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                <title>malnutrition - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>खड़गे का केंद्र पर बड़ा हमला: महिलाओं और बच्चों के पोषण के मुद्दों पर विफल रहने का लगाया आरोप, बोले- प्रत्येक पांच में से एक बच्चा तीव्र कुपोषण का शिकार</title>
                                    <description><![CDATA[कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने एनएफएचएस-6 के आंकड़ों का हवाला देते हुए केंद्र सरकार को घेरा है। उन्होंने आरोप लगाया कि देश में 84% बच्चों को पर्याप्त पोषण नहीं मिल रहा और 57% महिलाएं एनीमिया से पीड़ित हैं। खरगे ने सरकार पर अपनी नाकामियां छुपाने के लिए आंकड़ों को दबाने का आरोप लगाया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/kharges-big-attack-on-the-center-accused-of-failure-on/article-155938"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/kharge.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएचएस) के आंकड़ों का हवाला देते हुए केंद्र सरकार पर महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य तथा पोषण के मुद्दों पर विफल रहने का आरोप लगाया। खरगे ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर लिखा कि देश में प्रत्येक पांच में से एक बच्चा तीव्र कुपोषण का शिकार है। एक-तिहाई बच्चे कम वजन के हैं, छह से 23 माह आयु वर्ग के 84 प्रतिशत से अधिक बच्चों को पर्याप्त पोषण नहीं मिल रहा है तथा 15 से 49 वर्ष आयु वर्ग की 57 प्रतिशत महिलाएं एनीमिया से पीड़ित हैं। उनका आरोप है कि केंद्र सरकार अपनी नाकामियों को उजागर करने वाले महत्वपूर्ण आंकड़ों को जानबूझकर छिपा रही है। उन्होंने कहा कि एनएफएचएस-6 के आंकड़ों ने केंद्र सरकार की अक्षमता को बेनकाब कर दिया है।</p>
<p>खरगे ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार चुनिंदा आंकड़ों को दबाने, कमजोर वर्गों की उपेक्षा करने, प्रचार के माध्यम से सकारात्मक छवि पेश करने, वास्तविक स्थिति से ध्यान भटकाने की रणनीति अपनाते हुए काम कर रही है। उन्होंने कहा कि देश के बच्चों और महिलाओं के स्वास्थ्य एवं पोषण जैसे गंभीर मुद्दों पर सरकार को जवाबदेह होना चाहिए और सभी आंकड़े सार्वजनिक कर वास्तविक स्थिति सामने रखनी चाहिए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 04 Jun 2026 14:07:17 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>असर खबर का - कुपोषित व बिन मां के बच्चों को अब मिलेगा मां का अमृत</title>
                                    <description><![CDATA[पहले दिन पांच माताओं ने किया मिल्क डोनेट।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/effect-of-news---malnourished-and-motherless-children-will-now-get-mother-s-nectar/article-106433"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-03/6622-copy63.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। पौने तीन साल के लंबे इंतजार के बाद आखिरकार जेकेलोन अस्पताल परिसर में बहुप्रतीक्षित मदर मिल्क बैंक मंगलवार को शुरू हो ही गया। नवज्योति मदर मिल्क बैंक शुरू करने को लेकर लगातार खबरे प्रकाशित करता रहा उसकी यह परिणाम है कि 34 माह के बाद मंगलवार को पहली बार कोटा के मदर मिल्क बैंक में पांच माताओं ने दुध का दान करने के साथ ही मदर मिल्क बैंक शुुरुआत हो गई। दैनिक नवज्योति के 4 मार्च के अंक में पेज दो पर आखिरकार 34 माह बाद मदर मिल्क बैंक के ताले खूले शीर्षक से खबर प्रकाशित होने के बाद जेकेलोन प्रशासन ने आनन फानन में मदर मिल्क मंगलवार को शुरू कर दिया। मदर मिल्क बैंक शुरू होने से। मदर मिल्क बैंक के शुरू होने से कोटा संभाग के कुपोषित बच्चों व बिन मां के बच्चों को मां का दूध मिलेगा। उल्लेखनीय है कि बूंदी और बारां की मदर मिल्क के सफल संचालन के बाद अब संभाग के सबसे बड़े जेकेलोन अस्पताल में भी अब मदर मिल्क बैंक की शुरुआत हो गई है। </p>
<p><strong>नवजात बच्चों को कुपोषण से बचाने में मददगार होगा</strong><br />बालपोषण संस्थाओं के अनुसार जन्म के आधे घंटे के भीतर मां का पहला दूध बच्चे के लिए पीना जरूरी है, लेकिन किसी कारणवश देश में 95 प्रतिशत बच्चों को यह दूध नहीं मिल पाता। यही वजह है कि भारत में हर दूसरा बच्चा कुपोषित है। इसी बात को ध्यान में रखते नौ साल पहले राजस्थान के उदयपुर में दिव्य मदर मिल्क बैंक की स्थापना की गई। इसके पीछे सिर्फ एक वजह थी कि नवजात (0-1 साल) बच्चों को कुपोषित होने और दूध के अभाव में मौत के मुंह में समाने से रोकना। उदयपुर के मदर मिल्क की सफलता के बाद प्रदेश में जयपुर, बूंदी, बारां में मदर मिल्क बैंक खोले गए। अब कोटा में खुलने से बढ़ राहत मिलेगी।</p>
<p><strong>प्रदेश में बढ़ रहा मदर मिल्क बैंक का ट्रेंड</strong><br />मदर मिल्क बैंक के नोडल अधिकारी व प्रभारी डॉ. मोहित अजमेरा ने बताया कि यह एक नॉन-प्रॉफिट बैंक है । यहां नवजात शिशुओं के लिए मां का सुरक्षित दूध स्टोर किया जाएगा। इसकी मदद से उन नवजात शिशुओं को मां का दूध उपलब्ध कराया जाएगा जिनकी अपनी मां किसी कारणवश स्तनपान करा पाने में असमर्थ हैं। इस केंद्र में दो तरह की महिलाएं दूध दान कर सकती हैं। पहली स्वैच्छा से और दूसरी वे माताएं जो अपने बच्चों को दूध नहीं पिला सकतीं। जिनके बच्चे दूध नहीं पीते। अगर उनका दूध नहीं निकाला जाए तो मां के रोगी होने की आशंका बढ़ जाती है। उनके लिए दूध दान करना अच्छा विकल्प है। नर्स रुकसाना, ऋतु, आरती शर्मा ने मंगलवार दुध संग्रह किया। </p>
<p><strong>ऐसे लेते है दूध का दान</strong><br />मदर मिल्क बैंक में  दूध दान करने आई मां की पहले एचआईवी, एचबीएसएजी, डब्लूबीआरएल जांच की जाएगी । जांच रिपोर्ट सही आने के बाद महिला से लिखित अनुमति ली जाती है । उसके बाद मदर मिल्क लिया जाएगा।  मदर मिल्क बैंक वो बैंक है जो महिलाओं से न सिर्फ दूध इकट्ठा करती है, बल्कि जरुरतमंद बच्चों तक वो दूध पहुंचाने का काम भी करती है। उत्तर भारत में सबसे पहली मदर मिल्क बैंक 2013 में बनाई गई थी।  राजस्थान में उदयपुर में यह पहली बैंक बनी थी। उसके बाद जयपुर, बूंदी बारां और अब कोटा में बनी है।</p>
<p><strong>स्तनपान प्रबंधन पर रहेगा जोर</strong><br />मदर मिल्क बैंक के साथ स्तनपान प्रबंधन पर मुख्य रूप से फोकस रहेगा। महिलाओं को स्तनपान कराने में आने वाली समस्याओं का समाधान मदर मिल्क बैंक में किया जाएगा। माताओं को मेडिकल व इमोशन प्रॉब्लम का समाधान किया जाएगा। स्तनपान प्रबंधन के तहत दूसरा मुख्य कार्य यह किया जाएगा जिन माताओं के पास अतिरिक्त दूध है वह स्वैच्छा से दान करेंगी। उसका संग्रहण कर कुपोषित व समय से पूर्व हुए बच्चों को दिया जाएगा। यह दूध दवाई के रूप में कार्य करेंगा। माता दूर होने पर उन बच्चों को यह दूध दिया जाएगा। <br /><strong>- डॉ. मोहित अजमेरा, नोडल अधिकारी कोटा</strong></p>
<p>मदर मिल्क बैंक का सात दिन से व्यवस्थाओं का अवलोकन करने के बाद मेडिकल कॉलेज की प्रधानाचार्य के निर्देशन में मंगलवार को इसका संचालन शुरू किया। पहले दिन पांच महिलाओं ने मिल्क डोनेट किया। मदर मिल्क का संचालन के लिए नोडल अधिकारी मोहित अजमेरा को नियुक्त किया गया है। मिल्क बैंक में चार एसी भी लगाए है। <br /><strong>- डॉ. निर्मला शर्मा, अधीक्षक जेकेलोन अस्पताल कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 05 Mar 2025 14:46:58 +0530</pubDate>
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                <title>कुपोषण की भयावह समस्या से जूझती पूरी दुनिया</title>
                                    <description><![CDATA[विश्व में ‘भूख’ कुपोषण व अल्पपोषण की बढ़ती ज्वाला पर चिन्ता अभिव्यक्त करते हुए संयुक्त राष्ट्र ने यह तथ्य उजागर किया है कि विश्व के लगभग 80 करोड़ लोग कुपोषण के शिकार हैं, जो कि समस्त विश्व के लिए शर्मनाक है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/the-whole-world-is-struggling-with-the-terrible-problem-of/article-73442"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-03/ph-(1)23.png" alt=""></a><br /><p>भूख की आग मानव विकास के नाम पर कलंक है, मानव अस्तित्व पर प्रश्न चिन्ह है। विश्व में ‘भूख’ कुपोषण व अल्पपोषण की बढ़ती ज्वाला पर चिन्ता अभिव्यक्त करते हुए संयुक्त राष्ट्र ने यह तथ्य उजागर किया है कि विश्व के लगभग 80 करोड़ लोग कुपोषण के शिकार हैं, जो कि समस्त विश्व के लिए शर्मनाक है। कुपोषण से जुझते इन अबोध बालकों पर सदैव मौत की तलवार लटकती रहती है, कुपोषण की वजह से कितने ही बच्चे अकाल मौत का शिकार हो जाते हैं, कितने ही बच्चे असाध्य रोगों के शिकंजे में जकड़ जाते हैं। विडम्बना है कि हमारे बच्चों पर कुपोषण व अल्पपोषण को काली छाया का संकट मंडरा रहा है। देश के एक तिहाई बच्चों पर कुपोषण का मंडराता संकट देश में संचालित सभी योजनाओं, गरीबी निवारण व रोजगार कार्यक्रमों की सार्थकता पर प्रश्न चिन्ह लगा रही है। संयुक्त राष्ट्र खाद्य एवं कृषि संगठन द्वारा जारी रिपोर्ट में भी यह तथ्य  बताया गया है कि देश की 15 से 49 आयु की आधी प्रतिशत महिलाएं खून की कमी से जूझ रही है तथा पांच वर्ष से कम आयु के 38.4 प्रतिशत बच्चों की लंम्बाई उनकी आयु के मुताबिक कम पाई गई है जिसके लिए कुपोषण व अल्पपोषण ही जिम्मेदार है। संयुक्त राष्टÑ खाद्य एवं कृषि संगठन द्वारा जारी रिपोर्ट  में भारत में कुपोषित लोगों की संख्या 19 करोड़ दर्ज की गई है जो कि देश के लिए चिन्ता जनक व विचारणीय तथ्य है।</p>
<p>निसंदेह रूप से, बच्चों के शारीरिक, मानसिक व बौद्विक विकास के लिए पर्याप्त पोषकाहार आवश्यक है। ‘खाद्य सुरक्षा’ सुनिश्चित करने तथा  अल्पपोषण व कुपोषण के बढ़ते तूफान को रोकने के लिए सरकार के द्वारा अनेक नीतियों, कार्यक्रमों व योजनाओं को क्रियान्वित किया जा रहा है। किन्तु इन सबके बावजूद भी हकीकत यही है कि देश में कुपोषण का आंकड़ा चिन्ताजनक है।</p>
<p>‘गरीबी’ ही वह मूलभूत कारण है जिसकी वजह से बच्चों को भरपेट भोजन उपलब्ध नहीं होता है, पर्याप्त पोषक आहार की कल्पना तो निरर्थक प्रतीत होती हैं। क्रय शक्ति की अपर्याप्तता के कारण गरीब वर्ग ही खाद्य सुरक्षा के सर्वाधिक शिकार है। हमें इस तथ्य पर विचार करना होगा कि केवल योजनाओं का श्रीगणेश करके गरीबी व बेरोजगारी जैसे दानवों का अंत करना संभव नहीं है। असली तथ्य यह है कि इन योजनाओं को प्रभावशील एवं परिणामोंन्मुखी बनाने के लिए कठोर कदम यथाशीघ्र उठाए जाए ताकि देश को चंगुल कुपोषण से मुक्त किया जा सके तथा ‘खाद्य सुरक्षा’ जैसे उद्देश्य को यर्थाथ रूप से प्राप्त किया जा सके। इस संदर्भ में यह भी तथ्य उल्लेखनीय है कि गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन कर रहे लोगों की संख्या का अनुमान सही पद्धति से एवं सही रूप से आकलित किया जाए अन्यथा अनेक गरीब लोग ‘खाद्य सुरक्षा’ की परिधि में समावेशित होने से वंचित रह जाएंगे।</p>
<p>कुपोषण को कम करने जैसे महत्वपूर्ण व ज्वलन्त उद्देश्य की प्राप्ति के लिए सर्वप्रथम खाद्यान्नों के उत्पादन में वृद्धि करनी होगी। कृषि भारत की आत्मा है इस मूलमंत्र को दृष्टिगत रखते हुए कृषि पर मंडराते संकट के बादलों को हटाने की भरसक कोशिश करनी होगी। इस के लिए कृषि के विकास, कृषिगत उत्पादकता में वृद्धि तथा कृषकों में खेती के प्रति आकर्षण को बढ़ाने के लिए प्रभावी व्यूह रचना का सफल क्रियान्वयन सुनिश्चित करना आवश्यक है। कितनी विड़म्बना है कि एक तरफ कुपोषण व अल्पपोषण की मंडराती छाया विशालकाय होती जा रही है, भूखों की सूची में देश निचले पायदान पर खिसकता जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ  ऐसा अनुमान प्रस्तुत किया गया है कि देश में होने वाले कुल खाद्यान्न उत्पादन का दसवा हिस्सा प्रति वर्ष पर्याप्त व यथेष्ट संरक्षण व्यवस्था का प्रावधान नहीं होने से बर्बाद हो जाता है। देश में खाद्यान्न भंडारण व रखरखाव की समुचित व पर्याप्त व्यवस्था करके ही खाद्य सुरक्षा, समावेशी विकास तथा कुपोषण व अल्पपोषण में कमी जैसे लक्ष्यों की प्राप्ति संभव है। अत: सरकार को नए गोदामों के निर्माण के लिए सार्वजनिक निजी साझेदारी पद्धति को प्रोत्साहित करना चाहिए। प्रत्येक पंचायत में खाद्यान्न बैंको की स्थापना करके किसानों को वैज्ञानिक भंडारण के लिए ऋणों की आपूर्ति तथा परम्परागत खाद्यान्न भंडारण व्यवस्था को अपनाकर देश को कुछ सीमा तक खाद्य संकट से मुक्त कराना संभव है एवं कुपोषण से जुझते लोगों को जीवनदान दिया जा सकेगा। कुपोषण की इस भयावह समस्या के लिए विश्व खाद्य कार्यक्रम की रिपोर्ट में लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली, अपूर्ण सूचना, पारिवारिक विशेषताओं के अनुचित मापन, भ्रष्टाचार व अदक्षता को जिम्मेदार ठहराया गया है। इस संदर्भ में यह  आवश्यक है कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली को सार्वभौम, मजबूत एवं पारदर्षी बनाया जाए तथा इसका क्रियान्वयन ईमानदारी पूर्वक किया जाए।</p>
<p>सरकार ने कुपोषण की इस भयावह समस्या का समाधान करने के लिए राष्ट्रीय पोषण मिशन को गठित किया है ताकि विभिन्न मंत्रालायों द्वारा संचालित योजनाओं व कार्यक्रमों में समन्वय स्थापित किया जा सके। इस मिशन का मुख्य उद्देश्य पोषण को जन आंदोलन का स्वरूप प्रदान करना है तथा पोषण केन्द्रों की स्थापना करके कुपोषण के स्तर को कम करना है।    </p>
<p><strong>  -डॉ. अनीता मोदी</strong><br /><strong>(ये लेखक के अपने विचार हैं)</strong></p>
<p> </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 22 Mar 2024 12:01:47 +0530</pubDate>
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                <title>कुपोषण मिटाने के लिए खाद्य सुरक्षा पर ध्यान  की जरूरत</title>
                                    <description><![CDATA[स्तनपान के अभाव की स्थिति में भी बच्चों में कुपोषण की स्थिति पैदा हो सकती है। ज्ञान की कमी, पोषक आहार की कमी, गंदा पर्यावरण, पाचन विकार, मानसिक स्वास्थ्य, नशा, अव्यवस्थित जीवनशैली भी कुपोषण के प्रमुख कारण हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/need-to-focus-on-food-security-to-eradicate-malnutrition/article-50514"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-07/630-400-size-की-कॉपी-(11).png" alt=""></a><br /><p>कुपोषण आज सम्पूर्ण विश्व के लिए एक बड़ी समस्या है। आज कुपोषण बच्चों में रूग्णता और मृत्यु का एक बड़ा कारण है। कुपोषण के कारण हमारे शरीर में स्वस्थ ऊतकों और अंगों के कार्यकरण के लिए आवश्यक विटामिन, खनिज और अन्य पोषक तत्वों की कमी हो जाती है और इससे हम बीमार पड़ते हैं और बहुत बार कुपोषण से असमय मौतें हो जाती हैं। यदि हम यहां कुपोषण को परिभाषित करना चाहें तो हम यह बात कह सकते हैं कि कुपोषण या माल-न्यूट्रिशन वह अवस्था है जिसमें पौष्टिक पदार्थ और भोजन, अव्यवस्थित रूप से ग्रहण करने के कारण शरीर को पूरा पोषण नहीं मिल पाता है। कुपोषण तब भी होता है जब किसी व्यक्ति के आहार में पोषक तत्वों की सही मात्रा उपलब्ध नहीं होती है। <br /><br />विश्व स्वास्थ्य संगठन और यूनिसेफ  के अनुसार कुपोषण के तीन प्रमुख लक्षणों में क्रमश: नाटापन (बौना), निर्बलता और कम वजन को शामिल किया जा सकता है। वास्तव में अच्छा जीवन जीने के लिए अच्छे व पोषक भोजन की आवश्यकता होती है और प्रत्येक बालक को अच्छा, संतुलित व पोषक भोजन मिलना चाहिए। यहां यह उल्लेखनीय है कि संविधान के अनुच्छेद-21 और अनुच्छेद-47 भारत सरकार को सभी नागरिकों के लिए पर्याप्त भोजन के साथ एक सम्मानित जीवन सुनिश्चित करने के लिए उचित उपाय करने के लिए बाध्य करते हैं। किन्तु भारतीय संविधान में भोजन के अधिकार को मौलिक अधिकार के रूप में मान्यता नहीं प्रदान की गई है। यदि देश के सभी लोगों को राइट टू फूड का अधिकार मिलें तो इससे निश्चित ही कुपोषण में कमी लाई जा सकती है। बहरहाल, यदि हम यहां कुपोषण से संबंधित आंकड़ों की बात करें तो साल 2021 में दुनिया के 76.8 करोड़ लोग कुपोषण का शिकार पाए गए। इनमें 22.4 करोड़  (29 प्रतिशत) भारतीय थे। यह दुनियाभर में कुल कुपोषितों की संख्या के एक चौथाई से भी अधिक है। संयुक्त राष्टÑ का कुपोषण के संबंध में कुछ समय पहले यह कहना था कि भारत में हर साल कुपोषण के कारण मरने वाले पांच साल से कम उम्र वाले बच्चों की संख्या दस लाख से भी ज्यादा है। साल 2015-16 में किए गए एक सर्वे के आधार पर भारत में जिलेवार करीब 7 से लेकर 65 प्रतिशत तक बच्चे कुपोषण का शिकार पाए गए हैं वास्तव में, यह बहुत ही संवेदनशील बात है। यहां यह भी जानकारी देना चाहूंगा कि दक्षिण एशिया में भारत कुपोषण के मामले में बहुत बुरी हालत में है। आंकड़े बताते हैं कि जलवायु परिवर्तन के कारण 2050 तक 7.20 करोड़ और लोगों के कुपोषित होने का खतरा है। <br /><br />जानकारी देना चाहूंगा कि वर्तमान में दक्षिण एशिया के कई देश भारी खाद्य संकट से ग्रसित हैं। यहां यह भी जानकारी देना चाहूंगा कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के आंकड़ों के मुताबिक भारत में दुनिया के दूसरे देशों के मुकाबले कहीं अधिक कुपोषित बच्चे हैं। वास्तव में गरीबी, आर्थिक तंगी कुपोषण का सबसे बड़ा कारण है। दूसरा एक कारण स्वच्छ जल की अनुपलब्धता भी है। स्वच्छ जल की अनुपलब्धता से भी कुपोषण की समस्या पैदा होती है। भारत में आज भी कई जगहों पर लड़का और लड़की के बीच भेदभाव किया जाता है। यही वजह है कि माता-पिता लड़कियों के खान-पान और पोषण पर विशेष ध्यान नहीं देते। ऐसे में वह लड़कियां धीरे-धीरे कुपोषण का शिकार हो जाती हैं। लड़कियों का कम उम्र में मां बनना भी कुपोषण का एक प्रमुख कारण है। <br /><br />स्तनपान के अभाव की स्थिति में भी बच्चों में कुपोषण की स्थिति पैदा हो सकती है। ज्ञान की कमी, पोषक आहार की कमी, गंदा पर्यावरण, पाचन विकार, मानसिक स्वास्थ्य, नशा, अव्यवस्थित जीवनशैली भी कुपोषण के प्रमुख कारण हैं। गरीब होने के कारण आज बहुत से लोगों के पास खाने के लिए दो वक्त की रोटी तक नहीं होती है। हालांकि यह भी कि गरीबी अकेले कुपोषण को जन्म नहीं देती, किंतु यह आम लोगों के लिए पौष्टिक भोजन की उपलब्धता को प्रभावित कर सकती है। आंकड़े बताते हैं कि देश के ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाली कुल जनसंख्या का लगभग 25.7 प्रतिशत हिस्सा अभी भी गरीबी रेखा के नीचे जीवन व्यतीत कर रहा है, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह संख्या 13.7 प्रतिशत के करीब है। अज्ञानता के कारण भी बहुत बार कोई बच्चा कुपोषण का शिकार हो सकता है। बहुत बार बच्चे के पालन-पोषण में कमी, भोजन के प्रति जागरूकता का अभाव और भोजन की आदतें, ये सभी परिवार में पोषण की कमी का कारण बनते हैं। <br /><br />वास्तव में,आज देश में पौष्टिक और गुणवत्तापूर्ण आहार के संबंध में जागरूकता की कमी स्पष्ट दिखाई देती है जिसके कारण परिवार का परिवार कुपोषण का शिकार हो जाता है। जलवायु परिवर्तन से भी आज कृषि उत्पादन पर प्रभाव पड़ता है और कुपोषण जन्म लेता है। आज विश्व के 40 से अधिक विकासशील देशों में जलवायु परिवर्तन के कारण प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कृषि उत्पादन में हो रही गिरावट आने वाले वर्षों में भूख से पीड़ित लोगों की संख्या में काफी हद तक वृद्धि कर सकती है। यहां यह भी उल्लेखनीय है कि वर्ष  2022 में दक्षिण एशिया में लगभग सौ साल में सबसे अधिक तापमान दर्ज किया गया है। तापमान में बढ़ोतरी से खाद्य सुरक्षा कहीं न कहीं संकट में आती है और खाद्य उत्पादन कम होने से कुपोषण के आंकड़ों में भी कहीं न कहीं बढ़ोत्तरी देखने को मिलती है। <br /><br />-सुनील कुमार महला<br />(ये लेखक के अपने विचार हैं)</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 01 Jul 2023 10:17:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>बढ़ती उम्र में बदलें खानपान वरना हो सकते हैं कुपोषण के शिकार</title>
                                    <description><![CDATA[बुजुर्गों द्वारा आहार में फैट के ज्यादा सेवन से कोलोन का कैंसर, पैंक्रियाज और प्रोस्टेट की समस्या हो सकती है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/health/change-your-diet-in-old-age--otherwise-you-may-become-a-victim-of-malnutrition/article-49329"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-06/630-400-size-की-कॉपी-(1)4.png" alt=""></a><br /><p>उम्र बढ़ने के साथ-साथ शरीर में ऊर्जा का घटाव होने लगता है। ऐसे में पौष्टिक खुराक भी युवावस्था की अपेक्षा वृद्धावस्था में अलग होने लगती है,बुढ़ापे में रखें पौष्टिकता का खयाल। <br /><br />जीवन के हर पड़ाव पर पौष्टिकता की जरूरतें बदलती रहती हैं। उस में से एक पड़ाव है बुढ़ापा,उम्र के साथ पौष्टिकता की विशेष जरूरतें और समस्याएं आती रहती हैं। उम्र के साथ कई बदलाव भी आते हैं जैसे कि शरीर के आकार में बदलाव, शारीरिक गतिविधियों में कमी और खानपान में कम रुचि। ये सब बदलाव उम्रदराज लोगों को आवश्यक पौष्टिकता प्रदान करने में रुकावट बनते हैं। शरीर में यह बदलाव धीरे-धीरे अपनेआप आते हैं और अकसर हमें इन के बारे में पता नहीं होता। बढ़ती उम्र में अच्छी और संतुलित खुराक लेने से औस्टियोपोरोसिस, हाई ब्लडप्रैशर, दिल के रोग और कई किस्म के कैंसर होने का खतरा टल जाता है। <br /><br /><strong>बढ़ती उम्र और कुपोषण<br /></strong>अध्ययन के मुताबिक  बुढ़ापे में सब से बड़ी समस्या कुपोषण की होती है। कुपोषण की वजह से मौत की दर में वृद्धि, अस्पतालों में ज्यादा समय बिताना और जटिलताएं होती हैं। इस के साथ ही संक्रमण, एनीमिया, त्वचा की समस्याएं,कमजोरी, चक्कर आना और रक्त में इलैक्ट्रोलाइट असंतुलन होता है। <br /><br /><strong>कुपोषण दो तरह का<br /></strong>ज्यादा पोषण या कम पोषण, जब आवश्यक आहार नहीं लिया जाता तो इसे कम पौष्टिकता कहा जाता है, इस की वजह से वजन कम होना और उस की वजह से अन्य समस्याएं हो सकती हैं। अत्यधिक वजन कम हो जाए तो उसे वास्टिंग या केशेक्सिया कहा जाता है। बुजुर्ग जिन्हें रूमेटाइड आर्थ्राइटिस, हार्ट फेल, कैंसर,अंगों का काम करना बंद करना आदि समस्याएं हों। उन में वजन की भारी कमी हो सकती है। लैप्टिन और घ्रेलिन हार्मोंस में उम्र के साथ बढ़ोतरी हो सकती है,इस से भूख मर जाती है जो कम पोषण की वजह बनता है। <br /><br />कई बार उम्र के साथ लोगों की शारीरिक गतिविधियां तो कम हो जाती हैं लेकिन उन के खाने की आदत जवानी वाली ही रहती है,इस वजह से ज्यादा पोषण हो जाता है, वजन बढ़ने से दिल के रोग,आर्थ्राइटिस और डायबिटीज होने का खतरा बढ़ जाता है ज्यादा आहार लेने के बावजूद उन को उचित पोषण नहीं मिलता।<br /><br /><strong>कुपोषण के कारण</strong><br />-कोई बीमारी जिस की वजह से खाने की किस्में या मात्रा बढ़ जाती है।<br />-दिन में 2 बार से कम खाना।<br />-फलों, सब्जियों और दूध के उत्पाद कम खाना।<br />-शराब का सेवन<br />-दांतों की समस्याएं<br />-वित्तीय हालात<br />-अकेले खाना, -दवाएं<br />-खाने की समस्याएं <br /><br />अध्ययन में यह बात सामने आई है कि 65 वर्ष से ऊपर की उम्र वाले बड़ी संख्या में दोनों में से किसी तरह के कुपोषण से पीड़ित होते हैं,10 में से 1 को कम पोषण की आवश्यकता होती है,कई उम्रदराज लोग हैं जो एक वक्त का खाना छोड़ देते हैं,अस्पताल में भर्ती होने की वजह से 60 प्रतिशत बुजुर्गों में कम पोषण की संभावना 60 प्रतिशत तक बढ़ जाती है।<br /><br /><strong>बुढ़ापे पर प्रभाव<br /></strong>बुजुर्गों द्वारा आहार में फैट के ज्यादा सेवन से कोलोन का कैंसर, पैंक्रियाज और प्रोस्टेट की समस्या हो सकती है,असंतुलित खानपान से ब्लडप्रैशर, ब्लड लिपिड में बढ़ोतरी,ग्लूकोज को पचाने की क्षमता में कमी के चलते कोरोनरी हार्ट डिजीज हो सकती हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 19 Jun 2023 13:15:55 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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                <title>पीएम मोदी ने की कुपोषण के खिलाफ अभियान से जुड़ने की अपील</title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री ने कहा कि कुपोषण के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए एक अनोखा अभियान झारखंड में भी चल रहा है। झारखंड के गिरिडीह में सांप-सीढ़ी का एक खेल तैयार किया गया है। खेल-खेल में बच्चे, अच्छी और खराब आदतों के बारे में सीखते हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/pm-modi-appeals-to-join-the-campaign-against-malnutrition/article-20755"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-08/pm_modi_3.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कुपोषण के खिलाफ अभियान से जुड़ने की अपील करते हुए रविवार को कहा कि कुपोषण की चुनौतियों से निपटने में, सामाजिक जागरूकता से जुड़े प्रयास महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।</p>
<p>पीएम मोदी ने अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम 'मन की बात' में रविवार को कहा कि असम के बोंगाई गाँव में एक दिलचस्प परियोजना प्रोजेक्ट सम्पूर्णा चलाई जा रही है। इसका मकसद है कुपोषण के खिलाफ लड़ाई और इस लड़ाई का तरीका भी बहुत अनोखा है। इसके तहत, किसी आंगनबाड़ी केंद्र के एक स्वस्थ बच्चे की माँ, एक कुपोषित बच्चे की माँ से हर सप्ताह मिलती है और पोषण से संबंधित सारी जानकारियों पर चर्चा करती है। यानी, एक माँ, दूसरी माँ की मित्र बन, उसकी मदद करती है, उसे सीख देती है। इस योजना की मदद से, इस क्षेत्र में, एक साल में, 90 प्रतिशत से ज्यादा बच्चों में कुपोषण दूर हुआ है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि आप कल्पना कर सकते हैं, क्या कुपोषण दूर करने में गीत-संगीत और भजन का भी इस्तेमाल हो सकता है? मध्य प्रदेश के दतिया जिले में 'मेरा बच्चा अभियान' शुरू किया गया। इस अभियान में इसका सफलतापूर्वक प्रयोग किया गया है। इसके तहत, जिले में भजन-कीर्तन आयोजित हुए, जिसमें पोषण गुरु कहलाने वाले शिक्षकों को बुलाया गया। एक मटका कार्यक्रम भी हुआ, इसमें महिलाएँ, आंगनबाड़ी केंद्र के लिए मुट्ठी भर अनाज लेकर आती हैं और इसी अनाज से शनिवार को 'बालभोज' का आयोजन होता है। इससे आंगनबाड़ी केन्द्रों में बच्चों की उपस्थिति बढऩे के साथ ही कुपोषण भी कम हुआ है।</p>
<p>प्रधानमंत्री ने कहा कि कुपोषण के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए एक अनोखा अभियान झारखंड में भी चल रहा है। झारखंड के गिरिडीह में सांप-सीढ़ी का एक खेल तैयार किया गया है। खेल-खेल में बच्चे, अच्छी और खराब आदतों के बारे में सीखते हैं।</p>
<p>उन्होंने कहा कि वह कुपोषण से जुड़े इतने सारे अभिनव प्रयोगों के बारे में इसीलिए बता रहे हैं क्योंकि सबको आने वाले महीने में, इस अभियान से जुडऩा है। सितम्बर का महीना त्योहारों के साथ-साथ पोषण से जुड़े बड़े अभियान को भी समर्पित है। उन्होंने कहा कि हम हर साल एक से 30 सितम्बर के बीच पोषण माह मनाते हैं। कुपोषण के खिलाफ पूरे देश में अनेक रचनात्मक प्रयास किए जा रहे हैं। तकनीक का बेहतर इस्तेमाल और जन-भागीदारी भी, पोषण अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा बना है।</p>
<p>पीएम मोदी ने कहा कि देश में लाखों आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को मोबाइल देने से लेकर आंगनबाड़ी सेवाओं की पहुँच को निगरानी करने के लिए पोषण ट्रैकर भी शुरू किया गया है। सभी अस्परेशनल जिलों और पूर्वोत्तर के राज्यों में 14 से 18 साल की बेटियों को भी, पोषण अभियान के दायरे में लाया गया है। कुपोषण की समस्या का निराकरण इन कदमों तक ही सीमित नहीं है। इस लड़ाई में, दूसरी कई और पहल की भी अहम भूमिका है। उदाहरण के तौर पर, जल जीवन मिशन को ही लें, तो भारत को कुपोषणमुक्त कराने में इस मिशन का भी बहुत बड़ा असर होने वाला है। कुपोषण की चुनौतियों से निपटने में, सामाजिक जागरूकता से जुड़े प्रयास, महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि मैं आप सभी से आग्रह करूँगा, कि आप, आने वाले पोषण माह में, कुपोषण को दूर करने के प्रयासों में हिस्सा जरुर लें।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 28 Aug 2022 15:03:06 +0530</pubDate>
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