टाचार्य और राज्यसभा उम्मीदवार राजीव कुमार शामिल थे। हकीम ने एसआईआर प्रक्रिया की आलोचना की और आयोग पर घुसपैठ के मुद्दे पर केंद्र सरकार की कहानी से प्रभावित होकर गलत तरीका अपनाने का आरोप लगाया। </p>
<p>हकीम ने कहा, केंद्र सरकार ने यह प्रभाव बनाया है कि यह राज्य रोहिंग्या और घुसपैठियों से भरा है,और आयोग ने अपनी नीति उसी हिसाब से बनाई है। लेकिन इस प्रक्रिया के दो महीनों में आपको इसका कोई सबूत नहीं मिला है। इसके बजाय भारतीय नागरिकों को परेशान किया गया है। इस प्रक्रिया से आम लोगों को काफी मुश्किल हुई है। सैकड़ों मौतें हुई हैं और बहुत सारे लोग बीमारियों की चपेट में आए। इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा? लोग अपना काम छोड़कर सिर्फ अपनी नागरिकता साबित करने के लिए लंबी लाइनों में खड़े हो रहे हैं। केंद्र सरकार की बात मानकर बनाई गई यह नीति बनायी गयी। है। </p>
<p>हकीम ने कहा कि पार्टी की सबसे बड़ी चिंता यह पक्का करना है कि असली वोटर अपने अधिकारों से वंचित न रहें। उन्होंने कहा, हमारा बस यही आग्रह है कि किसी भी भारतीय नागरिक को वंचित न किया जाए। एसआईआर प्रक्रिया को लेकर पार्टी के उच्चतम न्यायालय जाने के सवाल पर भट्टाचार्य ने इस कदम का बचाव किया। उन्होंने कहा, जब भी हमने एसआईआर का मुद्दा उठाया, तो उन्होंने कहा कि मामला उच्चतम न्यायालय में है। फिर हमें बैठक के लिए क्यों बुलाया? अगर आप हमें बुलाते हैं, तो आपको हमारी बात सुननी चाहिए। क्या हमारा उच्चतम न्यायालय जाना गलत था? हमने सही किया। लोगों की सुरक्षा हमारी जिम्मेदारी है।</p>
<p>इस दौरान जब उनसे पूछा गया कि तृणमूल चुनाव को कितने चरण में कराना चाहती है, तो उन्होंने इस पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया और कहा कि बैठक का मकसद मतदान के चरण की संख्या पर चर्चा करना नहीं था। हालांकि, हकीम ने इस मौके का इस्तेमाल केंद्र सरकार पर राजनीतिक हमला करने के लिए किया और कहा, केंद्र सरकार राज्य में अपनी जमीन खो चुकी है। वे मासूम लोगों को एसआईआर कतारों में खड़ा करके बंगाल को नुकसान पहुंचा रहे हैं। इस वजह से कई मौतें हुई हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 09 Mar 2026 17:54:29 +0530</pubDate>
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