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                <title>cyber fraud - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>cyber fraud RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>क्रिकेट प्रेमी सावधान : आईपीएल टिकटों के नाम पर हो सकती है साइबर ठगी, आमजन के लिए विशेष एडवाइजरी जारी</title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थान पुलिस की साइबर क्राइम ब्रांच ने आईपीएल टिकटों के नाम पर होने वाली धोखाधड़ी से बचने के लिए आमजन के लिए विशेष एडवाइजरी जारी। वर्तमान में आईपीएल 2026 सीजन के दौरान टिकटों की मांग का फायदा उठाकर साइबर अपराधी क्रिकेट प्रेमियों को शिकार बना रहे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/cricket-lovers-beware-there-may-be-cyber-fraud-in-the/article-151136"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/111200-x-600-px)-(5)15.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान पुलिस की साइबर क्राइम ब्रांच ने आईपीएल टिकटों के नाम पर होने वाली धोखाधड़ी से बचने के लिए आमजन के लिए विशेष एडवाइजरी जारी की है। वर्तमान में आईपीएल 2026 सीजन के दौरान टिकटों की मांग का फायदा उठाकर साइबर अपराधी क्रिकेट प्रेमियों को शिकार बना रहे हैं। एसपी साइबर क्राइम शान्तनु कुमार सिंह ने बताया कि अपराधी नए-नए तरीकों से लोगों की मेहनत की कमाई हड़प रहे हैं।</p>
<p><strong>साइबर अपराधियों के ठगने के तरीके: </strong>अपराधी असली वेबसाइट बुक माई शो की नकल करते हैं। इनमें अंतर सिर्फ  एक अक्षर का होता है। जैसे ही इन वेबसाइट पर कार्ड डिटेल डालते हैं, आपका खाता खाली हो सकता है। गूगल पर सर्च इंजन विज्ञापन सर्च करने पर सबसे ऊपर दिखने वाले विज्ञापन कई बार फर्जी वेबसाइटों के होते हैं। स्कैमर्स पैसे देकर अपने फर्जी लिंक को टॉप पर रैंक कराते हैं। भुगतान के बाद अपराधी व्हाट्सएप पर फर्जी क्यूआर कोड या ई-टिकट भेजते हैं, जो वास्तव में स्टेडियम के गेट पर स्कैन नहीं होते। इमरजेंसी का झांसा देकर या डिस्काउंट ऑफर बताकर अपराधी तुरंत पेमेंट करने का दबाव बनाते हैं।</p>
<p><strong>बचाव के उपाय: </strong>टिकट हमेशा केवल आईपीएल की आधिकारिक वेबसाइट से ही खरीदें। भुगतान से पहले वेबसाइट की स्पेलिंग और सुरक्षित लॉक आइकन की जांच अवश्य करें। हमेशा सुरक्षित पेमेंट गेटवे का उपयोग करें। क्रेडिट कार्ड का उपयोग बेहतर है, क्योंकि इसमें फ्रॉड प्रोटेक्शन की सुविधा होती है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 21 Apr 2026 10:22:24 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur PS]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>Cyber Crime Alert : सार्वजनिक स्थानों पर अनजान व्यक्ति को मोबाइल देने से बढ़ रहा साइबर फ्रॉड, नई एडवाइजरी जारी</title>
                                    <description><![CDATA[पुलिस मुख्यालय की साइबर क्राइम ब्रांच ने आमजन को सतर्क करते हुए एक नई एडवाइजरी जारी की। साइबर अपराधी तकनीक के साथ-साथ लोगों को बातों में फंसाते।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/cyber-crime-alert-cyber-fraud-is-increasing-by-giving-mobile/article-148934"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/iran-cyber-attack.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। पुलिस मुख्यालय की साइबर क्राइम ब्रांच ने आमजन को सतर्क करते हुए एक नई एडवाइजरी जारी की है। साइबर अपराधी तकनीक के साथ-साथ लोगों को बातों में फंसाते हैं। वे बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन, पार्क और पर्यटन स्थलों जैसे सार्वजनिक स्थानों पर लोगों से जरूरी कॉल करने के बहाने मोबाइल मांगते हैं और फिर धोखाधड़ी को अंजाम देते हैं।</p>
<p><strong>अपराध के प्रमुख तरीके</strong><br />कॉल फॉरवडिंर्ग स्कैम: अपराधी आपके फोन से 21 जैसे कोड डायल कर कॉल फॉरवडिंर्ग चालू कर देते हैं। इससे आपके ओटीपी और कॉल उनके नंबर पर जाने लगते हैं। बैंक, सोशल मीडिया और वाट्सअप अकाउंट खतरे में आ जाते हैं। </p>
<p>मैलवेयर/स्पाइवेयर इंस्टाल करना: फोन इस्तेमाल करते समय अपराधी छिपकर लिंक खोलकर स्पाई ऐप या की लोगर डाउनलोड कर सकते हैं। आपकी निजी जानकारी, पासवर्ड और फोटो चोरी हो सकते हैं।</p>
<p>कॉन्टैक्ट्स और डेटा चोरी: फोन से कॉन्टैक्ट लिस्ट कॉपी कर ली जाती है। बाद में आपके रिश्तेदारों को इमरजेंसी का बहाना बनाकर पैसे मांगे जाते हैं। </p>
<p>अवैध गतिविधियों में इस्तेमाल: आपके फोन से किए गए कॉल अगर किसी अपराध से जुड़े हों। पुलिस रिकॉर्ड में आपका नंबर आ सकता है। आप अनजाने में कानूनी परेशानी में फंस सकते हैं। </p>
<p><strong>बचाव के जरूरी उपाय</strong><br />फोन हमेशा अपने हाथ में रखें, खुद नंबर डायल करें और स्पीकर पर बात कराएं। फोन को अनलॉक स्थिति में किसी को न दें। <br />कॉल फॉरवडिंर्ग चेक करें। <br />चेक करें: *#21#<br />बंद करें: ##002#<br />सभी यूपीआई और पेमेंट ऐप्स पर पिन या बायोमेट्रिक लॉक लगाएं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 03 Apr 2026 12:32:35 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur PS]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सोशल मीडिया विज्ञापनों के जरिए बढ़ रही साइबर धोखाधड़ी, राजस्थान पुलिस की एडवाइजरी जारी</title>
                                    <description><![CDATA[एडवाइजरी में आमजन को सतर्क रहने और साइबर अपराधियों के नए तरीकों से बचने की सलाह। कैसे हो रही है साइबर धोखाधड़ी? साइबर अपराधी आकर्षक विज्ञापनों और फर्जी ऑफर्स के जरिए लोगों को जाल में फंसा रहे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/cyber-fraud-increasing-through-social-media-advertisements-rajasthan-police-advisory/article-148736"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/iran-cyber-attack.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान पुलिस की साइबर क्राइम शाखा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म जैसे Instagram, Facebook और Telegram पर बढ़ती साइबर धोखाधड़ी को लेकर नई एडवाइजरी जारी की है। इस एडवाइजरी में आमजन को सतर्क रहने और साइबर अपराधियों के नए तरीकों से बचने की सलाह दी गई है। कैसे हो रही है साइबर धोखाधड़ी? साइबर अपराधी आकर्षक विज्ञापनों और फर्जी ऑफर्स के जरिए लोगों को जाल में फंसा रहे हैं।</p>
<p><strong> प्रमुख तरीके इस प्रकार हैं: </strong></p>
<ol>
<li>फर्जी शॉपिंग विज्ञापन ₹99 में ब्रांडेड जूते या 80–90% तक छूट जैसे ऑफर महंगे मोबाइल, लैपटॉप, कपड़े आदि पर भारी डिस्काउंट “Limited Time Offer” या “पहले 100 ग्राहकों के लिए” जैसे दबाव</li>
<li> फर्जी नौकरी के ऑफर “घर बैठे ₹3000–5000 रोज कमाएं” “No Experience Required” या “Immediate Joining” बड़ी कंपनियों के नाम का दुरुपयोग</li>
<li> निवेश धोखाधड़ी “100% Risk-Free Investment” जैसे झूठे वादे Cryptocurrency, Forex, Stock, Gold आदि में फर्जी स्कीम जल्दी निवेश करने का दबाव</li>
<li>फर्जी प्रोफाइल / पेज ब्रांड्स जैसे Nike, Amazon, Flipkart के नाम का इस्तेमाल नकली reviews और followers “Free Gift” या “Contest” के बहाने जानकारी लेना कैसे करें बचाव? किसी भी ऑफर या लिंक पर क्लिक करने से पहले आधिकारिक वेबसाइट जरूर जांचें संदिग्ध प्रोफाइल/पेज को तुरंत Report या Block करें निवेश से पहले SEBI/RBI रजिस्ट्रेशन की जांच करें</li>
</ol>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 01 Apr 2026 17:40:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur PS]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>श्रीनगर में अंतरराष्ट्रीय साइबर रैकेट का भंडाफोड़: सात आरोपी गिरफ्तार, छापेमारी के दौरान भारी मात्रा में डिजिटल उपकरण जब्त</title>
                                    <description><![CDATA[श्रीनगर की CIK-CID शाखा ने रंगरेठ में छापेमारी कर एक हाई-टेक साइबर रैकेट का पर्दाफाश किया है। सात संदिग्धों को गिरफ्तार कर भारी मात्रा में आईफोन, मैकबुक और वीओआईपी (VoIP) सिस्टम जब्त किए गए। यह गिरोह फर्जी विज्ञापनों और कॉल सेंटरों के जरिए करोड़ों की ठगी कर पैसों को क्रिप्टोकरेंसी में बदल देता था।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/international-cyber-racket-busted-in-srinagar-seven-accused-arrested-huge/article-147037"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/cycber.png" alt=""></a><br /><p>श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर से संचालित होने वाले एक अंतरराष्ट्रीय साइबर धोखाधड़ी रैकेट का भंडाफोड़ अपराध जांच विभाग (सीआईडी) की काउंटर इंटेलिजेंस कश्मीर (सीआईके) शाखा ने किया है और इस मामले में सात संदिग्धों को गिरफ्तार किया तथा शहर में समन्वित छापेमारी के दौरान भारी मात्रा में डिजिटल उपकरण भी जब्त किया है। पुलिस के अनुसार, सीआईके-सीआईडी को गुप्त कॉल सेंटरों के बारे में विश्वसनीय तकनीकी जानकारी प्राप्त हुई थी जो विदेशी नागरिकों एवं स्थानीय नागरियों को निशाना बनाकर धोखाधड़ी वाली ऑनलाइन गतिविधियों में शामिल थे।</p>
<p>त्वरित कार्रवाई करते हुए सीआईके ने निगरानी करने और डिजिटल खुफिया जानकारी जुटाने के लिए तकनीकी विशेषज्ञों और फील्ड कर्मियों की विशेष टीमें गठित कीं। जांच के बाद श्रीनगर के रंगरेठ औद्योगिक क्षेत्र में एक प्रमुख परिचालन केंद्र की पहचान हुई। छापेमारी के दौरान सात संदिग्धों को मौके पर ही गिरफ्तार किया गया। अधिकारियों ने 13 मोबाइल फोन, नौ लैपटॉप, वीओआईपी (वॉयस ओवर इंटरनेट प्रोटोकॉल) सिस्टम, सिम कार्ड, नेटवर्किंग उपकरण और डिजिटल स्टोरेज मीडिया जब्त किया। जब्त किए गए सामानों में कई महंगे स्मार्टफोन, जिनमें आईफोन, सैमसंग गैलेक्सी हैंडसेट, आईपैड और डेल, एचपी और एप्पल मैकबुक ब्रांड के लैपटॉप शामिल थे।</p>
<p>पुलिस के अनुसार, प्रारंभिक जांच से पता चला है कि आरोपी एक सुसंगठित साइबर अपराध गिरोह का हिस्सा है, जिसके संपर्क जम्मू-कश्मीर से बाहर भी फैले हुए हैं। अधिकारियों ने कहा कि आरोपियों ने वीओआईपी सिस्टम का उपयोग करके एक गैर-पंजीकृत कॉल सेंटर स्थापित किया था जिसके माध्यम से वे अंतरराष्ट्रीय वर्चुअल नंबर बनाते थे और सर्वर रूटिंग और स्पूफिंग तकनीकों से अपनी असली लोकेशन छिपाते थे। पीड़ितों को फर्जी याहू मेल वेबसाइटों और गूगल विज्ञापनों द्वारा लुभाया जाता था। जैसे ही लोग इन विज्ञापनों पर क्लिक करते थे, उन्हें संदिग्धों द्वारा संचालित टोल-फ्री नंबरों पर भेज दिया जाता था।</p>
<p>खुद को वैध सेवा प्रदाताओं के रूप में प्रस्तुत करते हुए आरोपियों ने पीड़ितों को तकनीकी समस्याओं का समाधान करने या जुर्माने को रोकने के बहाने संवेदनशील बैंकिंग विवरण साझा करने या भुगतान करने के लिए प्रेरित किया। धोखाधड़ी से प्राप्त धन को बैंकिंग चैनलों, फर्जी खातों, डिजिटल वॉलेट के माध्यम से भेजा गया और बाद में पहचान से बचने के लिए इसे क्रिप्टोकरेंसी में परिवर्तित किया गया।</p>
<p>अधिकारियों ने कहा कि इन लेन-देन में शामिल राशि कई करोड़ रुपये होने का अनुमान है, जिसमें नकद शामिल नहीं है जो कि पूरी तरह से डिजिटल धोखाधड़ी का संकेत देता है। पुलिस ने कहा कि धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के प्रावधानों सहित कानून की संबंधित धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की जा रही है।</p>
<p>पुलिस ने कहा, जब्त किए गए उपकरणों के फोरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है और आगे की छापेमारी सहित विस्तृत जांच जारी है ताकि व्यापक नेटवर्क का पता लगाया जा सके और अधिक संदिग्धों और पीड़ितों की पहचान की जा सके।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 19 Mar 2026 13:25:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>हैदराबाद पुलिस ने ऑपरेशन ऑक्टोपस के तहत साइबर धोखाधड़ी गिरोह का किया भंडाफोड़; 104 लोग गिरफ्तार, नकदी एवं इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त</title>
                                    <description><![CDATA['ऑपरेशन ऑक्टोपस' के तहत 16 राज्यों में छापेमारी। 104 जालसाज गिरफ्तार। निवेश और 'डिजिटल अरेस्ट' के जरिए ₹127 करोड़ की धोखाधड़ी। 151 बैंक खाते फ्रीज। भारी मात्रा में नकदी और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/hyderabad-police-busted-cyber-fraud-gang-under-operation-octopus-104/article-144451"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/arrestedd.png" alt=""></a><br /><p>हैदराबाद। तेलंगाना में हैदराबाद पुलिस ने ऑपरेशन ऑक्टोपस नामक एक राष्ट्रव्यापी अभियान के तहत 16 राज्यों में फैले एक साइबर धोखाधड़ी गिरोह पर कार्रवाई करते हुए 104 लोगों को गिरफ्तार किया और नकदी एवं इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किये। पुलिस उपायुक्त (साइबर अपराध) वी अरविंद बाबू,  के नेतृत्व में चलाये गये इस अभियान में निवेश घोटालों, व्यापार धोखाधड़ी और तथाकथित डिजिटल गिरफ्तारी घोटालों में शामिल संगठित नेटवर्क को निशाना बनाया गया। पुलिस ने मंगलवार को जारी एक बयान में कहा कि गहन जांच के बाद पुलिस ने पीड़ितों के पैसे निकालने के लिए इस्तेमाल किये गये 151 बैंक खातों की पहचान की है।</p>
<p>इस अभियान के तहत 10 दिनों की अवधि में कई राज्यों में एक साथ 32 विशेष टीमें तैनात की गईं। गिरफ्तार किए गए लोगों में 86 फर्जी खाताधारक, 17 खाता आपूर्तिकर्ता/एग्रीगेटर और अंदरूनी मिलीभगत का आरोपी एक बैंक अधिकारी, बंधन बैंक के रिलेशनशिप मैनेजर शामिल है। </p>
<p>आरोपियों का संबंध देश भर में दर्ज 1,055 साइबर धोखाधड़ी मामलों से है, जिनमें अनुमानित 127 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी शामिल है। छापेमारी के दौरान, पुलिस ने 36 लाख रुपये नकद, 204 मोबाइल फोन, 141 सिम कार्ड, 152 बैंक पासबुक, 234 डेबिट और क्रेडिट कार्ड, 26 लैपटॉप और अन्य आपत्तिजनक सामग्री जब्त की है।</p>
<p>यह अभियान संयुक्त पुलिस आयुक्त एस एम विजय कुमार और डीसीपी वी. अरविंद बाबू की देखरेख में चलाया गया। हैदराबाद पुलिस आयुक्त वी सी सज्जनार ने कहा कि साइबर अपराध समाज के लिए गंभीर खतरा है और उन्होंने शहर पुलिस की शून्य-सहिष्णुता नीति को दोहराते हुए कहा कि गिरोह के उच्च स्तरीय संचालकों को पकडऩे के लिए जांच जारी है।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 24 Feb 2026 17:53:41 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जयपुर में कॉल गर्ल्स के नाम पर साइबर ठगी का बड़ा खुलासा, फर्जी वेबसाइट बनाकर लाखों की ठगी</title>
                                    <description><![CDATA[कॉल गर्ल्स के नाम पर साइबर ठगी करने वाली एक सक्रिय गैंग का पर्दाफाश। आरोपी बदमाशों ने “SCHOLKA” नाम से एक फर्जी वेबसाइट बना रखी थी, जिसके जरिए लोगों को जाल में फंसाकर ऑनलाइन ठगी की जा रही थी। पुलिस जांच में सामने आया कि गैंग ने वेबसाइट पर कई फर्जी मोबाइल नंबर अपलोड कर रखे थे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/big-revelation-of-cyber-fraud-in-the-name-of-call/article-139429"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/cybercrimee.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। जिले के चोमू थाना क्षेत्र में कॉल गर्ल्स के नाम पर साइबर ठगी करने वाली एक सक्रिय गैंग का पुलिस ने पर्दाफाश किया है। आरोपी बदमाशों ने “SCHOLKA” नाम से एक फर्जी वेबसाइट बना रखी थी, जिसके जरिए लोगों को जाल में फंसाकर ऑनलाइन ठगी की जा रही थी।<br />पुलिस जांच में सामने आया कि गैंग ने वेबसाइट पर कई फर्जी मोबाइल नंबर अपलोड कर रखे थे। जैसे ही कोई व्यक्ति वेबसाइट पर क्लिक करता, उसके मोबाइल पर व्हाट्सएप के माध्यम से लड़कियों की अश्लील फोटो और वीडियो भेजी जाती थीं। इसके बाद पीड़ित को अलग-अलग लड़कियों की फोटो दिखाकर चयन करने के लिए कहा जाता था।</p>
<p>लड़की से मिलने का झांसा देकर गैंग टोकन मनी के नाम पर 500 की मांग करती थी। रकम ट्रांसफर कराने के लिए आरोपी क्यूआर कोड (QR Code) भेजते थे। पैसे ट्रांसफर होते ही आरोपी मोबाइल नंबर बंद कर देते थे और पीड़ित के साथ ठगी की वारदात को अंजाम दिया जाता था।<br />सूचना मिलने पर चोमू थाना पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए कचोलिया रोड स्थित मयंक एनक्लेव की एक बिल्डिंग के फ्लैट पर दबिश दी। यहां से पुलिस ने दो आरोपियों राजेंद्र कुमार यादव और अंकित को गिरफ्तार किया। पुलिस ने मौके से आरोपियों के मोबाइल फोन, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और अन्य आपत्तिजनक सामग्री भी जब्त की है, जिनका इस्तेमाल साइबर फ्रॉड में किया जा रहा था। प्रारंभिक जांच में यह भी आशंका जताई जा रही है कि इस गैंग ने अब तक कई लोगों को ठगी का शिकार बनाया है।</p>
<p>चोमू थाना पुलिस आरोपियों से गहन पूछताछ कर रही है और यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि गैंग में और कौन-कौन शामिल है तथा ठगी की रकम कहां-कहां ट्रांसफर की गई। पुलिस ने आमजन से अपील की है कि वे इस तरह की फर्जी वेबसाइटों, कॉल गर्ल विज्ञापनों और अनजान क्यूआर कोड से सावधान रहें तथा किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत पुलिस को सूचना दें।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 13 Jan 2026 14:30:31 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur PS]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जम्मू कश्मीर में सीआईके की बड़ी कार्रवाई, फर्जी बैंक खातों के नेटवर्क पर छापेमारी, कई अहम दस्तावेज जब्त</title>
                                    <description><![CDATA[काउंटर इंटेलिजेंस कश्मीर (CIK) ने बुधवार को साइबर धोखाधड़ी और टेरर फंडिंग के संदिग्ध नेटवर्क के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की। श्रीनगर समेत घाटी के 22 ठिकानों पर छापेमारी कर डिजिटल उपकरण जब्त किए गए।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/big-action-by-cik-in-jammu-and-kashmir-raid-on/article-138704"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/cik.png" alt=""></a><br /><p>श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर पुलिस की काउंटर इंटेलिजेंस कश्मीर (सीआईके) ने बुधवार को साइबर धोखाधड़ी और टेरर फंडिंग के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले संदिग्ध फर्जी बैंक खातों के एक नेटवर्क पर बड़ी छापेमार कार्रवाई शुरू की। </p>
<p>अधिकारियों ने बताया कि घाटी में कई जगहों पर एक साथ छापेमारी की गई। उन्होंने बताया कि अकेले श्रीनगर जिले में 10 से ज्यादा जगहों पर तलाशी ली गई और कश्मीर के दूसरे हिस्सों से भी एक साथ अभियान की जानकारी मिली हैं। अधिकारियों ने कहा, यह कार्रवाई उन जटिल वित्तीय गतिविधियों की चल रही जांच का हिस्सा है, जिनके बारे में माना जाता है कि वे ऑनलाइन घोटालों को बढ़ावा दे रहे हैं और आतंकवाद नेटवर्क को धन पहुंचा रहे हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 07 Jan 2026 12:59:57 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>संचार साथी ऐप पर सरकार का बड़ा बयान, कहा ऐप का इस्तेमाल उपयोगकर्ता की मर्जी पर निर्भर</title>
                                    <description><![CDATA[विपक्ष की आशंकाओं के बीच संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने स्पष्ट किया कि *संचार साथी* ऐप पूरी तरह स्वैच्छिक है और इसे अनिवार्य बनाने का कोई इरादा नहीं है। उन्होंने कहा कि ऐप को लेकर निजता पर खतरे जैसी बातें सिर्फ अफवाह हैं। उपयोगकर्ता चाहें तो इसे सक्रिय करें या कभी भी डिलीट कर दें।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/governments-big-statement-on-sanchar-sathi-app-says-use-of/article-134466"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/jyotiraditya.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। संचार साथी ऐप को लेकर विपक्ष की चिंताओं के बीच संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने मंगलवार को स्पष्ट किया कि यह पूरी तरह स्वैच्छिक और वैकल्पिक है और किसी भी तरह अनिवार्य नहीं है। इस ऐप को निजता के लिए खतरा बताये जाने को अफवाह करार हुए संचार मंत्री सिंघिया ने कहा कि, यह स्वैच्छिक ऐप है और इसका इस्तेमाल उपयोगकर्ता की इच्छा पर निर्भर है। उपयोगकर्ता चाहे तो अपने मोबाइल पर इसे सक्रिय करे या न करे और वह आसानी से इसे डिलीट भी कर सकता है।</p>
<p>संचार मंत्री सिंघिया ने मंगलवार को सोशल मीडिया एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि देश के हर नागरिक की डिजिटल सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। 'संचार साथी' ऐप का उद्देश्य है कि प्रत्येक व्यक्ति अपनी निजता की रक्षा कर सके और ऑनलाइन ठगी से सुरक्षित रह सके। यह एक पूरी तरह स्वैच्छिक और लोकतांत्रिक व्यवस्था है। उपयोगकर्ता चाहें तो ऐप को सक्रिय कर इसके लाभ ले सकते हैं और न चाहें तो इसे अपने फ़ोन से आसानी से डिलीट कर सकते हैं।</p>
<p>उन्होंने संचार साथी ऐप को सुरक्षा, पारदर्शिता और कस्टमर-फस्र्ट दृष्टिकोण को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया और कहा कि यह लगातार लोकप्रिय ऐप बन रहा है और लोग इस पर भरोसा कर रहे हैं। अब तक 20 करोड़ से ज्यादा लोग पोर्टल का उपयोग कर चुके हैं। डेढ़ करोड़ से ज्यादा यूजर्स ऐप से जुड़े हुए हैं और नागरिकों द्वारा 'नॉट माई नम्बर' चुने जाने पर 1.43 करोड़ से ज्यादा मोबाइल कनेक्शन डिस्कनेक्ट किए हैं। इससे 26 लाख मोबाइल फ़ोन ट्रेस हुए हैं जिनमें से 7.23 लाख फ़ोन सफलतापूर्वक नागरिकों को लौटाए गए। नागरिकों द्वारा रिपोर्ट किए गए 40.96 लाख फर्जी मोबाइल कनेक्शन डिस्कनेक्ट किए गए। इससे 6.2 लाख फ्रॉड-लिंक्ड आईएमईआईएस ब्लॉक किए जा चुके हैं। </p>
<p>इसके आगे संचार मंत्री ने कहा कि हर नागरिक की सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की सर्वोच्च जिम्मेदारी है। संचार साथी उसी दिशा में एक मजबूत कदम है, जो हर मोबाइल उपयोगकर्ता को सशक्त, सुरक्षित और जागरूक बनाता है। यह निगरानी का माध्यम नहीं, बल्कि जनभागीदारी पर आधारित एक पारदर्शी डिजिटल सुरक्षा प्लेटफॉर्म है। उन्होंने बताया कि यह ऐप और पोर्टल नागरिकों को अपने मोबाइल नंबर की सुरक्षा, फर्जी कनेक्शनों की पहचान, खोए-चोरी हुए फोन, साइबर ठगी से बचाव जैसे महत्वपूर्ण कार्यों में सक्षम बनाता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/bharat/governments-big-statement-on-sanchar-sathi-app-says-use-of/article-134466</link>
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                <pubDate>Tue, 02 Dec 2025 18:58:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जयपुर में साइबर ठगी के शिकार बने महिला डॉक्टर और कारोबारी : दो वारदातों में करीब 23.50 लाख रुपए की ठगी  </title>
                                    <description><![CDATA[पीड़िता इंदिरा कॉलोनी निवासी डॉ. रेखा सोनी ने मंगलवार को बनीपार्क थाने में रिपोर्ट दर्ज करवाई। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/women-doctors-and-businessmen-who-became-victims-of-cyber-fraud/article-124243"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-04/cyber.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। शहर में साइबर ठगों ने दो अलग-अलग वारदातों में करीब 23.50 लाख रुपए की ठगी कर ली। पहला मामला बनीपार्क इलाके का है, जहां ठगों ने महिला डॉक्टर को ओटीपी बताने के लिए बहला-फुसलाकर उनके खाते से 3.99 लाख रुपए निकाल लिए। पीड़िता इंदिरा कॉलोनी निवासी डॉ. रेखा सोनी ने मंगलवार को बनीपार्क थाने में रिपोर्ट दर्ज करवाई। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। </p>
<p>दूसरा मामला करधनी थाना क्षेत्र का है। यहां कालवाड़ रोड निवासी रामपाल के साथ ठगों ने बैंककर्मी बनकर धोखाधड़ी की। उन्होंने प्रॉपर्टी खरीदने के लिए चैक लगाया था। इसी दौरान ठगों ने कॉल कर मदद का झांसा दिया और कुछ जानकारियां हासिल कर उनका सिमकार्ड पोर्ट करवा लिया। इसके बाद उनके बैंक खाते से 19.50 लाख रुपए उड़ा लिए। करधनी थाना पुलिस ने प्राथमिक जांच के बाद मामला रेनवाल थाने भेज दिया है। </p>
<p> </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 21 Aug 2025 11:42:24 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur PS]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बिहार में जेडीयू नेता चला रहा था साइबर फ्रॉड सिंडिकेट, आर्थिक अपराध शाखा ने किया गिरफ्तार</title>
                                    <description><![CDATA[बिहार में आर्थिक अपराध इकाई की विशेष टीम ने बड़ी कार्रवाई करते हुए अंतरराष्ट्रीय साइबर फ्रॉड सिंडिकेट से जुड़े 6 सदस्यों को गिरफ्तार किया है]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/jdu-leader-in-bihar-was-running-cyber-fraud-syndicate-economic/article-121284"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-05/companycyber.jpg" alt=""></a><br /><p>पटना। बिहार में आर्थिक अपराध इकाई की विशेष टीम ने बड़ी कार्रवाई करते हुए अंतरराष्ट्रीय साइबर फ्रॉड सिंडिकेट से जुड़े 6 सदस्यों को गिरफ्तार किया है। इसका मुख्य सरगना 21 साल का हर्षित कुमार है, जिसे सुपौल के गौसपुर से दबोचा गया। हर्षित कुमार जेडीयू का नेता है। इसके साथ इस गिरोह के पांच अन्य सदस्यों को भी गिरफ्तार किया गया है। जानकारी के मुताबिक यह अंतरराष्टÑीय साइबर फ्रॉड सिंडिकेट सिम बॉक्स का संचालन भी करता था। ये सभी सिम बॉक्स की मदद से रोजाना 10 हजार से अधिक फर्जी कॉल करते थे और इन कॉल की मदद से साइबर फ्रॉड किए जाते थे। आर्थिक अपराध इकाई के एडीजी नैयर हसनैन खान ने बताया कि इस मामले की गहन तफ्तीश करने के लिए सीबीआई और आईबी की विशेष टीम भी जल्द पटना आने वाली है। चूंकि यह मामला कई राज्यों के अलावा विदेशों से जुड़ा हुआ है, तो ऐसे में राष्ट्रीय स्तर की एजेंसी के साथ मिलकर पूरे मामले की तफ्तीश की जाएगी। पूरे गिरोह को जल्द ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा। </p>
<p><strong>दो सप्ताह में ढाई करोड़ रुपए का नुकसान</strong><br />उन्होंने बताया कि इस पूरे गिरोह ने साइबर ठगी की बड़ी राशि को क्रिप्टो में तब्दील कर दी थी। इसी में वे आपस में लेनदेन करते थे। कई क्रिप्टो खातों और लेनदेन से जुड़े लिंक की जानकारी हासिल हुई है, जिसकी जांच चल रही है। केंद्रीय दूर संचार मंत्रालय से प्राप्त सूचना के अनुसार फर्जी तरीके से समानांतर एक्सचेंज की बदौलत फर्जी कॉल के जरिए अंतरराष्टÑीय कॉल करके पिछले सिर्फ दो सप्ताह में ढाई करोड़ रुपए की ठगी की गई है। जबकि जनवरी से अब तक दूर संचार मंत्रालय को 60 करोड़ रुपये से अधिक का आर्थिक नुकसान हुआ है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 22 Jul 2025 12:31:03 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>8 करोड़ की साइबर ठगी में पहली बार कोर्ट ने सुनाई उम्रकैद : कंबोडिया से व्हाट्सएप पर चल रहा था फर्जी गिरफ्तारी रैकेट, 29 गवाहों ने दिया बयान</title>
                                    <description><![CDATA[पश्चिम बंगाल की कल्याणी अदालत ने 'डिजिटल अरेस्ट' घोटाले में दोषसिद्धि के पहले मामले में 9 लोगों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/for-the-first-time-in-cyber-fraud-of-8-crores/article-121074"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-07/hogh-cort-chandigarh-court-hammer1457186614-82.jpg" alt=""></a><br /><p>कोलकाता। पश्चिम बंगाल की कल्याणी अदालत ने 'डिजिटल अरेस्ट' घोटाले में दोषसिद्धि के पहले मामले में 9 लोगों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। बदमाशों ने मुंबई पुलिस की वर्दी में लोगों से 8 करोड़ रुपए की ठगी की थी, जिसमें पश्चिम बंगाल के पीड़ितों से 6 करोड़ रुपए भी शामिल हैं।</p>
<p>घटना के करीब आठ महीने के भीतर पूरी हुई सुनवाई के बाद, गुरुवार को अदालत ने आरोपियों को दोषी करार देते हुए सज़ा सुनाई। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने शुक्रवार को फैसला सुनाया। पुलिस के अनुसार एक महीने की कड़ी मशक्कत के बाद राणाघाट पुलिस जिले के अंतर्गत कल्याणी साइबर पुलिस स्टेशन ने देश के विभिन्न हिस्सों से शाहिद अली शेख, शाहरुख रफीक शेख, जतिन अनूप लाडवाल, रोहित सिंह, रूपेश यादव, साहिल सिंह, पठान सुमैया बानो और अशोक फलदू सहित 9 लोगों को गिरफ्तार किया, जिन्हें बाद में अदालत ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई।</p>
<p>रानाघाट पुलिस जिले के एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा कि “यह एक बड़ी उपलब्धि है। देश में डिजिटल गिरफ्तारी के मामले में यह पहली सज़ा है। यह रानाघाट पुलिस स्टेशन और कानूनी टीम की एक उपलब्धि है।”</p>
<p>यह घटना पिछले साल नवंबर में शुरू हुई जब एक व्यक्ति ने कल्याणी साइबर पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई कि एक जालसाज़ ने खुद को मुंबई पुलिस का अधिकारी बताकर उसे डिजिटल रूप से गिरफ्तार कर लिया और रिहा होने की उम्मीद में, उसने “अधिकारी” के निर्देशों का पालन करते हुए विभिन्न बैंक खातों में एक करोड़ रुपए ट्रांसफर कर दिए।</p>
<p>एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा कि “यह कोई नई बात नहीं है। 'डिजिटल अरेस्ट' के कई मामले सामने आए हैं, जहां धोखेबाज अक्सर सज़ा से बच निकलते हैं, लेकिन यहाँ सब-इंस्पेक्टर देवारुण दास और उनकी टीम ने इस चलन को तोड़कर यह सुनिश्चित किया कि अपराधियों को सज़ा मिले।”</p>
<p>जाँच के दौरान साइबर पुलिस टीम ने पाया कि पीड़ित से संपर्क करने के लिए इस्तेमाल किया गया व्हाट्सएप नंबर दक्षिण पूर्व एशिया के कंबोडिया से संचालित हो रहा था। लेकिन सिम कार्ड एक भारतीय दूरसंचार प्रदाता द्वारा जारी किया गया था और कंबोडिया में बैठा कॉलर धाराप्रवाह बंगाली और हिंदी बोल रहा था। इतना ही नहीं, जिन बैंक खातों में पैसा जमा किया गया था, वे सभी भारतीय नागरिकों के थे।</p>
<p>तकनीक की मदद से और भी ज़्यादा जानकारियां सामने आईं और भारत के विभिन्न हिस्सों में एक महीने से ज़्यादा समय तक लगातार छापेमारी के बाद राणाघाट साइबर पुलिस ने कुल 13 आरोपियों को गिरफ्तार किया, जिनमें से 3 गुजरात से, 7 महाराष्ट्र से और 3 हरियाणा से थे। बाद में 4 लोगों को रिहा कर दिया गया।</p>
<p>अधिकारी ने कहा कि “पता चला कि इन 9 लोगों के खिलाफ राष्ट्रीय स्तर पर 100 से ज़्यादा शिकायतें दर्ज की गई थीं और उन्होंने लगभग 8 करोड़ रुपए की ठगी की थी, जिसमें से लगभग 6 करोड़ रुपए अकेले पश्चिम बंगाल के विभिन्न ज़िलों से थे। इस साल फरवरी में रानाघाट पुलिस ने दो हजार 600 पन्नों का आरोपपत्र दाखिल किया और 24 फरवरी को कल्याणी अदालत में आरोप तय किए गए।</p>
<p>लोक अभियोजक बिभास चट्टोपाध्याय ने कहा कि “धोखेबाजों के खिलाफ कुल 108 शिकायतें दर्ज की गई थीं और उन्होंने 10 करोड़ रुपये से ज़्यादा की धोखाधड़ी की है। इस मामले में कुल 29 गवाहों ने गवाही दी, जिनमें छह दूसरे राज्यों के थे। साढ़े चार महीने में मुकदमा पूरा हुआ और न्यायाधीश ने सभी नौ आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई।”</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 19 Jul 2025 18:55:19 +0530</pubDate>
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                <title>ऑनलाइन धोखाधड़ी से बचें : केवाईसी अपडेट के नाम पर हो रही ठगी से सावधान</title>
                                    <description><![CDATA[अपनी गोपनीय जानकारी, जैसे बैंक खाता संख्या, कार्ड नंबर, सीवीवी, पिन, ओटीपी या इंटरनेट बैंकिंग विवरण, किसी के साथ साझा न करें। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/avoid-online-fraud-beware-of-cheating-in-the-name-of/article-120648"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-07/8842roer28.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। साइबर अपराधी लगातार नए तरीके अपनाकर लोगों को ठगी का शिकार बना रहे हैं। इसके चलते राजस्थान पुलिस की साइबर क्राइम ब्रांच ने आमजन को केवाईसी विवरण अपडेट करने के नाम पर साइबर धोखाधड़ी से सतर्क रहने की सलाह दी है। </p>
<p><strong>कैसे फंसाते हैं ठग जाल में </strong><br />एसपी साइबर क्राइम शांतनु कुमार सिंह ने बताया कि साइबर अपराधी खुद को बैंक अधिकारी बताते हुए लोगों को फर्जी एसएमएस, ईमेल या कॉल करते हैं। वे लोगों को डराते हैं कि अगर उन्होंने अपना केवाईसी अपडेट नहीं कराई तो उनका बैंक खाता ब्लॉक कर दिया जाएगा या सभी लेनदेन रोक दिए जाएंगे। जब लोग घबराकर केवाईसी अपडेट करने का तरीका पूछते हैं, तो ये अपराधी उन्हें एक संदिग्ध मैलवेयर एपीके फाइल डाउनलोड करने या अपना ओटीपी शेयर करने के लिए कहते हैं। इन निर्देशों का पालन करते ही आपकी सभी व्यक्तिगत और बैंकिंग जानकारी अपराधियों के हाथ लग जाती है और आप ठगी का शिकार हो जाते हैं। याद रखें कि कोई भी बैंक या वित्तीय संस्था कभी भी फोन कॉल या इस तरह के अन्य माध्यमों से आपकी गोपनीय जानकारी नहीं मांगती।</p>
<p><strong>साइबर ठगी से बचने के लिए क्या करें</strong><br />केवाईसी प्रक्रिया हमेशा अपनी बैंक शाखा में जाकर ही पूरी करें। किसी भी अज्ञात स्रोत से मिली फाइलें डाउनलोड न करें।<br />ईमेल या व्हाट्सएप जैसे सोशल मीडिया ऐप्स पर भेजे गए अनाधिकृत लिंक पर कभी भी क्लिक न करें, खासकर ऐप्स डाउनलोड करने के लिए।<br />किसी भी संदिग्ध या धोखाधड़ी वाले संचार की जानकारी चक्षु पोर्टल पर दें।<br />अपनी गोपनीय जानकारी, जैसे बैंक खाता संख्या, कार्ड नंबर, सीवीवी, पिन, ओटीपी या इंटरनेट बैंकिंग विवरण, किसी के साथ साझा न करें। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 16 Jul 2025 12:25:59 +0530</pubDate>
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