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                <title>Pentagon - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा ऐलान: दक्षिण कोरिया के साथ सैन्य अभ्यासों में होगी बड़ी कटौती, किम जोंग उन से रिश्तों का दिया हवाला</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दक्षिण कोरिया के साथ उल्ची फ्रीडम शील्ड सैन्य अभ्यास में 'बड़ी कटौती' का निर्देश दिया है। उन्होंने इसे खर्चीला बताते हुए उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग उन के साथ अपने अच्छे संबंधों और ईरान मुद्दे पर दक्षिण कोरिया के रुख को इसकी मुख्य वजह बताया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/donald-trumps-big-announcement-there-will-be-a-big-reduction/article-163100"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-07/trump-(2)1.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दक्षिण कोरिया के साथ होने वाले संयुक्त सैन्य अभ्यासों में "बड़ी कटौती" करने की घोषणा की है। उन्होंने इसके लिए उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग उन के साथ अपने "बहुत अच्छे संबंध" और दक्षिण कोरिया के अमेरिका के ईरान को "परमाणु निरस्त्रीकरण" करने के प्रयासों में शामिल होने से इनकार को वजह बताया। यह घोषणा वार्षिक अमेरिका-दक्षिण कोरिया सैन्य अभ्यास शुरू होने से कुछ घंटे पहले की गई। हालांकि, दक्षिण कोरिया ने कहा कि अभ्यास निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार जारी रहेंगे। उल्ची फ्रीडम शील्ड अभ्यास 17 से 27 अगस्त तक होने हैं और इनमें करीब 18,000 दक्षिण कोरियाई सैनिक हिस्सा ले रहे हैं।</p>
<p>राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया मंच 'ट्रुथ सोशल' पर कहा कि वह दक्षिण कोरिया के साथ संयुक्त सैन्य अभ्यासों से खुश नहीं हैं। उन्होंने कहा कि ये अभ्यास महंगे हैं और अमेरिका इनकी लागत का बड़ा हिस्सा वहन करता है। उन्होंने रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ को अभ्यासों में "बड़ी कटौती" करने का निर्देश दिया है। उन्होंने दक्षिण कोरिया के ईरान संबंधी अमेरिकी प्रयासों में शामिल होने से इनकार की भी आलोचना की। ट्रम्प ने कहा कि उन्होंने दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति से ईरान के परमाणु निरस्त्रीकरण के प्रयास में शामिल होने को कहा था, लेकिन सियोल ने इससे इनकार कर दिया। दक्षिण कोरिया के रक्षा मंत्रालय ने कहा कि सैन्य अभ्यास पहले से निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार होंगे। इन अभ्यासों का उद्देश्य संभावित उत्तर कोरियाई आक्रामकता से निपटने के लिए दोनों देशों की सैन्य तैयारियों को मजबूत करना है। उत्तर कोरिया ने इन अभ्यासों की निंदा करते हुए इन्हें "आक्रामक युद्ध की तैयारी" बताया है और जवाबी कार्रवाई की धमकी दी है। प्योंगयांग ने हाल में बैलिस्टिक मिसाइल परीक्षण भी किए हैं।</p>
<p>अमेरिका के राष्ट्रपति की घोषणा किम जोंग उन के साथ उनकी कूटनीतिक नजदीकी के बीच हुई है। ट्रंप और किम ने उनके पहले कार्यकाल में कई उच्चस्तरीय बैठकें की थीं लेकिन उत्तर कोरिया के परमाणु निरस्त्रीकरण को लेकर वार्ता 2019 में टूट गई थी। जून 2019 में ट्रंप सैन्य सीमांकन रेखा पार कर उत्तर कोरिया में प्रवेश करने वाले पहले मौजूदा अमेरिकी राष्ट्रपति बने थे। दक्षिण कोरिया और अमेरिका सात दशक से अधिक समय से सैन्य सहयोगी हैं। दक्षिण कोरिया में करीब 28,500 अमेरिकी सैनिक तैनात हैं। अमेरिकी अधिकारियों ने कहा है कि उत्तर कोरिया द्वारा रूस के यूक्रेन युद्ध में समर्थन के कारण उसके सैनिकों को आधुनिक युद्ध का महत्वपूर्ण अनुभव मिला है। ट्रंप पहले भी दक्षिण कोरिया के साथ सैन्य अभ्यासों की लागत और अमेरिकी सैनिकों की तैनाती पर सवाल उठाते रहे हैं। वर्ष 2018 में उन्होंने किम जोन उन के साथ कूटनीतिक प्रयासों के दौरान बड़े अमेरिका-दक्षिण कोरिया सैन्य अभ्यासों को निलंबित कर दिया था और उन्हें "उकसावे वाला" बताया था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 17 Aug 2026 11:55:09 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>अमेरिका का समुद्र में बड़ा एक्शन : कथित ड्रग तस्करी जहाज़ पर हमला;  दो ढेर, सैन्य कार्रवाई पर उठे सवाल</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिकी दक्षिणी कमान ने पूर्वी प्रशांत क्षेत्र में एक संदिग्ध ड्रग-तस्करी जहाज पर घातक हमला किया, जिसमें दो लोग मारे गए। ट्रंप प्रशासन के इस अभियान में अब तक 198 मौतें हो चुकी हैं। हालांकि, जहाजों पर ड्रग्स होने के सबूत नहीं मिले हैं, जिसके बाद पेंटागन ने हमले की अनिवार्य कानूनी प्रक्रियाओं की जांच शुरू कर दी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/big-action-by-us-army-attack-on-boat-carrying-drugs/article-157767"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/us1.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिका की दक्षिणी कमान ने पूर्वी प्रशांत महासागर में कथित ड्रग-तस्करी करने वाले एक जहाज़ पर हमला किया है जिसमें दो लोगों की मौत हो गयी है। कमान ने रविवार देर रात एक्स पर लिखा, "21 जून को दक्षिणी कमान के कमांडर जनरल फ्रांसिस एल डोनोवन के निर्देश पर, संयुक्त कार्य बल सदर्न स्पीयर ने आतंकवादी संगठनों द्वारा संचालित एक जहाज़ पर घातक हमला किया। खुफिया जानकारी से पुष्टि हुई कि जहाज़ पूर्वी प्रशांत में ड्रग-तस्करी के ज्ञात रास्तों से गुज़र रहा था और ड्रग-तस्करी के काम में शामिल था।"</p>
<p>कमान ने कहा कि इसमें दो कथित ड्रग-आतंकवादी मारे गए। पूर्वी प्रशांत और कैरिबियन सागर सहित लैटिन अमेरिकी जलक्षेत्र में कथित ड्रग-तस्करी करने वाले जहाज़ों को नष्ट करने का ट्रंप प्रशासन का अभियान सितंबर की शुरुआत से जारी है और इसमें अब तक कम से कम 198 लोग मारे जा चुके हैं। सेना ने अभी तक इस बात का कोई सबूत नहीं दिया है कि किसी भी जहाज़ पर ड्रग्स लदे हुए थे। इस बीच, पेंटागन के आंतरिक निगरानी विभाग ने इस बात की जांच शुरू कर दी है कि क्या कैरिबियन और पूर्वी प्रशांत में नावों पर हमले करते समय अमेरिकी सैन्य कमांडरों ने सही प्रक्रियाओं का पालन किया था। </p>
<p>समीक्षा शुरू करने वाले 11 मई के एक मेमो के अनुसार रक्षा विभाग का महानिरीक्षक कार्यालय इस बात की जांच कर रहा है कि क्या सैन्य कमांडरों ने उस मानक छह-चरणीय प्रक्रिया का पालन किया, जिसका पालन अमेरिकी सेना को घातक हमलों को मंज़ूरी देने और उन्हें अंजाम देने से पहले करना होता है। इस समीक्षा में अमेरिका के दक्षिणी कमान द्वारा चलाए जा रहे अभियान में शामिल हैं, जो पूरे क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य गतिविधियों की देखरेख करता है और डोराल में स्थित है।</p>
<p>ट्रंप प्रशासन ने घोषणा की थी कि अमेरिका ड्रग कार्टेल के साथ "सशस्त्र संघर्ष" में है और उनके सदस्यों को "गैर-कानूनी लड़ाके" मानेगा। यह बिना कांग्रेस की पूर्व मंज़ूरी के युद्ध शक्तियों का व्यापक इस्तेमाल है। दोनों पार्टियों के सांसदों ने पेंटागन से नावों पर किए गए घातक हमलों के लिए कानूनी आधार बताने की मांग की थी। व्हाइट हाउस ने बिना कोई सबूत दिए दावा किया कि नावों पर ड्रग तस्कर सवार थे। प्रशासन ने कहा कि लैटिन अमेरिकी ड्रग कार्टेल कई अमेरिकी समुदायों में जानलेवा ड्रग अधिक खुराक की समस्या के लिए ज़िम्मेदार हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 22 Jun 2026 18:00:02 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>भारत-अमेरिका ने रक्षा संबंधों को मजबूत बनाने के लिए दोहराई प्रतिबद्धता, जनरल द्विवेदी ने कहा-दोनों सेनाओं के बीच रणनीतिक सहयोग को और सुदृढ़ करने पर सार्थक चर्चा हुई</title>
                                    <description><![CDATA[भारतीय सेना प्रमुख जनरल उपेन्द्र द्विवेदी ने पेंटागन का दौरा कर भारत-अमेरिका सैन्य संबंधों को नई ऊंचाई दी है। चर्चा के दौरान दोनों देशों ने रणनीतिक सहयोग, संयुक्त अभियानों और सैन्य प्रशिक्षण पर जोर दिया। इस यात्रा का उद्देश्य क्षेत्रीय स्थिरता सुनिश्चित करना और भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों के लिए आपसी तालमेल को और सुदृढ़ करना है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/india-america-reiterated-commitment-to-strengthen-defense-relations-general-dwivedi-said/article-152073"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/india-and-us.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। भारत और अमेरिका ने रक्षा संबंधों को और मजबूत करने तथा क्षेत्रीय स्थिरता, उन्नत क्षमता विकास और प्रगाढ़ सैन्य सहयोग के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। सेना ने बुधवार को बताया कि भारत–अमेरिका सैन्य साझेदारी को और मजबूत बनाने के उद्देश्य से जनरल उपेन्द्र द्विवेदी ने पिछले सप्ताह अमेरिका के रक्षा विभाग पेंटागन का दौरा किया। चार दिन की यात्रा के दौरान दोनों पक्षों ने दोनों सेनाओं के बीच रणनीतिक सहयोग को और सुदृढ़ करने पर सार्थक चर्चा की।</p>
<p>जनरल द्विवेदी ने अमेरिका के सेना सचिव डेनियल पी. ड्रिस्कॉल के साथ बातचीत की। साथ ही उन्होंने अमेरिकी सेना के कार्यवाहक स्टाफ प्रमुख जनरल क्रिस्टोफर ला नेव से भी मुलाकात की। उनकी बातचीत द्विपक्षीय रक्षा सहयोग के विस्तार, सेना-से-सेना संबंधों को सुदृढ़ करने तथा प्रशिक्षण, क्षमता विकास और संयुक्त अभियानों में सहयोग के नये क्षेत्रों का पता लगाने पर केंद्रित रहीं। दोनों पक्षों ने उभरती सुरक्षा चुनौतियों से निपटने में पारस्परिक संचालन क्षमता और संयुक्तता के महत्व पर जोर दिया।</p>
<p>जनरल द्विवेदी ने रक्षा नीति के अवर सचिव एल्ब्रिज कोल्बी और नेशनल गार्ड ब्यूरो के प्रमुख जनरल स्टीवन एस. नॉर्डहॉस के साथ भी बातचीत की। इन बैठकों ने रक्षा नीति समन्वय, संस्थागत संबंधों और भविष्य के सहयोग के क्षेत्रों को शामिल करते हुए एक व्यापक रणनीतिक आयाम जोड़ा। पेंटागन में हुई ये बैठकें इस यात्रा का महत्वपूर्ण हिस्सा थीं, जो एक गतिशील वैश्विक सुरक्षा वातावरण के बीच दोनों देशों द्वारा रक्षा साझेदारी को दिये जा रहे बढ़ते महत्व को दर्शाती हैं। इन संवादों ने आपसी विश्वास को मजबूत करने में मदद की और प्रमुख रणनीतिक प्राथमिकताओं पर समानता को उजागर किया। जनरल द्विवेदी की यात्रा भारत-अमेरिका रक्षा संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में एक और कदम है, जिसमें दोनों पक्षों ने क्षेत्रीय स्थिरता, उन्नत क्षमता विकास और गहरे सैन्य सहयोग के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 29 Apr 2026 15:51:59 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अमेरिका और ईरान के बीच सकारात्मक बातचीत: ईरान के ऊर्जा ढांचे पर हमले पाँच दिनों के लिए टले, ईरान का इंकार </title>
                                    <description><![CDATA[ईरान ने अमेरिका के साथ बातचीत के लिए उपराष्ट्रपति जेडी वेंस को प्राथमिकता दी है। रिपोर्ट के अनुसार, ईरान ने जैरेड कुशनर पर अविश्वास जताते हुए वेंस को युद्धविराम में रुचि रखने वाला नेता माना है। डोनाल्ड ट्रंप ने सकारात्मक बातचीत का दावा करते हुए ईरान के ऊर्जा ठिकानों पर हमले टालने का निर्देश दिया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/positive-talks-between-america-and-iran-attacks-on-irans-energy/article-147806"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/iran8.png" alt=""></a><br /><p>तेहरान। ईरान ने कथित तौर पर अमेरिका से कहा है कि वह विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के दामाद जैरेड कुशनर के बजाय उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के साथ बातचीत करना पसंद करता है। सीएनएन प्रसारक की रिपोर्ट में यह जानकारी सामने आयी है। सीएनएन के अनुसार ईरान ने अमेरिकी-इजरायली सैन्य अभियान शुरू होने से पहले हुई पिछली बातचीतों की विफलता को लेकर विटकॉफ और कुशनर पर अविश्वास जताया। वहीं, रिपोर्टस के मुताबिक उपराष्ट्रपति वेंस को ईरान एक ऐसे राजनेता के रूप में देखता है जो युद्धविराम के हित में रुचि रखते हैं। </p>
<p>गौरतलब है कि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को कहा कि पिछले दो दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच बहुत सकारात्मक बातचीत हुई है। उन्होंने यह भी बताया कि उन्होंने पेंटागन को निर्देश दिया है कि ईरान के ऊर्जा ढांचे पर हमलों को पाँच दिनों के लिए टाल दिया जाए। </p>
<p>ईरान के विदेश मंत्रालय ने हालांकि, बातचीत होने से इनकार किया और कहा कि उसे केवल ऐसे संदेश प्राप्त हुए हैं, जिनमें वॉशिंगटन की बातचीत में शामिल होने की इच्छा व्यक्त की गई थी। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 25 Mar 2026 12:51:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>कम पड़ गए 800 अरब! ईरान युद्ध में लागत बढ़ने से पेंटागन ने की 200 अरब डॉलर की मांग, अमेरिकी संसद में छिड़ा सियासी घमासान </title>
                                    <description><![CDATA[पेंटागन ने व्हाइट हाउस से ईरान युद्ध के समर्थन के लिए $200 अरब की अतिरिक्त धनराशि मांगी है। इस भारी बजट का उद्देश्य पिछले तीन हफ्तों में खर्च हुए हथियारों के भंडार को फिर से भरना है। हालांकि, अमेरिका में बढ़ते सैन्य खर्च और राजनीतिक विरोध के बीच इस प्रस्ताव पर बड़ा विवाद खड़ा हो सकता है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/800-billion-fell-short-due-to-increase-in-cost-of/article-147123"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/pentagan.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिकी रक्षा विभाग पेंटागन ने व्हाइट हाउस से ईरान युद्ध का समर्थन करने के लिए 200 अरब डॉलर से अधिक धनराशि के अनुरोध को मंजूरी देने के लिए कहा है। यह जानकारी स्पूतनिक ने वाङ्क्षशगटन पोस्ट के हवाले से गुरुवार को दी। </p>
<p>रिपोर्ट के अनुसार, यह अनुरोध मौजूदा खर्च से कहीं अधिक होगा और एक ऐसी राशि है जिसका कांग्रेस में कड़ा विरोध हो सकता है।इसका उद्देश्य उन हथियारों के भंडार को फिर से भरना है जो पिछले तीन हफ्तों में अमेरिकी और इजरायली सेनाओं द्वारा किए गए हजारों हमलों के कारण तेजी से कम हो गए हैं।</p>
<p>रिपोर्ट में कहा गया है कि युद्ध की लागत पहले सप्ताह में ही 11 अरब डॉलर से अधिक हो गई थी और अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि सीमित जनसमर्थन के बीच अतिरिक्त धन की उपलब्धता एक बड़े राजनीतिक संघर्ष को जन्म दे सकती है। यह प्रस्ताव विदेशों में सैन्य खर्च पर अंकुश लगाने के पहले किए गए वादों के बावजूद आया है जिससे वॉशिंगटन के बढ़ते अभियान के स्तर एवं स्थिरता पर सवाल खड़े होते हैं।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 20 Mar 2026 09:18:30 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>वॉशिंगटन डीसी के सैन्य बेस पर अज्ञात ड्रोन दिखने से हड़कंप: मार्को रूबियो और पीट हेगसेथ की बढ़ाई सुरक्षा, व्हाइट हाउस में उच्च स्तरीय बैठक का आयोजन</title>
                                    <description><![CDATA[वॉशिंगटन डीसी स्थित फोर्ट मैकनेयर सैन्य बेस के ऊपर रहस्यमयी ड्रोन दिखने से अमेरिकी सुरक्षा महकमे में हड़कंप मच गया है। इसी बेस पर विदेश मंत्री और रक्षा मंत्री के आवास भी हैं। ईरान-इजरायल संघर्ष के बीच, पेंटागन ने सुरक्षा उपायों को हाई अलर्ट पर कर दिया है और व्हाइट हाउस में आपात बैठक बुलाई गई है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/the-sighting-of-an-unidentified-drone-at-the-military-base/article-147065"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/drone.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंटगन। अमेरिका की राजधानी वॉशिंगटन डीसी स्थित एक प्रमुख सैन्य बेस 'फोर्ट मैकनेयर के ऊपर कई अज्ञात ड्रोन देखे जाने के बाद अमेरिकी सुरक्षा हलकों में हड़कंप मच गया है। इस घटना के बाद व्हाइट हाउस में एक उच्च स्तरीय बैठक बुलाई गई और सुरक्षा उपायों को कड़ा कर दिया गया है।</p>
<p>रिपोर्ट के अनुसार, इसी सैन्य बेस पर अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो और रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ का निवास स्थान भी है। सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि पिछले 10 दिनों के भीतर एक ही रात में कई ड्रोन देखे गए। ये ड्रोन कहां से आए, इसका अभी तक पता नहीं चल पाया है। ड्रोन दिखने के बाद प्रशासन ने रूबियो और हेगसेथ को किसी अन्य सुरक्षित स्थान पर भेजने पर विचार किया था, हालांकि फिलहाल दोनों अपने वर्तमान आवास पर ही बने हुए हैं।</p>
<p>प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि 28 फरवरी से ईरान पर शुरू हुए अमेरिका-इजरायल हमलों के बाद से अमेरिकी सेना हाई अलर्ट पर है। इस घटना के बाद अलर्ट स्तर को और अधिक बढ़ा दिया गया है। पेंटागन के मुख्य प्रवक्ता सीन पार्नेल ने रक्षा मंत्री हेगसेथ की सुरक्षा और उनकी आवाजाही पर टिप्पणी करने से इनकार करते हुए इसे अत्यंत गैर-जिम्मेदाराना बताया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
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                <pubDate>Thu, 19 Mar 2026 18:15:34 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>अमेरिका ने दक्षिण कोरिया को दिया धोखा, ट्रंप ने छीना थॉड एयर डिफेंस सिस्टम, किम जोंग के लिए बड़ा मौका?</title>
                                    <description><![CDATA[ईरानी मिसाइलों से निपटने के लिए ट्रंप प्रशासन ने दक्षिण कोरिया से 'थाड' (THAAD) सिस्टम हटाकर मिडिल ईस्ट में तैनात करना शुरू कर दिया है। इस फैसले से सियोल में सुरक्षा को लेकर खलबली मच गई है। उत्तर कोरिया के खतरे के बीच दक्षिण कोरिया अब अपनी रक्षा रणनीति और अमेरिकी भरोसे पर पुनर्विचार करने को मजबूर है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/america-betrayed-south-korea-trump-snatched-thod-air-defense-system/article-146181"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/1200-x-60-px)-(6)1.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। ईरानी मिसाइलों से बचने के लिए अमेरिका ने दक्षिण कोरिया से थाड एयर डिफेंस सिस्टम को धीरे धीरे बाहर निकालना शुरू कर दिया है। इनकी तैनाती मिडिल ईस्ट में की जा रही है। सिर्फ थाड एयर डिफेंस सिस्टम ही नहीं बल्कि अमेरिका ने दक्षिण कोरिया से कई और मिलिट्री हार्डवेयर भी ले जाना शुरू कर दिया है। अमेरिकी मीडिया ने मामले से परिचित दो अधिकारियों के हवाले से बताया है कि पेंटागन थाड सिस्टम के कुछ हिस्सों को मिडिल ईस्ट ले जा रहा है।</p>
<p>अमेरिका के इस फैसले से दक्षिण कोरिया में खलबली मच गई है। ब्रिटिश अखबार द गार्जियन ने बताया है कि दक्षिण कोरिया को डोनाल्ड ट्रंप के इरादों पर गहरा शक पैदा हो गया है। उसने चेतावनी दी है कि परमाणु हथियारों वाला उत्तर कोरिया इस मौके का फायदा उठा सकता है। वहीं दक्षिण कोरिया में राजनीतिक बहस शुरू हो गई है कि आखिर उसने उत्तर कोरिया के इतने गंभीर खतरे के सामने अमेरिका के ऊपर भरोसा ही क्यों किया था? जबकि ईरान की बैलिस्टिक मिसाइलें मिडिल ईस्ट में अमेरिकी सैन्य ठिकानों और इजरायल में तबाही मचा रही हैं।</p>
<p>हालांकि, दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे म्युंग ने लोगों को भरोसा दिलाने की कोशिश कर रहे हैं कि बगैर अमेरिकी एयर डिफेंस सिस्टम के भी दक्षिण कोरिया, उत्तर कोरिया की तरफ से आने वाले खतरों को रोकने की क्षमता रखता है। राष्ट्रपति ली ने कैबिनेट की बैठक के दौरान कहा कि अगर पूछा जाए कि क्या इससे उत्तर कोरिया के खिलाफ हमारी रोकथाम की रणनीति में कोई बड़ी रुकावट आएगी तो मैं पक्के तौर पर कह सकता हूं कि ऐसा नहीं होगा। उन्होंने आगे कहा कि दक्षिण कोरिया दुनिया में सबसे ज्यादा डिफेंस बजट पर खर्च करने वाले देशों की लिस्ट में आता है और देश का रक्षा बजट उत्तर कोरिया के जीडीपी का 1.4 गुना ज्यादा है। दक्षिण कोरिया के विदेश मंत्री चो ह्यून ने शुक्रवार को कहा कि यूएस और साउथ कोरिया की सेनाएं मिडिल ईस्ट में कुछ अमेरिकी पैट्रियट मिसाइल डिफेंस सिस्टम को फिर से तैनात करने पर भी चर्चा कर रही हैं। </p>
<p>वहीं दक्षिण कोरिया के कई अखबारों ने दावा किया है कि कुछ मिसाइल बैटरी को सऊदी अरब और यूनाइटेड अरब अमीरात में अमेरिकी बेस पर तैनात किए जाने की संभावना है।</p>
<p>दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति या विदेश मंत्री कुछ भी दावा करें लेकिन हकीकत यही है कि उत्तर कोरिया की घातक मिसाइलें देश पर भारी पड़ सकती हैं। अमेरिकी डिफेंस सिस्टम के दक्षिण कोरिया से बाहर निकलने के बाद देश की सुरक्षा कमजोर हो गई है। उत्तर कोरिया ने भी ईरान की तरह की हथियारों के निर्माण में ही भारी भरकम खर्च किए हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 12 Mar 2026 11:39:04 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>ईरान का समुद्र में सेना उतारने का ऐलान, हरमुज में सुरक्षित रूप से अभ्यास करें ईरान, जोखिम को ने दें जन्म: अमेरिका</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिकी सेंटकॉम ने ईरान की आईआरजीसी से हरमुज की खाड़ी में नौसैनिक अभ्यास सुरक्षित और पेशेवर तरीके से करने को कहा, ताकि अंतरराष्ट्रीय समुद्री यातायात को खतरा न हो।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/iran-should-practice-safely-in-hormuz-america-should-not-give/article-141435"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/500-px)-(9)1.png" alt=""></a><br /><p>टैंपा। अमेरिका के रक्षा मंत्रालय के अधीन आने वाली केंद्रीय कमान (सेंटकॉम) ने ईरान की इस्लामी रेवोल्यूशनरी गार्ड कोर (आईआरजीसी) से अनुरोध किया है कि वह रविवार से हरमुज की खाड़ी में शुरू होने वाला अपना नौसैनिक अभ्यास सुरक्षित तरीके से करे और किसी भी अनावश्यक जोखिम को जन्म न दे। </p>
<p>सेंटकॉम ने अपने बयान में कहा, सेंटकॉम आईआरजीसी से आग्रह करता है कि वह घोषित नौसैनिक अभ्यास को इस तरह से करे जो सुरक्षित, पेशेवर हो और अंतरराष्ट्रीय समुद्री यातायात के लिए नौपरिवहन की आजादी को अनावश्यक जोखिम से बचाये। हरमुज खाड़ी एक अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग है और एक जरूरी व्यापार गलियारा है, जो क्षेत्रीय आर्थिक समृद्धि में मदद करता है। किसी भी दिन, दुनिया के लगभग 100 व्यापारिक जहाज इस संकरी खाड़ी से गुजरते हैं।</p>
<p>ईरान ने गुरुवार को एलान किया था कि वह होरमुज की खाड़ी में रविवार से नौसैनिक अभियान शुरू करेगा। ईरान के प्रेस टीवी की एक रिपोर्ट के अनुसार, ईरान की नौसेना एक और दो फरवरी को हरमुज खाड़ी में गोलीबारी के साथ अभ्यास करेगी। हरमुज खाड़ी एक रणनीतिक जलमार्ग है, जिससे दुनिया की लगभग 20 प्रतिशत तेल सप्लाई गुजरती है। </p>
<p>उल्लेखनीय है कि अमेरिका ने पश्चिमी एशिया में अपना विमान वाहक पोत यूएसएस अब्राहम लिंकन भी तैनात किया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसका हवाला देते हुए ईरान से अपनी शर्ते मानने के लिये भी कहा है। ईरान का कहना है कि वह बातचीत के लिये तैयार है, लेकिन अगर अमेरिका किसी भी तरह का हमला करता है तो उसे तेज और व्यापक जवाब भी मिलेगा। </p>
<p>सेंटकॉम ने अपने बयान में कहा है कि वह ईरान के हरमुज की खाड़ी में अभ्यास करने के अधिकार का सम्मान करता है, लेकिन अमेरिकी सेना के करीब किसी भी तरह के असुरक्षित या गैर-पेशेवर रवैये को बर्दाश्त नहीं किया जायेगा। बयान में कहा गया, सेंटकॉम पश्चिमी एशिया में काम कर रहे अमेरिकी कर्मियों, जहाजों और विमानों की सुरक्षा सुनिश्चित करेगा। हम आईआरजीसी की किसी भी असुरक्षित कार्रवाई को बर्दाश्त नहीं करेंगे। इसमें फ्लाइट अभियान में लगे अमेरिकी सैन्य जहाजों के ऊपर से उड़ान भरना, जब इरादे साफ न हों तो अमेरिकी सैन्य संपत्तियों के ऊपर से कम ऊंचाई पर या हथियारों के साथ उड़ान भरना, अमेरिकी सैन्य जहाजों से टकराने की दिशा में हाई-स्पीड नावों का पास आना, या अमेरिकी सेना पर हथियार तानना शामिल है। </p>
<p>सेंटकॉम ने कहा, अमेरिकी सेना दुनिया की सबसे ज्यादा प्रशिक्षित और घातक सेना है। वह उच्चतम स्तर के पेशेवर रवैये के साथ काम करना जारी रखेगी और अंतरराष्ट्रीय नियमों का पालन करेगी। ईरान के आईआरजीसी को भी ऐसा ही करना चाहिए। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 31 Jan 2026 16:45:24 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>व्हाइट हाउस का बड़ा फैसला, इजरायल, सऊदी अरब को 15 अरब डॉलर के हथियारों के बिक्री को दी मंजूरी</title>
                                    <description><![CDATA[ईरान में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका ने इजरायल और सऊदी अरब को 15.67 अरब डॉलर की हथियार बिक्री को मंजूरी दी। इसमें अपाचे हेलीकॉप्टर और पैट्रियट मिसाइलें शामिल हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/white-houses-big-decision-israel-approves-sale-of-arms-worth/article-141434"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-11/trump-big-disi.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। व्हाइट हाउस ने ईरान में अशांति को लेकर तनाव के बीच पश्चिमी एशिया में अमेरिका के दो बड़े सहयोगी देशों, इजरायल और सऊदी अरब को कुल 15.67 अरब अमेरिकी डॉलर की बड़ी नयी हथियारों की बिक्री को मंजूरी दे दी है। अमेरिकी विदेश विभाग ने शुक्रवार को एक बयान में यह जानकारी दी। </p>
<p>बयान के अनुसार, इजरायल को 6.67 अरब डॉलर की नयी बिक्री में चार अलग-अलग पैकेज शामिल हैं, जिसमें रॉकेट लॉन्चर और आधुनिक टारगेटिंग गियर से लैस 30 अपाचे अटैक हेलीकॉप्टर शामिल हैं। इसके अलावा इजरायली सेना के लिए 'संचार लाइनें बढ़ाने' के मकसद से 3,250 हल्के टेक्टिकल वाहन शामिल हैं।</p>
<p>बयान में कहा गया है कि सऊदी अरब को नौ अरब डॉलर की बिक्री में 730 पैट्रियट मिसाइलें और संबंधित उपकरण शामिल हैं। इसका मकसद एक प्रमुख क्षेत्रीय गैर-नाटो सहयोगी का समर्थन करना है। विदेश विभाग ने कहा कि उसने शुक्रवार को पहले ही कांग्रेस को इन बिक्री की मंजूरी के बारे में सूचित कर दिया था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 31 Jan 2026 15:04:00 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>ईरान में होने वाला है कुछ बड़ा! ट्रंप ने कहा 'कई बेहद कड़े विकल्पों' पर विचार कर रहा है अमेरिका</title>
                                    <description><![CDATA[राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ईरान के खिलाफ कड़े विकल्पों, संभावित सैन्य कार्रवाई सहित, पर विचार कर रहा है और स्थिति पर करीबी नजर बनाए हुए है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/something-big-is-going-to-happen-in-iran-trump-said/article-139356"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-11/trump-big-disi.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार को कहा कि उनका प्रशासन ईरान के खिलाफ कई बेहद कड़े विकल्पों पर विचार कर रहा है, जिनमें संभावित सैन्य कार्रवाई भी शामिल है। राष्ट्रपति के आधिकारिक विमान 'एयर फोर्स वन' में पत्रकारों द्वारा यह पूछे जाने पर कि क्या ईरान ने किसी ऐसी लाल रेखा को पार कर लिया है जिससे जवाबी कार्रवाई जरूरी हो जाए, ट्रंप ने कहा, ऐसा लगता है कि वे ऐसा करना शुरू कर रहे हैं। हम इस पर बहुत गंभीरता से नजर रखे हुए हैं। सेना भी इस पर विचार कर रही है और हम कई बेहद कड़े विकल्पों पर काम कर रहे हैं। हम जल्द ही कोई फैसला करेंगे।</p>
<p>राष्ट्रपति ने यह भी बताया कि उन्हें ईरान की स्थिति पर हर घंटे रिपोर्ट दी जा रही है। ट्रंप ने यह खुलासा भी किया कि ईरान के नेताओं ने उनसे संपर्क किया है और बातचीत की इच्छा जताई है। उन्होंने कहा, ईरान के नेताओं ने फोन किया। वे बातचीत करना चाहते हैं। वॉल स्ट्रीट जर्नल ने रविवार को अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से बताया कि ट्रंप को ईरान में हो रही अशांति पर जवाब देने के विकल्पों के बारे में मंगलवार को जानकारी दी जाएगी।</p>
<p>रिपोर्ट में अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से कहा गया है कि विदेश मंत्री मार्को रुबियो, रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ और जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के अध्यक्ष जनरल डैन केन इस बैठक में शामिल होंगे। हालांकि रिपोर्ट के अनुसार, विचार-विमर्श शुरुआती चरण में होने के कारण इस बैठक में ट्रंप के किसी अंतिम निर्णय की उम्मीद नहीं है।</p>
<p>रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप प्रशासन के विकल्पों में ईरान में सरकार विरोधी ऑनलाइन स्रोतों को बढ़ावा देना, ईरानी सैन्य और नागरिक ठिकानों पर गुप्त साइबर हथियारों का इस्तेमाल, देश पर और अधिक प्रतिबंध लगाना तथा सैन्य हमले शामिल हो सकते हैं। इसके अलावा एलन मस्क की सैटेलाइट आधारित इंटरनेट सेवा स्टारलिंक के टर्मिनल ईरान भेजने की संभावना भी शामिल है।</p>
<p>पेंटागन ने संभावित सैन्य हमलों की तैयारी में किसी भी बल की तैनाती नहीं की है। रिपोर्ट में कहा गया है कि हमले शुरू करने के साथ-साथ क्षेत्र में तैनात अमेरिकी बलों की सुरक्षा के लिए भी संसाधन जुटाने होंगे। हाल ही में अमेरिका ने अपने विमानवाहक पोत यूएसएस जेराल्ड आर. फोर्ड और उसके स्ट्राइक ग्रुप को भूमध्य सागर से लैटिन अमेरिका भेज दिया है, जिसके बाद फिलहाल न तो मध्य पूर्व और न ही यूरोप में कोई अमेरिकी विमानवाहक पोत तैनात है।</p>
<p>इस बीच, ईरान की संसद के स्पीकर ने रविवार को कथित तौर पर चेतावनी दी कि यदि अमेरिका ने पहले कार्रवाई की, तो ईरान मध्य पूर्व में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमला करेगा। विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने शनिवार को ईरान, सीरिया और अन्य मध्य पूर्वी मुद्दों को लेकर इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से फोन पर बातचीत की।</p>
<p>ट्रंप ने शुक्रवार को कहा कि अगर ईरान इसमें शामिल होता है, तो अमेरिका वहां सेना नहीं भेजेगा। उन्होंने कहा, अगर वे पहले की तरह लोगों की हत्या शुरू करते हैं, तो हम हस्तक्षेप करेंगे। हम उन्हें वहां बहुत जोरदार तरीके से निशाना बनाएंगे, इसका मतलब है बहुत गंभीर  वार करना।</p>
<p>गौरतलब है कि रियाल की भारी गिरावट और लंबे समय से चली आ रही आर्थिक कठिनाइयों के विरोध में दिसंबर के अंत से ईरान के कई शहरों में प्रदर्शन हो रहे हैं। इन प्रदर्शनों के दौरान मरने वालों की संख्या लगातार बढऩे की रिपोर्टें हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 12 Jan 2026 18:55:27 +0530</pubDate>
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                <title>पूर्वी प्रशांत महासागर में मादक पदार्थ से भरे जहाज पर अमेरिकी हमला, दो लोगों की मौत</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिकी सेना ने प्रशांत महासागर में संदिग्ध तस्कर जहाज पर हमला कर दो लोगों को मार गिराया। पेंटागन के अनुसार, यह जहाज मादक पदार्थों की तस्करी के अंतरराष्ट्रीय मार्ग पर सक्रिय था।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/us-attack-on-drug-laden-ship-in-eastern-pacific-ocean-kills/article-137778"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/us-ship-attacked.png" alt=""></a><br /><p>वाशिंगटन। अमेरिकी सेना ने सोमवार को पूर्वी प्रशांत महासागर में अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में मादक पदार्थओं की तस्करी के संदेह में एक जहाज पर हमला किया, जिसमें सवार दो लोगों की मौत हो गई। यह जानकारी अमेरिकी दक्षिणी कमान ने दी। अमेरिकी दक्षिणी कमान ने सोशल प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में कहा, अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ के निर्देश पर, अमेरिकी संयुक्त टास्क फोर्स सदर्न स्पीयर ने अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में नामित आतंकवादी संगठनों द्वारा संचालित जहाज पर घातक सैन्य हमला किया।</p>
<p>अमेरिकी दक्षिणी कमान ने आगे कहा, खुफिया जानकारी से पुष्टि हुई है कि यह जहाज पूर्वी प्रशांत महासागर में मादक पदार्थों की तस्करी के ज्ञात मार्गों से गुजर रहा था और मादक पदार्थों की तस्करी की गतिविधियों में शामिल था। दो पुरुष तस्कर मारे गए। अमेरिकी सेना का कोई भी जवान हताहत नहीं हुआ।</p>
<p>पेंटागन ने सितंबर की शुरुआत से अब तक कैरिबियन और पूर्वी प्रशांत महासागर में कथित रूप से मादक पदार्थों से भरे 30 जहाजों को डुबो दिया है, जिनमें सवार कम से कम 107 लोग मारे गए हैं। बता दें कि कई महीनों से, अमेरिका ने कैरिबियन में, खासकर वेनेजुएला के तट पर, अपनी महत्वपूर्ण सैन्य उपस्थिति बनाए हुआ है, जिसका कथित उद्देश्य मादक पदार्थों की तस्करी से लडऩा है। हालांकि, अमेरिका के इस दावे को वेनेजुएला ने कराकस में सरकार परिवर्तन के एक छिपे हुए प्रयास के रूप में खारिज कर दिया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 30 Dec 2025 15:33:35 +0530</pubDate>
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                <title>Surat Diamond Bourse अब दुनिया की सबसे ऑफिस बिल्डिंग, 65 हजार से ज्यादा लोग साथ काम कर सकेंगे</title>
                                    <description><![CDATA[सूरत डायमंड बोर्स में कुल 15 फ्लोर है। इमारत 35 एकड़ भूमि में फैली है। इस बिल्डिंग को बनाने में 4 साल लगे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/surat-diamond-bourse-now-the-world-s-largest-office-building--left-behind-the-pentagon/article-52178"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-07/b-story-(3).png" alt=""></a><br /><p>गुजरात के सूरत में दुनिया का सबसे बड़ा कार्यालय भवन बन गया है। इस इमारत का नाम सूरत डायमंड बोर्स है जिसमें 65 हजार से ज्यादा लोग काम कर सकेंगे। इससे पहले अमेेरिका स्थित पेंटागन दुनिया का सबसे बड़ा कार्यालय भवन था। बता दें कि सूरत डायमंड बोर्स में डायमंड प्रोफेशनल्स काम करेंगे। सूरत शहर हीरे के काम के लिए जाना जाता है। यहां दुनिया के 90 प्रतिशत डायमंड तराशे जाते हैं। यही वजह है कि इसे डायमंड सिटी के नाम से जाना जाता है। जानकारी के मुताबिक सूरत डायमंड बोर्स में कुल 15 फ्लोर है। इमारत 35 एकड़ भूमि में फैली है। इस बिल्डिंग को बनाने में 4 साल लगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 19 Jul 2023 11:56:55 +0530</pubDate>
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