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                <title>बेटियों का दर्द : बीए के बाद छूट रही पढ़ाई, ग्रामीण क्षेत्रों के सरकारी कॉलेजों में पीजी संकाय ही नहीं</title>
                                    <description><![CDATA[रामगंजमंडी में 27 साल बाद भी शुरू नहीं हुआ पीजी संकाय ,उच्च शिक्षा के लिए 120 किमी सफर या पढ़ाई छोड़ने की मजबूरी।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/the-plight-of-daughters--studies-cut-short-after-ba--no-pg-faculty-in-rural-government-colleges/article-149857"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/1200-x-600-px)-(5)4.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने के दावों के बीच ग्रामीण क्षेत्रों की बेटियां उच्च शिक्षा से वंचित हो रही हैं। सरकारी कॉलेजों में पोस्ट ग्रेजुएशन नहीं होने से बीए के बाद उनकी शिक्षा बीच में ही छूट रही है। ऐसे में छात्राओं के सामने सिर्फ दो ही विकल्प बचते हैं, या तो आगे की पढ़ाई छोड़ दें, या फिर पीजी करने के लिए शहरी कॉलेज आने-जाने के रोजाना 120 से 150 किमी का लंबा सफर तय करें। सुरक्षा, दूरी और पारिवारिक चिंताओं के कारण ज्यादातर बेटियों के सपने यहीं टूट जाते हैं।<br />कोटा जिले के रामगंजमंडी, इटावा, कनवास और सांगोद के राजकीय महाविद्यालयों में पीजी संकाय संचालित नहीं है। बीए के बाद छात्राएं आगे की पढ़ाई जारी रखना चाहती हैं, लेकिन पीजी संकाय नहीं होने के कारण उनका सपना अधूरा रह जाता है। हालांकि, सांगोद कॉलेज में केवल राजनीति विज्ञान विषय में पीजी की सुविधा है, जबकि क्षेत्र की डिमांड भूगोल, इतिहास, हिन्दी व संस्कृत जैसे विषयों में स्नातकोत्तर कक्षाएं शुरू करने की है। नतीजन, छात्राओं को इन्हीं समस्याओं का सामना करना पड़ता है।</p>
<p><strong>27 साल बाद भी पोस्ट ग्रेजुएशन नहीं</strong><br />रामगंजमंडी कॉलेज में स्थापना के 27 साल बाद भी स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम शुरू नहीं हो सके। ग्रामीण क्षेत्र की छात्राओं के सामने सबसे बड़ी समस्या दूरी की है। पीजी की पढ़ाई के लिए उन्हें कोटा शहर के कॉलेजों में जाना पड़ता है, जो गांव-कस्बों से 60 से 75 किलोमीटर दूर हैं। आने-जाने में यह दूरी 120 से 150 किलोमीटर तक पहुंच जाती है। सुरक्षा, समय और खर्च जैसे कारणों से अभिभावक भी बेटियों को इतनी दूर भेजने में हिचकते हैं। ऐसे में बीए के बाद ही पढ़ाई छोड़ने की मजबूरी बन जाती है।</p>
<p><strong>80 से ज्यादा गांवों की बेटियों के टूट रहे सपने</strong><br />राजकीय महाविद्यालय कनवास की स्थापना वर्ष 2018 में हुई थी, जिसे आज 9 साल हो गए। छात्र-छात्राओं की संख्या भी बड़ी लेकिन कॉलेज यूजी से पीजी नहीं हो सका। जबकि, यह महाविद्यालय 80 से ज्यादा गांवों को कवर करता है। ग्रामीणों का कहना है, ऊर्जा मंत्री से लेकर लोकसभा अध्यक्ष तक को ज्ञापन दे चुके हैं। आयुक्तालय को भी कई बार पत्रभेजे हैं। लेकिन, आश्वासन के सिवाए कुछ नहीं मिला।</p>
<p>कनवास कॉलेज में नामांकन अच्छा है। यहां पीजी संकाय होना ही चाहिए। यूजी के बाद पीजी करने के लिए मुझे 120 किमी का सफर तय करना पड़ता है। जेडीबी से हिन्दी में एमए कर रही थी, लेकिन दूरी अधिक होने व अन्य कारणों से बीच में छोड़ना पड़ा। लड़कियों के लिए इतनी दूर आना जाना आसान नहीं है।<br /><strong>-कुसुम राठौर, छात्रा कनवास</strong></p>
<p><br />बीए करने के बाद अधिकतर छात्राएं एमए नहीं कर पाती। शहरी कॉलेज जाने के लिए घंटों बसों का इंतजार और लंबी दूरी के कारण छात्राओं को कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है। यहां हिन्दी, संस्कृत व ज्योग्राफी में पीजी खुलना चाहिए।<br /><strong>-श्रुति राठौर, छात्रा कनवास</strong></p>
<p>बीकॉम करने के बाद मुझे पीजी के लिए रामगंजमंडी से झालावाड़ आना-जाना पड़ा। प्रतिदिन 60 किमी के सफर में कई परेशानियों का सामना करना पड़ा। यूजी में मेरी कई सहपाठी तो पीजी नहीं कर सकी। मजबूरन उन्हें आगे की पढ़ाई छोड़नी पड़ी। कॉलेज को 27 साल हो गए। अब तो सरकार पीजी संकाय शुरू करें।<br /><strong>-रुचि गुर्जर, पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष रामगंजमंडी</strong></p>
<p>धरना, प्रदर्शन, भूख हड़ताल व अनशन तक सब कर लिए, शिक्षा मंत्री सहित आयुक्तालय को अनगिनत ज्ञापन दे दिए इसके बावजूद आज तक एमए व एमकॉम शुरू नहीं हुआ। छात्राओं की ही नहीं छात्रों की भी यूजी के बाद पढ़ाई छूट रही है।<br /><strong>-संस्कार मीणा, पूर्व छात्र रामगंजमंडी कॉलेज</strong></p>
<p><strong>क्या कहते हैं शिक्षक</strong></p>
<p>रामगंजमंडी कॉलेज 1999 में शुरू हुआ था, जिसे वर्तमान में 27 साल होने जा रहे हैं। इसके बावजूद यहां आर्ट्स व कॉमर्स में पीजी संकाय शुरू नहीं हो सका। जबकि, क्षेत्र का यह सबसे बड़ा कॉलेज होने के नाते यहां पीजी संकाय खोले जाने की सख्त आवश्यकता है। विद्यार्थियों को पीजी करने के लिए या तो 30 किमी दूर झालावाड़ या 75 किमी दूर कोटा जाने को मजबूर होते हैं। वहीं, अधिकांश छात्राएं तो पीजी कर नहीं पाती। कॉलेज में एमए व एमकॉम खुलना चाहिए।<br /><strong>-डॉ. संजय गुर्जर, प्राचार्य राजकीय महाविद्यालय रामगंजमंडी</strong></p>
<p>कनवास कॉलेज की स्थापना वर्ष 2018 में हुई थी, जिसके बाद से अब तक पीजी संकाय शुरू नहीं हो सका। जबकि, हिन्दी, संस्कृत, इतिहास व ज्योग्राफी में एमए शुरू किए जाने की सख्त आवश्यकता है। मजबूरन, विद्यार्थियों को पीजी करने के लिए 60 किमी दूर कोटा शहर जाने का ही विकल्प बचता है। प्रतिदिन आने-जाने में 120 किमी दूरी तय करनी पड़ती है। ऐसे में कई छात्राएं तो पीजी कर ही नहीं पाती है। आयुक्तालय को कई बार प्रस्ताव भिजवा चुके हैं। लेकिन, अब तक पीजी नहीं खुला।<br /><strong>-डॉ. ललित नामा, सीनियर असिस्टेंट प्रोफेसर कनवास कॉलेज</strong></p>
<p>संबंधित कॉलेजों से विद्यार्थियों की डिमांड पर प्राचार्य की ओर से प्रस्ताव आते हैं, उन्हें आयुक्ताय भेज दिया जाता है। सरकार हर साल कहीं न कहीं पीजी संकाय खोल रही है। यह सतत प्रक्रिया है जो निरंतर जारी है। हां, यह बात भी सही है कि कोटा ग्रामीण क्षेत्र के अधिकांश कॉलेजों में पीजी संकाय नहीं होने से परेशानी है। हालांकि, समाधान के प्रयास लगातार जारी है।<br /><strong>-प्रो. विजय पंचौली, क्षेत्रिय सहायक निदेशक कॉलेज शिक्षा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 10 Apr 2026 14:57:40 +0530</pubDate>
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                <title>एडमिशन शुरू, बिल्डिंग का अब तक पता नहीं</title>
                                    <description><![CDATA[कैथनू व अकलेरा कॉलेज को मिला अस्थाई भवन। 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/admission-started--building-is-not-known-yet/article-117060"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-06/news29.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। मुख्यमंत्री बजट घोषणा में कोटा संभाग को 4 नए राजकीय कन्या महाविद्यालयों की सौगात तो मिली लेकिन कॉलेज चलाने के लिए अस्थाई भवन अब तक नहीं मिले। जबकि, एडमिशन प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है। हालात यह हैं, जिन महाविद्यालयों में एडमिशन के लिए छात्राएं ऑनलाइन आवेदन कर रहीं हैं, वह कहां और किस बिल्डिंग में संचालित होगा, यह उनको भी पता नहीं है। ऐसे में छात्राएं और अभिभावक असमंजस में है कि दाखिले के बाद पढ़ने कहां जाएंगे।  हालांकि, इन चार राजकीय कन्या महाविद्यालयों में से कोटा के कैथून और झालावाड़ के अकलेरा कॉलेज को अस्थाई भवन मिल चुका है लेकिन बूंदी  के डाबी व कोटा के सुकेत कॉलेज के लिए अब तक अस्थाई बल्डिंग प्रशासन से आवंटित नहीं हुई है। </p>
<p><strong>कोटा में 2 और बूंदी-झालावाड़ में 1-1 नए कॉलेज</strong><br />बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने सत्र 2025-26 में कोटा, बूंदी और झालावाड़ जिले के कस्बों में चार नए कॉलेज खोले हैं। जिनमें कोटा में कैथून व सुकेत, बूंदी में डाबी और झालावाड़ में अकलेरा शामिल हैं। यह कॉलेज एजुकेशन सोसायटी (राजसेस) के अधीन संचालित होंगे। जिनमें फैकल्टी विद्या संबल योजना के तहत लगाई जानी है। हालांकि, अभी तक विद्या संबल शिक्षकों की भर्ती के लिए स्क्रूटनिंग नहीं की गई। लेकिन, सब्जेक्ट अलॉट कर दिए गए हैं। </p>
<p><strong>स्कूलों में चलेंगे कैथून व अकलेरा कॉलेज</strong><br />राजकीय कन्या महाविद्यालय कैथून व अकलेरा  को अस्थाई भवन के रूप में  राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालयों के कुछ कक्षा कक्ष मिले हैं। जिनमें यह कॉलेज संचालित होंगे। यहां पहली पारी में सुबह के समय स्कूल  चलेगा और दूसरी पारी दोपहर को कॉलेज चलाया जाएगा। ऐसे में छात्राओं को पढ़ने के लिए पहले स्कूल की छुट्टी होने का इंतजार करना पड़ेगा। </p>
<p><strong>सुकेत व डाबी के लिए अस्थाई भवन चिन्हित, लेकिन अलॉट नहीं हुए</strong><br />गवर्नमेंट गर्ल्स कॉलेज सुकेत के नोडल प्राचार्य डॉ. संजय गुर्जर का कहना है, कॉलेज संचालन के लिए कस्बे में स्थित सरकारी विद्यालय की पुरानी बिल्डिंग का चयन किया था। यहां पहले स्कूल चलता था, जो अब वह अपनी नई बिल्डिंग में शिफ्ट हो गया है। ऐसे में यह भवन खाली पड़ा है। जिसे सुकेत कॉलेज संचालन के लिए चिन्हित कर अलॉटमेंट के लिए प्रशासन को पत्र लिखा है लेकिन अभी तक अलॉटमेंट नहीं हुआ है। हालांकि, जल्द ही अस्थाई भवन अलॉट होने की उम्मीद है। इसके लिए लगातार प्रयास जारी हैं। इधर, डाबी कॉलेज के नोडल प्रभारी डॉ. संत मीणा ने बताया कि महाविद्यालय के अस्थाई भवन के लिए पंचायत समिति भवन व हाई सैकंडी स्कूल को चिन्हित किया है। इनमें से कोई भी एक भवन मिल जाए, इसके लिए प्रशासन को अवगत किया है लेकिन अभी तक अस्थाई भवन अलॉट नहीं हुए हैं। </p>
<p><strong>कहीं 4 तो कहीं 10 ही आए एडमिशन के आवेदन</strong><br />एडमिशन प्रक्रिया शुरू होने के बावजूद कॉलेजों को संचालन के लिए अस्थाई भवन नहीं मिलने से छात्राएं व अभिभावकों में असमंजस बना हुआ है कि एडमिशन के बाद बालिकाएं पढ़ने कहां जाएंगी। इस अव्यवस्था का असर दाखिले के लिए किए जा रहे आॅनलाइन आवेदनों की संख्या पर भी नजर आ रहा है। प्रवेश प्रक्रिया शुरू हुए चार दिन बीत चुके हैं लेकिन आवेदन नाममात्र ही आ रहे हैं। कैथून कॉलेज के लिए अभी तक मात्र 4, सुकेत में 5, अकलेरा के लिए 10 से अधिक आवेदन ही आए हैं। </p>
<p><strong>फेम्पलेट व बैनर बनवाकर कर रहे प्रचार प्रसार</strong><br />कैथून व सुकेत कॉलेज के नोडल प्राचार्यों का कहना है, नवीन महाविद्यालयों का प्रचार प्रसार किया जा रहा है। इसके लिए बैनर, फलेक्स, फेम्पलेट बनवाकर कस्बों में बंटवाए जाएंगे ताकि लोगों को क्षेत्र में नए कॉलेज खुले जाने की जानकारी मिल सके। प्रचार प्रसार होने के बाद आवेदनों की संख्या में वृद्धि होगी। </p>
<p><strong>क्या कहती हैं छात्राएं</strong><br />हमने सुकेत कन्या महाविद्यालय में दाखिलने के लिए आवेदन तो कर दिया है लेकिन यह कॉलेज कस्बे में कहां और किस बिल्डिंग में चलेगा, इसकी जानकारी ही नही है। ऐसे में मन में कई सवाल उठते हैं। सरकार को जल्द से जल्द कॉलेज बिल्डिंग की स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।<br /><strong>- शोभा कुमारी, छात्रा सुकेत </strong></p>
<p>कस्बे में नया कॉलेज खुला है, इसकी जानकारी मिली थी लेकिन यह कॉलेज किस भवन में चलेगा,इसका पता नहीं है। ऐसे में यहां सुविधाएं भी मिलेंगी या नहीं, इसको लेकर असमंजस बना हुआ है। ऐसे में बूंदी गर्ल्स कॉलेज में एडमिशन के लिए आवेदन करना सही लग रहा है। <br /><strong>- जया, चंचल व अर्पणा, छात्रा डाबी </strong></p>
<p>कैथून कन्या महाविद्यालय कस्बे के पीएम श्री राजकीय कन्या उच्च माध्यमिक विद्यालय में संचालित किया जाएगा। सुबह की पारी में स्कूल चलेगा और दोपहर की पारी में कॉलेज संचालित किया जाएगा। कस्बे की बालिकाओं को उच्च शिक्षा के लिए अब घर से दूर नहीं जाना पड़ेगा। यहां बेटियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सकेगी। छात्राओें की सुविधा के लिए हर संभव प्रयास जारी है। <br /><strong>- प्रो. सीमा चौहान, नोडल प्राचार्य राजकीय कन्या कैथून महाविद्यालय </strong></p>
<p>अकलेरा गर्ल्स कॉलेज, कस्बे में स्थित राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में संचालित होगा। स्कूल के 4-5 कक्ष मिले हैं। जिसमें सुबह 11 बजे से कॉलेज चलाया जाएगा। अभी तक 10 से 15 आवेदन आ चुके हैं। वहीं, कॉलेज निर्माण के लिए 12 से 13 बीघा जमीन भी अलॉट हो गई है, जो बारां-भोपाल बायपास पर स्थित है। <br /><strong>-फूल सिंह गुर्जर, नोडल प्राचार्य राजकीय कन्या महाविद्यालय अकलेरा </strong></p>
<p>डाबी कॉलेज के संचालन के लिए कस्बे में दो अस्थाई भवन चिन्हित किए हैं। अलॉटमेंट के लिए जिला प्रशासन को पत्र भेजा है। हालांकि, अभी तक अस्थाई भवन अलॉट नहीं हुआ। प्रयास जारी है।<br /><strong>- डॉ. संत राम मीणा, नोडल प्रभारी, राजकीय कन्या महाविद्यालय डाबी</strong></p>
<p>सभी नवीन कन्या महाविद्यालयों में प्रवेश प्रक्रिया जारी है। दो कॉलेजों को अस्थाई भवन के रूप में स्कूल में कक्ष मिल चुके हैं, वहीं शेष दो महाविद्यालयों के लिए प्रयास जारी है। बालिकाओं को क्वालिटी एजुकेशन देने के प्रति सरकार गंभीर है। <br /><strong>- डॉ. विजय पंचौली, क्षेत्रिय सहायक निदेशक, आयुक्तालय कोटा </strong></p>
<p><strong>ताकि व्यवस्थाओं में बना रहे विश्वास</strong><br />वर्तमान परिस्थितियों के मध्यनजर सह शिक्षा के कॉलेज खोले जाना अधिक उचित होगा। प्रवेश प्रक्रिया प्रारंभ होने से पहले ही महाविद्यालय संचालन के लिए अस्थाई भवन का आवंटन हो जाना जरूरी है। ताकि, एक निश्चित जगह से विद्यार्थियों की इंक्वायरी पूरी की जा सके। इससे उनके मन में महाविद्यालय के प्रति उठने वाले सवालों के बेहतर जवाब दिया जा सकता है। जिससे व्यवस्था में विश्वास जाग्रत होगा। वहीं, इसके उलट स्थिति होने का असर आवेदनों की संख्या पर देखने को मिलता है। <br /><strong>- प्रो. संजय भार्गव, रिटायर्ड प्रिंसिपल जेडीबी कॉलेज </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
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                <pubDate>Wed, 11 Jun 2025 14:52:12 +0530</pubDate>
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                <title>अब गर्मियों की छुट्टियों में भी खुलेंगे कॉलेज, लगेंगी कक्षाएं </title>
                                    <description><![CDATA[समय पर पूरा होगा कोर्स, परीक्षा की हो सकेगी बेहतर तैयारी ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/now-colleges-will-open-even-during-summer-vacations--classes-will-be-held/article-110540"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-04/257rtrer58.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। गर्मियों की छुट्टियों में अब सरकारी कॉलेजों में सन्नाटा नहीं पसरेगा बल्कि शिक्षक और विद्यार्थियों से परिसर गुलजार रहेगा। इस बार दो महीने के समर विकेशन में कॉलेजों में यूजी व पीजी प्रथम वर्ष के विद्यार्थियों की सैकंड सेमेस्टर की कक्षाएं लगेंगी, ताकि समय पर कोर्स पूरा हो और परीक्षा की  बेहतर तैयारी हो सकेगी। वहीं, शिक्षकों को छुट्टियों में ड्यूटी करने की एवज में परिलाभ दिया जाएगा। इस संबंध में आयुक्तालय की ओर से आवश्यक दिशा-निर्देश जारी हुए हैं।  दरअसल, राज्य के सभी सरकारी कॉलेजों में ग्रीष्मावकाश दो महीने तक रहेगा। ऐसे में विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित न हो और शैक्षणिक सत्र भी पटरी पर लाया जा सके। इसी उद्देश्य से आयुक्तालय ने यह दिशा निर्देश जारी किए हैं।  </p>
<p><strong>यूजी व पीजी सैकंड सेमेस्टर की लगेंगी कक्षाएं</strong><br />राजकीय महाविद्यालयों में 1 मई से 30 जून तक ग्रीष्मावकाश रहेगा। ऐसे में दो महीने तक विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसलिए गर्मियों की छुट्टियों में यूजी प्रथम वर्ष व पीजी प्रिवियस की सैकंड सेमेस्टर की कक्षाएं लगाई जाएगी। इससे विद्यार्थियों का सिलेबस समय पर पूरा हो सकेगा और परीक्षा की तैयारी बेहतर तरीके से हो सकेगी। क्योंकि, परीक्षा आयोजित करवाने के लिए 180 दिन कक्षाएं लगना जरूरी है। जबकि, प्रथम सेमेस्टर में कक्षाएं देरी से शुरू होने के कारण परीक्षा के एन वक्त पर भी सिलेबस पूरे नहीं हो सके थे। ऐसे में विद्यार्थियों को पेपर के दौरान काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। </p>
<p><strong>सेमेस्टर प्रणाली में नहीं ग्रीष्मावकाश </strong><br />आयुक्तालय के क्षेत्रीय सहायक निदेशक प्रो. विजय पंचौली ने बताया कि सेमेस्टर प्रणाली में ग्रीष्मावकाश नहीं रहा है। पहले वार्षिक प्रणाली हुआ करती थी तो कॉलेजों में दो माह का ग्रीष्मावकाश रहता था। लेकिन, सेमेस्टर होने से हर छह माह में पेपर होने हैं। ऐसे में दो माह छुट्टियां रहेंगी तो बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होगी। ऐसे में आयुक्तालय द्वारा जारी दिशा निर्देशों के अनुसार शिक्षकों को रोका जाएगा, ताकि विद्यार्थियों का सिलेबस समय पर पूरा हो सके। हालांकि, आवश्यक कार्य होने पर शिक्षक कुछ दिनों की छुट्टी लेकर जा सकते हैं।  लेकिन, दो महीने अवकाश नहीं ले सकते।  </p>
<p><strong>शिक्षकों को मिलेगा परिलाभ </strong><br />ग्रीष्मावकाश अवधि के दौरान सेमेस्टर कक्षाओं का अध्यापन कार्य, परीक्षा कार्य, वार्षिक परीक्षा व आगामी अकादमिक सत्र के प्रवेश संबंधित कार्यों के लिए प्राचार्य द्वारा आवश्यक कार्यों के लिए संकाय सदस्यों को गर्मी की छुट्टियों में रोक सकते हैं। जिसके लिए शिक्षकों को उपार्जित अवकाश व पीएल का लाभ दिया जाएगा।  हालांकि, संबंधित प्राचार्य को इसके लिए आयुक्तालय से स्वीकृति लेनी होगी। </p>
<p><strong>सेशन पटरी पर लाने की कवायद</strong><br />नाम न छापने की शर्त पर राजकीय गवर्नमेंट कॉलेज कॉलेज के शिक्षक ने बताया कि वर्तमान में कॉलेजों में शैक्षणिक सत्र निर्धारित समय से करीब दो माह देरी से चल रहा है, जो इस कवायद से पटरी पर लाया जा सकता है। बता दें, महाविद्यालयों का शैक्षणिक सत्र 1 जुलाई से शुरू होता है, जो अगले वर्ष की 30 अप्रेल तक रहता है। सत्र नियमित होने से समय पर पेपर होने व परीक्षा परिणाम जारी हो सकेंगे।  </p>
<p>कोटा यूनिवर्सिटी द्वारा इस वर्ष नई शिक्षा नीति के तहत यूजी में प्रथम व द्वितीय वर्ष में सेमेस्टर सिस्टम लागू किया गया है। हर 6-6 माह में पेपर होने हैं। जिसके तहत प्रथम सेमेस्टर के एग्जाम अभी चल रहे हैं, लेकिन राजसेस के कई कॉलेजों में सिलेबस समय पर पूरे नहीं हो सके। इस तरह की परेशानी सैकंड सेमेस्टर में न हो, इस दिशा में आयुक्तालय का दो माह के ग्रीष्मावकाश में कक्षाएं लगाने का कदम छात्र हित में है। <br /><strong>- आशीष मीणा, निवृतमान छात्रसंघ अध्यक्ष, राजकीय महाविद्यालय </strong></p>
<p>ग्रीष्मावकाश में सैकंड सेमेस्टर की कक्षाएं लगने से सिलेबस समय पर पूरा हो सकेगा। परीक्षा की बेहतर तरीके से तैयारी भी हो सकेगी। ऐसे में सरकार का निर्णय सराहनीय है। <br /><strong>- सौरभ कुमार, प्रथम वर्ष, राजकीय कला महाविद्यालय</strong></p>
<p>विद्यार्थियों को क्वालिटी एजुकेशन मिले, यह सरकार की पहली प्राथमिकता है। गर्मियों की छुट्टियों में कक्षाएं लगने से समय पर कोर्स पूरा हो सकेगा। वहीं, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से परीक्षा की बेहतर तैयारी होगी। छुट्टियों में कक्षाएं लेने व अन्य कार्यों में ड्यूटी करने वाले शिक्षकों को नियमानुसार परिलाभ मिलेगा।  वर्तमान में एग्जाम चल रहे हैं, जो मई से पहले पूरे हो जाएंगे। इसके बाद फिर से सैकंड सेमेस्टर की कक्षाएं शुरू होगी फिर जुलाई से एडमिशन प्रक्रिया भी प्रारंभ होगी। <br /><strong>- प्रो. विजय पंचौली, क्षेत्रीय सहायक निदेशक, आयुक्तालय कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 12 Apr 2025 15:58:29 +0530</pubDate>
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                <title>हाड़ौती के 6 कॉलेजों ने आयुक्तालय से मांगा 20 करोड़ रुपए का बजट</title>
                                    <description><![CDATA[आयुक्तालय ने कॉलेजों से तकमिना सहित मांगे थे विकास कार्यों के प्रस्ताव।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/6-colleges-of-hadoti-sought-a-budget-of-rs-20-crore-from-the-commissionerate/article-100608"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-01/257rtrer-(21)3.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। हाड़ौती के 6 सरकारी महाविद्यालयों ने विकास कार्य करवाने के लिए कॉलेज शिक्षा आयुक्तालय से करीब 20 करोड़ का बजट मांगा है। इसके लिए महाविद्यालयों ने पीडब्ल्यूडी से विकास कार्यों का एस्टीमेट बनवाकर प्रस्ताव भेजे हैं। आयुक्तालय से बजट स्वीकृत होने पर कॉलेजों की दशा सुधर सकेगी और काया कलप हो सकेगा। दरअसल, संभाग के कई सरकारी महाविद्यालय जीर्णशीर्ण अवस्था में हैं। यहां बजट के अभाव में विकास कार्यों नहीं हो पा रहे। विद्यार्थी व शिक्षकों को कई तरह की पेरशानियों से जूझना पड़ता है। ऐसे में आयुक्तालय द्वारा प्रस्ताव मांगे जाने पर हाड़ौती के इन 6 कॉलेजों ने अपने-अपने यहां प्रस्तावित कार्यों का तकमीना बनाकर प्रस्ताव भेजे हैं। </p>
<p><strong>बजट के अभाव में सुविधाओं को तरस रहे महाविद्यालय</strong><br />कोटा संभाग के चारों जिलों में करीब 48 सरकारी महाविद्यालय हैं। इनमें से कई महाविद्यालय ऐसे हैं जो बजट के अभाव में जीर्णशीर्ण अवस्था में है। कहीं छात्रों की संख्या के अनुपात में कक्षा-कक्षों की कमी है तो कहीं छतें टपकना, चार दीवारी न होना, दीवारों, छतें व फर्श में सीलन, कैम्पस में झाड़-झंकाड़ का जंगल सहित कई समस्याएं हैं। ऐसे में विद्यार्थियों व शिक्षकों को विभिन्न परेशानियों से जूझना पड़ता है। बजट नहीं होने से कॉलेज प्रशासन आवश्यक विकास कार्य नहीं करवा पा रहे। जिसकी वजह से शिक्षकों को अभिभावकों व क्षेत्रवासियों की नाराजगी झेलनी पड़ती है।</p>
<p><strong>कैम्पस में जंगल, बारिश में कट जाता सम्पर्क</strong><br />झालावाड़ जिले के राजकीय महाविद्यालय मनोहरथाना    के कार्यवाहक प्राचार्य ब्रजमोहन बलाई ने बताया कि कॉलेज कस्बे से करीब 2 किमी दूर है। परिसर में झाड़-झंकाड़ का जंगल हो रहा है। वहीं, चारदीवारी नहीं होने से कई तरह की आशंकाएं रहती हैं। ऐसे में महाविद्यालय की चार दीवारी के लिए 2.7 करोड़ और खेल मैदान के समतलीकरण के लिए 1 करोड़ का एस्टीमेट बनाकर प्रस्ताव आयुक्तालय को भेजा है। कैम्पस के पास नाले व खाळे हैं, जो बरसात में उफन जाते हैं। जिससे कस्बे का कॉलेज से सम्पर्क कट जाता है। ऐसे में विद्यार्थी कॉलेज नहीं पहुंच पाते। बजट मिलने पर कॉलेज की दशा सुधर सकेगी। </p>
<p><strong>3500 से ज्यादा विद्यार्थियों पर 15 क्लास रूम</strong><br />क्षेत्रिय सहायक निदेशक आयुक्तालय कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार राजकीय महाविद्यालय बारां में साइंस, आर्ट्स व कॉमर्स को मिलाकर कुल 3500 से ज्यादा विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। जिनके मुकाबले 15 कक्षा कक्ष हैं। जिसमें लैब भी शामिल है। जिसकी वजह से विद्यार्थियों को बैठने में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में कॉलेज प्रशासन ने 10 नए क्लास रूम बनवाने के लिए 3 करोड़ 38 लाख रुपए का प्रस्ताव भेज बजट मांगा है। </p>
<p><strong>खतरे की जद में बारां गर्ल्स कॉलेज, भवन जर्जर</strong><br />जानकारी के अनुसार, बारां जिला का एकमात्र राजकीय गर्ल्स कॉलेज जर्जर अवस्था में है। यहां छात्राएं व शिक्षक खतरे की जद में हैं। कक्षा-कक्ष, बरामदे, दीवारें क्षतिग्रस्त हो रहे हैं। कॉलेज प्रशासन ने दो मद में बजट मांगा है। बिल्डिंग मरम्मत के लिए 85.19  तथा छत मरम्मत के लिए 17.37 लाख रुपए के एस्टीमेट बनाकर बजट का प्रस्ताव भेजा है। बारिश में कक्षा-कक्षों की छतें टपकती है। जिसकी वजह से कमरों का प्लास्टर उखड़ गए हैं। सभी कमरों की दीवारे क्षतिग्रस्त है। वहीं, कई कमरे ऐसे हैं जिन्हें पीडब्ल्यूडी ने असुरक्षित घोषित कर दिए हैं। ऐसे में छात्राओं व शिक्षक खतरे की जद में रहते हैं। </p>
<p><strong>बरसों पुरानी जेल में चल रहा बूंदी गर्ल्स कॉलेज</strong><br />राजकीय कन्या महाविद्यालय बूंदी, जिले का सबसे बड़ा एकमात्र गर्ल्स कॉलेज है, जो बरसों पुराना जर्जर जेल भवन में संचालित हो रहा है। जिसमें तीन संकाय कला, विज्ञान और कॉमर्स संचालित हो रहा है। यहां तीनों संकाय की कुल 1100 से ज्यादा छात्राएं अध्ययनरत हैं। जिनके मुकाबले मात्र 7 कक्षा-कक्ष और 2 ही लैब हैं। ऐसे में छात्राओं को बिठाने के लिए क्लास रूम की तंगी है। जबकि, कॉलेज परिसर में पुराने जेल बैरक, जेलर आवास, ऑफिस खण्डर स्थिति में बने हुए हैं। जिन्हें ध्वस्त कर नए कक्षा-कक्ष बनाने की जरूरत है। ऐसे में कॉलेज प्राचार्य द्वारा 8 कक्षा-कक्ष और 4 लैब बनाने के लिए 5 करोड़ 14 लाख का पीडब्ल्यूडी से एस्टीमेट बनवाकर आयुक्तालय को प्रस्ताव भेज बजट मांगा है। </p>
<p><strong>अंता कॉलेज ने मांगा 7.50 करोड़ का बजट</strong><br />बारां जिले के राजकीय महाविद्यालय अंता ने 4 कक्षा-कक्ष, 4 लैब, पुस्कालय और केंटीन बनाने के लिए  एस्टीमेट में 7 करोड़ 50 लाख का प्रस्ताव बनाकर आयुक्तालय को भेजा है। इस कॉलेज में तीन संकाय आर्ट्स, साइंस व कॉमर्स संचालित है। वर्तमान में 12 कमरे हैं, जिसके मुकाबले विद्यार्थियों की संख्या 500 है। यहां साइंस व आर्ट्स में ड्राइंग के लिए लैब नहीं होने से विद्यार्थियों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। यदि, आयुक्तालय बजट स्वीकृत करता है तो कॉलेज में विद्यार्थियों की सुविधाओं में विस्तार हो सकेगा।</p>
<p><strong>सांगोद कॉलेज में ये होने हैं काम</strong><br />हाड़ौती से आयुक्तालय को बजट प्रस्ताव भेजने वाले कॉलेजों में कोटा जिले का एकमात्र राजकीय महाविद्यालय सांगोद है। कॉलेज प्रशासन ने चार दीवारी निर्माण  के लिए 24.60 लाख, मुख्य गेट व पार्किंग के लिए 10 लाख तथा बिल्डिंग की रंगाई-पुताई व छत सहित अन्य कार्यों के लिए 20.60 लाख रुपए का एस्टीमेट बनाकर बजट की मांग की है। वर्तमान में कॉलेज में करीब 548 विद्यार्थियों का नामांकन है। </p>
<p>कोटा संभाग के 6 राजकीय महाविद्यालयों ने भवन विस्तार, कक्षा-कक्ष रिपेयर, बाउंड्रीवाल, खेल मैदान, एवं जीणशीर्ण भवनों की मरम्मत सहित अन्य कार्यों के लिए तकमिना सहित प्रस्ताव आयुक्तालय को भेज गए हैं। जिनका मैरे द्वारा छात्र संख्या, भवन की वर्तमान स्थिति और मांग का औचित्य का परिक्षण कर आयुक्तालय को अनुशंसा भेजी गई है। जहां से स्वीकृति प्राप्त होने पर निर्देशानुसार आवश्यक कार्यवाही की जाएगी। <br /><strong>- प्रो. गीताराम शर्मा, क्षेत्रीय सहायक निदेशक आयुक्तालय कोटा संभाग </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 13 Jan 2025 14:33:18 +0530</pubDate>
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                <title>परीक्षा से पहले ही बंद कर दी फर्स्ट सेमेस्टर की कक्षाएं</title>
                                    <description><![CDATA[90 घंटे ही कक्षाएं संचालित करने के नियमों का हवाला देकर बंद की क्लासें।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/first-semester-classes-were-closed-before-the-examination/article-100008"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-01/257rtrer12.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। कॉलेज एजुकेशन सोसायटी के अधीन संचालित राजकीय महाविद्यालयों में परीक्षा से पहले ही बीए प्रथम वर्ष की कक्षाएं बंद कर दी गई हैं। जबकि, सेमेस्टर परीक्षाएं सिर पर हैं और 30 से 40 प्रतिशत कोर्स अधूरे हैं। इसके बावजूद कक्षाएं संचालित नहीं करवाई जा रही है। विद्यार्थियों को परीक्षा परिणाम बिगड़ने का डर सताने लगा है। दरअसल, राजसेस कॉलेजों में बीए फर्स्ट इयर के प्रथम सेमेस्टर में कॉलेज प्रशासन द्वारा 90 दिन ही कक्षाएं संचालित किए जाने के नियमों का  हवाला देकर शिक्षकों को कक्षाएं न लेने के निर्देश दिए गए हैं। ऐसे में विद्या संबल शिक्षकों द्वारा कक्षाएं नहीं लेने से शिक्षण व्यवस्था डगमगा गई है। </p>
<p><strong>एग्जाम तिथि घोषित होने तक चलती हैं कक्षाएं</strong><br />राजकीय कला कन्या महाविद्यालय रामपुरा के सहायक आचार्य डॉ. मोहम्मद हनीफ खान बताते हैं, सेमेस्टर प्रणाली के तहत परीक्षा तिथि घोषित होने से पहले तक कक्षाएं संचालित किए जाने और परीक्षा समाप्त होने के अगले दिन से ही दूसरे सेमेस्टर की कक्षाएं शुरू करने का प्रावधान है। गत वर्ष सत्र 2023-24 में भी इसी प्रणाली के तहत कक्षाएं संचालित की गई थी। इस बार 90 घंटे ही क्लासें लगाने का  हवाला देते हुए परीक्षा की तिथि घोषित होने से पूर्व ही कक्षाएं लेने से मना कर दिया गया।  जबकि, अभी 30 प्रतिशत से ज्यादा कोर्स अधूरे हैं।  </p>
<p><strong>24 सप्ताह या 28 फरवरी तक संचालित का नियम</strong><br />राजस्थान कॉलेज एजुकेशन सोसायटी शैक्षिक महासंघ की प्रदेशाध्यक्ष डॉ. शर्मिला कुमारी व शाहबाद कॉलेज की सहायक आचार्य डॉ. ज्योति कुमारी ने बताया कि राजसेस कॉलेजों में 90 घंटे कक्षाएं संचालित किए जाने का कोई नियम नहीं है। बल्कि 24 सप्ताह या 28 फरवरी दोनों में से जो भी पहले हो, तब तक कक्षाएं संचालित किए जाने का प्रावधान है। इसके बावजूद कॉलेज प्रशासन अपनी मनमर्जी चला रहे हैं और विद्या संबल शिक्षकों को प्रथम सेमेस्टर की कक्षाएं न लेने के निर्देश दिए गए हैं। जबकि, सिलेबस ही नहीं, प्रेक्टिकल व मिड टर्म भी अधूरे हैं। ऐसे में विद्यार्थियों को अनावश्यक परेशानियों से जूझना पड़ रहा है। </p>
<p><strong>परीक्षा परिणाम बिगड़ने का सता रहा डर </strong><br />हाड़ौती के कई राजसेस कॉलेजों में यूजी प्रथम सेमेस्टर में तीस से चालीस प्रतिशत कोर्स अधूरे हैं। वहीं, जनवरी के आखिरी या फरवरी के प्रथम सप्ताह में सेमेस्टर के एग्जाम होने हैं। ऐसे में परीक्षा से पहले ही कक्षाएं बंद करवा देने से विद्यार्थियों को परीक्षा परिणाम बिगड़ने का डर सताने लगा है। विद्यार्थियों का कहना है कि 5 में अभी तक 3 यूनिट ही पूरी हो सकी है। दो यूनिट अभी भी अधूरी है, ऐसी स्थिति में विद्या संबल शिक्षकों को कक्षाएं लेने से मना कर दिया। ऐसे में परीक्षा की तैयारी कैसे करेंगे। </p>
<p>बीए प्रथम वर्ष के प्रथम सेमेस्टर की कक्षाएं 2 जनवरी से ही बंद करवा दी गई है। जबकि, 30 से 40% कोर्स अधूरा हैं। परीक्षा की तिथियां घोषित होने तक कक्षाएं संचालित करवाई जानी चाहिए, ताकि एग्जाम से पहले तक सिलेबस पूरा हो सके। <br /><strong>- अनसुईया मीणा, छात्रा प्रतिनिधि रामपुरा कॉलेज</strong></p>
<p>हमारा आधा सिलेबस अभी बाकी है। कक्षाएं नहीं लगने से एग्जाम की तैयारी नहीं हो पा रही। यदि,अधूरी ईकाइयों से पेपर में प्रश्न आ गए तो क्या लिखेंगे। कॉलेज प्रशासन को छात्राओं के हित को देखते हुए कक्षाएं संचालित करवाई जानी चाहिए।<br /><strong>- लक्ष्मी मीणा, छात्रा बीए प्रथम सेमेस्टर, रामपुरा कॉलेज</strong></p>
<p>कोटा विवि द्वारा इन दिनों एग्जाम फॉर्म भरवाए जा रहे हैं। अभी परीक्षा की तिथियां घोषित नहीं हुई है, फिर कक्षाएं कैसे बंद करवा सकते हैं। छात्राएं फीस देकर कॉलेज में अध्ययनरत हैं, ऐसे में कॉलेज प्रशासन की जिम्मेदारी है कि वह समय पर कोर्स पूरा करवाए। नियमित कक्षाएं लगवाई जाए।<br /><strong>- देवंती कहार, छात्रा प्रतिनिधि रामपुरा कॉलेज</strong></p>
<p>अचानक से कक्षाएं बंद कर देना, कहां का इंसाफ है। स्टूडेंट्स पढ़ना चाहते हैं और टीचर पढ़ाना, इसके बावजूद कक्षाएं नहीं लगवाई जा रही। कई टॉपिक ऐसे हैं समझ में नहीं आ रहे, कक्षाएं नहीं लगने से कोई समझाने वाला भी नहीं है। <br /><strong>- खुशबू खत्री, छात्रा प्रथम सेमेस्टर </strong></p>
<p>हमारे यहां आॅफिशियली 11 दिसम्बर से ही प्रथम सेमेस्टर की कक्षाएं बंद करवा दी गई है। राजसेस कॉलेजों में परमानेंट फैकल्टी नहीं होने से हर साल ऐसी समस्याओं से विद्यार्थियों को जूझना पड़ता है। <br /><strong>- हरिप्रकाश कुमार, तालेड़ा कॉलेज </strong></p>
<p><strong>नियमानुसार ही बंद की कक्षाएं</strong><br />बीए प्रथम सेमेस्टर की कक्षाएं 90 घंटे संचालित किए जाने का ही प्रावधान है। आयुक्तालय के निर्देशानुसार ही कार्य किया जा रहा है। यह केवल रामपुरा कॉलेज में ही नहीं संभाग से सभी राजसेस कॉलेजों में 90 कलाशं पूरे होने पर नियमानुसार कक्षाओं का संचालन बंद किया गया है। ताकि, बच्चे घर पर परीक्षा की तैयारी कर सके। <br /><strong>- प्रो. राजेश चौहान, प्राचार्य राज. कन्या महाविद्यालय रामपुरा</strong></p>
<p>आयुक्तालय के निर्देशानुसार ही कार्य किया जा रहा है। हमारे यहां प्रथम सेमेस्टर की कक्षाएं संचालित की जा रही है। <br /><strong>- प्रो. बीके शर्मा, प्राचार्य राजकीय महाविद्यालय तालेड़ा</strong></p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />प्रथम वर्ष के प्रथम सेमेस्टर के लिए लगाए गए विद्या संबल शिक्षकों से 90 कलांश में ही निर्धारित पाठ्यक्रम पूरा करवाने के निर्देश आयुक्तालय द्वारा प्राचार्यों को दिए गए हैं। यदि, पाठ्यक्रम अधूरे रहने की शिकायत पूरी कक्षा द्वारा की जाती है तो आयुक्तालय से निर्देश प्राप्त कर आवश्यक कार्यवाही की जाएगी।<br /><strong>- प्रो. गीताराम शर्मा, सहायक क्षेत्रिय निदेशक, कॉलेज आयुक्तालय कोटा </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 08 Jan 2025 14:38:20 +0530</pubDate>
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                <title>बीबीए औंधे मुंह गिरा तो बीसीए सरपट दौड़ा</title>
                                    <description><![CDATA[कॉमर्स में एमबीए व साइंस कॉलेज में एमसीए नहीं हुआ शुरू। 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/bba-fell-flat-on-its-face--bca-ran-fast/article-94651"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-11/6630400-sizee-(1)3.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर के दो सरकारी कॉलेजों में एक ही समय शुरू हुए प्रोफेशनल कोर्सेज की तस्वीर भी अलग-अलग नजर आ रही है। गवर्नमेंट कॉमर्स कॉलेज में खुला बीबीए जहां शुरू होने से पहले ही दम तोड़ता नजर आ रहा है वहीं गवर्नमेंट साइंस कॉलेज में बीसीए सरपट दौड़ रहा है। वाणिज्य महाविद्यालय बीबीए में एडमिशन को तरस रहा है, तीन बार आवेदन की अंतिम तिथि बढ़ाने के बावजूद विद्यार्थियों ने दाखिले में रुचि नहीं दिखाई। जबकि, राजकीय महाविद्यालय कोटा में बीसीए का एक चौथाई कोर्स पूरा हो चुका है। शिक्षाविदें का तर्क है, प्रोफेशनल कोर्सेज  के हालात के लिए प्रवेश प्रक्रिया  में अनावश्यक देरी जिम्मेदार है। वहीं, कॉलेज प्रशासन सामूहिक प्रयास में कमी भी बड़ा कारण हो सकती है। </p>
<p><strong>बीबीए : 3 बार अंतिम तिथि बढ़ी, रुझान नहीं </strong><br />राजकीय वाणिज्य महाविद्यालय में बीबीए कोर्स  अगस्त माह के प्रथम सप्ताह में खुला था, लेकिन दाखिले में विद्यार्थियों ने रुचि नहीं दिखाई और अंतिम तिथि समाप्त हो गई। इसके बाद आयुक्तालय ने फिर से अंतिम तिथि बढ़ाई, काफी जद्दोहजद के बाद 3 विद्यार्थियों ने दाखिला लिया। तीसरी बार फिर से अंतिम तिथि बढ़ाने के बावजूद 14 विद्यार्थियों ने ही आवेदन किए। जिसमें से मात्र 9 ही विद्यार्थियों ने फीस जमा करवाई। </p>
<p><strong>60 सीटों पर नौ ही दाखिले, कोर्स शुरू नहीं</strong><br />बीबीए में 60 सीटें निर्धारित हैं, जिसके मुकाबले अब तक मात्र 9 ही सीट भरी है। कोर्स चलाने के लिए कम से कम 10 विद्यार्थियों का एडमिशन होना जरूरी है लेकिन अंतिम तिथि गुजरने के एक माह बाद भी दस का कोटा पूरा नहीं हुआ।  हालांकि, कॉलेज प्रशासन द्वारा आवेदन करने वाले छात्रों से सम्पर्क कर फीस जमा करवाने के लिए काउंसलिंग की जा रही है। हालांकि, कक्षाएं शुरू करवाने के प्रयास किए जा रहे हैं। </p>
<p><strong>बीसीए : एक चौथाई कोर्स पूरा, नियमित क्लासें</strong><br />गवर्नमेंट साइंस कॉलेज में बीसीए कम्प्यूटर डिग्री कोर्स के प्रति विद्यार्थियों में जबरदस्त उत्साह नजर आया। 21 स्टूडेंट्स एडमिशन ले चुके हैं। एक अक्टूबर से ही कक्षाओं के साथ कोर्स शुरू हो गया। विद्या संबल पर शिक्षक भी लगा दिए गए। नियमित कक्षाएं चल रही हैं, दिसम्बर-जनवरी के बीच प्रथम सेमेस्टर के एग्जाम होने हैं। अब तक एक चौथाई से ज्यादा कोर्स पूरा हो चुका है। लैब में प्रेक्टिकल भी करवाए जा रहे हैं। हालांकि, कॉलेज प्रशासन के व्यक्तिगत प्रयासों से कम समय व विपरीत परिस्थितियों में सफलतापूर्वक बीसीए संचालित हो सका। </p>
<p><strong>शिक्षकों के व्यक्तिगत प्रयासों से दौड़ा बीसीए</strong><br />राजकीय महाविद्यालय कोटा की प्राचार्य प्रतिमा श्रीवास्तव का कहना है,  बीसीए के सफलतापूर्वक संचालन में कॉलेज प्रशासन के व्यक्तिगत प्रयास अहम भूमिका में रहे। शिक्षकों ने प्रचार-प्रसार करने के साथ वन टू वन विद्यार्थियों से सम्पर्क किया। उन्हें कोर्सेज से संबंधित जानकारी व सुविधाओं से अवगत किया। उनकी समस्याओं व शंकाओं का संतोषजनक निवारण किया। इससे उत्साहित विद्यार्थियों ने बीसीए में एडमिशन लिए। वर्तमान में बीसीए की नियमित कक्षाएं व प्रेक्टिल करवाए जा रहे हैं। </p>
<p><strong>विद्यार्थियों का कहना है</strong><br />बीबीए में एडमिशन तब शुरू हुए जब बीकॉम प्रथम वर्ष की प्रवेश प्रक्रिया पूरी हो चुकी थी। ऐसे में हम बीकॉम छोड़ बीबीए में कैसे दाखिला  लेते। प्रोफेशनल कोर्स के बुरे हाल के लिए जिम्मेदार सरकार की लेटलतीफी जिम्मेदार है। अभी हमारे साथियों ने बीबीए की फीस जमा करवा दी है लेकिन कोर्स अब तक शुरू नहीं हुआ। ऐसे में दिसम्बर-जनवरी तक प्रथम सेमेस्टर के एग्जाम होने हैं। ऐसे में कोर्स कब शुरू होगा, फेकल्टी कब आएगी और कब सिलेबस पूरा होगा। असमंजस की स्थिति बनी हुई है। <br /><strong>- योगेंद्र चंद, ज्ञानदेव कुमार, आशिष शृंगी, छात्र </strong></p>
<p>बीसीए में एडमिशन लेकर उत्साहित हैं। नियमित कक्षाएं लग रही हैं। लैब में 15 से ज्यादा कम्प्यूटर हैं, जहां फेकल्टी द्वारा सब्जेक्ट क्लास के बाद प्रेक्टिकल करवाते हैं। कॉलेज प्रशासन द्वारा साधन संसाधनों की उपलब्धता के साथ छात्रहित का ख्याल रखा जा रहा। अब तक प्रथम सेमेस्टर का एक चौथाई सिलेबस भी पूरा हो चुका है। परीक्षा से पहले कोर्स पूरा होने की उम्मीद है। <br /><strong>- सत्येंद्र कुमार, हर्ष गौतम</strong></p>
<p><strong>इनका का कहना है</strong><br />बीसीए की नियमित कक्षाएं लग रही हैं। 21 विद्यार्थियों ने एडमिशन लिया है। अभी भी विद्यार्थी एडमिशन ले सकते हैं, उनका कोर्स एस्ट्रा क्लासें लगवाकर पूरा करवाएंगे। यूजीसी के मापदंडों के अनुसार वेल क्वालिफाइड शिक्षक विद्या संबल पर रखे हैं। कम्प्यूटर लैब में 15 से ज्यादा कम्प्यूटर हैं, जहां फेकल्टी नियमित विद्यार्थियों को प्रेक्टिल करवा रहे हैं। नई लैब बनाने व सुविधाओं में विस्तार के लिए प्रस्ताव बनाकर आयुक्तालय को भेजा है। विद्यार्थियों की सुविधाओं का ख्याल रखा जा रहा है। <br /><strong>- प्रतिमा श्रीवास्तव, प्राचार्य राजकीय महाविद्यालय</strong></p>
<p>बीबीए में अभी तक 9 विद्यार्थियों ने फीस जमा करवाई है। जबकि, आवेदन 14 जनों ने किया था। इनमें से तीन छात्रों ने कहीं ओर एडमिशन ले लिया है। हालांकि,  सरकार ने 10 छात्रों के दाखिला लेने पर कोर्स शुरू करने की राहत दी है। ऐसे में विद्यार्थियों को कन्वेंस किया जा रहा है। जल्द ही कोर्स शुरू करवाए जाने का प्रयास है। <br /><strong>- हितेंद्र कुमार, प्राचार्य राजकीय वाणिज्य महाविद्यालय</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 08 Nov 2024 15:12:57 +0530</pubDate>
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                <title>6 माह की परीक्षा 2 माह में, सिलेबस पूरा होना तो दूर, पास होना ही चुनौती</title>
                                    <description><![CDATA[हाड़ौती में खुले 4 नए सरकारी कॉलेजों में विद्यार्थियों का भविष्य अधर में।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/6-months-exam-in-2-months--let-alone-completing-the-syllabus--even-passing-is-a-challenge/article-92809"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-10/4427rtrer-(9)3.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। हाड़ौती में खुले 4 नए कॉलेजों के विद्यार्थियों का भविष्य अधरझूल में है। दिसम्बर में बीए फर्स्ट ईयर के प्रथम सेमेस्टर एग्जाम होने हैं लेकिन अभी तक कई कॉलेजों में कक्षाएं ही प्रारंभ नहीं हुई है। ऐसे में आगामी 2 माह में सिलेबस पूरा होना तो दूर विद्यार्थियों का पास होना ही चुनौतिपूर्ण है। दरअसल, मुख्यमंत्री बजट घोषणा में सत्र 2024-25 में सरकार ने कोटा, बूंदी व झालावाड़ में कुल 4 नए राजकीय कला महाविद्यालय खोले  हैं। इनमें प्रवेश प्रक्रिया ही 30 सितम्बर तक जारी रही है।  वहीं, कागजों में एक अक्टूबर से कक्षाएं प्रारंभ कर दी गई लेकिन वास्तविकता में कुछ कॉलेजों में विद्या संबल की फेकल्टी के लिए आवेदन ही 5 अक्टूबर तक निकाले गए हैं। ऐसे में बिना फेकल्टी के कक्षाएं कैसे लग सकती है। वहीं, कुछ महाविद्यालय तो ऐसे हैं, जहां आवंटित सभी विषयों के शिक्षक ही नहीं आए हैं। </p>
<p><strong>टेबल-कुर्सियां तो दूर, बिछाने को दरी पट्टी तक नहीं </strong><br />संभाग के चारों नवीन राजकीय महाविद्यालयों में कुल 447 विद्यार्थियों ने एडमिशन लिया है। इनमें लाखेरी, चेचट व डग महाविद्यालय में विद्यार्थियों को बिठाने के लिए टेबल कुर्सियां तो दूर जमीन पर बिछाने के लिए दरी पट्टियां तक नहीं है। चेचट कॉलेज में 153 तो डग में 96 स्टूडेंट्स कक्षाओं में दरी पट्टी बिछाकर जमीन पर बैठते हैं लेकिन लाखेरी कॉलेज में 132 प्रवेशित छात्र-छात्राओं को बिना दरी पट्टी के जमीन पर बैठना पड़ता है। अव्यवस्थाओं के कारण  नियमित कक्षाएं नहीं लग पा रही है। </p>
<p><strong>जमीन पर बिठाकर पढ़ा रहे विद्यार्थी </strong><br />सरकार की अनदेखी से कॉलेजों में उच्च शिक्षा का मखौल उड़ रहा है। दीगोद को छोड़कर चेचट, डग व लाखेरी सहित तीनों कॉलेजों में विद्यार्थियों को बिठाने के लिए फर्नीचर तक नहीं है। मजबूरी में प्रवेशित प्रथम वर्ष के विद्यार्थियों को जमीन पर बिठाकर पढ़ाया जा रहा है। वहीं, कुछ कॉलेज में तो नल, लाइट  पंखें की व्यवस्था तक नहीं है। ऐसे हालात में विद्यार्थियों को क्वालिटी एजुकेशन मिलने की उम्मीद नहीं की जा सकती। </p>
<p><strong>2 माह में कैसे होगा कोर्स पूरा</strong><br />शिक्षाविदें का कहना है, सरकार ने संभाग में 4 नए कॉलेज खोले हैं। जिनमें कोटा में चेचट, दीगोद, बूंदी में लाखेरी व झालावाड़ में डग महाविद्यालय   शामिल हैं। सेमेस्टर स्कीम के तहत दिसम्बर में कोटा यूनिवर्सिटी द्वारा प्रथम सेमेस्टर के एग्जाम करवाए जाने हैं, लेकिन अभी तक सभी महाविद्यालयों में शिक्षण कार्य प्रोपर रूप से शुरू नहीं हुआ है। वहीं, अक्टूबर से दिसम्बर तक सरकारी व साप्ताहिक अवकाश को मिलाकर कुल 27 दिन की छुट्टियां हैं। ऐसे में 6 माह की सेमेस्टर परीक्षा  की तैयारी 2 माह में करवाना संभव नहीं है। इस बीच एग्जाम से पहले मिर्ड टर्म भी करवाए जाने हैं, वह कैसे होंगे। सरकार की अव्यवस्थाओं से शिक्षक व विद्यार्थी दोनों ही हैरान हैं। </p>
<p><strong>क्या कहते हैं प्राचार्य</strong><br />कॉलेज अभी अस्थाई रूप से पुराने अस्पताल भवन में संचालित हो रहा है। यहां बड़ी संख्या में मेडिकल वेस्ट व कचरा-गंदगी के ढेर लगे थे। जिसे साफ करवाने में ही 8 दिन लग गए। करीब 10 ट्रॉली से ज्यादा कचरा निकला है। कक्षाएं  एक अक्टूबर से ही शुरू करवा दी गई है। अभी नल, लाइट, बिजली व फर्नीचर की व्यवस्थाएं कर रहे हैं।<br /><strong>- पवन  शर्मा, नोडल अधिकारी, राजकीय चेचट महाविद्यालय</strong></p>
<p>दीगोद कॉलेज में 75 विद्यार्थियों का एडमिशन हुआ है। बुधवार को ही खादी ग्रामोध्योग से विद्यार्थियों व स्टाफ के लिए फर्नीचर खरीदे हैं।  कक्षाएं आयुक्तालय के निर्देशानुसार विद्या संबल पर शिक्षक नियुक्त कर 1 अक्टूबर से ही शुरू करवा दी गई है। रही बात एग्जाम से पहले कोर्स पूरा करवाने की तो एस्ट्रा क्लासें लगवाकर सिलेबस कम्पलीट करवाया जाएगा। विद्यार्थियों के बेहतर अध्ययन व सुविधाओं के लिए माकूल बंदोबस्त किए जा रहे हैं। आयुक्तालय के दिशा-निर्देशानुसार आगे भी कार्य जारी रहेंगे। <br /><strong>- प्रो. रोशन भारती, प्राचार्य, नोडल राजकीय कला महाविद्यालय कोटा</strong></p>
<p><strong>क्या कहते हैं विद्यार्थी</strong><br />चेचट कॉलेज पुराने जर्जर अस्पताल भवन में चल   रहा है। यहां अस्पताल का मेडिकल वेस्ट के ढेर लगे हैं, जिसकी सफाई करवाने में ही कॉलेज प्रशासन को 8 दिन लग गए। बैठने के लिए टेबल-कुर्सियां नहीं है, जमीन पर दरी पट्टियां बिछाकर बैठना पड़ता है। कागजों में तो 1अक्टूबर से कक्षाएं लग रही हैं लेकिन हकीकत में सातों विषय की कक्षाएं नहीं लग रही। यहां नल, बिजली व पंखे तक की व्यवस्था नहीं है।<br /><strong>- कुशलपाल, छात्र </strong></p>
<p>हम कॉलेज विद्यार्थी हैं, लेकिन हमारी हालात सरकारी स्कूल के बच्चों से भी बदहाल है। स्कूल के बच्चे  दरी पट्टी बिछाकर बैठते हैं लेकिन हमारे लिए जमीन पर बिछाने के लिए दरी पट्टियां तक नहीं है। धूल जमे फर्श पर ही बैठना पड़ता है, कपड़े खराब हो रहे हैं। यह उच्च शिक्षा के साथ मजाक है। सरकार, टेबल-कुर्सियां नहीं दे सकती तो कम से कम बैठने के लिए दरी पट्टियां ही दे दे।<br /><strong>- कुलदीप कुमार (परिवर्तित नाम), छात्र </strong></p>
<p>कॉलेज स्कूल की पुरानी बिल्डिंग में संचालित हो रहा है। सुविधाएं तो छोड़िए, यहां पढ़ाने के लिए अभी तक शिक्षक नहीं लगे हैं। कक्षाएं ही शुरू नहीं हुई। जबकि, दिसम्बर में प्रथम सेमेस्टर के एग्जाम प्रस्तावित है। ऐसे में अक्टूबर से दिसम्बर तक सरकारी व साप्ताहिक करीब एक माह की छुट्टियां है। 2 महीने में शिक्षक कोर्स कैसे पूरा करा पाएगी और हम कैसे समझ पाएंगे। यहां एडमिशन लेकर गलती  कर दी, ऐसा महसूस हो रहा है।<br /><strong>- पुष्पेंद्र कुमार (परिवर्तित नाम), छात्र राजकीय महाविद्यालय डग </strong></p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />चौमेहला कॉलेज में प्रतिनियुक्ति निरस्त करवाने, स्थाई शिक्षकों की पोस्टिंग व डग के नवीन महाविद्यालय में फर्नीचर सहित अन्य शैक्षणिक व्यवस्थाओं के लिए मैंने आज ही उच्च शिक्षा मंत्री एवं उप मुख्यमंत्री  प्रेमचंद बैरवा से बात की है। उन्होंने जल्द  ही समस्याएं दूर करने का भरोसा दिलाया है।<br /><strong>- कालूराम मेघवाल, विधायक डग झालावाड़</strong></p>
<p>संभाग के सभी नवीन महाविद्यालयों में कक्षाएं 1 अक्टूबर से शुरू करवा दी गई हैं। हमारी कोशिश निर्धारित समय पर सिलेबस पूरा करवाने की रहेगी। इसके लिए अतिरिक्त कक्षाएं लगाने की जरूरत  पड़ी तो लगाई जाएगी। विद्यार्थियों के हित में बेहतर अध्ययन व्यवस्था बनाए रखने के प्रयास किए जा रहे हैं।<br /><strong>- डॉ. गीताराम शर्मा, सहायक क्षेत्रिय निदेशक कॉलेज आयुक्तालय कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 11 Oct 2024 16:26:51 +0530</pubDate>
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                <title>शहर के सरकारी कॉलेजों में प्रोफेशनल कोर्सेज का टूटा दम</title>
                                    <description><![CDATA[शहर के दो बड़े कॉलेजों को एमबीए व एमसीए कोर्स शुरू करने की सरकार से वित्तिय व प्रशानिक स्वीकृति मिल चुकी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/professional-courses-in-government-colleges-of-the-city-are-in-shambles/article-92574"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-10/4427rtrer-(1)12.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। जिले के सरकारी कॉलेजों में प्रोफेशनल कोर्सेज दम तोड़ रहे हैं। नई शिक्षा नीति के तहत शुरू किए बीबीए, एमबीए कोर्स व कम्प्यूटर साइंस सब्जेक्ट सरकारी मशीनरी की उपेक्षा की भेंट चढ़ गए। वहीं, राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालय, अब तक एमएससी व एमए कोर्स में एडमिशन प्रोसेज भी शुरू नहीं कर सका। इनमें सबसे ज्यादा खराब स्थिति गवर्नमेंट कॉमर्स की है। यहां बीबीए में 60 सीटों पर मात्र 3 ही एडमिशन हुए हैं। ऐसे में इस वर्ष बीबीए कोर्स शुरू होना मुश्किल है। वहीं, राजकीय कला महाविद्यालय कोटा में मात्र 16 विद्यार्थियों ने कम्प्यूटर विषय लिया है। जबकि, सीट 80 है। ऐसे में स्टूडेंट्स व शिक्षक असमंजस के दोहरे भंवर में फंस गए। जिन पाठ््यक्रमों में विद्यार्थियों ने एडमिशन ले लिया वहां, कक्षाएं सस्पेंड होने का खतरा हो गया। वहीं, कॉलेज प्रशासन के लिए निर्धारित एडमिटेड स्टूडेंट्स संख्या के अभाव में कोर्सेज चलाना व दिसम्बर से पहले सेमेस्टर एग्जाम की तैयारी करवाना समझ से परे है। </p>
<p><strong>इस साल बीबीए कोर्स चलना मुश्किल</strong><br />राजकीय वाणिज्य महाविद्यालय में बीबीए कोर्स का इस वर्ष संचालित होना मुश्किल लग रहा है। यहां 60 सीटों पर मात्र 3 ही एडमिशन हुए हैं। जबकि, आवेदन 16 विद्यार्थियों ने किया था। लेकिन, फीस मात्र तीन ही स्टूडेंट्स ही जमा करवा सके। इधर, कॉलेज प्रशासन फीस जमा करवाने के लिए छात्रों से सम्पर्क कर रहा फिर भी छात्र रुचि नहीं दिखा रहे। कक्षाएं शुरू करने के लिए 10 छात्रों का एडमिशन लेना आवश्यक है। </p>
<p><strong>एमबीए व एमसीए का अता-पता नहीं</strong><br />शहर के दो बड़े कॉलेजों को एमबीए व एमसीए कोर्स शुरू करने की सरकार से वित्तिय व प्रशानिक स्वीकृति मिल चुकी है। लेकिन कॉमर्स कॉलेज को एमबीए एडमिशन पॉलीसी को लेकर कोई गाइड लाइन नहीं मिली। वहीं, एआईसीटी द्वारा पोर्टल नहीं खोले जाने से गवर्नमेंट साइंस कॉलेज एमसीए में प्रवेश प्रक्रिया शुरू नहीं कर सका। शिक्षाविदें का तर्क है, सत्र 2024-25 में यह कोर्स शुरू नहीं हो सकते। विद्यार्थियों को एडमिशन के लिए अब अगले वर्ष का इंतजार करना होगा। </p>
<p><strong>आरटीयू शुरू नहीं कर सका एमएससी व एमए </strong><br />राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालय अपने कोटा कैम्पस में नॉन इंजीनियरिंग एमएससी व एमए पोस्ट ग्रेजुएशन पाठ्यक्रम अब तक शुरू नहीं कर सका। जबकि, आरटीयू द्वारा सितम्बर माह में ही प्रवेश प्रक्रिया शुरू करने के दावे किए गए थे। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, एडमिशन कोर्डिनेशन कमेटी का समय पर गठित न होना, सिलेबस पूरी तरह से तैयार न होना, बोर्ड आॅफ स्टडीज की दूसरी बैठक अब तक न होना सहित कई प्रमुख कारण बताए जा रहे हैं। </p>
<p><strong>कम्प्यूटर साइंस : 80 सीटों पर 16 विद्यार्थी</strong><br />राजकीय कला महाविद्यालय में विद्यार्थियों को रोजगार से जोड़ने के उद्देश्य से सरकार ने इसी सत्र से कम्प्यूटर विषय खोला है। प्रचार-प्रसार के बावजूद विद्यार्थियों ने कम्प्यूटर विषय चुनने में रुचि नहीं दिखाई। एक सेशन में 80 सीटें हैं और 16 विद्यार्थियों ने ही कम्प्यूटर सब्जेक्ट लिया है। जबकि, यह ऐच्छिक विषय है फिर भी छात्रों ने रुझान नहीं दिखाया। </p>
<p><strong>क्या कहते हैं विद्यार्थी</strong><br />बीबीए में एडमिशन तब शुरू हुए जब बीकॉम प्रथम वर्ष की प्रवेश प्रक्रिया पूरी हो चुकी थी। ऐसे में हम बीकॉम छोड़ बीबीए में कैसे दाखिला  लेते। प्रोफेशनल कोर्स के बुरे हाल के लिए जिम्मेदार सरकार की लेटलतीफी है। <br /><strong>-योगेंद्र चंद, ज्ञानदेव कुमार, आशिष शृंगी, छात्र कॉमर्स</strong></p>
<p>आरटीयू से इंग्लिश में एमए करना चाहता हूं। लेकिन, अब तक एडमिशन प्रोसेज ही शुरू नहीं किया। जबकि, पूर्व में सितम्बर से किए जाने की बात कही गई थी। गवर्नमेंट कॉलेज में ही अंग्रेजी में पीजी होती है, जहां सीटे लिमिटेड होने के कारण एडमिशन नहीं मिल पाया।<br /><strong>-सुरेश कहार, हर्षित मेहता, छात्र </strong></p>
<p><strong>क्या कहते हैं प्राचार्य</strong><br />बीबीए में 16 स्टूडेंट्स ने आवेदन किए थे लेकिन 3 ने ही फीस जमा करवाई है। एडमिशन प्रोसेज में देरी बड़ा कारण रही है। जबकि, कोर्स का व्यापक प्रचार-प्रयास भी किया है। लेकिन, अधिकतर विद्यार्थी बीकॉम व अन्य कोर्सेज में एडमिशन ले चुके हैं। ऐसे में रुझान कम दिखा। हालांकि, अगले सत्र में अच्छा रेस्पोंस देखने को मिलेगा।<br /><strong>-हितेंद्र कुमार, प्राचार्य गवर्नमेंट कॉमर्स कॉलेज </strong></p>
<p>विद्यार्थियों को रोजगार से जोड़ने के लिए सरकार ने कम्प्यूटर साइंस विषय खोला है। जिसका व्यापक प्रचार-प्रसार भी किया। सब्जेक्ट चुनाव के लिए आयुक्तालय द्वारा दो बार अंतिम तिथि बढ़ाकर मौका भी दिया। इसके बावजूद अब तक 16 ही विद्यार्थियों ने कम्प्यूटर विषय का चयन किया है। रुझान कम होने के कई कारण हो सकते हैं।<br /><strong>-प्रो. रोशन भारती, प्राचार्य गवर्नमेंट साइंस कॉलेज</strong></p>
<p>हमारी बेहतर व्यवस्थाएं, प्रचार प्रसार, दृढ़ इच्छा शक्ति का ही परिणाम है, जो बीसीए कोर्स में दाखिले के लिए विद्यार्थियों ने जबरदस्त रुझान दिखाया। यहां 40 सीटों पर 21 स्टूडेंट्स ने दाखिला लिया है। जिनकी कक्षाएं भी शुरू करवा दी गई हैं। इन्हें पढ़ाने के लिए विद्या संबल पर वैल क्वालिफाइड तीन शिक्षक नियुक्त किए हैं। <br /><strong>-प्रो. प्रतिमा श्रीवास्तव, प्राचार्य गवर्नमेंट साइंस कॉलेज</strong></p>
<p><strong>आरटीयू ने नहीं दिया जवाब</strong><br />खबर के संबंध में नवज्योति ने आरटीयू के परीक्षा नियंत्रक प्रो. रंजन माहेश्वरी से सम्पर्क करने के लिए फोन किए, मैसेज किए लेकिन उन्होंने जवाब नहीं दिए। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 08 Oct 2024 16:46:09 +0530</pubDate>
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                <title>दिसम्बर में एग्जाम, अब तक कक्षाएं शुरू तक नहीं</title>
                                    <description><![CDATA[राहत की जगह बोझ बना सेमेस्टर सिस्टम ।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/exams-in-december--classes-have-not-started-yet/article-91623"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-09/4427rtrer-(1)2.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। राजकीय महाविद्यालयों में सेमेस्टर प्रणाली राहत की जगह विद्यार्थियों के लिए बोझ बन गई। 6 माह के एग्जाम ढाई से तीन माह में हो रहे हैं। परीक्षाओं से पहले न तो सिलेबस पूरा हो पा रहा और न ही प्रेक्टिकल व असाइनमेंट समय पर पूरे हो पा रहे। नतीजन, आधी-अधूरी तैयारियों के बीच परीक्षाएं देनी पड़ रही हैं, जिससे विद्यार्थियों का रिजल्ट बिगड़ रहा है। हालात यह हैं, एमए, एमएसी व एमकॉम के सैकंड सेमेस्टर के एग्जाम हो चुके हैं, इसके बावजूद कॉलेजों में अभी तक थर्ड सेमेस्टर की कक्षाएं शुरू तक नहीं हो सकी। जबकि, कोटा विश्वविद्यालय द्वारा थर्ड सेमेस्टर की परीक्षाएं दिसम्बर में प्रस्तावित है। ऐसे में परीक्षा की तैयारी के लिए तीन माह का समय मिलेगा लेकिन इन माह में साप्ताहिक अवकाश, राजकीय अवकाश, दीपावली सहित 20 से 25 दिन का अवकाश रहेगा। ऐसे में छात्रों को मात्र ढाई माह का ही समय मिल पाएगा। इस समय में सिलेबस पूरा होना संभव नहीं होगा।</p>
<p><strong>6 माह की परीक्षा ढाई माह में</strong><br />राष्टÑीय शिक्षा नीति के तहत प्रत्येक सेमेस्टर की परीक्षा 6 माह में होनी चाहिए। लेकिन, कॉलेजों में ढाई से तीन माह में ही एग्जाम हो रहे हैं। हाल ही में पीजी सैकंड सेमेस्टर के एग्जाम सितम्बर माह में सम्पन्न हुए हैं, जबकि यह परीक्षाएं जून 2024 में होनी चाहिए थी। वहीं, यूजी की बात करें तो प्रथम वर्ष के सैकंड सेमेस्टर की परीक्षाएं गत जून में होनी थी, जो आगामी 8 अक्टूबर को सम्पन्न होगी। </p>
<p><strong>ढाई माह में कोर्स पूरा  करवाना संभव नहीं</strong><br />पीजी थर्ड सेमेस्टर की परीक्षाएं दिसम्बर में होनी है, लेकिन अभी तक कक्षाएं शुरू नहीं हुई। अक्टूबर से दिसम्बर तक तीन माह में 20 से 25 दिनों की सरकारी छुट्टियां हैं। ऐसे में परीक्षा की तैयारी के लिए विद्यार्थियों के पास मात्र ढाई माह का समय मिलेगा। जिसमें न तो सिलेबस पूरा हो पाएगा और न ही प्रेक्टिकल व असाइनमेंट हो पाएंगे। आधी-अधूरी तैयारियों के बीच पेपर देना पड़ रहा है, जिसका असर परीक्षा परिणामों में देखने को मिल रहा है। सेमेस्टर सिस्टम को पटरी पर लाने के प्रयास अब तक नाकाफी साबित हो रहे हैं।</p>
<p><strong>क्या कहते हैं प्राचार्य</strong><br />अभी एमएससी सैकंड सेमेस्टर के प्रेक्टिकल व असाइनमेंट करवाए जाने हैं, जिसकी सूचना विद्यार्थियों को दे दी गई है। दशहरे  की छुट्टी से पहले ही प्रेक्टिकल व असाइनमेंट करवा दिए जाएंगे। इसके बाद थर्ड सेमेस्टर की कक्षाएं शुरू कर दी जाएंगी। हालांकि, थोड़ा समय लग रहा है लेकिन एक बार सेमेस्टर रेगुलाइज हो जाएगातो यह विद्यार्थियों के लिए कारगर साबित होगा।<br /><strong>- प्रो. प्रतिमा श्रीवास्तव, प्राचार्य गनर्वमेंट कॉलेज कोटा</strong></p>
<p>कॉलेज में अभी यूजी सैकंड सेमेस्टर के एग्जाम चल रहे हैं। जिसमें स्टाफ व भौतिक संसाधन लगा है। संसाधनों की कमी होने के बावजूद हमने थर्ड सेमेस्टर की कक्षाएं लगवा दी हैं। रहीं बात, आगामी परीक्षा से पहले कोर्स पूरा करवाने की तो छुट्टियों में भी एक्स्ट्रा क्लासें लगवाकर कोर्स पूरा करवा देंगे। छात्रहित में व्यवस्थाएं बेहतर करने का प्रयास कर रहे हैं।<br /><strong>- प्रो. रोशन भारती, प्राचार्य, गवर्नमेंट आर्ट्स कॉलेज </strong></p>
<p>पीजी थर्ड सेमेस्टर के एग्जाम दिसम्बर व जनवरी के मध्य करवाए जाएंगे। वहीं, प्रथम सेमेस्टर के अधिकतर विषयों के परीक्षा परिणाम जारी किए जा चुके हैं। शेष रहे सब्जेक्ट के रिजल्ट जल्द ही जारी किए जाएंगे।<br /><strong>- प्रवीण भार्गव, परीक्षा नियंत्रक कोटा यूनिवर्सिटी</strong></p>
<p><strong>विद्यार्थी बोले- ढाई महीने में कोर्स पूरा होना तो दूर प्रेक्टिकल व असाइमेंट भी नहीं हो पाएंगे</strong><br /><strong>वर्ष 2020 से पटरी पर नहीं आया शैक्षणिक सत्र</strong><br />सत्र 2024-25 के एमएससी थर्ड सेमेस्टर की अब तक कक्षाएं नहीं लगाई  गई। जबकि, दिसम्बर में परीक्षाएं होनी है। दीपावली व अन्य राजकीय अवकाश आने से विद्यार्थियों को परीक्षा तैयारी के लिए मात्र 2 माह का ही समय मिलेगा। जिसमें सिलेबस तक पूरा नहीं हो पाएगा। वहीं, सत्र 2023-24 के थर्ड सेमेस्टर के परिणाम अब तक जारी नहीं हुए। जबकि, फोर्थ ईयर की परीक्षाएं सम्पन्न हो चुकी हैं। ऐसे में विद्यार्थी दूसरे प्रोफेशनल कोर्सेज में एडमिशन नहीं ले पा रहे। कोरोना के बाद से ही शैक्षणिक सत्र पटरी पर नहीं आ सका। जिसका नतीजा विद्यार्थियों को भुगतना पड़ रहा है। <br /><strong>- आशीष मीणा, निर्वमान छात्रसंघ अध्यक्ष, गवर्नमेंट कॉलेज कोटा</strong></p>
<p><strong>5 महीने बाद भी नहीं जारी किया रिजल्ट</strong><br />सत्र 2023-24 की एमएससी फाइनल ईयर के फोर्थ सेमेस्टर की परीक्षाएं हो चुकी है लेकिन थर्ड सेमेस्टर का परिणाम अब तक कोटा विवि ने जारी नहीं किया। जबकि, पेपर अप्रेल में ही समाप्त हो गए थे। पांच महीने से रिजल्ट का इंतजार कर रहे हैं। हालात यह हैं, बिना रिजल्ट देखे ही फाइनल ईयर की परीक्षाएं दे चुके हैं। जिससे परिणाम को लेकर अमंजस की स्थिति बनी हुई है। <br /><strong>- मयंक सोनी, छात्र गवर्नमेंट कॉलेज कोटा</strong></p>
<p><strong>आधी-अधूरी तैयारी से बिगड़ रहा परिणाम</strong><br /> एमकॉम सैकंड सेमेस्टर के एग्जाम 14 सितम्बर को समाप्त हो चुके हैं इसके बावजूद अभी तक थर्ड सेमेस्टर  की कक्षाएं शुरू नहीं हुई है। कॉलेज प्रशासन द्वारा गु्रप पर इस संबंध में कोई सूचना भी नहीं दी गई है। दिसम्बर तक सिलेबस पूरा नहीं हो पाएगा। हर बार की तरह इस बार भी विद्यार्थियों को आधी-अधूरी तैयारियों के साथ पेपर देना पड़ेगा। आयुक्तालय व कोटा विवि की लापरवाही का खामियाजा विद्यार्थियों को भुगतना पड़ रहा है।<br /><strong>- अर्पित जैन, निर्वमान छात्रसंघ अध्यक्ष, गवर्नमेंट कॉमर्स कॉलेज</strong></p>
<p><strong>छात्रों में असमंजस की स्थिति </strong><br />एमएससी द्वितीय सेमेस्टर की परीक्षा 18 सितम्बर को खत्म हो गई थी। जिसके 8 दिन बाद भी थर्ड सेमेस्टर की कक्षाएं शुरू नहीं की गई। वहीं, एमएससी प्रथम सेमेस्टर के एग्जाम अप्रेल 2024 में हुआ था, जिसका परिणाम अब तक जारी नहीं हुआ। परिणाम को लेकर असमंजस की स्थिति बनी रहती है, ऐसे में आगामी सेमेस्टर की भी पढ़ाई प्रभावित होती है। विवि व कॉलेज प्रशासन को व्यवस्थाओं में सुधार करना चाहिए।<br /><strong>- रविकांत सैनी, छात्र थर्ड सेमेस्टर, गवर्नमेंट कॉलेज</strong></p>
<p><strong>दूसरे कॉलेजो में नहीं ले पा रहे एडमिशन</strong><br />कोटा विवि कैम्पस में एमएससी थर्ड व फोर्थ सेमेस्टर के एग्जाम हो चुके हैं। प्रेक्टिकल भी हो गए। इसके बावजूद दोनों ही रिजल्ट नहीं आए। जिसकी वजह से अन्य कोर्सेज में एडमिशन नहीं ले पा रहे, क्योंकि दूसरे कॉलेज थर्ड सेमेस्टर में पास होने का सबूत मांग रहे हैं। विश्वविद्यालय में भी सम्पर्क किया लेकिन रिजल्ट कब जारी होंगे, इस संबंध में संतोषजनक जवाब नहीं मिल रहा। पिछले कई माह से परेशान हो रहे हैं। यूनिवर्सिटी को जल्द से जल्द परिणाम जारी करना चाहिए। <br /><strong>- निरंजना चंदेल, छात्रा एमएससी बॉटनी, कोटा विवि</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 26 Sep 2024 17:18:28 +0530</pubDate>
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                <title>जंगल में खेल मैदान, 44 कॉलेजों में एक ही पीटीआई</title>
                                    <description><![CDATA[स्पोर्ट्स वीक के नाम पर महज खानापूर्ति की जा रही है। 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/playground-in-jungle--only-one-pti-in-44-colleges/article-88873"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-08/jungle-me-khel-medan,-44-collego-me-ek-hi-pti...kota-news-28-08-2024.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। हाड़ौती के राजकीय महाविद्यालयों में शारीरिक शिक्षा का बुरा हाल है। यहां न तो खेलने की जगह है और न ही खिलाने वाले शिक्षक हैं। सरकार की उपेक्षा और कॉलेज प्रशासन की लापरवाही से खेल प्रतिभाएं संघर्ष से जूझ रही है। जबकि, स्पोर्ट्स विद्यार्थियों का कॅरियर बना सकता है। इधर, कोटा विश्वविद्यालय ने स्पोर्ट्स कैलेंडर जारी कर दिया है। अंतर महाविद्यालय प्रतियोगिताएं 4 सितम्बर से शुरू होगी, जो दिसम्बर तक जारी रहेगी। इसमें नेशनल लेवल तक छात्र-छात्राओं को प्रतिभा दिखाने का मौका मिलेगा, जो उनकी कॅरियर की दिशा बदल सकता है। लेकिन, हालात यह हैं, कॉलेजों के खेल मैदानों में जंगल खड़े हैं। अभी तक न तो खेल मैदानों की साफ-सफाई करवाई गई और न ही संविदा पर पीटीआई लगाए गए। स्पोर्ट्स वीक के नाम पर महज खानापूर्ति की जा रही है। </p>
<p><strong>43 कॉलेजों में एक भी पीटीआई नहीं </strong><br />कोटा संभाग में 44 राजकीय महाविद्यालय हैं। जिनमें से एकमात्र गवर्नमेंट कॉलेज बारां में ही एक पीटीआई हैं। शेष 43 कॉलेजों में शारीरिक शिक्षक नहीं है। कोटा विवि द्वारा जब अंतर महाविद्यालय प्रतियोगिता का आयोजन करवाया जाता है तो महाविद्यालय द्वारा 3 से 4 माह के लिए संविदा पर शिक्षक रख लिया जाता है, जिसे प्रतियोगिता के बाद हटा दिया जाता है। इसके बाद पूरे साल स्पोर्ट्स सिखाने वाला नहीं होता। विद्यार्थी खेलों की बारीकियां व नियम कायदे नहीं सीख पाते। नतीजन, इंटर स्टेट लेवल की प्रतियोगिताओं से बाहर हो जाते हैं।  </p>
<p><strong>1992 के बाद नहीं हुई भर्ती</strong><br />सरकारी कॉलेजों में वर्ष 1992 के बाद से ही पीटीआई की भर्ती नहीं हुई। हर साल भर्ती की आस में बड़ी संख्या में युवा बीपीएड की डिग्री ले रहे हैं।  लेकिन, भर्ती के अभाव में उनके सपने चकनाचूर हो रहे हैं। अधिकतर कॉलेजों में पीटीआई का चार्ज भी प्रोफेसरों को सौंप रखा है। जिसकी वजह से वे न तो अपने मूल कार्य कर पाते और न ही छात्रों को स्पोर्ट्स सिखा पाते। हालात यह हैं, सरकारी कॉलेजों में स्पोर्ट्स के नाम पर महज औपचारिकता निभाई जा रही है। </p>
<p><strong>बिना सीखे खेल रहे गेम्स</strong><br />शहर के राजकीय महाविद्यालयों के प्रोफेसर्स का कहना है, पीटीआई नहीं होने से उन्हें ही अतिरिक्त चार्ज दे रखा है। जिसकी वजह से शिक्षक ों के मूल कार्य प्रभावित हो रहे हैं। स्पोट्स में जानकारी न होने के बावजूद विद्यार्थियों को गेम्स खिला रहे हैं, प्रेक्टिस के नाम पर कुछ नहीं हो रहा। 4 माह के लिए ही संविदा पर शारीरिक शिक्षक लगाते हैं फिर हटा दिए जाते हैं। </p>
<p><strong>क्या कहते हैं विद्यार्थी </strong><br />नवीन कॉलेज में स्पोर्ट्स ग्राउंड नहीं है। लेकिन, पास में खाली जगह है, उसमें जंगल उगा हुआ है। न तो हमारे पास खेलने की जगह है और न ही खिलाने वाले शिक्षक। सात दिन बाद गेम्स शुरू हो जाएंगे, प्रेक्टिस कहां करें और कौन करवाएगा, यह बताने वाला भी कोई नहीं है। <br /><strong>- रिद्धम शर्मा, छात्र, गवर्नमेंट आर्ट्स कॉलेज </strong></p>
<p>कॉलेज के खेल मैदान में लंबे समय से झाड़ियां उगी हुई हैं। बरसाती पानी भरा हुआ है। खेल प्रतियोगिताओं के नाम पर खानापूर्ति की जाती है। अभी तक न तो शारीरिक शिक्षक लगाए गए और न ही मैदान की साफ-सफाई करवाई गई। फुटबॉल हैंडबॉल, कबड्डी, नेटबॉल, वॉलीबॉल सहित कई गेम्स की प्रेक्टिस कहां करें, विद्यार्थी परेशान हैं। <br /><strong>- आशीष मीणा, छात्रसंघ अध्यक्ष, गवर्नमेंट साइंस कॉलेज</strong></p>
<p>हमारे कॉलेज में खेल मैदान नहीं है। 4 हैक्टेयर भूमि पर जंगल बसा है। पिछले दो साल से फुटबॉल, बास्केट बॉल, बेडमिंटन हॉल बनवाने की मांग कर रहे हैं, जो अब तक नहीं बने। हमारे पास न तो पीटीआई है और न ही स्पोर्ट्स एक्यूमेंट। जबकि, हम स्पोर्ट्स में कॅरियर बनाना चाहते हैं, जिसका मौका ही नहीं मिलता। खेल सप्ताह के नाम पर चम्मच दौड़ व कुर्सी दौड़ करवाकर आफत टाल दी जाती है।<br /><strong>- अनसुईया मीणा, छात्रा सेविका रामपुरा कॉलेज</strong></p>
<p>वर्ष 2020 के बाद से कॉलेज में नियमित स्पोर्ट्स टीचर नहीं है। आयुक्तालय या कोटा विवि द्वारा जब भी कोई खेल प्रतियोगिताएं होती हैं तो एक माह पहले ही संविदा पर पीटीआई रख लिए जाते हैं, जो सिर्फ 4 महीने तक ही रहते हैं। इसके बाद छात्राओं को सिखाने वाला कोई नहीं होता।  लड़कियों को प्रेक्टिस के लिए स्टेडियम जाना पड़ता है। <br /><strong>- अंजली मीणा, छात्रसंघ अध्यक्ष, जेडीबी साइंस कॉलेज</strong></p>
<p>खेल मैदान तो है लेकिन खेलने लायक नहीं है। ग्राउंड जंगल में तब्दील हो चुके हैं। खो-खो, क्रिकेट, कब्बडी, फुटबॉल, रस्साकसी गेम मिटÞ्टी वाले ग्राउंड पर खेले जाते हैं, जो बरसात के चलते तालाब बने हुए हैं। यहां स्पोर्ट्स पर ध्यान नहीं दिया जाता, महज खानापूर्ति की जाती है। जबकि, स्पोर्ट्स कॅरियर बना सकता है। <br /><strong>- अर्पित जैन, छात्रसंघ अध्यक्ष गवर्नमेंट कॉमर्स कॉलेज</strong></p>
<p><strong>प्रिंसिपल बोले, बरसात के बाद साफ करवाएंगे खेल मैदान, किसी ने पीटीआई रखे तो कोई मंजूरी का कर रहे इंतजार</strong><br />संविदा पर पीटीआई रख लिए हैं, जब तक गेम्स चलेंगे तब तक वह रहेंगे। पथरीली मिट्टी होने के कारण मैदान उबड़-खाबड़ हैं। हालांकि, टेबल टेनिस के लिए एक रूम व बैडमिंटन के लिए आॅडिटोरियम में व्यवस्था की है लेकिन पानी टपकने की परेशानी है, जिसे दुरुस्त करवाया जा रहा है। <br /><strong>- हितेंद्र कुमार, प्राचार्य, गवर्नमेंट कॉमर्स कॉलेज</strong></p>
<p>विद्यार्थियों को गेम्स सिखाने व प्रेक्टिस करवाने के लिए जल्द ही संविदा पर शिक्षक रखे जाएंगे। मैदान में बारिश का पानी भरा होने से झाड़-झंकाड़ हटाने में परेशानी हो रही है। लेकिन, गेम्स शुरू होेने से पहले ही मैदान साफ करवा दिए जाएंगे। <br /><strong>- प्रतिमा श्रीवास्तव, गवर्नमेंट साइंस कॉलेज</strong></p>
<p>विद्यार्थियों व संबंधित कोच को स्पोर्ट्स एक्टिवीटी के लिए पुराने गवर्नमेंट कॉलेज कोटा में ही जाना पड़ेगा। क्योंकि, हमारे पास ग्राउंड नहीं है। पीटीआई का एक पद खाली है। सरकार पीटीआई तो महाविद्यालय प्रतिभाएं तराश सकता है। मैं राष्टÑीय स्तरीय खिलाड़ी हूं, इसलिए स्पोर्ट्स की ताकत जानता हूं। इस क्षेत्र में बच्चे कॅरियर बना सकते हैं। ग्रामीण परिवेक्ष से आने वाले स्टूडेंट्स टैलेंट रखते हैं, जिन्हें मंच दिए जाने की जरूरत है।<br /><strong>- प्रो. रोशन भारती,  प्राचार्य, गवर्नमेंट आर्ट्स कॉलेज</strong></p>
<p>स्पोर्ट्स टीचर रखे हुए एक माह से ज्यादा समय हो चुका है। हमारे पास बास्केट बॉल ग्राउंड है। वर्तमान में हम वॉलीबॉल, खो-खो, कबड्डी, हैंडबॉल व तीरंदाजी के लिए ग्राउंड बनवा रहे हैं। जिसका काम भी चल रहा है। हालांकि, बारिश के कारण जेसीबी नहीं चल पाने से काम रुका है,जल्द ही सभी खेल मैदान डवलप हो जाएंगे। जिसका लाभ जेडीबी साइंस के साथ राजकीय कला कन्या कॉलेज की बालिकाओं को भी मिलेगा।<br /><strong>- प्रो.अजय विक्रम, प्राचार्य, जेडीबी साइंस कॉलेज</strong></p>
<p>कैम्पस में खेल मैदान नहीं है लेकिन छात्राओं के खेलने व प्रेक्टिस की व्यवस्था पुख्ता करवाते हैं। गत वर्ष की तरह इस वर्ष भी बैडमिंटन के लिए स्टेडियम के सामने बैडमिंटन हॉल में नि:शुल्क प्रैक्टिस करवाते हैं। खेल सुविधाओं के संबंध में आयुक्तालय ने हमसे जानकारी मांगी थी, जो दे दी गई है। ऐसे में सुविधाओं में इजाफे की उम्मीद है। <br /><strong>- प्रो. सीमा चौहान, प्राचार्य, जेडीबी आर्ट्स कॉलेज</strong></p>
<p>कॉलेज में न तो पीटीआई है और न ही खेल मैदान। मैं राज्य स्तरीय खिलाड़ी हूं, इसलिए चाहता हूं कॉलेज की 4 हैक्टेयर भूमि पर उगे जंगल को साफ कर खेल मैदान बने। लेकिन, हमारे पास बजट नहीं है, हालांकि आयुक्तालय को इसके लिए पत्र भेजा है। प्राचार्य होने के बावजूद वित्तीय पावर नहीं मिलने से हर कार्य के लिए नोडल कॉलेजों पर निर्भर रहना पड़ता है। फिर भी हम स्पोर्ट्स एक्टिवीटी करवाते हैं।  <br /><strong>- डॉ. राजेश कुमार चौहान, प्राचार्य, रामपुरा गर्ल्स कॉलेज</strong></p>
<p>हाड़ौती के एकमात्र बारां कॉलेज में ही पीटीआई हैं। हालांकि, अन्य कॉलेजों में संविदा पर स्पोट्स शिक्षक लगाकर व्यवस्था सुचारू चला रहे हैं। अंतर महाविद्यालय खेल प्रतियोगिताओं की तैयारी के लिए सभी कॉलेज संविदा पर शिक्षक नियुक्त करते हैं। वहीं, सरकार ने आरपीएससी के माध्यम से पीटीआई व लाइब्रेरियन की भर्ती निकाली है, जिनके पेपर भी हो चुके हैं। आगामी समय में निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार सरकार गवर्नमेंट कॉलेजों को पीटीआई की नियुक्ति करेगी। <br /><strong>- डॉ. गीताराम शर्मा, क्षेत्रिय सहायक निदेशक कॉलेज आयुक्तालय </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 28 Aug 2024 14:25:09 +0530</pubDate>
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                <title>हाडौती के सरकारी कॉलेजों से अंग्रेजी की बत्तीगुल</title>
                                    <description><![CDATA[संभाग के 12 राजकीय कॉलेजों में नहीं विषयवार शिक्षक। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/english-language-from-government-colleges-of-hadauti/article-78205"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-05/hadoti-k-sarkari-college-s-angrezi-ki-battigul...kota-news-16-05-2024.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। हाड़ौती के राजकीय महाविद्यालयों में शिक्षा से गुणवत्ता दूर होती जा रही है। वर्षों से महत्वपूर्ण विषयों की कक्षाएं ही नहीं लग रही। जबकि, इन दिनों समर विकेशन चल रहा है और प्रथम वर्ष की सैकंड सेमेस्टर की क्लासे लगाई जा रही हैं। लेकिन, पढ़ाने वाले ही नहीं होने से कक्षाएं सुनी पड़ी हैं। हालात यह हैं, कोटा संभाग के 12 राजकीय महाविद्यालय ऐसे हैं, जहां अंगे्रजी से लेकर होम साइंस तक की कक्षाएं ही नहीं लगती। ऐसे में विद्यार्थियों का भविष्य भगवान भरोसे है।  दरअसल, संभाग के चारों जिलों में करीब 44 सरकारी महाविद्यालय हैं। जिनमें से 12 ऐसे हैं जहां एक दर्जन से अधिक महत्वपूर्ण विषयों के शिक्षक नहीं है। मजबूरन, विद्यार्थियों को अंग्रेजी और होम साइंस पढ़ने के लिए महंगे दामों पर टयूशन का सहारा लेना पड़ता है। सरकार की अनदेखी का खामियाजा हर साल विद्यार्थियों को भुगतना पड़ रहा है। </p>
<p><strong>5 कॉलेजों में नहीं लगती अंग्रेजी की कक्षा</strong><br />हाड़ौती के 5 राजकीय महाविद्यालयों में कई सालों से अंगे्रजी की कक्षाएं  ही नहीं लगती। जबकि, एडमिशन व एग्जाम फीस पूरी वसूली जाती है।  हालात यह हैं, राजकीय महाविद्यालय इटावा, हिंडौली, मांगरोल, अटरू बयॉज, अटरू गर्ल्स में पिछले कई वर्षों से अंग्रेजी की नियमित कक्षाएं नहीं लगी। हिंडौली में तो करीब तीन साल से अंग्रेजी की कक्षाएं लगी ही नहीं। इटावा कॉलेज कॉलेज में वर्ष 2021 के बाद से इंग्लिश पढ़ाने वाला नहीं है। इसी तरह मांगरोल में 2022 के बाद इस विषय का कोई शिक्षक ही नहीं आया। ऐसे में परीक्षा तक स्टूडेंट्स तनाव में रहते हैं। </p>
<p><strong>यहां नहीं चलती होम साइंस</strong><br />बारां जिले के चार राजकीय महाविद्यालयों में होम साइंस की कक्षाएं नहीं लगती। इनमें गवर्नमेंट कॉलेज बारां, शाहबाद कन्या,केलवाड़ा कन्या, अटरू कॉलेज शामिल हैं। यहां छात्राओं को पढ़ाने व समझाने वाले ही नहीं मिलते। हालांकि, बारां गर्ल्स कॉलेज में एक शिक्षक है। ऐसे में बेटियों को भटकना पड़ता है। प्रैक्टिल सब्जेक्ट होने के बावजूद परीक्षा में सबसे कम नम्बर इन्हीं में मिलते हैं। यहां न तो नियमित फैकल्टी है और न ही विद्या संबल पर मिलते हैं। छात्राएं सब्जेक्ट बदलने को मजबूर होती हैं।</p>
<p><strong>सब्जेक्ट ही बदल रहे विद्यार्थी</strong><br />हिंडौली महाविद्यालय के प्राचार्य रमेशचंद मीणा ने बताया कि अंग्रेजी के शिक्षक नहीं होने से विद्यार्थियों ने सब्जेक्ट ही बदल लिया। सत्र 2023-24 में दाखिले के दौरान छात्रों ने अंगे्रजी विषय लिया लेकिन शिक्षक नहीं होने से एग्जाम फॉर्म भरने के दौरान अंग्रेजी छोड़ दूसरा विषय ले लिया। इसी तरह सत्र 2022-23 के प्रथम वर्ष के छात्रों ने द्वितीय वर्ष में आकर अंगे्रजी विषय बदल दिया। विषय विशेषज्ञ नहीं होने से पढ़ाई तो प्रभावित होती है। </p>
<p><strong>मांगरोल में 10 में से 7 पद खाली</strong><br />राजकीय महाविद्यालय के प्राचार्य राजेश कुमार बताते हैं, यहां 10 पद स्वीकृत है। जिसमें से 7 विषयों के शिक्षकों के पद खाली हैं। इनमें अंगे्रजी , इतिहास, राजनेतिक विज्ञान, ऊर्दू, ज्योग्राफी शामिल हैं। पिछले दो साल से अंग्रेजी का कोई शिक्षक नहीं है। इस संबंध में आयुक्तालय को पत्र भी लिखे हैं। अभी प्रायोगिक परीक्षाएं भी होनी हैं, ज्योग्राफी के लिए दूसरी जगह से शिक्षक बुलाने पड़ेंगे। </p>
<p><strong>बारां में 59 में 9 ही शिक्षक </strong><br />राजकीय बारां कॉलेज के प्रिसिंपल केएम मीणा ने बताया कि यहां शिक्षकों के59 पद स्वीकृत हैं, जिसमें से 9 ही कार्यरत हैं। हालांकि, पहले 16 थे, लेकिन इसमें से 3 प्रतिनियुक्ति पर बाहर हैं और 4 शिक्षकों को राजकीय महाविद्यालय शाहबाद गर्ल्स, छबड़ा कन्या, नाहरगढ़ व सीसवाली में लगे हैं। ऐसे में कॉमर्स संकाय में अकाउंट्स, बिजनेस एडमिनेस्ट्रेशन, आर्ट्स में इतिहास, ज्योग्राफी, ऊर्दू, विज्ञान वर्ग में गणित के शिक्षक नहीं है। ऐसे में इनकी कक्षाएं संचालित करने में काफी परेशानी होती है। </p>
<p><strong>स्कॉलरशिप से लेकर एडमिशन तक सब पेंडिंग</strong><br />इटावा कॉलेज के प्राचार्य रामदेव मीणा ने बताया कि कॉलेज में उनके अलावा कोई शिक्षक नहीं है। हालांकि, संविदा पर समाजशास्त्र की शिक्षिका लगी हैं। इनके अलावा 5 विषयों के पद रिक्त हैं। एक साल से यही हालात है। बच्चों को पढ़ाने के अलावा स्कॉलरशिप, आॅनलाइन पोर्टल, एग्जाम और एडमिशन से लेकर कई तरह के कार्य भी करने होते हैं।  रे-सेंटर को पत्र लिख पांच विषयों के शिक्षक मांग रहे हैं। </p>
<p><strong>क्या कहते हैं विद्यार्थी</strong><br />कॉलेज में पिछले तीन साल से अंगे्रजी की पढ़ाई नहीं हो रही। सेमेस्टर प्रणाली के तहत दो साल एग्जाम हो रहे हैं। प्रथम सेमेस्टर में ही पेपर सिर से ऊपर निकल गया। न तो परीक्षा की तैयारी होती है और न ही सिलेबस समझाया जाता है। मजबूरन, ट्यूशन व वन वीक सीरीज का सहारा लेना पड़ रहा है। <br /><strong>- केवश दत्त, छात्र, इटावा कॉलेज</strong></p>
<p>एडमिशन व एग्जाम फीस देने के बाद भी अंगे्रजी, इतिहास व लोक प्रशासन जैसे मुख्य विषय पढ़ाने के लिए शिक्षक नहीं मिल रहे। परीक्षा में नम्बर कम आते हैं। शिक्षा अधिकारियों की लापरवाही का खामियाजा प्रथम सेमेस्टर में भुगतना पड़ा है। यहां एडमिशन लेना ही गलत हो गया। <br /><strong>- शंभू, तपेश, कैलाश, छात्र, मांगरोल कॉलेज</strong> </p>
<p>व्शिक्षकों की कमी तो है, लेकिन रे-सेंटर की मदद से व्यवस्थाएं बनाने का प्रयास कर रहे हैं। इसके अलावा आरपीएससी के माध्यम से शिक्षक भर्ती परीक्षा चल रही है, कुछ पेपर हो चुके हैं तो कुछ बाकी है। जैसी ही यह प्रक्रिया पूरी होगी, सरकार के माध्यम से कॉलेजों को नए शिक्षक मिल जाएंगे। वहीं, राजसेस कॉलेजों में विद्या संबल पर शिक्षक लगाकर  सुचारू रूप से पढ़ाई करवाई जा रही हैं। कॉलेज प्राचार्य आवश्यकतानुसार रे-सेंटर को पत्र  लिख शिक्षक की मांग करें, वहां से शिक्षक उपलब्ध कराए जाएंगे।<br /><strong>- गीताराम शर्मा, क्षेत्रिय सहायक निदेशक, आयुक्तालय कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 16 May 2024 16:33:20 +0530</pubDate>
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                <title>परीक्षा से पहले खाली हो गए कॉलेज, अब कौन पढ़ाएगा</title>
                                    <description><![CDATA[अधिकतर कॉलेजों में 30 से 40 प्रतिशत सिलेबस अधूरा चल रहा है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/colleges-became-vacant-before-exams--who-will-teach-now/article-71454"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-02/transfer-(6)15.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। राजस्थान कॉलेज एजुकेशन सोसायटी के अधीन संचालित हो रहे हाड़ौती के सरकारी कॉलेज बुधवार को एक साथ खाली हो गए। विद्या संबल पर लगे 90 से ज्यादा शिक्षकों को कार्यमुक्त कर दिया है। जिससे अस्टिेंट प्रोफेसर बेरोजगार हो गए वहीं, महाविद्यालयों में शिक्षण व्यवस्था गड़बड़ा गई।  हालात यह हैं, कॉलेजों में 30 से 40 प्रतिशत सिलेबस अधूरा है। जबकि, सेमेस्टर परीक्षा सिर पर है। ऐसे में विद्यार्थियों के भविष्य पर संकट खड़ा हो गया है। दरअसल, संभाग में 12 से ज्यादा नए राजकीय महाविद्यालय, राजस्थान कॉलेज एजुकेशन सोसायटी (राजसेस) के अधीन संचालित हैं। जिनमें प्राचार्य के अलावा सभी सहायक आचार्यों की नियुक्ति विद्या संबल योजना  के तहत की गई है। जिनका वर्किंग-डे सरकार ने 28 फरवरी तक ही निर्धारित किया गया था। जिसके तहत इन्हें कार्यमुक्त कर दिया गया। </p>
<p><strong>40 प्रतिशत कोर्स अधूरे</strong><br />हाड़ौती में राजसेस के अधीन संचालित सरकारी कॉलेजों में विद्या संबल शिक्षकों के कार्यमुक्त होने से शिक्षण व्यवस्था बेपटरी हो गई। अधिकतर कॉलेजों में 30 से 40 प्रतिशत सिलेबस अधूरा चल रहा है। जबकि, अगले माह में यूजी व पीजी की सेमेस्टर परीक्षाएं होना प्रस्तावित है। ऐसे में विद्यार्थियों  को परिणाम बिगड़ने का डर सता रहा है।  </p>
<p><strong>यह हैं राजेसस कॉलेज </strong><br />कोटा जिले में राजकीय कला कन्या महाविद्यालय रामपुरा, बूंदी में तालेड़ा व हिंडौली, झालावाड़ में असनावर और बारां जिले में राजकीय गर्ल्स कॉलेज छबड़ा, नाहरगढ़, शाहबाद, गर्ल्स अटरू, गर्ल्स केलवाड़ा, कृषि महाविद्यालय बारां व शाहबाद सहित कई कॉलेज शामिल हैं। </p>
<p><strong>भविष्य से खिलवाड़</strong><br />हाड़ौती के चारों जिलों में गत दो वर्षों में 12 से ज्यादा नए कॉलेज खुले हैं। जिनमें वर्तमान में प्रथम व द्वितीय वर्ष की कक्षाएं ही संचालित हो रही हैं। दोनों वर्षों को मिलाकर कुल 3 हजार से अधिक विद्यार्थियों का नामांकन है। इनमें से यूजी प्रथम वर्ष के पहले सेमेस्टर की परीक्षाएं अगले माह में होनी है। बिना शिक्षकों के विद्यार्थियों के भविष्य पर तलवार लटक गई है। </p>
<p><strong>क्या कहते हैं शिक्षक</strong><br />विद्या संबल के तहत नियुक्ति के दौरान जो आॅडर मिले उसके तहत 24 हफ्ते या 28 फरवरी जो भी पहले हो, उस दिन शिक्षकों को प्राचार्य द्वारा कार्यमुक्त कर दिया जाएगा। शिक्षक बेरोजगार हो गए वहीं, स्टूडेंट्स की पढ़ाई प्रभावित हो गई। सरकार को शिक्षण व्यवस्था सुचारू रखने के लिए सैकंड सेमेस्टर तक शिक्षकों की नियुक्ति बरकरार रखनी चाहिए।<br /><strong>- प्रो. शर्मिला, सहायक आचार्य, राज. कला कन्या महा.रामपुरा कोटा</strong></p>
<p>हाड़ौती ही नहीं, पूरे प्रदेश में विद्या संबल शिक्षकों को कार्यमुक्त कर दिया गया है। आयुक्तालय ने नियुक्तियां देने में एकरूपता नहीं रखी, जबकि  हटाने के लिए 28 फरवरी निर्धारित कर दी। छात्रहित को देखते हुए सरकार को यूजीसी के नियमों के तहत सेमेस्टर प्रणाली के आधार पर शिक्षकों की नियुक्तियां सैकंड सेमेस्टर तक आगे बढ़ानी चाहिए। <br /><strong>- डॉ. हनीफ खान, राजकीय कन्या महाविद्यालय केलवाड़ा</strong></p>
<p>एक तरफ तो सरकार 100 दिन की कार्ययोजना की बात करती है और दूसरी तरफ शिक्षण व्यवस्था ठप कर देती है। शिक्षकों की नियुक्ति कहीं अक्टूबर तो कहीं नवम्बर में की गई। ऐसे में उन्हें पढ़ाने के लिए 4 माह ही मिले। जिसमें भी दिवाली, शीतकालीन अवकाश आ गए। ऐसे में तीन माह ही पढ़ाने को मिले। ऐसे में 180 में से 120 ही क्लांश हो सके। जबकि, 30 क्लांश अधूरे हैं। जिससे छात्रों का सिलेबस अर्पूण रह गया। <br /><strong>- डॉ. रवि कुमार  नागर, सहायक आचार्य, राज.कला महाविद्यालय सीसवाली</strong></p>
<p><strong>क्या कहते हैं प्राचार्य </strong><br />शिक्षकों ने फर्स्ट सेमेस्टर तक की पढ़ाई तो करवा दी है। लेकिन, सैकंड सेमेस्टर तक शिक्षक नहीं लगाए तो शिक्षण व्यवस्था बिगड़ जाएगी। हालांकि, सरकार की 100 दिवसीय कार्य योजना के तहत 3 हजार पदों पर भर्ती की जाएगी। जिससे व्यवस्थाएं सुचारू होने की उम्मीद है।<br /><strong>- ब्रिज किशोर शर्मा, प्राचार्य, राजकीय कला महाविद्यालय तालेड़ा</strong></p>
<p>विद्या संबल के शिक्षक कार्यमुक्त हो चुके हैं। बच्चों के कोर्स व प्रेक्टिकल अधूरे हैं। बच्चों का कोर्स पूरा करवाने के लिए रे-सेंटर को लिखकर शिक्षक मांगेंगे। फिलहाल, दोबारा शिक्षकों की नियुक्ति को लेकर आयुक्तालय से कोई दिशा-निर्देश नहीं है। <br /><strong>- डॉ. राजेंद्र चौहान, प्राचार्य, राजकीय कला कन्या महाविद्यालय रामपुरा</strong></p>
<p><strong>क्या कहते हैं विद्यार्थी </strong><br /><strong>परिणाम बिगड़ने का डर</strong><br />यूजी प्रथम व द्वितीय वर्ष का करीब 25 से 30 प्रतिशत कोर्स अधूरा चल रहा है। छात्रों के सामने असमंजस की स्थिति बनी हुई कि उन्हें बिना तैयारी के परीक्षा देनी पड़ेगी। ऐसे में रिजल्ट बिगड़ने का डर सता रहा है। सरकार  विद्यार्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रही है। <br /><strong>- उपेंद्र सिंह, प्रथम वर्ष, राजकीय महाविद्यालय तालेड़ा </strong></p>
<p><strong>न कोर्स पूरा और न ही प्रेक्टिकल</strong><br />विद्या संबल के सभी शिक्षकों को कार्यमुक्त कर दिया गया है। जबकि, बीए फर्स्ट सेमेस्टर का 40 प्रतिशत कोर्स अधूरा है। प्रेक्टिकल की फाइलें तक चेक नहीं हुई हैं। बिना शिक्षक के साइन के हमें प्रेक्टिकल के नम्बर भी नहीं मिल पाएंगे। सरकार फीस तो पूरी वसूल रही लेकिन पढ़ाने के लिए   नियमित शिक्षक नहीं लगा रही। छात्राएं परीक्षा को लेकर तनाव में है।<br /><strong>- खुशबू मेहता, बीए प्रथम वर्ष, राजकीय कला कन्या महाविद्यालय केलवाड़ा </strong></p>
<p><strong>पैसा देकर भी पढ़ने को तरसे</strong><br />सरकार की लापरवाही से 300 छात्राओं का भविष्य दांव पर लग गया है। पढ़ाने वाले नहीं है, प्रेक्टिकल की फाइलें जांचने वाले नहीं है। पैसा देकर भी पढ़ने के लिए तरसना पड़े, ऐसे कॉलेज में एडमिशन लेने का क्या फायदा। प्राचार्य भी जवाब नहीं दे पा रहे।  10 प्रतिशत भी प्रेक्टिल फाइलें जमा नहीं हुई। शिक्षक नहीं लगे तो धरना-प्रदर्शन करेंगे।<br /><strong>- दिव्यांशी मुरारिया, बीए प्रथम वर्ष, राजकीय कला कन्या महाविद्यालय रामपुरा</strong></p>
<p><strong>6 माह में सिर्फ दो बार लगी अंग्रेजी-हिन्दी की क्लासें</strong><br />सरकार ने इस साल दो सेमेस्टर तो कर दिए लेकिन एक सेमेस्टर का कोर्स भी पूरा नहीं हुआ। ज्योग्राफी व होमसाइंस के प्रेक्टिकल अब तक पूरे नहीं हुए। इनके नम्बर के बिना पास होना मुश्किल हो जाएगा। यहां 6 माह में सिर्फ दो बार ही अंग्रेजी-हिन्दी विषय की कक्षाएं लगी है। ऐसे में पास होने के भी लाले पड़ गए हैं। <br /><strong>- अंजलि मेहता, बीए प्रथम वर्ष, राजकीय कला कन्या महाविद्यालय केलवाड़ा</strong></p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />28 फरवरी तक विद्या संबल शिक्षकों की कार्यमुक्ति का आदेश पिछली सरकार का था। यह मामला आयुक्तालय के ध्यान में है। विद्यार्थियों का नुकसान नहीं होने दिया जाएगा। इसके लिए वैकल्पिक व्यवस्था की जाएगी। <br /><strong>- प्रो. गीताराम शर्मा, क्षेत्रिय सहायक निदेशक, कॉलेज आयुक्तालय कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Thu, 29 Feb 2024 15:48:50 +0530</pubDate>
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