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                <title>agriculture department - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>agriculture department RSS Feed</description>
                
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                <title>कृषि विभाग और आईओआरए ईकोलोजिकल सोल्यूशन के मध्य कार्बन क्रेडिट को लेकर हुई सहमति, पर्यावरण संरक्षण के साथ किसानों को मिलेगा आर्थिक लाभ</title>
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                        <![CDATA[राजस्थान में एग्रीकल्चरल लैंड मैनेजमेंट कार्बन प्रोजेक्ट शुरू करने के लिए कृषि विभाग और आईओआरए ईकोलोजिकल सोल्यूशन के बीच सहमति। कृषि मंत्री किरोड़ी लाल मीणा ने बताया कि बानसुर, महुवा और मालपुरा ब्लॉकों में पायलट प्रोजेक्ट लागू। ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/agreement-reached-between-agriculture-department-and-iora-ecological-solution-regarding/article-145615"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/200-x-60-px)12.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। कृषि विभाग और मैसर्स आईओआरए ईकोलोजिकल सोल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड के मध्य राजस्थान में एग्रीकल्चरल लैंड मैनेजमेंट कार्बन प्रोजेक्ट शुरू करने के लिए सहमति हुई। कृषि मंत्री किरोड़ी लाल मीणा की पहल पर इस प्रकार की गतिविधि अपनाने में राजस्थान देश के अग्रणी राज्यों में से एक है। कृषि मंत्री ने बताया कि किसानों की ओर से कार्बन उत्सर्जन घटाने वाली गतिविधियां जैसे पौधारोपण, सुक्ष्म सिंचाई, फार्म पौण्ड और सोलर पम्प की जाती है। इन गतिविधियों से कृषकों को कार्बन फाइनेंस प्राप्त हो सकता है। राजस्थान के किसानों को इन गतिविधियों पर कार्बन क्रेडिट ट्रेडिंग स्कीम 2023 के तहत सुगमता से कार्बन फाइनेंस उपलब्ध करवाने हेतु राज्य के चयनित ब्लॉकों में कार्बन क्रेडिट को पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू किया जा रहा है। इनमें कोटपुतली-बहरोड़ का बानसुर ब्लॉक, दौसा का महुवा और टोंक का मालपुरा ब्लॉक शामिल है। इसे प्रदेश के तीन ब्लॉकों में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लागू किया गया है, जिसे जल्द ही पूरे राज्य में लागू किया जायेगा। जिससे कृषकों की आय में वृद्धि होगी।</p>
<p>उक्त परियोजना तहत किसानों की ओर से समुचित उवर्रक प्रबन्धन, सिंचाई में दक्षता, मृदा कार्बन संर्वधन, फसल अवशेष प्रबन्धन, वृक्षारोपण, चक्रीय पशु चराई जैसी गतिविधियां अपनाये जाने पर उनको कार्बन उत्सर्जन कमी के आधार पर प्रति हेक्टेयर निर्धारित राशि देय होगी।</p>
<p>कार्बन क्रेडिट प्रणाली जलवायु परिवर्तन को कम करने के लिए बनाया गया एक आर्थिक और पर्यावरणीय तंत्र है। इसका उद्देश्य वातावरण में ग्रीन हाउस गैसों विशेष रूप से कार्बन डाइऑक्साइड के उत्सर्जन को नियंत्रित करना और कम करना है। दुनिया भर में औद्योगिकीकरण, परिवहन और ऊर्जा उत्पादन के कारण बड़ी मात्रा में कार्बन डाईआक्साइड वातावरण में उत्सर्जित होती है। यह गैस ग्लोबल वार्मिग और जलवायु परिवर्तन का एक प्रमुख कारण है।</p>
<p>इसी समस्या के समाधान के लिए अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कार्बन क्रेडिट प्रणाली शुरू की गई है। इसके तहत् कम्पनियों और देशों को एक निश्चित सीमा तक कार्बन उत्सर्जन की अनुमति दी जाती है। यदि कोई संस्था निर्धारित सीमा से कम उत्सर्जन करती है तो उसे कार्बन क्रेडिट मिलते हैं जिन्हें वह अन्य कम्पनियों को बेच सकती है।</p>
<p> </p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 07 Mar 2026 16:34:39 +0530</pubDate>
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                <title>कृषि विभाग में महिला कर्मियों से यौन उत्पीड़न में दो अधिकारी दोषी, गुमनाम पत्र से हुआ मामले का खुलासा </title>
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                        <![CDATA[ प्रदेश के कृषि विभाग में कार्यरत दो अधिकारियों पर महिला कर्मचारियों के साथ यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगे हैं। ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/in-the-agriculture-department-two-officers-convicted-in-the-sexual/article-116671"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-06/news18.png" alt=""></a><br /><p> जयपुर। प्रदेश के कृषि विभाग में कार्यरत दो अधिकारियों पर महिला कर्मचारियों के साथ यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगे हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य के मुख्य सचिव सुधांश पंत ने विभाग से त्वरित कार्रवाई की रिपोर्ट तलब की है। </p>
<p>शिकायत को लेकर 6 महिने बीतने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने पर मुख्य सचिव सुधांश पंत ने कृषि विभाग के अधिकारियों से नाराजगी जताई है। इस मामले का खुलासा कृषि निदेशालय को एक गुमनाम पत्र से हुआ। पत्र में किसी भी पीड़िता का नाम नहीं था।</p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 07 Jun 2025 14:34:59 +0530</pubDate>
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                <title>असर खबर का - कृषि अवशेष जलाए तो अब वसूलेंगे जुर्माना, कृषि विभाग ने शुरू की कवायद</title>
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                        <![CDATA[नवज्योति ने प्रमुखता से किया था समाचार प्रकाशित।
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/effect-of-news---now-a-fine-will-be-levied-if-agricultural-residue-is-burnt--agriculture-department-has-started-the-exercise/article-112716"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-05/rtrer-(3)2.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। कृषि अवशेषों में आग लगाने के मामलों में कृषि विभाग ने सख्ती करने का निर्णय किया है। अब खेतों में कृषि अवशेष जलाने पर सम्बंधित किसान से जुर्माना वसूल किया जाएगा। वहीं विभाग की ओर से इस सम्बंध में किसानों को जागरूक करने के लिए जागरूकता रथ शुरू किया है, जो जिले के गांवों में घूमकर कृषि अवशेषों को नहीं जलाने के सम्बंध में समझाइश करेगा। इस दौरान गांवों में गोष्ठियां भी आयोजित की जाएगी। जिसमें किसानों को फसल अवशेषों के उपयोग के बारे में जानकारी दी जाएगी। गेहूं फसल की कटाई के बाद खेत खाली हो चुके हैं। इसके बाद किसान फसलों अवशेषों को जलाने में जुट जाते हैं, जिससे वायु प्रदूषण की मात्रा भी बढ़ जाती है। अब कृषि विभाग ने इस सम्बंध में प्रभावी कार्रवाई करने का निर्णय किया है। </p>
<p><strong>296 गांवों में घूमेगा जागरूकता रथ</strong><br />कृषि विभाग के अधिकारियों के अनुसार कार्बनिक पदार्थ मृदा का एक महत्वपूर्ण घटक है जो मृदा में सूक्ष्म जीवों के लिए भोजन, नाइट्रोजन एवं सल्फर का प्राकृतिक स्त्रोत एवं मृदा की जल धारण क्षमता में वृद्धि के लिए अत्यन्त महत्वपूर्ण है। फसल अवशेषों को जलाने से यह अमूल्य पदार्थ नष्ट हो जाता है। साथ ही मृदा का तापमान बढ़ने से लाभदायक सूक्ष्म जीव मर जाते हैं एवं फसल अवशेष जलाने से भारी मात्रा में हानिकारक गैस्ंो जैसे मीथेन, कार्बन-डाई-आॅक्साइड, सल्फर डाई आॅक्साइड आदि गैसों का उत्सर्जन होता है। इसलिए फसल अवशेषों के समुचित प्रबंधन एवं फसल अवशेष प्रबंधन के लाभ से कृषकों को जागरूक करने के लिए आईटीसी मिशन सुनहरा कल, संस्था एनसीएचएसई के सहयोग से जागरूकता रथ को रवाना किया गया है। यह रथ अगले 15 दिनों तक जिले के 296 गांव में घूम कर लोगों को फसल अवशेष नहीं जलाने के लिए जागरूक करेगा।</p>
<p><strong>फिर भी नहीं माने तो वसूलेंगे जुर्माना </strong><br />विभागीय अधिकारियों के अनुसार कृषि अवशेषों में आग लगाने के मामलों में अब सरकार ने सम्बंधित किसानों पर जुर्माना राशि दोगुना कर दी है। अब यदि किसान फसल अवशेष जलाते हुए पाए जाते हैं तो प्रदुषण की रोकथाम और नियंत्रण अधिनियम के तहत फसल अवशेषों को जलाने पर भूमि स्वामित्व के अनुसार 5 हजार रुपए (एक एकड से कम) पर, 10 हजार रुपए, (दो से पांच एकड) पर एवं 30 हजार रुपए (पांच एकड से अधिक) पर जुर्माना वसूला जाएगा। इसके लिए गांवों में टीमें भेजकर मॉनिटरिंग करवाई जाएगी। इस दौरान कहीं पर भी फसल अवशेष जलाने की तस्दीक होने पर कार्रवाई की जाएगी। </p>
<p><strong>नवज्योति ने प्रमुखता से उठाया था मामला</strong><br />कृषि अवशेषों में आग लगाने के मामलों में यूं तो राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (एनजीटी) ने संबंधित किसानों पर सख्ती से कार्रवाई के निर्देश जारी कर रखे हैं, लेकिन स्थानीय स्तर पर इन निर्देशों की पालना नहीं हो रही है। दैनिक नवज्योति में 30 अप्रैल को प्रमुखता से समाचार प्रकाशित कर बताया था कि खेतों की सफाई के नाम पर आए दिन किसान खेतों की नौलाइयों (फसल अवशेष) में आग लगा रहे है। जिससे दमकलकर्मियों के साथ पुलिस एवं प्रशासन की भी मशक्कत बढ़ रही है। पूर्व में ऐसे मामलों में प्रशासन ने काफी सख्ती दिखाई थी, अब कार्रवाई ठंडे बस्ते में है। ऐसे में किसानों द्वारा धड़ल्ले से नौलाइयां जलाई जा रही है। नौलाइयों का धुआं स्वच्छ वायु को भी प्रदूषित कर रहा है। इस पर रोक लगाने के लिए कोई प्रभावी कदम नहीं उठाए जा रहे हैं।</p>
<p>अब खेतों में कृषि अवशेष जलाने पर सम्बंधित किसान से जुर्माना वसूल किया जाएगा। वहीं विभाग की ओर से इस सम्बंध में किसानों को जागरूक करने के लिए जागरूकता रथ शुरू किया है, जो जिले के गांवों में घूमकर कृषि अवशेषों को नहीं जलाने के सम्बंध में समझाइश करेगा।<br /><strong>- आतिश कुमार शर्मा, संयुक्त निदेशक, कृषि विभाग कोटा</strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 02 May 2025 15:44:06 +0530</pubDate>
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                <title>डीएपी की भारी किल्लत से धरतीपुत्र बेहाल, नैनो बन सकती है सारथी</title>
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                        <![CDATA[ नैनो डीएपी का इस्तेमाल कर पा सकते हैं अच्छी पैदावार]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/dhartiputras-are-suffering-due-to-severe-shortage-of-dap--nano-can-become-the-charioteer/article-95335"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-11/27rtrer-(4)6.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। हाड़ौती में डीएपी की किल्लत विकराल हो गई है। धरतीपुत्र डीएपी  के लिए मारे-मारे फिर रहे हंै। रबी सीजन की फसलों गेहूं, चना, मसूर, सरसों की बुवाई होने का समय निकलता जा रहा है लेकिन डीएपी की कमी होने से काश्तकार परेशान हैं। इसकी वजह डीएपी की मांग के अनुरूप आपूर्ति नहीं होना है। अंतरराष्टÑीय बाजार में डीएपी की कीमतें लगातार बढ़ती जा रही है। जिससे विदेश से डीएपी को आयात कम किया जा रहा है। कोटा संभाग में रबी की फसल के लिए इस सीजन में 1 लाख 15 हजार मीट्रिक टन की डिमांड है। लेकिन डिमांड की अपेक्षा 16 नवंबर तक महज 17 हजार 545 मीट्रिक टन डीएपी की आपूर्ति हो पाई है। कृषि विभाग के एक्सपर्ट की मानें तो किसानों को लिक्विड नैनो डीएपी का उर्वरक का इस्तेमाल कर अपनी रबी की फसल में उपयोग करनी चाहिए जिससे कम खर्च में अच्छी पैदावार हो सकती है। नैनो डीएपी पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध भी है। </p>
<p><strong>डीएपी की किल्लत से बुवाई पर पड़ रहा असर</strong><br />खरीफ फसलों के समय लंबे समय तक बारिश जारी रहने से सभी फसलें बरसाती पानी की वजह से चौपट हो गई। अब रबी फसल की बुवाई का समय आया तो क्षेत्रीय किसानों को रबी फसलों की बुवाई के लिए डीएपी के लिए इधर-उधर भटकना पड़ रहा है। धरतीपुत्रों की समस्या दिनोंदिन बढ़ती जा रही है। डीएपी खाद की मारामारी हर वर्ष होती आ रही है।  लेकिन इस साल कुछ ज्यादा ही हो रही है। जिससे फसलों की बुवाई में भी लेटलतीफी हो जाती है। समय पर खाद उपलब्ध नहीं होने से फसलों की बुवाई देरी से करने को मजबूर है। इसका असर धरतीपुत्रों की पैदावार पर पड़ता है। उन दिनों धरतीपुत्रों के चेहरों पर मायूसी झलकती है। </p>
<p><strong>डिमांड 1 लाख 15 हजार मीट्रिक  टन, आपूर्ति महज 17 हजार 545 मीट्रिक  टन</strong><br />कोटा संभाग में रबी की फसल के लिए इस सीजन में 1 लाख 15 हजार मीट्रिक टन की डिमांड है। लेकिन डिमांड की अपेक्षा 16 नवंबर तक महज 17 हजार 545 मीट्रिक टन डीएपी की आपूर्ति हो पाई है। इसी प्रकार यूरिया और एसएसपी की भी डिमांग के अनुरूप सप्लाई नहीं हो पा रही है। कोटा संभाग में रबी की फसल के लिए यूरिया की कुल 3 लाख 52 हजार मीट्रिक टन की डिमांड है। लेकिन यूरिया की सप्लाई महज 69 हजार 625 मीट्रिक टन ही हुई हो पाई। इसी प्रकार एसएसपी की डिमांड 1 लाख 22 हजार मीट्रिक टन है लेकिन 37 हजार 659 मीट्रिक टन की ही आपूर्ति हो पाई है। वर्तमान में डीएपी का एक कट्टे की कीमत 2400-2500 तक की है। इसके लिए किसान से 1350 लिए जाते है जबकि सरकार इस पर 1094 सब सीटी डीएपी कंपनी को देती है। लेकिन अंतरराष्टÑीय बाजार में डीएपी की कीमत बढ़ गई है। ऐसे में निर्माता कंपनियों ने भाव भी बढ़ा दिए है लेकिन सरकार डीएपी कंपनियों को सबसिडी1094 ही दे रही है। इस वजह से निर्माता कंपनिया डीएपी का आयात कम कर रही है। </p>
<p><strong>इनका कहना है </strong><br />भारत में 80 से 90 प्रतिशत डीएपी सऊदी अरब और मोरक्को से आती है। अंतरराष्टÑीय बाजार में वर्तमान में डीएपी की कीमतें बढ़ गई है। डीएपी निर्माता कंपनियां भारत में कम मात्रा में आयात कर रही है। जिस वजह से भारत में कम मात्रा में डीएपी आ रही है। इस कारण से भारत में डीएपी की मारामारी हो रही है। डीएपी की समस्या का समाधान के लिए विकल्प अपनाए जा सकते है। जिसमें पहला विकल्प नैनो डीएपी है। इसमें बीज को उपचारित करके बुवाई कर सकते है। इसका काम डीएपी के समान है। 3 एमएल प्रति किलो बीज को उपचारित करके बुवाई कर सकते है। दूसरा विकल्प तीन बैग एसएसपी और एक बैग यूरिया काम में लिया जा सकता है। जिसमें डीएपी की तुलना में ज्यादा पौषक तत्व मिलते है। साथ ही कैल्शियम और सल्फर भी पौधों को मिलता है। जो कि डीएपी में नहीं मिलता है। तीसरा विकल्प एनपीके गेड्स इसमें 20-20-13, 12-32-16, 16-16-16 ये ग्रेड बाजार में उपलब्ध है। डीएपी में केवल नाइट्रोजन व फास्फोरस मिलता है जबकि एनपीके ग्रेड्स में नाइट्रोजन, फास्फोरस के साथ पोटास तीनों मिलते है। जो मिट्टी के लिए  बहुत फायदेमंद है। इससे फसल का उत्पादन भी बढ़ता है। रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढती है। मिट्टी कम पानी भी नुकसान नहीं होता। तेज हवा और आंधी से बचने की भी क्षमता बढ़ती है। <br /><strong>-डॉ. नरेश कुमार शर्मा, सहायक निदेशक, कृषि विभाग, कोटा</strong></p>
<p>यह सही है कि इस बार डीएसपी की अधिक किल्लत आ रही है। इसका प्रमुख कारण डिमांड की अपेक्षा डीएपी की आपूर्ति कम होती है। ऐसे में कृषि विभाग को चाहिए कि कृषि विभाग को पूरे क्षेत्र का सर्वे करवा कर डीएपी की अतिरिक्त मंगवाना चाहिए। किसानों का डीएपी पर ज्यादा विश्वास रहता है। काश्तकार नैनो डीएपी लेते नहीं है।<br /><strong>-लोकेश मीणा, प्रोफेसर,कृषि महाविद्यालय, कोटा</strong></p>
<p><strong>किसानों की पीड़ा</strong><br /> रबी की बुवाई के समय डीएपी खाद के लिए इस वर्ष मारामारी आगामी वर्ष ओर अधिक मारामारी बढ़ती जा रही है। किसानों को नैनो डीएपी के बारे में जानकारी का अभाव है। ऐसे में कृषि विभाग को समय-समय पर गांव-ढाणी में नैनो डीएपी का उपयोग करने के बारे में जागरूक करने की जरूरत है। <br /><strong>-नीरूशंकर शर्मा, किसान निवासी बांसी </strong></p>
<p>डीएपी खाद के लिए ज्यो-ज्यो समय गुजरता जा रहा है। वैसे-ही मांग बढती जा रही है। संबंधित विभाग की कमी है या सरकार से जिलेभर में मांग अनुरूप डीएपी खाद की आपूर्ति ही नही होती है। काश्तकारों का डीएपी पर अधिक भरोसा है। ऐसे में किसानों को जब तक कृषि विभाग नैनो डीएपी के बारे में प्रचार-प्रसार नहीं किया जाएगा तब तक कैसे उपयोग करेंगे।  अभी किसानों को नैनो डीएपी के बारे में पूरी जानकारी नहीं है। <br /><strong>-मुकुट बिहारी दाधीच, किसान निवासी दुगारी </strong></p>
<p>केन्द्र सरकार की नीतियां ही मुख्यरूप से जिम्मेदार है। इस सरकार द्वारा पिछले सालों में खाद पर सब्सिडी में भारी कटौती करने के कारण विदेशों से खाद के आयात पर शिकंजा कस दिया है। इससे खाद की कमी आ गई है। अत: कालाबाजारी पर सख़्ती से रोक लगाकर सभी गरीब व मध्यम किसानों को सहकारी समितियों के माध्यम से डीएपी उपलब्ध करवाना चाहिए।                    <br /><strong>  -दुलीचंद बोरदा, राज्य उपाध्यक्ष, अखिल भारतीय किसान सभा</strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 19 Nov 2024 15:01:32 +0530</pubDate>
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                <title>मौसम पलटा: बयाना में बारिश के साथ ओलों की बौछार</title>
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                        <![CDATA[जानकारों की माने तो रबी की फसल के दौरान मुख्य रूप से बोई जाने वाली सरसों की फसल तापपमान की इस गिरावट से प्रभावित होगी। ]]>
                    </description>
                
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bharatpur/weather-changed-in-earnest-with-rain-and-hailstorm/article-93529"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-10/630400-sizee-(2)3.png" alt=""></a><br /><p>बयाना। भरतपुर जिले के बयाना उपखण्ड के गढीबाजना क्षेत्र में रविवार को अचानक मौसम ने पलटा खाया और तेज हवा के साथ चना, मटर के आकर के ओले गिरे। वहीं खेतों में बारिश का पानी भर जाने से किसानों के चेहरे पर चिंता की लकीर पड़ गई हैं। जानकारों की माने तो रबी की फसल के दौरान मुख्य रूप से बोई जाने वाली सरसों की फसल तापपमान की इस गिरावट से प्रभावित होगी। </p>
<p>जिन खेतों में सरसों का अंकुरण हो चुका है, उन खेतों में इस बारिश से नुकसान हो गया है। लेकिन दो दिन पहले बोई गई फसल में अंकुरण में भी परेशानी आने की संभावना बन गई है।</p>
<p>कृषि विभाग के अधिकारियों ने कहा कि जहां फसल में अंकुरण हो चुका है वहां खेतो में खरपतवार की मात्रा बढ़ेगी, निराई जल्द करनी पड़ेगी। किसानो को बुबाई के बाद अंकुरण नही होने वाले खेतों में दोबारा बुवाई करने की जरूरत पड़ सकती है।</p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>भरतपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 21 Oct 2024 13:18:59 +0530</pubDate>
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                <title>असर खबर का - कोटा पहुंची 1494 मीट्रिक टन डीएपी की रैक</title>
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                        <![CDATA[समाचार प्रकाशित होने के बाद कृषि विभाग के अधिकारियों ने डीएपी की आपूर्ति बढ़ाने के लिए प्रयास तेज कर दिए थे। 
]]>
                    </description>
                
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/effect-of-news---rack-of-1494-metric-tons-of-dap-reached-kota/article-93332"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-10/4427rtrer-(3)14.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। जिले में डीएपी खाद की किल्लत झेल रहे किसानों को अब राहत मिलने लगी है। गुरुवार को दो कम्पनियों की लगभग 1494 मीट्रिक टन डीएपी खाद कोटा पहुंची। किसानों की डिमांड को देखते हुए कृषि विभाग ने डीएपी का वितरण शुरू करवा दिया है। कोटा जिले सहित संभाग में रबी फसलों की बुवाई का कार्य गति पकड़ने लगा है। बुवाई के दौरान किसानों को डीएपी की जरूरत होती है। इसलिए इसकी मांग बढ़ गई है। मांग की तुलना में पूर्व में डीएपी उपलब्ध नहीं हो पा रहा था। इस कारण किसानों को परेशानी हो रही थी। अब डीएपी की आपूर्ति होने लगी है। इससे किसानों को राहत मिलने की उम्मीद जगी है।   </p>
<p><strong>लोकसभा अध्यक्ष ने दिए थे निर्देश</strong><br />कुछ दिनों से लगातार सामने आ रही खाद की कमी को लेकर जनप्रतिनिधि व किसान प्रतिनिधियों ने लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला से वार्ता कर डीएपी की समस्या से अवगत करवाया था। इसके बाद बिरला के निर्देश पर  आईपीएल कम्पनी की 800 मीट्रिक टन और एक अन्य कम्पनी की 694 मीट्रिक टन डीएपी खाद कोटा पहुंची। बिरला ने केंद्रीय उर्वरक एवं रसायन मंत्रालय के उच्च अधिकारियों को अतिरिक्त डीएपी की आपूर्ति के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कृषि विभाग अधिकारियों को कहा कि वे डीएपी आपूर्ति की मॉनिटरिंग करें और साथ ही स्थानीय उत्पादकों के माध्यमों से मार्केटिंग सोसायटी को पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करवाएं। </p>
<p><strong>नवज्योति ने उठाया था मामला</strong><br />जिले में किसानों द्वारा डीएपी खाद के लिए भागदौड़ करने के सम्बंध में दैनिक नवज्योति के 13 अक्टूबर के अंक में प्रमुखता से समाचार प्रकाशित किया गया था। इसमें बताया था कि रबी फसलों की बुवाई का दौर शुरू हो गया है। इस कारण डीएपी खाद की मांग में तेजी आ गई है। मांग के अनुरूप खाद की उपलब्धता कम होने के कारण किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। वहीं किसानों द्वारा निर्धारित मात्रा से अधिक खाद खरीदने से किल्लत हो रही है। जिले में डीएपी के लिए हो रही मशक्कत को देखते हुए कृषि विभाग ने डीएपी खाद लेने की मात्रा निर्धारित कर दी है। समाचार प्रकाशित होने के बाद कृषि विभाग के अधिकारियों ने डीएपी की आपूर्ति बढ़ाने के लिए प्रयास तेज कर दिए थे। </p>
<p><strong>रैक आते ही वितरण प्रक्रिया शुरू</strong><br />कृषि मुख्यालय के सहायक निदेशक राजवीर सिंह ने बताया कि रैक के कोटा पहुंचते ही विभाग की ओर से वितरण की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। विभाग की ओर से निरन्तर मॉनिटरिंग की जा रही है। अगले कुछ दिनों में आपूर्ति में इजाफा होने से स्थिति में भी सुधार होगा। विभाग द्वारा किसानों से डीएपी- यूरिया का अनावश्यक स्टॉक नहीं करने के साथ दलहन और तिलहन में डीएपी के विकल्प के तौर पर एसएसपी और यूरिया का उपयोग करने का आग्रह किया, इससे उत्पादन अच्छा होगा साथ ही जमीन की उर्वरक क्षमता भी प्रभावित नहीं होगी।</p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 18 Oct 2024 13:10:18 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>RPSC ने जारी की सहायक सांख्यिकी अधिकारी प्रतियोगी परीक्षा-2024 की तिथि</title>
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                        <![CDATA[आयोग के मुख्य परीक्षा नियंत्रक आशुतोष गुप्ता ने बताया कि  परीक्षा के प्रवेश-पत्र आयोग की वेबसाइट एवं एसएसओ पोर्टल पर 22 अगस्त को जारी किए जाएंगे। ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/rpsc-released-the-date-of-assistant-statistics-officer-competitive-exam-2024/article-87900"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-10/rpsc2.jpg" alt=""></a><br /><p>अजमेर। राजस्थान लोक सेवा आयोग ने सहायक सांख्यिकी अधिकारी (कृषि विभाग) प्रतियोगी परीक्षा-2024 का आयोजन 25 अगस्त को सुबह 11 से डेढ़ बजे तक अजमेर व जयपुर जिला मुख्यालय पर किया जाएगा। परीक्षा में ओएमआर उत्तर पत्रक के पांचवे विकल्प को भरने के लिए 10 मिनट का अतिरिक्त समय दिया जाएगा।</p>
<p>आयोग के मुख्य परीक्षा नियंत्रक आशुतोष गुप्ता ने बताया कि अभ्यर्थी परीक्षा के लिए आवंटित जिले की जानकारी 18 अगस्त से एसएसओ पोर्टल पर लॉगिन कर प्राप्त कर सकेंगे। परीक्षा के प्रवेश-पत्र आयोग की वेबसाइट एवं एसएसओ पोर्टल पर 22 अगस्त को जारी किए जाएंगे। प्रवेश-पत्र आयोग की वेबसाइट पर उपलब्ध एडमिट कार्ड लिंक के माध्यम से आवेदन-पत्र क्रमांक व जन्म दिनांक प्रविष्ठ कर डाउनलोड किए जा सकेंगे। इसके अतिरिक्त एसएसओ पोर्टल पर लॉगिन कर सिटीजन ऐप्स में उपलब्ध रिक्रूटमेंट पोर्टल लिंक से भी प्रवेश-पत्रों को डाउनलोड किया जा सकता है।</p>
<p>परीक्षा केन्द्र पर किसी भी परीक्षार्थी को परीक्षा प्रारंभ होने के 60 मिनट पूर्व तक ही प्रवेश दिया जाएगा। इसके पश्चात् किसी भी परीक्षार्थी को परीक्षा केंद्र पर प्रवेश नहीं दिया जाएगा। अतः अभ्यर्थी परीक्षा के दिन परीक्षा प्रारंभ होने के लिए नियत समय से पर्याप्त समय पूर्व परीक्षा केंद्रों पर आवश्यक रूप से उपस्थित हो जाएं ताकि सुरक्षा जांच एवं पहचान का कार्य समय पर पूर्ण हो सके। देरी से आने पर तलाशी में समय लगने के कारण परीक्षा में शामिल होने से वंचित हो सकते हैं।</p>
<p>अभ्यर्थियों को पहचान के लिए परीक्षा केंद्र पर मूल आधार कार्ड (रंगीन प्रिंट) लेकर उपस्थित होना होगा। यदि मूल आधार कार्ड पर फोटो पुरानी अथवा अस्पष्ट है तो अन्य मूल फोटो युक्त पहचान-पत्र जैसे मतदाता पहचान-पत्र, पासपोर्ट, ड्राइविंग लाइसेंस जिसमें रंगीन एवं नवीनतम स्पष्ट फोटो हो, लेकर परीक्षा केंद्र पर उपस्थित होवें। इसके साथ ही अभ्यर्थी प्रवेश-पत्र पर भी नवीनतम रंगीन फोटो ही चस्पा करना सुनिश्चित करें। स्पष्ट मूल फोटो युक्त पहचान-पत्र के अभाव में परीक्षा केंद्र में प्रवेश नहीं दिया जाएगा। अभ्यर्थी प्रवेश-पत्र के साथ जारी आवश्यक अनुदेशों का अवलोकन अवश्य कर लेवें।</p>
<p>आयोग की ओर से आयोजित परीक्षा में सम्मिलित होने वाले अभ्यर्थी किसी दलाल, मीडिएटर, समाजकंटक या अपराधी के बहकावे में न आएं। यदि कोई परीक्षा में पास कराने के नाम पर रिश्वत की मांग या अन्य कोई प्रलोभन व झांसा देता है तो प्रमाण सहित इस संबंध में जांच एजेंसी एवं आयोग कंट्रोल रूम नंबर 0145-2635200, 2635212 एवं 2635255 पर सूचित करें। परीक्षा में अनुचित साधन अपनाये जाने एवं अनुचित कृत्यों में संलिप्त होने पर राजस्थान सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम के अध्युपाय) अधिनियम, 2022 के तहत आजीवन कारावास, 10 करोड़ रुपए तक के जुर्माने से दण्डित एवं चल अचल संपत्ति कुर्क कर जब्त की जा सकती है।</p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 16 Aug 2024 19:26:39 +0530</pubDate>
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                <title>कृषि विभाग द्वारा खुर्रा में किया रात्रि किसान संगोष्ठी का आयोजन</title>
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                        <![CDATA[आगामी खरीफ सीजन को मध्यनजर रखते हुए कृषि विभाग द्वारा किसानों को जागरूकता के लिए रात्रि किसान संगोष्ठियों का आयोजन किया जा रहा है।]]>
                    </description>
                
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/dausa/agriculture-department-organized-night-farmers-seminar-in-khura/article-81392"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-06/uu11rer2.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। आगामी खरीफ सीजन को मध्यनजर रखते हुए कृषि विभाग द्वारा किसानों को जागरूकता के लिए रात्रि किसान संगोष्ठियों का आयोजन किया जा रहा है।</p>
<p>कृषि अधिकारी दौसा अशोक कुमार मीना ने बताया की बुधवार को खुर्रा,चौण्डियावास, रामगढ़ पचवारा, कल्लावास  में कृषि विभाग के द्वारा रात्रि किसान संगोष्ठी का आयोजन किया गया। रात्रि किसान संगोष्ठी में  किसानों को गर्मी की गहरी जुताई, सफेद लट, फड़का नियंत्रण सहित खरीफ फसलों की उन्नत कृषि विधियों,खरीफ फसलों में खरपतवार नियंत्रण व कृषि  एवं उद्यान विभाग द्वारा संचालित अनुदान की विभिन्न योजनाओं कांटेदार तारबंदी,  फार्म पौंड  निर्माण सिंचाई पाइप लाइन, कृषि यंत्र, पॉलीहाउस, शेडनेट हाउस,  सोलर संयंत्र, नवीन फलदार बगीचा स्थापना, प्याज हाउस, सामुदायिक जल स्रोत, बूंद-बूंद सिंचाई पद्धति, लो टनल, मल्चिंग सहित विभिन्न योजनाओं की विस्तार से जानकारी दी गई।  </p>
<p>इच्छुक एवं पात्र किसान कृषि एवं उद्यान विभाग की योजनाओं पर अनुदान के लिए राज किसान साथी पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। किसानों को सफेद लट  नियंत्रण के लिए आगामी खरीफ सीजन की प्रथम मानसूनी बरसात के समय भंवरा (बीटल्स)  नियंत्रण की जानकारी दी गई यदि किसानों द्वारा सफेद लट के भंवरे(बीटल्स)  को नष्ट कर दिया जाए तो फसलों को सफेद लटके प्रकोप से बचाया जा सकता है। इसके लिए सभी किसानों को जानकारी दी गई एवं आगामी समय में सफेद लट के  भंवरे(बीटल्स)  का नियंत्रण करने का प्लान तैयार किया गया है । विभाग  द्वारा किसानों को फेरोमेन ट्रैप , ल्यूर  आदि उपलब्ध करवाए जाएंगे। </p>
<p>कृषि अधिकारी दौसा धर्म सिंह गुर्जर ने किसानों को फॉर्म पौंड योजना की विस्तार से जानकारी दी गई एवं वर्षा जल का संचय कर फसलों में सिंचाई  हेतु उपयोग करने की जानकारी दी गई। फॉर्म पौंड  निर्माण करवा कर यदि वर्षा जल को संचय कर लिया जाए तो फसलों में आसानी से सिंचाई की जा सकती है एवं पानी की समस्या का समाधान किया जा सकता है। रात्रि किसान गोष्ठी में सहायक कृषि अधिकारी मंडावरी राहुल मीना, कृषि पर्यवेक्षक श्रवण लाल जाट, चरत लाल मीना व क्षेत्र के किसान मौजूद रहे।</p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>दौसा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 13 Jun 2024 12:41:23 +0530</pubDate>
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                <title>ऑनलाइन का दावा हवा हवाई, खेत की मिट्टी सोना उगलेगी या हवा, नहीं जान पा रहे</title>
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                        <![CDATA[कोटा जिले की बात करें तो यहां पर केवल 5 हजार किसान ही इससे लाभान्वित हो पाए हैं।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/online-claim-is-like-wind--not-able-to-know-whether-the-soil-of-the-field-will-spew-out-gold-or-the-wind/article-72576"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-03/online-ka-dawa-hawa-hawai,-khet-ki-mitti-sona-uglegi-ya-hawa,-nhi-jaan-pa-rhe...kota-news-13-03-2024.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। कृषि विभाग की ओर से मिट्टी की सेहत घर बैठे ऑनलाइन पता लगाने के दावों की हवा निकल गई है। हालत यह है कि प्रदेश में सिर्फ 48 हजार किसान ही अब तक मिट्टी की सेहत के बारे में ऑनलाइन जानकारी ले पाए हैं। खेतों में मिट्टी कितनी उपजाऊ है, इसकी जानकारी किसानों को ऑनलाइन देने का दावा कृषि विभाग कर रहा है। लेकिन प्रदेश भर के सिर्फ 48 हजार किसानों को ही इसका फायदा मिला है। वहीं कोटा जिले की बात करें तो यहां पर केवल 5 हजार किसान ही इससे लाभान्वित हो पाए हैं। </p>
<p><strong>सैम्पल अधिक, प्रयोगशालाओं की क्षमता कम</strong><br />सरकार के निर्देश पर इस साल मार्च माह के अंत तक तीन लाख सैम्पल लेने का लक्ष्य दिया गया था। इसके बाद प्रदेश में 2 लाख से अधिक सैम्पल ले लिए गए, लेकिन प्रदेश में स्थित प्रयोगशालाओं की क्षमता कम होने से अभी तक केवल 48 हजार सैम्पल की जांच रिपोर्ट ही ऑनलाइन हो पाई है। कोटा जिले में केवल दो प्रयोगशालाएं हैं। यही स्थिति प्रदेश के अन्य जिलों की है। इस कारण अधिकांश सैम्पल की जांच रिपोर्ट ऑनलाइन नहीं हो पाई है। इससे किसानों को सैम्पल की जांच कराने का फायदा नहीं मिल पा रहा है।</p>
<p><strong>यह होती है प्रक्रिया</strong><br />कृषि पर्यवेक्षकों की ओर से किसानों का पंजीयन किया जाता है। इसके बाद उसे सॉयल हैल्थ कार्ड ऐप पर ऑनलाइन किया जाना है। प्रयोगशालाओं में प्राप्त मिट्टी के नमूनों की जांच कर सॉयल हैल्थ कार्ड पोर्टल पर जांच परिणामों को डालना है। यह कार्ड कृषि पर्यवेक्षक किसानों को उपलब्ध कराते हैं। जिनको कार्ड नहीं मिला, वे सॉयल हैल्थ कार्ड पोर्टल पर लॉग इन कर मोबाइल नम्बर दर्ज कर कार्ड की जानकारी ले सकते हैं।</p>
<p><strong>इनकी हो रही जांच</strong><br />कृषि विभाग की ओर से जो जांच की जा रही है उसमें मिट्टी की ईसी (विद्युत चालकता), पीएच, जैविक कार्बन, फास्फोरस, पोटाश, सूक्ष्म पोषक तत्वों में जस्ता, लोहा, तांबा, मैगनीज, सल्फर आदि शामिल हैं।  वर्ष 2015 में सॉयल हैल्थ कार्ड योजना शुरू हुई थी। इस योजना के तहत किसानों के खेतों से मिट्टी के नमूने लेकर उसकी पोषकता का पता लगाना और उसे ऑनलाइन करना था। योजना के तहत इस साल मार्च अंत तक तीन लाख किसानों के खेतों से मिट्टी के सैंपल लेकर उसे ऑनलाइन करने का लक्ष्य दिया गया हैं। </p>
<p><strong>पोर्टल पर ऐसे मिलेगी जानकारी</strong><br />सरकार ने इस वित्तीय वर्ष में तीन लाख किसानों के खेतों से मिट्टी के नमूने लेकर ऑनलाइन करने का लक्ष्य दिया है। जबकि हकीकत यह है कि गिने-चुने किसानों को ही घर बैठे मिट्टी के उपजाऊपन के बारे में जानकारी मिल पा रही है। जिन किसानों के सॉयल हैल्थ कार्ड ऑनलाइन हो चुके। वे सॉयल हैल्थ कार्ड पोर्टल पर जाकर फार्मर कॉर्नर में मोबाइल नंबर डालकर कार्ड खोल सकते हैं। मिट्टी कितनी उपजाऊ है, उसमें कितने पोषक तत्व हैं और कौन-कौन से पोषक तत्व डालकर मिट्टी को उपजाऊ बनाया जा सकता है। </p>
<p><strong>इनका कहना</strong><br />रबी सीजन में सरसों की बुवाई से पहले कृषि विभाग ने उसके खेत से मिट्टी की जांच के लिए सैम्पल लिया था। अभी तक उसकी जांच रिपोर्ट ऑनलाइन नहीं हो पाई है। अब तो सरसों की फसल भी खेत में तैयार हो चुकी है। जांच रिपोर्ट समय पर मिलने पर ही फायदा हो सकता है।<br /><strong>- त्रिलोक कुमार, किसान </strong></p>
<p>खेतों से मिट्टी के सैंपल लेकर उसका डाटा ऑनलाइन करवाया जा रहा है। प्रयास है जल्द से जल्द सभी का डाटा ऑनलाइन हो और किसानों को कार्ड बनने से फायदा मिले। अब तक करीब पांच हजार नमूनों की जांच ऑन लाइन की गई है।<br /><strong>- रमेश चंडक, संयुक्त निदेशक, कृषि विभाग कोटा</strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 13 Mar 2024 17:22:53 +0530</pubDate>
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                <title>पराली जलाने पर दिखाई सख्ती, वसूलेंगे जुर्माना</title>
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                        <![CDATA[कोटा जिले में नवम्बर माह में पांच किसानों के खिलाफ पराली जलाने की शिकायत मिली है। ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/strictness-shown-on-stubble-burning--fine-will-be-charged/article-63471"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-12/gan-(5)1.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। वायु प्रदूषण के बढ़ते स्तर को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर कोटा शहर में अब कृषि विभाग ने पराली जलाने की घटनाओं पर रोक लगाने के लिए सख्ती शुरू कर दी है। विभाग ने नवम्बर माह में जिले के पांच किसानों को पराली जलाने की शिकायत के आधार पर नोटिस जारी किया है। नोटिस का जवाब संतोषजनक नहीं मिलने पर इन किसानों से निर्धारित जुर्माना वसूल किया जाएगा।</p>
<p><strong>पराली से तैयार हो सकते हैं उत्पाद </strong><br />- पराली से कम्पोस्ट खाद बनाई जा सकती है।<br />- अच्छी गुणवत्ता का क्राफ्ट पेपर तैयार करने के लिए पेपर मिल में पराली दे सकते हैं। <br />- मशरूम व स्ट्रॉबेरी की खेती में भी भूसे का प्रयोग होता है।<br />- रोटावेटर व रिवरसिल्ल हाइड्रोलिक फ्लो मशीन पराली को टुकड़ों में कर मिट्टी में मिला देती है जो उर्वरक का काम करती है।<br />- पराली को गाय भैंस के रहने के स्थान पर डाल सकते हैं। बाद में वह भी खाद का काम करेगी।<br />- पराली वेस्ट रिसाइकिल से जैविक खाद, जैविक ईंट, आर्गेनिक डिस्पोजेबल पतल व दोना, कोयला व तारकोल बनाया जा सकता है।</p>
<p><strong>सुप्रीम कोर्ट ने जारी किए निर्देश</strong><br />सर्दी का असर बढ़ने और कोहरा छाने के कारण देश के अधिकांश जिले वायु प्रदूषण की चपेट में आ रहे हैं।  वायु प्रदूषण बढ़ने का एक कारण खेतों में पराली जलाना भी सामने आया है। ऐसे में केन्द्र व राज्य सरकारों की तरफ से बार-बार किसानों से अपील की जा रही है कि पराली में आग नहीं लगाएं, फिर भी किसानों द्वारा पराली में आग लगाई जा रही है। जिससे काफी प्रदूषण फैल रहा है। दिल्ली सहित राजस्थान के अधिकांश जिलों में बढ़ते प्रदूषण पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्ती दिखाई है। सुप्रीम कोर्ट ने गत 7 नवम्बर को पंजाब, हरियाणा, उत्तरप्रदेश एवं राजस्थान सरकार को तत्काल पराली जलाने की घटनाओं पर रोक लगाने का निर्देश दिया है। </p>
<p><strong>तीन सदस्यीय कमेटी गठित</strong><br />जयपुर के उच्चाधिकारियों ने पराली जलाने पर रोक के लिए सभी जिलों में तीन सदस्यीय कमेटी गठित कर रखी है। जिसमें कृषि पर्यवेक्षक, पटवारी व ग्राम विकास अधिकारी शामिल है। यह कमेटी किसानों से समझाइश करती है। फिर भी किसान नहीं मानता है तो नोटिस जारी किया जाता है। इसके बाद जुर्माना वसूली के लिए उपखण्ड अधिकारी को लिखा जाता है।</p>
<p><strong>तीन साल में मात्र 16 मामले</strong><br />कोटा सम्भाग में पिछले तीन साल में पराली में आग लगाने की घटनाएं तो ज्यादा हुई है, लेकिन विभाग के पास रिकोर्डेड केवल 16 घटनाएं ही है। साल 2021 में 4 घटनाओं पर 10 हजार, साल 2022 में 7 घटनाओं पर 20 हजार रुपए किसानों से जुर्माना वसूला गया। इस साल नवम्बर माह में 5 घटनाएं सामने आई है जिनकी शिकायत उपखण्ड अधिकारी से की गई है। वहां से जुर्माना निर्धारित किया जाएगा।</p>
<p><strong>निर्देश के बाद हरकत में आया कृषि विभाग</strong><br />सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद जिले का कृषि विभाग भी हरकत में आ गया।  कृषि विभाग के अधिकारियों के अनुसार पराली जलाने की ज्यादा समस्या राजस्थान के श्रीगंगानगर व हनुमानगढ़ और हाड़ौती में कोटा, बारां, बूंदी व झालावाड़ जिलों में है। यहां पर अधिकांश किसान फसल उत्पादन का कार्य पूरा होने के बाद पराली को जलाते हैं। कोटा जिले में नवम्बर माह में पांच किसानों के खिलाफ पराली जलाने की शिकायत मिली है। इनकों नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है। जवाब संतोषजनक नहीं मिलने पर इनसे जुर्माना वसूल किया जाएगा।</p>
<p><strong>इनका कहना है </strong><br />पराली जलाने पर सरकार ने जुर्माना तय कर रखा है। 2 एकड़ से कम भूमि पर प्रति घटना 2 हजार, 2 से 5 एकड़ पर 5 हजार व 5 एकड़ से अधिक भूमि पर पराली में आग लगाने पर 15 हजार रुपए जुर्माना तय कर रखा है।<br /><strong>- खेमराज शर्मा, अतिरिक्त निदेशक कृषि विभाग कोटा</strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 05 Dec 2023 19:04:23 +0530</pubDate>
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                <title>नकली कीटनाशक चट कर रहा धरतीपुत्रों की मेहनत</title>
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                        <![CDATA[फसल को बचाने के लिए कीटनाशक का छिड़काव ही किसानों की मेहनत को चट कर रहा है।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/the-hard-work-of-the-sons-of-the-soil-is-being-licked-by-fake-pesticides/article-53792"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-08/nakli-keetnashak-chat-kr-rha-dhartiputro-ki-mehnat...kota-news-05-08-2023.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। जिले में नकली कीटनाशक की बिक्री पर अब कृषि विभाग ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। जिले में कीटनाशक दुकानों की जांच की जा रही है। इस दौरान नमूने लेकर जांच के लिए लैब में भेजे जा रहे हैं। शुक्रवार को कैथून क्षेत्र में दो कीटनाशक विक्रेता फर्म का लाइसेंस निलम्बित किया गया। बाजारों में नकली कीटनाशक की बिक्री होने से किसानों को नुकसान उठाना पड़ रहा है। इस समय खरीफ फसलों में सिंचाई का दौर चल रहा है। ऐसे फसलों को खरपतवार और कीटों से बचाने के लिए किसान फसलों पर कीटनाशक दवा का छिड़काव कर रहे हैं। फसल को बचाने के लिए कीटनाशक का छिड़काव ही किसानों की मेहनत को चट कर रहा है।</p>
<p><strong>नकली कीटनाशक की पहचान मुश्किल</strong><br />किसानों ने बताया कि इस समय दुकानों पर विभिन्न कम्पनियों के कीटनाशक   मिल रहे हैं। ऐसे में किसान असली और नकली कीटनाशक की पहचान नहीं कर पाते हैं। नकली कीटनाशकों की पैकेजिंग बिलकुल असली कीटनाशक की तरह होती है। किसानों को नकली या एक्सपायरी डेट की दवा होने की समझ तब आती है जब ऐसे कीटनाशकों के छिड़काव के बाद असर प्रभावहीन होता है या फिर फसल को भारी नुकसान हो जाता है।</p>
<p><strong>किसानों को नुकसान</strong><br />जानकारी के अनुसार किसानों के आमतौर पर अनभिज्ञ होने का फायदा कृषि से सम्बंधित सामान बेचने वाले दुकानदार जमकर उठाते हैं। क्षेत्र के किसान उपभोक्ता कानून की जानकारी के अभाव में कीटनाशकों की खरीद के समय दुकानदार से रसीद नहीं लेते हैं। इस कारण जानकारी होने के बावजूद कोई दस्तावेज नहीं होने से कृषि विभाग इन दुकानदारों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं कर पाता है। वहीं दूसरी ओर इन कीटनाशकों के उपयोग के कारण  फसलों के उत्पादन में भारी कमी आ जाती है। इस कारण किसानों को दोहरा नुकसान उठाना पड़ता है।</p>
<p><strong>गड़बड़ी मिली तो की कार्रवाई </strong><br />कृषि विभाग की ओर से शुक्रवार को कैथून क्षेत्र में कीटनाशक विक्रेता फर्मो के उत्पादों की जांच का अभियान चलाया गया। यहां पर दो फर्मो पर कीटनाशक सामग्री से सम्बंधित पर्याप्त दस्तावेज नहीं मिले। वहीं अन्य कई गड़बड़ी मिलने के कारण दोनों फर्मो के लाइसेंस निलम्बित कर दिए गए। विभागीय अधिकारियों ने बताया कि शिकायत मिलने पर टीम बनाकर जांच की जा रही है। वहीं नमूने लेकर जांच के लिए लैब में भेजे जा रहे हैं।</p>
<p><strong>अब सघन जांच अभियान चलाया</strong><br />कृषि विभाग के अधिकारियों के अनुसार जिले में कई स्थानों पर खरपतवारनाशक  सामग्री से फसलों में नुकसान होने की शिकायतें मिली थी। इसके बाद से जिलेभर में कीटनाशक विक्रेतों फर्मो के यहां जांच अभियान चलाया जा रहा है। पहले उन स्थानों पर जांच की जा रही है जहां से शिकायत मिली है। वहां पर टीम भेजकर मौका मुआयना किया जाता है। इसके बाद सम्बंधित फर्म के यहां जाकर कीटनाशक का नमूना लेकर लैब में भेजा जाता है। रिपोर्ट में गड़बड़ी मिलने पर दोषी फर्म का लाइसेंस निलम्बित करने की कार्रवाई की जाती है।</p>
<p>नकली कीटनाशकों के कारण किसानों को काफी नुकसान उठाना पड़ता है।  फसल तैयार करने के लिए काफी मेहनत होती हैं। ऐसे में नकली कीटनाशक से पूरी फसल खराब हो जाती है। इसलिए कीटनाशक फर्मो के पास मौजूद उत्पादों की नियमित रूप से जांच होनी चाहिए।<br /><strong>- नेमीचंद नागर, किसान भीमपुरा</strong></p>
<p>जिले में कीटनाशक फर्मों के यहां लगातार जांच की जा रही है। नमूने लेकर जांच के लिए लैब में भेज रहे हैं। किसानों की शिकायत मिलते ही तुरन्त कार्रवाई की जाती है। शुक्रवार को भी कैथून क्षेत्र में गड़बड़ी मिलने पर दो फर्मो के लाइसेंस निलम्बित किए गए हैं। जांच करने की कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।<br /><strong>- खेमराज शर्मा, संयुक्त निदेशक कृषि विभाग</strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 05 Aug 2023 17:54:17 +0530</pubDate>
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                <title>कृषि विभाग से लाइसेंस के लिए अब करना होगा सर्टिफिकेट कोर्स</title>
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                        <![CDATA[खाद-बीज की दुकान चलाने वालों या दुकान खोलने वालों के लिए कृषि विभाग एक साल का डिप्लोमा सर्टिफिकेट कोर्स चला रहा है। यह कोर्स करने के बाद दुकानदारों को खाद-बीज का लाइसेंस लेने में सहूलियत होने के साथ रोजगार भी मिल सकेगा। ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/certificate-course-will-now-have-to-be-done-for-license-from-agriculture-department/article-19977"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-08/krishi-vibhag-se-license-k-liye-certificate..kota-news-22.8.2022.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। युवाओं को रोजगार देने के लिए कृषि विभाग की ओर से चलाया जा रहा एक वर्षीय सर्टिफिकेट कोर्स रोजगार के नए रास्ते खोल रहा है। सर्टिफिकेट कोर्स के बाद युवा अब खाद-बीज की जो दुकानें चला रहे हैं। जो वर्तमान में खाद बीज की दुकानें संचालित कर रहे उनके लिए भी अनिवार्य लाइसेंस लेने के लिए कृषि विभाग ये सुविधा दे रहा है। दरअसल, खाद-बीज की दुकान चलाने वालों या दुकान खोलने वालों के लिए कृषि विभाग एक साल का डिप्लोमा सर्टिफिकेट कोर्स चला रहा है। यह कोर्स करने के बाद दुकानदारों को खाद-बीज का लाइसेंस लेने में सहूलियत होने के साथ रोजगार भी मिल सकेगा। कई युवक खुद की दुकान लगाना चाहते हैं, लेकिन लाइसेंस नहीं होने के कारण वो दुकान नहीं लगा पा रहे थे। ऐसे युवकों और आमजन की मदद करने के लिए एक साल का डिप्लोमा सर्टिफिकेट कोर्स है। इसे करने के बाद एग्रीकल्चर एक्जीक्यूटिव बनकर अपना व्यवसाय शुरू कर सकते हैं। राष्ट्रीय स्तर पर कोर्स का डिजाइन कृषि अनुसंधान अधिकारी डॉ. नरेश कुमार शर्मा ने बताया कि यह सर्टिफिकेट कोर्स 3 वर्ष पहले शुरू किया गया था। कोर्स का डिजाइन राष्ट्रीय स्तर पर हैदराबाद की राष्टÑीय कृषि विस्तार प्रबंध संस्थान (एमएएनएजीई ) ने तैयार किया है। प्रदेश के राज्य कृषि प्रबल संस्थान (एसआईएम) दुगार्पुरा जयपुर से संचालित किया जा रहा है। कोर्स में अधिकतम 40 लोग एडमिशन ले सकते हैं। इसे कोर्स को दोनों ही संस्थान से मान्यता प्राप्त है। इसलिए जरूरी है यह कोर्स शर्मा के मुताबिक, खाद बीज कीटनाशक खरीदने के लिए किसान गांव-कस्बों में इनपुट डीलर्स से सम्पर्क करते हैं, इसलिए इन डीलर्स को तकनीकी ज्ञान होना आवश्यक है। डीलर शिक्षित होंगे तो सही बीज, खाद एवं दवा किसान को बता पाएंगे। ऐसे में किसान अपनी फसल को जरूरत के मुताबिक खाद बीज दे सकेंगे, जिससे फसल को लाभ होगा। अभी तक डीलर्स बिना तकनीकी ज्ञान के ही किसानों को अंदाजे से खाद बीज व दवा दे देते हैं, इससे फसलों को नुकसान पहुंचने की आशंका रहती है। किसान का नुकसान न हो इसलिए डीलर्स को प्रोडक्ट से संबंधित तकनीकि ज्ञान होना आवश्यक है। 40 लोगों का होता है बैच कृषि विभाग के पास जैसे ही 40 आवेदन आने के साथ ही बैच शुरू कर दिया जाता है। हालांकि 30 से 35 आवेदन पर भी क्लासें शुरू कर दी जाती है। इसमें आयु सीमा की कोई बाधा नहीं है। वर्तमान में सर्टिफिकेट कोर्स की 4 कक्षाएं कोटा व बूंदी में संचालित हो रही है। कोटा में नयापुरा स्थित राज्य कृषि प्रबल संस्थान व बूंदी में आत्मा सप्ताह सभागार में चल रही है। अब तक 6 बैच पूर्ण हो चुके हैं, करीब 300 से ज्यादा लोगों को प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार से जोड़ चुके हैं। इनमें अधिकांश लोग खाद-बीज दुकान का लाइसेंस लेकर खुद का व्यवसाय शुरू कर चुके हैं। क्या है यह कोर्स खाद-बीज की दुकान चलाने के लिए लाइसेंस अनिवार्य है, जिसके लिए यह कोर्स आवश्यक है। हैदराबाद की राष्टÑीय कृषि विस्तार प्रबंध संस्थान व राज्य कृषि प्रबल संस्थान दुर्गापुरा जयपुर द्वारा यह संचालित किया जा रहा है। इस पाठ्यक्रम को देशी कोर्स के नाम से जाना जाता है। इसमें आवेदन के लिए 10वीं पास न्यूनत योग्यता है और फीस 2 हजार है। वहीं, आवेदन के लिए आवेदक संबंधित जिले के जिला परिषद के उप निदेशक कृषि विस्तार कार्यालय में सम्पर्क कर सकता है। 48 सप्ताह के कोर्स में प्रेक्टिकल ट्रेनिंग भी डॉ. शर्मा ने बताया कि यह कोर्स 48 सप्ताह का होता है। जिसमें 40 सप्ताह तक थ्योरी क्लासेज और 8 सप्ताह कृषि विशेषज्ञों द्वारा प्रेक्टिकल ट्रेनिंग दी जाती है। कोर्स करने वाले अधिकांश लोग काम-धंधे वाले होते हैं। इसलिए ये प्रतिदिन क्लास में नहीं आ सकते। इसलिए सप्ताह में एक दिन यानी हर रविवार को कक्षाएं लगाई जाती है। ऐसे में एक दिन में दो व्याख्यान आयोजित किए जाते हैं। 300 लोगों को रोजगार से जोड़ा यह कोर्स करीब 3 साल से कोटा-बूंदी में संचालित हो रहा है। यह पहल शुरू करने का मकसद लोगों को रोजगार उपलब्ध कराना और खाद बीज की दुकान लगाने वाले डीलर्स में प्रोडक्ट की तकनीकि समझ विकसित करना है। अब तक 6 बैच निकल चुके हैं और वर्तमान में करीब 4 बैच संचालित हैं। कोर्स का पाठ्यक्रम पूरा होते ही परीक्षाएं करवाई जाती है। जिसमें पास होने के बाद ही प्रशिक्षार्थियों को हैदराबाद संस्थान द्वारा सर्टिफिकेट जारी किया जाता है। इसके बाद परीक्षार्थी खाद-बीज दुकान लगाने के लिए लाइसेंस ले सकता है। अब तक करीब 300 से ज्यादा लोगों को रोजगार से जोड़ चुके हैं। लोगों में इस कोर्स को लेकर रूझान बढ़ा है। कोटा कृषि विभाग ने किसानों को कृषि से संबंधित आ रही समस्याओं को देखते हुए राष्ट्रीय स्तर पर कोर्स शुरू किया है। -डॉ. नरेश कुमार शर्मा, कृषि अनुसंधान अधिकारी, संयुक्त निदेशक कृषि विस्तार कार्यालय कोटा</p>]]>
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                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 22 Aug 2022 16:44:18 +0530</pubDate>
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