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                <title>cancer disease treatment - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>cancer disease treatment RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>सीएआर टी-सेल थेरेपी बनी कैंसर मरीजों के लिए वरदान</title>
                                    <description><![CDATA[भारत में हर साल ब्लड, लंग, प्रोस्टेट, ब्रेस्ट और सर्वाइकल कैंसर के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/car-t-cell-therapy-became-a-boon-for-cancer-patients/article-104884"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-02/pze-(12)2.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। कैंसर एक गंभीर बीमारी है। भारत में हर साल ब्लड, लंग, प्रोस्टेट, ब्रेस्ट और सर्वाइकल कैंसर के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। कैंसर उपचार में कई नई तकनीकों का विकास हुआ है। भारत की पहली जीन आधारित सीएआर टी-सेल थेरेपी ब्लड, लिंफोमा कैंसर मरीजों में उम्मीद की एक नई किरण बनकर उभरी है। यह तकनीक न केवल प्रभावी है बल्कि इसे किफायती और सुलभ भी बनाया गया है। </p>
<p>मानसरोवर स्थित एचसीजी कैंसर सेंटर जयपुर में डायरेक्टर ऑन्कोलॉजी डॉ. नरेश सोमानी और डॉ. अभिषेक चारण मेडिकल ऑन्कोलॉजिस्ट ने बताया कि सीएआर टी-सेल थेरेपी से अस्पताल में एक मरीज को जीवन दान मिला है। उन्होंने बताया कि मरीज की आयु 63 साल है। बीते सालों से बी सेल लिंफोमा से ग्रसित था। उसने अपना इलाज बाहर से लिया लेकिन छह माह के पश्चात ही उसे फिर से बीमारी ने घेर लिया। उसके बाद वह यहां आया और यहां सीएआर टी-सेल थेरेपी से मरीज का इलाज किया गया। पूर्ण इलाज के बाद जब मरीज की एक बार फिर पेट सिटी की जांच की गई तो पेट सिटी के मुताबिक पेशेंट पूरी तरह से स्वस्थ है और अपनी सामान्य जीवन जी रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 20 Feb 2025 11:17:00 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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                <title>एसएमएस अस्पताल में पहली बार एसबीआरटी तकनीक से किया कैंसर पीड़िता का इलाज</title>
                                    <description><![CDATA[एसएमएस मेडिकल कॉलेज के प्रिंसीपल डॉ. राजीव बगरहट्टा ने बताया कि अमूमन इस तकनीक से इलाज करवाने में किसी भी प्राइवेट हॉस्पिटल में दो लाख रुपए या उससे ज्यादा की रकम खर्च होती है, लेकिन एसएमएस में ये बिल्कुल निशुल्क किया गया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/cancer-victim-treated-with-sbrt-technique-for-the-first-time-in-sms-hospital/article-18192"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-08/untitled-1-copy26.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान में पहली बार सवाई मानसिंह अस्पताल में स्टीरियोटैक्टिक बॉडी रेडियोथैरेपी (एसबीआरटी) से कैंसर का सफल इलाज किया गया है। इलाज में न तो मरीज का ऑपरेशन किया और न ही कीमोथैरेपी दी गई। मरीज को महज पांच दिन में इलाज के बाद छुट्टी दे दी गई। इस इलाज के लिए मरीज को न तो भर्ती होना पड़ा और न ही उसका कोई पैसा लगा। एसएमएस मेडिकल कॉलेज के प्रिंसीपल डॉ. राजीव बगरहट्टा ने बताया कि अमूमन इस तकनीक से इलाज करवाने में किसी भी प्राइवेट हॉस्पिटल में दो लाख रुपए या उससे ज्यादा की रकम खर्च होती है, लेकिन एसएमएस में ये बिल्कुल निशुल्क किया गया है। सफल इलाज के बाद अब आगे दूसरे मरीजों के लिए रास्ते खुल गए हैं, जिनके लिवर, लंग्स, प्रोस्टेट या स्पाइन में ट्यूमर कैंसर हो और वह पहली या दूसरी स्टेज तक हमारे पास आता है। उन्होंने बताया कि इलाज करने वाली टीम में डॉ. आरएस गोठवाल, डॉ. मीतू जैन, डॉ. मुकेश सांकरिया, डॉ. दीपेश, डॉ. नरेश, डॉ. हर्षा सहित अन्य सदस्य शामिल रहे।</p>
<p><strong>इलाज से पहले मरीज को  दी 15 दिन की ट्रेनिंग<br /></strong><br />एसएमएस मेडिकल कॉलेज के रेडियो थैरेपी डिपार्टमेंट के सीनियर प्रोफेसर और यूनिट हैड डॉ. संदीप जैन ने बताया कि अजमेर निवासी 48 वर्षीय चम्पा देवी को साल 2016 में ब्रेस्ट कैंसर डिटेक्ट हुआ था। उसके बाद महिला ने किसी निजी हॉस्पिटल में इलाज करवाया और कीमोथैरेपी ली। इलाज के बाद महिला का ब्रेस्ट कैंसर तो ठीक हो गया लेकिन बाद में लंग्स में एक ट्यूमर बन गया। हमारे पास जब महिला आई तो वह दूसरी और तीसरी स्टेज के बीच थी। इसके बाद हमने महिला को सर्जरी और रेडियो थैरेपी का आॅप्शन दिया। महिला के परिजनों ने रेडियो थैरेपी करवाने का निर्णय लिया। इस थैरेपी को करने से पहले महिला को 15 दिन की ब्रीथ कंट्रोल यानी सांस रोकने की ट्रेनिंग दी, जिसे एक्टिव ब्रिथिंग कंट्रोल कहते हैं, ताकि रेडिएशन डोज देने के दौरान मरीज का शरीर बिल्कुल स्थिर रहे उसमें हल्का भी मूवमेंट न हो।<br /><br /><strong>एडवांस तरीके से दी गई रेडिएशन<br /></strong><br />डॉ. जैन ने बताया कि एसबीआरटी तकनीक से लीनियर मशीन के जरिए एडवांस तरीके से रेडिएशन की हाईडोज दी गई। महज पांच सीटिंग के दौरान मरीज को दी गई इस डोज से उसके ट्यूमर को 95 फीसदी तक ठीक कर दिया, जो कि सर्जरी करने के बाद भी इतना ही ठीक होता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 07 Aug 2022 16:57:15 +0530</pubDate>
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                <title>भारत में लंग कैंसर के होते है 7 प्रतिशत मामले, समय रहते किया जा सकता है इलाज </title>
                                    <description><![CDATA[हुक्का और ई-सिगरेट के बढ़ते स्मोकिंग कल्चर के कारण अब लंग कैंसर के मरीज सामने आ रहे है। बीमारी का समय रहते इलाज किया जा सकता है, जिसके रेगुलर स्क्रीनिंग जरूरी है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/health/7-percent-case-of-cancer-in-india/article-17172"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-08/q-1-copy.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। दुनिया में लंग कैंसर सबसे आम कैंसरों में से एक है। भारत में कुल कैंसर मामलों में से करीब 7 प्रतिशत मामले लंग कैंसर के होते है। हुक्का और ई-सिगरेट के बढ़ते स्मोकिंग कल्चर के कारण अब लंग कैंसर के मरीज सामने आ रहे है। बीमारी का समय रहते ईलाज किया जा सकता है, जिसके रेगुलर स्क्रीनिंग जरूरी है। इसके साथ ही उपचार में हुई प्रगति से अब गंभीर स्टेज के मरीजों में भी कारगर परिणाम देखे जा सकते है। डॉ. शुभांशु ने बताया कि लंग कैंसर में स्क्रीनिंग की अहम भूमिका रहती है। ऐसे लोग जो नियमित रूप से धूम्रपान करते है।</p>
<p>अत्यधिक प्रदूषित वातावरण में रहते है। परिवार में कैंसर की हिस्ट्री है या लंग्स से जुड़ी कोई पुरानी बीमारी टीबी रही हो, उनमें लंग कैंसर होने की संभावना अधिक होती है। लंग कैंसर के जल्द निदान के लिए लो डेंसिटी सीटी-स्कैन एक प्रभावी जांच है, जो रेगुलर कम रेडिएशन एक्सपोजर के साथ बीमारी के होने का पता लगाती है। साल में एक बार और स्मोकर्स में हर 6 महीने में जांच करने से कैंसर का पता लगाया जा सकता है और समय रहते इलाज किया जा सकता है। कैंसर सर्जन डॉ. अभिषेक पारीक ने कहा कि वर्तमान में लंग कैंसर के इलाज में हुई तरक्की में एनजीएस (नेक्स्ट-जनरेशन सिक्वेंसिंग) बहुत कारगर सिद्ध हो रही है। इस नई इलाज प्रणाली में हम मरीज के ट्यूमर में हुए म्यूटेशन की जांच कर एक कस्टमाइज्ड इलाज और डोज मरीज को दी जाती है, जिससे उपचार और भी कारगर हो जाता है।<br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 01 Aug 2022 12:54:05 +0530</pubDate>
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