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                            <item>
                <title>केंद्र सरकार का बड़ा फैसला: इथेनॉल मिले पेट्रोल पर हटाई एक्साइज ड्यूटी, जानें ताजा भाव</title>
                                    <description><![CDATA[पश्चिम एशिया संकट और कच्चे तेल की आपूर्ति बाधाओं के बीच केंद्र सरकार ने इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल को बढ़ावा देने के लिए बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने 22%, 25%, 27% और 30% इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल पर उत्पाद शुल्क और सभी उपकर शून्य कर दिए हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/big-decision-of-central-government-excise-duty-removed-on-petrol/article-156635"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/petrol.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने 22 प्रतिशत, 25 प्रतिशत, 27 प्रतिशत और 30 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल पर उत्पाद शुल्क शून्य कर दिया है। वित्त मंत्रालय की बुधवार देर रात जारी अधिसूचनाओं में कहा गया है कि इन चारों प्रकार के पेट्रोल पर उत्पाद शुल्क शून्य और इससे संबंधित सभी उपकर शून्य कर दिये गये हैं, बशर्ते इनमें मिश्रित पेट्रोल पर नियमों के मुताबिक उत्पाद शुल्क और उपकर तथा इथेनॉल पर वस्तु एवं सेवा कर और उपकर का पूरा भुगतान पहले ही किया जा चुका हो।</p>
<p>सरकार का यह कदम इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल को बढ़ावा देने के लिए है ताकि आपूर्ति संबंधी बाधाओं के बीच कच्चे तेल का आयात कम किया जा सके। पश्चिम एशिया संकट के कारण पिछले कुछ समय से दुनिया भर में कच्चे तेल की आपूर्ति को लेकर संकट है। ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य से वाणिज्यिक जहाजों की आवाजाही प्रतिबंधित करने से इस संकट का फिलहाल कोई समाधान निकलता नहीं दिख रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 11 Jun 2026 12:53:51 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>लाल निशान में खुला शेयर बाजार: आईटी शेयरों में जबरदस्त बिकवाली, सेंसेक्स में 900 अंक से ज्यादा गिरावट</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिका-ईरान तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के कारण घरेलू शेयर बाजारों में चौतरफा बिकवाली हुई। शुरुआती कारोबार में बीएसई सेंसेक्स 900 अंक से अधिक लुढ़क गया। टीसीएस और इंफोसिस जैसी दिग्गज आईटी कंपनियों के शेयरों में भारी गिरावट दर्ज की गई, जिससे निफ्टी आईटी सूचकांक करीब 4.5% टूट गया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/stock-market-opened-in-red-heavy-selling-in-it-shares/article-155810"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/share-market3.png" alt=""></a><br /><p>मुंबई। आईटी कंपनियों में जबरदस्त बिकवाली के बीच घरेलू शेयर बाजारों में शुरुआती कारोबार में बुधवार को बड़ी गिरावट देखी गयी और बीएसई का सेंसेक्स 900 अंक से ज्यादा लुढ़क गया। सेंसेक्स 142.11 अंक टूटकर 74,507.73 अंक पर खुला। इसके बाद इसकी गिरावट और बढ़ती गयी। खबर लिखे जाते समय यह 903.39 अंक (1.21 प्रतिशत) नीचे 73,746.45 अंक पर रहा। अमेरिका और ईरान द्वारा एक-दूसरे के खिलाफ मिसाइल दागे जाने के दावों के बाद बाजार में निवेश धारणा कमजोर हुई है। साथ ही कच्चे तेल में उछाल से भारत जैसे तेल आयातक देशों में शेयर बाजारों पर अतिरिक्त दबाव पड़ा है।</p>
<p>बाजार में इस समय चौतरफा बिकवाली देखी जा रही है। सबसे बुरा हाल आईटी सेक्टर का है जिसमें पिछले कुछ दिनों से मजबूती बनी हुई थी। निफ्टी आईटी सूचकांक करीब साढ़े चार प्रतिशत नीचे चल रहा है। रियलटी, वित्त, बैंकिंग, मीडिया, एफएमसीजी और टिकाऊ उपभोक्ता उत्पाद समूहों के सूचकांक भी एक प्रतिशत के करीब या उससे अधिक टूट चुके हैं। सिर्फ ऑटो सेक्टर में हल्की बढ़त है।</p>
<p>नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी-50 सूचकांक भी 67.60 अंक नीचे 23,415.95 अंक पर खुला। खबर लिखे जाते समय यह 227.60 अंक यानी 0.97 प्रतिशत उतरकर 23,255.95 अंक पर था। सेंसेक्स की कंपनियों में टीसीएस का शेयर इस समय साढ़े छह फीसदी, टेक महिंद्रा का सवा चार फीसदी, इंफोसिस का साढ़े तीन फीसदी और एचसीएल टेक्नोलॉजीज का करीब तीन फीसदी नीचे है। चारों दिग्गज आईटी कंपनियां हैं। आईटीसी, इटरनल, बजाज फिनसर्व और एक्सिस बैंक के शेयर भी डेढ़ से ढाई फीसदी तक गिर चुके हैं। मारुति सुजुकी का शेयर फिलहाल बढ़त में है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Wed, 03 Jun 2026 11:23:34 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>गौरव भाटिया का कांग्रेस पर पलटवार: जल्द दो हिस्सों में बंट जाएगी कांग्रेस, राहुल गांधी को बताया भारतीय राजनीति का 'भस्मासुर'</title>
                                    <description><![CDATA[भाजपा प्रवक्ता गौरव भाटिया ने राहुल गांधी को राजनीति का 'भस्मासुर' बताते हुए दावा किया कि कांग्रेस जल्द ही दो टुकड़ों में बंट जाएगी। उन्होंने 'एक साल में सरकार गिरने' के दावे को टूलकिट मॉडल की अराजक सोच बताया। भाटिया ने कहा कि वर्ष 2026 में भारत ने रूस से रिकॉर्ड तेल आयात किया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/gaurav-bhatias-counter-attack-on-congress-congress-will-soon-be/article-154967"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/gaurav.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी को भारतीय राजनीति का 'भस्मासुर' करार देते हुए दावा किया है कि कांग्रेस जल्द ही दो हिस्सों में बंट जाएगी। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता गौरव भाटिया ने सोमवार को पार्टी मुख्यालय में संवाददाता सम्मेलन में कहा कि यह बड़े दुख की बात है कि विपक्ष के नेता ऐसे समय में इस तरह का बयान दे रहे हैें, जब देश मजबूती के साथ चुनौतियों का सामना कर रहा है। उन्होंने कहा, "जहां इस वैश्विक संकट के दौरान कई देशों की अर्थव्यवस्थाएं कमज़ोर हुई हैं, वहीं दूसरी ओर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत इस वैश्विक चुनौती का मज़बूती से सामना कर रहा है। हमारी अर्थव्यवस्था मज़बूत है।"</p>
<p>उन्होंने कहा कि एक 'टूलकिट मॉडल' जो विनाशकारी, अराजक, अपरिपक्व और मूर्खतापूर्ण है तथा राहुल गांधी के दिमाग की उपज है। यह एक बार फिर सामने आया है जब राहुल गांधी ने दावा किया कि केन्द्र की मोदी सरकार एक साल के अंदर गिर जाएगी। उन्होंने राहुल गांधी पर अराजकता फैलाने का आरोप लगाते हुए कहा, "अगर आपका मकसद अराजकता फैलाना है, तो हमारा संकल्प भारत को और भी ज़्यादा मज़बूत बनाना है। आप आगे बढ़ें और अपनी पूरी ताकत लगा दें। हमने भारत को और भी आगे ले जाने का मन बना लिया है।"</p>
<p>भाजपा प्रवक्ता ने दावा किया कि यह सरकार स्थिर और मज़बूत भी है प्रवक्ता ने दावा किया कि जल्द ही कांग्रेस दो हिस्सों में बंट जाएगी और कांग्रेस के नेता भी विपक्ष के नेता द्वारा ऐसे भारत-विरोधी और अशांति फैलाने वाले बयान दिए जाने के पक्ष में नहीं हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस यह गलत जानकारी फैला रही है कि भारत अमेरिकी दबाव के कारण रूस से कच्चा तेल आयात नहीं कर रहा है। उन्होंने कहा, "हम देश के हित में ही फैसले लेंगे। यह बात बिल्कुल साफ है। हम किसी के दबाव में काम नहीं करते।"</p>
<p>उन्होंने कहा कि राजग के शासन में पिछले चार पांच वर्षों में रूस से 30 प्रतिशत तक कच्चे तेल का आयात किया गया है जबकि संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) के शासन में यह आंकड़ा केवल एक प्रतिशत था। उन्होंने कहा, "साल 2026 में हमने रूस से सबसे ज़्यादा कच्चे तेल का आयात किया। रूसी तेल के आयात से देश को लगभग 20-25 अरब डॉलर की बचत हुई है। जब हमने रूसी तेल आयात करने का फैसला किया था, तो उसी राहुल गांधी और कांग्रेस ने इस फैसले का विरोध किया था।"</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 25 May 2026 18:51:25 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>कांग्रेस का केंद्र सरकार पर हमला: सोने-चांदी पर आयात शुल्क बढ़ाने से ज्वेलरी क्षेत्र पर गंभीर संकट, सुरजेवाला ने की विशेष आर्थिक राहत पैकेज की मांग</title>
                                    <description><![CDATA[कांग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला ने सोने पर आयात शुल्क 6% से बढ़ाकर 15% करने के फैसले को ज्वेलरी उद्योग पर हमला बताया है। उन्होंने 3.5 करोड़ स्वर्णकारों और कारीगरों के लिए विशेष आर्थिक पैकेज की मांग की। कांग्रेस का आरोप है कि सरकार की नीतियां MSME क्षेत्र को बर्बाद कर तस्करी को बढ़ावा दे रही हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/congress-attacks-central-government-serious-crisis-in-jewelery-sector-due/article-153933"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/randeep-singh1.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस ने केंद्र सरकार के सोने के गहने नहीं खरीदने की सलाह और सोने-चांदी पर आयात शुल्क बढ़ाने के फैसले को ज्वेलरी उद्योग पर हमला बताते हुए सरकार से 3.5 करोड़ से अधिक सुनारों, स्वर्णकारों, कारीगरों और छोटे कारोबारियों के लिए विशेष आर्थिक राहत पैकेज देने की मांग की है। कांग्रेस महासचिव एवं सांसद रणदीप सिंह सुरजेवाला ने शुक्रवार को यहां पार्टी मुख्यालय में संवाददाता सम्मेलन में कहा कि केंद्र सरकार की ओर से सोने के गहने नहीं खरीदने की अपील तथा सरकार के सोने और चांदी पर आयात शुल्क छह प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत करने से ज्वेलरी क्षेत्र पर गंभीर संकट आ गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि इससे 3.5 करोड़ से अधिक सुनारों, स्वर्णकारों, दुकानदारों, व्यापारियों, कारीगरों और कामगारों की आजीविका प्रभावित होने वाली है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि देश में स्वर्ण आभूषण सांस्कृतिक, सामाजिक और धार्मिक परंपराओं का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं और करोड़ों महिलाओं के लिए आर्थिक सुरक्षा का माध्यम भी हैं। यह देश में 90 प्रतिशत से अधिक ज्वेलरी कारोबार एमएसएमई क्षेत्र से जुड़ा है, जिससे करोड़ों लोगों की रोजी-रोटी चलती है। सुरजेवाला ने आरोप लगाया कि सोने के गहने नहीं खरीदने की सलाह और आयात शुल्क में बढ़ोतरी से ज्वेलरी कारोबार पर दोहरी मार पड़ेगी तथा इससे तस्करी बढ़ने की आशंका भी है। उनका कहना था कि केंद्र सरकार के पहले ही नोटबंदी, कर नीतियों, जीएसटी और अनिवार्य हॉलमार्किंग जैसे फैसलों से यह क्षेत्र प्रभावित रहा है।</p>
<p>उन्होंने सरकार से स्वर्ण आभूषण उद्योग से जुड़े 3.5 करोड़ सुनारों, स्वर्णकारों, दुकानदारों, व्यापारियों, कारीगरों और कामगारों के लिए विशेष आर्थिक राहत पैकेज की तत्काल घोषणा करने की मांग है ताकि वे सरकार की नीतियों से उत्पन्न संकट से उबर सकें। कांग्रेस ने यह भी मांग की कि सोने पर आयात शुल्क बढ़ाने के बजाय घरेलू गोल्ड मोबिलाइजेशन, रिसाइक्लिंग, ‘आइडियल गोल्ड स्टॉक्स’ के उपयोग तथा आयकर कानून में संशोधन कर परिवारों को अपनी पसंद के ज्वेलर्स को सोना उधार देने की अनुमति जैसे विकल्पों पर विचार किया जाए। पार्टी ने कहा कि वह इस मुद्दे को संसद से सड़क तक उठाएगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 15 May 2026 14:50:09 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>खाद्य तेल की खपत कम करने की पीएम मोदी की अपील का स्वागत, आत्मनिर्भर भारत की दिशा में बड़ा कदम</title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री की खाद्य तेल उपभोग कम करने की अपील का व्यापारिक संगठनों ने स्वागत किया है। भारत अपनी खपत का 60% आयात करता है। राजस्थान, जहाँ सरसों उत्पादन 60 लाख टन तक पहुँच चुका है, अब 120 लाख टन का लक्ष्य रखकर देश को आयात मुक्त और खाद्य तेल में आत्मनिर्भर बनाने की ओर अग्रसर है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/pm-modis-appeal-to-reduce-consumption-of-edible-oil-welcomed/article-153459"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/raja.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा खाद्य तेल के उपभोग को कम करने की अपील का व्यापारिक और औद्योगिक संगठनों ने स्वागत किया है। भारतीय उद्योग व्यापार मंडल के राष्ट्रीय अध्यक्ष बाबू लाल गुप्ता ने कहा कि वैश्विक संकट और बढ़ती आयात निर्भरता के दौर में देश को आत्मनिर्भर बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ना होगा। देश में प्रतिवर्ष लगभग 255 लाख टन खाद्य तेल की खपत होती है, जिसमें से करीब 145 लाख टन तेल आयात किया जाता है। भारत में पॉम ऑयल मुख्य रूप से इंडोनेशिया और मलेशिया से, सोयाबीन ऑयल अमेरिका और ब्राजील से तथा सनफ्लावर ऑयल रूस और यूक्रेन से आयात होता है। </p>
<p>ऐसे में वैश्विक परिस्थितियों का सीधा असर भारतीय बाजार और उपभोक्ताओं पर पड़ता है। बाबू लाल गुप्ता ने कहा कि राजस्थान ने सरसों उत्पादन के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। राज्य में सरसों का उत्पादन पहले 30 लाख टन था, जो बढ़कर 60 लाख टन तक पहुंच चुका है और भविष्य में इसे 120 लाख टन तक ले जाने की क्षमता है। उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की कि राजस्थान को “सरसों उत्पादक राज्य” के रूप में विशेष पहचान दी जाए, ताकि किसानों को प्रोत्साहन मिल सके और देश खाद्य तेल के मामले में आत्मनिर्भरता की ओर तेजी से बढ़ सके। उन्होंने कहा कि यदि देश में घरेलू उत्पादन को बढ़ावा दिया जाए और खाद्य तेल के अनावश्यक उपभोग को नियंत्रित किया जाए तो विदेशी आयात पर निर्भरता कम होगी तथा देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बिजनेस</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 11 May 2026 18:29:15 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर पर : ऐतिहासिक निचले स्तर पर, 95 रूपए प्रति डॉलर</title>
                                    <description><![CDATA[अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में 6.5% के उछाल और डॉलर सूचकांक में मजबूती से रुपया धराशायी हो गया। गुरुवार को भारतीय मुद्रा 44 पैसे टूटकर 95.32 प्रति डॉलर के अपने सर्वकालिक निचले स्तर पर पहुंच गई। पश्चिम एशिया संकट और महंगे आयात ने मुद्रा बाजार में भारी दबाव पैदा कर दिया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/business/rupee-hits-record-low-at-historic-low-of-rs-95/article-152159"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/dollar-vs-rupee2.png" alt=""></a><br /><p>मुंबई। अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल में तेजी और डॉलर की मजबूती से अंतरबैंकिंग मुद्रा बाजार में रुपया एक बार फिर 95 डॉलर प्रति बैरल के पार निकलते हुए नये निचले स्तर तक उतर गया। पिछले कारोबारी दिवस पर भारतीय मुद्रा 20 पैसे गिरकर 94.88 रुपये प्रति डॉलर के रिकॉर्ड निचले स्तर पर बंद हुई थी। रुपये पर आज शुरू से ही दबाव रहा। यह 13 पैसे नीचे 95.01 रुपये प्रति डॉलर पर खुला और इसके बाद सीधा फिसलता हुआ 44 पैसे लुढ़ककर फिलहाल 95.32 रुपये प्रति डॉलर पर है।</p>
<p>बीच कारोबार में पहली बार रुपया इतना कमजोर हुआ है। इससे पहले 27 मार्च को यह 95.2275 रुपये प्रति डॉलर तक उतरा था। पश्चिम एशिया संकट के कारण कच्चा तेल आज साढ़े छह प्रतिशत चढ़कर 125 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया। इससे रुपये पर दबाव है। दुनिया की अन्य प्रमुख मुद्राओं के बास्केट में डॉलर सूचकांक में 0.1 प्रतिशत की तेजी से भी भारतीय मुद्रा कमजोर हुई है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 30 Apr 2026 11:23:53 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>डॉलर के मुकाबले रुपया 10 पैसे टूटा : 94.11 पर कर रहा कारोबार, बाजार में बढ़ी हलचल</title>
                                    <description><![CDATA[अंतर्राष्ट्रीय बाजार में डॉलर की मजबूती और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के कारण रुपया 10 पैसे टूटकर 94.11 के स्तर पर पहुंच गया है। 30 मार्च के बाद यह पहली बार है जब भारतीय मुद्रा इतनी कमजोर हुई है। ब्रेंट क्रूड के 103 डॉलर तक पहुँचने से रुपये पर दबाव बरकरार है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/business/rupee-fell-by-10-paise-against-dollar-trading-at-9411/article-151532"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/dollar-and-rupee.png" alt=""></a><br /><p>मुंबई। अंतरबैंकिंग मुद्रा बाजार में रुपया शुक्रवार को 10 पैसे टूटकर 94.11 रुपये प्रति डॉलर पर खुला। रुपया 30 मार्च के बाद पहली बार 94 प्रति डॉलर से अधिक कमजोर हुआ है। भारतीय मुद्रा में यह लगातार चौथी गिरावट है। रुपये पर आज शुरू से ही दबाव रहा। दुनिया की अन्य प्रमुख मुद्राओं की तुलना में डॉलर सूचकांक आज 0.10 प्रतिशत मजबूत हुआ। साथ ही अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल में करीब एक फीसदी की तेजी रही और लंदन का ब्रेंट क्रूड वायदा 103 डॉलर प्रति बैरल के पास पहुंच गया। इन दोनों कारकों से भारतीय मुद्रा दबाव में रही।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 24 Apr 2026 12:58:46 +0530</pubDate>
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                <title>कांग्रेस महासचिव का हमला, बोलें-भारत कांग्रेस व्यापार समझौते के तहत हम जरूरत का 52 प्रतिशत तेल नहीं खरीद सकेंगे </title>
                                    <description><![CDATA[कांग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला ने आरोप लगाया कि अमेरिका के साथ नए समझौते के तहत भारत अब रूस से सस्ता कच्चा तेल नहीं खरीद पाएगा। इससे देश को भारी आर्थिक नुकसान होगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/congress-general-secretarys-attack-india-congress-will-not-be-able/article-143383"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/1200-x-600-px)-(15)1.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस ने कहा है कि हाल ही में अमेरिका के साथ हुए व्यापारिक समझौते के तहत जो शर्त रखी गयी है कि उसके तहत भारत, रूस से कच्चा तेल नहीं खरीदेगा और इस शर्त के बाद भारत अपनी जरूरत का 52 प्रतिशत कच्चा तेल अब नहीं खरीद सकेगा जिससे देश को भारी आर्थिक नुकसान होगा। </p>
<p>कांग्रेस महासचिव तथा पार्टी के राज्यसभा सदस्य रणदीप सिंह सुरजेवाला ने सोमवार को यहां पार्टी मुख्यालय में संवाददाता सम्मेलन में कहा कि अमेरिका के राष्ट्रपति ने छह फरवरी को एक आदेश में कहा है कि भारत ने वादा किया है कि वह रूस से कच्चा तेल नहीं खरीदेगा और अगर खरीदता है तो अमेरिका इस पर निगरानी रखेगा। निगरानी में यदि पाया जाता है कि भारत ने प्रत्यक्ष या परोक्ष से रूस से तेल खरीदा है तो भारत पर सारी टैरिफ पैनल्टी लागू कर दी जाएगी।</p>
<p>उन्होंने कहा, 14 फरवरी को अमेरिकी विदेश मंत्री ने भी यही बात दोहराई है। उन्होंने एक अंतरराष्ट्रीय मंच पर कहा है कि भारत ने वादा किया है कि वह रूस से तेल नहीं खरीदेगा। इस शर्त के अनुसार भारत अब अमेरिका के कहने पर रूस से भी कच्चा तेल नहीं खरीद सकेगा। इससे पहले अमेरिका के कहने पर भारत ने ईरान से कच्चे तेल की खरीद बंद कर दी थी।</p>
<p>रणदीप​ सिंह सुरजेवाला ने एक आंकड़ा देते हुए बताया, रूस तथा ईरान, दोनों देशों से भारत रुपए में तेल खरीदते था और इससे हमारा पैसा बचता था। भारत कच्चा तेल रूस से 40 प्रतिशत और 11 प्रतिशत ईरान से खरीदता था लेकिन ईरान से तेल खरीद पर अमेरिका ने प्रतिबंध लगाया है तो भारत ने उस प्रतिबंध को आसानी से मान लिया है। अब यह समझौता कर लिया गया है कि भारत रूस से भी तेल नहीं खरीद सकता है। इस तरह से भारत अपनी जरूरत का 52 प्रतिशत तेल का आयात नहीं कर सकेगा।</p>
<p>उन्होंने कहा कि भारत बराबर रूस तथा ईरान से कच्चा तेल खरीदता रहा है और इन दोनों देशों से भारत को सस्ता कच्चा तेल मिलता था। इसी का परिणाम है कि पिछले चार साल में भारत ने 15 लाख 24 हजार करोड का कच्चा तेल खरीदा और इससे भारत को एक लाख 81 हजार करोड़ रुपए की बचत हुई है लेकिन अब अमेरिका के साथ समझौते के बाद भारत सस्ता तेल नहीं खरीद सकेगा और इस खरीद में बचत नहीं कर सकेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 16 Feb 2026 16:34:45 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>भारत ने अफगानिस्तान को शुरू किया दवाओं का एक्सपोर्ट</title>
                                    <description><![CDATA[पाकिस्तान की दवाओं की गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए तालिबान सरकार ने भारत से दवाओं का आधिकारिक आयात शुरू किया है। शुरुआत में 25 तरह की दवाएं मंगाई जाएंगी। इससे अफगान स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूती मिलने की उम्मीद है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/india-started-exporting-medicines-to-afghanistan/article-136212"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/india-paksitan-and-afganistan.png" alt=""></a><br /><p>काबुल। अफगानिस्तान की तालिबान सरकार ने पाकिस्तान पर प्रतिबंध लगाने के बाद अब भारत से दवाओं का आयात शुरू कर दिया है। तालिबान सरकार ने आरोप लगाया था कि पाकिस्तान की दवाओं की गुणवत्ता खराब है और वे अफगान लोगों पर बुरा प्रभाव डाल रही हैं। इसके बाद तालिबान ने पाकिस्तान से दवाओं के आयात पर प्रतिबंध लगा दिया था। अब काबुल की एक प्राइवेट फर्म के प्रतिनिधियों ने एक जानी-मानी भारतीय कंपनी के ब्रांच ऑफिस के उद्घाटन के साथ भारत से अफगानिस्तान में दवाओं के ऑफिशियल इंपोर्ट शुरू होने की घोषणा की है।</p>
<p><strong>25 तरह की दवाएं मंगा रहा अफगानिस्तान:</strong></p>
<p>हुर्रियत रेडियो इंग्लिश के पोस्ट के अनुसार, शुरूआती दौर में, 25 तरह की दवाएं इंपोर्ट की जाएंगी। इसमें भविष्य में अफगानिस्तान की जरूरतों को पूरा करने के लिए इस प्रक्रिया को बढ़ाने की योजना है। दूसरी ओर, अफगानिस्तान फार्मास्युटिकल सर्विसेज यूनियन के सदस्यों ने पुष्टि की कि देश में फिलहाल 400 से ज्यादा कंपनियां दवाओं के इंपोर्ट में लगी हुई हैं, जो हेल्थ स्टैंडर्ड के हिसाब से अच्छी क्वालिटी की दवाएं हासिल करने की कोशिश कर रही हैं।</p>
<p><strong>अफगानिस्तान को दवा देता रहेगा भारत</strong></p>
<p>रिपोर्ट में बताया गया कि एक भारतीय कंपनी के अधिकारियों ने दवा उत्पादन में अपने 90 सालों के अनुभव का इस्तेमाल करते हुए, हेल्थकेयर सेक्टर में अफगानिस्तान के साथ लगातार सहयोग करने की अपनी प्रतिबद्धता पर जोर दिया। तालिबान प्रशासित सरकार के पाकिस्तान से दवाओं के इंपोर्ट पर रोक लगाने के बाद, इंपोर्ट करने वालों को दवाएं हासिल करने के लिए दूसरे रास्ते खोजने की सलाह दी गई थी, जिसके बाद भारत से दवाओं के इंपोर्ट की यह ठोस पहल शुरू हुई।</p>
<p><strong>पाकिस्तान को बड़ा झटका</strong></p>
<p>पाकिस्तानी दवा निर्माता कंपनियां हर साल अफगानिस्तान को बड़ी मात्रा में दवाओं का निर्यात कर भारी मुनाफा कमाती थीं। उनकी दवाओं की गुणवत्ता निम्नस्तर की होती थी। इससे पाकिस्तानी कंपनियों की लागत कम आती थी, लेकिन वे अफगानिस्तान को पूरी कीमत पर दवाओं का निर्यात करती थीं। इससे अफगान लोगों के स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ता था। अब तालिबान सरकार के प्रतिबंध से पाकिस्तानी दवा निर्माता कंपनियों के लिए एक बड़ा बाजार बंद हो गया है। ऐसे में उन्हें दूसरे अल्टरनेटिव को देखना होगा, जहां माल पहुंचाने का लागत अफगानिस्तान के मुकाबले काफी ज्यादा होगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 17 Dec 2025 11:56:13 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>भारत में पाकिस्तान से माल के आयात पर लगी रोक : हर तरह की वस्तु पर होगी लागू, अधिसूचना जारी</title>
                                    <description><![CDATA[ पहलगाम में पिछले पाकिस्तान द्वारा प्रायोजित आतंकवादी हमले के बाद भारत में पाकिस्तान के खिलाफ कई सख्त प्रतिबंधात्मक कदम उठाए हैं।  ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/prohibition-on-import-of-goods-from-pakistan-in-india-will/article-112883"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-05/rtrer-(4)6.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। भारत सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा और लोक नीति को ध्यान में रखते हुए पाकिस्तान के साथ हर प्रकार के माल के आयात पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। यह पाबंदी पाकिस्तान के ऐसे माल पर भी लागू होगी, जो भारत के रास्ते किसी और जगह भेजा जा रहा हो। वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय की एजेंसी विदेश व्यापार महानिदेशालय की अधिसूचना के अनुसार पाकिस्तान में बनी या वहां से निर्यात की जाने वाली सभी वस्तुओं के वहां से सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से किए जाने वाले सभी निर्यात या ऐसे माल को भारत के रास्ते कहीं और भेजे जाने (ट्रांजिट) पर रोक लागू की जाती है।</p>
<p>यह रोक वहां से मुक्त रूप से मंगायी जा सकने वाली या अन्य प्रकार से मंगाई जाने वाली - हर तरह की वस्तु पर लागू होगी। अधिसूचना में कहा गया है कि यह निर्णय राष्ट्रीय सुरक्षा और लोक नीति के हित में लिया गया है। इस निर्णय को लागू करने के लिए विदेश व्यापार नीति 2023 में आवश्यक संशोधन अधिसूचित किए गए हैं। इस प्रतिबंध के किसी भी विकल्प के लिए सरकार से अनुमति अनिवार्य होगी।</p>
<p>जम्मू-कश्मीर में पहलगाम में पिछले पाकिस्तान द्वारा प्रायोजित आतंकवादी हमले के बाद भारत में पाकिस्तान के खिलाफ कई सख्त प्रतिबंधात्मक कदम उठाए हैं।  भारत ने पाकिस्तान को उड़ानों के लिए अपने वायु मार्ग का इस्तेमाल करने से रोक दिया है। वहीं पाकिस्तान ने भी भारत के व्यापार और यात्री एयरलाइनों के लिए अपने वायु मार्ग के इस्तेमाल नहीं करने देने का निर्णय लिया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 03 May 2025 15:49:33 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नए टकराव की ओर बढ़ रही है दुनिया </title>
                                    <description><![CDATA[इसमें दुनिया के 120 देश भागीदार हैं। सेमीकंडक्टर से ज्यादा ट्रेड सिर्फ क्रूड ऑयल, मोटर व्हीकल व तेल का ही ट्रेड होता है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/the-world-moving-towards-a-new-confrontation/article-17860"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-08/untitled-1-copy21.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। अमेरिकी स्पीकर नैन्सी पेलोसी की ताइवान यात्रा के बाद दुनिया एक नए टकराव की ओर बढ़ रही है। यात्रा के बाद अमेरिका और चीन के बीच तनाव बढ़ गया है, जिसके केंद्र में ग्लोबल सेमीकंडक्टर ट्रेड पर वर्चस्व बनाना है। ऐसा अनुमान है कि ग्लोबल सेमीकंडक्टर कैपेसिटी में अकेले ताइवान की 20 फीसदी हिस्सेदारी होगी। दूसरी ओर अमेरिका और चीन सेमीकंडक्टर के सबसे बड़े उपभोक्ताओं में से हैं। बोस्टन कंसल्टिंग ग्रुप की एक रिपोर्ट के अनुसार सेमीकंडक्टर दुनिया में चौथा सबसे ज्यादा ट्रेड होने वाला प्रोडक्ट है। इसमें दुनिया के 120 देश भागीदार हैं। ट्रेड सिर्फ क्रूड ऑयल, मोटर व्हीकल व तेल का ही ट्रेड होता है। महामारी से पहले साल 2019 में टोटल ग्लोबल सेमीकंडक्टर ट्रेड की वैल्यू 1.7 ट्रिलियन डॉलर पर पहुंच गई थी। चीन सेमीकंडक्टर के डिजाइन व मैन्यूफैक्चरिंग में काफी पीछे है, लेकिन चिप वाली डिवाइसेज के प्रोडक्शन में चीन की हिस्सेदारी 35 फीसदी है। अमेरिका सेमीकंडक्टर बेस्ड डिवाइसेज का सबसे बड़ा उपभोक्ता है और इन्हें बनाने वाली 33 फीसदी कंपनियों का हेडक्वार्टर अमेरिका में ही है। बोस्टन कंसल्टिंग ग्रुप की रिपोर्ट के अनुसार सेमीकंडक्टर मैन्यूफैक्चरिंग की पांच सबसे बड़ी फॉन्ड्रीज में से 2 ताइवान में स्थित है।</p>
<p><strong>ताइवान का अमेरिका और चीन के साथ ट्रेड</strong><br />पिछले कुछ सालों के दौरान अमेरिका और चीन दोनों के साथ ताइवान का व्यापार बढ़ा है। 2021 में ताइवान ने अमेरिका को 65.7 बिलियन डॉलर और चीन को 125.9 बिलियन डॉलर के सामानों का निर्यात किया था। अमेरिका के मामले में ग्रोथ की रफ्तार अधिक थी। अमेरिका को ताइवान का निर्यात 29.9 फीसदी बढ़ा था, जबकि चीन के मामले में ग्रोथ की दर 22.9 फीसदी रही थी। सेमीकंडक्टर से केमिकल्स तक के लिए ताइवान पर निर्भर भारत और चीन के बीच बड़े स्तर पर बाइलैटरल ट्रेड होता है। चीन भारत के सबसे बड़े एक्सपोर्ट एंड इम्पोर्ट पार्टनर्स में से एक है। भारत सेमीकंडक्टर से लेकर मशीनरी तक के लिए ताइवान पर निर्भर है। ताइवान से व्यापार बाधित होने पर भारत के स्मार्टफोन, इलेक्ट्रॉनिक और ऑटो सेक्टर के ऊपर तबाह होने का खतरा उत्पन्न हो जाएगा। ताइवान से भारत इलेक्ट्रिकल मशीनरी, इलेक्ट्रिकल उपकरण, प्लास्टिक, मशीन टूल्स और ऑर्गेनिक केमिकल्स खरीदता है। वहीं भारत मिनरल फ्यूल, तिलहन, और लोहा उत्पाद ताइवान को बेचता है।</p>
<p><strong>5476 करोड़ का प्र्रतिमाह आयात करता है भारत</strong><br />भारतीय रिजर्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार, इस साल मई महीने में भारत ने ताइवान से 54.76 अरब रुपए के सामान खरीदे। इससे पहले अप्रैल 2022 में ताइवान से भारत का आयात 44.67 अरब रुपए रहा था। साल 1991 से 2022 के दौरान ताइवान से भारत का औसत आयात 11.04 अरब रुपए रहा है। इस साल मई महीने में भारत का ताइवान से आयात अपने ऐतिहासिक उच्च स्तर पर रहा है। अभी जून और जुलाई के आंकड़े सामने नहीं आए हैं। अप्रैल 1991 में ताइवान से भारत का आयात महज 0.27 अरब रुपए रहा था। यह अब तक के उपलब्ध आंकड़ों में सबसे कम है।</p>
<p><strong>भारत में काम कर रहीं यह कंपनियां</strong><br />भारत में पिछले कुछ समय में ताइवानी कंपनियों की दिलचस्पी बढ़ी है। विस्ट्रॉन कार्प, फॉक्सकॉन टेक्नोलॉजी ग्रुप, पेगाट्रॉन कॉर्प, क्वांटा कम्यूपटर इंक जैसी कई ताइवानी कंपनियों ने पिछले कुछ साल के दौरान भारत में प्लांट लगाए हैं। पहले ये कंपनियां मुख्य तौर पर चीन में प्लांट लगाकर प्रोडक्ट बना रही थीं और उन्हें ग्लोबल मार्केट में सप्लाई कर रही थीं। चीन के साथ ताइवान के संबंधों में आई खटास और चीन में बढ़ती निगरानी के बाद इन कंपनियों ने भारत का रुख किया। आज के समय में तो फॉक्सकॉन यहीं से मेड इन इंडिया आईफोन बना रही है। हालांकि अभी भी भारत में ताइवान की कंपनियों का निवेश काफी कम है। ग्लोबल मार्केट में अभी ताइवान की करीब 11 हजार कंपनियां काम कर रही हैं। इनमें से महज 116 ताइवानी कंपनियों ने ही भारत में पैसे लगाए हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 05 Aug 2022 13:08:09 +0530</pubDate>
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