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                <title>financial inclusion - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>financial inclusion RSS Feed</description>
                
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                <title>केन्द्रीय सहकारी बैंकों की सेवाओं का होगा विस्तार, नई शाखाएं और बीमा व्यवसाय शुरू करने की तैयारी</title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थान सरकार केंद्रीय सहकारी बैंकों को मजबूत करने के लिए नए जिलों में सर्वेक्षण करा रही है। अब इन बैंकों में बीमा व्यवसाय भी शुरू होगा, जिससे किसानों को एक ही छत के नीचे वित्तीय सुविधाएं मिलेंगी। ग्रामीण क्षेत्रों में बैंकिंग पहुंच बढ़ाने के लिए सेवाओं के आधुनिकीकरण और वित्तीय ढांचे को सुदृढ़ करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/services-of-central-co-operative-banks-will-be-expanded-and-preparations/article-146403"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/1200-x-60-px)-(youtube-thumbnail)1.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। प्रदेश में केन्द्रीय सहकारी बैंकों की सेवाओं के विस्तार की दिशा में राज्य सरकार कदम उठा रही है। जिन जिलों में अभी केन्द्रीय सहकारी बैंक संचालित नहीं हैं, वहां सर्वे कराया जा रहा है और सक्षमता के आधार पर नए केन्द्रीय सहकारी बैंक स्थापित करने की कार्यवाही की जा रही है।</p>
<p> केन्द्रीय सहकारी बैंकों के उप नियमों में संशोधन कर उनमें बीमा व्यवसाय शुरू करने की प्रक्रिया भी प्रारंभ कर दी गई है। इससे बैंकों की सेवाओं का दायरा बढ़ेगा और किसानों व आम उपभोक्ताओं को एक ही स्थान पर अधिक वित्तीय सुविधाएं उपलब्ध हो सकेंगी। प्रदेश में ग्राम सेवा सहकारी समितियों और केन्द्रीय सहकारी बैंकों की प्रकृति व भूमिका अलग-अलग है। इसी कारण केन्द्रीय सहकारी बैंकों की शाखाओं को नि:शुल्क भूमि आवंटन का कोई प्रावधान नहीं है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि यदि इन बैंकों की शाखाओं के लिए भूमि आवंटन से संबंधित प्रस्ताव प्राप्त होते हैं तो उन पर नियमानुसार विचार किया जाएगा। सरकार का उद्देश्य सहकारी बैंकिंग व्यवस्था को मजबूत करते हुए ग्रामीण क्षेत्रों में वित्तीय सेवाओं की पहुंच बढ़ाना है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 13 Mar 2026 17:00:37 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पीएम मोदी ने दी अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर महिलाओं को शुभकामनाएं, कहा-महिलाएं पक्के इरादे, रचनात्मकता और बेमिसाल जोश के साथ भारत की तरक्की को दे रही आकार</title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर देश की 'नारी शक्ति' को बधाई देते हुए उन्हें विकसित भारत का आधार बताया। उन्होंने कहा कि पिछले दशक की सरकारी योजनाओं ने महिलाओं के लिए समान अवसर सुनिश्चित किए हैं। पीएम ने जमीनी स्तर पर आए बदलावों का उल्लेख करते हुए राष्ट्र निर्माण में उनके अतुलनीय जोश और रचनात्मकता की सराहना की।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/pm-modi-congratulated-women-on-international-womens-day-and-said/article-145698"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/modi-1.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर रविवार को देश भर की महिलाओं को बधाई दी और भारत के विकास में उनके योगदान की सराहना करते हुए कहा कि नारी शक्ति की उपलब्धियां देश को प्रेरित करती हैं और एक विकसित भारत की ओर इसके सफऱ को मजबूत करती हैं। पीएम मोदी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर किये गये सिलसिलेवार पोस्ट में कहा कि महिलाएं सभी क्षेत्रों में बदलाव लाने वाली भूमिका निभा रही हैं और देश की तरक्की के केंद्र में हैं। उन्होंने लिखा, अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर मैं हमारी सभी नारी शक्ति को बधाई देता हूं। हर क्षेत्र में महिलाएं पक्के इरादे, रचनात्मकता और बेमिसाल जोश के साथ भारत की तरक्की को आकार दे रही हैं। उनकी उपलब्धियां हमारे देश को प्रेरित करती हैं और विकसित भारत बनाने के हमारे सामूहिक इरादे को मजबूत करती हैं।</p>
<p>पीएम मोदी ने महिला सशक्तिकरण पर सरकार के ध्यान का उल्लेख करते हुए कहा कि पिछले दस सालों में शुरू की गई कई पहल और योजनाओं का मकसद अवसरों को बढ़ाना और महिलाओं को उनकी पूरी क्षमता का एहसास कराना है। उन्होंने कहा, महिलाओं का सशक्तिकरण हमारी अलग-अलग योजनाओं और पहलों का मुख्य हिस्सा है। हम ऐसे मौके बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं जिनसे हर महिला अपनी पूरी क्षमता का एहसास कर सके और भारत के विकास के सफऱ में योगदान दे सके। </p>
<p>उन्होंने एक अन्य पोस्ट में लिखा कि देश भर में महिलाओं की उपलब्धियां भारत के भविष्य को आकार दे रही हैं। पीएम मोदी ने लिखा, भारत की नारी शक्ति की उपलब्धियां गर्व का विषय हैं और राष्ट्र निर्माण में बदलाव लाने वाली भूमिका की एक मजबूत याद दिलाती हैं। जैसे-जैसे भारत आगे बढ़ेगा, महिलाओं की उम्मीदें और योगदान एक मजबूत और खुशहाल देश की ओर हमारी सामूहिक यात्रा को प्रोत्साहित करते रहेंगे।</p>
<p>प्रधानमंत्री मोदी ने जमीनी स्तर पर महिलाओं की सफलता की कहानियों को दिखाने वाला एक वीडियो शेयर करते हुए नये भारत की नारी शक्ति हैशटैग का इस्तेमाल करके लिखा, यह पिछले एक दशक में जमीनी स्तर पर महिलाओं की जिंदगी कैसे बदली है, इसकी एक झलक दिखाता है।</p>
<p>केंद्र सरकार ने हाल के सालों में महिलाओं के सशक्तिकरण पर केन्द्रित कई कार्यक्रम शुरू किये हैं, जिनमें वित्तीय समावेशन, उद्यमिता, स्वास्थ्य, शिक्षा और स्वच्छता से जुड़े पहलें शामिल हैं। सरकार ने विज्ञान, प्रौद्योगिकी, शासन और सशस्त्र बल जैसे क्षेत्रों में भी महिलाओं की भागीदारी पर जोर दिया है। </p>
<p>उल्लेखनीय है कि हर साल दुनिया भर में आठ मार्च को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के तौर पर मनाया जाता है। इसे महिलाओं की सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक उपलब्धियों का जश्न मनाने के साथ ही दुनिया भर में महिलाओं के लिए लैंगिक समानता को बढ़ावा देने के तौर पर मनाया जाता है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 08 Mar 2026 13:05:36 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>केंद्रीय कैबिनेट का बड़ा फैसला: अटल पेंशन योजना 2030-31 तक बढ़ी, मंत्रिमंडल की मंजूरी</title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार, 21 जनवरी 2026 को अटल पेंशन योजना (APY) को वित्त वर्ष 2030-31 तक जारी रखने की मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही सरकार ने योजना के प्रचार-प्रसार और विकासात्मक गतिविधियों के लिए अतिरिक्त फंड के विस्तार को भी हरी झंडी दी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/big-decision-of-union-cabinet-cabinet-approves-extension-of-atal/article-140379"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/atal-penson-yojna.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के लिए शुरू की गयी अटल पेंशन योजना को वर्ष 2030-31 तक जारी रखने और इसके लिए जागरूकता बढ़ाने तथा विकासात्मक गतिविधियों को चलाने के लिए अंतर निधि आवंटन विस्तार को मंजूरी दे दी है। पीएम मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को यहां हुई मंत्रिमंडल की बैठक में इस आशय के प्रस्ताव को मंजूरी दी गयी। </p>
<p>केंद्र सरकार ने एक वक्तव्य जारी कर कहा है कि बैठक में अटल पेंशन योजना को वित्त वर्ष 2030-31 तक जारी रखने के साथ-साथ इसको लेकर प्रचार और विकासात्मक गतिविधियों तथा अंतर निधि वित्त पोषण सहायता के विस्तार को भी मंजूरी दी गयी है। यह योजना सरकारी सहायता से 2030-31 तक जारी रहेगी और इसके लिए जागरूकता, क्षमता निर्माण सहित असंगठित श्रमिकों के बीच पहुंच के लिए प्रचार और विकासात्मक गतिविधियाँ चलाई जाएगी तथा इसमें अंतराल निधि को पूरा किया जाएगा।</p>
<p>अटल पेंशन योजना के तहत सरकार कम आय वाले और असंगठित क्षेत्र के लाखों श्रमिकों के लिए वृद्धावस्था आय सुरक्षा सुनिश्चित करती है और वित्तीय समावेशन को बढ़ाने के साथ ही सबके लिए स्थायी सामाजिक सुरक्षा प्रदान कर विकसित भारत 2047 के दृष्टिकोण को मजबूत करती है। </p>
<p>गौरतबल है कि, यह योजना असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को वृद्धावस्था आय सुरक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से 9 मई 2015 को शुरु की गयी थी और इसके तहत 60 वर्ष की आयु से शुरू होकर 1,000 रुपये से 5,000 रुपये प्रति माह की न्यूनतम पेंशन की गारंटी प्रदान करती है। योजना में गत 19 जनवरी तक 8.66 करोड़ से अधिक नागरिक नामांकित हैं जिससे यह योजना देश  के समावेशी सामाजिक सुरक्षा ढांचे की आधारशिला बन गई है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Wed, 21 Jan 2026 15:40:44 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
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                <title>प्रधानमंत्री जनधन योजना एवं वित्तीय समावेश</title>
                                    <description><![CDATA[ आजादी के पश्चात देश में साक्षरता का अनुपात तो बढा है, लेकिन वित्तीय साक्षरता का अभाव पाया जाता है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/scheme-and-financial-inclusion/article-21332"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-09/46546546510.jpg" alt=""></a><br /><p>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लगभग 8 वर्ष पूर्व स्वतंत्रता दिवस के उद्बोधन पर प्रधानमंत्री जनधन योजना की घोषणा की थी, जो कि वित्तीय समावेश की दृष्टि से एक ऐतिहासिक कदम माना जाता है। आजादी के पश्चात देश में साक्षरता का अनुपात तो बढा है, लेकिन वित्तीय साक्षरता का अभाव पाया जाता है। देश की बहुसंख्यक जनसंख्या ऐसी है, जिनका बैंकों में खाता तक नहीं है, तो कैसे उनका बैंकिंग क्षेत्र में समावेश होगा, कैसे उनकी वित्तीय उत्पादों एवं बैंकिंग संस्थाओं तक पहुंच होगी। उनकी निर्भरता देसी साहूकारों एवं महाजनों तक ही सीमित रहती है। इसका एक बड़ा कारण शिक्षा के अभाव के साथ-साथ गरीबी माना गया तथा महिलाओं की स्थिति में आर्थिक निर्णय में अधिकांशत: पुरुषों की भागीदारी को माना गया। गरीब व्यक्ति की पहुंच बैंकों तक कमजोर हो जाती है, जबकि उसके पास बैंकिंग जागरूकता का अभाव होता है तथा खाते खुलवाने तक के लिए पैसे जैसे नहीं होते हैं।</p>
<p>प्रधानमंत्री जनधन योजना के अंतर्गत बैंकों के द्वारा जीरो बैलेंस के आधार पर महिलाओं के खाते खोले गए तथा उन्हें 10 हजार तक ओवरड्राफ्ट की सुविधा दी गई। उन्हें जमा के साथ-साथ ऋण सुविधाएं भी उपलब्ध करवाई गई तथा सब्सिडी का भुगतान भी प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण सुविधा के माध्यम से दिया गया। फर्जी खाते नहीं खुले तथा सरकारी सब्सिडी का लाभ आयोग्य धारकों के द्वारा नहीं उठाया जाए, इस दृष्टि से जनधन खातों को आधार कार्ड एवं रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर से भी जोड़ा गया। वर्ष 2018 में जनधन खातों के संबंध में नीतिगत परिवर्तन किया गया, जिसके अंतर्गत इस योजना को परिवार से या महिला मुखिया से ही नहीं जोड़कर बालिग आधार पर क्रियान्वित किया गया। गत 8 वर्षों में प्रधानमंत्री जन धन योजना की प्रगति का अवलोकन किया जाए तो ज्ञात होता है आज 46.3 करोड जनधन खाते खोले गए हैं लेकिन उसका लगभग 56 प्रतिशत खाताधारक तो महिलाएं हैं तथा 66.8 प्रतिशत खाते ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में खोले गए हैं। अधिसंख्य 81.2 प्रतिशत खाते सक्रिय है, जबकि मात्र 8.2 प्रतिशत खाते ही शून्य शेष रखते हैं। लगभग 5. 4 करोड़ खाताधारकों ने प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण योजना का लाभ उठाया है।</p>
<p>प्रधानमंत्री जनधन योजना ने जमाओ की दृष्टि से योगदान दिया है इस योजना के अंतर्गत आज 1.74 लाख करोड़ रुपए जमा हैं तथा प्रति खाता औसत 3761 है तथा 31. 94 करोड़ खाताधारकों को रूपए कार्ड जारी खोले गए हैं। प्रधानमंत्री जन धन योजना एक लोकप्रिय योजना है तथा वित्तीय समावेशीकरण एवं साक्षरता की दृष्टि से ऐतिहासिक कदम है यह योजना महिलाओं में वित्तीय सशक्तिकरण पैदा कर रही है। उन्हें आर्थिक एवं वित्तीय निर्णय लेने के लिए एक अवसर एवं मंच भी प्रदान करती है। जब महिला सशक्तिकरण की बात देश एवं समाज में आती है तो भारत के संदर्भ में एक आम धारणा है कि भारतीय समाज पुरुष प्रधान समाज है तथा पुरुष महिला समानता की बात करना बेमानी है, लेकिन यह मिथक टूट रहा है, पुरुष महिला समानता की दिशा में प्रयास हो रहे हैं । उसमें सबसे महत्वपूर्ण भूमिका पुरुषों के समान ही महिलाओं की आर्थिक, सामाजिक एवं राजनीतिक क्षेत्रों में भागीदारी है। यह भागीदारी बढ़ेगी तो महिला सशक्तिकरण होगा तथा जो कि सामाजिक परिवर्तन एवं क्रांति का कारण बनेगा। इस दृष्टि से प्रधानमंत्री जन धन योजना कार्य कर रही है, लेकिन शिक्षा एवं वित्तीय जागरूकता के प्रयास ओर तेजी से ग्रामीण, पिछड़े, आदिवासी दुर्गम एवं पहाड़ी क्षेत्रों में किए जाने चाहिए।</p>
<p>प्रधानमंत्री जनधन योजना का दायरा ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में हुआ है, जो कि वित्तीय समावेशीकरण की दृष्टि से एक उपलब्धि है। यह कार्य सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों द्वारा अहम जिम्मेदारी उठाते हुए किया जा रहा है। यह योजना डिजिटल भुगतान व्यवस्था को भी आगे बढ़ा रही है जो कि आज लेन-देन का प्रमुख आधार बनता जा रहा है। कोषो का स्थानांतरण तेजी से आसानी से हो जाता है। प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना एवं किसान सम्मान निधि योजना का लाभ सीधे 80 करोड़ किसानों को मिनटों में मिल जाता है, कहीं भी आने-जाने व संपर्क करने की आवश्यकता नहीं है।देश का सामाजिक सुरक्षा का ढांचा का अत्यंत कमजोर है जिसका कारण है, आज भी बहुसंख्या बीमा कवरेज बाहर है लेकिन प्रधानमंत्री जनधन योजना के अंतर्गत बहुत ही अल्प बीमा के माध्यम से बीमा सुरक्षा प्रदान की जा रही है। देश में लगभग 140 करोड की जनसंख्या है तथा लगभग एक तिहाई जनसंख्या के खाते जन धन योजना से जुड़ गए हैं, लेकिन अभी तक भी यह योजना नियमित सक्रिय लेन-देन का माध्यम नहीं बन पाई है। इस योजना को संचालित करने की बैंकों की संचालन लागत अधिक आती है। तुलनात्मक रूप से बैंकिंग व्यवसाय उत्पन्न नहीं होता है। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की, तो यह जिम्मेदारी होती है कि जनकल्याण पर आधारित सरकारी फ्लैगशिप योजना को लागू करें, लेकिन यह बाध्यता निधि एवं विदेशी बैंकों के पास नहीं है।</p>
<p><strong> - डॉ.सुभाष गंगवाल</strong><br /><strong>(ये लेखक के अपने विचार हैं)</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 02 Sep 2022 10:41:30 +0530</pubDate>
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