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                <title>teachers day - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>विद्यार्थी को संस्कारित कर उत्कृष्टम करने के लिए प्रेरित करता है शिक्षक, हरिभाऊ बागड़े ने की नई शिक्षा नीति की चर्चा </title>
                                    <description><![CDATA[राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े ने शिक्षक दिवस पर शुभकामनाएं और बधाई देते हुए कहा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/teacher-governor-inspires-the-student-to-excel-by-cremation/article-125982"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-04/haribhau.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े ने शिक्षक दिवस पर शुभकामनाएं और बधाई देते हुए कहा कि शिक्षक वह है, जो विद्यार्थी को संस्कारित करे और जीवन में उत्कृष्टम करने के लिए प्रेरित करें। उन्होंने आदर्श शिक्षक और देश के पूर्व राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की उदात्त शिक्षा दृष्टि को आगे बढ़ाने का आह्वान किया।</p>
<p>बागडे शिक्षक दिवस पर एक कार्यक्रम में बोल रहे थे। उन्होंने नई शिक्षा नीति की चर्चा करते हुए कहा कि यह राष्ट्र विकास से जुड़ी है। शिक्षक, विद्यार्थी और समाज के हितों के आलोक में इसे तैयार किया गया है। उन्होंने पंडित मदन मोहन मालवीय के योगदान को स्मरण करते हुए कहा कि शिक्षा के लिए उन्होंने अपना जीवन कर दिया था। उन्होंने कहा कि मालवीय ने हिंदी का प्रसार किया। राष्ट्रवादी विचारों को आगे बढ़ाया और काशी हिंदू विश्वविद्यालय जैसा विश्वस्तरीय विश्वविद्यालय स्थापित किया।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 05 Sep 2025 19:00:52 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>शास्त्रों और संस्कृतियों में भी कहा गया है, कि शिक्षक समाज का भविष्य गढ़ते हैं : मुख्यमंत्री</title>
                                    <description><![CDATA[मुख्यमंत्री ने समारोह में शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले शिक्षकों को सम्मानित किया और उन्हें समाज का सच्चा मार्गदर्शक बताया। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/scriptures-and-cultures-also-states-that-chief-minister-bhajan-lal/article-125947"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-09/(630-x-400-px)-(6)3.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि शिक्षक समाज का भविष्य गढ़ते हैं। शास्त्रों और संस्कृतियों में भी कहा गया है। बलीहारी गुरु अपने, गोविंद दियो बताय। गुरु का स्थान सदैव सर्वोच्च रहा है, क्योंकि वही शिष्य को ज्ञान, संस्कार और जीवन की दिशा प्रदान करता है।मुख्यमंत्री शुक्रवार को बिड़ला सभागार जयपुर में आयोजित राज्य स्तरीय शिक्षक सम्मान समारोह-2025 को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि भारत में गुरु-शिष्य परंपरा हजारों साल से चली आ रही है और यही हमारी सांस्कृतिक धरोहर है।उन्होंने राजस्थान की धरती को ‘अलख जगाने वाली’ बताते हुए कहा कि इस प्रदेश के शिक्षकों ने शिक्षा की मशाल हमेशा ऊँची रखी है।</p>
<p>खासकर प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों का योगदान सबसे अधिक रहा है, जिन्होंने ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में शिक्षा का उजाला फैलाया। मुख्यमंत्री ने समारोह में शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले शिक्षकों को सम्मानित किया और उन्हें समाज का सच्चा मार्गदर्शक बताया। समारोह के दौरान उपस्थित विद्यार्थियों और शिक्षकों ने उत्साहपूर्वक उनका स्वागत किया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 05 Sep 2025 17:48:36 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur PS]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>शिक्षक केवल ज्ञान के वाहक नहीं होते, बल्कि वे नैतिकता, विवेक और संवेदनशीलता के मार्गदर्शक भी : देवनानी</title>
                                    <description><![CDATA[इसलिए इस अवसर पर केवल शिक्षक का सम्मान करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनके संदेश को जीवन में उतारना भी आवश्यक है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/teachers-are-not-only-the-carriers-of-knowledge-but-those/article-125945"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-09/rajasthan-assembly-speaker.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। शिक्षक दिवस के अवसर पर राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने कहा कि शिक्षक केवल ज्ञान के वाहक नहीं होते, बल्कि वे नैतिकता, विवेक और संवेदनशीलता के मार्गदर्शक भी हैं। उनकी शिक्षाएँ पीढ़ियों को प्रभावित करती हैं और उनके व्यक्तित्व से निकलने वाली रोशनी दूर-दूर तक फैलती है। उन्होंने कहा कि आज की तेज़ रफ्तार तकनीकी दुनिया में शिक्षक ही वह संतुलन हैं जो ज्ञान और संस्कार की नदियों को सूखने नहीं देते। शिक्षक बच्चों को आज से जोड़कर भविष्य तक पहुँचाने वाले पुल हैं।</p>
<p>इसलिए इस अवसर पर केवल शिक्षक का सम्मान करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनके संदेश को जीवन में उतारना भी आवश्यक है। देवनानी ने यह भी जोर दिया कि गुरु-परंपरा ने हमें यह सिखाया है कि शिक्षा केवल रोजगार का साधन नहीं, बल्कि जीवन को सार्थक और समाज को उज्ज्वल बनाने का माध्यम है। शिक्षक दिवस पर हमें इस परंपरा को आगे बढ़ाने और शिक्षकों की भूमिका को और सशक्त बनाने का संकल्प लेना चाहिए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 05 Sep 2025 17:22:56 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>शिक्षक दिवस पर विशेष : अन्य राज्यों की तुलना में राजस्थान की राजनीति काफी बेहतर है, इसकी वजह है शिक्षकों की अहम भूमिका </title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थान के पहले मुख्यमंत्री हीरालाल शास्त्री ने शिक्षा का एक ऐसा संस्थान ही खड़ा कर दिया, जो महिला शिक्षा पर केंद्रित था और शांति निकेतन को टक्कर देता था। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/rajasthans-politics-is-much-better-than-other-states-on-teachers/article-125911"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-09/(630-x-400-px)-(6)2.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राज्य की सियासत बाकी राज्यों की तुलना में काफी संजीदा है। इसकी वजह है प्रदेश की राजनीति में शिक्षकों की अहम भूमिका। प्रदेश की राजनीति में कई ऐसे शिक्षक रहे हैं, जिन्होंने प्रदेश और देश की राजनीति और सरकारों में अहम भूमिका निभाई। कुछ शिक्षक विधायक-सांसद ही बने, जबकि कुछ शिक्षक केन्द्रीय मंत्री, विधानसभा अध्यक्ष और राजनीतिक दलों के असरदार नेता भी रहे। राजस्थान के पहले मुख्यमंत्री हीरालाल शास्त्री ने शिक्षा का एक ऐसा संस्थान ही खड़ा कर दिया, जो महिला शिक्षा पर केंद्रित था और शांति निकेतन को टक्कर देता था। उदयपुर के कालूलाल श्रीमाली तो केंद्र में मंत्री रहे। </p>
<p><strong>केएल श्रीमाली</strong><br />उदयपुर निवासी श्रीमाली मौलाना आजाद के बाद नेहरू मंत्रिमण्डल में दूसरे शिक्षा मंत्री बने। वे वर्ष 1955 से 1963 तक केन्द्र में शिक्षा मंत्री रहे। भारत सरकार ने उनकी सेवाओं को देखकर उन्हें पदमविभूषण सम्मान से सम्मानित किया। शिक्षा को समर्पित जन शक्ति मासिक पत्रिका का सम्पादन भी किया था।</p>
<p><strong>गुलाब चन्द कटारिया</strong><br />कटारिया वर्तमान में पंजाब के राज्यपाल हैं। जीवन की शुरूआत एक शिक्षक के रूप में। भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष,  नेता प्रतिपक्ष और गृहमंत्री रहे। शेखावत की सरकार में शिक्षा मंत्री रहे। मेवाड़ के बड़े नेता। उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में काफी दिलचस्पी ली और अहम काम किए। </p>
<p><strong>डॉ.सीपी जोशी</strong><br />जोशी मनोविज्ञान के प्रोफेसर रहने के साथ ही विद्यार्थी जीवन में मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय में छात्रसंघ के अध्यक्ष भी रहे। वे प्रदेश के शिक्षा मंत्री, कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष, राष्ट्रीय महामंत्री और केन्द्र में पंचायतीराज मंत्री रहे। बाद में विधानसभा के अध्यक्ष भी बने।</p>
<p><strong>वासुदेव देवनानी</strong><br />देवनानी ने अपने जीवन की शुरूआत शिक्षक के रूप में की, वे दो बार प्रदेश के शिक्षा राज्य मंत्री रहे हैं। वर्तमान में राज्य विधानसभा के अध्यक्ष के रूप में कार्य कर रहे हैं। </p>
<p><strong>ललित किशोर चतुर्वेदी</strong><br />कॉलेज शिक्षा में साइंस के प्रोफेसर रहे हैं, वे राजस्थान में लम्बे समय तक भाजपा प्रदेशाध्यक्ष, उच्च शिक्षा मंत्री और राज्य सभा सदस्य रहे हैं।</p>
<p><strong>डॉ. गिरिजा व्यास</strong><br />व्यास दर्शनशास्त्र की मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय में प्रोफेसर रहने के साथ ही उनकी आठ पुस्तकें प्रकाशित हुई। वे राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष, केन्द्र और राज्य में मंत्री भी रही हैं। कवि, लेखक के रूप में कार्य करने के साथ ही वे राजस्थान कांग्रेस की प्रदेशाध्यक्ष भी रहीं हैं। इसी साल पूजा करते समय कपड़ों में आग लगने से मौत हो गई। </p>
<p><strong>अबरार अहमद</strong><br />आरयू में वाणिज्य सरकार में शिक्षण कार्य करवाया। बाद में केन्द्रीय वित्त राज्य मंत्री रहे।</p>
<p><strong>प्रो.सांवरलाल जाट</strong><br />आरयू में वाणिज्य संकाय में प्रोफेसर, राज्य और केन्द्र सरकार में मंत्री रहे हैं। वे जनता परिवार से भाजपा में शामिल हुए थे। राजस्थान किसान आयोग के अध्यक्ष भी रहे हैं।</p>
<p><strong>हीरालाल शास्त्री</strong><br />आजादी के संघर्ष के यौद्धा होने के साथ ही राजस्थान के प्रथम मुख्यमंत्री बने। महिला शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए निवाई में अपनी पुत्री की स्मृति में 'शांताबाई शिक्षा कुटीर' की स्थापना की, जो बाद में वनस्थली विद्यापीठ के रूप में पहचाना गया। विद्यापीठ को देखकर पं. नेहरू ने कहा था कि यदि मेरा दूसरा जन्म होता है तो एक लड़की के रूप में हो और मेरी पढ़ाई वनस्थली विद्यापीठ में हो।  </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 05 Sep 2025 12:00:43 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur PS]]></dc:creator>
                            </item>
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                <title>शिक्षा मानव जीवन का आधार</title>
                                    <description><![CDATA[शिक्षा मानव जीवन का आधार है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/education-basis-of-human-life/article-125917"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-09/(630-x-400-px)-(13)1.png" alt=""></a><br /><p>शिक्षा मानव जीवन का आधार है। यह केवल रोजगार पाने का साधन नहीं, बल्कि संस्कार, नैतिकता और समाज की प्रगति का वास्तविक स्तंभ है। शिक्षक वह दीपक है, जो स्वयं जलकर दूसरों के जीवन में प्रकाश फैलाता है। इस संदर्भ में मेरा यह कथन कि मैं भी एक शिक्षक हूं, केवल एक वाक्य नहीं, बल्कि जीवन का दर्शन है। मैंने अपने राजनीति और सार्वजनिक जीवन में रहते हुए सदैव यह संदेश दिया कि हर व्यक्ति अपने जीवन में किसी न किसी क्षण,किसी न किसी रूप में एक शिक्षक होता है। प्राचीन भारतीय परंपरा में गुरु का स्थान सर्वोच्च माना गया है। गुरु को सृष्टि के रचयिता, पालक और संहारक के समान दर्जा दिया गया है परंतु मेरा यह दृष्टिकोण केवल पारंपरिक गुरु तक सीमित नहीं है। मेरा मानना है कि मां जीवन का पहला पाठ पढ़ाती है, वह पहली शिक्षक है। पिता अपने बच्चों को संस्कार देता है, वह भी एक शिक्षक है। मित्र सही मार्गदर्शन करता है, वह भी शिक्षक है।</p>
<p><strong>सकारात्मक बदलाव :</strong></p>
<p>अनुभव हमें जीवन का सबक सिखाते हैं, वे भी शिक्षक हैं, इसलिए मैं कहता हूं कि मैं भी एक शिक्षक हूं, क्योंकि हर इंसान अपने ज्ञान और अनुभव से दूसरों को सिखाता है। मैं भी एक शिक्षक हूं, का वास्तविक अर्थ यही है कि हम सभी में एक शिक्षक छुपा हुआ है। हमें चाहिए कि हम अपने ज्ञान और अनुभव को दूसरों के साथ साझा करें। समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए आगे आएं। बच्चों को केवल किताबें ही नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला भी सिखाएं। मेरा जीवन इस बात का प्रमाण है कि राजनीति में रहकर भी मैंने शिक्षा को सर्वोच्च स्थान दिया है। समाज में शिक्षा और शिक्षक की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। उसका जीवन और कार्य इस बात का प्रत्यक्ष उदाहरण है। राजस्थान की राजनीति में लंबे समय तक सक्रिय रहने और अब राज्य की विधानसभा का अध्यक्ष रहने के बावजूद मैंने हमेशा शिक्षा को अपने जीवन का केंद्र बिंदु माना है।</p>
<p><strong>मैं स्वयं शिक्षक रहा :</strong></p>
<p>राजनीति में आने से पहलें मैं स्वयं शिक्षक रहा। आज जिस तकनीकी शिक्षा पर सर्वाधिक जोर दिया जाता है, मैं उसी विषय से जुड़ा हुआ था। मैं देश के सबसे बड़े भौगोलिक प्रदेश राजस्थान का दो बार शिक्षा मंत्री भी रहा। राजस्थान का शिक्षा मन्त्री रहते हुए मैंने कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए, जिनका असर आज भी दिखाई देता है। मैंने राज्य के शिक्षा पाठ्यक्रम में सुधार किया और विद्यालयों के पाठ्यक्रम में महापुरुषों, संतों और स्वतंत्रता सेनानियों को शामिल कराया। जिसमें महाराणा प्रताप महान पाठ को शामिल कराना प्रमुख था, क्योंकि मेरा प्रारंभ से ही मानना था कि अकबर महान पाठ पढ़ाना सही नहीं है। यह हमारे महान इतिहास का अपमान है। इसीलिए मैंने इस चैप्टर और अन्य कई महापुरुषों और भारतीय संस्कृति से जुड़े पाठ स्कूल पाठ्यक्रम में सम्मिलित कराये। इसका उद्देश्य बच्चों को केवल ज्ञान ही नहीं, बल्कि प्रेरणा और आदर्श प्रदान करना था।</p>
<p><strong>संस्कृत ज्ञान की कुंजी :</strong></p>
<p>संस्कृत को प्रोत्साहन देने के क्रम में मैंने संस्कृत भाषा को प्राचीन भारतीय ज्ञान की कुंजी मानते हुए इसे विद्यालय स्तर पर बढ़ावा दिया। स्मार्ट स्कूल योजना के अन्तर्गत शिक्षा को आधुनिक बनाने के लिए डिजिटल क्लास,ई-कंटेंट और प्रोजेक्टर आधारित पढ़ाई शुरू कराई। विद्यालय अनुशासन पर बल देते हुए शिक्षकों और विद्यार्थियों की उपस्थिति पर विशेष ध्यान दिया गया। पढ़ो राजस्थान,जैसी योजनाओं से शिक्षा में नवाचार लाने का कार्य किया। नैतिक शिक्षा पर बल देने से विद्यार्थियों के नेतृत्व में यह प्रयास हुआ कि विद्यार्थी केवल पढ़ाई में ही नहीं, बल्कि व्यवहार और सामाजिक उत्तरदायित्व में भी श्रेष्ठ बनें। मेरा मानना है कि शिक्षा का उद्देश्य केवल नौकरी नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण है। भारतीय संस्कृति और परंपरा का सम्मान शिक्षा का अनिवार्य हिस्सा होना चाहिए। प्रौद्योगिकी और आधुनिकता का समावेश शिक्षा को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करता है। अनुशासन और मूल्य आधारित शिक्षा ही समाज को सही दिशा देती है।</p>
<p><strong>जीवन का मूल मंत्र :</strong></p>
<p>मेरे लिए मैं भी एक शिक्षक हूं, यह वाक्य जीवन का मूल मंत्र है। राजनीति में रहते हुए भी मैंने स्वयं को समाज का शिक्षक माना हैं। क्योंकि जीवन स्वयं सबसे बड़ा विद्यालय है। अनुभव सबसे बड़ी पाठ्य पुस्तक है। हर व्यक्ति जो कुछ सीखता है, उसे समाज के साथ साझा करना उसका कर्तव्य है। इस दृष्टिकोण से हर किसी को अपने आपको शिक्षक और एक निरंतर सीखने वाला और सिखाने वाला इन्सान मानना चाहिए। आज के समय में जब शिक्षा को केवल डिग्री और रोजगार तक सीमित कर दिया गया हैए मेरा यह विचार और भी प्रासंगिक हो जाता है कि यदि समाज को सशक्त बनाना है, तो शिक्षा में संस्कार और संस्कृति को स्थान देना होगा। शिक्षक को केवल अध्यापक नहीं, बल्कि मार्गदर्शक और जीवन निर्माता होना चाहिए। शिक्षा का अंतिम लक्ष्य समग्र विकास होना चाहिए, न कि केवल परीक्षा उत्तीर्ण करना। मैं भी एक शिक्षक हूं, केवल एक विचार या भाषण नहीं है। यह एक जीवन दृष्टि है।</p>
<p><strong>शिक्षा का उद्देश्य :</strong></p>
<p>शिक्षक होना किसी पद, वेतन या संस्था से बंधा हुआ कार्य नहीं है, बल्कि, जब भी हम किसी को सही मार्ग दिखाते हैं, अनुभव साझा करते हैं और समाज को शिक्षित करते हैं, तब हम शिक्षक बन जाते हैं। वास्तविकता में हर व्यक्ति शिक्षक है और हर क्षण शिक्षा का अवसर है। इसलिए यह कथन हमारे हृदय और मन में गहराई से छू जाना चाहिए कि मैं भी एक शिक्षक हूं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने कई बार अपने भाषणों,मन की बात और शिक्षक दिवस जैसे अवसरों पर शिक्षा और शिक्षक पर विचार व्यक्त करते हुए कहा है कि शिक्षा का उद्देश्य केवल नौकरी नहीं, जीवन निर्माण है। शिक्षा का लक्ष्य केवल रोजगार तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि यह बच्चों के चरित्र, रचनात्मकता और आत्मनिर्भरता को विकसित करने वाली होनी चाहिए। शिक्षा में भारतीय संस्कृति, परंपरा और मूल्यों को बनाए रखते हुए आधुनिक विज्ञान और तकनीक को जोड़ने पर विशेष जोर दिया जाना चाहिए। शिक्षा किसी भी राष्ट्र की रीढ़ होती है। यदि शिक्षा व्यवस्था पारदर्शी, गुणवत्तापूर्ण और भ्रष्टाचार मुक्त होगी, तभी समाज और देश का भविष्य सुरक्षित और सशक्त बन सकता है।</p>
<p><strong>-वासुदेव देवनानी</strong><br /><strong>अध्यक्ष, राजस्थान विधानसभा</strong><br /><strong>(यह लेखक के अपने विचार हैं)</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 05 Sep 2025 11:53:43 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur KD]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पद नहीं, पेशे में गुरूर शिक्षा के सर्वपल्ली नूर : भारतीय शिक्षा जगत का एक अनोखा किस्सा है—उस व्यक्ति का, जो देश का राष्ट्रपति भी बना, मगर खुद को जीवनभर केवल 'शिक्षक' कहता रहा</title>
                                    <description><![CDATA[दर्शन जैसे कठिन विषय को वे रोजमर्रा की भाषा और गांव की कहानियों से जोड़ देते। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/sarvapalli-noor-of-gurur-education-in-the-profession-is-not/article-125914"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-09/(630-x-400-px)-(11)1.png" alt=""></a><br /><p>कहानी शुरू होती है 1909 से, जब मद्रास क्रिश्चियन कॉलेज से पढ़ाई पूरी करने के बाद एक युवा अध्यापक ने दर्शनशास्त्र की कक्षाएँ लेना शुरू कीं। यह वही अध्यापक था, जिसकी क्लास में भीड़ इतनी हो जाती कि छात्र खिड़कियों और दरवाजों से टिककर सुनते।</p>
<p>तीस बरस बाद, वही व्यक्ति कलकत्ता यूनिवर्सिटी का उपकुलपति, ऑक्सफर्ड का प्रोफेसर और विश्व-स्तरीय दार्शनिक बन चुका था।<br />1952 में जब वह भारत के उपराष्ट्रपति बने, छात्रों ने पूछा—'अब आप शिक्षक दिवस क्यों नहीं मनाते?'  उनका उत्तर था—'अगर विद्यार्थी इस दिन को शिक्षक दिवस के रूप में मनाएँ, तो यह मेरे लिए सबसे बड़ा सम्मान होगा।' यही दिन आज पूरे भारत में शिक्षक दिवस कहलाता है।</p>
<p><strong>आज का टेकअवे : वे पांच शिक्षाएं, जो डॉ. राधाकृष्णन के जीवन से मिलती हैं </strong><br />1. शिक्षा का असली लक्ष्य— आत्मा का उत्थान<br />जानकारी किताबों से मिल सकती है, लेकिन शिक्षा का सार है— सोचने और जीने का नया दृष्टिकोण देना।<br />2. संवाद ही सबसे बड़ा क्लासरूम<br />कक्षा में सवाल पूछने और चर्चा करने का माहौल सबसे ज्यादा जरूरी है। यही छात्रों को जीवंत और जागरूक बनाता है।<br />3. सरल भाषा, गहरे विचार<br />जितना कठिन विषय हो, उसे उतना ही सहज ढंग से समझाना चाहिए। यही असली शिक्षक की पहचान है।<br />4. पद नहीं, कर्म महान बनाता है<br />राष्ट्रपति पद पर पहुंचकर भी उन्होंने कहा— 'क्यों न मुझे बस ट१. ढ१ी२्रिील्ल३ कहें?'<br />यही सिखाता है कि उपाधियां नहीं, आपके कर्म और आचरण ही आपकी महानता तय करते हैं।<br />5. शिक्षक, राष्ट्र की आत्मा का निमार्ता<br />अच्छे शिक्षक केवल छात्रों का भविष्य नहीं संवारते, बल्कि पूरे राष्ट्र का चरित्र गढ़ते हैं।</p>
<p><strong>शिक्षण के सूत्र</strong><br />राधाकृष्णन का कक्षा-कक्ष एक तरह का संवाद का मंच था।<br />वे उपनिषदों और ग्रीक दर्शन को एक साथ पढ़ाते, और पूछते: 'इनमें कौन सा सत्य स्थायी है?'<br />वे कहते: 'एजुकेशन इज नॉट एक्युमुलेशन ऑव इन्फॉर्मेेशन, बट ट्रांस्फोर्मेशन ऑव सॉल'<br />उनके छात्र बताते हैं कि वे किसी भी जटिल विचार को गांव की कहानियों और रोजमर्रा की भाषा में उतार देते थे।</p>
<p><strong>शिक्षण का फिलॉसफी</strong><br />'शिक्षा इ्न्फोर्मेशन नहीं, ट्रांस्फोर्मेशन है.'<br />किताबें नहीं, सोचने की आदत देना ही उनका तरीका था।<br />वे कहते थे, शिक्षक वही <br />है जो 'विद्यार्थी की आत्मा को छू ले।'</p>
<p><strong>निजी घटनाएँ, जो आदर्श बनीं</strong><br />1936 में उन्हें ऑक्सफर्ड में 'ईस्टर्न रिलीजन एंड एथिक्स' की चेयर मिली। पश्चिमी विद्वानों ने पहली बार पूर्वी दर्शन को उसी स्तर पर सुना, जिस स्तर पर प्लेटो और अरस्तू को पढ़ाया जाता था।<br />जब वे यूनिवर्सिटी पढ़ाते थे, तो कभी अपनी तनख्वाह का हिस्सा गरीब छात्रों की फीस में दे देते।<br />क्यों अलग थे वे शिक्षक?<br />राधाकृष्णन की खासियत यह थी कि वे 'सोचने' के लिए मजबूर करते थे। वे विद्यार्थियों को किताब का उत्तर नहीं, बल्कि सवाल पूछने की आदत देते थे। यही कारण है कि उनके शिष्यों में वैज्ञानिक, राजनेता और लेखक—सब <br />शामिल हुए।</p>
<p><strong>भारत का राष्ट्रपति जो जीवनभर सिर्फ शिक्षक रहा</strong><br />टाइमलाइन: घटनाओं की तेज झलक<br />1909: मद्रास क्रिश्चियन कॉलेज से पढ़ाई पूरी, अध्यापन की शुरूआत।<br />1931: आंध्र यूनिवर्सिटी के उपकुलपति बने।<br />1936: ऑक्सफर्ड यूनिवर्सिटी में 'ईस्टर्न रिलीजन एंड एथिक्स' की चेयर मिली।<br />1952: भारत के उपराष्ट्रपति बने।<br />1962: राष्ट्रपति पद संभाला, लेकिन कहा—'मैं अब भी एक शिक्षक हूँ।'<br />1962 से आज तक: 5 सितम्बर को पूरा देश मनाता है शिक्षक दिवस।</p>
<p><strong>क्लासरूम की कहानियाँ</strong><br />कहा जाता है, उनकी कक्षाओं में जगह कम पड़ जाती थी। छात्र खिड़कियों और दरवाजों पर खड़े होकर सुनते। दर्शन जैसे कठिन विषय को वे रोजमर्रा की भाषा और गांव की कहानियों से जोड़ देते। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 05 Sep 2025 11:38:48 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur PS]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>दो विद्यालयों के प्रधानाचार्यों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश : स्कूल में अव्यवस्थाओं को देख शिक्षा मंत्री मदन दिलावर हुए नाराज</title>
                                    <description><![CDATA[द्वारकापुरी में कक्षा नवीं में उर्दू अध्ययन करा रहे अध्यापक जवाद अली की कक्षा में शिक्षा मंत्री द्वारा बच्चों से सामान्य ज्ञान की प्रश्न पूछे गए।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/education-minister-madan-dilwar-got-angry-after-seeing-the-dislocations/article-125885"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-09/(630-x-400-px)15.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। जयपुर के स्कूलों का औचक निरीक्षण करने पहुंचे शिक्षा एवं पंचायती राज मंत्री मदन दिलावर ने गुरुवार को विद्यालयों में अव्यवस्थाओं को लेकर प्रधानाचार्यों के खिलाफ  कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। शिक्षा मंत्री मदन दिलावर प्रात: 7.40 बजे रा.उ. मा. विद्यालय, वाटर वर्क्स, पानीपेच, जयपुर पहुंचे। वे प्रार्थना में शामिल हुए। विद्यालय में कुल 334 बच्चे हैं जबकि प्रार्थना सभा में डेढ़ सौ छात्र-छात्राएं मिले तथा अर्थशास्त्र के व्याख्याता जितेंद्र सिंह बिना सूचना के अनुपस्थित थे। प्रार्थना सभा मोबाइल से कराई जा रही थी। इसके बाद मंत्री ने प्रधानाचार्य दामोदर लाल को निर्देश दिए कि प्रार्थना छात्र-छात्राओं से ही कराएं।</p>
<p>मुरलीपुरा स्थित शहीद मेजर योगेश अग्रवाल रा.उ. मा. विद्यालय में प्रात: 8.05 पर पहुंचे शिक्षा मंत्री को प्रधानाचार्य रचना दूदवाल, व्याख्याता सुनीता पारेख, वरिष्ठ अध्यापक वर्षा गोयल, कृष्णा देवी जाट एवं मंजीता अतिरिक्त प्रशासनिक अधिकारी, कमलकांत मिश्रा वरिष्ठ सहायक बिना सूचना अनुपस्थित पाए गए। विद्यालय में मूवमेंट रजिस्टर नहीं था। दिलावर ने डीईओ माध्यमिक मुख्यालय जयपुर को प्रधानाचार्य के विरुद्ध सख्त कार्रवाई के लिए निर्देशित किया। वहीं शास्त्री नगर स्थित उ. मा. विद्यालय, द्वारकापुरी के हालात को देखकर चौंक गए। प्रधानाचार्य सीमा विज विद्यालय में अनुपस्थित थी। विद्यालय स्टाफ  ने बताया कि विद्यालय दो पारी में संचालित है। अत: वे प्रात: 10 बजे विद्यालय आती है। </p>
<p><strong>बच्चों को राष्ट्रपति, पीएम और सीएम के नाम ही पता नहीं</strong><br />द्वारकापुरी में कक्षा नवीं में उर्दू अध्ययन करा रहे अध्यापक जवाद अली की कक्षा में शिक्षा मंत्री द्वारा बच्चों से सामान्य ज्ञान की प्रश्न पूछे गए। उन्होंने पाया कि बच्चों को देश के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और प्रदेश के मुख्यमंत्री के नाम तक नहीं पता थे। ऐसे में शिक्षा मंत्री ने वरिष्ठ अध्यापक जवाद अली के विरुद्ध डीईओ माध्यमिक मुख्यालय जयपुर को अनुशासनात्मक कार्रवाई के निर्देश दिए।  </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 05 Sep 2025 10:06:44 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur PS]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>शिक्षा व्यवस्था की बदहाली के खिलाफ गांव-ढांणी तक सच्चाई पहुंचाएगी कांग्रेस, भदौरिया ने कहा- बैठक में कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा </title>
                                    <description><![CDATA[शिक्षा पर वर्तमान सरकार के हो रहे अथवा होने वाले प्रहारों का जवाब देने की रूपरेखा भी तैयार की गई। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/congress-bhadoria-will-convey-the-truth-to-the-village-dhani-against/article-117188"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-06/rtroer-(4)19.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। प्रदेश कांग्रेस शिक्षक प्रकोष्ठ राजस्थान की प्रदेश कार्यकारिणी, जिला अध्यक्ष, जिला महासचिव एवं प्रदेश संरक्षक मंडल सलाहकार मंडल की संयुक्त बैठक पीसीसी में हुई। प्रदेशाध्यक्ष अभिमन्यु सिंह भदौरिया ने बताया कि इस बैठक में प्रदेश संरक्षक मंडल एवं सलाहकार मंडल के सदस्यों की मौजूदगी में कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई। बैठक में उपस्थित पदाधिकारी को विभिन्न प्रभार का आवंटन करना संभाग तथा जिला प्रभारी नियुक्त करना पर चर्चा हुई। जिन जिलों में जिला अध्यक्षों की नियुक्ति नहीं हुई है वहां जल्दी ही जिला अध्यक्ष नियुक्त करेंगे। संभाग स्तर पर प्रकोष्ठ के कार्यक्रम निर्धारित किए गए। </p>
<p>शिक्षक दिवस 5 सितंबर पर आयोजन की रूपरेखा निर्धारित की गई। शिक्षा पर वर्तमान सरकार के हो रहे अथवा होने वाले प्रहारों का जवाब देने की रूपरेखा भी तैयार की गई। हम जल्दी ही गांव गांव, ढाणी ढाणी जाकर भाजपा सरकार में शिक्षा व्यवस्था की बदहाली के बारे में लोगों को बताएंगे। इस सरकार में अंग्रेजी माध्यम स्कूलों को बंद करने की कोशिश की जा रही है, जिससे गरीब बच्चों के हितों पर कुठाराघात हो रहा है। एसआई भर्ती प्रकरण में यह सरकार अब तक कोई कदम नहीं उठा पाई। आरपीएससी के पुनर्गठन पर भी कोई फैसला नहीं लिया गया। भदौरिया ने कहा कि हम जल्दी ही प्रदेश कार्यकारिणी का विस्तार करेंगे।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 12 Jun 2025 16:57:02 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur PS]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>शिक्षक दिवस पर मेट्स ने दीर्घवधि सेवाओं के लिए शिक्षकों को किया सम्मानित</title>
                                    <description><![CDATA[कार्यक्रम की मुख्य अतिथि सुषमा रावत, डायरेक्टर, एक्सप्लोरेशन, ओएनजीसी ने कहा कि प्रधानमंत्री का 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने लक्ष्य प्राप्त करने में शिक्षकों की महत्वपूर्ण भूमिका होगी, क्योंकि शिक्षक को बस देना आता है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/mets-honored-teachers-for-long-term-services-on-teachers-day/article-56394"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-09/teachers-day.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। महाराजा अग्रसेन टेक्निकल एजुकेशन सोसाइटी (मेट्स) द्वारा शिक्षक दिवस का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में 32 शिक्षकों को दीर्घावधि सेवा सम्मान से अलंकृत किया गया।  सम्मान के रूप में उन्हें पदक प्रदान किया गया। इसके साथ ही उन शिक्षकों को भी सम्मानित किया गया जिन्होंने इस साल पी एच डी की डिग्री हासिल की, किताब लिखी और पेटेंट हासिल किया।<br /><br />कार्यक्रम की मुख्य अतिथि सुषमा रावत, डायरेक्टर, एक्सप्लोरेशन, ओएनजीसी ने कहा कि प्रधानमंत्री का 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने लक्ष्य प्राप्त करने में शिक्षकों की महत्वपूर्ण भूमिका होगी, क्योंकि शिक्षक को बस देना आता है।<br /><br />मेट्स के संस्थापक अध्यक्ष डा. नंदकिशोर गर्ग ने कहा कि शिक्षक बहुत आसानी से समाज में समरसता का पाठ पढ़ा सकता है। वह एक मित्र, दार्शनिक और मार्गदर्शक की भूमिका निभाते हुए छात्र को राष्ट्र, समाज के लिए तैयार कर सकता है। इस अवसर पर उन्होंने डा. राधाकृष्णन, मदन मोहन मालवीय और डा . श्यामा प्रसाद मुखर्जी जैसे शिक्षाविदों का स्मरण किया।<br /><br />संस्था के अध्यक्ष विनीत गुप्ता ने अपने उद्बोधन में  गुरु और शिष्य के अटूट संबंध पर प्रकाश डाला। संस्था के मुख्य कार्यकारी ज्ञानेन्द्र वास्तव ने कुछ सच्ची घटनाओं के माध्यम से गुरु शिष्य के पावन संबंध को रेखांकित किया। <br /><br />समारोह में मेट्स के उपाध्यक्ष सर्व जगदीश मित्तल,आर के गुप्ता, एस पी गोयल, सचिव रजनीश गुप्ता, मेट की निदेशक प्रो. नीलम शर्मा, मैम्स की निदेशक प्रो. रजनी मल्होत्रा ढींगरा, महाराजा अग्रसेन बिजनेस स्कूल के निदेशक प्रो . एस . के. मारवाह और डीन प्रो. एस एस देसवाल सहित सभी शिक्षक उपस्थित थे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 05 Sep 2023 19:53:06 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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                <title>बच्चों ने बताया वह कैसा शिक्षक चाहते  हैं</title>
                                    <description><![CDATA[शिक्षक दिवस के अवसर पर दैनिक नवज्योति ने बंधा धर्मपुरा रोड़ स्थित विद्यांजलि एकेडमी के विद्यार्थियों के बीच एक लेखन प्रतियोगिता आयोजित की जिसका विषय था ‘आपकी नजर में एक शिक्षक कैसा होना चाहिए’। इस प्रतियागिता में विद्यांजलि एकेडमी के कक्षा छह से दसवीं तक के विद्यार्थियों ने भाग लिया। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/children-told-what-kind-of-teacher-they-want/article-21727"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-09/event-teachers-day-dainik-navajyoti-5.9.2022.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। शिक्षक को आज नहीं सदियों से गुरु माना जाता है। एक अच्छे शिक्षक का कर्तव्य विद्यार्थी को पढ़ाना नहीं है बल्कि पूरे समाज में ऐसे समाज का सृजन करना हैं जिससे समाज आदर्शों से प्रज्ज्वलित हो सकें। महर्षि अरविन्द ने कहा है ‘शिक्षक राष्टÑ की संस्कृति के चतुर माली हैं। वे सस्कारों की जड़ों में खाद देते हैं और अपने श्रम से सींचकर उन्हें शक्ति में परिवर्तित करते हैं। राष्टÑ के वास्तविक निर्माता उस देश के शिक्षक होते हैं।’ शिक्षक का दर्जा समाज  में हमेशा से ही पूज्यनीय रहा है। सही मायनों में कहा जाए तो एक शिक्षक ही अपने विद्यार्थी का जीवन गढ़ता है। इसलिए शिक्षक को समाज का शिल्पकार कहा जाता है। क्योंकि एक शिक्षक द्वारा दी गई शिक्षा ही विद्यार्थी के सर्वांगीण विकास का मूल आधार है। आधुनिक युग में शिक्षक की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है। शिक्षक वह पथ-प्रदर्शक होता है जो किताबी ज्ञान ही नहीं बल्कि जीवन जीने की कला सिखाता है। प्रत्येक विद्यार्थी के सफल जीवन की नींव उन्हीं के हाथों रखी जाती है।</p>
<p><strong>शिक्षक दिवस के अवसर पर दैनिक नवज्योति ने बंधा धर्मपुरा रोड़ स्थित विद्यांजलि एकेडमी के विद्यार्थियों के बीच एक लेखन प्रतियोगिता आयोजित की जिसका विषय था ‘आपकी नजर में एक शिक्षक कैसा होना चाहिए’। इस प्रतियागिता में विद्यांजलि एकेडमी के कक्षा छह से दसवीं तक के विद्यार्थियों ने भाग लिया। विद्यार्थी कैसा शिक्षक चाहते हैं इस विषय पर इस स्कूल के बच्चों ने अपने मनोभावों को कागज पर कलम द्वारा अभिव्यक्त किया। वे एक शिक्षक में क्या गुण देखना चाहते हैं। वे इस प्रकार हैं :</strong></p>
<p>-    शिक्षक निष्पक्ष हो। नि:स्वार्थ भाव से पढ़ाए। पाठ को अच्छे से समझाए।<br />-    सभी विषयों का ज्ञान होना चाहिए। लेकिन जिस  भी विषय को पढ़ाता है उस विषय का पूरा ज्ञान होना चाहिए।<br />-       ऐसे अध्यापक चाहिए जो विद्यार्थी के मनोभावों को समझ सकें। जिनसे मन की बात कह सकें।<br />-    अध्यापक को कठोर होना चाहिए लेकिन इतना भी सख्त न हो कि उनके आने से पढ़ने का मन नहीं करे। जिस भी विषय    का वह अध्यापक  है वह विषय पढ़ने का मन नहीं करे।<br />-    अध्यापक थोड़ा हंसी-मजाक करने वाला भी होना चाहिए। जिससे पढ़ाई में और उस विषय को पढ़ने में रूचि हो।<br />-    टीचर साधारण स्वभाव का होना चाहिए। उसमें सादगी होनी चाहिए।<br />-    ज्यादा गृहकार्य टीचर को नहीं देना चाहिए इससे बच्चों के ऊपर प्रेशर पड़ता है।<br />-    अगर किसी बच्चे के टेस्ट में कम नंबर आए तो टीचर को बच्चे को समझाना चाहिए ना कि डांटना चाहिए।<br />-    टीचर को टेलेंटेड होना चाहिए। इससे बच्चों को बहुत बातें सीखने को मिलती है।<br />-    टीचर को धैर्यवान होना चाहिए। गुस्से पर काबू रखने वाला होना चाहिए। <br />-    टीचर का व्यक्तित्व साफ-सुंदर प्रभावशाली होना चाहिए। व्यवहार में अच्छा होना चाहिए।<br />-    बेवजह स्टूडेंट्स को सजा नहीं देना चाहिए। कभी कभी शिष्यों का ही नहीं बल्कि शिक्षक की भी गलती <br />होती है।<br />-    स्टूडेंटस में भेदभाव नहीं करें। टीचर के मन में ऐसा नहीं होना चाहिए कि वह बच्चा ज्यादा पढ़ता है तो उस पर ज्यादा ध्यान दें। टीचर के लिए सभी बच्चे एक समान है टीचर को पढ़ाई में कमजोर बच्चों पर भी ज्यादा ध्यान देना चाहिए।<br />-    पढ़ाने का तरीका रूचिकर होना चाहिए कि खेल-खेल में स्टूडेंटस सीख जाए।<br />-    किसी भी स्टूडेंटस के रूप रंग का उपहास नहीं बनाएं।<br />-    शिक्षक का व्यक्तित्व मित्रवत और मददगार होना चाहिए<br />-    मोबाइल या अन्य इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स  टीचर को क्लास में नहीं लाना चाहिए। प्रतियोगिता के परिणाम</p>
<p><strong>प्रतियोगिता के परिणाम</strong></p>
<p><strong>प्रथम पुरस्कार-  चित्रा राठौर, कक्षा-10</strong><br />इस दुनिया और इस देश का प्रत्येक शिक्षक  अद्भुत हैं। वे हमें न केवल किताबी ज्ञान देते हैं बल्कि दुनिया भर का ज्ञान भी देते हैं। एक शिक्षक को छात्रों के प्रति सख्त होना चाहिए लेकिन बहुत ज्यादा नहीं। अपने विषय को मैत्रीपूर्ण तरीके से समझाना चाहिए। पढ़ाई में छात्रों की मदद करने वाला होना चाहिए।</p>
<p><strong>द्वितीय पुरस्कार- हर्ष प्रजापति,  कक्षा- 8</strong><br />शिक्षक मित्र हैं, शिक्षक माता-पिता हैं,  स्टूडेन्ट्स का भविष्य संवर सकें इसके लिए  शिक्षक वर्तमान में उन्हें तैयार करते हैं, शिक्षक ही सफलता का मार्ग है। शिक्षक, स्टूडेन्ट्स की भावना का सम्मान करने वाला हो।</p>
<p><strong>तृतीय पुरस्कार- दीक्षा जैन, कक्षा- 10</strong><br />गुरुमें अनुशासन होना बहुत जरूरी है। गुरु का साथ छूटने के बाद भी उनकी कहीं बातें याद रहें ऐसा व्यक्तित्व गुरु का होना चाहिए।</p>
<p><strong>सांत्वना पुरस्कार</strong><br /><strong>पार्थ कछावा, कक्षा - 8</strong><br />शिक्षक को मिलनसार, सख्त, प्रोत्साहित करने वाला, सुशिक्षित होना चाहिए। शिक्षक हमारे जीवन में एक किताब की तरह है, क्योंकि  दुनिया में चल रही किसी भी चीज की वह जानकारी देते है।</p>
<p><strong>खनक महावर, कक्षा-7</strong><br />गुरु का होना हमारी जिंदगी में बहुत महत्वपूर्ण हैं। गुरु हमारे हर कार्य में मार्गदर्शन करते हैं। शिक्षक में ज्ञान, विनम्रता, बात करने का तरीका जैसे गुण मुख्य रूप से होने चाहिए।</p>
<p><strong>आर्यन मालव, कक्षा - 9</strong><br />टीचर चाहे सुंदर नहीं हो लेकिन उनके पढ़ाने का तरीका सुंदर होना चाहिए। सभी विद्यार्थियों को एक समान नजरिये से देखना चाहिए। विद्यार्थियों के साथ मित्रता का व्यवहार हो जिससे वह अपनी समस्याओं को उन तक लाने में संकोच नहीं करें।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 05 Sep 2022 13:16:01 +0530</pubDate>
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