<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://dainiknavajyoti.com/donald-trump/tag-30994" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>Dainik Navajyoti Rising Rajasthan RSS Feed Generator</generator>
                <title>Donald Trump - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
                <link>https://dainiknavajyoti.com/tag/30994/rss</link>
                <description>Donald Trump RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>ट्रंप को बड़ा झटका, अमेरिकी न्यायाधीश ने लगाई जन्मसिद्ध नागरिकता सीमित करने पर रोक</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिकी फेडरल न्यायाधीश डेबरा बोर्डमैन ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को बड़ा झटका देते हुए जन्म के आधार पर नागरिकता सीमित करने वाले नए कार्यकारी आदेश पर रोक लगा दी है। अदालत ने इसे असंवैधानिक और 14वें संशोधन का उल्लंघन करार दिया, जिससे अवैध या अस्थायी प्रवासियों के बच्चों को राहत मिली है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/big-blow-to-trump-american-judge-bans-limiting-birthright-citizenship/article-164595"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/trump.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड्र ट्रंप को उस समय एक जोरदार झटका लगा जब अमेरिकी फेडरल न्यायाधीश डेबरा बोर्डमैन ने बुधवार को ट्रंप प्रशासन को जन्म के आधार पर नागरिकता को सीमित करने वाले नये कार्यकारी आदेश को लागू करने से रोक दिया। न्यायाधीश बोर्डमैन ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप का यह आदेश संभवतः असंवैधानिक है और 14वें संशोधन का उल्लंघन करता है। रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी न्यायाधीश बोर्डमैन ने प्रवासियों के अधिकारों के लिए लड़ने वाले संगठन द्वारा दायर मामले में प्रारंभिक रोक का आदेश दिया। इन संगठनों ने पिछले साल ट्रंप प्रशासन की उस प्रारंभिक कोशिश को भी चुनौती दी थी, जिसमें जन्म के समय स्वाभाविक रूप से नागरिकता पाने की पात्रता को सीमित करने की कोशिश की गई थी।</p>
<p>न्यायाधीश बोर्डमैन ने 35 पन्नों के अपने फैसले में लिखा कि नया निर्देश "प्रमाणित वर्ग पर लागू होने के मामले में लगभग निश्चित रूप से असंवैधानिक" है। उन्होंने जून में सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले का हवाला दिया, जिसमें ट्रंप के कार्यकाल के पहले दिन जारी कार्यकारी आदेश को खारिज कर दिया गया था। न्यायाधीश बोर्डमैन, जो राष्ट्रपति जो. बाइडेन द्वारा नियुक्त न्यायाधीश हैं, ने लिखा, "इस अदालत को एक बार फिर राष्ट्रपति द्वारा उनसे नागरिकता का अधिकार छीनने के सबसे हालिया प्रयास के अमल पर प्रारंभिक रोक लगानी होगी। जिसके तहत लोगों से नागरिकता का अधिकार छीनने की कोशिश की गई है।" उनका आदेश प्रशासन को 19 फरवरी, 2025 के बाद जन्म लिये किसी भी ऐसे बच्चे पर नयी पाबंदी लागू करने से रोकता है, जिसके माता-पिता में से कोई एक या दोनों उस समय देश में कानूनी रूप से मौजूद नहीं थे।</p>
<p>न्यायाधीश बोर्डमैन ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट पहले ही यह तय कर चुका है कि अमेरिका में पैदा होने वाले बच्चे जन्म से ही नागरिक हो जाते हैं, भले ही उनके माता-पिता देश में गैर-कानूनी या अस्थायी रूप से रह रहे हों। उन्होंने अपने 35 पृष्ठों के फैसले में लिखा, "सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है-मान्यता प्राप्त समूह में शामिल बच्चे 'जन्म से नागरिक' हैं।" यह फैसला अमेरिका में पैदा हुए लोगों के लिए नागरिकता की संवैधानिक गारंटी को सीमित करने की ट्रंप की कोशिशों के लिए एक और झटका है। न्यायाधीश बोर्डमैन के फैसले ने प्रशासन को उस सीमित नियम को लागू करने से रोक दिया है, जिसे सुप्रीम कोर्ट द्वारा जन्म के आधार पर नागरिकता खत्म करने की ट्रंप की व्यापक कोशिश को खारिज करने के बाद जारी किया गया था। अदालत ने हालांकि फेडरल एजेंसियों को इस बात पर दिशा-निर्देश तैयार करने की इजाजत दी है कि इस आदेश को कैसे लागू किया जाएगा।</p>
<p>यह फैसला सुप्रीम कोर्ट द्वारा जन्म के आधार पर नागरिकता खत्म करने की प्रशासन की प्रारंभिक कोशिश को खारिज किए जाने के लगभग दो महीने बाद आया है। न्यायाधीश बोर्डमैन ने शुरू में छह अगस्त को ट्रम्प के हस्ताक्षरित आदेश को रोकने से मना कर दिया था लेकिन उन्होंने अप्रवासी अधिकारों के लिए काम करने वाले समूहों को अपने मामले में बदलाव करने की इजाजत दे दी। ऐसा उन्होंने इस बात पर विचार करने से पहले किया कि क्या उस आदेश के खिलाफ कोई प्रारंभिक रोक लगाई जाए, जिसे उन्होंने 'अभूतपूर्व' बताया था।</p>
<p>न्यायाधीश बोर्डमैन ने बुधवार को अपने फैसले में कहा कि "राष्ट्रपति ने कार्यकारी आदेश के जरिए हमारे देश में लंबे समय से चली आ रही जन्मसिद्ध नागरिकता की परंपरा को बदलने और बड़ी संख्या में अमेरिकियों से जन्म के आधार पर नागरिकता के अधिकार को खत्म करने का प्रयास किया है। यह अधिकार संविधान के 14वें संशोधन के नागरिकता संबंधी प्रावधान में निहित है।" उनके आदेश के तहत संघीय सरकार को "अवैध रूप से या अस्थायी रूप से अमेरिका में रह रहे विदेशी नागरिकों से जन्मे बच्चों की नागरिकता में हस्तक्षेप करने, उसे अस्वीकार करने या उसे मान्यता न देने के लिए कोई अन्य कार्रवाई करने" से रोक दिया गया है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि 30 जून को सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए फैसले को देखते हुए यह कार्यकारी आदेश "लगभग निश्चित रूप से असंवैधानिक" है। राष्ट्रपति ट्रम्प का तर्क है कि जन्मसिद्ध नागरिकता का 'मजाक बना दिया गया है।" सीएनएन की रिपोर्ट के अनुसार अटॉर्नी जनरल टॉड ब्लैंच ने कल मीडिया को बताया कि कार्यकारी आदेश को सुप्रीम कोर्ट के फैसले को ध्यान में रखकर तैयार किया गया था। अटॉनी जनरल ब्लैंच ने कहा, "हमें उम्मीद नहीं थी कि न्यायाधीश हमारे पक्ष में बात करेंगी, इसलिए यह हमारे लिए कोई हैरानी की बात नहीं है।" उन्होंने बाद में कहा, "अगर हमें सुप्रीम कोर्ट वापस जाना पड़ा, तो हम जाएंगे।" इस नए कार्यकारी आदेश का मकसद मौजूदा कानूनों को सख्त करना और जन्मसिद्ध नागरिकता के लिए मान्यता प्राप्त अपवादों को सीमित करना था। यह सिद्धांत 14वें संशोधन में शामिल है, जो आम तौर पर अमेरिकी धरती पर पैदा हुए लोगों को-उनके माता-पिता के आप्रवासन स्थिति की परवाह किए बिना अमेरिकी नागरिकता देता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/leads/big-blow-to-trump-american-judge-bans-limiting-birthright-citizenship/article-164595</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/leads/big-blow-to-trump-american-judge-bans-limiting-birthright-citizenship/article-164595</guid>
                <pubDate>Thu, 03 Sep 2026 18:39:58 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2026-03/trump.png"                         length="790718"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ट्रंप का बड़ा ऐलान! इस साल उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग-उन से फिर मुलाकात करेंगे, परमाणु हथियारों पर भी किया बड़ा दावा</title>
                                    <description><![CDATA[अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की है कि वह इस वर्ष के अंत में उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग-उन से मुलाकात करेंगे। व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने यह भी दावा किया कि उत्तर कोरिया के पास 57 बेहद शक्तिशाली परमाणु हथियार मौजूद हैं ।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/trumps-big-announcement-he-will-meet-north-korean-leader-kim/article-163440"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/donald-trump-123.jpg" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि वह इस वर्ष उत्तर कोरिया के सर्वोच्च नेता किम जोंग-उन से मुलाकात करेंगे। ट्रंप ने व्हाइट हाउस में संवाददाताओं से बातचीत के दौरान यह बात कही। उनसे पूछा गया था कि क्या वह इस वर्ष के अंत में किम से मुलाकात की उम्मीद कर रहे हैं। ट्रंप ने कहा, "हां, मैं (उनसे मुलाकात) करूंगा।" उन्होंने दावा किया कि उत्तर कोरिया के पास 57 'बेहद शक्तिशाली' परमाणु हथियार हैं।</p>
<p>यह पहली बार है जब ट्रंप ने उत्तर कोरिया के परमाणु जखीरे की कोई निश्चित संख्या बतायी है। एक दिन पहले 'द वॉल स्ट्रीट जर्नल' की रिपोर्ट में कहा गया था कि ट्रंप अपने सहयोगियों पर किम के साथ बैठक की तैयारी के लिए दबाव डाल रहे हैं। ऐसी बैठक नवंबर में चीन के शेनझेन में होने वाले एशिया-प्रशांत आर्थिक सहयोग (एपेक) शिखर सम्मेलन में ट्रंप की संभावित यात्रा के दौरान हो सकती है। ट्रंप ने हालांकि किम के साथ दोबारा बातचीत शुरू करने की अपनी योजना के बारे में विस्तार से जानकारी नहीं दी। यह पूछे जाने पर कि क्या वह किम के साथ लिखित पत्रों के माध्यम से संपर्क में हैं, उन्होंने कहा, "मैं आपको यह नहीं बता सकता।"</p>
<p>ट्रंप ने बाद में एक अन्य संवाददाता सम्मेलन में इस सवाल का जवाब देने से इनकार कर दिया कि किम के साथ बातचीत बहाल करने का उनका लक्ष्य अब भी उत्तर कोरिया का परमाणु निरस्त्रीकरण है या नहीं। इससे आशंका बढ़ी है कि उनका प्रशासन पूर्ण परमाणु निरस्त्रीकरण के बजाय तनाव कम करने और परमाणु जोखिम के प्रबंधन जैसे सीमित लक्ष्यों पर ध्यान केंद्रित कर सकता है। ट्रंप प्रशासन इससे पहले उत्तर कोरिया के 'पूर्ण' परमाणु निरस्त्रीकरण के प्रति प्रतिबद्धता दोहरा चुका है।</p>
<p>ट्रंप ने कहा, "मैं इस बारे में बात नहीं करना चाहता, लेकिन जैसा कि आप जानते हैं, किम जोंग-उन के साथ मेरे अच्छे संबंध हैं। उन्हें (जो) बाइडेन पसंद नहीं थे। उन्हें (बराक) ओबामा पसंद नहीं थे। उन्हें कोई पसंद नहीं था, लेकिन वह मुझे पसंद करता है।" ट्रंप की यह टिप्पणी ऐसे समय आयी है जब उनके किम के साथ व्यक्तिगत कूटनीति दोबारा शुरू करने की संभावना को लेकर अटकलें तेज हैं। अपने पहले कार्यकाल में ट्रंप ने किम के साथ तीन बैठकें की थीं। दोनों नेताओं की पहली मुलाकात जून 2018 में सिंगापुर में, दूसरी फरवरी 2019 में हनोई में और तीसरी जून 2019 में पनमुनजोम स्थित अंतर-कोरियाई सीमा गांव में हुई थी।</p>
<p>इन अटकलों को ट्रंप के दक्षिण कोरिया-अमेरिका के संयुक्त सैन्य अभ्यासों में कटौती के हालिया निर्देश से भी बल मिला है। इसे उत्तर कोरिया के प्रति एक सुलहकारी कदम के तौर पर देखा जा रहा है। उत्तर कोरिया लंबे समय से इन संयुक्त सैन्य अभ्यासों को अपने खिलाफ युद्ध की तैयारी करार देता रहा है। यह सवाल बना हुआ है कि किम ट्रंप की पहल पर कैसी प्रतिक्रिया देंगे। रूस के साथ उत्तर कोरिया के राजनयिक, आर्थिक और सैन्य संबंधों में बढ़ोतरी तथा चीन के साथ बेहतर संबंधों ने उत्तर कोरिया की अमेरिका पर निर्भरता को पहले की तुलना में कम किया है।</p>
<p>ट्रंप की पहली प्रेस वार्ता से कुछ समय पहले ही किम जोंग-उन की प्रभावशाली बहन किम यो-जोंग ने दक्षिण कोरिया-अमेरिका के जारी सैन्य अभ्यास में कटौती को लेकर कहा कि उत्तर कोरिया को इसमें कोई दिलचस्पी नहीं है। उन्होंने कहा कि यह कदम 'टिप्पणी के लायक भी नहीं' है। उन्होंने यह भी कहा कि ट्रंप के लिए किम 'अच्छी यादें और भावनाएं' रखते हैं और दोनों नेताओं के संबंध अब भी उत्कृष्ट हैं। उनके इस बयान को अमेरिका के साथ बातचीत दोबारा शुरू करने की संभावना के लिए एक खुला संकेत माना जा रहा है।</p>
<p>ट्रंप ने पहले उत्तर कोरिया को 'परमाणु शक्ति' कहा है, लेकिन यह पहली बार है जब उन्होंने उसके परमाणु जखीरे की कोई विशिष्ट संख्या बतायी है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि उत्तर कोरिया के पास करीब 60 परमाणु हथियार हो सकते हैं और उसके पास इतनी विखंडनीय सामग्री भी हो सकती है जिससे दर्जनों और हथियार बनाए जा सकते हैं। ट्रंप ने कहा, "अगर मैं राष्ट्रपति होता तो इसकी अनुमति नहीं देता। लेकिन उसके पास ये हथियार हैं। मैं उसके साथ बहुत अच्छी तरह मिलता हूं। जब तक हमारे पास एक समझदार राष्ट्रपति है, वह ठीक रहेंगे। अगर हमारे पास कोई मूर्ख राष्ट्रपति है, तो शायद वह इतना ठीक नहीं रहेंगे।"</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/leads/trumps-big-announcement-he-will-meet-north-korean-leader-kim/article-163440</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/leads/trumps-big-announcement-he-will-meet-north-korean-leader-kim/article-163440</guid>
                <pubDate>Thu, 20 Aug 2026 18:16:48 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2026-06/donald-trump-123.jpg"                         length="575650"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ट्रंप के ‘इकोनॉमिक डी-डे’ पर ईरान का पलटवार, विदेश मंत्री बोले- अमेरिका को मिलेगी और बड़ी हार, बढ़ेगा विरोध </title>
                                    <description><![CDATA[ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के 'इकोनॉमिक डी-डे' अभियान पर तंज कसा है। उन्होंने कहा कि यह कदम अमेरिका के आर्थिक संकट और बढ़ते कर्ज से ध्यान भटकाने की कोशिश है। विफल नीतियों को दोहराने से वाशिंगटन को केवल हार और ईरानियों का विरोध ही मिलेगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/irans-counterattack-on-trumps-economic-d-day-foreign-minister-said/article-163438"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-08/abbas.png" alt=""></a><br /><p>तेहरान। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने गुरुवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के तेहरान के खिलाफ घोषित नये ‘इकोनॉमिक डी-डे’ अभियान की आलोचना करते हुए कहा कि इससे अमेरिका को ‘और बड़ी हार’ का सामना करना पड़ेगा तथा ईरानियों में अमेरिका के प्रति विरोध और बढ़ेगा। अराघची ने अमेरिकी सोशल मीडिया मंच एक्स पर कहा, “ तथाकथित ‘इकोनॉमिक डी-डे’ अमेरिका के अपने संकट से ध्यान भटकाने का प्रयास है। अमेरिका अभूतपूर्व कर्ज और बढ़ती ब्याज लागत का सामना कर रहा है। विफल नीतियों को और आगे बढ़ाने से केवल अमेरिका को और बड़ी हार तथा ईरानियों की शत्रुता हासिल होगी। ”</p>
<p>उन्होंने अमेरिकी ‘आर्थिक आतंकवाद’ करार दी जाने वाली नीतियों को वैश्विक अर्थव्यवस्था और दुनियाभर में देशों की संप्रभुता के लिए खतरा बताया। उन्होंने कहा, “ सैन्य युद्ध अपने उद्देश्यों को हासिल करने में विफल रहा और अब उन्होंने अपनी अगली विफलता को ‘आर्थिक युद्ध’ का नाम दे दिया है। ” ईरानी नेताओं की यह प्रतिक्रिया अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा बुधवार को ईरान के खिलाफ नये आर्थिक अभियान की घोषणा के बाद आयी है। ट्रंप ने इसे ‘किसी भी देश के खिलाफ अब तक चलाया गया सबसे कठोर आर्थिक अभियान’ बताया और कहा कि इसका उद्देश्य अभूतपूर्व स्तर पर आर्थिक युद्ध और अलगाव लागू करना है।</p>
<p>ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ईरान को आर्थिक सहायता प्रदान करने वाले वित्तीय और वाणिज्यिक माध्यमों को बंद करने का प्रयास करेगा। उन्होंने चेतावनी दी कि जिन देशों के वित्तीय संस्थान, कंपनियां, हवाई अड्डे या सरकारी संस्थाएं ईरान को आर्थिक ‘जीवनरेखा’ उपलब्ध कराएंगी, उन्हें गंभीर आर्थिक परिणाम भुगतने होंगे। ट्रंप ने इस अभियान को इकोनॉमिक डी-डे बताते हुए अमेरिकी सहयोगी देशों से भी ईरान को अलग-थलग करने के प्रयास में शामिल होने का आह्वान किया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/world/irans-counterattack-on-trumps-economic-d-day-foreign-minister-said/article-163438</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/world/irans-counterattack-on-trumps-economic-d-day-foreign-minister-said/article-163438</guid>
                <pubDate>Thu, 20 Aug 2026 16:43:00 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2026-08/abbas.png"                         length="680300"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अमेरिका-ईरान के बीच 60 दिन का समझौता बेनतीजा: परमाणु मुद्दे पर गतिरोध कायम, होर्मुज जलडमरूमध्य भी नहीं खुला</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिका और ईरान के बीच 17 जून को वर्साय में हुए 60-दिन के अस्थायी समझौते की समय सीमा समाप्त हो गई है। दोनों देश होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह खोलने, अमेरिकी नाकाबंदी हटाने और परमाणु कार्यक्रम पर व्यापक सहमति बनाने में विफल रहे हैं, जिससे क्षेत्र में तनाव जारी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/60-day-agreement-between-america-and-iran-remains-deadlocked-on/article-163178"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-08/us1.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिका और ईरान के बीच 17 जून को हुए 60-दिन के समझौते की समय सीमा सोमवार को समाप्त हो गयी, लेकिन दोनों देश युद्ध समाप्त करने, ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर समझौता करने और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह खोलने पर सहमति नहीं बना सके। इससे आगे की बातचीत और क्षेत्र में शांति की संभावनाएं अनिश्चित हो गयी हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के बीच फ्रांस के वर्साय में हुए समझौते का उद्देश्य अस्थायी संघर्ष विराम को स्थायी समझौते में बदलना था। इसके तहत 60 दिनों में ईरान के परमाणु कार्यक्रम, संघर्ष की समाप्ति और होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने पर व्यापक समझौता किया जाना था।</p>
<p>इन तीनों प्रमुख उद्देश्यों में से कोई भी पूरा नहीं हो सका। कुछ ही सप्ताह में दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर समझौते का उल्लंघन करने का आरोप लगाना शुरू कर दिया। प्रत्यक्ष बातचीत भी रुक गयी और ईरानी बंदरगाहों पर अमेरिकी नाकाबंदी जारी रही। होर्मुज जलडमरूमध्य में भी सामान्य आवाजाही बहाल नहीं हो सकी। वर्तमान में केवल पांच मालवाहक जहाजों को इसके रास्ते गुजरने की अनुमति है, जबकि सामान्य परिस्थितियों में प्रतिदिन करीब 130 से 140 जहाज इस महत्वपूर्ण जलमार्ग से गुजरते हैं।</p>
<p>समझौते के तहत ईरान को जलडमरूमध्य खोलने में मदद करनी थी और अमेरिका को तेहरान पर दबाव कम करना था। लेकिन दोनों पक्ष इस बात पर सहमत नहीं हो सके कि जलमार्ग पर यातायात किसके नियंत्रण में और किन शर्तों के तहत संचालित होगा। ईरान ने जलडमरूमध्य खोलने के लिए अमेरिकी नाकाबंदी हटाने की शर्त रखी है, जबकि अमेरिका ने इसे स्वीकार नहीं किया है। तेहरान ने होर्मुज में जहाजों की आवाजाही पर नियंत्रण और संभावित शुल्क वसूलने में भूमिका की भी मांग की है।</p>
<p>तनाव आठ जुलाई को और बढ़ गया, जब श्री ट्रंप ने नाटो सम्मेलन के दौरान समझौते को समाप्त घोषित कर दिया। इसके बाद अमेरिका ने ईरान के सैन्य और तटीय ठिकानों पर हमले किए। इनमें मिसाइल और ड्रोन भंडारण केंद्र, रसद केंद्र, वायु रक्षा एवं निगरानी प्रणालियां तथा नौसैनिक और तटीय ढांचे शामिल थे। ईरान ने जवाबी कार्रवाई में बहरीन, कुवैत, कतर और जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों और अन्य सैन्य एवं संचार प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया। इसके बाद 60 दिनों के भीतर व्यापक समझौते की उम्मीदें लगभग समाप्त हो गयीं।</p>
<p>इसके बाद अमेरिका ने ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाते हुए उन प्रतिबंधों में मिली छूट वापस ले ली, जिनके तहत संघर्ष विराम के दौरान ईरान सीमित रूप से तेल बेच सकता था। अमेरिका ने ईरान पर रियायतों के लिए दबाव बनाने के उद्देश्य से ईरानी बंदरगाहों की नौसैनिक नाकाबंदी भी फिर शुरू कर दी। ईरान ने दूसरी ओर होर्मुज को अपने दबाव के प्रमुख साधन के रूप में इस्तेमाल किया है। उसने जलमार्ग को पूरी तरह खोलने के लिए अमेरिकी नाकाबंदी हटाने, ईरान के आसपास से अमेरिकी सैनिकों की वापसी और युद्ध क्षतिपूर्ति की मांग की है।</p>
<p>अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा कि अमेरिका का पहला उद्देश्य देश में तेल और गैस की कीमतों को कम रखना और दूसरा ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना है। ईरान लगातार कहता रहा है कि उसका परमाणु हथियार विकसित करने का कोई इरादा नहीं है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा है कि फिलहाल तेहरान और वाशिंगटन के बीच कोई प्रत्यक्ष बातचीत नहीं हो रही है। उन्होंने कहा कि कतर और पाकिस्तान मध्यस्थ के तौर पर ईरान के साथ संदेशों का आदान-प्रदान कर रहे हैं, लेकिन इसे बातचीत नहीं माना जा सकता।</p>
<p>पाकिस्तान ने जून के समझौते में मध्यस्थ की भूमिका निभायी थी और दोनों पक्षों को फिर बातचीत की मेज पर लाने के प्रयास जारी रखने की बात कही है। 60 दिन की समयसीमा समाप्त होने के साथ समझौता युद्धविराम को स्थायी बनाने, होर्मुज को पूरी तरह खोलने और ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर व्यापक समझौता कराने में विफल रहा है। प्रत्यक्ष बातचीत बंद होने, अमेरिकी नाकाबंदी जारी रहने और सैन्य तनाव बरकरार रहने के बीच अब यह स्पष्ट नहीं है कि इस विफल समझौते की जगह आगे कौन-सा ढांचा सामने आएगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/leads/60-day-agreement-between-america-and-iran-remains-deadlocked-on/article-163178</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/leads/60-day-agreement-between-america-and-iran-remains-deadlocked-on/article-163178</guid>
                <pubDate>Mon, 17 Aug 2026 18:05:16 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2026-08/us1.png"                         length="543924"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को झटका, प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट छोड़ेंगी पद</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की है कि व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलीन लेविट महीने के अंत में इस्तीफा देंगी। लेविट ने बताया कि वह अपने छोटे बच्चों और परिवार को समय देने के लिए यह पद छोड़ रही हैं। अब वह ट्रंप की प्रमुख बाहरी सलाहकार के रूप में कार्य करेंगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/shock-to-trump-press-secretary-caroline-levitt-will-step-down/article-162861"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-08/trump.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को घोषणा की कि व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट महीने के अंत में अपने पद से इस्तीफा देंगी। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में लेविट को अपने ‘सबसे भरोसेमंद सहयोगियों’ में से एक बताया और कहा कि वह अपने छोटे बच्चों और परिवार के साथ समय बिताने के लिए पद छोड़ रही हैं। उन्होंने कहा कि वह उनके फैसले को पूरी तरह समझते और उसका सम्मान करते हैं।</p>
<p>ट्रंप ने कहा कि लेविट अब उनकी प्रमुख बाहरी सलाहकारों में शामिल रहेंगी और रिपब्लिकन पार्टी में प्रभावशाली भूमिका निभाएंगी। लेविट ने पिछले वर्ष व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव का पद संभाला था और वह इस पद पर नियुक्त होने वाली सबसे कम उम्र की थीं। उनके स्थान पर किसे नियुक्त किया जाएगा, इसकी अभी घोषणा नहीं की गयी है। लेविट ने के पति निकोलस रिसियो है। उन्होंने मई में अपनी दूसरी संतान एक बेटी को जन्म दिया था। उनका दो वर्ष का एक बेटा भी है। वह पिछले महीने मातृत्व अवकाश के बाद काम पर लौटी थीं।</p>
<p>राष्ट्रपति की घोषणा के बाद लेविट ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर कहा कि व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव के रूप में काम करना उनके जीवन का सबसे बड़ा सम्मान और रोमांच रहा है। उन्होंने कहा कि दुनिया की सबसे कठिन नौकरियों में से एक को निभाते हुए मां बनना और एक बच्चे को जन्म देना उनके जीवन का सबसे चुनौतीपूर्ण और संतोषजनक दौर रहा है। लेविट ने कहा कि बेटी के जन्म के बाद व्हाइट हाउस लौटने पर उन्हें महसूस हुआ कि वह अपने दो छोटे बच्चों की मां के रूप में उन्हें वह समय और ध्यान नहीं दे पाएंगी, जिसके वे हकदार हैं, जबकि प्रेस सचिव के पद के लिए लगातार समय, ऊर्जा और ध्यान की आवश्यकता होती है। इसी कारण उन्होंने व्हाइट हाउस छोड़ने और जीवन के एक नये अध्याय की शुरुआत करने का फैसला किया।</p>
<p>व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव बनने से पहले भी लेविट लंबे समय तक ट्रंप के साथ काम कर चुकी थीं। उनके पहले कार्यकाल में उन्होंने सहायक प्रेस सचिव और भाषण लेखिका के रूप में काम किया था। इसके बाद वह न्यूयॉर्क की रिपब्लिकन सांसद एलिस स्टेफनिक की संचार निदेशक बनीं और उनके शीर्ष सहयोगियों में शामिल रहीं। वर्ष 2022 में लेविट ने न्यू हैम्पशायर से अमेरिकी कांग्रेस का चुनाव लड़ा था। उन्होंने रिपब्लिकन पार्टी के विवादित प्राथमिक चुनाव में जीत हासिल की, लेकिन बाद में डेमोक्रेटिक उम्मीदवार क्रिस पप्पास से चुनाव हार गयीं। इसके बाद वह ट्रंप समर्थक धन जुटाने वाले संगठन 'मागा इंक' की प्रवक्ता बनीं और 2024 के राष्ट्रपति चुनाव अभियान में ट्रंप की राष्ट्रीय प्रेस सचिव के रूप में काम किया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/world/shock-to-trump-press-secretary-caroline-levitt-will-step-down/article-162861</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/world/shock-to-trump-press-secretary-caroline-levitt-will-step-down/article-162861</guid>
                <pubDate>Thu, 13 Aug 2026 15:38:57 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2026-08/trump.png"                         length="1069641"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अमेरिका-ईरान वार्ता:  ट्रंप ने की ईरान के साथ बातचीत की घोषणा, डीन्यूक्लियराइजेशन पर समझौता संभव</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ नए सिरे से कूटनीतिक बातचीत शुरू करने का ऐलान किया है। उन्होंने दावा किया कि खाड़ी देशों की अपील पर सप्ताहांत के सैन्य हमले टाल दिए गए हैं। अमेरिका को उम्मीद है कि इस वार्ता से परमाणु निरस्त्रीकरण और होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने पर सहमति बन जाएगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/donald-trump-announces-talks-with-iran-agreement-on-denuclearization-possible/article-161800"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/donald-trump-123.jpg" alt=""></a><br /><p>न्यूयॉर्क। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की कि अमेरिका और ईरान सोमवार को बातचीत करेंगे। ट्रंप ने कहा, "हम उनसे बातचीत (नेगोशिएशन) कर रहे हैं। यह कल दोपहर शुरू होगी।" अमेरिकी राष्ट्रपति ने भरोसा जताया कि ईरान के परमाणु हथियार खत्म करने (डीन्यूक्लियराइजेशन) पर कोई समझौता हो जाएगा। उन्होंने कहा, "मुझे लगता है कि एक समझौता होगा। होर्मुज (जलडमरूमध्य) पर एक समझौता होगा, और फिर परमाणु मुद्दे पर, या जिसे आप ईरान का परमाणु-मुक्त होना कह सकते हैं, उस पर समझौता होगा।"</p>
<p>ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ने ईरान पर सप्ताहांत में होने वाले हमले को रद्द कर दिया था - कुछ हद तक तेहरान के अनुरोध पर - लेकिन वह किसी भी समय बमबारी फिर से शुरू करने के लिए तैयार है। उन्होंने आगे कहा, "मुझसे सऊदी अरब, यूएई, कतर और ईरान ने कहा था। ईरान ने भी हमसे बहुत ज़ोर देकर कहा था।"</p>
<p>अमेरिकी राष्ट्रपति ने कुवैत और बहरीन से अमेरिकी सेना को हटाने की खबरों पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। श्री ट्रंप ने एयर फ़ोर्स वन में पत्रकारों से कहा, "मैं उस पर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहता।" मीडिया में पहले खबर आई थी कि अमेरिका मध्य पूर्व के कई देशों में मौजूद अपने ठिकानों से कुछ सैनिकों को हटा रहा है, जिन पर ईरान ने हमला किया था।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/leads/donald-trump-announces-talks-with-iran-agreement-on-denuclearization-possible/article-161800</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/leads/donald-trump-announces-talks-with-iran-agreement-on-denuclearization-possible/article-161800</guid>
                <pubDate>Mon, 03 Aug 2026 11:17:13 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2026-06/donald-trump-123.jpg"                         length="575650"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>स्पेन के जीत के जश्न के दौरान पोडियम पर रुके रहे ट्रंप, वीडियो वायरल</title>
                                    <description><![CDATA[स्पेन के फीफा विश्व कप जीत के जश्न के दौरान अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अनजाने में आकर्षण का केंद्र बन गए। पदक वितरण समारोह के दौरान जब चैंपियन टीम ट्रॉफी उठाने की तैयारी कर रही थी, तब ट्रंप पोडियम पर ही रुके रहे, जिसके बाद फीफा अध्यक्ष जियानी इन्फेंटिनो को उन्हें एक तरफ करना पड़ा। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/khel/video-of-trump-staying-on-the-podium-during-spains-victory/article-160394"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-07/1200-x-600-px)-(3)45.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। स्पेन के फीफा विश्व कप जीत के जश्न के दौरान अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अनजाने में आकर्षण का केंद्र बन गए। पदक वितरण समारोह के दौरान जब चैंपियन टीम ट्रॉफी उठाने की तैयारी कर रही थी, तब ट्रंप पोडियम पर ही रुके रहे, जिसके बाद फीफा अध्यक्ष जियानी इन्फेंटिनो को उन्हें एक तरफ करना पड़ा। यह पल अब वायरल हो गया है। यह घटना स्पेन द्वारा अतिरिक्त समय के बाद अर्जेंटीना को 1-0 से हराकर 2026 फीफा वल्र्ड कप का खिताब जीतने के कुछ ही पलों बाद हुई। ट्रंप जो पदक और ट्रॉफी देने के लिए इन्फेंटिनो के साथ शामिल हुए थे, मंच पर ही रुके रहे जबकि स्पेन के खिलाड़ी पारंपरिक ट्रॉफी-लिफ्ट (ट्रॉफी उठाने) के लिए इकट्ठा हो रहे थे। टेलीविजन फुटेज में इन्फेंटिनो को ट्रंप की ओर इशारा करते हुए और उन्हें पोडियम के बीच से हटाते हुए दिखाया गया, ताकि स्पेन के कप्तान रोड्री और उनके साथियों के जश्न मनाने के लिए जगह बन सके।</p>
<p>यह छोटी सी बातचीत लाइव रिकॉर्ड हो गई और तेजी से सोशल मीडिया पर फैल गई, जिससे इस पर खूब चर्चा होने लगी। पोडियम वाले इस पल ने मैच के बाद के समारोह के कुछ हिस्सों पर ध्यान केंद्रित कर दिया। कई ऑनलाइन यूजर्स ने फ़ुटबॉल के सबसे यादगार जश्न में से एक के दौरान ट्रंप की अप्रत्याशित मौजूदगी पर टिप्पणी की। इससे पहले जब ट्रंप पदक देने के लिए इन्फेंटिनो के साथ मैदान पर आए, तो भीड़ के कुछ हिस्सों से उन्हें मिली-जुली प्रतिक्रिया मिली, जिसमें साफ़ तौर पर नापसंदगी जाहिर करने की आवाजें भी शामिल थीं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>खेल</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/khel/video-of-trump-staying-on-the-podium-during-spains-victory/article-160394</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/khel/video-of-trump-staying-on-the-podium-during-spains-victory/article-160394</guid>
                <pubDate>Mon, 20 Jul 2026 16:18:08 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2026-07/1200-x-600-px%29-%283%2945.png"                         length="1979459"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur PS]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ट्रंप का बड़ा दावा: ईरान ने अमेरिकी मांगों पर जताई सहमति, पश्चिम एशिया में युद्ध खत्म होने की ओर</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि सैन्य संघर्ष समाप्त करने की वार्ता के दौरान ईरान ने अमेरिका की लगभग सभी प्रमुख मांगों पर सहमति जता दी है। जून 2026 में हुए एक अहम समझौते के तहत हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में नौवहन बहाल करने और अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी हटाने की समय सीमा तय की गई है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/trumps-big-claim-that-iran-agreed-to-american-demands-towards/article-158749"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-07/trump-(2).png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि पश्चिम एशिया में युद्ध समाप्त करने को लेकर हुई वार्ता के दौरान ईरान ने अमेरिका के लगभग सभी प्रमुख मुद्दों पर सहमति जतायी थी। ट्रंप ने कहा, "हमने उन्हें सैन्य रूप से पूरी तरह पराजित कर दिया है। उनके पास कुछ मिसाइलें बची हैं, जिन्हें भी हम नष्ट कर सकते हैं। उन्होंने हमारी लगभग सभी प्रमुख मांगों पर सहमति दे दी है।"</p>
<p>रिपोर्ट के अनुसार, 18 जून की रात ईरान और अमेरिका के बीच एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर हुए, जिसमें 28 फरवरी से जारी सैन्य संघर्ष समाप्त करने का प्रावधान किया गया है। समझौते में अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी हटाने और ईरान द्वारा हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य में नौवहन बहाल करने की समय सीमा भी निर्धारित की गयी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/leads/trumps-big-claim-that-iran-agreed-to-american-demands-towards/article-158749</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/leads/trumps-big-claim-that-iran-agreed-to-american-demands-towards/article-158749</guid>
                <pubDate>Fri, 03 Jul 2026 14:30:57 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2026-07/trump-%282%29.png"                         length="653905"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अमेरिका-इजरायल के बीच भूमि आवंटन समझौता: यरुशलम में बनेगा अमेरिकी दूतावास का स्थायी परिसर, ट्रंप के फैसले को मिली नई रफ्तार </title>
                                    <description><![CDATA[इजरायल और अमेरिका ने यरुशलम में अमेरिकी दूतावास के स्थायी परिसर के निर्माण के लिए भूमि आवंटन समझौते पर हस्ताक्षर किए। यह कदम 2017 में यरुशलम को इजरायल की राजधानी मानने के अमेरिकी फैसले की दिशा में अहम माना जा रहा है। इस निर्णय पर पहले भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विवाद और विरोध देखने को मिला था।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/land-allocation-agreement-between-america-and-israel-permanent-complex-of/article-158636"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-07/02.png" alt=""></a><br /><p>तेल अवीव। इजरायल और अमेरिका ने यरुशलम में अमेरिकी दूतावास के स्थायी परिसर के निर्माण के लिए भूमि आवंटन संबंधी एक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इजरायल के विदेश मंत्रालय ने बुधवार को यह जानकारी दी। मंत्रालय के अनुसार, विदेश मंत्री गिदोन सार और इजरायल में अमेरिकी राजदूत माइक हकाबी ने यरुशलम के मेयर मोशे लियोन की मौजूदगी में विदेश मंत्रालय में इस समझौते पर हस्ताक्षर किए। इसके तहत यरुशलम में अमेरिकी दूतावास के स्थायी परिसर के निर्माण के लिए भूमि आवंटित की गई है, जिसे इजरायल अपनी शाश्वत राजधानी मानता है।</p>
<p>विदेश मंत्रालय ने कहा कि यह कदम सरकार के उस निर्णय के क्रियान्वयन में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर है, जिसके तहत दूतावास के लिए एलनबी परिसर आवंटित किया गया। यह उस कूटनीतिक प्रक्रिया का भी महत्वपूर्ण चरण है जिसकी शुरुआत दिसंबर 2017 में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा यरुशलम को इजरायल की राजधानी के रूप में मान्यता दिए जाने के साथ हुई थी। गौरतलब है कि, ट्रंप प्रशासन ने दिसंबर 2017 में यरुशलम को इजरायल की राजधानी के रूप में मान्यता दी थी और 14 मई 2018 को अमेरिकी दूतावास को तेल अवीव से यरुशलम स्थानांतरित कर दिया था। इस फैसले के बाद फ़िलीस्तीनी क्षेत्रों में अशांति फैल गई थी और अरब जगत के कई देशों में विरोध प्रदर्शन हुए थे।</p>
<p>इजरायल यरुशलम को अपनी एकीकृत और अविभाज्य राजधानी मानता है, जबकि अधिकांश देश पूर्वी यरुशलम के इजरायल में विलय को मान्यता नहीं देते। उनका मानना है कि यरुशलम की अंतिम स्थिति फ़िलीस्तीनियों और इजरायल के बीच आपसी सहमति से तय की जानी चाहिए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/world/land-allocation-agreement-between-america-and-israel-permanent-complex-of/article-158636</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/world/land-allocation-agreement-between-america-and-israel-permanent-complex-of/article-158636</guid>
                <pubDate>Thu, 02 Jul 2026 18:25:58 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2026-07/02.png"                         length="1033672"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ट्रंप का बड़ा दांव: जन्म के आधार पर नागरिकता खत्म करने के लिए लाएंगे नया कानून, छिड़ी नई कानूनी लड़ाई</title>
                                    <description><![CDATA[सुप्रीम कोर्ट से झटका मिलने के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जन्म के आधार पर मिलने वाली अमेरिकी नागरिकता खत्म करने के लिए संसद से नया कानून लाने की वकालत की। ट्रंप ने इसे महंगा और अनुचित बताते हुए कहा कि संवैधानिक संशोधन के बजाय विधायी रास्ते से बदलाव संभव है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/trumps-big-bet-he-will-bring-a-new-law-to/article-158527"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/trump3.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि 'जन्म के आधार पर नागरिकता' उनके देश के लिए अच्छी नहीं है और वह इसके खिलाफ जल्द ही संसद में कानून देखना चाहेंगे। ट्रंप ने मंगलवार रात ट्रुथ सोशल पर लिखे एक पोस्ट में कहा, "सुप्रीम कोर्ट ने जन्मजात नागरिकता को बरकरार रखा है, जो हमारे देश के लिए बहुत बुरा है। हम राष्ट्रपति के समर्थन से संसद में कानून लाकर इसमें बदलाव कर सकते हैं। इस प्रक्रिया के दौरान अब यह तय हो गया है। अब किसी लंबे और बोझल संवैधानिक संशोधन की जरूरत नहीं है।"</p>
<p>उल्लेखनीय है कि अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को ट्रंप के उस प्रयास को सिरे से खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने एक कार्यकारी आदेश के जरिये अमेरिका में जन्मजात नागरिकता को खत्म करने की कोशिश की थी। कोर्ट ने एक सदी से भी अधिक पुराने कानूनी मिसाल और राष्ट्रीय परंपरा को बरकरार रखते हुए साफ किया कि अमेरिकी धरती पर पैदा होने वाले बच्चे स्वाभाविक रूप से अमेरिका के नागरिक हैं।<br />सुप्रीम कोर्ट का यह 6-3 से आया फैसला ट्रंप के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है। </p>
<p>ट्रंप ने इस कार्यकारी आदेश को बरकरार रखने के लिए अदालत से लगातार पैरवी की थी। वह इस मामले की मौखिक बहस में भी शामिल हुए थे। वह इस तरह की कानूनी बहस में हिस्सा लेने वाले अमेरिका के पहले मौजूदा राष्ट्रपति बने थे। अब वह संसद के जरिए इस बदलाव को मूर्त रूप देना चाहते हैं। ट्रंप ने लिखा, "संसद को आज ही जन्मजात नागरिकता खत्म करने की ओर काम शुरू करना चाहिये, जो हमारे देश के लिए बहुत महंगा और अनुचित है। उन्हें मेरा संपूर्ण समर्थन प्राप्त होगा।"</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/world/trumps-big-bet-he-will-bring-a-new-law-to/article-158527</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/world/trumps-big-bet-he-will-bring-a-new-law-to/article-158527</guid>
                <pubDate>Wed, 01 Jul 2026 16:02:58 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2026-01/trump3.png"                         length="653905"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ट्रंप का बड़ा दावा: आज दोहा में होगी अमेरिका-ईरान शांति वार्ता, तेहरान ने तुरंत किया खंडन</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दोहा में अमेरिका-ईरान वार्ता का दावा किया, लेकिन ईरान ने ऐसी किसी निर्धारित बातचीत से इनकार कर दिया। दोनों देशों के विरोधाभासी बयानों से कूटनीतिक तनाव और अविश्वास उजागर हुआ। इस बीच युद्धविराम, होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गतिविधियां तेज हो गई हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/trumps-big-claim-that-america-iran-peace-talks-will-be-held/article-158494"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/donald-trump.jpg" alt=""></a><br /><p>दोहा। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका और ईरान के बीच मंगलवार को कतर की राजधानी दोहा में वार्ता होगी, जबकि ईरान ने स्पष्ट किया है कि आने वाले दिनों में वाशिंगटन के साथ किसी भी स्तर की वार्ता निर्धारित नहीं है। ट्रंप ने कहा कि उनके विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और पूर्व वरिष्ठ सलाहकार जैरेड कुशनर दोहा जा रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि उच्चस्तरीय बैठकों के साथ-साथ तकनीकी स्तर की वार्ता भी जारी रहेगी।</p>
<p>ट्रंप ने सोमवार को सोशल मीडिया पर दावा किया कि ईरान ने बैठक का अनुरोध किया था और यह बैठक दोहा में होगी, हालांकि उन्होंने इसके बारे में कोई अन्य विवरण नहीं दिया। अमेरिका के दो अधिकारियों ने भी पुष्टि की कि विटकॉफ और कुशनर दोहा जा रहे हैं। उनके अनुसार वाशिंगटन युद्धविराम को व्यापक समझौते में बदलने के उद्देश्य से वार्ता को आगे बढ़ाना चाहता है। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने कहा,"विशेष दूत विटकॉफ और जारेड कुशनर इस सप्ताह उच्चस्तरीय बैठकों के लिए दोहा जाएंगे। इन बैठकों के समानांतर तकनीकी स्तर की वार्ता भी होगी।"</p>
<p>उन्होंने कहा, "हमारी ओर से युद्धविराम का पूरी तरह पालन किया जा रहा है। यदि हिंसा हुई तो उसका जवाब भी उसी प्रकार दिया जाएगा।" अमेरिका और ईरान ने 17 जून को 14 सूत्रीय समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए थे, जिसका उद्देश्य चार महीने से जारी संघर्ष समाप्त करना था। इस समझौते के तहत दोनों पक्षों ने शत्रुता समाप्त करने और होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने पर सहमति व्यक्त की थी, जहां से दुनिया के लगभग पांचवें हिस्से का तेल और तरलीकृत प्राकृतिक गैस का समुद्री परिवहन होता है।</p>
<p>ट्रंप के बयान से संकेत मिलता है कि ईरान की ओर से औपचारिक वार्ता से इनकार किये जाने के बावजूद अमेरिका कूटनीतिक प्रयास जारी रखना चाहता है। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने किसी भी आसन्न वार्ता की खबरों को खारिज करते हुए कहा कि आने वाले दिनों में अमेरिका के साथ किसी भी स्तर पर बातचीत निर्धारित नहीं है। उन्होंने ईरान में संवाददाताओं से कहा, "अमेरिकी प्रतिनिधियों के कतर जाने का ईरानी प्रतिनिधिमंडल की यात्रा से कोई संबंध नहीं है।"</p>
<p>दोनों पक्षों के विरोधाभासी बयानों से उनके बीच गहरे अविश्वास का संकेत मिलता है। साथ ही हालिया सैन्य टकरावों के बाद 60 दिनों के भीतर व्यापक समझौते तक पहुंचने की संभावना पर भी सवाल खड़े हो गये हैं। बघाई ने कहा कि ईरान और अमेरिका अभी अंतिम समझौते पर बातचीत के चरण में नहीं पहुंचे हैं। उन्होंने कहा कि फिलहाल तेहरान की प्राथमिकता हालिया मध्यस्थता के बाद हुए समझौता ज्ञापन में किए गए वादों को लागू कराना है।</p>
<p>उन्होंने कहा, "समझौता ज्ञापन की धारा 13 के अनुसार अंतिम समझौते पर वार्ता तभी शुरू हो सकती है, जब धारा 1, 4, 5, 10 और 11 का क्रियान्वयन शुरू हो जाए।" बघाई के अनुसार अमेरिका ने धारा 10 के तहत ईरानी तेल की बिक्री से संबंधित लाइसेंस जारी किए हैं, जबकि तेहरान धारा 11 के तहत ईरान की जब्त संपत्तियों को मुक्त कराने की प्रक्रिया आगे बढ़ा रहा है। उन्होंने कहा कि इसी सिलसिले में इस सप्ताह के अंत में ईरान का एक विशेषज्ञ प्रतिनिधिमंडल दोहा जाएगा, लेकिन इसका अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल की यात्रा से कोई संबंध नहीं है।</p>
<p>इस बीच ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने कहा कि यदि अमेरिका अपनी प्रतिबद्धताओं का पालन करेगा तो ईरान भी समझौते का सम्मान करेगा, हालांकि उन्होंने चेतावनी दी कि किसी भी प्रकार की धमकी का ईरान दृढ़ता से जवाब देगा। उन्होंने कहा, "यदि अमेरिका अपनी जिम्मेदारियां निभाता है तो ईरान भी समझौते के प्रति प्रतिबद्ध रहेगा," लेकिन साथ ही स्पष्ट किया कि देश अपने हितों की रक्षा करने में कोई हिचकिचाहट नहीं करेगा।</p>
<p>ईरानी राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि कतर में जमी ईरान की लगभग 12 अरब डॉलर की संपत्ति में से आधी राशि तेहरान को वापस मिलेगी। यह मुद्दा वर्तमान कूटनीतिक प्रयासों का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है। होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा को लेकर जारी अंतरराष्ट्रीय चिंताओं के बीच ईरान ने इस सुझाव को भी खारिज कर दिया कि अन्य देश वहां बारूदी सुरंग हटाने के अभियान में भाग लें। ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम ग़रीबाबादी ने कहा कि जलडमरूमध्य में बारूदी सुरंग हटाने का कार्य केवल ईरान करेगा। उन्होंने फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के उस बयान को अस्वीकार किया, जिसमें फ्रांस, ओमान और अन्य देशों की संभावित भूमिका का उल्लेख किया गया था।</p>
<p>ग़रीबाबादी ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर लिखा, "समझौता ज्ञापन के अनुसार होर्मुज जलडमरूमध्य में सुरंग हटाने का कार्य केवल ईरान करेगा। किसी अन्य देश को इसकी अनुमति नहीं दी जाएगी।" उन्होंने कहा कि स्थिति अब भी संवेदनशील और जटिल बनी हुई है तथा फ्रांस को भड़काऊ बयान देकर इसे और जटिल नहीं बनाना चाहिए। उधर इजरायल के रक्षा मंत्री इजरायल काट्ज ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान और लेबनान दोनों से जुड़े युद्धविराम समझौतों को एक-दूसरे से जोड़ने पर जोर दिया, जबकि इजरायल दोनों मामलों को अलग-अलग रखना चाहता था। </p>
<p>काट्ज ने कहा कि अमेरिका ने इजरायल को तब तक लेबनान के कुछ हिस्सों में अपनी सैन्य उपस्थिति बनाए रखने का समर्थन दिया है, जब तक हिजबुल्ला पूरी तरह निरस्त्र नहीं हो जाता। इजरायल और लेबनान के बीच समझौता हो चुका है, फिर भी लेबनान की संसद के अध्यक्ष और हिजबुल्ला के प्रमुख सहयोगी नबीह बेरी ने अमेरिका की मध्यस्थता में हुए समझौते की आलोचना करते हुए कहा कि "इसका क्रियान्वयन नहीं होगा।"</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/leads/trumps-big-claim-that-america-iran-peace-talks-will-be-held/article-158494</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/leads/trumps-big-claim-that-america-iran-peace-talks-will-be-held/article-158494</guid>
                <pubDate>Tue, 30 Jun 2026 16:12:36 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2026-04/donald-trump.jpg"                         length="56364"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>क्या टल गया तीसरे विश्व युद्ध का खतरा? अमेरिका-ईरान ने तनाव घटाने पर जताई सहमति, तकनीकी वार्ता जारी</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य टकराव के बाद फिलहाल दोनों पक्ष पीछे हटने पर सहमत हुए हैं। ट्रंप प्रशासन के अनुसार, होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से वाणिज्यिक जहाजों का आवागमन जारी रखने के लिए अंतरिम व्यवस्था लागू की गई है। हालांकि, क्षेत्र में सुरक्षा को लेकर अनिश्चितता और तनाव अभी भी बना हुआ है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/has-the-threat-of-third-world-war-been-averted-america-iran/article-158362"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/12200-x-600-px)9.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिका और ईरान के बीच हालिया सैन्य हमलों के बाद दोनों पक्षों ने फिलहाल तनाव कम करने पर सहमति जतायी है। ट्रंप प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने रविवार को कहा कि दोनों पक्ष "फिलहाल पीछे हटेंगे" और होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही जारी रहेगी। इस संबंध में ईरान की ओर से अब तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गयी है। रिपोर्ट के अनुसार, अधिकारी ने कहा कि दोनों पक्षों के बीच एक अंतरिम व्यवस्था लागू है और जहाजों की आवाजाही में बाधा नहीं आएगी। </p>
<p>होर्मुज में वास्तविक स्थिति अभी भी सामान्य नहीं दिख रही है, जिससे वाणिज्यिक जहाजों के संचालकों और चालक दल के बीच अनिश्चितता और सुरक्षा संबंधी चिंताएं बनी हुई हैं। उल्लेखनीय है कि ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (आईआरजीसी) ने दावा किया कि अमेरिका द्वारा ईरानी ठिकानों पर हमले किये जाने के बाद उसने कुवैत और बहरीन सहित पड़ोसी देशों में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। इससे पहले होर्मुज में आवाजाही के कारण अमेरिका-ईरान के बीच हमलों का आदान-प्रदान हुआ था।</p>
<p>एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने कहा कि ईरान के साथ तकनीकी स्तर की वार्ता निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार जारी है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पहले चेतावनी दे चुके हैं कि यदि ईरान की ओर से हमले जारी रहे तो अमेरिका और सैन्य कार्रवाई करेगा। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने रविवार को कहा कि क्षेत्र के देशों को अपनी भूमि अथवा सुविधाओं का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ हमलों के लिए नहीं होने देना चाहिये।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/leads/has-the-threat-of-third-world-war-been-averted-america-iran/article-158362</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/leads/has-the-threat-of-third-world-war-been-averted-america-iran/article-158362</guid>
                <pubDate>Mon, 29 Jun 2026 13:04:28 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2026-06/12200-x-600-px%299.png"                         length="1647194"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        