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                <title>import - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                            <item>
                <title>डॉलर के मुकाबले रुपया 10 पैसे टूटा : 94.11 पर कर रहा कारोबार, बाजार में बढ़ी हलचल</title>
                                    <description><![CDATA[अंतर्राष्ट्रीय बाजार में डॉलर की मजबूती और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के कारण रुपया 10 पैसे टूटकर 94.11 के स्तर पर पहुंच गया है। 30 मार्च के बाद यह पहली बार है जब भारतीय मुद्रा इतनी कमजोर हुई है। ब्रेंट क्रूड के 103 डॉलर तक पहुँचने से रुपये पर दबाव बरकरार है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/business/rupee-fell-by-10-paise-against-dollar-trading-at-9411/article-151532"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/dollar-and-rupee.png" alt=""></a><br /><p>मुंबई। अंतरबैंकिंग मुद्रा बाजार में रुपया शुक्रवार को 10 पैसे टूटकर 94.11 रुपये प्रति डॉलर पर खुला। रुपया 30 मार्च के बाद पहली बार 94 प्रति डॉलर से अधिक कमजोर हुआ है। भारतीय मुद्रा में यह लगातार चौथी गिरावट है। रुपये पर आज शुरू से ही दबाव रहा। दुनिया की अन्य प्रमुख मुद्राओं की तुलना में डॉलर सूचकांक आज 0.10 प्रतिशत मजबूत हुआ। साथ ही अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल में करीब एक फीसदी की तेजी रही और लंदन का ब्रेंट क्रूड वायदा 103 डॉलर प्रति बैरल के पास पहुंच गया। इन दोनों कारकों से भारतीय मुद्रा दबाव में रही।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 24 Apr 2026 12:58:46 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>कांग्रेस महासचिव का हमला, बोलें-भारत कांग्रेस व्यापार समझौते के तहत हम जरूरत का 52 प्रतिशत तेल नहीं खरीद सकेंगे </title>
                                    <description><![CDATA[कांग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला ने आरोप लगाया कि अमेरिका के साथ नए समझौते के तहत भारत अब रूस से सस्ता कच्चा तेल नहीं खरीद पाएगा। इससे देश को भारी आर्थिक नुकसान होगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/congress-general-secretarys-attack-india-congress-will-not-be-able/article-143383"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/1200-x-600-px)-(15)1.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस ने कहा है कि हाल ही में अमेरिका के साथ हुए व्यापारिक समझौते के तहत जो शर्त रखी गयी है कि उसके तहत भारत, रूस से कच्चा तेल नहीं खरीदेगा और इस शर्त के बाद भारत अपनी जरूरत का 52 प्रतिशत कच्चा तेल अब नहीं खरीद सकेगा जिससे देश को भारी आर्थिक नुकसान होगा। </p>
<p>कांग्रेस महासचिव तथा पार्टी के राज्यसभा सदस्य रणदीप सिंह सुरजेवाला ने सोमवार को यहां पार्टी मुख्यालय में संवाददाता सम्मेलन में कहा कि अमेरिका के राष्ट्रपति ने छह फरवरी को एक आदेश में कहा है कि भारत ने वादा किया है कि वह रूस से कच्चा तेल नहीं खरीदेगा और अगर खरीदता है तो अमेरिका इस पर निगरानी रखेगा। निगरानी में यदि पाया जाता है कि भारत ने प्रत्यक्ष या परोक्ष से रूस से तेल खरीदा है तो भारत पर सारी टैरिफ पैनल्टी लागू कर दी जाएगी।</p>
<p>उन्होंने कहा, 14 फरवरी को अमेरिकी विदेश मंत्री ने भी यही बात दोहराई है। उन्होंने एक अंतरराष्ट्रीय मंच पर कहा है कि भारत ने वादा किया है कि वह रूस से तेल नहीं खरीदेगा। इस शर्त के अनुसार भारत अब अमेरिका के कहने पर रूस से भी कच्चा तेल नहीं खरीद सकेगा। इससे पहले अमेरिका के कहने पर भारत ने ईरान से कच्चे तेल की खरीद बंद कर दी थी।</p>
<p>रणदीप​ सिंह सुरजेवाला ने एक आंकड़ा देते हुए बताया, रूस तथा ईरान, दोनों देशों से भारत रुपए में तेल खरीदते था और इससे हमारा पैसा बचता था। भारत कच्चा तेल रूस से 40 प्रतिशत और 11 प्रतिशत ईरान से खरीदता था लेकिन ईरान से तेल खरीद पर अमेरिका ने प्रतिबंध लगाया है तो भारत ने उस प्रतिबंध को आसानी से मान लिया है। अब यह समझौता कर लिया गया है कि भारत रूस से भी तेल नहीं खरीद सकता है। इस तरह से भारत अपनी जरूरत का 52 प्रतिशत तेल का आयात नहीं कर सकेगा।</p>
<p>उन्होंने कहा कि भारत बराबर रूस तथा ईरान से कच्चा तेल खरीदता रहा है और इन दोनों देशों से भारत को सस्ता कच्चा तेल मिलता था। इसी का परिणाम है कि पिछले चार साल में भारत ने 15 लाख 24 हजार करोड का कच्चा तेल खरीदा और इससे भारत को एक लाख 81 हजार करोड़ रुपए की बचत हुई है लेकिन अब अमेरिका के साथ समझौते के बाद भारत सस्ता तेल नहीं खरीद सकेगा और इस खरीद में बचत नहीं कर सकेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 16 Feb 2026 16:34:45 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>भारत ने अफगानिस्तान को शुरू किया दवाओं का एक्सपोर्ट</title>
                                    <description><![CDATA[पाकिस्तान की दवाओं की गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए तालिबान सरकार ने भारत से दवाओं का आधिकारिक आयात शुरू किया है। शुरुआत में 25 तरह की दवाएं मंगाई जाएंगी। इससे अफगान स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूती मिलने की उम्मीद है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/india-started-exporting-medicines-to-afghanistan/article-136212"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/india-paksitan-and-afganistan.png" alt=""></a><br /><p>काबुल। अफगानिस्तान की तालिबान सरकार ने पाकिस्तान पर प्रतिबंध लगाने के बाद अब भारत से दवाओं का आयात शुरू कर दिया है। तालिबान सरकार ने आरोप लगाया था कि पाकिस्तान की दवाओं की गुणवत्ता खराब है और वे अफगान लोगों पर बुरा प्रभाव डाल रही हैं। इसके बाद तालिबान ने पाकिस्तान से दवाओं के आयात पर प्रतिबंध लगा दिया था। अब काबुल की एक प्राइवेट फर्म के प्रतिनिधियों ने एक जानी-मानी भारतीय कंपनी के ब्रांच ऑफिस के उद्घाटन के साथ भारत से अफगानिस्तान में दवाओं के ऑफिशियल इंपोर्ट शुरू होने की घोषणा की है।</p>
<p><strong>25 तरह की दवाएं मंगा रहा अफगानिस्तान:</strong></p>
<p>हुर्रियत रेडियो इंग्लिश के पोस्ट के अनुसार, शुरूआती दौर में, 25 तरह की दवाएं इंपोर्ट की जाएंगी। इसमें भविष्य में अफगानिस्तान की जरूरतों को पूरा करने के लिए इस प्रक्रिया को बढ़ाने की योजना है। दूसरी ओर, अफगानिस्तान फार्मास्युटिकल सर्विसेज यूनियन के सदस्यों ने पुष्टि की कि देश में फिलहाल 400 से ज्यादा कंपनियां दवाओं के इंपोर्ट में लगी हुई हैं, जो हेल्थ स्टैंडर्ड के हिसाब से अच्छी क्वालिटी की दवाएं हासिल करने की कोशिश कर रही हैं।</p>
<p><strong>अफगानिस्तान को दवा देता रहेगा भारत</strong></p>
<p>रिपोर्ट में बताया गया कि एक भारतीय कंपनी के अधिकारियों ने दवा उत्पादन में अपने 90 सालों के अनुभव का इस्तेमाल करते हुए, हेल्थकेयर सेक्टर में अफगानिस्तान के साथ लगातार सहयोग करने की अपनी प्रतिबद्धता पर जोर दिया। तालिबान प्रशासित सरकार के पाकिस्तान से दवाओं के इंपोर्ट पर रोक लगाने के बाद, इंपोर्ट करने वालों को दवाएं हासिल करने के लिए दूसरे रास्ते खोजने की सलाह दी गई थी, जिसके बाद भारत से दवाओं के इंपोर्ट की यह ठोस पहल शुरू हुई।</p>
<p><strong>पाकिस्तान को बड़ा झटका</strong></p>
<p>पाकिस्तानी दवा निर्माता कंपनियां हर साल अफगानिस्तान को बड़ी मात्रा में दवाओं का निर्यात कर भारी मुनाफा कमाती थीं। उनकी दवाओं की गुणवत्ता निम्नस्तर की होती थी। इससे पाकिस्तानी कंपनियों की लागत कम आती थी, लेकिन वे अफगानिस्तान को पूरी कीमत पर दवाओं का निर्यात करती थीं। इससे अफगान लोगों के स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ता था। अब तालिबान सरकार के प्रतिबंध से पाकिस्तानी दवा निर्माता कंपनियों के लिए एक बड़ा बाजार बंद हो गया है। ऐसे में उन्हें दूसरे अल्टरनेटिव को देखना होगा, जहां माल पहुंचाने का लागत अफगानिस्तान के मुकाबले काफी ज्यादा होगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 17 Dec 2025 11:56:13 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भारत में पाकिस्तान से माल के आयात पर लगी रोक : हर तरह की वस्तु पर होगी लागू, अधिसूचना जारी</title>
                                    <description><![CDATA[ पहलगाम में पिछले पाकिस्तान द्वारा प्रायोजित आतंकवादी हमले के बाद भारत में पाकिस्तान के खिलाफ कई सख्त प्रतिबंधात्मक कदम उठाए हैं।  ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/prohibition-on-import-of-goods-from-pakistan-in-india-will/article-112883"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-05/rtrer-(4)6.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। भारत सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा और लोक नीति को ध्यान में रखते हुए पाकिस्तान के साथ हर प्रकार के माल के आयात पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। यह पाबंदी पाकिस्तान के ऐसे माल पर भी लागू होगी, जो भारत के रास्ते किसी और जगह भेजा जा रहा हो। वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय की एजेंसी विदेश व्यापार महानिदेशालय की अधिसूचना के अनुसार पाकिस्तान में बनी या वहां से निर्यात की जाने वाली सभी वस्तुओं के वहां से सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से किए जाने वाले सभी निर्यात या ऐसे माल को भारत के रास्ते कहीं और भेजे जाने (ट्रांजिट) पर रोक लागू की जाती है।</p>
<p>यह रोक वहां से मुक्त रूप से मंगायी जा सकने वाली या अन्य प्रकार से मंगाई जाने वाली - हर तरह की वस्तु पर लागू होगी। अधिसूचना में कहा गया है कि यह निर्णय राष्ट्रीय सुरक्षा और लोक नीति के हित में लिया गया है। इस निर्णय को लागू करने के लिए विदेश व्यापार नीति 2023 में आवश्यक संशोधन अधिसूचित किए गए हैं। इस प्रतिबंध के किसी भी विकल्प के लिए सरकार से अनुमति अनिवार्य होगी।</p>
<p>जम्मू-कश्मीर में पहलगाम में पिछले पाकिस्तान द्वारा प्रायोजित आतंकवादी हमले के बाद भारत में पाकिस्तान के खिलाफ कई सख्त प्रतिबंधात्मक कदम उठाए हैं।  भारत ने पाकिस्तान को उड़ानों के लिए अपने वायु मार्ग का इस्तेमाल करने से रोक दिया है। वहीं पाकिस्तान ने भी भारत के व्यापार और यात्री एयरलाइनों के लिए अपने वायु मार्ग के इस्तेमाल नहीं करने देने का निर्णय लिया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 03 May 2025 15:49:33 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नए टकराव की ओर बढ़ रही है दुनिया </title>
                                    <description><![CDATA[इसमें दुनिया के 120 देश भागीदार हैं। सेमीकंडक्टर से ज्यादा ट्रेड सिर्फ क्रूड ऑयल, मोटर व्हीकल व तेल का ही ट्रेड होता है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/the-world-moving-towards-a-new-confrontation/article-17860"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-08/untitled-1-copy21.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। अमेरिकी स्पीकर नैन्सी पेलोसी की ताइवान यात्रा के बाद दुनिया एक नए टकराव की ओर बढ़ रही है। यात्रा के बाद अमेरिका और चीन के बीच तनाव बढ़ गया है, जिसके केंद्र में ग्लोबल सेमीकंडक्टर ट्रेड पर वर्चस्व बनाना है। ऐसा अनुमान है कि ग्लोबल सेमीकंडक्टर कैपेसिटी में अकेले ताइवान की 20 फीसदी हिस्सेदारी होगी। दूसरी ओर अमेरिका और चीन सेमीकंडक्टर के सबसे बड़े उपभोक्ताओं में से हैं। बोस्टन कंसल्टिंग ग्रुप की एक रिपोर्ट के अनुसार सेमीकंडक्टर दुनिया में चौथा सबसे ज्यादा ट्रेड होने वाला प्रोडक्ट है। इसमें दुनिया के 120 देश भागीदार हैं। ट्रेड सिर्फ क्रूड ऑयल, मोटर व्हीकल व तेल का ही ट्रेड होता है। महामारी से पहले साल 2019 में टोटल ग्लोबल सेमीकंडक्टर ट्रेड की वैल्यू 1.7 ट्रिलियन डॉलर पर पहुंच गई थी। चीन सेमीकंडक्टर के डिजाइन व मैन्यूफैक्चरिंग में काफी पीछे है, लेकिन चिप वाली डिवाइसेज के प्रोडक्शन में चीन की हिस्सेदारी 35 फीसदी है। अमेरिका सेमीकंडक्टर बेस्ड डिवाइसेज का सबसे बड़ा उपभोक्ता है और इन्हें बनाने वाली 33 फीसदी कंपनियों का हेडक्वार्टर अमेरिका में ही है। बोस्टन कंसल्टिंग ग्रुप की रिपोर्ट के अनुसार सेमीकंडक्टर मैन्यूफैक्चरिंग की पांच सबसे बड़ी फॉन्ड्रीज में से 2 ताइवान में स्थित है।</p>
<p><strong>ताइवान का अमेरिका और चीन के साथ ट्रेड</strong><br />पिछले कुछ सालों के दौरान अमेरिका और चीन दोनों के साथ ताइवान का व्यापार बढ़ा है। 2021 में ताइवान ने अमेरिका को 65.7 बिलियन डॉलर और चीन को 125.9 बिलियन डॉलर के सामानों का निर्यात किया था। अमेरिका के मामले में ग्रोथ की रफ्तार अधिक थी। अमेरिका को ताइवान का निर्यात 29.9 फीसदी बढ़ा था, जबकि चीन के मामले में ग्रोथ की दर 22.9 फीसदी रही थी। सेमीकंडक्टर से केमिकल्स तक के लिए ताइवान पर निर्भर भारत और चीन के बीच बड़े स्तर पर बाइलैटरल ट्रेड होता है। चीन भारत के सबसे बड़े एक्सपोर्ट एंड इम्पोर्ट पार्टनर्स में से एक है। भारत सेमीकंडक्टर से लेकर मशीनरी तक के लिए ताइवान पर निर्भर है। ताइवान से व्यापार बाधित होने पर भारत के स्मार्टफोन, इलेक्ट्रॉनिक और ऑटो सेक्टर के ऊपर तबाह होने का खतरा उत्पन्न हो जाएगा। ताइवान से भारत इलेक्ट्रिकल मशीनरी, इलेक्ट्रिकल उपकरण, प्लास्टिक, मशीन टूल्स और ऑर्गेनिक केमिकल्स खरीदता है। वहीं भारत मिनरल फ्यूल, तिलहन, और लोहा उत्पाद ताइवान को बेचता है।</p>
<p><strong>5476 करोड़ का प्र्रतिमाह आयात करता है भारत</strong><br />भारतीय रिजर्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार, इस साल मई महीने में भारत ने ताइवान से 54.76 अरब रुपए के सामान खरीदे। इससे पहले अप्रैल 2022 में ताइवान से भारत का आयात 44.67 अरब रुपए रहा था। साल 1991 से 2022 के दौरान ताइवान से भारत का औसत आयात 11.04 अरब रुपए रहा है। इस साल मई महीने में भारत का ताइवान से आयात अपने ऐतिहासिक उच्च स्तर पर रहा है। अभी जून और जुलाई के आंकड़े सामने नहीं आए हैं। अप्रैल 1991 में ताइवान से भारत का आयात महज 0.27 अरब रुपए रहा था। यह अब तक के उपलब्ध आंकड़ों में सबसे कम है।</p>
<p><strong>भारत में काम कर रहीं यह कंपनियां</strong><br />भारत में पिछले कुछ समय में ताइवानी कंपनियों की दिलचस्पी बढ़ी है। विस्ट्रॉन कार्प, फॉक्सकॉन टेक्नोलॉजी ग्रुप, पेगाट्रॉन कॉर्प, क्वांटा कम्यूपटर इंक जैसी कई ताइवानी कंपनियों ने पिछले कुछ साल के दौरान भारत में प्लांट लगाए हैं। पहले ये कंपनियां मुख्य तौर पर चीन में प्लांट लगाकर प्रोडक्ट बना रही थीं और उन्हें ग्लोबल मार्केट में सप्लाई कर रही थीं। चीन के साथ ताइवान के संबंधों में आई खटास और चीन में बढ़ती निगरानी के बाद इन कंपनियों ने भारत का रुख किया। आज के समय में तो फॉक्सकॉन यहीं से मेड इन इंडिया आईफोन बना रही है। हालांकि अभी भी भारत में ताइवान की कंपनियों का निवेश काफी कम है। ग्लोबल मार्केट में अभी ताइवान की करीब 11 हजार कंपनियां काम कर रही हैं। इनमें से महज 116 ताइवानी कंपनियों ने ही भारत में पैसे लगाए हैं।</p>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Fri, 05 Aug 2022 13:08:09 +0530</pubDate>
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