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                <title>dilapidated building - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>जर्जर भवन ढ़ह रहे, जिम्मेदार अधिकारी मौन</title>
                                    <description><![CDATA[ठोस कार्रवाई नहीं होने से इस तरह के हादसे हो रहे हैं।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/dilapidated-buildings-collapsing--responsible-officials-remain-silent/article-152863"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/1111200-x-600-px)-(4)9.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर में बहुमंजिला बिल्डि़ंगों के गिरने का मंगलवार को तीन माह में दूसरा बड़ा हादसा हुआ है। इन हादसों के बाद भी सबक नहीं लेते हुए जिम्मेदार अधिकारी पुराने व जर्जर भवनों पर कोई कार्रवाई नहीं कर रहे हैं। जवाहर नगर थाना क्षेत्र स्थित इंद्र विहार में तीन माह पहले 7 फरवरी को एक नॉनवेज रेस्टोरेंट की बिल्डिंग धराशाही हो गई थी। इसका कारण उस बिल्डिंग के पास अन्य बिल्डिंग में चल रहा निर्माण कार्य बताया गया था। जिससे इस रेस्टोरेंट की बिल्डिंग में दबने से दो लोगों की मौत हो गई थी। वहीं एक महिला का पैर काटना पड़ा था। उस हादसे के बाद कुछ समय तक तो नगर निगम व केडीए प्रशासन हरकत में आया और अवैध निर्माण को नोटिस दिए। जर्जर मकानों व भवनों का सर्वे कर उन्हें मकान मालिक द्वारा या तो स्वयं गिराने या निगम के स्तर पर गिरवाकर खर्चा मकान मालिकों से लेने का आदेश जारी किया गया। लेकिन उस हादसे के कुछ समय बाद सभी जिम्मेदार विभागों ने आगे कोई कार्रवाई नहीं की।इसी का नतीजा है कि मंगलवार को एक बार फिर से तीन मंजिला पुराने मकान के गिरने का हादसा हो गया। इस मकान में गनीमत रही कि वर्तमान में कोई नहीं रह रहा था। वरना पड़ा हादसा हो सकता था।</p>
<p><strong>भीड़भाड़ वाला इलाका</strong><br />प्रत्यक्ष दर्शियों ने बताया कि घौंसी मौहल्ले में जिस जगह यह मकान गिरा वह काफी भीड़भाड़ वाला क्षेत्र है। हालांकि गली संकरी होने से वहां लोगों के निकलने के बाद यदि किसी पर मकान का मलबा गिरता तो भी कई लोगों की जान जा सकती थी। मकान गिरते ही मौके पर लोगों की भीड़ जमा हो गई। हालांकि मौके पर पहुंचे पुलिस अधिकारियों ने मलबे व मकान के आस-पास किसी को भी जाने से रोक दिया। जिससे किसी को कोई चोट नहीं लगे। उसके बाद भी लोग रात तक वहीं डटे रहे।</p>
<p><strong>सामने मकान से बनाया लाइव वीडियो</strong><br />जिस समय यह मकान गिरा उस समय उसके सामने वाले मकान से एक बच्चे द्वारा उसका वीडियो बनाया जा रहा था। हादसे के बाद तेजी से वायरल हुए मकान गिरने के उस लाइव वीडियो में आवाज भी सुनाई दे रही है कि मैं वीडियो बना रहा हूं। साथ ही लोगों के चिल्लाने की आवाजें भी आ रही है। वहीं मकान में पहले छज्जा गिरने और उसके कुछ ही सैकंड में पूरा मकान ताश के पत्तों की तरह धराशाही होता दिख रहा है। हादसे में कई वाहन व सामान दबे हैं। वहीं आस-पास धार्मिक स्थान व अन्य मकानों को भी नुकसान पहुंचा है।</p>
<p><strong>मकान गिरते ही मचा हाहाकार</strong><br />जैसे ही मकान गिरा वहां लोगों की भीड़ जमा हो गई। सभी को लगा कि मकान के मलबे में कोई दबा है। ऐसे में आस-पास हाहाकार मच गया। लोग चिल्लाने लगे कि कोई दबा तो नहीं। काफी देर तक लोगों में व प्रशासन में भी आशंका बनी रही। लेकिन जांच के बाद निगम व पुलिस अधिकारियों ने इसकी पुष्टि की कि मलबे में फिलहाल किसी के दबे होने की कोई जानकारी नहीं है। मकान में काम कर रहे महिला पुरुष श्रमिक व उनका एक बच्चा हादसे से पहले वहां से दूर हट गए थे।</p>
<p><strong>मकान को लेकर विवाद ही स्थिति बनी</strong><br />तीन मंजिला इस पुराने मकान के गिरने के बाद इसे लेकर मौके पर विवाद की स्थिति भी बनी। मौके पर एक मंगलमुखी  पहुंची और उन्होंने दावा किया कि यह मकान उनकी गुरु रेखा का है। उन्होंने इस मकान की चाबी उन्हें दी थी। लेकिन वह हरिद्वार गई हुई थी। इस कारण से मकान की चाबी आयशा अंसारी को दे गई थी। जबकि किसी ने बताया कि यह मकान आयशा अंसारी का है। मंगलमुखी ने बताया कि वे हरिद्वार से आई तो उन्हें मकान गिरा हुआ मिला है। उनकी जानकारी के बिना ही मकान की मरम्मत का काम कराया जा रहा था। इस मकान को लेकर मौके पर विवाद की स्थिति भी देखने को मिली। जिसे मौके पर मौजूद पुलिस अधिकारियों ने समझाइश से शांत कराया। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मकान के टाइगर की जांच की जाएगी। फिलहाल प्राथमिकता मलबा हटाने व लोगों को सुरक्षित करना है।</p>
<p><strong>अभी भी चिढ़ा रहे हैं पुराने व जर्जर मकान</strong><br />शहर में अभी भी बड़ी संख्या में पुराने व जर्जर मकान जैसे के तैसे खड़े हुए हैं। यह प्रशासन को चिढ़ा रहे हैं। प्रशासन द्वारा पुराने शहर के सूरजपोल से मोखापाड़ा, कैथूनीपोल से लालबुर्ज तक और नयापुरा व स्टेशन समेत कई जगह पर पुराने व जर्जर मकानों का सर्वे कराया गया है। उनके खिलाफ कार्रवाई के दावे भी किए गए लेकिन अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। जिससे इस तरह के हादसे हो रहे हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 06 May 2026 14:20:31 +0530</pubDate>
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                <title>बच्चों का भविष्य अंधकार में, कैसे होगी पढ़ाई !</title>
                                    <description><![CDATA[अभिभावक निजी विद्यालयों में बच्चों को भेजने को मजबूर हो रहे हैं।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jhalawar/the-future-of-children-is-in-the-dark--how-will-they-study/article-123465"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-08/1ne1ws40.png" alt=""></a><br /><p>मनोहरथाना। मनोहरथाना क्षेत्र के राजकीय प्राथमिक विद्यालय आफूखेड़ी में अव्यवस्थाओं का आलम है। बता दे कि सत्र जुलाई 2024 - 25 से  आफूखेड़ी विद्यालय पंचायत शिक्षकों के भरोसे चल रहा है, हैरानी की बात तो यह है कि विद्यालय में तैनात अध्यापक मनोहर सिंह भील 13 साल से दूसरे विद्यालय में डेपुटेशन पर लगे हुए हैं और वो 13 साल से आफूखेड़ी विद्यालय में आए तक नहीं। जबकि आफूखेड़ी विद्यालय का पूर्ण चार्ज मनोहरसिंह भील को दे रखा है, वही पंचायत शिक्षकों के पास आफूखेड़ी विद्यालय का आधिकारिक रूप से कोई विद्यालय चार्ज नहीं है। जिससे आफूखेड़ी में लगातार बच्चों के नामांकन भी कम होते जा रहे है। अभिभावक निजी विद्यालयों में बच्चों को भेजने को मजबूर हो रहे हैं। वहीं अभिभावक भी टीसी सहित अन्य कार्य के लिए चक्कर काटने को मजबूर हो रहे हैं। </p>
<p><strong>आफूखेड़ी विद्यालय में तैनात पंचायत शिक्षकों के पास नहीं है कोई कार्यभार</strong><br />जब सत्र शुरू हुआ तो शिक्षा विभाग के नियमों को ताक पर रखकर आफूखेड़ी विद्यालय में पंचायत शिक्षकों को लगा दिया। वहीं पंचायत शिक्षकों के पास आफूखेड़ी विद्यालय का कोई चार्ज नहीं दिया। वैसे तो शिक्षा विभाग लगातार बच्चों के नामांकन के लिए निरंतर प्रयास कर रहा है, लेकिन शिक्षा विभाग की उदासीनता के कारण विद्यालय का चार्ज किसी और के पास होने के कारण आफूखेड़ी विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चों के नामांकन 5 अगस्त 2025 तक नहीं बढे, जबकि आफूखेड़ी विद्यालय में बच्चों के नामांकन अभिभावकों ने लिखवा दिया। पंचायत शिक्षकों का कहना है कि हमारे पास नामांकन आते ही हमने आवेदन भिजवा दिए, लेकिन समय पर बच्चों के नामांकन नहीं किए। आफूखेड़ी विद्यालय में पंचायत शिक्षकों को लगाने के बाद बांसखेड़ा पीईईओ द्वारा पीईईओ के अधीनस्थ विद्यालय से दूसरे अध्यापक की व्यवस्था कर आफूखेड़ी विद्यालय में दूसरे अध्यापक का डेपुटेशन का आदेश जारी किया था, जिससे आफूखेड़ी विद्यालय की व्यवस्था सुचारू रूप से चल सके। मामले के अनुसार आफूखेड़ी विद्यालय में तैनात अध्यापक अनिल कुमार मेवाड़ा को ब्लॉक के पीईईओ बड़बद में डेपुटेशन कर दिया गया था और उनके स्थान पर जुलाई 2024 को आफूखेड़ी विद्यालय पंचायत शिक्षकों के भरोसे कर दिया। लेकिन उस समय भी पंचायत शिक्षकों के पास विद्यालय का कोई चार्ज नहीं था और संपूर्ण चार्ज अनिल कुमार मेवाड़ा के पास रहा हालांकि फरवरी 2025 में अनिल कुमार मेवाड़ा सेवानिवृत हो गए और उनके बाद आफूखेड़ी विद्यालय का चार्ज 13 साल से दूसरे विद्यालय में डेपुटेशन पर कार्यरत अध्यापक मनोहर सिंह भील को विभाग के अधिकारियों ने चार्ज सौंप दिया। </p>
<p><strong>आदेश के बाद भी नहीं गिरा जर्जर भवन</strong><br />आफूखेड़ी विद्यालय जर्जर भवन होने के कारण जमीदोज करने के आदेश दिए गए थे लेकिन कोई चार्ज किसी के पास नहीं होेने के कारण जमीदोज नहीं किया जा सका, क्योंकि यहां सिर्फ पंचायत शिक्षकों को लगा रखा है, और उनके पास कोई चार्ज नहीं है।  </p>
<p><strong>एसएमसी के सदस्य पहुंचे सीबीईओ कार्यालय</strong><br />आफूखेड़ी  विद्यालय की समस्या को लेकर एसएमसी के सदस्य मंगलवार को ब्लॉक शिक्षा अधिकारी के पास पहुंचे। वहां उन्होंने ब्लॉक शिक्षा अधिकारी को विद्यालय की समस्या बताई समस्या में उन्होंने कहा है कि आफूखेड़ी विद्यालय से पंचायत शिक्षकों को हटाकर उनकी जगह दूसरे अध्यापक की नियुक्ति की जाए और मनोहर सिंह भील के पास जो चार्ज है वो नए अध्यापक को दिया जाए। </p>
<p>आफूखेड़ी विद्यालय के एसएमसी के सदस्य मेरे पास आए थे उन्होंने विद्यालय की समस्या बताई पीईईओ से बात करके जल्दी विद्यालय की समस्या का समाधान कर दिया जाएगा।  <br /><strong>- राजेंद्र कुमार मेहरा  कार्यवाहक ब्लॉक शिक्षा अधिकारी मनोहरथाना</strong></p>
<p>एक साल से टीसी के लिए परेशान हो रहा हूं। जिससे मेरे बच्चों का विद्यालय में नामांकन नहीं हो पा रहा है। आफूखेड़ी विद्यालय में आते हैं यहां मौजूद अध्यापक कहते हैं कि हमारे पास चार्ज नहीं है, चार्ज किसी और के पास है। <br /><strong>- अल्ताफ खान ग्रामीण आफूखेड़ी</strong></p>
<p>एसएमसी की मीटिंग की थी, जिसमें कोई अधिकारी नहीं नहीं आया। बच्चों के नए नामांकन भी करवाने आते हैं तो वो भी समय पर नहीं हो रहे हैं।  <br /><strong>- फिरोज खान, ग्रामीण आफूखेडी</strong></p>
<p>विद्यालय का चार्ज किसी और के पास है, जिससे बच्चों के नामांकन भी समय पर नहीं हो रहे हैं और टीसी के लिए फोन करते हैं कोई जवाब नहीं मिलता। हमारी मांग है कि पंचायत शिक्षकों को हटाकर नया शिक्षक लगाया जाए। <br /><strong>- इकलाक खान एसएमसी अध्यक्ष आफूखेडी</strong></p>
<p>हमें सत्र 2024-25 से शिक्षण कार्य के लगा रखा है हमारे पास कोई विद्यालय का चार्ज नहीं है। ग्रामीणों द्वारा नए 4- 5 बच्चों को दस्तावेज ले लिए थे, हमारे द्वारा आफूखेडी विद्यालय के संस्था प्रधान के पास दस्तावेज भेज दिए थे उन्होंने समय पर नहीं किया नामांकन उनकी जिम्मेदारी है वैसे आफूखेडी विद्यालय  में 16-17 बच्चों के नामांकन है।<br /><strong>- वहीद खान पंचायत शिक्षक आफूखेडी</strong></p>
<p>सत्र 2024 से शिक्षण कार्य के लिए लगा रखा है, हमारे पास विद्यालय संबंधित कोई चार्ज नहीं है, टीसी और नामांकन का भी काम समय पर नहीं हो रहे हैं हमारे द्वारा नए नामांकन के लिए संस्था प्रधान को दस्तावेज भेज दिए।  <br /><strong>- हीरालाल पंचायत शिक्षक आफूखेडी</strong></p>
<p>मेरे पास 4 बच्चों के दस्तावेज आए थे, लेकिन वहां बच्चों के बैठने की जगह भी तो नहीं है कहां बिठाएंगे और मुझे विद्यालय का आॅनलाइन काम की जानकारी नहीं है। वैसे मैं 2012 से उस विद्यालय में नहीं हूं, लेकिन विद्यालय का सम्पूर्ण चार्ज मेरे पास ही दे रखा है। फरवरी में आफूखेड़ी विद्यालय जर्जर भवन को जमींदोज करने का आदेश आ गया था, लेकिन जर्जर भवन जमीदोज नहीं हो सका तो पीईईओ ने मेरे को नोटिस जारी कर दिया।  <br /><strong>- मनोहर सिंह भील संस्था प्रधान आफूखेड़ी</strong></p>
<p>मेरे क्षेत्र में 9 विद्यालय आते हैं और 9 ही विद्यालय में मेरा काम है। व्यवस्था के लिए मैंने पहले ही आफुखेडी में दो पंचायत शिक्षक लगा रखे हैं, इसके अलावा कोई व्यवस्था मेरे पास नहीं है। चार्ज पंचायत सहायक के पास नहीं है, चार्ज तो किसी और के पास है अगर आपको व्यवस्था करवाना है तो डीओ, बीईओ के पास जाओ।<br /><strong>- श्रवणकुमार पीईईओ बांसखेड़ा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>झालावाड़</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 13 Aug 2025 16:59:04 +0530</pubDate>
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                <title>जंगल में गवर्नमेंट गर्ल्स पॉलिटेक्निक कॉलेज, खतरे में छात्राओं की जान</title>
                                    <description><![CDATA[कक्षाओं की गैलरी की छतों के उखड़े प्लास्टर, सरिए निकले बाहर ।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/government-girls-polytechnic-college-in-the-jungle--lives-of-the-students-in-danger/article-122799"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-08/1ne1ws-(2)15.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। कोटा जिले का एकमात्र गवर्नमेंट गर्ल्स पॉलिटेक्निक कॉलेज घने जंगल से घिरा हुआ है। यह जंगल प्राकृतिक नहीं बल्कि कॉलेज प्रशासन की लापरवाही का नतीजा है। इसमें सांप, बिच्छू, गोयरा सहित जहरीले जीव-जंतुओं की मौजूदगी बनी रहती है। वहीं, बालिकाओं के टॉयलेट भी क्षतिग्रस्त  हैं। खिड़कियां टूट गई, दीवारों में सीलन तो छतों का प्लास्टर उखड़ रहा है। वहीं, कॉलेज में मुख्य विद्युत पैनल खुले पड़े हैं। जिनके पास फर्नीचर का कबाड़ लगा हुआ है। ऐसे में स्पार्किंग होने से आगजनी का खतरा बना रहता है। हालात यह है, कॉलेज कैम्पस में जगह-जगह पानी भरा हुआ है। जिनमें खरतनाक बीमारियों के मच्छर पनप रहे हैं। महाविद्यालय प्रशासन द्वारा छात्राओं की सुरक्षा में गंभीर लापरवाही बरती जा रही है। </p>
<p><strong>दीवारों पर उगा पीपल का पेड़, जड़ों से आई दरारें</strong><br />छात्राओं के टॉयलेट की बाहरी दीवार पर पीपल के पेड़ उग गए हैं। जिनकी जड़ों से कॉलेज की पत्थरों की दीवार फट गई। जगह-जगह गहरी दरारें आ रही हैं। जिसे कॉलेज प्रशासन द्वारा अनदेखा किया जा रहा है। ऐसे में दीवार ढहने का खतरा बना रहता है। </p>
<p><strong>गैलरी की छतों का गिरा प्लास्टर, निकले सरिए</strong><br />फर्स्ट फ्लोर पर गैलरी की छतों का प्लास्टर जगह-जगह से गिर गया। सरिए बाहर निकल रहे हैं। जबकि, इस गैलरी में कॉमर्शियल आर्ट ब्रांच की कक्षाएं संचालित होती है। इस गैलरी में छात्राओं की मौजूदगी रहती है। ऐसे में बालिकाओं पर प्लास्टर गिरने का खतरा बना रहता है। वहीं, पानी पीने के लिए बना स्थान भी दुर्दशा का शिकार है। </p>
<p><strong>बालिकाओं के टॉयलेट बदहाल</strong><br />कॉलेज में ग्राउंड व फर्स्ट फ्लोर पर बालिकाओं के लिए बने सुविधा घर बदहाल हो रहे हैं। दीवारें सीलन से दुर्गंध मार रही है तो छतों का प्लास्टर जगह-जगह से उखड़ रहा है। वहीं, फर्श भी क्षतिग्रस्त हो रहा है। टॉयलेट की खिड़कियां टूटी हुई है, जबकि सामने जंगल है। ऐसे में सुविधा घरों में जहरीले जीव-जंतुओं के आने खतरा रहता है।</p>
<p><strong>वाहन स्टैंड के पास लगा गंदगी का ढेर</strong><br />कॉलेज में स्थित वाहन स्टैंड के पास ही कचरे का ढेर लगा हुआ है। दुर्गंघ से छात्राओं का सांस लेना तक मुश्किल हो जाता है। टेक्सटाइल की छात्रा ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि कैम्पस से कई दिनों तक कचरा उठता नहीं है। परिसर में ही स्टाफ के लिए क्वार्टर बने हुए हैं। जिनके घरों का कचरा भी यहीं डाला जाता है। वहीं, मुख्य मार्ग के नालों का गंदा पानी भी कैम्पस में ही जमा रहता है। ऐसे में स्टैंड पर वाहन खड़े करने के दौरान छात्राओं का सांस लेना तक दूभर हो जाता है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 06 Aug 2025 14:41:18 +0530</pubDate>
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                <title>आयुर्वेद अस्पताल में बनी दीवारें भी टूटी, परिसर में भरा पानी</title>
                                    <description><![CDATA[जलभराव होेने से मच्छर पनप रहे हैं, संक्रमण होने का खतरा।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/the-walls-built-in-the-ayurveda-hospital-are-also-broken--the-campus-is-filled-with-water/article-122625"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-08/oer-(8).png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर के तलवटी में स्थित राजकीय आयुर्वेद, योग एवं प्राकृतिक चिकित्सालय  के परिसर में जगह-जगह पानी भरा हुआ है तथा जलभराव होने की स्थिति यहां आने वाले मरीजों को भी असुविधा हो रही है। डॉ. नित्यानंद शर्मा ने बताया कि अस्पताल परिसर में बनी दीवारें भी टूटी हुई है। जिसके कारण बरसात का सारा पानी परिसर में जमा हो गया है। वहीं परिसर के पीछे स्थित गेट भी टूटा हुआ जिसके कारण यहां लगाए गए पौधों को नुकसान पहुंच रहा हे।</p>
<p><strong>पुराना भवन जर्जर व क्षतिग्रस्त</strong><br />उन्होंने बताया कि राजकीय आयुर्वेद, योग एवं प्राकृतिक चिकित्सालय एकीकृत महाविद्यालय का पुराना भवन सवा दो लाख मासिक किराए पर लिया हुआ है। इस महाविद्यालय में अध्ययनरत विद्यार्थियों को बारिश में परेशानी बनी रहती हैं। विद्यार्थियों को आने जाने में भी परेशानी का सामना करना पड़ता है।</p>
<p><strong>महाविद्यालय का नवीन भवन तैयार</strong><br />महाविद्यालय का नवीन भवन तलवंडी स्थित जिला आयुर्वेद चिकित्सालय परिसर में आरएसआरडीसी ने तैयार किया है। विद्यार्थियों की परेशानी को देखते हुए, अस्पताल संबंद्ध प्राचार्य ने नवीन भवन में शिफ्ट करवाने या नवीन भवन में दस कमरें देने की मांग अजमेर स्थित मुख्यालय को पत्र के माध्यम से अवगत करवाया है।</p>
<p><strong>चिकित्सालय में जगह जगह भरा बारिश का गंदा पानी</strong><br />उन्होंने बताया कि यहां आने वाले मौसमी बीमारियों के चलते रोजाना सामान्य दिनों की अपेक्षा 250 से 300 लोग आ रहे हैं। बारिश होने से पेट दर्द, खुजली तथा वायरल फीवर के मरीजों की संख्या बढ़ी है।  मौसमी बीमारियों के चलते रोजाना सामान्य दिनों की अपेक्षा पेट दर्द, खुजली तथा वायरल फीवर के मरीजों की संख्या बढ़ी है।  अस्पताल की मुख्य सड़क पर जगह-जगह जलभराव की स्थिति बनी हुई है। जलभराव होेने की स्थिति में मच्छर भी पनप रहे हैं, संक्रमण होने का भी खतरा बना हुआ है। वहां लगे पेड़-पौधे भी डूब गए है।</p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />आयुर्वेद चिकित्सालय परिसर में बने नए भवन के लिए आरएसआरडीसी से बात चल रही हैं। अगले सप्ताह तक शिफ्ट करने का विचार है। इस संबंध में कार्रवाई चल रही है।<br /><strong>- आनंद शर्मा, निदेशक, आयुर्विज्ञान  </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 04 Aug 2025 16:15:32 +0530</pubDate>
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                <title>कक्षा-कक्ष में टूटी छत की पट्टी, हादसे की आशंका</title>
                                    <description><![CDATA[बपावरकलां के महात्मा गांधी इंग्लिश मीडियम स्कूल के हाल-बेहाल। 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/roof-strips-broken-in-classrooms--fear-of-accident/article-119931"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-07/untitled-design-(5).png" alt=""></a><br /><p>बपावरकलां। बपावरकलां के महात्मा गांधी इंग्लिश मीडियम स्कूल का भवन पूरी तरह जर्जर हो जाने से छात्राओं, अभिभावकों व शिक्षकों को हमेशा किसी अनहोनी का भय बना रहता है। स्कूल के एक अभिभावक व सामाजिक कार्यकर्ता लालसिंह मारण ने बताया कि बपावरकलां के महात्मा गांधी इंग्लिश मीडियम स्कूल का भवन काफी जर्जर अवस्था में है। बरसात के समय एक कक्षा-कक्ष की छत टपकती है। जिससे छात्राओं को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। वहीं एक अन्य कक्षा-कक्ष की छत की पट्टियां टूटी होने से हमेशा हादसे की आशंका बनी रहती है। </p>
<p><strong>लगातार कम हो रहे नामांकन </strong><br />लालसिंह मारण ने बताया कि विद्यालय में बुनियादी सुविधाओं की कमी के कारण लगातार नामांकन कम हो रहे हैं। वहीं प्रधानाचार्य नवल किशोर मालव ने बताया कि भवन निर्माण की गुणवत्ता बेहद कमजोर है। इस बार नामांकन भी बहुत कम हुआ है। बच्चे अब निजी विद्यालयों की तरफ रुख कर रहे हैं।</p>
<p>हम अपनी बेटियों को गांव से 4 किलोमीटर दूर इसलिए भेजते हैं कि उन्हें अच्छी शिक्षा मिले। लेकिन सुविधाओं की कमी और जर्जर भवन के कारण हमेशा हादसे की आशंका बनी रहती है। सरकार को इस तरफ ध्यान देना चाहिए।<br /><strong>- लालसिंह मारण, अभिभावक</strong></p>
<p>हमने छह माह पूर्व विभाग को मरम्मत का प्रस्ताव भेज रखा है। जैसे ही बजट आएगा, कार्य शुरू कर दिया जाएगा। <br /><strong>- पुरुषोत्तम मेघवाल, एसीबीईईओ, सांगोद </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 09 Jul 2025 15:07:59 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>जर्जर स्कूलों से खतरे में बचपन, हर पल दरबीजी जैसी घटना का डर</title>
                                    <description><![CDATA[कोटा जिले के सरकारी स्कूलों के हाल बद से बदतर।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/childhood-in-danger-due-to-dilapidated-schools/article-104579"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-02/pze9.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। अंधेर नगरी, चौपट राजा..., कहावत की यह पंक्तियां इन दिनों कोटा जिले के राजकीय विद्यालयों व शिक्षाधिकारियों पर सटीक बैठती है। इन विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिलना तो दूर कल्पना तक नहीं की जा सकती। सरकार के क्वालिटी एजुकेशन के दावों की ग्रामीण इलाकों के स्कूलों में धज्जियां उड़ रही है। इटावा ब्लॉक के राजकीय प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालय बिना कमरों के खुले में चल रहे हैं। यहां बच्चे कभी सर्दी में शीत लहर से ठिठुरते तो कभी गर्मी से झुलसते। सरकारी मशीनरी की लचरता से विद्यार्थियों ने स्कूल आना ही बंद कर दिया। हालात यह हैं, ग्रामीण इलाकों में दो-दो कमरों में प्राइमरी व अपर प्राइमरी स्कूल चलते हैं। यह कमरें भी जर्जर हो चुके हैं, जिसकी वजह से स्कूल प्रशासन अनहोनी के डर से खुले में कक्षाएं लगाने को मजबूर है। ऐसे में मौसम बिगड़ते ही पढ़ाई  चौपट हो जाती है। कक्षा-कक्षों की छतों से प्लास्टर गायब हो चुके और सरिए बाहर निकल गए। दीवारों पर बड़ी-बड़ी गहरी दरारों से बचपन खतरे में पड़ा है। पेश है खबर के प्रमुख अंश....</p>
<p><strong>हर पल दरबीजी जैसी घटना का डर</strong><br />कोटा जिले के ग्रामीण इलाके अमरपुरा, झाड़ोल, बंबूलिया रणमल, कोटड़ा दीप सिंह सहित अन्यक्षेत्रों के प्रायमरी व अपर प्रायमरी स्कूलों में हर पल दरबीजी गांव के स्कूल में हुए हादसे जैसी घटनाओं का डर लगा रहता है। सुल्तानपुर के दरबीजी स्कूल में हाल ही में क्षतिग्रस्त टायलेट की दीवार ढहने से 7वर्षीय छात्रा की मौत हो गई थी।  इस घटना के बाद भी शिक्षा विभाग नहीं चेता। इन इलाकों के स्कूलों के कक्षा-कक्ष पूरी तरह से जर्जर हो रहे हैं। दीवारों में बड़ी-बड़ी दरारें, छतों के सरिए बाहर निकल रहे हैं। तेज हवा चलने या बारिश होने के दौरान हादसे का डर बना रहता है। </p>
<p><strong>अमरपुरा स्कूल : दो कमरे, दोनों ही जर्जर</strong><br />इटावा ब्लॉक के राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय अमरपुरा स्कूल खुले में चलता है। स्कूल के पास दो कमरे हैं, लेकिन दोनों ही जर्जर है। इनमें से एक कमरा आंगनबाड़ी का है और दूसरा स्कूल का, जिसे जर्जर होने के कारण बंद रखा जाता है। ऐसे में कक्षा 1 से 8वीं तक की कक्षाएं खुले आसमान के नीचे धूप में तो कभी पेड़ की छांव में चलती है। धूप आने पर विद्यार्थियों को फिर से दरी पट्टी उठाकर अपनी जगह बदलनी पड़ती है। </p>
<p><strong>मैंदान तो कहीं पेड़ के नीचे लगती कक्षाएं</strong><br />अमरपुरा स्कूल के हैडमास्टर कालूलाल सुमन ने बताया कि स्कूल में कक्षा 1 से 8वीं तक कुल 78 बच्चों का नामांकन है। क्षतिग्रस्त कमरों में हादसे के डर से सभी कक्षाएं मैदान में खुले में चलानी पड़ती है। स्कूल के पास एक ही कमरा है, जिसकी छत से सरिए बाहर निकल रहे हैं। जिसमें पोषाहार बनता है और खाद्य सामग्री रखी जाती है। ऐसे में कक्षा 3 व 4 बरामदे में और 1,2,5,6,7 और 8वीं कक्षा पेड़ों के नीचे लगानी पड़ती है। बारिश के दिनों में हालात खराब हो जाती है। छोटे बच्चों की छुट्टी करनी पड़ती है, ताकि उनकी जगह बरामदे में कक्षा 6 से 8वीं तक के बच्चों को बिठा सके। उच्चाधिकारियों को मामले से अवगत करा चुके हैं और पीओ कार्यालय में भी लिखित शिकायत कर चुके हैं। </p>
<p><strong>ढह गया रसोई घर, क्षतिग्रस्त कमरे में बना पोषाहार</strong><br />अमरपुरा स्कूल का रसोई घर पिछले साल हुई तेज बारिश में ढह गया। जिससे पोषाहार के समान रखने व बच्चों के लिए भोजन बनाने में परेशानी हो गई। ऐसे में कक्षा-कक्ष के नाम पर  क्षतिग्रस्त कमरे में ही पोषाहार बनाना पड़ता है। </p>
<p><strong>झाड़ोल स्कूल : एक कमरे में तीन कक्षाएं</strong><br />राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय झड़ोल की प्रधानाध्यापक रेणु मीणा ने बताया कि स्कूल में 120 बच्चों का नामांकन है और कमरे तीन हैं। जिसमें से एक असुरक्षित घोषित होने से सालों से बंद है। दूसरा क्षतिग्रस्त होने से कक्षाएं संचालित नहीं की जाती।  शेष बचे तीसरे कमरे में ही कक्षाएं लगती है, जिसमें 6,7 व 8वीं कक्षा एक साथ लगानी पड़ती है। वहीं, अन्य कक्षाएं खुले मैदान में चलती है। </p>
<p><strong>मौसम बिगड़ते ही 120 बच्चों में मचती भगदड़</strong><br />इस स्कूल में कक्षा 1 से 5वीं तक के विद्यार्थियों की कक्षाएं खुले में लगानी पड़ती है। इसमें कक्षा 1 व 2 तो चबुतरे पर तो 3, 4 व 5वीं कक्षा पेड़ों के नीचे लगानी पड़ती है। ऐसे में मौसम बदलते ही विद्यार्थियों में हड़कम्प मच जाता है और बारिश होते ही दरिपट्टियां  उठाकर बरामदे की ओर दौड़ लगानी पड़ती है। ऐसे में बच्चों के फिसलने से हादसे का डर बना रहता है। </p>
<p><strong>सर्दियों में ठिठुरते हैं बच्चे</strong><br />कक्षा कक्ष नहीं होने से खुले में बैठने पर बच्चे व शिक्षक  सर्दियों में ठिठुरते रहते हैं। कभी बरामदमें में एक साथ पांच कक्षाएं लगानी पड़ती है लेकिन यहां भी सर्द हवाओं से ठिठुरन बनी रहती है। ऐसे स्कूलों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिलना तो दूर शिक्षा का माहौल भी नहीं बन पाता। सरकार को तुरंत बजट जारी कर जर्जर स्कूलों की मरम्मत करवानी चाहिए। </p>
<p><strong>कोटड़ादीप सिंह स्कूल : दीवारों में दरारें, छत के उखड़े प्लास्टर</strong><br />राजकीय प्राथमिक विद्यालय कोटड़ा दीप सिंह स्कूल में कक्षा 1 से 5वीं तक कुल 80 बच्चों का नामांकन है। जबकि, कक्षा-कक्ष तीन ही है।  कक्षाओं की दीवारों में बड़ी-बड़ी दरारें हैं और छतों का प्लाटर गिरने से सरिए बाहर निकल आए। कमरे क्षतिग्रस्त हैं, निर्माण की सख्त आवश्यकता है। हालांकि, मरम्मत के लिए स्कूल प्रशासन की ओर से सरपंच व एसडीएमसी की बैठक में प्रस्ताव लिए जा चुके हैं, जिसे सीबीईओ को भेजे गए हैं। </p>
<p>सरकार एक ओर तो क्वालिटी एजुकेशन देने की बात कर रही है और दूसरी तरफ मूलभूत सुविधाओं से वंचित कर रही है। बुनियादी सुविधाओं के अभाव में कैसे सरकारी स्कूलों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिलेगी।  बिना कमरों के स्कूल चल रहे हैं। खुले में पेड़ों के नीचे कक्षाएं लग रही हैं, बरसात में पढ़ाई चौपट हो जाती है। इलाके के सरकारी स्कूलों के बूरे हालात हैं, दरबीजी स्कूल जैसी घटना न हो, इसके लिए शिक्षा विभाग को छात्रहित में कमद उठाने चाहिए।<br /><strong>- शिव प्रकाश नागर, अध्यक्ष बेरोजगार महासंघ कोटा</strong><br /> <br />क्षेत्र के ग्रामीण सरकारी स्कूलों की हालत बद से बदतर है। टूटी दीवारें, टपकती छतें, शौचालयों का अभाव और बुनियादी सुविधाओं की कमी से बच्चों की शिक्षा और सुरक्षा खतरे में है। शिक्षा विभाग व शिक्षा मंत्री को स्कूलों की दशा सुधारनी चाहिए।  इन स्कूलों को सुरक्षित, आधुनिक और बच्चों के लिए अनुकूल बनाए जाना बेहद जरूरी है। <br /><strong>- हरिओम मीणा, सदस्य बेरोजगार महासंघ </strong></p>
<p>समसा के इंजीनियर व ब्लॉक शिक्षाधिकारी द्वारा स्कूलों  का निरीक्षण किया जाता है, उनकी रिपोर्ट के आधार पर डिपार्टमेंट बजट जारी करता है। इटावा ब्लॉक के स्कूलों की टीम भेजकर मौका दिखवाकर उचित कार्यवाही करेंगे। बच्चों की सुरक्षा व गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना हमारी प्राथमिकता है।<br /><strong>- सतीश कुमार गुप्ता, विशेषाधिकारी शिक्षा मंत्री  </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 17 Feb 2025 15:46:28 +0530</pubDate>
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                <title>पुराने राजकीय विद्यालय का भवन भी हो चुका है जर्जर</title>
                                    <description><![CDATA[खेलते समय बच्चों के साथ न हो जाए अनहोनी।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/the-building-of-the-old-government-school-has-also-become-dilapidated/article-102978"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-02/257rtrer-(2)4.png" alt=""></a><br /><p>मोईकलां। राजकीय विद्यालय दरबीजी में हुई बालिका की दर्दनाक व आकस्मिक मौत की घटना को देखते हुए प्रशासन व शिक्षा विभाग को सांगोद विधानसभा क्षेत्र में भी एक बार विद्यालय भवनों की वास्तविक स्थिति के बारे में संज्ञान लेने की जरूरत है। वरना क्षेत्र में दरबीजी जैसी घटना क्षेत्र में होने की संभावना है। मोईकलां राजकीय विद्यालय का पुराना जर्जर हो चुका भवन भी इस बात की गवाही देता दिख रहा है कि भविष्य में इस तरह की घटना हो सकती है। यहां कई बच्चे खेलने के लिए आते हैं। जिनके  साथ कभी भी दरबीजी जैसी अनहोनी की आशंका बनी रहती है।  प्रधानाध्यापक हेमन्त गोचर ने बताया कि भवन के मरम्मत कार्य के लिए उच्चाधिकारियों को लिखित में सूचना देने के बाद भी समस्या का समाधान नहीं हो सका। यदि ऐसी स्थिति रहती है तो भविष्य में इसी प्रकार की अनहोनी का खतरा बना हुआ है। गणतंत्र दिवस के कार्यक्रम पश्चात हुई स्थानीय जनप्रतिनिधियों की मीटिंग में  राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय के पुराने भवन की मरम्मत कार्य को लेकर भी माहौल गर्मा गया था। मोईकलां सहकारी समिति अध्यक्ष सत्यनारायण यादव ने सीधा सत्ता पक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि यदि जनप्रतिनिधि बस माला साफा पहनने तक ही सीमित रह गए तो समस्या समाधान के लिए फिर कौन आगे आएगा। यदि समाधान करना है तो उसके Ñलिए निस्वार्थ भाव से मेहनत भी करनी पड़ेगी। जर्जर भवन का मरम्मत कार्य हो जाए तो इस भवन का उपयोग बालिका विद्यालय के रूप में भी हो सकता है। जर्जर भवन के निर्माण को लेकर पंचायत समिति सदस्य गंगोत्री बाई ने भी जिला शिक्षा अधिकारी को लिखित में समस्या बताकर समाधान के बारे में चर्चा की। साथ ही दरबीजी में हुई घटना पर संवेदना प्रकट कर क्षेत्र में ऐसी घटना ना इसके लिए प्रशासन से सहयोग मांगा। </p>
<p><strong>बालिका विद्यालय में कक्षा-कक्ष की कमी</strong><br />राजकीय बालिका विद्यालय भवन में कक्षा-कक्षों की संख्या कम होने से अध्ययनरत छात्रों को बैठने में समस्या आ रही है। बालिका विद्यालय में कमरों की संख्या कम होने की वजह से कक्षाओं को निरंतर सुचारू रूप से चलाने में समस्या आने लगी है। यदि भवन को देखें तो यह प्राथमिक कक्षा तक के लिए ही पर्याप्त है। लेकिन वर्तमान में यहां उच्च प्राथमिक तक की कक्षाएं संचालित हो रही हैं।<br /> <br />अभिभावक के तौर पर विद्यालय की सुविधाओं को देखते हुए आत्मसंतुष्टि होती है। सभी शिक्षक कार्य को पूर्ण निष्ठा से वहन करते हैं। विद्यालय भवन के साथ खेल मैदान भी पूर्ण हो तो बच्चों की खेलों में  प्रतिभा निखरेगी।<br /><strong>- प्रकाश बोहरा, अभिभावक</strong></p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />जर्जर भवन की समस्या के साथ विगत वर्षों से खेल मैदान का निर्माण भी एक विद्यालय की मुख्य समस्या बना हुआ है। यदि सैकंडरी विद्यालय का खेल मैदान पूर्ण रूप से सही हो जाता है तो खेलों में भी विद्यार्थी अपनी प्रतिभा दिखा सकते हैं। खेल शिक्षक का पद भी विद्यालय में काफी समय से रिक्त चल रहा है। <br /><strong>- रोहित जोशी, पूर्व एसडीएमसी सदस्य</strong></p>
<p>वर्तमान में 136 छात्राओं का नामांकन है। यदि उच्च माध्यमिक विद्यालय के पुराने भवन की मरम्मत करवा दी जाए या नया भवन निर्माण हो जाए तो उक्त समस्या से छुटकारा मिल सकता है। साथ ही कक्षाओं का नियमित व सुचारू रूप से संचालन हो सकेगा।<br /><strong>- गायत्री मीना, प्रधानाचार्य, बालिका विद्यालय  </strong></p>
<p>स्थानीय बालिका विद्यालय में बच्चों की संख्या ज्यादा होने व कमरे कम होने से बच्चों को बैठने में दिक्कत होती है। कई बार स्कूल की दो तीन कक्षाओं को एक साथ संचालित करना पड़ता है। यदि जर्जर भवन सही होकर बालिका विद्यालय की कक्षाएं उसमें लगें तो कुछ समाधान हो सकता है। <br /><strong>- राजेन्द्र सुमन, अभिभावक</strong></p>
<p>मोईकलां सीनियर विद्यालय की पुरानी जर्जर हो चुकी बिल्डिंग को अस्थायी रूप से कार्य में नहीं लेने के लिए सूचित किया हुआ है। आगामी समय में बिल्डिंग को मरम्मत करवाने के प्रस्ताव जिला अधिकारी को भेज रखे हैं। जल्द ही भवन की स्थिति जायजा लिया जाएगा।<br /><strong>-कृष्ण कुमार सक्सेना, अतिरिक्त ब्लॉक शिक्षा अधिकारी, सांगोद </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 03 Feb 2025 16:24:07 +0530</pubDate>
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                <title>जर्जर व खाली पड़े खण्डहरों से दहशत, जिम्मेदार बेखबर</title>
                                    <description><![CDATA[कई भवन तो ऐसे है जो केवल छोटी मोटी दीवारों पर ही टिके हुए है। 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/panic-due-to-dilapidated-and-empty-ruins--responsible-people-aware/article-86527"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-08/4.png" alt=""></a><br /><p>इन्द्रगढ़। इन्द्रगढ़ शहर में कई मकान खण्डहर अवस्था में है जो तेज हवा व बारिश में कभी भी गिर सकते है। जिससे जान माल का नुकसान भी हो सकता है। इन्द्रगढ़ के वार्ड नं0 7 निवासी शुभम शर्मा ने बताया कि बाईसी पाडा वार्ड नं0 7 में कुछ पुराने खण्डहर है जो बिल्कुल जीर्ण शीर्ण अवस्था मे हो चुके है। जो कभी भी तेज आंधी और बरसात में भरभरा कर गिर सकते है। इन खण्डहरों की वजह से मोहल्ले के लोगो में बारिश के मौसम में भय का माहौल बना हुआ है। अभी कुछ दिन पूर्व ही एक खण्डहर मकान का छज्जा टूट कर गिर गया था। गली में किसी के मौजूद नही होने से जान माल का नुकसान नही हुआ। शर्मा ने बताया कि ये मकान काफी समय से खाली पड़े हुए है तथा अब बिल्कुल खंडहर हो चुके है। यहां तक की कुछ खंडहरों में तो पीपल के बड़े बड़े पेड़ भी उग आए है तेज आंधी में इन पेड़ों के गिरने का भी डर लगा रहता है। जिससे खतरा और ज्यादा बढ़ गया है। सारे मोहल्लेवासी तेज आंधी व बारिश होते ही भयभीत हो जाते है।  शुभम शर्मा ने नगर पालिका अध्यक्ष से इन खण्डहर मालिकों को नोटिस देने की बात कही है। वार्ड नं0 07 के बाशिंदे लगभग 1 वर्ष पूर्व भी नगर पालिका इन्द्रगढ़ को पत्र के माध्यम से उक्त जर्जर भवन के बारे में अवगत करवा चुके है परंतु पालिका प्रशासन द्वारा एक वर्ष बाद भी उक्त मामले में किसी प्रकार की कोई कार्यवाही नही की गई है। गौरतलब है कि वार्ड नं0 7 ही नही बल्कि इन्द्रगढ़ शहर में इस तरह के कई खण्डहर है जो जीर्ण शीर्ण अवस्था में है तथा तेज बारिश व आंधी के चलते कभी भी ढह सकते है तथा उनके ढह जाने से कभी भी कोई बड़ा हादसा भी हो सकता है व जान माल का नुकसान भी हो सकता है। पालिका प्रशासन को इन जर्जर भवनों के मालिकों को जल्द से जल्द नोटिस देकर इनका निस्तारण करवाया जाना चाहिए। इन्द्रगढ़ में बहुत सारे है जर्जर भवन - इन्द्रगढ़ के वार्ड नं0 07 में ही नही पुराने शहर के हर गली मोहल्ले में कई जर्जर इमारतें है जो निरंतर हादसों को न्योता दे रही है। मुख्य बाजार में चन्द्र बिहारी जी के मंदिर के सामने ही एक जर्जर भवन है जो वर्षों से खाली पड़ा है तथा जो पुरी तरह से खंडहर हो चुका है तथा बारिश व तेज आंधी में कभी भी भरभरा कर गिर सकता है। इसके साथ ही कई पुरानी दुकाने जो जीर्ण शीर्ण अवस्था में है इनके भी गिरने का खतरा बना रहता है। कई भवन तो ऐसे है जो केवल छोटी मोटी दीवारों पर ही टिके हुए है। </p>
<p><strong>सक्षम भवन मालिकों को दिया जाना चाहिए मरम्मत का आदेश </strong><br />शहर में कई ऐसे जर्जर भवन भी है जिनके मालिक यहां किसी अन्य मकान में रह रहे है और पुराना भवन जर्जर हो चुका है तो पालिका प्रशासन को ऐसे सक्षम मकान मालिकों को अपने पुराने जर्जर भवन की मरम्मत करवाने के लिए पाबंद किया जाना चाहिए जिससे समय रहते बडे हादसे को टाला जा सके। सभी भवनों को ढहाना न तो नगर पालिका के लिए संभव है और ना ही भवन मालिकों के लिए। इसलिए जो भवन कुछ मरम्मत से ठीक हो सकते है उनकी मरम्मत करवाई जानी चाहिए।कई सरकारी इमारते भी हो चुकी है खण्डहर - पुराने शहर में कई सरकारी इमारते भी खंडहर व जर्जर हो चुकी है। जिसमें मुख्य बाजार में स्थित बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय का भवन व छोटी सब्जी मंडी में स्थित पुराना धर्मशाला स्कूल। ये ऐसी इमारते है जो पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो चुकी है और इनकी देखभाल भी नही हो पाती है। तीन मंजिला बालिका स्कुल का भवन तो इन्ही सुरक्षा कारणो से खाली करवा कर नए भवन में शिफ्ट किया गया था। अब ये इमारते खाली पडी है व शहर के मुख्य बाजार में स्थित होने से बडे हादसे का भय है।</p>
<p>हमारे मोहल्ले में एक दो मकान बिल्कुल खण्डहर हो चुके है तथा इन खण्डहरों की वजह से मोहल्लेवासी दहशत में है। पालिका प्रशासन को इन खण्डहरों के मालिकों को नोटिस देकर इनकी साफ सफाई करवाना चाहिए अन्यथा बारिश में गिरने के कगार वाली दीवारों को सुरक्षा के मध्येनजर पहले ही ढहा देना चाहिए।  <br /><strong>- शुभम शर्मा निवासी वार्ड नं0 7 इन्द्रगढ़।</strong></p>
<p>नगर पालिका द्वारा समय रहते जर्जर भवन मालिकों को नोटिस देकर उचित कार्यवाही अमल मे लानी चाहिए साथ ही सक्षम भवन मालिकों द्वारा खण्डहर भवनों की मरम्मत करवाने के लिए भी पाबंद किया जाना चाहिए। इन्द्रगढ शहर में ऐसे कई खण्डहर है जो कभी भी धराशाही हो सकते है।  <br /><strong>- पंकज वैष्णव शहरवासी इन्द्रगढ़।</strong></p>
<p>पुराने शहर में ऐसे भवनों की संख्या बहुत सारी है तथा इनमें से कई तो इतने जीर्ण शीर्ण हो चुके है कि चार वर्ष पूर्व जैसी खतरनाक बारिश आ जाए तो गिर भी सकते है। भविष्य में होने वाली दुर्घटना से बचने के लिए जल्द कार्यवाही की जानी आवश्यक है। <br /><strong>- गणेश गौत्तम, शहरवासी इन्द्रगढ़।  </strong></p>
<p>इन्द्रगढ़ शहर में जर्जर एवं क्षतिग्रस्त मकानों को चिह्नित किया जाकर बहुत जल्द इनके मालिकों को नोटिस भेजने की कार्यवाही प्रारंभ की जावेगी। <br /><strong>- गजेन्द्र मीना, सहायक अभियंता नगर पालिका इन्द्रगढ़।</strong></p>
<p>एक वर्ष पूर्व दिए गए प्रार्थना पत्र की तो मुझे जानकारी नही है। परंतु अब ये मामला मेरे संज्ञान में आया है तो इन जर्जर भवनों को चिन्हित करने की कार्यवाही जल्द ही प्रारंभ करवा कर नोटिस जारी किए जाएगें।     <br /><strong> - मनोज मालव, अधिशाषी अधिकारी नगर पालिका इन्द्रगढ़।</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बूंदी</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 01 Aug 2024 17:33:40 +0530</pubDate>
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                <title>कमरों में सीलन व दरारें, छत की टूटी पट्टियां दे रहीं हादसों को न्यौता</title>
                                    <description><![CDATA[अधिकारी नहीं दे रहे ध्यान, दहशत के साए में काम कर रहे पंचायत कर्मी। 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/dampness-and-cracks-in-the-rooms--broken-strips-of-the-roof-are-inviting-accidents/article-85640"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-07/111u1rer-(6)8.png" alt=""></a><br /><p>खेड़ारसूलपुर। खेड़ारसूलपुर स्थित पटवार भवन पूरी तरह से जर्जर हो गया है। कमरे की छत की टूटी पट्टियां पंचायत कर्मियों व यहां काम के लिए आने वाले ग्रामीणों के सिर पर मौत बन कर नाच रही हैं। ग्रामीणों ने बताया कि सालों पहले निर्मित इस भवन के कमरों में राजस्व रिकॉर्ड भी सुरक्षित नहीं है। भवन में कई स्थानों में दरारें आ चुकी हैं। कमरे की पट्टियां तक टूट गई हैं। जिन्हें गिरने से बचाने के लिए लोहे की एंगल लगाई गई है। कमरों में हर समय सीलन बनी रहती है। इससे हमेशा भवन के गिरने व बड़ी दुर्घटना होने का खतरा बना रहता है। बरसात के समय ये समस्या और भयानक हो जाती है। छत से पानी टपकता रहता है। जिससे पटवारी को काम करने में काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। जर्जर हो चुके भवन के कारण पंचायत कर्मियों सहित यहां काम के लिए आने वाले ग्रामीणों को हमेशा हादसे की आशंका बनी रहती है। </p>
<p><strong>खराब हो रहा राजस्व रिकॉर्ड</strong><br />ग्रामीणों ने बताया कि बारिश के कारण टपकती छत से राजस्व रिकॉर्ड भी खराब हो जाता है। विभागीय अधिकारियों की उदासीनता के कारण कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है। जिससे ग्रामीणों में रोष व्याप्त है।</p>
<p><strong>ग्रामीणों ने की मरम्मत की मांग</strong><br />ग्रामीणों ने जिला प्रशासन व सम्बंधित विभाग के उच्च अधिकारियों से शीघ्र जर्जर पटवार भवन की मरम्मत कराने के साथ ही नवीन पटवार भवन बनाने की मांग की है। जिससे कोई बड़ा हादसा घटित नहीं हो सके।</p>
<p><strong>इनका कहना</strong><br />पटवार घर जर्जर हो गया है। जिसके चलते कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। शीघ्र मरम्मत कराई जाए। <br /><strong>- प्रदीप शर्मा, ग्रामीण</strong></p>
<p>जर्जर भवन को लेकर विभागीय उच्च अधिकारियों को अवगत करा दिया गया है।<br /><strong>- संजय कुशवाह, पटवारी </strong></p>
<p>पटवार भवन में सीलन बनी रहती है। जगह-जगह कमरों में दरारें आ गई हैं। बरसात के समय लोगों का बैठना भी मुश्किल हो जाता है। भवन गिरने का डर बना रहता है। शीघ्र पटवार घर की मरम्मत कर साथ ही नवीन भवन बनाया जाए।<br /><strong>- प्रवीण नामा, पूर्व ब्लॉक अध्यक्ष, लाडपुरा</strong></p>
<p>जर्जर भवन की शिकायत के बाद भी जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा कोई कार्यवाही नहीं की गई। जिम्मेदार अधिकारी अपनी आंखें बंद कर के बैठे हुए हैं। जबकि जर्जर भवन व छत की टूटी पट्टियां कर्मचारियों व ग्रामीणों के सिर पर मौत बन कर नाच रही हैं। <br /><strong>- अनूप मेहरा, पंचायत समिति सदस्य</strong></p>
<p>जर्जर भवन की मरम्मत कराने के लिए विभाग में आगे प्रस्ताव बनाकर भिजवाया जाएगा। शीघ्र ही जर्जर भवन की मरम्मत करवा दी जाएगी।<br /><strong>-  सोनी, तहसीलदार, लाडपुरा </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 23 Jul 2024 16:43:52 +0530</pubDate>
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                <title>मौत के साये में विद्यार्थी और शाला परिवार </title>
                                    <description><![CDATA[स्कूल भवन में नही बिजली कनेक्शनआधुनिक युग में विद्युत कनेक्शन नहीं है। 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/students-and-school-family-in-the-shadow-of-death/article-84875"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-07/photo-size-(5)10.png" alt=""></a><br /><p>भण्डेड़ा। क्षेत्र के बांसी कस्बे में हाल ही में खुला महात्मा गांधी गवर्मेंट स्कूल सरकारी पुराने जर्जर भवन में संचालित हो रहा है। ऐसे में स्कूल में अध्ययनरत बच्चे और स्कूल का स्टाफ खतरे के सायेहै। स्कूल में पीने के पानी की सुगम व्यवस्था व शौचालय भी दुर्दशा के शिकार हो रहे है। इन स्थितियों के मद्देनजर शाला परिवार परेशान है। इस मामले में जिम्मेदार चुप्पी साधे हुए है। जिम्मेदार आनन फानन में खोले ऐसे जर्जर भवन की स्थिति को लेकर चिंतित नहीं है। इनके हालात अभी तक जस के तस बने हुए है। जानकारी के अनुसार सत्र-2023 में महात्मा गांधी गवर्मेंट स्कूल का शिक्षा सत्र शुरू हुआ था। जब यहां पर उच्च प्राथमिक विद्यालय के खाली पडे भवन में शुरू कर दिया गया था। जब से इसी भवन में चल रहा है। यह भवन लंबे समय से खाली पडा होने से यहां पर नशेडियों का अड्डा बना हुआ था। परिसर में कांच की बोतलें पड़ी है। वही कक्षों के गेट भी टूटे हुए है। कक्षों के हालात बदतर स्थिति में है। यहां कक्षा-कक्ष जर्जर स्थिति में है। परिसर में तीन कक्ष अलग से बने हुए है। जिनमें 6 कक्षाएं बरामदे सहित संचालित है। मगर इनकी छतें भी बरसाती समय टपकती है। </p>
<p>स्कूल भवन में नही बिजली कनेक्शनआधुनिक युग में विद्युत कनेक्शन नहीं है। जो इस भीषण गर्मी के मौसम में शाला परिवार को गर्मी से भी परेशान होना पड़ रहा है। बिना बिजली के ही कक्षों में बैठकर अध्ययन कार्य करने की मजबूरी बनी हुई है। सरकार ने विद्यालय तो खोला है, पर मूलभूत आवश्यकताओं की पूर्ति नही होने से शाला परिवार को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। </p>
<p><strong>शौचालय के हाल-बेहाल </strong><br />गांव के बद्रीलाल कुशवाह ने बताया कि स्कूल परिसर में लंबे समय से विरान पडे होने से पुराने शौचालय है। जिनकी भी मरम्मत नही होने से क्षतिग्रस्त हालत में है। शाला परिवार द्वारा ग्राम पंचायत के पास ही गार्डन में बने शौचालयों को उपयोग में लेते है, जिसकी अनुमति ग्राम पंचायत ने दे रखी है। उससे काम चलाया जा रहा है। </p>
<p><strong>पेयजल का नही स्त्रोत </strong><br />रिंकू सोनी का कहना है कि स्कूल परिसर में शाला परिवार के लिए पानी पीने के लिए कोई पेयजल स्त्रोत नही है, जो ग्राम पंचायत के गार्डन में लगे नलकूप से पानी जुटाना पड़ता है। मगर दो रोज से यह भी खराब होकर बंद पडा होने से पीने का पानी भी दूर जाकर लाना पड़ रहा है। </p>
<p><strong>पुराने भवन कक्षों के हाल-बेहाल</strong><br />जिस समय यहां पर राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय संचालित था। तत्कालीन बने कक्षो के गेट, खिड़किया वर्तमान में क्षतिग्रस्त है। वही एक कक्ष में विद्यालय की पुराने टेबले भरी हुई है। कक्षों के फर्श में गंदगी की भरमार हो रही है। जगह-जगह फर्श में गढ्ढे नजर आ रहे है।</p>
<p>यहां पर लंबे समय से भवन खाली रहने से यहां पर आसपास के गांवों सहित नशेड़ियों का जमावड़ा लगा रहता था। इसलिए यहां पर हालात खराब रहते थे। वर्तमान में यह स्कूल चलने से इन लोगों की आवाजाही तो बंद हो गई। पर स्कूल भवन सहित परिसर की स्थिति खराब है। इस भवन की मरम्मत के लिए राशि मिले, तो भवन सहित शौचालयों की मरम्मत होने पर शाला परिवार को इधर-उधर भटकने से भी राहत मिलेगी।  <br /><strong>- चंद्रप्रकाश टेलर, ग्रामीण</strong> </p>
<p><strong>इनका कहना है </strong><br />स्कूल शुरू हुआ, उस समय यहां पर नशेड़ी प्रवृत्ति के लोग आते थे। जिन्हें मना करने के बाद नही आ रहे है। विभाग के द्वारा सूचना मांगी गई थी। जिस पर हमने भवन की मरम्मत के लिए मांग कर रखी है। पर अभी तक राशि उपलब्ध नहीं हुई है। राशि मिले, तो भवन सहित शौचालय की मरम्मत हो सके। <br /><strong>- ब्रह्मानंद मीणा, प्रधानाचार्य, महात्मा गांधी गवर्मेंट स्कूल बांसी </strong></p>
<p>नैनवां ब्लॉक स्तर के जर्जर स्कूल भवनों के लिए मरम्मर राशि के लिए हमने डिमांड की थी। इसके बारे में पूरी जानकारी रमसा विभाग के उच्चा अधिकारियों को भेज दी गई है। जर्जर स्कूलों के लिए राशि स्वीकृत होते ही आगे की कार्रवाई की जाएगी। <br /><strong>- अनिल गोयल, मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी, नैनवां </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बूंदी</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 16 Jul 2024 16:14:07 +0530</pubDate>
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                <title>खतरा:जर्जर भवन में चल रहा पाटनपोल स्कूल</title>
                                    <description><![CDATA[क्लासरूम के नाम पर एक भी कक्ष नहीं हैं, स्कूल तिबारियों में ही चलता है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/danger--patanpol-school-running-in-dilapidated-building/article-52019"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-07/khatra--jajr-bhavan-me-chl-rha-patanpol-school...kota-news-17-07-2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर का राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय पाटनपोल 88 साल से जर्जर रियासतकालीन भवन में संचालित हो रहा है। भवन इतना जर्जर हो चुका कि पीडब्ल्यूडी ने इसे गत वर्ष असुरक्षित घोषित कर दिया था। साथ ही सुरक्षित भवन में स्कूल शिफ्ट करने की हिदायत दी थी। फिर भी विद्यालय को इसी जर्जर भवन में संचालित किया जा रहा है। हालात यह हैं, स्कूल की दूसरी मंजिल को बंद कर दिया गया है। क्योंकि, छतों की पट्टियां टूटकर गिर चुकी हैं। दीवारें जगह-जगह से दरक चुकी हंै। हर पल हादसे का खतरा बना रहता है। इसके बावजूद दूसरी मंजिल के क्षतिग्रस्त हिस्सों की मरम्मत कराए बिना पहली मंजिल की तिबारियों की दीवारों का प्लास्टर करवाया जा रहा है। समग्र शिक्षा से स्वीकृत हुए 14 लाख रुपए के बजट से प्लास्टर, फर्श व बिजली से संबंधित काम करवाए जाने हैं।  जबकि, विशेषज्ञों का मानना है, ऊपर के जर्जर भवनों की मरम्मत कराए बिना नीचे 14 लाख से काम करवाना उचित नहीं है। </p>
<p><strong>पीडब्ल्यूडी ने माना था असुरक्षित </strong><br />जानकारी के अनुसार गत वर्ष जुलाई माह में पीडब्ल्यूडी अधिकारियों ने पाटनपोल स्कूल का सर्वे किया था। बिल्डिंग के एक-एक हिस्से की फोटोग्राफी व वीडियोग्राफी करवाई थी। जिसकी सर्वे रिपोर्ट तत्कालीन शाला प्रधान को सौंप भवन को असुरक्षित घोषित किया था। अधिकारियों ने रिपोर्ट में बताया कि यह भवन स्कूल चलाने लायक नहीं है। रियासतकालीन भवन पूरी तरह से जर्जर हो चुका है। छतों की पट्टियां टूटी हुई हैं। दीवारों में गहरे गड्ढ़े हो रहे हैं। बरसात में कभी भी हादसा हो सकता है।</p>
<p><strong>7 तिबारियों में स्कूल, एक साथ लगती है पांच क्लास</strong><br />पाटनपोल स्कूल में कक्षा-कक्ष नाम की कोई जगह नहीं है। यहां छोटी-छोटी 7 तिबारियां है, जिनमें कक्षा 1 से 12वीं तक की क्लासें चलती हैं। स्कूल में करीब 125 बच्चों का नामांकन है। वहीं, 16 फीट लंबी और 8 फीट चौड़ी तिबारी में 1 से 5वीं तक की कक्षाएं एक साथ लगती हैं। तिबारियां क्षतिग्रस्त हैं, हालांकि, दीवारों पर प्लास्टर करवाकर खानापूर्ति की जा रही है। </p>
<p><strong>ऊपरी मंजिल पर दो आंगनबाड़ी, सांप का खतरा</strong><br />स्कूल की दूसरी मंजिल पर बांए तरफ क्षतिग्रस्त तिबारियां हैं। जिनमें दो आंगनबाड़ी चलती हैं। ऊपर जाने के लिए सीढ़ियां है, जिसके पत्थर हिल रहे हैं। बारिश में दीवारें ढहने का खतरा है। तिबारियों में एक फीट तक पानी भर जाता है। आंगनबाड़ी कार्यकताओं ने बताया कि यहां कई बार सांप आ चुके हैं। जिन्हें भगाने पर वे दीवारों में हो रहे गडढ़ों में छिप जाते हैं। यहां हर पल जान का जोखिम रहता है।</p>
<p><strong>तिबारियों में एग्जास्ट नहीं, सीलन की बदबू से परेशान</strong><br />क्लासरूम के नाम पर एक भी कक्ष नहीं हैं। स्कूल तिबारियों में ही चलता है। वर्तमान में कुछ तिबारियों में मरम्मत कार्य किया जा रहा है। इनमें एग्जास नहीं होने से सीलन की बदबू से विद्यार्थी परेशान रहते हैं। स्कूल में करीब 125 विद्यार्थियों का नामांकन है। जबकि, पर्याप्त जगह नहीं होने से विद्यार्थी ठीक से बैठ भी नहीं पाते। 10 फीट लंबी और 8 फीट चौड़ी तिबारी में कक्षा 10वीं-11वीं को एक साथ बिठाया जाता है। </p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />स्कूल भवन असुरक्षित नहीं है। स्कूल भवन की रिपेयरिंग के लिए समग्र शिक्षा से 14 लाख रुपए की राशि स्वीकृत हुई है। जिससे प्रथम तल पर बनी तिबारियों की मरम्मत करवा रहे हैं। वहीं, बाहर विद्यालय की बड़ी जगह है, जहां 4 नए कक्षा-कक्ष बनवाने के लिए यूआईटी को प्रस्ताव भेजे थे। तीन-चार दिन पहले ही यूआईटी के जेईएन मौका मुआयना करके गए हैं। यहां नए कक्षा-कक्ष बनने पर राहत मिल सकेगी। <br /><strong>- रेणुका सजनानी, प्रिंसिपल, राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय पाटनपोल</strong></p>
<p>गत वर्ष पाटनपोल स्कूल की तत्कालीन हैडमास्टर मंदाकिनी शर्मा ने यूसीईईओ बैठक में बताया था कि पीडब्ल्यूडी ने स्कूल भवन को असुरक्षित घोषित कर दिया है। मामला संज्ञान में आते ही मैंने उन्हें उस स्कूल के क्षतिग्रस्त कमरों में कक्षाएं संचालित न करने की हिदायत दी थी। वहीं, उच्चाधिकारियों को अवगत करवाकर सुरक्षित भवन में कक्षाएं संचालित करवाने को निर्देशित किया था।  <br /><strong>-आभा शर्मा, यूसीईईओ प्रभारी एवं प्राचार्य राज. श्रीपुरा बा.उ.मा.वि.</strong></p>
<p>पीडब्ल्यूडी द्वारा अगर स्कूल भवन को असुरक्षित घोषित किया गया है तो वहां बच्चों को नहीं बिठाया जाएगा। बच्चों की सुरक्षा जरूरी है। इसके लिए मामले की जांच करवाएंगे।  यदि, भवन की स्थिति खराब हुई तो स्कूल को अन्य भवन में शिफ्ट करने की वैकल्पिक व्यवस्था करेंगे। ताकि बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो। <br /><strong>- प्रदीप चौधरी, मुख्य जिला शिक्षाधिकारी कोटा </strong></p>
<p>पीडब्ल्यूडी द्वारा गत वर्ष राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय पाटनपोल का सर्वे किया गया था। जिसकी रिपोर्ट स्कूल को सौंपी। रिपोर्ट में स्कूल भवन को असुरक्षित माना था। इस पर हमने यूसीईईओ, बीसीईईओ, डीईओ व ज्वाइंट डायरेक्टर को लिखित में सूचना देकर मार्गदर्शन मांगा था। <br /><strong>- मंदाकिनी शर्मा, तत्कालीन प्रधानाचार्य उमावि पाटनपोल  </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 17 Jul 2023 17:11:34 +0530</pubDate>
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