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                <title>FBI - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>FBI RSS Feed</description>
                
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                <title>अमेरिका में फर्जी डकैती रचकर वीजा लेने का खेल बेनकाब: भारतीय नागरिक दोषी करार, अदालत ने दिया देश छोड़ने का आदेश</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिका की अदालत ने फर्जी डकैती का नाटक रचकर आव्रजन लाभ हासिल करने की साजिश में शामिल एक भारतीय नागरिक को दोषी ठहराया। मामले में जुर्माना लगाने के साथ उसे देश छोड़ने का आदेश दिया गया। जांच एजेंसियों के अनुसार, कथित नेटवर्क नकली अपराध दिखाकर वीजा प्रक्रिया का दुरुपयोग करता था।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/the-game-of-getting-a-visa-by-committing-fake-robbery/article-161452"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-07/fbi.png" alt=""></a><br /><p>बोस्टन। अमेरिका के मैसाचुसेट्स में फर्जी डकैती का नाटक रचकर आव्रजन वीजा (यू-वीजा) पाने की साजिश में शामिल भारतीय नागरिक मितुल पटेल को बोस्टन की अदालत ने दोषी ठहराया है। अदालत ने पटेल (40) पर 1,000 डॉलर का जुर्माना लगाया और जेल में बिताए गये एक दिन को ही उसकी सजा मानते हुए उसे तुरंत अमेरिका से बाहर भेजने का आदेश दिया। मामले के मुताबिक, गैर-कानूनी तरीके से अमेरिका में रह रहे मितुल पटेल और उसके 10 साथियों पर मार्च में मामला दर्ज हुआ था। मितुल ने जून में अपना जुर्म कबूल कर लिया था।</p>
<p>जांच में सामने आया कि मुख्य आरोपी रामभाई पटेल और उसके साथी मार्च 2023 से दुकानों और रेस्तरां में फर्जी सशस्त्र डकैती करवाते थे। इसका मकसद दुकान के कर्मचारियों को पीड़ित दिखाकर उनके लिए अमेरिका का 'यू-वीजा' हासिल करना था। अमेरिका में यह वीजा उन विदेशियों को मिलता है जो किसी गंभीर अपराध का शिकार हुए हों और जांच में पुलिस की मदद करते हैं। इस फर्जीवाड़े में एक नकली डाकू दुकान में घुसकर बंदूक दिखाता था और पैसे लूटकर भाग जाता था। यह सब दुकान के सीसीटीवी में रिकॉर्ड होता था ताकि सबूत रहे। डाकू के भागने के पांच मिनट बाद कर्मचारी पुलिस को फोन करते थे। पीड़ित बनने के लिए मितुल पटेल जैसे लोग रामभाई को पैसे देते थे और रामभाई दुकानों के मालिकों को इसके बदले भुगतान करता था।</p>
<p>मितुल पटेल ने अक्टूबर 2023 में ऐसी ही एक फर्जी डकैती में 'पीड़ित' बनने के लिए रामभाई को पैसे दिए थे। एफबीआई के अनुसार, इस पूरे नेटवर्क के मुख्य साजिशकर्ताओं को मई 2025 में ही दोषी ठहराया जा चुका था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
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                <pubDate>Thu, 30 Jul 2026 16:29:52 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>अमेरिकी बॉर्डर पैट्रोल की सीमा पर मुठभेड़, एक शख्स घायल, पुलिस जांच जारी</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिका के एरिजोना में बॉर्डर पेट्रोल मुठभेड़ में संदिग्ध को गोली लगी। मानव तस्करी संदेह में पीछा करते दौरान फायरिंग हुई, आरोपी गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/one-person-injured-in-encounter-with-us-border-patrol-police/article-141105"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/1200-x-600-px)-(14)3.png" alt=""></a><br /><p>लॉस एंजिलस। अमेरिका के एरिजोना राज्य में अमेरिकी बॉर्डर पेट्रोल से जुड़ी एक घटना में गोली लगने से एक आदमी की हालत गंभीर है। अधिकारियों ने मंगलवार को यह जानकारी दी। </p>
<p>स्थानीय मीडिया ने पिमा काउंटी शेरिफ विभाग के हवाले से बताया कि यह घटना अरिवाका में हुई, जो अमेरिका-मेक्सिको सीमा से लगभग 16 किमी उत्तर में है। पिमा काउंटी शेरिफ क्रिस नैनोस ने एक संवाददाता सम्मेलन में पुष्टि की कि संदिग्ध की पहचान एरिजोना के निवासी पैट्रिक गैरी श्लेगल के रूप में हुई है। यह घटना स्थानीय समय के अनुसार सुबह लगभग 7:30 बजे शुरू हुई, जब बॉर्डर पेट्रोल एजेंटों ने एक वाहन की पहचान की। उनका मानना था कि वह एक ऐसे व्यक्ति का है, जिस पर पहले की एक घटना में मानव तस्करी का संदेह था। नैनोस ने कहा, जब उन्होंने ट्रैफिक रोका, तो कार में बैठा अकेला ड्राइवर पैदल भागने लगा। बॉर्डर पेट्रोल एजेंट ने पैदल उसका पीछा किया। कुछ ही देर बाद संदिग्ध ने गोलियां चलायीं और एजेंट ने जवाबी गोलीबारी की। इससे संदिग्ध को गोली लग गयी।</p>
<p>स्थानीय मीडिया ने बताया कि उस व्यक्ति को हिरासत में ले लिया गया है और इलाज के लिए ले जाया गया। शेरिफ विभाग ने कहा कि वह एफबीआई और अमेरिकी सीमा शुल्क एवं सीमा सुरक्षा के साथ समन्वय में काम कर रहा है। एफबीआई के फीनिक्स डिवीजन के प्रभारी विशेष एजेंट हीथ जंके ने भी मीडिया को बताया कि घटना के दौरान संदिग्ध ने बॉर्डर पेट्रोल हेलीकॉप्टर और एजेंटों पर गोलियां चलायीं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 28 Jan 2026 17:25:15 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>एपस्टीन फाइल्स विवाद: अमेरिकी न्याय विभाग की वेबसाइट से दस्तावेज़ गायब, ट्रंप की तस्वीर हटने से मचा सियासी और कानूनी भूचाल</title>
                                    <description><![CDATA[दोषी सेक्स अपराधी जेफरी एपस्टीन से जुड़े दस्तावेज़ एक बार फिर अमेरिकी राजनीति, न्याय व्यवस्था और सत्ता के गलियारों में हलचल मचा रहे हैं। एसोसिएटेड प्रेस (AP) की एक विस्तृत समीक्षा के अनुसार, अमेरिकी न्याय विभाग (US Department of Justice – DOJ) की सार्वजनिक वेबसाइट से कम से कम]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/epstein-files-controversy-documents-missing-from-us-justice-departments-website/article-136671"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/the-epstin-fies.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। दोषी सेक्स अपराधी जेफरी एपस्टीन से जुड़े दस्तावेज़ एक बार फिर अमेरिकी राजनीति, न्याय व्यवस्था और सत्ता के गलियारों में हलचल मचा रहे हैं। एसोसिएटेड प्रेस (AP) की एक विस्तृत समीक्षा के अनुसार, अमेरिकी न्याय विभाग (US Department of Justice – DOJ) की सार्वजनिक वेबसाइट से कम से कम 16 ऐसे दस्तावेज़ रहस्यमय ढंग से गायब हो गए, जो एपस्टीन केस से जुड़े थे। इन दस्तावेज़ों में एक ऐसी इमेज भी शामिल थी, जिसमें पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप दिखाई दे रहे थे।</p>
<p>ये फाइलें शुक्रवार तक वेबसाइट पर उपलब्ध थीं, लेकिन शनिवार को बिना किसी आधिकारिक नोटिस, स्पष्टीकरण या सार्वजनिक घोषणा के एक्सेस से बाहर हो गईं। इस अचानक हुई कार्रवाई ने न सिर्फ सोशल मीडिया पर अटकलों को जन्म दिया, बल्कि एपस्टीन केस में वर्षों से चली आ रही पारदर्शिता की कमी पर भी नए सिरे से बहस छेड़ दी।</p>
<p><strong>क्या-क्या हुआ गायब?</strong></p>
<p>AP के मुताबिक, जो दस्तावेज़ गायब हुए हैं, उनमें सिर्फ टेक्स्ट फाइलें ही नहीं, बल्कि कई अहम तस्वीरें और इमेज भी शामिल थीं। इनमें कुछ आर्टवर्क की तस्वीरें थीं, जिनमें नग्न महिलाओं को दर्शाया गया था। इसके अलावा एक तस्वीर ऐसी थी जिसमें एक क्रेडेंज़ा (फर्नीचर) और उसके दराजों के भीतर रखी तस्वीरें दिखाई दे रही थीं। इन्हीं दराजों की एक तस्वीर में डोनाल्ड ट्रंप की एक फोटो भी शामिल थी, जिसमें वह जेफरी एपस्टीन, अपनी पत्नी मेलानिया ट्रंप और एपस्टीन की लंबे समय से सहयोगी और बाद में दोषी ठहराई गई घिसलेन मैक्सवेल के साथ नजर आ रहे थे। हालांकि, इस बात का कोई संकेत नहीं है कि इन तस्वीरों का किसी आपराधिक मामले में सीधा इस्तेमाल हुआ हो, लेकिन इनका अचानक गायब होना कई सवाल खड़े करता है।</p>
<p><strong>न्याय विभाग की चुप्पी</strong></p>
<p>सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि अमेरिकी न्याय विभाग ने इन फाइलों के हटने पर कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया। यह भी साफ नहीं किया गया कि ये दस्तावेज़ जानबूझकर हटाए गए या किसी तकनीकी गलती के चलते वेबसाइट से गायब हुए। AP ने जब इस बारे में सवाल पूछे, तो न्याय विभाग के प्रवक्ता ने टिप्पणी के अनुरोध पर तुरंत कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। इस चुप्पी ने संदेह को और गहरा कर दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जब मामला इतना संवेदनशील हो और उसमें प्रभावशाली लोगों के नाम या तस्वीरें जुड़ी हों, तो पारदर्शिता की कमी अपने आप में एक बड़ा मुद्दा बन जाती है।</p>
<p><strong>ऑनलाइन अटकलें और राजनीतिक प्रतिक्रिया</strong></p>
<p>दस्तावेज़ों के अचानक गायब होने के बाद सोशल मीडिया पर अटकलों की बाढ़ आ गई। कई यूज़र्स ने सवाल उठाया कि आखिर क्या छिपाया जा रहा है और किसके हित में यह कदम उठाया गया। हाउस ओवरसाइट कमेटी के डेमोक्रेटिक सदस्यों ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट में इन गायब इमेज की ओर इशारा करते हुए लिखा, “और क्या छिपाया जा रहा है? हमें अमेरिकी जनता के लिए ट्रांसपेरेंसी चाहिए।” इस बयान ने मामले को और राजनीतिक रंग दे दिया और कांग्रेस में न्याय विभाग की भूमिका पर सवाल उठने लगे।</p>
<p><strong>पारदर्शिता पर पहले से ही सवाल</strong></p>
<p>यह घटना ऐसे समय पर सामने आई है, जब अमेरिकी न्याय विभाग पहले से ही एपस्टीन से जुड़े दस्तावेज़ों के बड़े पैमाने पर जारी करने को लेकर आलोचनाओं का सामना कर रहा है। हाल ही में जारी किए गए हजारों पन्नों के रिकॉर्ड्स से यह उम्मीद की जा रही थी कि एपस्टीन के अपराधों, उसके प्रभावशाली लोगों से संबंधों और सरकारी फैसलों पर नई रोशनी पड़ेगी। लेकिन आलोचकों का कहना है कि इन दस्तावेज़ों से बहुत कम नई जानकारी सामने आई है। कई बेहद अहम और लंबे समय से प्रतीक्षित रिकॉर्ड अब भी सार्वजनिक नहीं किए गए हैं।</p>
<p><strong>कौन-से अहम रिकॉर्ड अब भी गायब हैं?</strong></p>
<p>गायब या जारी न किए गए दस्तावेज़ों में शामिल हैं:</p>
<p>* एपस्टीन के पीड़ितों और सर्वाइवरों के साथ FBI के इंटरव्यू<br />* न्याय विभाग के आंतरिक मेमोरेंडम<br />* वे दस्तावेज़, जिनमें यह जांच की गई थी कि एपस्टीन सालों तक गंभीर फेडरल आरोपों से कैसे बचता रहा</p>
<p>इन रिकॉर्ड्स से यह समझने में मदद मिल सकती थी कि जांचकर्ताओं ने आरोपों का मूल्यांकन कैसे किया और आखिर 2008 में एपस्टीन को सिर्फ एक मामूली राज्य-स्तरीय वेश्यावृत्ति (प्रॉस्टिट्यूशन) के आरोप में दोषी क्यों ठहराया गया।</p>
<p><strong>बड़े नाम, लेकिन अधूरी तस्वीर</strong></p>
<p>कांग्रेस द्वारा हाल ही में पास किए गए एक कानून के तहत जिन खुलासों की उम्मीद की जा रही थी, उनमें एपस्टीन से जुड़े कई बड़े नामों का जिक्र बेहद सीमित है। ब्रिटेन के पूर्व प्रिंस एंड्रयू जैसे हाई-प्रोफाइल नामों का भी मुश्किल से ही उल्लेख मिलता है। AP के मुताबिक, इससे फिर वही सवाल उठते हैं—</p>
<p>किसकी जांच हुई?<br />किसकी नहीं हुई?<br />और क्या इन दस्तावेज़ों की रिलीज़ से वाकई सार्वजनिक जवाबदेही बढ़ी है?</p>
<p><strong>जो नई जानकारी सामने आई</strong></p>
<p>हालांकि आलोचनाओं के बीच कुछ नई जानकारियां भी सामने आई हैं। इनमें शामिल हैं:</p>
<p>2000 के दशक में न्याय विभाग द्वारा एपस्टीन के खिलाफ फेडरल जांच बंद करने के फैसले की नई डिटेल्स<br />1996 की एक पहले कभी न देखी गई शिकायत, जिसमें एपस्टीन पर बच्चों की तस्वीरें चुराने का आरोप लगाया गया था</p>
<p>इन खुलासों से यह संकेत मिलता है कि एपस्टीन के खिलाफ आरोप और शिकायतें दशकों पहले से मौजूद थीं, लेकिन फिर भी उसे लंबे समय तक सख्त कार्रवाई से बचाया गया।</p>
<p><strong>तस्वीरें ज्यादा, जवाब कम</strong></p>
<p>अब तक जारी किए गए रिकॉर्ड्स में एपस्टीन के न्यूयॉर्क और यूएस वर्जिन आइलैंड्स स्थित घरों की तस्वीरें बड़ी संख्या में हैं। इसके अलावा कई सेलिब्रिटी और राजनीतिक नेताओं के साथ उसकी तस्वीरें भी शामिल हैं। पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन की कई पहले कभी न देखी गई तस्वीरें सामने आई हैं। वहीं, डोनाल्ड ट्रंप की तस्वीरें तुलनात्मक रूप से कम हैं। दोनों नेताओं ने एपस्टीन को जानने की बात स्वीकार की है, लेकिन किसी भी तरह की गलत गतिविधियों में शामिल होने से इनकार किया है। यह भी स्पष्ट किया गया है कि इन तस्वीरों का किसी आपराधिक मुकदमे में सीधा इस्तेमाल नहीं हुआ।</p>
<p><strong>देरी, बदलाव और सर्वाइवरों का गुस्सा</strong></p>
<p>कांग्रेस की ओर से पूरी जानकारी देने की जो समय-सीमा तय की गई थी, उसके बावजूद न्याय विभाग ने कहा कि रिकॉर्ड “रोलिंग बेसिस” पर जारी किए जाएंगे। विभाग का तर्क है कि सर्वाइवरों की पहचान और नाम हटाने के लिए अतिरिक्त समय की जरूरत है। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं किया गया कि आगे और दस्तावेज़ कब जारी होंगे। इस अस्पष्टता ने कई कानून निर्माताओं और सर्वाइवरों को खारिज कर दिया है। मरीना लेसरडा, जिन्होंने आरोप लगाया है कि एपस्टीन ने 14 साल की उम्र में उनके साथ यौन शोषण किया था, ने कहा,“मुझे फिर से लगता है कि DOJ और जस्टिस सिस्टम हमें फेल कर रहा है।”</p>
<p><strong>एपस्टीन केस: एक संक्षिप्त पृष्ठभूमि</strong></p>
<p>जेफरी एपस्टीन पर 2019 में फेडरल प्रॉसिक्यूटर्स ने सेक्स ट्रैफिकिंग के गंभीर आरोप लगाए थे। लेकिन ट्रायल शुरू होने से पहले ही न्यूयॉर्क की जेल में उनकी मौत हो गई, जिसे आधिकारिक तौर पर आत्महत्या बताया गया। अब तक जो दस्तावेज़ जारी हुए हैं, वे न्याय विभाग के पास मौजूद कुल रिकॉर्ड्स का सिर्फ एक छोटा हिस्सा हैं।</p>
<p><strong>रिकॉर्ड्स का विशाल दायरा</strong></p>
<p>डिप्टी अटॉर्नी जनरल टॉड ब्लैंच के अनुसार, अकेले मैनहट्टन प्रॉसिक्यूटर ऑफिस ने एपस्टीन और घिसलेन मैक्सवेल की जांच से जुड़े 3.6 मिलियन से अधिक रिकॉर्ड इकट्ठा किए हैं। इनमें से कई FBI मटीरियल की प्रतियां हैं। फिलहाल जो कुछ भी सार्वजनिक किया गया है, वह पहले से ही कोर्ट फाइलिंग, कांग्रेसनल डिस्क्लोज़र या फ्रीडम ऑफ इंफॉर्मेशन रिक्वेस्ट (FOIA) के जरिए उपलब्ध था। नया यह है कि इन्हें एक सर्च करने योग्य प्लेटफॉर्म पर इकट्ठा किया गया है।</p>
<p><strong>भारी सेंसरशिप और ब्लैकआउट</strong></p>
<p>नए जारी किए गए कई रिकॉर्ड्स बुरी तरह से एडिट किए गए हैं। कई जगह संदर्भ (कॉन्टेक्स्ट) हटा दिया गया है। “ग्रैंड जूरी-NY” नाम का एक 119 पन्नों का दस्तावेज़ पूरी तरह से ब्लैक आउट कर दिया गया था, जिससे उसमें मौजूद जानकारी जनता के लिए पूरी तरह अपठनीय हो गई।</p>
<p><strong>ग्रैंड जूरी ट्रांसक्रिप्ट: सबसे अहम खुलासा</strong></p>
<p>सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज़ों में ग्रैंड जूरी ट्रांसक्रिप्ट शामिल हैं। इनसे पता चलता है कि 2007 की शुरुआत में ही फेडरल प्रॉसिक्यूटर्स के पास एपस्टीन के खिलाफ एक मजबूत केस मौजूद था। FBI एजेंट्स ने उन लड़कियों और युवतियों के इंटरव्यू के बारे में गवाही दी, जिन्होंने कहा कि उन्हें एपस्टीन के लिए सेक्स एक्ट करने के बदले पैसे दिए गए। इनमें एक 14 साल की नौवीं कक्षा की छात्रा भी शामिल थी। एक गवाह ने बताया कि मसाज के दौरान विरोध करने पर उसके साथ शारीरिक हमला किया गया। एक अन्य गवाह ने कहा कि एपस्टीन ने उसे 16 साल की उम्र में काम पर रखा और बाद में दूसरी लड़कियों को भर्ती करने के लिए पैसे दिए। उसने गवाही में कहा, “हर लड़की के लिए जिसे मैं उसके पास लाती थी, वह मुझे 200 डॉलर देता था।”</p>
<p><strong>अलेक्जेंडर अकोस्टा का बयान</strong></p>
<p>दस्तावेज़ों में अमेरिकी अटॉर्नी अलेक्जेंडर अकोस्टा के साथ न्याय विभाग का एक इंटरव्यू भी शामिल है। अकोस्टा ने इस केस की निगरानी की थी और बाद में ट्रंप के पहले कार्यकाल में श्रम सचिव बने। उन्होंने कहा कि उस समय जूरी की सोच और सेक्स ट्रैफिकिंग व वेश्यावृत्ति के मामलों के बीच की रेखा धुंधली थी। मैं यह नहीं कह रहा कि यह सही सोच थी, उन्होंने स्वीकार किया और जोड़ा कि पीड़ितों के प्रति रवैया अब काफी बदल चुका है।</p>
<p><strong>सर्वाइवरों की प्रतिक्रिया: जीत भी, त्रासदी भी</strong></p>
<p>एपस्टीन पर आरोप लगाने वाली मारिया फार्मर की वकील जेनिफर फ्रीमैन ने कहा कि इन खुलासों ने उनके क्लाइंट को एक साथ सही साबित होने और टूट जाने जैसा महसूस कराया है। उन्होंने कहा, यह एक जीत और एक त्रासदी दोनों है। ऐसा लगता है कि सरकार ने बिल्कुल कुछ नहीं किया। अगर उन्होंने थोड़ी सी भी जांच की होती, तो कई भयानक चीजें रोकी जा सकती थीं।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
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                <pubDate>Sun, 21 Dec 2025 12:04:19 +0530</pubDate>
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                <title>कौन है रहमानुल्लाह लकनवाल? अफगानिस्तान में अमेरिकी सैनिकों के साथ करता था काम, व्हाइट हाउस के बाहर की थी फायरिंग</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिका के वाशिंगटन डीसी में व्हाइट हाउस के पास बुधवार को हुई गोलीबारी में दो सुरक्षा प्रहरी और एक व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हो गए। फारागट स्क्वायर के पास हुई इस घटना में आरोपी 29 वर्षीय अफगान नागरिक रहमानुल्लाह लाकनवाल को गिरफ्तार किया गया। एफबीआई मामले की जांच कर रही है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/who-is-rahmanullah-lakanwal-he-worked-with-american-soldiers-in/article-133794"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-11/us1.png" alt=""></a><br /><p>अमेरिका। अमेरिका के वाशिंगटन डीसी में बुधवार को व्हाइट हाउस के पास हुई गोलीबारी में दो सुरक्षा प्रहरी गंभीर रूप से घायल हो गए। इस घटना में नेशनल गार्ड के जवानों के साथ एक और व्यक्ति के गंभीर रूप से घायल होने की सूचना है। यह घटना वाशिंगटन डीसी के भीड़भाड़ वाले इलाके, फारागट स्क्वायर के पास हुई, जिससे इलाके में अफरा तफरी मच गई। इस गोलीबारी के मामले में एक हमलावर को गिरफ्तार किया गया है। </p>
<p>अधिकारियों के अनुसार, आरोपी ने सुरक्षा प्रहरियों पर गोलियां चलाईं, जिसके बाद पास में मौजूद नेशनल गार्ड के दूसरे जवानों ने उसे पकड़ लिया, जिन्होंने गोलियों की आवाज सुनी थी। संदिग्ध की पहचान 29 वर्षीय अफगान नागरिक रहमानुल्लाह लाकनवाल की पहचान संदिग्ध के रूप में हुई है।</p>
<p><strong>मूलरूप से अफगान का रहने वाला रहमानुल्लाह लकनवाल</strong></p>
<p>पुलिस ने जानकारी देते हुए बताया है कि, आरोपी साल 2021 में बाइडन प्रशासन की नीति के तहत अमेरिका में आया था। एफबीआई प्रमख काश पटेल ने भी घटनास्थल की जांच के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए बताया है कि, आरोपी का क्या फायरिंग के पीछे क्या मकसद था फिलहाल इसके बारे में जांच जारी हैं। इसके अलावा एफबीआई ने आरोपी की पहचान आतंकी के रूप में की है, जिसकी सोशल मीडिया पर एक तस्वीर भी वायरल हो रही है। इस गोलीबारी के बारे में डीसी के मेयर म्यूरिल बाउजर ने बताया कि, आरोपी ने यह टार्गेटेड अटैक किया था. इसके आगे पुलिस ने जानकारी देते हुए बताया कि, रहमानुल्लाह काफी समय से वाशिंगटन में ही रह रहा था और अफगानिस्तान में अमेरिकी सैनिकों के साथ काम करता था। इतना ही नहीं, आरोपी ने करीब 10 साल से अफगान सेना में किया और कंधार के हवाई अड्डे पर तैनात रहा। फिलहाल, इस मामले में आगे जांच जारी है और आरोपी की अन्य जानकारियां भी निकाली जा रही है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 27 Nov 2025 13:20:02 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>ट्रंप की पत्नी मेलानिया ने अमेरिकी खुफिया एजेंसी पर लगाया निजता के हनन का आरोप</title>
                                    <description><![CDATA[याद रखने की बात है कि हमारी स्वतंत्रता और अधिकारों का सम्मान किया जाना चाहिए।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/trumps-wife-melania-accuses-us-intelligence-agency-of-violating-privacy/article-90577"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-09/2rtrer-(23)1.png" alt=""></a><br /><p>वाशिंगटन। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति एवं रिपब्लिकन पार्टी के राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार डोनाल्ड ट्रंप की पत्नी मेलानिया ट्रंप ने आरोप लगाया है कि अमेरिकी खुफिया एजेंसी फेडरल ब्यूरो ऑफ इनवेस्टिगेशन (एफबीआई) ने ट्रंप के खिलाफ अपनी जांच के तहत अगस्त 2022 में मार-ए-लागो में उनकी संपत्ति की तलाशी लेकर उनकी निजता का हनन किया है।</p>
<p>ट्रंप ने 'एक्स' पर एक वीडियो में कहा कि मैंने कभी नहीं सोचा था कि अमेरिकी सरकार मेरी निजता का हनन करेगी। एफबीआई ने फ्लोरिडा में मेरे घर पर छापा मारा और मेरे निजी सामान की तलाशी ली। यह सिर्फ मेरी कहानी नहीं है, यह सभी अमेरिकियों के लिए एक चेतावनी है, याद रखने की बात है कि हमारी स्वतंत्रता और अधिकारों का सम्मान किया जाना चाहिए।</p>
<p>उनके संक्षिप्त भाषण के बाद वीडियो में उनके संस्मरण 'मेलानिया' के कवर के साथ एक टाइटल कार्ड दिखाया गया है, जिसके इस वर्ष शरद ऋतु में प्रकाशित होने की उम्मीद है। इससे पहले, ट्रम्प ने एक आत्मकथात्मक पुस्तक के दो संस्करणों में विमोचन की घोषणा की थी। एफबीआई ने पूर्व राष्ट्रपति द्वारा बड़ी संख्या में वर्गीकृत दस्तावेज रखने और छिपाने के मामले में अगस्त 2022 में उनकी संपत्ति की तलाशी ली थी। कानून प्रवर्तन अधिकारियों ने आधिकारिक सामग्रियों के अवैध उपयोग, चोरी और विनाश के मामले के तहत फ्लोरिडा में उनके मार-ए-लागो एस्टेट में तलाशी ली थी। </p>
<p>उन्होंने तलाशी के दौरान हजारों गोपनीय दस्तावेज जब्त किये थे, जिनमें उच्चतम गोपनीयता वाले दस्तावेज भी शामिल थे। ट्रंप हालांकि, जांच प्रक्रियाओं से सहमत नहीं थे और उन्होंने न्याय विभाग की कार्रवाइयों की आलोचना करते हुए दावा किया कि वे राजनीति से प्रेरित थे। जिला न्यायाधीश ऐलीन कैनन ने जुलाई के मध्य में ट्रंप के खिलाफ मामले को बंद करने का फैसला सुनाया, जिसमें कहा गया कि पूर्व राष्ट्रपति के खिलाफ मामलों की जांच के प्रभारी जैक स्मिथ की विशेष अभियोजक के रूप में नियुक्ति अमेरिकी संविधान के मानदंडों के विपरीत थी। स्मिथ ने बाद में इस फैसले के खिलाफ अपील की थी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 15 Sep 2024 18:48:26 +0530</pubDate>
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                <title>पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प के आवास पर छापे, जानकारी को सार्वजनिक करने से भारी क्षति की आशंका</title>
                                    <description><![CDATA[शुक्रवार को जारी वारंट के अनुसार पाम बीच स्थित संपत्ति से आठ अगस्त को तलाशी में गोपनीय फाइलों के ग्यारह सेट बरामद हुए थे। कई समाचार संगठनों ने वारंट प्राप्त करने के लिए आवश्यक सबूत वाले अदालती दस्तावेज को सार्वजनिक करने के लिए याचिका दायर की है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/raid-on-former-us-president-trump-s-residence--fear-of-heavy-damage-due-to-disclosure-of-information/article-19216"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-08/donald-trump.jpg" alt=""></a><br /><p>वाशिंगटन। अमेरिका के न्याय विभाग ने कहा कि पिछले हफ्ते पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के फ्लोरिडा स्थित आवास पर छापेमारी के लिए जारी वारंट की जानकारी सार्वजनिक करने से इसकी जांच को भारी क्षति हो सकती है।</p>
<p>बीबीसी की रिपोर्ट में बताया गया कि विभाग हलफनामे के विवरण का खुलासा नहीं करना चाहता है। अमेरिका की प्रमुख जांच एजेंसी फेडरल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन के एजेंटों ने मार-ए-लेगो स्थित रिपब्लिकन नेता आवास पर सरकारी रिकॉर्ड को गलत तरीके इस्तेमाल को लेकर छापेमारी की थी। यह अमेरिकी इतिहास में पहली बार है की जब किसी पूर्व राष्ट्रपति के आवास पर आपराधिक जांच के दौरान छापा मारा गया हो।</p>
<p>शुक्रवार को जारी वारंट के अनुसार पाम बीच स्थित संपत्ति से आठ अगस्त को तलाशी में गोपनीय फाइलों के ग्यारह सेट बरामद हुए थे। कई समाचार संगठनों ने वारंट प्राप्त करने के लिए आवश्यक सबूत वाले अदालती दस्तावेज को सार्वजनिक करने के लिए याचिका दायर की है।  लेकिन अभियोजकों ने सोमवार को इस याचिका का यह कहते हुए विरोध किया कि इस कदम से चल रही आपराधिक जांच को महत्वपूर्ण और अपूरणीय क्षति होगी। उन्होंने यह भी कहा कि हलफनामे को सीलबंद रखना चाहिए क्योंकि जांच में अत्यधिक गोपनीय दस्तावेज शामिल है।</p>
<p>सोमवार को ट्रम्प ने कहा कि एफबीआई छापे के दौरान उनके तीन पासपोर्ट ले गई। उन्होंने कहा कि यह राजनीतिक प्रतिद्वंदी पर हमला है।</p>
<p>अदालती फाइलिंग में अभियोजकों ने अदालत को बताया कि एफबीआई के खिलाफ धमकियों के मद्देनजर हलफनामे को सार्वजनिक नहीं किया जाए।अदालत की फाइलिंग में कहा गया है- गवाहों के बारे में जानकारी विशेष रूप से संवेदनशील है। इस मामले की हाई-प्रोफाइल प्रकृति का होने से गवाहों की पहचान का खुलासा होने का खतरा है जोकि जांच में सहयोग करने की उनकी इच्छा को प्रभावित करेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 16 Aug 2022 15:09:06 +0530</pubDate>
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