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                <title>Donald Trump - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>Donald Trump RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>ट्रंप का बड़ा दावा: ईरान ने अमेरिकी मांगों पर जताई सहमति, पश्चिम एशिया में युद्ध खत्म होने की ओर</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि सैन्य संघर्ष समाप्त करने की वार्ता के दौरान ईरान ने अमेरिका की लगभग सभी प्रमुख मांगों पर सहमति जता दी है। जून 2026 में हुए एक अहम समझौते के तहत हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में नौवहन बहाल करने और अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी हटाने की समय सीमा तय की गई है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/trumps-big-claim-that-iran-agreed-to-american-demands-towards/article-158749"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-07/trump-(2).png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि पश्चिम एशिया में युद्ध समाप्त करने को लेकर हुई वार्ता के दौरान ईरान ने अमेरिका के लगभग सभी प्रमुख मुद्दों पर सहमति जतायी थी। ट्रंप ने कहा, "हमने उन्हें सैन्य रूप से पूरी तरह पराजित कर दिया है। उनके पास कुछ मिसाइलें बची हैं, जिन्हें भी हम नष्ट कर सकते हैं। उन्होंने हमारी लगभग सभी प्रमुख मांगों पर सहमति दे दी है।"</p>
<p>रिपोर्ट के अनुसार, 18 जून की रात ईरान और अमेरिका के बीच एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर हुए, जिसमें 28 फरवरी से जारी सैन्य संघर्ष समाप्त करने का प्रावधान किया गया है। समझौते में अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी हटाने और ईरान द्वारा हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य में नौवहन बहाल करने की समय सीमा भी निर्धारित की गयी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 03 Jul 2026 14:30:57 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>अमेरिका-इजरायल के बीच भूमि आवंटन समझौता: यरुशलम में बनेगा अमेरिकी दूतावास का स्थायी परिसर, ट्रंप के फैसले को मिली नई रफ्तार </title>
                                    <description><![CDATA[इजरायल और अमेरिका ने यरुशलम में अमेरिकी दूतावास के स्थायी परिसर के निर्माण के लिए भूमि आवंटन समझौते पर हस्ताक्षर किए। यह कदम 2017 में यरुशलम को इजरायल की राजधानी मानने के अमेरिकी फैसले की दिशा में अहम माना जा रहा है। इस निर्णय पर पहले भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विवाद और विरोध देखने को मिला था।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/land-allocation-agreement-between-america-and-israel-permanent-complex-of/article-158636"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-07/02.png" alt=""></a><br /><p>तेल अवीव। इजरायल और अमेरिका ने यरुशलम में अमेरिकी दूतावास के स्थायी परिसर के निर्माण के लिए भूमि आवंटन संबंधी एक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इजरायल के विदेश मंत्रालय ने बुधवार को यह जानकारी दी। मंत्रालय के अनुसार, विदेश मंत्री गिदोन सार और इजरायल में अमेरिकी राजदूत माइक हकाबी ने यरुशलम के मेयर मोशे लियोन की मौजूदगी में विदेश मंत्रालय में इस समझौते पर हस्ताक्षर किए। इसके तहत यरुशलम में अमेरिकी दूतावास के स्थायी परिसर के निर्माण के लिए भूमि आवंटित की गई है, जिसे इजरायल अपनी शाश्वत राजधानी मानता है।</p>
<p>विदेश मंत्रालय ने कहा कि यह कदम सरकार के उस निर्णय के क्रियान्वयन में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर है, जिसके तहत दूतावास के लिए एलनबी परिसर आवंटित किया गया। यह उस कूटनीतिक प्रक्रिया का भी महत्वपूर्ण चरण है जिसकी शुरुआत दिसंबर 2017 में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा यरुशलम को इजरायल की राजधानी के रूप में मान्यता दिए जाने के साथ हुई थी। गौरतलब है कि, ट्रंप प्रशासन ने दिसंबर 2017 में यरुशलम को इजरायल की राजधानी के रूप में मान्यता दी थी और 14 मई 2018 को अमेरिकी दूतावास को तेल अवीव से यरुशलम स्थानांतरित कर दिया था। इस फैसले के बाद फ़िलीस्तीनी क्षेत्रों में अशांति फैल गई थी और अरब जगत के कई देशों में विरोध प्रदर्शन हुए थे।</p>
<p>इजरायल यरुशलम को अपनी एकीकृत और अविभाज्य राजधानी मानता है, जबकि अधिकांश देश पूर्वी यरुशलम के इजरायल में विलय को मान्यता नहीं देते। उनका मानना है कि यरुशलम की अंतिम स्थिति फ़िलीस्तीनियों और इजरायल के बीच आपसी सहमति से तय की जानी चाहिए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 02 Jul 2026 18:25:58 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>ट्रंप का बड़ा दांव: जन्म के आधार पर नागरिकता खत्म करने के लिए लाएंगे नया कानून, छिड़ी नई कानूनी लड़ाई</title>
                                    <description><![CDATA[सुप्रीम कोर्ट से झटका मिलने के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जन्म के आधार पर मिलने वाली अमेरिकी नागरिकता खत्म करने के लिए संसद से नया कानून लाने की वकालत की। ट्रंप ने इसे महंगा और अनुचित बताते हुए कहा कि संवैधानिक संशोधन के बजाय विधायी रास्ते से बदलाव संभव है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/trumps-big-bet-he-will-bring-a-new-law-to/article-158527"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/trump3.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि 'जन्म के आधार पर नागरिकता' उनके देश के लिए अच्छी नहीं है और वह इसके खिलाफ जल्द ही संसद में कानून देखना चाहेंगे। ट्रंप ने मंगलवार रात ट्रुथ सोशल पर लिखे एक पोस्ट में कहा, "सुप्रीम कोर्ट ने जन्मजात नागरिकता को बरकरार रखा है, जो हमारे देश के लिए बहुत बुरा है। हम राष्ट्रपति के समर्थन से संसद में कानून लाकर इसमें बदलाव कर सकते हैं। इस प्रक्रिया के दौरान अब यह तय हो गया है। अब किसी लंबे और बोझल संवैधानिक संशोधन की जरूरत नहीं है।"</p>
<p>उल्लेखनीय है कि अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को ट्रंप के उस प्रयास को सिरे से खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने एक कार्यकारी आदेश के जरिये अमेरिका में जन्मजात नागरिकता को खत्म करने की कोशिश की थी। कोर्ट ने एक सदी से भी अधिक पुराने कानूनी मिसाल और राष्ट्रीय परंपरा को बरकरार रखते हुए साफ किया कि अमेरिकी धरती पर पैदा होने वाले बच्चे स्वाभाविक रूप से अमेरिका के नागरिक हैं।<br />सुप्रीम कोर्ट का यह 6-3 से आया फैसला ट्रंप के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है। </p>
<p>ट्रंप ने इस कार्यकारी आदेश को बरकरार रखने के लिए अदालत से लगातार पैरवी की थी। वह इस मामले की मौखिक बहस में भी शामिल हुए थे। वह इस तरह की कानूनी बहस में हिस्सा लेने वाले अमेरिका के पहले मौजूदा राष्ट्रपति बने थे। अब वह संसद के जरिए इस बदलाव को मूर्त रूप देना चाहते हैं। ट्रंप ने लिखा, "संसद को आज ही जन्मजात नागरिकता खत्म करने की ओर काम शुरू करना चाहिये, जो हमारे देश के लिए बहुत महंगा और अनुचित है। उन्हें मेरा संपूर्ण समर्थन प्राप्त होगा।"</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 01 Jul 2026 16:02:58 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>ट्रंप का बड़ा दावा: आज दोहा में होगी अमेरिका-ईरान शांति वार्ता, तेहरान ने तुरंत किया खंडन</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दोहा में अमेरिका-ईरान वार्ता का दावा किया, लेकिन ईरान ने ऐसी किसी निर्धारित बातचीत से इनकार कर दिया। दोनों देशों के विरोधाभासी बयानों से कूटनीतिक तनाव और अविश्वास उजागर हुआ। इस बीच युद्धविराम, होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गतिविधियां तेज हो गई हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/trumps-big-claim-that-america-iran-peace-talks-will-be-held/article-158494"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/donald-trump.jpg" alt=""></a><br /><p>दोहा। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका और ईरान के बीच मंगलवार को कतर की राजधानी दोहा में वार्ता होगी, जबकि ईरान ने स्पष्ट किया है कि आने वाले दिनों में वाशिंगटन के साथ किसी भी स्तर की वार्ता निर्धारित नहीं है। ट्रंप ने कहा कि उनके विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और पूर्व वरिष्ठ सलाहकार जैरेड कुशनर दोहा जा रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि उच्चस्तरीय बैठकों के साथ-साथ तकनीकी स्तर की वार्ता भी जारी रहेगी।</p>
<p>ट्रंप ने सोमवार को सोशल मीडिया पर दावा किया कि ईरान ने बैठक का अनुरोध किया था और यह बैठक दोहा में होगी, हालांकि उन्होंने इसके बारे में कोई अन्य विवरण नहीं दिया। अमेरिका के दो अधिकारियों ने भी पुष्टि की कि विटकॉफ और कुशनर दोहा जा रहे हैं। उनके अनुसार वाशिंगटन युद्धविराम को व्यापक समझौते में बदलने के उद्देश्य से वार्ता को आगे बढ़ाना चाहता है। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने कहा,"विशेष दूत विटकॉफ और जारेड कुशनर इस सप्ताह उच्चस्तरीय बैठकों के लिए दोहा जाएंगे। इन बैठकों के समानांतर तकनीकी स्तर की वार्ता भी होगी।"</p>
<p>उन्होंने कहा, "हमारी ओर से युद्धविराम का पूरी तरह पालन किया जा रहा है। यदि हिंसा हुई तो उसका जवाब भी उसी प्रकार दिया जाएगा।" अमेरिका और ईरान ने 17 जून को 14 सूत्रीय समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए थे, जिसका उद्देश्य चार महीने से जारी संघर्ष समाप्त करना था। इस समझौते के तहत दोनों पक्षों ने शत्रुता समाप्त करने और होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने पर सहमति व्यक्त की थी, जहां से दुनिया के लगभग पांचवें हिस्से का तेल और तरलीकृत प्राकृतिक गैस का समुद्री परिवहन होता है।</p>
<p>ट्रंप के बयान से संकेत मिलता है कि ईरान की ओर से औपचारिक वार्ता से इनकार किये जाने के बावजूद अमेरिका कूटनीतिक प्रयास जारी रखना चाहता है। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने किसी भी आसन्न वार्ता की खबरों को खारिज करते हुए कहा कि आने वाले दिनों में अमेरिका के साथ किसी भी स्तर पर बातचीत निर्धारित नहीं है। उन्होंने ईरान में संवाददाताओं से कहा, "अमेरिकी प्रतिनिधियों के कतर जाने का ईरानी प्रतिनिधिमंडल की यात्रा से कोई संबंध नहीं है।"</p>
<p>दोनों पक्षों के विरोधाभासी बयानों से उनके बीच गहरे अविश्वास का संकेत मिलता है। साथ ही हालिया सैन्य टकरावों के बाद 60 दिनों के भीतर व्यापक समझौते तक पहुंचने की संभावना पर भी सवाल खड़े हो गये हैं। बघाई ने कहा कि ईरान और अमेरिका अभी अंतिम समझौते पर बातचीत के चरण में नहीं पहुंचे हैं। उन्होंने कहा कि फिलहाल तेहरान की प्राथमिकता हालिया मध्यस्थता के बाद हुए समझौता ज्ञापन में किए गए वादों को लागू कराना है।</p>
<p>उन्होंने कहा, "समझौता ज्ञापन की धारा 13 के अनुसार अंतिम समझौते पर वार्ता तभी शुरू हो सकती है, जब धारा 1, 4, 5, 10 और 11 का क्रियान्वयन शुरू हो जाए।" बघाई के अनुसार अमेरिका ने धारा 10 के तहत ईरानी तेल की बिक्री से संबंधित लाइसेंस जारी किए हैं, जबकि तेहरान धारा 11 के तहत ईरान की जब्त संपत्तियों को मुक्त कराने की प्रक्रिया आगे बढ़ा रहा है। उन्होंने कहा कि इसी सिलसिले में इस सप्ताह के अंत में ईरान का एक विशेषज्ञ प्रतिनिधिमंडल दोहा जाएगा, लेकिन इसका अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल की यात्रा से कोई संबंध नहीं है।</p>
<p>इस बीच ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने कहा कि यदि अमेरिका अपनी प्रतिबद्धताओं का पालन करेगा तो ईरान भी समझौते का सम्मान करेगा, हालांकि उन्होंने चेतावनी दी कि किसी भी प्रकार की धमकी का ईरान दृढ़ता से जवाब देगा। उन्होंने कहा, "यदि अमेरिका अपनी जिम्मेदारियां निभाता है तो ईरान भी समझौते के प्रति प्रतिबद्ध रहेगा," लेकिन साथ ही स्पष्ट किया कि देश अपने हितों की रक्षा करने में कोई हिचकिचाहट नहीं करेगा।</p>
<p>ईरानी राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि कतर में जमी ईरान की लगभग 12 अरब डॉलर की संपत्ति में से आधी राशि तेहरान को वापस मिलेगी। यह मुद्दा वर्तमान कूटनीतिक प्रयासों का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है। होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा को लेकर जारी अंतरराष्ट्रीय चिंताओं के बीच ईरान ने इस सुझाव को भी खारिज कर दिया कि अन्य देश वहां बारूदी सुरंग हटाने के अभियान में भाग लें। ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम ग़रीबाबादी ने कहा कि जलडमरूमध्य में बारूदी सुरंग हटाने का कार्य केवल ईरान करेगा। उन्होंने फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के उस बयान को अस्वीकार किया, जिसमें फ्रांस, ओमान और अन्य देशों की संभावित भूमिका का उल्लेख किया गया था।</p>
<p>ग़रीबाबादी ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर लिखा, "समझौता ज्ञापन के अनुसार होर्मुज जलडमरूमध्य में सुरंग हटाने का कार्य केवल ईरान करेगा। किसी अन्य देश को इसकी अनुमति नहीं दी जाएगी।" उन्होंने कहा कि स्थिति अब भी संवेदनशील और जटिल बनी हुई है तथा फ्रांस को भड़काऊ बयान देकर इसे और जटिल नहीं बनाना चाहिए। उधर इजरायल के रक्षा मंत्री इजरायल काट्ज ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान और लेबनान दोनों से जुड़े युद्धविराम समझौतों को एक-दूसरे से जोड़ने पर जोर दिया, जबकि इजरायल दोनों मामलों को अलग-अलग रखना चाहता था। </p>
<p>काट्ज ने कहा कि अमेरिका ने इजरायल को तब तक लेबनान के कुछ हिस्सों में अपनी सैन्य उपस्थिति बनाए रखने का समर्थन दिया है, जब तक हिजबुल्ला पूरी तरह निरस्त्र नहीं हो जाता। इजरायल और लेबनान के बीच समझौता हो चुका है, फिर भी लेबनान की संसद के अध्यक्ष और हिजबुल्ला के प्रमुख सहयोगी नबीह बेरी ने अमेरिका की मध्यस्थता में हुए समझौते की आलोचना करते हुए कहा कि "इसका क्रियान्वयन नहीं होगा।"</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
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                <pubDate>Tue, 30 Jun 2026 16:12:36 +0530</pubDate>
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                <title>क्या टल गया तीसरे विश्व युद्ध का खतरा? अमेरिका-ईरान ने तनाव घटाने पर जताई सहमति, तकनीकी वार्ता जारी</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य टकराव के बाद फिलहाल दोनों पक्ष पीछे हटने पर सहमत हुए हैं। ट्रंप प्रशासन के अनुसार, होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से वाणिज्यिक जहाजों का आवागमन जारी रखने के लिए अंतरिम व्यवस्था लागू की गई है। हालांकि, क्षेत्र में सुरक्षा को लेकर अनिश्चितता और तनाव अभी भी बना हुआ है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/has-the-threat-of-third-world-war-been-averted-america-iran/article-158362"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/12200-x-600-px)9.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिका और ईरान के बीच हालिया सैन्य हमलों के बाद दोनों पक्षों ने फिलहाल तनाव कम करने पर सहमति जतायी है। ट्रंप प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने रविवार को कहा कि दोनों पक्ष "फिलहाल पीछे हटेंगे" और होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही जारी रहेगी। इस संबंध में ईरान की ओर से अब तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गयी है। रिपोर्ट के अनुसार, अधिकारी ने कहा कि दोनों पक्षों के बीच एक अंतरिम व्यवस्था लागू है और जहाजों की आवाजाही में बाधा नहीं आएगी। </p>
<p>होर्मुज में वास्तविक स्थिति अभी भी सामान्य नहीं दिख रही है, जिससे वाणिज्यिक जहाजों के संचालकों और चालक दल के बीच अनिश्चितता और सुरक्षा संबंधी चिंताएं बनी हुई हैं। उल्लेखनीय है कि ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (आईआरजीसी) ने दावा किया कि अमेरिका द्वारा ईरानी ठिकानों पर हमले किये जाने के बाद उसने कुवैत और बहरीन सहित पड़ोसी देशों में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। इससे पहले होर्मुज में आवाजाही के कारण अमेरिका-ईरान के बीच हमलों का आदान-प्रदान हुआ था।</p>
<p>एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने कहा कि ईरान के साथ तकनीकी स्तर की वार्ता निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार जारी है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पहले चेतावनी दे चुके हैं कि यदि ईरान की ओर से हमले जारी रहे तो अमेरिका और सैन्य कार्रवाई करेगा। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने रविवार को कहा कि क्षेत्र के देशों को अपनी भूमि अथवा सुविधाओं का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ हमलों के लिए नहीं होने देना चाहिये।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 29 Jun 2026 13:04:28 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>डोनालड ट्रंप की चेतावनी: ईरान जब तक परमाणु हथियार बनाने की जिद्द नहीं छोड़ता तब तक नाकेबंदी रहेगी जारी, ईरानी राष्ट्रपति का दावा-परमाणु कार्यक्रम केवल नागरिक उद्देश्यों के लिए और कुछ नहीं</title>
                                    <description><![CDATA[राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को परमाणु शर्तों पर समझौता न करने पर नौसैनिक नाकेबंदी और आर्थिक दबाव बढ़ाने की चेतावनी दी है। इस तनाव के कारण ब्रेंट क्रूड $125 प्रति बैरल के पार पहुंच गया है। ट्रंप ने इसे बमबारी से अधिक प्रभावी बताया है, जिससे एशियाई अर्थव्यवस्थाओं और ग्लोबल सप्लाई चेन पर गंभीर संकट मंडरा रहा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/donald-trumps-warning-that-the-blockade-will-continue-until-iran/article-152199"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/trump4.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने गुरुवार को ईरान को परमाणु समझौते की शर्तों पर सहमत होने की चेतावनी देते हुए कहा है कि ऐसा न होने पर अमेरिका उसके बंदरगाहों की नौसैनिक नाकेबंदी जारी रखेगा और आर्थिक दबाव बढ़ाएगा। ट्रंप ने दोहराया कि यदि ईरान परमाणु हथियार बनाना जारी रखता है, तो उसके साथ 'कभी कोई समझौता नहीं' होगा। दूसरी ओर, ईरान का कहना है कि उसका परमाणु कार्यक्रम केवल नागरिक उद्देश्यों के लिए है।</p>
<p>अमेरिकी राष्ट्रपति और उनकी राष्ट्रीय सुरक्षा टीम ईरान के ताजा प्रस्ताव पर चर्चा कर रही है, जिसमें ईरान ने पहले होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने और नाकेबंदी हटाने का सुझाव दिया है, जबकि परमाणु वार्ता को स्थगित करने की बात कही है। नाकेबंदी जारी रखने के ट्रंप के फैसले से वैश्विक तेल बेंचमार्क 'ब्रेंट क्रूड' की कीमतें गुरुवार को 125 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुँच गईं। अमेरिकी राष्ट्रपति ने इस रणनीति का बचाव करते हुए कहा कि नाकेबंदी प्रत्यक्ष सैन्य कार्रवाई से अधिक प्रभावी हो सकती है। उन्होंने ईरान से जल्द कार्रवाई करने का आग्रह किया और कहा कि अधिकारी जरूरत पड़ने पर महीनों तक नाकेबंदी जारी रखने के तरीके खोज रहे हैं।</p>
<p>अमेरिकी नीति निर्माताओं का मानना है कि लंबे समय तक लगे प्रतिबंध अंततः ईरान को तेल उत्पादन रोकने के लिए मजबूर कर सकते हैं। यह संघर्ष अब दसवें सप्ताह में प्रवेश कर चुका है, जबकि इसके चार से छह सप्ताह में सुलझने की उम्मीद थी। होर्मुज जलडमरूमध्य के प्रतिबंधित रहने से वैश्विक आपूर्ति से प्रतिदिन लगभग दो करोड़ बैरल तेल कम हो रहा है। अमेरिका की इस लंबी नाकेबंदी की तैयारी से एशियाई अर्थव्यवस्थाएं प्रभावित हो रही हैं। क्षेत्र के कई देश ऊर्जा आपूर्ति के लिए इस जलडमरूमध्य पर निर्भर हैं और कच्चे तेल, प्राकृतिक गैस, प्लास्टिक तथा उर्वरकों की आपूर्ति में कमी महसूस की जा रही है।</p>
<p>इस बीच, पाकिस्तान की मध्यस्थता की कोशिशें भी विफल रही हैं। ट्रंप ने कहा कि यदि ईरान बातचीत करना चाहता है तो वह कॉल कर सकता है। उन्होंने बताया कि अभी टेलीफोन के माध्यम से बातचीत हो रही है। 'एक्सियोस' के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प नाकेबंदी को 'बमबारी से अधिक प्रभावी' मानते हैं। हालांकि, सूत्रों का यह भी कहना है कि अमेरिकी सेंट्रल कमांड बातचीत के गतिरोध को तोड़ने के लिए ईरान पर 'शक्तिशाली हमलों' की तैयारी कर रहा है लेकिन मंगलवार रात तक ट्रंप ने किसी हमले का आदेश नहीं दिया था। दूसरी ओर, ईरान ने संकल्प लिया है कि जब तक वह खतरा महसूस करेगा, होर्मुज जलडमरूमध्य में यातायात बाधित करना जारी रखेगा। संयुक्त राष्ट्र में ईरानी प्रतिनिधि ने अमेरिकी नाकेबंदी को 'समुद्री डकैती' करार दिया और चेतावनी दी कि इसका 'अभूतपूर्व' जवाब दिया जाएगा। हालांकि, ईरानी बलों ने कूटनीति को मौका देने के लिए अब तक संयम दिखाया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 30 Apr 2026 17:55:45 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>पश्चिम एशिया संकट : डोनाल्ड ट्रंप ने की फ्रेडरिक मर्ज़ की तीखी आलोचना, होर्मुज जलडमरूमध्य के घटनाक्रम पर भी जताई चिंता </title>
                                    <description><![CDATA[राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ की तीखी आलोचना करते हुए ईरान पर उनके रुख को खतरनाक बताया है। ट्रंप का दावा है कि परमाणु संपन्न ईरान दुनिया को बंधक बना लेगा। वहीं, जर्मनी ने अमेरिका की युद्ध नीति और ऊर्जा बाजारों पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभावों पर चिंता जताई है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/west-asia-crisis-donald-trump-sharply-criticized-friedrich-merz-also/article-152097"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/trump.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। ईरान के मुद्दे पर अमेरिका और उसके यूरोपीय सहयोगियों के बीच गहराते मतभेद के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि मर्ज़ को लगता है कि ईरान का परमाणु हथियार संपन्न होना ठीक है। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रूथ सोशल पर कहा कि इसमें कोई आश्चर्य नहीं है कि जर्मनी आर्थिक और अन्य मोर्चों पर इतना खराब प्रदर्शन कर रहा है। उन्होंने कहा कि जर्मन चांसलर को नहीं पता कि वह क्या कह रहे हैं।</p>
<p>अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि यदि ईरान के पास परमाणु हथियार होता, तो पूरी दुनिया को बंधक बना लिया जाता। उन्होंने कहा कि वह अभी ईरान के संबंध में वह कदम उठा रहे हैं, जो अन्य देशों या राष्ट्रपतियों को बहुत पहले कर लेने चाहिए थे। यह तीखी प्रतिक्रिया मर्ज़ द्वारा ईरान मुद्दे पर अमेरिकी दृष्टिकोण की आलोचना के बाद आई है। जर्मन चांसलर ने कहा था कि ईरान का नेतृत्व अमेरिका को अपमानित कर रहा है और ऐसा प्रतीत नहीं होता कि अमेरिका के पास इस युद्ध से बाहर निकलने की कोई स्पष्ट योजना है। मर्ज़ ने होर्मुज जलडमरूमध्य के घटनाक्रम पर भी चिंता व्यक्त करते हुए कहा था कि वहां होने वाले व्यवधान के ऊर्जा बाजारों और वैश्विक व्यापार के लिए दूरगामी परिणाम हो सकते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 29 Apr 2026 16:52:04 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>ईरान को परमाणु हथियार विकसित करने की अनुमति नहीं दिये जाने के पक्षधर हैं सम्राट चार्ल्स-3 : डोनाल्ड ट्रंप</title>
                                    <description><![CDATA[राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि सम्राट चार्ल्स ईरान के परमाणु कार्यक्रम को रोकने पर सहमत हैं। हालांकि, ब्रिटिश सम्राट की राजनीतिक तटस्थता के कारण यह बयान चर्चा में है। व्हाइट हाउस में आयोजित राजकीय भोज के दौरान दोनों नेताओं के बीच ऐतिहासिक संदर्भों और कूटनीति पर हल्के-फुल्के अंदाज में दिलचस्प संवाद भी हुआ।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/emperor-charles-3-donald-trump-is-in-favor-of-not-allowing/article-152096"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-04/donlad-trump-3.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि ब्रिटेन के सम्राट चार्ल्स-3 भी इस बात से सहमत हैं कि ईरान को परमाणु हथियार विकसित करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। डोनाल्ड ट्रंप ने पश्चिम एशिया नीति पर टिप्पणी करते हुए कहा कि ईरान को कभी भी परमाणु हथियार हासिल नहीं करने दिया जाएगा और इस मुद्दे पर सम्राट चार्ल्स भी उनकी सोच से सहमत हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति की यह टिप्पणी ब्रिटेन की संवैधानिक परंपराओं के संदर्भ में असहज मानी जा रही है, क्योंकि ब्रिटिश सम्राट परंपरागत रूप से राजनीतिक रूप से तटस्थ रहते हैं और सरकारी नीति या अंतरराष्ट्रीय संघर्षों पर सार्वजनिक रूप से पक्ष नहीं लेते। ब्रिटेन में संवैधानिक व्यवस्था के तहत सम्राट किसी भी दलगत या प्रत्यक्ष राजनीतिक रुख से दूरी बनाए रखते हैं। ऐसे में ट्रंप का यह दावा राजनीतिक और कूटनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है।</p>
<p>इस बीच ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि ईरान से जुड़ा युद्ध ब्रिटेन का युद्ध नहीं है और वह इस संघर्ष में प्रत्यक्ष रूप से शामिल होने के पक्ष में नहीं हैं। उन्होंने यह भी दोहराया है कि ईरान को परमाणु हथियार नहीं मिलने चाहिए, जो लंबे समय से ब्रिटिश सरकारों की नीति रही है। हाल के अमेरिकी दौरे के दौरान सम्राट चार्ल्स ने अमेरिकी कांग्रेस की संयुक्त बैठक को संबोधित करते हुए अमेरिका-ब्रिटेन संबंधों, साझा मूल्यों और वैश्विक सहयोग पर जोर दिया था। उनकी यात्रा को दोनों सहयोगी देशों के बीच बढ़ते कूटनीतिक तनाव को कम करने के एक प्रयास के रूप में व्यापक रूप से देखा गया।</p>
<p>ईरान संघर्ष से निपटने के तरीके को लेकर कुछ सहयोगी देशों के साथ मतभेदों के बाद ट्रंप ने अमेरिका को नाटो से अलग करने की संभावना जतायी है। इस कदम के लिए कांग्रेस की मंज़ूरी ज़रूरी होगी और इसका कड़ा विरोध होने की उम्मीद है। व्हाइट हाउस में आयोजित राजकीय भोज के दौरान सम्राट चार्ल्स और ट्रंप के बीच हल्के-फुल्के अंदाज में ऐतिहासिक संदर्भों पर आधारित हास्यपूर्ण टिप्पणियां भी हुईं। सम्राट चार्ल्स ने ट्रंप के एक हालिया बयान का जवाब देते हुए मजाकिया लहजे में कहा कि यदि ब्रिटिश प्रभाव न होता तो शायद अमेरिकी फ्रेंच भाषा बोल रहे होते, जिस पर उपस्थित लोगों ने ठहाके लगाए। उल्लेखनीय है कि ट्रंप ने दावोस शिखर सम्मेलन में कहा था कि विश्व युद्ध-2 में अगर अमेरिका हस्तक्षेप न करता तो ब्रिटेन के लोग जर्मन और जापानी भाषाएं बोल रहे होते।</p>
<p>अमेरिकी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार सम्राट चार्ल्स ने कुछ समकालीन विषयों पर भी बात की और व्हाइट हाउस के 'ईस्ट विंग' में हुए "पुनर्समायोजनों" का ज़िक्र किया। बताया जाता है कि ट्रंप ने एक नयी बॉलरूम परियोजना के हिस्से के तौर पर इस विंग को फिर से विकसित करवाया है। इसके बाद उन्होंने 1812 के युद्ध का एक ऐतिहासिक संदर्भ दिया, जब ब्रिटिश सेनाओं ने व्हाइट हाउस को जला दिया था। सम्राट चार्ल्स ने कहा, "मुझे यह कहते हुए अफ़सोस है कि हम ब्रिटिश लोगों ने 1814 में व्हाइट हाउस के रियल एस्टेट पुनर्विकास का प्रयास किया था।" उन्होंने 'बॉस्टन टी पार्टी' का भी ज़िक्र किया और मज़ाकिया लहजे में कहा कि यह 'स्टेट डिनर' 1773 के उस विरोध प्रदर्शन से 'काफ़ी बेहतर' है, जिसमें अमेरिकी उपनिवेशवादियों ने ब्रिटिश चाय को बंदरगाह में फेंक दिया था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 29 Apr 2026 15:43:46 +0530</pubDate>
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                <title>ट्रंप की भारत विरोधी टिप्पणी पर युवा कांग्रेस का प्रदर्शन : अमेरिकी दूतावास के बाहर की नारेबाजी, लाकड़ा ने कहा-देश का अपमान नहीं किया जाएगा बर्दाश्त </title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की भारत विरोधी कथित टिप्पणी के खिलाफ युवा कांग्रेस ने दिल्ली में अमेरिकी दूतावास के बाहर उग्र प्रदर्शन किया। कार्यकर्ताओं ने तीन मूर्ति सर्किल से मार्च निकाला, जिन्हें पुलिस ने हिरासत में लिया। प्रदेश अध्यक्ष अक्षय लाकड़ा ने स्पष्ट किया कि देश के सम्मान के साथ कोई भी समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/youth-congress-protest-on-trumps-anti-india-remarks-sloganeering-outside-us/article-151867"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/lakda.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। युवा कांग्रेस ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की भारत को लेकर कथित 'हेल होल' टिप्पणी के विरोध में सोमवार को यहां अमेरिकी दूतावास के बाहर प्रदर्शन किया। युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता वरुण पांडे ने आज यहां बताया कि प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने तीन मूर्ति सर्किल से अमेरिकी दूतावास की ओर मार्च करने का प्रयास किया, लेकिन दिल्ली पुलिस ने बैरिकेडिंग कर उन्हें रोक दिया और कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया।</p>
<p>इस अवसर पर दिल्ली प्रदेश युवा कांग्रेस के अध्यक्ष अक्षय लाकड़ा ने आरोप लगाया कि ट्रंप लगातार भारत के खिलाफ टिप्पणी कर रहे हैं और 'हेल होल' जैसे शब्दों का प्रयोग कर देश का अपमान किया है, जिसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि देश के सम्मान के खिलाफ कोई भी बयान स्वीकार्य नहीं है और युवा कांग्रेस इसका विरोध करती रहेगी। इस प्रदर्शन का उद्देश्य दुनिया को स्पष्ट संदेश देना है कि भारत के सम्मान से कोई समझौता नहीं होगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 27 Apr 2026 18:40:17 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>ईरान-अमेरिका वार्ता पर तनाव : ईरानी प्रवक्ता इब्राहिम रजाई का कड़ा रुख, बोले-मध्यस्थता के लिए पाकिस्तान के पास नहीं है आवश्यक विश्वसनीयता</title>
                                    <description><![CDATA[ईरानी संसद ने स्पष्ट किया है कि पाकिस्तान के पास अमेरिका के साथ बातचीत के लिए आवश्यक विश्वसनीयता नहीं है। प्रवक्ता इब्राहिम रजाई ने कहा कि इस्लामाबाद डोनाल्ड ट्रंप के हितों के आगे निष्पक्ष रहने में विफल रहा है। होर्मुज जलडमरूमध्य संकट और ऊर्जा युद्ध के बीच, ईरान ने सीधी बातचीत से इनकार करते हुए तटस्थ मध्यस्थ की मांग की है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/tension-on-iran-america-talks-iranian-spokesperson-takes-a-tough-stance/article-151845"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/pakistan3.png" alt=""></a><br /><p>तेहरान। ईरानी संसद के प्रवक्ता इब्राहिम रजाई ने सोमवार को ईरान और अमेरिका के बीच वार्ता को लेकर पाकिस्तान की मध्यस्थता पर कड़ी आलोचना करते हुए स्पष्ट रूप से कहा कि 'मध्यस्थता के लिए पाकिस्तान के पास आवश्यक विश्वसनीयता नहीं है।' सांसद ने आरोप लगाया कि इस्लामाबाद 'हमेशा अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हितों का ध्यान रखता है और अमेरिकियों की इच्छा के विरुद्ध एक शब्द भी नहीं बोलता। पाकिस्तान हमारा एक अच्छा दोस्त और पड़ोसी है, लेकिन वह बातचीत के लिए उपयुक्त मध्यस्थ नहीं है।' उन्होंने कहा कि ईरान का मानना है कि एक मध्यस्थ को निष्पक्ष होना चाहिए और दोनों पक्षों को असहज सच बोलने के लिए तैयार रहना चाहिए, जिसमें पाकिस्तान विफल रहा है।</p>
<p>रजाई के अनुसार, पाकिस्तान यह सार्वजनिक रूप से स्वीकार करने को तैयार नहीं है कि अमेरिका ने शुरू में प्रस्ताव स्वीकार किया और फिर उससे पीछे हट गया। उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान लेबनान और ईरान की रुकी हुई वित्तीय संपत्तियों के संबंध में अमेरिका को उसकी प्रतिबद्धताओं के लिए जवाबदेह ठहराने में विफल रहा है। सबसे गंभीर आरोप उस 10-सूत्रीय वार्ता ढांचे को लेकर है, जिसे ईरान का दावा है कि तेहरान यात्रा के दौरान पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर को सीधे सौंपा गया था। ईरान के अनुसार, जनरल मुनीर को यह प्रस्ताव इस समझ के साथ दिया गया था कि इसे अमेरिकी पक्ष तक पहुँचाया जाएगा, लेकिन ईरान का कहना है कि उसे अब तक कोई प्रतिक्रिया या पावती नहीं मिली है।</p>
<p>यह कूटनीतिक तनाव 28 फरवरी को ईरान पर अमेरिका-इजरायल के हमलों के बाद शुरू हुए संघर्ष की पृष्ठभूमि में सामने आया है। इस युद्ध ने होर्मुज जलडमरूमध्य को लगभग बंद कर दिया है, जिससे वैश्विक ऊर्जा संकट पैदा हो गया है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अमेरिका के साथ सीधी बातचीत से इनकार कर दिया है। दूसरी ओर, ट्रंप ने सोशल मीडिया पर संकेत दिया कि यदि ईरान बात करना चाहता है, तो उन्हें बस फोन करना चाहिए, लेकिन अमेरिका अब इस्लामाबाद में वरिष्ठ वार्ताकार नहीं भेजेगा। पाकिस्तान की मुस्लिम जगत के शांति मध्यस्थ बनने की महत्वाकांक्षा को इस कूटनीतिक गतिरोध से बड़ा झटका लगा है। ईरान का संदेश स्पष्ट है- तटस्थता दिखाई देनी चाहिए, केवल उसका दावा करना पर्याप्त नहीं है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 27 Apr 2026 15:53:51 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>ट्रंप की ईरान को चेतावनी : समय के साथ नाकेबंदी और भी बदतर होगी, बोले- युद्ध खत्म करने के लिए बेचैन</title>
                                    <description><![CDATA[राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर नकेल कसते हुए कहा कि अमेरिकी नाकेबंदी अब और सख्त होगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि कोई भी समझौता केवल अमेरिकी हितों के आधार पर होगा। ट्रंप ने ईरान की सैन्य शक्ति के पतन का दावा करते हुए कहा कि उनके पास दुनिया भर का समय है, लेकिन ईरान के पास नहीं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/trumps-warning-to-iran-that-the-blockade-will-get-worse/article-151534"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/iran2.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को एक बार फिर ईरान को चेतावनी देते हुए कहा कि घड़ी की सुई टिक-टिक कर रही है और यह नाकेबंदी तब तक और भी बदतर होती जाएगी, जब तक कि कोई ऐसा समझौता नहीं हो जाता जो अमेरिका और उसके सहयोगियों के लिए फायदेमंद हो। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कहा, "समय उनके पक्ष में नहीं है। यह नाकेबंदी पूरी तरह से अभेद्य और मज़बूत है और अब यहाँ से स्थिति और भी खराब होती जायेगी। कोई भी समझौता तभी किया जाएगा, जब वह अमेरिका, उसके सहयोगियों और बाकी दुनिया के लिए उचित और हितकारी होगा।"</p>
<p>अमेरिकी मीडिया पर एक बार फिर निशाना साधते हुए राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि न्यूयॉर्क टाइम्स और सीएनएन जैसे मीडिया संस्थानों को लगता है, "मैं ईरान के साथ युद्ध खत्म करने के लिए बेचैन हूँ।" उन्होंने कहा, "कृपया यह जान लें कि इस पद पर रहते हुए शायद मैं अब तक का सबसे कम दबाव महसूस करने वाला व्यक्ति हूँ। मेरे पास दुनिया भर का समय है, लेकिन ईरान के पास नहीं। घड़ी की सुई टिक-टिक कर रही है।" उन्होंने कहा कि ईरान की नौसेना समुद्र की रसातल में है, उनकी वायुसेना पूरी तरह से तबाह हो चुकी है, उनके विमान-रोधी और रडार हथियार नष्ट हो चुके हैं, और उनके नेता अब हमारे बीच नहीं रहे।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 24 Apr 2026 15:15:05 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>डोनाल्ड ट्रंप की घोषणा: तीन हफ़्तों के लिए और बढ़ा इज़रायल और लेबनान के बीच संघर्ष-विराम, नेतन्याहू और जोसेफ आउन के बीच शिखर सम्मेलन की मेजबानी की संभावना</title>
                                    <description><![CDATA[राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इज़रायल और लेबनान के बीच संघर्ष विराम को तीन सप्ताह के लिए बढ़ाने की घोषणा की है। व्हाइट हाउस में हुई उच्च स्तरीय बैठक के बाद ट्रंप ने हिज़्बुल्लाह के विरुद्ध लेबनान की रक्षा का संकल्प लिया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/donald-trumps-announcement-extends-the-ceasefire-between-israel-and-lebanon/article-151524"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/trump3.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। इज़रायल और लेबनान के बीच संघर्ष विराम को तीन हफ़्तों के लिए बढ़ा दिया गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने शुक्रवार को यह घोषणा की। यह फ़ैसला व्हाइट हाउस के ओवल ऑफ़िस में श्री ट्रम्प, अमेरिकी उपराष्ट्रपति जे.डी. वैन्स, विदेश मंत्री मार्को रूबियो, इज़रायल में अमेरिका के राजदूत माइक हकाबी, लेबनान में अमेरिका के राजदूत मिशेल ईसा और इज़रायल तथा लेबनान के कई उच्च-स्तरीय प्रतिनिधियों के बीच हुई एक बैठक में लिया गया।</p>
<p>ट्रम्प ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म पर कहा, "बैठक बहुत अच्छी रही।" उन्होंने कहा कि अमेरिका लेबनान को हिज़्बुल्लाह से रक्षा करने में मदद करने के लिए उसके साथ मिलकर काम करेगा। उन्होंने कहा कि वह "निकट भविष्य" में इज़रायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ आउन की बैठक की मेज़बानी करने के लिए उत्सुक हैं, हालाँकि उन्होंने इसकी तारीख़ की घोषणा नहीं की है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 24 Apr 2026 10:51:24 +0530</pubDate>
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