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                <title>united nations - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>यूएन रिपोर्ट में खौफनाक सच हुआ बेनकाब: इजरायली जेलें फिलीस्तीनियों के लिए सोची-समझी क्रूरता की प्रयोगशाला, अब तक 100 से ज्यादा कैदियों की हिरासत में मौत </title>
                                    <description><![CDATA[संयुक्त राष्ट्र की विशेष दूत फ्रांसेस्का अल्बानीज़ ने इजरायली हिरासत केंद्रों को 'बर्बरता की प्रयोगशाला' करार दिया है। अक्टूबर 2023 से 1,500 बच्चों सहित 18,500 फिलिस्तीनियों को कैद किया गया है। रिपोर्ट में यौन शोषण, भुखमरी और अमानवीय यातनाओं का खुलासा करते हुए इसे 'राजकीय नीति' और नरसंहार का हथियार बताया गया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/the-dreadful-truth-has-been-exposed-in-the-un-report/article-147740"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/jail.png" alt=""></a><br /><p>जेनेवा। संयुक्त राष्ट्र की ताजा रिपोर्ट ने इजरायली हिरासत केंद्रों के भीतर छिपे उस खौफनाक सच को बेनकाब कर दिया है, जिसे अब 'राज्य के सिद्धांत' के रूप में अपनाया जा चुका है। अक्टूबर 2023 से अब तक जुल्म की यह शृंखला 18,500 से अधिक फिलिस्तीनियों को अपनी चपेट में ले चुकी है, जिनमें 1,500 से ज्यादा मासूम बच्चे शामिल हैं।</p>
<p>ये आंकड़े महज संख्या नहीं, बल्कि उन हजारों जिंदगियों की दास्तान हैं, जिन्हें बिना किसी आरोप या मुकदमे के सलाखों के पीछे धकेल दिया गया है। करीब 100 कैदियों की हिरासत में हुई मौतें इस व्यवस्था की भयावहता की गवाही देती हैं। इजरायली जेलें अब सुधार गृह नहीं, बल्कि 'सोची-समझी क्रूरता की प्रयोगशाला' बन चुकी हैं। जहां कैदियों के साथ ऐसी अमानवीय और घिनौनी हरकतें की जा रही हैं, जो इंसानियत को शर्मसार कर दें। लोहे की छड़ों और चाकुओं से यौन शोषण, हड्डियों और दांतों को बेरहमी से तोड़ना, भूखा रखना और कैदियों पर कुत्तों से हमला करवाकर उन पर पेशाब करना— ये वे अकल्पनीय प्रताड़नाएं हैं, जिनका उद्देश्य फिलिस्तीनियों को केवल शारीरिक रूप से ही नहीं, बल्कि मानसिक और आत्मिक तौर पर भी पूरी तरह तोड़ देना है। यह संगठित बर्बरता अब अंधेरे में नहीं, बल्कि सत्ता के ऊंचे गलियारों की शह पर खुलेआम अंजाम दी जा रही है।</p>
<p>संयुक्त राष्ट्र की विशेषज्ञ ने चेतावनी दी है कि दशकों से मिल रही छूट और राजनीतिक संरक्षण के चलते, फिलिस्तीनियों के खिलाफ इजरायल की व्यवस्थित प्रताड़ना अब कब्जे वाले फिलीस्तीनी क्षेत्र में जारी 'नरसंहार' का परिभाषित हथियार बन गयी है। 1967 से कब्जे वाले फिलिस्तीनी क्षेत्र में मानवाधिकारों की स्थिति पर संयुक्त राष्ट्र की विशेष दूत फ्रांसेस्का अल्बानीज़ ने मानवाधिकार परिषद को सौंपी अपनी नयी रिपोर्ट में कहा, "नरसंहार की शुरुआत के बाद से, इजरायली जेल प्रणाली 'सोची-समझी क्रूरता की प्रयोगशाला' में बदल गयी है।" </p>
<p>अल्बानीज के अनुसार, "जो कभी अंधेरे और साये में किया जाता था, वह अब खुलेआम हो रहा है। संगठित अपमान, पीड़ा और अधोगति का यह शासन अब उच्चतम राजनीतिक स्तरों से स्वीकृत है।" यानी, जो दर्द पहले छिपाया जाता था, अब उसे सत्ता की शह पर सरेआम अंजाम दिया जा रहा है। रिपोर्ट में बताया गया है कि राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन-ग्वीर सहित वरिष्ठ अधिकारियों की लागू की गयी नीतियों ने प्रताड़ना, सामूहिक दंड और हिरासत की अमानवीय स्थितियों को एक संस्थानिक रूप दे दिया है। यह फिलिस्तीनियों को इंसान न समझने की एक सोची-समझी नीति है।</p>
<p>विशेष दूत ने स्पष्ट किया कि मानवाधिकारों के इन जघन्य उल्लंघनों के लिए जिम्मेदार लोगों को जांच और न्याय का सामना करना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि युद्ध के समय भी इन अधिकारों से वंचित नहीं किया जा सकता और अपराधियों को 'अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय' (आईसीसी) के कटघरे में खड़ा होना होगा। अल्बानीज की रिपोर्ट चेतावनी देती है कि अक्टूबर 2023 से अब तक पूरे कब्जे वाले फिलिस्तीनी क्षेत्र में 18,500 से अधिक फिलिस्तीनियों को हिरासत में लिया गया है, जिनमें कम से कम 1,500 बच्चे शामिल हैं। हजारों लोग बिना किसी आरोप या मुकदमे के कैद हैं, कई 'जबरन गायब' कर दिये गये हैं और लगभग 100 कैदियों की हिरासत में मौत हो चुकी है।</p>
<p>कैदियों के साथ ऐसी दरिंदगी की गयी है जो कल्पना से परे है। रिपोर्ट में बोतलों, लोहे की छड़ों और चाकुओं से बलात्कार, भुखमरी, हड्डियां और दांत तोड़ना, शरीर को जलाना, थूकना और कुत्तों से हमला करवाना व उन पर पेशाब करवाने जैसी भयानक प्रताड़नाओं का जिक्र है।<br />वर्ष 2025 में प्रताड़ना के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र समिति ने भी 'संगठित और व्यापक प्रताड़ना की एक वास्तविक 'राज्य की नीति' की निंदा की थी, जो 7 अक्टूबर 2023 के बाद से बेहद गंभीर हो गयी है।</p>
<p>इस बर्बरता को दुनियाभर के राजनेताओं से बचाव मिल रहा है। कानूनी संस्थाएं इसे तर्कसंगत बता रही हैं। मीडिया इसे साफ-सुथरा कर पेश कर रहा है। दुनिया की वे सरकारें इसे सहन कर रही हैं, जो इजरायल को हथियार और सुरक्षा देना जारी रखे हुए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, प्रताड़ना केवल जेल की दीवारों तक सीमित नहीं है। निरंतर बमबारी, जबरन विस्थापन, भुखमरी, घरों-अस्पतालों की तबाही और सैन्य व बसने वाले आतंकी समूहों के खौफ ने पूरे फिलिस्तीनी क्षेत्र को एक 'प्रताड़नाकारी माहौल' में बदल दिया है।</p>
<p>अल्बानीज ने भावुक होकर कहा, "गाज़ा, वेस्ट बैंक और पूर्वी येरुसलेम में फिलीस्तीनी पीड़ा की अटूट शृंखला से गुजर रहे हैं। वहां कोई शरण नहीं है, कोई सुरक्षित कोना नहीं है, जीने के लिए कोई महफूज जगह नहीं बची है।" अल्बानीज़ ने इजरायल से प्रताड़ना के सभी कृत्यों को तुरंत रोकने, अंतरराष्ट्रीय जांचकर्ताओं को प्रवेश देने और कब्जे को खत्म करने की प्रक्रिया शुरू होने तक दोषियों की जवाबदेही तय करने का आग्रह किया और सदस्य देशों से नरसंहार और प्रताड़ना को रोकने के अपने कानूनी दायित्वों को निभाने की अपील की। इनमें इतामार बेन-ग्वीर, बेजालेल स्मोट्रिच और इजरायल काट्ज जैसे जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ जांच और गिरफ्तारी वारंट जारी करना शामिल है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
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                <pubDate>Tue, 24 Mar 2026 18:00:31 +0530</pubDate>
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                <title>मिडिल ईस्ट में तनाव बीच सईद इरावानी का बड़ा बयान: होर्मुज में शांति एवं सुरक्षा बनाए रखना ईरान का निहित अधिकार</title>
                                    <description><![CDATA[संयुक्त राष्ट्र में ईरान के प्रतिनिधि अमीर सईद इरावानी ने होर्मुज जलडमरूमध्य में सुरक्षा बनाए रखना अपना अधिकार बताया है। उन्होंने मौजूदा तनाव के लिए अमेरिकी कार्रवाइयों को जिम्मेदार ठहराया। वहीं, नए सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने इस रणनीतिक मार्ग को अवरुद्ध करने के हथियार को जारी रखने का आह्वान कर वैश्विक चिंता बढ़ा दी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/saeed-iravanis-big-statement-amid-tension-in-the-middle-east/article-146400"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/said.png" alt=""></a><br /><p>न्यूयॉर्क। संयुक्त राष्ट्र में ईरान के स्थायी प्रतिनिधि अमीर सईद इरावानी ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य क्षेत्र में शांति और सुरक्षा बनाए रखना उनके देश का निहित अधिकार है। इरावानी ने गुरुवार को संवाददाताओं से कहा कि ईरान अंतरराष्ट्रीय समुद्र कानून के तहत नौवहन की स्वतंत्रता के सिद्धांत का पूरी तरह से सम्मान करता है और इसके प्रति प्रतिबद्ध है।</p>
<p>प्रतिनिधि ने कहा, होर्मुज जलडमरूमध्य सहित क्षेत्र की वर्तमान स्थिति ईरान की आत्मरक्षा का परिणाम नहीं है, बल्कि यह ईरान पर हमला करने और क्षेत्रीय सुरक्षा को कमजोर करने की अमेरिका की कार्रवाइयों का प्रत्यक्ष परिणाम है।</p>
<p>ईरान के नए सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने गुरुवार को होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद रखने का आह्वान करते हुए कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य को अवरुद्ध करने के हथियार का उपयोग निश्चित रूप से जारी रहना चाहिए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
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                <pubDate>Fri, 13 Mar 2026 18:42:33 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>ईरानी सरकार का दावा: अमेरिकी-इजरायली हमलों में 1,300 से अधिक नागरिकों की मौत; 9,669 नागरिक ठिकाने हुए नष्ट,  अमेरिका-इजरायल जानबूझकर बुनियादी ढांचे को बना रहे निशाना</title>
                                    <description><![CDATA[ईरानी राजदूत अमीर सईद इरावानी ने आरोप लगाया कि अमेरिका-इजरायल हमलों में 1,300 नागरिक मारे गए और 7,000 से अधिक घर तबाह हुए। उन्होंने ईंधन डिपो पर बमबारी से फैले जहरीले प्रदूषण और राजनयिकों की हत्या को 'युद्ध अपराध' करार दिया। ईरान ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से इस मानवीय संकट को रोकने हेतु तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/iranian-government-claims-more-than-1300-civilians-killed-in-american-israeli/article-146072"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/iran3.png" alt=""></a><br /><p>न्यूयॉर्क। संयुक्त राष्ट्र में ईरान के राजदूत और स्थायी प्रतिनिधि अमीर सईद इरावानी ने कहा कि गत 28 फरवरी से अमेरिका-इजरायल के सैन्य हमलों में ईरान में 1,300 से अधिक नागरिक मारे गए हैं और 9,669 नागरिक ठिकाने नष्ट हो गए हैं। इरावानी ने मंगलवार को प्रेस को दिए एक बयान में बताया कि नष्ट किए गए नागरिक ठिकानों में 7,943 आवासीय घर, 1,617 वाणिज्यिक और सेवा केंद्र, 32 चिकित्सा सुविधाएं, 65 स्कूल और शैक्षणिक संस्थान, रेड क्रिसेंट की 13 इमारतें और कई ऊर्जा आपूर्ति सुविधाएं शामिल हैं।</p>
<p>उन्होंने कहा, अमेरिका-इजरायल जानबूझकर और अंधाधुंध तरीके से मेरे देश के नागरिकों और नागरिक बुनियादी ढांचे को निशाना बना रहे हैं। वे अंतरराष्ट्रीय कानून का कोई सम्मान नहीं कर रहे हैं और इन अपराधों को करने में कोई संयम नहीं दिखा रहे हैं। इरावानी ने कहा कि घनी आबादी वाले रिहायशी इलाकों और महत्वपूर्ण नागरिक बुनियादी ढांचे को जानबूझकर निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि यह आंकड़ें वास्तविक नहीं हैं, इनमें बढ़ोतरी हो सकती है।</p>
<p>ईरान के राजदूत ने नागरिक बुनियादी ढांचों पर हमलों का उल्लेख करते हुए बताया कि शनिवार रात तेहरान और अन्य शहरों में ईंधन भंडारण केंद्रों पर भारी हमले किये गये, जिससे वातावरण में बड़ी मात्रा में खतरनाक और जहरीले प्रदूषक फैल गए हैं। ईरानी रेड क्रिसेंट सोसाइटी का हवाला देते हुए इरावानी ने कहा कि इन विस्फोटों के कारण गंभीर वायु प्रदूषण हुआ और नागरिकों, विशेष रूप से बच्चों, महिलाओं, बुजुर्गों और गंभीर स्वास्थ्य स्थिति वाले लोगों के लिए स्वास्थ्य जोखिम पैदा हो गए हैं।</p>
<p>उन्होंने कहा, ये जघन्य हमले अंतरराष्ट्रीय पर्यावरणीय दायित्वों का भी उल्लंघन करते हैं, जिनमें जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र फ्रेमवर्क कन्वेंशन और जैविक विविधता पर कन्वेंशन के तहत आने वाले नियम शामिल हैं। इरावानी ने अन्य उदाहरणों का भी जिक्र किया, जिनमें शनिवार तड़के तेहरान के मेहराबाद हवाई अड्डे पर हुए हमले शामिल हैं, जिससे कई नागरिक विमान और सुविधाएं नष्ट या गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो गईं। इसके अलावा होर्मोजगन प्रांत के केशम द्वीप पर एक मीठे पानी के संयत्र पर हमला किया गया, जिससे 30 गांवों की जल आपूर्ति बाधित हो गई।</p>
<p>प्रतिनिधि ने यह भी कहा कि रविवार तड़के इजरायल ने लेबनान के बेरूत में रामादा होटल पर जानबूझकर आतंकवादी हमला किया, जिसमें चार ईरानी राजनयिक मारे गए। उन्होंने कहा, किसी अन्य संप्रभु राज्य के क्षेत्र में राजनयिकों की लक्षित हत्या एक गंभीर आतंकवादी कृत्य, युद्ध अपराध और अंतरराष्ट्रीय कानून का घोर उल्लंघन है। इरावानी ने कहा, ईरानी लोगों के खिलाफ इस खूनी संघर्ष को रोकने के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय को अब कार्रवाई करनी चाहिए। हम अपने लोगों, अपने क्षेत्र और अपनी स्वतंत्रता की रक्षा के लिए सभी आवश्यक उपाय करेंगे।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 11 Mar 2026 12:58:23 +0530</pubDate>
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                <title>अंतरराष्ट्रीय कानून अब खत्म: ईरान-यूएस जंग से भड़का रूस, बुलाई पी-5 देशों की बैठक</title>
                                    <description><![CDATA[क्रेमलिन प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने चेतावनी दी है कि पश्चिम एशिया में जारी हिंसा के कारण अंतरराष्ट्रीय कानून का वजूद खत्म हो चुका है। रूस ने राष्ट्रपति पुतिन के उस पुराने प्रस्ताव को दोहराया है, जिसमें P-5 (रूस, अमेरिका, चीन, फ्रांस, ब्रिटेन) की बैठक के जरिए वैश्विक स्थिरता बहाल करने की मांग की गई है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/international-law-now-ends-russia-enraged-by-iran-us-war-calls/article-145769"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/trump-and-putin.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। पश्चिमी एशिया के हालात इस वक्त बेहद तनावपूर्ण हैं। अमेरिका और इजरायल की तरफ से ईरान पर जो हमले हुए हैं, उसने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है। इस बीच रूस ने एक बहुत बड़ा और कड़ा बयान दिया है. रूस का कहना है कि जिस अंतरराष्ट्रीय कानून की हम बात करते हैं, वह अब लगभग खत्म हो चुका है। इसी बिगड़ते माहौल को देखते हुए रूस ने अब राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के उस पुराने प्रस्ताव को फिर से सबके सामने रखा है, जिसमें संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के पांच स्थायी सदस्यों (पी-5) की बैठक बुलाने की सलाह दी गई थी।</p>
<p><strong>सिर्फ कागजों पर रह गया है कानून</strong></p>
<p>रूस के सरकारी टीवी रूसिया को दिए एक इंटरव्यू में क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने बहुत खरी-खरी बात कही। उन्होंने कहा कि आज के दौर में हमने वह सब कुछ खो दिया है जिसे अंतरराष्ट्रीय कानून कहा जाता था। पेसकोव ने सवाल उठाया कि जब कानून का कोई वजूद ही नहीं बचा, तो भला किसी से इसके नियमों और सिद्धांतों को मानने के लिए कैसे कहा जा सकता है?</p>
<p>उन्होंने इस स्थिति को समझाने के लिए दो शब्दों का इस्तेमाल किया। उनका कहना था कि अंतरराष्ट्रीय कानून कानून के मुताबिक, किताबों या कागजों में दिख सकता है, लेकिन वास्तविक रूप से जमीनी हकीकत में इसका अब कोई नामोनिशान नहीं रह गया है। पेसकोव ने जोर देकर कहा कि आज दुनिया में कोई भी यह साफ-साफ नहीं बता सकता कि अंतरराष्ट्रीय कानून आखिर है क्या? ऐसे में किसी को इसके पालन के लिए कहना बेमानी है।  </p>
<p>कोरोना महामारी से पहले पुतिन ने एक प्रस्ताव दिया था कि दुनिया की पांच बड़ी ताकतें (रूस, अमेरिका, चीन, फ्रांस और ब्रिटेन)  एक साथ बैठें और वैश्विक सुरक्षा और स्थिरता पर चर्चा करें। आज के हालात को देखते हुए इस प्रस्ताव पर फिर से गौर करना बहुत जरूरी हो गया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 09 Mar 2026 11:28:16 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>ईरानी राजदूत अमीर सईद इरवानी ने पत्र लिखकर दी अमेरिका को चेतावनी, कहा-अगर हम पर हमला किया तो...</title>
                                    <description><![CDATA[ईरान ने संयुक्त राष्ट्र को पत्र लिखकर चेतावनी दी है कि अमेरिकी धमकियों के जवाब में उनके ठिकानों पर हमला वैध होगा। ट्रंप की 15 दिवसीय समयसीमा के बाद तनाव चरम पर है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/iranian-ambassador-amir-saeed-ervani-wrote-a-letter-warning-america/article-143894"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/iran.png" alt=""></a><br /><p>न्यूयॉर्क। ईरान ने शुक्रवार को संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस और सुरक्षा परिषद के अध्यक्ष को एक पत्र लिखकर चेतावनी दी है कि यदि अमेरिका अपनी सैन्य धमकियों पर अमल करता है, तो अमेरिकी ठिकानों और संपत्तियों पर ईरानी हमले वैध होंगे। संयुक्त राष्ट्र में ईरान के राजदूत अमीर सईद इरवानी ने पत्र में कहा कि ईरान किसी भी हमले का निर्णायक जवाब देगा। साथ ही उन्होंने क्षेत्र में सैन्य आक्रामकता के गंभीर परिणामों की चेतावनी भी दी।</p>
<p>यह घटनाक्रम अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान को दी गयी उस धमकी के बाद आया है, जिसमें उन्होंने परमाणु मुद्दे पर अमेरिका के साथ समझौता करने के लिए अधिकतम 10-15 दिन का समय दिया है। उन्होंने कहा कि यदि दोनों पक्ष किसी समझौते पर पहुंचने में विफल रहते हैं, तो बुरी चीजें होंगी।</p>
<p>संयुक्त राष्ट्र में ईरान के स्थायी मिशन ने भी राष्ट्रपति ट्रंप के बयान की आलोचना करते हुए कहा कि यह सैन्य आक्रामकता के वास्तविक खतरे का संकेत है, हालांकि उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि ईरान युद्ध नहीं चाहता है। पत्र में चेतावनी दी गयी कि किसी भी अप्रत्याशित और अनियंत्रित परिणाम के लिए संयुक्त राज्य अमेरिका पूर्ण और प्रत्यक्ष रूप से जिम्मेदार होगा।</p>
<p>बढ़ते तनाव के बीच पश्चिम एशिया में अमेरिकी सैन्य तैनाती पर संयुक्त राष्ट्र ने चिंता जतायी है। संयुक्त राष्ट्र प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक ने संवाददाताओं से कहा, महासचिव एंटोनियो गुटेरेस, अन्य लोगों की तरह, सैन्य जमावड़े, युद्धाभ्यास और चल रहे प्रशिक्षण को लेकर बहुत चिंतित हैं। इसीलिए हम ईरान और अमेरिका दोनों को ओमान की मध्यस्थता में अपनी चर्चा जारी रखने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं।</p>
<p>ईरानी परमाणु कार्यक्रम पर ईरान-अमेरिका बातचीत का दूसरा दौर 17 फरवरी को जिनेवा में ओमान की मध्यस्थता में संपन्न हुआ। बातचीत के बाद, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि इसमें प्रगति हुई है और ईरान तथा अमेरिका अब उन मसौदों पर काम करेंगे, जो एक संभावित समझौते का आधार बन सकते हैं। राष्ट​पति? ट्रंप ने अपने तेवर और कड़े कर लिए हैं। उन्होंने अपने ट्रुथ सोशल प्लेटफॉर्म पर लिखा है कि यदि ईरान समझौता नहीं करने का फैसला करता है, तो अमेरिका को चागोस द्वीप समूह में हिंद महासागर एयरबेस का उपयोग करने की आवश्यकता हो सकती है। उल्लेखनीय है कि हिंद महासागर में चागोस द्वीप समूह पर अमेरिका सैन्य ठिकाना है।</p>
<p>बातचीत का पिछला प्रयास पिछले साल तब विफल हो गया था, जब इजरायल ने ईरान पर हमले शुरू किये थे। इसके बाद 12 दिनों तक चले युद्ध में अमेरिका भी शामिल हो गया था और उसने फोर्डो, नतांज और इस्फहान में तीन ईरानी परमाणु स्थलों पर बमबारी की थी।</p>
<p>राष्ट्रपति ट्रंप ने जनवरी में सरकार विरोधी प्रदर्शनकारियों पर ईरानी कार्रवाई के बाद सैन्य कार्रवाई की धमकी दी थी। ईरान ने इसके जवाब में खाड़ी से निर्यात किये जाने वाले तेल के लिए महत्वपूर्ण मार्ग, होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने की धमकी दी थी और चेतावनी दी थी कि वह क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमला कर सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 20 Feb 2026 12:59:14 +0530</pubDate>
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                <title>अफगान तालिबान ने आतंकी समूहों की सहायता वाले आरोपों को किया खारिज, कहा पड़ोसी देशों से संचालित</title>
                                    <description><![CDATA[तालिबान ने विदेशी आतंकी समूहों को मदद देने के आरोप नकारे। कहा, इस्लामिक स्टेट ने पड़ोसी देशों में ठिकाने बनाए, अफगानिस्तान पूरी तरह सुरक्षित है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/afghan-taliban-rejects-allegations-of-supporting-terrorist-groups-says-operated/article-142149"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/11-(700-x-400-px)-(630-x-400-px)-(4)5.png" alt=""></a><br /><p>काबुल। अफगान तालिबान ने अफगानिस्तान में सक्रिय विदेशी आतंकवादी समूहों को किसी भी प्रकार की सहायता देने के आरोपों को खारिज कर दिया। उसने आरोप लगाया कि इस्लामिक स्टेट के लड़ाकों ने पड़ोसी देशों में ठिकाने स्थापित किए हैं, जो पाकिस्तान की ओर एक अप्रत्यक्ष इशारा है। तालिबान के प्रवक्ता मुजाहिद ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में कई देशों द्वारा तालिबान-नियंत्रित अफगानिस्तान से कथित आतंकवादी गतिविधियों के बारे में व्यक्त की गई चिंताओं का जवाब देते हुए गुरुवार को कहा कि अफगानिस्तान सुरक्षित है और इस्लामी अमीरात में कोई विदेशी या दुष्ट समूह मौजूद नहीं है।</p>
<p>अफगानिस्तान में इस्लामिक स्टेट की हार का दावा करते हुए उन्होंने कहा कि दुर्भाग्यवश इस आतंकी समूह ने हमारे पड़ोसी देशों में अपने ठिकाने बना लिए हैं। मुजाहिद ने देशों द्वारा उठाई गई सुरक्षा चिंताओं को बेबुनियाद करार देते हुए कहा कि ये चिंताएं संयुक्त राष्ट्र में तालिबान के प्रतिनिधित्व की कमी के कारण उत्पन्न हुई हैं।</p>
<p>हालांकि, उन्होंने किसी भी पड़ोसी देश का नाम नहीं लिया, जहां उनके अनुसार इस्लामिक स्टेट खोरासान ने कथित तौर पर शरण ली थी लेकिन तालिबान अधिकारियों ने एक से अधिक बार पाकिस्तान पर इस्लामिक स्टेट के गुर्गों को पनाह देने, सहायता करने, प्रशिक्षण देने एवं वित्तपोषण करने का आरोप लगाया है।</p>
<p>बुधवार को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के सत्र में, संयुक्त राष्ट्र के एक वरिष्ठ अधिकारी, अलेक्जेंडर जुएव ने चेतावनी दी कि इस्लामिक अमीरात में आईएस-केपी क्षेत्र और उससे परे दोनों जगह सुरक्षा के लिए एक गंभीर खतरा बना हुआ है, जो तालिबान द्वारा बार-बार किए गए उन दावों के विपरीत है कि उसने देश के भीतर इसे हरा दिया है।</p>
<p>संयुक्त राष्ट्र में अमेरिकी राजदूत माइक वाल्ट्ज ने कहा कि अफगानिस्तान में इस्लामिक स्टेट का खतरा लगातार बना हुआ है और इसके लिए तत्काल समन्वित अंतरराष्ट्रीय कार्रवाई की आवश्यकता है। उन्होंने आगे कहा कि यह खतरा अफगानिस्तान से परे पश्चिम और दक्षिण एशिया के कुछ हिस्सों तक फैल रहा है और यहां तक कि अफ्रीका के कुछ हिस्सों तक भी पहुंच रहा है। पाकिस्तान के प्रतिनिधि आसिम इफ्तिखार अहमद ने तालिबान पर आतंकी समूहों की सहायता करने और उन्हें बढ़ावा देने का आरोप लगाते हुए कहा कि जब से इस्लामी समूह काबुल में सत्ता में वापस लौटा है, तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान और बलूच अलगाववादियों जैसे आतंकवादी संगठनों को नई ताकत मिली है।</p>
<p>उन्होंने काबुल पर इन समूहों को सुरक्षित पनाह देने और अफगान क्षेत्र में परिचालन की स्वतंत्रता प्रदान करने का आरोप लगाया, जिसका उपयोग उन्होंने पाकिस्तान के खिलाफ विभिन्न हमले करने के लिए किया। अहमद ने इस्लामाबाद के बयान को दोहराते हुए कहा कि पाकिस्तान आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में अग्रणी देशों में से एक रहा है और उसे कई नुकसान उठाने पड़े हैं, जिनमें 90,000 से अधिक लोगों की जान जाना और अवसंरचना एवं समग्र आर्थिक विनाश शामिल है।</p>
<p>चीन के प्रतिनिधि ने अफगानिस्तान में अल-कायदा, इस्लामिक स्टेट और उइघुर आतंकवादियों जैसे आतंकी समूहों की मौजूदगी एवं गतिविधियों पर चिंता व्यक्त की और तालिबान से कार्रवाई करने का आग्रह किया। काबुल के शहर-ए-नाव जिले में एक चीनी रेस्तरां पर आईएसआईएस के हमले का उल्लेख करते हुए, चीन के राजदूत ने कहा कि अफगान धरती पर आतंकवादी गतिविधियां बढ़ रही हैं और इसे गंभीरता से लिया जाना चाहिए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 06 Feb 2026 14:20:19 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान को अपने सदाबहार दोस्त चीन से झटका, नागरिकों के कल्याण पर दें ध्यान</title>
                                    <description><![CDATA[बीजिंग में आयोजित 7वीं रणनीतिक वार्ता के बाद चीन ने कश्मीर विवाद को 'इतिहास की देन' बताते हुए इसे भारत-पाकिस्तान के बीच द्विपक्षीय समझौतों और शांतिपूर्ण वार्ता के जरिए सुलझाने पर जोर दिया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/pakistan-faces-blow-from-its-all-time-friend-china-on-kashmir/article-138662"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/kashmir-case-paksitan.png" alt=""></a><br /><p>बीजिंग। कश्मीर के मुद्दे पर पाकिस्तान को अपने सदाबहार दोस्त चीन से झटका लगा है। चीन ने इस मुद्दे को द्विपक्षीय समझौतों के आधार पर सुलझाने की बात कही है। चीन के विदेश मंत्री वांग यी और पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री इशाक डार के बीच आयोजित 7वीं रणनीतिक वार्ता के समापन पर जारी संयुक्त बयान में कश्मीर का भी जिक्र है। लेकिन पाकिस्तान के पक्ष में चीन ने कोई एकतरफा बात नहीं कही।</p>
<p>जम्मू और कश्मीर का विवाद इतिहास की देन: इस बयान में कहा गया है कि पाकिस्तानी पक्ष ने जम्मू-कश्मीर पर अपनी स्थिति और नवीनतम घटनाक्रमों के बारे में चीनी पक्ष को जानकारी दी। इस पर चीन ने अपना रुख दोहराया कि जम्मू और कश्मीर का विवाद इतिहास की देन है। उसने कहा कि संघर्ष की सियासत छोड़ कर दोनों देशों को जनता की समृद्धि और आर्थिक विकास पर ध्यान देना चाहिए। इसे संयुक्त राष्ट्र चार्टर, संबंधित संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों और द्विपक्षीय समझौतों के अनुसार उचित और शांतिपूर्ण तरीके से हल किया जाना चाहिए। संयुक्त बयान में दोनों पक्षों ने समानता और पारस्परिक लाभ के सिद्धांत के तहत सीमा पार जल संसाधन सहयोग करने की जरूरत बताई। अंतरराष्ट्रीय कानूनी दायित्वों को पूरा करने की जरूरत पर जोर दिया गया है।</p>
<p><strong>सुरक्षा और स्थिरता बनाए रखना जरूरी</strong></p>
<p>अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता को बनाए रखने के महत्व को दोहराया गया है। लेकिन भारत की ओर से सिंधु जल संधि को स्थगित रखने के निर्णय का कोई जिक्र नहीं किया गया है। पहलगाम हमले के भारत ने इस जल संधि को स्थगित कर दिया था। कुल मिलाकर, चीन ने संतुलित रुख अपनाते हुए पाकिस्तान को कश्मीर पर द्विपक्षीय समाधान का संदेश दिया। चीन ने इस मसले पर पाकिस्तान को समर्थन देने से साफ इनकार कर उस का मनोबल तोड़ा है। चीन ने कहा कि भारत पाकिस्तान के सम्बंध ऐतिहासिक है। इसी तरह कश्मीर समस्या भी इतिहास की देन है। इसे ये दोनों देश ही मिल कर सुलझा सकते हैं। इसमें किसी तीसरे पक्ष की दखलंदाजी का कोई मतलब नहीं है। </p>
<p><strong>सैनिक होड़ से आर्थिक प्रगति बाधित</strong></p>
<p>उसने कहा कि भारत और पाकिस्तान दोनों उसके मित्र हैं और वह चाहता है कि ये देश अपनी क्षमता और संसाधन का उपयोग अपनी जनता की आर्थिक उन्नति एवं आधारभूत ढांचे के विकास पर करें। सैनिक होड़ में अंधाधुंध संसाधन झोंकने से कई बार आर्थिक प्रगति बाधित होती है। अत: उन्हें शांतिपूर्ण उपायों से वार्ता के द्वारा कश्मीर समस्या का हल ढूंढ़ना चाहिए और विवाद एवं संघर्ष से दूर हो जाना चाहिए। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 07 Jan 2026 11:23:59 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>संयुक्त राष्ट्र में सुधार जरूरी : भारत नियम आधारित व्यवस्था का पक्षधर, राजनाथ ने कहा- चुनौतियों से निपटने में विफल रही यह संस्था </title>
                                    <description><![CDATA[रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने संयुक्त राष्ट्र में व्यापक सुधारों की मांग करते हुए कहा कि मौजूदा ढांचा आज की चुनौतियों से निपटने में असफल है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय नियमों के उल्लंघन पर चिंता जताई और भारत की शांति स्थापना में भूमिका को रेखांकित किया। सिंह ने कहा- भारत नियम-आधारित व्यवस्था और वैश्विक न्याय के लिए प्रतिबद्ध है।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/reforms-are-necessary-in-the-united-nations-rajnath-a-supporter/article-129654"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-10/y-of-news-(3)3.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने संयुक्त राष्ट्र जैसी वैश्विक संस्थाओं में सुधारों पर जोर देते हुए कहा है कि विश्वास के संकट का सामना कर रही यह संस्था मौजूदा वास्तविकताओं के अनुरूप नहीं होने के कारण चुनौतियों से निपटने में विफल रही है। रक्षा मंत्री ने किसी देश का नाम लिए बिना कहा कि कुछ देश खुलेआम अंतर्राष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन कर अपना दबदबा बनाने की कोशिश कर रहे हैं।</p>
<p>सिंह ने भारतीय सेना द्वारा आयोजित एक सम्मेलन में यह बात कही। सम्मेलन में संयुक्त राष्ट्र में शांति सैनिकों का योगदान देने वाले देशों के सेना प्रमुखों को संबोधित करते हुए उन्होंने संयुक्त राष्ट्र के पुराने बहुपक्षीय ढांचे पर सवाल उठाते हुए इसमें सुधारों की वकालत की। उन्होंने कहा- हम आज की चुनौतियों का सामना पुराने बहुपक्षीय ढांचों से नहीं कर सकते। व्यापक सुधारों के बिना, संयुक्त राष्ट्र विश्वास के संकट का सामना कर रहा है। आज की परस्पर जुड़ी दुनिया के लिए, हमें एक सुधारित बहुपक्षवाद की आवश्यकता है, जो आज की वास्तविकताओं को प्रतिबंबित करे, सभी हितधारकों की आवाज बनें, समकालीन चुनौतियों का समाधान करे और मानव कल्याण पर केंद्रित हो।</p>
<p>कुछ देशों द्वारा अंतर्राष्ट्रीय नियमों की खुलेआम धज्जी उडाए जाने का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि भारत पुरानी अंतर्राष्ट्रीय संरचनाओं में सुधार की वकालत करते हुए, अंतर्राष्ट्रीय नियम-आधारित व्यवस्था को मजबूती से कायम रखने में मजबूती से खड़ा है। उन्होंने कहा- आजकल, कुछ देश खुलेआम अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं, कुछ उन्हें कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि कुछ अपने नियम बनाकर अगली सदी पर अपना दबदबा बनाना चाहते हैं। इन सबके बीच, भारत पुरानी अंतर्राष्ट्रीय संरचनाओं में सुधार की वकालत करते हुए, अंतर्राष्ट्रीय नियम-आधारित व्यवस्था को मजबूती से कायम रखने में मजबूती से खड़ा है।</p>
<p>रक्षा मंत्री ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र के चार्टर के अनुरूप  सैन्य योगदान देने वाले देशों की अधिक भूमिका की वकालत करने वाली एक आवाज है। उन्होंने कहा- जो लोग क्षेत्र में सेवा करते हैं और जोखिम उठाते हैं, उन्हें अपने मिशनों का मार्गदर्शन करने वाली नीतियों को आकार देने में एक सार्थक आवाज मिलनी चाहिए।</p>
<p>सिंह ने कहा कि भारत मानता है कि शांति स्थापना की सफलता केवल संख्या पर ही नहीं, बल्कि तैयारियों पर भी निर्भर करती है। यहां स्थित हमारे संयुक्त राष्ट्र शांति स्थापना केंद्र (सीयूएनपीके) ने 90 से अधिक देशों के प्रतिभागियों को प्रशिक्षित किया है। यह केंद्र व्यापक परिद्दश्य-आधारित शिक्षा प्रदान करता है, इसमें सशस्त्र समूहों के साथ बातचीत, खतरे में मानवीय अभियानों और संकट के दौरान नागरिक सुरक्षा का अनुकरण शामिल है।</p>
<p>अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था में भारत का विश्वास व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा- भारत के लिए, यह सिर्फ बातचीत का विषय नहीं है, हजारों भारतीय संयुक्त राष्ट्र के झंडे तले शांति और विकास के लिए काम करते हैं। यह एक प्रमुख उदाहरण है, जो भारत के वादों को प्रदर्शन के साथ जोडऩे के सिद्धांत और अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को बनाए रखने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। सिंह ने कहा कि भारत के लिए शांति स्थापना कभी भी एक विकल्प का कार्य नहीं रहा है, बल्कि एक आस्था का विषय रहा है। उन्होंने कहा- अपनी स्वतंत्रता के आरंभ से ही, भारत अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा बनाए रखने के अपने मिशन में संयुक्त राष्ट्र के साथ द्दढ़ता से खड़ा रहा है।</p>
<p>सिंह ने कहा कि भारत महात्मा गांधी की भूमि है, जहां शांति हमारे अहिंसा और सत्य के दर्शन में गहराई से निहित है। महात्मा गांधी के लिए, शांति केवल युद्ध का अभाव नहीं, बल्कि न्याय, सछ्वाव और नैतिक शक्ति की एक सकारात्मक स्थिति थी।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 14 Oct 2025 15:30:23 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur KD]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>इजरायल ने गाजा में स्थिति को और भी बनाया खतरनाक : शांति वार्ता के तीसरे दिन भी गाजा में सैन्य अभियानों में कोई कमी नहीं, यूएन ने कहा- जीवित रहने के लिए संघर्ष कर रहे लोग </title>
                                    <description><![CDATA[गाज़ा में इजरायली हमलों में कोई राहत नहीं है। संयुक्त राष्ट्र ने चेताया कि गाज़ा में सैन्य कार्रवाई से मानवीय हालात बेहद खराब हो गए हैं। 81,000 से अधिक घर क्षतिग्रस्त हुए, 42,000 लोग घायल हैं, जिनमें एक-चौथाई बच्चे हैं। वेस्ट बैंक में भी इजरायली हमले जारी हैं। 1,200 से अधिक हमलों में 17,000 पेड़ नष्ट हुए, फसल कटाई प्रभावित हुई।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/israel-made-the-situation-in-gaza-even-more-dangerous-even/article-129253"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-11/united-nations.jpg" alt=""></a><br /><p>संयुक्त राष्ट्र। संयुक्त राष्ट्र (संरा) के मानवीय कार्यकर्ताओं ने कहा कि मिस्र में गाजा शांति वार्ता के तीसरे दिन भी गाजा में इजरायली सैन्य अभियानों में कोई कमी नहीं आई है। संरा के मानवीय मामलों के समन्वय कार्यालय (ओसीएचए) ने कहा कि यह अभियान पहले से ही गंभीर मानवीय स्थिति को और भी खतरनाक बना रहा है। ओसीएचए ने कहा कि उसके सहयोगियों ने बताया है कि असुरक्षा के कारण कई लोग उत्तरी गाजा से बाहर नहीं जा पा रहे हैं। लोग बाहर सो रहे हैं और भोजन एवं आश्रय की भारी कमी के बीच जीवित रहने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र उपग्रह केंद्र ने गाजा शहर में हुए नुकसान का एक प्रारंभिक विश्लेषण प्रकाशित किया है, जिसमें 83 प्रतिशत इमारतें शामिल हैं। इससे पता चला है कि लगभग 81,000 आवासीय इकाइयां क्षतिग्रस्त हुई हैं।</p>
<p>विश्व स्वास्थ्य संगन ने कहा है कि 2023 में युद्ध शुरू होने के बाद से, गाजा में लगभग 42,000 फिलिस्तीनी गंभीर, संभावित रूप से जीवन बदल देने वाली चोटों का सामना कर चुके हैं। घायलों में से एक-चौथाई बच्चे हैं और 5,000 से ज्यादा अंग-विच्छेदन दर्ज किए गए हैं। पश्चिमी तट के संबंध में ओसीएचए ने कहा कि वह इज़रायली सैन्य अभियानों (जिनमें उत्तरी क्षेत्रों के शरणार्थी शिविरों में भी शामिल हैं) के प्रभाव से बेहद चिंतित है। तुलकरम, नूर शम्स और जेनिन शिविरों में हजारों लोग अपने घरों से विस्थापित हैं। ओसीएचए ने 2025 के पहले नौ महीनों में पश्चिमी तट पर इज़रायल के बसने वालों द्वारा किए गए 1,200 से ज्यादा हमलों का रिकॉर्ड दर्ज किया है, जिसके परिणामस्वरूप फिलिस्तीनी हताहत हुए, संपत्ति को नुकसान पहुंचा या दोनों हुए, और 17,000 से ज्यादा पेड़ों और पौधों को नुकसान पहुंचा। कार्यालय ने कहा कि जैतून की फसल फिलिस्तीनियों के लिए एक महत्वपूर्ण आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक घटना है। हालाँकि, नब्लस, सलफिÞत और कल्किलिया के कुछ किसान पिछले कुछ दिनों में बसने वालों द्वारा किए गए शारीरिक हमलों या पेड़ों को तोड़े जाने के कारण अपनी फÞसल नहीं काट पाए।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
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                <pubDate>Fri, 10 Oct 2025 10:58:30 +0530</pubDate>
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                <title>यूएन में फिलिस्तीन की चर्चा होते ही बंद हुआ 4 वर्ल्ड लीडर्स का माइक, तकनीकी खराबी या मोसाद का हाथ ?</title>
                                    <description><![CDATA[संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठक में इस बार सबका ध्यान एक अलग ही घटना पर चला गया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/as-soon-as-palestine-was-discussed-in-the-un-4/article-127842"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-09/copy-of-news-(10)3.png" alt=""></a><br /><p>न्यूयॉर्क। संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठक में इस बार सबका ध्यान एक अलग ही घटना पर चला गया। फिलिस्तीन के समर्थन में बोलने वाले नेताओं का माइक अचानक बंद हो गया। एक नहीं, दो नहीं बल्कि चार नेताओं को इसका सामना करना पड़ा। इसी वजह से बैठक में मोसाद का नाम चर्चा में आ गया। इंडोनेशिया के राष्ट्रपति जब गाजा में शांति सेना तैनात करने की बात कर रहे थे तो उनका माइक ऑफ हो गया। ठीक ऐसा ही तुर्किए के राष्ट्रपति रेचेप तैयप एर्दोगन के साथ हुआ। जब उन्होंने हमास को आतंकी न मानने और फिलिस्तीन के समर्थन की बात की, तो अचानक आवाज गायब हो गई।</p>
<p>ट्रांसलेटर को कहना पड़ा, इनकी आवाज चली गई है।  यही नहीं, कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने जब फिलिस्तीन और दो-राष्ट्र समाधान पर बात की तो शुरूआत में उनका भाषण सामान्य रहा लेकिन जैसे ही उन्होंने फिलिस्तीन को मान्यता देने की बात छेड़ी, उनका माइक ऑफ हो गया। कुछ मिनट तक हॉल में सन्नाटा छाया रहा। दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा के साथ भी यही घटना घटी। उन्होंने जैसे ही फिलिस्तीन का मुद्दा उठाया, माइक ऑफ हो गया।</p>
<p><strong>शक की सुई मोसाद पर :</strong></p>
<p>अब सवाल ये है कि आखिर हर बार फिलिस्तीन के समर्थन पर ही माइक क्यों बंद हुआ? क्या ये केवल तकनीकी खराबी थी, जैसा कि यूएन ने कहा, या फिर इसके पीछे कोई खुफिया दखल था? कई देशों के नेता मानते हैं कि यह संयोग नहीं हो सकता। चूंकि इजरायल फिलिस्तीन को अंतरराष्ट्रीय मंच पर बढ़ते समर्थन को बर्दाश्त नहीं कर सकता, इसलिए शक की सुई उसकी खुफिया एजेंसी मोसाद पर टिक गई है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
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                <pubDate>Thu, 25 Sep 2025 11:41:51 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>ट्रम्प ने की दूसरे देशों की प्रवासन और जलवायु नीतियों की आलोचना : खुली सीमाओं के असफल प्रयोग को खत्म करने का आ गया वक्त, दावा कर बोले- संयुक्त राष्ट्र की गलत थी भविष्यवाणियां  </title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने तीखे भाषण में संयुक्त राष्ट्र पर निशाना साधा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/trump-did-the-criticism-of-migration-and-climate-policies-of/article-127783"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-02/donald-trumpp.png" alt=""></a><br /><p>न्यूयॉर्क। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने तीखे भाषण में संयुक्त राष्ट्र पर निशाना साधा और दूसरे देशों की प्रवासन एवं जलवायु नीतियों की आलोचना की। अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि खुली सीमाओं के असफल प्रयोग को खत्म करने का वक्त आ गया है और दावा किया कि जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र की भविष्यवाणियां गलत थीं।</p>
<p>रिपोर्ट के अनुसार, इस भाषण के बाद महासभा में हडकंप मच गया। ट्रम्प ने रूस - यूक्रेन युद्ध पर अपने रुख में भी बड़ा बदलाव किया और कहा कि यूक्रेन पूरे देश को उसके मूल स्वरूप में वापस जीत सकता है। अपने ट्रुथ सोशल प्लेटफॉर्म पर एक पोस्ट में, उन्होंने कहा कि यूक्रेन, यूरोप और नाटो के समर्थन से उन मूल सीमाओं को वापस पा सकता है जहां से यह जंग शुरू हुई थी।</p>
<p>ट्रम्प ने लगभग एक घंटे तक चले भाषण में, दोहराया कि राष्ट्रपति के पद पर दोबारा आने के बाद से उन्होंने सात युद्ध रोक दिए हैं, और संयुक्त राष्ट्र इसमें उनकी मदद करने में नाकामयाब रहा है। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र के होने के मकसद पर सवाल उठाया और कहा कि यह अपनी क्षमता के हिसाब से काम नहीं कर रहा है।</p>
<p>अमेरिकी राष्ट्रपति ने जलवायु परिवर्तन को नकारते हुए इसे दुनिया पर अब तक का सबसे बड़ा धोखा बताया। उन्होंने कहा- सफल औद्योगिक देशों से खुद पर भारी बोझ डालने और अपने समाज को तहस-नहस करने की वैश्विक अवधारणा को खारिज करना चाहिए।</p>
<p>ट्रम्प ने शरणार्थियों के मसले पर भी संयुक्त राष्ट्र को कटघरे में खड़ा करते हुए कहा कि यह संगठन नकद सहायता देकर पश्चिमी देशों पर हमले को वित्तपोषित कर रहा है। उन्होंने यूरोप का विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि वह प्रवासन को लेकर गंभीर संकट में है। उन्होंने कहा- हम उन जगहों के लिए बड़े दिल से सोचते हैं जो संघर्ष कर रहे हैं - हमें उनके देशों में समस्या का समाधान करना होगा।</p>
<p>अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि गाजा में युद्धविराम जरूरी है, लेकिन कुछ देशों के फिलिस्तीन को राष्ट्र का दर्जा देने के कदम की आलोचना करते हुए कहा कि यह हमास के लिए एक इनाम होगा। उन्होंने ट्रुथ सोशल प्लेटफार्म पर यूक्रेन के बारे में कहा कि यूक्रेन-रूस की सैन्य और आर्थिक स्थिति को पूरी तरह से जानने और समझने के बाद उनका रुख बदल गया है।</p>
<p>ट्रम्प ने यह संदेश यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की से बातचीत के बाद पोस्ट किया। यह (एजेंसी) ट्रम्प के संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करने के बाद हुई थी।</p>
<p>इस बीच, ट्रम्प ने कहा कि यह शर्मनाक है कि कुछ यूरोपीय देश रूस से तेल और गैस खरीद रहे हैं, जबकि वे यूक्रेन पर उसके पूर्ण आक्रमण का विरोध कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह युद्ध रूस की छवि को खराब भी कर रहा है।</p>
<p>अपने संबोधन के बाद, ट्रंप ने अपने ट्रुथ सोशल प्लेटफॉर्म पर एक पोस्ट में कहा कि उनका मानना है कि भाषण को बहुत अच्छी प्रतिक्रिया मिली है। अपने दूसरे कार्यकाल के पहले भाषण के बाद, उन्होंने संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस के साथ एक बैठक की, जिसमें उन्होंने कहा कि अमेरिका संयुक्त राष्ट्र के साथ 100 प्रतिशत खड़ा है, भले ही वह कभी-कभी इससे असहमत हो सकते हैं।</p>
<p>गुटेरेस ने अमेरिकी राष्ट्रपति से कहा कि उनका मानना है कि ऐसे कई क्षेत्र हैं, जहां हम सकारात्मक तरीके से सहयोग कर सकते हैं और मुझे लगता है कि सबसे महत्वपूर्ण शांति है।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
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                <pubDate>Wed, 24 Sep 2025 15:43:26 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>संयुक्त राष्ट्र प्रमुख गुटेरेस ने भी किया भारत की मांग का समर्थन, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार का आह्वान  </title>
                                    <description><![CDATA[संयुक्त राष्ट्र महासभा का 80वां सत्र न्यूयॉर्क में शुरू हुआ है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/united-nations-chief-guterres-also-supported-indias-demand-calling-for/article-127737"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-09/copy-of-news-(11)1.png" alt=""></a><br /><p>न्यूयॉर्क। संयुक्त राष्ट्र महासभा का 80वां सत्र न्यूयॉर्क में शुरू हुआ है। इस सत्र में कई देशों के राष्ट्राध्यक्ष भी हिस्सा ले रहे हैं। इस दौरान संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने सुरक्षा परिषद में सुधार का आह्वान किया है। इसे भारत की मांग के समर्थन के रूप में देखा जा रहा है। भारत लंबे समय से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार की मांग करता रहा है। वर्तमान में केवल पांच सदस्य संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्य हैं, जिनमें अमेरिका, फ्रांस, ब्रिटेन, रूस और चीन शामिल हैं। वर्तमान में भारत समेत ब्राजील और जापान सुरक्षा परिषद की स्थायी सदस्यता की दावेदारी कर रहे हैं।</p>
<p>एंटोनियो गुटेरेस भी भारत के समर्थन में: इस बीच एंटोनियो गुटेरेस के प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक ने कहा, संयुक्त राष्ट्र महासचिव सुरक्षा परिषद में सुधार को लेकर आशावादी हैं, क्योंकि भारत बहुपक्षीय व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण आवाज के रूप में उभर रहा है। दुजारिक ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के चल रहे सत्र के दौरान बताया कि महासचिव सुरक्षा परिषद में सुधार के बहुत समर्थक हैं ताकि इसे 1945 की दुनिया के बजाय 2025 की दुनिया का अधिक प्रतिनिधित्व करने वाला बनाया जा सके। हालांकि यूएन महासचिव के इस समर्थन से चीन को मिर्ची लगनी तय मानी जा रही है, क्योंकि वही इकलौता स्थायी सदस्य है, जो विरोध करता है।</p>
<p>यूएनएससी की सदस्यता भारत की सर्वोच्च प्राथमिकता: भारत लगातार विस्तारित यूएनएससी में स्थायी सदस्यता के लिए प्रयासरत रहा है। पिछले साल, विदेश मंत्री एस जयशंकर ने संसद को बताया था कि भारत इस उद्देश्य को सर्वोच्च प्राथमिकता देता है। राज्यसभा में एक लिखित उत्तर में, उन्होंने कहा, भारत का दृढ़ विश्वास है कि समकालीन वैश्विक वास्तविकताओं को प्रतिबिंबित करने वाली एक सुधारित और विस्तारित यूएनएससी का स्थायी सदस्य बनने के लिए उसके पास सभी योग्यताएं हैं।</p>
<p><strong>संयुक्त राष्ट्र में भारत का महत्वपूर्ण योगदान :</strong></p>
<p>दुजारिक ने संयुक्त राष्ट्र में भारत के योगदान पर भी प्रकाश डाला और कहा, भारत संयुक्त राष्ट्र प्रणाली का एक अत्यंत महत्वपूर्ण अंग है। वे बहुपक्षवाद के प्रबल समर्थक हैं। महासचिव के भारत सरकार के साथ बहुत अच्छे संबंध हैं। हमारे कई भारतीय सहयोगी यहां हमारे साथ काम करते हैं। संयुक्त राष्ट्र प्रणाली में भारत की एक महत्वपूर्ण भूमिका है।</p>
<p><strong>यूएन सुरक्षा परिषद क्या है ?</strong></p>
<p>संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) संयुक्त राष्ट्र का एक बुनियादी अंग है, जिसकी स्थापना 1945 में हुई थी और जिसका मुख्य कार्य अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा बनाए रखना है। इसमें 15 सदस्य हैं, जिनमें 5 स्थायी सदस्य (पी5: चीन, फ्रांस, रूस, यूनाइटेड किंगडम, और संयुक्त राज्य अमेरिका) शामिल हैं, जिनके पास वीटो पावर है। शेष 10 सदस्य देशों को संयुक्त राष्ट्र महासभा दो साल के कार्यकाल के लिए चुनती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
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                <pubDate>Wed, 24 Sep 2025 11:15:15 +0530</pubDate>
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