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                <title>Coaching centers - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>कोचिंग में सेंसर डोर बन रहे मौत का रास्ता, जानें पूरा मामला </title>
                                    <description><![CDATA[फायर अनुभाग ने शुरु की कोचिंग में आग से सुरक्षा की जांच
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/sensor-operated-doors-at-coaching-centers-turning-into-death-traps/article-157951"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/1200-x-600-px)15.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। उत्तर प्रदेश के लखनऊ स्थित अलीगंज की जिस कोचिंग संस्थान में एक दिन पहले आग लगने से 15 लोगों की मौत हुई। उनमें अधिकतर छात्र थे। उस कोचिंग संस्थान में फायर सिस्टम तो था ही नहीं लेकिन सेंसर डोर होने से वे समय पर नहीं खुले। यही बच्चों की मौत का कारण बने। उसी तरह की हालत कोटा शहर में भी है।</p>
<p>कोचिंग नगरी कोटा में जहां सैकड़ों की संख्या में छोटे बड़े कोचिंग संस्थान है। उनमें से अधिकतर बड़े कोचिंग संस्थान जिनमें हजारों बच्च एक साथ मेडिकल व इंजीनियरिंग की तैयारी कर रहे हैं। उन सभी कोचिंग परिसर में प्रवेश करने से लेकर गैलेरी और कक्षा कक्षों तक, ऑफिस स्टाफ के कक्ष समेत अधिकतर स्थानों पर सेंसर डोर लगाए हुए हैं। ये डोर या तो फेस दिखाने पर या कार्ड लगाने पर ही खुलते हैं।</p>
<p>हालांकि कोचिंग संस्थानों ने ये व्यवस्था वहां पढऩे वाले छात्रों व स्टाफ की सुरक्षा के लिए लगाए हुए हैं। जिससे बिना आईडी प्रुफ के कोई भी न तो अंदर प्रवेश कर सकेगा और न ही बाहर निकल सकेगा। लेकिन आग लगने पर धुंआ उठने या आग लगने पर लाइट बंद होने से डोर का सेंसर काम करना बंद कर देता है। जिससे अंदर के लोग न तो बाहर निकल पाते हैं और न ही बाहर के लोग अंदर जा पाते हैं। जिससे धुएं से दम घुटने पर कई लोग मौत का शिकार हो चुके हैं। अलीगंज स्थित कोचिंग संस्थान में भी इसी तरह की घटना ने कई बच्चों की जान ली है।</p>
<p><strong>पहले भी हो चुकी हैं इस तरह की घटनाएं</strong><br />यह पहला मामला नहीं है जब इस तरह की घटना हुई हो। दिल्ली स्थित बेसमेंट लायब्रेरी में पानी भरने पर भी वहां का दरवाजा सेंसर लॉक हो गया था। जिससे वह सय पर नहीं खुल सका और वहां प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे कई लोगों की जान चली गई थी।<br />कोटा में भी कुछ समय पहले एक परिवार ने बच्चों की सुरक्षा के लिए मकान में कमरे को साउंड प्रुफ व दरवाजों को सेंसर लॉक वाला बनाया हुआ था। जिससे माता पिता के घर से बाहर होने व घर में आग लगने पर कमरे का दरवाजा इंटर लॉक हो गया। जिससे वह नहीं खुल सका। साथ ही बच्चों के चिल्लाने की आवाज बाहर तक नहेीं आई। बच्चों की सुरक्षा के लिए की गई यह व्यवस्था ही उनकी मौत का कारण बन गई।इसी तरह से होटल, हॉस्टल या कोचिंग संस्थानों में भी सेंसर लॉक या डिजिटल लॉक वाले डोर मौत का कारण बन सकते हैं।</p>
<p><strong>ऐसे डोर होना गलत</strong><br />नगर निगम के मुख्य अग्निशमन अधिकारी राकेश व्यास ने बताया कि चाहे आग लगने की घटना हो या बरसात में पानी भरने जैसी आपदा। बिल्डिंग में सेनसर व डिजिटल लॉक वाले दरवाजे अक्सर बंद हो जाते हैं। वे बिना किसी कार्ड, फेस रीडर या सेंसर के नहीं खुलते हैं। जबकि आग लगने पर धुएं के कारण लाइट बंद होने पर सेंसर काम करना बंद कर देता है।<br />व्यास ने बताया कि कोचिंग संस्थान हो या हॉस्टल या फिद्दर ऐसी जगह जहां बुजुर्ग लोग रहते हैं। वहां इस तरह के लॉक वाले दरवाजे नहीं होने चाहिए। उन्होंने कहा कि यहां तक कि कई बार कारों में भी सेफ्टी लॉक नहीं खुलने पर कई लोग आग लगने पर उन कारों में ही जिंदा जल चुके हैं। व्यास ने बताया कि जहां भी इस तरह के लॉक व डोर हैं। उन सभी को समझाइश की जाएगी।</p>
<p><strong>कोचिंग में जांच शुरु, नहीं हैं सुरक्षा इंतजाम:</strong><br />सीएफओ व्यास ने बताया कि लखनऊ की घटना के बाद कोटा में भी फायर अनुभाग ने सतर्कता शुरु कर दी है। मंगलवार को एएफओ सीता चौबदार के नेतृत्व में नदी पार लैंक मार्क, बालिता व पाश्र्वनाथ समेत कई जगह पर कोचिंग संस्थान में आग से सुरक्षा के इंतजामों की जांच की गई।<br />एएफओ चौबदार ने बताया कि अधिकतर जगह पर दो से तीन मंजिला कोचिंग संस्थान है। उनमें एक-एक कक्षा में कई-कई बच्चे पढ़ रहे हैं। लेकिन उन कोंिचंग में न तो आग से सुरक्षा के नाम पर फायर सिस्टम है और न ही एनओसी। यहां तक कि प्रवेश व निकास के लिए एक ही दरवाजा है वह भी काफी संकरा है। इतना ही नहीं कक्षा कक्ष में जाने की गैलुरी तक काफी संकरी है। जिससे एक साथ कई बच्चे तक नहीं निकल सकते। ऐसे में कभी कोई हादसा हो जाए तो बच्चों का जीवन कतरे में पड़ सकता है। सीएफओ व्यास ने बताया कि कोचिंग संस्थानों में सुरक्षा जांच का यह अभियान लगातार जारी रहेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 24 Jun 2026 15:32:52 +0530</pubDate>
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                <title>शैक्षणिक संस्थानों में विद्यार्थियों की खुदकुशी पर राज्यों को दिशा निर्देश : कोचिंग सेंटरों का पंजीकरण, छात्रों की सुरक्षा और शिकायत निवारण तंत्र अनिवार्य</title>
                                    <description><![CDATA[सुप्रीम कोर्ट ने शैक्षणिक संस्थानों में छात्रों की खुदकुशी और मानसिक स्वास्थ्य को लेकर देश भर के सभी राज्यों के लिए दिशानिर्देश जारी किया है]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/registration-of-coaching-centers-to-states-on-suicide-of-students/article-121688"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-04/supreme-court--3.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने शैक्षणिक संस्थानों में छात्रों की खुदकुशी और मानसिक स्वास्थ्य को लेकर देश भर के सभी राज्यों के लिए दिशानिर्देश जारी किया है। स्टिस जेबी पारदीवाला की अध्यक्षता वाली बेंच ने सभी राज्यों के दो महीनों के अंदर कोचिंग सेंटरों के लिए सख्त नियम बनाने का आदेश दिया है जिसमें कोचिंग सेंटरों का पंजीकरण, छात्रों की सुरक्षा और शिकायत निवारण तंत्र अनिवार्य होगा।</p>
<p><strong>बच्चों को बैच में बांटने से बचें </strong><br /> सुप्रीम कोर्ट ने कोचिंग सेंटरों को निर्देश दिया कि वो छात्रों को उनके शैक्षणिक प्रदर्शन या पब्लिक शेमिंग के आधार पर बैच में बांटने से बचें क्योंकि इससे छात्रों पर अनावश्यक दबाव पड़ता है। </p>
<p><strong>ये दिए निर्देश</strong></p>
<ul>
<li>कोचिंग सेंटरों को छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए खास उपाय करने होंगे।</li>
<li>सभी राज्य सरकारें कोचिंग सेंटरों की गतिविधियों पर नजर रखेंगे।</li>
<li>आग से सुरक्षा, बिल्डिंग सुरक्षा, आपातकालीन निकास जैसे मानकों का पालन करना होगा। </li>
<li>छात्रों और अभिभावकों की शिकायतों के लिए एक साफ.-सुथरा सिस्टम बनाना होगा।</li>
<li>सभी शैक्षणिक संस्थानों और खासकर कोचिंग सेंटरों को एक समान मानसिक स्वास्थ्य नीति बनानी और लागू करनी होगी। </li>
</ul>
<p>जिन कोचिंग सेंटरों में सौ या उससे ज्यादा छात्र पढ़ते हैं उन्हें कम से कम एक प्रमाणित काउंसलर, मनोवैज्ञानिक या सोशल वर्कर रखना होगा। इस काउंसलर को बच्चों को किशोरों के मानसिक स्वास्थ्य में विशेष ट्रेनिंग होनी चाहिए। जिन कोचिंग सेंटरों में सौ से कम छात्र हैं उन्हें बाहरी मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों के साथ औपचारिक रेफरल सिस्टम बनाना होगा ताकि जरुरत पड़ने पर छात्रों को प्रोफेशनल मदद मिल सके।</p>
<p><strong>कोटा में छात्रों की आत्महत्या पर जताई थी नाराजगी</strong><br />बता दें कि 23 मई को सुप्रीम कोर्ट ने कोटा में छात्रों की आत्महत्या पर राजस्थान सरकार को फटकार लगाई थी। कोर्ट ने राजस्थान सरकार से पूछा था कि छात्र कोटा में ही आत्महत्या क्यों कर रहे हैं। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा था कि अब तक इस साल कोटा में 14 आत्महत्या की खबरें आ चुकी हैं। कोर्ट ने राजस्थान सरकार से पूछा था कि आप राज्य सरकार के रूप में क्या कर रहे हैं। क्या आपने एक राज्य की अवधारणा छोड़ तो नहीं दी है। आपने एफआईआर दर्ज क्यों नहीं किया। आप सुप्रीम कोर्ट के फैसले का पालन नहीं कर रहे हैं। तब राज्य सरकार की ओर से पेश वकील ने कहा था कि इस मामले में एसआईटी का गठन किया जा चुका है जो खुदकुशी के इन मामलों की पड़ताल करेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 26 Jul 2025 14:45:35 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बिना सुरक्षा उपकरणों और मापदण्डों के पावटा में संचालित हो रहे कोचिंग सेंटर</title>
                                    <description><![CDATA[कोचिंग सेन्टरों तक आने जाने के लिए तंग सीढ़ियां हैं व सुरक्षा के नाम पर कोई प्रबंध नहीं किया गया है। आगजनी की घटना के हालातों में यहां अग्निशमन यन्त्र तो दूर की बात पानी तक की भी व्यवस्था नहीं है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/%E0%A4%AC%E0%A4%BF%E0%A4%A8%E0%A4%BE-%E0%A4%B8%E0%A5%81%E0%A4%B0%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B7%E0%A4%BE-%E0%A4%89%E0%A4%AA%E0%A4%95%E0%A4%B0%E0%A4%A3%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%94%E0%A4%B0-%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%AA%E0%A4%A6%E0%A4%A3%E0%A5%8D%E0%A4%A1%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%AA%E0%A4%BE%E0%A4%B5%E0%A4%9F%E0%A4%BE-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%B8%E0%A4%82%E0%A4%9A%E0%A4%BE%E0%A4%B2%E0%A4%BF%E0%A4%A4-%E0%A4%B9%E0%A5%8B-%E0%A4%B0%E0%A4%B9%E0%A5%87-%E0%A4%95%E0%A5%8B%E0%A4%9A%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%97-%E0%A4%B8%E0%A5%87%E0%A4%82%E0%A4%9F%E0%A4%B0/article-17717"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-08/coching-new.jpg" alt=""></a><br /><p> प्रागपुरा। कस्बे में करीब डेढ़ दर्ज कोचिंग सेन्टर हैं जिनमें ना तो कोई सुरक्षा उपकरण  हैं और ना ही पार्किंग का स्पेश है। कोचिंग सेंटर सस्ते किराये के लालच में कस्बे की तंग गलियों में चल रहे हैं। कोचिंग सेंटर संचालक नियमों की धज्जियों की उड़ा रहे हैं, जो कि पढ़ने वाले विद्यार्थियों पर भारी पड़ सकती है। कोचिंग सेंटरों का तंग गलियों में संचालन होने के कारण यहां पढ़ने वाले विद्यार्थियों का आपदाकालीन परिस्थितियों में जान बचाना तक मुश्किल है।</p>
<p><br /><strong>सतर्कता बहुत जरूरी</strong> <br />विद्यार्थियों की सुरक्षा के लिए कोचिंग संचालकों और प्रशासन को सतर्क होना पडेगा। कस्बे में कई स्थानों पर तीसरी व दूसरी मंजिल में चल रहे कोचिंग सेन्टरों तक आने जाने के लिए तंग सीढ़ियां हैं व सुरक्षा के नाम पर कोई प्रबंध नहीं किया गया है। आगजनी की घटना के हालातों में यहां अग्निशमन यन्त्र तो दूर की बात पानी तक की भी व्यवस्था नहीं है। जिम्मेदार प्रशासन यदि समय रहते नहीं चेता तो कस्बे में कोई बड़ा हादसा हो सकता है।</p>
<p><br /><strong>हजारों विद्यार्थी आते हैं पढ़ने</strong><br />पावटा तहसील मुख्यालय होने के साथ सत्ताईसा क्षेत्र का हृदय स्थल है और राजमार्ग पर होने के  कारण यहां 2 हजार से अधिक विद्यार्थी कोचिंग करने आते हैं जिनकी सुरक्षा भगवान भरोसे है। कई कोचिंग सेन्टर तो इतनी तग गलियों में हैं कि यहां तक पैदल पहुंचने में भी परेशानी आती है। इस सम्बन्ध में सबसे उल्लेखनीय बात यह भी है कि कई बार आगजनी की घटनाओं में कोटपूतली या शाहपुरा से दमकल बुलाई जाती है, लेकिन जब तक दमकल आती है तब तक आग पर काबू पा लिया जाता है। इसके अलावा कोचिंग सेन्टरों की ईमारतों पर मोबाइल टावर लग जाने से यहां पढ़ रहे बच्चों व आसपास के क्षेत्र में रेडियेशन का खतरा बढ़ गया है। मोबाइल टावरों से निकलने वाला रेडिएशन जानलेवा बन सकता है। चिकित्सकों का  कहना  है  कि रेडिएशन के कारण विशेष कर छोटे बच्चों के स्वास्थ्य पर वितरित प्रभाव पड़ता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 04 Aug 2022 14:41:59 +0530</pubDate>
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