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                <title>Andhra Pradesh Government - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>Andhra Pradesh Government RSS Feed</description>
                
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                <title>तिरुपति लड्डू मामला: सुप्रीम कोर्ट ने आंध्र प्रदेश की एक-सदस्यीय जांच समिति को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज किया</title>
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                        <![CDATA[सुप्रीम कोर्ट ने तिरुपति लड्डू घी मिलावट मामले में आंध्र प्रदेश सरकार की एक-सदस्यीय जांच समिति को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी। अदालत ने स्पष्ट किया कि प्रशासनिक जांच से आपराधिक जांच प्रभावित नहीं होगी।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/tirupati-laddu-case-supreme-court-rejects-plea-challenging-andhra-pradeshs/article-144310"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/sc1.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने तिरुपति मंदिर के लड्डुओं के घी में मिलावट की जांच के लिए एक-सदस्यीय जांच समिति बनाने के आंध्र प्रदेश सरकार के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका को सोमवार को खारिज कर दिया। मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने डॉ सुब्रमण्यम स्वामी की ओर से दायर रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए यह फैसला सुनाया। याचिका में कहा गया था कि अगर राज्य समानांतर रूप से जांच करता है तो शीर्ष अदालत द्वारा गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) की आपराधिक जांच में खलल पड़ेगा। उच्चतम न्यायालय ने कहा कि दोनों ही प्रक्रियाएं कानून के हिसाब से चलती रहनी चाहिए। </p>
<p>पीठ ने कहा कि एसआईटी की जांच पूरी हो गयी है और राज्य की प्रशासनिक जांच से उसपर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। एसआईटी ने अपनी अंतिम रिपोर्ट जनवरी में प्रस्तुत कर दी थी। रिपोर्ट के अनुसार, लड्डू में जानवरों की चर्बी नहीं थी लेकिन खरीद प्रक्रिया में अन्य अनियमितताएं थीं जिससे मंदिर तक नकली घी पहुंच रहा था। </p>
<p>आंध्र सरकार ने हाल ही में सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी दिनेश कुमार की अगुवाई में एक-सदस्यीय समिति गठित की थी। इस समिति का काम एसआईटी के नोट की जांच करना और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ जरूरी कार्रवाई की सलाह देना था। </p>]]>
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                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 23 Feb 2026 18:27:31 +0530</pubDate>
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                <title>नायडू को राहत नहीं, सुप्रीम कोर्ट नौ अक्टूबर को करेगी सुनवाई</title>
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                        <![CDATA[पुलिस हिरासत के खिलाफ उनकी याचिका पर तत्काल विचार करने से इनकार कर दिया था, लेकिन मुकदमा रद्द करने की गुहार पर विचार के लिए सहमति व्यक्त की थी।]]>
                    </description>
                
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/no-relief-for-naidu-supreme-court-will-hear-on-october/article-58676"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-10/supreme-court--3.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने आंध्र प्रदेश में कौशल विकास केंद्रों की स्थापना में कथित घोटाले से संबंधित एक मामले में पूर्व मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू को तत्काल राहत देने की उनकी गुहार ठुकराते हुए मंगलवार को कहा वह इस मामले से उच्च न्यायालय में पेश दस्तावेज प्राप्त राज्य सरकार से होने के बाद नौ अक्टूबर को इस पर विचार करेगा।</p>
<p>न्यायमूर्ति अनिरुद्ध बोस और न्यायमूर्ति बेला एम त्रिवेदी की पीठ ने श्री नायडू की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ताओं- वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश साल्वे, ए एम सिंघवी और सिद्धार्थ लूथरा और आंध्र प्रदेश सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी और रंजीत कुमार की दलीलें सुनने के बाद कहा कि वह इस मामले में सोमवार को विचार करेगी।</p>
<p>पीठ ने आंध्र प्रदेश सरकार से कहा कि वह इस मामले में उच्च न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत दस्तावेजों का पूरा संकलन शीर्ष अदालत के समक्ष पेश करे। शीर्ष अदालत ने 27 सितंबर को  उनकी  पुलिस हिरासत के खिलाफ उनकी याचिका पर तत्काल विचार करने से इनकार कर दिया था, लेकिन मुकदमा रद्द करने की गुहार पर विचार के लिए सहमति व्यक्त की थी।</p>
<p>मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने संबंधित पक्षों की दलीलें सुनने के बाद यह आदेश पारित किया था। पीठ ने कहा था कि यह अदालत निचली अदालत को चंद्रबाबू नायडू की पुलिस हिरासत की मांग करने वाले आवेदन पर विचार करने से नहीं रोकेगी।</p>
<p>लूथरा ने अदालत से भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17A को देखने का अनुरोध करते हुए कहा कि उनके मुवक्किल को हिरासत में नहीं रखा जा सकता। उन्होंने कहा कि कोई भी पुलिस थाना सक्षम प्राधिकारी की अनुमति के बिना अपने कर्तव्यों का पालन करने वाले लोक सेवक के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं कर सकता है।</p>
<p>इस पर मुख्य न्यायाधीश ने कहा था कि इस मामले को 3 अक्टूबर को एक पीठ के समक्ष सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाएगा। नायडू ने उच्च न्यायालय के 22 सितंबर के आदेश के खिलाफ पिछले दिनों उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था, जिसमें नौ दिसंबर 2021 को दर्ज प्राथमिकी को रद्द करने से इनकार कर दिया गया था।</p>]]>
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                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 03 Oct 2023 19:45:29 +0530</pubDate>
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                <title>राज्य बोर्डों को 'सुप्रीम' आदेश: 10 दिन में बताएं 12वीं की मूल्यांकन नीति, 31 जुलाई तक घोषित करें नतीजे</title>
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                        <![CDATA[सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्य बोर्डों को 12वीं की परीक्षा के परिणाम के लिए मूल्यांकन योजना 10 दिन के भीतर अधिसूचित करने का गुरुवार को निर्देश दिया। न्यायमूर्ति एएम खानविलकर और न्यायमूर्ति दिनेश माहेश्वरी की अवकाशकालीन खंडपीठ ने सभी बोर्डों को निर्देश दिया कि वे आंतरिक आकलन के आधार पर 31 जुलाई तक परीक्षाफल जारी करें।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%9C%E0%A5%8D%E0%A4%AF-%E0%A4%AC%E0%A5%8B%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A1%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%95%E0%A5%8B--%E0%A4%B8%E0%A5%81%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%80%E0%A4%AE--%E0%A4%86%E0%A4%A6%E0%A5%87%E0%A4%B6--10-%E0%A4%A6%E0%A4%BF%E0%A4%A8-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%AC%E0%A4%A4%E0%A4%BE%E0%A4%8F%E0%A4%82-12%E0%A4%B5%E0%A5%80%E0%A4%82-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%AE%E0%A5%82%E0%A4%B2%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%95%E0%A4%A8-%E0%A4%A8%E0%A5%80%E0%A4%A4%E0%A4%BF--31-%E0%A4%9C%E0%A5%81%E0%A4%B2%E0%A4%BE%E0%A4%88-%E0%A4%A4%E0%A4%95-%E0%A4%98%E0%A5%8B%E0%A4%B7%E0%A4%BF%E0%A4%A4-%E0%A4%95%E0%A4%B0%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%A8%E0%A4%A4%E0%A5%80%E0%A4%9C%E0%A5%87/article-871"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-06/supreme_court1.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्य बोर्डों को 12वीं की परीक्षा के परिणाम के लिए मूल्यांकन योजना 10 दिन के भीतर अधिसूचित करने का गुरुवार को निर्देश दिया। न्यायमूर्ति एएम खानविलकर और न्यायमूर्ति दिनेश माहेश्वरी की अवकाशकालीन खंडपीठ ने सभी बोर्डों को निर्देश दिया कि वे आंतरिक आकलन के आधार पर 31 जुलाई तक परीक्षाफल जारी करें। खंडपीठ ने कहा कि वह सभी राज्य बोर्ड के लिए सामान्य आदेश जारी कर रही है। कोर्ट ने कहा कि सभी राज्य बोर्ड आज से 10 दिन के भीतर अपनी योजना अधिसूचित करें। ये बोर्ड सीबीएसई और आईसीएसई को दी गई अवधि के अनुसार ही 31 जुलाई तक आंतरिक मूल्यांकन के जरिए परीक्षा परिणाम जारी करेंगे। <br /> <br /> कोर्ट ने कहा कि वह कोई एकरूप योजना के लिए दिशानिर्देश जारी नहीं कर रहा है, क्योंकि सभी राज्य बोर्डों के लिए एक समान मूल्यांकन योजना संभव नहीं है। कोर्ट ने कहा कि राज्य और उनके बोर्ड अपनी नीति बनाने को स्वतंत्र और स्वायत्त हैं। इसलिए उनके अधिकार क्षेत्र में दखल नहीं देंगे। इस दौरान कोर्ट ने आंध्र प्रदेश सरकार द्वारा परीक्षा आयोजित करने के फैसले पर गहरी नाराजगी जताई। कोर्ट ने आंध्र प्रदेश सरकार से पूछा कि सामाजिक और शारीरिक दूरी के सिद्धांत का पालन करते हुए परीक्षा हॉल में 15 से 20 छात्रों को बैठाने के इंतजाम कैसे करेंगे। कोर्ट ने आंध्र के हलफनामे के हवाले से कहा कि आपके यहां कुल परीक्षार्थियों के लिए कम से कम 34,600 कमरों की जरूरत होगी, कैसे मैनेज करेंगे। कोर्ट ने सरकार से पूछा कि आपने जुलाई के आखिरी हफ्ते में इम्तिहान आयोजित करने की बात कही है। सबसे पहले तो स्थिति अनिश्चित है, आपने इम्तिहान करा भी लिया तो नतीजे कब तक दे पाएंगे, देश-विदेश के विश्वविद्यालय आपके नतीजों का इंतजार करेंगे क्या।</p>]]>
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                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 24 Jun 2021 16:29:44 +0530</pubDate>
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