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                <title>polythene - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>सांभर और हिरणों की जिंदगी निगल गई पॉलीथिन : 6 वन्यजीवों की दर्दनाक मौत, सांभर व हिरणों के पेट से निकली 10 से 15 किलो पॉलीथिन</title>
                                    <description><![CDATA[पोस्टमार्टम रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासा : भूख व बीमारी से नहीं पॉलीथिन से हुई वन्यजीवों की मौत।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/polythene-swallowed-the-lives-of-sambar-and-deer--6-animals-died-a-painful-death--10-to-15-kg-of-polythene-was-found-in-the-stomachs-of-sambar-and-deer/article-138859"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/1200-x-600-px)-(2)1.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहरवासियों की लापरवाही और बढ़ता प्लास्टिक कचरा अब जंगल के प्राणियों पर मौत बनकर टूट रहा है। पिछले दिनों सैन्य क्षेत्र और रेलवे स्टेशन के आसपास से रेस्क्यू किए सांभर व हिरणों की दर्दनाक मौत हो गई। इनका चिड़ियाघर रेस्क्यू सेंटर में पोस्टमार्टम किया गया तो भयानक मंजर देखने को मिला। प्रत्येक वन्यजीव के पेट से 10 से 15 किलो पॉलीथिन निकला। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सामने आया कि इन मासूस वन्यजीवों की मौत भूख या बीमारी से नहीं, बल्कि प्लास्टिक निगलने से हुई है।</p>
<p><strong>पॉलीथिन ने ब्लॉक किया पाचन तंत्र</strong><br />सैन्य व रेलवे स्टेशन क्षेत्र में कुछ दिनों पहले 6 सांभर व हिरण मृत अवस्था में मिले थे। जिन्हें वन विभाग की टीम रेस्क्यू कर कोटा चिड़ियाघर आई। जहां वन्यजीव चिकित्सक द्वारा पोस्टमार्टम किया। जिसमें चौंकाने वाला खुलासा हुआ। पोस्टमार्टम की रिपोर्ट के अनुसार, सभी हिरणों के पाचन तंत्र में भारी मात्रा में प्लास्टिक आधारित कचरा जमा था। प्रत्येक मृत वन्यजीव के पेट से करीब 10 से 15 किलो प्लास्टिक कचरा निकला। जिससे पाचन तंत्र पूरी तरह ब्लॉक हो गया। जिसकी वजह से उनकी मौत हो गई।</p>
<p><strong>आंतों में सूजन, अंदरुनी अंगों को गंभीर नुकसान </strong><br />वन्यजीव विभाग के एसीएफ पंकज सिंह मीणा ने बताया कि सैन्य व स्टेशन क्षेत्र में सांभर व हिरणों का हैबीटेट है। लोग खाद्यय साम्रगी को प्लास्टिक की थैलियों में बांधकर फैंक देते हैं। जिसे भोजन की तलाश में विचरण कर रहे वन्यजीव निगल लेते हैं। जिससे भोजन के साथ पॉलीथिन भी शरीर में जाकर आंतों में फंस जाती है, जो पेट में प्लास्टिक की गांठ बनकर आंतों को गंभीर नुकसान पहुंचाती है। नतीजन, भूख न लगना, कमजोरी, सूजन और आंतरिक अंगों को गंभीर नुकसान पहुंचता है। यह परिस्थितियां धीरे-धीरे उन्हें मौत की तरफ धकेल देती है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सामने आया कि मृत वन्यजीवों की पॉलीथिन के कारण आंतों में सूजन थी और अंदरुनी अंगों को गंभीर नुकसान पहुंचा, जो उनकी मौत का कारण बनी।</p>
<p><strong>प्लास्टिक से वन्यजीवों पर गंभीर असर</strong><br />एसीएफ मीणा ने बताया कि प्लास्टिक निगलने से हिरणों में पोषक तत्वों की पूर्ति रुक जाती है। वजन तेजी से घटता है और रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो जाती है। माइक्रोप्लास्टिक रुमेन की प्राकृतिक प्रक्रिया को बाधित करता है, जिससे ऊर्जा उत्पादन कम होता है। साथ ही प्लास्टिक से निकलने वाले रसायन हार्मोन असंतुलन और प्रजनन संबंधी समस्याएं भी पैदा करते हैं। उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी मात्रा में पॉलीथिन मिलना क्षेत्र में गंभीर प्लास्टिक प्रदूषण की ओर इशारा करता है। यह खतरा केवल सांभर तक सीमित नहीं है, बल्कि चीतल सहित अन्य शाकाहारी वन्यजीव भी इसकी चपेट में आ सकते हैं।</p>
<p><strong>सैन्य व स्टेशन क्षेत्र को प्लास्टिक मुक्त करने की जरूरत</strong><br />वन्यजीव संरक्षण से जुड़े संगठनों ने सैन्य क्षेत्र और रेलवे स्टेशन के आसपास के इलाकों को प्लास्टिक मुक्त क्षेत्र घोषित करने की मांग की है। साथ ही सिंगल यूज प्लास्टिक पर सख्त प्रतिबंध, नियमित सफाई अभियान और प्रभावी कचरा प्रबंधन प्रणाली लागू करने की आवश्यकता पर बल दिया। वहीं, वन क्षेत्रों में देशी पौधों का रोपण कर हिरणों के लिए सुरक्षित प्राकृतिक भोजन स्रोत विकसित किया जाए ताकि वन्यजीव की जान बच सके।</p>
<p><strong>जैव विविधता के लिए खतरा</strong><br />शाकाहारी जीवों की मृत्यु से पारिस्थितिकी तंत्र असंतुलित होता है। उनकी संख्या घटने से शिकारी जीवों के लिए भोजन की कमी और मानव-वन्यजीव संघर्ष बढ़ सकता है। माइक्रोप्लास्टिक मिट्टी और पौधों को भी नुकसान पहुंचाकर जैव विविधता को खतरे में डालता है। यह उसी क्षेत्र में भोजन तलाश करने वाले अन्य वन्यजीवों के लिए बड़ा खतरा बन सकता है।</p>
<p><strong>हबीर्वोर का करेंगे पुनर्वास</strong><br />सैन्य व स्टेशन क्षेत्रों से कुछ सांभर व हिरणों का रेस्क्यू किया गया था। पोस्टमार्टम कराने पर सामने आया कि उनके पेट से करीब 15 किलो पॉलीथिन निकली, जो उनकी दर्दनाक मौत का कारण बनी। इस संबंध में सैन्य अधिकारियों को पत्र लिख वन्यजीवों को ट्रैंकुलाइज कर सुरक्षित वनक्षेत्र में शिफ्ट करने की परमिशन ली जाएगी। साथ ही उनके एरिया में भोजन सामग्री को पॉलीथिन में बांधकर न फैंकने के लिए जागरूक किया जाएगा। वहीं, घरों से निकलने वाली खाद्य सामग्री को फेंकने के लिए कचरा पात्र रखने व जगह-जगह साइन बोर्ड लगाने का आग्रह करेंगे।<br /><strong>-अनुराग भटनागर, डीएफओ वन्यजीव विभाग कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 08 Jan 2026 15:10:27 +0530</pubDate>
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                <title>असर खबर का - पॉलिथीन पर सख्ती शुरू, निगम ने पहले ही दिन दो दुकानों पर ताला जड़ा</title>
                                    <description><![CDATA[प्रतिबंधित के बाद भी शहर में पॉलिथीन का धडल्ले से उपयोग जारी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/impact-of-the-news---strict-action-begins-against-those-using-and-selling-polythene--municipal-corporation-team-seizes-two-shops-on-the-first-day/article-129372"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-10/copy-of-news-(4)19.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। राज्य सरकार द्वारा प्रतिबंधित करने के बाद भी शहर में धडल्ले से सिंगल यूज प्लास्टिक (पॉलिथीन)  का उपयोग व बिक्री करने वालों पर नगर निगम ने सख्ती करना शुरु कर दिया है। निगम टीम ने शुक्रवार को पहले ही दिन दो दुकानों को सीज किया है। नगर निगम कोटा दक्षिण के मुख्य अग्निशमन अधिकारी राकेश व्यास ने बताया कि आयुक्त ओम प्रकाश मेहरा के आदेश की पालना में शुक्रवार को नगर निगम की टीम ने शहर में दुकानों का सर्वे किया।  </p>
<p>इस दौरान  सूचना मिली कि धानमंडी स्थित दो दुकानों में प्लास्टिक का अवैध माल भरा हुआ है। इसकी पुष्टि करने के बाद दुकान के किराएदार को मौके पर बुलाया गया लेकिन वह नहीं आए। जबकि उन दुकानों के मालिक मौके पर पहुंच गए थे। वहां अवैध रूप से पॉलिथीन का माल भरा हुआ था। जिसे देखते हुए दोनों दुकानों को सीज किया गया है। सीएफओ व्यास ने बताया कि शहर में जहां भी सिंगल यूज प्लास्टिक का उपयोग किया जाएगा। वहां उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।  इस मौके पर सहायक अभियंता तौसिफ खान स्वास्थ्य निरीक्षक नासिर व अतिक्रमण की टीम मौजूद रही।</p>
<p><strong> एक दिन पहले गठित की टीम </strong><br /> जिला कलक्टर द्वारा शहर में किए गए औचक  निरीक्षण के दौरान कोटा दक्षिण निगम आयुक्त को सिंगल यूज प्लास्टिक के खिलाफ कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे। उन निर्देशों की पालना में आयुक्त ने गुरुवार को ही टीम गठित कर दी। जिसमें सीएफओ राकेश व्यास, सहायक अभियंता तौसिफ खान, स्वास्थ्य अधिकारी रिचा गौतम, संबंधित कनिष्ठ अभियंता क्षेत्र के अनुसार, फायरमैन मुकेश तंवर, संबंधित स्वास्थ्य निरीक्षक और अतिक्रमण दस्ता को शामिल किया गया है। </p>
<p><strong>नवज्योति ने किया था मामला प्रकाशित</strong><br />सरकार द्वारा प्रतिबंधित करने के बाद भी शहर में पॉलिथीन का धडल्ले से उपयोग होने के बारे में दैनिक नव’योति ने प्रमुखता से प्रकाशित किया था। समाचार पत्र में 9 सितम्बर को पेज 4 पर‘ बाजार में धडल्ले से हो रहा पॉलिथीन का उपयोग’ शीर्षक से समाचार प्रकाशित किया था। इस समाचार में शहर की हकीकत दिखाई गई थी। उस समय निगम अधिकारियों ने शीघ्र ही कार्यवाही का दावा किया था।  अब जिला कलक्टर ने जब सख्ती से कार्यवाही करने का आदेश दिया तो निगम अधिकारी हरकत में आए और कार्यवाही के लिए न केवल टीम गठित की वरन् कार्रवाई भी तुरंत शुरू कर दी गई।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 11 Oct 2025 15:24:52 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>गंदगी से अटा शौचालय, सफाई व्यवस्था चौपट</title>
                                    <description><![CDATA[कस्बे के बस स्टैंड पर पानी की खेळ के पास सार्वजनिक शौचालय जिसकी नियमित साफ सफाई नहीं होने के कारण गंदगी से अटा पड़ा हुआ है, जिससे दुर्गंध आती रहती है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jhalawar/-toilet-filled-with-dirt--cleaning-system-in-shambles/article-114651"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-05/rtrer-(7)8.png" alt=""></a><br /><p>पनवाड़। भारत सरकार द्वारा स्वच्छ भारत मिशन कार्यक्रम को लेकर प्रचार प्रसार किया जा रहा है। सफाई के नाम पर लाखों रुपए खर्च किया जा रहा है। वहीं पनवाड़ कस्बे के बस स्टैंड पर पानी की खेळ के पास बना सार्वजनिक शौचालय अपनी दुर्दशा पर आंसू बहा रहा है, इसकी साफ सफाई नियमित नहीं होने के कारण गंदगी से अटा पड़ा हुआ है, जहां पर कचरा, पॉलीथिन गंदगी से दुर्गंध आती रहती है। नशेडियों ने शौचालय को अड्डा बना रखा है, जहां पर शराब पीकर बोतले वही फेंक जाते हैं। नशेड़ियों ने इसका दरवाजा तक चुरा लिया है, ऐसे में इसका उपयोग करे तो कैसे करे , जैसे तैसे लोग को उपयोग में ले लेते है पर महिलाओं के लिए परेशानियों का सबब बना हुआ है। कस्बे के दीपेश सोनी ने बताया कि सरकार स्वच्छ भारत अभियान के नाम पर लाखों रुपए खर्च कर रही है। ग्राम पंचायतों में वर्ष के 12 लाख रुपए साफ सफाई के लिए दे रही है। वहीं दूसरी ओर इसकी धज्जियां उड़ रही है, इसका उदाहरण है कस्बे के बस स्टैंड पर पानी की खेळ के पास सार्वजनिक शौचालय जिसकी नियमित साफ सफाई नहीं होने के कारण गंदगी से अटा पड़ा हुआ है, जिससे दुर्गंध आती रहती है। कस्बे के मैंन बस स्टैंड होने से बसों का ठहराव होने से बड़ी संख्या में यात्री आते जाते हैं। वहीं मैन मार्केट होने से लोगों का आना जाना लगा रहता है, इसको देखते हुए ग्राम पंचायत द्वारा सार्वजनिक शौचालय का निर्माण कराया था, जिससे यात्रियों एवं आमजन को सुविधा मिल सके, लेकिन साफ सफाई पर ध्यान नहीं देने के कारण यहां गंदगी का अंबार लगा हुआ है। इससे फैलने वाली दुर्गंध के कारण लोग इसका उपयोग नहीं करते और खुले में शौच के लिए मजबूर है। यही नहीं सार्वजनिक शौचालय में गेट नहीं होने के कारण काफी परेशानी उठानी पड़ती है। आमजन के लिए ग्राम पंचायत द्वारा लाखों रुपए खर्च कर सार्वजनिक शौचालय तो बना दिया लेकिन कुछ महीने पहले पानी की खेळ का ऊंचाई बढ़ाने के कारण शौचालय की ऊंचाई कम हो गई जिससे लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इसको लेकर कस्बेवासी की मांग है कि सार्वजनिक शौचालय की ऊंचाई बढ़ाकर कर निर्माण कराया जाए एवं समय पर साफ सफाई कराई जाए।</p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />शौचालय में सफाई नहीं होने के कारण दुर्गंध से कस्बेवासियो ंको परेशानी उठानी पड़ रही है, शौचालय में नियमित रूप से सफाई होनी चाहिए। <br /><strong>-भंवरलाल रेगर, ग्रामीण </strong></p>
<p>नशेडियों का आतंक इतना है कि शौचालय का गेट तक तोड़ कर ले गए और शराब की बोतलें पीकर शौचालय में फैंक जाते है। <br /><strong>-उमेश सोनी, ग्रामीण </strong></p>
<p>शौचालय में नियमित सफाई होनी चाहिए तथा गेट लगवाना चाहिए ताकी किसी प्रकार की कोई समस्या कस्बेवासियों को ना हो। <br /><strong>- भरत सेन, ग्रामीण  </strong></p>
<p>बस स्टैण्ड पास में होने के कारण सुविधा के लिए बस स्टैण्ड बनाया गया था लेकिन सफाई नहीं होने के कारण यात्री व कस्बेवासी परेशानी का सामना कर रहे है।<br /><strong>- इकबाल पठान, ग्रामीण </strong></p>
<p>साफ सफाई के लिए ठेकेदार को अवगत करा दिया गया है। शौचालय के कई बार गेट लगवा दिया गया है नशेडी तोड़ कर ले जाते हैं। जो भी समस्या है उसका जल्द से जल्द समाधान करा दिया जाएगा। <br /><strong>- देवराज सिंह सोलंकी, प्रशासक ग्राम पंचायत पनवाड़</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>झालावाड़</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 19 May 2025 17:29:40 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>गौवंश की मौत का कारण बन रही पॉलिथीन, निगम गौशाला में दो बैल के पोस्टमार्टम से हुआ खुलासा</title>
                                    <description><![CDATA[शहर में सड़कों पर लावारिस हालत में घूम रहे अधिकतर गौवंश की मौत का कारण उनके पेट में जमा पॉलिथीन बन रही है]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/polythene-is-the-cause-of-death-of-cows/article-112644"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-05/rtrer-(2)2.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर में सड़कों पर लावारिस हालत में घूम रहे अधिकतर गौवंश की मौत का कारण उनके पेट में जमा पॉलिथीन बन रही है। इसका खुलासा बुधवार को निगम की बंधा गौशाला में एक ही दिन में मरे एक दर्जन से अधिक गौवंश में से दो बैल के पोस्ट मार्टम से हुआ। उनके पेट से चारे की जगह पर पॉलिथीन के करीब 40 से 50 किलो के गुच्छे निकले। शहर में बड़ी संख्या में लावारिस हालत में गाय और सांड घूम रहे हैं। उनके द्वारा सड़कों पर पड़े कचरे व खाद्य सामग्री को खाकर ही पेट भरा जा रहा है। लेकिन हालत यह है कि वे उस कचरे व खाद्य सामग्री के साथ इतनी अधिक मात्रा में पॉलिथीन खा रहे हैं कि उनके पेट में चारे की जगह ही नहीं है। </p>
<p><strong>12 की मौत, दो का पोस्टमार्टम</strong><br />नगर निगम कोटा दक्षिण के गौशाला समिति अध्यक्ष व पार्षद जितेन्द्र सिंह ने बताया कि गौशाला में वर्तमान में करीब 3 हजार से अधिक गौवंश है। गर्मी व चक्कर आकर गिरने की बीमारी से आए दिन गौवंश की मौत हो रही है। पिछले कई दिन से गौवंश की मृत्यु दर बढ़ी है। सिंह ने बताया कि बुधवार को भी करीब एक दर्जन गाय व बैल की मौत हुई थी। उनमें से पशु चिकित्सा अधिकारी की मौजूदगी में दो बैल का पोस्ट मार्टम किया गया। जिनमें दोनों के ही पेट से काफी मात्रा में पॉलिथीन निकली है। यही उनकी मौत का कारण बताया जा रहा है। </p>
<p><strong>40 से 50 किलो के निकले गुच्चे</strong><br />इधर वरिष्ठ पशु चिकित्सा अधिकारी व प्रभारी जिला मोबाइल यूनिट डॉ. भंवर सिंह चौधरी ने बताया कि उनकी मौजूदगी में रैंडमली दो बैल का पोस्ट मार्टम निगम की गौशाला में किया गया। दोनों के ही पेट से करीब 40 से 50 किलो पॉलिथीन के गुच्छे निकले हैं। ये तो उदाहरण है। अधिकतर गौवंश की यही हालत है।  डॉ. चौधरी ने बताया कि लावारिस हालत में घूमने पर गाय व बैल अधिकतर पॉलिथीन खा रहे है। जिससे इनके पेट में चारे की जगह ही नहीं है। जब वे चारा नहीं खा पा रहे हैं तो उनमें कमजोरी आ रही है। साथ ही उनके लीवर डीमेज हो रहे हैं। यही उनकी मौत का कारण बन रहे हैं। </p>
<p><strong>पहले भी मिली थी यही स्थिति</strong><br /><strong>डॉ. चौधरी ने बताया</strong> कि इससे पहले भी निगम की गौशाला में गौवंश की बड़ी संख्या में मौत हुई थी। उस समय भी जब गायों का पोस्ट मार्टम किया गया था तब भी उनके पेट से पॉलिथीन के गुच्छे निकले थे। </p>
<p><strong>पॉलिथीन में न डालें खाद्य पदार्थ</strong><br /><strong>डॉ. भंवर सिंह चौधरी व पार्षद जितेन्द्र सिंह ने बताया </strong>कि गायों की मौत का कारण  पॉलिथीन बन रही है। ऐसे में लोगों को चाहिए कि वे खाद्य पदार्थ को पॉलिथीन में नहीं फेंके। खाद्य पदार्थ खाने के चक्कर में गाय पॉलिथीन तक को खा रही है। जिससे वे चारा व रोटी नहीं खा पा रही और यही उनकी मौत का कारण है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 01 May 2025 17:47:04 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>शहर में पॉलिथीन के अलावा डिस्पोजेबल का फेल रहा कचरा, सर्दी में चाय के ठेले व थड़ी वालों के यहां लग रहा कचरे का ढेर </title>
                                    <description><![CDATA[निगम ने समझाइश व चालान की शुरु की कार्रवाई।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/apart-from-polythene--disposable-waste-is-also-spreading-in-the-city/article-103794"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-02/2597rtrer.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर में पॉलिथीन के अलावा इन दिनों डिस्पोजेबल आइटमों का कचरा अधिक फेल रहा है। सर्दी का सीजन होने से इस कचरे का सबसे अधिक ढेर चाय के ठेले व थड़ी वालों के पास लगा हुआ है। ऐसे में नगर निगम कोटा दक्षिण की ओर से शहर में सड़क किनारे और फुटपाथ पर खड़े चाय के ठेले और थड़ी वालों के खिलाफ चालान और समझाइश की कार्रवाई की जा रही है। नगर निगम कोटा दक्षिण की स्वास्थ्य अधिकारी रिचा गौतम के नेतृत्व में जन स्वास्थ्य अनुभाग की टीम लगातार कार्रवाई कर रही है। सीएडी रोड और घोड़े वाले बाबा चौराहे पर चाय के ठेले वालों से समझाइश की गई। साथ ही उन्हें सड़क से हटाया गया। स्वास्घ्य अधिकारी ने बताया कि सर्दी के मौसम में शहर में जगह-जगह पर चाय के ठेले व थड़ियां लग गई है। इनके द्वारा दिनभर चाय बेची जा रही है। जहां लोग चाय पीकर डिस्पोजेबल कप सड़क पर ही फेक रहे है। जिससे हवा चलने पर वे पूरी सड़क पर फेल रहे है। ऐसे में इन्हें मुख्य मार्ग से हटाने और कचरा नहीं  फेलाने के लिए समझाइश की जा रही है।  श्रीनाथपुरम् स्थित फायर स्टेशन के पास हरीतिमा पट्टी पर लगे चाय के ठेले वाले कचरा फेला रहे थे। उनके खिलाफ निगम टीम ने कार्रवाई की। वहीं छावनी चौराहे पर चौपाटी की तरफ जाने वाले रास्ते पर भी चाय के ठेले वाले कचरा फेला रहे है।</p>
<p><strong>हरीतिमा बिगाड़ रहा कचरा</strong><br />स्वास्थ्य अधिकारी ने बताया कि डिस्पोजेबल का कचरा किसी एक दो जगह पर नहीं वरन् सभी जगह पर हो रहा है। पास-पास चाय के कई ठेले लगे हुए हैं।  सबसे अधिक मुख्य मार्ग, फुटपाथ और हरीतिमा पट्टी पर इस तरह के ठेले लग रहे हैं। जिससे वे ठेले के पीछे या पास में ही कचरा फेला रहे है। वहीं कई लोगों ने नाले के पास ही थड़ी व ठेला लगाया हुआ है। डस्टबीन होने के बावजूद उसके भरन पर टिपर में नहीं डालकर नाले में ही डिस्पोजेबल कप डाल रहे हैं। जिससे निगम द्वारा सफाई करवाने के बाद भी नाले जाम हो रहे है। स्वास्थ्य अधिकारी ने बताया कि एक बार समझाइश के बाद भी यदि वे नहीं मानते हैं तो दूसरी बार में उन पर करीब 20 हजार रुपए का चालान किया जाएगा। गौरतलब है कि स्वच्छता सर्वेक्षण के भौतिक सत्यापन के लिए इसी महीने केन्द्रीय टीम के आने की संभावना है। जिसे देखते हुए भी नगर निगम कोटा दक्षिण और उत्तर के अधिकारी सफाई पर विशेष ध्यान दे रहे हैं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 10 Feb 2025 17:42:19 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>लापरवाही: सफाई व्यवस्था चरमराई, आमजन परेशान</title>
                                    <description><![CDATA[पॉलिथीन और कचरा भरने से नालियां हो रही जाम। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/baran/negligence--cleaning-system-has-collapsed--common-people-are-troubled/article-80115"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-06/laparwahi-safai-vyvastha-charmarai-aamjan-pareshan....atru,-baran-news-01-06-2024.jpg" alt=""></a><br /><p>अटरू। नगरपालिका क्षेत्र अटरू में लंबे समय से मेन रोड़ की नालियों की साफ सफाई नहीं होने से नालियों में गन्दगी व पॉलिथिन से भरी हुई है। अब तो नालियों का पानी मेन रोड पर आ रहा है और नालियों भी बन्द हो गई है यही भी मालूम नहीं है कि यहां पहले नालियां भी थी या नहीं पर नगरपालिका प्रशासन का इस समस्या की ओर कोई ध्यान ही नहीं है।  जो मेन बाजार की नालियों से जुड़ी गली मौहल्लों की नालियां बड़े नाले में आकर मिलती है। जब बड़े नाले की ही सफाई समय पर नहीं हो पाए तो जो छोटी छोटी नालियों में पानी का निकास बन्द हो जाता है। जिससे उन नालियों का पानी गलियों में ही भरा रहता है। इनकी सफाई को हुए करीब साल भर हो गया है। इसके कारण आमजन को समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। नगरवासी अमित, हेमन्त, चंद्रप्रकाश, वीरेन्द्र ने बताया कि आए दिन गंदगी और कचरे से नालियां जाम हो जाती है। जिससे नालियों की गदंगी रोड पर आ जाती है। जिससे वहां से निकलने वाले लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। </p>
<p><strong>समस्या से जिम्मेदारों को करा चुके है अवगत</strong><br />अटरू क्षेत्र के नगरवासी कीचड़ और गंदगी की समस्या को लेकर कई बार नगर पालिका अधिकारी, कर्मचारियों और जिम्मेदारों को अवगत करा चुके है लेकिन अभी भी इस समस्या की ओर किसी का कोई ध्यान नहीं है। नगरपालिका प्रशासन को जल्दी ही इस समस्या का समाधान करना चाहिए ताकि नगरवासियों को राहत मिल सकें।</p>
<p><strong>कीचड़ में फिसलकर चोटिल हो रहे नगरवासी</strong><br />वहीं नगरवासियों ने बताया कि नालियों में जमा गंदगी और कीचड़ रोड पर आ जाता है। जिससे रास्ते में फिसलन हो जाती है। कई बार वहां से निकलते समय बच्चें, बुजुर्ग, महिलाएं सहित नगरवासी कीचड़ में फिसलकर चोटिल हो जाते है। </p>
<p>नगरपालिका क्षेत्र में मेंन रोड के दोनों तरफ से निकलने वाली नालियों बहुत समय से दुर्दशा का शिकार हो रही हैं। नालियों में गंदगी व पॉलिथिन से नालियां जाम हो रही है।  <br /><strong>- राजेन्द्र प्रजापति, नगरवासी। </strong><br />     <br />नालों की सफाई बहुत समय से नहीं हुई है। जिसके कारण नाले में बहुत कचरा जमा हो गया है। उसमें से पानी <strong>नहीं निकल रहा है। जिसके कारण पानी रोड़ पर आने लगा है। </strong><br /><strong>- नन्दलाल सुमन,  नगरवासी। </strong></p>
<p>नालियों में भरा कीचड़ और गंदगी रोड पर आ जाने से यहां से निकलते समय बच्चें और बुजर्ग गिरकर चोटिल हो जाते है। शीघ्र ही समस्या का समाधान किया जाए। <br /><strong>- सुनीता, नगरवासी। </strong></p>
<p><strong>इनका कहना है </strong><br />पांच दिन बाद नालियों की सफाई के टेंडर निकलवाकर बरसात के पहले नालियों की साफ-सफाई करवा दी जाएगी।<br /><strong>- सुरेश रेगर, अधिशासी अधिकारी, नगरपालिका अटरू।   </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बारां</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 01 Jun 2024 17:23:38 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>नगर निगम ग्रेटर: डेढ़ साल में सवा पांच क्विंटल पॉलिथीन जब्त की</title>
                                    <description><![CDATA[ अब तक 525 किलो से अधिक प्रतिबंधित सिंगल यूज प्लास्टिक जब्त करने के साथ ही 11.80 लाख रुपए जुर्माना वसूल किया है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/jaipur-nagar-nigam-greater-seized-five-and-a-quarter-quintals-of-polythene-in-one-and-a-half-year/article-68835"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-02/polythene.png" alt=""></a><br /><p>ब्यूरो/नवज्योति, जयपुर। केंद्र सरकार के पर्यावरण, वन और जलवायु मंत्रालय ने एक जुलाई 2022 से सिंगल यूज प्लास्टिक पर रोक लगाने के बाद नगर निगम जयपुर ग्रेटर द्वारा लगातार कार्रवाई की जा रही है। निगम प्रशासन डेढ़ साल में करीब सवा पांच क्विंटल पॉलिथीन ही जब्त कर पाया है। इस दौरान निगम ग्रेटर ने 11 लाख 80 हजार रुपए जुर्माना भी वसूल किया है। निगम ग्रेटर प्रशासन ने मुख्यालय के साथ ही जोन स्तर पर टॉस्क फोर्स का गठन किया था। इस डेढ़ साल की अवधि में निगम प्रशासन ने प्लास्टिक के भंडारण, परिवहन एवं विनिर्माण करने वालों पर कोई ठोस कार्रवाई करने की बजाए छोटे-छोटे दुकानदारों और थड़ी ठेले वालों पर ही कार्रवाई कर खानापूर्ति की। <br /><br /><strong>11.80 लाख जुर्माना वसूला</strong><br />जयपुर ग्रेटर नगर निगम  आयुक्त  रूकमणि रियाड़ ने बताया कि प्रतिबंधित सिंगल यूज प्लास्टिक के उपयोग, परिवहन भंडारण व विनिर्माण की रोकथाम के लिए केन्द्र सरकार ने एक जुलाई 2022 से रोक लगा रखी है। निगम ग्रेटर तभी से नियमित कार्रवाई कर रहा है। अब तक 525 किलो से अधिक प्रतिबंधित सिंगल यूज प्लास्टिक जब्त करने के साथ ही 11.80 लाख रुपए जुर्माना वसूल किया है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 01 Feb 2024 12:06:49 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पॉलिथीन रोजाना ले रही 15 से अधिक गायों की जान</title>
                                    <description><![CDATA[नगर निगम की बंधा धर्मपुरा स्थित गौशाला में ही वर्तमान में रोजाना करीब 15 से 20 गायों की मौत हो रही है। जिनमें से अधिकतर की मौत का कारण पॉलिथीन खाया हुआ होना है। शहर में पॉलिथीन का सेवन करने से मरने वाली गायों का आंकड़ा अधिक भी हो सकता है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/polythene-is-killing-more-than-15-cows-daily/article-46633"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-05/photo-size-630-400-(5)4.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। पॉलिथीन की थैलियां इंसानों के लिए तो हानिकारक है हीं। मवेशियों के लिए भी जानलेवा हैं। पॉलिथीन शहर में रोजाना15 से अधिक गायों की जान ले रही है। सरकार द्वारा प्रतिबंधित होने के बावजूद भी शहर में पॉलिथीन का धडल्ले से उपयोग हो रहा है। पॉलिथीन की थैलियों में खाद्य पदार्थ रखने से उनका सेवन करने पर वे न केवल शरीर को नुकसान पहुंचाती हैं। वरन् उन थैलियों को सड़क पर व नालियों में फेकने पर वे नालियां जाम कर देती हैं। इतना ही नहीं अधिकतर लोग थैलियों में खाने की बची हुई वस्तुएं व सब्जी और उनके छिलके फेक रहे हैं। जिन्हें सड़कों पर लावारिस हालत में घूमने वाले गाय खा रही है। खाद्य पदार्थ के साथ प्लास्टिक की थैलियां भी गायों के पेट में जाकर जम रही है। जिससे वह उन्हें न केवल नुकसान पहुंचा रही है। वरन् उनकी जान तक ले रही है। इसका अंदाजा एक दिन पहले नगर निगम की ओर से बंधा धर्मपुरा स्थित निगम की गौशाला में मृत गायों का पोस्ट मार्टम में निकले पॉलिथीन के गुच्छों से लगाया जा सकता है। नगर निगम की बंधा धर्मपुरा स्थित गौशाला में ही वर्तमान में रोजाना करीब 15 से 20 गायों की मौत हो रही है। जिनमें से अधिकतर की मौत का कारण पॉलिथीन खाया हुआ होना है। </p>
<p><strong>आंकड़ा अधिक भी हो सकता है</strong><br />शहर में पॉलिथीन का सेवन करने से मरने वाली गायों का आंकड़ा अधिक भी हो सकता है। यह आंकड़ा तो सिर्फ निगम की गौशाला का है। इसके अलावा शहर में कई निजी गौशालाएं भी हैं। उनके अलावा लावारिस हालत में घूमने वाली अन्य गाय व घरों पर पालतू गायों की मौत भी हो रही होगी। जिससे यह आंकड़ा अधिक भी हो सकता है। </p>
<p><strong>सरकार का प्रतिबंध, फिर भी हो रहा उपयोग</strong><br />सरकार ने सिंगल यूज प्लास्टिक पर प्रतिबंध लगा दिया है। जिससे उनका उपयोग करना गैर कानूनी है। लेकिन हालत यह है कि उसके बाद भी बाजार में बड़ी संख्या में पॉलिथीन व प्लास्टिक का उपयोग हो रहा है। गर्म चीजों के कारण पॉलिथीन पिघलकर शरीर में उसके कण पहुंचकर नुकसान पहुंचा रहे हैं। इना सब कुछ जानने के बाद भी लोग सिंगल यूज प्लास्टिक का उपयोग कर रहे हैं। </p>
<p><strong>सड़क पर कचरे में पॉलिथीन का ढेर</strong><br />शहर में सड़क किनारे हो या कचरा पाइंट। हर जगह पर लगे कचरे के ढेर में बड़ी मात्रा में पॉलिथीन के ढेर लगे हुए मिल जाएंगे। ऐसा लोगों की आदत के कारण हो रहा है। अधिकतर लोग विशेष कर महिलाएं घर में बची खाद्य वस्तुओं, रोटियों और सब्जी व उनके छिलकों को थैलियों में भरकर फेक रही हैं। उस कचरे में खाने की वस्तुओं के साथ पॉलिथीन भी गायों के  पेट में जा रही है। जिससे वह च नहीं पाती और गुच्छा बनकर उनको नुकसान पहुंचा रही है। निगम द्वारा एक दिन पहले तीन मृत गायों का पोस्ट मार्टम करने पर सभी के पेट से 30 से 40 किलो पॉलिथीन के गुच्छे निकले हैं। </p>
<p><strong>हकीकत में लगे प्रतिबंध</strong><br />सरकार ने सिंगल यूज प्लास्टिक पर प्रतिबंध तो लगा दिया है लेकिन वह कागजों में ही है। हकीकत में बाजार में अधिकतर चीजें पॉलिथीन की थैलियों में ही बिक रही है। प्रतिबंध कागजों में नहीं हकीकत में लगे। तभी इसे समाप्त किया जा सकता है। <br /><strong>-मोहनलाल चोरसिया, रामपुरा</strong></p>
<p><strong>अनजाने में बन रहे गायों की मौत के वाहक</strong><br />गाय को एक तरफ तो गौ माता के रूप में पूजा जा रहा है। दूसरी तरफ उनकी मौत इस खतरनाक पॉलिथीन के सेवन से हो रही है। यह बड़ा दु:खद है। लोग अनजाने में ही सही पॉलिथीन में खाने की वस्तुएं फेक रहे हैं। जिसका सेवन गाय द्वारा करने पर उनकी मौत हो रही है। इसे रोकने के लिए चाहिए कि कोई भी खाद्य पदार्थ पॉलिथीन में नहीं फेका जाए। <br /><strong>-दिनेश रावल, श्रीपुरा</strong></p>
<p><strong>घर से कपड़े का थैला लेकर जाएं</strong><br />पॉलिथीन शरीर के लिए तो नुकसान दायक है ही। तभी तो सरकार ने उसके उपयोग पर रोक लगाई है। लेकिन लोग जान बूझकर उनका उपयोग कर शरीर को नुकसान पहुंचा रहे हैं। लोगों को चाहिए कि वे स्वयं अपनी आदत बदलें। सब्जी हो या किराने का सामान कुछ भी लेने जाएं तो अपने साथ कपड़े का थैला लेकर जाएं। गायों की मौत पॉलिथीन से होना गौ हत्या के पाप के समान है। <br /><strong>-घनश्याम गोचर, बल्लभबाड़ी</strong></p>
<p><strong>इनका कहना</strong><br />निगम की गौशाला में रोजाना गायों की मौत हो रही है। लोग आरोप तो लगा रहे हैं कि निगम की अनदेखी व लापरवाही से गायों की मौत हो रही है। लेकिन जब हकीकत का पता किया तो मौत का कारण पॉलिथीन है। लोगों को चाहिए कि वे गौमाता को बचने के लिए खाने की वस्तुएं पॉलिथीन मे नहीं फेके। गौशाला में अभी तो 15 से 0 गायों की मौत हो रही है। बरसात के समय में यह संख्या बढ़ जाती है।  <br /><strong>-जितेन्द्र सिंह, अध्यक्ष गौशाला समिति</strong></p>
<p>निगम की गौशाला में वर्तमान में करीब 4 हजार से अधिक गौवंश है। जिनमें से रोजाना 15 से 20 गायो।की मौत हो रही है।  निगम द्वारा उन्हें हरा चारा, भूसा व पानी भी पर्याप्त मात्रा में दिया जा रहा है। गौशाला की व्यवस्थाओं में पहले से काफी सुधार हुआ है। उसके बाद भी गायों की मौत 1 फीसदी तो होती है। लेकिन गौशाला में यह संख्या कम है। गायों की मौत का कारण पोस्ट मार्टम से पॉलिथीन आया है। ऐसे में इसके उपयोग को रोकने की आवश्यकता है। नगर निगम ने सिंगल यूज प्लास्टिक के खिलाफ अभियान चलाकर गत दिनों बड़ी मात्रा में जब्त भी की थी। लोगों को पॉलिथीन का उपयोग नहीं करने के लिए जागरूक किया जाएगा। साथ ही पॉलिथीन बिकने पर कार्रवाई भी की जाएगी। <br /><strong>-राजेश डागा, कार्यवाहक आयुक्त, नगर निगम कोटा दक्षिण</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 25 May 2023 15:32:32 +0530</pubDate>
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                <title>पॉलिथीन का उपयोग करने पर कार्रवाई  सुनिश्चित करने के निर्देश</title>
                                    <description><![CDATA[कोटा जिले में पॉलिथीन प्रतिबंधित होने के बावजूद तीन टन घातक प्लास्टिक की थैलियों का उपयोग किया जा रहा है । इस दौरान लगातार उपयोग में किए जा रहे कपड़े के कैरी बैग वास्तव में कपड़े के नहीं है बल्कि प्लास्टिक मेटेरियल के बने हुए हैं जो पर्यावरण के लिए खतरनाक साबित हो रहे हैं।  ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/instructions-to-ensure-action-on-using-polythene/article-35184"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-01/hogh-cort-chandigarh-court-hammer1457186614-82.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर की स्थाई लोक अदालत ने कोटा शहर में प्रतिबंधित पॉलीथिन का उपयोग करने के मामले में फैसला सुनाते हुऐ  नगर निगम  आयुक्त  और जिला कलेक्टर को कोटा शहर  एवं कोटा जिले में  पॉलिथीन को तुरंत प्रभाव से प्रतिबंधित करते हुए कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं । इस मामले में  एडवोकेट लोकेश कुमार सैनी ने एक जनहित  याचिका  न्यायालय में पेश की थी । जिसमें बताया था कि कोटा जिले में पॉलिथीन प्रतिबंधित होने के बावजूद तीन टन घातक प्लास्टिक की थैलियों का उपयोग किया जा रहा है । इस दौरान लगातार उपयोग में किए जा रहे कपड़े के कैरी बैग वास्तव में कपड़े के नहीं है बल्कि प्लास्टिक मेटेरियल  के बने हुए हैं जो पर्यावरण के लिए खतरनाक साबित हो रहे हैं।  </p>
<p>याचिका में बताया गया था सितंबर 2017 में एनजीटी ने 50 माइक्रोन से पतले प्लास्टिक के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगा दिया था जबकि राजस्थान सरकार ने 1 अगस्त सन 2010 से ही प्रदेश में प्लास्टिक के कैरी बैग पर प्रतिबंध लगा चुकी है इसके बावजूद पॉलिथीन के कैरी बैग खुलेआम इस्तेमाल किए जा रहे हैं । इस मामले में सुनवाई करते हुए न्यायालय ने नगर निगम आयुक्त तथा जिला कलेक्टर को नोटिस जारी करते हुए जवाब तलब किया था। नगर निगम ने इस मामले में जवाब पेश करते हुए बताया कि राज्य सरकार के आदेश अनुसार जब्त की गई । पॉलिथीन 6710 किलो 25 अप्रैल 2019 को  डिस्पोज के लिए भिजवाई गई थी। शेष पॉलिथीन 5144 किलो को भी जल्द ही निस्तारण के लिए भेजा जाएगा । जवाब में अभी बताया गया । यह अकेले कोटा  या राजस्थान की नहीं  बल्कि  राष्ट्रीय स्तर की समस्या है । इसके समाधान के लिए उच्चस्तरीय निर्णय हो। इसी तरीके से प्रत्येक व्यक्ति का भी कर्तव्य के वह दुकानदारों से पॉलिथीन की थैलियों में कोई वस्तु नहीं ले । न्यायालय में दोनों पक्षों की सुनवाई करते हुए कोटा नगर निगम व जिला कलेक्टर को आदेश दिया कि वह प्लास्टिक की  थैलियों का उपयोग जहां भी किया जा रहा है उसे तुरंत प्रभाव से प्रतिबंधित करने की विधि अनुसार कार्रवाई सुनिश्चित करें ।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 18 Jan 2023 17:38:58 +0530</pubDate>
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                <title>नगर निगम टीम ने जप्त की 400 किलो पॉलिथीन </title>
                                    <description><![CDATA[नगर निगम द्वारा पॉलिथीन जब्ती का अभियान लगातार किया जा रहा है। राज्य सरकार द्वारा सिंगल यूज प्लास्टिक को प्रतिबंधित करने के बाद से लगातार कार्रवाई  की जा रही है । ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/nagar-nigam-team-seized-400-kg-polythene/article-30554"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-11/nagar-nigam-team-nei-japt-ki-400-kilo-polythene...kota-live-news-..23.11.2022.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। नगर निगम कोटा उत्तर व दक्षिण की संयुक्त टीम ने बुधवार को कार्रवाई करते हुए करीब 400 किलो पॉलिथीन जप्त की है । नगर निगम कोटा उत्तर के मुख्य अग्निशमन अधिकारी राकेश व्यास ने बताया कि कोटा उत्तर व कोटा दक्षिण के फायर अनुभाग की टीम ने संयुक्त रूप से स्मॉल स्केल इंडस्ट्रियल एरिया में एक फैक्ट्री पर छापा मारा। जहां से बड़ी मात्रा में पॉलिथीन बरामद हुई ।पॉलिथीन का उपयोग पैकिंग के काम के लिए किया जा रहा था। विभिन्न उत्पादों की पैकिंग के लिए पॉलिथीन तैयार की जा रही थी। फैक्ट्री में पॉलिथीन होने की सूचना पर टीम मौके पर पहुंची और वहां छापा मारा जिसमें करीब 400 किलो पॉलिथीन जप्त की गई है।</p>
<p>व्यास ने बताया कि नगर निगम द्वारा पॉलिथीन जब्ती का अभियान लगातार किया जा रहा है। राज्य सरकार द्वारा सिंगल यूज प्लास्टिक को प्रतिबंधित करने के बाद से लगातार कार्रवाई की जा रही है। नगर निगम कोटा उत्तर और दक्षिण की और अनुवाद की टीमें अलग-अलग क्षेत्रों में कई कार्रवाई  पूर्व में कर चुकी है। यह कार्रवाई लगातार जारी रहेगी। बुधवार को की गई कार्रवाई में कोटा उत्तर नगर निगम के सहायक अग्निशमन अधिकारी अमजद खान और दक्षिण के फायर अधिकारी और होमगार्ड जाब्ता मौजूद रहा। गौरतलब है कि राज्य सरकार द्वारा सिंगल यूज प्लास्टिक को प्रतिबंधित करने के बावजूद शहर में बड़ी संख्या में दुकानों पर प्लास्टिक का उपयोग किया जा रहा है। डिस्पोजल से लेकर पैकिंग तक में प्रतिबंधित सिंगल यूज प्लास्टिक का उपयोग हो रहा है जो शरीर के लिए काफी हानिकारक है। हालांकि सिंगल यूज प्लास्टिक पर प्रतिबंध लगने के बाद से कई जगहों पर इसका उपयोग पूरी तरह से बंद हो चुका है ।उसकी जगह पर कागज की थैली और कपड़े के थैलों का उपयोग होने लगा है। उसके बावजूद अभी भी सब्जी मंडी समेत किराने की दुकानों पर पॉलिथीन का उपयोग हो रहा है। नगर निगम के मुख्य अग्निशमन अधिकारी राकेश व्यास ने बताया कि निगम की ओर से पॉलिथीन जब्ती का अभियान लगातार जारी रहेगा । प्रयास है कि जहां से भी सूचना मिलती है वहां टीम मौके पर जाकर पॉलिथीन जब्ती की कार्रवाई कर रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 23 Nov 2022 16:29:57 +0530</pubDate>
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