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                <title>jungle - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title> मुकुंदरा के बोराबास में इसी माह शुरू होगी नई जंगल सफारी, पर्यटकों को ऐतिहासिक धरोहरों व वन्यजीवों का मिलेगा रोमांच</title>
                                    <description><![CDATA[एंट्री गेट, साइन बोर्ड और सफारी ट्रैक तैयार, सुरक्षा रेलिंग व वॉच टावर का काम अंतिम चरण में।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/a-new-jungle-safari-will-launch-this-month-at-borabas-in-mukundara--offering-tourists-the-thrill-of-exploring-historical-heritage-sites-and-wildlife/article-161671"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-08/111200-x-600-px)-(1)1.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहरवासियों को अब जल्द ही मुकुंदरा टाइगर रिजर्व में एक ओर जंगल सफारी की सौगात मिलने जा रही है। एमएचटीआर प्रशासन अगस्त माह से बोराबांस रेंज में सफारी शुरू करने की तैयारी में जुटा है। अब पर्यटकों को शहर से 48 किमी दूर दरा सेंचुरी के लिए लंबा चक्कर नहीं काटना पड़ेगा। यहां दौलतगंज स्थित चौकी में पर्यटकों के लिए 10 लाख की लागत से एंट्री गेट व 16 मीटर लंबा सफारी रुट बनकर तैयार कर लिया गया है। हालांकि, कुछेक काम बाकी है, जिसे इसी माह में पूरे करवाकर सफारी शुरू किया जाना है। सफारी शुरू होने पर पर्यटकों को कोटा की ऐतिहासिक विरासत, चंबल घाटियों और वन्यजीवों के अद्भुत नजारों के साथ वाइल्ड लाइफ ट्यूरिज्म को भी नई पहचान मिलेगी।</p>
<p><strong>दौलतगंज से मिलेगी एंट्री और एग्जिट</strong><br />मुकुंदरा प्रशासन से मिली जानकारी के अनुसार, पर्यटकों को दौलतगंज स्थित डायवर्जन चैनल के पास चौकी से ही पर्यटकों को एंट्री मिलेगी। यहां से चंबल नदी के किनारे होते हुए कोटिया भील महल, अकेलगढ़ का पुराना किला, चंबल व्यू प्वाइंट, गरड़िया व्यू प्वाइंट, न्यू गरड़िया प्वाइंट होते हुए वापस दौलतगंज से ही एग्जिट दी जाएगी। यह रुट्स गत वर्ष अक्टूबर माह में ही तय किया गया था।</p>
<p><strong>10 लाख से बनेगा वॉच टावर, दिखेगा विहंग्म नजारा</strong><br />बोराबास के घने जंगलों के बीच सफारी रुट्स पर मुकुंदरा प्रशासन 10 लाख की लागत से तीन वॉच टावर बनाएगा। वन अधिकारियों ने बताया कि सफारी रूट पर कुछ जगहों पर सेल्फी प्वाइंट बनाए जा रहे हैं। जिसका कार्य किया जा रहा है। पर्यटकों की सुरक्षा को देखते हुए चंबल किनारे चट्टानों पर सुरक्षा रेलिंग लगाई जाएगी। यह काम भी अगले सप्ताह तक पूरा हो जाएगा।वहीं, जगह-जगह साइन बोर्ड लगा दिए गए हैं।</p>
<p><strong>सफारी के रूट में यह मिलेंगे व्यू प्वाइंट</strong><br />16 किमी लंबे सफारी रूट में पर्यटकों को कोट्या भील फोर्ट, न्यू चंबल प्वाइंट, न्यू गरड़िया प्वाइंट, भंवरकुंज, अकेलगढ़ फोर्ट, चंबल किनारे दो मंजिला वॉच टावर, सेल्फी प्वाइंट, प्रकृति का विहंग्म नजारा, वन्यजीवों की साइटिंग सहित प्रकृति के अद्भुद नजारें देखने को मिलेंगे।</p>
<p><strong>बोराबास में पैंथर व भालू की संख्या अधिक</strong><br />वन्यजीव प्रेमियों का कहना है कि बोराबांस के जंगल में टाइगर को छोड़कर सभी वन्यजीवों का प्राकृतिक आवास है। यहां लैपर्ड व भालूओं की बड़ी संख्या में मौजूदगी है। इसके अलावा भेडिए, हायना, लोमड़ी, सियार, हिरण, नीलगाय, जंगली बिल्ली सहित कई एनिमल शामिल हैं।</p>
<p>मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व की बोराबास रेंज में इसी माह पर्यटकों के लिए जंगल सफारी शुरू कर दी जाएगी। अभी तक यहां चौकी, सफारी एंट्री गेट, सफारी रूट्स व साइन बोर्ड सहित कई सौंदर्यीकरण कार्य पूरे हो गए हैं। हालांकि, कुछेक कार्य ही बाकी हैं, जो जल्द ही पूरे हो जाएंगे।<br /><strong>-मूथु एस, उप वन संरक्षक मुकुंदरा टाइगर रिजर्व</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 01 Aug 2026 14:26:18 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>रामगढ़ से पिछड़ा मुकुंदरा, 1 जिप्सी के भरोसे जंगल सफारी, 100 किमी चक्कर काटकर भी निराश लौट रहे पर्यटक </title>
                                    <description><![CDATA[दो साल बाद भी मुकुंदरा की बोराबांस में शुरू नहीं हुई सफारी, दरा जाकर भी शहरवासियों को नहीं मिल रही सफारी की बुकिंग।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/mukundra-lags-behind-ramgarh--jungle-safari-relies-on-only-1-jeep--tourists-return-disappointed-after-traveling-100-km/article-137745"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/500-px)-(2)10.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व में जंगल सफारी शुरू हुए करीब दो साल बीत चुके हैं, इसके बावजूद सफारी परवान नहीं चढ़ी। जबकि, रामगढ़ टाइगर रिजर्व हाउस फुल चल रहा है। नतीजन, राजस्व और पर्यटकों की संख्या में मुकुंदरा, रामगढ़ टाइगर रिजर्व से पिछड़ रहा है। इसकी बड़ी वजह मुकुंदरा की सफारी 1 ही जिप्सी के भरोसे चल रही है। जबकि, रामगढ़ में 6 जिप्सी पर्यटकों को जंगल की सैर करवा रही है। दरअसल, मुकुंदरा में एक ही रेंज दरा में जंगल सफारी करवाई जा रही है, जो कोटा शहर से करीब 48 किमी दूर है और टिकट बुकिंग भी आॅफलाइन है। ऐसे में पर्यटक दरा जाता है तो जिप्सी पहले से ही बुक रहती है। ऐसे में उन्हें 48 किमी जाना और वापस आने में करीब 100 किमी का चक्कर काट बैरंग लौटना पड़ता है।</p>
<p><strong>रुट्स बने फिर से शहर से सटे बोराबास में शुरू नहीं हुई सफारी</strong><br />शहरी सीमा से सटे रावतभाटा रोड स्थित मुकुंदरा की बोराबास रेंज में जंगल सफारी शुरू किए जाना प्रस्तावित है। इसके रुट्स भी बन चुके हैं। हाल ही में रुट्स संशोधित भी किए जा चुके हैं। इसके बावजूद यहां 2 साल बाद भी सफारी शुरू नहीं हो सकी। जबकि, यह जंगल शहर के नजदीक होने से पर्यटकों की संख्या में इजाफा हो सकता है। इसके बावजूद मुकुंदरा प्रशासन द्वारा यहां सफारी शुरू नहीं की जा रही। पर्यटकों को शहर से 48 किमी दूर दरा जाना पड़ता है, जहां भी एक ही जिप्सी होने से बुकिंग नहीं मिल पाती। ऐसे में उन्हें बैरंग लौटना पड़ता है।</p>
<p><strong>बोराबास में है चम्बल व जंगल का विहंगम व्यू प्वाइंट्स</strong><br />नेचर प्रमोटर एएच जैदी का कहना है कि शहर से सटी बोराबास रेंज का जंगल काफी घना है। यहां चंबल व जंगल के कई विहंग्म व्यू प्वाइंट है। इसके अलावा पैंथर, भेड़िया, भालू, जरख, फॉक्स सहित अन्य बड़े वन्यजीवों का हैबीटाट है, जिनकी सफारी के दौरान साइटिंग होने से पर्यटकों की संख्या में तेजी से इजाफा होगा। इधर, पर्यटकों का कहना है कि मुकुंदरा प्रशासन यदि, रावतभाटा रोड स्थित बोराबांस रैंज में स्वीकृत रुट्स पर सफारी शुरू करें तो हमें दरा जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। समय की बचत होगी और ट्यूरिज्म को बढ़ावा मिलेगा।</p>
<p><strong>यह रहेगा 15 किमी का सफारी रुट्स</strong><br />बोराबास रेंजर राजपाल शर्मा ने बताया कि यहां दौलतगंज स्थित डायवर्जन चैनल के पास चौकी से सफारी के लिए पर्यटकों को एंट्री मिलेगी। यहां से चंबल नदी के किनारे कोटिया भील महल, चंबल व्यू प्वाइंट, गरड़िया व्यू प्वाइंट होते हुए रथकांकरा तक रुट रहेगा। यह रुट्स गत अक्टूबर माह में ही तय किया गया था। जल्द ही सफारी शुरू किए जाने की तैयारी है।</p>
<p><strong>दरा में एक जिप्सी के भरोसे सफारी</strong><br />दरा सेंचुरी में जंगल सफारी के लिए मात्र एक ही जिप्सी है, जो सुबह की पारी में 6 से 9 बजे तथा दोपहर 3 से 6 बजे तक रहती है। पर्यटकों को एंट्री व टिकट दरा रेंज कार्यालय से लेना होता है। यहीं से बुकिंग आॅफलाइन की जाती है। कोटा शहर से जाने वाले पर्यटकों को वहां जाकर पता लगता है कि जिप्सी एडवांस बुक हैं, ऐसे में उन्हें सफारी का मौका अगले दिन मिल पाएगा या फिर दोपहर की पारी तक इंतजार करना होगा। दोनों ही सूरत में पर्यटकों का समय व्यर्थ हो जाता है। मजबूरन उन्हें बैरंग लौटना पड़ता है। यदि, यहां जिप्सियों की संख्या बढ़ाई जाए तो भी लोगों को राहत मिल सकती है।</p>
<p><strong>ऐतिहासिक धार्मिक स्थलों से झलकता प्राचीन वैभव</strong><br />नेचर प्रमोटर एएच जैदी ने बताया कि प्राकृतिक छटा के साथ मुकुन्दरा विरासत से भरा पड़ा है। रिजर्व में 12वीं शताब्दी का गागरोन किला, 17वीं शताब्दी का अबली मीणी का महल, पुरातात्विक सर्वे के अनुसार 8वीं-9वीं शताब्दी का बाडोली मंदिर समूह, भैंसरोडगढ़ फोर्ट, 19वीं शताब्दी का रावठा महल, शिकारगाह समेत कई ऐतिहासिक व रियासतकालीन इमारतें, गेपरनाथ, गरड़िया महादेव मंदिर भी है, जो कला-संस्कृति व प्राचीन वैभव को दशार्ते हैं। ऐसे में इन रुट्स पर सफारी शुरू होने से पर्यटक विरासत से रुबरू हो सकेंगे।</p>
<p><strong>इधर, रामगढ़ में दोनों स्लॉट की सफारी हाउस फुल</strong><br />रामगढ़ टाइगर रिजर्व के रेंजर सुमीत कुमार ने बताया कि नवम्बर व दिसम्बर माह से जंगल सफारी हाउस फुल चल रही है। सफारी के लिए यहां 6 जिप्सी संचालित की जा रही है। सुबह की 6 से 9 और शाम की 3 से 6 बजे की दोनों पारी में पर्यटकों को जबरदस्त रुझान देखने को मिल रहा है।</p>
<p><strong>क्या कहते हैं पर्यटक</strong><br />दरा में जंगल सफारी के लिए बुकिंग आॅफलाइन है, जो पर्यटन के लिहाज से सही नहीं है। शहर से 48 किमी का सफर कर दरा पहुंचते हैं तो वहां जाकर जिप्सी एडवांस बुक होने की बात पता चलती है, जिससे आना-जाना मिलाकर 100 किमी का चक्कर व्यर्थ हो जाता है। मुकुंदरा प्रशासन को बोराबास रैंज में सफारी शुरू करनी चाहिए।<br /><strong>-अशोक कुमार, महावीर नगर तृतीय</strong></p>
<p>दरा बहुत दूर पड़ता है। ऐसे में रावतभाटा रोड स्थित बोराबास या कोलीपुरा रेंज में प्रस्तावित रुट पर जंगल सफारी शुरू की जानी चाहिए। ताकि, पर्यटकों का समय व पेट्रोल का पैसा बच सके। साथ ही बुकिंग प्रणाली भी आॅनलाइन होनी चाहिए, जिससे व्यक्ति सफारी से पहले बुकिंग की करंट स्टेटस को देख ट्रैवलिंग प्लान बना सके।<br /><strong>-राम नारायण माहेश्वरी, दादाबाड़ी छोटा चौराहा</strong></p>
<p>मैं अपने साथियों के साथ कुछ दिनों पहले सफारी के लिए दरा गया था। वहां जाकर पता लगा कि जिप्सी एडवांस में ही बुक हो चुकी है। ऐसे में शाम का स्लॉट मिलने पर सफारी मिल सकती थी। जिसके लिए दोपहर 3 बजे तक का इंतजार करना पड़ता। ऐसे में वापस बैरंग लौटना पड़ा। यदि, बुकिंग व्यवस्था आॅनलाइन होती या फिर जिप्सी की संख्या अधिक होती तो उसी दिन सफारी का मौका मिल जाता। विभाग को अपनी कार्यप्रणाली में सुधार करने और शहरी सीमा में स्थित रावतभाटा रोड के जंगलों में सफारी शुरू की जानी चाहिए।<br /><strong>-चेतन सैन, प्रहलाद मीणा कैशवपुरा</strong></p>
<p>बोराबास रेंज में जंगल सफारी शुरू की जानी है। यहां के रुट्स भी तय कर दिए हैं, अब यहां रास्ते, वाच टावर, एंट्री गेट सहित पब्लिक फेसेलिटी डवलपमेंट के लिए कार्य किए जा रहे हैं। हमारी कोशिश वित्तिय वर्ष की समाप्ती से पहले सफारी शुरू किए जाने की कोशिश है। पर्यटन बढ़ाने के लिए हमारी तरफ से लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।<br /><strong>-सुगनाराम जाट, सीसीएफ मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व  </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 30 Dec 2025 14:58:45 +0530</pubDate>
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                <title>बारिश में दशहरा मैदान बना जंगल, कच्ची जमीन पर उगी बड़ी-बड़ी घास</title>
                                    <description><![CDATA[मेला शुरु होने  में करीब सवा महीने का समय शेष है। 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/dussehra-ground-becomes-jungle-in-rain--big-grass-grows-on-unpaved-land/article-123048"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-08/6622-copy12.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। नगर निगम कोटा दक्षिण व उत्तर के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित होने वाला 132 वां राष्ट्रीय दशहरा मेला अगले महीने 22 सितम्बर से शुरु होने वाला है। लेकिन उससे पहले बारिश के कारण दशहरा मैदान की कच्ची जमीन पर उगी बड़ी-बड़ी घास यह जंगल सा लगने लगा है। वहीं मैदान के चारों तरफ अतिक्रमण मैदान पर ग्रहण की तरह दिख रहा है। मेला शुरु होने  में करीब सवा महीने का समय शेष है। ऐसे में जहां मेले से संबंधित कामों और कलाकारों के टेंडर की प्रक्रिया ही चल रही है। वहीं दूसरी तरफ दशहरा मैदान के फेज एक में कच्ची भूमि पर बड़ी-बड़ी घास उगी हुई है। किशोरपुरा थाने के सामने की तरफ से लेकर रंगमंच के दोनों तरफ, उसके सामने व पीछे चार दीवारी की तरफ जहां देखो वहां बड़ी-बड़ी घास  ऐसी लग रही है जैसे यह दशहार मैदान नहीं जंगल का हिस्सा हो। इस कच्ची जगह पर जहां फूडकोर्ट व अन्य फेरी व फुटकर सामान बेचने वालों के ठेले व जमीन पर सामान बेचने वाले बैठते हैं उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। </p>
<p><strong>खाना बदोश का अतिक्रमण</strong><br />दशहरा मैदान फेज एक के चारों तरफ अम्बेडकर भवन के सामने से लेकर किशोरपुरा थाने के सामने, दाजी देहड़ा पुुलिया से लेकर आशापुरा माताजी मंदिर के आस-पास तक चार दीवारी के चारों तरफ अतिक्रमण हो रहा है। खास तौर पर खाना बदोश लोगों ने स्थायी डेरा डाला हुआ है। यहां टापरियां बनाकर परिवार समेत रह रहे हैं। जिससे मैदान की सुंदरता पर ग्रहण लग रहा है। </p>
<p><strong>घास कटाई शुरु, अतिक्रमण भी हटाएंगे</strong><br />नगर निगम मेला उत्सव व अन्य आयोजन समिति के अध्यक्ष विवेक राजवंशी ने बताया कि उन्होंने दशहरा मैदान का दौरा किया था। उस समय घास बढ़ी हुई थी। उसके बाद निगम अधिकारियों को कहकर उसे कटवाने के लिए कहा था। घास कटाई का काम तो शुरु कर दिया है। उन्होंने बताया कि अभी बरसात का सीजन शेष है। ऐसे में मेला शुरु होने तक फिर से यह घास बढ़ सकती है। इस कारण से इसे देर से काटना शुरु किया है। राजवंशी ने बताया कि अभी मेला शुरु होने में वैसे तो समय है। उससे पहले मैदान के चारों तरफ व आस-पास का अतिक्रमण हटा दिया जाएगा। अतिक्रमण हटाने के संबंध में पूर्व में आयुक्त को पत्र भी लिखा गया है। हालांकि अभी गणेश चतुथी का त्योहार आने वाला है। ऐसे में यहां मूतित्त्यां बेचने वाले भी दुकानें लगाते हैं। इस त्योहार के बाद ही अतिक्रमण हटाने का काम होगा। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 08 Aug 2025 16:45:06 +0530</pubDate>
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                <title>दम तोड़ रही मुकुंदरा की जंगल सफारी</title>
                                    <description><![CDATA[दो साल बाद भी बोराबांस रैंज में शुरू नहीं हुई सफारी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/mukundra-s-jungle-safari-is-dying/article-110867"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-04/257rtrer-(2)41.png" alt=""></a><br /><p>कोटा । मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व की जंगल सफारी  दम तोड़ रही है। पिछले दो महीने से एक भी बुकिंग नहीं मिलने से जिप्सी चालक भी खाली बैठे हैं। हालात यह है कि वर्ष 2025 के शुरुआती 4 माह में मात्र 6 बार ही पर्यटक सफारी को गए हैं। जनवरी व फरवरी माह के बाद मार्च-अप्रेल में एक भी बुकिंग नहीं आई है। ऐसे में दरा अभयारण्य में शुरू की गई सफारी दम तोड़ रही है। </p>
<p><strong>दो माह से एक भी बुकिंग नहीं</strong><br />जिप्सी चालक महेंद्र गुर्जर ने बताया कि वन विभाग द्वारा दरा सेंचुरी में सितम्बर 2023 में जंगल सफारी शुरू की गई थी। उस समय लोगों में क्रेज था लेकिन दरा में टाइगर नहीं होने से पर्यटकों का सफारी के प्रति मोह भंग होता गया। हालात यह हो गए कि वर्ष 2025  में जनवरी में सफारी के 4 व फरवरी में 2 ही राउंड कटे हैं। इसके बाद मार्च व अप्रेल में अभी तक एक भी बुकिंग नहीं आई है। पर्यटकों के अभाव में जिप्सी भी घर पर ही खड़ी रहती है। </p>
<p><strong>बोराबास में इन वन्यजीवों का बसेरा</strong><br />वाइल्ड लाइफ रिसर्चर रवि नागर ने बताया कि बोराबांस का जंगल बेहद खूबसूरत है। यहां हायना, फॉक्स, जेकॉल, भालू, हिरण, चिंकारा, ब्लैक बक, सांभर, नीलगाय, सिविट केट, रेटल, लंगूर, नेवला, झाऊ चूहा, जंगली खरगोश, चिंटीखोर यानी पैंगोलिन, सेही जंगली चूहा सहित कई वन्यजीवों की मौजूदगी हैं। वहीं, सरीसृप व उभयचर में पायथन, रैट स्नेक, बफ-स्ट्राइप, कीलबैक, चेकर्ड कीलबैक, रेड सैंडबोआ, रेसेल्स वाइपर, टिंकेट, कोबरा व चंबल में मगरमच्छ बड़ी संख्या में है।</p>
<p><strong>टाइगर नहीं होने से घटा पर्यटकों का रुझान</strong><br />वर्तमान में मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व में तीन टाइगर हैं। इनमें दो बाघिन व एक बाघ है। इनमें से एक टाइगर का जवाहर सागर तो दूसरे का कोलीपुरा रेंज में मूवमेंट रहता है। इसके अलावा एक बाघिन है, जिसे दरा में रिवाइल्डिंग के लिए एनक्लोजर में रखा गया है। ऐसे में दरा सेंचुरी में खुले में बाघ-बाघिन नहीं होने से पर्यटकों का रुझान सफारी के प्रति घट गया। पर्यटकों का कहना है कि दरा शहर से करीब 40 किमी दूर है। जहां आने-जाने में काफी समय व्यर्थ हो जाता है और वहां पर देखने के लिए टाइगर तक नहीं है। ऐसे में पैसा और समय दोनों ही बर्बाद होता है।  </p>
<p><strong>ऑफलाइन बुकिंग से घटा रुझान</strong><br />दरा सेंचुरी में जंगल सफारी के लिए मात्र एक ही जिप्सी है, जो सुबह की पारी में 6.30 से  9.30 तथा दोपहर 3 से 6 बजे तक रहती है। पर्यटकों को एंट्री व टिकट दरा रेंज कार्यालय से लेना होता है। यहीं से बुकिंग ऑफलाइन की जाती है। कोटा शहर से जाने वाले पर्यटकों को कई बार वहां जाकर पता लगता है कि जिप्सी एडवांस बुक हैं, ऐसे में उन्हें सफारी का मौका अगले दिन मिल पाएगा या फिर दोपहर की पारी तक इंतजार करना होगा। दोनों ही सूरत में पर्यटकों का समय व्यर्थ हो जाता है। मजबूरन उन्हें बैरंग लौटना पड़ता है। यदि, यहां जिप्सियों की संख्या बढ़ाई जाए तो भी लोगों को राहत मिल सकती है।  </p>
<p><strong>4500 से 700 किराया, फिर भी टाइगर नहीं</strong><br />दरा रेंज में मौरूकलां-बंजर-रेतिया तलाई-पटपडिया-सावनभादौ एरिया शामिल है। करीब 21 किमी के जंगल में सफारी करवाई जाती है। 6 पर्यटक होने पर ही जिप्सी सफारी के लिए रवाना होती है। ट्यूरिस्ट की संख्या कम होने पर उनसे 6 सीटों का किराया 4500 से 700 रुपए किराया वसूला जाता है। इसके बावजूद पर्यटकों को इस रेंज में टाइगर देखने को नहीं मिलते। ऐसे में पर्यटक सफारी को नहीं आते।</p>
<p><strong>बोराबास रेंज में दो साल बाद भी सफारी नहीं</strong><br />वर्तमान में दरा सेंचुरी में ही सफारी करवाई जाती है, जो शहर से करीब 40 किमी दूर है। ऐसे में पर्यटकों का जाना और आने में 80 किमी का सफर तय करना पड़ता है। वहीं, बोराबास रेंज शहरी सीमा में होने के बावजूद दो साल से सफारी शुरू नहीं की गई। जबकि, यहां रुट्स भी निर्धारित किए हुए हैं। इसके बावजूद वन विभाग यहां सफारी शुरू नहीं कर रहा। वन्यजीव प्रेमियों  का कहना है कि बोराबांस का जंगल खूबसूरत होने के साथ शहर में नजदीक है। ऐसे में पर्यटकों की पहुंच आसान होगी और सफारी  का उद्देश्य पूर्ण हो सकेगा। मुकुंदरा प्रशासन को इसके सकारात्मक प्रयास करना चाहिए। </p>
<p><strong>इन तीन रुट्स पर सफारी का इंतजार </strong><br />दरा रेंज के अलावा तीन अन्य रेंजों में भी सफारी के रुट्स प्रस्तावि हैं। जिनमें बोराबांस रेंज में बंधा-बग्गी रोड, अखावा-बलिंडा-बंधा, दूसरा रूट कोलीपुरा रेंज में नागनी चौकी पोस्ट, कालाकोट-दीपपुरा घाटा-कान्या तालाब-नागनी चौकी पोस्ट, तीसरा रूट मंदरगढ़ में बेरियर-मंदरगढ़, तालाब-केशोपुरा-रोझा तालाब होते हुए मंदरगढ़ बेरियर रुट भी शामिल है। ऐसे में यहां भी सफारी शुरू करने करने के प्रयास तेज किए जाने चाहिए। </p>
<p><strong>क्या कहते हैं पर्यटक</strong><br />दरा में जंगल सफारी के लिए बुकिंग भी ऑफलाइन है। जिसे जल्द से जल्द ऑनलाइन किया जाना चाहिए। शहर से 40 किमी का सफर कर दरा पहुंचते हैं तो वहां जाकर जिप्सी एडवांस बुक होने की बात पता चलती है, जिससे आना-जाना मिलाकर 80 किमी का चक्कर व्यर्थ हो जाता है। मुकुंदरा प्रशासन को बोराबास रैंज में सफारी शुरू करनी चाहिए।<br /><strong>-कुशाल सिंह, महावीर नगर </strong></p>
<p>दरा बहुत दूर पड़ता है। ऐसे में रावतभाटा रोड स्थित बोराबास रेंज में प्रस्तावित रुट पर जंगल सफारी शुरू की जानी चाहिए। ताकि, पर्यटकों का समय व पेट्रोल का पैसा बच सके। साथ ही बुकिंग प्रणाली भी ऑनलाइन होनी चाहिए, जिससे व्यक्ति सफारी से पहले बुकिंग की करंट स्टेटस को देख ट्रैवलिंग प्लान बना सके।<br /><strong>-ललित नामा, प्रोफेसर राजकीय कनवास महाविद्यालय  </strong></p>
<p>मैं अपने साथियों के साथ कुछ माह पहले सफारी के लिए दरा गया था। वहां जाकर पता लगा कि जिप्सी एडवांस में ही बुक हो चुकी है। ऐसे में वापस बैरंग लौटना पड़ा। यदि, बुकिंग व्यवस्था ऑनलाइन होती या फिर जिप्सी की संख्या अधिक होती तो उसी दिन सफारी का मौका मिल जाता। विभाग को अपनी कार्यप्रणाली में सुधार करने की जरूरत है। वहीं, सफारी के लिए प्रस्तावित अन्य तीन रुट्स पर भी सफारी शुरू की जानी चाहिए। <br /><strong>-यतीश जैन, अशोक चंद्रावत, दादाबाड़ी </strong></p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br /> बोराबांस रेंज में नए रुट्स तैयार किए गए हैं। यह शहर के पास भी है। यहां जल्द ही सफारी शुरू करवाई जाएगी। वहीं, महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश से टाइगर लाने की प्रक्रिया जारी है।<br /><strong>-सुगनाराम जाट, सीसीएफ मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 15 Apr 2025 15:21:46 +0530</pubDate>
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                <title>जंगल से घिरा रामपुरा कॉलेज, खतरे में बेटियों की जान</title>
                                    <description><![CDATA[सांप-बिच्छुओं का मंडराया खतरा, कक्षाओं में आ चुके कोबरा व गोयरा।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/rampura-college-surrounded-by-jungle--lives-of-girls-in-danger/article-88230"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-08/pze-(5)2.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। करोड़ों की लागत से बना राजकीय कला कन्या महाविद्यालय रामपुरा जंगल से घिरा हुआ है। कॉलेज की 4 एकड़ जमीन पर बड़ी-बड़ी झाड़ियां उगी हुई है। जिसमें जहरीले जीव-जंतुओं की मौजूदगी से छात्राओं की जान संकट में रहती है। गत वर्ष क्लासरूम में कोबरा दस्तक दे चुका है। उस वक्त कक्षा में छात्राओें के नहीं होने से हादसा टल गया। वहीं, महाविद्यालय के एंट्री गेट पर गोयरा आने से छात्राओं में हड़कम्प मच गया था। ऐसे में अनहोनी का खतरा बना रहता है। दरअसल, रामपुरा कॉलेज को सवा 6 एकड़ जमीन आवंटित हुई थी। जिसमें से सवा 2 एकड़ भूमि पर दो मंजिला भवन बना। इसमें 8 कक्षा कक्ष हैं। भवन के पीछे शेष 4 एकड़ भूमि पर जंगल उगा हुआ है। जिसमें जहरीले जीव-जंतुओं की मौजूदगी बनी रहती है।</p>
<p><strong>क्लास में कोबरा, बाहर गोयरे ने मचाई दहशत</strong><br />छात्रा सेविका अनसुईया मीणा ने बताया कि कक्षा-कक्षा के पीछे कॉलेज की 4 एकड़ जमीन देखरेख के अभाव में दुर्दशा का शिकार हो रही है। यहां झाड़-झंकाड उगे हैं, जिनमें जहरीले जीव-जंतुओं की मौजूदगी होने से जान का खतरा बना रहता है। गत वर्ष कॉलेज के रूम नंबर-25 में कोबरा आ गया था। गनीमत रही की क्लास में लड़कियां नहीं थी, जिससे बड़ा हादसा होने से टल गया। वहीं, गत माह महाविद्यालय के चैनल गेट के पास  गोयरा आने से छात्राओं में दहशत मच गई थी।  सरकार को बजट जारी कर खेल मैदान विकसित करना चाहिए।</p>
<p><strong>तलाई बनी करोड़ों की जमीन, मच्छरों का आतंक</strong><br />छात्रा सेविका देवयन्ती कहार ने बताया कि कैम्पस में महाविद्यालय की 4 एकड़ जमीन है, जो बरसाती पानी भरने से तलाई बन गई। इसमें खतरनाक बीमारियों का लार्वा पनप रहा है। क्लारूम में मच्छरों का प्रकोप बना रहता है। खिड़ियों में जालियां नहीं होने से सांप, बिच्छु, गोयरा सहित अन्य जहरीले कीड़े कक्षा कक्ष में घुस आते हैं। जिससे जान का खतरा बना रहता है। सरकार को इस भूमि पर बास्केट बॉल व हैंड बॉल का ग्राउंड विकसित करना चाहिए। ताकि, छात्राओं को खेल सुविधाएं मिल सके। </p>
<p><strong>टंकियों का पानी पी रही छात्राएं</strong><br />छात्रा प्रतिनिधि दिव्यांशी मुराड़िया ने बताया कि कॉलेज में दो वाटरकूलर लगे हैं,जिसमें से एक खराब है। दूसरी मंजिल पर ज्योग्राफी की छात्राओं को पानी पीने के लिए ग्राउंड फ्लोर पर आना पड़ता है। लेकिन, यहां के वाटरकूलर में भी आरओ नहीं लगा होने से छात्राओं को टंकी का पानी पीना पड़ रहा है। जिससे छात्राओं को स्वास्थ्य संबंधी कई परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। आरओ सिस्टम लगाने के लिए भी कॉलेज प्रशासन के पास बजट नहीं है। कॉलेज परिसर में आउट डोर के अलावा इनडोर गेम की भी सुविधा नहीं है। जिससे छात्राओं को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। </p>
<p><strong>गंदगी व दुर्गंघ से सांस लेना हो रहा मुश्किल</strong><br />छात्रा महिमा चौहान व प्रियंका ने बताया कि कैम्पस में क्लासरूम के पीछे गंदगी का ढेर लगा हुआ है। जिससे उठती दुर्गंध से छात्राओं का सांस लेना तक मुश्किल हो जाता है। झाड़ियों की सफाई और मिट्टी डलवाकर जगह समतल करवाकर ट्रैक बनाना चाहिए।  वहीं, कॉलेज भवन के दायी व बायी ओर हैंडबॉल व बास्केट बॉल के ग्राउंड बनाए जाना चाहिए। </p>
<p>कॉलेज की 4 एकड़ भूमि पर खेल मैदान विकसित किया जाना है। इसके लिए आयुक्तालय को पत्र लिख बजट की मांग की है, जो अब तक नहीं मिला। जैसे ही बजट जारी होगा, जमीन की सफाई करवाकर स्पोर्ट्स ग्राउंड विकसित किया जाएगा। महाविद्यालय में छात्राओं को क्वालिटी एजुकेशन दी जा रही है। साथ ही समस्याओं के समाधान के प्रयास लगातार जारी हैं। <br /><strong>- डॉ. राजेश चौहान, प्राचार्य रामपुरा कॉलेज </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 21 Aug 2024 16:07:09 +0530</pubDate>
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                <title>भुजंग मचा रहा दहशत, जंगल से घरों की दहलीज तक पहुंचे सांप </title>
                                    <description><![CDATA[कोटा बैराज परिसर में शुक्रवपार को 7 फीट लंबा अजगर नजर आने से कर्मचारियों में हड़कम्प मच गया। 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/bhujang-is-creating-panic--snakes-have-reached-the-doorsteps-of-houses-from-the-jungle/article-83857"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-07/21.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। बारिश के दिनों में सांपों का बिलों से बाहर निकल रिहायशी इलाकों में पहुंचने का सिलसिला लगातार जारी है। शिक्षा नगरी में कोबरा, वाइपर, करैत के बाद अब अजगर ने भी दस्तक दे दी है। ताजा मामला शुक्रवार को कोटा बैराज परिसर का है। यहां 7 फीट लंबा अजगर गेट नम्बर 19 के नजदीक दीवार के बीच हो रहे गड्ढ़ों में घुसा हुआ था। वहीं, हाल ही में एक घर की रसोई में सिलेंडर के पीछे साढ़े पांच फीट लंबा कोबरा छिपा बैठा था और वहां महिला खाना बना रही थी। नजर पड़ने के बाद महिला ने भागकर जान बचाई। घटना से पूरा परिवार दहशत में रहा। रिहायशी इलाकों में आए दिन विभिन्न प्रजाति के सांप घरों में घुसने के मामले सामने आ रहे हैं। इनमें सबसे ज्यादा मामले कोबरा के आ रहे हैं। जबकि, कोबरा सांप सबसे ज्यादा जहरीला माना जाता है। ऐसे में विशेषज्ञ बरसात के दिनों में घरों में कबाड़ा न रखने, साफ-सफाई रखने और घास पर नंगे पैर न चलने की हिदायत देते हैं।  वहीं, सांप के काटने पर तुरंत डॉक्टर से इलाज कराने की सलाह दी है। </p>
<p><strong>बैराज पर आया 7 फीट लंबा कोबरा</strong><br />कोटा बैराज परिसर में शुक्रवपार को 7 फीट लंबा अजगर नजर आने से कर्मचारियों में हड़कम्प मच गया। अजगर बैराज के 19 नंबर गेट के नजदीक दीवार पर बने हॉल में घुसा हुआ था। बैराज के कर्मचारियों ने देखा तो स्नैक केचर गोविंद शर्मा को सूचना दी। उन्होंने मौके पर पहुंचे और कड़ी मशक्कत के बाद अजगर को रेस्क्यू किया जा सका। उन्होंने बताया कि डेम के गेट के पास की दीवार में पत्थरों के बीच बने छेद में अजगर फंसा हुआ था। जिसे बाहर निकालने के लिए दीवार का एक पत्थर हटाया फिर इसे रेस्क्यू किया जा सका। बाद में लाडपुरा रेंज में सुरक्षित रिलीज कर दिया गया।</p>
<p><strong>रसोई में सिलेंडर के छिपा था कोबरा</strong><br />नयागांव इलाके में 2 जुलाई को एक घर की रसोई में 6 फीट लंबा कोबरा छिपा बैठा था। जबकि, महिला भोजन बनाने की तैयारी कर रही थी। तभी उसकी नजर कोबरा पर पड़ी तो तुरंत रसोई से बाहर निकल जान बचाई। महिला नीतू व गीताबाई ने बताया कि कोबरा सिलेंडर के पीछे फन फैलाकर बैठा था। गनीमत रही कि समय पर नजर आने से बड़ा हादसा टल गया।</p>
<p><strong>फैक्ट्री में कोबरा ने मचाई दहशत</strong><br />स्नैक केचर गोविंद ने बताया कि इंद्रप्रस्थ इंडस्ट्रियल एरिया में 3 जुलाई को एक फैक्ट्री में साढ़े पांच फीट लंबे कोबरा ने कर्मचारियों में दहशत फैला दी। यहां श्रमिक वेल्डिंग का काम कर रहे थे। तभी, वहां बजरी से भरे कट्टों के पीछे अजीब आवाज आने पर श्रमिक ने वहां देखा तो कोबरा फन फैलाकर बैठा था। जिसे देख कर्मचारी व श्रमिक घबरा गए। सूचना के बाद उसे तुरंत रेस्क्यू कर लिया गया।</p>
<p><strong>दो दिन कार में छिपा रहा सांप</strong><br />नयागांव इलाके में 4 जुलाई को एक कार में कोबरा के निकल आने का मामला सामने आया। कोबरा कभी बोनट तो कभी इंजन व कार के अंदर नजर आता रहा। जब उसे रेस्क्यू करने की कोशिश करते तो वह कहीं छुप जाता। जिसे गुरुवार को स्नेक कैचर द्वारा कड़ी मशक्कत के बाद रेस्क्यू किया जा सका। कार चालक पंकज ने बताया कि कई बार गेट व बोनट खोलकर देखा, लेकिन कोबरा कहीं छिप जाता था। हादसे का डर बना रहता था। </p>
<p><strong>जिले में प्रतिमाह 100 से ज्यादा सांप हो रहे रेस्क्यू </strong><br />स्नैक कैचर्स के मुताबिक, सांप के भूमिगत बिलों से बाहर निकल कर रिहायशी इलाकों में पहुंचने के मामले मानसून में अधिक होते हैं। बरसात से उनके बिलों में पानी भर जाने व जमीन में गर्मी का दबाव अधिक बढ़ने से सांप बाहर निकल आते हैं और भोजन की तलाश में रिहायशी इलाकों की ओर रुख कर रहे हैं। स्नैक कैचर के मुताबिक, शहर व ग्रामीण इलाकों में प्रतिमाह 100 से ज्यादा सांप रेस्क्यू हो रहे हैं। वहीं, कई जगहों पर तो सांप आने और जाने का पता नहीं लग पाता। ऐसे में इनकी संख्या का सटीक अनुमान नहीं लगाया जा सकता। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 06 Jul 2024 16:50:29 +0530</pubDate>
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                <title>‘बहादुर’ हुआ घायल</title>
                                    <description><![CDATA[ माना जा रहा है कि लेपर्ड बहादुर का किसी अन्य लेपर्ड के साथ टेरेटरी को लेकर संघर्ष हुआ होगा, जिसमें वह घायल हो गया है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/bahadur-got-injured/article-71739"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-03/transfer2.jpg" alt=""></a><br /><p>ब्यूरो/नवज्योति, जयपुर। झालाना लेपर्ड रिजर्व में लेपर्ड्स को देख पर्यटक रोमांचित हो जाते हैं। इस बीच सफारी के दौरान पर्यटकों को नर लेपर्ड ‘बहादुर’ दिखाई दिया। इसकी एक आंख के पास घाव दिखाई दे रहा है। लेपर्ड का ये फोटो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इसे रविवार का बताया जा रहा है। इसके बाद वन विभाग के अधिकारियों ने इसकी प्रॉपर मॉनिटरिंग के लिए टीम को निर्देश दिए हैं। गौरतलब है कि झालाना में लेपर्ड्स के बीच आए दिन टेरेटरी को लेकर संघर्ष के मामले सामने आते रहते हैं। इस दौरान कई बार लेपर्ड्स घायल भी हो जाते हैं। माना जा रहा है कि लेपर्ड बहादुर का किसी अन्य लेपर्ड के साथ टेरेटरी को लेकर संघर्ष हुआ होगा, जिसमें वह घायल हो गया है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 04 Mar 2024 09:59:21 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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                <title>मुकुंदरा के जंगलों में खो गई टाइगर सफारी</title>
                                    <description><![CDATA[ सितम्बर 2022 में पर्यटकों को जंगल की सैर करवाने के लिए तीन जिप्सी मालिकों ने आवेदन किए थे लेकिन विभाग अब तक उनका रजिस्ट्रेशन भी नहीं करवा सका]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/tiger-safari-lost-in-the-jungles-of-mukundara/article-34522"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-01/12.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व में एक साल बाद भी टाइगर सफारी शुरू नहीं हो सकी। न ही वाहनों का इंतजाम किया जा सका। मुकुंदरा प्रशासन को न तो पर्यटन बढ़ाने में दिलचस्पी है और न ही लोकसभा अध्यक्ष के निदेर्शों की परवाह है। गत वर्ष एक अक्टूबर से सफारी शुरू की जानी थी। जिसकी डेट लाइन खत्म हुए तीन माह बीत गए लेकिन इस दिशा में कोई प्रयास नहीं किए गए। हालात यह हैं, मुकुंदरा में सफारी कब शुरू होगी, इसका जवाब सीसीएफ व डीएफओ के पास भी नहीं है। सितम्बर 2022 में पर्यटकों को जंगल की सैर करवाने के लिए तीन जिप्सी मालिकों ने आवेदन किए थे लेकिन विभाग अब तक उनका रजिस्ट्रेशन भी नहीं करवा सका। दरअसल, स्पीकर ओम बिरला ने गत वर्ष दिल्ली में आयोजित बैठक में वन विभाग को मुकुंदरा में गत एक अक्टूबर से टाइगर सफारी शुरू करने के निर्देश दिए थे। जिसके बाद विभाग ने सफारी के लिए रिजर्व के चार रूट तय किए थे। प्रत्येक रूट पर 4 जिप्सियों की जरूरत है। ऐसे में 4 रूट पर 16 गाड़ियों की आवश्यकता है। जबकि, अभी तक मात्र 3 ही जिप्सी मालिकों ने ही वाहन चलाने के लिए आवेदन किए थे। जिसके रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया अब तक पूरी नहीं हुई।   </p>
<p><strong>बफर जोन के 4 रूटों पर शुरू की जानी है सफारी </strong><br />मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व के बफर जोन में ईको-टूरिज्म का संचालन किया जाना है। इसके लिए वन विभाग ने 4 रूट तय किए हैं। इनमें बोराबांस रेंज में बंधा-बग्गी रोड, अखावा-बलिंडा-बंधा, दूसरा रूट कोलीपुरा रेंज में नागनी चौकी पोस्ट, कालाकोट-दीपपुरा घाटा-कान्या तालाब-नागनी चौकी पोस्ट, तीसरा रूट मंदरगढ़ में बेरियर-मंदरगढ़, तालाब-केशोपुरा-रोझा तालाब होते हुए मंदरगढ़ बेरियर और चौथा रूट दरा रेंज में मौरूकलां-बंजर-रेतिया तलाई-पटपडिया-सावनभादौ एरिया शामिल है। इन क्षेत्र में पर्यटक जंगल सफारी का लुत्फ ले सकेंगे। इसके अलावा चंबल घड़ियाल अभयारण्य और रथकांकरा रेंज में भी पर्यटन रूट खोलने की स्वीकृति दी जाने की जानकारी है।</p>
<p><strong>तय रूट पर नहीं लगाए साइन बोर्ड</strong><br />लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने 22 मार्च 2022 को दिल्ली में आयोजित बैठक में वन अधिकारियों को जल्द से जल्द एमएचटीआर में टाइगर सफारी शुरू करने के निर्देश दिए थे। जिसके बाद वन विभाग ने मुकुंदरा प्रशासन को रूट तय करने के आदेश दिए। इस पर अधिकारियों ने रूट तो तय कर दिए लेकिन सफारी शुरू करने को लेकर वाहनों का इंतजाम नहीं किया गया। साथ ही तय रूटों पर साइन बोर्ड, गाइड सहित अन्य व्यवस्थाओं के लिए प्रयास तक नहीं किए। हालात यह हैं, 4 रूट पर 16 वाहनों की आवश्यकता है, जिसका इंतजाम एक साल बाद भी नहीं किया गया। इधर, मुकुंदरा डीएफओ व सीसीएफ सफारी कब शुरू होगी, इसकी जानकारी न होने का हवाला देकर जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रहे हैं।  </p>
<p><strong>सालभर बाद भी जिप्सियों के नहीं हुए रजिस्ट्रेशन</strong><br />मुकुंदरा टाइगर रिजर्व में पर्यटकों को जंगल सफारी कराने के लिए सितम्बर 2022 में तीन जिप्सी मालिकों ने आवेदन किया था। जिनके रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया पूरी नहीं होने से सफारी की शुरुआत नहीं हो सकी। वहीं, मुकुंदरा अधिकारियों की लापरवाही का आलम यह है कि एक साल बीतने के बाद भी शेष 13 वाहनों का इंतजाम तक नहीं कर सका। वन्यजीव प्रेमियों का कहना है कि वर्तमान हालातों को देखते हुए नए साल में भी सफारी के शुरू होने पर भी संशय है। </p>
<p><strong>16 वाहनों की जरूरत, 3 ही आए आवेदन</strong><br />मुकुंदरा में टाइगर सफारी शुरू करने के लिए 16 वाहनों की जरूरत है, लेकिन अभी तक 3 ही जिप्सी मालिकों के ही आवेदन किए हैं, जिनके एक साल बाद भी रजिस्ट्रेशन नहीं हुए। विभाग ने ओपन टेंडर निकाले थे, जिसके तहत नई गाड़ियां खरीदने की बजाए ठेके पर ही वाहनों का इंतजाम करना है। सफारी के लिए खुली गाड़ियों की डिमांड की जा रही है, उनमें जिप्सी पहली प्राथमिकता है। वहीं, इस तरह के अन्य वाहनों की कीमत 16 लाख हैं, ऐसे में कोई भी यहां महंगी गाड़ियां नहीं लगाना चाहता। </p>
<p><strong>पांच वर्ष से अधिक पुराने नहीं होंगे वाहन</strong><br />जंगल सफारी के लिए उपलब्ध वाहन पांच वर्ष से अधिक पुराने नहीं होंगे। प्रीमियम वाहन के लिए यह अवधि 7 वर्ष की रहेगी। राजस्थान में पंजीकृत वाहनों को ही सफारी के लिए पंजीकृत किया जाएगा। इन वाहनों के रंग भी पर्यावरण के अनुकूल होंगे।</p>
<p><strong>सफारी को लेकर डीएफओ बीजो रॉय से सवाल-जवाब</strong><br />- 2022 में सफारी शुरू होनी थी, जो अब तक क्यों शुरू नहीं हुई?<br /> सफारी शुरू करने के लिए 16 वाहनों की आवश्यकता है, जिसके मुकाबले अभी तक 3 जिप्सी मालिकों ने ही आवेदन किए है, जिनके भी रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया पूरी नही हो सकी। <br />-सफारी शुरू करने में क्या समस्या आ रही है?<br />पर्यटकों को जंगल की सैर कराने के लिए गाड़ियों की उपलब्धता न होना ही सबसे बड़ी समस्या है। <br />-मुकुंदरा में सफारी कब शुरू होगी और वाहनों के रजिस्ट्रेशन में क्या दिक्कत है?<br />सफारी कब शुरू होगी, यह मैं नहीं कह सकता। रही बात वाहनों के रजिस्ट्रेशन की तो इसका जवाब सीसीएफ से लिया जा सकता है।<br />-सफारी शुरू होती है तो टिकट दर क्या रहेगी? <br />जब सफारी शुरू होगी तब इसके बारे में निर्णय किया जाएगा।<br />-सफारी कितनी पारी में करवाई जाएगी?<br /> यहां भी रणथम्भौर टाइगर रिजर्व जैसा ही सुबह-शाम का शेड्यूल रहेगा। <br />- गाइड की नियुक्ति को लेकर क्राइट एरिया क्या रहेगा?<br /> इसका जवाब सीसीएफ से लिया जा सकता है। </p>
<p><strong>सीसीएफ एसपी सिंह ने नहीं दिए इन सवालोें के जवाब </strong><br />1.  मुकुंदरा में टाइगर सफारी एक साल बाद भी क्यों शुरू नहीं हुई?   <br />2. पिछले साल 28 सितम्बर तक सफारी के लिए तीन ही जिप्सी मालिकों ने आवेदन किया था, जिनकी अब तक रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया पूरी क्यों नहीं हुई?<br />3. रजिस्ट्रेशन कम्पलीट नहीं होने के पीछे क्या वाहन मालिकों में किराया को लेकर कोई विवाद है? <br />4. मुकुंदरा में कब तक शुरू होगी टाइगर सफारी<br />5. गाड़ियों के इंतजाम के लिए आपकी ओर से क्या प्रयास किए गए? </p>
<p><strong>सफारी को लेकर यह की जानी है व्यवस्था</strong><br />दिव्यांगों के लिए विशेष वाहन की व्यवस्था<br />रिजर्व क्षेत्र में पर्यटकों को जंगल सफारी के लिए प्रत्येक पारी में 16 वाहन उपलब्ध रहेंगे। इनमें से 20 प्रतिशत वाहन 50 लाख रुपए से अधिक कीमत वाले प्रीमियम श्रेणी के होंगे। दिव्यांगों के लिए भी एक विशेष वाहन की व्यवस्था की जाएगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 09 Jan 2023 16:28:20 +0530</pubDate>
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