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                <title>voter list - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव: पहले चरण की मतदाता सूची फ्रीज; न्यायाधिकरण की पहुंच अभी भी अनिश्चित, 23 और 29 अप्रैल को होंगे मतदान</title>
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                        <![CDATA[पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले चरण की मतदाता सूची सोमवार मध्यरात्रि से फ्रीज कर दी गई है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज अग्रवाल के अनुसार, 60 लाख विचाराधीन नामों में से लगभग 27 लाख मतदाताओं के नाम हटाए जा सकते हैं। प्रभावित लोग न्यायाधिकरण में अपील कर सकेंगे, लेकिन इस चुनाव में मतदान नहीं कर पाएंगे।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/west-bengal-assembly-elections-first-phase-voter-list-freeze-tribunals/article-149412"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/west-bengal-election-20261.png" alt=""></a><br /><p>कोलकाता। पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के पहले चरण की मतदाता सूची को सोमवार मध्यरात्रि से ‘फ्रीज’ कर दिया गया है। राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज अग्रवाल ने आज ही कूछ घंटे पहले संवाददाता सम्मेलन में घोषणा की कि राज्य विधानसभा चुनाव के पहले चरण की मतदाता सूची आज मध्य रात्रि को ‘फ्रीज’ कर दी जायेगी। यदि न्यायाधिकरण इस समय सीमा के बाद किसी मतदाता का नाम सूची में शामिल करने की मंजूरी देता है तो उसे सूची में शामिल किया जायेगा लेकिन वह इस चुनाव में मतदान नहीं कर पायेगा। यद्यपी ऐसे व्यक्ति को अगले चुनाव में मतदान करने की अनुमति होगी।</p>
<p>चुनाव आयोग के अनुसार, गहन मतदाता पुनरीक्षण प्रक्रिया के दौरान लगभग 60 लाख मतदाताओं के नाम विचाराधीन थे। इनमें से न्यायिक अधिकारियों ने लगभग 58 लाख मामलों का निपटारा कर दिया है। हालांकि, अग्रवाल ने हटाए गए नामों की सटीक संख्या नहीं बताई, लेकिन उन्होंने कहा कि निपटाए गए लगभग 45 प्रतिशत मामलों में अंततः मतदाता सूची से नाम हटाए जा सकते हैं, जिससे संकेत मिलता है कि लगभग 27 लाख मतदाताओं के नाम हटाए जा सकते हैं। हालांकि, प्रभावित व्यक्तियों के पास न्यायाधिकरणों के समक्ष अपील करने का विकल्प होगा। इसके बावजूद, आम जनता के लिए न्यायाधिकरण कब पूरी तरह से काम करना शुरू करेंगे, इस पर अनिश्चितता बनी हुई है।</p>]]>
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                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 07 Apr 2026 17:59:44 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Jaipur NM]]>
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            <item>
                <title>ट्रिब्यूनल का बड़ा फैसला, कांग्रेस उम्मीदवार मेहताब शेख का नाम मतदाता सूची में बहाल करने का आदेश</title>
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                        <![CDATA[एसआईआर ट्रिब्यूनल ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए मुर्शिदाबाद के कांग्रेस उम्मीदवार मेहताब शेख का नाम मतदाता सूची में जोड़ने का आदेश दिया है। दस्तावेजों की जांच के बाद ट्रिब्यूनल ने चुनाव आयोग को रविवार शाम तक नाम शामिल करने का निर्देश दिया। इस फैसले से शेख के लिए 6 अप्रैल को नामांकन दाखिल करने का रास्ता साफ हो गया है।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/big-decision-of-tribunal-order-to-restore-the-name-of/article-149182"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/west-bengal1.png" alt=""></a><br /><p>कोलकाता। पश्चिम बंगाल में एसआईआर ट्रिब्यूनल ने अपने गठन के बाद पहले ही फैसले में कांग्रेस उम्मीदवार मेहताब शेख का नाम मतदाता सूची में बहाल करने का निर्देश दिया है। यह मामला मुर्शिदाबाद के फरक्का विधानसभा क्षेत्र से जुड़ा है। विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया के दौरान शेख का नाम मतदाता सूची से हटा दिया गया था, जिसके चलते वह नामांकन दाखिल नहीं कर पा रहे थे, जबकि उन्हें कांग्रेस का आधिकारिक उम्मीदवार घोषित किया जा चुका था। एसआईआर ट्रिब्यूनल के अध्यक्ष. एस. शिवग्नानम , ने आदेश दिया कि शेख का नाम तुरंत प्रभाव से मतदाता सूची में फिर से जोड़ा जाए।</p>
<p>चुनाव आयोग ने 28 फरवरी को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की थी, जिसमें 60 लाख से अधिक मतदाताओं को शामिल किया गया था। उच्चतम न्यायालय के निर्देश पर न्यायिक अधिकारियों ने विवादित प्रविष्टियों की जांच और समाधान की प्रक्रिया शुरू की थी। शीर्ष अदालत ने यह भी कहा था कि जिन लोगों के नाम सूची से हटाए गए हैं, वे राहत के लिए ट्रिब्यूनल का रुख कर सकते हैं। मतदाता सूची से नाम हटने और ट्रिब्यूनल के कामकाज में देरी के कारण शुरुआत में वहां नहीं जा पाने पर, शेख ने तुरंत राहत के लिए उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। अदालत के निर्देश पर उन्होंने बाद में बिजन भवन स्थित ट्रिब्यूनल में याचिका दायर की।</p>
<p>सुनवाई के दौरान शेख ने आधार कार्ड, पासपोर्ट, ड्राइविंग लाइसेंस और अपने बच्चे का जन्म प्रमाणपत्र जैसे दस्तावेज प्रस्तुत किए, जिनमें उनका नाम दर्ज था। उनके वकील फिरदौस शमीम और सुश्री गोपा बिस्वास ने पक्ष रखा, जबकि सुश्री दिव्या मुरुगेसन ने निर्वाचन आयोग की ओर से दलीलें पेश कीं। ट्रिब्यूनल ने पाया कि शेख के पिता के विवरण से संबंधित विसंगतियों के कारण नोटिस जारी किया गया था, लेकिन यह भी स्पष्ट किया कि इससे शेख की पात्रता पर कोई असर नहीं पड़ता। ट्रिब्यूनल ने निर्देश दिया कि रविवार शाम 8 बजे तक उनका नाम पूरक मतदाता सूची में शामिल किया जाए।</p>
<p>इससे पहले शेख ने कलकत्ता उच्च न्यायालय का रुख किया था, लेकिन अदालत ने एसआईआर से जुड़े मामलों पर उच्चतम न्यायालय के अधिकार क्षेत्र का हवाला देते हुए सुनवाई से इनकार कर दिया था। इसके बाद उच्चतम न्यायालय ने उन्हें ट्रिब्यूनल जाने की अनुमति दी और निर्वाचन आयोग को सहयोग करने का निर्देश दिया। फरक्का में मतदान के पहले चरण की तारीख नजदीक होने और नामांकन की अंतिम तिथि 6 अप्रैल तय होने के बीच, ट्रिब्यूनल के इस आदेश से श्री शेख के लिए नामांकन दाखिल करने का रास्ता साफ हो गया है।</p>]]>
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                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 05 Apr 2026 15:59:54 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Jaipur NM]]>
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                <title>पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव: हटाए गए मतदाताओं के लिए ट्रिब्यूनल पोर्टल शुरू, चुनाव आयोग ने ऑनलाइन पोर्टल किया शुरू</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर चुनाव आयोग ने मतदाता सूची से कटे नामों की बहाली हेतु 23 जिलों में स्पेशल ट्रिब्यूनल गठित किए हैं। प्रभावित 14 लाख मतदाता अब ऑनलाइन पोर्टल या ऑफलाइन माध्यम से अपील कर सकेंगे। आयोग ने तीसरी अनुपूरक सूची जारी कर 2 लाख नए नाम जोड़े हैं, जिससे चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित होगी।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/west-bengal-assembly-elections-tribunal-portal-launched-for-deleted-voters/article-148331"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/ec.png" alt=""></a><br /><p>कोलकाता। चुनाव आयोग ने मतदाता सूची से नाम हटाए जाने की शिकायतों के समाधान के लिए उच्चतम न्यायालय के निर्देश के बाद एक विशेष ट्रिब्यूनल प्रणाली और ऑनलाइन पोर्टल शुरू किया है, जिसके तहत प्रभावित मतदाता रविवार से अपील दर्ज कर सकेंगे। ट्रिब्यूनल जल्द ही काम करना शुरू करेंगे, जिससे जिन मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं, उन्हें औपचारिक रूप से शिकायत दर्ज कराने और निवारण का अवसर मिलेगा। इससे पहले आयोग ने राज्य के 23 जिलों में ट्रिब्यूनल गठित किए थे, जिनकी देखरेख के लिए 19 पूर्व न्यायाधीशों और न्यायिक अधिकारियों की नियुक्ति की गयी है।</p>
<p>मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) कार्यालय के अनुसार, जिन मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं, वे अब ऑनलाइन या ऑफलाइन दोनों माध्यमों से राहत के लिए आवेदन कर सकते हैं। ऑनलाइन आवेदन के लिए संबंधित व्यक्ति को निर्वाचन आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर "व्यक्तियों के लिए अपील प्रस्तुत करें (निर्णयाधीन)" विकल्प पर क्लिक करना होगा। इसके बाद मोबाइल नंबर या एपिक नंबर के माध्यम से लॉगिन कर हटाए गए मतदाता का विवरण, पूर्ण पता, अपील का संक्षिप्त विवरण और अपील के आधार भरकर आवेदन जमा करना होगा।</p>
<p>इसके अलावा, ऑफलाइन आवेदन के लिए जिला मजिस्ट्रेट, अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट या उपमंडल अधिकारी के कार्यालय में आवश्यक दस्तावेजों के साथ आवेदन प्रस्तुत किया जा सकता है। अधिकारियों के अनुसार, ट्रिब्यूनल की कार्यवाही शीघ्र शुरू होगी और शिकायतों का समयबद्ध निपटारा सुनिश्चित किया जाएगा। यह कदम मतदाता सूची से बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने को लेकर उठ रही चिंताओं के बीच उठाया गया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, दूसरी अनुपूरक सूची से करीब 45 प्रतिशत नाम हटाए गए हैं जो लगभग 14 लाख मतदाताओं के बराबर है, जिनमें बड़ी संख्या महिलाओं और अल्पसंख्यक वर्ग की बताई जा रही है।हालांकि, आयोग ने अभी तक अंतिम मतदाता सूची के कुल विस्तृत आंकड़े जारी नहीं किए हैं।</p>
<p>इस बीच, शनिवार देर रात आयोग ने तीसरी अनुपूरक मतदाता सूची जारी की, जिसमें दो लाख से अधिक नए नाम जोड़े जाने की जानकारी है। इसके साथ ही प्रतिदिन अनुपूरक सूची जारी करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है और चौथी सूची रविवार को जारी किए जाने की संभावना है। तीसरी सूची में शामिल और हटाए गए नामों के विस्तृत आंकड़े अभी सार्वजनिक नहीं किए गए हैं।</p>]]>
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                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 29 Mar 2026 15:02:19 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Jaipur NM]]>
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                <title>पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव: ममता बनर्जी ने बोला केंद्र सरकार पर हमला, लोगों के अधिकारों की रक्षा का दोहराया संकल्प, बोली-हमारी लड़ाई जारी रहेगी, आपके अधिकार किसी भी हाल में छीनने नहीं दूंगी</title>
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                        <![CDATA[कोलकाता में ईद सभा के दौरान ममता बनर्जी ने केंद्र और चुनाव आयोग पर तीखा हमला बोला। उन्होंने मतदाता सूची से नाम हटाए जाने को साजिश करार देते हुए "भाजपा हटाओ, देश बचाओ" का नारा दिया। मुख्यमंत्री ने संकल्प लिया कि वह बंगाल के लोगों के अधिकारों और सांप्रदायिक एकता की रक्षा के लिए आखिरी सांस तक लड़ेंगी।]]>
                    </description>
                
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/west-bengal-assembly-elections-mamata-banerjee-said-it-was-an/article-147331"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/cm-mamta-on-sir.png" alt=""></a><br /><p>कोलकाता। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने शनिवार को ईद के मौके पर कोलकाता में आयोजित कार्यक्रम के दौरान लोगों के अधिकारों की रक्षा का संकल्प दोहराया और केंद्र की भाजपा सरकार तथा चुनाव आयोग पर तीखा निशाना साधा। वार्षिक ईद सभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार बंगाल के लोगों के अधिकार किसी भी हाल में छीने नहीं जाने देगी। उन्होंने आरोप लगाया कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान मतदाता सूची से कई नाम हटाए गए हैं, हालांकि उन्होंने उम्मीद जताई कि लोगों की गरिमा सुरक्षित रहेगी।</p>
<p>उन्होंने कहा, "हमारी लड़ाई जारी रहेगी। हम बंगाल के हर व्यक्ति के साथ हैं और उनके अधिकारों को छीने नहीं जाने देंगे।" मुख्यमंत्री ने केंद्र के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि उनकी सरकार किसी भी दबाव के आगे नहीं झुकेगी। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा, "जो बंगाल को निशाना बनाएंगे, उनका अंजाम अच्छा नहीं होगा।" साथ ही उन्होंने "बीजेपी हटाओ, देश बचाओ" का नारा भी दोहराया।</p>
<p>यह बयान उस समय आया है जब राज्य में अंतिम एसआईआर सूची को लेकर विवाद जारी है, जिसमें लाखों नाम हटाए जाने और कई नामों के जांच के दायरे में होने की खबरें हैं। तृणमूल कांग्रेस लगातार आरोप लगा रही है कि चुनाव आयोग केंद्र सरकार के दबाव में काम कर रहा है।</p>
<p>इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री ने कहा कि वह पहले ही दिल्ली जाकर आयोग के सामने अपनी बात रख चुकी हैं और आगे भी संघर्ष जारी रखेंगी।<br />कार्यक्रम के दौरान बारिश को उन्होंने "ईश्वरीय आशीर्वाद" बताया और कहा कि यह उनके संघर्ष के समर्थन का प्रतीक है। साथ ही उन्होंने सभी धर्मों के बीच एकता और सौहार्द बनाए रखने पर जोर दिया। इस मौके पर मौजूद तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महसचिव अभिषेक बनर्जी ने भी लोगों से एकजुट रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि समाज को बांटने की कोशिश हो रही है, लेकिन बंगाल की सांप्रदायिक एकता कायम रहेगी। कार्यक्रम के बाद दोनों नेताओं ने शहर की एक मस्जिद में जाकर ईद की नमाज से जुड़े कार्यक्रमों में हिस्सा लिया।</p>]]>
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                                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Sat, 21 Mar 2026 15:00:54 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव: शुक्रवार को जारी हो सकती है Updated Voter List, मतदाता सूची को लेकर हाईकोर्ट के मुख्य न्यायधीश की आज अहम बैठक</title>
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                        <![CDATA[पश्चिम बंगाल में 60 लाख से अधिक 'विचाराधीन' नामों की जांच के बाद शुक्रवार को संशोधित मतदाता सूची जारी होने की संभावना है। कलकत्ता उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश ने सुरक्षा स्थिति की समीक्षा हेतु शीर्ष अधिकारियों के साथ बैठक की। प्रशासन सूची प्रकाशन के बाद संभावित कानून-व्यवस्था की चुनौतियों को लेकर पूरी तरह सतर्क है।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/west-bengal-assembly-elections-may-be-released-on-friday-updated/article-147049"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/west-bengal-sir.png" alt=""></a><br /><p>कोलकाता। पश्चिम बंगाल में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया के बाद  मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) कार्यालय की ओर से तैयार की गई अतिरिक्त मतदाता सूची से नामों का पहला सेट प्रकाशित किए जाने की संभावना है और ऐसे संकेत मिल रहे हैं कि अद्यतन मतदाता सूची शुक्रवार तक जारी की जा सकती है। यह घटनाक्रम संशोधित नामों के सार्वजनिक होने के बाद संभावित कानून-व्यवस्था संबंधी समस्याओं को लेकर बढ़ी हुई प्रशासनिक तैयारियों और चिंताओं के बीच सामने आया है।</p>
<p>स्थिति की गंभीरता को देखते हुए कलकत्ता उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश सुजॉय पॉल ने गृह सचिव संघमित्रा घोष, पुलिस महानिदेशक सिद्धनाथ गुप्ता और कोलकाता पुलिस आयुक्त अजय नंदा के साथ राज्य में मौजूदा सुरक्षा स्थिति का आकलन करने के लिए बैठक की। गुरुवार को सुबह 10 बजे बैठक शुरू हुई और लगभग आधे घंटे तक चली।  इस समीक्षा का समय महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि यह एसआईआर प्रक्रिया के बाद अतिरिक्त मतदाता सूची के प्रकाशन से ठीक पहले हो रही है। चुनाव आयोग ने इससे पहले 28 फरवरी को एक संशोधित मतदाता सूची जारी की थी, हालांकि इसे अपूर्ण माना गया था।</p>
<p>आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, उस सूची में 6,44,52,609 मतदाताओं को 'पात्र' के रूप में चिह्नित किया गया था, जबकि 60,06,675 नाम 'विचाराधीन' श्रेणी में रखे गए थे। इन लंबित नामों पर निर्णय लेने की प्रक्रिया में हाल के दिनों में तेजी आई है। बुधवार तक लगभग 23.3 लाख ऐसे मामलों पर निर्णय लिए जा चुके थे।</p>
<p>उच्च न्यायालय द्वारा नियुक्त 700 से अधिक न्यायिक अधिकारी वर्तमान में इन प्रविष्टियों की जांच में लगे हुए हैं। मुख्यमंत्री कार्यालय के अधिकारियों ने सुझाव दिया है कि यदि वर्तमान गति बनी रही, तो चुनाव से पहले सभी लंबित नामों का निपटारा पूरा हो सकता है। कुछ हलकों में आशंका बनी हुई है कि जब मतदाताओं की पहली सूची प्रकाशित होगी, तो कई नाम छूट सकते हैं। इससे राज्य के कुछ हिस्सों में सूची जारी होने के बाद संभावित कानून-व्यवस्था की गड़बड़ी की आशंका बढ़ गई है।</p>
<p>इस पृष्ठभूमि में, उच्च न्यायालय द्वारा सुरक्षा स्थिति की सक्रिय समीक्षा प्रशासन की सतर्कता को रेखांकित करती है। अधिकारी घटनाक्रम पर कड़ी नजर रख रहे हैं ताकि संशोधित मतदाता सूचियों के प्रकाशन से उत्पन्न होने वाले किसी भी दुष्प्रभाव को प्रभावी ढंग से नियंत्रित किया जा सके।</p>]]>
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                                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Thu, 19 Mar 2026 17:49:26 +0530</pubDate>
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                <title>मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने की बेलूर मठ एवं दक्षिणेश्वर काली मंदिर में पूजा-अर्चना, स्वामी गौतमानंदजी महाराज से लिया आशीर्वाद </title>
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                        <![CDATA[मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने मंगलवार को बेलूर मठ और दक्षिणेश्वर मंदिर में पूजा-अर्चना की। काले झंडे और विरोध के बीच उन्होंने पश्चिम बंगाल में हिंसा मुक्त एवं निष्पक्ष चुनाव का संकल्प दोहराया। आयोग की टीम चुनावी तैयारियों और मतदाता सूची प्रबंधन की समीक्षा के लिए अधिकारियों के साथ महत्वपूर्ण बैठकें कर रही है।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/chief-election-commissioner-gyanesh-kumar-worshiped-at-belur-math-and/article-145947"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/gyanesh-kumar1.png" alt=""></a><br /><p>कोलकाता। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने पश्चिम बंगाल के अपने तीन दिवसीय दौरे के दौरान मंगलवार को बेलूर मठ और दक्षिणेश्वर काली मंदिर का दौरा किया तथा पूजा-अर्चना की। मुख्य चुनाव आयुक्त सुबह करीब 7:15 बजे रामकृष्ण मठ और रामकृष्ण मिशन के मुख्यालय पहुंचे और मुख्य मंदिर में पूजा-अर्चना की। अपनी यात्रा के दौरान, उन्होंने रामकृष्ण संघ के अध्यक्ष स्वामी गौतमानंदजी महाराज से भी मुलाकात की और उनका आशीर्वाद लिया। मुख्य चुनाव आयुक्त ने मठ में करीब 45 मिनट बिताए।</p>
<p>ज्ञानेश कुमार ने बेलूर मठ से बाहर आने के बाद मीडिया के सामने राज्य में स्वतंत्र, निष्पक्ष और शांतिपूर्ण चुनाव कराने के आयोग के संकल्प को दोहराया। उन्होंने कहा, चुनाव आयोग यह सुनिश्चित करने के लिए दृढ़ संकल्पित है कि चुनाव के दौरान कोई अप्रिय घटना न हो। हम पश्चिम बंगाल में हिंसा मुक्त और शांतिपूर्ण चुनाव कराने के लिए प्रतिबद्ध हैं।</p>
<p>बेलूर मठ की अपनी यात्रा पूरी करने के बाद, मुख्य चुनाव आयुक्त पूजा करने के लिए प्रसिद्ध दक्षिणेश्वर काली मंदिर के लिए रवाना हुए। हालांकि, प्रदर्शनकारियों के एक समूह ने मंदिर परिसर के बाहर उन्हें काले झंडे दिखाए। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों ने वापस जाओ के नारे भी लगाए।</p>
<p>प्रदर्शनकारियों का कहना था कि विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची से कथित तौर पर कई नाम हटा दिए गए थे, जिससे मतदाताओं के एक वर्ग में नाराजगी थी। ज्ञानेश कुमार ने हालांकि विरोध प्रदर्शन पर कोई टिप्पणी नहीं की। मुख्य चुनाव आयुक्त ने सोमवार को कालीघाट काली मंदिर का भी दौरा किया था, जहां इसी तरह का विरोध प्रदर्शन हुआ था।</p>
<p>मुख्य चुनाव आयुक्त वर्तमान में चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी के साथ पश्चिम बंगाल के तीन दिवसीय दौरे पर हैं। आयोग की पूर्ण पीठ आगामी चुनावों की तैयारियों की समीक्षा के लिए राज्य में प्रशासनिक अधिकारियों, पुलिस अधिकारियों और राजनीतिक दलों के साथ बैठकें कर रही हैं।</p>
<p>मंगलवार के कार्यक्रम के तहत, ज्ञानेश कुमार मतदाता सूची प्रबंधन और जमीनी स्तर की चुनावी तैयारियों की समीक्षा के लिए राज्य के बूथ स्तर के अधिकारियों (बीएलओ) के साथ बैठक भी करने वाले हैं। चुनाव आयोग का यह दौरा पश्चिम बंगाल में चुनाव कार्यक्रम की घोषणा से पहले हो रहा है, जिसमें आयोग की पीठ चुनाव प्रक्रिया के सुचारू संचालन को सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न हितधारकों के साथ चर्चा कर रही है।</p>]]>
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                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 10 Mar 2026 12:53:50 +0530</pubDate>
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                <title>मतदाता सूची बदलाव को लेकर कोलकाता में टीएमसी और चुनाव आयोग में तीखी नोकझोंक, अपनी बात नहीं रखने का लगाया आरोप</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[कोलकाता में चुनाव आयोग और तृणमूल कांग्रेस के बीच 'विशेष गहन पुनरीक्षण' (SIR) पर टकराव बढ़ गया है। मंत्री चंद्रिमा भट्टाचार्य ने मुख्य चुनाव आयुक्त पर अमर्यादित व्यवहार का आरोप लगाया, वहीं फिरहाद हकीम ने इस प्रक्रिया को नागरिकों का उत्पीड़न बताया। TMC ने आरोप लगाया कि केंद्र के प्रभाव में आकर असली मतदाताओं के नाम काटे जा रहे हैं।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/heated-dispute-between-tmc-and-election-commission-in-kolkata-regarding/article-145867"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/sir.png" alt=""></a><br /><p>कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में सोमवार को चुनाव आयोग और राजनीतिक दलों के बीच हुई बैठक के दौरान मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर आयोग और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के बीच तीखी बहस हुई। बैठक के बाद तृणमूल प्रतिनिधिमंडल में शामिल सदस्यों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के बर्ताव पर गहरी नाराजगी जताई और आरोप लगाया कि उन्होंने उन्हें अपनी बात पूरी तरह से रखने की इजाजत नहीं दी। </p>
<p>तृणमूल की वरिष्ठ नेता एवं राज्य मंत्री चंद्रिमा भट्टाचार्य ने दावा किया कि उनसे चर्चा के दौरान अपनी आवाज ऊंची न करने के लिए कहा गया। उन्होंने कहा, मैं एक महिला हूँ और उन्होंने मुझसे कहा,'चिल्लाओ मत'। असल में उनके मन में महिलाओं के लिए कोई सम्मान नहीं है। इसीलिए महिलाओं के नाम भी मतदाता सूची से काटे जा रहे हैं। अगर मेरा नाम नहीं है, तो इसे साबित करना आपकी जिम्मेदारी है। मुझे कतार में क्यों खड़ा होना चाहिए? महिलाओं पर चिल्लाना आपका काम नहीं है। </p>
<p>तृणमूल के प्रतिनिधिमंडल के मुताबिक मुख्य चुनाव आयुक्त उनकी बातें सुनने को तैयार नहीं थे। उन्होंने आरोप लगाया, वह किसी की बात नहीं सुनना चाहते। वह खुद बोलते रहे और जब हमने बोलने की कोशिश की,तो उन्होंने अपनी आवाज ऊंची कर ली। ऐसा लगता है कि आयोग इसलिए नाराज है क्योंकि हमने उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाया।</p>
<p>आयोग के साथ ही बैठक में तृणमूल की ओर से फिरहाद हकीम, श्रीमती भट्टाचार्य और राज्यसभा उम्मीदवार राजीव कुमार शामिल थे। हकीम ने एसआईआर प्रक्रिया की आलोचना की और आयोग पर घुसपैठ के मुद्दे पर केंद्र सरकार की कहानी से प्रभावित होकर गलत तरीका अपनाने का आरोप लगाया। </p>
<p>हकीम ने कहा, केंद्र सरकार ने यह प्रभाव बनाया है कि यह राज्य रोहिंग्या और घुसपैठियों से भरा है,और आयोग ने अपनी नीति उसी हिसाब से बनाई है। लेकिन इस प्रक्रिया के दो महीनों में आपको इसका कोई सबूत नहीं मिला है। इसके बजाय भारतीय नागरिकों को परेशान किया गया है। इस प्रक्रिया से आम लोगों को काफी मुश्किल हुई है। सैकड़ों मौतें हुई हैं और बहुत सारे लोग बीमारियों की चपेट में आए। इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा? लोग अपना काम छोड़कर सिर्फ अपनी नागरिकता साबित करने के लिए लंबी लाइनों में खड़े हो रहे हैं। केंद्र सरकार की बात मानकर बनाई गई यह नीति बनायी गयी। है। </p>
<p>हकीम ने कहा कि पार्टी की सबसे बड़ी चिंता यह पक्का करना है कि असली वोटर अपने अधिकारों से वंचित न रहें। उन्होंने कहा, हमारा बस यही आग्रह है कि किसी भी भारतीय नागरिक को वंचित न किया जाए। एसआईआर प्रक्रिया को लेकर पार्टी के उच्चतम न्यायालय जाने के सवाल पर भट्टाचार्य ने इस कदम का बचाव किया। उन्होंने कहा, जब भी हमने एसआईआर का मुद्दा उठाया, तो उन्होंने कहा कि मामला उच्चतम न्यायालय में है। फिर हमें बैठक के लिए क्यों बुलाया? अगर आप हमें बुलाते हैं, तो आपको हमारी बात सुननी चाहिए। क्या हमारा उच्चतम न्यायालय जाना गलत था? हमने सही किया। लोगों की सुरक्षा हमारी जिम्मेदारी है।</p>
<p>इस दौरान जब उनसे पूछा गया कि तृणमूल चुनाव को कितने चरण में कराना चाहती है, तो उन्होंने इस पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया और कहा कि बैठक का मकसद मतदान के चरण की संख्या पर चर्चा करना नहीं था। हालांकि, हकीम ने इस मौके का इस्तेमाल केंद्र सरकार पर राजनीतिक हमला करने के लिए किया और कहा, केंद्र सरकार राज्य में अपनी जमीन खो चुकी है। वे मासूम लोगों को एसआईआर कतारों में खड़ा करके बंगाल को नुकसान पहुंचा रहे हैं। इस वजह से कई मौतें हुई हैं।</p>]]>
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                                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Mon, 09 Mar 2026 17:54:29 +0530</pubDate>
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                <title>कोलकाता के कालीघाट मंदिर पहुंचे मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार: प्रदर्शनकारियों ने दिखाए काले झंड़े, लगाए &quot;वोटर नहीं, तो वोट नहीं&quot; के नारे</title>
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                        <![CDATA[मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को कोलकाता के कालीघाट मंदिर में भारी विरोध का सामना करना पड़ा। प्रदर्शनकारियों ने मतदाता सूची से नाम हटाने का आरोप लगाते हुए उन्हें काले झंडे दिखाए। विरोध के बावजूद, उन्होंने पूजा की और बंगाल में स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव का संकल्प दोहराया। चुनाव आयोग की टीम राजनीतिक दलों के साथ समीक्षा बैठकें करेगी।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/chief-election-commissioner-gyanesh-kumar-reached-kolkatas-kalighat-temple-protestors/article-145777"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/gyanesh-kumar.png" alt=""></a><br /><p>कोलकाता। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को सोमवार सुबह कोलकाता के कालीघाट काली मंदिर के अपने दौरे के दौरान विरोध प्रदर्शनों का सामना करना पड़ा। जब ज्ञानेश कुमार मंदिर में पूजा करने पहुंचे तो प्रदर्शनकारियों का एक समूह मंदिर के बाहर जमा हो गया और वापिस जाओ के नारे लगाते हुए उन्हें काले झंडे दिखाए। यह विरोध प्रदर्शन कालीघाट इलाके में हुआ, जो पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से जुड़ा इलाका है।</p>
<p>ज्ञानेश कुमार, राज्य के मुख्य चुनाव आयुक्त मनोज कुमार अग्रवाल के साथ विरोध प्रदर्शनों के बीच मंदिर में चले गये। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया है कि मतदाता सूची की विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया के दौरान अनेक मतदाताओं के नाम मनमाने ढंग से मतदाता सूची से हटा दिए गए थे और उन्होंने इसे लेकर चुनाव आयोग के खिलाफ रोष व्यक्त किया। </p>
<p>नारेबाजी के बावजूद ज्ञानेश कुमार ने मंदिर का दौरा जारी रखा और बाद में उन्होंने पत्रकारों से थोड़ी देर बात की, लेकिन इन विरोध प्रदर्शनों पर कोई प्रतिक्रिया नहीं की। वहां से निकलने से पहले उन्होंने कहा, पश्चिम बंगाल के सभी भाइयों और बहनों को मेरा नमस्कार। माँ काली सभी पर कृपा करें।</p>
<p>चुनाव आयोग सूत्रों के मुताबिक, ज्ञानेश कुमार ने पश्चिम बंगाल के लोगों की भलाई के लिए मंदिर में प्रार्थना की और राज्य में स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चत करने के लिए आयोग के संकल्प को दोहराया। उन्होंने कहा कि आने वाले चुनाव बिना किसी डर के माहौल में कराए जाएंगे। गौरतलब है कि, चुनाव आयोग की पूरी पीठ रविवार रात तीन दिन के दौरे पर कोलकाता पहुंची। ज्ञानेश कुमार के अलावा, इस दल में चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी शामिल हैं।</p>
<p>आयोग का अलग-अलग राजनीतिक पार्टियों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक करने का कार्यक्रम है। इसके बाद आयोग चुनाव की तैयारियों की समीक्षा करने के लिए चीफ सेक्रेटरी और पुलिस महानिदेशक तथा राज्य के वरिष्ठ अधिकारियों से भी मिलेगा। ज्ञानेश कुमार अपने दौरे के दौरान बेलूर मठ भी जा सकते हैं। रविवार रात जब ज्ञानेश कुमार और उनकी टीम शहर पहुंची तो विरोध प्रदर्शन शुरू हो चुके थे। नेताजी सुभाष चंद्र बोस इंटरनेशनल एयरपोर्ट से न्यू टाउन में उनके होटल तक के रास्ते में प्रदर्शनकारियों ने काले झंडे दिखाए और वापस जाओ के नारे लगाए।</p>
<p>सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस और वाम पार्टियों के समर्थकों ने अलग-अलग विरोध प्रदर्शन किए, जिसमें वाम कार्यकर्ताओं ने वोटर नहीं, तो वोट नहीं जैसे नारे लगाए।</p>]]>
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                                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Mon, 09 Mar 2026 13:17:23 +0530</pubDate>
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                <title>पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव: अंतिम मतदाता सूची सामने आने से पहले हो सकती है चुनावी तारीखों की घोषणा, मतदाता सूची से 58 लाख से अधिक नाम कटे</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की घोषणा अंतिम मतदाता सूची से पहले भी संभव। उच्चतम न्यायालय के निर्देशों के अनुसार, 28 फरवरी के बाद चरणों में प्रकाशित सूचियां भी मान्य होंगी। बूथ पुनर्गठन की संभावना कम। राज्य में पुराने 80,681 मतदान केंद्रों के साथ ही चुनाव कराए जा सकते हैं।]]>
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                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/west-bengal-assembly-elections-election-dates-may-be-announced-before/article-144520"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/west-bengal-election.png" alt=""></a><br /><p>कोलकाता। चुनाव आयोग ने संकेत दिया है कि यदि उच्चतम न्यायालय के निर्देशों का पालन किया जाए तो पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों की तारीखों की घोषणा अंतिम और पूर्ण मतदाता सूची प्रकाशित होने से पहले भी की जा सकती है। आयोग के अनुसार, नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि तक प्रकाशित सभी मतदाता सूचियों को चुनाव संचालन के लिए मान्य माना जाएगा। आयोग ने स्पष्ट किया कि भले ही अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन चरणबद्ध तरीके से जारी रहे, चुनाव इन्हीं सूचियों के आधार पर कराए जा सकते हैं। </p>
<p>राज्य में अब तक मसौदा मतदाता सूची से 58 लाख से अधिक नाम हटाए जा चुके हैं। अंतिम सूची शुक्रवार को प्रकाशित होनी है, लेकिन अधिकारियों का कहना है कि हटाए गए नामों की तत्काल समेकित गणना संभव नहीं होगी। शीर्ष न्यायालय के आदेश के अनुसार आयोग को 28 फरवरी के बाद भी चरणों में मतदाता सूची प्रकाशित करने की अनुमति होगी और इन सभी सूचियों को अंतिम माना जाएगा। सभी सूचियों को मिलाकर ही कुल विलोपनों का आकलन किया जाएगा। </p>
<p>मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) कार्यालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, उच्चतम न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप हमें चुनाव कार्यक्रम की घोषणा के लिए अंतिम मतदाता सूची के प्रकाशन की प्रतीक्षा करने की आवश्यकता नहीं है। मतदाता सूची चरणों में प्रकाशित होगी और उसे अंतिम सूची में शामिल किया जाएगा। दोनों प्रक्रियाएं एक साथ चल सकती हैं।</p>
<p>मतदाता सूची के प्रकाशन में देरी के कारण नए मतदान केंद्रों के पुनर्गठन की योजना प्रभावित हुई है और इस चुनाव में नए बूथ स्थापित किए जाने की संभावना कम मानी जा रही है। इससे पहले आयोग ने घोषणा की थी कि जहां मतदाताओं की संख्या 1,200 से अधिक होगी, वहां नए बूथ बनाए जाएंगे। ऊंची इमारतों और अपार्टमेंट परिसरों के भीतर भी मतदान केंद्र स्थापित करने पर विचार किया गया था। आयोग ने पांच जिलों में कई अपार्टमेंट परिसरों की पहचान भी की थी, लेकिन वरिष्ठ अधिकारियों का मानना है कि मौजूदा गतिशील मतदाता सूची की स्थिति में बूथ पुनर्गठन संभव नहीं है।  </p>
<p>विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया शुरू होने से पहले मतदाता संख्या के आधार पर लगभग 14,000 अतिरिक्त बूथों की आवश्यकता जतायी गयी थी। मसौदा सूची से 58 लाख से अधिक नाम हटाए जाने के बाद आयोग ने संकेत दिया था कि बूथ पुनर्गठन पर पुनर्विचार किया जा सकता है। एसआईआर प्रक्रिया अभी पूरी न होने के कारण फिलहाल पुराने बूथ विन्यास को ही बनाए रखने का निर्णय लिया गया है। </p>
<p>अधिकारी ने कहा, हम बहुमंजिला आवास परिसरों में 60-70 अतिरिक्त बूथ स्थापित करने का अंतिम प्रयास कर रहे हैं। सब कुछ राज्य में एसआईआर प्रक्रिया पर निर्भर करेगा। वर्तमान में पश्चिम बंगाल में कुल मतदान केंद्रों की संख्या 80,681 ही रहेगी। न्यायमूर्ति सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली उच्चतम न्यायालय की पीठ ने मंगलवार को कहा कि अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित करने की अंतिम तिथि 28 फरवरी होगी। पीठ ने यह भी अनुमति दी कि यदि तार्किक विसंगतियां या अनमैप्ड श्रेणी के मामलों का सत्यापन उस तिथि तक पूरा नहीं होता है, तो आयोग चरणों में सूची प्रकाशित करता रह सकता है। </p>]]>
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                                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Wed, 25 Feb 2026 13:24:03 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Jaipur NM]]>
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                <title>सीएम ममता ने लगाया एसआईआर प्रक्रिया में 10 लाख से ज्यादा मतदाताओं के नाम कम होने का आरोप, 28 फरवरी को प्रकाशित होगी अंतिम सूची</title>
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                        <![CDATA[पश्चिम बंगाल में विशेष पुनरीक्षण के दौरान 4 लाख से अधिक दस्तावेज अपात्र पाए गए हैं। सुनवाई में अनुपस्थित 7 लाख लोगों सहित कुल 10 लाख नाम मतदाता सूची से हटाए जा सकते हैं।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/cm-mamata-alleges-that-names-of-more-than-10-lakh/article-143987"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/bengal-sir.png" alt=""></a><br /><p>कोलकाता। पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान चार लाख से ज्यादा मतदाताओं के दस्तावेजों को अपात्र बताने से अंतिम सूची में 10 लाख से ज्यादा नाम के कम होने की संभावना है। सूत्रों ने यह जानकारी दी है। भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) द्वारा नियुक्त पर्यवेक्षक ने 444970 मतदाताओं द्वारा जमा किये गये दस्तावेजों को अपात्र के तौर पर चिह्नित किया है। आगे की कार्रवाई के लिए जानकारी आयोग को भेज दी गयी हैं। इसके अलावा, 466323 मतदाताओं द्वारा जमा किये गये दस्तावेज जिला मजिस्ट्रेट के पास सत्यापन के लिए लंबित हैं।</p>
<p>इससे पहले, पुनरीक्षण प्रक्रिया के तहत हुई सुनवाई में लगभग सात लाख मतदाता शामिल नहीं हुए थे। जिन लोगों के दस्तावेज अपात्र घोषित किये गये हैं, उन्हें मिलाकर 10 लाख से ज्यादा मतदाता अंतिम सूची से हटाये जा सकते हैं। आयोग ने पहले करीब 58 लाख मतदाताओं की पहचान की थी, जिनका देहांत हो चुका है, मौजूद नहीं हैं, या लापता हैं, जिसकी वजह से उन्हें मसौदा सूची से बाहर कर दिया गया था। सुनवाई के दौरान और 10 लाख मतदाताओं की पहचान की गयी। इनमें से करीब सात लाख मतदाता सुनवायी में शामिल नहीं हुए, जबकि बाकी मामले अयोग्य पाये गये दस्तावेजों से जुड़े हैं। </p>
<p>आयोग ने उच्चतम न्यायालय के निर्देशों के बाद कहा है कि पश्चिम बंगाल के लिए अंतिम मतदाता सूची 28 फरवरी को प्रकाशित की जाएगी। हालांकि, अधिकारियों ने कहा कि अभी काफी काम बाकी है। दस्तावेज सत्यापन की समय सीमा 21 फरवरी है, और अगर तब तक प्रक्रिया पूरी नहीं हुई, तो अंतिम सूची के प्रकाशन में देरी हो सकती है। मुख्य चुनाव अधिकारी कार्यालय के सूत्रों ने कहा कि यदि लंबित मामलों का निपटारा समय पर पूरा नहीं हुआ, तो आयोग विस्तार की मांग कर सकता है। सुनवाई के दौरान मतदाताओं ने कई दस्तावेज जमा किये, जिनकी पर्यवेक्षक जांच कर रहे हैं।</p>
<p>आयोग के सूत्रों के मुताबिक, पर्यवेक्षक ने करीब 30 लाख मतदाताओं के दस्तावेजों को दोबारा सत्यापन के लिए मतदाता पंजीकरण अधिकारी  (ईआरओ) और सहायक मतदाता पंजीकरण अधिकारी (एईआरओ) को वापस भेज दिया है। करीब 20 लाख मतदाताओं के दस्तावेज अभी भी लंबित पड़े हैं, जिन पर अभी तक कोई अंतिम फ़ैसला नहीं हुआ है। </p>
<p>आयोग ने पहले एसआईआर प्रक्रिया के लिए मंजूर किये जाने वाले 13 दस्तावेजों की एक सूची प्रकाशित की थी और कहा था कि सूची के बाहर के दस्तावेज मंजूर नहीं किये जाएंगे, इसे बाद में उच्चतम न्यायालय ने भी मंजूरी दी। सूत्रों ने हालांकि कहा कि कुछ मामलों में भ्रम हुआ, जहां सूची में शामिल नहीं किये गये दस्तावेज जमा किये गये और अधिकारियों ने कथित तौर पर उन्हें मंजूर कर लिया। सूत्रों ने बताया कि संबंधित लोगों से स्पष्टीकरण मांगा जा सकता है। अधिकारियों के साथ आगे बातचीत के बाद इन मामलों के सुलझने की उम्मीद है। </p>]]>
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                                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Fri, 20 Feb 2026 18:45:52 +0530</pubDate>
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                <title>बंगाल वोटर लिस्ट विवाद: सुप्रीम कोर्ट ने बंगाल SIR को ज्यूडिशियल निगरानी में रखा, माइक्रो-ऑब्जर्वर पर भी आपत्ति जताई</title>
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                        <![CDATA[ममता बनर्जी सरकार ने आयोग को पर्याप्त संख्या में ग्रुप-B अधिकारी उपलब्ध कराए हैं। सरकार ने चुनाव आयोग द्वारा नियुक्त माइक्रो-ऑब्जर्वर पर भी आपत्ति जताई थी।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/bengal-voter-list-controversy-supreme-court-puts-bengal-sir-under/article-143962"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/sc.png" alt=""></a><br /><p>पश्चिम बंगाल। एसआईआर को लेकर पूरे देश में विवाद खड़ा हुआ है जिसको लेकर अलग अलग जगहों पर अलग अलग पार्टियों ने मिलकर विरोध प्रदर्शन किया। इसी बीच पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर जारी गतिरोध पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए शुक्रवार 20 फरवरी को मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली की पीठ ने निर्देश देते हुए कहा कि इस प्रक्रिया की निगरानी के लिए कलकत्ता हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश मौजूदा या सेवानिवृत्त अतिरिक्त जिला न्यायाधीशों (ADJs) को नियुक्त करें।</p>
<p><strong>संवैधानिक संस्थाओं के बीच 'भरोसे की कमी'</strong></p>
<p>अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा, राज्य सरकार और भारत निर्वाचन आयोग के बीच "दुर्भाग्यपूर्ण आरोप-प्रत्यारोप" और भरोसे की भारी कमी के कारण उसके पास न्यायिक हस्तक्षेप के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा था। यह विवाद मुख्य रूप से इस बात पर था कि क्या ममता बनर्जी सरकार ने आयोग को पर्याप्त संख्या में ग्रुप-B अधिकारी उपलब्ध कराए हैं। सरकार ने चुनाव आयोग द्वारा नियुक्त माइक्रो-ऑब्जर्वर पर भी आपत्ति जताई थी।</p>
<p><strong>निष्पक्षता के लिए न्यायिक हस्तक्षेप</strong></p>
<p>इसके आगे सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट करते हुए कहा, मतदाता सूची में नाम जोड़ने या हटाने के दावों पर निष्पक्ष निर्णय सुनिश्चित करने के लिए न्यायिक अधिकारी Logical Error की श्रेणी में लंबित मामलों का निपटारा करेंगे। पीठ ने कलकत्ता हाई कोर्ट के सीजे से अनुरोध किया कि वे ईमानदार अधिकारियों का चयन करें, जिन्हें राज्य सरकार और माइक्रो-ऑब्जर्वर सहयोग देंगे। साथ ही, जिला कलेक्टर और पुलिस अधीक्षकों को इन टीमों को पूर्ण लॉजिस्टिक सहायता प्रदान करने का आदेश दिया गया है।</p>
<p><strong>समयसीमा और सुरक्षा</strong></p>
<p>अदालत ने निर्वाचन आयोग को 28 फरवरी तक अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित करने की अनुमति दी है, जबकि शेष दावों के लिए सप्लीमेंट्री लिस्ट बाद में जारी की जा सकती है। इसके अलावा, राज्य के डीजीपी को उन शिकायतों पर हलफनामा दाखिल करने को कहा गया है जिनमें पुनरीक्षण अधिकारियों को धमकियां मिलने की बात कही गई थी। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पहले कोर्ट में पेश होकर आरोप लगाया था कि चुनाव से पहले राज्य को निशाना बनाया जा रहा है।</p>]]>
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                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 20 Feb 2026 16:56:04 +0530</pubDate>
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                <title>आगामी विधानसभा चुनावों से पहले चुनाव आयोग ने की असम में प्रमुख राजनीतिक दलों के साथ बैठक, इन मुद्दों पर हुई चर्चा</title>
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                        <![CDATA[मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के नेतृत्व में निर्वाचन आयोग ने गुवाहाटी में राजनीतिक दलों के साथ बैठक की। दलों ने बिहू उत्सव को देखते हुए एक या दो चरणों में मतदान कराने का सुझाव दिया है।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/before-the-upcoming-assembly-elections-the-election-commission-held-a/article-143526"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/ec.png" alt=""></a><br /><p>गुवाहाटी। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के नेतृत्व में निर्वाचन आयोग की पूर्ण पीठ ने असम में आगामी चुनावों की तैयारियों की समीक्षा के लिए मंगलवार को गुवाहाटी में मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय और राज्य राजनीतिक दलों के साथ बैठकें आयोजित की। इस बैठक में असम के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) और आयोग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हुए।</p>
<p>चर्चा में चार मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय दलों आम आदमी पार्टी, भारतीय जनता पार्टी, माक्र्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी और कांग्रेस के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। मान्यता प्राप्त राज्य दलों में ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट, असम गण परिषद, बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट और यूनाइटेड पीपुल्स पार्टी लिबरल के नेता मौजूद थे।आयोग की ओर से जारी एक विज्ञप्ति के अनुसार, अधिकांश राजनीतिक दलों ने आयोग से आग्रह किया कि सुचारू संचालन सुनिश्चित करने और लंबे समय तक चलने वाले प्रचार को कम करने के लिए चुनाव एक ही चरण में या अधिकतम दो चरणों में कराये जायें।</p>
<p>आयोग ने विज्ञप्ति में कहा, ज्यादातर दलों का मानना था कि प्रशासनिक सुविधा और मतदाता भागीदारी के लिहाज से एक चरण का चुनाव, या अधिकतम दो चरण बेहतर होंगे। बैठक के दौरान उठायी गयी एक और प्रमुख मांग यह थी कि चुनाव कार्यक्रम में असम के सबसे महत्वपूर्ण सांस्कृतिक उत्सवों में से एक बिहू उत्सव का भी ध्यान रखा जाना चाहिए।</p>
<p>विज्ञप्ति में कहा गया है, राजनीतिक दलों ने अनुरोध किया कि चुनाव की तारीखों की घोषणा बिहू उत्सव को ध्यान में रखते हुए की जाए ताकि मतदाता लोकतांत्रिक प्रक्रिया और पारंपरिक उत्सवों, दोनों में पूरी तरह से भाग ले सकें। दलों ने राज्य में हाल ही में किए गए मतदाता सूची के विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (एसआईआर) की सराहना की और इसे मतदाता सूचियों की सटीकता और समावेशिता सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।</p>
<p>आयोग के अधिकारियों ने उल्लेख किया कि चुनाव के शांतिपूर्ण और सुचारू संचालन को सुनिश्चित करने के लिए भी सुझाव दिए गए, जिसमें जिला अधिकारियों और राजनीतिक प्रतिनिधियों के बीच बेहतर समन्वय शामिल है। बातचीत के दौरान, आयोग ने कानून के अनुसार स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव कराने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। आयोग ने कहा, आयोग राजनीतिक दलों द्वारा दिए गए रचनात्मक सुझावों को महत्व देता है और चुनाव कार्यक्रम तथा व्यवस्थाओं को अंतिम रूप देते समय उन पर सावधानीपूर्वक विचार करेगा। गौरतलब है कि असम में विधानसभा चुनाव मार्च-अप्रैल के आसपास होने वाले हैं।</p>]]>
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                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 17 Feb 2026 15:07:47 +0530</pubDate>
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