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                <title>ट्रंप की बड़ी घोषणा: जल्द खत्म हो सकता है युद्ध, समझौते को लेकर ईरान के साथ बातचीत सफल</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान के साथ युद्ध समाप्त करने पर सकारात्मक चर्चा हुई है। व्हाइट हाउस में उन्होंने कहा कि ईरान अब समझौता करने के लिए पूरी तरह तैयार है। ट्रंप के अनुसार, पिछले दो महीनों से जारी तनाव के बाद अब एक स्थायी शांति संधि की प्रबल संभावना है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/trumps-big-announcement-may-end-soon-talks-with-iran-regarding/article-152967"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/trumpp.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि युद्ध समाप्त करने को लेकर ईरान के साथ अच्छी बातचीत हुई है। ट्रंप ने बुधवार को कहा कि पिछले 24 घंटों में अमेरिका की ईरान के साथ उस युद्ध को खत्म करने को लेकर बहुत अच्छी बातचीत हुई है, जो दो महीने से ज़्यादा समय से चल रहा है। उन्होंने व्हाइट हाउस में एक कार्यक्रम के दौरान कहा कि ईरान किसी भी कीमत पर समझौता करना चाहता है। उन्होंने पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा, "वे समझौता करना चाहते हैं। पिछले 24 घंटों में हमारी बहुत अच्छी बातचीत हुई है और यह पूरी तरह मुमकिन है कि हम कोई समझौता कर लें।" ट्रंप ने कहा कि अगर अमेरिका अभी ईरान को छोड़ देता है, तो देश को फिर से खड़ा होने में 20 साल लग जाएँगे, क्योंकि 28 फरवरी को अमेरिका और इज़रायल के हमलों से उसे भारी नुकसान पहुँचा था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 07 May 2026 11:06:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>ईरान को परमाणु हथियार विकसित करने की अनुमति नहीं दिये जाने के पक्षधर हैं सम्राट चार्ल्स-3 : डोनाल्ड ट्रंप</title>
                                    <description><![CDATA[राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि सम्राट चार्ल्स ईरान के परमाणु कार्यक्रम को रोकने पर सहमत हैं। हालांकि, ब्रिटिश सम्राट की राजनीतिक तटस्थता के कारण यह बयान चर्चा में है। व्हाइट हाउस में आयोजित राजकीय भोज के दौरान दोनों नेताओं के बीच ऐतिहासिक संदर्भों और कूटनीति पर हल्के-फुल्के अंदाज में दिलचस्प संवाद भी हुआ।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/emperor-charles-3-donald-trump-is-in-favor-of-not-allowing/article-152096"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-04/donlad-trump-3.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि ब्रिटेन के सम्राट चार्ल्स-3 भी इस बात से सहमत हैं कि ईरान को परमाणु हथियार विकसित करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। डोनाल्ड ट्रंप ने पश्चिम एशिया नीति पर टिप्पणी करते हुए कहा कि ईरान को कभी भी परमाणु हथियार हासिल नहीं करने दिया जाएगा और इस मुद्दे पर सम्राट चार्ल्स भी उनकी सोच से सहमत हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति की यह टिप्पणी ब्रिटेन की संवैधानिक परंपराओं के संदर्भ में असहज मानी जा रही है, क्योंकि ब्रिटिश सम्राट परंपरागत रूप से राजनीतिक रूप से तटस्थ रहते हैं और सरकारी नीति या अंतरराष्ट्रीय संघर्षों पर सार्वजनिक रूप से पक्ष नहीं लेते। ब्रिटेन में संवैधानिक व्यवस्था के तहत सम्राट किसी भी दलगत या प्रत्यक्ष राजनीतिक रुख से दूरी बनाए रखते हैं। ऐसे में ट्रंप का यह दावा राजनीतिक और कूटनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है।</p>
<p>इस बीच ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि ईरान से जुड़ा युद्ध ब्रिटेन का युद्ध नहीं है और वह इस संघर्ष में प्रत्यक्ष रूप से शामिल होने के पक्ष में नहीं हैं। उन्होंने यह भी दोहराया है कि ईरान को परमाणु हथियार नहीं मिलने चाहिए, जो लंबे समय से ब्रिटिश सरकारों की नीति रही है। हाल के अमेरिकी दौरे के दौरान सम्राट चार्ल्स ने अमेरिकी कांग्रेस की संयुक्त बैठक को संबोधित करते हुए अमेरिका-ब्रिटेन संबंधों, साझा मूल्यों और वैश्विक सहयोग पर जोर दिया था। उनकी यात्रा को दोनों सहयोगी देशों के बीच बढ़ते कूटनीतिक तनाव को कम करने के एक प्रयास के रूप में व्यापक रूप से देखा गया।</p>
<p>ईरान संघर्ष से निपटने के तरीके को लेकर कुछ सहयोगी देशों के साथ मतभेदों के बाद ट्रंप ने अमेरिका को नाटो से अलग करने की संभावना जतायी है। इस कदम के लिए कांग्रेस की मंज़ूरी ज़रूरी होगी और इसका कड़ा विरोध होने की उम्मीद है। व्हाइट हाउस में आयोजित राजकीय भोज के दौरान सम्राट चार्ल्स और ट्रंप के बीच हल्के-फुल्के अंदाज में ऐतिहासिक संदर्भों पर आधारित हास्यपूर्ण टिप्पणियां भी हुईं। सम्राट चार्ल्स ने ट्रंप के एक हालिया बयान का जवाब देते हुए मजाकिया लहजे में कहा कि यदि ब्रिटिश प्रभाव न होता तो शायद अमेरिकी फ्रेंच भाषा बोल रहे होते, जिस पर उपस्थित लोगों ने ठहाके लगाए। उल्लेखनीय है कि ट्रंप ने दावोस शिखर सम्मेलन में कहा था कि विश्व युद्ध-2 में अगर अमेरिका हस्तक्षेप न करता तो ब्रिटेन के लोग जर्मन और जापानी भाषाएं बोल रहे होते।</p>
<p>अमेरिकी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार सम्राट चार्ल्स ने कुछ समकालीन विषयों पर भी बात की और व्हाइट हाउस के 'ईस्ट विंग' में हुए "पुनर्समायोजनों" का ज़िक्र किया। बताया जाता है कि ट्रंप ने एक नयी बॉलरूम परियोजना के हिस्से के तौर पर इस विंग को फिर से विकसित करवाया है। इसके बाद उन्होंने 1812 के युद्ध का एक ऐतिहासिक संदर्भ दिया, जब ब्रिटिश सेनाओं ने व्हाइट हाउस को जला दिया था। सम्राट चार्ल्स ने कहा, "मुझे यह कहते हुए अफ़सोस है कि हम ब्रिटिश लोगों ने 1814 में व्हाइट हाउस के रियल एस्टेट पुनर्विकास का प्रयास किया था।" उन्होंने 'बॉस्टन टी पार्टी' का भी ज़िक्र किया और मज़ाकिया लहजे में कहा कि यह 'स्टेट डिनर' 1773 के उस विरोध प्रदर्शन से 'काफ़ी बेहतर' है, जिसमें अमेरिकी उपनिवेशवादियों ने ब्रिटिश चाय को बंदरगाह में फेंक दिया था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 29 Apr 2026 15:43:46 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>डोनाल्ड ट्रंप की घोषणा: तीन हफ़्तों के लिए और बढ़ा इज़रायल और लेबनान के बीच संघर्ष-विराम, नेतन्याहू और जोसेफ आउन के बीच शिखर सम्मेलन की मेजबानी की संभावना</title>
                                    <description><![CDATA[राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इज़रायल और लेबनान के बीच संघर्ष विराम को तीन सप्ताह के लिए बढ़ाने की घोषणा की है। व्हाइट हाउस में हुई उच्च स्तरीय बैठक के बाद ट्रंप ने हिज़्बुल्लाह के विरुद्ध लेबनान की रक्षा का संकल्प लिया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/donald-trumps-announcement-extends-the-ceasefire-between-israel-and-lebanon/article-151524"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/trump3.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। इज़रायल और लेबनान के बीच संघर्ष विराम को तीन हफ़्तों के लिए बढ़ा दिया गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने शुक्रवार को यह घोषणा की। यह फ़ैसला व्हाइट हाउस के ओवल ऑफ़िस में श्री ट्रम्प, अमेरिकी उपराष्ट्रपति जे.डी. वैन्स, विदेश मंत्री मार्को रूबियो, इज़रायल में अमेरिका के राजदूत माइक हकाबी, लेबनान में अमेरिका के राजदूत मिशेल ईसा और इज़रायल तथा लेबनान के कई उच्च-स्तरीय प्रतिनिधियों के बीच हुई एक बैठक में लिया गया।</p>
<p>ट्रम्प ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म पर कहा, "बैठक बहुत अच्छी रही।" उन्होंने कहा कि अमेरिका लेबनान को हिज़्बुल्लाह से रक्षा करने में मदद करने के लिए उसके साथ मिलकर काम करेगा। उन्होंने कहा कि वह "निकट भविष्य" में इज़रायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ आउन की बैठक की मेज़बानी करने के लिए उत्सुक हैं, हालाँकि उन्होंने इसकी तारीख़ की घोषणा नहीं की है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 24 Apr 2026 10:51:24 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>अमेरिका ने बढ़ाया युद्धविराम, ट्रंप बोले-ईरानी नेतृत्व बातचीत के लिए एक &quot;एकीकृत प्रस्ताव&quot; पेश नहीं करता, तब तक नहीं होगी कोई आक्रामक कार्रवाई </title>
                                    <description><![CDATA[राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पाकिस्तान की अपील पर ईरान के साथ युद्धविराम बढ़ाने और सैन्य हमला स्थगित करने की घोषणा की है। हालांकि, अमेरिका ने स्पष्ट किया है कि नौसैनिक नाकेबंदी और सैन्य तैयारी जारी रहेगी। अब तक 4,000 मौतों के बाद, यह कदम कूटनीति को एक आखिरी मौका देने के रूप में देखा जा रहा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/donald-trump-extends-ceasefire-says-no-offensive-action-unless-iranian/article-151271"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/chatgpt-image-apr-22,-2026,-11_56_00-am.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को घोषणा की कि अमेरिका ने ईरान के साथ जारी युद्ध में युद्धविराम की अवधि बढ़ा दी है और प्रस्तावित सैन्य हमले को फिलहाल टाल दिया गया है। व्हाइट हाउस द्वारा भारतीय समयानुसार देर रात के बाद जारी बयान में कहा गया कि राष्ट्रपति ट्रंप ने पाकिस्तान के नेतृत्व की अपील पर ईरान पर नियोजित सैन्य हमले को स्थगित करने और युद्धविराम को बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की है। उन्होंने बताया कि ईरान के भीतर "गंभीर रूप से विभाजित" स्थिति को देखते हुए यह कदम उठाया गया है, जिससे ईरान की ओर से एकजुट बातचीत की स्थिति पर सवाल उठ रहे हैं।</p>
<p>बयान के अनुसार, युद्धविराम बढ़ाने का अनुरोध पाकिस्तान के सेना प्रमुख असीम मुनीर और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने किया था। अमेरिका ने कहा है कि जब तक ईरानी नेतृत्व बातचीत के लिए एक "एकीकृत प्रस्ताव" पेश नहीं करता, तब तक कोई आक्रामक कार्रवाई नहीं की जाएगी। राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा, "मैंने अपनी सेना को निर्देश दिया है कि वे नाकेबंदी जारी रखें और पूरी तरह तैयार रहें।" इसका मतलब है कि सक्रिय सैन्य कार्रवाई भले ही टाल दी गई हो लेकिन ईरान पर दबाव बना रहेगा।</p>
<p>बयान में यह भी स्पष्ट किया गया कि युद्धविराम तब तक प्रभावी रहेगा जब तक ईरान अपना प्रस्ताव पेश नहीं करता और वार्ता किसी नतीजे पर नहीं पहुंचती "चाहे जो भी परिणाम हो।" इससे यह संकेत मिलता है कि कूटनीति विफल होने पर सैन्य कार्रवाई फिर से शुरू हो सकती है। यह कदम क्षेत्रीय संकट के बीच कूटनीति के लिए एक अस्थायी अवसर के तौर पर देखा जा रहा है, जिसमें पाकिस्तान मध्यस्थ के रूप में एक अहम भूमिका निभाने के तौर पर उभर रहा है। अमेरिका के हालांकि नाकेबंदी जारी रहने से यह भी स्पष्ट है कि तनाव अभी कम नहीं हुआ है और बातचीत विफल होने पर स्थिति फिर से बिगड़ सकती है।</p>
<p>इससे पहले ईरान ने संयुक्त राष्ट्र से अपील करते हुए अमेरिका द्वारा ईरानी जहाज "तौस्का " को जब्त करने की निंदा की थी और इसे "समुद्री डकैती" करार दिया था। अमेरिका-ईरान दोनों देशों के बीच संघर्षविराम रुकने तक लगभग 4,000 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें अधिकतर मौतें मिसाइल हमलों और ड्रोन हमलों के कारण हुई हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 22 Apr 2026 12:31:11 +0530</pubDate>
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                <title>रिपोर्ट्स : होर्मुज़ पर लगे संभावित शुल्क से नाराज़ तेल कंपनियां, ईरान द्वारा संभावित शुल्क लगाए जाने की चर्चाओं पर जताई चिंता </title>
                                    <description><![CDATA[ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले टैंकरों पर $1 प्रति बैरल शुल्क लगाने का प्रस्ताव दिया है। वैश्विक तेल कंपनियों ने व्हाइट हाउस से संपर्क कर इस 'टैक्स' का विरोध किया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप आने वाले हफ्तों में इस पर चर्चा करेंगे, क्योंकि यह रणनीतिक जलमार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/reports-oil-companies-angry-over-possible-duty-on-hormuz-expressed/article-149738"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/hormuz.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। तेल कंपनियों के शीर्ष अधिकारियों ने व्हाइट हाउस से संपर्क कर होर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुजरने के लिए ईरान द्वारा संभावित शुल्क लगाए जाने की चर्चाओं पर चिंता जतायी है। यह जानकारी अखबार ने मामले से परिचित एक स्रोत के हवाले से दी है। रिपोर्टाें के अनुसार, तेल कंपनियों के अधिकारियों ने व्हाइट हाउस, विदेश मंत्री मार्को रुबियो और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस से अपील की है कि वे शांति वार्ता की शर्त के रूप में ईरान को इस रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुजरने के लिए शुल्क लेने की अनुमति देने का विरोध करें।</p>
<p>स्रोत के मुताबिक, तेल उद्योग के प्रतिनिधियों ने बुधवार सुबह अमेरिकी विदेश विभाग में वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों के साथ बैठक कर उन्हें अपनी चिंताओं से अवगत कराया। इस बीच, बुधवार को व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलीन लीविट ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुजरने पर शुल्क लगाने के प्रस्ताव पर आने वाले हफ्तों में चर्चा करेंगे।। इस बीच, फाइनेंशियल टाइम्स ने ईरान के तेल, गैस और पेट्रोकेमिकल उत्पाद निर्यातकों के संघ के आधिकारिक प्रवक्ता हामिद होसैनी के हवाले से बताया कि ईरान तेल टैंकरों को प्रति बैरल एक डॉलर के शुल्क पर होर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुजरने की अनुमति देने के लिए तैयार है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 09 Apr 2026 17:57:18 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>ईरान जंग को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने दी अब नई डेडलाइन: ऊर्जा संयंत्र पर हमले को 10 दिनों के लिए किया स्थगित, ईरान ने कहा - हमने ऐसा कुछ नहीं मांगा </title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरानी सरकार के अनुरोध पर ऊर्जा संयंत्रों पर हमले की कार्रवाई को 6 अप्रैल तक रोक दिया है। ट्रंप के अनुसार, द्विपक्षीय बातचीत सकारात्मक दिशा में बढ़ रही है, हालांकि ईरान ने किसी भी वार्ता से इनकार किया है। इस कूटनीतिक स्थगन से पश्चिम एशिया में युद्ध का खतरा फिलहाल टल गया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/us-president-trump-has-given-a-new-deadline-regarding-the/article-148062"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/trump.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने शुक्रवार को कहा कि ईरानी सरकार के अनुरोध पर उन्होंने ईरान के ऊर्जा संयंत्रों पर हमले की प्रक्रिया को 10 दिनों के लिए रोक दिया है। ट्रम्प ने कहा कि वे इस प्रक्रिया को छह अप्रैल को पूर्वी समयानुसार रात आठ बजे तक के लिए स्थगित कर रहे हैं।</p>
<p>राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कहा, "ईरानी सरकार के अनुरोध पर, मैं ऊर्जा संयंत्रों पर हमले की अवधि को 10 दिनों के लिए सोमवार, छह अप्रैल को रात आठ बजे (पूर्वी समय) तक रोक रहा हूं।" उन्होंने दोहराया कि बातचीत जारी है और फर्जी मीडिया और अन्य लोगों द्वारा इसके विपरीत दिए गए गलत बयानों के बावजूद, यह बहुत अच्छी तरह से आगे बढ़ रही है। हालांकि ईरान लगातार इस बात से इनकार करता रहा है कि अमेरिका के साथ कोई बातचीत चल रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 27 Mar 2026 11:12:17 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>इजरायल पर ईरानी मिसाइलों की बारिश के बीच ट्रंप का विवादित बयान, बोले-विश्व के नक्शे से मिटा देंगे ईरान का नामोनिशान</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि अमेरिका ने ईरान की सैन्य शक्ति और नेतृत्व को "तय समय से पहले" पूरी तरह नष्ट कर दिया है। ईरान द्वारा इजरायल और डिएगो गार्सिया पर मिसाइल हमलों के बाद, ट्रंप ने किसी भी समझौते से इनकार करते हुए कहा कि ईरान की नौसेना और वायुसेना अब खत्म हो चुकी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/amidst-the-rain-of-iranian-missiles-on-israel-trumps-controversial/article-147435"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/trump.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि अमेरिका ने "ईरान को नक्शे से मिटा दिया है" और यह लक्ष्य तय समय से "कई सप्ताह पहले" हासिल कर लिया गया। ट्रंप ने यह बयान अपने सोशल मीडिया मंच पर दिया है। यह प्रतिक्रिया उस समय आयी है जब ईरान ने इजरायल के डिमोना और अराद स्थित परमाणु ठिकानों पर मिसाइल हमले किए। ईरान ने इसके अलावा डिएगो गार्सिया स्थित अमेरिका-ब्रिटेन के ठिकानों पर भी मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं, जिससे उसकी लंबी मारक क्षमता का संकेत मिला।</p>
<p>अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने एक प्रमुख अमेरिकी अखबार की आलोचना करते हुए कहा कि उसके " मामूली विश्लेषक" यह कह रहे हैं कि उन्होंने अपने लक्ष्य हासिल नहीं किए। वह न्यूयॉर्क टाइम्स के पत्रकार डेविड सैंगर का जिक्र कर रहे थे, जो व्हाइट हाउस और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों की रिपोर्टिंग करते हैं।</p>
<p>ट्रंप और सैंगर के बीच मतभेद लंबे समय से रहे हैं, जिसमें सैंगर ने ट्रंप प्रशासन की नीतियों, विशेषकर "अमेरिका फर्स्ट" नीति और ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की आलोचनात्मक रिपोर्टिंग की है। ट्रंप ने अपने दावे को दोहराते हुए कहा, "हां, मैंने ऐसा किया है, और तय समय से कई सप्ताह पहले।" उन्होंने कहा कि ईरान का नेतृत्व समाप्त हो चुका है, उसकी नौसेना और वायुसेना "खत्म" हो चुकी है और उसके पास "कोई रक्षा क्षमता नहीं बची" है।</p>
<p>अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने यह भी दावा किया कि ईरान अब समझौता करना चाहता है, लेकिन उन्होंने स्पष्ट किया कि वह इसके पक्ष में नहीं हैं। उन्होंने कहा, "वे समझौता करना चाहते हैं, मैं नहीं।" उन्होंने फिर दोहराया कि अमेरिका अपने लक्ष्यों को तय समय से "कई सप्ताह पहले" हासिल कर चुका है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 22 Mar 2026 17:00:48 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>कम पड़ गए 800 अरब! ईरान युद्ध में लागत बढ़ने से पेंटागन ने की 200 अरब डॉलर की मांग, अमेरिकी संसद में छिड़ा सियासी घमासान </title>
                                    <description><![CDATA[पेंटागन ने व्हाइट हाउस से ईरान युद्ध के समर्थन के लिए $200 अरब की अतिरिक्त धनराशि मांगी है। इस भारी बजट का उद्देश्य पिछले तीन हफ्तों में खर्च हुए हथियारों के भंडार को फिर से भरना है। हालांकि, अमेरिका में बढ़ते सैन्य खर्च और राजनीतिक विरोध के बीच इस प्रस्ताव पर बड़ा विवाद खड़ा हो सकता है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/800-billion-fell-short-due-to-increase-in-cost-of/article-147123"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/pentagan.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिकी रक्षा विभाग पेंटागन ने व्हाइट हाउस से ईरान युद्ध का समर्थन करने के लिए 200 अरब डॉलर से अधिक धनराशि के अनुरोध को मंजूरी देने के लिए कहा है। यह जानकारी स्पूतनिक ने वाङ्क्षशगटन पोस्ट के हवाले से गुरुवार को दी। </p>
<p>रिपोर्ट के अनुसार, यह अनुरोध मौजूदा खर्च से कहीं अधिक होगा और एक ऐसी राशि है जिसका कांग्रेस में कड़ा विरोध हो सकता है।इसका उद्देश्य उन हथियारों के भंडार को फिर से भरना है जो पिछले तीन हफ्तों में अमेरिकी और इजरायली सेनाओं द्वारा किए गए हजारों हमलों के कारण तेजी से कम हो गए हैं।</p>
<p>रिपोर्ट में कहा गया है कि युद्ध की लागत पहले सप्ताह में ही 11 अरब डॉलर से अधिक हो गई थी और अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि सीमित जनसमर्थन के बीच अतिरिक्त धन की उपलब्धता एक बड़े राजनीतिक संघर्ष को जन्म दे सकती है। यह प्रस्ताव विदेशों में सैन्य खर्च पर अंकुश लगाने के पहले किए गए वादों के बावजूद आया है जिससे वॉशिंगटन के बढ़ते अभियान के स्तर एवं स्थिरता पर सवाल खड़े होते हैं।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 20 Mar 2026 09:18:30 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>वॉशिंगटन डीसी के सैन्य बेस पर अज्ञात ड्रोन दिखने से हड़कंप: मार्को रूबियो और पीट हेगसेथ की बढ़ाई सुरक्षा, व्हाइट हाउस में उच्च स्तरीय बैठक का आयोजन</title>
                                    <description><![CDATA[वॉशिंगटन डीसी स्थित फोर्ट मैकनेयर सैन्य बेस के ऊपर रहस्यमयी ड्रोन दिखने से अमेरिकी सुरक्षा महकमे में हड़कंप मच गया है। इसी बेस पर विदेश मंत्री और रक्षा मंत्री के आवास भी हैं। ईरान-इजरायल संघर्ष के बीच, पेंटागन ने सुरक्षा उपायों को हाई अलर्ट पर कर दिया है और व्हाइट हाउस में आपात बैठक बुलाई गई है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/the-sighting-of-an-unidentified-drone-at-the-military-base/article-147065"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/drone.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंटगन। अमेरिका की राजधानी वॉशिंगटन डीसी स्थित एक प्रमुख सैन्य बेस 'फोर्ट मैकनेयर के ऊपर कई अज्ञात ड्रोन देखे जाने के बाद अमेरिकी सुरक्षा हलकों में हड़कंप मच गया है। इस घटना के बाद व्हाइट हाउस में एक उच्च स्तरीय बैठक बुलाई गई और सुरक्षा उपायों को कड़ा कर दिया गया है।</p>
<p>रिपोर्ट के अनुसार, इसी सैन्य बेस पर अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो और रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ का निवास स्थान भी है। सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि पिछले 10 दिनों के भीतर एक ही रात में कई ड्रोन देखे गए। ये ड्रोन कहां से आए, इसका अभी तक पता नहीं चल पाया है। ड्रोन दिखने के बाद प्रशासन ने रूबियो और हेगसेथ को किसी अन्य सुरक्षित स्थान पर भेजने पर विचार किया था, हालांकि फिलहाल दोनों अपने वर्तमान आवास पर ही बने हुए हैं।</p>
<p>प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि 28 फरवरी से ईरान पर शुरू हुए अमेरिका-इजरायल हमलों के बाद से अमेरिकी सेना हाई अलर्ट पर है। इस घटना के बाद अलर्ट स्तर को और अधिक बढ़ा दिया गया है। पेंटागन के मुख्य प्रवक्ता सीन पार्नेल ने रक्षा मंत्री हेगसेथ की सुरक्षा और उनकी आवाजाही पर टिप्पणी करने से इनकार करते हुए इसे अत्यंत गैर-जिम्मेदाराना बताया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 19 Mar 2026 18:15:34 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप का दावा, बोलें-परमाणु हथियारों को लेकर ईरान के साथ बातचीत जारी, शांति बोर्ड का सदस्य बनने पर सहमति</title>
                                    <description><![CDATA[वॉशिंगटन में राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान के साथ संभावित परमाणु समझौते की संभावनाएं तलाशने की बात कही। नेतन्याहू संग बैठक में गाजा, सुरक्षा और क्षेत्रीय मुद्दों पर भी चर्चा हुई।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/us-president-trumps-claim-talks-continue-with-iran-on-nuclear/article-142941"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-10/220922-donald-trump-mjf-1544-99e118.jpg" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका और ईरान के बीच (एजेंसी) इस बात की संभावनाओं का पता लगाने के लिये जारी रहेगी कि क्या परमाणु हथियारों को लेकर कोई समझौता किया जा सकता है। यह बयान उन्होंने व्हाइट हाउस में इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ बंद कमरे में हुई बैठक के तुरंत बाद दिया।</p>
<p>अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने सोशल मीडिया मंच ट्रुथ सोशल पर पोस्ट में कहा, मैंने अभी-अभी इजरायल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू और उनके प्रतिनिधियों से मुलाकात पूरी की है। ईरान के साथ जारी रखने के अलावा कोई निर्णायक सहमति नहीं बनी, ताकि यह देखा जा सके कि कोई समझौता संभव है या नहीं। यदि समझौता हो सकता है, तो मैंने प्रधानमंत्री को बताया कि यही मेरी प्राथमिकता होगी। यदि ऐसा नहीं हो पाता, तो हमें देखना होगा कि आगे क्या परिणाम निकलता है।</p>
<p>उन्होंने कहा, बैठक में गाजा और पूरे क्षेत्र में हो रही प्रगति पर भी चर्चा हुई। नेतन्याहू बुधवार सुबह व्हाइट हाउस के दक्षिणी लॉन से होते हुए पहुंचे और बिना किसी संवाददाता सम्मेलन या आधिकारिक बयान के रवाना हो गये। दोनों नेताओं के बीच यह ट्रंप के दूसरे कार्यकाल के दौरान सातवीं मुलाकात थी, जो करीब तीन घंटे तक चली। बैठक से पहले नेतन्याहू ने अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो से मुलाकात की और औपचारिक रूप से शांति बोर्ड का सदस्य बनने पर सहमति दी, जिसे इजरायली संसद में विवादास्पद पहल बताया जा रहा है। </p>
<p>अमेरिका रवाना होने से पहले नेतन्याहू ने कहा था कि वह राष्ट्रपति ट्रंप के समक्ष ईरान से (एजेंसी) के सिद्धांतों को रखेंगे, जो न केवल इजरायल बल्कि पश्चिम एशिया में शांति और सुरक्षा चाहने वालों के लिए अहम हैं। नेतन्याहू के कार्यालय के अनुसार, वह चाहते हैं कि (एजेंसी) में ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम पर सीमाएं लगायी जाएं और हमास तथा हिजबुल्लाह जैसे संगठनों से उसके संबंधों में कटौती शामिल हो। </p>
<p>राष्ट्रपति ट्रंप ने मंगलवार को फॉक्स बिजनेस नेटवर्क को दिए साक्षात्कार में कहा था, समझौता अच्छा होना चाहिए। कोई परमाणु हथियार नहीं, कोई मिसाइल नहीं। इस बीच, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने तेहरान में 1979 की इस्लामी क्रांति की 47वीं वर्षगांठ के अवसर पर कहा कि पश्चिम द्वारा खड़ी की गयी अविश्वास की दीवार अमेरिका के साथ परमाणु (एजेंसी) में बाधा बन रही है। उन्होंने दोहराया कि ईरान अत्यधिक मांगों और आक्रामकता के आगे कभी झुकेगा नहीं। ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने रूस टुडे से कहा कि उन्हें विश्वास है कि ईरान और अमेरिका जुलाई 2015 में हुए संयुक्त व्यापक कार्ययोजना (जेसीपीओए) से भी बेहतर परमाणु समझौता कर सकते हैं, लेकिन ईरान अपने मिसाइल कार्यक्रम या क्षेत्रीय गठबंधनों पर बातचीत नहीं करेगा।</p>
<p>अमेरिका और ईरान ने शुक्रवार को ओमान की राजधानी मस्कट में अप्रत्यक्ष (एजेंसी) की थी, ऐसे समय में जब दोनों देशों के बीच तनाव बना हुआ है और अमेरिका ने ईरान के पास सैन्य तैनाती बढ़ा दी है। राष्ट्रपति ट्रंप ने मंगलवार को यह भी कहा था कि यदि (एजेंसी) विफल होती है तो वह ईरान के खिलाफ संभावित सैन्य कार्रवाई के लिए पश्चिम एशिया में दूसरा विमानवाहक पोत स्ट्राइक ग्रुप भेजने पर विचार कर रहे हैं। </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 12 Feb 2026 17:29:17 +0530</pubDate>
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                <title>अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के शांति बोर्ड में शामिल होने के प्रस्ताव का मूल्यांकन कर रहा सिंगापुर, रूस और बेलारूस सहित कई वैश्विक नेताओं को भी भेजा गया प्रस्ताव</title>
                                    <description><![CDATA[सिंगापुर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के शांति बोर्ड में शामिल होने के प्रस्ताव का मूल्यांकन कर रहा है, विदेश मंत्री विवियन बालाकृष्णन ने संसद में जानकारी दी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/singapore-is-evaluating-us-president-donald-trumps-proposal-to-join/article-142160"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/11-(700-x-400-px)-(630-x-400-px)-(6)5.png" alt=""></a><br /><p>सिंगापुर सिटी। सिंगापुर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के शांति बोर्ड में शामिल होने के प्रस्ताव का मूल्यांकन कर रहा है। यह जानकारी द स्ट्रेट्स टाइम्स अखबार ने सिंगापुर के विदेश मंत्री विवियन बालाकृष्णन के हवाले से गुरुवार को दी। </p>
<p>रिपोर्ट में कहा गया कि संसद के पांच सदस्यों ने बालाकृष्णन से सिंगापुर को शांति बोर्ड में शामिल होने के लिए अमेरिका द्वारा दिए गए स्थायी निमंत्रण के बारे में सवाल किया था।</p>
<p>उल्लेखनीय है कि, 16 जनवरी को अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने शांति बोर्ड के गठन की घोषणा की, जिसमें अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो, ट्रम्प के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और दामाद जेरेड कुशनर, ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर, विश्व बैंक के अध्यक्ष अजय बंगा और अमेरिकी उप राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार रॉबर्ट गैब्रियल शामिल हैं। राष्ट्रपति ट्रम्प ने रूस और बेलारूस सहित कई वैश्विक नेताओं को भी इसमें शामिल होने के लिए आमंत्रित किया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 06 Feb 2026 15:38:45 +0530</pubDate>
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                <title>क्या रद्द हो सकता है भारत अमेरिका व्यापार समझौता? व्हाहट हाउस ने दी चेतावनी, कहा-रूस से तेल नहीं खरीदेगा भारत</title>
                                    <description><![CDATA[व्हाइट हाउस ने कहा, भारत ने नए समझौते में रूस से कच्चा तेल न लेने, अमेरिका से अधिक तेल खरीदने और अमेरिकी अर्थव्यवस्था में बड़े निवेश की प्रतिबद्धता जताई बताई।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/can-india-us-trade-agreement-be-cancelled-white-house-warns-says/article-141924"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/11-(700-x-400-px)-(630-x-400-px)-(8)3.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। व्हाइट हाउस ने बुधवार को दावा किया कि भारत ने अमेरिका के साथ हुए नये समझौते के तहत रूस से कच्चा तेल न लेने और अमेरिका से ज्यादा तेल खरीदने का निर्णय लिया है। </p>
<p>व्हाइट हाउस की मीडिया सचिव कैरोलाइन लेविट ने संवाददाताओं से कहा कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के बीच सीधी बातचीत के बाद भारत ने यह प्रतिबद्धता जाहिर की। उन्होंने कहा, जैसा कि आप सब ने देखा, राष्ट्रपति (ट्रंप) ने भारत के साथ एक और बेहतरीन सौदा किया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से सीधे बात की। उन दोनों का रिश्ता बहुत मजबूत है। लेविट ने कहा, भारत ने रूसी तेल नहीं खरीदने का वादा किया है, बल्कि अमेरिका से भी तेल खरीदने का वादा किया है, और शायद वेनेजुएला से भी। इसका सीधा फ़ायदा अमेरिका और अमेरिकी लोगों को होगा।</p>
<p>उन्होंने दावा किया कि पीएम मोदी ने अमेरिकी अर्थव्यवस्था में बड़े निवेश का वादा किया है। लेविट ने दावा किया कि प्रधानमंत्री मोदी ने अमेरिकी अर्थव्यवस्था में 500 अरब अमेरिकी डॉलर के निवेश का वादा किया है, जिसमें परिवहन, ऊर्जा और कृषि उत्पादों जैसे सेक्टर शामिल हैं। उन्होंने कहा, यह राष्ट्रपति की वजह से एक और शानदार व्यापारिक समझौता है।</p>
<p>उन्होंने अमेरिकी विनिर्माण को मजबूत करने और विदेशी निवेश को आकर्षित करने के लिए राष्ट्रपति ट्रंप की टैरिफ नीति और व्यापार रणनीति को श्रेय दिया। प्रशासन की आयात नीति का बचाव करते हुए, लेविट ने कहा कि इससे पहले ही ठोस आर्थिक फ़ायदे मिल रहे हैं। उन्होंने कहा, राष्ट्रपति की आयात शुल्क नीति काम कर रही है और उनका आर्थिक एजेंडा काम कर रहा है। पूरे अमेरिका में नयी फ़ैक्ट्री परियोजनाओं की वजह से निर्माण से जुड़ी नौकरियों में बढ़ोतरी हुई है। वे फ़ैक्ट्रियां यहीं अमेरिका में बन रही हैं, और हम अमेरिकियों को काम दे रहे हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 04 Feb 2026 15:59:52 +0530</pubDate>
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