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                <title>food security plan - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>food security plan RSS Feed</description>
                
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                <title>खाद्य सुरक्षा: 66 हजार कर्मचारियों से 80 करोड़ रुपए की वसूली</title>
                                    <description><![CDATA[अभियान के बाद विभाग डीएसओ के माध्यम से अभी तक योजना से जुड़े सरकारी कर्मचारियों को नोटिस देकर वसूली की कार्रवाई करेगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/food-security-recovery-of-rs-80-crore-from-66-thousand/article-89139"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-10/food-grain-copy.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। खाद्य सुरक्षा योजना में गरीब का एक रुपए किलो गेंहू डकारने वाले हजारों कर्मचारियों को खाद्य विभाग डीएसओ के माध्यम से नोटिस जारी कर अब तक उठाए गेंहू की राशि 27 रुपए प्रति किलो के हिसाब से वसूलेगा। आरजीएचएस में जनाधार लिंक के बाद अब तक 66 हजार कर्मचारियों से 80 करोड़ रुपए की वसूली की जा चुकी है। शेष कर्मचारियों को अगले महीने डीएसओ के माध्यम से नोटिस देने की तैयारी तेज कर दी है। </p>
<p>खाद्य मंत्री सुमित गोदारा ने हाल ही में सरकारी कर्मचारियों सहित सक्षम लोगों से अपील की थी कि वे राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा गिवअप अभियान के तहत योजना में स्वेच्छा से अपना नाम वापस ले सकते हैं, जिससे गरीबों को उनके हिस्से का अन्न मिल सके। गिवअप करने वाले के खिलाफ किसी भी तरह की कार्रवाई नहीं की जाएगी। अभियान के बाद विभाग डीएसओ के माध्यम से अभी तक योजना से जुड़े सरकारी कर्मचारियों को नोटिस देकर वसूली की कार्रवाई करेगा। खाद्य विभाग के अफसरों का कहना है कि पिछले दो साल से सरकारी कर्मचारियों को गेंहू देने पर रोक लगा रखी है। गेंहू नहीं मिल पाने के कारण बाद में उनका नाम पोर्टल से हटाने की कार्रवाई की जा रही है।</p>
<p><strong>अपात्र होने के बावजूद उठाया गेंहू, वसूली से बचने की जुगत</strong><br />जब योजना 2013 में शुरू हुई तो योजना से जुड़ने के लिए लाखों आवेदन आए। इसमें बड़ी संख्या में सरकारी कर्मचारी और अधिकारी भी शामिल थे। चुनावी समय नजदीक होने के कारण राजनीतिक दबाव में पर्याप्त जांच नहीं होने से बडी संख्या में नाम जुड़ गए। गहलोत सरकार में मंत्री रहे रमेशचन्द्र मीणा ने सबसे पहले सरकारी कर्मचारियों से वसूली की कार्रवाई शुरू की। इसके बाद सरकार बदलने के बाद प्रक्रिया सुस्त पड़ गई। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद केन्द्र सरकार के आदेशों की पालना में अब यह कार्रवाई फिर से शुरू की जाएगी। कुछ कर्मचारी अभी भी वसूली से बचने की जुगत में लगे हुए हैं।</p>
<p><strong>वेतन से भी हो सकती है वसूली</strong><br />उन सरकारी कर्मचारियों से वसूली होगी, जो अपात्र होने के बावजूद गेंहू उठा रहे हैं। कई जगह अभी भी गरीबों को मिलने वाले गेंहू को सरकारी कर्मचारी और अधिकारी फर्जी तरीके से उठा लेते हैं। इनसे वसूली के लिए संबंधित एसडीएम राशि जमा कराने का नोटिस करता है। राशि जमा नहीं कराने पर वेतन से भी वसूली करने का प्रावधान है।</p>
<p>वहीं, हाल ही में खाद्य मंत्री सुमित गोदारा ने चौपहिया वाहन मालिक और आयकर दाताओं का खाद्य सुरक्षा सूची से नाम हटाने का फैसला लिया। इसके लिए परिवहन विभाग और आयकर विभाग से ब्यौरा मांगा है। परिवहन विभाग से ट्रेक्टर और कॉमर्शियल श्रेणी छोड़कर सभी चौपहिया वाहन मालिकों के आधार कार्ड का ब्यौरा मांगा है तथा आयकर विभाग से इन्कम टैक्स देने वालों की सूची मांगी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 31 Aug 2024 11:01:41 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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            <item>
                <title> गड़बड़झाले का हथियार बनी पोस मशीन</title>
                                    <description><![CDATA[इसके तहत प्रत्येक राशन डीलर को पोस मशीन उपलब्ध कराई गई थी। इसी के माध्यम से राशन वितरण की व्यवस्था की गई थी। प्रारम्भ में इस व्यवस्था के परिणाम सही आए और राशन के गड़बड़झाले पर लगाम लग गई। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/pos-machine-became-the-weapon-of-mess/article-25062"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-10/gadhabadajhaale-ka-hathiyar-bani-pos-machine...kota-news-01-10-2022.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। राजस्थान में खाद्य सुरक्षा योजना के तहत राशन की 25 हजार दुकानों के मार्फत गेहूं वितरण में पारदर्शिता के लिए पोस मशीनें लगाई गई हैं। अब इन मशीनों की पारदर्शिता पर सवाल उठने शुरू हुए हैं। इस सम्बंध में लाभार्थी लगातार शिकायतें कर रहे हैं। गेहूं लेने के बाद मशीन से गेहूं की मात्रा की पर्ची नहीं निकलने, किसी जगह मशीन का डिस्प्ले खराब होने जैसी 9 हजार से ज्यादा शिकायतें प्रदेश में खाद्य विभाग को मिली हैं। कोटा जिले में भी इस तरह की 149 शिकायतें मिली है। ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि राशन डीलरों द्वारा पोस मशीन में तकनीकी खामी बताकर गेहूं में गड़बड़झाले का प्रयास किया जा रहा है। रसद विभाग की ओर से पूर्व में राशन वितरण की प्रभावी निगरानी के लिए कोई व्यवस्था नहीं थी। ऐसे में राशन डीलरों द्वारा आए दिन गेहूं सहित अन्य राशन सामग्री को हजम करने के मामले सामने आते रहते थे। इस पर राज्य सरकार के निर्देश पर रसद विभाग में भी राशन वितरण पर निगरानी के लिए आॅनलाइन सिस्टम शुरू किया गया है। इसके तहत प्रत्येक राशन डीलर को पोस मशीन उपलब्ध कराई गई थी। इसी के माध्यम से राशन वितरण की व्यवस्था की गई थी। प्रारम्भ में इस व्यवस्था के परिणाम सही आए और राशन के गड़बड़झाले पर लगाम लग गई। </p>
<p><strong>फिर लगातार बढ़ने लगी शिकायतें</strong><br />तीन साल पहले पोस मशीनों में खराबी के मामले सामनॉे आने लगे। उस समय मशीन खराब होने पर राशन कार्ड के माध्यम से ही राशन वितरण के निर्देश दिए गए। बाद में पोस मशीनों में खराबी मामले ज्यादा आने लगे। लाभार्थियों ने रसद विभाग में शिकायतें कर बताया कि राशन डीलरों द्वारा पोस मशीन खराब बता दी जाती है। इससे गेहूं कम मिल रहा है। इस तरह की प्रदेश में लगातर बढ़ने लगी। तीन साल की अवधि में ही पूरे प्रदेश में 9 हजार शिकायतें विभाग को मिली है।</p>
<p><strong>24 घंटे में करा लेता है ठीक</strong><br />खाद्य विभाग के सूत्रों के अनुसार राशन की दुकानों पर इस तरह की शिकायतों की संख्या बढ़ भी रही है। गेहूं वितरण पूरी तरह से आॅनलाइन सिस्टम पर है, लेकिन जब पोस मशीन में इस तरह की खराबी आती है तो डीलर को आसानी से गेहूं गायब करने का मौका मिल जाता है। हालांकि यह भी सही है कि मशीन को डीलर 24 घंटे के भीतर अनिवार्य रूप से ठीक भी करा लेता है।</p>
<p><strong>कहां कितनी शिकायतें</strong><br />कोटा          149<br />अलवर      336<br />बांसवाड़ा     828<br />बारां         320 <br />बाड़मेर         1442 <br />भरतपुर         336 <br />भीलवाड़ा     364 <br />बीकानेर     348 <br />बूंदी         145 <br />चित्तौड़गढ़     192 <br />चूरू          462 <br />दौसा          225<br />धौलपुर      287 <br />डूंगरपुर      28 <br />हनुमानगढ़      49<br />जयपुर प्रथम        67<br />जयपुर-द्वितीय       2<br />जैसलमेर           123<br />जालौर       158<br />झालावाड़      166<br />झुंझुनूं          217<br />जोधपुर      244<br />करौली             0<br />नागौर               430<br />पाली          222<br />प्रतापगढ़       256<br />राजसमंद      196<br />समाधोपुर     62<br />सीकर                  227<br />टोंक          223<br />उदयपुर     296<br />अजमेर     781</p>
<p><strong>बाड़मेर अव्वल, करौली में एक भी नहीं</strong><br />राशन की दुकान पर पोस मशीन से पर्ची जारी नहीं होने, डिस्प्ले आउट होने जैसी सबसे ज्यादा शिकायतें बाड़मेर में सामने आई हैं। यहां तीन वर्ष में 1442 शिकायतें सामने आ चुकी हैं। वहीं दूसरे नंबर पर बांसवाड़ा जिला है, जहां की 828 शिकायतें मिली हैं। वहीं करौली जिले में एक भी शिकायत विभाग को प्राप्त नहीं हुई है। कोटा संभाग की बात करें तो यहांं कोटा जिले में 149, बारां में 320, बूंदी में 145 और झालावाड़ में 166 शिकायतें मिली है। </p>
<p>जिले में खाद्य सुरक्षा योजना के तहत गेहूं का वितरण पूरी पारदर्शिता के साथ किया जा रहा है। पोस मशीनों के संबध में खराबी की शिकायतें मिलती हैं तो डीलर को दूसरी दुकान से मशीन लेकर गेहूं बांटना अनिवार्य है। जिससे डीलर  गेहूं वितरण में किसी तरह की अनियमितता नहीं कर सके।<br /><strong>- प्रवीण कुमार, प्रवर्तन निरीक्षक, रसद विभाग</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 01 Oct 2022 14:40:35 +0530</pubDate>
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                <title>सरकारी जांच प्रक्रिया के इंतजार में दब गई उम्मीद</title>
                                    <description><![CDATA[ खाद्य सुरक्षा योजना में नाम जुड़वाने के लिए जिले के करीब डेढ़ लाख से अधिक लाभार्थी तीन माह से इंतजार कर रहे हैं। नए लाभार्थियों ने ईमित्रों के माध्यम से नाम जुड़वाने के लिए आॅनलाइन आवेदन किया था। अब तक आवेदनों फॉर्मो की जांच नहीं हो पाई है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/waiting-for-government-investigation-process-buried-hope/article-19983"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-08/uit-ki-zameen-par-atikraman..kota-news-22.8.20221.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। खाद्य सुरक्षा योजना में नाम जुड़वाने के लिए जिले के करीब डेढ़ लाख से अधिक लाभार्थी तीन माह से इंतजार कर रहे हैं। नए लाभार्थियों ने ईमित्रों के माध्यम से नाम जुड़वाने के लिए आॅनलाइन आवेदन किया था। अब तक आवेदनों फॉर्मो की जांच नहीं हो पाई है। इस कारण लाभार्थी सरकारी राशन के लिए तरस रहे हैं। कोटा जिले में काफी संख्या में लोग पात्र होने के बावजूद खाद्य सुरक्षा योजना के लाभ वंचित हो रहे थे। ऐसे में लोगों को योजना का लाभ देने के लिए करीब दो साल बाद अप्रेल 2022 में खाद्य सुरक्षा का पोर्टल खोला गया था। इसकी अवधि केवल 12 दिन ही होने से हजारों लोग जानकारी के अभाव में पोर्टल के माध्यम से आवेदन नहीं कर पाए थे। इसके बाद 28 मई तक पोर्टल खोलकर आॅनलाइन आवेदन लिए गए। इस अवधि में कोटा जिले के लगभग डेढ़ लाख लोगों ने आॅनलाइन आवेदन किए थे। आवेदन फार्म जमा हुए तीन माह का समय बीत चुका है, लेकिन अभी तक इनकी जांच नहीं हो पाई है। इस कारण लाभार्थी परिवारों को अभी तक सरकारी राशन नहीं मिल पाया है। रोजाना लगा रहे चक्कर आॅनलाइन आवेदन जमा करवाने के बाद प्राथी ईमित्र केन्द्रों पर रोजाना चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन उन्हें कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिल पा रहा है। कई लोग रसद विभाग कार्यालय में जानकारी करने पहुंचते हैं। इसके बावजूद नाम जुड़ने के सम्बंध में कोई जवाब नहीं मिल रहा है। इससे पात्र लोगों को बाजार से महंगी दर पर राशन सामग्री खरीदनी पड़ रही है। इस सम्बंध में ईमित्र संचालकों का कहना है कि उनके पास खाद्य सुरक्षा योजना में नाम जोड़ने की कोई जानकारी रसद विभाग से नहीं मिल रही है। अभी तक आवेदन फॉर्मो की जांच नहीं हो पाई है। तो इनका नहीं बनेगा कार्ड नए आवेदनों में यदि किसी परिवार की वार्षिक आय एक लाख रुपए से ज्यादा है तो वह खाद्य सुरक्षा योजना में चयन के लिए अपात्र होगा। सरकार ने अपात्रता के लिए छह श्रेणियां निर्धारित की है। इसमें आवेदक परिवार का कोई भी सदस्य आयकरदाता होने, परिवार का सदस्य सरकारी, अर्द्धसरकारी, स्वायत्तशासी संस्था में नियमित कर्मचारी होने, एक लाख रुपए से ज्यादा पेंशन, चौपहिया वाहन, नगर परिषद क्षेत्र में एक हजार वर्ग फीट और नगर पालिका क्षेत्र में 1500 वर्ग फीट पक्का आवासीय या व्यावसायिक परिसर और ग्रामीण क्षेत्र में 2000 वर्ग फीट से बड़ा मकान होने पर अपात्र माना जाएगा। यह है अधिनियम राज्य में राष्टÑीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम 2 अक्टूबर 2013 से लागू किया गया था। पात्र परिवारों का चयन राज्य सरकार करती है। राज्य में राष्टÑीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत अधिसूचित मापदंडों के अनुरूप पात्र परिवारों का चयन 32 समावेशन श्रेणियों और 7 निष्कासन श्रेणियों के मापंदडों के आधार पर अपील प्रक्रिया से किया जाता है। राज्य सरकार के आवेदन फॉर्मो की जांच के सम्बंध में अभी तक कोई आदेश नहीं मिला है। आदेश मिलने के बाद फॉर्मो की जांच का काम शुरू कर दिया जाएगा। - नीलकमल, प्रवर्तन निरीक्षक रसद विभाग</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 22 Aug 2022 16:45:52 +0530</pubDate>
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