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                <title>Anant Chaturdashi - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>Anant Chaturdashi RSS Feed</description>
                
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                <title>इस चाल पर चलेगी तलवार रफ्ता...रफ्ता, अखाड़े में बालिकाएं सीख रही विभिन्न करतब</title>
                                    <description><![CDATA[व्यायामशाला द्वारा शहर में निकलने वाली अनंत चतुर्दशी की शोभायात्रा में महिला अखाड़े द्वारा एक से बढ़कर एक हैरतअंग्रेज प्रदर्शन किया जाता हैं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/the-sword-will-move-in-this-way/article-124413"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-08/1ne1ws-(6)28.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। अनंत चतुर्दशी की तैयारियों के चलते अभी से ही शहर की व्यायामशाला वाले तैयारियों  में जुट गए हैं। जिससे व्यायामशाला में चहल - पहल के साथ ही विभिन्न करतबों का नियमित अभ्यास करवाया जा रहा हैं। श्री मंगलेश्वरी व्यायामशाला छावनी स्थित अखाड़े के उस्ताद नाथू लाल पहलवान ने बताया कि व्यायामशाला 45 साल पुरानी हैं। व्यायामशाला द्वारा शहर में निकलने वाली अनंत चतुर्दशी की शोभायात्रा में महिला अखाड़े द्वारा एक से बढ़कर एक हैरतअंग्रेज प्रदर्शन किया जाता हैं। वहीं अभी अखाडें में करीब 40 बालिकाएं व महिलाएं सीखने के लिए आती है और करीब 50 से 70 महिलाएं अखाडेÞ से जुड़ी हुई हैं। अखाड़ा सीखने वाले भानू प्रताप सुमन ने बताया कि पिछले कई दिनों से बालिकाओं व महिलाओं को अखाडेÞ की प्रैक्टिस करवाई जाती हैं जिससे बाद इनके द्वारा प्रदर्शन किया जाता हैं। </p>
<p><strong>अखाड़े में बालिकाएं सीख रही विभिन्न करतब</strong><br />अखाड़ा प्रमुख ज्योति गोयल ने बताया कि अखाड़े की बालिका इशिता राठौर द्वारा चतुर्दर्शी के जुलूस में लठी चलाना, तलवार घूमना, शमशीर सहित अन्य हैरतअंग्रेज प्रदर्शन किया जाता हैं तो वहां पर खडेÞ दर्शक भी दांतों तले अंगुली दबा लेते हैं। सह अखाड़ा प्रमुख खुशी राठौर ने बताया कि कनक शाक्यवाल करीब अखाड़े में काफी समय से विभिन्न अवसरों पर प्रदर्शन करती आ रही हैं। जिसमें ढाल तलवार, भाला, सिंगल व डबल बनेठी सहित अन्य प्रदर्शन किया जाता हैं तो दर्शक भी रोमांचित हो उठते हैं। अखाड़े में अभी नंदनी, रानू, इशिका नागर, चित्रांशी, भूमि, वर्षा, दिव्या, राधिका सहित अन्य बालिकाएं अभी अखाड़े में बनेठी चलना, शमशीर, डबल व सिंगल डंडे घूमना, ढाल तलवार, भाला सहित अन्य करतबों के प्रदर्शन का अभ्यास कर रही हैं।</p>
<p><strong>अभी तक इन स्थानों पर दी प्रस्तुति</strong><br />अखाड़े की बालिकाओं द्वारा  अकलेरा, रामगंजमंडी, भवानीमंडी, सवाईमाधोपुर, केशवरायपाटन, मांगरोल, बंंूदी सहित अन्य विभिन्न जगहों पर अखाड़े की प्रस्तुति दी जा चुकी हैं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 22 Aug 2025 17:40:57 +0530</pubDate>
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                <title>गणेशोत्सव पर बाजार में बरसा 100 करोड़</title>
                                    <description><![CDATA[कोटा में दस दिवसीय गणेशोत्सव में वाहन, इलेक्ट्रानिक सामान और भूमि, भवन और फ्लेट की भी जमकर बिक्री हुई । ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/100-crores-were-showered-in-the-market-on-ganeshotsav/article-90957"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-09/630400-size9.png" alt=""></a><br /><p>कोटा ।  रिद्धि सिद्धी के दाता गणेशजी इस बार दस दिवसीय गणेशोत्सव में शहर में सुख समृद्धि में वृद्धि करके गए है। घरों से लेकर बाजार में बप्पा की विशेष कृपा बरसी। व्यापार महासंघ के महासचिव अशोक माहेश्वरी ने बताया कि दस दिवसीय गणेशोत्सव में इस बार लगभग 100 करोड़ रुपए के कारोबार होने अनुमान है। इस बार गणेश चतुर्थी से अनंत चर्तुदशी तक दस दिन में गणपति बप्पा की खूब कृपा बरसी।  व्यापारियों की  आस से अधिक व्यापार हुआ। इस बार मूर्ति, सजावट, टेंट, डीजे, विद्युत सज्जा, प्रसाद, केटरिंग, हलवाई, किराना बाजार में सैकड़ो लोगों को रोजगार मिला और अच्छा धंधा हुआ। वहीं गणेश चतुर्थी पर वाहनों की जमकरबिक्री हुई थी। कोटा में दस दिवसीय गणेशोत्सव में वाहन, इलेक्ट्रानिक सामान और भूमि, भवन और फ्लेट की भी जमकर बिक्री हुई । </p>
<p><strong>किराणा बाजार पर प्रथमेश की रही कृपा</strong><br />किराना व्यापार संघ के अध्यक्ष पवन दुआ ने बताया कि इस बार गणेशोत्सव की अच्छी धूम रही। कई बड़े पांडालों में प्रतिदिन भंडारों का आयोजन हुए। इस बार किराना बाजार में अच्छी रौनक रही। 30 से 35 हजार करोड़ के व्यापार की आस है। इस बार शहर में करीब 700 से अधिक स्थानों पर छोटी बड़ी मुर्तियां स्थापित हुई। वहीं 135 बड़ी झांकियां थी सभी में भंडारों का आयोजन और प्रसाद वितरण के कार्यक्रम हुए। इसके अलावा घरों में करीब पूजा अर्चना प्रसाद के रूप में करीब 20 करोड़ रुपए की सामग्री अलग से बिकी। </p>
<p><strong>दुपहिया वाहनों की हुई एडवांस बुकिंग</strong><br />दुपहिया वाहन शो रूम के मैनेजर लोकेश कुमार ने बताया कि गणेश चर्तुथी पर  10 करोड़ के आसपास कारोबार हुआ। दस दिवसीय गणेशोत्सव में वाहनों की अच्छी बिक्री हुई। इस बार करीब सभी मिलाकर 100 करोड़ Þ के आसपास कारोबार होने की आस है जिसमें ओटो मोबाइल, इलेक्ट्रानिक आइटम, दुपहिया वाहन, थ्रीव्हीलर  और अन्य आइटम शामिल है। प्रोपर्टी डीलर महेश जैन ने बताया कि गणेश चतुर्थी पर फ्लेट, प्लांट की रजिस्ट्री कराने के लिए बुकिंग हुई है। 8 से 10 करोड़ की बुकिंग हुई है। </p>
<p><strong>मूर्ति बाजार में दो करोड़ का बरसा धन</strong><br />मूर्ति कलाकार सुरेश ने बताया कि गणेश चतुर्थी तक करीब छोटी बड़ी 15 हजार से अधिक मुर्तियां बिकी है। 51 रुपए से लेकर 15 हजार रुपए तक मूर्तियां बाजार में बिकी है। मूर्तियों का छोटी मूर्तियों का करीब 2 करोड़ रुपए का कारोबार हुआ है। </p>
<p><strong>प्रसाद, भंडारे व मोदक की हुई भारी बुकिंग</strong><br />राजू हलवाई ने बताया कि दस दिवसीय गणेशोत्सव को लेकर प्रसाद में बेसन व मोतीचूर के लड्डू के अलावा भंडारों के आयोजन हुए जिसमें करीब शहर के 150 से अधिक हलवाईयों रोजगार मिला वहीं करीब 15 से 20 लाख रुपए का कारोबार हुआ। </p>
<p><strong>टेंट डेकोरेशन पर बप्पा की बरसी मेहर</strong><br />टेंट एसोसिएशन के सचिव गुरमित सिंह शनि ने बताया कि इस बार दस दिसवसीय गणेशोत्सव में बप्पा की विशेष कृपा रही। छोटे से बड़े विशाल पांडाल और डेकोरेशन में अच्छा व्यापार हुआ है। करीब शहर में 365 व्यापारी है। इस बार करोड़ो का कारोबार हुआ है। 8 से 10 करोड़ के कारोबार हुआ है। जिसमें डीजे साउड, टेंट शामिल है। इसके अलावा भजन संध्या आक्रेस्टा में करीब 50 से 60 लाख रुपए का करोबार हुआ। </p>
<p><strong>फूल महंगे होने से किसानों को मिला लाभ</strong><br />फ्लावर डेकोरेशन संचालक सांवरिया राठौर ने बताया कि इस बार फूल महंगे होने से व्यापारियों को कम किसानों अच्छा मुनाफा हुआ है। बाजार में फूल 100 से 125 रुपए किलों तक बिके। प्रतिदिन एक व्यापारी करीब 25 से 30 हजार रुपए के फूलमाला बची करीब 2.50 करोड़ रुपए का करोबार हुआ। है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 19 Sep 2024 16:13:28 +0530</pubDate>
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                <title>असर खबर का - निगम ने विसर्जन के दौरान ही बनाया भीतरिया कुंड में वैकल्पिक पौंड </title>
                                    <description><![CDATA[निगम की ओर से वैकल्पिक पौंड बनाने के बाद पीओपी की अधिकतर मूर्तियों का विसर्जन उसी पौंड में करवाया गया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/effect-of-the-news---the-corporation-made-an-alternative-pond-in-bhitriya-kund-during-the-immersion-itself/article-90926"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-09/630400-size-(21).png" alt=""></a><br /><p>कोटा । दैनिक नवज्योति में खबर प्रकाशन के बाद आनन फानन में नगर निगम कोटा दक्षिण की ओर से अनंत चतुर्दशी के दिन मंगलवार को गणेश प्रतिमाओं के विसर्जन के दौरान ही भीतरिया कुंड में नदी के घाट पर बड़ा तिरपाल लगाकर वैकल्पिक पौंड बनाया ।  हालांकि भीतरिया कुंड में सुबह जल्दी ही मूर्तियों का विसर्जन शुरु हो गया था। लेकिन निगम की ओर से सुबह 11 बजे बाद यह व्यवस्था की गई है। उस समय तक काफी संख्या में मिट्टी से अधिक प्लास्टर आॅफ पेरिस की मूर्तियां नदी में विसर्जित की जा चुकी थी। निगम की ओर से वैकल्पिक पौंड बनाने के बाद पीओपी की अधिकतर मूर्तियों का विसर्जन उसी पौंड में करवाया गया। जिससे उन्हें नदी में जाने से रोका गया। </p>
<p><strong>नवज्योति ने प्रकाशित किया था मामला</strong><br />अनंत चतुर्दशी पर भीतरिया कुंड में नगर निगम की ओर से इस बार वैकल्पिक पौंड नहीं बनाने का मामला दैनिक नवज्योति ने प्रकाशित किया था। दैनिक नवज्योति में 17 सितम्बर के अंक में पेज 5 पर‘ भीतरिया कुंड में नहीं बनाया वैकल्पिक पौंड’ शीर्षक से समाचार प्रकाशित किया था। जिसमें बताया था कि पिछले साल यहां हम लोग संस्था की ओर से वैकल्पिक पौंड बनाया गया था।  लेकिन इस बार उन्होंने चार महीने पहले ही नगर निगम आयुक्त को और करीब एक महीने पहले जिला कलक्टर को यह व्यवस्था करने संबंधी ज्ञापन दिया था। उसके बाद भी व्यवस्था नहीं की गई थी।  समाचार प्रकाशित होने के बाद इस मामले को जिला कलक्टर ने गम्भीरता से लिया। उन्होंने एसडीएम गजेन्द्र सिंह को व्यवस्था करवाने के निर्देश दिए। सिंह ने नगर निगम कोटा दक्षिण के एक्सईएन निर्माण ए.क्यू कुरैशी से वैकल्पिक पौंड बनाने व घाट पर टूटी रैलिंग को सही करवाने की कार्यवाही करने को कहा। निगम के एक्सईएन कुरैशी ने बताया कि अधिकारियों का आदेश मिलते ही निगम के स्तर पर बड़े तिरपाल की व्यवस्था की गई। हालांकि सुबह 7 बजे आदेश मिला था। व्यवस्था करने में समय लगने से सुबह 11 बजे करीब भीतरिया कुंड के थाट पर बड़ा तिरपाल लगाकर मूर्ति विसर्जन के लिए वैकल्पिक कुंड बनाया  गया था। जिससे उसके बाद गणेश प्रतिमाओं का विसर्जन उस वैकल्पिक पौंड में ही किया जा सका। कुरैशी ने बताया कि घाट की टूटी लोहे की रैलिंग को नदी का पानी कम होने के बाद सही कराया जाएगा। उन्होंने इस संबंध में कलक्टर को भी अवगत करवा दिया है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 19 Sep 2024 15:25:43 +0530</pubDate>
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                <title>खुद से की महिलाओं और लड़कियों के अखाड़े में आने की शुरूआत</title>
                                    <description><![CDATA[हर अनंत चतुर्दशी और डोल एकादशी से पहले व्यायामशाला में मानो जश्न सा माहौल बन जाता है।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/she-herself-started-the-entry-of-women-and-girls-in-the-arena/article-90461"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-09/2rtrer-(1)9.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। अपने करतब में ऐसी धार की देखने वालों को सोचने पर मजबूर कर दे, तलवार को इस तरह से चलाना जैसे चाकू को घुमा रही हो। वो हर उस कलाबाजी को यूं दिखाती हो जैसे उसके बाएं हाथ का खेल हो। ऐसी महिलाएं और लड़कियां तैयार होती हैं छावनी स्थित हरदौल व्यायामशाला में जहां इन महिलाओं और लड़कियों एक से बढ़कर एक करतब दिखाने की हौड़ लगी रहती है। व्यायामशाला में जब ये लड़कियां शस्त्र लेकर उतरती हैं तो पुरूष और लड़के सिर्फ देखने के लिए ही खड़े रहते हैं। हर अनंत चतुर्दशी और डोल एकादशी से पहले व्यायामशाला में मानो जश्न सा माहौल बन जाता है हर शख्स इन लड़कियों के करतब देखने के लिए उमड़ पड़ता है।</p>
<p><strong>खुद से की शुरूआत फिर लड़कियों को जोड़ा</strong><br />हरदौल व्यायामशाला की खिलाड़ी और कलाबाज संगीता कश्यप ने ही इस अखाड़े में महिलाओं और लडकियों को आने की शुरूआत की थी। संगीता बताती हैं कि आज से आठ साल पहले इस व्यायामशाला में केवल लड़के और पुरूष ही अखाड़ा खेलते थे। जिसे देखकर हम भी खेलने को लेकर प्रेरित होने लगे, जिसके बाद सबसे पहले मैं मेरी दोस्तों के साथ इस अखाड़े में पहुंच गई। हालांकि शुरूआत में थोड़ा मुश्किल लगा लेकिन धीरे धीरे सबकुछ आसान लगने लगा। मौहल्ले और परिवार के लोग भी कई बार कहते थे कैसे करोगी। लेकिन मन में जुनून रखा और आगे बढ़ते रहे। संगीता बताती हैं कि अखाड़े में सबसे ज्यादा मजा तलवार बाजी में आता है क्योंकि उसे चलाने में इंसान को बहुत सावधानी रखनी होती है। उसी सावाधानी को चैलेंज बनाकर तलवारबाजी करने पर सब तालियां बजाने पर मजबूर हो जाते हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने के चलते कई समस्या आती है और सब कुछ अपने दम पर ही करना पड़ता है। संगीता बताती है कि वो तलवारबाजी में भविष्य बनाना चाहती हैं, और देश के लिए पदक जीतना चाहती हैं।</p>
<p><strong>बच्चों को देखकर अखाड़ा सीखा, अब संचालक</strong><br />हरदौल व्यायामशाला की संचालक मीना प्रजापति बताती हैं कि उन्होंने बच्चों को देखकर अखाड़ा खेलना सीखा इससे पहले वो केवल गृहिणी थी। करीब 8 साल से मीना प्रजापति अखाड़े में आती हैं। जहां लड़कियों को अखाड़ा सिखाने के साथ उन्हें खेलों में जाने के लिए भी प्रेरित करती हैं। शुरूआत में अखाड़े में आते समय करतब करने में कई समस्याओं का सामना करना पड़ा कई बार चोटें लग जाती थी। लेकिन लड़कियों को सिखाने और उनके बीच जोश लाने के लिए हमेशा करतब करती रही। मीना बताती हैं कि अखाड़े के लिए उन्हें परिवार और समाज की ओर से हमेशा सहयोग रहा। व्यायामशाला में आने वाली हर लड़की आर्थिक रूप से कमजोर परिवार से आती हैं। ये सभी लड़कियां अपने बलबूते पर ही सभी प्रकार के खर्चे उठाती हैं। वहीं व्यायामशाला से कई लड़कियां राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं में जीत दर्ज करा चुकी हैं। </p>
<p><strong>आत्मनिर्भर और खुदकी सुरक्षा के लिए जरूरी अखाड़ा</strong><br />अखाड़े के संचालक लोकेश बताते हैं कि आज से करीब आठ साल पहले संगीता और अन्य लड़कियां अखाड़ा सीखने को लेकर व्यायामशाला आई थी। जिसके बाद से ही यहां महिलाओं के लिए करतब सिखाना शुरू किया। इन्हें देखते हुए और भी लड़कियां आने लगी और आज करीब 100 लड़कियां व्यायामशाला में अपने करतब दिखाती हैं। कई बालिकाएं अखाड़े में ऐसी भी हैं जो दिन में अपनी जॉब करती हैं और शाम को यहां आकर अभ्यास करती हैं। क्योंकि उनकी आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने से घर में भी सहायता देनी पड़ती है। व्यायामशाला से हर साल मलखंभ के लिए प्रतिभागी जाते हैं और हर बार जीतकर आते हैं। अखाड़ा और व्यायामशाला में अभ्यास लड़कियों को आत्मनिर्भर बनाने के साथ ही खुदकी सुरक्षा करने के काबिल बनाता है ताकि वो मुसीबत के समय खुदकी रक्षा खुद कर सके।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 14 Sep 2024 16:11:49 +0530</pubDate>
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                <title>हमारा हौसला पूंछो, तो फिर मंझधार से पूंछो</title>
                                    <description><![CDATA[कोटा में भी ऐसे व्यक्तित्व वाली महिलाओं में से एक मंग्लेश्वर महादेव व्यायामशाला की गायत्री सुमन जो अपने दम पर पूरे अखाड़े और व्यायामशाला को चलाती ही नहीं बल्कि हर साल बड़े आयोजन भी करती हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/if-you-ask-about-my-courage--then-ask-the-middle-of-the-sea/article-90329"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-09/2rtrer6.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। भंवर में कैसे बच पाया, किसी पतवार से पूछो, हमारा हौसला पूंछो, तो फिर मंझधार से पूंछो। अपने दम पर किसी संस्था को खड़ा करना और उसका सफलता पूर्वक संचालन करना हर किसी के बस की बात नहीं होती। लेकिन कुछ शख्सियतें ऐसी होती हैं जो हर नामुमकिन काम को मुमकिन बना ही लेती हैं। कोटा में भी ऐसे व्यक्तित्व वाली महिलाओं में से एक मंग्लेश्वर महादेव व्यायामशाला की गायत्री सुमन जो अपने दम पर पूरे अखाड़े और व्यायामशाला को चलाती ही नहीं बल्कि हर साल बड़े आयोजन भी करती हैं। गायत्री सुमन ने पहले अखाड़ा खेलना सीखा फिर उसे बाकी लड़कियों को सिखाया और आज अपने दम पर पूरी व्यायामशाला को एक संस्था के रूप में चलाती हैं।</p>
<p><strong>पांच साल लगे करतब सीखने में</strong><br />सुभाष नगर स्थित मंग्लेश्वर व्यायामशाला की उस्ताद गायत्री सुमन ने बचपन से ही अखाड़ा खेलने और करतब दिखाने को लेकर मन बना लिया था। जिसकी शुरूआत उन्होंने अपने घर से ही कर दी थी। गायत्री ने सबसे पहले अखाड़ा खेलना छावनी स्थित मंग्लेश्वर व्यायामशाला में गुरू नाथूलाल पहलवान की देखरेख में शुरू किया। गायत्री बताती हैं कि शुरूआत में खुद को भी थोड़ी घबराहट हुई लेकिन धीरे धीरे सीखते चली गई तो आसान लगने लगा। वहीं आस पास भी लोग कहते थे कि अखाड़ा कैसे करोगी, कैसे लठ और तलवार को चला पाओगी। लेकिन घर वालों के प्रोत्साहन के चलते लोगों को नजरअंदाज कर अखाड़ा खेलना जारी रखा और आज 20 साल हो चुके हैं। </p>
<p><strong>अपने दम पर शुरू की व्यायामशाला</strong><br />गायत्री सुमन ने अखाड़ा सीखने के बाद अखाड़ा खेलना जारी रखने साथ ही साल 2020 में सुभाष नगर में भी मंगलेश्वर महादेव व्यायाम शाला के नाम से खुद की व्यायाम शाला की शुरू कर दी। गायत्री बताती हैं कि उन्हें अखाड़े से ज्यादा बालिकाओं और महिलाओं को मुश्किल समय में अपनी रक्षा करने के लिए तैयार करने का लक्ष्य रखा है। गायत्री का कहना है कि जब लड़कियां और महिलाएं हाथों में लठ, बल्लम और तलवार जैसे शस्त्र लेकर निकलती हैं तो उन्हें अच्छा लगता है। जिसके चलते ही वो अपने खर्चे पर आज करीब 100 बालिकाओं और महिलाओं को अपनी व्यायामशाला में अखाड़ा सिखाती हैं। इसके अलावा अपने खर्चे पर ही हर साल अनंत चतुर्दशी पर जुलूस का आयोजन करती हैं।</p>
<p><strong>दिन में  दुकान और शाम को अखाड़ा</strong><br />गायत्री सुमन का कहना है कि वो एक र्स्वणकार का कार्य भी करती हैं, जिसके लिए वो दिन का समय रखती हैं। गायत्री हर रोज अपने कार्य से आने के कुछ समय बाद ही व्यायामशाला आ जाती है। जहां अपनी व्यायामशाला में आने वाली महिलाओं और बालिकाओं को करतब सिखाना शुरू कर देती हैं। गायत्री हर दिन शाम को 7 बजे से 9.30 बजे अखाड़े में समय व्यतित करती हैं।</p>
<p><strong>देश के लिए खेलने की चाहत</strong><br />अखाड़े में करतब सीखने आने वाली बालिका सपना ने कहा, वो पिछले दो साल से तलवारबाजी और कुश्ती सीखने आ रही हैं और आगे भविष्य में भारत के लिए कुश्ती खेलना चाहती हैं। अच्छा लगता हैं जब लोग उनके करतबों पर दंग रह जाते हैं और तारीफ करते हैं। ज्योति सुमन ने कहा, वो हर दिन शाम को सारे कामों से फ्री होकर अखाड़े में आ जाती हैं ताकि प्रैक्टिस के बाद कुछ नया सीख सकें। ज्योति ने बताया कि वो पहले अन्य अखाड़े में प्रैक्टिस करती थी लेकिन पिछले साल से यहां अखाड़ा शुरू होने के बाद यहीं करती हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 12 Sep 2024 16:37:29 +0530</pubDate>
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                <title>शादी के बाद सास ने चूल्हा चौका नहीं हाथ में तलवार और लठ पकड़ाया था</title>
                                    <description><![CDATA[अनंत चतुदर्शी के अवसर पर निकलने वाले जुलूस में महिला अखाड़े भी अपने करतबों से लोगों को दांतों तले उंगलियां चबाने पर मजबूर कर देते हैं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/after-marriage--her-mother-in-law-made-her-hold-a-sword-and-a-stick-in-her-hand-instead-of-cooking-and-household-chores/article-90141"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-09/shadi-k-bad-sas-ne-cholha-chauk-nhi-hath-mein-talawar-or-lath-pakadaya-tha...kota-news-10.09.2024.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा।  वह चमचमाती तलवार को ऐसे चलाती हैं जैसे बच्चों का खिलोना घुमा रही हों। कभी दोनों हाथ में बल्लम में आग लगाकर हजारों की भीड़ में जब वे आत्म विश्वास के साथ कूदती हैं तो लगता है जैसे उसमें भवानी समाहित हो गई हो। जो काम पुरूष नहीं कर पाते वह ऐसे हैरत अंगेज काम कर बैठती हैं। जब लोग उनके करतब देखते हैं तो हर कोई कह उठता है वाह उस्ताद। हम बात कर रहे हैं महिला अखाड़ों में से एक अखाड़े की उस्ताद संतोष सुमन की। संतोष को उनकी सास ने चूल्हा चौका संभलवाने के साथ आत्मरक्षा करने को तलवार और बल्लम संभलाए थे।  अनंत चतुदर्शी के अवसर पर निकलने वाले जुलूस में महिला अखाड़े भी अपने करतबों से लोगों को दांतों तले उंगलियां चबाने पर मजबूर कर देते हैं। कोटा में महिला अखाडों की शुरूआत आज से करीब 25 साल पहले पहलवान सीता देवी ने दुर्गाशक्ति व्यायामशाला के रूप में केशवपुरा में की थी। जिसे आज उनके पति जगदीश सुमन और बहु संतोष सुमन् संभाल रही हैं। वहीं व्यायामशाला की महिला उस्ताद के रूप में संतोष सुमन करीब 140 लडकियों और महिलाओं को अखाड़े के दांव पेंच सीखा रही हैं। जो कई बार अखाड़े के लिए परिवार तक को भूल जाती हैं। </p>
<p><strong>शादी के बाद ही शुरू हो गया अखाड़ा</strong><br />दुर्गाशक्ति व्यायामशाला की उस्ताद संतोष सुमन के जीवन में अखाड़ा शादी के बाद से ही शुरू हो गया था। संतोष बताती हैं कि उनकी शादी पहलवान सीता देवी के बेटे से साल 2013 में हुई थी। शादी के कुछ दिनों बाद ही उनकी सास सीता देवी ने उन्हें लठ और तलवार पकड़ाकर अखाड़ा खेलने के लिए कह दिया। संतोष को शुरूआत में तो अजीब लगा लेकिन सास की मदद और प्रोत्साहन के चलते धीरे धीरे अखाड़े में माहिर होती गई। संतोष को अखाड़ों में करतब दिखाते हुए 11 साल से ज्यादा का समय हो चुका है। वहीं तीन साल पहले सीता देवी के निधन के बाद से संतोष सुमन ही अखाड़े की महिला उस्ताद हैं और आज 140 से ज्यादा लडकियों और महिलाओं को अखाडेÞ के गुर सीखा रही हैं। </p>
<p><strong>संस्कृत में एम.ए. बी एड नौकरी की जगह अखाड़ा चुना</strong><br />अखाड़े की उस्ताद संतोष सुमन ने संस्कृत विषय में एम ए के साथ बीएड किया हुआ है। जिसके बाद उन्हें कई विद्यालयों से शिक्षक पद के लिए आॅफर भी आए लेकिन अखाड़े के प्रति लगाव के चलते संतोष पूरा ध्यान लडकियों और महिलाओं की ट्रेनिंग पर लगाती हैं। कई बार तो संतोष अखाडेÞ में ट्रेनिंग देने के लिए अपने बच्चों तक को किसी ओर के पास छोड़ आती हैं। साथ ही कई मौकों पर बालिकाओं और महिलाओं को घरों से भी खुद ही बुलाकर लाती हैं। इतना ही नहीं अखाड़े में काम आने वाले शस्त्रों को लेने के लिए भी संतोष खुद ही जाती हैं।</p>
<p><strong>लड़कियों को आत्मरक्षा सिखाना लगता है अच्छा</strong><br />संतोष सुमन शुरूआत से ही महिलाओं को अखाड़े के गुर सिखाने और आत्मरक्षा के काबिल बनने की पक्षधर रहीं हैं। संतोष का कहना है कि महिलाओं और लड़कियों को आत्मरक्षा के गुर सिखाने में अच्छा लगता है कि हम भी समाज में अपना कुछ योगदान दे रहे हैं। संतोष आगे बताती हैं कि जब लड़कियां सड़कों पर अस्त्र शस्त्र लेकर निकलती है तो उन्हें खुशी होती है। संतोष का मानना है कि हर लड़की को आत्मरक्षा और अखाड़े के दांव पेंच सीखने चाहिए जिससे किसी भी मुसीबत के समय में वो खुद अपनी मदद कर सकें।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 10 Sep 2024 18:10:44 +0530</pubDate>
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                <title>हेरत अंगेज व परंपरागत करतब दिखाएंगे पट्टेबाज</title>
                                    <description><![CDATA[इस अखाड़े में पहले कुश्ती का दंगल का अखाड़ा हुआ करता था बाद में यहां व्यायामशाला और शस्त्रों के अखाड़े कि शुरूआत हुई और लड़के आने लगे। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/patter-will-show-traditional-and-traditional-stunts/article-58244"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-09/herat-angez-va-parampragat-kartab-dikhayenge-pattebaz...kota-news-28-09-2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। अखाड़े और व्यायामशालाएं जानी जाती हैं उनके द्वारा किए जाने वाले हैरतंगेज करतबों और कलाबाजियों से पर एक अखाड़ा ऐसा भी है जो सिर्फ प्रशासन द्वारा तय किए गए और उसके द्वारा तय किए गए दिशा निर्देशों के अनुसार प्रदर्शन करके भी प्रसिद्ध है। बोट के बालाजी मंदिर स्थित महाबली व्यायामशाला में कल होने वाले प्रदर्शन को शानदार बनाने के लिए लड़के जी जान से लगे हुए हैं और सुबह से ही करतबों और शस्त्रों को चलाने का अभ्यास कर रहे हैं ताकि प्रदर्शन के समय कोई चूक ना हो। व्यायामशाला के व्यवस्थापक अशोक गोयल ने बताया कि इस व्यायामशाला में 250 से भी ज्यादा लड़के हर दिन सभी तरहों के शस्त्रों को चलाने का अभ्यास करते हैं और साथ ही कुश्ती और बुशू कि भी प्रैक्टिस करते हैं। अनंत चतुर्दशी को लेकर लड़कों में इस बार काफी उत्साह है क्योंकि पिछले कुछ सालों से कोरोना के चलते लड़के अपने करतबों का प्रदर्शन खुलकर नहीं कर पा रहे थे। यहां 8 साल के बच्चे से लेकर 40 साल तक के पुरूष भालों तलवारों और चक्करों को अपनी उंगलियों पर घुमाने का हुनर रखते हैं। </p>
<p><strong>170 साल पुराना अखाड़ा</strong><br />अखाड़े के अध्यक्ष सुखदेव सिंह ने बताया कि इस अखाड़े में पहले कुश्ती का दंगल का अखाड़ा हुआ करता था बाद में यहां व्यायामशाला और शस्त्रों के अखाड़े कि शुरूआत हुई और लड़के आने लगे। आज भी इस व्यायामशाला में कलाबाजों और पहलवानों के लिए मिट्टी से बना अखाड़ा और कसरत करने के लिए जिम और योग के लिए प्रांगण बना हुआ है जहां हर दिन सुबह लड़के आकर पहले कसरत करते हैं फिर करतबों का अभ्यास करते हैं। ये अखाड़ा करीब 170 साल पुराना है और इस का नाम बालाजी के नाम महाबली पर रखा गया था। तब से ही इसे ही महाबली अखाड़ा कहा जाता है। </p>
<p><strong>समिति के सदस्य ही संचालित करते हैं</strong><br />अखाड़े के अध्यक्ष सुखदेव सिंह ने बताया कि व्ययामशाला का सारा खर्चा अखाड़ा समिति ही व्यय करती है जिसमें सिर्फ 25 वर्ष से उपर कि आयु वालों से सदस्यता शुल्क के रूप में योगदान लिया जाता है। वहीं अखाड़े के जिम, योगा स्थल और मिट्टी के अखाड़े का व्यय वहां पर अभ्यास करने वालों से सदस्यता शुल्क के रूप में लिया जाता है।</p>
<p><strong>सिर्फ पारम्परिक करतबों का ही प्रदर्शन</strong><br />इस बार अखाड़े के लड़कों द्वारा चाकू , बनेठी को एक उंगली से घुमाने का प्रदर्शन किया जाएगा वहीं इसके साथ ही अखाड़े समिति के द्वारा इस साल कोई भी जानलेवा या जिससे किसी को नुकसान पहुंचे ऐसा करतब या स्टंट नहीं दिखाने का निर्णय लिया गया है, अखाड़े के लड़के सिर्फ पारम्परिक रूप से किए जाने वाले करतबों का ही लोंगों के बीच प्रदर्शन करेंगें जिससे पारम्परिक शस्त्र विद्या के बारे में लोगों को बता सके। </p>
<p><strong>अखाड़े से शस्त्र प्रतियोगिता का पहला हाड़ौती केसरी</strong><br />अखाड़े के व्यवस्थापक अशोक गोयल ने बताया कि इस अखाड़े से तलवार बाज लोकेश शर्मा 2023 में कोटा में आयोजित शस्त्र प्रतियोगिता में हाड़ौती केसरी का खिताब जीतने कामयाब हुए जिसमें लोकेश ने 8 तरह के शस्त्रों का लगातार प्रदर्शन किया। वहीं इसके साथ ही लोकेश 2018 में उदयपुर में, 2019 में श्रीगंगानगर में और 2021 में बाड़मेर में आयोजित वुशु स्टेट चैंपियनशिप में सिल्वर मेडल के विजेता रहे। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 28 Sep 2023 17:40:01 +0530</pubDate>
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                <title>तलवार और अग्नि चक्कर के करतब से चौंकाने की कर रहे तैयारी</title>
                                    <description><![CDATA[इस अखाड़े में करीब 100 लड़के हर दिन प्रैक्टिस करने आते हैं और हर साल अनंत चर्तुदशी से 1 महीने पहले प्रैक्टिस करना शुरू कर देते हैं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/preparing-to-surprise-with-sword-and-fire-tricks/article-58157"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-09/talwar-or-agni-chakkr-k-kartab-s-chokane-ki-kr-rhe-tyyari...kota-news-24-09-2023.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। सारा शहर अनंत चर्तुदशी कि तैयारियों में जुट गया है जिसमें कहीं शोभायात्राओं के स्वागत के लिए गेट खड़े हो गए हैं तो कहीं पूरे बाजारों को सजा दिया गया है और इसी क्रम में अखाड़ों ने भी अपने प्रर्दशन को लेकर तैयारी तेज़ कर दी हैं। कोटा के सबसे पुराने अखाड़ों में से एक पट्टा बुर्ज अखाड़ा के लड़के भी दिन भर अपने प्रर्दशन और करतबों को निखारने में पूरे दम खम से जुटे हुए हैं। अखाड़े में कोई दोनों हाथों में तलवार लेकर करतब कि प्रैक्टिस कर रहा है तो कोई बनेठी को शरीर के चारों तरफ हैरतंगेज ढंग से चला रहा है। वहीं कोई अखाड़े में लौहे के बने पट्टे से रस्सी कूद खेल रहा है। </p>
<p><strong>अग्नि चक्कर का होगा प्रदर्शन </strong><br />अखाड़े के उस्ताद शम्भु सिंह ने बताया कि इस अखाड़े में करीब 100 लड़के हर दिन प्रैक्टिस करने आते हैं और हर साल अनंत चर्तुदशी से 1 महीने पहले प्रैक्टिस करना शुरू कर देते हैं। लड़के कीलों से बने पट्टे पर लेटकर सीने पर पत्थर फोड़ना, निम्बु को पेट पर रखकर तलवार से काटना या तलवारों को चलाते समय आपस में बदलना सभी तरह के करतबों कि यहां प्रैक्टिस कर रहे हैं। अनंत चर्तुदशी से 1 महीने पहले अखाड़े कि रौनक ज्यादा बढ़ जाती है क्योंकि इस महीने में नए लड़कों के साथ पुराने लड़के भी प्रैक्टिस करने के लिए आने लग जाते हैं। जो पुराने हैं वो नए लड़कों को करतब सिखाते हैं और उनका हौसला बढ़ाते हैं। सिंह ने आगे बताया कि इस बार प्रदर्शन में लड़के सिर्फ उनके अखाड़े के द्वारा किया जाने वाला करतब अग्नि चक्कर प्रदर्शन भी करेंगें जिसमें कलाबाज लड़का चक्कर पर लगे 16 गुट्टों को डीजल में भीगोकर उसे जलाकर उससे करतब दिखाएगा जो बहुत मुश्किल करतब है। वहीं कलाबाज धारिया, लौहे का पट्टा, दो हाथ कि बनेठी और लौहे के चक्कर के साथ करतब दिखाते हुए नजर आएंगे। </p>
<p><strong>150 साल पुराना अखाड़ा</strong><br />व्यवस्थापक प्रीतम सिंह ने बताया कि अखाड़ा अनंत चर्तुदशी पर अपनी झांकी और करतबों का प्रर्दशन साल 1984 से करते आ रहे हैं वहीं अखाड़ा लगभग 150 साल पुराना है। अखाड़े नाम के सवाल पर प्रीतम सिंह ने बताया कि अखाड़ा कोटा के पट्टा बुर्ज के पास है और इस अखाड़े कि शुरूआत करने वाले उस्ताद गणपत सिंह अंग्रेजों के जमाने में बुर्ज पर स्थित पतेह जंग तोप का संचालन किया करते थे। उन्होंने इस बुर्ज के पास मन्दिर और अखाड़े कि स्थापना बुर्ज के नाम पर ही की जो आज भी संचालित है। अखाड़े का संचालन अखाड़ा पट्टा बुर्ज समिति के द्वारा किया जाता है और सामिति के द्वारा ही पुरा खर्चा व्यय किया जाता है साल भर में सिर्फ एक बार ही समाज से सहयोग लिया जाता है। </p>
<p><strong>12 मिनट बहुत कम समय</strong><br />वहीं प्रशासन द्वारा तय किए गए पॉइन्टों और समय पर राय जानी जो उनके मुताबिक पॉइन्ट बनाना तो ठीक है लेकिन समय को सीमित करना जायज नहीं क्योंकि एक अखाड़े को लय बनाने और करतबों के लिए पर्याप्त जगह बनाने में ही 10 मिनट लग जाते हैं तो फिर कलाबाज करतब क्या दिखाएंगे। वहीं उनका कहना है कि कोरोना महामारी के बाद से ही निगम ने भी प्रोत्साहन राशि देना बंद कर दिया है जिससे अखाड़े चलाने में परेशानी भी आ रही है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 27 Sep 2023 12:01:44 +0530</pubDate>
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                <title>चाकू से लगाएंगें आंखों में काजल, पलकों से उठाएंगें सूई</title>
                                    <description><![CDATA[यह अखाड़ा कोटा का सबसे पुराना अखाड़ा है जिसकी स्थापना उस्ताद चौथमल द्वारा करीब सौ साल पहले की गई थी। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/will-apply-kajal-in-the-eyes-with-a-knife--will-lift-the-needle-from-the-eyelashes/article-58063"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-09/ch.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। बाइक को आग के गोले से निकालना, चाकू से आँख में काजल डालना या आखों कि पलकों से सूई को उठाना सब सुनकर कैसा लगा बहुत खतरनाक और जोखिम भरा है। आज हम बात कर रहे हैं छोटी समाध स्थित उस्ताद चौथमल अखाड़ा कि जो कोटा शहर सबसे पुराना अखाड़ा है और एक सदी से भी ज्यादा समय से यहां के कलाबाज और उस्ताद कोटा के निवासीयों को दांतों तले उंगली चबाने को मजबूर कर रहे हैं। अखाड़ा और उसमें प्रैक्टिस करने वाले सभी लडकें एक से बढ़कर एक हैरतंगेज करतबों कि जमकर प्रैक्टिस कर रहे हैं जो किसी का भी मुहं खुला का खुला रहने पर मजबूर कर दे। इस बार करने वाले हैं रोंगटे खड़े कर देने वाले करतब व्यायामशाला के संरक्षक उस्ताद बालकिशन बरथूनिया ने बताया कि व्यायामशाला के लड़के सामान्य करतबों को करने के साथ साथ इस बार अपनी क्षमताओं से थोड़ा आगे जाकर कुछ ऐसे करतब करने जा रहे हैं जो दर्शकों कि सोचने पर मजबूर कर देंगे।</p>
<p>उन्होंने बताया कि इस बार अखाड़े से लड़के एक साथ, सात हथियारों को चलाएगा जो बहुत ही मुश्किल होगा और ऐसा अभी तक किसी ने नहीं किया है इसके साथ ही अखाड़े के लड़के आंखों पर काली पट्टी बांध कर हाथौड़े से पत्थर तोड़ने का करतब भी करेंगे। ऐसे ही आग कि रिंग से बाइक पर इस बार एक कि जगह दो कलाबाज बैठकर करतब दिखाएंगें वहीं इसके साथ ही चाकू से आंख में काजल लगाने वाला करतब भी अखाड़े के कलाबाजों द्वारा दिखाया जाएगा। संरक्षक बरथूनिया ने आगे बताया कि लड़के आंखों कि पलकों से सुई भी उठाएंगें जिसकी प्रैक्टिस वो लगातार कर रहे हैं। ये सारे करतब जितने बात करने में मुश्किल हैं उससे कहीं ज्यादा करने में मुश्किल हैं और व्यायामशाला के कलाबाज इन सभी करतबों को प्रशासन द्वारा निर्धारित किए गए सभी चिन्हों पर प्रर्दशित करेंगें। </p>
<p><strong>सहयोगियों के दम पर चल रहा है अखाड़ा</strong><br />अखाड़े के संरक्षक उस्ताद बालकिशन बरथूनिया ने बताया कि इस अखाड़े के संचालन के लिए वो साल भर में एक बार ही सामाजिक सहयोग लेते हैं और साल भर का खर्चा व्यायामशाला कि समिति ही उठाती है उनका कहना है कि अखाड़ा इतना पुराना होने और इतने पहलवान देने के बावजूद भी उन्हें कोई सरकारी मदद नहीं मिलती है। जहां एक ओर अखाड़ा हर बार प्रतियोगिताओं में प्रथम स्थान पर रहता है वहीं दुसरी ओर उसे विजेता के रूप में प्रोत्साहन राशी भी नहीं मिलती। साथ अखाड़े को एक कुश्ती सिखाने के लिए एक कोच कि जरूरत है जिसके लिए भी प्रशासन से अपील कि गई है पर आगे कि कोई कारवाई नहीं है।</p>
<p><strong>व्यायामशाला से जुडे है कोटा के कई मशहूर पहलवान और कलाबाज</strong><br />व्यायामशाला के संचालक शशी नामा ने बताया कि ये अखाड़ा कोटा का सबसे पुराना अखाड़ा है जिसकी स्थापना उस्ताद चौथमल द्वारा करीब सौ साल पहले की गई थी। उस्ताद चौथमल कोटा के पहले उस्ताद थे जिन्होंने कोटा में अखाड़े कि शुरूआत की थी जिसके बाद इसी अखाड़े से निकलकर कई पहलवानों और सदस्यों ने अपनी अपनी व्यायामशाला और अखाडेÞ खोले। नामा ने आगे बताया कि इस अखाड़े के उस्ताद चौथमल कोटा ही नहीं बल्कि भारत में भी प्रसिद्ध थे जिस कारण उनके समय के विश्वविजता पहलवान उस्ताद चौथमल का आशीर्वाद लेने आते थे। इस अखाड़े में प्रसिद्ध पहलवान और विश्वविजेता दारा सिंह, पहलवान चंदगीराम, पहलवान सकपाल सिंह, पहलवान विश्वनाथ भी अपनी मौजूदगी दर्ज करा चुके हैं जो सभी उस्ताद चौथमल का आशीर्वाद और मार्गदर्शन लेकर गए। वहीं इनके साथ ही अखाड़े से कोटा के प्रसिद्ध पहलवान गणेश पहलवान, राम पहलवान, पहलवान सुरेन्द्र भोलू, पहलवान सिकन्दर, पहलवान रामचन्द्र चौहान स्वतंत्रता सेनानी गुलाबचन्द शर्मा और मोहनलाल शर्मा भी निकले जिन्होंने पहलवानी खुब नाम कमाया। वहीं इस अखाड़े के पहलवान गोपाल तलवार को अपनी कमर पर बांधकर हवा में उछाल कर मुंह से पकड़ने का करतब दिखाया करते थे जो आज भी कोई कलाबाज नहीं दिखा पाता है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 26 Sep 2023 11:23:13 +0530</pubDate>
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                <title>तलवार, चक्कर और भाला चलाने में माहिर हैं यह लड़कियां</title>
                                    <description><![CDATA[लडकियां तलवार, भाला घुमाने और अखाड़े के साथ साथ मलखम्ब और कुश्ती की भी यहां प्रैक्टिस करती हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/these-girls-are-expert-in-using-sword--javelins-and-spear/article-57988"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-09/talwar-chakkar-or-bhala-chlane-me-mahir-h-yeh-ladkiya...kota-news-25-09-2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। अनन्त चर्तुदर्शी आने को है और शहर के सारे अखाड़े पूरे जोर शोर के साथ तैयारियों में लगे हैं और आज इसी क्रम में हम लेकर आएं है छावनी रामचन्द्रपुरा स्थित श्री मंशापूर्ण हनुमान महिला अखाड़ा। आप इस अखाड़े के अन्दर प्रवेश करते ही पाएंगे कि एक लड़की भाले को हैरतंगेज ढ़ंग से घुमा रही है तो दूसरी तलवार के साथ ऐसे करतब कर  रही होगी जैसे उगंली पर चाबी का छल्ला घुमा रही हो। यहां कि लड़कियां हर कदम पर लड़कों के करतबों को कमतर साबित कर रहीं हैं। महिला संचालिका दीपमाला पंवार ने बताया कि वैसे व्यायामशाला 25 वर्ष पुरानी है और महिला अखाड़े कि शुरूआत 2018 में ती  गई लेकिन आज व्यायामशाला में देखकर लगता है कि लड़कियां लड़कों के पहले से ये सारे करतब करती आ रहीं हैं।</p>
<p><strong>दंगल भी खेलती हैं लड़कियां</strong><br />वहीं व्यायामशाला कि बालिका विनिता राठौर साल 2022 में आयोजित हाड़ौती केसरी दंगल की विजेता रहीं अन्य बालिका मोना राठौर इसी साल मई माह में उज्जैन में आयोजित मलखम्ब प्रतियोगिता कि विजेता रहीं। व्यायामशाला कि बालिका लक्ष्मी गुर्जर ने बताया कि पहले वो अखाड़े में ज्यादा रुचि नहीं लेती थी लेकिन जब साथ कि लडकियों को करते देखा तो उन्हें भी हौसला मिला और आज वो 2 साल से अखाड़े में जा रही हैं और आगे कुश्ती खेलना चाहती हैं। बालिका राठी सोलंकी ने बात करने पर बताया कि वो भी कुश्ती खेलना चाहती हैं मगर आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने से कोचिंग नहीं जा सकती इसीलिए यहां खेलती हैं। वहीं एक बालिका मुस्कान अभी 9 साल कि ही हैं और अखाडेÞ के सारे दांवपेंच और मलखम्ब सीखना चाहती हैं। </p>
<p><strong>करतब देख हैरत में पड़ जाते हैं दर्शक</strong><br />हर दिन लड़कियां ऐसे ऐसे करतब कर रहीं हैं जिन्हें देखकर हम भी हैरत में पड़ जाते हैं। जिस तरह से लडकियां पिरामिड बनाकर उस पर चक्कर और तलवार घुमाती हैं वो कभी कभी हमें भी मुश्किल लगता है। लडकियां तलवार, भाला घुमाने और अखाड़े के साथ साथ मलखम्ब और कुश्ती की भी यहां प्रैक्टिस करती हैं।</p>
<p><strong>दो लडकियों से अखाड़ा किया शुरू</strong><br />व्यायामशाला के महामंत्री जयप्रकाश तुसिया ने बताया कि इस महिला व्यायामशाला कि शुरूआत उस्ताद लालचन्द तुसिया ने दो लडकियों हिना प्रजापति व विनिता राठौर के साथ की थी जहां इस व्यायामशाला का प्रारम्भ इलाके कि लड़कियों को कुश्ती, दंगल और अन्य प्रतियोगिताओं के लिए तैयार करने के उद्देश्य से किया गया था। शुरूआत में दो लडकियों से शुरूआत के बाद आज यहां करीब 70 लडकियां अखाडेÞ के दांव पेंच सीख रही हैं। </p>
<p><strong>खुद उठाती है खर्च</strong><br />महिला संचालिका दीपमाला पंवार ने बताया कि यहां कि अधिकतर लडकियां गरीब परिवार से आती हैं और प्रैक्टिस का सारा खर्चा खुद ही उठाती हैं अपनी बचत के पैसों से ही प्रैक्टिस के सामान लाती हैं। स्थाई जगह नहीं होने के कारण व्यायामशाला को बार बार प्रैक्टिस कि जगह भी बदलनी पड़ती है जिससे लड़कियों कि प्रैक्टिस पर भी असर पड़ता है। इस विषय पर नगर निगम कोटा को भी एक उपयुक्त जगह के लिए पत्र भी लिखा गया पर अभी भी प्रैक्टिस के लिए कोई जगह नहीं है और मंदिर प्रांगण में ही प्रैक्टिस करनी पड़ती है।  </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 25 Sep 2023 18:18:34 +0530</pubDate>
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                <title>तलवार चलाने से लेकर भाला घूमाने तक लौहा मनवा रही नारी शक्ति</title>
                                    <description><![CDATA[पीरामिड बनाना या मटकी फोड़ना हो इन लड़कियों को किसी भी करतब को करने में महारत हासिल है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/from-wielding-a-sword-to-swinging-a-spear--women-s-power-is-making-people-proud/article-57985"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-09/talwar-chakkar-or-bhala-chlane-me-mahir-h-yeh-ladkiya...kota-news-25-09-20231.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। अनंत चतुर्दशी नजदीक आने के साथ ही अखाड़ेबाजों का उत्साह जोश के साथ बढ़ रहा है। हर अखाड़ा अपने हैरतअंगेज करतब से शहरवासियों को रोमांचित करने की तैयारियों में जुटा है। सुभाष नगर द्वितीय स्थित मंगलेश्वर महादेव व्यायामशाला कि लडकियां भी अखाड़े की दुनिया में अपना लौहा मनवाने को पसीना बहा रही हैं। वहीं, करतब के बीच दांव-पेंच की कला निखारने में जुटी हैं। शाम ढलते ही अस्त्र शस्त्र के साथ अखाड़े में उतरती नारी शक्ति का जौहर देख हर कोई अचंभित रह जाता है। यहां 10 से लेकर 30 वर्ष तक कि लडकियां भाला, तलवार, चक्कर घुमाने के साथ ही कुश्ती और दंगल में भी लौहा मनवा रही हैं। वहीं, पीरामिड बनाना या मटकी फोड़ना हो इन लड़कियों को किसी भी करतब को करने में महारत हासिल है। संचालिका गायत्री सुमन ने बताया कि इस व्यायामशाला कि लडकियां वो सारे करतब करने में माहीर हैं जो किसी व्यक्ति को करने में सालों लग जाते हैं। बालिकाओ की दृढ़ इच्छा शक्ति और लगन का ही नतीजा है कि आज हम इतना बड़ा समूह चला रहे हैं और लड़कियां प्रतियोगिताओं में भी जा रही हैं।</p>
<p><strong>2 से 40 लडकियों तक का सफर</strong><br />मंगलेश्वर महादेव महिला व्यायामशाला कि संचालिका गायत्री सुमन ने बताया कि व्यायामशाला कि शुरुआत छावनी स्थित मंगलेश्वर महिला व्यायामशाला से निकलकर उनके द्वारा ही साल 2021 में की थी। तब व्यायामशाला में सिर्फ 2 ही लडकियां थी। शुरूआत में मुश्किलों का सामना करना पड़ा लेकिन धीरे-धीरे राह आसान होती चली गई। वर्तमान में व्यायामशाला में 40 लड़कियां हैं, जो हर दिन प्रैक्टिस करने आती हैं। इस व्यायमशाला को महज दो ही साल हुए हैं और इतनी लड़कियों को जुड़ता देख उम्मीद है कि ये और बढ़ा होगा और हम अखाड़ों के साथ साथ राज्य स्तरीय, राष्टÑीय स्तरीय और अंतररष्टÑीय स्तर पर लड़कियों को भेजेंगे। </p>
<p><strong>समाज के सहयोग से चल रहा अखाड़ा</strong><br />संचालिका सुमन कहती हैं, पहले व्यायामशाला का संचालन घर से ही करती थीं। लेकिन, बाद में समाज के सहयोग से इसे सुभाष नगर में टंकी वाले पार्क में चलाया जाने लगा और आज वहीं संचालित है। व्यायामशाला में आने वाली अधिकतर बालिकाएं मध्यम परिवार से हैं, उनके खर्चे का सारा वहन सुमन खुद करती हैं। बालिका सपना ने कहा, वो पिछले साल से तलवारबाजी और कुश्ती सीखने आ रही हैं और आगे भविष्य में भारत के लिए कुश्ती खेलना चाहती हैं। अच्छा लगता हैं जब लोग उनके करतबों पर दंग रह जाते हैं और तारीफ करते हैं। ज्योति सुमन ने कहा, वो हर दिन शाम को सारे कामों से फ्री होकर अखाडेÞ में आ जाती हैं ताकि प्रैक्टिस के बाद कुछ नया सीख सकें। ज्योति  ने बताया कि वो पहले अन्य अखाड़े में प्रैक्टिस करती थी लेकिन पिछले साल से यहां अखाड़ा शुरू होने के बाद यहीं करती हैं। </p>
<p><strong>लाइसेंस मिले तो बात बने</strong><br />संचालिका गायत्री कहती हैं, नया अखाड़ा होने कि वजह से उन्हें लाइसेंस नहीं मिला है। जबकि, इसके लिए नगर निगम में भी आवेदन किया है। पर्याप्त जगह के अभाव में व्यायामशाला को पार्क में चलाना पड़ रहा है और इस वजह से कई परेशनियों का भी सामना करना पड़ रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 25 Sep 2023 17:35:46 +0530</pubDate>
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                <title>नन्ही बेटियां ही नहीं साड़ी पहनकर महिलाएं भी चलाती हैं यहां तलवार</title>
                                    <description><![CDATA[व्यायामशाला में 2 वर्ष से लेकर 40 वर्ष तक कि बालिकाएं व महिलाएं हर दिन शाम होते ही घर के काम खत्म कर अभ्यास में जुट जाती हैं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/not-only-little-daughters-but-women-wearing-saree-also-wield-swords-here/article-57674"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-09/nanhi-betiya-hi-nhi-sari-pehnkr-mahilaye-bhi-chlati-h-yha-talwar...kota-news-21-09-2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। लड़कियों को हर मुसीबत, हर परेशानी का डटकर मुकाबला करने के लिए हमेशा तैयार रहना चाहिए और उस तैयारी के लिए जरूरी है शारीरिक रूप से मजबूत होना । ये मानना था शहर के पहली महिला व्यायामशाला यानि दुर्गाशक्ति व्यायामशाला कि उस्ताद सीतादेवी सुमन का। सीता देवी तो नहीं रहीं लेकिन आज भी उनके द्वारा स्थापित अखाड़ा आबाद है। इस अखाड़ें में पांच साल की बच्ची कोमल से लेकर प्रौढ़ संतोष सुमन तक तलवार, बल्लम और चकरी चला कर सबको अचंभित कर देती हैं। अब संतोष सुमन इस अखाड़े का कार्यभार संभाल रही हैं। स्वर्गीय सीतादेवी के नक्शे कदम पर चलते हुए आज उनकी बेटियां और बहुएं इस परम्परा को आगे बढ़ा रहीं हैं। शहर के केशवपुरा इलाके में स्थित दुर्गाशक्ति व्यायामशाला में हर साल कि तरह इस साल भी अनन्त चतुर्दशी पर निकाले जाने वाले जुलूस को लेकर महिलाओं ने तैयारी शुरू कर दी है और पूरे जोर शोर के साथ अपनी कलाबाजियों को निखार रहीं हैं। व्यायामशाला में 2 वर्ष से लेकर 40 वर्ष तक कि बालिकाएं व महिलाएं हर दिन शाम होते ही घर के काम खत्म कर अभ्यास में जुट जाती हैं। इस बार जुलूस के प्रदर्शन को और अच्छा बनाने के लिए वो त्रिशूल के साथ अभ्यास कर रहीं हैं वहीं त्रिशुल के साथ कलाबाजी व्यायामशाला कि ओर से पहली बार की जाएगी। अखाड़े कि सभी महिलाएं और बालिकाएं सभी तरह के करतब की हर दिन साड़ी पहनकर अभ्यास करती हैं जो अपने आप में ही एक मुश्किल काम है। </p>
<p><strong>सास से बहु ने सीखा व्यायामशाला चलाना</strong><br />व्यायामशाला में गणेश चतुर्थी और नवरात्रा आने के साथ ही उत्साह का माहौल शुरू हो जाता है और महिलाएं दस दिन तक अनन्त चतुर्दशी कि तैयारियों में जुट जाती हैं। उस्ताद संतोष सुमन ने बताया कि उनकि सास ने इस व्यायामशाला कि शुरूआत सन् 1985 में तब की थी जब वो पहली बार एक महिला के तौर पर जिला कुश्ती संघ में शामिल हुई थी। वहां उन्होंने पुरूष पहलवानों को कुश्ती करता देखकर महिलाओं के लिए भी व्यायामशाला चलाने का ठान लिया। शुरूआत में उन्हें काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा पर उन्होंने हार ना मानते हुए इसे चलाए रखा और आज इस व्यायामशाला में करीब 150 बालिकाएं या महिलाएं हर दिन हैरतंगेज करतबों का प्रदर्शन करती हैं। </p>
<p><strong>ताकि महिलाएं आत्मनिर्भर बन सकें </strong><br />व्यायामशाला कि दीपलता सुमन ने बताया कि वो 2005 से इस व्यायामशाला में अभ्यास कर रहीं हैं और शादी के बाद भी उनका अभ्यास जारी है। दीपलता हर साल आयोजित होने वाले अखाड़े में भाग लेती हैं। दीपलता सुमन साल 1992 व 1993 में हिसार में आयोजित हुए नेशनल जूडो चैपिंयनशिप के 26 किग्रा में विजेता भी रहीं है। वहीं सीतादेवी कि दूसरी बेटी पिंकलता का कहना है कि मां ने हमेशा हर मुसीबत और परेशानी से डटकर मुकाबला करना सिखाया है और आज हम भी हमारे बच्चों को यही शिक्षा देते हैं, मां ने घर के काम ना करवाकर हमें अखाड़े और कुश्ती के दांव पेंच सिखाए जिससे हम आत्म निर्भर बन सकें। व्यायामशाला में अभ्यास करने वाली ज्योति सुमन ने बताया कि छोटे होने पर पहले हमें करतबों से डर लगता था पर जब सीतादेवी के बारे में सुना तो हम भी अपने डर को भुलाकर कुश्ती व अखाड़े का अभ्यास करना शुरू कर दिया और आज हम खुदको बहुत मजबूत महसूस करते हैं जो किसी भी परेशानी का सामना कर सकते हैं। </p>
<p><strong>खुदको मजबूत बना पाते हैं</strong><br />बालिका कोमल ने बताया कि यहां आना और अखाड़े कि प्रैक्टिस करना बहुत अच्छा लगता है और पै्रक्टिस से हम खुदको मजबूत बना पाते हैं। वहीं व्यायामशाला में प्रैक्टिस करने वाली महिलाओं का कहना है कि व्यायामशाला कि उस्ताद सीतादेवी शहर कि पहली महिला पहलवान थी जिन्होंने महिला अखाड़े कि शुरूआत की और प्रशासन को उन्हें सम्मान देते हुए शहर में उनकी मुर्ति कि स्थापना करनी चाहिए ताकि और महिलाएं प्रोत्साहित हों।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 21 Sep 2023 15:45:59 +0530</pubDate>
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