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                <title>Lij Truss - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>लिज ट्रस ने ली शपथ, मंत्रिमंडल का गठन  </title>
                                    <description><![CDATA[शपथ ग्रहण के तुरंत बाद उन्होंने अपने मंत्रिमंडल का गठन भी कर दिया। भारत के लिए खास बात यह रही कि उसमें भारतीय मूल की सुएला ब्रेवर्मन को गृह मंत्रालय दिया गया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/lij-truss-took-oath-the-cabinet/article-22201"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-09/46546546559.jpg" alt=""></a><br /><p>स्कॉटलैंड के बाल्मोरल एस्टेट में आयोजित एक समारोह में ब्रिटेन की चुनी गई नई प्रधानमंत्री लिज ट्रस ने अपने पद की शपथ ग्रहण कर ली है। उन्हें ब्रिटेन की साम्राज्ञी एलिजाबेथ द्वितीय ने शपथ दिलाई। शपथ ग्रहण के तुरंत बाद उन्होंने अपने मंत्रिमंडल का गठन भी कर दिया। भारतीय मूल की सुएला ब्रेवर्मन को गृह मंत्रालय दिया गया है। सीओपी प्रेसिडेंट के रूप में आलोक शर्मा को दायित्व दिया गया है। मंत्रिमंडल में 4 अश्वेतों को शामिल किया गया है। जेम्स क्लेवरली को विदेश, उप प्रधानमंत्री थेरेस कॉफे को स्वास्थ्य तथा बेन वालेस को रक्षा, जेकब रीस को व्यापार मंत्रालय की जिम्मेदारी दी गई है। शपथ ग्रहण करने और इसके बाद संसद में दिए गए संबोधन में उन्होंने विश्वास दिलाया कि वह ब्रिटेन को तूफान से बाहर निकालेगी। कर में कटौती और आर्थिक सुधार के माध्यम से अर्थव्यवस्था को विकसित करने , बिजली के बिलों को कम करने के लिए एक सप्ताह के भीतर वे एक साहसिक योजना की घोषणा करने वाली हैं। हम ब्रिटेन का पुनर्निर्माण करेंगे। देश को आधुनिक बनाएंगे।</p>
<p>एक तेजतर्रार नेता के रूप में विख्यात नए प्रधानमंत्री के भाषण से जाहिर होता है कि ब्रिटेन इस समय घरेलू और विदेशी मोर्चे पर कई चुनौतियों से जूझ रहा है। इनमें सबसे प्रमुख पार्टी में आंतरिक द्वंद्व की समाप्ति, चुनावी वादों और घोषणाओं की क्रियान्विति के साथ, दो साल बाद होने वाले देश के आम चुनावों में अपने दल को फिर से विजयश्री दिलाने की चुनौतियों से दो-दो हाथ करना होगा। सिर्फ यही नहीं, बदले वैश्विक माहौल में ब्रिटेन की प्रभावशाली छवि और भूमिका को स्थापित करने, देश की आर्थिक स्थिति को मजबूती देने के लिए भी काफी मशक्कत करनी होगी। बढ़ती महंगाई पर काबू पाने, डॉलर के मुकाबले पौंड के गिरते स्तर, रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद उपजे ऊर्जा संकट से निपटने के प्रयासों को गति देने की प्रमुख चुनौतियां सामने है। इसके अलावा पिछले एक अर्से से भारत के साथ ब्रिटेन के संबंध नए आयाम ले रहे हैं। ऐेसे में भारत के साथ कारोबारी और रणनीतिक मैत्रीपूर्ण संबंधों को और मजबूती देने के ठोस प्रयासों को अमलीजामा भी पहनाना होगा। कारण पिछले कुछ अर्से से दोनों देशों के संबंध नए सिरे से प्रगाढ़ हो रहे हैं। कारोबारी स्तर पर दोनों देशों के बीच मुक्त व्यापार समझौते में तेजी आएगी। उम्मीद है दीपावली तक इस समझौते को अंतिम रूप दे दिया जाएगा। मौजूदा वीजा पद्धति में बदलाव की भी उम्मीद है।</p>
<p>इस साल मार्च में जब ट्रस बतौर विदेश मंत्री के दौरे पर आई थीं तो उन्होंने बताया था कि ब्रिटेन की सैन्य उपकरण व युद्ध सामग्री बनाने वाली कंपनियां भारत को एक बड़े बाजार के तौर पर देख रही हैं। वो आत्म निर्भर भारत योजना का हिस्सा बनने को तैयार हैं। इस दिशा में शीघ्र शीर्ष स्तरीय वार्ता का प्रस्ताव भी रखा गया था। इस क्रम में उम्मीद है कि ट्रस के प्रधानमंत्री बनने के बाद अब दोनों देशों के बीच टू प्लस टू वार्ता शीघ्र होगी। थोड़ी चुनाव पर चर्चा कर लें। पूर्व प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन के इस्तीफा देने के बाद अपनी कंजरवेटिव पार्टी में हुए चुनाव में ट्रस ने प्रतिद्वंद्वी ऋषि सुनक को करीब इक्कीस हजार मतों से शिकस्त दी थी। इस चुनाव में खास बात तो यह रही कि बियालीस वर्षीय भारतीय मूल के ऋषि सुनक को पार्टी में चालीस फीसदी मतों का मिलना। यह भी एक तरह से प्रभावशाली होने का संकेत है। जो नए ब्रिटेन के राजनीतिक इतिहास में आ रहे नए बदलाव का इशारा कर रहा है। बोरिस के मंत्रिमंडल में सुनक ने बतौर वित्त मंत्री कोरोना महामारी के दौर में भी ब्रिटिश अर्थव्यवस्था को प्रभावशाली तरीके से संतुलित बनाए रखने में सफलता अर्जित की थी। यह तथ्य उनके उज्जवल भविष्य का संकेत दे रहा है। </p>
<p>दूसरी ओर लिज ट्रस, बोरिस मंत्रिमंडल में पहले व्यापार फिर विदेश मंत्री के पद पर कार्य कर चुकी हैं। उनका कार्यकाल भी प्रभावशाली रहा। ब्रिटेन और भारत के बीच रणनीतिक और कारोबारी संबंधों को नए आयाम और मजबूती देने का श्रेय भी उनके खाते में जाता है। ट्रस की छवि एक फायर ब्रांड, अनुभवी और उदारवादी नेता के रूप में मानी जाती है। उनकी जीत के प्रमुख कारकों में बोरिस जॉनसन खेमे का समर्थन मिलना रहा। कारण सुनक ने तो बोरिस के शासन के खिलाफ बगावत की थी। लगभग 2 माह तक चली चुनावी प्रक्रिया में वे, सुनक के खिलाफ  निष्ठा का सवाल करने में भी सफल रही है। <strong>(ये लेखक के अपने विचार है)</strong></p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 09 Sep 2022 10:55:02 +0530</pubDate>
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                <title>चीन के खिलाफ आपसी लड़ाई भूल कर एक साथ हैं लिज ट्रस और ऋषि सुनक</title>
                                    <description><![CDATA[ हांगकांग, जासूसी, साइबर सिक्योरिटी और ह्यूमन राइट्स ऐसे मुद्दे हैं, जिनके कारण दोनों देशों में तनाव बढ़ा है। ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में आधुनिक चीन के इतिहास और राजनीति के प्रोफेसर राणा मित्तर ने कहा कि ट्रस और सुनक दोनों ही चीन के प्रति कट्टरपंथी दिखने की पूरी कोशिश कर रहे हैं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/lij-truss-and-rishi-sunak-are-together-forgetting-their-mutual-fight-against-china/article-19424"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-08/d-2.jpg" alt=""></a><br /><p>लंदन। ब्रिटेन में अगला प्रधानमंत्री बनने के लिए ऋषि सुनक और लिज ट्रस के बीच टक्कर है। ब्रिटेन का अगला प्रधानमंत्री बनने के लिए दोनों अपनी अपनी नीतियों को बेहतर बता रहे हैं। आर्थिक मुद्दे पर दोनों एक दूसरे को घेरने में लगे हैं। एक ही पार्टी से ताल्लुक रखने के बावजूद भी उनकी नीतियों के विचार अलग-अलग हैं। लेकिन एक मुद्दा ऐसा है, जिसे लेकर दोनों नेता एकमत हैं। वह मुद्दा चीन है। लिज ट्रस और ऋषि सुनक दोनों चीन के खिलाफ सख्त रवैया अपनाने का वादा कर रहे हैं। चीन के बढ़ते भू-राजनैतिक खतरे को देखते हुए दोनों नेता ऐसी बात कर रहे हैं। विश्लेषक मानते हैं कि दोनों का रुख इस बात का गवाह है कि ब्रिटेन के राजनेताओं द्वारा शुरू किया गया चीन-ब्रिटेन का स्वर्ण युग बढ़ते संघर्ष के बाद खत्म हो रहा है। हांगकांग, जासूसी, साइबर सिक्योरिटी और ह्यूमन राइट्स ऐसे मुद्दे हैं, जिनके कारण दोनों देशों में तनाव बढ़ा है। ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में आधुनिक चीन के इतिहास और राजनीति के प्रोफेसर राणा मित्तर ने कहा कि ट्रस और सुनक दोनों ही चीन के प्रति कट्टरपंथी दिखने की पूरी कोशिश कर रहे हैं। ये इस बात का संकेत है कि ढट कोई भी बने पर नीति चीन के खिलाफ होगी।</p>
<p><strong>चीन के खिलाफ ऋषि सुनक</strong><br />ऋषि सुनक ने हाल ही में चीन को ब्रिटेन और पूरी दुनिया के लिए सबसे बड़ा खतरा बताया था। ऋषि सुनक कह चुके हैं कि अगर वह पीएम बने तो चीन के सायबर हमलों से निपटने के लिए इंटरनेशनल लेवल पर एक संगठन बनाएंगे। इसके अलावा उन्होंने कहा है कि ब्रिटेन की सिक्योरिटी एजेंसी को मजबूत करेंगे, ताकि चीन की औद्योगिक जासूसी रोकी जा सके।</p>
<p><strong>क्यों खराब हुए संबंध</strong><br />दोनों देशों में व्यापर तो बढ़ा, लेकिन उनके संबंध अच्छे नहीं हो सके। लगातार कंजर्वेटिव पार्टी की सरकार चीन के हांगकांग पर अपनी पकड़ बढ़ाने और अल्पसंख्यक उइगर मुस्लिमों के मानवाधिकारों के हनन का मुद्दा उठाती रही है। इसके साथ ही साइबर हमले को लेकर भी ब्रिटेन की चीन से नाराजगी है। हाल ही में, ब्रिटेन ने यूक्रेन पर हमला करने वाले रूस के प्रति सहानुभूतिपूर्ण दृष्टिकोण रखने का मुद्दा भी उठाया। प्रोफेसर राणा कहते हैं कि हम ऐसे समय में आ गए हैं जब चीन के यूके ही नहीं लगभग सभी पश्चिमी देशों से संबंध खराब हो रहे हैं।</p>
<p><strong>कभी दोनों देशों में थे गहरे संबंध</strong><br />चीन ब्रिटेन का तीसरा सबसे बड़ा ट्रेड पार्टनर है। ब्रिटेन का सात फीसदी व्यापार अकेले चीन के साथ होता है। दोनों देशों में सालाना ट्रेड 114 बिलियन डॉलर है। ये आंकड़ा 2015 के बाद बहुत बढ़ा है, क्योंकि तब दोनों देशों में सिर्फ 70 बिलियन डॉलर का व्यापार होता था। तत्कालीन प्रधानमंत्री डेविड कैमरन और उनके वित्त मंत्री जॉर्ज ओसबोर्न ने चीन के साथ संबंधों को मजबूत किया। उन्होंने यहां तक कह दिया कि पश्चिम में यूके चीन का सबसे बेहतर पार्टनर बनेगा।</p>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Thu, 18 Aug 2022 11:45:59 +0530</pubDate>
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