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                <title>sco - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                            <item>
                <title>रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव का दावा, बोलें-ब्रिक्स, एससीओ आम सहमति से काम करते हैं, नाटो के फैसले अमेरिका की मर्जी पर निर्भर</title>
                                    <description><![CDATA[रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने कहा कि ब्रिक्स और एससीओ में फैसले सर्वसम्मति से होते हैं, जबकि नाटो अमेरिका पर निर्भर है। उन्होंने ईयू की भी आलोचना की।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/russian-foreign-minister-sergei-lavrovs-claim-brics-sco-work-with/article-142777"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/11-(700-x-400-px)-(630-x-400-px)-(16)4.png" alt=""></a><br /><p>मॉस्को। रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने कहा है कि ब्रिक्स और शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) ज्यादातर मामलों में सर्वसम्मति के आधार पर फैसले करते हैं, जबकि नाटो के फैसले अमेरिका पर निर्भर करते हैं। </p>
<p>विदेश मंत्री लावरोव ने रूस के एक यूट्यूब चैनल एमपाशिया मनुची प्रोजेक्ट के साथ बातचीत में कहा, ज्यादातर मामलों में अंतरराष्ट्रीय समझौतों का पालन किया जाता है। जब बात हमारे पश्चिमी साथियों की हो तब नहीं, बल्कि जब उन प्रतिनिधियों की होती है जिन्हें हम वैश्विक बहुमत कहते हैं, जैसे ब्रिक्स, एससीओ, और सोवियत के बाद वाले सीएसटीओ, ईएईयू, और सीआईएस। इन ढांचों में आम सहमति ज्यादातर बनी रहती है। आप नाटो की तरह आसानी से फ़ैसले नहीं ले सकते, जहां अमेरिकी कहते हैं'चुप रहो और हमें दिखता है कि यह सब कैसे काम करता है।</p>
<p>इसके आगे विदेश मंत्री लावरोव ने कहा, यूरोपीय संघ भी फैसलों पर असर डालता है। यूरोपीय संघ की तरह, जहां ब्रसेल्स में बिना चुने हुए नौकरशाह देश की चुनी हुई सरकारों को बताते हैं कि क्या करना है, कैसे बर्ताव करना है, किसके साथ व्यापार करना है और किसके साथ नहीं करना है। हमारे हंगरी के साथियों ने ब्रसेल्स के हाल के गलत कामों पर साफ और समझने लायक टिप्पणी की है।</p>
<p>हंगरी के प्रधानमंत्री विक्टर ओरबान ने दिसंबर 2025 में  कहा था कि यूरोपीय संघ यूक्रेनी संघर्ष को लंबा खींचने के लिए व्यवस्थित तरीके से कानून को रौंद रहा है। उन्होंने कहा कि यूरोपीय संघ में कानून का राज ब्रसेल्स की तानाशाही से बदल गया है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 11 Feb 2026 16:44:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>रूसी विद्वान ने कहा, ब्रिक्स, एससीओ वैश्विक शासन में वैश्विक दक्षिण की भागीदारी को सक्षम बनाते हैं </title>
                                    <description><![CDATA[रूसी विद्वान आंद्रेई मनोइलो ने कहा कि ब्रिक्स और एससीओ वैश्विक दक्षिण के देशों को वैश्विक शासन में समान भागीदार बना रहे हैं। उन्होंने शिन्हुआ को दिए साक्षात्कार में बताया कि ये संगठन आर्थिक विकास और सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण मंच हैं, जो उभरती अर्थव्यवस्थाओं के बीच सहयोग को बढ़ावा देकर वैश्विक बदलाव के प्रेरक बन रहे हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/russian-scholar-says-brics-enables-global-souths-participation-in-sco/article-137531"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/bricks.png" alt=""></a><br /><p>मास्को। एक रूसी विद्वान ने रविवार कहा कि ब्रिक्स एवं शंघाई सहयोग संगठन वैश्विक दक्षिण के देशों को वैश्विक शासन में सीमांत खिलाड़ी के बजाय समान भागीदार के रूप में सक्षम बनाते हैं। लोमोनोसोव मास्को स्टेट यूनिवर्सिटी के राजनीति विज्ञान के प्रोफेसर आंद्रेई मनोइलो ने शिन्हुआ से एक साक्षात्कार में कहा कि पिछले कुछ वर्षों में ब्रिक्स और एससीओ के साथ जुडऩे वाले देशों की बढ़ती संख्या वैश्विक दक्षिण में उनकी बढ़ती लोकप्रियता को दर्शाती है।</p>
<p>प्रो. मनोइलो ने कहा कि आर्थिक विकास एवं राजनीतिक सुरक्षा को बढ़ावा देने में ब्रिक्स अब दक्षिण-दक्षिण सहयोग के लिए एक महत्वपूर्ण प्रेरक शक्ति बन चुका है। रूसी प्रोफेसर ने कहा कि ब्रिक्स वैश्विक दक्षिण के देशों को वैश्विक मामलों में अपनी उचित भागीदारी का दावा करने के लिए एक मंच प्रदान करता है। उन्होंने आगे कहा कि ब्रिक्स में भागीदारी इन देशों चीन, रूस एवं भारत सहित विश्व की सबसे बड़ी उभरती अर्थव्यवस्थाओं के साथ सहयोग करने का एक मूल्यवान अवसर भी प्रदान करती है।</p>
<p>प्रो. मनोइलो ने यह भी कहा कि कई देश एससीओ को विकास के लिए एक न्यायसंगत एवं व्यावहारिक मार्ग के रूप में देखते हैं। सुरक्षा उद्देश्यों के लिए 2001 में स्थापित एससीओ अपने कार्यों का विस्तार राजनीतिक, आर्थिक एवं अन्य क्षेत्रों में कर चुका है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में एससीओ वैश्विक दक्षिण के देशों को एक-दूसरे के विकास में सहयोग एवं वैश्विक शासन में अपनी जिम्मेदारी निभाने में सक्षम बनाता है। उन्होंने आगे कहा कि अपने विस्तारित कार्यों के साथ, एससीओ न केवल एक मजबूत अंतरराष्ट्रीय संगठन के रूप में विकसित हो रहा है बल्कि वैश्विक परिवर्तन का प्रेरक भी बन रहा है।</p>
<p>प्रो. मनोइलो ने अंत में कहा कि वर्ष 2025 बदलाव का प्रतीक है जिसमें वैश्विक दक्षिण के देश अपनी शक्ति के प्रति तेजी से जागरूक हो रहे हैं और आगे के विकास के लिए सहयोग कर रहे हैं।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 28 Dec 2025 17:28:48 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>S. Jaishankar ने की चीनी विदेश मंत्री से बातचीत</title>
                                    <description><![CDATA[गौरतलब है कि अस्थाना में एससीओ परिषद के राष्ट्राध्यक्षों की बैठक चल रही है। जहां एस. जयशंकर भारतीय पीएम नरेन्द्र मोदी का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/s-jaishankar-talked-to-chinese-foreign-minister/article-83684"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-09/jaishankar_ticks_off_europe_at_raisina_dialogue_said_happenings_in_asia_should_worry_europe__1651035368.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अपने चीनी समकक्ष वांग यी से अस्थाना (कजाकिस्तान) ने द्विपक्षीय एवं वैश्विक मुद्दों पर विस्तार से बातचीत की है। गौरतलब है कि अस्थाना में एससीओ परिषद के राष्ट्राध्यक्षों की बैठक चल रही है। जहां एस. जयशंकर भारतीय पीएम नरेन्द्र मोदी का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। विदेश मंत्रालय की ओर से यहां बताया गया कि बातचीत के दौरान दोनों नेताओं ने पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर शेष मुद्दों का शीघ्र समाधान खोजने पर चर्चा की। दोनों मंत्री इस बात पर भी सहमत हुए कि सीमावर्ती क्षेत्रों में मौजूदा स्थिति का लंबा खिंचना किसी के भी हित में नहीं है।</p>
<p>दोनों विदेश मंत्रियों ने भारत एवं चीन के बीच पूर्व में हुए द्विपक्षीय समझौतों और आपसी समझ का पालन करने के महत्व को माना। मुलाकात के दौरान दोनों मंत्रियों ने वैश्विक स्थिति पर भी बातचीत की।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 05 Jul 2024 09:49:13 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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                <title>मोदी ने एससीओ के सदस्य देशों के सम्मेलन को किया संबोधित, 2 कार्य समूह बनाने का दिया प्रस्ताव </title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री मोदी ने सम्मेलन के प्रमुख सत्र को संबोधित करते हुए खाद्य सुरक्षा के बारे में चर्चा की।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/modi-addressed-the-conference-of-sco-member-countries-proposed-to/article-23067"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-09/modi1.jpg" alt=""></a><br /><p>समरकंद (उजबेकिस्तान)। भारत ने लोक केन्द्रित विकास के लिए प्रौद्योगिकी आधारित नवान्वेषण एवं स्टार्ट अप्स के अनुभव तथा पारंपरिक औषधियों एवं चिकित्सा पद्धतियों को शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के सदस्य देशों के साथ साझा करने के लिए 2 विशेष कार्य समूह बनाने का प्रस्ताव किया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने एससीओ के सदस्य देशों के शासनाध्यक्षों के 22वें सम्मेलन में यह प्रस्ताव किया। प्रधानमंत्री मोदी ने सम्मेलन के प्रमुख सत्र को संबोधित करते हुए खाद्य सुरक्षा के बारे में चर्चा की तथा टिकाऊ एवं भरोसेमंद आपूर्ति श्रृंखला बनाने की भी आवश्यकता दोहरायी और इसके लिए कनेक्टिविटी मजबूत करने एवं पारगमन का अधिकार देने पर भी बल दिया। प्रधानमंत्री ने कहा कि पूरा विश्व महामारी के बाद आर्थिक रिकवरी की चुनौतियों का सामना कर रहा है, एससीओ की भूमिका महत्वपूर्ण है। एससीओ के सदस्य देश वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में लगभग 30 प्रतिशत का योगदान देते है और विश्व की 40 प्रतिशत जनसंख्या भी एससीओ देशों में निवास करती है। भारत एससीओ सदस्यों के बीच अधिक सहयोग और आपसी विश्वास का समर्थन करता है। महामारी और यूक्रेन के संकट से ग्लोबल सप्लाई चेन्स में कई बाधाएं उत्पन्न हुईं, जिसके कारण पूरा विश्व अभूतपूर्व ऊर्जा एवं खाद्य संकट का सामना कर रहा है। एससीओ को हमारे क्षेत्र में विश्वस्त, टिकाऊ और विविध आपूर्ति श्रृंखला विकसित करने के लिए प्रयत्न करने चाहिए। इसके लिए बेहतर कनेक्टिविटी की आवश्यकता तो होगी ही, साथ ही यह भी महत्वपूर्ण होगा कि हम सभी एक दूसरे को पारगमन का पूरा अधिकार दें।</p>
<p>प्रधानमंत्री ने कहा कि हम भारत को एक विनिर्माण केन्द्र बनाने पर प्रगति कर रहे हैं। भारत का युवा और प्रतिभाशाली कार्यबल हमें स्वाभाविक रूप से प्रतिस्पर्धी बनाता है। इस वर्ष भारत की अर्थव्यवस्था में 7.5 प्रतिशत वृद्धि की आशा है, जो विश्व की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में सबसे अधिक होगी। हमारे लोक केन्द्रित विकास मॉडल में टेक्नोलॉजी के उचित उपयोग पर भी बहुत फोकस दिया जा रहा है। हम प्रत्येक सेक्टर में नवान्वेषण का समर्थन कर रहे हैं। आज भारत में 70 हजार से अधिक स्टार्ट-अप्स हैं, जिनमें से सौ से अधिक यूनिकॉर्न हैं। हमारा यह अनुभव कई अन्य एससीओ सदस्यों के भी काम आ सकता है। इसी उदेश्य से हम स्टार्ट अप्स एवं नवान्वेषण पर एक नए विशेष कार्य समूह की स्थापना करके एससीओ के सदस्य देशों के साथ अपना अनुभव साझा करने के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा कि विश्व एक और बड़ी चुनौती का सामना कर रहा है और यह है हमारे नागरिकों की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना। इस समस्या का एक संभावित समाधान है मिलेट्स, यानी मोटे अनाज की खेती और उपभोग को बढ़ावा देना। मिलेट्स एक ऐसा सुपरफूड है, जो न सिर्फ एससीओ देशों में, बल्कि विश्व के कई भागों में हजारों सालों से उगाया जा रहा है और खाद्य संकट से निपटने के लिए एक पारंपरिक, पोषक और कम लागत वाला विकल्प है। वर्ष 2023 को संयुक्त राष्ट्र अंतरराष्ट्रीय मिलेट्स वर्ष के रूप में मनाया जाएगा। हमें एससीओ के अंतर्गत एक 'मिलेट्स फूड फेस्टिवल' के आयोजन पर विचार करना चाहिए।</p>
<p>प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत आज विश्व में मेडिकल एवं वेलनेस पर्यटन के लिए सबसे किफायती स्थानों में से एक है। 2022 में गुजरात में डब्ल्यूएचओ वैश्विक पारंपरिक औषधि केन्द्र का उद्घाटन किया गया। पारंपरिक चिकित्सा के लिए यह विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) का पहला और एकमात्र ग्लोबल सेंटर होगा। हमें एससीओ देशों के बीच ट्रेडिशनल मेडिसिन पर सहयोग बढ़ाना चाहिए। इसके लिए भारत एक नए एससीओ पारंपरिक औषधि कार्य समूह पर पहल लेगा। प्रधानमंत्री ने एससीओ शिखर सम्मेलन के आयोजन एवं आतिथ्य के लिए उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शौकत मिरजियोएव के प्रति आभार भी जताया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 16 Sep 2022 16:41:58 +0530</pubDate>
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