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                <title>Donald Trump - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>Donald Trump RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>डोनालड ट्रंप की चेतावनी: ईरान जब तक परमाणु हथियार बनाने की जिद्द नहीं छोड़ता तब तक नाकेबंदी रहेगी जारी, ईरानी राष्ट्रपति का दावा-परमाणु कार्यक्रम केवल नागरिक उद्देश्यों के लिए और कुछ नहीं</title>
                                    <description><![CDATA[राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को परमाणु शर्तों पर समझौता न करने पर नौसैनिक नाकेबंदी और आर्थिक दबाव बढ़ाने की चेतावनी दी है। इस तनाव के कारण ब्रेंट क्रूड $125 प्रति बैरल के पार पहुंच गया है। ट्रंप ने इसे बमबारी से अधिक प्रभावी बताया है, जिससे एशियाई अर्थव्यवस्थाओं और ग्लोबल सप्लाई चेन पर गंभीर संकट मंडरा रहा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/donald-trumps-warning-that-the-blockade-will-continue-until-iran/article-152199"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/trump4.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने गुरुवार को ईरान को परमाणु समझौते की शर्तों पर सहमत होने की चेतावनी देते हुए कहा है कि ऐसा न होने पर अमेरिका उसके बंदरगाहों की नौसैनिक नाकेबंदी जारी रखेगा और आर्थिक दबाव बढ़ाएगा। ट्रंप ने दोहराया कि यदि ईरान परमाणु हथियार बनाना जारी रखता है, तो उसके साथ 'कभी कोई समझौता नहीं' होगा। दूसरी ओर, ईरान का कहना है कि उसका परमाणु कार्यक्रम केवल नागरिक उद्देश्यों के लिए है।</p>
<p>अमेरिकी राष्ट्रपति और उनकी राष्ट्रीय सुरक्षा टीम ईरान के ताजा प्रस्ताव पर चर्चा कर रही है, जिसमें ईरान ने पहले होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने और नाकेबंदी हटाने का सुझाव दिया है, जबकि परमाणु वार्ता को स्थगित करने की बात कही है। नाकेबंदी जारी रखने के ट्रंप के फैसले से वैश्विक तेल बेंचमार्क 'ब्रेंट क्रूड' की कीमतें गुरुवार को 125 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुँच गईं। अमेरिकी राष्ट्रपति ने इस रणनीति का बचाव करते हुए कहा कि नाकेबंदी प्रत्यक्ष सैन्य कार्रवाई से अधिक प्रभावी हो सकती है। उन्होंने ईरान से जल्द कार्रवाई करने का आग्रह किया और कहा कि अधिकारी जरूरत पड़ने पर महीनों तक नाकेबंदी जारी रखने के तरीके खोज रहे हैं।</p>
<p>अमेरिकी नीति निर्माताओं का मानना है कि लंबे समय तक लगे प्रतिबंध अंततः ईरान को तेल उत्पादन रोकने के लिए मजबूर कर सकते हैं। यह संघर्ष अब दसवें सप्ताह में प्रवेश कर चुका है, जबकि इसके चार से छह सप्ताह में सुलझने की उम्मीद थी। होर्मुज जलडमरूमध्य के प्रतिबंधित रहने से वैश्विक आपूर्ति से प्रतिदिन लगभग दो करोड़ बैरल तेल कम हो रहा है। अमेरिका की इस लंबी नाकेबंदी की तैयारी से एशियाई अर्थव्यवस्थाएं प्रभावित हो रही हैं। क्षेत्र के कई देश ऊर्जा आपूर्ति के लिए इस जलडमरूमध्य पर निर्भर हैं और कच्चे तेल, प्राकृतिक गैस, प्लास्टिक तथा उर्वरकों की आपूर्ति में कमी महसूस की जा रही है।</p>
<p>इस बीच, पाकिस्तान की मध्यस्थता की कोशिशें भी विफल रही हैं। ट्रंप ने कहा कि यदि ईरान बातचीत करना चाहता है तो वह कॉल कर सकता है। उन्होंने बताया कि अभी टेलीफोन के माध्यम से बातचीत हो रही है। 'एक्सियोस' के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प नाकेबंदी को 'बमबारी से अधिक प्रभावी' मानते हैं। हालांकि, सूत्रों का यह भी कहना है कि अमेरिकी सेंट्रल कमांड बातचीत के गतिरोध को तोड़ने के लिए ईरान पर 'शक्तिशाली हमलों' की तैयारी कर रहा है लेकिन मंगलवार रात तक ट्रंप ने किसी हमले का आदेश नहीं दिया था। दूसरी ओर, ईरान ने संकल्प लिया है कि जब तक वह खतरा महसूस करेगा, होर्मुज जलडमरूमध्य में यातायात बाधित करना जारी रखेगा। संयुक्त राष्ट्र में ईरानी प्रतिनिधि ने अमेरिकी नाकेबंदी को 'समुद्री डकैती' करार दिया और चेतावनी दी कि इसका 'अभूतपूर्व' जवाब दिया जाएगा। हालांकि, ईरानी बलों ने कूटनीति को मौका देने के लिए अब तक संयम दिखाया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 30 Apr 2026 17:55:45 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>पश्चिम एशिया संकट : डोनाल्ड ट्रंप ने की फ्रेडरिक मर्ज़ की तीखी आलोचना, होर्मुज जलडमरूमध्य के घटनाक्रम पर भी जताई चिंता </title>
                                    <description><![CDATA[राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ की तीखी आलोचना करते हुए ईरान पर उनके रुख को खतरनाक बताया है। ट्रंप का दावा है कि परमाणु संपन्न ईरान दुनिया को बंधक बना लेगा। वहीं, जर्मनी ने अमेरिका की युद्ध नीति और ऊर्जा बाजारों पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभावों पर चिंता जताई है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/west-asia-crisis-donald-trump-sharply-criticized-friedrich-merz-also/article-152097"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/trump.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। ईरान के मुद्दे पर अमेरिका और उसके यूरोपीय सहयोगियों के बीच गहराते मतभेद के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि मर्ज़ को लगता है कि ईरान का परमाणु हथियार संपन्न होना ठीक है। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रूथ सोशल पर कहा कि इसमें कोई आश्चर्य नहीं है कि जर्मनी आर्थिक और अन्य मोर्चों पर इतना खराब प्रदर्शन कर रहा है। उन्होंने कहा कि जर्मन चांसलर को नहीं पता कि वह क्या कह रहे हैं।</p>
<p>अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि यदि ईरान के पास परमाणु हथियार होता, तो पूरी दुनिया को बंधक बना लिया जाता। उन्होंने कहा कि वह अभी ईरान के संबंध में वह कदम उठा रहे हैं, जो अन्य देशों या राष्ट्रपतियों को बहुत पहले कर लेने चाहिए थे। यह तीखी प्रतिक्रिया मर्ज़ द्वारा ईरान मुद्दे पर अमेरिकी दृष्टिकोण की आलोचना के बाद आई है। जर्मन चांसलर ने कहा था कि ईरान का नेतृत्व अमेरिका को अपमानित कर रहा है और ऐसा प्रतीत नहीं होता कि अमेरिका के पास इस युद्ध से बाहर निकलने की कोई स्पष्ट योजना है। मर्ज़ ने होर्मुज जलडमरूमध्य के घटनाक्रम पर भी चिंता व्यक्त करते हुए कहा था कि वहां होने वाले व्यवधान के ऊर्जा बाजारों और वैश्विक व्यापार के लिए दूरगामी परिणाम हो सकते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 29 Apr 2026 16:52:04 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>ईरान को परमाणु हथियार विकसित करने की अनुमति नहीं दिये जाने के पक्षधर हैं सम्राट चार्ल्स-3 : डोनाल्ड ट्रंप</title>
                                    <description><![CDATA[राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि सम्राट चार्ल्स ईरान के परमाणु कार्यक्रम को रोकने पर सहमत हैं। हालांकि, ब्रिटिश सम्राट की राजनीतिक तटस्थता के कारण यह बयान चर्चा में है। व्हाइट हाउस में आयोजित राजकीय भोज के दौरान दोनों नेताओं के बीच ऐतिहासिक संदर्भों और कूटनीति पर हल्के-फुल्के अंदाज में दिलचस्प संवाद भी हुआ।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/emperor-charles-3-donald-trump-is-in-favor-of-not-allowing/article-152096"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-04/donlad-trump-3.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि ब्रिटेन के सम्राट चार्ल्स-3 भी इस बात से सहमत हैं कि ईरान को परमाणु हथियार विकसित करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। डोनाल्ड ट्रंप ने पश्चिम एशिया नीति पर टिप्पणी करते हुए कहा कि ईरान को कभी भी परमाणु हथियार हासिल नहीं करने दिया जाएगा और इस मुद्दे पर सम्राट चार्ल्स भी उनकी सोच से सहमत हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति की यह टिप्पणी ब्रिटेन की संवैधानिक परंपराओं के संदर्भ में असहज मानी जा रही है, क्योंकि ब्रिटिश सम्राट परंपरागत रूप से राजनीतिक रूप से तटस्थ रहते हैं और सरकारी नीति या अंतरराष्ट्रीय संघर्षों पर सार्वजनिक रूप से पक्ष नहीं लेते। ब्रिटेन में संवैधानिक व्यवस्था के तहत सम्राट किसी भी दलगत या प्रत्यक्ष राजनीतिक रुख से दूरी बनाए रखते हैं। ऐसे में ट्रंप का यह दावा राजनीतिक और कूटनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है।</p>
<p>इस बीच ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि ईरान से जुड़ा युद्ध ब्रिटेन का युद्ध नहीं है और वह इस संघर्ष में प्रत्यक्ष रूप से शामिल होने के पक्ष में नहीं हैं। उन्होंने यह भी दोहराया है कि ईरान को परमाणु हथियार नहीं मिलने चाहिए, जो लंबे समय से ब्रिटिश सरकारों की नीति रही है। हाल के अमेरिकी दौरे के दौरान सम्राट चार्ल्स ने अमेरिकी कांग्रेस की संयुक्त बैठक को संबोधित करते हुए अमेरिका-ब्रिटेन संबंधों, साझा मूल्यों और वैश्विक सहयोग पर जोर दिया था। उनकी यात्रा को दोनों सहयोगी देशों के बीच बढ़ते कूटनीतिक तनाव को कम करने के एक प्रयास के रूप में व्यापक रूप से देखा गया।</p>
<p>ईरान संघर्ष से निपटने के तरीके को लेकर कुछ सहयोगी देशों के साथ मतभेदों के बाद ट्रंप ने अमेरिका को नाटो से अलग करने की संभावना जतायी है। इस कदम के लिए कांग्रेस की मंज़ूरी ज़रूरी होगी और इसका कड़ा विरोध होने की उम्मीद है। व्हाइट हाउस में आयोजित राजकीय भोज के दौरान सम्राट चार्ल्स और ट्रंप के बीच हल्के-फुल्के अंदाज में ऐतिहासिक संदर्भों पर आधारित हास्यपूर्ण टिप्पणियां भी हुईं। सम्राट चार्ल्स ने ट्रंप के एक हालिया बयान का जवाब देते हुए मजाकिया लहजे में कहा कि यदि ब्रिटिश प्रभाव न होता तो शायद अमेरिकी फ्रेंच भाषा बोल रहे होते, जिस पर उपस्थित लोगों ने ठहाके लगाए। उल्लेखनीय है कि ट्रंप ने दावोस शिखर सम्मेलन में कहा था कि विश्व युद्ध-2 में अगर अमेरिका हस्तक्षेप न करता तो ब्रिटेन के लोग जर्मन और जापानी भाषाएं बोल रहे होते।</p>
<p>अमेरिकी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार सम्राट चार्ल्स ने कुछ समकालीन विषयों पर भी बात की और व्हाइट हाउस के 'ईस्ट विंग' में हुए "पुनर्समायोजनों" का ज़िक्र किया। बताया जाता है कि ट्रंप ने एक नयी बॉलरूम परियोजना के हिस्से के तौर पर इस विंग को फिर से विकसित करवाया है। इसके बाद उन्होंने 1812 के युद्ध का एक ऐतिहासिक संदर्भ दिया, जब ब्रिटिश सेनाओं ने व्हाइट हाउस को जला दिया था। सम्राट चार्ल्स ने कहा, "मुझे यह कहते हुए अफ़सोस है कि हम ब्रिटिश लोगों ने 1814 में व्हाइट हाउस के रियल एस्टेट पुनर्विकास का प्रयास किया था।" उन्होंने 'बॉस्टन टी पार्टी' का भी ज़िक्र किया और मज़ाकिया लहजे में कहा कि यह 'स्टेट डिनर' 1773 के उस विरोध प्रदर्शन से 'काफ़ी बेहतर' है, जिसमें अमेरिकी उपनिवेशवादियों ने ब्रिटिश चाय को बंदरगाह में फेंक दिया था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 29 Apr 2026 15:43:46 +0530</pubDate>
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                <title>ट्रंप की भारत विरोधी टिप्पणी पर युवा कांग्रेस का प्रदर्शन : अमेरिकी दूतावास के बाहर की नारेबाजी, लाकड़ा ने कहा-देश का अपमान नहीं किया जाएगा बर्दाश्त </title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की भारत विरोधी कथित टिप्पणी के खिलाफ युवा कांग्रेस ने दिल्ली में अमेरिकी दूतावास के बाहर उग्र प्रदर्शन किया। कार्यकर्ताओं ने तीन मूर्ति सर्किल से मार्च निकाला, जिन्हें पुलिस ने हिरासत में लिया। प्रदेश अध्यक्ष अक्षय लाकड़ा ने स्पष्ट किया कि देश के सम्मान के साथ कोई भी समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/youth-congress-protest-on-trumps-anti-india-remarks-sloganeering-outside-us/article-151867"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/lakda.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। युवा कांग्रेस ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की भारत को लेकर कथित 'हेल होल' टिप्पणी के विरोध में सोमवार को यहां अमेरिकी दूतावास के बाहर प्रदर्शन किया। युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता वरुण पांडे ने आज यहां बताया कि प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने तीन मूर्ति सर्किल से अमेरिकी दूतावास की ओर मार्च करने का प्रयास किया, लेकिन दिल्ली पुलिस ने बैरिकेडिंग कर उन्हें रोक दिया और कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया।</p>
<p>इस अवसर पर दिल्ली प्रदेश युवा कांग्रेस के अध्यक्ष अक्षय लाकड़ा ने आरोप लगाया कि ट्रंप लगातार भारत के खिलाफ टिप्पणी कर रहे हैं और 'हेल होल' जैसे शब्दों का प्रयोग कर देश का अपमान किया है, जिसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि देश के सम्मान के खिलाफ कोई भी बयान स्वीकार्य नहीं है और युवा कांग्रेस इसका विरोध करती रहेगी। इस प्रदर्शन का उद्देश्य दुनिया को स्पष्ट संदेश देना है कि भारत के सम्मान से कोई समझौता नहीं होगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 27 Apr 2026 18:40:17 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>ईरान-अमेरिका वार्ता पर तनाव : ईरानी प्रवक्ता इब्राहिम रजाई का कड़ा रुख, बोले-मध्यस्थता के लिए पाकिस्तान के पास नहीं है आवश्यक विश्वसनीयता</title>
                                    <description><![CDATA[ईरानी संसद ने स्पष्ट किया है कि पाकिस्तान के पास अमेरिका के साथ बातचीत के लिए आवश्यक विश्वसनीयता नहीं है। प्रवक्ता इब्राहिम रजाई ने कहा कि इस्लामाबाद डोनाल्ड ट्रंप के हितों के आगे निष्पक्ष रहने में विफल रहा है। होर्मुज जलडमरूमध्य संकट और ऊर्जा युद्ध के बीच, ईरान ने सीधी बातचीत से इनकार करते हुए तटस्थ मध्यस्थ की मांग की है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/tension-on-iran-america-talks-iranian-spokesperson-takes-a-tough-stance/article-151845"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/pakistan3.png" alt=""></a><br /><p>तेहरान। ईरानी संसद के प्रवक्ता इब्राहिम रजाई ने सोमवार को ईरान और अमेरिका के बीच वार्ता को लेकर पाकिस्तान की मध्यस्थता पर कड़ी आलोचना करते हुए स्पष्ट रूप से कहा कि 'मध्यस्थता के लिए पाकिस्तान के पास आवश्यक विश्वसनीयता नहीं है।' सांसद ने आरोप लगाया कि इस्लामाबाद 'हमेशा अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हितों का ध्यान रखता है और अमेरिकियों की इच्छा के विरुद्ध एक शब्द भी नहीं बोलता। पाकिस्तान हमारा एक अच्छा दोस्त और पड़ोसी है, लेकिन वह बातचीत के लिए उपयुक्त मध्यस्थ नहीं है।' उन्होंने कहा कि ईरान का मानना है कि एक मध्यस्थ को निष्पक्ष होना चाहिए और दोनों पक्षों को असहज सच बोलने के लिए तैयार रहना चाहिए, जिसमें पाकिस्तान विफल रहा है।</p>
<p>रजाई के अनुसार, पाकिस्तान यह सार्वजनिक रूप से स्वीकार करने को तैयार नहीं है कि अमेरिका ने शुरू में प्रस्ताव स्वीकार किया और फिर उससे पीछे हट गया। उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान लेबनान और ईरान की रुकी हुई वित्तीय संपत्तियों के संबंध में अमेरिका को उसकी प्रतिबद्धताओं के लिए जवाबदेह ठहराने में विफल रहा है। सबसे गंभीर आरोप उस 10-सूत्रीय वार्ता ढांचे को लेकर है, जिसे ईरान का दावा है कि तेहरान यात्रा के दौरान पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर को सीधे सौंपा गया था। ईरान के अनुसार, जनरल मुनीर को यह प्रस्ताव इस समझ के साथ दिया गया था कि इसे अमेरिकी पक्ष तक पहुँचाया जाएगा, लेकिन ईरान का कहना है कि उसे अब तक कोई प्रतिक्रिया या पावती नहीं मिली है।</p>
<p>यह कूटनीतिक तनाव 28 फरवरी को ईरान पर अमेरिका-इजरायल के हमलों के बाद शुरू हुए संघर्ष की पृष्ठभूमि में सामने आया है। इस युद्ध ने होर्मुज जलडमरूमध्य को लगभग बंद कर दिया है, जिससे वैश्विक ऊर्जा संकट पैदा हो गया है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अमेरिका के साथ सीधी बातचीत से इनकार कर दिया है। दूसरी ओर, ट्रंप ने सोशल मीडिया पर संकेत दिया कि यदि ईरान बात करना चाहता है, तो उन्हें बस फोन करना चाहिए, लेकिन अमेरिका अब इस्लामाबाद में वरिष्ठ वार्ताकार नहीं भेजेगा। पाकिस्तान की मुस्लिम जगत के शांति मध्यस्थ बनने की महत्वाकांक्षा को इस कूटनीतिक गतिरोध से बड़ा झटका लगा है। ईरान का संदेश स्पष्ट है- तटस्थता दिखाई देनी चाहिए, केवल उसका दावा करना पर्याप्त नहीं है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 27 Apr 2026 15:53:51 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>ट्रंप की ईरान को चेतावनी : समय के साथ नाकेबंदी और भी बदतर होगी, बोले- युद्ध खत्म करने के लिए बेचैन</title>
                                    <description><![CDATA[राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर नकेल कसते हुए कहा कि अमेरिकी नाकेबंदी अब और सख्त होगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि कोई भी समझौता केवल अमेरिकी हितों के आधार पर होगा। ट्रंप ने ईरान की सैन्य शक्ति के पतन का दावा करते हुए कहा कि उनके पास दुनिया भर का समय है, लेकिन ईरान के पास नहीं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/trumps-warning-to-iran-that-the-blockade-will-get-worse/article-151534"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/iran2.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को एक बार फिर ईरान को चेतावनी देते हुए कहा कि घड़ी की सुई टिक-टिक कर रही है और यह नाकेबंदी तब तक और भी बदतर होती जाएगी, जब तक कि कोई ऐसा समझौता नहीं हो जाता जो अमेरिका और उसके सहयोगियों के लिए फायदेमंद हो। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कहा, "समय उनके पक्ष में नहीं है। यह नाकेबंदी पूरी तरह से अभेद्य और मज़बूत है और अब यहाँ से स्थिति और भी खराब होती जायेगी। कोई भी समझौता तभी किया जाएगा, जब वह अमेरिका, उसके सहयोगियों और बाकी दुनिया के लिए उचित और हितकारी होगा।"</p>
<p>अमेरिकी मीडिया पर एक बार फिर निशाना साधते हुए राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि न्यूयॉर्क टाइम्स और सीएनएन जैसे मीडिया संस्थानों को लगता है, "मैं ईरान के साथ युद्ध खत्म करने के लिए बेचैन हूँ।" उन्होंने कहा, "कृपया यह जान लें कि इस पद पर रहते हुए शायद मैं अब तक का सबसे कम दबाव महसूस करने वाला व्यक्ति हूँ। मेरे पास दुनिया भर का समय है, लेकिन ईरान के पास नहीं। घड़ी की सुई टिक-टिक कर रही है।" उन्होंने कहा कि ईरान की नौसेना समुद्र की रसातल में है, उनकी वायुसेना पूरी तरह से तबाह हो चुकी है, उनके विमान-रोधी और रडार हथियार नष्ट हो चुके हैं, और उनके नेता अब हमारे बीच नहीं रहे।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 24 Apr 2026 15:15:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>डोनाल्ड ट्रंप की घोषणा: तीन हफ़्तों के लिए और बढ़ा इज़रायल और लेबनान के बीच संघर्ष-विराम, नेतन्याहू और जोसेफ आउन के बीच शिखर सम्मेलन की मेजबानी की संभावना</title>
                                    <description><![CDATA[राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इज़रायल और लेबनान के बीच संघर्ष विराम को तीन सप्ताह के लिए बढ़ाने की घोषणा की है। व्हाइट हाउस में हुई उच्च स्तरीय बैठक के बाद ट्रंप ने हिज़्बुल्लाह के विरुद्ध लेबनान की रक्षा का संकल्प लिया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/donald-trumps-announcement-extends-the-ceasefire-between-israel-and-lebanon/article-151524"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/trump3.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। इज़रायल और लेबनान के बीच संघर्ष विराम को तीन हफ़्तों के लिए बढ़ा दिया गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने शुक्रवार को यह घोषणा की। यह फ़ैसला व्हाइट हाउस के ओवल ऑफ़िस में श्री ट्रम्प, अमेरिकी उपराष्ट्रपति जे.डी. वैन्स, विदेश मंत्री मार्को रूबियो, इज़रायल में अमेरिका के राजदूत माइक हकाबी, लेबनान में अमेरिका के राजदूत मिशेल ईसा और इज़रायल तथा लेबनान के कई उच्च-स्तरीय प्रतिनिधियों के बीच हुई एक बैठक में लिया गया।</p>
<p>ट्रम्प ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म पर कहा, "बैठक बहुत अच्छी रही।" उन्होंने कहा कि अमेरिका लेबनान को हिज़्बुल्लाह से रक्षा करने में मदद करने के लिए उसके साथ मिलकर काम करेगा। उन्होंने कहा कि वह "निकट भविष्य" में इज़रायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ आउन की बैठक की मेज़बानी करने के लिए उत्सुक हैं, हालाँकि उन्होंने इसकी तारीख़ की घोषणा नहीं की है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 24 Apr 2026 10:51:24 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>हॉर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ा तनाव : ट्रंप का ऐलान-ईरानी नौकाएं दिखते ही तुरंत नष्ट करें, अमेरिकी नौसेना प्रमुख ने त्यागपत्र दिया </title>
                                    <description><![CDATA[राष्ट्रपति ट्रंप ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य में बारूदी सुरंगें बिछाने वाली ईरानी नावों को नष्ट करने का सख्त आदेश दिया है। अमेरिकी घेराबंदी के तहत 31 जहाजों को वापस लौटा दिया गया। तनाव के बीच अमेरिकी नौसेना प्रमुख जॉन फेलन ने इस्तीफा दे दिया है, जबकि ईरान ने बातचीत की शर्त 'हार की स्वीकारोक्ति' रखी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/tension-increases-in-the-strait-of-hormuz-trump-announces/article-151521"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/trump.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव को और बढ़ाते हुए अपनी नौसेना को कड़े आदेश दिए हैं तथा कहा है कि यदि ईरान से जुड़ी कोई भी नाव इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग में बारूदी सुरंगें बिछाती हुई पाई जाए, तो उसे तुरंत ‘नष्ट’ कर दिया जाए। ट्रंप ने अपने ‘ट्रुथ सोशल’ पर लिखा कि इस तरह की हरकतों को रोकने में किसी भी तरह की झिझक नहीं होनी चाहिए। उन्होंने बताया कि अमेरिकी नौसेना की टीमें इस रास्ते को साफ करने के काम में जुटी हुई हैं और सुरक्षा के लिहाज से यह कदम उठाना जरूरी है।</p>
<p><strong>ईरान की घेराबंदी : 31 जहाजों को वापस लौटने का निर्देश</strong></p>
<p>ईरान के खिलाफ अपनी समुद्री घेराबंदी को और सख्त करते हुए अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने गुरुवार को पुष्टि की कि उसने ‘ईरान के विरुद्ध अमेरिकी घेराबंदी के हिस्से के रूप में 31 जहाजों को वापस मुड़ने या बंदरगाह पर लौटने का निर्देश दिया है।’वापस लौटाए गए जहाजों में अधिकांश तेल टैंकर बताये जा रहे हैं।</p>
<p><strong>अमेरिका पहले हार माने, तभी होगी बातचीत: ईरान </strong></p>
<p>ईरान के सांसद हामिदरज़ा हाजी बाबाई ने कहा है कि जब तक अमेरिका अपनी हार स्वीकार नहीं करता, तब तक उससे किसी भी प्रकार की वार्ता संभव नहीं है। ईरानी संसद के उपाध्यक्ष हाजी बाबाई ने कहा, अमेरिका के हार स्वीकार किए बिना कोई भी बातचीत निषिद्ध है। </p>
<p>अमेरिकी नौसेना प्रमुख जॉन फेलन ने त्यागपत्र दे दिया है। इसकी जानकारी अमेरिका के युद्ध विभाग ने दी। विभाग ने बुधवार को एक बयान में कहा, नौसेना प्रमुख जॉन सी. फेलन तत्काल प्रभाव से पद छोड़ रहे हैं। बयान में कहा गया है कि उप प्रमुख हंग काओ नौसेना के कार्यवाहक प्रमुख के रूप में सेवा देंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 24 Apr 2026 09:48:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने जन्मसिद्ध नागरिकता पर साधा निशाना : भारत और चीन को बताया 'नरक', नागरिकता कानूनों की आलोचना की</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जन्मसिद्ध नागरिकता नीति की आलोचना करते हुए भारत और चीन जैसे देशों के लिए विवादास्पद शब्दों का प्रयोग किया है। उन्होंने 'ट्रुथ सोशल' पर साझा पत्र में प्रवासियों पर संसाधनों के दुरुपयोग का आरोप लगाया। ट्रंप ने इस संवैधानिक प्रावधान को बदलने और आप्रवासन कानूनों को और सख्त करने की वकालत की है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/us-president-trump-targets-birthright-citizenship-calls-india-and-china/article-151453"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/trumpp.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जन्मसिद्ध नागरिकता को लेकर चल रही बहस के बीच भारत और चीन सहित कुछ देशों को लेकर विवादास्पद टिप्पणी की है, जिससे नयी राजनीतिक चर्चा छिड़ गई है। डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया मंच ट्रुथ सोशल पर एक पत्र साझा करते हुए इन देशों के लिए आपत्तिजनक शब्दों का उपयोग किया और जन्मसिद्ध नागरिकता सहित कई अमेरिकी नागरिकता कानूनों की आलोचना की।</p>
<p>पत्र में कैलिफ़ोर्निया के प्रौद्योगिकी क्षेत्र में नियुक्तियों को लेकर दावा किया गया है कि वहां भारत और चीन से आए लोगों का वर्चस्व है, हालांकि इसके समर्थन में कोई प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया गया है। पत्र का मुख्य विषय जन्मसिद्ध नागरिकता की नीति है, जिसके तहत अमेरिका में जन्म लेने वाले बच्चों को नागरिकता मिलती है। इसमें आरोप लगाया गया है कि इस प्रावधान का उपयोग कर प्रवासी अपने परिवार के अन्य सदस्यों को भी देश में लाते हैं।</p>
<p>पत्र में कहा गया, "यहां पैदा होने वाला बच्चा तुरंत नागरिक बन जाता है और फिर वे चीन, भारत या दुनिया के किसी अन्य 'नरक' से अपने पूरे परिवार को यहां ले आते हैं।" इस पत्र की भाषा ने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। पत्र में यह भी कहा गया है कि इस मुद्दे पर निर्णय न्यायालयों या वकीलों के बजाय जनमत से होना चाहिए। इसमें एक सामाजिक माध्यम सर्वेक्षण का हवाला देते हुए दावा किया गया है कि बहुमत इस नीति में बदलाव के पक्ष में है, साथ ही न्यायिक प्रक्रिया पर अविश्वास भी व्यक्त किया गया है। पत्र में अमेरिकी नागरिक स्वतंत्रता संघ (एसीएलयू) की भी आलोचना की गई है और उस पर ऐसी नीतियों का समर्थन करने का आरोप लगाया गया है, जो कथित रूप से अवैध प्रवासियों को लाभ पहुंचाती हैं।</p>
<p>इसके अलावा पत्र में यह भी आरोप लगाया गया है कि प्रवासी स्वास्थ्य सेवाओं और कल्याणकारी योजनाओं का दुरुपयोग करते हैं, जिससे करदाताओं पर अतिरिक्त बोझ पड़ता है। इसमें कैलिफ़ोर्निया जैसे प्रांतो में कथित अनियमितताओं का भी उल्लेख किया गया है। पत्र में अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट में चल रही कार्यवाही का भी संदर्भ दिया गया है और संवैधानिक व्याख्या को वर्तमान परिस्थितियों से असंगत बताया गया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/world/us-president-trump-targets-birthright-citizenship-calls-india-and-china/article-151453</link>
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                <pubDate>Thu, 23 Apr 2026 17:40:13 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पश्चिम एशिया संकट के बीच अमेरिकी नौसेना प्रमुख ने दिया त्यागपत्र, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ थे अच्छे संबंध : युद्ध विभाग ने की पुष्टि</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिकी नौसेना प्रमुख जॉन फेलन ने युद्ध मंत्री पीट हेगसेथ के साथ मतभेदों के चलते तत्काल प्रभाव से इस्तीफा दे दिया है। हंग काओ कार्यवाहक प्रमुख होंगे। यह इस्तीफा ऐसे समय आया है जब अमेरिका ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य की रणनीतिक घेराबंदी कर रखी है, जिसे राष्ट्रपति ट्रंप ने एक बड़ी सफलता बताया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/us-navy-chief-resigns-amid-west-asia-crisis-had-good/article-151407"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/अमेरिकी-नौसेना-प्रमुख.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिकी नौसेना प्रमुख जॉन फेलन ने त्यागपत्र दे दिया है। इसकी जानकारी अमेरिका के युद्ध विभाग ने दी। विभाग ने बुधवार को एक बयान में कहा, "नौसेना प्रमुख जॉन सी. फेलन तत्काल प्रभाव से पद छोड़ रहे हैं।” बयान में कहा गया है कि उप प्रमुख हंग काओ नौसेना के कार्यवाहक प्रमुख के रूप में सेवा देंगे। एक्सियोस समाचार पोर्टल की रिपोर्ट के अनुसार, फेलन की विदाई कई लोगों के लिये आश्चर्यजनक रही। उनके संबंध युद्ध मंत्री पीट हेगसेथ के साथ ‘ठीक नहीं’ थे, लेकिन कथित तौर पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ उनके संबंध अच्छे थे।</p>
<p>समाचार पोर्टल ने एक सूत्र के हवाले से कहा, “फेलन यह नहीं समझ पाये कि वह सर्वोच्च अधिकारी नहीं थे। उनका काम दिये गये आदेशों का पालन करना है, न कि उन आदेशों का पालन करना जो उनके अनुसार दिये जाने चाहिये। ” फेलन ने मंगलवार को नौसेना के भविष्य और 'गोल्डन फ्लीट' पहल सहित इसके प्रमुख निवेशों पर चर्चा करने के लिये संवाददाताओं से बात की थी। फेलन का त्यागपत्र एक महत्वपूर्ण मोड़ पर आया है। अमेरिकी नौसेना ने 13 अप्रैल को हॉर्मुज जलडमरूमध्य के दोनों ओर ईरानी बंदरगाहों में प्रवेश करने और बाहर निकलने वाले सभी समुद्री यातायात की घेराबंदी शुरू कर दी है। दुनिया के तेल, पेट्रोलियम उत्पादों और तरल प्राकृतिक गैस की आपूर्ति का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा हॉर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है।</p>
<p>अमेरिका का कहना है कि गैर-ईरानी जहाज हॉर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने के लिये स्वतंत्र हैं, जब तक कि वे तेहरान को मार्ग कर नहीं देते। ईरानी अधिकारियों ने मार्ग कर लगाने की घोषणा नहीं की है, लेकिन ऐसी योजनाओं पर चर्चा की है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरानी बंदरगाहों की अमेरिकी घेराबंदी को ‘एक जबरदस्त सफलता’ बताया है और कहा है कि वाशिंगटन तब तक हॉर्मुज जलडमरूमध्य को नहीं खोलेगा, जब तक कि उसके पास ‘अंतिम समझौता’ न हो।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 23 Apr 2026 14:04:38 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>रूस-अमेरिका संबंध सबसे निचले स्तर पर: यह स्थिति बेहद खराब, पैनकिन ने कहा-दोनों देशों के राष्ट्रपतियों के बीच हुई सीधी बातचीत काफी सार्थक रही</title>
                                    <description><![CDATA[रूस के उप विदेश मंत्री अलेक्जेंडर पैनकिन ने कहा कि अमेरिका के साथ संबंध वर्तमान में अपने सबसे निचले स्तर पर हैं। एंकरेज शिखर सम्मेलन के सार्थक होने के बावजूद, ट्रंप प्रशासन की नीतियों में अत्यधिक अनिश्चितता सबसे बड़ी बाधा बनी हुई है। यूक्रेन संघर्ष पर चर्चा सकारात्मक रही, लेकिन भविष्य अब भी अस्पष्ट है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/russia-america-relations-are-at-their-lowest-level-this-situation-is/article-151401"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/alexander-pankin.png" alt=""></a><br /><p>संयुक्त राष्ट्र। रूस के उप विदेश मंत्री अलेक्जेंडर पैनकिन ने कहा कि उनके देश और अमेरिका के बीच संबंध इस समय अपने सबसे निचले स्तर पर हैं। पैनकिन ने संयुक्त राष्ट्र में पत्रकारों द्वारा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल में दोनों देशों के संबंधों के बारे में पूछे जाने पर कहा, "ये (संबंध) सबसे निचले स्तर पर हैं। यह मैं नहीं कह रहा, बल्कि हमारे अधिकारी ऐसा मानते हैं... और यह स्थिति बेहद खराब है।"</p>
<p>उन्होंने कहा कि एंकरेज में दोनों देशों के राष्ट्रपतियों के बीच हुई सीधी बातचीत काफी सार्थक रही। पैनकिन ने कहा, "हमारे राष्ट्रपतियों के बीच हुई सीधी बातचीत काफी सार्थक रही। लेकिन एंकरेज में शायद सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि वहां कोई निश्चितता नहीं है। आप सुबह कुछ और सुनते हैं, शाम को ठीक उसके विपरीत कुछ और, या फिर अगले दिन कोई ऐसा कदम उठाया जाता है जो उन दोनों बातों के बिल्कुल उलट होता है। इसलिए, इस तरह की अत्यधिक अनिश्चितता ही सबसे बड़ी समस्या है।"</p>
<p>गौरतलब है कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 15 अगस्त, 2025 को अलास्का में बातचीत की थी। यह बैठक एंकरेज स्थित एल्मेंडॉर्फ-रिचर्डसन सैन्य अड्डे पर हुई थी। इस दौरान दोनों राष्ट्रपतियों ने यूक्रेन संघर्ष को सुलझाने के उपायों पर चर्चा की। दोनों नेताओं ने इस बैठक को सकारात्मक बताया। पुतिन ने बैठक के बाद कहा कि यूक्रेन संघर्ष का समाधान संभव है और उन्होंने इस मुद्दे के दीर्घकालिक समाधान में रूस की गहरी रुचि पर जोर दिया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 23 Apr 2026 12:05:03 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>ईरान ने ट्रंप के युद्धविराम विस्तार को 'चाल' बताकर किया खारिज: कहा-हमने कभी इसकी मांग नहीं की, नौसैनिक नाकेबंदी की निंदा की </title>
                                    <description><![CDATA[ईरान ने डोनाल्ड ट्रंप के एकतरफा युद्धविराम विस्तार को 'धोखा' करार देते हुए खारिज कर दिया है। विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी को 'युद्ध की कार्रवाई' बताया। ईरान का स्पष्ट रुख है कि जब तक नाकेबंदी खत्म नहीं होती, कोई वार्ता संभव नहीं है और हॉर्मुज जलडमरूमध्य पूरी तरह बंद रहेगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/iran-rejected-trumps-ceasefire-extension-as-a-ploy-said/article-151300"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/iran6.png" alt=""></a><br /><p>तेहरान। ईरान ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के युद्धविराम को एकतरफा बढ़ाने की घोषणा पर शक जाहिर करते हुए कहा है कि यह एक 'चाल' है और उसने कभी इसके लिए दरख्वास्त नहीं की थी। विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि ईरान ने 'धमकियों के साये' में युद्धविराम विस्तार या नयी बातचीत की कोई गुजारिश नहीं की है। श्री अराघची ने ईरानी बंदरगाहों की जारी अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी की निंदा करते हुए इसे 'युद्ध की कार्रवाई' और मौजूदा युद्धविराम सिद्धांतों का उल्लंघन करार दिया। उन्होंने कहा, “ईरान जानता है कि दबंगई का मुकाबला कैसे करना है।”</p>
<p>ईरानी संसद के अध्यक्ष बगर गालिबाफ के वरिष्ठ सलाहकार महदी मोहम्मदी ने युद्धविराम विस्तार को खारिज करते हुए कहा कि ईरान के नजरिये से इसका 'कोई मतलब नहीं' है और इसकी 'कोई वास्तविक अहमियत' नहीं है। उन्होंने इस कदम को 'अचानक हमले' के लिए वक्त हासिल करने की रणनीति बताया और दलील दी कि जो पक्ष इस तरह के दबाव का सामना कर रहा हो, वह शर्तें तय नहीं कर सकता।</p>
<p>संयुक्त राष्ट्र में ईरान के राजदूत आमिर सईद इरावानी ने इस बात पर जोर दिया कि इस्लामाबाद में किसी भी औपचारिक शांति वार्ता में शामिल होने के लिए नौसैनिक नाकेबंदी को खत्म करना ईरान की अनिवार्य शर्त है।इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (आईआरजीसी) से जुड़ी ईरान की अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी मेहर (एमएनए) ने कहा कि ईरान ने युद्धविराम बढ़ाने की मांग नहीं की है। एजेंसी ने ताकत के दम पर अमेरिकी नाकेबंदी को तोड़ने की धमकियों को फिर दोहराया।</p>
<p>युद्धविराम विस्तार की यह घोषणा युद्ध में हुए कई बड़े घटनाक्रमों के बाद हुई है। हमलों पर रोक के बावजूद ट्रंप ने अमेरिकी सेना को नौसैनिक नाकेबंदी जारी रखने का निर्देश दिया है, जो ईरान के लिए विवाद का मुख्य मुद्दा बना हुआ है। ट्रंप ने दावा किया कि यह विस्तार आंशिक रूप से ईरानी सरकार में 'गहरी दरार' होने के कारण किया गया है। ईरानी अधिकारियों ने इस आख्यान को खारिज कर दिया है और स्थायी शांति के लिए खुद की '10-सूत्रीय योजना' पर कायम हैं।</p>
<p>मेहर समाचार एजेंसी ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप, जो पिछले कुछ दिनों से बार-बार दावा कर रहे थे कि वह ईरान के साथ युद्धविराम नहीं बढ़ायेंगे, उन्होंने एकतरफा रूप से युद्धविराम विस्तार की घोषणा कर दी। एजेंसी के मुताबिक, ट्रंप को एकतरफा युद्धविराम की घोषणा करने के लिए मजबूर होना पड़ा, जबकि उन्होंने पहले खुले तौर पर जोर दिया था कि वह किसी भी हाल में युद्धविराम नहीं बढ़ायेंगे और ईरान को इस्लामाबाद वार्ता में हिस्सा लेना ही होगा।</p>
<p>डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को घोषणा की थी कि अमेरिकी प्रतिनिधि बातचीत के लिए पाकिस्तान जा रहे हैं और अगर ईरान सहमत नहीं हुआ तो युद्ध फिर से शुरू हो जायेगा। ईरानी अधिकारियों ने हालांकि चुप्पी साधे रखी है और बातचीत में शामिल होने या न होने के संबंध में किसी आधिकारिक रुख की घोषणा नहीं की है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अमेरिका ने युद्धविराम का उल्लंघन किया है। एक अन्य अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी, तस्नीम ने अज्ञात अधिकारियों के हवाले से यह भी कहा कि ईरान ने युद्धविराम के विस्तार का अनुरोध नहीं किया था, और ट्रंप की घोषणा के कई मायने हो सकते हैं।</p>
<p>"पहला मतलब यह है कि ट्रंप युद्ध हार चुके हैं। उन्होंने युद्ध के दौरान सभी संभावित परिदृश्यों का परीक्षण और कार्यान्वयन कर लिया है।" इसमें कहा गया है कि श्री ट्रंप जानते हैं कि युद्ध के जरिये उन्हें कुछ हासिल नहीं होगा, इसलिए वह युद्ध से बाहर निकलने को ही अपने लिए सबसे अच्छा रास्ता मानते हैं। अगर वह युद्ध जारी भी रखते हैं, तब भी उन्हें कुछ हासिल नहीं होगा। तस्नीम ने कहा कि हालांकि इस युद्ध में अमेरिका के लिए कोई उपलब्धि नहीं है, लेकिन ट्रंप हर मुमकिन हथकंडे से धोखा देने सहित कुछ भी कर सकते हैं, जिनमें युद्धविराम का विस्तार भी शामिल है। इसमें कहा गया है कि ट्रंप युद्धविराम बढ़ाने का दावा कर सकते हैं, लेकिन फिर वही अमेरिकी प्रशासन या इजरायल 'आतंकवादी कदम' उठा सकते हैं। एजेंसी ने कहा कि ईरान ऐसे परिदृश्य को कम कर नहीं आंकता और इस तरह की संभावना पर करीब से नजर रख रहा है।</p>
<p>इसमें कहा गया है कि अमेरिका युद्ध से पीछे हट जायेगा और इजरायल लेबनान में युद्धविराम के उल्लंघन के बहाने इस जंग में बना रहेगा।अमेरिकी अधिकारियों को हालांकि पहले ही चेतावनी दी जा चुकी है कि अमेरिका एकतरफा रूप से युद्ध से भाग नहीं सकता और इजरायल को लड़ाई में बनाये नहीं रख सकता। नौसैनिक नाकेबंदी जारी रहने का मतलब है कि शत्रुता जारी है। जब तक नौसैनिक नाकेबंदी लागू रहेगी, तब तक ईरान कम से कम होर्मुज जलडमरूमध्य को नहीं खोलेगा और अगर जरूरी हुआ तो ताकत के बल पर इस नाकेबंदी को तोड़ देगा।</p>
<p>इसमें कहा गया है कि अमेरिका ईरान पर युद्ध का साया बनाये रखना चाहता है और ईरान की अर्थव्यवस्था और राजनीति को अधर में रखना चाहता है। तस्नीम ने अज्ञात अधिकारियों के हवाले से कहा, "अमेरिका का मानना है कि ईरान की स्थिति वैसी ही है, जैसी 12 दिवसीय युद्ध के बाद थी। वर्तमान काल में हालांकि एक मौलिक अंतर है और वह है होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान का नियंत्रण। अगर अमेरिका युद्ध का साया बनाये रखना चाहता है, तो उसे यह जान लेना चाहिए कि होर्मुज जलडमरूमध्य पूरी तरह से बंद रहेगा।"</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 22 Apr 2026 18:01:12 +0530</pubDate>
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