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                <title>विकास और सुशासन से परास्त हो रहा नक्सलवाद, बस्तर में शांति और अवसरों का नया दौर शुरू : पीएम मोदी</title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में आए बड़े बदलाव को रेखांकित किया है। उन्होंने कहा कि जहां कभी भय और हिंसा का माहौल था, आज वहां विकास, सुशासन और जनविश्वास की जीत हो रही है। बस्तर ओलंपिक जैसे आयोजनों में युवाओं की भागीदारी इस सकारात्मक परिवर्तन और सुरक्षा बलों के साहस का जीवंत प्रमाण है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/victory-of-development-over-naxalism-new-era-of-peace-and/article-157842"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/modi-1.png" alt=""></a><br /><p>रायपुर। छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में हुए बदलाव का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने एक संदेश में कहा है कि नक्सलवाद और माओवाद के खिलाफ सरकार की लड़ाई अब विकास, जनविश्वास और सुशासन की जीत के रूप में सामने आ रही है। जिन इलाकों में कभी भय और हिंसा का माहौल था, वहां आज विकास और नई संभावनाओं का दौर शुरू हो चुका है। छत्तीसगढ़ जनसंपर्क विभाग ने मंगलवार को जारी एक विज्ञप्ति में बताया कि प्रधानमंत्री ने कहा कि एक समय नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के लोग सुरक्षा, आजीविका और सम्मान को लेकर चिंतित रहते थे तथा विकास कार्यों का हिंसक विरोध किया जाता था। सड़क निर्माण, संचार सुविधाओं के विस्तार और अन्य परियोजनाओं को बाधित करने के प्रयास होते थे। इसके बावजूद सरकार ने विकास को प्राथमिकता देते हुए हजारों किलोमीटर सड़कों का निर्माण कराया, मोबाइल टावर स्थापित किए और दूरस्थ क्षेत्रों तक संचार सुविधाएं पहुंचाईं।</p>
<p>उन्होंने कहा कि बैंकिंग, डाक सेवाओं और वित्तीय समावेशन के जरिए लोगों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ा गया। यह बदलाव केवल आधारभूत ढांचे के विस्तार तक सीमित नहीं है, बल्कि लोगों के जीवन में विश्वास और अवसरों के विस्तार का प्रतीक है। प्रधानमंत्री ने कहा कि नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई केवल सुरक्षा अभियानों तक सीमित नहीं रही, बल्कि आम लोगों की आकांक्षाओं को पूरा करने, सरकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने और लोकतंत्र में विश्वास मजबूत करने पर भी समान रूप से ध्यान दिया गया। इसी का परिणाम है कि आज नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में लोकतांत्रिक व्यवस्था के प्रति लोगों का भरोसा बढ़ा है।</p>
<p>बस्तर का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि जहां कभी आतंक और हिंसा का माहौल था, वहां आज युवा खेल, शिक्षा और विकास के क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर रहे हैं। बस्तर ओलंपिक जैसे आयोजनों में बड़ी संख्या में युवाओं की भागीदारी इस सकारात्मक परिवर्तन का प्रमाण है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व, सुरक्षा बलों के साहस और केंद्र-राज्य सरकार की समन्वित रणनीति के कारण बस्तर सहित नक्सल प्रभावित क्षेत्रों की तस्वीर बदली है। उन्होंने कहा कि सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, संचार, बैंकिंग और जनकल्याणकारी योजनाओं की पहुंच से लोगों के जीवन में व्यापक परिवर्तन आया है।</p>
<p>मुख्यमंत्री ने कहा कि आज बस्तर की पहचान नक्सली हिंसा नहीं, बल्कि विकास, जनभागीदारी, खेल, पर्यटन और नई संभावनाओं से बन रही है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ सुशासन और विकास का राष्ट्रीय मॉडल बनेगा तथा बस्तर देश के तेजी से विकसित होने वाले क्षेत्रों में शामिल होगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 23 Jun 2026 17:28:40 +0530</pubDate>
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                <title>परिंडा लगाओ अभियान: पक्षियों के लिए दाना-पानी का संदेश, समाजसेवियों का सम्मान</title>
                                    <description><![CDATA[जयपुर के महावीर उद्यान में संत दुलाराम कुलरिया की स्मृति में “परिंडा लगाओ अभियान” का शुभारंभ हुआ। आह्वान जनकल्याण समिति द्वारा आयोजित इस पहल का उद्देश्य भीषण गर्मी में बेजुबान पक्षियों को दाना-पानी उपलब्ध कराना है। कार्यक्रम में रमेश ओझा और बृजेन्द्र चौधरी को उल्लेखनीय समाज सेवा और गौसेवा के लिए सम्मानित किया गया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/parinda-laao-campaign-message-of-food-and-water-for-birds/article-155098"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/1200-x-600-px6.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। बजाज नगर स्थित महावीर उद्यान में आह्वान जनकल्याण एवं सेवा समिति की ओर से गौसेवा एवं मानव सेवा के लिए समर्पित प्रेरणास्रोत संत दुलाराम कुलरिया की स्मृति में “परिंडा लगाओ अभियान” का शुभारंभ किया गया। भीषण गर्मी में पक्षियों को दाना-पानी उपलब्ध कराने और आमजन में जीव दया का संदेश देने के उद्देश्य से आयोजित इस अभियान ने सामाजिक सरोकारों की अनूठी मिसाल पेश की। कार्यक्रम के दौरान संस्था संरक्षक एवं ऑल इंडिया ब्राह्मण महासभा के राष्ट्रीय सचिव (समन्वय) रमेश ओझा तथा अंतरराष्ट्रीय फिटनेस मास्टर एवं किसान नेता बृजेन्द्र चौधरी को समाज सेवा, गौसेवा और जनहित के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित किया गया। संस्था सचिव नफीस ने कहा कि आज के दौर में मानव सेवा के साथ-साथ पशु-पक्षियों की सेवा भी हमारी नैतिक जिम्मेदारी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 26 May 2026 17:55:31 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>कोटा के पीडब्ल्यू  विद्यापीठ के छात्र हर्ष वर्धन कुमार का कमाल, जेईई मेंन्स में 66 से 99 पर्सेंटाइल तक पहुँचे</title>
                                    <description><![CDATA[कोटा के हर्ष वर्धन कुमार ने JEE Main में चमत्कारिक सुधार कर सबको चौंका दिया। सेशन 1 में 66 परसेंटाइल लाने के बाद, उन्होंने हार नहीं मानी और सटीक रणनीति व PW विद्यापीठ के गुरुजनों के मार्गदर्शन से सेशन 2 में 99 परसेंटाइल हासिल किए। उनकी यह सफलता निरंतरता और खुद पर भरोसे की जीत है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/amazing-feat-of-harsh-vardhan-kumar-student-of-pw-vidyapeeth/article-152137"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/1200-x-60-px)-(youtube-thumbnail)17.png" alt=""></a><br /><p><span style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';">प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं में सफलता पाने के लिए मेहनत, सही रणनीति और लगातार प्रयास बहुत जरूरी होते हैं। इसका बेहतरीन उदाहरण कोटा में तैयारी कर रहे छात्र हर्ष वर्धन कुमार ने पेश किया है, जिन्होंने JEE Main Session 1 में 66 पर्सेंटाइल से Session 2 में 99 पर्सेंटाइल हासिल कर एक शानदार सुधार दर्ज किया। उनकी यह यात्रा न केवल संघर्ष और आत्मविश्वास की मिसाल है, बल्कि यह दिखाती है कि सही दिशा में की गई मेहनत से किसी भी लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है। </span><span style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';">इस शानदार उपलब्धि के पीछे की कहानी और उनकी तैयारी की रणनीति को जानने के लिए हमने हर्ष वर्धन कुमार से खास बातचीत की:</span></p>
<p class="MsoNormal" style="line-height:115%;background:#FFFFFF;margin:10pt 0in 10pt 0in;"><strong><span style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';color:#222222;">आपकी JEE Main Session 1 से Session 2 तक की यात्रा कैसी रही? इस बदलाव के पीछे सबसे बड़ा कारण क्या था?</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="line-height:115%;background:#FFFFFF;margin:10pt 0in 10pt 0in;"><span style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';color:#222222;">मेरी JEE Mains Session 1 से Session 2 तक की यात्रा इतनी अप्रत्याशित रही है कि मुझे खुद भी विश्वास नहीं था कि मैं इतना अच्छा परिणाम हासिल कर पाऊँगा। इस बड़े बदलाव के पीछे मुख्य रूप से 2-3 कारण थे। जब मैं छठ पूजा के बाद कोटा वापस आया, तब मुझे एहसास हुआ कि समय हाथ से निकलता जा रहा है। मुझे लगा कि अगर अब कुछ नहीं किया, तो खाली हाथ घर वापस जाना पड़ेगा। दूसरी बात यह थी कि मुझे खुद पर थोड़ा भरोसा था; क्योंकि मैंने पहले भी कई एग्जाम्स आखिरी समय में एक सटीक रणनीति के दम पर निकाले थे। बस इसी आत्मविश्वास ने मुझे आगे बढ़ाया।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="line-height:115%;background:#FFFFFF;margin:10pt 0in 10pt 0in;"><strong><span style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';color:#222222;">आपने खुद बताया कि शुरुआत में पढ़ाई में ज्यादा रुचि नहीं थी—तो फिर ऐसा कौन-सा मोड़ आया जिसने आपको मेहनत करने के लिए प्रेरित किया?</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="background:#FFFFFF;margin:10pt 0in 10pt 0in;"><span style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';color:#222222;">ऐसा नहीं था कि मेरी पढ़ाई में रुचि नहीं थी, लेकिन जब कुछ समझ नहीं आता था, तो पढ़ने का मन भी नहीं करता था। उदाहरण के लिए, मेरी केमिस्ट्री बहुत कमजोर थी, यहाँ तक कि मुझे 11वीं की केमिस्ट्री भी समझ नहीं आती थी। इसके विपरीत, मैथ्स में मैं शुरू से अच्छा था और फिजिक्स भी औसत था। लेकिन Session 1 के बाद मुझे समझ आया कि अगर स्कोर बढ़ाना है, तो केमिस्ट्री पर फोकस करना ही होगा, और मैंने वही किया।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="line-height:115%;background:#FFFFFF;margin:10pt 0in 10pt 0in;"><strong><span style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';color:#222222;">PW Vidyapeeth Kota ने आपकी सफलता में किस तरह से भूमिका निभाई? क्या कोई खास शिक्षक या रणनीति थी जिसने आपको मदद की?</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="background:#FFFFFF;margin:10pt 0in 10pt 0in;"><span style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';color:#222222;">मेरी सफलता की कहानी में कोटा PW विद्यापीठ और वहां के अनुभवी गुरुजनों का योगदान अतुलनीय है। यहाँ के शिक्षकों के मार्गदर्शन ने न केवल मेरे ज्ञान को बढ़ाया, बल्कि मुश्किल विषयों के प्रति मेरा नजरिया भी बदल दिया। जैसे कि ऑर्गेनिक केमिस्ट्री में राहुल पारीक सर (RP Sir) जैसा कोई नहीं है; मेरा मानना है कि अगर किसी छात्र को उनसे यह विषय समझ नहीं आया, तो शायद ही कोई और उसे समझा पाएगा। फिजिक्स में अंशुल गुप्ता सर ने मेरी नींव मजबूत की, उन्होंने मुझे केवल फॉर्मूले रटने के बजाय वैचारिक स्पष्टता पर ध्यान केंद्रित करना सिखाया, जो परीक्षा के दौरान बहुत मददगार साबित हुआ। वहीं गणित के क्षेत्र में महेश जैन सर एक सच्चे 'लिजेंड' हैं, जिनसे बेहतर शिक्षक मैंने आज तक नहीं देखा। साथ ही, राजीव रस्तोगी सर की विशेषज्ञता का दायरा सिर्फ JEE तक सीमित नहीं था, बल्कि वे दुनिया भर के विभिन्न और कठिन प्रकार के सवालों से हमारा परिचय कराते थे; उनकी मेहनत का स्तर यह है कि अक्सर उनके नोट्स से सीधे सवाल मुख्य परीक्षा में मिल जाते हैं। इन सभी गुरुजनों के सामूहिक प्रयासों और कोटा विद्यापीठ के बेहतरीन माहौल ने ही मेरी सफलता का मार्ग प्रशस्त किया।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="line-height:115%;background:#FFFFFF;margin:10pt 0in 10pt 0in;"><strong><span style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';color:#222222;">इस सफर में आपको किन चुनौतियों का सामना करना पड़ा और आपने उन्हें कैसे पार किया?</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="background:#FFFFFF;margin:10pt 0in 10pt 0in;"><span style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';color:#222222;">66 परसेंटाइल से 99 परसेंटाइल तक का सफर बहुत कठिन था, लेकिन नामुमकिन नहीं। सबसे बड़ी चुनौती थी उन 2-3 महीनों में कंसिस्टेंसी बनाए रखना। अक्सर ऐसा होता था कि एक हफ्ते तक 10-12 घंटे पढ़ने के बाद मन भटकने लगता था कि 'आज रहने देते हैं', लेकिन मैंने खुद को रुकने नहीं दिया। मैंने पहले दिन जो JEE Mains का एनालिसिस करके प्लान बनाया था, उसे पूरी ईमानदारी से फॉलो किया कि क्या पढ़ना है और क्या छोड़ना है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="line-height:115%;background:#FFFFFF;margin:10pt 0in 10pt 0in;"><strong><span style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';color:#222222;">अब आगे के लिए आपके क्या लक्ष्य और भविष्य की योजनाएँ हैं? क्या आप अन्य छात्रों को कोई संदेश देना चाहेंगे?</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';">फिलहाल मैं अपनी पूरी ऊर्जा के साथ JEE Advanced की तैयारी में जुटा हूँ और अपना शत-प्रतिशत योगदान दे रहा हूँ। हालाँकि मुझे इस बात का सटीक अंदाजा नहीं है कि मैं सिर्फ कट-ऑफ क्लियर कर पाऊँगा या मेरी रैंक अंडर 5000 आएगी, लेकिन मैं अपनी ओर से सर्वश्रेष्ठ प्रयास करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहा हूँ। अब मैं मानसिक रूप से काफी शांत और तनावमुक्त महसूस करता हूँ क्योंकि मैं स्वयं को एक सुरक्षित स्थिति में पाता हूँ। अन्य तैयारी करने वाले छात्रों को मैं यही मशविरा दूँगा कि सबसे पहले अपने शिक्षकों पर अटूट भरोसा रखें; उनका अनुभव आपसे कहीं अधिक है और उनकी बातें भले ही कभी कड़वी लगें, पर वे हमेशा आपके हित में होती हैं। साथ ही, अपनी पढ़ाई में कंसिस्टेंसी बनाए रखें, चाहे क्लासेस ऑनलाइन हों या ऑफलाइन, उन्हें नियमित रूप से अटेंड करें। केवल लेक्चर देखना पर्याप्त नहीं है, बल्कि अधिक से अधिक अभ्यास और PYQs को हल करना अनिवार्य है। कभी भी यह गलतफहमी न पालें कि आप केवल दो विषयों के सहारे JEE फतह कर लेंगे; यदि कोई विषय कठिन लगता है, तो उससे जी चुराने के बजाय उस पर डटकर मेहनत करना ही एकमात्र विकल्प है। अंत में मेरा यही मानना है कि यदि आप पूरी ईमानदारी से अपनी प्रक्रिया यानी 'प्रोसेस' को फॉलो करते हैं, तो लक्ष्य स्वयं ही हासिल हो जाएगा।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';"> </span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 29 Apr 2026 15:40:40 +0530</pubDate>
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                <title>परीक्षा पर चर्चा-2026: पीएम मोदी ने कहा, परीक्षा में सफलता की गारंटी आत्मविश्वास होता है, हड़बड़ी नहीं </title>
                                    <description><![CDATA[पीएम मोदी ने परीक्षा पर चर्चा में छात्रों से कहा कि तनाव नहीं, लक्ष्य, धैर्य, आत्मविश्वास और सपने पर ध्यान दें, हड़बड़ी छोड़ समझदारी से पढ़ें, निरंतर मेहनत।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/discussion-on-examination-2026-pm-modi-said-that-the-guarantee-of/article-142131"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/11-(700-x-400-px)-(630-x-400-px)-(1)5.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि छात्रों को परीक्षा के लिए तनाव पालने और ज्यादा नंबर लाने की होड़ की सोच पर ध्यान देने की बजाय जीवन के लक्ष्य की कसौटी पर खुद को कसते हुए निरंतर और धैर्य तथा आत्मविश्वास के साथ काम करते रहने की जरूरत पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए।</p>
<p>पीएम मोदी ने शुक्रवार को यहां अपने आवास पर 'परीक्षा पर चर्चा' को लेकर देश की विभिन्न हिस्सों से आए बच्चों से संवाद के कार्यक्रम में बच्चों से बात करते हुए कहा कि परीक्षा को बोझ नहीं मानना है और उसे आसानी से लेते हुए अपनी पढ़ाई करनी है। उन्होंने पुराने पेपर देखकर तैयारी करने को पुरानी बीमारी बताया और कहा कि नए दौर ने इसका कोई औचित्य नहीं है। यह एक तरह की बीमारी है इसलिए सहज रूप से अपने लक्ष्य को हासिल करने के लिए तैयारी करनी चाहिए और परीक्षा को तनाव की वजह या बोझ नहीं बनाना चाहिए।</p>
<p>प्रधानमंत्री मोदी से एक बच्चे ने सवाल किया कि जीवन में सपना पलना जरूरी है, पीएम मोदी ने कहा कि सपना ना देखना जीवन के साथ सबसे बड़ा अपराध है। सपने से ही लक्ष्य बनते हैं और उससे शक्ति के साथ जीवन मे आगे बढ़ाने की प्रेरणा मिलती है। कठिन से कठिन सपने को पाने के लिए अनुकूल मेहनत कर ही उसे पूरा किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि बच्चों को खुद का आत्मविश्वास बढ़ाने के लिए महापुरुषों की जीवनियां पढऩी चाहिए।</p>
<p>पीएम मोदी ने कहा कि किसी भी परीक्षा के लिए आत्मविश्वास जरूरी है और आत्मविश्वास तभी आता है जब सच्चे मन से अपने विषय को अपने लक्ष्य के अनुसार पढ़ते हैं। उनका कहना था कि परीक्षा के समय हड़बड़ी नहीं करनी होती है क्योंकि हड़बड़ी से सब कुछ गड़बड़ हो जाता है इसलिए हड़बड़ी के बजाय आत्मविश्वास और पूरी समझ के साथ ध्यान लगाकर अपने विषय के प्रश्नपत्र को हल करना है। हड़बड़ी के कारण कई बार जो सवाल आते हैं वे भी गड़बड़ा जाते हैं जितनी भी मेहनत की होती है वह सब कुछ बेकार हो जाता है।</p>
<p>प्रधानमंत्री ने कहा कि अब वह समय नहीं है कि जब कहा जाता था कि सफलता उन्हीं को मिलती है जिनके पास सारी सुविधा होती है लेकिन अब हालात बदल गए है। गरीब से गरीब घर के बच्चे भी सर्वोत्तम अंकों के साथ परीक्षा पास कर रहे हैं। उन्होंने इसकी वजह स्वतंत्र सोच और सुविधा अनुसार पढ़ाई करने को बताया।</p>
<p>प्रधानमंत्री मोदी ने बच्चों से कहा कि हर चीज का एक पैटर्न होता है और अनुभव के आधार पर उसे बदला जा सकता है। उनका कहना था कि परीक्षा पर चर्चा कार्यक्रम उन्होंने जिस पैटर्न पर पहले शुरू किया था उसमें अनुभव के आधार पर धीरे-धीरे बदलाव उंन्होने लाया है। इसी तरह से हर बच्चे को अनुभव के आधार पर अपने कार्यों में बदलाव लाना चाहिए।</p>
<p>बच्चों से संवाद करने के बाद पीएम मोदी ने कहा कि उन्हें लगता है कि अब देश के विभिन्न हिस्सों में बच्चों से परीक्षा पर चर्चा की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि कई राज्य में उन्होंने यह कार्यक्रम किए हैं और उन्हें लगता है की और कार्यक्रम अन्य राज्यों में भी किए जाने चाहिए।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>शिक्षा जगत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/leads/discussion-on-examination-2026-pm-modi-said-that-the-guarantee-of/article-142131</link>
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                <pubDate>Fri, 06 Feb 2026 12:00:23 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जयपुर लनिंर्ग फेस्टिवल 2025 : मोटिवेशनल स्पीकर सौरभ जैन ने 30 घंटे तक नोन-स्टॉप स्पीच देकर विश्व रिकॉर्ड बनाने की दिशा में बढ़ाया कदम, आत्महत्या से बचाव पर दिया व्याख्यान </title>
                                    <description><![CDATA[गुलाबी नगर जयपुर के बिडला ऑडिटोरियम में रविवार को लनिंर्ग और मोटिवेशनल फेस्ट 'जयपुर लनिंर्ग फेस्टिवल 2025' का भव्य शुभारंभ हुआ। सीखेगा भारत, तभी तो आगे बढ़ेगा भारत थीम पर आधारित आयोजन ने देशभर में उत्साह का वातावरण बना दिया है। इस ऐतिहासिक कार्यक्रम के केंद्र में हैं-प्रसिद्ध मोटिवेशनल स्पीकर सौरभ जैन, जो 30 घंटे की नोन-स्टोप स्पीच देकर नया विश्व रिकॉर्ड बनाने की दिशा में अग्रसर हैं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/jaipur-learning-festival-2025-motivational-speaker-saurabh-jain-took-a/article-131920"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-11/111-(4)2.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। गुलाबी नगर जयपुर के बिडला ऑडिटोरियम में रविवार को लनिंर्ग और मोटिवेशनल फेस्ट 'जयपुर लनिंर्ग फेस्टिवल 2025' का भव्य शुभारंभ हुआ। सीखेगा भारत, तभी तो आगे बढ़ेगा भारत थीम पर आधारित आयोजन ने देशभर में उत्साह का वातावरण बना दिया है। इस ऐतिहासिक कार्यक्रम के केंद्र में हैं-प्रसिद्ध मोटिवेशनल स्पीकर सौरभ जैन, जो 30 घंटे की नोन-स्टोप स्पीच देकर नया विश्व रिकॉर्ड बनाने की दिशा में अग्रसर हैं। शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ, जिसमें भामाशाह अशोक पाटनी, नंदकिशोर, प्रमोद पहाड़िया, चक्रश जैन, सुनिता जैन सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे। </p>
<p><strong>सौरभ ने आत्मविश्वास, आत्मनिर्भरता आत्महत्या से बचाव पर दिया व्याख्यान</strong><br />सौरभ जैन ने लगातार कई घंटों तक प्रेरक भाषण दिया, उन्होंने आत्मविश्वास, आत्मनिर्भरता, आत्महत्या से बचाव, तनावमुक्त जीवन जैसे 100 से अधिक विषयों पर चर्चा की। आयोजन के चीफ डायरेक्टर प्रमोद जैन ने बताया कि इस फेस्टिवल का मुख्य उद्देश्य लनिंर्ग और स्किल डेवलपमेंट के माध्यम से राष्ट्र निर्माण को नई दिशा देना। विद्यार्थियों ने जहां टाइम मैनेजमेंट और स्टडी टेक्निक्स सीखने को लेकर बात की।  महिलाओं को आत्मनिर्भरता और आत्मविश्वास का संदेश दिया। प्रोजेक्ट डायरेक्टर सुधीर जैन गोधा ने बताया कि इस आयोजन में 700 से अधिक संस्थाओं और 250 विशेषज्ञों की टीम काम कर रही है। मीडिया प्रभारी विनोद जैन कोटखावदा और राजकुमार बैद ने बताया कि जो प्रतिभागी 9 घंटे या उससे अधिक समय तक स्पीच सुनेंगे उन्हें वर्ल्ड रिकॉर्ड सर्टिफि केट प्रदान किया जाएगा। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 10 Nov 2025 11:10:30 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur PS]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>भारतीय हॉकी टीम के पूर्व कप्तान वीरेन रसकिन्हा ने छात्रों को दिया सफलता का मंत्र</title>
                                    <description><![CDATA[हॉकी के पूर्व कप्तान रसकिन्हा ने मुंबई की गलियों में अपने बड़े होने के दिनों के बारे में बात करते हुए कहा कि उन्होंने 1996 के अटलांटा ओलंपिक में लिएंडर पेस की जीत को अपने जीवन का सबसे अतिसंवेदनशील बिंदु करार दिया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/khel/former-indian-hockey-team-captain-viren-rasquinha-gave-success-mantra-to-students/article-20584"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-08/index14.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। भारतीय हॉकी टीम के पूर्व कप्तान वीरेन रसकिन्हा ने 'चेंजमेकर्स' श्रृंखला में भाग लेते हुए छात्रों के साथ बातचीत करते हुए ''नम्बर एक बनो और दूसरा सर्वश्रेष्ठ कुछ नहीं' के मंत्र को दोहराया। </p>
<p>हॉकी में साल के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी के लिए 2005 के अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित रसकिन्हा ने कहा कि खेल सभी को टीम निर्माण, समानता, अनुशासन, समावेश, सम्मान और निष्पक्षता जैसे मूल्यों को सिखाने का एक उत्कृष्ट साधन है।</p>
<p>हॉकी के पूर्व कप्तान रसकिन्हा ने मुंबई की गलियों में अपने बड़े होने के दिनों के बारे में बात करते हुए कहा कि उन्होंने 1996 के अटलांटा ओलंपिक में लिएंडर पेस की जीत को अपने जीवन का सबसे अतिसंवेदनशील बिंदु करार दिया। उन्होंने कहा कि मैं अभी किशोरावस्था में था। यह मेरी प्रेरणा का क्षण था और तभी से मेरे मन में भारत के लिए खेलने की चाह जगी और मेरी इच्छा भारतीय हॉकी टीम की कप्तानी करने की जगी थी और ओलंपिक में खेलना चाहता था। मैं खुशनसीब हूं कि मैंने ये सब पाया।</p>
<p>रसकिन्हा 2004 में एथेंस ओलंपिक टीम के सदस्य थे। रसकिन्हा ने 2008 में 28 साल की उम्र में मैनेजमेंट की पढ़ाई करने के लिए अंतरराष्ट्रीय हॉकी छोड़ दी थी। वह अब ओलंपिक गोल्ड केस्ट के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी हैं।</p>
<p>छात्रों को प्रतिदन सैर और व्यायाम के माध्यम से सक्रिय रहने की सलाह देते हुए उन्होंने कहा कि जो जुनून आप चाहते हैं उसका पीछा करें और एक स्वस्थ राष्ट्र के लिए खेल की संस्कृति को आगे बढ़ाएं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>खेल</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/khel/former-indian-hockey-team-captain-viren-rasquinha-gave-success-mantra-to-students/article-20584</link>
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                <pubDate>Fri, 26 Aug 2022 18:08:43 +0530</pubDate>
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