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                <title>janmashtami - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>आधी रात गूंजेंगे शंख-नगाड़े, मंदिरों में जन्मेंगे नंदलाल, बृजनाथजी समेत शहर के प्रमुख मंदिरों में जन्माष्टमी की तैयारियां पूरी</title>
                                    <description><![CDATA[वल्लभकुल परंपरा के अनुसार होंगे विशेष दर्शन, गीता भवन से इस्कॉन मंदिर तक सजे मंदिरों में आधी रात मनाया जाएगा कान्हा का जन्मोत्सव।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/conch-shells-and-drums-will-resound-at-midnight-as-nandlal--is-born-in-the-temples--preparations-for-janmashtami-are-complete-at-the-city-s-prominent-temples--including-brijnathji/article-164670"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-09/111200-x-600-px)-(3)13.png" alt=""></a><br /><p>कोटा ।जन्माष्टमी के पर्व पर शुक्रवार को शहर के गढ़ पैलेस स्थित बृजनाथ मंदिर पर  सुबह ठाकुरजी का पंचामृत से अभिषेक किया गया। पुराने कोटा शहर में महाप्रभुजी के बड़े मंदिर, मथुराधीशजी, बृजनाथजी, फूल बिहारीजी, दाऊजी सहित अन्य मंदिरों में वल्लभकुल सम्प्रदाय की परंपराओं के अनुसार जन्माष्टमी मनाई जाएगी। मंदिरों को आकर्षक रूप से सजाया गया है।<br />बृजनाथजी मंदिर के पुजारी राजेन्द्र श्रृंगी ने बताया की  मंदिर में सुबह 6.30 बजे मंगला, दोपहर 12 बजे पंचामृत, 1.15 बजे शृंगार, 1.30 बजे तिलक, 2.30 बजे राजभोग, रात 8 बजे उत्थापन, 8.30 बजे संध्या भोग और 10 बजे जागरण के दर्शन होंगे। मध्यरात्रि 12 बजे जन्म दर्शन होंगे।</p>
<p>वहीं मथुराधीशजी का बड़ा मंदिर मे शुक्रवार सुबह 5 बजे पंचामृत, १ बजे तिलक, 11 बजे राजभोग, शाम 5.30 बजे उत्थापन, 6 बजे भोग, 6.30 बजे आरती, 7 बजे शयन तथा रात 10 बजे जागरण के दर्शन होंगे। रात 12 बजे ठाकुरजी के जन्म के दर्शन करवाए जाएंगे। वहीं  जन्माष्टमी पर शहर के गीता भवन, टीलेश्वर महादेव मंदिर, तलवंडी स्थित राधाकृष्ण मंदिर, किशोरपुरा स्थित इस्कॉन मंदिर, रंगबाड़ी स्थित बांके बिहारी मंदिर व मुकुंदरा विहार स्थित नंदग्राम, मथुराधीश मंदिर व पाटनपोल स्थित मथुराधीशजी मंदिर सहित करीब एक दर्जन मंदिरों में बाल गोपाल के जन्म के साथ ही गूंजेगे शंख और ढोल-नगाड़ों की आवाज व आतिशबाजी के साथ रात्रि 12 बजे कान्हा का जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया जाएगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 04 Sep 2026 14:31:30 +0530</pubDate>
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                <title>कृष्ण राजस्थान में कैसे दिखते हैं... नाथद्वारा से किशनगढ़ तक रंगों में रची पांच अलग-अलग छवियां</title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थान की चित्रकला परंपराओं में श्रीकृष्ण भक्ति, प्रेम और लोकजीवन के विविध रूपों में नजर आते हैं। नाथद्वारा की पिछवाई में श्रीनाथजी का भक्ति-वैभव, मेवाड़ में लोकजीवन, बूंदी-कोटा में प्रकृति, किशनगढ़ में राधा-कृष्ण का प्रेम और जयपुर में राजसी वैभव उभरता। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/shri-krishna-rajasthan-nathdwara/article-164633"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-09/111200-x-600-px)-(4)7.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान में कृष्ण केवल भक्ति के आराध्य नहीं बल्कि कला, संस्कृति, संगीत और लोकजीवन के ऐसे केंद्र हैं, जिनके रूप को अलग-अलग क्षेत्रों और राजदरबारों ने अपनी कल्पना, सौंदर्यबोध और परंपराओं के अनुरूप चित्रित किया। जन्माष्टमी के अवसर पर राजस्थान की चित्रकला परंपराओं को देखें तो एक ही कृष्ण कहीं नटखट बालक हैं, कहीं गोपाल, कहीं प्रेमी नायक तो कहीं राजसी वैभव से युक्त दैवी सत्ता के रूप में नजर आते हैं। नाथद्वारा से किशनगढ़ और मेवाड़ से बूंदी-कोटा तक कृष्ण की यह विविध छवि राजस्थान की समृद्ध कला विरासत को सामने लाती हैं।</p>
<p>नाथद्वारा की पिछवाई में भक्ति और वैभव : नाथद्वारा की पिछवाई चित्रकला में श्रीनाथजी के रूप में श्रीकृष्ण की आराधना का विशिष्ट संसार दिखाई देता है। मंदिर की सेवा-परंपरा से जुड़ी इन चित्रकृतियों में तुए उत्सव, गोवर्धन, कमल, गायों और वृंदावन के प्रसंगों को सजावटी सौंदर्य के साथ प्रस्तुत किया जाता है।</p>
<p>मेवाड़ में कृष्ण भक्ति और लोकजीवन के करीब : मेवाड़ शैली के चित्रों में कृष्ण कथाओं को सरल, जीवंत और कथात्मक रूप में प्रस्तुत करने की परंपरा दिखाई देती हैं। रासलीला, गोवर्धनधारण, बाल-कृष्ण की लीलाएं और ग्वाल-बालों के प्रसंगों में कृष्ण को लोकजीवन से जुड़े पात्र के रूप में देखा जा सकता है।</p>
<p>बूंदी और कोटा में प्रकृति के बीच श्रीकृष्ण : बूंदी और कोटा की चित्रशैलियों में प्रकृति का विशेष महत्व है। घने वृक्ष, पहाड़, जलाशय, बादल और वन्य परिवेश श्रीकृष्ण की लीलाओं की पृष्ठभूमि बनते हैं। विशेष रूप से राग-रागिनी और दरबारी चित्रों में रंगों और प्राकृतिक दृश्यों का सुंदर सामंजस्य देखने को मिलता है।</p>
<p>किशनगढ़ में प्रेम और सौंदर्य का कृष्ण : किशनगढ़ शैली कृष्ण की प्रेममय छवि को अत्यंत सौंदर्यपूर्ण ढंग से सामने लाती हैं। राधा-कृष्ण के प्रेम, विरह और मिलन के प्रसंगों को इस शैली की पहचान हैं। किशनगढ़ की प्रसिद्ध ‘बणी-ठणी’परंपरा ने राधा-कृष्ण के प्रेम संसार को विशिष्ट दृश्य भाषा प्रदान की।</p>
<p>जयपुर में कृष्ण राजसी वैभव स्वरूप में : गोविन्द देवजी के श्रीकृष्ण राजसी, दिव्य और वैभव स्वरूप में दिखाई देते हैं। इनमें दरबारी वातावरण, आभूषण, वस्त्र और शृंगार का चित्रण। गोपीनाथजी के चित्रांकन में श्रीकृष्ण के माधुर्य, श्रीराधा-कृष्ण भाव और वृन्दावन की लीलाओं पर अधिक जोर।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 04 Sep 2026 11:01:45 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur KD]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>वासुदेव देवनानी की श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर शुभकामनाएं, कहा-  श्रीकृष्ण का जीवन कर्तव्य, सत्य और निष्काम कर्म की देता है प्रेरणा </title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पावन पर्व पर प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं दी हैं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/vasudev-devnanis-best-wishes-on-shri-krishna-janmashtami-said-the/article-123737"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-08/oer-(1)10.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पावन पर्व पर प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं दी हैं। इस अवसर पर देवनानी ने कहा कि श्रीकृष्ण का जीवन कर्तव्य, सत्य और निष्काम कर्म की प्रेरणा देता है। गीता केवल एक ग्रंथ ही नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला है। आज के अवसर पर हमें संकल्प लेना चाहिए कि हम अपने आचरण और कर्मों से समाज में प्रेम, सछ्वावना और न्याय की स्थापना करें।</p>
<p>देवनानी ने कहा कि श्रीकृष्ण के आदर्श प्रत्येक नागरिक को राष्ट्र निर्माण और जनकल्याण के पथ पर अग्रसर होने की प्रेरणा देते हैं। उन्होंने कहा कि सभी मिलकर सामाजिक सौहार्द, भाईचारे और मानवीय मूल्यों की रक्षा करें तथा समाज में सकारात्मकता और सछ्वावना का वातावरण निर्माण करें। </p>
<p> </p>
<p> </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 16 Aug 2025 12:00:52 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur KD]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर राज्यपाल की शुभकामनाएं, कर्तव्य पथ पर चलने का किया आह्वान </title>
                                    <description><![CDATA[राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की बधाई और शुभकामनाएं दी हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/governors-wish-on-shri-krishna-janmashtami-to-follow-the-duty/article-123734"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-08/oer9.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की बधाई और शुभकामनाएं दी हैं।</p>
<p>राज्यपाल बागडे ने सभी को भगवान श्री कृष्ण के जीवन और निष्काम कर्म के आदर्श दर्शन को आत्मसात कर कर्तव्य पथ पर चलने का आह्वान किया। बागडे ने भगवान श्रीकृष्ण से सभी के सुख समृद्धि और खुशहाली की कामना की है।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 16 Aug 2025 11:01:44 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>कन्हैया के जन्म का छाएगा उल्लास, जन्माष्टमी 16 को : अष्टमी तिथि 15 अगस्त रात 11.49 बजे शुरू होकर 16 की रात 9.34 बजे तक</title>
                                    <description><![CDATA[मान्यता है कि इस संयोग में व्रत-पूजन करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं, कष्ट दूर होते हैं और भगवत कृपा प्राप्त होती है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/the-birth-of-kanhaiyas-birth-will-be-elastic-janmashtami-on/article-123335"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-08/1ne1ws-(10)4.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी 16 अगस्त को मनाई जाएगी। भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अष्ठमी तिथि 15 अगस्त रात 11.49 बजे शुरू होकर 16 अगस्त रात 9.34 बजे समाप्त होगी। शास्त्रों के अनुसार-अष्टमी तिथि, रोहिणी नक्षत्र और हर्षण योग में व्रत करने से तीन जन्मों के पाप नष्ट होते हैं। </p>
<p>निर्णय सिंधु सहित अन्य ग्रंथों में भी इस योग का विशेष महत्व बताया गया है। भगवान कृष्ण का जन्म भाद्रपद माह की अष्टमी तिथि, बुधवार, रोहिणी नक्षत्र और वृष राशि में मध्यरात्रि को हुआ था। इस वर्ष यह दुर्लभ संयोग बन रहा है, जो शत्रुओं का दमन करने वाला माना जाता है। इस वर्ष कृष्ण जन्म का 5252वां उत्सव है, जन्माष्टमी पर पूजन का शुभ मुहूर्त 16 अगस्त की रात 12.04 से 12.47 बजे तक रहेगा। चंद्रोदय समय 11.32 बजे होगा। व्रत करने वाले श्रद्धालु सप्तमी को सात्विक आहार लें और अष्टमी पर स्नान के बाद व्रत का संकल्प करें। मध्यान्ह में काले तिल से जल छिड़ककर देवकी जी के लिए सूतिका गृह बनाएं, कलश स्थापना करें और कृष्ण, देवकी, वासुदेव, बलदेव, नन्द, यशोदा व लक्ष्मी जी की पूजा करें। यह व्रत रात्रि 12 बजे के बाद खोला जाता है और इसमें फलाहार लिया जाता है।</p>
<p><strong>भोग और महत्व</strong><br />भगवान लड्डू-गोपाल को माखन-मिश्री का भोग विशेष प्रिय है। इस दिन केसर घेवर, मखने की खीर, पेड़ा, मोहनभोग, रसगुल्ला, लड्डू आदि का भोग भी लगाया जा सकता है। मान्यता है कि इस संयोग में व्रत-पूजन करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं, कष्ट दूर होते हैं और भगवत कृपा प्राप्त होती है। यहां तक कि प्रेत योनि में भटक रहे जीवों को भी मुक्ति मिलती है।  </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 12 Aug 2025 14:00:54 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>जन्माष्टमी के अवसर पर स्टार प्लस पर प्रसारित होगा ‘हाथी घोड़ा पाल की बर्थडे कन्हैया लाल की’, जश्न के साथ देखने को मिलेगा एक मजेदार ट्विस्ट </title>
                                    <description><![CDATA[जन्माष्टमी के अवसर पर 16 अगस्त को स्टार प्लस चैनल पर ‘हाथी घोड़ा पाल की बर्थडे कन्हैया लाल की’ प्रसारित होगा। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/movie-fun/on-the-occasion-of-janmashtami-star-plus-will-be-broadcast/article-123266"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-08/st.png" alt=""></a><br /><p>मुंबई। जन्माष्टमी के अवसर पर 16 अगस्त को स्टार प्लस चैनल पर ‘हाथी घोड़ा पाल की बर्थडे कन्हैया लाल की’ प्रसारित होगा। स्टार प्लस हमेशा से भारत के त्योहारों को धूमधाम, रंग और भावना के साथ मनाता आया है, जिससे हर मौका एक रंगीन और खूबसूरत महोत्सव बन जाता है, जो उसके पसंदीदा शो और किरदारों को जोड़ता है। इस जन्माष्टमी, चैनल फिर से वही जादू लेकर आ रहा है खास फेस्टिव स्पेशल ‘हाथी घोड़ा पाल की बर्थडे कन्हैया लाल की’, जो भगवान कृष्ण के जन्म के उत्सव को खुशियों, खेलों और जश्न से भरपूर मनाएगा।</p>
<p>हाल ही में जारी प्रोमो में दर्शकों को ‘अनुपमा’ को मेजबान की भूमिका में देखकर बहुत खुशी हुई। जश्न में एक मजेदार ट्विस्ट भी है, एक मस्तीभरा मुकाबला जिसमें तय किया जाएगा कि कौन सबसे शरारती है। आखिर जन्माष्टमी बिना कन्हैया की मस्ती के कैसे हो सकती है। प्रतियोगिता में स्टार प्लस की लोकप्रिय जोड़ियां भी हिस्सा ले रही हैं, जिनमें ‘ये रिश्ता क्या कहलाता है’ के अभिरा और अरमान, ‘अनुपमा’ के प्रेम और राही, और ‘आर्टी’ के वेद और आर्टी शामिल है।</p>
<p>प्रोमो में ऊर्जा और हंसी से भरे मजेदार पलों की झलक मिलती है, जहां खेलों के जरिए सबके शरारती पक्ष दिखाई देते हैं। पारंपरिक सजावट, दही-हांड़ी की मस्ती और कृष्ण के थीम वाले जश्न के बीच उत्साह का माहौल है। क्या ‘सबसे शरारती’ का खिताब अभिरा और अरमान की मस्ती, प्रेम और राही की मजेदार बातें, या वेद और आर्टी की मुकाबले वाले जोश से मिलेगा।‘हाथी घोड़ा पाल की बर्थडे कन्हैया लाल की’ 16 अगस्त को शाम 7 बजे, सिर्फ स्टार प्लस पर प्रसारित होगा।</p>
<p> </p>
<p> </p>
<p> </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मूवी-मस्ती</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 11 Aug 2025 15:51:30 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur KD]]></dc:creator>
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                <title>गोविंद देव जी मंदिर में कृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव, मंदिर के दोनों प्रवेश द्वारों पर शहनाई वादन होगा शुरू </title>
                                    <description><![CDATA[आराध्य गोविंद देव जी मंदिर में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव शुरू होगा। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/shehnai-playing-will-be-started-at-both-the-entrances-of/article-122162"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-07/1ne1ws-(8).png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। आराध्य गोविंद देव जी मंदिर में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव शुरू होगा। मंदिर की छांवण में बधाई संदेश और पारंपरिक बांदरवाल लगाई गई। मंदिर महंत अंजन कुमार गोस्वामी के सान्निध्य में सुबह साढ़े दस बजे मंदिर बंगाली कीर्तन मंडल की ओर से 24 घंटे का अष्ट प्रहर नाम संकीर्तन शुरू होगा। दोनों प्रवेश द्वारों पर शहनाई वादन शुरू होगा, जो जन्माष्टमी तक चलेगा। सेवाधिकारी मानस गोस्वामी ने बताया कि कार्यक्रम शाम सात से रात साढ़े आठ बजे तक होंगे।</p>
<p><strong>कब-कब क्या होंगे :</strong> एक अगस्त को गिर्राज परिक्रमा मंडल, 2 अगस्त को श्री निम्बार्क सत्संग मंडल, 3 अगस्त को श्री गोविंद की गैया संकीर्तन मंडल एवं गोपीनाथ महिला मंडल, 4 अगस्त को श्री गुरुकृपा सत्संग मंडल और एसएमएस ब्लड बैंक, 5 अगस्त को हरिनाम संकीर्तन परिवार व त्रिवेणी सत्संग मंडल, 6 अगस्त को राधा गोविंद कृपा प्रभातफेरी मंडल, 7 अगस्त को श्रीमन माधव गौड़ेश्वर संकीर्तन मंडल एवं गौर गोविंद महिला मंडल, 8 अगस्त को नारायण नाम संकीर्तन मंडल, 9 अगस्त को श्री राम सत्संग मंडल प्रातकाल और श्री शिव सत्संग भवन ट्रस्ट परिवार सायंकाल, 10 अगस्त को श्री गोविंद देव जी चाकर मंडल के साथ संजय रायजादा एवं मंजू शर्मा की भजन संध्या, 11 अगस्त को श्री निम्बार्क परिषद मंडल और आलोक भट्ट कल्पना संगीत विद्यालय, 12 अगस्त को निताई गोर हरिबोल मंडल, 13 अगस्त को राधा गोविंद सखी परिवार, श्री मदन मोहन गौड़ीय मठ एवं अविनाश शर्मा 14 अगस्त को एल्पाइन स्कूल के मार्गदर्शन में छात्र-छात्राओं की ओर से सांस्कृतिक प्रस्तुतियां होंगी। 15 अगस्त को वृंदावन वैष्णव मंडल की ओर से अष्ट प्रहर संकीर्तन का आयोजन होगा।</p>
<p><strong>श्रीकृष्ण जन्माष्टमी 16 अगस्त को :</strong> मंदिर में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी 16 अगस्त को मनाई जाएगी। रात्रि 12 से 12:30 बजे तक तिथि पूजन एवं भगवान श्रीकृष्ण का जन्माभिषेक किया जाएगा। 17 अगस्त को नंदोत्सव के उपलक्ष्य में शाम 4:30 बजे मंदिर श्री गोविंद देवजी से शोभायात्रा निकाली जाएगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 31 Jul 2025 12:41:37 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur KD]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>निर्धारित तिथि पर आते हैं भारतीय त्योहार : इस साल रक्षाबंधन, जन्माष्टमी, दशहरा, दीपावली पिछले साल की तुलना में आएंगे जल्दी</title>
                                    <description><![CDATA[सावन की शुरुआत 11 जुलाई, रक्षाबंधन 9 अगस्त, जन्माष्टमी 16 अगस्त, गणेश चतुर्थी 27 अगस्त,  शारदीय नवरात्र शुरुआत 22 सितंबर, दशहरा 2 अक्टूबर, दीपावली 20 अक्टूबर, देवउठनी एकादशी 1 नवंबर को रहेंगे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/indian-festivals-come-on-the-scheduled-date-rakshabandhan-janmashtami-dussehra/article-120882"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-07/785452.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। जुलाई से कई मांगलिक कार्यो और त्योहारों का सिलसिला शुरू हो गया है। हरियाली तीज, रक्षाबंधन और जन्माष्टमी से लेकर दीपावली और छठ पूजा का इंतजार लोग पूरे वर्ष भर करते हैं। इस साल ये सभी त्योहार पिछले साल की तुलना में जल्दी आ रहे हैं। इस साल सावन मास से लेकर रक्षाबंधन, जन्माष्टमी, गणेश चतुर्थी से लेकर नवरात, दशहरा, दीपावली पिछले दो सालों की तुलना में 11 दिन पहले आएंगे। 9 अगस्त को रक्षाबंधन, 22 सितंबर से नवरात्र, 2 अक्टूबर को दशहरा और 20 अक्टूबर को दीपावली का पर्व मनाया जाएगा।</p>
<p>देवों के देव महादेव की आराधना और भक्ति का महीना सावन 11 जुलाई से शुरू हो गया है। दरअसल, कैलेंडर सौरमास पर आधारित यानी 365 दिनों का होता है, जबकि पंचांगों की गणना चंद्रमास पर आधारित होती है और यह 354 दिनों का होता है। ऐसे में प्रतिवर्ष पड़ने वाले इन 11 दिनों के भेद को पूरा करने के लिए हर तीन साल में अधिकमास आता है। इससे पहले सावन अधिक मास वर्ष 2023 में पड़ा था और अब अगले साल यानी 2026 में फिर से ज्येष्ठ अधिक मास लगेगा। </p>
<p><strong>2025 में त्योहार कब-कब आएंगे</strong><br />सावन की शुरुआत 11 जुलाई, रक्षाबंधन 9 अगस्त, जन्माष्टमी 16 अगस्त, गणेश चतुर्थी 27 अगस्त,  शारदीय नवरात्र शुरुआत 22 सितंबर, दशहरा 2 अक्टूबर, दीपावली 20 अक्टूबर, देवउठनी एकादशी 1 नवंबर को रहेंगे।</p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />इस बार पिछले साल की तुलना में सभी त्यौहार जल्दी आ रहे हैं, जबकि पिछले साल कुछ दिन बाद में आए थे।<br /> -डॉ. अनीष व्यास,भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्लेषक  </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/indian-festivals-come-on-the-scheduled-date-rakshabandhan-janmashtami-dussehra/article-120882</link>
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                <pubDate>Fri, 18 Jul 2025 12:40:45 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur PS]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ये हैं श्री कृष्ण के सबसे प्रसिद्ध मंदिर</title>
                                    <description><![CDATA[<p>पूरे देश में भगवान श्रीकृष्ण के अनगिनत मंदिर हैं। जहां हमेशा श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है।इनमें से कुछ मंदिर एकदम खास हैं।<br /><br /><strong>जगन्नाथ मंदिर<br /></strong>पुराणों में जगन्नाथ पुरी को धरती का बैकुंठ कहा गया है।जगन्नाथ मंदिर की महीमा देश में ही नहीं विश्व में भी प्रसिद्ध हैं। पुरी में बना जगन्नाथ मंदिर भारत में हिंदुओं के चार धामों में से एक है। जगन्नाथ मंदिर के शिखर पर स्थित झंडा हमेशा हवा की विपरीत दिशा में लहराता है।इसी तरह मंदिर के शिखर पर एक सुदर्शन चक्र भी है। चक्र को किसी भी दिशा से खड़े होकर देखने पर ऐसा लगता</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/these-are-the-most-famous-temples-of-shri-krishna/article-56511"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-09/krishna-temple.png" alt=""></a><br /><p>पूरे देश में भगवान श्रीकृष्ण के अनगिनत मंदिर हैं। जहां हमेशा श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है।इनमें से कुछ मंदिर एकदम खास हैं।<br /><br /><strong>जगन्नाथ मंदिर<br /></strong>पुराणों में जगन्नाथ पुरी को धरती का बैकुंठ कहा गया है।जगन्नाथ मंदिर की महीमा देश में ही नहीं विश्व में भी प्रसिद्ध हैं। पुरी में बना जगन्नाथ मंदिर भारत में हिंदुओं के चार धामों में से एक है। जगन्नाथ मंदिर के शिखर पर स्थित झंडा हमेशा हवा की विपरीत दिशा में लहराता है।इसी तरह मंदिर के शिखर पर एक सुदर्शन चक्र भी है। चक्र को किसी भी दिशा से खड़े होकर देखने पर ऐसा लगता है कि चक्र का मुंह आपकी तरफ है। <br /><br /><strong>प्रेम मंदिर, वृंदावन<br /></strong>वृंदावन का प्रेम मंदिर अत्यंत भव्य है।रात के वक्त भी यहां श्रद्धालुओं की भीड़ कम नहीं होती है।प्रेम मंदिर की सजावट एकदम खास तरीके से की गई है। <br /><br /><strong>इस्कॉन मंदिर, वृंदावन<br /></strong>वृंदावन के इस्कॉन मंदिर में राधेकृष्ण की प्रतिमा एकदम मनोहारी है। जो भी इन्हें देखता है। वे मुग्ध हो जाता है।ये मंदिर कृष्णा बलराम मंदिर के नाम भी जाना जात है।ये मंदिर साल 1975 में बनाया गया था।   <br /><br /><strong>द्वारकाधीश मंदिर, मथुरा<br /></strong>मथुरा का द्वारकाधीश मंदिर की आरती विशेष रूप से दर्शनीय होती है।मंदिर में मुरली मनोहर की सुंदर मूर्ति विराजमान है।मथुरा में पावन यमुना नदी पर कई घाट बने हुए हैं। <br /><br /><strong>श्रीनाथ जी, नाथद्वारा<br /></strong>राजस्थान के नाथद्वारा में स्थित श्रीनाथ जी मंदिर अपनी मूर्तियों के लिए जाना जाता है।माना जाता है कि मेवाड़ के राजा इस मंदिर में मौजूद मूर्तियों को गोवर्धन की पहाड़ियों से औरंगजेब से बचाकर लाए थे।ये मंदिर 12वीं शताब्दी में  बनाया गया था।<br /><br /><strong>रंछोद्रीजी महाराज, गुजरात<br /></strong>ये मंदिर गोमती नदी के किनारे दकोर के मुख्य बाजार के बीचों है।मंदिर की संरचना 1772 में मराठा नोबेल द्वारा की गई थी।इस मंदिर में 8 गुंबद और 24 बुर्ज हैं।जो सोने से बने हैं। <br /><br /><strong>श्री पार्थसारथी स्वामी, चेन्नई<br /></strong>ये मंदिर 8वीं सदी में बनाया गया था।इस मंदिर में श्रध्दालुओं के आना जाना लगा रहता है।इस मंदिर में विष्णु भगवान की कई तरह मूर्तियां हैं। जो भक्तों को अपनी ओर सबसे ज्यादा आकर्षित करती हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 07 Sep 2023 12:00:14 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जन्माष्टमी आज :  कोटा के असली राजा माने जाते हैं भगवान श्रीकृष्ण</title>
                                    <description><![CDATA[रियासतकाल से ही कोटा कृष्ण भक्ति का प्रधान  केन्द्र रहा है। महाराव भीमसिंह प्रथम कृष्ण के अनन्य भक्त थे। उन्होंने कोटा का नाम नंदग्राम कर दिया था। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/janmashtami-today--lord-krishna-is-considered-the-real-king-of-kota/article-19603"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-08/kota-ke-asli-raja-bhagwan-krishna..kota-news-19.8.2022.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। जन्माष्टमी का पावन त्यौहार आज शहर में अत्यंत उत्साह और जोश के साथ मनाया जा रहा है। भगवान कृष्ण के जन्म जन्माष्टमी पर पुराने कोटा का नंदग्राम इलाके का कोना-कोना कृष्णमय हो उठता है। कोटा में  जन्माष्टमी  परंपरा और उत्साह के साथ मनाई जाती है। रात 12 बजे जैसे ही कान्हा का जन्म होता है नंदग्राम श्रीकृष्ण के जयकारों से गूंज उठता है। कान्हा के प्रेम में रंगे भक्त भी अपने घर में श्रीकृष्ण के विभिन्न रूपों की झांकियां सजाकर घर को मंदिर बना देते हैं। भगवान श्री कृष्ण को माखन-मिश्री, पंजिरी, सूखे मेवों आदि के भोग लगाए जा रहे हैं। कोटा सिर्फ शिक्षा नगरी ही नहीं है बल्कि श्रद्धालुओं के लिए धार्मिक आस्था का भी केन्द्र है। रियासतकाल से ही कोटा कृष्ण भक्ति का प्रधान  केन्द्र रहा है। महाराव भीमसिंह प्रथम कृष्ण के अनन्य भक्त थे। उन्होंने कोटा का नाम नंदग्राम कर दिया था। शहर के परकोटे के भीतर पाटनपोल में श्री प्रथम बल्लमपीठ श्री मथुराधीश जी का मंदिर स्थित है। इसी क्षेत्र में रियासतकालीन श्री बृजनाथ जी भगवान का मंदिर, श्री फूल बिहारी जी का मंदिर, श्री महाप्रभु जी का बड़ा मंदिर, भगवान लक्ष्मीनारायण मंदिर चारभुजा जी का मंदिर सहित कई प्राचीन मंदिर है। जिनके  प्रति आस्था लोगों में आज भी है। वल्लभ संप्रदाय की प्रमुख पीठ श्री मथुराधीश जी होने से यहां  जन्माष्टमी पर अवकाश नहीं होता बल्कि अगले दिन नंद उत्सव पर कोटा मेंअवकाश रहता है। किशोरपुरा दरवाजे से लेकर बड़े मथुराधीश जी मंदिर तक का क्षेत्र नंदग्राम कहलाता है। नंदग्राम में करीब 150 छोटे-बडेÞ कृष्ण मंदिर है। कृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर शहर के प्राचीन कृष्ण मंदिरों के प्रति लोगों की क्यों है आस्था इस बारे में  जानते हैं।</p>
<p><strong>भगवान श्री बृजनाथ जी  : महाराव भीमसिंह थे कृष्ण के अनन्य भक्त</strong><br />जब महाराव भीमसिंह प्रथम ने वल्लभ कुल की दीक्षा ली थी तब ही उन्होंने इस मंदिर की स्थापना की और बृजनाथ जी को यहां विराजमान किया। उन्होंने अपने शासनकाल में 17वीं शताब्दी में ही मंदिर का निर्माण किया। उसके बाद महाराव दुर्जनशाल सिंह मथुराधीश जी को लेकर आए। मथुराधीश जी की स्थापना से भी पहले की स्थापना बृजनाथ जी की है। ये वह प्रतिमा है जिसे महाराव भीमसिंह प्रथम हमेशा अपने साथ रखते थे। जहां भी वह युद्ध में जाते थे अपने साथ हाथी के ओहदे पर भगवान श्री बृजनाथ जी की प्रतिमा को साथ में रखते थे। यहां से ही कोटा कृष्ण भक्ति का केन्द्र बनना शुरू हुआ। उसके बाद उन्होंने कोटा का नाम बदल कर नंदग्राम कर दिया। वह कृष्ण के इतने परम भक्त थे की शेरगढ़ (बारां) को राधा जी का स्थान बरसाना बना दिया और उन्होंने उसे बरसाना नाम दे दिया। यहां से ही कोटा में वल्लभ कुल की परंपरा की शुरूआत हुई। उसके बाद फिर दुर्जनसाल सिंह के समय मथुराधीश जी कोटा पधारे और प्रथम पीठ की स्थापना हुई उसके बाद से कोटा वल्लभ कुल के प्रमुख स्थलों में से एक माना जाने लगा। क्योंकि वल्लभ कुल की प्रथम पीठ कोटा में मथुराधीश जी के रूप में विराजमान है। इस तरह कोटा कृष्ण भक्ति का महत्वपूर्ण केन्द्र बन गया।  महाराव भीमसिंह के समय से ही कोटा राजपरिवार में परंपरा रही जब भी राज दरबार लगता था तो सिंहासन  भगवान कृष्ण  के लिए ही लगता था। महाराव भीमसिंह प्रथम के समय से कोटा में प्रचलन प्रारंभ हुआ कि जो असली राजा है या असली मालिक है कोटा के वह भगवान कृष्ण  है। कोटा में आज भी मथुराधीश जी वाला क्षेत्र नंदग्राम कहलाता है इसी वजह से कोटा में जन्माष्टमी का अवकाश दूसरे दिन नंद महोत्सव पर होता है। <br /><strong>-पं. आशुतोष दाधीच , क्यूरेटर, राव माधोसिंह म्यूजियम गढ़ पैलेस</strong></p>
<p><strong>भगवान मथुराधीश जी : पाटन पोल द्वार के पास रुक गया था प्रभु का रथ </strong><br />वल्लभ संप्रदाय में भगवान श्री कृष्ण के सप्त स्वरूपों की सेवा की जाती है। पाटनपोल स्थित श्री मथुराधीश मंदिर वल्लभ संप्रदाय की प्रथम पीठ और तीर्थ है। जिसके अनुयायी देश विदेश में मौजूद हैं। संवत 1795 में कोटा के महाराज दुर्जनशाल ने प्रभु को कोटा पधराया था। कोटा नगर में पाटनपोल द्वार के पास प्रभु का रथ रुक गया तो तत्कालीन आचार्य गोस्वामी गोपीनाथ महाराज ने आज्ञा दी कि प्रभु की यहीं विराजने की इच्छा है। तब कोटा राज्य के दीवान द्वारकादास राय ने अपनी हवेली को गोस्वामी जी के सुपुर्द कर दिया था। गोस्वामी जी ने उसी हवेली में कुछ फेरबदल कराकर प्रभु को विराजमान किया। तब से अभी तक प्रभु इसी हवेली में विराजमान हैं। यहाँ वल्लभ कुल सम्प्रदाय की रीत के अनुसार सेवा होती है । इससे पहले ठाकुर जी की प्रतिमा को महाराव दुर्जनसाल बूंदी से लेकर आए थे। मंदिर में प्रतिदिन मंगला आरती, ग्वाल, राजभोग, आरती, उत्थापन, शयन के दर्शन होते हैं। हालांकि शयन के दर्शन रामनवमी से बंद रहते है तथा कार्तिक सुदी अष्टमी में खुलने लग जाते है । मंदिर पर सामान्य दिनों में 2 हजार, अवकाश वाले दिनों में 3 से 4 हजार, पर्वों पर 10 से 12 हजार एवं सम्पूर्ण वर्ष में लगभग 12 से 15 लाख भक्त दर्शन करते हैं।  <br /><strong>- गोस्वामी मिलन कुमार बावा, श्री मथुराधीश मंदिर प्रथम पीठ</strong></p>
<p><strong>लक्ष्मीनारायण मंदिर : एक साथ विराजे हैं भगवान नारायण-मां लक्ष्मी</strong><br />कोटा गढ़ के समीप स्थित भगवान लक्ष्मीनारायण मंदिर 600 साल प्राचीन है। इस मंदिर में ब्रह्मा, विष्णु और महेश तीनों ही विराजमान है। यहां लक्ष्मीनाथ जी (युगल जोड़ी) की छवि है। भगवान नारायण अ ौर मां लक्ष्मी एक साथ विराजमान है। जन्माष्टमी पर यहां बहुत बढ़िया उत्सव होता है। तीनों मंदिरों की श्रृंखला यहां एक साथ है। लक्ष्मीनारायण जी, चारभुजा जी और श्रीनाथ जी तीनों ही क्रमबद्ध है और यहां से ही नंदग्राम की शुरूआत होती है। जो मुख्य मथुराधीश जी मंदिर तक नंदग्राम में करीब 150 छोटे-बडे कृष्ण मंदिर है। <br /><strong>- पं. विमल शर्मा, पुजारी, लक्ष्मीनारायण मंदिर</strong></p>
<p><strong>300 वर्ष प्राचीन श्री फूल बिहारी जी का मंदिर </strong><br />पाटनपोल स्थित श्री फूल बिहारी जी का मंदिर 300 वर्ष प्राचीन है। इस मंदिर की स्थापना तत्कालीन कोटा नरेश रामसिंह ने की थी। उनकी महारानी फूल कंवर बाई की इच्छानुसार संवत् 1918 तदानुसार शाके 1784 बैसाख का महीना यानि शुक्ल पक्ष की छठे दिन सोमवार को इस मंदिर की स्थापना की गई। फूल कंवर रानी के कृष्ण इष्टदेव थे। रानी की इच्छा थी की कृष्ण का मंदिर बनवाऊं। वह मीरा बाई की तरह ही कृष्ण की भक्त थी। अष्टधातु की बांसुरी बजाते हुए छोटी मूर्ति कृष्ण की खड़े स्वरूप में है।  ये पुष्टि मार्गी मंदिर है। वल्लभ संप्रदाय के प्रथम पीठ के अनुसार ही सेवा की जाती है। <br /><strong>- अश्विनी कुमार,मुखिया,श्री फूल बिहारी जी मंदिर</strong></p>
<p><strong>चरण चौकी : चार महीने बिराजे थे श्रीनाथ जी </strong><br />श्रीनाथ जी की चरण चौकी कोटा से 18 किमी दूर डाढ़ देवी मार्ग पर मोतीपुरा गांव में स्थापित है। यहां श्री नाथ जी के चरण पूजे जाते है। यहां श्रीनाथ जी चार महीने बिराजे इसलिए इस स्थान की बहुत आस्था लोगों में है।श्रीनाथ जी ठाकुर जी का मंदिर बना हुआ है प्राचीन स्थान है। श्रीनाथजी के  चरण की आज भी पूजा होती है। संवत 1726 में जब मुगल बादशाह औरंगजेब द्वारा मंदिरों को तोड़ने का अभियान शुरू किया गया था तब बृज भूमि से सभी विग्रह हिन्दूृ राजाओं के रियासत में लाए गए थे। औरंगजेब ने जब मथुरा पर चढ़ाई की तब मथुरा परिक्रमा परिसर में जतीपुरा में श्रीनाथजी का मंदिर था। वहां से मूर्ति आगरा ,मुरैना गई। मुरैना के बाद तीसरा स्थान कोटा चरण चौकी है जहां चार महीना श्रीनाथजी बिराजे थे। यहां के बाद मूर्ति किशनगढ़, वहां से जोधपुर चौपासनी गई। श्रीनाथजी की मूर्ति सीहाड़ लेकर गए जहां पर उनका भव्य मंदिर बनवाया गया जो आज श्री नाथद्वारा कहलाता है । <br /><strong>- जयनारायण गुर्जर, सदस्य मोतीपुरा चरण चौकी मंदिर ट्रस्ट</strong></p>
<p><strong>चारभुजा जी का मंदिर : पूरी होती है मनोकामना</strong><br />गढ़ के पास स्थित चारभुजा जी का मंदिर करीब 250 साल पुराना है। काफी वर्षों पूर्व यह मंदिर हमारे परिवार को राजपूत समाज के किसी व्यक्ति ने दान में दिया और कहा कि इसकी सेवा आप करें। तब से ही इस मंदिर की सेवा कर रहे हैं। वर्तमान में हमारी चौथी पीढ़ी यहां सेवा कर रही है। इस मंदिर में विराजमान चारभुजा जी बाल स्वरूप में है। लोगों की आस्था इस मंदिर के प्रति है कि मन में जो भी मांगते हैं वह कामना पूरी हो जाती है। जन्माष्टमी पर यहां काफी उत्साह का माहौल रहता है। अष्टमी पर जन्माष्टमी तथा नवमी व दशमी को नंदोत्सव मनाया जाता है। <br /><strong>- पं. मुनीश कुमार शुक्ला, पुजारी चारभुजा मंदिर</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 19 Aug 2022 14:53:00 +0530</pubDate>
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