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                <title>no facilities - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>कोटा उत्तर वार्ड 48- खाली प्लाटों में भरा गंदा पानी, सुविधा घर नहीं </title>
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                        <![CDATA[घरों के आगे से गुजरते बिजली के तार दुर्घटना को न्यौता दे रहे हैं। ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/kota-north-ward-48--vacant-plots-filled-with-dirty-water--no-facilities/article-120522"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-07/news26.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। नगर निगम कोटा उत्तर के वार्ड 48 में समस्याएं तो है लेकिन वहां के वार्ड पार्षद समस्याओं का समाधान नहीं करवा पा रहें है। उनका कहना है कि मेरे साथ राजनीतिक भेदभाव किया जा रहा है। जिसका नुकसान वार्डवासियों को भुगतना पड़ रहा है। वार्ड में खुला नाला व कचरा बन रहा परेशानी का सबब। वार्डवासियों का कहना है कि वार्ड में सामुदायिक भवन नहीं होने से काफी परेशानी होती है। वार्ड में खाली प्लॉटों में बारिश का गंदा पानी भरा रहता है। जिससे बीमा्रियों के फैलने का खतरा रहता है। वार्ड में आने वाले क्षेत्रों में सफाई की व्यवस्था नहीं होने से लोगों को हर समय बीमारी का खतरा बना रहता है। नाले खुले पड़े हुए हैं। सड़को पर गढ्ढों के होने से रात के समय कई वाहनधारी चोटिल हो जाते हैं। सीवरेज का काम करने के बाद सड़कों का आधा अधूरा  निर्माण होने से वाहन चालकों को परेशानी हो रही है। वार्ड में घरों के आगे से गुजरते बिजली के तार दुर्घटना को न्यौता दे रहे हैं। वही वार्ड में जगह - जगह स्पीड ब्रेकर परेशानी का कारण बने हुए हैं। वार्ड में महिला स्नान घर नहीं होने से भी काभी समस्या होती है।</p>
<p><strong>वार्ड का क्षेत्र</strong><br />सरस्वती कॉलोनी, बालाजी टाउन, विधाता कॉलोनी, शमशान, घूमचक्कर, गणेश चौक, कुम्हारों का मोहल्ला से सरकारी स्कूल का क्षेत्र।</p>
<p><strong>नहीं होती वार्ड में सफाई</strong><br />समय-समय पर सफाई नहीं होने के कारण नालियां जाम हो गई है। सफाई कर्मचारियों के नहीं आने से हमें खुद को ही घर के आगे से सफाई करनी पड़ रही है। यहां तक की नालियों की सफाई भी हमें ही करना पड़ रही है।<br /><strong>- शुभम मेहरा, वार्डवासी </strong></p>
<p><strong>झूलते तारों से खतरा</strong><br />बिजली के तार खम्भों से झूलतें हुए घरों के सहारे लटक रहे है जिससे कभी भी घटना घट सकती है। इस समस्या के लिए कई बार पार्षद को बोला है। लेकिन समस्या का समाधान नही हो सका। वार्ड के विकास के लिए अब किससे गुहार लगाए।<br /><strong>- लाखन कुमार, वार्डवासी</strong></p>
<p><strong>सामुदायिक भवन बने</strong><br />लोगों के होने वाले छोटे छोटे कार्यक्रमों को करने के लिए भी जगह नही है। कार्यक्रम सड़को पर करने पड़ते है, जिससे काभी परेशानियोंं का सामना करना पड़ता है। वार्ड में सामुदायिक भवन का होना बहुत आवशयक है।<br /><strong>- धीरज सिंह मीणा, वार्डवासी</strong></p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />राजनीतिक भेदभाव के कारण मेरी सुनवाई नही हो पा रही है। मै भाजपा से पार्षद हु, और नगर निगम में भी भाजपा को बोर्ड होने के बाद भी वहा के अधिकारियों को मेरा काम नही करने के निर्देश दिए हुए है। आप ही बताए मंै क्या करूं।<br /><strong>- रामगोपाल लोधा, वार्ड पार्षद</strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 15 Jul 2025 14:21:10 +0530</pubDate>
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                <title>खेलों में प्रोत्साहन ना  ही सुविधाएं, कैसे लाएं मेडल</title>
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                        <![CDATA[कोटा में कई खेलों के खिलाड़ी ऐसे हैं जिन्हें राज्य स्तर और राष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतने के बाद भी कई तरह की सुविधाओं के लिए मोहताज हैं।]]>
                    </description>
                
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/no-incentives-in-sports--no-facilities--how-to-bring-medals/article-91985"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-09/4427rtrer-(3)8.png" alt=""></a><br /><p>कोटा । खिलाड़ी अपने शहर राज्य ओर देश का नाम रोशन करने के लिए जी जान लगा देते हैं। एक एक प्रतियोगिता जीतने के लिए ये खिलाड़ी दिन रात एक कर देते हैं। लेकिन इन खिलाड़ियों को इनकी मेहनत का ना बराबर सम्मान मिलता है और ना प्रोत्साहन। कोटा में कई खेलों के खिलाड़ी ऐसे हैं जिन्हें राज्य स्तर और राष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतने के बाद भी कई तरह की सुविधाओं के लिए मोहताज हैं। इसके साथ ही इन खिलाड़ियों को मिलने वाली प्रोत्साहन राशि भी पिछले 6 साल से नहीं दी गई है।</p>
<p><strong>ट्रैक एथेलेटिक्स के खिलाड़ियों के पास नहीं साधन और मैदान</strong><br />कोटा जिले में अन्य खेलों की तरह ही ट्रैक एथेलेटिक्स के खिलाड़ी भी राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर कोटा का नाम रोशन कर रहे हैं। लेकिन ट्रैक एथेलेटिक्स में आने वाले भाला फेंक, गोला फेंक, डिस्कस थ्रो और हेमर थ्रो के खिलाड़ियों के पास आज खुद का मैदान तक नहीं है। ट्रैक एथेलेटिक्स के कोच श्याम बिहारी नाहर ने बताया कि वो अपने दम पर ही एथेलीटों को ट्रेनिंग देते हैं। खिलाड़ियों के पास खेलों के पर्याप्त साधन तक नहीं है। इन खिलाड़ियों को अपने खर्चे पर ही सारी व्यवस्थाएं जुटानी होती हैं। हेमर थ्रो के अंडर 20 के नेशनल खिलाड़ी सत्यम ने बताया कि वो नेशनल में ब्रांज मेडल जीत चुके हैं। लेकिन मेडल जीतने के बाद उनका ना किसी ने सम्मान किया ना प्रोत्साहन दिया। साथ ही क्रिड़ा संगम से खेल के सामान मांगने पर वहां से भी मना कर दिया जाता है। इसी तरह भाला फेंक खिलाड़ी कृतिका मीणा ने बताया कि ट्रैक एथेलीटों के लिए कोटा में कोई स्थान नहीं है हम जहां जाते हैं वहीं से कोई ना कोई भगा देता है। श्री नाथपुरम स्टेडियम में भी ट्रैक बनाया लेकिन वहां भी दौड़ लगाने वाले और अन्य खिलाड़ी विरोध करने लग जाते हैं। </p>
<p><strong>तीरंदाजी में भी नहीं मिलता प्रोत्साहन</strong><br />ट्रैक एथेलेटिक्स की तरह ही कोटा में तीरंदाजी के कई खिलाड़ी ऐसे हैं जो राष्ट्रीय स्तर तक कोटा और प्रदेश का परचम लहरा चुके हैं। लेकिन इसके बावजूद भी ये खिलाड़ी अपने दम पर ही सबकुछ करने को मजबूर हैं। क्योंकि इन्हें न तो प्रशासन और न ही क्रीड़ा परिषद की ओर से किसी प्रकार का प्रोत्साहन मिलता है। तिरंदाज पुष्पेंद्र सिंह बताते हैं कि वो तिरंदाजी में राष्ट्रीय स्तर तक खेल चुके हैं और तिरंदाजी में 30 से ज्यादा पदक हासिल कर चुके हैं। लेकिन आज भी उन्हें अपने अभ्यास का खर्चा खुद उठाना पड़ता है क्योंकि कोटा में तिरंदाजी का अच्छा कोच तक मौजूद नहीं है। पुष्पेंद्र बताते हैं कि तिरंदाजी के साथ ही कोटा में कई खेल ऐसे हैं जिनके खिलाड़ी अपने दम पर ही सब कुछ कर रहे हैं। आज भी उन्हें प्रशासन और क्रीड़ा परिषद की ओर से कोई प्रोत्साहन नहीं मिलता। अन्य तीरंदाज खिलाड़ी हिमांशी राजावत ने बताया कि स्टेट और राष्ट्रीय स्तर में पदक जीत चुकी हैं लेकिन किसी की ओर से सहायता नहीं मिली साथ ही क्रीड़ा परिषद की ओर से मिलने वाली पुरस्कार राशि भी पिछले 6 साल से अटकी हुई है।</p>
<p><strong>पुरस्कार राशि 2017 से अटकी हुई</strong><br />कोटा के कई खिलाड़ी ऐसे हैं जिनकी प्रोत्साहन राशि साल 2018 से नहीं मिली है। कोटा की वुशू खिलाड़ी ईशा गुर्जर के साल 2018 व 2019 में आयोजित स्टेट वुशू चैंपियनशिप में कांस्य व स्वर्ण पदक व राष्ट्रीय वुशू चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीतने पर राज्य सरकार द्वारा प्रोत्साहन राशि की घोषणा की गई थी जो अभी तक प्राप्त नहीं हुई। ईशा की कुल 3 लाख 50 हजार रुपए की प्रोत्साहन राशि रुकी हुई है। इसी तरह बॉक्सिंग प्लेयर निशा गुर्जर द्वारा भी साल 2021, 2022 व 2023 में आयोजित राज्य स्तरीय महिला बॉक्सिंग चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतने पर सरकार की ओर से प्रोत्साहन राशि की घोषणा की गई थी जो अभी तक जारी नहीं हुई है। निशा प्रोत्साहन राशि अभी तक जारी नहीं हुई है। वहीं वुशू खिलाड़ी प्रियांशी गौतम के पिता अशोक गौत्तम ने बताया कि प्रियांशी द्वारा साल 2021 में 20वीं व 2022 में 21वीं नेशनल सब जूनियर वुशू प्रतियोगिता में गोल्ड के साथ साल 2023 में 67वीं स्कूल गेम नेशनल प्रतियोगिता वुशू प्रतियोगिता में गोल्ड मेडल जीतने पर सरकार की ओर से प्रोत्साहन राशि की घोषणा की गई थी जो अभी तक पेंडिग है।</p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />खिलाड़ियों की ट्रेनिंग के लिए कोच लगाए गए हैं, किसी भी खिलाड़ी के लिए व्यक्तिगत रूप से कोच और संसाधान की व्यवस्था नहीं की जाती है। जिन भी क्षेत्रों में कमी होगी उन्हें दूर करने के लिए प्रयास किए जाएंगे। प्रोत्साहन राशि के लिए सभी खिलाड़ियों की रिपोर्ट तैयार कर जयपुर फाइल भेजी हुई है।<br /><strong>- मधु चौहान, जिला खेल अधिकारी, कोटा</strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 30 Sep 2024 17:05:29 +0530</pubDate>
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                <title>सुविधाओं के अभाव में भी हैमर थ्रो खेल रहे खिलाड़ी </title>
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                        <![CDATA[कोटा में हैमर थ्रो खेल खेलने के लिए के लिए कोई खेल मैदान भी नहीं है। इसके बावजूद भी खिलाड़ियों का रुझान इस खेल की और है। कोटा में ऐसे कई खिलाड़ी है जिन्होंने नेशनल लेवल पर होने वाली हैमर थ्रो प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया है।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/players-playing-hammer-throw-even-in-the-absence-of-facilities/article-20092"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-08/suvidhao-k-abhav-mei-hammer-throw-...kota-news-23.8.2022-copy.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। अपने आप को परफेक्ट बनाने के लिए खिलाड़ी जोखिम भरे खेल भी खेल रहे है। इन जोखिम भरे खेलों में से एक खेल है हैमर थ्रो। कोटा में हैमर थ्रो खेल खेलने के लिए के लिए कोई खेल मैदान भी नहीं है। इसके बावजूद भी खिलाड़ियों का रुझान इस खेल की और है। कोटा में ऐसे कई खिलाड़ी है जिन्होंने नेशनल लेवल पर होने वाली हैमर थ्रो प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया है। राजस्थान में जिन खिलाड़ियों से राज्य स्तर पर मेडल की उम्मीद की जाती है, वे खिलाड़ी ही राजस्थान से नाउम्मीद हो रहे है। बड़ी संख्या में यहां के खिलाड़ी हैमर थ्रो जैसे खेल की ट्रेनिंग हरियाणा जाकर ले रहे हैं। और खिलाड़ी वहीं बस भी रहे है। क्योंकि राजस्थान में उन्हें न राज्य स्तरीय एकेडमी मिलती है और न तैयारी के लिए बेहतरीन कोच। कोटा के कोच व राष्टÑीय खिलाड़ियों व कोच की माने तो राज्य में ट्रेनिंग का विकल्प उपलब्ध नहीं होने के कारण कई खिलाड़ी परिवार दूसरे राज्यों में बस गए है।</p>
<p>कोटा में खिलाड़ियों की संख्या कोटा में हैमर थ्रो खेलने वाले खिलाड़ियों की संख्या 70 से अधिक है। यह खिलाड़ी सुविधाओं के अभाव में भी खुले मैदानों में जाकर प्रतिदिन अभ्यास करते है। कोटा में हैमर थ्रो का अभ्यास करवाने के लिए कोई कोच भी नहीं है। यही वजह है की कोटा के खिलाड़ी हैमर थ्रो खेलने के लिए दूसरे राज्यों की और बढ़ रहे है। राष्ट्रीय स्तरीय खिलाड़ी कोटा के राहुल, सत्यम, यर्थात सुवालका, रेखा प्रजापत, सत्यनारायण मीणा, कुंदन सहित अनेक ऐसे खिलाड़ी है, जो राष्ट्रीय स्तरीय हैमर थ्रो प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेकर कोटा का नाम रोशन कर रहे है।</p>
<p><strong>इनका कहना </strong></p>
<p>कोटा में खिलाड़ियों को अभ्यास करवाने के खेल सर्किल तक नहीं है। इन्हें अभ्यास करवाने के लिए सरकारी कॉलेज के खेल मैदान में ले जाना पड़ता है। जहां तक अन्य खिलाड़ियों को चोट लगने का खतरा बना रहता है। खिलाड़ी सुविधाओं के अभाव में खेल रहे है। खिलाड़ियों को किसी भी प्रकार की कोई सुविधा नहीं मिल रही। -श्याम बिहारी नाहर, ट्रेनर</p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
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                <pubDate>Tue, 23 Aug 2022 12:44:22 +0530</pubDate>
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