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                <title>uprooted - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>मुंडला हरिगढ़ सड़क खस्ताहाल : पुलिया पर निकले सरिए, सड़क का डामर उखड़ा; फैली गिट्टी से हादसे का अंदेशा</title>
                                    <description><![CDATA[ग्रामीणों ने संबंधित विभाग से सड़क और पुलिया निर्माण की मांग की है।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jhalawar/mundla-harigarh-road-in-bad-condition--iron-rods-protruding-from-the-culvert/article-126654"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-09/_400-px)-(3)5.png" alt=""></a><br /><p>पनवाड़। खानपुर उपखंड की ग्राम पंचायत मुंडला गांव से हरिगढ़ सड़क की हालत खस्ताहाल हो चुकी है। सड़क से जगह -जगह से डामर उखड़ कर गिट्टी कंकड़ फैल रहे हैं। सड़क पर जगह जगह गड्ढे हो गए हैं, इससे वाहन चालकों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। गांव के समीप बनी पुलिया की स्थिति भी चिंताजनक है पुलिया से सरिए बाहर निकल आए हैं, पुलिया के ऊपर की स्लैब उखड़ने से सीमेंट के नीचे का सरिया दिख रहा है, जिससे दोपहिया वाहन चालकों के लिए खतरा बना हुआ है। ग्रामीण सोनू नागर,दुर्गेश गुर्जर,टीकम नागर,जितेंद्र गुर्जर,भुवनेश नागर,महावीर नागर, सहित अन्य लोगों ने बताया कि हरिगढ़ से मुंडला सड़क का निर्माण हुए लगभग 10 वर्ष हो चुके हैं। इसके पश्चात  सड़क पर स्थानीय प्रशासन का ध्यान नहीं होने के कारण वर्तमान में सड़क की हालत जर्जर हो रही है। सड़क पर जगह जगह से डामर उखड़ कर गहरे गड्ढे हो चुके है, जिनसे गिट्टी बाहर निकल कर सड़क पर फैल रही है। जिससे दुपहिया वाहन चालक गिर कर घायल हो चुके हैं। बारिश होने पर इन गड्ढों में पानी भर जाने से वाहन चालकों को गड्ढे का पता नहीं चलता और गिरकर घायल हो जाते हैं, सड़क क्षतिग्रस्त होने से हर समय दुर्घटना का खतरा बना रहता है।</p>
<p><strong>पुलिया की स्थिति दयनीय</strong><br />गांव के समीप सड़क पर बनी पुलिया की स्थिति दयनीय बनी हुई है। पुलिया की स्लैब उखड़ जाने से पुलिया के ऊपर बने गड्ढे में सीमेंट के नीचे सरिया बाहर निकल चुका है। यह दुपहिया वाहन चालकों के लिए खतरनाक है, सरिया वाहनों में फंस सकता है, जिससे कभी भी बड़ा हादसा घटित हो सकता है।  बारिश के मौसम में तेज बारिश होने के कारण पुलिया पर पानी आ जाता है और पानी के कटाव के कारण पुलिया की स्लैब पूरी तरह से उखड़ कर बह चुकी है, जिससे सरिए नजर आने लगे हैं। गांव के लोगों के खेत खलिहानों पर कृषि कार्य के लिए भारी वाहन भी इसी पुलिया से होकर गुजरते हैं जिससे दिनों दिन पुलिया से सरिए बाहर निकल रहे हैं और यह सरिए निकलने से दुपहिया वाहन चालकों के लिए खतरा बन रहे हैं। भारी माल वाहक ट्रैक्टर ट्रॉली पुलिया पर निकलने से पुलिया टूटने का खतरा भी बना हुआ है। समय रहते विभाग द्वारा पुलिया की मरम्मत नहीं कराई गई तो कभी भी बड़ा हादसा घटित हो सकता है। ग्रामीणों ने संबंधित विभाग से सड़क और पुलिया निर्माण की मांग की है।</p>
<p>मुंडला से हरिगढ़ डामरीकरण सड़क क्षतिग्रस्त हो चुकी है। डामर उखड़कर  गड्ढे हो चुके हैं । वहीं पुलिया पर सीमेंट उखड़ कर सरिए निकल चुके है, जिससे कभी भी दुर्घटना घटित हो सकती है। इस समस्या के लिए कई बार ग्रामसभा में स्थानीय प्रशासन को अवगत कराया है। <br /><strong>- शीला नागर, वार्ड मेंबर ग्राम पंचायत मुंडला </strong></p>
<p>खानपुर उपखंड की सभी क्षतिग्रस्त सड़कें और पुलियाओं का प्रपोजल बनाकर भेज दिया गया है। सेंशन होने के पश्चात सड़क और पुलिया की मरम्मत करा दी जाएगी।<br /><strong>- एसएन मीणा, अधिशाषी अभियंता सार्वजनिक निर्माण विभाग खानपुर</strong></p>
<p>हरिगढ़ से मुंडला सड़क का जगह जगह से डामर उखड़कर गिट्टी निकल कर गहरे गड्ढे हो गए है। सड़क पर गिट्टी फैल रही है जिससे वाहन चालक गिर कर घायल हो रहे हैं।  समस्या पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। <br /><strong>- भुवनेश नागर, मुंडला निवासी </strong></p>
<p>मुंडला गांव के पास बनी पुलिया पर सरिए निकल चुके हैं जिससे दुपहिया वाहन चालकों के लिए खतरा बना हुआ है पुलिया की मरम्मत नहीं हुई तो कभी भी बड़ा हादसा घटित हो सकता है।<br /><strong>- तुलसीराम नागर, मुंडला निवासी </strong></p>
<p>सड़क और पुलिया ग्राम पंचायत के अंतर्गत नहीं है यह सार्वजनिक निर्माण विभाग के अंतर्गत आती है इसके लिए पूर्व में सार्वजनिक निर्माण विभाग को समाचार के माध्यम से अवगत करा दिया गया था लेकिन कार्यवाही नहीं हुई। <br /><strong>- महावीर नागर, उप सरपंच ग्राम पंचायत मूण्डला</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>झालावाड़</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 12 Sep 2025 16:54:57 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>एक बरसात भी नहीं झेल पाई नई बनी सड़कें</title>
                                    <description><![CDATA[सड़के बनाने व मरम्मत पर खर्च हो रहे हर साल करोड़ों रुपए ।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/newly-built-roads-could-not-withstand-even-one-rain/article-87392"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-08/6622-copy33.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। <strong>दृश्य 1 - </strong>अभय कमांड सेंटर से दादाबाड़ी रोटरी सर्किल तक एलबीएस मार्ग पर कुछ समय पहले ही डामर की नई सड़क बनी थी। लेकिन पहली ही बरसात में उस सड़क पर इतने बड़े-बड़े गड्ढ़े हो गए हैं। जिससे रात ही नहीं दिन के समय भी हादसों का खतरा बना हुआ है। </p>
<p><strong>दृश्य 2 - </strong>नयापुरा स्थित जेल रोड पर सैनिक सर्किल के पास की सड़क बने अधिक समय नहीं हुआ है। लेकिन पहली ही बरसात में उस पर गड्ढ़े हो गए हैं। कई जगह से डामर उखड़ गया। जिससे हादसों का खतरा बना हुआ है। </p>
<p><strong>दृश्य 3 -</strong> जेडीबी कॉलेज के सामने स्टेशन जाने का मुख्य मार्ग है। यहां सड़क की हालत इतनी अधिक खराब हो रही है कि दिन में ही नहीं रात के समय भी यहां से निकलने वाले वाहनों के दुर्घटनाग्रस्त होने का खतरा बना हुआ है। </p>
<p>ये तो उदाहरण मात्र हैं शहर की सड़कों के उस हालात को बताने के लिए जो वर्तमान में बरसात के सीजन में देखने को मिल रहे हैं। इस तरह के हालात पूरे शहर की सड़कों के हो रहे है। ऐसा नहीं है कि सड़कों की यह हालत इस बार ही बरसात में हुई है। वरन् हर साल होती है। बरसात के समय डामर की सड़कों  पर गड्ढ़े होने व सड़कों के उखड़ने पर बरसात के बाद कोटा विकास प्राधिकरण व नगर निगम की ओर से सड़कों की मरम्मत व नई बनाने पर करोड़ों रुपए खर्च किए जाते हैं। उसके बाद भी फिर से सड़कों की हालत जस की तस बनी हुई है। हालत यह है कि अधिकतर सड़कें तो पहली बरसात भी नहीं झेल पाई और उन पर बड़े-बड़े गड्ढ़े हो गए हैं। जबकि विदेशों में बनने वाली सड़कें लम्बे समय तक चलने वाली व टिकाऊ होती हैं। हालांकि सड़कों को लेकर कुछ समय पहले केन्द्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्री नितिन गड़करी ने भी बयान दिया था। जिसमें कहा था कि भारत में भी 25 साल या उससे अधिक समय तक चलने वाली सड़कें बन सकती हैं। लेकिन अधिकारियों व ठेकेदारों की मिलीभगत से ऐसा नहीं हो पा रहा है। बार-बार सड़कें खराब होंगी तभी तो सभी का काम चलेगा। </p>
<p><strong>आचार संहिता से पहले बनाई थी कई सड़कें</strong><br />कोटा विकास प्राधिकण(पूर्व नगर विकास न्यास) की ओर से शहर में कई सड़कें तो विधानसभा चुनाव की आचार संहिता लगने से पहले ही बनाई थी। सितम्बर 2023 में चम्बल रिवर फ्रंट व आॅक्सीजोन जैसे विश्व स्तरीय पर्यटन स्थलों के उद्घाटन समारोह में मुख्यमंत्री और देशी विदेशी राजदूतों के आने की संभावना को देखते हुए सड़कों की दशा सुधारी गई थी। एलबीएस मार्ग की सड़क तो पूरी ही नहीं बनी थी। उसके अलावा मेन रोड की अधिकतर सड़कों पर डामर की मोटी परत चढ़ाकर बनाया गया था। लेकिन उसके बाद पहली बरसात में ही अधिकतर सड़कों की हालत ऐसी हो गई कि उन पर चलना ही मुश्किल हो रहा है। </p>
<p><strong>यहां भी हालात खराब</strong><br />नयापुरा बाग स्कूल के पास का क्षेत्र हो या विवेकानंद सर्किल का। नई धानमंडी से एयरपोर्ट लिंक रोड हो या विज्ञान नगर डिस्पेंसरी रोड, राजीव प्लाजा रोड, अशोक पार्क रोड, पीएनटी कॉलोनी रोड,  डीसीएम मेन रोड, रायपुरा रोड, देवली अरब रोड तक पर कई जगह गड्ढ़े हैं तो कई जगह पर डामर उखड़ने से गिट्टी फेली हुई है। ऐसे में उनसे बचने के प्रयास में वाहन चालक फिसलकर गिर रहे हैं और हादसों का शिकार हो रहे हैं। </p>
<p><strong>अधिकारियों की अनदेखी व भ्रष्टाचार का खेल</strong><br />दादाबाड़ी निवासी नितन मालव ने कहा कि हर साल सड़कें खराब होने का कारण संबंधित विभागों के अधिकारियों की अनदेखी और भ्रष्टाचार का खेल है। अधिकारी संवेदकों के भरोसे सड़कें बनाने का काम छोड़ देते हैं। संवेदक श्रमिकों के भरोसे रह जाते हैं।  हालत यह है कि न तो अधिकारी और न ही इंजीनियर मौके पर जाकर सड़कों को बनता हुआ देखते हैं। जिससे अधिकतर सड़कों की हालत खराब हो रही है। वहीं अधिकतर संवेदक कम रेट में ठेके तो ले लेते हैं लेकिन उसमें भी कमीशन का खेल होने से सही मेटेरियल का उपयोग नहीं किया जाता। जिससे सड़कें निर्धारित से कम समय में ही खराब हो रही हैं। महावीर नगर निवासी असरगर अली कहना है जबकि विदेशों  में जो सड़कें बन रही हैं वह इतनी मजबूत होती हैं कि बरसों तक खराब नहीं होती। वैसे ही सड़कें कोटा व देश में भी बनाई जा सकती हैं लेकिन नहीं बन पाती। करोड़ों रुपए खर्च होने के बाद भी जनता को ही परेशानी भुगतनी पड़ रही है। बरसात  में गड्ढ़ों में पानी भरने से उनके नजर नहीं आने या उन गड्ढ़ों से बचने के प्रयास में वाहनों के आपस में टकराने से होने वाले हादसों  का शिकार आमजन ही हो रहा है। </p>
<p><strong>फ्लाई ओवर तक बदहाल</strong><br />मेन रोड ही नहीं ल्लाई ओवर व आरओबी तक  बदहाल हो रहे हैं। नयापुरा स्थित चम्बल की नई पुरानी दोनों पुलिया,बैराज के समानांतर पुलिया व संजय नगर आरओबी और गुमानपुरा फ्लाई ओवर तक पर जगह-जगह बड़े गड्ढ़े हो रहे हैं। जबकि इनमें से ’यादातर सड़कें पहली बरसात ही नहीं झेल पाई। नयापरिा चम्बल पुलिया पर तो पूरा डामर ही उखड़ गया। जिससे नीचे की सरिये तक नजर आ गए हैं। </p>
<p><strong>मजबूती के लिए बनाई सीसी रोड तक बदहाल</strong><br />बरसात के समय में हर साल डामर की सड़कें खराब होती हैं। ऐसे में उसके स्थायी समाधान के लिए पिछली कांग्रेस सरकार में शहर में अधिकतर सीसी रोड बनाई गई थी। लेकिन हालत यह है कि कहीं सीवरेज लाइन डालने के लिए तो कहीं पानी की लाइन डालने और कहीं केबल डालने के लिए सीसी रोड तक को खोद दिया गया। जिससे वे भी बदहाल हो गई हैं। विज्ञान नगर मुक्तिधाम से पीएफ आॅफिस के सामने वाली रोड, धानमंडी डाकघर रोड व नयापुरा समेत कई क्षेत्रों की सीसी रोड की यही हालत है।  </p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />विदेशों की तरह कोटा व राजस्थान में भी टिकाऊ सड़कें बनती हैं।  लेकिन बरसात के समय हर साल डामर की कुछ सड़कें खराब होती ही हैं।  पानी को डामर का दुश्मन कहते हैं। बरसात में सड़कों में पानी भरने से डामर उखड़ जाता है। इसलिए ही उनकी मरम्मत का प्रावधान रखा जाता है। वैसे सारी सड़कें खराब नहीं होती है। <br /><strong>- शांति धारीवाल, पूर्व मंत्री विधाजक, कोटा उत्तर </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 10 Aug 2024 15:09:16 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>अब मुकुंदरा टाइगर रिजर्व में जड़ से उखाड़ा जाएगा जूली फ्लोरा</title>
                                    <description><![CDATA[वन्यजीवों के लिए नासूर बना कांटों का पेड़, जख्मी हो रहे जानवर
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/now-julie-flora-will-be-uprooted-from-the-root-in-mukundra-tiger-reserve/article-84761"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-07/54.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व में वन्यजीवों के लिए नासूर बना जूली फ्लोरा को बड़े पैमाने पर अब जड़ समेत उखाड़ा जाएगा। इसकी जगह ग्रास लैंड विकसित किया जाएगा। इसके लिए वन विभाग से मुकुंदरा प्रशासन को लाखों का बजट मिला है। विभाग ने टेंडर जारी कर दिए हैं। जल्द ही विलायती बबूल को जड़ समेत उखाड़ फैंकने का कार्य शुरू हो जाएगा। जुली फ्लोरा से न केवल शाकाहारी वन्यजीवों का भोजन समाप्त हो रहा है बल्कि प्रे-बेस पर भी विपरीत असर पड़ रहा है।</p>
<p><strong>25 लाख का मिला बजट </strong><br />मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व के दरा अभयारणय में करीब 2 वर्ग किमी के एरिया में जूली फ्लोरा फैला हुआ है। सावनभादौ डेम की डाउन स्ट्रीम की तरफ बबूल घना हो गया है। जिसे जड़ समेत उखाड़ने के लिए विभाग को 25 लाख का बजट मिला है। विभाग ने इसके टैंडर प्रक्रिया भी कर दी है। जल्द ही जूली फ्लोरा हटाने का कार्य शुरू हो जाएगा। डेम की ओर जूली फ्लोरा इतना घना हो चुका है कि वन्यजीवों की साइटिंग तक नहीं होे पाती। वहीं, जूली फ्लोरा न केवल स्थानीय वनस्पति को नष्ट कर रहा है, बल्कि बाघ एवं अन्य वन्यजीवों के लिए भी खतरनाक साबित हो रहा है।जमीन को कर देता है बंजर : वनाधिकारियों की माने तो जूली फ्लोरा एक प्रकार का जंगली पौधा है। इससे लाभ की अपेक्षा नुकसान अधिक है। जिस क्षेत्र में जूली फ्लोरा अधिक हो जाता है वहां की जमीन को यह धीेरे-धीरे बंजर कर देता है। ऐसे में जंगल के जिस क्षेत्र में जूली फ्लोरा अधिक होता है। वहां पर ग्रास लैण्ड समाप्त हो जाता है। इससे वन्यजीवों का भोजन समाप्त होने से उन्हें परेशानी होती है। जिसका असर प्रे-बेस पर पड़ता है। </p>
<p><strong>बाघिन एमटी-4 का पैर हो गया था जख्मी</strong><br />जानकारी के अनुसार, मुकुंदरा में अक्टूबर 2020 में बाघिन एमटी-4 का पैर कांटा लगने जख्मी हो गया था। जिसके इलाज के लिए पशु चिकित्सा एवं अनुसंधान संस्थान इज्जतनगर बरेली से विशेषज्ञ बुलाए गए थे। इलाज के लिए उसे अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क में लाया गया था। पैर में घाव होने से वह काफी दिनों से लंगड़ाकर चल रही थी। तब विशेषज्ञों की निगरानी में चिकित्सकों ने लेजर थैरेपी देकर इलाज किया था। इसके अलावा जंगल में कई वन्यजीव कांटे लगने से जख्मी हो जाते हैं। </p>
<p><strong>2 वर्ग किमी में डवलप करेंगे ग्रासलैंड </strong><br />मुकुंदरा टाइगर रिजर्व के डीएफओ अभिमन्यू सहारण ने बताया कि दरा सेंचुरी में 2 वर्ग किमी के एरिया में जूली फ्लोरा को जड़ समेत उखाड़ा जाएगा। इसकी जगह ग्रासलैंड विकसित करने के लिए बीजारोपण किया जाएगा। इससे शाकाहारी वन्यजीवों के लिए पर्याप्त भोजन उपलब्ध हो सकेगा। जिससे जानवरों की संख्या में बढ़ोतरी होगी। वहीं, वन्यजीवों की मॉनिटरिंग व साइटिंग भी आसानी से हो सकेगी। </p>
<p><strong>10 साल होती उम्र</strong><br />वनकर्मियों ने बताया कि विलायती बबूल की उम्र करीब 10 वर्ष होती है। यह तने से काटनेभर से ही खत्म नहीं होता बल्कि इसे पूरी तरह से खत्म करने के लिए जड़ से उखाड़ा जाना आवश्यक है। अब तक केवल इसे तने तक ही काटा जा रहा है। वहीं इसकी लम्बाई भी करीब 8 से 10 फीट होती है। यह पेड़ अपने आसपास किसी भी वनस्पति को पनपने नहीं देता। </p>
<p><strong>वन्यजीवों के लिए घातक जूली फ्लोरा</strong><br />मुकंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व में जूली फ्लोरा का दायरा तेजी से बढ़ रहा है। इससे बाघों की मॉनिटिरिंग पर भी असर पड़ रहा है। वहीं, दूसरी ओर इसके असर से बाघों के प्रे-बेस के लिए ग्रासलैंड पर भी खतरा होने लगा है। स्थिति यह है कि बबूल की दरा एरिया में अधिकता होने से वन्यजीवों की दूर से साइटिंग नहीं हो पा रही। एक्सपर्ट का कहना है कि इसके असर से शाकाहारी वन्यजीव चीतल, नील गाय, चिंकारा के लिए चारे की समस्या तक हो जाती है। साथ ही धीरे-धीरे इस वनस्पति के असर से ग्रासलैंड पनप नहीं पाता। </p>
<p><strong>जानवरों की जान भी जा सकती है</strong><br />जूली फ्लोरा यानी विलायती बबूल आसानी से ग्रोथ कर लेता है। उसे जिनता काटा जाए वह तेजी से फैलाव लेते हुए बढ़ता है। ऐसे में उसको जड़ से निकालकर ही नष्ट किया जा सकता है। जूली फ्लोरा का सबसे बड़ा नुकसान वाइल्ड लाइफ को है। जूली फ्लोरा का कांटा जंगली जानवर के पैर में लग जाए तो पैर सड़ा देता है, जिससे जानवर की मृत्यु भी हो सकती है।  <br /><strong>- देवव्रत सिंह हाड़ा, अध्यक्ष पगमार्क फाउंडेशन </strong></p>
<p>मुकुंदरा में जूलीफ्लोरा तेजी से फैल रहा है। ये स्थानीय वनस्पति को नष्ट कर रहा है। बाघों सहित अन्य वन्यजीवों के लिए भी घातक है। एक बार जहां उगता है, इसके बाद ये बढ़ता ही जाता है। जमीन के पौषक तत्वों को भी खत्म कर रहा है। जूली फ्लोरा का कांटा जानवरों के लिए नुकसान दायक है। समय रहते इसकी रोकथाम जरूरी है।<br /><strong>- एएच जैदी, नेचर प्रमोटर </strong></p>
<p><strong>कई टाइगर हो चुके जख्मी</strong><br />जूलीफ्लोरा का कांटा मोटा होता है, जो बाघों व वन्यजीवों के लिए खतरनाक है। कांटा लगने से देश के अन्य टाइगर रिजर्व में कई बाघ जख्मी भी हो चुके हैं। यह वनस्पति को मिलने वाले पानी व खाद सोखकर खुद का पोषण करता है। जिससे दूसरा पौधा कमजोर पड़ जाता है। गर्मियों में गहरा हरा हो जाता है, तब भी इसकी मजबूत जड़ें जमीन का पानी सोख लेती है, जो जमीन के लिए भी नुकसानदायक है।<br /><strong>- रवि नागर, रिसर्चर वाइल्ड लाइफ</strong></p>
<p>मुकुंदरा की दरा रेंज में जुली फ्लोरा को जड़ समेत उखाड़ा जाएगा।  इसके लिए 25 लाख का बजट मिला है। टेंडर प्रक्रिया भी कर दी गई है। इसकी जगह ग्रासलैंड विकसित करेंगे। ताकि, शाकाहारी जानवरों के लिए भोजप उपलब्ध होगा, जिससे प्रे-बेस बढ़ेगा। जंगल के विकास के लिए हमारी ओर से लगातार प्रयास किए जा रहा है। <br /><strong>- अभिमन्यू सहारण, उपवन संरक्षक, मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 15 Jul 2024 17:22:32 +0530</pubDate>
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                <title>बदहाल सड़क के कारण तीन किलोमीटर का सफर एक घंटा में हो रहा पूरा  </title>
                                    <description><![CDATA[कुछ स्थानों पर तो सड़क का नामोनिशान तक नहीं रहा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/due-to-bad-condition-of-the-road--the-journey-of-three-kilometers-is-completed-in-one-hour/article-72579"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-03/1111.png" alt=""></a><br /><p>कसार। कसार कस्बे से दो गांवों को जोड़ने वाली तीन किलोमीटर की सड़क पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई है। जिस कारण रोजाना दोपहिया वाहन चालक गिरकर चोटिल हो रहे है। जानकारी अनुसार कसार से रांक्याखेड़ी रामनगर गांव की और जाने वाली सड़क पूरी तरह उखड़ गई है और 3 किलोमीटर की दूरी किसी वाहन से तय करने में आधे घंटे से भी अधिक समय लगता है। कुछ स्थानों पर तो सड़क का नामोनिशान तक नहीं रहा। जगह-जगह गहरे गड्डे हो गए हैं। दुपहिया वाहन चालक आए दिन गिरकर दुर्घटना का शिकार हो रहे हैं। वही इस सड़क से गुजरते बड़े वाहनों से उड़ते धूल के गुब्बारों से दुपहिया चालकों की हालत खराब हो जाती है। इन सड़क का निर्माण कई साल पहले किया गया था मगर क्षेत्र में पत्थर एवं अवैध रूप से मिट्टी खनन के बाद माल लेकर जाने वाले ओवरलोड वाहनों के कारण सड़क धीरे धीरे टूटती चली गई और अब ग्रामीणों के सामने गंभीर समस्या खड़ी हो गई है। </p>
<p><strong>फैली गिट्टी भी दुर्घटना का कारण</strong><br />वही ग्रामीणों का कहना है कि कुछ समय पहले चुनाव के समय सड़क निर्माण कार्य शुरू किया गया था और निर्माण कार्य करने वाली कंपनी ने बची सड़क को खोद कर पूरे मार्ग में गिट्टी डाल दी थीं लेकिन किसी वजह से निर्माण कार्य बंद कर दिया गया और अब मार्ग में फैली गिट्टी भी दुर्घटना का कारण बनी हुई है व रोजाना आवाजाही करने वाले दोपहिया वाहन चालक गिरकर चोटिल हो रहे है। वहीं गावों में इसी कारण डिलेवरी के समय एम्बुलेंस आदि इमर्जेंसी सेवा भी समय पर नही पहुंच पाती और अगर पहुंच भी जाती है तो रास्ते मे ही प्रसव हो जाते है। क्योंकी रास्ते में इतना खराब है कि डिलेवरी के समय इतनी पीड़ा सहन नहीं कर पाती है और ग्रामीणों के सामने गंभीर समस्या खड़ी हो जाती है। जिस कारण ग्रामीणों ने विभाग से सड़क बनवाने की मांग की है। कसार कस्बे में बालकों को स्कूल भेजते है तो सड़क खराब होने के कारण उनका भी दुर्घटना होने का भय रहता है। जिस कारण आधे समय बच्चे भी स्कूल नही जाते। </p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />इस समस्या को लेकर हमने कई बार चुनाव के समय आने वाले जनप्रतिनिधियों से भी शिकायत की है लेकिन चुनाव न होने तक तो आश्वासन देते रहते है और चुनाव जीत जानें के बाद हम लोगों को भूल जाते है और समस्या का समाधान भी नहीं करवाते। <br /><strong>- गोविंद मेघवाल, ग्रामीण।    </strong>    </p>
<p>गांव से रोजाना संैकडों लोग मजदूरी करने कसार कस्बे की और जाते है लेकिन सड़क पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो जाने के करण 10 मिनट के रास्ते में हमे पहुचने में करीब एक घंटा लग जाता है। <br /><strong>- गोलू मेघवाल, ग्रामीण।  </strong>  </p>
<p>गांव में आने वाली सड़क पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो जानें के कारण रात को दुर्घटना के समय इमरजेंसी सेवा भी समय पर गांव में नही पहुंच पाती। जिस कारण हमारे सामने गंभीर समस्या खड़ी हो जाती है।  <br /><strong>- दिलीप मेघवाल, ग्रामवासी।   </strong> </p>
<p>मैनें उच्च अधिकारियों से बात की है। सड़क का बजट रखा हुआ है और दस से पंद्रह दिन के अंदर डामर रोड निर्माण रोड कार्य शुरू हो जाएगा। <br /><strong>- नमोनारायण राय, एक्सईएन, पीडब्ल्यूडी विभाग, डिवीजन कोटा। </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 13 Mar 2024 19:09:17 +0530</pubDate>
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                <title>नवीन चिकित्सालय में अव्यवस्थाएं दिखा रही अपना रंग</title>
                                    <description><![CDATA[अस्पताल में कई वार्ड ऐसे हैं जिनमें बिजली के बोर्ड या तो खुले पड़े हैं या उनके तार बाहर निकले हुए हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/disorders-are-showing-their-colors-in-the-new-hospital/article-67813"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-01/naveen-chikitsalye-me-avyavsthaye-dikha-rhi-apna-rang...kota-news-22-01-2024.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर में मेडिकल कॉलेज नवीन चिकित्सालय में रोज हजारों लोग ईलाज कराने आते हैं, और हजारों मरीज अस्पताल में भर्ती रहते हैं। वर्ष 2008 से संचालित ये अस्पताल नए कोटा के निवासियों के लिए ईलाज मुहैया कराता है। लेकिन गुजरते सालों के साथ इस अस्पताल में भी अव्यवस्थाओं ने अपना घर बना लिया हैं जहां अस्पताल का एक भी कोना ऐसा नहीं हैं जहां गुटखे के निशान ना हो। वहीं अस्पताल में आग लगने के समय में काम आने वाली रेत की बाल्टियों तक में गुटखा खाने वालों ने अपने निशान छोड़ रखे हैं। जिनके आगे अस्पताल प्रशासन एक दम कमजोर दिखता नजर आता है। वहीं अस्पताल में मौजूद तीन लिफ्टों में से एक लिफ्ट तो कई सालों से बंद पड़ी है। इसके अलावा अस्पताल में जगह जगह कबाड़ ईकठ्ठा किया हुआ है जो सांप व जहरीले कीटों का घर बना हुआ है। इन सबके अलावा अस्पताल में मौजूद वार्डों में बिजली के बोर्ड तक उखड़े पड़े हैं। जिनसे कभी कोई बड़ा हादसा हो सकता है। </p>
<p><strong>गुटखा पीकने वालों पर कारवाई क्यों नहीं</strong><br />अस्पताल में रोज हजारों मरीज अपना इलाज कराने आते हैं, लेकिन कुछ गुटखा खाने वाले लोग यहां वहां गुटखा पीकते देते हैं जो अस्पताल को दिन प्रतिदिन गंदा बनाता जा रहा है। वहीं गुटखा पीकने वालों पर अस्पताल प्रशासन न तो कोई कारवाई करता है और ना ही उसकी सफाई करवाता है।</p>
<p><strong>वार्डों में लगे बिजली बोर्ड खुले पड़े</strong><br />अस्पताल में कई वार्ड ऐसे हैं जिनमें बिजली के बोर्ड या तो खुले पड़े हैं या उनके तार बाहर निकले हुए हैं। खुले पड़े इन बोर्डों से कभी भी कोई भी हादसा हो सकता है या बिजली की चपेट में आ सकता है। अस्पताल के पोस्ट गायनिक वार्ड मेडिसिन यूनिट ए और बी, सायकेट्रिक वार्ड सहित कई वार्ड में बिजली के बोर्ड या तो खुले पड़े हैं या उनके तार बाहर निकले पड़े हैं। </p>
<p><strong>जगह जगह पीक से हो रही गंदगी</strong><br />अस्पताल के अधीक्षक कक्ष के बाहर आपको एकदम चकाचक साफ सफाई और व्यवस्था मिलेगी। लेकिन जैसे ही आप अस्पताल के दूसरे भागों में जाएंगे तो कदम कदम पर गुटखा खाने वालों ने पीक करके उसे लाल किया हुआ है। गुटखे निशान से गंदगी तो होती ही है साथ ही ये बदबू भी पैदा करते हैं। जो मरीजों के लिए बीमारी में और परेशानी खड़ी कर देते हैं। अधिकारियों और कर्मचारियों ने अपने कक्षों के बाहर की सफाई व्यवस्था को तो ठीक किया हुआ है लेकिन मरीजों और तीमारदारों को बदबू में परेशान होने के लिए छोड़ रखा है। वहीं अस्पताल प्रथम तल पर पोस्टगायनिक वार्ड के बाहर एक निजी संस्था द्वारा लगाए गए वाटर कुलर पर अस्पताल प्रशासन ने चालू न करके उस पर कई महीनों से ताला जड़ा हुआ है जिसके कारण तीमारदारों को पानी भरने के लिए बार बार नीचे आना जाना पड़ता है।</p>
<p><strong>तीन में से एक लिफ्ट महीनों से बंद</strong><br />रंगबाड़ी स्थित अस्पताल में मरीजों की सुविधा के लिए तीन लिफ्ट मौजूद हैं लेकिन उनमें से एक लिफ्ट कई महीनों से बंद पड़ी है जिसको चलाने के लिए भी अस्पताल प्रशासन की योजना नहीं है। लिफ्ट के बंद होने से मरीजों और तीमारदारों को पूरे अस्पताल का चक्कर लगाकर दूसरी लिफ्ट से जाना पड़ता है। इस लिफ्ट के पास मेडिसिन और साइकेट्रिक जैसे वार्ड हैं जिनके मरीजों को नीचे आने के लिए दूसरी लिफ्ट का उपयोग करना पड़ता है। इसके अलावा पोस्ट गायनिक वार्ड के बाहर स्थित आरओ व वाटर कूलर को भी प्रशासन द्वारा बंद करके उस पर ताला जड़ा हुआ है जिससे वाटर कूलर व आरओ होने के बावजूद तीमारदारों को पानी भरने के लिए नीचे वाले तल पर जाना पड़ता है।</p>
<p><strong>मरीजों व तीमारदारों कहना है...</strong><br />गुटखे के निशानों ने पूरे अस्पताल को गंदा किया हुआ है इनकी वजह से बदबू अलग बनी रहती है अस्पताल प्रशासन झाडू तो लगावाता है लेकिन  इनकी धुलाई नहीं करवाता और ना ही इन पर कारवाई करता है। <br /><strong>- बृजेश सुमन, तीमारदार</strong></p>
<p>पीछे वाली लिफ्ट बंद है मेरा भाई यहीं मेडिसिन वार्ड में भर्ती है उसे नीचे लाने ले जाने के लिए गायनिक वार्ड तक जाना पड़ता है क्योंकि लिफ्ट वहीं है। <br /><strong>- नंदलाल वैष्वण, तीमारदार</strong></p>
<p>वार्ड में लगे बिजली के बोर्ड खुले पड़े हैं कई बार अस्पताल प्रशासन को बोला पर कहते हैं बजट आने पर होगा अब ऐसे में कभी भी हादसा हो सकता है। <br /><strong>- लीलावती मीणा, पोस्ट गायनिक वार्ड</strong></p>
<p>अस्पताल की साफ सफाई पूर्ण रूप से की जाती है गुटखा थूकते पाए जाने पर जुर्माना भी लगाया जाता है। लिफ्ट और वाटर कूलर को चालू करने के लिए उच्च स्तर पर पत्र लिखकर मांग की हुई है। वहीं बिजली बोर्ड को ठीक कराने के लिए सार्वजनिक निर्माण विभाग को पत्र लिखकर बजट की मांग की हुई बजट आते ही ठीक करवा दिया जाएगा।<br /><strong>- आरपी मीणा, अधीक्षक, नवीन चिकित्सालय कोटा </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 22 Jan 2024 20:07:52 +0530</pubDate>
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                <title>चुनाव से पहले बनी सड़कों का डामर उधड़ा</title>
                                    <description><![CDATA[सड़कों का डामर उधड़ा और गिट्टी फेल रही है, शहर में अधिकतर सड़कों की यही हालत है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/asphalt-of-roads-built-before-elections-torn-up/article-64548"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-12/चुनाव-से-पहले-बनी-सड़कों-का-डामर-उधड़ा.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। एक तरफ तो शिक्षा नगरी को पर्यटन नगरी के रूप में विकसित किया जा रहा है। जहां उम्मीद की जा रही है देशी ही नहीं विदेशी पर्यटक भी यहां आकर विकास को देखे। वहीं दूसरी तरफ सड़कों की हालत इतनी खराब है कि विधानसभा चुनाव से पहले बनी सड़कों का डामर ही उखड़ गया। जिससे हादसों का खतरा बना हुआ है।  शहर में पहले जहां सड़कें बनाने का काम सार्वजनिक निर्माण विभाग का था। वह काम अब अधिकतर नगर विकास न्यास के माध्यम से किया जा रहा है। शहर के मुख्य मार्गों की और डिवाइडर साइड की सभी प्रमुख सड़कों को बनाने का काम नगर विकास न्यास ने किया। जबकि शहर के अंदरूनी इलाकों व वार्डों  में सड़कें बनाने का काम नगर निगम कर रहा है। दीपावली और विधानसभा चुनाव से पहले न्यास की ओर से शहर में अधिकतर जगहों पर डामर की नई सड़कें बनाई गई थी। लेकिन हालत यह है कि नवम्बर के अंतिम सप्ताह में हुई बारिश से अधिकतर सड़कों का डामर उखड़ गया है। जिससे सभी जगहों पर सड़कों पर गिट्टी फेल रही है। ऐसे में वहां से गुजरने वाले वाहनों विशेष रूप से दो पहिया वाहन चालकों के फिसलने  व दुर्घटनाग्रस्त होने की घटनाएं हो रही हैं। </p>
<p><strong>प्रवेश चौराहा नयापुरा की हालत खराब</strong><br />शहर में अधिकतर सड़कों की यही हालत है। शहर के प्रवेश चौराहा नयापुरा स्थित विवेकानंद सर्किल की सड़क की कई बार बनाया जा चुका है। यहां तक कि इस सड़क को खोदकर उस पर कई लेयर की परत चढ़ाकर सड़क बनाई गई है। लेकिन हालत यह है कि चौराहे के आस-पास की अधिकतर सड़क का डामर उखड़ गया। जिससे वहां गिट्टी फेली हुई है। यहां आए दिन हादसे होने के बाद न्यास ने उस पर डामर कर पेचवर्क की लीपापोती की है। जिससे उस नई सड़क की दुर्दशा हो गई है। चौराहा चारों तरफ से तो हैरीटेज लुक में नजर आ रहा है जबकि सड़क की हालत उसकी दुर्दशा बयां कर रही है।</p>
<p><strong>एसपी आॅफिस रोड भी बदहाल</strong><br />नगर विकास न्यास की ओर से विधानसभा चुनाव से पहले ही एसपी आॅफिस से माला रोड की तरफ डामर की सड़क बनाई थी। लेकिन हालत यह है कि एसपी आॅफिस चौराहे से लेकर एसपी के बंगले तक की सड़क का डामर उखड़ गया है। जिससे वहां से वाहनों के निकलने पर दुर्घटना का खतरा बना हुआ है। इसी तरह अंटाघर चौराहे पर नयापुरा की तरफ से आने पर निजी स्कूल के सामने की तरफ की सड़क बदहाल हो रही है।  </p>
<p><strong>जे.के. लोन मोड पर खोदी सड़क</strong><br />नयापुरा में मेन रोड की डामर सड़क को कुछ समय पहले ही बनाया गया है। यह सड़क दो से तीन बार मोटी परत वाली बनाई गई थी। लेकिन हालत यह है कि जे.के. लोन अस्पताल मोड के पास नाले व सीवरेज का काम चल रहा है। जिससे सड़क को बीच से ही खोदा हुआ है। नयापुरा थाने से कलक्ट्रेट की तरफ और जे.के. लोन अस्पताल की तरफ जाने वाले रास्ते पर खुदी सड़क की मिट्टी का ढेर लगा हुआ है। जिससे दिनभर ट्रैेफिक जाम के साथ ही वाहन चालकों को निकलने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। लोगों का कहना, जनता के धन की बर्बादी: लोगों का कहना है सड़कें बनाने के बाद उन्हें बार-बार खोदकर जनता के धन की बर्बादी की जा रही है। नयापुरा निवासी शालिनी पारीक का कहना है कि विभागों में समंवय नहीं है। यही कारण है कि हर विभाग द्वारा एक ही जगह पर बार-बार काम करने के लिए सड़कों को खोदा जाता है। जिससे जनता के धन की बर्बादी हो रही है। शॉपिंग सेंटर निवासी राहुल जैन ने बताया कि सड़क बनाने वाली एजेंसी को चाहिए कि वह संवेदक द्वारा किए जा रहे काम की समय-समय पर मॉनिटरिंग करे। इंजीनियरों की निगरानी में सड़कें बनाई जाए। जिससे मजबूत काम हो। डामर की सड़क बनाने के बाद कई साल तक वह खराब नहीं होनी चाहिए। जबकि वह महीने-दो महीने या एक जरा सी बरसात में ही खराब हो रहे हैं। स्टेशन निवासी मोहम्मद आरिफ का कहना है कि सड़क निर्माण में भ्रष्टाचार किया जा रहा है। तभी तो उसमें सही मेटेरियल का उपयोग नहीं होने से ही सड़कें कुछ ही समय में उखड़ रही हैं। </p>
<p><strong>यहां भी यही हालत</strong><br />शहर के बीच शॉपिंग सेंटर स्थित लाला लाजपतराय सर्किल पर कुछ समय पहले ही डामर की नई सड़क बनाई गई थी। साथ ही उसके आस-पास सीसी रोड बनाई गई थी। लेकिन हालत यह है कि सर्किल के पास की मुख्य सड़क को पाइप लाइन के लिए खोदकर पटक दिया। जिसे दोबारा सही नहीं करने से यहां आए दिन हादसे हो रहे हैं। इसी तरह से एरोड्राम सर्किल के ऊपर नयापुरा से झालावाड़ और झालावाड़ से नयापुरा की तरफ जाने वाली दोनों सड़कों का डामर उखड़ा हुआ है। जिससे यहां गड्ढ़े हो रहे हैं। ऐसे में यहां से गुजरने वाले अधिकतर वाहन चालकों के लिए दुर्घटना का खतरा बना हुआ है। </p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />शहर में जहां भी सड़कें खराब थी उन्हें सही किया गया था। बरसात के समय हो सकता है कई सड़कों का डामर उखड़ गया हो। उनकी जानकारी कर सही करवा दिया जाएगा। जहां बड़े-बड़े गड्ढ़े हो रहे हैं और हादसों का खतरा है वहां पेंचवर्क किया जा रहा है। <br /><strong>- मानसिंह मीणा, सचिव, नगर विकास न्यस  </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 19 Dec 2023 17:10:20 +0530</pubDate>
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                <title>साढ़े 13 लाख रुपए से भरा एटीएम  उखाड़ ले गए चोर</title>
                                    <description><![CDATA[पुलिस अधीक्षक जय यादव ने बताया कि मामले में एक व्यक्ति को डिटेन कर लिया है। एटीएम भी बरामद हो गया है। घटना को तीन से चार लोगों ने मिलकर अंजाम दिया है। मामले में पुलिस अन्य आरोपियों की तलाश जुटी हुई है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/thieves-uprooted-atm-full-of-13-5-lakh-rupees/article-42797"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-04/bob.png" alt=""></a><br /><p>लाखेरी । बूंदी जिले के लाखेरी में बॉटम लेवल में मुख्य सडक मार्ग पर बैंक आॅफ बड़ौदा के एटीएम को  गुरूवार रात  चोर उखाड़ कर ले गए।  बैंक अधिकारी की सूचना  के आधार पर एटीएम में करीब साढे तेरह लाख रुपए की राशि होने का अनुमान है। पुलिस के अनुसार घटना रात ढाई से साढे़ तीन बजे के बीच होने का अनुमान है। अज्ञात चोर एक मारूति वैन में आए और उन्होंने एटीएम परिसर के शटर के ताले तोड़े और अंदर प्रवेश किया । शटर को डाउन करके एटीएम को उखाड़ा और मारूति वैन में रखकर ले गए । घटना का पता स्थानीय पुलिस को पुलिस कंट्रोल रूम से चला ।  जब चोरों ने एटीएम के तार काटे तो एटीएम कंट्रोल रूम को जानकारी मिलने पर  उन्होंने इसकी सूचना बड़ौदा बैंक चीफ प्रबंधकों को दी । सूचना के बाद रात्रि के समय बैंक अधिकारी पहुंचे। उस दौरान पुलिस मौके पर पहुंची । बैंक की सूचना के आधार पर  एटीएम में करीब साढ़े तेरह लाख रुपए की राशि होने का अनुमान है।</p>
<p>वारदात को देखते हुए उप पुलिस अधीक्षक निशांत जाखड़ ने अपनी टीम को  सक्रिय करते हुए  आस पास के सीसीटीवी फुटेज खंगालना शुरू किया। उसी के आधार पर उनियारा के सोंप थाना क्षेत्र में पुलिस को एटीएम का खोल मिल गया व एक आरोपी को डिटेन भी किया है। एटीएम की घटना से ऐसा प्रतीत होता है। अपराधी इस मामलें के विशेषज्ञ है और उन्होंने पहले पूरी रैकी की थी। रात 10 बजे एटीएम के ताले लग जाते है। अंबेडकर जयंती की छुट्टी की वजह से बैंक ने पर्याप्त नकद रखा था। चोरों को यह भी अनुमान था की पुलिस का गश्ती वाहन निकलने के बाद कितनी देर में वापस दोबारा गुजरता है। इन्ही सब को ध्यान में रखते हुए वारदात को अंजाम दिया गया। पुलिस की सूचना के बाद शुक्रवार सुबह जयपुर से  फोरेसिंक टीम भी मौके पर पहुंची। उन्होंने एटीएम परिसर का निरीक्षण करते हुए बारीकी से जांच करते हुए फिंगरप्रिंट व अन्य साक्ष्य जुटाए।</p>
<p>पुलिस अधीक्षक जय यादव ने बताया कि मामले में एक व्यक्ति को डिटेन कर लिया है। एटीएम भी बरामद हो गया है। घटना को तीन से चार लोगों ने मिलकर अंजाम दिया है। मामले में पुलिस अन्य आरोपियों की तलाश जुटी हुई है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बूंदी</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 14 Apr 2023 16:27:37 +0530</pubDate>
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                <title>चार किलोमीटर लम्बी सड़क दो माह में ही उखड़ी, ग्रामीणों में रोष </title>
                                    <description><![CDATA[ दो महीने में ही सड़क पूरी तरह से उखड़ गई और जगह-जगह गड्ढे हो गए। सड़क जगह-जगह से टूट गई है। डामर उखड़ने से सड़क में गड्ढे बन गए हैं। सड़क के किनारों की हालत तो सबसे ज्यादा खराब हो रही है। किनारों से गिट्टी निकल रहीं है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/baran/four-kilometer-long-road-uprooted-in-two-months--fury-among-villagers/article-30051"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-11/4-km,-lambi-sadak-do-maah-mei-hi-ukhdi,-gramino-mei-rosha-...-samraniya-news-baran-18.11.2022.jpg" alt=""></a><br /><p>समरानियां। समरानियां से नारायणखेड़ा के लिए बनी चार किलोमीटर लंबी सड़क दो माह भी नहीं टिक पाई पिछले कई सालों से सड़क की हालत बेहद जर्जर थी। यह सड़क मध्यप्रदेश की सीमा से जुड़कर मध्यप्रदेश के कई गांवों को जोड़ती है। इस सड़क के माध्यम से स्थानीय लोगों के साथ साथ मध्य प्रदेश के लोगों का समरानियां कस्बे में अधिकतर आना जाना रहता है। जिससे सड़क पर वाहनों का आवागमन ज्यादा रहता है। दर्जनों गांवों के लोग इसी सड़क का रोजाना इस्तेमाल करते हैं। काफी शिकायतों के बाद करीब पांच माह पूर्व सड़क का निर्माण कार्य शुरू हुआ। सड़क निर्माण के बाद लोगों ने कुछ राहत महसूस की,परंतु लोगों को यह राहत ज्यादा दिन नसीब नहीं हुई। दो महीने में ही सड़क पूरी तरह से उखड़ गई और जगह-जगह गड्ढे हो गए। सड़क जगह-जगह से टूट गई है। डामर उखड़ने से सड़क में गड्ढे बन गए हैं। सड़क के किनारों की हालत तो सबसे ज्यादा खराब हो रही है। किनारों से गिट्टी निकल रहीं है। गिट्टी के कारण दुपहिया वाहन सवार राहगीर जख्मी हो सकते हैं। अब इस सड़क पर पैचवर्क किया जा रहा है। निर्माण के पांच महीने बाद पैचवर्क होने से ग्रामीणों में रोष फैल रहा है। उनका आरोप है कि सड़क बनाने में गुणवत्ताहीन निर्माण सामग्री का इस्तेमाल किया गया है। इस कारण निर्माण के दो महीने बाद ही सड़क उखड़ गई। अब उसे छिपाने के लिए अधिकारी पैचवर्क करा रहे हैं। इस मामले की उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए।</p>
<p>ग्रामीण आशु मेहता ने बताया कि यह सड़क निर्माण के कुछ दिन बाद ही जगह जगह उखड़ गई। आरोप लगाया कि सड़क का निर्माण निर्धारित मापदंडों पर नहीं हुआ है। इस मामले की उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए। कस्बेवासी बंटी मेहता ने बताया कि बरसात से पहले जल्दबाजी में सड़क का निर्माण किया। जिसमें तालाब की मिट्टी डाल दी गई जिसकी वजह से पूरी सड़क धंस गई और जगह-जगह गड्ढों में तब्दील हो गई ग्रामीणों ने विरोध किया तो ठेकेदार द्वारा रात में मिट्टी डालकर सड़क बना दी और अब नई सड़क पर पेचवर्क संदेह पैदा करता है। निवासी करतार मेहता ने बताया कि पांच महीने पहले बनी सड़क पर पैचवर्क का कार्य निर्माण सामग्री की गुणवत्ता पर सवालिया निशान है। सड़क में इस्तेमाल निर्माण सामग्री की जांच होनी चाहिए। जिससे दूध का दूध और पानी का पानी स्पष्ट हो जाएगा। </p>
<p>सड़क दो माह में जगह-जगह से उखड़ गई एवं दरारें पड़ गई है। हमारी मांग है सड़क का पुन: निर्माण कार्य किया जाए, अन्यथा सड़क के दोबारा उखड़ने की संभावना बनी रहेगी और इस तरह की लापरवाह ठेकेदारों के प्रति कार्यवाही अमल में लाई जाए ताकि अन्य जगह इस तरह से गुणवत्ताहीन निर्माण नहीं हो।<br /><strong>-सर्वेश मेहता, कस्बेवासी।  </strong></p>
<p>जहां-जहां सड़क खराब हुई है। वहां वहां पेचवर्क किया गया है, अगर अब सड़क खराब होती है, तो सड़क को दोबारा बनवाया जाएगा।<br /><strong>-अभिषेक गुप्ता, सहायक अभियंता, सार्वजनिक निर्माण विभाग, केलवाड़ा। </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बारां</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 18 Nov 2022 14:30:24 +0530</pubDate>
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