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                <title>एआई लिट्रेसी को स्कूली कोर्स में शामिल करना जरूरी, लेकिन मानवीय मूल्य बने रहें </title>
                                    <description><![CDATA[रचनात्मकता बनी रहे, एआई का एथीकल यूज हो, नेशनल एआई लिट्रेसी स्ट्रेटेजी तैयार होनी चाहिए।
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/it-is-necessary-to-include-ai-literacy-in-school-curriculum--but-human-values-should-remain/article-118062"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-06/news46.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। दैनिक नवज्योति की ओर से प्रतिमाह आयोजित परिचर्चा की श्रंखला के तहत शुक्रवार को जब चीन छोटी क्लास से ही बच्चों को आर्टिफिशियल इंटेलीजेस(एआई) की शिक्षा दे रहा है वहां कोटा जिले में डिजीटल लिट्रेसी की क्या स्थिति है इस मुद्दे पर वक्ताओं ने विचार विमर्श किया। परिचर्चा का विषय था ( वाट इज द पॉ्जिशन आॅफ डिजिटल लिट्रेसी इन कोटा व्हेन चाइना हेज मूव टू एआई लिट्रेसी) परिचर्चा में  शिक्षा विभाग की संयुक्त निदेशक, कोटा यूनिवर्सिटी की डीन, रोबोटिक इंजीनियर, इनोवेटर,  एआई टीचर, शिक्षाविद, प्राइवेट व सरकारी स्कूल के संचालक ,  प्रिंसिपल, कम्प्यूटर एक्सपर्ट,   पैरेन्ट्स और बच्चोंं ने भाग लिया। परिचर्चा में सभी वक्ताओं ने स्कूलों में छोटी क्लासेज से ही एआई को सब्जेक्ट के रूप में पढ़ाने पर जोर दिया लेकिन इसके साथ उनहोंने ऐसा केरिकुलम तैयार करने की भी जरूरत बताई जो मानवीय मूल्यों को बनाए रखे। वक्ताओं ने कहा कि सीबीएसई ने बड़ी क्लास में इसे एैच्छिक रूप से शुरू कर दिया है।  इसे कम्पलसरी करना चाहिए। साथ ही पैरेन्ट्स को भी एजुकेट करने की आवश्यकता बताई। वक्ताओं का कहना था कि एआई की सबसे बड़ी थ्रेट यह है कि यह लोगों को कुन्द कर सकती है। उनकी मौलिकता और रचनात्मकता  को खत्म कर सकती है। ऐसी स्थिति में हमें स्पेशल कोर्स डिजाइन कर इसे लागू करना चाहिए। सरकारी स्कूलों में लैब हब्स और टिंकरिंग लैब्स की पर्याप्त सुविधा भी विद्यार्थियों को मिलनी चाहिए। </p>
<p><strong>शिक्षा में डिजिटल साक्षरता की उपयोगिता बढ़ रही</strong><br />वर्तमान शिक्षा नीति में डिजिटल साक्षरता पर पूरा फोकस किया जा रहा है। स्मार्ट क्लॉस में बच्चों को डिजिटल शिक्षा के साथ एआई के उपयोग के बारे में भी पढाया जा रहा है। ग्रामीण क्षेत्र में टेलेंट की कमी नहीं है। सरकारी स्कूलों में शिक्षा में लगातार नवाचार किए जा रहे है। बच्चों को कम्प्यूटर शिक्षा के साथ डिजिटल साक्षरता भी दी जा रही है। एआई का प्रयोग करना भी बताया जा रहा है। सरकारी स्कूल निजी स्कूलों के मुकाबले अब बेहतर प्रदर्शन कर रहे है। निजी स्कूलों में बच्चों रटाया जाता है। लेकिन सरकारी स्कूलों बच्चों स्मार्ट बनाया जाता है। उन्हें मौलिकता के साथ डिजिटल एजुकेशन के प्रयोग भी बताए जा रहे है। अभी समिति संसाधान है लेकिन सरकार की ओर से डिजिटिल शिक्षा को लेकर काफी बदलाव किए है। 80 प्रतिशत स्कूलों में डिजिटल साक्षरता का उपयोग हो रहा है। इंटरनेट कनेक्टिविटी नहीं मिलने वाले क्षेत्रों में कुछ परेशानी है बाकी स्कूलों में आधुनिक कम्प्यूटर लेब स्मार्ट क्लॉस में बच्चों सारी समस्याओं का समाधान हो रहा है।  हालांकि कुछ विषय के अध्यापकों की कमी है लेकिन सरकार उनके रिक्त पदों को भी भर रही है। सरकारी स्कूल के बूनियादी ढांचे में पहले की अपेक्षा काफी बदलाव आया है। <br /><strong>-तेजकंवर संयुक्त निदेशक शिक्षा विभाग कोटा</strong></p>
<p><strong>डिजिटल साक्षरता से युवा सोच का दायरा बढ रहा</strong><br />जहां एक ओर डिजिटल साक्षरता युवाओं की सोच के दायरे को बढ़ा रही है और हर काम आसान कर रहा है। वहीं दूसरी ओर बच्चे इस पर आश्रित भी हो रहे है। वो छोटी छोटी चीजों के लिए भी एआई का सहारा ले रहे जिससे उनके अंदर नवाचार करने की प्रवृति खत्म हो रही है। डिजिटल साक्षरता जरूरी है लेकिन इस पर निर्भर नहीं होना है। इसका उपयोग अपनी सोच के दायरे को व्यापक करने तक ही सीमित रखना चाहिए। एआई के प्रयोग के साथ हमें अपने नैतिक मूल्यों के संरक्षण की भी आवश्यकता है। हर स्कूल में एआई ट्रेंड टीचर होना चाहिए जो एआई के प्रयोग को ठीक से समझा सकें। बच्चों को डिजिटल साक्षरता के लिए जागरूक करने की आवश्यकता है। हमें यह देखना होगा बच्चों की किस विषय में रूचि है। कोटा के कई स्कूलों में 9 से 12 में एआई शिक्षा शुरू हो चुकी है। डिजिटल साक्षरता से पहले हमें अभिभावकों की सोच में बदलाव लाना होगा। अभिभावकों के साथ लगातार कार्यशालाएं आयोजित कर बच्चों की क्या जरूरत है उसी के अनुसार उसे तैयार करना चाहिए। इस क्षेत्र में अभी काफी काम करने की आवश्यकता है। <br /><strong>-जसपिंदर साहनी,  प्रिंसीपल एमबी इंटरनेशनल स्कूल</strong></p>
<p><strong> डीएमआई टेस्ट से जान सकेंगे हैं बच्चे की रूचि</strong><br />कोटा में डिजिटल साक्षरता बढ़ाने की आवश्यकता है। बच्चों के सामने सबसे बड़ी समस्या केरियर चुनने की आती है। ऐसे में डीएमआईडमेर्टोग्राफिक मल्टीपल इंटेलिजेंस टेस्ट (डीएमआईटी) एक ऐसा टेस्ट है जो फिंगरप्रिंट पैटर्न का विश्लेषण करके किसी व्यक्ति की जन्मजात प्रतिभा, व्यक्तित्व और बुद्धि के बारे में जानकारी प्रदान करता है। यह एक वैज्ञानिक रूप से समर्थित मूल्यांकन है जो व्यक्ति की अद्वितीय क्षमताओं और संभावित सीखने की शैली को समझने में मदद करता है।  डीएमआईटी का मतलब है डमेर्टोग्लिफिक्स मल्टीपल इंटेलिजेंस टेस्ट। डमेर्टोग्लिफिक्स उंगलियों और हथेलियों पर पाए जाने वाले अनूठे पैटर्न का अध्ययन है। यह टेस्ट फिंगरप्रिंट के पैटर्न का विश्लेषण करके मस्तिष्क के विभिन्न क्षेत्रों से उनके संबंध को समझने का प्रयास करता है, जिससे व्यक्ति की जन्मजात क्षमताओं और सीखने की शैली के बारे में जानकारी मिलती है। टेस्ट रिपोर्ट व्यक्ति की ताकत, कमजोरियों, सीखने की शैली और संभावित करियर विकल्पों के बारे में जानकारी मिल जाती है।  यह टेस्ट छात्रों को उनकी ताकत और कमजोरियों के आधार पर सही शैक्षणिक मार्ग चुनने में मदद करता है।<br /><strong>-जितेंद्र वर्मा, एआई शिक्षक आई स्टार्ट नेस्ट</strong></p>
<p><strong>कोरोना काल में अपनाई एआई तकनीक</strong><br />किसान परिवार से होने के कारण किसानों की समस्याओं को नजदीकी से देखा। किसानों को  खेती के हर काम के लिए अलग मशीन का उपयोग करना पड़ता है। कक्षा 10 वीं तक  पेंटिग का शौक रहा। उसी समय कोरोना काल आया। जिसमें डिजिटल तकनीक का अधिक उपयोग हुआ। ऐसे में किसानों की समस्याओं के समाधान के लिए स्टार्टअप किया और ऐसी तकनीक इजात की। जिससे एक ही मशीने  किसानों की हर जरूरत को पूरा कर रही है। उनके इस काम को प्रधानमंत्री ने भी सराहा तो आगे काम करने का अवसर मिला। <br /><strong>-आर्यन सिंह, फाउंडर मेरा साथी प्रा. लि.  </strong></p>
<p><strong>प्रतिस्पर्धा के लिए तकनीक का ज्ञान जरूरी</strong><br />दुनिया के साथ चलना है और विश्व के अन्य देशों से प्रतिस्पर्धा करनी है तो तकनीक का ज्ञान जरूरी है। लेकिन उसके साथ ही भारतीय संस्कृति को भी जीवित रखना होगा। ग्रामीण क्षेत्रों मेंं बच्चों में छिपा टेलेंट अधिक है। उसे सही दिशा में ले जाने की जरूरत है। एआई का उपयोग जानकारी के लिए किया जाना अच्छा है लेकिन उसके दुरुपयोग को भी रोकने की जरूरत है। वहीं बच्चों को उनकी रूचि के हिसाब से आगे बढ़ाना होगा तभी वे अपने क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन कर सकेंगे।  <br /><strong>-अशोक कुमार गुप्ता, फ्रोफेसर रिटा. प्रिंसिपल जेडीबी</strong></p>
<p><strong>एआई का सही दिशा में हो उपयोग</strong><br />एआई पर कोटा में हर स्तर पर काम हो रहा है। यूनिवर्सिटी में भी अच्छा काम हो रहा है। डिजिटल लिट्रेसी बढ़ रही है। वर्तमान समय में डिजिटल व एआई तकनीक का ज्ञान जरूरी है। लेकिन उसके साथ ही संस्कृति का ह्रास न हो इसका भी ध्यान रखना होगा। तकनीक का उपयोग करने के साथ ही बच्चों की सोच में वैज्ञानिक दृुष्टिकोण विकसित करने की जरूरत है। एआई का जितना लाभ है उससे अधिक नुकसान भी है। एआई को सोशल मीडिया अधिक प्रभावित कर रहा है। ऐसे में बच्चों के साथ ही परिजनों में भी जागरूकता की जरूरत है। इसकी शुरुआत खुद से करनी होगी। <br /><strong>- रीना दाधीच, प्रोफेसर कोटा यूनिवर्सिटी </strong></p>
<p><strong>बच्चों में टेलेंट, सही दिशा देने की जरूरत</strong><br />आज के बच्चों में टेलेंट काफी है। जरूरत उन्हें सही दिशा देने की है। शहरों की तुलना में ग्रामीण क्षेत्र के बच्चे डिजिटल तकनीक का अधिक उपयोग कर रहे हैंं वह भी सकारात्मक रूप में। स्किल के साथ डिजिटल तकनीक का उपयोग पिछले 5 साल में अधिक बढ़ा है। इस दिशा में सहरिया बच्चे भी काफी आगे हैं। जरूरत है कि एआई के नकारात्मक पहलुओं को रोका जाए। जिससे उसके दुष्परिणाम नहीं हो। <br /><strong>-विभा शर्मा, डायरेक्टरसीएसटी कम्प्यूटर इंस्टीट्यूट </strong></p>
<p><strong>एआई से रीयल टेलेट हो रहा खत्म</strong><br />वर्तमान में हर क्षेत्र में एआई का अधिक उपयोग होने लगा है। संगीत में भी इसका उपयोग तेजी से होने  लगा है। एआई के आने से रीयल टेलेंट खत्म हो रहा है।  समय के साथ चलना है तो डिजिटल तकनीक का उपयोग भी जरूरी है। लेकिन उसके नकारात्मक पहलुओं को रोकने की भी जरूरत है। क्रियटिविटी बनी रहे। हालांकि आज की यह जरूरत है लेकिन इसके नकारात्मक पहलुओं पर भी हमें सोचना होगा।  <br /><strong>-शिल्पी सक्सेना, डायरेक्टर संगीत वाटिका</strong></p>
<p><strong> शिक्षा में अपग्रेट हमेशा होना चाहिए</strong><br /> डिजिटल साक्षरता और शिक्षा में अंतर समझना होगा। वर्तमान में शिक्षा के साथ डिजिटल साक्षरता वर्तमान की जरुरत है लेकिन इसका उपयोग किस प्रकार से किया जा रहा है विचारणीय प्रश्न है। स्कूलों में मौलिक शिक्षा के साथ डिजिटल शिक्षा जरूरी है। चायना में प्राइमेरी स्तर पर ही लोगों को व्यवसायी शिक्षा के लिए तैयार किया जाता है। वहां एआई कक्षा छह से शुरू कर रहे हमारे यहां डिजिटल और एआई को शिक्षा में समावेश किया है लेकिन अभी उसका व्यापक उपयोग नहीं हो रहा है।  शिक्षा में एआई  व डिजिटल शिक्षा को सोच समझकर लागू करने की आश्यकता है। शिक्षा में अपग्रेट हमेशा होना चाहिए लेकिन उसका उपयोग कैसा होगा इस पर भी ध्यान देने की आवश्कता है। हमें विदेशी संस्कृति के पीछे दौडना रोकना चाहिए लेकिन समय के साथ चलना भी आज की जरूरत है। <br /><strong>-देव शर्मा, चेयरमैन कम मैनेजिंग डायरेक्टर क्रेडीजी कोटा</strong></p>
<p><strong>आधी अधूरी लर्निंग से खत्म हो रही क्रियटिविटी</strong><br />वर्तमान समय में डिजिटल शिक्षा यूथ के लिए जरूरी हो गई है। कारण की भारत डिजिटल क्षेत्र में काफी आगे ग्रोथ कर रहा है। स्कूल कॉलेज में युवाओं को थ्यौरी तो पढाई जाती है। लेकिन प्रेक्टिकल ज्ञान नहीं दिया जाता है। टेक्नोलॉजी में कोडिग नहीं सिखाई जा रही है। युवा एआई से मदद लेकन अपने प्रोजेक्ट पूरा कर रहा है लेकिन वो प्रोजेक्ट कैसे तैयार हुआ उसको बेसिक नॉलेज नहीं मिल रहा है। डिजिटल साक्षरता से युवाओं की क्रिएटिविटी खत्म हो रही है। एआई युवाओं के सीधा मस्तिष्क पर अटैक कर रहा वो स्वयं कोई इनोवेशन नहीं करना चाहता सारा ज्ञान वो एआई से ही लेकर अपने प्रोजेक्ट तैयार कर रहा जो ठीक नहीं प्रेक्टिकल की जगह युवा आएई पर अधीन होता जा रहा है। <br /><strong>-साक्षी गुप्ता, स्टूडेंट</strong></p>
<p><strong> डिग्री की नहीं स्किल बेस शिक्षा की जरूरत</strong><br />एआई तकनीक का उपयोग तो बहुत अधिक होने लगा है। लेकिन उसके बारे में सही जानकारी का भी होना आवश्यक है। इसके लिए स्कूल से ही बच्चों को इस बारे में सही दिशा में जानकारी देनी की आवश्कता है। जिससे शिक्षा पूरी करने तक बच्चे में विशेषज्ञता आएगी। वर्तमान में डिग्री की नहीं स्किल बेस शिक्षा की जरूरत है। आगे बढ़ने के लिए डिजिटल व तकनीकी शिक्षा बहुत जरूरी है। वर्तमान में जिस तरह से एआई का उपयोग बढ़ रहा है। ऐसे में 2030 तक इससे संबंधित लाखों नौकरियां आने वाली है। <br /><strong>-अरविंद गुप्ता, शिक्षाविद </strong></p>
<p><strong>बच्चे तकनीक का उपयोग करें, पंगु नहीं बनाएं</strong><br />भारत विकासशील और चीन विकसित देश है। भारत में टेलेंट की कमी नहीं है। दुनिया में सबसे अधिक टेलेंट भारत का ही काम कर रहा है। एआई जो काम अब कर रहा है। वह काम भारत में शंकराचार्य बहुत पहले से कर रहे हैं। बच्चों को एआई और डिजिटल तकनीक का उपयोग करना आना चाहिए लेकिन उसके कारण बच्चों को पंगु नहीं बनाएं। हर माता पिता को चाहिए कि बच्चों को तकनीक का सही उपयोग करना बताएं। मानवीय मूल्यि बने रहने चाहिए। <br /><strong>-नीलम विजय, सोशल एक्टिविस्ट</strong></p>
<p><strong>एआई लोगों की सोच को अपग्रेड करने का एक टूल</strong><br />कोटा में अभी डिजिटल साक्षरता के क्षेत्र में काम तो हो रहा है लेकिन जिस प्रकार से विकसित देशों में खासतौर से चाइना में इसका उपयोग हो रहा है उस स्तर का अभी भारत में नहीं हो रहा है। लोगों को लगता है एआई आने से लोगों की नौकरियां खत्म होगी यह गलत धारणा है। एआई के प्रयोग से जॉब खत्म नहीं होगा उसका नैचर बदलेगा लोगों को उसके अनुरूप ही अपने को अपग्रेट करना होगा। एआई लोगों को सोच को अपग्रेट करने का एक टूल है। अपनी सोच को व्यापक बनाने के साधन के रूप में देखना चाहिए। वर्तमान शिक्षा नीति में डिजिटल साक्षरता और एआई अपना स्थान बनाने लगी है। लेकिन इसका उपयोग सोच समझकर करने की आवश्यकता है। हर बच्चे में योग्यता की कोई कमी नहीं है उसे सही दिशा देने की आवश्यकता है। वर्तमान शिक्षा थ्यौरी पर ज्यादा जोर दिया जाता है। प्रेक्टिकल पर कम । वर्तमान में डिजिटल साक्षरता लोगों के जीवन का हिस्सा बनती जा रही है। कोटा बेगलूरू से दस साल पीछे चल रहा है। लोगों को नवाचार को अपनाना होगा। कोटा के यूथ को ब्रेन अन्य देशों में काम आ रहा है। <br /><strong>-ओमप्रकाश सोनी, रोबोटिक इंजीनियर एटीएल इंचार्ज</strong></p>
<p><strong>एआई के प्रयोग से शिक्षा अब सार्वभौमिक हो गई है</strong><br />भारत में नई राष्टÑीय शिक्षा नीति 2020 में आर्टिफिशियल इंटीलीजेंस की महत्वपूर्ण भूमिका के चलते ही इसको एजुकेशन सिस्टम में शामिल करने की सिफारिश की गई है। शिक्षा में एआई की सार्वभौमिकता पहुंच एवं वैश्विक कक्षाएं सर्वसुलभ होने लिए स्कूली शिक्षा में एआई व टेक्नोलॉजी को बढ़ावा देने के लिए सीबीएसई ने एआई तथ इंटरनेट आॅफ थिंग्स को कक्षा 6 से 10 तक के पाठ्यक्रम में शामिल किया गया है।  चीन की बात करें तो वहां नेक्स्ट जनरेशन एआई डवलमेंट प्लान 2017 को अधिक गहनता से शिक्षा में सम्मलित किया गया है। हमारे देश राष्टÑीय शिक्षा नीति 2020 का लक्ष्य स्थानीय भाषाओं को बढावा देते हुए डिजिटल शिक्षा को बढावा देना है। तथा हॉलिस्टिक एजुकेशन की ओर लेकर जाना है। वहीं चीन का लक्ष्य 2023 तक एआई में वैश्विक नैतृत्व पाना है।  देश में सीबीएसई ने  कक्षा 9 से 11 तक में एआई को इलेक्टिव पेपर के रूप में रक्षा है वहीं चीन में इसे प्राथमिक कक्षाओं से ही पढ़ाया जा रहा है। आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस अब भविष्य का वादा नहीं रह गया है। बल्कि आज शिक्षा में सक्रिय रूप से आगे बढाया जा रहा है। इसके द्वारा ड्रीम बॉक्स, स्मार्ट स्पैरो जैसे प्लेटफार्म द्वारा उन्नत वैयक्तिक शिक्षण हो रहो रहा है। ग्रेड स्कोप जैसे उपकरणों में  एएआई द्वारा ग्रेडिंग शेड्यूलिंग, रिपोर्ट निर्माण जैसे कार्य किए जा रहे हंै।<br /><strong>-डॉ. मीनू माहेश्वरी, कोटा विश्व विद्यालय </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 21 Jun 2025 11:28:23 +0530</pubDate>
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                <title>असर खबर का - कोटा यूनिवर्सिटी में शुरू हुई ट्यूरिज्म एंड ट्रैवल मैनेजमेंट की कक्षाएं </title>
                                    <description><![CDATA[फैकल्टी परीक्षा से पहले कोर्स पूरा करवाने की जद्दो जहद में लगी है।  ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/effect-of-the-news---tourism-and-travel-management-classes-started-in-kota-university/article-100382"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-01/257rtrer-(1)16.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। कोटा विश्वविद्यालय में शुरू किए गए मास्टर ऑफ ट्यूरिज्म एंड ट्रैवल मैनेजमेंट कोर्स  की कक्षाएं शुरू हो गई हैं। विद्यार्थियों को पढ़ाने के लिए फैकल्टी व क्लास रूम भी मिल गए हैं। कैम्पस में प्रतिदिन डेढ़ से दो घंटे की क्लासें लगाई जा रही हैं। हालांकि, कक्षाएं शुरू होने में काफी वक्त लगा है। फरवरी में सेमेस्टर एग्जाम होने हैं। ऐसे में फैकल्टी परीक्षा से पहले कोर्स पूरा करवाने की जद्दो जहद में लगी है।  इसके लिए एक्सट्रा क्लासें भी लगाई जा रही हैं। मास्टर ऑफ ट्यूरिज्म एंड ट्रैवल मैनेजमेंट कोर्स की कन्वीनर डॉ. अनुकृति शर्मा ने बताया कि 23 दिसम्बर को ऑफिशियली रूप से कक्षाएं शुरू कर दी गई थीं। अब परीक्षा से पहले सिलेबस पूरा करवाना चुनौति है। हालांकि, एक्सट्रा क्लासें लगवाकर कोर्स पूरा करवाने का प्रयास किया जा रहा है। </p>
<p><strong>प्रतिदिन 2 घंटे लग रही कक्षाएं</strong><br />मास्टर ऑफ ट्यूरिज्म एंड ट्रैवल मैनेजमेंट के प्रथम सेमेस्टर की कक्षाएं प्रतिदिन डेढ़ से दो घंटे लगाई जा रही है। इस दौरान विद्यार्थियों को न केवल किताबी ज्ञान पढ़ा रहे हैं बल्कि प्रेक्टिकली ट्यूरिज्म एंड ट्रैवल के बारे में बताया जा रहा है। इस कोर्स में देश के ऐतिहासिक  स्थल, इमारतों व ट्यूरिज्म स्पोट्स के बारे में पढ़ाया जा रहा है। जल्द ही भर सकेंगे एग्जाम फॉर्म : डॉ. अनुकृति ने बताया कि एग्जाम फॉर्म भरने की तिथि निकल चुकी है। लेकिन, इस कोर्स के विद्यार्थियों के लिए अलग से एग्जाम फॉर्म भरने के लिए पोर्टल खोला जाएगा। जल्द ही विद्यार्थी फॉर्म भर सकेंगे। हालांकि, इनकी परीक्षा अन्य संकायों के सेमेस्टर एग्जाम समाप्त होने के कुछ दिनों बाद करवाए जाने की संभावना है। </p>
<p><strong>यह आ रही थी समस्या</strong><br />कोटा विवि ने वर्तमान सत्र से मास्टर ऑफ ट्यूरिज्म एंड ट्रैवल मैनेजमेंट पीजी कोर्स लॉन्च किया था। लेकिन, कोर्स के लिए अलग से कोई डिपार्टमेंट नहीं बनाया। जबकि, यूजीसी नियमानुसार इस कोर्स के संचालन के लिए अलग से डिपार्टमेंट होना जरूरी है। लेकिन, विभाग नहीं बनने से न तो फैकल्टी मिली और न ही कक्षाएं लग पा रही थी। ऐसे में विद्यार्थियों में कोर्स को लेकर असमंजस की स्थिति बन गई थी। विद्यार्थियों की शिकायत पर दैनिक नवज्योति ने 17 दिसम्बर को खबर प्रकाशित कर छात्रों की समस्या को प्रमुखता से उठाया था। इसके बाद यूनिवर्सिटी प्रशासन ने कोर्स के लिए फैकल्टी व क्लासरूम की परमिशन दी। जिसके बाद 23 दिसम्बर को कक्षाएं शुरू हो गई।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 11 Jan 2025 17:40:54 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>बीबीए में नहीं दिखा रुझान, 9 ही आए आवेदन, तीन बार अंतिम तिथि बढ़ाई </title>
                                    <description><![CDATA[पहली बार कोर्स शुरू किए जाने पर आयुक्तालय द्वारा कक्षाएं संचालित करने की हरी झंडी दी जा सकती है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/no-interest-in-bba--only-9-applications-received--last-date-extended-thrice/article-91438"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-09/630400-size-(2)13.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। राजकीय वाणिज्य महाविद्यालय में शुरू हुए बीबीए कोर्स दम तोड़ता नजर आ रहा है।  विद्यार्थियों का रुझान उम्मीद के विपरीत रहा। तीन बार अंतिम तिथि बढ़ाए जाने के बावजूद 9 ही आवेदन आए हैं। जबकि, तीसरी अंतिम तिथि भी शनिवार को समाप्त हो गई। ऐसे में इस वर्ष बैचलर ऑफ बीजनेस एडमिनेस्ट्रेशन की कक्षाओं पर सस्पेंड का खतरा मंडरा रहा है। हालांकि, पहली बार कोर्स शुरू किए जाने पर आयुक्तालय द्वारा कक्षाएं संचालित करने की हरी झंडी दी जा सकती है। </p>
<p><strong>बीबीए के प्रति घटते रुझान का यह मुख्य कारण</strong><br />शिक्षाविदें का कहना है, कॉलेज आयुक्तालय की ओर से बैचलर ऑफ बीजनेस एडमिनेस्ट्रेशन की प्रवेश प्रक्रिया देरी से शुरू होना ही मुख्य कारण माना जा रहा है। बीबीए में उस समय एडमिशन प्रोसेज शुरू हुआ, जब  बीकॉम प्रथम वर्ष की प्रवेश प्रक्रिया समाप्त हो चुकी थी। ऐसे में अधिकतर विद्यार्थी बीकॉम में प्रवेश ले चुके थे। वहीं, कई छात्रों ने 12वीं के बाद सीए व प्रोफेशनल कोर्सेज में दाखिले ले लिए। इसके अलावा फैकल्टी की उपलब्धता के प्रति भी छात्र आशंकित थे। इन्हीं कारणों से विद्यार्थियों ने इस कोर्स के प्रति रुझान नहीं दिखाया। जबकि, आयुक्तालय ने यह सुविधा भी दी है कि यदि,  कोइ छात्र बीकॉम में एडमिशन लेने के दौरान फीस जमा करवा देता है और बाद में वह बीबीए में दाखिला लेता है तो उसकी फीस इसमें मर्ज हो जाएगी। इसके बावजूद बीबीए में आवेदन न आने का मुख्य कारण प्रवेश प्रक्रिया में देरी है। </p>
<p><strong>इधर, कम्प्यूटर साइंस में भी नहीं दिखी रुचि</strong><br />सरकार ने व्यवसायिक शिक्षा पर जोर देते हुए हाल ही में गवर्नमेंट आर्ट्स कॉलेज कोटा में कम्प्यूटर साइंस कोर्स शुरू किया। जिसमें भी विद्यार्थियों का रुझान देखने को नहीं मिल रहा। हालात यह हैं, दो बार अंतिम तिथि बढ़ाए जाने के बावजूद सोमवार तक एडमिशन के लिए 18 ही आवेदन आए हैं। आयुक्तालय ने सोमवार को आदेश जारी कर कम्प्यूटर साइंस में प्रवेश की अंतिम तिथि 30 सितम्बर तक बढ़ा दी है। साथ ही प्राचार्यों को कोर्स का प्रचार-प्रसार किए जाने को निर्देशित किया है। </p>
<p>बीबीए में अब तक 9 फॉर्म ही आए हैं। कोर्स के प्रति घटते रुझान का मुख्य कारण प्रवेश प्रक्रिया में देरी हो सकता है। आवेदन की अंतिम तिथि समाप्त हो चुकी है। फिलहाल आयुक्तालय की ओर से अंतिम तिथि बढ़ाए जाने के संबंध में अभी तक कोई निर्देश प्राप्त नहीं हुए हैं। <br /><strong>-डॉ. हितेंद्र कुमार, प्राचार्य राजकीय कॉमर्स कॉलेज</strong></p>
<p>व्यवसायिक शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने महाविद्यालय में कम्प्यूटर साइंस सब्जेक्ट शुरू किया है। अभी तक 18 ही आवेदन आए हैं। आयुक्तालय ने आवेदन की अंतिम तिथि 30 सितम्बर तक बढ़ा दी है। ऐसे में आवेदनों की संख्या में बढ़ोतरी हो सकेगी। <br /><strong>-प्रो. रोशन भारती, प्राचार्य राजकीय कला महाविद्यालय कोटा</strong></p>
<p><strong>क्या कहते हैं छात्र</strong><br />बीकॉम में एडमिशन लेने के बाद आयुक्तालय ने बीबीए में प्रवेश प्रक्रिया शुरू की है। ऐसे में कब तक एडमिशन चलेंगे और कब कक्षाएं शुरू होंगी, पढ़ाने के लिए अभी तक कोई फैकल्टी भी नहीं लगाई गई। एग्जाम से पहले सिलेबस पूरा न होने की आशंका के चलते हमने एडमिशन नहीं लिया। साथ ही कोर्स के व्यवस्थित संचालन को लेकर भी छात्रों में असमंजस की स्थिति है। <br /><strong>-दिव्यांश नागर, हितेंद्र कुमार, बनवारी, छात्र बीकॉम</strong></p>
<p>कम्प्यूटर साइंस कोर्स शुरु तो कर दिया लेकिन कॉलेज में न तो लैब है और न ही कम्प्यूटर टीचर लगाए गए।  वहीं, विद्यार्थी कला प्रथम वर्ष में एडमिशन लेने के बाद कम्प्यूटर साइंस में प्रवेश प्रक्रिया शुरू करने का कोई  औचित्य नहीं रहा। यदि, समय पर एडमिशन प्रासेज शुरू करते तो हम भी एडमिशन ले सकते थे। <br /><strong>-बुद्धिप्रकाश यादव, तपेश नागर, छात्र गवर्नमेंट कॉलेज </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 24 Sep 2024 15:24:46 +0530</pubDate>
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                <title>अंबेडकर अध्ययन केंद्र में होगा सर्टिफिकेट कोर्स : जैन</title>
                                    <description><![CDATA[अंबेडकर अध्ययन केंद्र सर्टिफिकेट व डिप्लोमा डिग्री कोर्स होगा। संपूर्ण केंद्र में उद्देशिका की प्रति लगाई जाएगी। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/certificate-course-will-be-in-ambedkar-study-center/article-51668"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-07/rj23.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। डॉ. अंबेडकर अध्ययन केंद्र राजस्थान विश्वविद्यालय में पौधारोपण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता राजस्थान विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर राजीव जैन ने की। जैन ने बताया कि डॉ. आंबेडकर केंद्र में शोध होगा और इसे आधुनिकीकरण किया जाएगा। यहां म्यूजियम की स्थापना की जाएगी तथा केंद्र आर्थिक संसाधनों के अभाव में नहीं रहेगा। अंबेडकर अध्ययन केंद्र सर्टिफिकेट व डिप्लोमा डिग्री कोर्स होगा। संपूर्ण केंद्र में उद्देशिका की प्रति लगाई जाएगी। </p>
<p>डॉ. आंबेडकर अध्ययन केंद्र की निदेशक डॉ. सुमन मौर्य ने कहा कि इसी दिन डॉ अंबेडकर राष्ट्रीय रक्षा परिषद में वायसराय की कार्यकारिणी के सदस्य निर्वाचित हुए थे। केंद्र में अशोक, कनेर व अन्य फलदार पौधे लगाए गए। राजस्थान विश्वविद्यालय के नियंत्रक एवं वित्त अधिकारी आरसी जाटोलिया ने मुख्य अतिथि और चीफ प्रोक्टर प्रोफेसर पलसानिया तथा यूनिवर्सल हुमन राइट्स काउंसिल के अध्यक्ष डॉ. तरुण कुमार विशिष्ट अतिथि रहे। इसके अलावा रमेश चावला पूर्व निदेशक अंबेडकर अध्ययन केंद्र, कार्यक्रम में गांधी अध्ययन केंद्र के निदेशक डॉ. राजेश कुमार शर्मा, डॉ अंशु सहित अन्य लोग मौजूद रहे। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>शिक्षा जगत</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 13 Jul 2023 13:07:25 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>डिप्लोमा इन जेमोलोजी कोर्स का समापन समारोह </title>
                                    <description><![CDATA[मुख्य संचालन जीएसआई की ग्लोबल हाइट्स जेमोलॉजिस्ट मीनू बृजेश व्यास एवं मैनेजिंग डायरेक्टर रमित कपूर रहे। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/ceremony-of-diploma-in-the-gemology-course/article-49068"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-06/630-400-size-की-कॉपी-(27).png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। जेमोलॉजिकल साइंस इंटरनेशनल की ओर से संचालित डिप्लोमा इन जेमोलोजी कोर्स के प्रथम सत्र के समापन पर राजस्थान चैम्बर ऑफ कॉमर्स के मोहन लाल सुखाडिया सभागार में समापन समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि मिदास सिग्नेचर ज्वैलरी की प्रमुख सुनीता शेखावत थी एवं राजस्थान चैम्बर ऑफ कॉमर्स एण्ड इण्डस्ट्री के अध्यक्ष डॉ. केएल जैन समारोह ने समारोह की अध्यक्षता की। </p>
<p>मुख्य संचालन जीएसआई की ग्लोबल हाइट्स जेमोलॉजिस्ट मीनू बृजेश व्यास एवं मैनेजिंग डायरेक्टर रमित कपूर रहे। मुख्य अतिथि सुनीता शेखावत ने कहा कि जैम एण्ड ज्वैलरी उद्योग के लिए प्रशिक्षित युवाओं की दरकार है और मैं जीएस1 को इसके लिए बधाई देती हूं कि ये डिप्लोमा इन जेमोलोजी कोर्स के माध्यम से इस उद्योग के लिए प्रशिक्षित युवाओं को तैयार कर रही हैं। साथ ही उन्होंने कोर्स पूरा करने वाले विद्यार्थियों की भी उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए बधाई दी। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बिजनेस</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 17 Jun 2023 10:47:19 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>पुलिसकर्मी अब करेंगे साइबर सिक्योरिटी डिप्लोमा कोर्स</title>
                                    <description><![CDATA[ यह सेल राजस्थान पुलिस का डाटा, डिजिटल नेटवर्क व वेबसाइट्स की सुरक्षा और उसकी गोपनीयता को बनाए रखती है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/policemen-will-now-do-cyber-security-diploma-course/article-44408"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-05/x-13.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। प्रदेश में बढ़ रहे साइबर अपराध को रोकने के लिए पुलिस मुख्यालय ने सरदार पटेल विश्वविद्यालय के सहयोग से पुलिसकर्मियों के लिए नौ माह का साइबर सिक्योरिटी डिप्लोमा कोर्स शुरू किया है। पहले बैच में 50 पुलिसकर्मी होंगे। डीजीपी उमेश मिश्रा ने बताया कि इस कोर्स से पुलिसकर्मियों की तकनीकी दक्षता बढ़ेगी और साइबर अपराध पर कंट्रोल होगा। दूरसंचार एवं तकनीकी शाखा को मुख्य सूचना सुरक्षा अधिकारी के रूप में नोडल शाखा बनाया गया है। पुलिस दूरसंचार मुख्यालय में सूचना सुरक्षा सेल बनाई गई  है। यह सेल राजस्थान पुलिस का डाटा, डिजिटल नेटवर्क व वेबसाइट्स की सुरक्षा और उसकी गोपनीयता को बनाए रखती है। इस अवसर पर सरदार पटेल पुलिस विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. आलोक त्रिपाठी ने कहा पुलिस की जरूरत को देखते हुए ही इस कोर्स को तैयार किया गया है। डीजी (साइबर क्राइम) डॉ. रवि प्रकाश मेहरडा ने इस डिप्लोमा कोर्स के संबंध में यूनिवर्सिटी के साथ एमओयू के बारे में  बताया। इस मौके पर सेंटर फोर साइबर सिक्योरिटी के उपनिदेशक डॉ. अर्जुन चौधरी, आईजी शरद कविराज व भूपेन्द्र साहु सहित कई अधिकारी मौजूद रहे।</p>
<p><strong>2 सेमेस्टर में पूरा होगा कोर्स</strong><br />ऑनलाइन व ऑफलाइन मोड में नौ माह के इस पाठ्यक्रम को दो सेमेस्टर होंगे। एक्सपर्ट माह में एक बार पुलिस मुख्यालय में आकर प्रायोगिक कक्षाएं लेने के साथ ही प्रतिभागियों के सवालों का भी समाधान करेंगे।  </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 02 May 2023 10:27:32 +0530</pubDate>
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                <title>कृषि विभाग से लाइसेंस के लिए अब करना होगा सर्टिफिकेट कोर्स</title>
                                    <description><![CDATA[खाद-बीज की दुकान चलाने वालों या दुकान खोलने वालों के लिए कृषि विभाग एक साल का डिप्लोमा सर्टिफिकेट कोर्स चला रहा है। यह कोर्स करने के बाद दुकानदारों को खाद-बीज का लाइसेंस लेने में सहूलियत होने के साथ रोजगार भी मिल सकेगा। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/certificate-course-will-now-have-to-be-done-for-license-from-agriculture-department/article-19977"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-08/krishi-vibhag-se-license-k-liye-certificate..kota-news-22.8.2022.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। युवाओं को रोजगार देने के लिए कृषि विभाग की ओर से चलाया जा रहा एक वर्षीय सर्टिफिकेट कोर्स रोजगार के नए रास्ते खोल रहा है। सर्टिफिकेट कोर्स के बाद युवा अब खाद-बीज की जो दुकानें चला रहे हैं। जो वर्तमान में खाद बीज की दुकानें संचालित कर रहे उनके लिए भी अनिवार्य लाइसेंस लेने के लिए कृषि विभाग ये सुविधा दे रहा है। दरअसल, खाद-बीज की दुकान चलाने वालों या दुकान खोलने वालों के लिए कृषि विभाग एक साल का डिप्लोमा सर्टिफिकेट कोर्स चला रहा है। यह कोर्स करने के बाद दुकानदारों को खाद-बीज का लाइसेंस लेने में सहूलियत होने के साथ रोजगार भी मिल सकेगा। कई युवक खुद की दुकान लगाना चाहते हैं, लेकिन लाइसेंस नहीं होने के कारण वो दुकान नहीं लगा पा रहे थे। ऐसे युवकों और आमजन की मदद करने के लिए एक साल का डिप्लोमा सर्टिफिकेट कोर्स है। इसे करने के बाद एग्रीकल्चर एक्जीक्यूटिव बनकर अपना व्यवसाय शुरू कर सकते हैं। राष्ट्रीय स्तर पर कोर्स का डिजाइन कृषि अनुसंधान अधिकारी डॉ. नरेश कुमार शर्मा ने बताया कि यह सर्टिफिकेट कोर्स 3 वर्ष पहले शुरू किया गया था। कोर्स का डिजाइन राष्ट्रीय स्तर पर हैदराबाद की राष्टÑीय कृषि विस्तार प्रबंध संस्थान (एमएएनएजीई ) ने तैयार किया है। प्रदेश के राज्य कृषि प्रबल संस्थान (एसआईएम) दुगार्पुरा जयपुर से संचालित किया जा रहा है। कोर्स में अधिकतम 40 लोग एडमिशन ले सकते हैं। इसे कोर्स को दोनों ही संस्थान से मान्यता प्राप्त है। इसलिए जरूरी है यह कोर्स शर्मा के मुताबिक, खाद बीज कीटनाशक खरीदने के लिए किसान गांव-कस्बों में इनपुट डीलर्स से सम्पर्क करते हैं, इसलिए इन डीलर्स को तकनीकी ज्ञान होना आवश्यक है। डीलर शिक्षित होंगे तो सही बीज, खाद एवं दवा किसान को बता पाएंगे। ऐसे में किसान अपनी फसल को जरूरत के मुताबिक खाद बीज दे सकेंगे, जिससे फसल को लाभ होगा। अभी तक डीलर्स बिना तकनीकी ज्ञान के ही किसानों को अंदाजे से खाद बीज व दवा दे देते हैं, इससे फसलों को नुकसान पहुंचने की आशंका रहती है। किसान का नुकसान न हो इसलिए डीलर्स को प्रोडक्ट से संबंधित तकनीकि ज्ञान होना आवश्यक है। 40 लोगों का होता है बैच कृषि विभाग के पास जैसे ही 40 आवेदन आने के साथ ही बैच शुरू कर दिया जाता है। हालांकि 30 से 35 आवेदन पर भी क्लासें शुरू कर दी जाती है। इसमें आयु सीमा की कोई बाधा नहीं है। वर्तमान में सर्टिफिकेट कोर्स की 4 कक्षाएं कोटा व बूंदी में संचालित हो रही है। कोटा में नयापुरा स्थित राज्य कृषि प्रबल संस्थान व बूंदी में आत्मा सप्ताह सभागार में चल रही है। अब तक 6 बैच पूर्ण हो चुके हैं, करीब 300 से ज्यादा लोगों को प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार से जोड़ चुके हैं। इनमें अधिकांश लोग खाद-बीज दुकान का लाइसेंस लेकर खुद का व्यवसाय शुरू कर चुके हैं। क्या है यह कोर्स खाद-बीज की दुकान चलाने के लिए लाइसेंस अनिवार्य है, जिसके लिए यह कोर्स आवश्यक है। हैदराबाद की राष्टÑीय कृषि विस्तार प्रबंध संस्थान व राज्य कृषि प्रबल संस्थान दुर्गापुरा जयपुर द्वारा यह संचालित किया जा रहा है। इस पाठ्यक्रम को देशी कोर्स के नाम से जाना जाता है। इसमें आवेदन के लिए 10वीं पास न्यूनत योग्यता है और फीस 2 हजार है। वहीं, आवेदन के लिए आवेदक संबंधित जिले के जिला परिषद के उप निदेशक कृषि विस्तार कार्यालय में सम्पर्क कर सकता है। 48 सप्ताह के कोर्स में प्रेक्टिकल ट्रेनिंग भी डॉ. शर्मा ने बताया कि यह कोर्स 48 सप्ताह का होता है। जिसमें 40 सप्ताह तक थ्योरी क्लासेज और 8 सप्ताह कृषि विशेषज्ञों द्वारा प्रेक्टिकल ट्रेनिंग दी जाती है। कोर्स करने वाले अधिकांश लोग काम-धंधे वाले होते हैं। इसलिए ये प्रतिदिन क्लास में नहीं आ सकते। इसलिए सप्ताह में एक दिन यानी हर रविवार को कक्षाएं लगाई जाती है। ऐसे में एक दिन में दो व्याख्यान आयोजित किए जाते हैं। 300 लोगों को रोजगार से जोड़ा यह कोर्स करीब 3 साल से कोटा-बूंदी में संचालित हो रहा है। यह पहल शुरू करने का मकसद लोगों को रोजगार उपलब्ध कराना और खाद बीज की दुकान लगाने वाले डीलर्स में प्रोडक्ट की तकनीकि समझ विकसित करना है। अब तक 6 बैच निकल चुके हैं और वर्तमान में करीब 4 बैच संचालित हैं। कोर्स का पाठ्यक्रम पूरा होते ही परीक्षाएं करवाई जाती है। जिसमें पास होने के बाद ही प्रशिक्षार्थियों को हैदराबाद संस्थान द्वारा सर्टिफिकेट जारी किया जाता है। इसके बाद परीक्षार्थी खाद-बीज दुकान लगाने के लिए लाइसेंस ले सकता है। अब तक करीब 300 से ज्यादा लोगों को रोजगार से जोड़ चुके हैं। लोगों में इस कोर्स को लेकर रूझान बढ़ा है। कोटा कृषि विभाग ने किसानों को कृषि से संबंधित आ रही समस्याओं को देखते हुए राष्ट्रीय स्तर पर कोर्स शुरू किया है। -डॉ. नरेश कुमार शर्मा, कृषि अनुसंधान अधिकारी, संयुक्त निदेशक कृषि विस्तार कार्यालय कोटा</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 22 Aug 2022 16:44:18 +0530</pubDate>
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