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                <title>turkey - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>turkey RSS Feed</description>
                
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                <title>रूस का तुर्की से आग्रह : यूक्रेन से गैस पाइपलाइनों पर हमला नहीं करने की अपील की</title>
                                    <description><![CDATA[रूस ने तुर्की से 'तुर्कस्ट्रीम' और 'ब्लू स्ट्रीम' पाइपलाइनों पर यूक्रेनी हमलों को रोकने की गारंटी मांगी है। रूसी उप विदेश मंत्री अलेक्जेंडर ग्रुश्को ने इन ऊर्जा बुनियादी ढांचों पर बढ़ते खतरे पर चिंता जताई। मॉस्को ने अंकारा से आग्रह किया है कि वह यूक्रेन को सख्त चेतावनी दे ताकि क्षेत्रीय ऊर्जा आपूर्ति सुरक्षित बनी रहे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/russia-urges-turkey-not-to-attack-ukraines-gas-pipelines/article-150995"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/russia.png" alt=""></a><br /><p>मॉस्को । रूस ने तुर्की से बार-बार यह अपील की है कि वह यूक्रेन से इस बात की गारंटी ले कि 'तुर्कस्ट्रीम' और 'ब्लू स्ट्रीम' गैस पाइपलाइन बुनियादी ढांचे पर कोई हमला नहीं किया जाएगा। रूसी उप विदेश मंत्री अलेक्जेंडर ग्रुश्को ने एक साक्षात्कार के दौरान कहा, "काला सागर के नीचे तुर्की को गैस आपूर्ति करने वाली पाइपलाइनों पर यूक्रेन द्वारा लगातार किए जा रहे हमलों को देखते हुए, हमने अपने तुर्की भागीदारों से बार-बार आग्रह किया है। हमने उनसे कहा है कि वे यूक्रेनी पक्ष को स्पष्ट और कड़े संकेत भेजें और मांग करें कि वे इस तरह के आक्रामक कृत्यों को तुरंत रोकें तथा भविष्य में भी ऐसा न होने की गारंटी दें।"</p>
<p>इससे पहले, क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने भी स्पष्ट किया था कि रूस इन गैस पाइपलाइनों पर बढ़ते खतरे को लेकर तुर्की के साथ लगातार अपनी चिंताएं साझा कर रहा है। वहीं, तुर्की सरकार के सूत्रों के अनुसार, तुर्की इन पाइपलाइनों पर होने वाले हमलों और खतरों की खबरों पर बारीकी से नजर रख रहा है और इस मामले में रूस के साथ निरंतर समन्वय बना हुआ है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 19 Apr 2026 13:33:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>प्रपोजल इन्वेस्टमेंट फेसिलिटेशन फॉर डेवलपमेंट के खिलाफ भारत-तुर्की आए साथ, बीजिंग को अमेरिका का सपोर्ट</title>
                                    <description><![CDATA[भारत और तुर्की ने 40 देशों के साथ मिलकर चीन समर्थित इन्वेस्टमेंट फेसिलिटेशन फॉर डेवलपमेंट (IFD) फ्रेमवर्क का विरोध किया है। WTO की बैठक में नई दिल्ली ने इसे 'डिजिटल उपनिवेशवाद' और नीतिगत स्वायत्तता के लिए खतरा बताया। विवादित प्री-इन्वेस्टमेंट अपील सिस्टम और ई-कॉमर्स प्रावधानों पर सर्वसम्मति न होने के कारण भारत ने इस पर रोक लगा दी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/india-t%C3%BCrkiye-come-together-against-the-proposal-investment-facilitation-for-development/article-147625"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/1200-x-60-px)-(7)6.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। भारत और तुर्की के रिश्ते हाल के समय में अच्छे नहीं रहे हैं। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान के साथ खड़े होने के कारण ऐसा हुआ। हालांकि, चीन के एक प्रस्ताव के खिलाफ दोनों एक साथ खड़े हुए हैं। यही नहीं, भारत और तुर्की समेत 40 देशों को इसकी चुभन महसूस हुई है। इन देशों ने इस हफ्ते हुई मंत्री-स्तरीय बैठक में चीन के समर्थन वाले एक नए फ्रेमवर्क के प्रस्ताव पर विश्व व्यापार संगठन में चिंता जताई है। इकोनॉमिक टाइम्स (ईटी) ने इस मामले से जुड़े अधिकारियों के हवाले से यह जानकारी दी। इस नए फ्रेमवर्क का नाम इन्वेस्टमेंट फेसिलिटेशन फॉर डेवलपमेंट है। यह घटनाक्रम कई मायने में महत्वपूर्ण है। कारण है कि इस प्रस्ताव के समर्थक 26 से 29 मार्च तक कैमरून में होने वाले डब्ल्यूटीओ के 14वें मंत्री-स्तरीय सम्मेलन (एमसी14) में इस पर कोई समझौता करने के लिए उत्सुक हैं।</p>
<p><strong>समझौते को 120 देशों का समर्थन</strong></p>
<p>हालांकि, इस समझौते का समर्थन करने वाले करीब 120 सदस्य देशों का दावा है कि इससे प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करने और पारदर्शिता बढ़ाने में मदद मिलेगी। इससे अंतरराष्ट्रीय निवेश को बढ़ावा मिलेगा। लेकिन, चिंता की बात यह है कि इसके तहत एक स्वतंत्र संस्था के जरिए निवेश की जांच के लिए प्री-इन्वेस्टमेंट अपील सिस्टम बनाया जाएगा। इससे पॉलिसी फ्लेक्सिबिलिटी सीमित हो जाएगी।</p>
<p><strong>भारत समेत विरोध करने वाले देशों की चिंता</strong></p>
<p>एक अधिकारी ने बताया कि नई दिल्ली और अन्य सदस्य देशों ने सीमित नीतिगत दायरे और गरीब देशों के लिए विशेष और अलग व्यवहार के प्रावधानों की कमी को लेकर चिंता जताई है। तुर्की ने अलग से चिंता जताते हुए कहा है कि इस प्रस्ताव में प्री-इन्वेस्टमेंट और पोस्ट इन्वेस्टमेंट प्रावधानों को लेकर स्पष्टता का अभाव है। साथ ही रक्षा और परमाणु ऊर्जा जैसे संवेदनशील क्षेत्रों के लिए कोई छूट नहीं दी गई है। प्रस्तावित फ्रेमवर्क में ई-कॉमर्स को भी शामिल कर लिया गया है। नेपाल और श्रीलंका जैसे देशों ने भी अपनी आशंकाएं जाहिर की हैं। वे इस पहल में शामिल नहीं हैं। वहीं, अमेरिका, जो आईएफडी का सदस्य नहीं है, फिर भी इस समझौते को डब्ल्यूटीओ के ढांचे में शामिल किए जाने का समर्थन कर रहा है। भारत और दक्षिण अफ्रीका ने 2024 के मंत्री-स्तरीय सम्मेलन के दौरान आईएफडी को डब्ल्यूटीओ के ढांचे में शामिल करने के प्रयासों को रोक दिया था।</p>
<p><strong>क्या चल रहे हैं प्रयास?</strong></p>
<p>फिलहाल, इस बात के प्रयास किए जा रहे हैं कि आईएफडी समझौते को डब्ल्यूटीओ के कानूनी ढांचे के तहत संगठन के परिशिष्ट 4 में एक बहुपक्षीय समझौते के रूप में शामिल किया जाए। परिशिष्ट 4 में सूचीबद्ध बहुपक्षीय समझौते केवल उन सदस्य देशों पर लागू होते हैं, जो उनमें शामिल होते हैं। जो सदस्य शामिल नहीं होते, उन पर ये समझौते बाध्यकारी नहीं होते। किसी भी समझौते को इस परिशिष्ट में जोड़ने के लिए संगठन के सभी सदस्य देशों की सर्वसम्मति होना जरूरी है। एक अधिकारी ने बताया, जिन सदस्य देशों ने इस पहल में हिस्सा लिया है, उन्हें भी इस समझौते की परिभाषा, इसके दायरे और इसकी गतिविधियों को लेकर स्पष्टता के अभाव से जुड़ी चिंताएं हैं।</p>
<p>नई दिल्ली ने यह रुख बनाए रखा है कि व्यापार और निवेश से जुड़े किसी भी पहलू पर चर्चा डब्ल्यूटीओ के दायरे से बाहर है। कारण है कि यह कोई व्यापार समझौता नहीं है। साथ ही, संगठन को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि बहुपक्षीय समझौते अपवाद ही बने रहें, न कि एक सामान्य नियम बन जाएं। भारत ने इस बात पर जोर दिया है कि माराकेश समझौते के परिशिष्ट 4 में नए समझौतों को शामिल करना न केवल सदस्यों के अंतरराष्ट्रीय समझौते करने के अधिकार से जुड़ा मुद्दा है, बल्कि यह डब्ल्यूटीओ के कामकाज से भी संबंधित है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 24 Mar 2026 10:56:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>तुर्की में एक टन से ज्यादा नशीले पदार्थ जब्त, 144 तस्कर गिरफ्तार, तलाशी अभियान जारी</title>
                                    <description><![CDATA[तुर्की में 10 दिन चले अभियानों में पुलिस ने 1.24 टन नशीले पदार्थ, 18.3 लाख गोलियां जब्त कर 144 तस्करों को हिरासत में लिया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/more-than-one-ton-of-drugs-seized-in-t%C3%BCrkiye-144/article-142522"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/11-(700-x-400-px)-(630-x-400-px)-(23).png" alt=""></a><br /><p>इस्तांबुल। तुर्की के गृह मंत्री अली येरलिकाया ने सोमवार को घोषणा की कि तुर्की पुलिस ने पिछले 10 दिनों में देश भर में चलाये गये अभियानों में 1.24 टन नशीले पदार्थ जब्त किए हैं और नशीली दवाओं की तस्करी करने वाले 144 संदिग्धों को हिरासत में लिया है।</p>
<p>येरलिकाया ने एक्स पर एक बयान में कहा कि इन छापों के दौरान पुलिस ने 18.3 लाख नशे की गोलियां भी जब्त कीं। मंत्री ने बताया कि 24 प्रांतों में चलाए गये इन अभियानों का समन्वय मुख्य सरकारी वकीलों और एंटी-नारकोटिक्स इकाइयों ने किया था। </p>
<p>तुर्की ने हाल के वर्षों में ड्रग तस्करी के खिलाफ अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। यूरोप और एशिया के बीच इसकी रणनीतिक स्थिति, साथ ही व्यस्त सीमा क्रॉसिंग और सीमा शुल्क के दरवाजों के कारण यह तस्करों के लिए एक प्रमुख रास्ता बन गया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 09 Feb 2026 18:49:59 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>यूएई ने अजरबैजान से सदर्न गैस कॉरिडोर में हिस्सेदारी के लिए किया समझौता, 3500 किलोमीटर का पाइपलाइन नेटवर्क शामिल</title>
                                    <description><![CDATA[अबू धाबी में ADNOC की सहायक XRGC ने साउदर्न गैस कॉरिडोर में अजरबैजान अर्थव्यवस्था मंत्रालय के साथ समझौते पर हस्ताक्षर किए। 3,500 किमी पाइपलाइन नेटवर्क शामिल।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/uae-signs-agreement-with-azerbaijan-for-stake-in-southern-gas/article-141792"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/11-(700-x-400-px)-(630-x-400-px)-(8)2.png" alt=""></a><br /><p>अबू धाबी। संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) की अबू धाबी नेशनल ऑयल कंपनी (एडीएनओसी) की सहायक कंपनी एक्सआरजी ने सदर्न गैस कॉरिडोर में हिस्सेदारी हासिल करने के लिए अजरबैजान अर्थव्यवस्था मंत्रालय के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर किए है। अमीरात मीडिया ने यह जानकारी दी है।          </p>
<p>रिपोर्ट के अनुसार, अबू धाबी में यूएई के राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान और अजरबैजान के राष्ट्रपति इल्हाम अलीयेव की मौजूदगी में समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। डब्ल्यूएएम समाचार एजेंसी ने सोमवार को बताया कि यह समझौता कई शर्तों पर निर्भर है, जिसमें नियमित नियामक और विश्वास विरोधी मंजूरी हासिल करना शामिल है। हासिल की जा रही हिस्सेदारी की जानकारी का खुलासा नहीं किया गया।</p>
<p>रिपोर्ट में बताया गया है कि सदर्न गैस कॉरिडोर में प्राकृतिक गैस उत्पादन संपत्तियां और कैस्पियन सागर से जॉर्जिया और तुर्की होते हुए दक्षिणी यूरोप तक 3,500 किलोमीटर का पाइपलाइन नेटवर्क शामिल है, जिसकी मौजूदा आपूर्ति क्षमता हर साल 26 बिलियन क्यूबिक मीटर तक है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 03 Feb 2026 14:20:24 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>तुर्की में भीषण गोलीबारी, IS के खिलाफ छापेमारी में सात तुर्की पुलिसकर्मी घायल</title>
                                    <description><![CDATA[तुर्की के यालोवा प्रांत में सोमवार को इस्लामिक स्टेट (IS) के खिलाफ छापेमारी के दौरान भीषण मुठभेड़ हुई। एलमालिक गांव में छिपे आतंकवादियों ने पुलिस पर गोलीबारी की, जिसमें सात पुलिसकर्मी घायल हो गए। नए साल की सुरक्षा के मद्देनजर चलाए जा रहे इस अभियान में विशेष कमांडो तैनात किए गए हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/fierce-firing-in-t%C3%BCrkiye-seven-turkish-policemen-injured-in-raid/article-137620"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/turkey-is.png" alt=""></a><br /><p>इस्तांबुल। तुर्की के उत्तर-पश्चिमी प्रांत यालोवा में संदिग्ध इस्लामिक स्टेट (आईएस) सदस्यों को निशाना बनाकर किये गये आतंकवाद विरोधी अभियान के दौरान गोलीबारी में सात पुलिसकर्मी घायल हो गये। उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है।</p>
<p>सरकारी प्रसारक टीआरटी की रिपोर्ट में सोमवार को यह जानकारी दी गयी। रिपोर्ट में बताया कि प्रांतीय पुलिस इकाइयों ने एलमालिक गांव के एक घर पर छापा मारा, जहां छापेमारी अभियान के दौरान आईएस सदस्यों और पुलिस के बीच मुठभेड़ हुई। गोलीबारी के बाद, पड़ोसी प्रांत बर्सा से विशेष ऑपरेशन पुलिस को छापेमारी में मदद करने के लिए तैनात किया गया, जो आसपास के क्षेत्र में बढ़ी हुई सुरक्षा व्यवस्था के तहत जारी है। मुठभेड़ में घायल हुये पुलिसकर्मियों की हालत स्थिर बनी हुई है।</p>
<p>तुर्की ने हाल के हफ्तों में आईएस के खिलाफ अपने अभियान तेज कर दिए हैं। प्राप्त खुफिया जानकारी के अनुसार नये साल की छुट्टियों के दौरान सुरक्षा खतरों में बढ़ोतरी की चेतावनी दी है। गौरतलब है कि, तुर्की ने 2013 में आधिकारिक तौर पर आईएस समूह को आतंकवादी संगठन घोषित किया था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 29 Dec 2025 14:08:17 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>भीषण विमान दुर्घटना  में लीबियाई सेना प्रमुख अहमद अल-हदाद का निधन, जांच शुरू</title>
                                    <description><![CDATA[अंकारा से लौटते समय लीबियाई सेना प्रमुख मोहम्मद अली अल-हदाद का विमान तुर्की के हायमाना में दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इस हादसे में थल सेना कमांडर सहित पांच अधिकारियों की मौत हो गई।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/libyan-army-chief-ahmed-al-haddad-dies-in-horrific-plane-crash/article-137023"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/bibya-army-chief-death.png" alt=""></a><br /><p>त्रिपोली। लीबिया की सेना के प्रमुख, मोहम्मद अली अहमद अल-हदाद की मंगलवार को एक हवाई दुर्घटना में मौत हो गयी। वह अपने हवाई जहाज से तुर्की की राजधानी अंकारा की आधिकारिक यात्रा के बाद वापस आ रहे थे। लीबिया की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार के प्रधानमंत्री ने अब्दुल हामिद दबीबा ने इसे दुखद दुर्घटना बताते हुए कहा, यह अपूरणीय क्षति राष्ट्र, सैन्य संस्थान और समस्त जनता के लिए एक बड़ी हानि है। उन्होंने बताया कि विमान में हदाद के अलावा लीबिया की थल सेना के कमांडर, सैन्य विनिर्माण प्राधिकरण के निदेशक, कर्मचारी प्रमुख के एक सलाहकार और उनके कार्यालय का एक फोटोग्राफर भी सवार थे।</p>
<p>तुर्की के गृह मंत्री अली येरलिकाया ने सोशल मीडिया पर बताया कि विमान ने स्थानीय समयानुसार 17:10 बजे अंकारा के एसेनबोगा हवाई अड्डे से त्रिपोली के लिए उड़ान भरी और उसका 17:52 बजे रेडियो संपर्क टूट गया। अधिकारियों को बाद में अंकारा के हायमाना जिले के केसिक्कवाक गांव के पास विमान का मलबा मिला। उन्होंने बताया कि डसॉल्ट फाल्कन 50 प्रकार के इस जेट विमान ने हायमाना के ऊपर से गुजरते समय आपातकालीन लैंडिंग का अनुरोध किया था, लेकिन उसके बाद कोई संपर्क नहीं हो सका। उन्होंने लिखा कि पुलिस ने मलबे का पता लगा लिया है और घटनाक्रम से जनता को अवगत कराया जाएगा। दुर्घटना के कारणों का तत्काल पता नहीं चल पाया है। </p>
<p>लीबिया सरकार ने एक बयान में कहा कि प्रधानमंत्री ने रक्षा मंत्री को कार्यवाही की निगरानी के लिए एक आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल अंकारा भेजने का निर्देश दिया है और देश भर में तीन दिनों के आधिकारिक शोक की घोषणा की है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 24 Dec 2025 13:12:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>तुर्की ने मालदीव को सौंपा सबसे बड़ा नौसैनिक युद्धपोत धरुमावंथा, हरपून मिसाइलों से है लैस</title>
                                    <description><![CDATA[तुर्की ने मालदीव को सबसे बड़ा नौसैनिक युद्धपोत सौंपा है। इसके साथ ही तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप एर्दोगन के हिंद महासागर की साजिश का बड़ा खुलासा हो गया है]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/turkey-is-equipped-with-the-biggest-naval-warship-dharumavantha-harpoon/article-123907"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-08/oer-(1)11.png" alt=""></a><br /><p>माले। तुर्की ने मालदीव को सबसे बड़ा नौसैनिक युद्धपोत सौंपा है। इसके साथ ही तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप एर्दोगन के हिंद महासागर की साजिश का बड़ा खुलासा हो गया है। तुर्की ने युद्धपोत, जिसका नाम धरुमावंथा रखा गया है, वो हिंद महासागर में तुर्की की नौसेना की ताकत को बढ़ाएगा। रिपोर्ट के मुताबिक ये युद्धपोत काफी तेज रफ्तार से हमला करने की क्षमता रखता है। मालदीव की राजधानी माले के नजदीक हुलहुमाले क्षेत्र में शुक्रवार रात आयोजित एक समारोह के दौरान राष्ट्रपति डॉ. मोहम्मद मुइज्जू, रक्षा मंत्री गस्सान मौमून और तुर्की नौसेना के वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में इस पोत को कमीशन किया गया है।</p>
<p>इस दौरान मालदीव के रक्षा मंत्री गस्सान मौमून ने अपने संबोधन में कहा कि ये युद्धपोत, मालदीव की नौसैनिक क्षमता बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम है। उन्होंने 1980 में कोस्टगार्ड की स्थापना से अब तक हुई डेवलपमेंट का भी जिक्र किया और उन सभी को धन्यवाद दिया जिन्होंने इस बेड़े को मजबूत बनाने में योगदान दिया। मालदीव के रक्षा प्रमुख इब्राहीम हिल्मी ने भी कहा कि राष्ट्रपति मुइज्जू का वादा धीरे-धीरे पूरा हो रहा है और यह पोत तट रक्षक की क्षमताओं में कई गुना इजाफा करेगा।</p>
<p><strong>1981 में तुर्की नौसेना में शामिल किया गया था</strong><br />आपको बता दें कि धरुमावंथा नाम का ये युद्धपोत, असल में टीसीजी वोलकान (पी-343) है, जिसे 1981 में तुर्की नौसेना में शामिल किया गया था। चार दशक से ज्यादा समय तक यह जहाज तुर्की की समुद्री शक्ति का अहम हिस्सा रहा और बाद में इसे प्रशिक्षण और परीक्षण पोत के रूप में इस्तेमाल किया जाने लगा। जर्मन शिपबिल्डर लुर्सेन वर्फ्ट द्वारा बनाए गए इस डोगन-क्लास जहाज ने 20वीं सदी के अंत में तुर्की की नौसैनिक ताकत को नया आयाम दिया था। ये युद्धपोत इसलिए भी अहम है, क्योंकि तुर्की ने इसमें हरपून एंटी-शिप मिसाइलों का इस्तेमाल किया है। यह युद्धपोत 58 मीटर लंबा और 7.6 मीटर चौड़ा है। इसका पूरा लोड 436 टन तक होता है और इसमें चार डीजल इंजन लगे हैं जो 12,000 हॉर्सपावर की ताकत देते हैं। इसकी रफ्तार 38 नॉट्स (करीब 70 किमी/घंटा) तक पहुंच सकती है और यह 1,050 नॉटिकल मील (करीब 1,940 किमी) की दूरी तय कर सकता है। </p>
<p>इसमें 45 सैनिकों का दल तैनात होगा। हथियारों में दो हरपून एंटी-शिप मिसाइल, 76 मिमी का ओटो मेलारा नौसैनिक तोप, 35 मिमी एयर डिफेंस गन और मशीनगनें शामिल हैं। तुर्की लगातार हिंद महासागर में भारत को काउंटर करने के लिए भारत के पड़ोसी देशों के साथ डिफेंस डील कर रहा है और मालदीव को युद्धपोत सौंपना, एर्दोगन की इसी स्ट्रैटजी का हिस्सा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 18 Aug 2025 12:07:53 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पाकिस्तान और तुर्की के बीच बड़ा रक्षा समझौता, मिलकर बनाएंगे रॉकेट और गाइडेड मिसाइल</title>
                                    <description><![CDATA[पाकिस्तान और तुर्की के बीच लगातार गहरे होते संबंधों के बीच दोनों देशों की रक्षा क्षेत्र की कंपनियों के बीच समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर हुआ है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/rockets-and-guided-missiles-will-be-created-between-pakistan-and/article-121860"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-07/news-(12)6.png" alt=""></a><br /><p>इस्तांबुल। पाकिस्तान और तुर्की के बीच लगातार गहरे होते संबंधों के बीच दोनों देशों की रक्षा क्षेत्र की कंपनियों के बीच समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर हुआ है। पाकिस्तान के रक्षा समूह जीआईडीएस और तुर्की की रक्षा कंपनी एमकेई के बीच 24 जुलाई को एमओयू पर सहमति बनी है। दोनों रक्षा कंपनियों के बीच होने वाला यह समझौता हवाई हथियारों पर केंद्रित है, जो एमकेई के हवाई बमों और ड्रोन में इस्तेमाल होने वाले हथियारों में पाकिस्तान की रुचि को दिखाता है।</p>
<p><strong>इस्तांबुल में एमओयू पर हुए हस्ताक्षर :</strong></p>
<p>इस्तांबुल में आयोजित अंतरराष्ट्रीय रक्षा उद्योग मेले के दौरान इस समझौता ज्ञापर पर हस्ताक्षर किए गए, जहां दुनिया भर की रक्षा कंपनियों ने अपनी नवीनतम तकनीकों का प्रदर्शन किया। पाकिस्तान और तुर्की के अधिकारियों ने एमओयू को एक रणनीतिक साझेदारी बताया जो स्वदेशी रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने और क्षेत्रीय सुरक्षा को बढ़ाने के उनके साझा लक्ष्यों के अनुरूप है। यह समझौता भारत और पाकिस्तान के बीच बीती मई में हुई सैन्य झड़प के बाद हो रहा है, जिसमें पाकिस्तानी सेना ने तुर्की के ड्रोन का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया था।</p>
<p>पाकिस्तानी वायुसेना विभिन्न प्रकार के प्लेटफॉर्म का संचालन करती है, जिनमें एफ-16, जेएफ-17 और तुर्की ड्रोन शामिल हैं, जो एमके सीरीज जैसे नाटो-मानक हथियारों के अनुकूल है। तुर्की की सरकारी कंपनी एमकेई 40 से अधिक देशों को निर्यात करती है, जिसमें पाकिस्तान एक प्रमुख भागीदार है। साल 2024 में एमकेई ने 63.9 करोड़ डॉलर का निर्यात किया था। इसकी रैंकिंग शीर्ष 100 वैश्विक रक्षा फर्मों में रही थी, जो पाकिस्तान को आपूर्ति करने की इसकी क्षमता को दिखाती है।</p>
<p><strong>नवाचार एवं निर्यात के नए रास्ते खुलेंगे :</strong></p>
<p>एमकेई मख्य रूप से तुर्की के सशस्त्र बलों के लिए विभिन्न प्रकार के हवाई बम और संबंधित हथियार बनाती है। पाकिस्तान इस समय हथियारों के लिए तुर्की का रुख कर रहा है। इस समझौते के तहत जीआईडीएस और एमकेई संयुक्त उद्यम, टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और एडवांस हवाई हथियारों के सह-विकास की संभावनाओं पर विचार करेंगे। इन हथियारों में सटीक निर्देशित बम, हवा से जमीन पर मार करने वाली मिसाइल प्रणालियां और रॉकेट तकनीकें शामिल हैं। साझेदारी से पाकिस्तान के गोला-बारूद निर्माण क्षमता में वृद्धि और नवाचार एवं निर्यात के नए रास्ते खुलने की उम्मीद है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 28 Jul 2025 12:22:51 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur KD]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>टिकटॉक पर प्रतिबंध लगा सकता है तुर्की</title>
                                    <description><![CDATA[ तुर्की में नियमों का उल्लंघन करने के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म टिकटॉक को ब्लॉक किया जा सकता है वहीं एक्स को देश में प्रतिनिधि नियुक्त करने से इनकार करने पर परिणाम भुगतना पड़ सकता है। तुर्की में डिजिटल मीडिया पर संसदीय आयोग के प्रमुख हुसैन यायमन ने यह जानकारी दी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/turkey-may-ban-tiktok/article-77515"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-05/6633-copy.jpg22.jpg" alt=""></a><br /><p>इस्तांबुल। तुर्की में नियमों का उल्लंघन करने के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म टिकटॉक को ब्लॉक किया जा सकता है वहीं एक्स को देश में प्रतिनिधि नियुक्त करने से इनकार करने पर परिणाम भुगतना पड़ सकता है। तुर्की में डिजिटल मीडिया पर संसदीय आयोग के प्रमुख हुसैन यायमन ने यह जानकारी दी।</p>
<p>हुसैन यायमन ने तुर्की की संसद में गुरुवार को अपने संबोधन में कहा कि इंटरनेट ट्रोल या ऑनलाइन बदमाश जो जानबूझकर आक्रामक या उत्तेजक संदेश ऑनलाइन पोस्ट करते हैं अन्य बातों के अलावा तुर्की में राजनीतिक और सार्वजनिक जीवन को धमकी देते हैं। उन्होंने याद दिलाया कि टिकटॉक प्रतिनिधियों ने पहले कुछ सांसदों के सवालों का लिखित जवाब दिया था लेकिन जवाब संतोषप्रद नहीं थे। हुसैन यायमन ने कहा कि संसद में हर कोई सेंसरशिप के खिलाफ है लेकिन परिवारों और बच्चों की रक्षा करना और यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि युवा स्वस्थ दिमाग के साथ बड़े हों।</p>
<p>तुर्की प्रसारक एनटीवी ने हुसैन यायमन के हवाले से कहा हमारा आयोग प्रतिबंध लगाने के खिलाफ है लेकिन हमारे आयोग के नवीनतम विश्लेषण के अनुसार कुछ करने की जरूरत है। अमेरिका में टिकटॉक पर प्रतिबंध लगा दिया गया है हम इस प्रतिबंध के खिलाफ हैं लेकिन तुर्की में विधायी प्रतिबंध की स्थिति आ सकती है। हुसैन यायमन ने कहा किसी को यह नहीं सोचना चाहिए कि वह कानून से ऊपर है। जैसे आप कनाडा फ्रांस यूनाइटेड किंगडम ऑस्ट्रिया और डेनमार्क में काम कर रहे हैं हमारे साथ भी वैसा ही है आपको कानूनों का पालन करना चाहिए।मैं आखिरी के लिए कह रहा हूं इस समय सोशल नेटवर्क एक्स के लिए हमारी आखिरी कॉल है या तो आप तुर्की आएंगे या आप परिणामों से निपटेंगे आपने कहा था कि आप एक प्रतिनिधि नियुक्त करेंगे लेकिन ये अब तक सिर्फ शब्द हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/world/turkey-may-ban-tiktok/article-77515</link>
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                <pubDate>Fri, 10 May 2024 17:01:30 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>गर्मियों में इराक से सटी सीमा पूरी तरह से सुरक्षित हो जाएगी: तुर्की</title>
                                    <description><![CDATA[गुलेर ने तुर्की के अखबार हुर्रियत के साथ एक साक्षात्कार में कहा, ''इस गर्मी में तक हम क्षेत्र के उस घेरे को बंद कर देंगे जो इराक से सटी हमारी सीमा को सुरक्षित करेगा और इसके साथ आतंकवाद का मुद्दा अब प्रासंगिक नहीं रहेगा।"]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/turkey-border-with-iraq-will-be-completely-safe-by-summer/article-72426"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-03/transfer-(14)3.jpg" alt=""></a><br /><p>अंकारा। तुर्की के रक्षा मंत्री यासर गुलेर ने सोमवार को कहा कि देश के सशस्त्र बलों को गर्मी में इराक से सटी सीमा को पूरी तरह से सुरक्षित करने और आतंकवाद की समस्या को एजेंडे से हटाने की उम्मीद है।</p>
<p>गुलेर ने तुर्की के अखबार हुर्रियत के साथ एक साक्षात्कार में कहा, ''इस गर्मी में तक हम क्षेत्र के उस घेरे को बंद कर देंगे जो इराक से सटी हमारी सीमा को सुरक्षित करेगा और इसके साथ आतंकवाद का मुद्दा अब प्रासंगिक नहीं रहेगा।"</p>
<p>रिपोर्ट में बताया कि तुर्की सशस्त्र बलों को देश में प्रतिबंधित कुर्दिस्तान वर्कर्स पार्टी (पीकेके) के उग्रवादियों के खिलाफ उत्तरी इराक में बड़े पैमाने पर जमीनी अभियान चलाने की उम्मीद है और इसके लिए बगदाद प्रशासन के साथ एक समझौता हुआ है।</p>
<p>रक्षा मंत्री ने कहा कि आतंकवाद विरोधी अभियान चलाने के लिए अमेरिका या रूस से कोई अनुमति नहीं मांगी जाएगी। गुलेर ने कहा, ''जब हमारे देश की सुरक्षा की बात सामने आती है, तो हम किसी से कुछ भी सलाह नहीं मांगते हैं और जो जरूरी होता है, वह करते हैं। किसी को यह नहीं भूलना चाहिए कि तुर्की बड़ा देश है। हमने न किसी के आदेश को माना है और न ही मानंगे।"</p>
<p>पिछले हफ्ते, तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन ने दोहराया कि अंकारा को गर्मियों में इराक से सटी सीमा मुद्दे को हल करने की उम्मीद है। तुर्की सीरिया से सटी 30-40 किलोमीटर क्षेत्र पर एक सुरक्षा गलियारा भी बनाना चाहता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 11 Mar 2024 17:34:09 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>तुर्की ने सीरिया में  वर्कर्स पार्टी ऑफ कुर्दिस्तान के 15 ठिकानों को नष्ट किया</title>
                                    <description><![CDATA[मंत्रालय ने कहा, 06 अक्टूबर, 2023 को रात 10 बजे, उत्तरी सीरिया में आतंकवादी ठिकानों पर हवाई हमले किए गए, जिसमें तथाकथित मुख्यालय, आश्रय और गोदामों सहित 15 स्थलों को नष्ट कर दिया गया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/turkey-destroys-15-pkk-bases-in-syria/article-58954"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-10/tukey.png" alt=""></a><br /><p>अंकारा। तुर्की के सशस्त्र बलों ने देश में प्रतिबंधित वर्कर्स पार्टी ऑफ कुर्दिस्तान (पीकेके) के 15 ठिकानों को नष्ट कर दिया है। तुर्की रक्षा मंत्रालय ने एक बयान में यह जानकारी दी है।</p>
<p>बयान में कहा गया है कि अंकारा के केंद्र में आंतरिक मंत्रालय की इमारत के पास रविवार सुबह एक आतंकवादी हमले के प्रयास के बाद तुर्की सुरक्षा सेवाएँ पूरे देश में हीरोज आतंकवाद विरोधी अभियान चला रही हैं। इस दौरान एक आतंकवादी ने खुद को उड़ा लिया और दूसरा मारा गया। गोलीबारी के दौरान दो पुलिस अधिकारी मामूली रूप से घायल हो गए।</p>
<p>ए हैबर टीवी चैनल की रिपोर्ट के अनुसार, तुर्की में प्रतिबंधित पीकेके ने आतंकवादी हमले की जिम्मेदारी ली है। मंत्रालय ने इन घटनाओं के बाद उत्तरी इराक और सीरिया में पीकेके आतंकवादी ठिकानों पर हवाई हमलों की सूचना दी।</p>
<p>मंत्रालय ने कहा, 06 अक्टूबर, 2023 को रात 10 बजे, उत्तरी सीरिया में आतंकवादी ठिकानों पर हवाई हमले किए गए, जिसमें तथाकथित मुख्यालय, आश्रय और गोदामों सहित 15 स्थलों को नष्ट कर दिया गया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 07 Oct 2023 17:55:47 +0530</pubDate>
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                <title>तुर्की से रूस आ रहे जहाज पर मिला विस्फोटक : एफएसबी</title>
                                    <description><![CDATA[एफएसबी ने बताया कि 22 जुलाई को तुर्की से रोस्तोव-ऑन-डॉन जा रहे मालवाहक जहाज में डाइनिट्रोटोलुइन जैसी विस्फोटक सामग्री और बाहरी हस्तक्षेप के निशान पाए गए।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/explosives-found-on-ship-coming-from-turkey-to-russia--fsb/article-52643"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-07/news-(4)1.png" alt=""></a><br /><p>मॉस्को। रूस की संघीय सुरक्षा सेवा (एफएसबी) ने सोमवार को कहा कि तुर्की से रोस्तोव-ऑन-डॉन आ रहे मालवाहक जहाज का संभावित आतंकवादी हमलों को रोकने के लिए केर्च जलडमरूमध्य से गुजरने के दौरान निरीक्षण में जहाज पर विस्फोटक मिला है। </p>
<p>एफएसबी ने बताया कि 22 जुलाई को तुर्की से रोस्तोव-ऑन-डॉन जा रहे मालवाहक जहाज में डाइनिट्रोटोलुइन जैसी विस्फोटक सामग्री और बाहरी हस्तक्षेप के निशान पाए गए।</p>
<p>उन्होंने कहा, ''हम आतंकवादी और विध्वंसकारी हमलों को रोकने और समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए केर्च जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों का निरीक्षण उपाय कर रहे हैं।"</p>
<p>एफएसबी के अनुसार मई के अंत में जहाज किलिया के यूक्रेनी बंदरगाह में था, लेकिन जुलाई में तुर्की में इसने अपने चालक दल को पूरी तरह से बदलकर उसमें 12 यूक्रेनी नागरिक शामिल किया। उन्होंने कहा कि इस जहाज के जलडमरूमध्य से गुजरने पर रोक लगाने का फैसला किया गया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 24 Jul 2023 21:50:47 +0530</pubDate>
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