<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://dainiknavajyoti.com/garbage-heaps/tag-31825" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>Dainik Navajyoti Rising Rajasthan RSS Feed Generator</generator>
                <title>garbage heaps - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
                <link>https://dainiknavajyoti.com/tag/31825/rss</link>
                <description>garbage heaps RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>बुनियादी सुविधाओं का अभाव : टूटी सड़कें, अंधेरा और कचरे के ढेर की कड़वी सच्चाई</title>
                                    <description><![CDATA[कोटा ग्राउंड रिपोर्ट: वार्ड 60 से 65 में विकास के दावों की खुली पोल।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/lack-of-basic-amenities--the-harsh-reality-of-broken-roads--darkness--and-garbage-heaps/article-163730"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-08/111200-x-600-px)-(3)51.png" alt=""></a><br /><p>कोटा।शहर के प्रमुख इलाकों में शामिल वार्ड 60 से 65 की ग्राउंड रिपोर्ट में विकास के दावों की अलग तस्वीर सामने आई। कहीं टूटी सड़कें परेशानी बढ़ा रही हैं तो कहीं रोड लाइट और सफाई व्यवस्था लोगों के लिए बड़ी समस्या बनी हुई है। कई जगह सड़क और नालियों का निर्माण तक नहीं हुआ है। वार्ड 63 के छावनी क्षेत्र में टूटी सड़कों और जगह-जगह बने कचरा पॉइंट की समस्या सामने आई। सफाई व्यवस्था कमजोर होने से कचरा पॉइंट भी परेशानी का कारण बने हुए हैं। लोगों ने कहा कि सड़क, सफाई और रोड लाइट जैसी सुविधाएं हर वार्ड की पहली जरूरत हैं, लेकिन इन पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा। वार्ड 60, 61 और 62 में भी सड़क, रोड लाइट और सफाई को लेकर लोगों की शिकायतें सामने आईं। कई जगह सड़कें खराब हैं। पर्याप्त रोशनी नहीं होने से शाम के बाद परेशानी बढ़ जाती है। सफाई व्यवस्था को लेकर भी लोगों में नाराजगी है।</p>
<p><strong>वार्ड में सड़क-नाली का इंतजार</strong><br />वार्ड नंबर 64 में स्थानीय लोगों का आरोप है कि पार्षद समस्या दूर करवाना तो दूर, उनकी समस्या पूछने तक नहीं आते। वार्डवासियों ने कहा कि चुनाव से पहले उनसे कई बड़े-बड़े वादे किए गए थे। विकास कार्य करवाने और समस्याओं का समाधान करने की बात कही गई थी, लेकिन चुनाव जीतने के बाद कई वादे अधूरे रह गए। लोगों का कहना है कि अब जब वे अपनी समस्याएं बताते हैं तो सरकार के बीच में चले जाने का तर्क दिया जाता है।</p>
<p><strong>पूर्व पार्षद लेखराज योगी ने बताया</strong><br />वार्ड का एक बड़ा हिस्सा पहले कच्ची बस्ती और डूबत क्षेत्र में आता था। मेरे कार्यकाल में इन क्षेत्रों को व्यवस्थित और विकसित करने की दिशा में काम किया गया। वार्ड की सबसे बड़ी समस्या नाले को लेकर थी, जिसके कारण जलभराव और अन्य परेशानियां बनी रहती थीं।</p>
<p><strong>पूर्व पार्षद शिवांगी सोनी ने बताया</strong><br />वार्ड क्षेत्र में आने वाले विशाल मार्केट में बना नाला लंबे समय से हादसों का कारण बना हुआ था। नाले को व्यवस्थित कराया गया। वार्ड में सीवरेज लाइन डलवाने के साथ बंगाली कॉलोनी के गार्डन का जीर्णोद्धार भी करवाया गया। अधिकारियों ने वार्ड के साथ भेदभाव किया, जिसके चलते कई जरूरी कार्य आज भी अधूरे पड़े हैं।</p>
<p><strong>पूर्व पार्षद इसरार मोहम्मद ने बताया</strong><br />वार्ड में वर्षों पुरानी सीवरेज व्यवस्था लोगों के लिए परेशानी का कारण बनी हुई थी। कार्यकाल में पुरानी सीवरेज लाइन को हटाकर नई लाइन डलवाई गई। वार्ड में बने नालों का सीसी निर्माण करवाने के साथ पेयजल व्यवस्था को मजबूत करने के लिए नई पानी की लाइन भी डलवाई गई।</p>
<p><strong>पूर्व पार्षद ऐश्वर्य श्रृंगी ने बताया</strong><br />वार्ड में लंबे समय से चली आ रही पेयजल समस्या का स्थायी समाधान करवाया गया। पूरे वार्ड क्षेत्र में रोड लाइट लगवाकर अंधेरे की समस्या को भी दूर किया गया। शिकायत मिलते ही संबंधित अधिकारियों से संपर्क कर उसका समाधान उसी दिन करवाया जाए। जनप्रतिनिधि की सबसे बड़ी जिम्मेदारी जनता के बीच रहकर समस्याओं का समाधान करना है।</p>
<p><strong>वार्डवासी आकाश कश्यप ने कहा</strong><br />वार्ड की मौजूदा स्थिति पर नाराजगी जताते हुए कहा कि क्षेत्र में व्यवस्थाएं लगातार बिगड़ती जा रही हैं। कई जगह सड़कें क्षतिग्रस्त हैं और सफाई व्यवस्था भी पूरी तरह चरमराई हुई है। वर्षों से बने कचरा पॉइंट अब तक नहीं हटाए गए, जिससे गंदगी और बदबू की समस्या बनी रहती है।</p>
<p><strong>वार्डवासी विवेक प्रजापति ने कहा</strong><br />कम से कम दिन में एक बार पूरे वार्ड का भ्रमण करने से क्षेत्र की वास्तविक स्थिति का पता लगाया जा सकता है। कई समस्याएं ऐसी होती हैं, जिनकी जानकारी शिकायत मिलने के बाद नहीं बल्कि मौके पर जाकर ही होती है। इसलिए जनप्रतिनिधि को सक्रिय रहकर जनता से सीधा संवाद करना चाहिए और समस्याओं के समाधान के लिए अधिकारियों से लगातार समन्वय रखना चाहिए।</p>
<p><strong>वार्ड नंबर व क्षेत्र</strong><br /><strong>वार्ड नंबर 60: </strong>न्यू पब्लिक सीनियर सेकेंडरी स्कूल, सर्वोदय कॉलेज ऑफ पैरामेडिकल, शिवाजी पार्क, गुलमोहर पार्क, गवर्नमेंट संस्कृत स्कूल, नूरी जामा मस्जिद आदि क्षेत्र शामिल हैं।</p>
<p><strong>वार्ड नंबर 61</strong>: ईएसआई हॉस्पिटल, आईटीआई कॉलेज, आयशा मस्जिद, न्यू मोटर मार्केट, मंशापूर्ण हनुमान मंदिर, मीणा छात्रावास, महिला पॉलिटेक्निक कॉलेज, चमत्कारेश्वर हनुमान मंदिर, अपना घर आश्रम, कलाल सामुदायिक भवन तथा संजय नगर का आंशिक क्षेत्र शामिल है।</p>
<p><strong>वार्ड नंबर 62:</strong> गोविंद नगर, एसएसएफ चौराहा, सूर्य नगर तथा जेके फैक्ट्री का क्षेत्र शामिल है।</p>
<p><strong>वार्ड नंबर 63:</strong> अहलूवालिया मॉल, पुलिस चौकी, छावनी पुलिस चौकी के पीछे का क्षेत्र, दुर्गा बस्ती, भेरू बस्ती, छावनी रामचंद्रपुरा की गली नंबर 1, 2, 3, 4 व 5, इंडस्ट्रियल एरिया, घेरवाले बाबा के पीछे का क्षेत्र, शीतला माता मंदिर के आसपास का क्षेत्र, बंगाली कॉलोनी, तिलक नगर, पालीवाल कंपाउंड तथा विशाल मार्केट का क्षेत्र आदि शामिल हैं।</p>
<p><strong>वार्ड नंबर 64:</strong> शिव आश्रम के पीछे का क्षेत्र, जेपी कॉलोनी, चमड़ा फैक्ट्री के आसपास का क्षेत्र, राजपूत कॉलोनी, राधा-कृष्ण मंदिर के आसपास का क्षेत्र, शीतला माता मंदिर तथा मंगलेश्वर व्यायामशाला के आसपास का क्षेत्र आदि शामिल हैं।</p>
<p><strong>वार्ड नंबर 65:</strong> गोपेश्वर महादेव मंदिर, तेलियों का मंदिर, तिलक स्कूल, सुलभ कॉम्प्लेक्स, नेशनल टेलर्स के पीछे का क्षेत्र, दुर्गा ड्राईक्लीनर्स के पीछे का क्षेत्र, गोपेश्वर महादेव मंदिर के पीछे का क्षेत्र, जमुना पान भंडार के पीछे का क्षेत्र, जगदीश माईल पूर्व पार्षद के पीछे का क्षेत्र, एक मीनार मस्जिद के पीछे का क्षेत्र, एस पी कॉलोनी का आंशिक भाग तथा शमा कॉलोनी का क्षेत्र शामिल है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/lack-of-basic-amenities--the-harsh-reality-of-broken-roads--darkness--and-garbage-heaps/article-163730</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/lack-of-basic-amenities--the-harsh-reality-of-broken-roads--darkness--and-garbage-heaps/article-163730</guid>
                <pubDate>Mon, 24 Aug 2026 15:18:05 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2026-08/111200-x-600-px%29-%283%2951.png"                         length="1174852"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कूड़े के ढेर समूची दुनिया की समस्या</title>
                                    <description><![CDATA[ कोई शहर इस समस्या से अछूता नहीं है। सरकार की ही माने तो हर साल इसमें 1.3 फीसदी से भी अधिक की दर से बढ़ोतरी हो रही है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/garbage-heaps-of-the-whole-world/article-20937"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-08/bob-copy1.jpg" alt=""></a><br /><p>कूड़े के पहाड़ कहें या ढेर समूची दुनिया की समस्या बन चुके हैं। असलियत तो यह है कि समूची दुनिया आज कूड़े की समस्या से जूझ रही है। अपने देश को ही लें, हमारे देश के शहरों में से ही सालाना 6.2 करोड़ टन से भी ज्यादा कूड़ा निकलता है। कोई शहर इस समस्या से बचा नहीं है। सरकार की ही माने तो हर साल इसमें 1.3 फीसदी से भी अधिक की दर से बढ़ोतरी हो रही है। इसके चलते ही देश में कूड़े की समस्या ने भयावह रूप अख्तियार कर लिया है। यह समस्या उस हालत में है जबकि कूड़े के निस्तारण के लिए देश में व्यवस्थित रूप से सरकारी विभाग हैं, हजारों कार्यालय हैं और पूरे लाव-लश्कर व तामझाम के साथ लाखों की तादाद में सरकारी और स्थानीय निकायों के कर्मचारी हैं। उस हालत में कूड़ा कैसे भीषण समस्या बन गया, यह विचारणीय है। महानगरों-शहरों-कस्बों की बात छोड़िए, वे भी लाख कोशिशों के बाद भी कूड़े के दंश को झेलने को अभिशप्त हैं। अब तो देश के पहाड़ी इलाके जो सैरगाहों के लिए मशहूर थे और तीर्थ स्थल जहां आस्था के वशीभूत तीर्थ यात्री दर्शनों के लिए जाकर खुद को धन्य समझते थे, वे भी जगह-जगह ढलानों-जंगलों व निचली खाली पड़ी जगहों पर कूड़े के ढेर और कहीं-कहीं कूड़े के नए पहाड़ों की समस्या से जूझ रहे हैं। आदि कैलाश इसका जीता-जागता सबूत है जहां से केवल चार महीनों में ही 500 किलो से ज्यादा कूड़ा-कचरा निकाला जा चुका है। पर्वतीय स्थल हों या फिर धार्मिक तीर्थ स्थलों पर पर्यटन को बढ़ावा देने वाली सरकारी नीति के चलते खुले रिसोर्टों ने इसमें अहम भूमिका निबाई है। यहां आने वाले पर्यटकों-तीर्थ यात्रियों द्वारा छोड़ी गई प्लास्टिक की बोतलों, पॉलिथीन, पैक्ड फूड की थैलियों सहित रिसोर्टों का कचरा दिन-ब-दिन बढ़ता ही जा रहा है। यह चिंतनीय है। </p>
<p>देश की राजधानी दिल्ली के लिए तो कूडेÞ के पहाड़ एक भीषण समस्या बन चुके हैं। हालात इस बात के सबूत हैं कि हाल-फिलहाल यह मसला हल होने वाला भी नहीं है। इसका सबसे बडाÞ कारण तो यह है कि लाख कोशिशों के बावजूद इन कूडेÞ के पहाड़ों पर कूड़ा कम होने के बजाए दिनोंदिन बढ़ता ही जा रहा है। यहां कूड़ा कम किए जाने की दिशा में सरकारी प्रयास अभी तक नाकाफी ही साबित हुए हैं। इसका जीता जागता सबूत है कि बीते साल की तुलना में इस साल यहां पर अभी तक कूडेÞ की मात्रा में 851 टन की बढ़ोतरी होना है, जबकि साल 2024 की मार्च तक इन तीनों यथा-गाजीपुर, भलस्वा और ओखला लैंडफिल साइटों का साफ  कर दिए जाने का लक्ष्य निर्धारित है। मौजूदा हालात तो इसकी गवाही नहीं देते कि मार्च 2024 तक यह लक्ष्य पूरा कर लिया जाएगा। इसका सबसे अहम कारण यह है कि दिल्ली के इन कूड़े के पहाड़ों से जितना कचरा रोज निपटाया जाता है, उससे तकरीब 400 टन से ज्यादा नया कचरा रोज आ जाता है। यदि मौजूदा हालात पर नजर डालें तो पता चलता है कि इन तीनों लैंडफिल साइटों पर इनकी क्षमता पूरी होने के बावजूद कूड़ा पड़ना निर्बाध गति से जारी है, उस पर कोई अंकुश नहीं है। क्योंकि सरकार लाख कवायद के बावजूद इसका विकल्प ढूंढ पाने में नाकाम रही है। यही वजह है कि यहां पड़ने वाले कूडेÞ की मात्रा कम होने के बजाए लगातार बढ़ती ही जा रही है। दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट भी इस तथ्य को प्रमाणित करती है। उसके अनुसार देश की राजधानी दिल्ली से रोजाना निकलने वाला 54 फीसदी कूड़ा इन्हीं कूडे के पहाड़ों पर डाला जा रहा है जिसके चलते इन लैंडफिल साइटों पर पड़ने वाले कूडेÞ की मात्रा में 851 टन का इजाफा हो गया है। राजधानी दिल्ली में तकरीब 7 हजार मीट्रिक टन कूडाÞ-कचरा निकल रहा है। जबकि इसमें से अधिकांशत: प्लास्टिक, कागज, गत्ते के टुकडेÞ, धातु आदि को कचरा बीनने वाले निकाल कर बेच देते हैं। शेष तकरीब 30 फीसदी कूडे-कचरे का ढंग से निस्तारण कर पाना दिल्ली के तीनों नगर निगमों के लिए टेड़ी खीर है। कहने को तो पालिथिन पर बंदिश है लेकिन आज भी करीब 585 टन के करीब प्लास्टिक कचरा रोजाना निकल रहा है। इनमें से मेडीकल और इलैक्ट्रिक कचरा प्रदूषण में और जहर घोल रहा है। दुखदायी बात तो यह है कि इन कूड़े के पहाड़ों पर आग लगने की घटनाएं आम हो गई हैं। यही नहीं इनके आसपास के इलाके की हवा की गुणवत्ता इतनी प्रभावित हो चुकी है, जिससे जहरीली हो चुकी हवा से वहां के रहने वाले लोगों का जीना हराम हो गया है। पर्यावरण तो प्रभावित हुआ ही है, प्रदूषण बढ़ रहा है सो अलग। इससे समीपस्थ इलाके के लोगों के स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है और वह श्वांस, अस्थमा, पेट, लीवर, आंत्रशोध, हैजा, फेफडेÞ व जलजनित आदि जानलेवा बीमारियों के शिकार हो अनचाहे मौत के मुंह में जा रहे हैं। इसका सबसे ज्यादा असर बच्चे और बूढ़ों पर पड़ रहा है। </p>
<p><strong>(ये लेखक के अपने विचार हैं)</strong></p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/opinion/garbage-heaps-of-the-whole-world/article-20937</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/opinion/garbage-heaps-of-the-whole-world/article-20937</guid>
                <pubDate>Tue, 30 Aug 2022 10:35:21 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2022-08/bob-copy1.jpg"                         length="513756"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        