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                <title>Krishna Janmotsav - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>धूमधाम से मनाया नंदोत्सव; भक्तों ने लूटी उछाल, धर्म की स्थापना के लिए जन्म लेते हैं भगवान: स्वामी दयानंद सरस्वती</title>
                                    <description><![CDATA[राजापार्क में श्री साईं बाबा के 20वें वार्षिकोत्सव पर श्रीमद भागवत कथा में 'नंदोत्सव' धूमधाम से मनाया गया। श्रद्धालुओं ने भजन और झांकियों के बीच खिलौने और मेवे लुटाए। जगदगुरु परमहंसाचार्य ने धर्म और भक्ति का संदेश दिया। महोत्सव में बुधवार को गोवर्धन पूजा और 56 भोग का विशेष आयोजन किया जाएगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/nandotsav-celebrated-with-pomp-devotees-looted-the-boom-lord-swami/article-146136"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/jaipurn.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। श्री साईं नाथ सेवा धाम समिति के तत्वावधान में व श्री साईं बाबा के 20वें वार्षिकोत्सव पर राजापार्क,सिंधी कॉलोनी के स्वामी सर्वानंद पार्क में चल रहे श्रीमद भागवत कथा ज्ञान यज्ञ समारोह के  चौथे दिन  मंगलवार  को भगवान श्री का जन्मोत्सव नंदोत्सव के रूप में मनाया गया। इस मौके पर नंद के आनंद भयो,जय कन्हैया लाल की.... यशोदा जायो ललना... गोविन्द मेरो है गोपाल मेरो है,......जैसे बधाई गीतों पर श्रद्धालुओं को खिलौने,मेवे व फल की खूब उछाल लुटाई। इस दौरान आसपास का क्षे़त्र भक्ति और आस्था के रंग में डूब गया। </p>
<p>महोत्सव के मध्य श्रद्धालु श्री कृष्ण जन्मोत्सव की मनमोहक झांकी के दर्शन कर निहाल हो उठे।  इस अवसर पर जगदगुरु परमहंसाचार्य स्वामी दयानंद सरस्वती ने कहा कि जब-जब धरती पर अत्याचार बढ़ता है,तब-तब धर्म की स्थापना के लिए धरती पर अवतारी जन्म लेते है।संसार में जो सुख प्रभु  के भजन में है,वहीं सुख कहीे भी नहीं है।सदैव भगवान का ध्यान करते हुए उनका भजन करते रहना चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि  नंदोत्सव हमें सिखाता है कि जीवन में जब भी कोई शुभ घटना घटे, उसका आनंद केवल अपने तक सीमित न रखें, बल्कि उसे समाज और संसार के साथ बाँटें। जैसे नंदबाबा ने अपने पुत्र के जन्म की खुशी पूरे व्रज में फैलाई, वैसे ही हमें भी प्रेम, करुणा और सद्भावना का प्रसार करना चाहिए।नंदोत्सव केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि आनंद, प्रेम और भक्ति का अद्भुत संगम है। यह वह पावन क्षण है जब व्रज में भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के बाद नंदबाबा ने पूरे गाँव में हर्ष और उल्लास का संदेश फैलाया। आयोजन से जुड़े निवर्तमान पार्षद घनश्याम चंदलानी ने बताया कि महोत्सव के तहत बुधवार को  भगवान श्रीकृष्ण की बाललीला के बाद गोवर्धन पूजा व 56 भोग सजाया जाएगा। उन्होंने बताया कि महोत्सव के तहत 12 को रासलीला के बाद रुकमणि विवाह की कथा के बाद अंतिम दिन सुदामा चरित्र,परीक्षित मोक्ष के बाद कथा की पूर्णाहुति के बाद पोथी विदाई होगी। कथा राेजाना साम 4बजे से रात्रि 8बजे तक होगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 11 Mar 2026 18:30:13 +0530</pubDate>
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                <title>द्वारकाधीश मंदिर में जन्माष्टमी उत्सव की धूम, गोस्वामी कुमार ने परेड की सलामी ली</title>
                                    <description><![CDATA[मंदिर में शुक्रवार को नियमित दर्शन के बाद रात करीब साढे 8 बजे जागरण के दर्शन खुलेंगे जो साढे 11 बजे तक चलेंगे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/rajsamand/janmashtami-celebration-in-dwarkadhish-temple/article-19642"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-08/asdgsdg.jpg" alt=""></a><br /><p>राजसमंद जिला मुख्यालय पर स्थित श्री द्वारकाधीश मंदिर पर भी कृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव की धूम मची हुई है। सुबह करीब साढे 4 बजे प्रभु के पंचामृत स्नान के दर्शन के साथ ही जन्माष्टमी महोत्सव की शुरुआत हुई। वहीं दोपहर में राजभोग के दर्शन में श्रीनाथ बैंड की मधुर स्वर लहरियो पर श्रीनाथ गार्ड ने परेड की। गोस्वामी कुमार ने परेड की सलामी ली। मंदिर में शुक्रवार को नियमित दर्शन के बाद रात करीब साढे 8 बजे जागरण के दर्शन खुलेंगे जो साढे 11 बजे तक चलेंगे। इसके बाद प्रभु द्वारिकाधीश को 12 बजे जन्म के समय बंदूकों की सलामी दी जाएगी। इसके बाद मंदिर में जागरण के दर्शन खुलेंगे। शनिवार सुबह साढे 8 बजे बाद मंदिर में नंद महोत्सव मनाया जाएगा। मंदिर में दर्शन करने के लिए देशभर से श्रद्धालु राजसमंद पहुंच रहे हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>राजसमंद</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 19 Aug 2022 17:53:29 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>गोविंददेव जी मंदिर पहुंचे पायलट,दर्शन कर लिया आशीर्वाद</title>
                                    <description><![CDATA[पायलट ने इस अवसर पर कहा कि भगवान श्रीकृष्ण सभी लोगों के जीवन में खुशियां लाए। श्रीकृष्ण ने समाज को न्याय का संदेश देकर लोगों को जीवन जीने की कला सिखाई।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/pilot-reached-govinddev-ji-temple-got-blessings/article-19610"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-08/sdfjgdfhdf.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट शुक्रवार को गोविंददेव जी मंदिर पहुंचे। पायलट ने मंदिर में दर्शन कर आशीर्वाद लिया। श्री कृष्ण जन्माष्टमी के पावन अवसर पर सचिन पायलट ने श्री गोविंद देव जी के दर्शन कर प्रदेश के सुख समृद्धि और खुशहाली की कामना की। पायलट ने इस अवसर पर कहा कि भगवान श्रीकृष्ण सभी लोगों के जीवन में खुशियां लाए। श्रीकृष्ण ने समाज को न्याय का संदेश देकर लोगों को जीवन जीने की कला सिखाई। हमें श्रीकृष्ण के उपदेशों को अपने जीवन मे आत्मसात करना होगा, ताकि सभी का भला कर सकें।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 19 Aug 2022 14:32:05 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>मुख्यमंत्री गहलोत ने दी जन्माष्टमी की शुभकामनाएं</title>
                                    <description><![CDATA[गहलोत ने युवाओं से आह्वान किया है कि श्रीकृष्ण के जीवन से प्रेरणा लें। रिश्तों को हर स्तर पर मर्यादापूर्वक निभाएं। अपनी क्षमताओं का उपयोग कर प्रदेश की उन्नति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/chief-minister-gehlot-wishes-janmashtami/article-19586"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-08/gov.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जयपुर। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर प्रदेशवासियों को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दी हैं। </span><span lang="hi" style="line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">गहलोत ने कहा कि श्रीकृष्ण का जीवन हमारे लिए प्रेरणास्त्रोत है। उनका जीवन हमें सकारात्मक रहने और कर्म करते रहने की सीख देता है। श्रीकृष्ण ने जिस तरह महाभारत के युद्ध में सत्य का साथ दिया</span><span style="line-height:115%;">, </span><span lang="hi" style="line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">उसी तरह हमें अपने जीवन में आगे बढ़ने के लिए सदैव सत्य के रास्ते पर चलना चाहिए। गहलोत ने युवाओं से आह्वान किया है कि श्रीकृष्ण के जीवन से प्रेरणा लें। रिश्तों को हर स्तर पर मर्यादापूर्वक निभाएं। अपनी क्षमताओं का उपयोग कर प्रदेश की उन्नति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएं। अन्याय का प्रतिकार करें। जरूरतमंद लोगों की निःस्वार्थ सेवा करें।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 19 Aug 2022 12:08:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>श्रीकृष्ण का जीवन दर्शन और लीलाएं</title>
                                    <description><![CDATA[ मथुरा के कारागार में वसुदेव की पत्नी देवकी के गर्भ से रात्रि 12 बजे श्रीकृष्ण ने जन्म लिया था। अपने बाल्याकाल में श्रीकृष्ण ने अनेकों लीलाएं कीं, जन्माष्टमी के अवसर पर ऐसी ही अनेक लीलाओं का मंचन किया जाता है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/life-philosophy-and-pastimes-of-shri-krishna/article-19581"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-08/p-61.jpg" alt=""></a><br /><p>सम्पूर्ण भारत में प्रति वर्ष भाद्रपक्ष कृष्णाष्टमी को भारतीय जनमानस के नायक योगेश्वर भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव के रूप में जन्माष्टमी पर्व बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। यह पर्व हमें प्रेरणा देता है कि हम अपनी बुद्धि और मन को निर्मल रखने का संकल्प लेते हुए अहंकार,ईर्ष्या, द्वेष रूपी मन के विकारों को दूर करें। माना जाता है कि इसी दिन मथुरा के कारागार में वसुदेव की पत्नी देवकी के गर्भ से रात्रि 12 बजे श्रीकृष्ण ने जन्म लिया था। अपने बाल्याकाल में श्रीकृष्ण ने अनेकों लीलाएं कीं, जन्माष्टमी के अवसर पर ऐसी ही अनेक लीलाओं का मंचन किया जाता है। उनकी दिव्य लीलाओं को समझना जहां पहुंचे हुए ऋषि-मुनियों और बड़े-बड़े विद्वानों के बूते से भी बाहर था, वहीं अनपढ़, गंवार माने जाते रहे निरक्षर और भोले-भाले ग्वाले और गोपियां उनका सानिध्य पाते हुए उनकी दिव्यता का सुख पाते रहे। वे महाभारत काल के ऐसे आध्यात्मिक और राजनीतिक दृष्टा रहे, जिन्होंने धर्म, सत्य और न्याय की रक्षा के लिए दुर्जनों का संहार किया। वे शांति, प्रेम एवं करूणा के साकार रूप थे। उनके आदर्श, उनके जीवन की विद्वत्ता, वीरता, कूटनीति, योगी सदृश उज्जवल, निर्मल एवं प्रेरणादायक पक्ष, सब हमारे लिए अनुकरणीय हैं। पाप-पुण्य, नैतिक-अनैतिक, सत्य-असत्य से परे पूर्ण पुरुष की अवधारणा को साकार करते श्रीकृष्ण भारतीय परम्परा के ऐसे प्रतीक हैं, जो जीवन का प्रतिबिम्ब हैं और सम्पूर्ण जीवन का चित्र प्रस्तुत करते हैं।<br /><br />जन्माष्टमी पर्व का भारतीय संस्कृति में इतना महत्व क्यों है, यह जानने के लिए कृष्ण के जीवन दर्शन और उनकी अलौकिक लीलाओं को समझना जरूरी है। दरअसल बाल्याकाल से लेकर बड़े होने तक श्रीकृष्ण की अनेक लीलाएं विख्यात हैं। श्रीकृष्ण ने अपने बड़े भाई बलराम का घमंड तोड़ने के लिए हनुमान जी का आव्हान किया था, जिसके बाद हनुमान ने बलराम की वाटिका में जाकर बलराम से युद्ध किया और उनका घमंड चूर-चूर कर दिया था। मथुरा के राजा और श्रीकृष्ण के मामा कंस ने उन्हें मारने के लिए अनेक प्रयास किए। श्रीकृष्ण को मौत के घाट उतारने के लिए अनेक राक्षसों को गोकुल भेजा गया किन्तु एक-एक कर सभी कृष्ण के हाथों मारे गए। एक बार कंस ने कृष्ण का वध कराने के लिए अपने खास निजी सेवक तृणावर्त नामक राक्षस को गोकुल भेजा। तृणावर्त बवंडर का रूप धारण कर गोकुल पहुंचा और उसी बवंडर में श्रीकृष्ण को अपने साथ आकाश में उड़ा ले गया। उस मायावी बवंडर के चलते पूरा गोकुल थोड़े समय के लिए अंधकारमय हो गया था, इसलिए गोकुलवासी कुछ भी देखने में असमर्थ थे। बवंडर शांत होने के पश्चात् जब माता यशोदा ने श्रीकृष्ण को आंगन से गायब पाया तो वह अत्यंत चिंतित होकर रोने लगी। उधर तृणावर्त अपने मायावी बवंडर में कृष्ण को अपने साथ लेकर आकाश में उड़ तो गया, किन्तु उसी दौरान कृष्ण ने अपना भार इतना बढ़ा दिया कि तृणावर्त उस भार को संभालने में असमर्थ हो गया। इस कारण तृणावर्त के मायावी बवंडर की गति एकाएक कम हो गई और तृणावर्त के लिए आगे बढ़ना मुश्किल हो गया। तभी कृष्ण ने तृणावर्त का गला इतनी जोर से पकड़ा कि वह लाख प्रयासों के बावजूद उनसे अपना गला नहीं छुड़ा पाया और अंतत: उस भयानक राक्षस तृणावर्त के प्राण पखेरू उड़ गए। श्रीकृष्ण को खोजने निकले गोकुलवासियों ने देखा कि एक भयानक राक्षस पास की एक विशाल चट्टान पर गिरा पड़ा है, जिसके सारे अंग चकनाचूर हो चुके थे और कृष्ण उसके शरीर पर बैठे हुए थे। कृष्ण को वहां सकुशल देखकर सभी बेहद प्रसन्न हुए किन्तु सब आश्चर्यचकित भी थे कि इतने विशालकाय राक्षस को इस छोटे से बालक ने कैसे मौत के घाट उतार दिया। यह श्रीकृष्ण की अलौकिक लीला ही थी कि महाभारत युद्ध से ठीक पहले दुर्योधन मदद की गुहार लेकर सबसे पहले श्रीकृष्ण के पास द्वारिका पहुंचा और अर्जुन दुर्योधन के बाद पहुंचे। दोनों जब द्वारिकाधीश के पास पहुंचे, उस समय वे सो रहे थे। दुर्योधन उनके सिर से पास बैठ गया जबकि अर्जुन पैरों की ओर। जब श्रीकृष्ण की नींद खुली तो उनकी दृष्टि पैरों की ओर बैठे अर्जुन पर पहले पड़ी। इसलिए उन्होंने अर्जुन से उनकी नारायणी सेना या स्वयं श्रीकृष्ण में से किसी को एक को चुनने के लिए कहा। दुर्योधन ने विरोध जताते हुए कहा कि पहले वो उनके पास आया है, इसलिए उनसे कुछ मांगने का अधिकार उसे ही मिलना चाहिए। श्रीकृष्ण के हां कहने के पश्चात् दुर्योधन ने उनकी विशाल नारायणी सेना मांगी और इस तरह अर्जुन को महाभारत युद्ध में भगवान श्रीकृष्ण का साथ मिला।श्रीकृष्ण को प्रेम एवं मित्रता के अनुपम प्रतीक के रूप में भी जाना जाता है। बचपन के निर्धन मित्र सुदामा को उन्होंने अपने राज्य में जो मान-सम्मान दिया, वह मित्रता का अनुकरणीय उदाकरण बना। महाभारत युद्ध के समय शांति के सभी प्रयास असफल होने पर उन्होंने संशयग्रस्त धनुर्धारी अर्जुन को ज्ञान का उपदेश देकर कर्त्तव्य मार्ग पर अग्रसर किया और अन्याय की सत्ता को उखाड़ने के लिए अपने ही कौरव भाइयों के साथ युद्ध करते हुए उन्हें अपने कर्मों का पालन करने के लिए गीता का उपदेश दिया। </p>
<p>-योगेश कुमार गोयल<br />(ये लेखक के अपने विचार हैं)</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 19 Aug 2022 11:53:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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                <title>शहर में विसर्जन के लिए बने अलग कुंड तो स्वच्छ रहेंगे जलाशय</title>
                                    <description><![CDATA[प्रति वर्ष की भांति अनन्त चतुर्दशी, कृष्ण जन्मोत्सव, गणेशोत्सव और नवरात्रि में सार्वजनिक पांडालों में विराजित विशाल और छोटी बड़ी लाखों प्रतिमाओं को फिर से चंबल, किशोर सागर तथा छोटे बड़े जलाशयों में  विसर्जन किया जाएगा। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/if-a-separate-pool-is-made-for-immersion-in-the-city--the-reservoir-will-remain-clean/article-18332"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-08/shahar-mei-visarjan-k-liye-bane-alag-kund..kota-news-8.8.2022.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। कोटा स्मार्ट सिटी बनने की ओर अग्रसर है। प्रति वर्ष की भांति अनन्त चतुर्दशी, कृष्ण जन्मोत्सव, गणेशोत्सव और नवरात्रि में सार्वजनिक पांडालों में विराजित विशाल और छोटी बड़ी लाखों प्रतिमाओं को फिर से चंबल, किशोर सागर तथा छोटे बड़े जलाशयों में विसर्जन किया जाएगा। ऐसे में इन मूर्तियों से निकलने वाले रसायन और अघुलनशील प्लास्टर ऑफ पेरिस, मालाएं, कपड़ा और अन्य सामान तालाबों में समर्पित किया जाएगा। इससे फिर हमारे जलाशय प्रदूषित होंगे और जलीय जीव जंतुओं के जीवन पर संकट आएगा। ऐसे में शहर के लोगों को मिलकर ऐसी व्यवस्था करनी चाहिए कि हमारी धार्मिक भावनाएं भी बनी रहें और हमारे जलाशय स्वच्छ बने रहें। इसी मुददे को लेकर नवज्योति ने शहर के लोगों से बातचीत की। प्रस्तुत हैं उसके अंश। उच्च न्यायालय के निर्देश अनुसार स्थानीय प्रशासन करे काम राजस्थान उच्च न्यायालय ने इस संबंध में सरकार को निर्देश दे रखे हैं। करीब आठ नौ वर्ष पहले हमारी ही याचिका पर हाई कोर्ट ने निर्देश दिए थे कि विसर्जन के लिए अलग से कुंड का निर्माण कराया जाए। भीलवाड़ा शहर में यह व्यवस्था कायम है। यदि अलग कुंड में विसर्जन होता है तो जलीय जीव जंतुओं को कोई नुकसान नहीं होगा और हमारी धार्मिक भावनाएं भी बनी रहेगी। कोटा में स्थानीय प्रशासन को भी इस संबंध में हाई कोर्ट के निर्देशानुसार निर्णय लेना चाहिए। -बाबू लाल जाजू, पर्यावरणविद</p>
<p>ना बिक्री पर रोक लग सकी ना क्रेज हुआ कम कोरोना काल से मजदूर और निम्न वर्ग आमदनी के संकट से परेशान है। जो लोग मूर्ति बनाकर अपने और अपने परिवारों का जीवन यापन करते हैं उन पर रोक लगाना मानवीय दृष्टि से ठीक नहीं। ऐसे में बीच का रास्ता निकालना ही अच्छा समाधान है। हर शहर में सरकार को ऐसी व्यवस्था करनी चाहिए कि नदी,तालाबों में प्रदूषण भी ना हो और धार्मिक भावनाएं बनी रहें। सात ही लोगों को रोजगार भी मिलता रहे। इसका एक मात्र समाधान विसर्जन के समय अस्थाई व्यवस्था की जाए जैसी भीतरिया कुन्ड में पिछले वर्ष की गई थी। अथवा कोई ऐसा कुन्ड बनाया जाए जहां विसर्जन हो सके और और फिर उसकी सफाई कर दी जाए। -राकेश राकू, चंबल बचाओ संघर्ष समिति</p>
<p>सरकार की ओर से प्लास्टर ऑफ पेरिस की मूर्तियां बनाने और बिक्री पर रोक लगा रखी है उसके बावजूद प्लास्टर ऑफ पेरिस की मूर्तियों का ना तो क्रेज कम हुआ ना ही मांग घटी। हर साल हम अभियान चलाकर पीओपी मूर्तियां ना बने इसके लिए पुलिस व प्रशासन की मदद से कलाकारों से मिलकर रोकने का प्रयास करते हैं। लेकिन फिर भी शहर में गणेशोत्सव से पहले बड़ी संख्या में मूर्तिया बिकने आती ही है। हालांकि अब लोगों में जागृति आने लगी है और मिट्टी प्रतिमाएं ही खरीद रहे हैं लेकिन नगर निगम व यूआईटी को चाहिए की गणेशोत्सव में मूर्तियों के विसर्जन के लिए सरकार हर शहर में एक कुंड तैयार करें । जहां प्लास्टर ऑफ पेरिस की मूर्तियों का विसर्जन किया जाए। उसके बाद उस कुंड से मूर्तियों व पानी की निकासी कर कुंड को खाली कर दें तो मूर्तिकारों को रोजगार बना रहेगा। दूसरा शहर के नदी तालाब प्रदूषण होने से बच जाएंगे। शहर के भीतरियां कुंड व किशोर सागर तालाब पर ये कुंड निर्माण करें तो अन्नत चर्तुदशी पर होने वाले विसर्जन से जल भी दूषित नहीं होगा और लोगों की धार्मिक आस्था भी बनी रहेगी। इन कुंड का बाकी समय खाद बनाने में उपयोग कर निगम दोहरा लाभ उठा सकती है। -डॉ. सुधीर गुप्ता, संयोजक</p>
<p>हम लोग संस्थान स्थाई ठिकाना बने सरकार की ओर से पीओपी की मूर्तियां बनाने और बिक्री पर रोक लगा दी है। साथ ही मूर्तियों की ऊंचाई को लेकर कलाकारों को नोटिस दिए जा रहे है। ऐसे में कुंभकारों का रोजगार छीनता जा रहा है। पर्यावरण प्रेमियों का कहना है कि नगर निगम की ओर से भीतरिया कुंड, किशोर सागर तालाब पर अलग से ऐसे कुंड का निर्माण किया जाना चाहिए जिससे प्रतिमाओं के विसर्जन का स्थाई ठिकाना बनाया जा सके। उसे समय समय पर साफ कर देने से जल प्रदूषण भी नहीं होगा। साथ ही मूर्तियों की मिट्टी भी पुन: बगीचों में काम आएगी। -कुंदन चीता, हाडौती पर्यावरण समिति</p>
<p>प्लास्टर ऑफ पेरिस की मूर्तियों के विसर्जन के लिए बने स्थाई कुंड सरकार ने प्लास्टर ऑफ पेरिस की मूर्तियों की बिक्री पर रोक लगाने के बाद आजकल मूर्तिकार पानी में घुलने और कच्चे रंगों का इस्तेमाल कर रहे हैं। जिससे विजर्सन के बाद मूर्ति पानी में गल जाए और उसके कलर से जलीय जीवों को नुकसान भी नहीं हो। बड़ी मूर्तियों में नारियल की जूट का प्रयोग किया जाता है जिससे मूर्तियां पानी में विसर्जन के बाद भी घुलती नहीं है। पिछले दो साल से कलाकारों ऐसी मूर्तियां बनाना बंद कर दिया है। अब पानी में घुलनशील मिट्टी की मूर्तिया तैयार कर रहे है। हालांकि प्लास्टर ऑफ पेरिस स्थानीय कलाकार ना भी बनाए तो बाहर से त्यौहारों पर ये बिकने आती ही है। सस्ती होने से लोगों में अभी इसका क्रेज कम नहीं हुआ ना ही मांग घटी है। नगर निगम की ओर गणेशोत्सव में प्लास्टर ऑफ पेरिस की मूर्तियों के लिए भीतरिया कुंड, किशोर सागर तालाब में स्थाई पक्का गणेश कुंड तैयार करें जहां प्लास्टर ऑफ पेरिस की मूर्तियों का विसर्जन जा सके। मूर्तियों के गलने के बाद उस पानी को खाली कर उसकी मिट्टी उपयोग किया जा सकता है। जिससे मूर्तिकारों को रोजगार बना रहेगा। दूसरा शहर के नदी तालाब प्रदूषण होने से बच जाएंगे। - शंकर,मूर्तिकार कोटा</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 08 Aug 2022 19:06:55 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
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                <title>पीओपी मूर्तियों पर प्रतिबंध ने छीना मूर्तिकारों का रोजगार </title>
                                    <description><![CDATA[ पीओपी की मूर्तियों पर प्रतिबंध का बड़ा नुकसान मूर्तिकारों को हो रहा है। सरकार की ओर से पीओपी की मूर्तियों की बनाने और बिक्री पर रोक लगा दी साथ ही मूर्तियों की ऊंचाई को लेकर कलाकरों को नोटिस दिए जा रहे है। ऐसे में कुंभकारों का रोजगार छीनता जा रहा है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/ban-on-pop-idols-snatched-employment-of-sculptors/article-18325"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-08/pop-murtiyo-par-pratibandh-nei-chhina-murtikaro-ka-rojgar-..kota-news-8.8.2022.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा । पिछले दो सालों से कोरोना संक्रमण ने मूर्तिकारों का व्यवसाय ठप पड़ा है। दो साल से बड़े आयोजन नहीं होने से पहले ही संकट गुजर रहे मूर्तिकारों पर नये नियमों का बोझ भारी पड़ रहा है। पीओपी की मूर्तियों पर प्रतिबंध का बड़ा नुकसान मूर्तिकारों को हो रहा है। सरकार की ओर से पीओपी की मूर्तियों की बनाने और बिक्री पर रोक लगा दी साथ ही मूर्तियों की ऊंचाई को लेकर कलाकरों को नोटिस दिए जा रहे है। ऐसे में कुंभकारों का रोजगार छीनता जा रहा है। मूर्तिकारों कहना कि कोरोना संक्रमण काल में पिछले दो साल से सारे धार्मिक समारोह पर पाबंदी के चलते मूर्तिकार बेरोजगार हो गए है। जन्माष्टमी, गणेश उत्सव, नवरात्रि, दीपावली होने वाले सार्वजनिक कार्यक्रमों पर कोरोना के चलते प्रतिबंध सीधा असर मूर्तियां बनाने वाले कलाकारों पर पड़ा है। कृष्ण जन्मोत्सव व गणेशोत्सव में सजने वाले सावर्जनिक पांडाल पिछले दो साल से बंद होने से इन कलाकारों की कमर ही टूट चुकी है। अब सब ठीक होने लगा तो मूर्तियों की ऊंचाई तो कभी पीओपी की मूर्तियों के प्रतिबंध के नाम पर मूर्तिकारों को नोटिस दिए जा रहे है।</p>
<p>कोरोना पहले ही कई लोगों नेअपना धंधा बदल लिया है कुछ अपनी पुस्तैनी विरासत को बचाने में लगे हुए है। 25 साल पहले 50 से अधिक मूर्तिकार जोधपुर से कोटा आकर बसे तब से बना रहे मूर्तियां प्लास्टर आॅफ पेरिस की मूर्तियों पर बेन लगने के बाद कोटा के मूर्तिकारों ने पानी में घुलनशील वाली मिट्टी से मूर्तियां बनाना शुरू कर दिया। पिछले दो साल से कोरोना के चलते पहले ही मूर्तिकार आर्थिक तंगी से गुजर रहे है। उस पर अब मूर्तियों की ऊंचाई को लेकर नोटिस दिए जा रहे है। हालांकि प्रशासन ने अब 12 फीट की प्रतिमाओं छूट देकर राहत दी है। पिछले दो साल साल दशहरा मेला नहीं लगा, जिससे 50 से अधिक परिवारों का रोजगार छीन गया। दशहरा मेले में प्लास्टर आॅफ पेरिस की विभिन्न सजावटी मूर्तियां, गमले, सजावटी वॉल पेटिंग बिक जाती थी, लेकिन कोरोना से शहर के विभिन्न धार्मिक उत्सवों पर भरने वाले मेलों पर प्रतिबंध लगा दिया। जिससे इन कलाकारों को गली मोहल्लों में मूर्तिया बेचना पड़ रहा है। 25 साल पहले जोधपुर से 50 से अधिक परिवार यहां आकर बस गए पहले पत्थर की मूर्तियां बनाया करते थे। लेकिन उनकी मांग कम हुई तो अपने हुनर को जिंदा रखने के लिए मिट्टी व प्लास्टर आॅफ पेरिस की मूर्तिया बनाना शुरू किया।</p>
<p>अब प्लास्टर ऑफ पेरिस के साथ पानी में घुलनशील मिट्टी मिलाकर जोधपुर की बारीक कलाकारी को मिट्टी की मूर्तियों में उकेर रहे है। - सूरजमल, मूर्तिकार सरकार आर्थिक पैकेज दे तो बच सकेगा हुनर मूर्तिकार कालूमल ने बताया कि कोरोना संक्रमण से शहर में मूर्तिकार बेरोजगार हो गए है। सरकार नियमों से प्लास्टर ऑफ पेरिस का माल जब्त होने का खतरा बना रहता है। मिट्टी मूर्तियों बनाने में लागत ज्यादा आती है ऐसे में लोग महंगी मूर्तियों खरीदते नहीं है। जहां प्लास्टर ऑफ पेरिस की मूर्तियां 51 रुपए से 250 रुपए में बिकती है। वही मिट्Þटी की छोटी प्रतिमाए भी 125 रुपए से शुरू होती है। एक व दो फीट की मूर्ति 300 से 1000 रुपए बिकती है। सरकार हम कलाकारों को आर्थिक पैकेज दे और हमारे माल को बेचने के लिए एक प्लेटफार्म तैयार करें तभी मूर्तिकारों का हुनर बच पाएगा। कोरोना काल में कई परिवारों ने अपना धंधा बदल लिया है। पहले शहर में तीज त्यौहारों पर आयोजित मेलों और सार्वजनिक उत्सवों में कलाकारों की कलाकृतियां बिक जाती जिससे घर चल जाता था। नये नये नियमों से मूर्तिकारों धंधा छीनता जा रहा है। मूर्तियों की बिक्री के लिए तैयार हो हाट बाजार शहर में मूर्तिकारों के माल बेचने के लिए एक हाट बाजार तैयार हो जाए तो सभी कलाकारों का माल एक जगह बिकेगा । दूसरी ओर बाहर से आने वाली पीयूपी की मूर्तियों की बिक्री पर रोक लग सकेंगी। सड़को पर बिकने पीयूपी मूर्तियों की बिक्री पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी। साथ ही स्थाई मूर्तिकारों को पूरे साल रोजगार मिलेगा। जिससे ग्राहकों को इधर उधर नहीं भटकना पड़ेगा। साथ रोड किनारे माल बेचने की समस्या से निजात मिल जाएंगी। अभी मूर्तियों के लिए सीएडी चौराहा, दशहरा मैदान रोड, घोडेवाले बाबा चौक, कुन्हाड़ी, तालाब रोड पर कलाकारों को फूटपाथ पर दुकाने लगानी पड़ती है। हाट बाजार तैयार हो जाए तो माल बेचने में आसानी होगी। साथ ही प्लाटर ऑफ पेरिस की बाहर से आकर बिकने वाली मूर्तियों धर पकड़ में भी निगम को आसानी हो जाएगी। -महेंद्र लुहार, मूर्तिकार प्लास्टर ऑफ पेरिस की मूर्तियों केविसर्जन के लिए बने स्थाई कुंड सरकार ने प्लास्टर आॅफ पेरिस की मूर्तियों की बिक्री पर रोक लगाने के बाद आजकल मूर्तिकार पानी में घुलने और कच्चे रंगों का इस्तेमाल कर रहे हैं। जिससे विजर्सन के बाद मूर्ति पानी में गल जाए और उसके कलर से जलीय जीवों को नुकसान भी नहीं हो। बड़ी मूर्तियों में नारियल की जूट का प्रयोग किया जाता है जिससे मूर्तियां पानी में विसर्जन के बाद भी घुलती नहीं है। पिछले दो साल से कलाकारों ऐसी मूर्तियां बनाना बंद कर दिया है। अब पानी में घुलनशील मिट्टी की मूर्तिया तैयार कर रहे है। हालांकि प्लास्टर आॅफ पेरिस स्थानीय कलाकार ना भी बनाए तो बाहर से त्यौहारों पर ये बिकने आती ही है। सस्ती होने से लोगों में अभी इसका क्रेज कम नहीं हुआ ना ही मांग घटी है। नगर निगम की ओर गणेशोत्सव में प्लास्टर ऑफ पेरिस की मूर्तियों के लिए भीतरिया कुंड, किशोर सागर तालाब में स्थाई पक्का गणेश कुंड तैयार करें जहां प्लास्टर ऑफ पेरिस की मूर्तियों का विसर्जन जा सके। जिससे मूर्तिकारों को रोजगार बना रहेगा। दूसरा शहर के नदी तालाब प्रदूषण होने से बच जाएंगे। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 08 Aug 2022 17:54:08 +0530</pubDate>
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