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                <title>Anganwadi - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>असर खबर का : आंगनबाड़ी केन्द्रों पर बच्चों के लिए 14 जनवरी तक अवकाश</title>
                                    <description><![CDATA[पंजीकृत बच्चों को दिए जाने वाला गरम पोषाहर, टेक होम राशन के रूप में उपलब्ध करवाने के निर्देश ।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/impact-of-the-news--anganwadi-centers-closed-for-children-until-january-14th/article-138545"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/1200-x-600-px-(1)13.png" alt=""></a><br /><p>कोटा।  दैनिक नवज्योति में स्कूलों में अवकाश लेकिन आंगनबाड़ी के बच्चे केंद्र पर आने को मजबूर शीर्षक से बीते 31 दिसंबर को समाचार प्रकाशित होने के बाद सोमवार को प्रशासन हरकत में आया और आंगनबाड़ी केंद्र पर 14 जनवरी तक अवकाश घोषित किया। वहीं प्रशासन ने जिले में शीतलहर के मध्यनजर आंगनबाड़ी केन्द्रों पर आने वाले शालापूर्व शिक्षा गतिविधियों के 3-6 वर्ष की आयु वर्ग के बच्चों के लिए 6 से 14 जनवरी तक के लिए अवकाश घोषित किया गया है। जिला कलक्टर पीयूष समारिया ने इस संबंध में आदेश जारी किए हैं।</p>
<p>आदेश में आंगनबाड़ी केन्द्रों के माध्यम से दी जाने वाली अन्य सेवाएं जैसे टीकाकरण, मातृ-शिशु स्वास्थ्य एवं पोषण दिवस आदि पूर्व की भांति जारी रहेंगी। समस्त आंगनबाड़ी केन्द्रों पर मानदेयकर्मी निर्धारित समय में नियमित रूप से उपस्थित रहकर आंगनबाड़ी केन्द्रों के संचालन संबंधी समस्त गतिविधियां सम्पादित करेंगे। साथ ही, उक्त अवधि के दौरान आंगनबाड़ी केन्द्र पर पंजीकृत बच्चों को दिए जाने वाला गरम पोषाहर, टेक होम राशन के रूप में उपलब्ध करवाने के निर्देश दिए गए हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 06 Jan 2026 14:30:29 +0530</pubDate>
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                <title>लापरवाही : आंगनबाड़ी पाठशाला पर मंडराता खतरा</title>
                                    <description><![CDATA[आंगनबाड़ी का भवन पूरी तरह जर्जर अवस्था में पहुंच चुका है। छत के भीतर बड़े-बड़े गड्ढे हो गए है। और किसी भी समय बड़े हादसे को न्योता दे सकता है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jhalawar/negligence--danger-looms-over-the-anganwadi-school/article-136635"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/3694.png" alt=""></a><br /><p>सूमर। ग्राम पंचायत सूमर के चीकली गांव में राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय के पास संचालित आंगनबाड़ी पाठशाला की स्थिति अत्यंत चिंताजनक बनी हुई है। आंगनबाड़ी का भवन पूरी तरह जर्जर अवस्था में पहुंच चुका है। छत के भीतर बड़े-बड़े गड्ढे हो गए हैं, जिनसे बारिश के दौरान लगातार पानी टपकता रहता है। ऐसे हालात में यहां अध्ययनरत 18 नन्हे-मुन्ने बच्चे इसी खतरनाक भवन में बैठकर पढ़ने और खेलने को मजबूर हैं, जो किसी भी समय बड़े हादसे को न्योता दे सकता है। </p>
<p>पिपलोदी में हुए दर्दनाक हादसे ने पूरे क्षेत्र को झकझोर दिया था, लेकिन इसके बावजूद चीकली गांव की आंगनबाड़ी आज भी उसी खतरे की जद में बनी हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि बरसात के मौसम में टपकती छत बच्चों के सिर पर लटकती तलवार बन चुकी है। ग्रामीणों ने बताया कि भवन की जर्जर स्थिति के चलते बच्चों को बाहर बैठाना पड़ता है, जिससे उनकी पढ़ाई के साथ-साथ सुरक्षा भी प्रभावित हो रही है। यह समस्या केवल एक गांव तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में जर्जर आंगनबाड़ी भवनों की स्थिति मासूम बच्चों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है। सरकारी योजनाएं कागजों में मजबूत नजर आती हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इससे अलग दिखाई दे रही है। रामबिलास बैरवा, महेश मीणा सहित अन्य ग्रामीणों ने बताया कि छत में बने गड्ढे लगातार बढ़ते जा रहे हैं। ग्रामीणों ने किसी बड़े हादसे से पहले तत्काल मरम्मत अथवा नए आंगनबाड़ी भवन के निर्माण की मांग की है।</p>
<p> पिपलोदी हादसे के बाद भी प्रशासन बेखबर है। यहां केवल मरम्मत से काम नहीं चलेगा, बल्कि नए आंगनबाड़ी भवन का निर्माण जरूरी है।<br /><strong>- बलराम गुर्जर, वार्ड पंच </strong></p>
<p> इस समस्या को लेकर पहले भी प्रशासन को अवगत कराया जा चुका है। ये 18 बच्चे गांव का भविष्य हैं, जिन्हें खतरे में नहीं डाला जा सकता।<br /><strong>- महेंद्र गुर्जर, ग्रामीण</strong></p>
<p> महिला एवं बाल विकास विभाग से मामले को गंभीरता से लेने की मांग की।<br /><strong>- शालू शर्मा, ग्रामीण</strong></p>
<p>भवन की हालत खराब होने के कारण बच्चों को बाहर बैठाना पड़ रहा है।<br /><strong>- द्रोपदी बाई, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता</strong></p>
<p> सूचना विभाग के संज्ञान में है। भवन का स्वयं सर्वे कराया गया है और पीडब्ल्यूडी से भी सर्वे करवाया गया है। सर्वे रिपोर्ट व सूची उच्च स्तर पर भेज दी गई है, आगे की कार्रवाई प्रक्रिया में है।<br /><strong>- सत्येंद्र सिंह चौहान, विभागीय महिला एवं बाल विकास अधिकारी</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>झालावाड़</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 20 Dec 2025 16:53:02 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>शहर के कई आंगनबाड़ी केंद्रों में उपस्थिति कम, एक केंद्र मिला बंद </title>
                                    <description><![CDATA[विभिन्न केंद्रों पर किए गए निरीक्षण में कई अव्यवस्थाएँ सामने आईं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/low-attendance-at-several-anganwadi-centers-in-the-city--with-one-center-found-closed/article-134666"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/1200-x-600-px)-(1)12.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। राज्य सरकार व केंद्र सरकार द्वारा आंगनबाड़ी केंद्रों में पंजीकृत बच्चों के पोषण व स्वास्थ्य सुधार के लिए कई योजनाएं संचालित की जा रही हैं, लेकिन कोटा शहर के कुछ आंगनबाड़ी केंद्रों की वास्तविक स्थिति इन दावों के विपरीत दिखाई दी। बुधवार को विभिन्न केंद्रों पर किए गए निरीक्षण में कई कमियां और अव्यवस्थाएँ सामने आईं। वहीं केंद्रों पर बच्चों के खेलने की सामग्री कुछ जगहों पर गोदरेज में रखी हुई है तो कुछ में अलमारी में रखी हुई।</p>
<p><strong>दुर्गा बस्ती स्थित आंगनबाड़ी द्वितीय केंद्र : एक ही कमरे में पूरी व्यवस्था</strong><br />बुधवार सुबह करीब 11:40 बजे दुर्गा बस्ती में स्थित आंगनबाड़ी द्वितीय केंद्र का स्कैन किया गया। यह केंद्र केवल एक कमरे में संचालित हो रहा है। केंद्र में 7 पंजीकृत बच्चों में से मौके पर सिर्फ 1 बच्चा ही मौजूद था। जब रिपोर्टर ने बाकी बच्चों के बारे में पूछा तो कार्यकर्ता सायरा मंसूरी और सहायिका जयंती राठौर ने बताया कि सर्दी के कारण बच्चे कम आ रहे हैं। दोनों ने यह भी जानकारी दी कि सुपरवाइजर किसी मीटिंग में गई हुई हैं।इस केंद्र में बच्चों के खेलने की सामग्री कमरे में बनी अलमारियों और टांड पर रखी हुई मिली। वहीं, उसी एक कमरे में बच्चों के लिए दूध गर्म करने के साथ-साथ दलिया और अन्य खाद्य सामग्री भी तैयार की जाती हैं, जिससे साफ-सफाई और जगह की कमी जैसी समस्याएँ साफ नजर आती हैं।</p>
<p><strong>सिंधी कॉलोनी द्वितीय केंद्र: व्यवस्थित लेकिन उपस्थिति फिर भी कम</strong><br />सरकारी स्कूल में संचालित सिंधी कॉलोनी द्वितीय आंगनबाड़ी केंद्र का निरीक्षण बुधवार दोपहर 12 बजे किया गया। यहां भवन की दीवारों पर ज्ञानवर्धक पेंटिंग बनी हुई थीं, जो बच्चों के लिए शिक्षाप्रद वातावरण बनाती हैं।केंद्र में 10 पंजीकृत बच्चों में से 7 बच्चे ही उपस्थित थे। कार्यकर्ता सीमा कुमारी ने बताया कि सोमवार से शनिवार तक बच्चों को 10 ग्राम दूध और 5 ग्राम चीनी गर्म करके दी जाती है। इसके अलावा सरकार द्वारा निर्धारित मेन्यू चार्ट के अनुसार बच्चों को खिचड़ी, दलिया, उपमा सहित अन्य पोषक आहार भी दिया जाता है।</p>
<p><strong>साजीहेड़ा केंद: निरीक्षण के दौरान केंद्र बंद मिला</strong><br />साजीहेड़ा में एक निजी स्कूल के पास संचालित आंगनबाड़ी केंद्र पर जब संवाददाता बुधवार दोपहर 12:30 बजे पहुंचे, तो केंद्र बिल्कुल खाली और बंद मिला। आसपास के लोगों ने बताया कि केंद्र पर उस समय कोई मौजूद नहीं था। मकान मालिक व अन्य ने जानकारी दी कि सहायिका कुछ देर के लिए केंद्र खोलकर आई थी और थोड़ी देर बाद ही चली गई, जिससे यह स्पष्ट होता है कि केंद्र नियमित समय पर संचालित नहीं हो रहा है।</p>
<p>दुर्गा बस्ती स्थित आंगनबाड़ी द्वितीय की सुपरवाईजर ट्रेनिंग में हैं। साथ हीआंगनबाड़ी कार्यकतार्ओं की डयूटी एसआईआर में लगी हुई। जिसकी वजह से कुछ व्यवस्थाएं प्रभावित हो रही है। और अन्य समस्याओं को दिखावाता हूं।<br /><strong>- आलोक शर्मा, सीडीपीओं कोटा शहर</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 04 Dec 2025 14:40:52 +0530</pubDate>
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                            </item>
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                <title>केंद्र पर आना है तो बच्चों को बोतल घर से लाना होगा </title>
                                    <description><![CDATA[आंगनबाड़ी केंद्र पर बैठने के लिए कुर्सियां भी पर्याप्त मात्रा में नहीं होने पर टीकाकरण के दिन आने वाले अभिभावको को बैठने में भी परेशानी का सामना करना पड़ता हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/if-children-have-to-come-to-the-centre--they-will-have-to-bring-bottles-from-home/article-121297"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-07/11.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। महिला बाल विकास विभाग द्वारा संचालित शहर के विभिन्न वार्डों में चलने वाले आंगनबाड़ी केंद्रों के पास ना तो अपने भवन और ना ही उनके पास सरकार ने किसी प्रकार की सुविधा केंद्र पर विकसित कर रखी हैं। केंद्र पर आने वाले बच्चे घर से ही पीने के पानी की बोतल लेकर आते हैं। वहीं अधिकतर केंद्र जर्जर हैं। जिससे बच्चों के साथ कभी भी हादसा हो सकता हैं। घोड़े वाले बाबा चौराहे बस्ती में स्थित आंगनबाड़ी केंद्र द्वितीय में कार्यरत कार्यकर्ता माया नायक ने बताया कि केंद्र में वर्तमान में कुल 55 बच्चे नांमाकित है। जिनसे तीन से छह वर्ष तक के 20 बच्चे व जीरों से लेकर तीन वर्ष तक के 35 बच्चे हैं। आंगनबाड़ी  केंद्र एक किराये एक कमरे में चली रहे हैं। बच्चें पीने के लिए पानी की बोतल भी घर से साथ लेकर आते हैं। आंगनबाड़ी केंद्र पर बैठने के लिए कुर्सियां भी पर्याप्त मात्रा में नहीं होने पर टीकाकरण के दिन आने वाले अभिभावको को बैठने में भी परेशानी का सामना करना पड़ता हैं। साथ ही जब कभी भी केंद्र की लाइट जाती है अंधेरा हो जाता है। बच्चों को अंधेरे में ही बैठा का पढ़ाई करनी पढ़ती है।</p>
<p><strong>आंगनबाड़ी केंद्र किराए के एक कमरें में संचालित</strong><br />शहर की अधिकतर आंगनबाड़ी किराये के घरों में मात्र एक या दो कमरों में संचालित होती हंै। जिसमें बच्चों को दिया जाने वाला खाना बनता हैं। और इसी कमरे में बच्चों को बैठकर पोषाहर खाना पड़ता  व  पोषाहर वितरण भी उसी में करना पड़ता हंै। <br /> <br /><strong>केंद्र के भवन जर्जर स्थिति में</strong><br />केंद्रों के भवन अधिकतर जर्जर व पुराने है जिससे बारिश के समय पर पानी टपकता हैं। और कमरों में सीलन आ रही हैं। साथ ही बारिश में कई बार केंद्र का रिकार्ड व पोषाहार भी बारिश में भीग जाता हैं। केंद्र की छातों से प्लास्टिक गिरता रहता हैं। बच्चों को बैठने में भी परेशानी आती है। साथ ही केंद्रों के भवनों में दरारें व सीलन आ रही है। </p>
<p><strong>बच्चों के खिलौने के नाम पर कुछ नहीं</strong><br />चाहे राज्य सरकार आंगनबाड़ी केंद्र पर खेल सुविधा के नाम पर कितनी वाहीं - वाही लूटे पर आंगनबाड़ी केंद्रों खेलने के लिए जगह ही उपलब्ध नहीं हैं। वहीं खिलौने के नाम पर ना तो किचन सेट, रिंग, लेसिंग फे्रम, रंगीन मोम, पेंसिल, बड़ी गेंद, रस्सी, सब्जी फल, जानवरों के चित्र, राउंड टेबल, फिसलन पट्टी, सहित विभिन्न खिलौने होने चाहिए पर अधिकतर आंगनबाड़ी केंद्र मेें कुछ भी नहीं है। बच्चों को बैठने के लिए टेबल -कुर्सी की भी व्यवस्था नहीं है।</p>
<p><strong>बच्चों को पढ़ाने के लिए ब्लैकबोर्ड की व्यवस्था नहीं</strong><br />केंद्र की दिवारों पर आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने बच्चों को पढ़ने के लिए पहाड़ व गिनती लिख रखी है।  साथ ही केंद्र पर केंद्र पर बच्चों को पढ़ने के लिए विभिन्न चार्ट होने चाहिए जो कि नहीं हैं। दुर्गा बस्ती आंगनबाड़ी केंद्र द्वितीय में चलने वाले आंगनबाड़ी केंद्र में कुल 28 बच्चें है जिसमें अभी एक से तीन वर्ष के 17 व तीन से छह वर्ष के 11 बजे नामांकित है किराये के एक कमरें चलता है। पिछले दिनों बारिश से उसमें रखी किताबें व स्टेशनरी भीग गई है। कार्यकर्ता सायरा मंसूरी ने बताया कि हम एक ही रूम में पोषाहर, बच्चों की पढ़ाई, खेल खेलना, टीकाकरण सहित सभी कार्य एक ही कमरें में करना पड़ता है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता ने बताया कि केंद्र पर जो सरकारी स्कूल में जो आंगनबाड़ी संचालित की जाती है उनको जो फर्नीचर, खेल के सामान, सुव्यवस्थित रूम सहित अन्य जो सुविधा दी जाती है वहां अन्य केंद्र को भी दी जानी चाहिए। </p>
<p><strong>इनका कहना</strong><br /> जो आंगनबाड़ी केंद्र किरायें  के भवन में चले रहे उनके लिए सरकारी भवन देख रहे हैं।  जो केंद्र जर्जर  हैं उनको अन्य जगह पर शिफ्ट कर दिया जायेंगा। <br /><strong>- सीता शर्मा, उपनिदेशक बाल विकास विभाग कोटा </strong></p>
<p>वर्तमान में एक हजार रूपए जो किराया दिया जाता है उसको बढ़ाकर करीब तीन या चार हजार रूपए किए। साथ ही आंगनबाड़ी केंद्र पर सुविधाओं का विस्तार किया जाएं।<br /><strong>- शाहिदा खान, राज. आंगनबाड़ी महिला कर्मचारी महासंघ</strong></p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 22 Jul 2025 18:13:04 +0530</pubDate>
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                <title>बिहार में अब जीविका दीदी की पोशाक पहनेंगे आंगनबाड़ी के बच्चे, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने दी  प्रस्ताव को स्वीकृति </title>
                                    <description><![CDATA[बिहार में अब सभी आंगनबाड़ी केंद्रों के बच्चे जीविका दीदी के सिले पोशाक पहनेंगे और इसके लिए 400 रुपए की राशि जीविका संस्थान को दी जाएगी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/in-bihar-now-the-children-of-anganwadi-will-wear-jeevika/article-116297"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-06/news-(3)3.png" alt=""></a><br /><p>पटना। बिहार में अब सभी आंगनबाड़ी केंद्रों के बच्चे जीविका दीदी के सिले पोशाक पहनेंगे और इसके लिए 400 रुपए की राशि जीविका संस्थान को दी जाएगी। मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग के अपर मुख्य सचिव डॉ. एस. सिद्धार्थ ने मंगलवार को बताया कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में यहां हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में इस आशय के प्रस्ताव को स्वीकृति दी है।</p>
<p>डॉ. सिद्धार्थ ने बताया कि इसके लिए मंत्रिमंडल के स्तर से नई व्यवस्था की गई है। अब बच्चों के अभिभावकों के बैंक खातों में 400 रुपए पोशाक की राशि ट्रांसफर नहीं की जाएगी बल्कि यह राशि जीविका दीदियों के संस्थान को दी जाएगी और वे पोशाक तैयार करके बच्चों को सप्लाई करेंगी। उन्होंने बताया कि 400 रुपए की इस राशि में प्रतिवर्ष पांच प्रतिशत की बढ़ोतरी भी की जाएगी। आंगनबाड़ी केंद्र पर प्रत्येक बच्चे को एक जोड़ी पोशाक मिलेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 03 Jun 2025 18:55:31 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>दिया कुमारी ने मानी आंगनबाड़ी कर्मियों की मांगें, धरना स्थगित</title>
                                    <description><![CDATA[अगर बजट सत्र में हमारी मांगों को पूरा नहीं किया जाएगा तो हम फिर से महिला एंव बाल विकास निदेशालय के सामने धरना देंगे।  ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/diya-kumari-accepted-the-demands-of-anganwadi-workers-and-postponed/article-101020"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-01/5554-(5)19.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। अखिल राजस्थान राज्य महिला एवं बाल विकास कर्मचारी संघ एकीकृत ने 9वें दिन धरना पदर्शन खत्म करने की घोषणा की। आंगनबाड़ी कर्मियों के प्रतिनिधिमंडल से उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी ने मुलाकात की। दूसरे राउंड की वर्ता सफल रही। इसके बाद संघ ने बजट सत्र तक धरना स्थगित करने की घोषणा की है। संघ के प्रदेशाध्यक्ष ने कहा कि दिया कुमारी से हमारी वार्ता सकारात्मक रही है।</p>
<p>डिप्टी सीएम ने हमारी मांगों को मान लिया है। दिया कुमारी ने हमें भरोसा दिया है कि हमारी मांगों को इस बजट सत्र में पूरा कर दिया जाएगा। डिप्टी सीएम के इस आश्वासन के साथ ही फिलहाल हम धरना स्थगित कर रहे हैं। अगर बजट सत्र में हमारी मांगों को पूरा नहीं किया जाएगा तो हम फिर से महिला एंव बाल विकास निदेशालय के सामने धरना देंगे।  </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 17 Jan 2025 10:27:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जर्जर आंगनबाड़ी में कैसे खिलेंगे नौनिहाल</title>
                                    <description><![CDATA[ग्राम पंचायत सरपंच को इस विषय में कई बार अवगत कराया फिर भी कोई समाधान नहीं हुआ।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jhalawar/how-will-the-children-blossom-in-a-dilapidated-anganwadi/article-89692"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-09/pze-(4)5.png" alt=""></a><br /><p> चौमहला। चौमहला क्षेत्र के गांव चोरबर्डी में आंगनबाड़ी भवन क्षतिग्रस्त हो रहा है । बरसात के  दिनों में इसकी छत जगह- जगह से टपकती रहती है, नन्हे नन्हे बच्चें हादसे के साए में अक्षर ज्ञान सीख रहे है। क्षेत्र के गांव चोरबर्डी में आंगनबाड़ी केंद्र का भवन काफी क्षतिग्रस्त हो रहा है, जगह जगह से बरसात में पानी टपकता है, दरवाजे खिड़की भी खराब हो रहे है। नीचे का फर्श भी जमीन में धंस रहा है, हमेशा भय बना रहता है, पोषाहार भी खराब हो जाता है। महिला व बच्चों के कुपोषण को लेकर सरकार तरह-तरह की योजनाएं चला रही है और हर वर्ष करोड़ों रुपए खर्च कर रही है, लेकिन अभी भी आंगनबाड़ी भवन की सुरक्षा व्यवस्था की ओर ध्यान नहीं है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता भावना चौहान ने बताया कि आंगनबाड़ी भवन की छत पूरी तरह जर्जर हो चुकी है। बरसात में चारों तरफ से पानी टपकता है, पोषाहार भी गीला हो जाता है, आए दिन हादसों का भी डर बना रहता है। वही आंगनबाड़ी के दोनों तरफ पास में बने गड्ढे जिसमें बारिश का पानी भर जाने से आंगनबाडी में भी पानी आ जाता है। ग्राम पंचायत सरपंच को इस विषय में कई बार अवगत कराया फिर भी कोई समाधान नहीं हुआ। ग्रामीण गजराव सिंह, कचरूसिंह, कृपाल सिंह पाटीदार, दिलीप सिंह,कमलेश टेलर, नारायण सिंह,राम लाल बारेट आदि ग्रामीणों ने शीघ्र नया भवन बनाने की मांग की है।</p>
<p>बच्चों को बारिश के समय बैठने में काफी समस्या होती है, लेकिन किसी का इस और  ध्यान नहीं है। समस्या का समाधान कर शीघ्र नया भवन बनाया जाए।<br /><strong>- दिलीप सिंह ग्रामीण</strong></p>
<p>गांव का आंगनबाड़ी भवन बरसात के दिनों पानी टपकता है, पोषाहार भी गीला हो जाता है। पढ़ाने वाले व बच्चों को काफी समस्या का सामना करना पड़ता है। जर्जर अवस्था के चलते माता पिता बच्चों के आंगनबाड़ी भी नहीं भेजते है।<br /><strong>- गजराव सिंह ग्रामीण</strong></p>
<p>काफी दिनों से आंगनबाड़ी की छत से पानी टपक रहा है, लेकिन संबंधित अधिकारी की नजर इस ओर नहीं गई है। समस्या का समाधान होना चाहिए। <strong>- कचरू सिंह ग्रामीण</strong></p>
<p>आंगनबाड़ी भवन क्षतिग्रस्त हो रहा है, बरसात में पानी टपकता है, दरवाजे खिड़की भी क्षतिग्रस्त है( उच्च अधिकारियों को अवगत करा रखा है।<br /><strong>- भावना चौहान, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता</strong></p>
<p> इसका प्रस्ताव बनाकर उच्च अधिकारियों को भिजवाया जाएगा तथा समस्या का जल्द से जल्द समाधान करवाया जाएगा। <br /><strong>- रमेश चंद्र वर्मा, महिला बाल विकास अधिकारी, डग</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>झालावाड़</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 05 Sep 2024 17:00:39 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>आंगनबाड़ी में बच्चों को खेल खेल में पढ़ना सिखाया जाएगा</title>
                                    <description><![CDATA[आईसीडीएस के निदेशक ओपी बुनकर ने कहा कि बच्चों में प्री स्कूल, बालबाड़ी में बच्चों के शारीरिक विकास के साथ ही उसका मानसिक विकास किया जाना लक्षित है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/children-will-be-taught-to-read-through-games-in-anganwadi/article-88982"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-08/1rtrer.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। निदेशक समेकित बाल विकास सेवाएं (आईसीडीएस) ओपी बुनकर ने आईजीपीआर संस्थान में आईसीडीएस, राजस्थान और राष्ट्रीय जन सहयोग एवं बाल विकास संस्थान (एनआईपीसीसीडी) के संयुक्त तत्वाधान में "पोषण भी पढ़ाई भी" विषय पर दो दिवसीय राज्य स्तरीय मास्टर ट्रेनर्स प्रशिक्षण कार्यक्रम रखा।</p>
<p>बुनकर ने कहा कि समस्त आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को प्रारंभिक बाल्यावस्था में शिक्षा के अंतर्गत उनका क्षमता वर्धन किये जाने के लिए दिए जाने वाले प्रशिक्षण के लिए जिला उपनिदेशकों, सीडीपीओ तथा महिला पर्यवेक्षकों का दो दिवसीय मास्टर ट्रेनर्स प्रशिक्षण कार्यक्रम ऑनलाइन ऑफलाइन प्रशिक्षण करवाया जा रहा है। राजस्थान में 50 प्रतिशत से अधिक महिलाएं एनीमिक हैं। हम इस पर काम करके महिलाओं को एनीमिया से बचाना हैं। गर्भवती और धात्री माताओं को बेहतर स्वास्थ्य प्रदान करने आंगनबाड़ियों की महत्वपूर्ण भूमिका है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि बच्चों में प्री स्कूल, बालबाड़ी में बच्चों के शारीरिक विकास के साथ ही उसका मानसिक विकास किया जाना लक्षित है। बच्चों पर पढ़ाई का ज्यादा बोझ नहीं डाला जाना चाहिए। प्रयास यह किया जाना चाहिए कि बच्चे खेल खेल में सीख सके। बच्चा आंगनबाड़ी में आने हेतु लालायित रहे तो हम अपने इस उद्देश्य में कामयाब हो सकेंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/children-will-be-taught-to-read-through-games-in-anganwadi/article-88982</link>
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                <pubDate>Thu, 29 Aug 2024 20:00:21 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>आंगनबाड़ी केंद्रों पर बुनियादी सुविधाओं से भी वंचित हैं नौनिहाल</title>
                                    <description><![CDATA[इनकी देखरेख नहीं होने के कारण यह टांके क्षतिग्रस्त अवस्था में पड़े हैं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/baran/young-children-are-deprived-of-even-basic-facilities-at-anganwadi-centers/article-69224"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-02/photo-(10).png" alt=""></a><br /><p>राजपुर। आदिवासी अंचल क्षेत्र में बाल विकास परियोजना विभाग द्वारा  224 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित किए जा रहे हैं। जिनमें तीन वर्ष से 6 वर्ष तक के 7095 बालक-बालिकाएं अध्ययन करते हैं। आंगनबाड़ी भवन पर बालक-बालिकाओं के लिए पर्याप्त पानी की व्यवस्था नहीं है। आंगनवाड़ी सहायिका को इधर-उधर से बालक-बालिकाओं के लिए पानी लाना पड़ता है। पानी की सुविधा नहीं होने के कारण शौचालय की स्थिति भी दयनीय बनी हुई है। ऐसे में आंगनबाड़ी केंद्रों पर आने वाले बालक-बालिकाओं सहित गर्भधात्री गर्भवती महिलाओं को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। मजबूरन आंगनबाड़ी के बालक बालिकाओं एवं आने वाली महिलाओं को खुले में शौच आदि के लिए जाना पड़ रहा है। आंगनबाड़ी केंद्रों पर बरसों पहले एक संस्था द्वारा जल संचय करने के लिए लाखों करोड़ों रुपए की लागत से आंगनबाड़ी केंद्रों पानी के टांकों का निर्माण कराया था और उनमें छत से पाइपलाइन जोड़कर बारिश का पानी संचय किया जाता था। जिसमें एक हैंड पंप भी लगाया गया था जो बारिश के पानी से क्षेत्र के लोगों को आवश्यकता के अनुरूप पानी उपलब्ध होता था। लेकिन अब इनकी देखरेख नहीं होने के कारण यह टांके क्षतिग्रस्त अवस्था में पड़े हैं। टांको के अंदर गंदगी फैली हुई है। </p>
<p><strong>टांकों के ढक्कन हुए चोरी </strong><br />जानकारी के अनुसार टांकों से ढक्कन चोरी हो गए हैं। ऐसे में आंगनबाड़ी केंद्रों पर आने वाले बालक-बालिका इन टांकों पर खेलते नजर आते हैं। जिससे इनको हमेशा दुर्घटना घटित होने का अंदेशा बना रहता है। इस मामले को लेकर जिम्मेदार कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं। बरसों पहले टांके में गिरने से एक बालिका की मौत हो गई थी। उसके बावजूद भी अभी तक इन टैंकों पर ढक्कन नहीं लगवाए गए हैं। अगर इस मामले को जिम्मेदार विभाग के अधिकारियों ने गंभीरता से नहीं लिया तो आने वाले समय में कोई बड़ी दुर्घटना घटित हो सकती है। पूरी तरह हुए जीर्ण-शीर्ण: ग्रामीण भरत सिंह यादव, नरेश कुमार, कलाराम सहरिया, जसराम ने बताया कि आंगनबाड़ी केंद्रों पर वर्षों पहले टांकों का निर्माण करवाया था जो अब पूर्ण रूप से जीर्ण-शीर्ण और गंदगी से अटे पड़े हैं। सरकारी धन का दुरुपयोग जमकर हो रहा है। लेकिन इनकी सुध नही ली जा रही। आंगनबाड़ी केंद्र के आसपास लगे गंदगी के ढेर आदिवासी अंचल क्षेत्र में संचालित आंगनबाड़ियों पर साफ-सफाई की व्यवस्था अधिकांशतया चौपट बनी हुई है। भवनों के आसपास गंदगी के ढेर आंगनबाड़ी केंद्र पर आने वाले बच्चों के लिए बीमारियों का न्यौता देते नजर आते हैं। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा साफ-सफाई व्यवस्था ठीक तरीके से नहीं कराई जाती है। </p>
<p>आंगनबाड़ी भवनों पर बरसों पहले किसी संस्था द्वारा बारिश का पानी संचय करने के लिए टांकों का निर्माण करवाया गया था। संस्था की जानकारी नहीं है। लेकिन गंदगी फैली हुई है। ढक्कन गायब है तो इनको दुरुस्त करवाने के लिए सभी ब्लॉक की आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को पाबंद किया जाएगा। पानी की समस्या को लेकर उच्चाधिकारियों को अवगत करा रखा है।<br /><strong>- रवि मित्तल, बाल विकास परियोजना अधिकारी, शाहाबाद</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बारां</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 05 Feb 2024 19:05:34 +0530</pubDate>
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                <title>आंगनबाड़ी के बच्चों को रास नहीं आ रहा नया पोषाहार</title>
                                    <description><![CDATA[जिले में बच्चों को कुपोषण से छुटकारा दिलाने के लिए सरकार ने पोषाहार वितरण में बदलाव कर सभी आंगनबाड़ी केंद्रों पर अगस्त से बालकों, गर्भवती, धात्री महिलाओं व किशोरियों को पोसेस्ड पूरक पोषाहार वितरण  शुरू किया लेकिन ये नया पोषाहार केंद्रों से जुड़े लाभार्थियों रास नहीं आ रहा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/children-of-anganwadi-are-not-liking-the-new-nutrition/article-23019"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-09/anganbadi-k-bachee-posahar-kota-news-16-9-2022.jpg" alt=""></a><br /><p> कोटा। सरकार ने आंगनवाड़ी में आ रहे बालक बालिकाओं को पोष्टिक आहार के लिए अगस्त से पोषाहार में बदलाव किए लेकिन नया पोषाहार की गुणवत्ता ठीक नहीं होने से बच्चों को दाल और दलिया रास नहीं आ रहा है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का कहना है कि केंद्रों पर जो नया पोषाहार पैकेट सप्लाई किया जा रहा है वो घटिया किस्म का है। बच्चों को मीठा दलिया बनाकर देने पर बच्चों पसंद नहीं आ रहा है। केंद्रों सप्लाई दलिया और दाल के पैकेट की मात्रा भी कम है। उल्लेखनीय है कि ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों की आंगनबाड़ी केंद्रों  जुड़ी गर्भवती,धात्री महिलाओं और बच्चों को अगस्त से फोटीर्फाइड प्रोसेस्ड पूरक पोषाहार दिया जाना शुरू किया है। पिछले जहां केंद्रों पर बालक बलिकाओं गर्भवती महिलाओं को सूखा पोषाहार चावल,दाल दिए जा रहे थे उस में अगस्त सरकार ने केंद्रों पर मिलने वाले पोषाहार में बदलाव किया है। केंद्र पर अब गेहूं, चावल, दाल व पंजीरी जैसी सूखी सामग्रियों पर रोक लगा दी थी। जिले में बच्चों को कुपोषण से छुटकारा दिलाने के लिए सरकार ने पोषाहार वितरण में बदलाव कर सभी आंगनबाड़ी केंद्रों पर अगस्त से बालकों, गर्भवती, धात्री महिलाओं व किशोरियों को पोसेस्ड पूरक पोषाहार वितरण  शुरू किया लेकिन ये नया पोषाहार केंद्रों से जुड़े लाभार्थियों रास नहीं आ रहा है।  बंद पैकेट में सामग्री का वितरण घटिया किस्म का होने की शिकायत लाभार्थी कर चुके है। </p>
<p><strong> नाश्ता बच्चों को नहीं आ रहा पसंद</strong><br />आंगनवाड़ी कार्यकर्ता संतोष ने बताया कि आंगनबाड़ी केंद्रों पर 3 से 6 वर्ष के सामान्य व अति कुपोषित बच्चों को नाश्ते में गर्म फोटीर्फाइड मूंग दाल, चावल खिचड़ी, फोटीर्फाइड न्यूट्री मीठा दलिया व प्रीमिक्स उपमा दिया दिया जा रहा है। लेकिन केंद्र पर ना तो बनाने के लिए इंधन है। बनाने के लिए मात्र 45 पैसे पर यूनिट दिया जाता है। जबकि दलिया को पकाने और तैयार करने में काफी खर्च आता है। विभाग को तीन रुपए करने की मांग की जा चुकी है।</p>
<p><strong>कैटेगरी वाइज पैकेटों में लाभार्थियों को ऐसे हो रहा सामग्री का वितरण</strong><br />6 माह से 3 वर्ष के बालकों को फोटीर्फाइड न्यूट्री मीठा दलिया 480 ग्राम, फोटीर्फाइड मूंग दाल, चावल खिचड़ी 480 ग्राम, फोटीर्फाइड सादा गेहूं का दलिया 540 ग्राम, फोटीर्फाइड बालाहार  बेबी प्रीमिक्स 1375 ग्राम के पैकेट में दिया जा रहा है। गर्भवती व धात्री महिलाओं को फोटीर्फाइड न्यूट्री मीठा दलिया 1400 ग्राम, मूंग दाल, चावल खिचड़ी 1400 ग्राम, फोटीर्फाइड सादा दलिया 700 ग्राम, 6 माह से 3 वर्ष के अति कुपोषित बच्चों को सामान्य बच्चों के अलावा 500 ग्राम फोटीर्फाइड मूंग दाल, चावल खिचड़ी 500, सादा गेहूं दलिया एवं 1500 ग्राम तथा बालाहार प्रीमिक्स 1125 ग्राम के दो पैकेट में दिया जा रहा है। वहीं 3 से 6 वर्ष के अति कुपोषित बच्चों को फोटीर्फाइड बालाहार प्रीमिक्स 1550 ग्राम के पैकेट में दिया दिया जा रहा। आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं का कहना है कि जो माल की सप्लाई हो रही है वो लाभार्थियों की संख्या से कम हो रही है जिससे कई लाभार्थी वंचित रह रहे है। जो माल सप्लाई हो रहा वो गुणवत्ता युक्त नहीं होने से बच्चों और गर्भवती महिलाओं को रास नहीं आ रहा है। </p>
<p><strong> शिकायत मंत्री तक कर चुके</strong><br />प्रदेश मंत्री सुमन ने बताया कि राजस्थान आंगनबाड़ी महिला कर्मचारी संघ के प्रतिनिधित्व मंडल ने 14 सितंबर को महिला बाल विकास मंत्री एवं निदेशक जयपुर को पोषहार में घटिया गुणवत्ता का माल सप्लाई की शिकायत की थी।  साथ ही आंगनबाड़ी केंद्रों पर  ईधन की  व्यवस्था नहीं होने से, सप्लाई वाला पोषाहार का माल कम दिए जाने की शिकायत की।  इसके अलावा घटिया क्वालिटी ,बदबू वाला क्वालिटीहीन माल भेजा जा रहा जो बच्चे नहीं खा रहे है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को 45 पैसे की दर  पोषाहार बनाने का मानदेय दिया जा रहा उसको बढ़ाकर 3 किया किए जाने की मांग की। </p>
<p><strong>इनका कहना है......</strong><br />जिले में नये पोषहार की घटिया सप्लाई और कम मात्रा देने की। शिकायत उपनिदेशक महिला एवं बालविकास को कई बार की लेकिन कोई सुनवाई नहंीं होने पर पर  इसकी शिकायत करने 14 सितंबर को आंगनबाडी कार्यकर्ताओं का एक प्रतिनिधि मंडल मेरे नेतृत्व में जयपुर गया वहां महिला एवं बाल विकास मंत्री व विभाग के निदेशक को इस बारे में अवगत कराया की कोटा जिले में पोषाहर की सप्लाई ठीक से नहीं हो रही है।  जिले में बेबी मिक्स का  2019 का बकाया भुगतान भी अभी तक नहीं हुआ है। आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं का मानदेय समय नहीं डाला जा रहा है। चार  माह का बकाया चल रहा भुगतान शीघ्र करने की मांग मंत्री के सामने रखी। उन्होंने इसकी जांच कराने और गुणवत्ता युक्त पोषाहार सप्लाई कराने और उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया। <br /><strong> -शाहिदा खान,प्रदेशाघ्यक्ष आंगनबाड़ी महिला कर्मचारी संघ</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 16 Sep 2022 16:53:15 +0530</pubDate>
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                <title>आंगनबाड़ी के जर्जर भवन में मासूमों पर मौत का साया</title>
                                    <description><![CDATA[कस्बे में पुराने प्राथमिक विद्यालय भवन जर्जर हो रहा है। इसी जर्जर भवन में आंगनबाड़ी केंद्र संख्या 3 संचालित है। यह भवन खस्ताहाल है। छत की पट्टियों पर दरारें आ रही है। आंगनबाड़ी केंद्र में लगभग दो दर्जन बच्चे आते हैं।  जर्जर भवन से बड़ा हादसा हो सकता है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/the-shadow-of-death-on-the-innocent-in-the-dilapidated-building-of-anganwadi/article-20399"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-08/aaganbadi-k-jarjar-bhavan-mei-...karwar-news-bundi-25.8.2022.jpg" alt=""></a><br /><p>करवर। कस्बे में पुराना प्राथमिक विद्यालय भवन जर्जर हो रहा है। इसी जर्जर भवन में आंगनबाड़ी केंद्र संख्या 3 संचालित है। यह भवन खस्ताहाल है। छत की पट्टियों पर दरारें आ रही है। आंगनबाड़ी केंद्र में लगभग दो दर्जन बच्चे आते हैं। जर्जर भवन से बड़ा हादसा हो सकता है। आंगनबाड़ी केन्द्र जिस कमरे मे संचालित है उसमें भी बरसाती पानी टपकता है। विभाग और पंचायत को इसकी जानकारी आंगनबाड़ी कार्यकर्ता द्वारा दी गई है लेकिन कमरों की मरम्मत नहीं कराई गई। पहले यहां पर शासकीय प्राथमिक स्कूल लगता था। लेकिन 2012 में यह स्कूल मिडिल स्कूल में मर्ज हो जाने की वजह से खाली हो गया। बाद में यह भवन पुलिस थाना स्वीकृत होने के बाद 14 अगस्त 2012 को पुलिस थाना करवर को किराए पर दे दिया। जिसका किराया अभी तक भी स्कूल को नहीं मिला। कुछ सालों तक पुलिस थाना रहा। बाद में 2014 में मिडिल स्कूल भी उच्च माध्यमिक स्कूल में मर्ज हो जाने से जरखोदा रोड पर स्थित स्कूल भवन में 2014 के बाद में पुलिस थाना इस भवन में स्थानांतरित हो गया। <br /><br />इसी स्कूल भवन में आंगनबाड़ी संख्या तीन संचालित होने लगी लेकिन भवन की देखरेख के अभाव में ये जीर्ण शीर्ण होने लगा। अधिकतर कमरों और बरामदे की पट्टियां टूटी हुई है, जिससे बरसात के समय पूरी बिल्डिंग से पानी टपकता है। आंगनबाड़ी केंद्र में रखा हुआ सामान बरसाती पानी से खराब हो सकता है लेकिन प्रशासन का इस ओर कोई ध्यान नहीं है। यह स्कूल भवन शिक्षा विभाग के अधीन होने से ग्राम पंचायत भी इस भवन का जीर्णोद्धार नहीं कराती। शिक्षा विभाग भी इस भवन की तरफ ध्यान नहीं दे पा रहा है। भवन में 7 कमरे हैं जो काम के नहीं बचे है। एक कमरे में आंगनबाड़ी केंद्र संचालित है। 2 कमरों में सीनियर सेकेंडरी स्कूल का अनुपयोगी फर्नीचर रखा हुआ है और एक कमरे में महात्मा गांधी स्कूल का। भवन पूरी तरह से खराब हालत में होने के कारण महात्मा गांधी स्कूल भी इस भवन का उपयोग नहीं कर सकता। क्योंकि कमरों की पट्टियां टूटी हुई है। जिससे कभी भी जनहानि होने की संभावनाएं बनी हुई है। भवन की छत पर देखरेख के अभाव में तीन-तीन फीट के पौधे उग आए हैं जिनकी जड़ें छत से होती हुई दीवारों पर आ गई और बरसात के पानी से पूरी बिल्डिंग की दीवारों पर सीलन आ चुकी है। दीवारें खराब होने लगी है।<br /><br />आंगनबाड़ी केंद्र में लगभग दो दर्जन बच्चे आते हैं। आंगनबाड़ी भवन क्षतिग्रस्त हैं, जिसकी जानकारी ग्राम पंचायत एवं महिला बाल विकास विभाग को दी गई है। लेकिन मरम्मत नहीं कराई जा रही है। -शिला शर्मा, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, करवर</p>
<p>एफएफसी मद में 15 प्रतिशत राशि शिक्षा विभाग और बाकी राशि ग्राम पंचायत के द्वारा इस भवन का जीर्णोद्धार कराकर भवन को उपयोगी बनाया जा सकता है। -पीईईओ और प्रधानाचार्य ब्रजगोपाल दीक्षित, राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय ,करवर</p>
<p> स्कूल भवन पूरी तरह से क्षतिग्रस्त अवस्था में है। इस भवन में बच्चों को पढा नहीं सकते हैं। पीईईओ करवर ने अस्थाई रूप से स्कूल भवन महात्मा गांधी स्कूल को दिया लेकिन स्कूल की पुरानी बिल्डिंग को स्थाई रूप से स्कूल को सुपुर्द कर देते है तो विभाग उसका काम कराकर बिल्डिंग को उपयोगी बनाकर स्कूल को काम में लिया जा सकता  है। -योगेन्द्र कुमार,प्रधानाध्यापक, महात्मा गांधी विद्यालय, करवर</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बूंदी</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 25 Aug 2022 14:38:45 +0530</pubDate>
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                <title>कलेक्टर ने पढ़ाया पाठ और बोली कविताएं</title>
                                    <description><![CDATA[ कलेक्टर ने सवेरे बायतु ब्लॉक के माधासर एवं बालोतरा के दूधवा में आंगनवाड़ी पाठशाला का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने आंगनवाड़ी केंद्रों की व्यवस्थाओ को देखने के बाद बच्चों के साथ दरी पर नीचे बैठ कर उनका शिक्षा का स्तर जाँचा एवं उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jodhpur/barmer-collector-taught-lessons-and-spoken-poems/article-18162"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-08/ravi-copy2.jpg" alt=""></a><br /><p>बाड़मेर। कलेक्टर लोकबंधु के नवाचार मिशन सुरक्षा चक्र की बदौलत अब कुपोषण एवं एनीमिया मुक्त बाड़मेर का सपना साकार होने जा रहा है। जिला कलेक्टर लोक बंधु ने मिशन सुरक्षा चक्र के अंर्तगत कुपोषण, अतिकुपोषण एवं एनीमिया रोगियों के उपचार का जायजा लेने आंगनवाड़ी एवं स्वास्थ्य केंद्रों का मौके पर जाकर निरीक्षण किया। जिला कलेक्टर ने सवेरे बायतु ब्लॉक के माधासर एवं बालोतरा के दूधवा में आंगनवाड़ी पाठशाला का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने आंगनवाड़ी केंद्रों की व्यवस्थाओ को देखने के बाद बच्चों के साथ दरी पर नीचे बैठ कर उनका शिक्षा का स्तर जाँचा एवं उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली। उन्होंने स्लेट लेकर बालिका नेहा से गिनती पूछी एवं उसको खिलोने देकर खेलों के बारे में रुचि जानी। यह बालिका मिशन सुरक्षा चक्र के जरिए कुपोषण से मुक्त हुई थी। इसी तरह जिला कलेक्टर ने दुधवा के आंगनवाड़ी केंद्र का निरीक्षण कर कार्यकर्ता से इस अभियान में वितरित किए जाने वाले न्यूट्रिशन के बारे में जानकारी ली। दूधवा में ही जिला कलेक्टर ने प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र का निरीक्षण कर व्यवस्थाओ की जानकारी ली। यहां पर मिशन सुरक्षा चक्र के नियमित उपचार की बदौलत गर्भवती महिला राधा का रक्त में हीमोग्लोबिन का स्तर 8 से 11 हो गया। उन्होंने अभियान में काम कर रही एएनएम एवं आशा सहयोगीनी से जानकारी ली। भ्रमन के दौरान उपखंड अधिकारी नरेश सोनी, आईसीडीएस उपनिदेशक प्रह्लाद सिंह राजपुरोहित, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ चन्द्र शेखर गजराज, यूनिसेफ के प्रतिनिधि डॉ पंकज सुथार साथ थे। </p>
<p>अध्यापक की भूमिका में-शनिवार को जिले भर में एक फोटो सोशियल मीडिया पर जमकर वायरल होना भी लाजमी था। जब जिले के प्रशासनिक मुखिया वीआईपी चैयर को छोड़कर साधारण दरी पट्टी पर आंगनवाड़ी केन्द्र पर एक अध्यापक की तरह बच्चों को स्लेट पर काम देते हुये दिखाई दे रहे थे। उनकी इस साधारण शैली और अपनायत की भावना से हर कोई प्रभावित हुआ। पूरे जिलेभर में इस सादगी की प्रशंसा हो रही थी। इस दौरान उन्होंने आंगनवाड़ी केन्द्रों पर बच्चों के साथ रहकर अपना बचपन याद कर खुश नजर आये। बच्चे भी हुये खुश-जिले के प्रशासनिक मुखिया जिनका नाम महज सुना था, उन्हें आज अपने बीच पाकर आंगनवाड़ी केन्द्र के बच्चों सहित आस-पास के लोग भी बेहद खुश नजर आये। ग्रामीणों के चेहरों पर एक अलग ही खुशी की आभा नजर आ रही थी। कलक्टर ने पढ़ाया पाठ और बोली कविताएं-आंगनवाड़ी केन्द्र पर करीब एक घण्टे तक जिला कलक्टर लोकबन्धु अध्यापक की भूमिका में रहे। इस दौरान उन्होंने बच्चों को हिन्दी और अंग्रेजी में स्लेट पर वर्णमाला लिखी। वहीं आलू कचालू कहां गये थे... सहित अन्य कई मनोरजंक कविताएं बोलकर बच्चों को मंत्र मुग्ध कर दिया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बाड़मेर</category>
                                            <category>जोधपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 07 Aug 2022 15:57:43 +0530</pubDate>
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