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                <title>festivals - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>महिलाएं आजमा रहीं दांव, ताे कहीं पुरूष चला रहे शमशीर</title>
                                    <description><![CDATA[तलवारबाजी, पट्टेबाजी और बनेठी में बेटियां भी दिखा रहीं हुनर, राजस्थान का पहला महिला अखाड़ा भी कोटा में।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/women-are-mastering-combat-moves-while-men-wield-the--shamshir---sword/article-166266"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-09/111200-x-600-px)-(2)71.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शाम ढलते ही शहर के अखाड़ों में एक अलग ही रौनक देखने को मिल रही है। ढलते सूरज की सुनहरी धूप के बीच लाल मिट्टी पर गूंजती तलवारों की खनक, लकड़ी और लोहे के टकराने की आवाजें तथा युवाओं की जोशीली हुंकार इस बात की गवाही देती है कि कोटा में पारंपरिक शस्त्र कला और संस्कृति की जड़ें कितनी गहरी हैं। पिछले 35 से अधिक वर्षों से अनवरत चल रही इस परंपरा के जरिए नई पीढ़ी को शारीरिक सुदृढ़ता, अनुशासन और अपनी प्राचीन विरासत से जोड़ने का अनूठा कार्य किया जा रहा है। अनंत चतुर्दशी जैसे पर्वों पर जब ये खिलाड़ी सड़कों पर अपने हैरतअंगेज करतब दिखाते हैं, तो पूरा शहर गर्व महसूस करता है।</p>
<p><strong>श्री जय बजरंग व्यायामशाला: 5 दशक पुरानी ऐतिहासिक विरासत</strong><br />शहर के सबसे पुराने और लाइसेंसशुदा अखाड़ों में शुमार श्री जय बजरंग व्यायामशाला, चमलेश्वर महादेव मंदिर, गोरधनपुरा का अपना विशिष्ट ऐतिहासिक महत्व रहा है। 70 के दशक में नहर के किनारे एक चबूतरे पर हनुमान जी की प्रतिमा के सामने से शुरू हुआ यह सफर आज तक अनवरत चल रहा है। अखाड़े के संचालक शंकर सिंह जादौन बताते हैं कि शुरुआती दौर में कसरत के लिए जलपान की व्यवस्था आपसी सहयोग या मंदिर में आने वाले चढ़ावे से ही करनी होती थी।</p>
<p><strong>कई अखाड़ों के लिए शुरूआती दंगल का मैदान</strong><br />आज शहर के प्रमुख अखाडों की स्थापना का सफर भी यहा से ही शुरू हुआ था। एक समय था जब पट्टा बुर्ज, महंत गोपाल दास और कोटड़ी की वर्तमान कश्यप व्यायामशाला के सभी नामचीन खिलाड़ी व पट्टेबाज़ इसी व्यायामशाला से अपने हुनर का प्रदर्शन करते थे। गुरु-शिष्य परंपरा का निर्वहन करते हुए यहाँ से तैयार हुए पट्टेबाजाें ने शहर के विभिन्न क्षेत्रों में नए अखाड़ों की नींव रखी। गुरु श्रीकृष्ण उस्ताद के सानिध्य में गुलाब तंवर, शंकर गांधी और शंकर सिंह जादौन जैसे खिलाड़ियों ने इस परंपरा को आगे बढ़ाया और कोटा में पहलवानी को नया आयाम दिया।</p>
<p><strong>काली टेक के बालाजी अखाड़े में 35 वर्षों से जारी है साधना</strong><br />शहर के काली टेक के बालाजी अखाड़े में पिछले 35 वर्षों से पारंपरिक शस्त्र कला और संस्कृति को सहेजने का कार्य निरंतर जारी है। वर्ष 1990 में गुरु बाबूलाल गुर्जर द्वारा स्थापित इस अखाड़े में अनुशासन और परंपरा का अनूठा संगम देखने को मिलता है। वर्तमान में अखाड़े के सबसे पुराने उस्ताद महावीर गुर्जर के सानिध्य में यह परंपरा आगे बढ़ रही है, जिन्होंने इसकी स्थापना से लेकर अब तक अध्यक्ष पद की कमान संभाल रखी है। उनके मार्गदर्शन में कभी इस अखाड़े में करीब 500 लोग खेलने के लिए जुटते थे, और वर्तमान में भी 200 से अधिक शागिर्द यहाँ नियमित रूप से अखाड़ा खेल रहे हैं।</p>
<p><strong>तलवार बाजी रोमांच ही नही साधना का खेल</strong><br />शाम ढलते ही काली टेक के बालाजी मंदिर परिसर में पट्टेबाजों और खिलाड़ियों का तांता लग जाता है। प्रांगण के एक कोने में 5 से 6 वर्ष के नन्हे-मुन्ने बच्चे लकड़ी की छोटी-छोटी छड़ें थामे पट्टा बाजी की शुरुआती बारीकियां सीखते नजर आते हैं, जिनकी आंखों में बड़े पहलवान बनने का सपना चमक रहा है। थोड़ा आगे बढ़ने पर युवा खिलाड़ी आशीष गुर्जर तलवारबाजी की तीव्र प्रैक्टिस करते हैं। आशीष बताते हैं कि वे बचपन से अपने पिता के साथ अखाड़े में आते रहे हैं और तलवार का यह खेल जितना खतरनाक है, उससे कहीं अधिक रोमांचक और गौरवशाली है।</p>
<p>अखाड़े में मुख्य शस्त्र प्रशिक्षक अशोक गुर्जर के मार्गदर्शन में युवाओं और बालिकाओं को तलवारबाजी, पट्टा बाजी, बनेठी और सीने पर पत्थर फोड़ने जैसे हैरतअंगेज करतबों का नियमित अभ्यास कराया जा रहा है। पिछले 5 वर्षों से बालिकाओं के लिए विशेष प्रशिक्षण भी शुरू किया गया है, जिसमें 30 से अधिक बालिकाएं पूरी तल्लीनता से यह प्राचीन कला सीख रही हैं।</p>
<p><strong>राजस्थान का पहला महिला अखाड़ा</strong><br />कोटा ने सनातन संस्कृति के संरक्षण में एक और ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। बालाकुंड केशवपुरा क्षेत्र में स्थित 'संतोष सुमन महिला अखाड़ा' राजस्थान का पहला पंजीकृत महिला अखाड़ा होने का गौरव रखता है। इसकी नींव साल 1998 में स्वर्गीय सीता देवी सुमन ने रखी थी। चार बच्चों की माँ होने के बावजूद उन्होंने जूडो-कुश्ती सीखकर समाज में एक मिसाल कायम की।</p>
<p>साल 2001 में इसे आधिकारिक लाइसेंस प्राप्त हुआ। वर्तमान में उनकी बहू संतोष सुमन इस अखाड़े की मुख्य महिला गुरु के रूप में कमान संभाले हुए हैं। अनंत चतुर्दशी की तैयारियों के तहत यहाँ प्रशिक्षण ले रही 180 से 250 महिला पहलवान लाठी, तलवारबाजी, आग की बनेठी, त्रिशूल और गदा संचालन जैसे साहसिक करतब सीख रही हैं। यहाँ की बालिकाओं ने राज्य से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक पदक जीतकर कोटा का नाम पूरे देश में रोशन किया है।</p>
<p><strong>राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर गाड़ चुकी हैं झंडे</strong><br />यह अखाड़ा केवल पारंपरिक प्रदर्शन तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यहाँ की बालिकाओं ने जूडो-कुश्ती और अन्य कलाओं में राज्य स्तर से लेकर राष्ट्रीय स्तर पर गोल्ड और कांस्य पदक जीतकर कोटा का नाम पूरे देश में रोशन किया है। संध्या के समय आरती के पश्चात शुरू होने वाला यह अभ्यास और महिला सशक्तिकरण का यह अनूठा रूप शहरवासियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना हुआ है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 22 Sep 2026 14:44:30 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>ठठेरा बाजार के कुछ परिवार आज भी जिंदा रखे हैं पुश्तैनी परंपरा, त्योहारों पर रहती है हाथ से बने बर्तनों की मांग </title>
                                    <description><![CDATA[रामपुरा की गलियों से गायब हो रहे हाथ के कारीगर, अब बचे सिर्फ दो कारखाने।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/families-in-thathera-bazaar-keep-ancestral-tradition-alive/article-152082"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/111200-x-600-px)-(3)39.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर के रामपुरा स्थित ठठेरा गली की वह ऐतिहासिक 'टक-टक' की गूंज, जो कभी इस बाजार की पहचान हुआ करती थी, आधुनिक मशीनी युग के शोर में मानों कहीं गायब सी हो गई है। लेकिन इस मशीनी दौर के बावजूद ठठेरा बाजार के कुछ परिवारों ने अपनी पारंपरिक विरासत और पुश्तैनी व्यवसाय को आज भी जिंदा रखा हुआ है। ये परिवार आज भी इसी हुनर के जरिए अपने परिवार का भरण-पोषण कर रहे हैं।</p>
<p><strong>ठठेरा बाजार में सालों पहले करीब 40 कारीगर हुआ करते थे</strong><br />आज के मशीनी युग के कारण हाथ से बने बर्तन काफी महंगे पड़ते हैं, जिसके चलते इनकी मांग कम रहती है। यही वजह है कि जिस ठठेरा बाजार में सालों पहले करीब 40 कारीगर हुआ करते थे, अब वहां केवल दो ही परिवार रह गए हैं। हालांकि, आज भी त्योहारों और विशेष आयोजनों के मौके पर इन कारीगरों के हाथ से बने बर्तनों की खास मांग बनी रहती है। संतोष की बात यह है कि इन परिवारों की युवा पीढ़ी भी इस पुश्तैनी काम को पूरी लगन से सीख रही है।रामपुरा ठठेरा बाजार के रघुनंदन कसेरा ने बताया कि उनके कारखाने को 150 साल से भी अधिक समय हो गया है और वर्तमान में उनकी चौथी पीढ़ी इस काम को संभाल रही है। आज बाजार में केवल दो ही ऐसे कारखाने संचालित हैं जो पूरी तरह हाथ से बर्तन तैयार करते हैं।</p>
<p><strong>बाहर से मंगवाकर बेच रहे बर्तन </strong><br />जबकि अधिकांश लोगों ने अब बर्तन की दुकानें खोल ली हैं और वे बाहर से मशीन निर्मित बर्तन मंगवाकर बेचते हैं। चूंकि हाथ से बने बर्तनों की लागत अधिक आती है, इसलिए आम ग्राहक अक्सर उनका सही दाम नहीं दे पाते और कम कीमत वाले मशीनी बर्तनों को चुन लेते हैं। लेकिन विशिष्ट धार्मिक आयोजनों के लिए लोग आज भी इन्हीं के पास आते हैं। वहीं दुकानदार मुरलीमनोहर ने बताया कि उनकी दुकान पर पुराने बर्तनों की मरम्मत और पॉलिश का कार्य भी किया जाता है।</p>
<p><strong>पीतल और तांबे के बर्तनों का क्रेज </strong><br />दुकानदार गौरव ठठेरा ने बताया कि बाजार में खासकर पीतल, तांबा, कांसा और जस्ते के बर्तन बनाने की परंपरा रही है, हालांकि बीते कुछ वर्षों में जस्ते के बर्तनों का चलन बंद हो गया है। अब लोगों की मांग पीतल के बर्तनों की ज्यादा है। दुकानदार गौरव ठठेरा के अनुसार, वर्तमान में तांबे के बर्तनों की मांग भी काफी है क्योंकि इनमें रखे पानी को पीने और खाना बनाने से शरीर को पोषक तत्व मिलते हैं।</p>
<p><strong>मंदिर की पूजन सहित अन्य सामग्री भी बनाते </strong><br />इसके अलावा पूजा-पाठ के बर्तन, मंदिरों के लिए भोलेनाथ के कवच और मूर्तियां भी पीतल से तैयार की जा रही हैं। बाजार में भोलेनाथ के कवच के साथ-साथ कलश, भगोनी, लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियों और तांबे की आकर्षक आकृतियों सहित हनुमान जी की गदा जैसे विशेष आॅर्डरों की काफी मांग रहती है। इसके अलावा तांबे से बनी विभिन्न आकर्षक आकृतियां और हनुमान जी की गदा जैसे विशेष उत्पाद भी श्रद्धा का केंद्र बने हुए हैं।</p>
<p><strong>चौथी पीढ़ी संभाल रही विरासत </strong><br />दुकानदार रघुनंदन ठठेरा ने बताया कि उनके दादा के समय से चली आ रही इस दुकान और विरासत को अब उनके बेटे गौरव, सोमू और विजय भी सीख रहे हैं, ताकि पीढ़ी-दर-पीढ़ी चला आ रहा यह हुनर आने वाले समय में भी जीवित रहे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 29 Apr 2026 15:01:30 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>आगामी त्योहारों से पहले शहरों की सड़कें होगी सही : शासन विभाग ने जारी किए आदेश, मापदंड और समय सीमा का रख्ना होगा विशेष ध्यान </title>
                                    <description><![CDATA[निविदा या रेट कॉन्ट्रेक्ट प्रक्रिया को तत्काल पूरा कर कार्यादेश जारी किया जाए, ताकि मौके पर काम शीघ्र शुरू हो सके।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/before-the-upcoming-festivals-the-roads-of-cities-will/article-123141"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/swayat-shasan-vibhag-copy1.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के निर्देश पर स्वायत्त शासन विभाग ने सभी नगर निकायों को आदेश जारी किए हैं कि आगामी त्योहारों से पहले शहरों की सड़कों की मरम्मत का कार्य प्राथमिकता से पूरा किया जाए। इसके लिए प्रत्येक निकाय को विस्तृत सर्वेक्षण कर तय करना होगा कि कौन-सी सड़कें यातायात की दृष्टि से सबसे अधिक महत्वपूर्ण हैं, जिसके अनुसार प्राथमिकता सूची तैयार की जाए। निर्देशों के अनुसार सड़क मरम्मत कार्य में गुणवत्ता, निर्धारित मापदंड और समय सीमा का विशेष ध्यान रखा जाए। </p>
<p>निविदा या रेट कॉन्ट्रेक्ट प्रक्रिया को तत्काल पूरा कर कार्यादेश जारी किया जाए, ताकि मौके पर काम शीघ्र शुरू हो सके। स्वायत्त शासन विभाग ने स्पष्ट किया है कि सभी निकाय मरम्मत कार्य की प्रगति रिपोर्ट नियमित रूप से विभाग को भेजें। सीएम ने अधिकारियों को निर्देश दिए थे कि शहरों में सड़कें त्योहारों से पहले पूरी तरह दुरुस्त और सुरक्षित हों, ताकि नागरिकों को यातायात में किसी प्रकार की असुविधा न हो।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 10 Aug 2025 10:47:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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                <title>हिन्दुओं के त्योहारों पर शराबबंदी के लिए चलेगा अभियान, मुख्यमंत्री को देंगे ज्ञापन</title>
                                    <description><![CDATA[ हिन्दू धर्म के सभी त्योहारों पर शराबबंदी रोकने के लिए प्रदेशभर में अभियान चलेगा]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/on-the-festivals-of-hindus-there-will-be-a-memorandum/article-108376"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-03/441.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। हिन्दू धर्म के सभी त्योहारों पर शराबबंदी रोकने के लिए प्रदेशभर में अभियान चलेगा। इसके लिए मुख्यमंत्री को ज्ञापन दिया जाएगा। गोविन्द देवजी मंदिर में आयोजित शहर के मंदिरों के महंतों की धर्म सभा में सर्वसम्मति से विक्रम संवत 2082 में दीपावली 20 अक्टूबर को मनाने पर सहमति बनी। धर्म प्रचारक विजय शंकर पाण्डेय ने बताया कि गोविन्द देव जी मन्दिर में महन्त अंजन कुमार गोस्वामी के सान्निध्य में हुई धर्म सभा की अध्यक्षता महाराजा संस्कृत कॉलेज के ज्योतिष विभाग के पूर्व अध्यक्ष रामपाल ने की। </p>
<p>इस मौके पर प्रयाग राज महाकुंभ गोविन्द धाम में विशेष सेवा देने वाले सैकड़ों श्रद्धालुओं को मानस गोस्वामी ने दुपट्टा, प्रसाद और सम्मान पत्र देकर सम्मानित किया। अन्त में श्रद्धालुओं की मांग पर आर्य संस्कृति दिग्दर्शक ट्रस्ट ने कहा कि होली, दीपावली, दशहरा, राम नवमी, जन्माष्टमी, रक्षाबंधन आदि प्रमुख धार्मिक हिन्दू त्यौहारों पर शराबबन्दी होनी चाहिए, इसके लिए सभी ने मांगपत्र पर हस्ताक्षर किए। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 23 Mar 2025 11:57:15 +0530</pubDate>
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                <title>होली और दिवाली भारत के सबसे खास त्योहारों में से एक, दुनिया के 15 देशों में मनाया जाता है होली जैसा फेस्टिवल </title>
                                    <description><![CDATA[हम 15 देशों की होली के बारे में बताएंगे, जहां होली से मिलते जुलते फेस्टिवल मनाए जाते हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/holi-and-diwali-one-of-the-most-special-festivals-in/article-107418"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-03/news-(10)3.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। होली और दिवाली भारत के सबसे खास त्योहारों में से एक हैं। होली की तैयारियों के बीच हम आपको कुछ दिलचस्प बातें बताने वाले हैं। क्या आप जानते हैं कि दुनिया के दूसरे देशों में भी होली की तरह  फेस्टिवल मनाया जाता है। आज हम 15 देशों की होली के बारे में बताएंगे, जहां होली से मिलते जुलते फेस्टिवल मनाए जाते हैं।</p>
<p><strong>सांगक्रान</strong><br />थाईलैंड में सांगक्रान नाम से नए साल का उत्सव मनाया जाता है। हर साल 13 से 15 अप्रैल के बीच यह फेस्टिवल मनाया जाता है। इसमें होली की तरह ही एक दूसरे पर पानी डाला जाता है। माना जाता है कि इस तरह नेगेटिव एनर्जी कम होती है।</p>
<p><strong>ला टोमाटीना </strong><br />स्पेन में टमाटर से होली खेलने का फेस्टिवल मनाया जाता है। और आप ये बात जरूर जानते होंगे। स्पेन के बुनोल शहर में अगस्त के आखिरी बुधवार को ला टोमाटीना मनाई जाती है। इसमें हजारों लोग सड़कों पर आकर टमाटर फेंककर मस्ती करते हैं जैसा कि होली में किया जाता है।</p>
<p><strong>बैटल ऑफ ऑरेंजेस</strong><br />इटली के इव्रिया में यह फेस्टिवल मनाया जाता है जिसमें लोग एक दूसरे पर पके हुए संतरे फेंकते हैं। इसे 12वीं शताब्दी के एक विद्रोह की याद में मनाया जाता है। इसमें संतरे फेंककर एक दूसरे के साथ प्रतीक के तौर पर युद्ध किया जाता है।</p>
<p><strong>कार्निवल</strong><br />ब्राजील कार्निवल को दुनिया का सबसे बड़ा रंग-बिरंगा उत्सव माना जाता है। इसमें लोग सड़कों पर डांस करते हैं, परेड होती है, और रंग-बिरंगे कपड़े पहनकर म्यूजिक और डांस होता है। जो कुछ हद तक होली के जश्न से मिलता जुलता है।</p>
<p><strong>कलर रन </strong><br />अमेरिका और कई अन्य देशों में कलर रन नामक इवेंट होता है। इसमें दौड़-दौड़ कर एक दूसरे को रंग लगाया जाता है। जो देखने में कुछ हद तक होली जैसा लगता है।</p>
<p><strong>कार्निवल कोलोन </strong><br />जर्मनी के कोलोन शहर में फरवरी या मार्च में यह कार्निवल होता है। इसे फिफ्थ सीजन भी कहा जाता है। यानि कह सकते हैं कि पांचवा मौसम प्यार का। इसमें लोग रंग-बिरंगे कपड़े पहनते हैं। एक दूसरे के साथ नाचते-गाते हैं। और रंग उड़ाते हैं। </p>
<p><strong>बैटल ऑरेंज&amp;ब्लैक </strong><br />वेनेजुएला में यह फेस्टिवल अक्टूबर में मनाया जाता है। होली की तरह एक दूसरे पर रंग फेंका जाता है। बस फर्क ये है कि इस त्योहार में सिर्फ आॅरेंज और ब्लैक रंग का इस्तेमाल होता है।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 13 Mar 2025 11:55:48 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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                <title>कोटा उत्तर वार्ड 17 : त्यौहारों पर मेहमानों का घरों तक पहुंचना हो रहा मुश्किल</title>
                                    <description><![CDATA[शहर को स्मार्ट सिटी बनाने के लिए एक तरफ करोड़ों रुपए खर्च कर विकास कार्य करवाए जा रहे हैं वहीं, दूसरी तरह अंदरुनी इलाकों में बसे वार्ड आज भी मूलभूत सुविधाओं को तरस रहे हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/kota-north-ward-17--it-is-difficult-for-guests-to-reach-homes-on-festivals/article-18835"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-08/ward-17-tyoharo-par-mehmaano-ka-gharo-tak-...kota-news-12.8.2022-(2).jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर को स्मार्ट सिटी बनाने के लिए एक तरफ करोड़ों रुपए खर्च कर विकास कार्य करवाए जा रहे हैं वहीं, दूसरी तरह अंदरुनी इलाकों में बसे वार्ड आज भी मूलभूत सुविधाओं को तरस रहे हैं। कोई भी शहर तब तक स्मार्ट नहीं बन सकता जब तक वार्डों में आवश्यक सुविधाएं विकसित नहीं हो जाती। हालात यह हैं, कॉलोनियां बसे बरसों हो गए लेकिन सड़क, नालियां व पार्क तक नहीं पाए। वहीं, चंबल किनारे बसे होने के बावजूद बाशिंदे बोंरिग का पानी पीने का मजबूर हैं। कोटा उत्तर नगर निगम के वार्ड 17 के बाशिंदे भूलभूत सुविधाओं को तरस रहे हैं। हालात यह हैं, वार्ड के अधिकतर क्षेत्र में पेयजल आपूर्ति के लिए पाइप लाइनें तक नहीं डल पाई। यह है वार्ड क्षेत्र- रायपुरा, राजनगर, गायत्री विहार, मानसरोवर कॉलोनी, कंवरपुरा, धाकड़खेड़ी, उम्मेदगंज ग्राम का क्षेत्र। कॉलोनी में पानी, घरों से कैसे निकले बाहर मानसरोवर कॉलोनी को बसे लंबा समय बीत गया पर यहां सड़कें नहीं बनी। कच्ची सड़क है जो बरसात में कीचड़ में तब्दील हो गई। पूरी कॉलोनी में बरसाती पानी भरा हुआ है। घर से बाहर निकलना तक मुश्किल हो गया। जलभराव से घरों की दहलीज पर खतरनाक बीमारियों का लार्वा पनप रहा है, जिससे मौसमी बीमारियों का खतरा बढ़ गया। वहीं, रोड लाइटें नहीं होने से शाम होते ही अंधेरा पसर जाता है। पार्षद तो कभी इलाके में आकर तक नहीं देखते की हम किस हालात में जी रहे हैं। सड़क न बनाओ तो कम से कम पैदल चलना लायक तो रोड बनाना चाहिए। - चैतन्य सुमन, मानसरोवर कॉलोनी निवासी जख्मी सड़कों से हर पल हादसों का डर धाकड़खेड़ी के कई इलाके ऐसे हैं, जहां आज भी सड़कों पर पंचायत समय के खरंजे बने हुए हैं, जबकि इस क्षेत्र को नगर निगम में शामिल हुए 15 साल से ज्यादा समय बीत गया। इसके बावजूद यहां शहर जैसी मूलभूत सुविधाएं विकसित नहीं हो पाई। पक्की सड़क नहीं होने से दिनभर धूल के गुबार उड़ते हैं। वहीं, उबड़-खाबड़ व क्षतिग्रस्त सड़कों के कारण हादसे की आशंका बनी रहती है। इसके अलावा ड्रेनेज सिस्टम का तो नामो-निशान नहीं है। इन दिनों बरसात का दौर चल रहा है। जगह-जगह जलभराव हो रहा है। पानी भरा होने के कारण सड़कों पर हो रहे गड्ढेÞ दिखाई नहीं देते, जिससे राहगीर व वाहन चालक दुर्घटना का शिकार हो रहे हैं। इलाके में सड़कें, नालियां व पेयजल आपूर्ति के लिए पाइप लाइनें बिछाने की सख्त आवश्यकता है। - गीता बाई, धाकड़खेड़ी निवासी जगह-जगह गंदगी का ढेर मानसरोवर कॉलोनी में पक्की सड़कें नहीं होने से बरसात में कीचड़ की समस्या हो गई। पैदल तो दूर बाइक से भी निकलना मुश्किल हो गया। वहीं, पानी के लिए मारामारी मची रहती है। बोरिंग का पानी पीना पड़ता है। मोटर के बिना नलों में पानी नहीं आता। छतों पर रखी पानी की टंकियां भरने के लिए दिन-रात मोटर चलती है, जिससे बिजली का बिल बढ़ रहा है। इसके अलावा सड़क नाम की चीज नहीं है। जगह-जगह गहरे गड्ढे हो रहे हैं। -प्रताप सिंह हाड़ा, मानसरोवर बोरिंग का पानी पीना बनी मजबूरी रायपुरा इलाके के बाशिंदों को चंबल का शुद्ध पानी नसीब नहीं हो रहा। इलाके में पेयजल आपूर्ति के लिए पाइप लाइनें तक नहीं बिछाई गई। मजबूरन, बोरिंग का पानी पीना पड़ता है। इनदिनों क्षेत्रवासी दोहरी समस्या से जूझ रहे हैं। जरूरत के मुताबिक पानी एकत्रित करने के लिए सुबह-शाम मोटर चलानी पड़ती है। लगातार मोटर का उपयोग होने से बिजली का बिल बढ़ रहा है। वहीं, बिजली सप्लाई व्यवस्था भी ठीक नहीं है। बिजली चले जाने पर टंकियों में पानी नहीं भर पाते। वहीं, मकानों के पट्टे तक नहीं बन पा रहे। वोट लेने के समय तो जनप्रतिनिधि घर-घर दस्तक देते हैं लेकिन बाद में कोई भी जनता की तकलीफोें से सरोकार नहीं रखता। पार्षद भी समस्याओं के समाधान पर ध्यान नहीं देती। - सुल्तान अंसारी, रायपुरा निवासी वार्ड की अधिकतर कॉलोनियां कृषि भूमि पर बसी है, जिसके चलते वह यूआईटी से अनुमोदित नहीं हो पाई। इसी वजह से यहां मूलभूत सुविधाएं विकसित नहीं हो सकी। असल में, कॉलोनाइजरों ने एग्रीकल्चर भूमि पर प्लानिंग काट लोगों को सड़क, नालियां व रोड लाइटें लगवाकर देने की बात कहकर प्लॉट बेच दिए। बाद में इन कॉलोनियों को नगर विकास न्यास से अनुमोदित भी नहीं करवाई। लेकिन, जनप्रतिनिधि होने के नाते वार्ड में मूलभूत सुविधाएं विकसित करवाना मेरा धर्म है, जिसे पूरी शिद्दत से निभाने की कोशिश कर रही हूं। अमृतधारा प्रोजेक्ट के तहत 30-35 कॉलोनियों में पाइप लाइन बिछाने के लिए प्रस्ताव बनाकर जलदाय विभाग को दिए हैं। वहीं, ड्रेनेज सिस्टम बनाने का काम प्रयास चल रहा है। बरसात के बाद क्षेत्र में नई सीसी सड़क, नालियां, रोड लाइटें लगवाने का काम किया जाएगा। वहीं, लाइप लाइनें बिछाकर लोगों को शुद्ध पानी उपलब्ध करवाना प्राथमिकता है। - ईना मीणा, पार्षद वार्ड 17</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 12 Aug 2022 15:12:05 +0530</pubDate>
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