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                <title>school education - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>स्कूल छोड़ने की दर आधी : भजनलाल सरकार में शिक्षा ने पकड़ी रफ्तार, बजट से मिलेगा नई पीढ़ी को मजबूत आधार</title>
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                        <![CDATA[बजट वर्ष 2026-27 में शिक्षा क्षेत्र को मजबूत आधार देने के लिए प्रारम्भिक शिक्षा के लिए 21 हजार 646 करोड़ रुपये तथा माध्यमिक शिक्षा के लिए 19 हजार 473 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/school-dropout-rate-halved-education-gained-record-pace-under-bhajan/article-143272"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/cm-bhjan-lal-sharma.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान में शिक्षा के क्षेत्र में बड़ा सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में प्रदेश में ड्रॉप आउट रेट में ऐतिहासिक कमी दर्ज की गई है, जिससे शिक्षा व्यवस्था की मजबूती का संकेत मिलता है।</p>
<p>आर्थिक समीक्षा 2025-26 के अनुसार वर्ष 2024-25 में प्राथमिक स्तर पर ड्रॉप आउट रेट 7.6 प्रतिशत से कम होकर 3.6 प्रतिशत रह गई है। उच्च प्राथमिक स्तर पर यह 6.8 प्रतिशत से कम होकर 3.6 प्रतिशत और माध्यमिक स्तर पर 11.1 प्रतिशत से कम होकर 7.7 प्रतिशत हो गई है। वहीं संक्रमण दर में भी  सुधार हुआ है। माध्यमिक से उच्च माध्यमिक में संक्रमण दर 82.6 प्रतिशत से बढ़कर 88.2 प्रतिशत तथा प्राथमिक से उच्च प्राथमिक में 90.7 प्रतिशत से बढ़कर 93.8 प्रतिशत हो गई है।</p>
<p>बजट वर्ष 2026-27 में शिक्षा क्षेत्र को मजबूत आधार देने के लिए प्रारम्भिक शिक्षा के लिए 21 हजार 646 करोड़ रुपये तथा माध्यमिक शिक्षा के लिए 19 हजार 473 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसके साथ ही समग्र शिक्षा अभियान, आरटीई शुल्क पुनर्भरण और पीएमश्री योजना के लिए भी पर्याप्त राशि निर्धारित की गई है।</p>
<p>सरकार ने टेबलेट-लैपटॉप, साइकिल और यूनिफॉर्म वितरण में डीबीटी और ई-वाउचर प्रणाली लागू कर पारदर्शिता और समयबद्धता सुनिश्चित करने की पहल की है। ‘स्कूल टू वर्क’ और ‘स्कूल ऑन व्हील्स’ जैसे नवाचारों के माध्यम से व्यावसायिक एवं समावेशी शिक्षा को नई दिशा देने का प्रयास किया जा रहा है। राज्य सरकार का लक्ष्य गुणवत्तापूर्ण, रोजगारपरक और तकनीक आधारित शिक्षा के जरिए नई पीढ़ी को सशक्त बनाना है, ताकि राजस्थान शिक्षा के क्षेत्र में अग्रणी राज्य के रूप में स्थापित हो सके।</p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 15 Feb 2026 19:00:59 +0530</pubDate>
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                <title>Budget: स्कूल शिक्षा की सुविधा बढ़ेगी, 38 भवन रहित विद्यालयों के भवनों का निर्माण करवाया जाएगा</title>
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                        <![CDATA[क्लास रूम, लैब, लाइब्रेरी एवं टॉयलेट निर्माण के लिए 350 करोड़ रुपए का प्रावधान प्रस्तावित है। साथ ही, 750 विद्यालयों के भवनों की मरम्मत के लिए 100 करोड़ रुपए व्यय किए जाएंगे। ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/budget-school-education-facilities-will-increase-buildings-of-38-school/article-84337"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-07/u1rer17.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। प्रदेश में स्कूल शिक्षा की सुविधां बढ़ाने के लिए 50 नए प्राथमिक विद्यालय खोलने के साथ ही 100 विद्यालयों का क्रमोन्नयन तथा 100 उच्च माध्यमिक विद्यालयों में नवीन विषय शुरू किया जाएगा।</p>
<p>प्रदेश में 4 कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों के छात्रावास भवन, 5 नेताजी सुभाषचन्द्र बोस छात्रावासों तथा 138 भवन रहित विद्यालयों के भवनों का निर्माण करवाया जाएगा। क्लास रूम, लैब, लाइब्रेरी एवं टॉयलेट निर्माण के लिए 350 करोड़ रुपए का प्रावधान प्रस्तावित है। साथ ही, 750 विद्यालयों के भवनों की मरम्मत के लिए 100 करोड़ रुपए व्यय किए जाएंगे। प्रदेश के विभिन्न वंचित वर्गों के विद्यार्थियों को बेहतर आवासीय सुविधाएं उपलब्ध करवाने की दृष्टि से छात्रावास-आवासीय विद्यालयों का निर्माण तथा आधारभूत सुविधाए विकसित की जाएगी। </p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 11 Jul 2024 10:46:51 +0530</pubDate>
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                <title>समय के अनुसार शिक्षा में बदलाव करने की पहल - शासन सचिव, स्कूल शिक्षा ने दिए निर्देश</title>
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                        <![CDATA[कुणाल ने उपलब्ध संसाधनों का अधिकतम सदुपयोग करने, सह-शैक्षणिक गतिविधियों को बढ़ावा देने, रिसर्च का उपयोग करने, नवाचारों को बढ़ावा देने, स्किल डवलपमेंट एवं ब्रांडिंग पर ध्यान देने के निर्देश दिए।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/initiative-to-make-changes-in-education-according-to-time/article-78878"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-05/whatsapp-image-2024-05-22-at-10.07.58.jpeg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। शासन सचिव, स्कूल शिक्षा कृष्ण कुणाल ने कहा कि विकसित राजस्थान के लिए शिक्षा क्षेत्र के हितधारक टाइमलाईन के अनुसार लक्ष्य निर्धारित कर विजन डॉक्यूमेंट तैयार करें। </p>
<p>कुणाल शिक्षा संकुल में शिक्षा क्षेत्र के हितधारकों के साथ विज़न डॉक्यूमेंट विकसित राजस्थान 2047 तैयारी के संबंध में आयोजित बैठक को संबोधित करे रहे थे। उन्होंने उपलब्ध संसाधनों का अधिकतम सदुपयोग करने, सह-शैक्षणिक गतिविधियों को बढ़ावा देने, रिसर्च का उपयोग करने, नवाचारों को बढ़ावा देने, स्किल डवलपमेंट एवं ब्रांडिंग पर ध्यान देने के निर्देश दिए।<br />बैठक में प्रोजेक्ट मेनेजमेंट इकाई द्वारा तैयार प्रजन्टेशन, शिक्षा के क्षेत्र में वर्तमान की चुनौति एवं परिदृश्य पर विस्तृत चर्चा की गई एवं सुझाव आमंत्रित किए गए।</p>
<p>बैठक में शासन सचिव, विज्ञान एवं तकनीकि वी. सरवन कुमार, आयुक्त मिड-डे मील विश्व मोहन शर्मा, आयुक्त कॉलेज शिक्षा  पुखराज सैन, विशिष्ट शासन सचिव, शिक्षा चित्रा गुप्ता सहित संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।</p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 22 May 2024 13:19:49 +0530</pubDate>
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                <title>स्कूली शिक्षा के मामले में राजस्थान के 25 जिलों का स्तर अति उत्तम, सात जिले उत्तम श्रेणी में</title>
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                        <![CDATA[जयपुर, जोधपुर, अजमेर, कोटा, भरतपुर, अलवर, धौलपुर, बारां, झालावाड़, बूंदी, दौसा, सवाई माधोपुर, नागौर, चुरू, झुंझुनू, सीकर, चित्तौड़गढ़, भीलवाड़ा, गंगानगर, बाड़मेर, जालौर, जैसलमेर, हनुमानगढ़, टोंक और राजसमंद अति उत्तम श्रेणी में शामिल है।]]>
                    </description>
                
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/in-the-matter-of-school-education--the-level-of-25-districts-of-the-state-is-excellent--seven-districts-are-in-the-best-category/article-51632"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-07/multipurpose-timeline-infographic-based-on-years-(14).png" alt=""></a><br /><p>नवज्योति ब्यूरो, नई दिल्ली। केन्द्रीय शिक्षा मंत्रालय की एक ताजा रिपोर्ट में राज्य ने स्कूली शिक्षा के मामले में अच्छा प्रदर्शन किया है। जिलों के प्रदर्शन पर आधारित सूचकांक पर जारी हुई रिपोर्ट के अनुसार राज्य के 25 जिलों ने अति-उत्तम श्रेणी में अपना स्थान बनाया है। इसी प्रकार ‘सीखने की क्षमता’ में भी राजस्थान ने बाकी राज्यों के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन किया है।</p>
<p>केन्द्रीय शिक्षा मंत्रालय की रिपोर्ट वर्ष 2020-21 और 2021-22 के लिए है। जो जिलों के प्रदर्शन क्रम निर्धारण सूचकांक पर आधारित है। इसके लिए राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों में साल 2020-21 के दौरान 742 जिलों और साल 2021-22 में 748 जिलों को शामिल किया गया है। यह सूचकांक जिला स्तर पर विद्यालयी शिक्षा प्रणाली के प्रदर्शन का आकलन प्रस्तुत करता है। इस सारी कवायद में करीब 14.9 लाख स्कूल, 95 लाख शिक्षक और विभिन्न सामाजिक एवं आर्थिक पृष्ठभूमि के लगभग 26.5 करोड़ छात्र शामिल हैं।</p>
<p><strong>अति उत्तम श्रेणी में शामिल जिले<br /></strong>जयपुर, जोधपुर, अजमेर, कोटा, भरतपुर, अलवर, धौलपुर, बारां, झालावाड़, बूंदी, दौसा, सवाई माधोपुर, नागौर, चुरू, झुंझुनू, सीकर, चित्तौड़गढ़, भीलवाड़ा, गंगानगर, बाड़मेर, जालौर, जैसलमेर, हनुमानगढ़, टोंक एवं राजसमंद।</p>
<p><strong>उत्तम श्रेणी में शामिल जिले</strong><br />उदयपुर, डूंगरपुर, बांसवाड़ा, प्रतापगढ़, करौली, पाली एवं सिरोही।</p>
<p><strong>इन मापदंडों के आधार पर बना सूचकांक<br /></strong>इसमें स्कूल का परीक्षा परिणाम, प्रभावशाली कक्षा कार्य, स्कूल भवन में बुनियादी ढांचागत सुविधाएं और छात्रों के अधिकार, स्कूल सुरक्षा एवं बाल संरक्षण, डिजिटल लर्निंग एवं प्रशासनिक प्रक्रिया को शामिल किया गया है। इन श्रेणियों को 12 डोमेन में बांटा गया। जिनमें सीखने के परिणाम एवं गुणवत्ता, अधिगम परिणाम, शिक्षक की उपलब्धता एवं व्यावसायिक विकास प्रतिफल, शिक्षण प्रबंधन, शिक्षण संवर्धन गतिविधियां, बुनियादी ढांचा एवं सुविधाएं, छात्रों के लिए अवसर, विद्यालय सुरक्षा और बाल संरक्षण, डिजिटल लर्निंग, धनराशि अभिसरण और उसका उपयोग, सीआरसी प्रदर्शन को बढ़ावा देना, उपस्थिति निगरानी प्रणाली और विद्यालयी नेतृत्व विकास जैसे विभिन्न आयाम शामिल हैं। असल में, संबंधित सूचकांक को 83 संकेतकों में 600 अंकों के आधार पर तैयार किया गया है। जिन्हें कुल छह श्रेणियों में बांटा गया।</p>]]>
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                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>शिक्षा जगत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 12 Jul 2023 18:00:03 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Jaipur]]>
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                            </item>
            <item>
                <title>प्रदेश में स्कूलों की रैंकिंग : पहले स्थान पर जयपुर और दूसरे पर बूंदी</title>
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                        <![CDATA[राजस्थान स्कूल शिक्षा परिषद के उपायुक्त ने अंतिम तीन में रहने वाले जिलों के शिक्षा अधिकारियों को स्थिति सुधारने के लिए हिदायत दी है। मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी एवं पदेन जिला परियोजना समन्वयक को भेजे पत्र में कहा है कि रैंकिंग में अंतिम तीन स्थान वाले बीकानेर, जैसलमेर और अजमेर को सूची में ऊपर लाने के लिए प्राथमिकता से मॉनिटरिंग की जाए।]]>
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                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/ranking-of-schools-in-the-state-jaipur-in-first-place/article-26394"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-10/q-77.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राज्य सरकार शिक्षा का स्तर सुधारने के लिए भले ही बड़े-बड़े दावे कर रही हो, लेकिन इसको राजस्थान स्कूल शिक्षा परिषद की ओर से जारी रैंकिंग आइना दिखा रही है। सितंबर माह की रैंकिंग में पहले स्थान पर जयपुर, दूसरे पर बूंदी, तीसरे पर श्रीगंगानगर, चौथे पर चूरू तथा पांचवें पर सीकर जिला है। वहीं अंतिम तीन स्थानों पर 31वें स्थान पर अजमेर, 32वें पर बीकानेर तथा 33वें पर जैसलमेर जिले का नाम है। बीकानेर को 375 में से 168.07 अंक मिले हैं।  हैरानी की बात है कि शिक्षा विभाग का मुख्यालय यहां पर है और उच्च अधिकारी भी यहीं बैठकर प्रदेश के स्कूलों की दशा सुधारने पर मंथन करते हैं। योजनाएं लागू करते हैं। राजस्थान स्कूल शिक्षा परिषद के उपायुक्त ने अंतिम तीन में रहने वाले जिलों के शिक्षा अधिकारियों को स्थिति सुधारने के लिए हिदायत दी है। मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी एवं पदेन जिला परियोजना समन्वयक को भेजे पत्र में कहा है कि रैंकिंग में अंतिम तीन स्थान वाले बीकानेर, जैसलमेर और अजमेर को सूची में ऊपर लाने के लिए प्राथमिकता से मॉनिटरिंग की जाए। इसके अलावा प्रदेश के जिले एवं ब्लॉक के कमजोर रहे क्षेत्रों में सुधार के लिए संबंधित अधिकारियों के साथ बैठक कर कार्य योजना तैयार की जाए, ताकि आगामी माह में रैंकिंग में अपेक्षित प्रगति हो सके। </p>
<p><strong>हर माह होती है रैंकिंग</strong></p>
<p>राजस्थान स्कूल शिक्षा परिषद की ओर से हर माह स्कूलों की रैंकिंग होती है। इसमें स्कूलों में सफाई, शिक्षकों तथा नामांकन की स्थिति, विद्यार्थियों को मिलने वाली विभिन्न योजनाओं की क्रियान्विति सहित कई ऐसे बिन्दु शामिल हैं जो स्कूलों की रैंकिंग सुधार सकें। इसकी हकीकत जानने के लिए सर्वे किया जाता है। इसके आधार पर रैंकिंग तय होती है।</p>
<p><strong>एक भी जिला प्रथम श्रेणी से पास नहीं</strong></p>
<p>रैंकिंग कुल 375 अंकों की होती है, जिसमें से जिलों को उनके प्रदर्शन के आधार पर अंक मिलते हैं। हैरान करने वाली बात है कि प्रदेश का एक भी जिला ऐसा नहीं है, जिसने प्रथम श्रेणी के अंक हासिल किए हो। पहले नंबर पर रहने वाले जयपुर को भी 375 में से 200.33 यानी 53.42 फीसदी अंक मिले है।</p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>शिक्षा जगत</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 13 Oct 2022 11:30:11 +0530</pubDate>
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                <title>विज्ञान व कृषि संकाय नहीं होने से कला विषय लेना बना होनहार बालकों की मजबूरी </title>
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                        <![CDATA[हरनावदाशाहजी में विज्ञान संकाय और कृषि संकाय नहीं खुलने से होनहार बालक अपने मन में सपने सजाकर रह जाते हैं। क्षेत्र के हजारों बालक बालिकाओं को मजबूरी में कला संकाय लेना पड़ रहा है। ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/baran/due-to-lack-of-science-and-agriculture-faculties--the-compulsion-of-promising-children-to-take-art-subjects/article-17236"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-08/science-and-agriculture-faculty-nahi-hone-se..harnawadashahji-news-baran-1.8.2022.jpg" alt=""></a><br /><p>हरनावदाशाहजी। हरनावदाशाहजी में विज्ञान संकाय और कृषि संकाय नहीं खुलने से होनहार बालक अपने मन में सपने सजाकर रह जाते हैं। क्षेत्र के हजारों बालक बालिकाओं को मजबूरी में कला संकाय लेना पड़ रहा है। छीपाबडौद उपखंड का सबसे बड़ा कस्बा होने के बावजूद भी यहां के बालक बालिकाओं को अपनी इच्छा अनुसार शिक्षा नहीं मिल पा रही है। हरनावदाशाहजी 1919 में प्राथमिक शिक्षा से स्थापित विद्यालय 2022 तक भी भौतिक सुविधाओं से समपन्न नहीं हुआ। यहां कई विषयों के रिक्त पदों के कारण पढ़ाई भी बाधित हो रही है। हरनावदा शाहजी राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में बालक-बालिकाओ का नामांकन तो एक हजार पार होने को है लेकिन यहां अध्ययनरत बालक बालिकाओं को अध्यापन करवाने के लिए दर्जनों विषयाध्यापकों के पद रिक्त पढ़ें हैं। <br /><br /> कई बार विभिन्न आयोजनों पर स्कूल की समस्याओं को लेकर विद्यालय की बैठकों में अभिभावकों का दर्द देखने में आता है। क्षैत्र के जनप्रतिनिधि अपनी बात को सरकार तक पहुंचाने का वादा भी करते हैं लेकिन समस्याएं जस की तस बनी हुई है। 2 वर्ष से कोरोना से विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हुई थी अब विधालय पूरी क्षमता से खुल रहे हैं लेकिन विषयाअध्यापकों की कमी का खामियाजा बालक-बालिकाओ को आज तक भी भुगतना पड़ रहा है। <br /> <br /><strong> भौतिक और शैक्षणिक सुविधाओं को तरसता विद्यालय</strong><br />लम्बे समय बाद यह विद्यालय 1992 में सीनियर स्कूल में क्रमोन्नत हुआ। इस बीच यहां आर्ट फेकल्टी के बाद साईस, कॉमर्स भी खुली परन्तु सुविधाओं के अभाव और पदों की रिक्तता को लेकर पैदा हुई समस्या से छात्रों का रुझान नही हुआ तो साईस, कॉमर्स फैकल्टी बन्द हो गई। अब मात्र आर्ट फैकल्टी शेष है जो भी भौतिक और शैक्षणिक असुविधाओ से जूझ रही है। <br /><br /><strong> विज्ञान संकाय खोलने की मांग</strong><br />हरनावदाशाहजी के राजकीय विद्यालय में वर्षों से विज्ञान संकाय खोलने की मांग लगातार की जा रही है। क्षैत्र के जनप्रतिनिधियों द्वारा सेंकड़ों बार विभिन्न सरकारों को पत्रों के माध्यम से अवगत कराया, मंत्रियों ओर छबड़ा छीपाबड़ौद विधायकों को कई बार लिखित में दिया। विद्यालय समिति द्वारा भी प्रस्ताव बनाकर भेजे जा चुकें है लेकिन उच्चअधिकारियों के कान पू जूं तक नहीं रेंगती। हरनावदाशाहजी विधालय समिति द्वारा विज्ञान संकाय के लिए प्रस्ताव भिजवाए गए लेकिन बारां समग्र शिक्षा परियोजना अधिकारी का कहना है कि प्रस्ताव के बारे में जानकारी नहीं है। <br /><br /><strong>यह पद पडे हैं खाली</strong><br />वर्तमान में विद्यालय में प्रधानाचार्य, संस्कृत व्याख्याता, राजनीतिविज्ञान व्याख्याता, भूगोल व्याख्याता, ऊर्दू, वहीं  द्वितीय श्रेणी के गणित, विज्ञान, अंग्रेजी, लाईब्रेरियन, एएओ, यूडीसी, कम्प्यूटर अनुदेशक, लेबबॉय, चपरासी के पद रिक्त चल रहे हैं। अगले माह तीन ओर अध्यापकों का भी सेवाकाल समाप्त हो जाएगा। ऐसे में वर्तमान में यहां 14 अध्यापक हैं। जिनमें से अगले माह यह संख्या 11 ही रहने वाली है। स्टापिंग पैटर्न के अनुसार यहां विज्ञान में द्वितीय श्रेणी के 2 पद,गणित के 2 पद,अंग्रेजी के 2 पद ओर होने चाहिए। इसी तरह संख्या बल को देखते हुए अंग्रेजी के 3 राजनीतिक विज्ञान के 2 ओर भूगोल के 3 तथा संस्कृत के 1 नये व्याख्याताओ के नवीन पद स्वीकृत हो, विद्यालय में कक्षा एक से आठ तक 425 बच्चे हैं, पेटर्न के अनुसार 255 बच्चों पर 8 अध्यापक होने चाहिए। 425 नामांकन के आधार पर एक से आठ की कक्षा लिए 5 और अध्यापक होने चाहिए। पेटर्न के अनुसार विद्यालय को शिक्षक मिले तो विद्यालय शिक्षा के क्षेत्र में नये कीर्तिमान स्थापित कर सकेगा।<br /><br /><strong>परिणाम ओर खेलों में हासिल है उपलब्धियां</strong><br />सरकार के स्टापिंग पैटर्न को देखें तो यहां पिछले 3 से 5 सालों से अच्छे रहें बोर्ड के परीक्षा परिणामों ओर खेलों की उपलब्धि के साथ कम शैक्षणिक मानवीय संसाधनों के बावजूद 100 प्रतिशत रह रहे रिजल्ट से बालकों के प्रवेश में वृद्धि हो रही है। बैठने को पर्याप्त स्थान नही है। 2019 से बढ़ रहे प्रवेश से 2022 में 985 बालक-बालिका अभी यहां अध्ययनरत है। अब यहां रिक्त पद तो भरे ही जाने चाहिए और छात्र-छात्राओं की सँख्या के आधार पर नए कक्षा-कक्ष सहित व्याख्याताओ के नवीन पद स्वीकृत हो,तो विद्यालय आगे शिक्षा के क्षेत्र में नये कीर्तिमान स्थापित कर सकेगा। <br /><br /><strong>12वीं के बाद घर बैठने पर मजबूर छात्र</strong><br />हरनावदाशाहजी स्कूल गरीब और मध्यम श्रेणी के परिवारों से जुड़ा हुआ है जहां अभी भी लोग गरीबी की रेखा से ऊपर नही उठ पाए। आज भी यहां के विद्यार्थियों को 12 वीं के बाद कॉलेज शिक्षा नही मिल पाती और 12 वीं के बाद छात्राएं तो अधिकतर घर बैठ जाती है। एसडीएमसी के सदस्यों ओर क्षेत्र के ग्रामीण अभिभावकों ने स्कूल में कृषि ओर विज्ञान संकाय खोलने सहित कस्बे में एक महाविद्यालय भी खुले तो ग्रामीणों को उच्च शिक्षा का लाभ मिल सकेगा इसके लिए लगातार मांग की जा रही है।<br /><br /><br />अगले माह एसडीएमसी में प्रस्ताव लेकर शिक्षकों की अतिरिक्त व्यवस्था की जाएगी। गेस्ट फेकल्टी के भी अभी आदेश नहीं आए हैं। आदेश आने पर ओर शिक्षकों की कमी को दूर किया जाएगा।<br /><strong>-  मोहनलाल नागर, कार्यवाहक प्रधानाचार्य, राउमावि, हरनावदाशाहजी।</strong> <br /><br />हरनावदाशाहजी में विज्ञान और कृषि संकाय के प्रस्ताव के बारे में मुझे जानकारी नहीं है। <br /><strong>- रामावतार रावल, समग्र शिक्षा परियोजना अधिकारी, बारां।</strong></p>]]>
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                                            <category>शिक्षा जगत</category>
                                            <category>बारां</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 01 Aug 2022 17:00:29 +0530</pubDate>
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