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                <title>swachh bharat mission - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                            <item>
                <title>पंचायत मुख्यालय पर शोपीस बने जनसुविधाघर</title>
                                    <description><![CDATA[पानी की सुविधा नहीं होने से  नियमित सफाई नहीं हो रही]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/public-toilets-at-panchayat-headquarters-become-showpieces/article-137179"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/1200-x-600-px-(5)7.png" alt=""></a><br /><p>दबलाना। क्षेत्र के धाबाइयों का नया गांव पंचायत मुख्यालय स्थित अटल सेवा केंद्र में स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण योजना के तहत निर्मित जन सुविधा घर पंचायत की अनदेखी के चलते बदहाली का शिकार हो गए हैं। सुविधाओं के अभाव और जमा गंदगी के कारण ये जनसुविधाघर उपयोग में नहीं आ पा रहे हैं और महज शोपीस बनकर रह गए हैं।बाथरूम के ऊपर पानी की टंकी का अभाव है, वहीं टंकी से आने वाला पाइप क्षतिग्रस्त है और नल भी गायब है। पानी की सुविधा नहीं होने से महिलाओं एवं पुरुषों के लिए बने सुविधाघरों में नियमित सफाई नहीं हो पा रही है। जमा गंदगी और दुर्गंध के कारण ग्राम सभा जैसे बड़े आयोजनों के दौरान पंचायत मुख्यालय आने वाले ग्रामीणों को शौच के लिए इधर-उधर भटकना पड़ता है। पंचायत परिसर में लगी बोरिंग की मोटर लंबे समय से खराब पड़ी है। बरसात के बाद क्यारियां तो बनाई गईं, लेकिन मोटर खराब होने से अब तक पौधारोपण नहीं हो सका। दीवारों की कालिमा और गंदगी स्वच्छ भारत मिशन की जमीनी हकीकत बयां कर रही है।</p>
<p><br />ग्राम विकास अधिकारी परमेश्वर प्रजापत ने बताया कि बोरिंग की मोटर शीघ्र ठीक करवाई जाएगी तथा टूटी टंकी के स्थान पर नई टंकी रखवाई जाएगी।<br /><strong>-परमेश्वर प्रजापत,ग्राम विकास अधिकारी</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बूंदी</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 25 Dec 2025 15:20:19 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>निगम कर रहा सफाई के दावे, हकीकत जनता के सामने, सड़कों पर कचरे के ढेर</title>
                                    <description><![CDATA[स्वच्छ भारत मिशन के तहत हर साल होने वाले स्वच्छता सर्वेक्षण के लिए केन्द्रीय टीम के 15 फरवरी के बाद कोटा आने की संभावना है]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/corporation-is-making-claims-of-cleanliness--reality-is-in-front-of-public/article-103107"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-02/257rtrer-(3)3.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। स्वच्छ भारत मिशन के तहत हर साल होने वाले स्वच्छता सर्वेक्षण के लिए केन्द्रीय टीम के 15 फरवरी के बाद कोटा आने की संभावना है। सर्वेक्षण को देखते हुए जहां नगर निगम अधिकारी सफाई के दावे कर रहे हैं। वहीं हकीकत में शहर की सड़कों पर जगह-जगह कचरे के ढेर लगे हुए हैं और मेन रोड पर मवेशियों के जमघट लगे हुए हैं। केन्द्रीय टीम के पहले जनवरी में आने की संभावना थी। वहीं अब नए शिड्यूल के तहत 15 फरवरी के बाद टीम के कोटा आने की संभावना है। स्वच्छता सर्वेक्षण को देखते हुए नगर निगम कोटा उत्तर व दक्षिण की ओर से शहर में सलाई के लिए विशेष अभियान चलाए जा रहे है। कोटा दक्षिण निगम आयुक्त ने तो अभियान के तहत एक-एक वार्ड में 125 से 200 सफाई श्रमिक लगा दिए। हालांकि पार्षदों द्वारा विरोध करने पर उस अभियान को ड्रॉप कर दिया गया। वहीं मुख्य मार्गों पर अतिरिक्त सफाई श्रमिक लगाकर सफाई करवाने का दावा किया जा रहा है। जबकि पार्षद वार्डों में सफाई नहीं होने की शिकायतें कर रहे हैं। केन्द्रीय टीम के आने में अब बहुत कम समय शेष है। ऐसे में निगम द्वारा जो प्रयास किए जा रहे हैं वह समय पर पूरे होंगे या नहीं इसका तो समय पर ही पता चल सकेगा। लेकिन हालत यह है कि शहर में अधिकतर सार्वजनिक शौचालयों की हालत इतनी अधिक खराब है कि वहां न तो पानी आ रहा है और नल की टोटियां तक टूटी हुई है। जिन शौचालयों में पानी आ रहा है और नल सही हैं तो वहां सफाई तक नहीं हो रही। जिससे वहां दुर्गंध फेल रही है। ऐसे में लोगों को उस दुर्गंध का सामना करना पड़ रहा है। इसी तरह दादाबाड़ी मेन रोड से लेकर बंगाली कॉलोनी छावनी, नई धानमंडी, डाकघर रोड, छावनी एलआईसी बिल्ड़िंग के पास, मल्टीपरपज स्कूल गुमानपुरा के आस-पास के क्षेत्र में कचरे के ढेर देखे जा सकते है। यहां तक कि छावनी मेन रोड पर लगा आधुनिक कचरा पात्र बरसों से क्षतिग्रस्त हालत में ही पड़ा हुआ है। जिससे उसका कचरा बाहर तक फेला रहता है। ऐसी स्थिति सिर्फ कोटा दक्षिण निगम में ही नहीं कोटा उत्तर में भी है। यहां बस स्टैंड क्षेत्र में चम्बल पुलिया के नीचे, चम्बल रिवर फ्रंट से रियासत कालीन पुलिया के रास्ते में और कई अन्य स्थानों पर कचरे के ढेर लगे हुए देखे जा सकते है। </p>
<p><strong>मवेशियों  व श्वानों का नहीं समाधान</strong><br />शहर में मुख्य मार्गों से लेकर गली मौहल्लों तक में श्वान और मवेशियों के जमघट लगे हुए हैं। इनका अभी तक कोई स्थायी समाधान निगम की  ओर से नहीं किया जा रहा है। श्वान शाला में श्वानों का बधियाकरण वापस सड़क पर ही छोड़ा जा रहा है। वहीं मवेशियों को पकड़ा तो जा रहा है लेकिन उसके  बाद भी कोटड़ी से लेकर किशोरपुरा तक, छावनी से लेकर नयापुरा तक, धानमंडी से लेकर दादाबाड़ी तक हर जगह मवेशियों के झुंड देखे जा सकते हैं। यह हालत केवल कोटा दक्षिण निगम की नहीं है वरन् कोटा उत्तर निगम क्षेत्र में भी यही हालत है। </p>
<p><strong>इंदौर से तुलना की बातें</strong><br />नगर निगम अधिकारी और जनप्रतिनिधि कोटा में हर साल सर्वेक्षण के समय तो बड़े-बड़े दावे करते है। कोटा दक्षिण के महापौर राजीव अग्रवाल कई बार कह चुके कि कोटा को इंदौर की तरह साफ करने के प्रयास किए जा रहे है।  हर बार सर्वेक्षण के समय  तो दावे करते हैं लेकिन रैकिंग में पिछड़ने पर उनका कहना रहता है कि अगली बार जरूर सुधार होगा लेकिन अभी तक वह सुधार हकीकत में नजर नहीं आ रहा। </p>
<p><strong>कांग्रेस पार्षदों के साथ भेदभाव</strong><br />नगर निगम कोटा उत्तर के उप महापौर सोनू कुरैशी समेत कई पार्षदों का कहना है कि सफाई के मामले में निगम अधिकारियों द्वारा कांग्रेस पार्षदों के साथ भेदभाव किया जा रहा है। वार्डों में पहले 3 टिपर चलते थे उसे कम कर दो कर दिए। जिससे वे पूरे वार्ड में नहीं जा पाते। सफाई श्रमिकों की संख्या कम कर दी। मेन रोड पर सफाई श्रमिक बढ़ाने के दावे किए जा रहे हैं लेकिन वह नजर नहीं आते। </p>
<p><strong>सफाई नजर नहीं आ रही</strong><br />शहर वासियों का कहना है कि कोटा में दो नगर निगम होने के बाद भी सफाई नजर नहीं आती। पुराने शहर का क्षेत्र हो या नए कोटा में। सभी जगह पर कचरे के ढेर दिनभर पड़े रहते हैं।  हिरण बाजार निवासी अनवार अहमद ने बताया कि पुराने शहर के कुछ ही इलाके ऐसे हैं जहां सफाई नजर आती है। जबकि अधिकतर क्षेत्रों में गलियां संकरी होने से वहां कचरा तक समय पर नहीं उठता। घंटाघर पुलिस चौकी के पीछे शनि मंदिर की गली में दिनभर कचरे का ढेर लगा रहता है।  रामपुरा निवासी अजय गुप्ता का कहना है कि निगम हर साल सफाई पर करोड़ों रुपए खर्च कर रहा है। उसके बाद भी बड़े आयोजन होने पर अलग से सफाई करवानी पड़ती है। निगम का ध्यान केन्द्रीय टीम के आने पर उसे दिखाने के लिए सफाई करवाने पर है। हकीकत में जो स्थायी काम होने चाहिए  उन पर किसी का ध्यान नहीं है। </p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />नगर निगम की ओर से शहर में लगातार सफाई के प्रयास किए जा रहे हैं। बड़े बरसाती नालों से लेकर एक-एक सेक्टर को लिया जा रहा है। वाहीं पूरे दक्षिण क्षेत्र के मेन रोड पर कहीं भी गंदगी नजर नहीं आएगी। पहले से करीब चार गुना अधिक सफाई श्रमिक लगाकर सफाई करवाई जा रही है और तुरंत ही कचरा उठाया जा रहा है। रीको इंडस्ट्रीयल एरिया व मंडी क्षेत्र में नगर निगम सफाई नहीं करवाया। रीको क्षेत्र में सफाई की जिम्मेदारी रीको की है। पूर्व में इस संबंध में रीको अधिकारियों से चर्चा हो चुकी है। <br /><strong>- राजीव अग्रवाल, महापौर नगर निगम कोटा दक्षिण</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 04 Feb 2025 15:52:52 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>स्वच्छ भारत मिशन योजना का हाल : सुविधाघर दुर्दशा के शिकार </title>
                                    <description><![CDATA[लोग खुले में शौच जाने को मजबूर। 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/the-condition-of-swachh-bharat-mission--suvidha-ghar-is-in-a-bad-state/article-98206"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-12/257rtrer-(2)1.jpg" alt=""></a><br /><p>कापरेन। भारत सरकार द्वारा चलाई गई स्वच्छ भारत मिशन योजना के तहत करोड़ों रुपए खर्च कर बनाए गए सुविधाघर यहां दुर्दशा के शिकार हो रहे हैं। पालिका प्रशासन की सफाई और देखरेख में नाकामयाब साबित हो रहा हैं। नगर पालिका क्षेत्र में सरकार ने लाखों रुपए खर्च कर करीब एक दर्जन सुविधाघर  बनाए थे जो करीब वर्षभर से दुर्दशा के शिकार हो रहे हैं। आलम यह है कि किसी शौचालय में दरवाजे जर्जर हो रहे हैं तो किसी में कुंडियां टूटी हुई हैं, कुछ में नलों की टूटियां टूटी हुई हैं तो किसी में सीटें ही जमींदोज हो गई है। किसी में दरारें पड़ रही हैं तो किसी में सफाई व्यवस्था लचर पड़ी हुई है। शौच करने के बाद हाथ धोने की व्यवस्था नहीं है। जबकि सरकार ने लोगों को विशेष रूप से महिलाओं को शौच करने जंगल जाने से बचने के लिए सरकारी शौचालय बनाए गए थे लेकिन अब यहां स्वच्छ भारत मिशन को ग्रहण लग गया हैं। पिछले पालिका बोर्ड में जहां स्थानीय नगर पालिका ने प्रथम रैंक हासिल कर संभाग में अपनी पहचान बनाई थी। जो अब जीरो नंबर पर आ गई हैं। स्वच्छ भारत मिशन के तहत बने शौचालयों की स्थिति जानी। पालिका क्षेत्र में बने ये शौचालय बंद पड़े हुए हैं। सफाई व्यवस्था नही होने के कारण आमजन इसका उपयोग करने से भी कतराने लगे हैं। शिवनगर में स्थित शौचालय में करीब 1 साल से बंद पड़ा हैं। दुर्गंध के कारण इसका उपयोग नही कर पा रहे हैं। पानी की व्यवस्था नही हैं। दरवाजे टूटे हुए है । अन्दर टॉयलेट्स की सीट टूटी हुई हैं। सफाई हुए कई महीने हो चुके है। इसको लेकर वार्डवासियों ने पालिका प्रशासन को अवगत करवाया लेकिन इस कोई ध्यान नही है।</p>
<p><strong>क्षेत्रवासियों की पीड़ा</strong><br />स्वच्छ भारत मिशन के तहत बनाए गए शौचालय की नियमित सफाई नही होती है जिससे इसका उपयोग नही कर पा रहे हैं। टॉयलेट्स की सीटे टूटी हुई हैं। दुर्गंध की वजह से अंदर प्रवेश करने में भी कतराते हैं।<br /><strong>- नरेंद्र पांचाल, कस्बे वासी</strong></p>
<p>शहर में बनाए गए सार्वजनिक शौचालय नियमित देखभाल नहीं होने से मात्र शोपीस बनकर रह गए हैं। पालिका कर्मी भी अपनी ड्यूटी ढंग से नहीं निभा रहे हैं। सुविधा के लिए बनाए गए गंदगी से अटे ये शौचालय अब वातावरण को और प्रदूषित कर रहे हैं।<br /><strong>- निजाम कस्बे वासी</strong></p>
<p>सरकार की ओर से स्वच्छ भारत मिशन का दावा किया जाता है। इसके लिए लाखों रुपये आवंटित किए जाते हैं। उसके बावजूद नगर पालिका की ओर से शौचालयों की अनदेखी की जा रही है। शौचालयों की सफाई कराने पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है।<br /><strong>- अशोक पांचाल कस्बे वासी</strong></p>
<p>शहर के सार्वजनिक शौचालयों में सफाई तक नहीं होती। गंदगी होने के कारण लोगों को शौच करने में परेशानी का सामना करना पड़ता है। नगरपालिका अधिकारियों को शिकायत करने के बावजूद समस्या का समाधान नहीं किया जा रहा।<br /><strong>- रामकिशन मीणा कस्बे वासी</strong></p>
<p><strong>यहां बनाए गए थे सार्वजनिक शौचालय</strong><br />शिवनगर में, बालाजी की बगीची के पास,तेजाजी मेला ग्राउंड, ठीमली, अड़ीला,जोस्या का खेड़ा और रोटेदा रोड पर सार्वजनिक सुविधाघर बनाए गए। सार्वजनिक शौचालयों की सफाई करवाई दी जाएगी।  जमादार को बुलाकर जानकारी लेता हूं। पालिका में बजट का अभाव बताया जा रहा हैं। दरवाजे ,कुंडिया और टॉयलेट्स टूटी हुई सीट्स को भी सही करवाने का प्रयास करूंगा। <br /><strong>- दीपक सक्सेना,पालिका कार्यवाहक ईओ</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बूंदी</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 20 Dec 2024 16:45:49 +0530</pubDate>
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                <title>केवल कागजों में ही चल रहा है स्वच्छ भारत मिशन, सुविधाघर में लग रहा गंदगी का अंबार</title>
                                    <description><![CDATA[शौचालय की साफ-सफाई पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/swachh-bharat-mission-is-only-on-paper/article-97606"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-12/257rtrer-(21)3.png" alt=""></a><br /><p>सुकेत। सुकेत में स्वच्छ भारत मिशन केवल कागजों में ही चल रहा है। कस्बे में टंकी तिराहे पर स्थित सामुदायिक शौचालय का हाल-बेहाल है। लोग मजबूरी में मूत्रालय का उपयोग कर रहे हैं। स्वच्छ भारत मिशन को लेकर नगर पालिका में कोई संदीजगी दिखाई नहीं दे रही। टंकी तिराहा पर स्थित सामुदायिक शौचालय का हाल-बेहाल है। लोग मजबूरी में मूत्रालय का उपयोग कर रहे हैं। शौचालयों की स्थिति बेहाल है। यहां शौच के लिए बैठना भी मुश्किल है क्योंकि पानी की व्यवस्था नहीं है। कई बार नगर पालिका के पदाधिकारियों को समस्या से अवगत करवाया। इसके बावजूद मजबूरी में लोग राहगीर लघुशंका के लिए ही सिर्फ उपयोग कर रहे हैं। शौचालय की साफ-सफाई पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। जबकि नगर पालिका के जिम्मेदार अधिकारी स्वच्छता अभियान के तहत गली-मोहल्ले में जाकर लोगों को स्वच्छता का पाठ पढ़ा रहे। नगर पालिका सुकेत के सार्वजनिक शौचालयों की हालत यह है कि उसके पास बदबू के कारण लोगों का गुजरना मुश्किल है। इन शौचालयों से उठती बदबू के चलते आसपास के लोगों का सांस लेना भी मुश्किल हो गया है।</p>
<p><strong>वर्षों से नहीं हुई सफाई</strong><br />कस्बे वासियों ने बताया कि नगर पालिका द्वारा सामुदायिक शौचालय का निर्माण तो करवाया पर इसकी सुध कोई नहीं लेता। जिसके चलते शौचालय में पानी की व्यवस्था नहीं है। टंकी तिराहे स्थित स्वच्छ शौचालय में गंदगी ही गंदगी है, मल-मूत्र यूंही पड़ा हुआ है। शौचालय में न तो पानी की व्यवस्था है और ना ही इसको साफ करने की कोई व्यवस्था नहीं है। शौचालय के अंदर दीवारों पर मकड़ी के जाले लगे हुए हैं। अंदर र्इंट, बोतल, गंदे कपड़े और गुटखे आदि के पाऊच पड़े हुए हैं। ऐसा प्रतीत होता है कि वहां सालों से सफाई नहीं की गई। </p>
<p>शौचालय दो-ढाई साल से खस्ता हालत में है। किसी भी अधिकारी और कर्मचारी ने यहां आकर नहीं देखा कि लगातार गंदगी बढ़ रही है। <br /><strong>-दीपक खटीक, स्थानीय निवासी</strong></p>
<p>शौचालय जब से बना है, तब से ही यही हाल है। कई बार शिकायत की गई। पर किसी ने भी सुनवाई नहीं करता है। इससे गंदगी फैल रही है। जिससे बीमारी होने का डर बना रहता है। इसके पास से गुजरना भी मुश्किल होता है।<br /><strong>-महेन्द्र महावर, स्थानीय निवासी</strong></p>
<p>कस्बे में सफाईकर्मी मनमानी करते हैं। पहले ठेकेदार द्वारा जमादार लगा रखा था तो सफाई व्यवस्था ठीक थी। पालिका और ठेकेदार द्वारा स्थाई जमादार लगाना चाहिए।<br /><strong>-फैसल खान, उपाध्यक्ष, नगर पालिका सुकेत</strong></p>
<p>सफाई कर्मचारी लगा रखे हैं। लेकिन जिम्मेदारी से कार्य नहीं करते। जल्द ही समाधान करवाया जाएगा।<br /><strong>-गोवर्धन मेहर, पालिकाध्यक्ष, सुकेत</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 14 Dec 2024 17:08:45 +0530</pubDate>
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                <title>सर्वेक्षण टीम अगले महीने आएगी तो फिर खराब इम्प्रेशन लेकर जाएगी</title>
                                    <description><![CDATA[कचरा पॉइंट से समय पर नहीं उठ रहा कचरा]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/if-the-survey-team-comes-next-month--it-will-again-leave-with-a-bad-impression/article-96973"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-12/257rtrer-(3)8.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर को स्वच्छ व सुंदर बनाने के जिस मकसद से कोटा में दो नगर निगम किए थे। वह मकसद तो पूरा हुआ नहीं। शहर की सफाई व्यवस्था में सुधार होने की जगह पर हालात बिगड़ते ही जा रहे है। कचरा पॉइंट से समय पर कचरा तक नहीं उठ पा रहा। ऐसे ही हालात रहे तो अगले महीने जनवरी में आने वाली केन्द्रीय सर्वेक्षण टीम एक बार फिर से बुरा इम्प्रेशन लेकर जाएगी। जिसका असर शहर की स्वच्छता रैकिंग  पर पड़ेगा। केन्द्रीय शहरी विकास मंत्रालय की ओर से स्वच्छ भारत मिशन के तहत हर साल देश के कई शहरों की नगर निगमों में स्वच्छता सर्वेक्षण कराया जाता है। सर्वेक्षण के लिए वैसे तो कई तरह के मापदंड तय किए हुए हैं। लेकिन उसमें सबसे बड़ा मापदंड है शहर की सफाई व्यवस्था। इधर शहर में दो नगर निगम कोटाउत्तर व दक्षिण होने और करीब 3 हजार स्थायी सफाई कर्मचारी होनेके बाद भी हालत यह है कि शहर साफ नजर नहीं आ रहा। घर-घर कचरा संग्रहण के टिपर कई जगह पर समय पर नहीं पहुंच पा रहे। जिससे लोगों को सड़क पर, घर के बाहर, कॉलोनी के मेन गेट पर और कचरा पाइंट पर कचरा डालना पड़ रहा है। उस कचरा पाइंट से दिन में समय पर कचरा नहीं उठ रहा। जिससे वह दिनभर पड़ा रहता है। वह कचरा हवा के कारण या मवेशियों के साथ सड़क पर फेल रहा है। जिससे सुबह-शाम मेन रोड की सफाई होने के बाद भी सफाई नजर नहीं आ रही। </p>
<p><strong>शौचालय से लेकर मार्केट तक में ढेर</strong><br />शहर में उत्तर व दक्षिण दोनों निगम क्षेत्रों में कई जगह ऐसीहैं जहां हमेशा ही कचरे के ढेर लगे रहतेहैं। जिनमें चाहे शौचालय के पास का क्षेत्र हो या मार्केट का।  कोटड़ी गुमानपुरा रोड पर कांग्रेस कार्यालय के पास सार्वजनिक मूत्रालय के मुहाने पर ही दिनभर कचरे काढेर लगा रहता है। जिससे वहांजाने वालों को तो  परेशानी होती ही है। उस रोड की दशा उस कचरे से बिगड़ रही है।  नई धानमंडी में पोस्ट आॅफिस  के मेन गेट के पास और उसी रोड पर आगे दिनभर कचरे का ढेर लगा रहता है। फर्नीचर मार्केट में शॉपिंग सेंटर डिस्पेंसरी के सामने, सब्जीमंडी न्यू क्लॉथ मार्केट के सामने, छावनी बंगाली कॉलोनी में।यहां तक कि नयापुरा से रियासत कालीन पुलिया की तरफ जाने वाले रास्ते पर भी कचरे के ढेर लगे हुए हैं। </p>
<p><strong>शहर के मध्य बृज टॉकीज का कचरा पॉइंट परेशानी</strong><br />शहर में वैसे तो हर जगह पर कचरा पॉइंट बने हुए हैं। लेकिन सबसे बड़ी मुसीबत है नयापुरा विवेकानंद चौराहा स्थित बृज टॉकीज का कचरा पॉइंट। तत्कालीन कांग्रेस सरकार में बृज टॉकीज का बाहर से तो सौन्दर्यीकरण कर दिया गया था लेकिन अंदर कचरा भरा होने से वह दुर्दशा बयांकर रहा है। हालत यह है कि इस कचरा पाइंट का कचरा मेन रोड तक आकर दुर्गंध का कारण बनता है। </p>
<p><strong>इनका होता है भौतिक सत्यापन</strong><br />टीम द्वारा हर साल सभी शहरों में मौके पर जाकर सफाई व्यवस्था का भौतिक सत्यापन किया जाता है। टीम के कई सदस्य शहर में अलग -अलग स्थानों पर जाकर वहां स्वयं सफाई को देखते  हैं। जिनमें मार्केट, मेन रोड, गली मौहल्ला, सार्वजनिक शौचालय, सामुदायिक शौचालय, ओडीएफ, रात्रि कलीन सफाई,  घर-घर कचरा संग्रहण, गीला -सूखा कचरा कचरा अलग-अलग करना, ट्रेचिंग ग्राउंड की व्यवस्था,सीएंडडी वेस्ट का निस्तारण समेत लोगों से शहर की सफाई व्यवस्था के बारे में उनकी राय जानी जाती है। </p>
<p><strong>रैंकिंग में हमेशा फिसड्डी</strong><br />स्वच्छता सर्वेक्षण की हर साल जारी होने वाली रैकिंग में कोटा हमेशा से फिसड्डी रहा है। वर्ष  2022 में कोटा दक्षिण निगम की रैकिंग 141 थी वह 2023 में 256 वीं हो गई थी। जबकि 2022 में कोटा उत्तर निगम की  रैकिंग 364 थी वह 2023 में 244  हो गई थी। हालत यह है कि पिछले कई सालों से हो रहे सर्वेक्षण में हर साल देश में इंदौर ही सफाई में पहले नम्बर पर रहता है। जबकि कोटा पहले 100 में भी शामिल नहीं हुआ है। 2024 की रैकिंग का परिणाम अगले साल आएगा। </p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br /> स्वच्छता रैकिंग में केवल सफाई ही नहीं है। उसके कई मापदंड हैं।उन सभीपर काम किया जा रहा है। सीएंडडी वेस्ट, लीगेसी वेस्ट, ट्रेचिंग ग्राउंड, आधुनिक कचरा ट्रांसफर स्टेशन व कचरा पॉइंट को कम करने समेत सभी श्रेणियों में काम किया जा रहा है। उसके परिणाम क्या रहेंगे वह अलग बात है। बृज टॉकीज के कचरा पॉइंट को हमेशा के लिए बंद करने के लिए उस पर 11 फीट की दीवार बना दी गई है। उससे पहले अंदर की पूरी तरह से सफाई करवाई गई है। जिससे अब उसका स्थाई समाधान हो गया है। <br /><strong>- अशोक त्यागी, आयुक्त, नगर निगम कोटा उत्तर </strong></p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 07 Dec 2024 16:28:19 +0530</pubDate>
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                <title>कागजों में सफाईकर्मी, शौचालय बदहाल </title>
                                    <description><![CDATA[देखरेख के अभाव में ये गंदे और जर्जर हो चुके हैं।  ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jhalawar/sweepers-only-on-paper--toilets-in-bad-condition/article-96976"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-12/9930400-sizee-(1)13.png" alt=""></a><br /><p>भवानीमंडी। भवानीमंडी नगर पालिका में सफाईकर्मियों के नाम पर प्लेसमेंट एजेंसियां नगर परिषद अधिकारियोें के साथ मिलकर किस तरह फर्जीवाडा कर रही है, इसका प्रत्यक्ष उदाहरण शहर में बनाए गए कॉम्पलेक्स हैं। शहर में आमजन की सुविधा के लिए दस टॉयलेट कॉम्पलेक्स बनाए हैं लेकिन दो सौ से ज्यादा सफाईकर्मी होने के बावजूद आठ कॉम्पलेक्स बंद और बदहाल पड़े है। भवानीमंडी नगर पालिका के पास 133 स्थाई सफाईकर्मी है। जबकि 80-90 सफाईकर्मी विभिन्न प्लेसमेंट एजेंसियों के माध्यम से लगा रखे हैं। इसके बावजूद स्वच्छ भारत मिशन और अन्य कोष से लाखों रूपए खर्च करके बनाए गए सुविधा कॉम्पलेक्सों पर ताले लगे है। शहर के विभिन्न इलाकों में दस कॉम्पलेक्स बनाए गए है, लेकिन नगर पालिका इनमें से दो का ही संचालन कर रही है। जबकि अन्य पर कर्मचारी नहीं होने के कारण ताले लगे हैं। देखरेख के अभाव में ये गंदे और जर्जर हो चुके हैं।  </p>
<p><strong>ढाई गली पर एक सफाईकर्मी</strong><br />भवानीमंडी शहर की बसावट करीब एक से सवा वर्ग किलोमीटर के दायरे में है। 2011 की जनगणना के अनुसार यहां 8 हजार 333 परिवार निवास करते थे जिनकी आबादी 42 हजार 283 थी। एक अनुमान के मुताबिक देश की आबादी गत जनगणना के बाद 17 प्रतिशत बढ़ना बताया जा रहा है। इसी को आधार मान लें तो भवानीमंडी में वर्तमान में अनुमानित दस हजार परिवारों पर पचास हजार से अधिक जनसंख्या नहीं होगी। इनकी सफाई व्यवस्था को संभालने के लिए नगर परिषद के पास 133 स्थाई और 90 ठेका सफाईकर्मी तैनात है। यानी 40-45 मकानों की बस्ती पर एक सफाईकर्मी तैनात है। इसके बाबवजूद शहर में जगह जगह गंदगी के अंबार लगे है और कॉम्पलेक्स बंद। जिससे लोगों को सड़कों-बाजारों में औने कौने देखकर टॉयलेट करना पड़ता है। जबकि स्वच्छ भारत अभियान के तहत इन्हीं समस्याओं को ध्यान में रखकर सरकारों ने अच्छा खासा बजट नगर पालिका को उपलब्ध कराया है। </p>
<p><strong>अत्याधुनिक कॉम्लेक्स से कीमती सामान गायब</strong><br />स्वच्छ भारत मिशन के दौरान शहर में दो अत्याधुनिक वातानुकूलित कॉम्पलेक्स का निर्माण किया गया था, लेकिन इन कॉम्पलेक्सो के कीमती सामान गायब हो चुके हैं और अब बदहाल स्थिति में है। इनमें से एक का ही संचालन किया जा रहा है।  देखरेख केअभाव में गाडोलिया लुहार बस्ती सुलभ शौचालय, सब्जी मंडी सुलभ शौचालय, राजस्थान- एमपी बॉर्डर पर बना सुलभ शौचालय, सरकारी अस्पताल सुलभ शौचालय, कृषि उपजमण्डी सुलभ शौचालय, पचपहाड़ प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, इंदिरा रसोई वृद्धा आश्रम सुलभ शौचालय आदि कॉम्पलेक्स बंद पड़े है। </p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />लापरवाह केयरटेकर के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी, जिनकी वजह से सुलभ शौचालय की दुर्दशा हो रही है।<br /><strong>- मनीष मीणा अधिशासी अधिकारी, भवानीमंडी नगर पालिका</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>झालावाड़</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 07 Dec 2024 16:02:02 +0530</pubDate>
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                <title>सर्वेक्षण में जिन कामों के अधिक अंक, उनमें नहीं हुआ सुधार </title>
                                    <description><![CDATA[शहर को स्वच्छ व सुंदर बनाने के लिए नगर निगम कोटा उत्तर व दक्षिण की ओर से नियमित सफाई करवाई जाती है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/there-is-no-improvement-in-the-works-which-get-more-marks-in-the-survey/article-95020"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-11/6630400-sizee-(2)13.png" alt=""></a><br /><p>कोटा ।  स्वच्छ भारत मिशन के तहत हर साल केन्द्रीय शहरी विकास मंत्रालय की ओर से करवाए जाने वाले स्वच्छता सर्वेक्षण के लिए केन्द्र की टीम के इस बार जनवरी में आने की संभावना है। टीम के आने से पहले हालांकि दोनों नगर निगमों ने  शहर में साफ सफाई करवाना शुरु कर दी है।  लेकिन सर्वेक्षण में जिन कामों के अधिक अंक मिलते हैं उनमें नगर निगम अभी तक भी सुधार नहीं कर पाए हैं।  शहर को स्वच्छ व सुंदर बनाने के लिए नगर निगम कोटा उत्तर व दक्षिण की ओर से नियमित सफाई करवाई जाती है। सफाई की शुरुआत दोनों निगमों द्वारा घर-घर कचरा संग्रहण के माध्यम से की जा रही है। कोटा उत्तर के सभी 70 वार्डों में पहले जहां नगर निगम के माध्यम से टिपरों का संचालन किया जा रहा था। वहीं अब यह काम निगम द्वारा संवेदक के माध्यम से कराया जा रहा है। हर वार्ड में दो-दो टिपर चलाए जा रहे है।जबकि पूर्व में यह काम तीन-तीन टिपरों से किया जा रहा था। हालांकि कोटा दक्षिण निगम के 80 वार्डों में अभी यह  घर-घर कचरा संग्रहण का काम नगर निगम द्वारा ही किया जा रहा है।  दोनों नगर निगमों की ओर से नियमित सफाई के अलावा विशेष अभियान चलाकर भी सफाई करवाई जा रही है। जिससे दो माह बाद आने वाली टीम को शहर साफ सुधरा नजर आ सके। </p>
<p><strong>गीला-सूखा कचरा नहीं हो सका अलग-अलग</strong><br />नगर निगम की ओर से हर साल सफाई पर करोड़ों रुपए खर्च करने के बाद भी घरों से एकत्र किए जा रहे गीले-सूखे कचरे को अभी तक भी अलग-अलग नहीं किया जा सका है। हालांकि ट्रेचिंग ग्राउंड में उस कचरे की छटनी की जा रही है। बाजारों में भी कचरा पात्र तो रखवाए गए हैं लेकिन उनमें भी एक साथ ही कचरा डाला जा रहा है। जबकि स्वच्छता सर्वेक्षण में गीला-सूखा कचरा अलग-अलग करने(सेग्रीगेशन) के अंक निर्धारित हैं। कोटा के दोनों नगर निगम इस श्रेणी में हमेशा पिछड़ते हैं। </p>
<p><strong>ट्रेचिंग ग्राउंड का कचरा बड़ी समस्या</strong><br />नगर निगम के लिए नांता स्थित ट्रेचिंग ग्राउंड का कचरा बड़ी समस्या बना हुआ है। यहां शहर से रोजाना निकलने वाले करीब 450 टन से अधिक  कचरा आने से कचरे के बड़े-बड़े पहाड़ लग रहे है। हालांकि निगम कीओर से पूर्व में करीब 16 करोड़ रुपए का टेंडर कर 5 लाख क्यूविक मेट्रिक टन कचरे का निस्तारण कर उसे साफ कराया जा चुका है। लेकिन उसके बाद बजट के अभाव में शेष कचरे का समाधान नहीं हो सका है। जबकि ट्रेचिंग ग्राउंड के साफ होने के भी अंक सर्वेक्षण में शामिल होते है। कोटा नगर निगम इसमें भी हमेशा पिछड़ता रहा है। </p>
<p><strong>सिटीजन फीडबैक के भी अंक</strong><br />सर्वेक्षण में जहां केन्द्रीय टीम द्वारा मौके पर आकर शहर की सफाई व्तवस्था, सार्वजनिक शौचालयों कीसफाई, मार्केट कीसफाई, रात्रि कालीन सफाई व कचरे का निस्तारण संबंधी काम देखे जाते है। वहीं सिटीजन फीड बैक भी सर्वेक्षण का महत्वपूर्ण भाग है। इसमें शहर के लोगों से आॅनलाइन कई सवाल पूछे जाते हैं। जिनके आधार पर अंक मिलते है और रैकिंग में उपयोगी रहते हैं। शुरुआती सर्वेक्षण में तो कोटा नगर निगम को इस श्रेणी में सबसे अधिक अंक मिले थे लेकिन उसके बाद लोगों को इस बारे में जानकारी नहीं होने व निगम कीओर से प्रचार-प्रसार का अभाव रहने से इस श्रेणी में भीनिगम  को अपेक्षा अनुरूप अंक नहीं मिल पा रहेहैं। स्वच्छता सर्वेक्षण में हर नगर निगम को 9500 में से अंक दिए जाते हैं। लेकिन पिछले कई सालों से दोनों नगर निगम रैकिंग में ऊपर बढ़ने की जगह नीचे हीजाते जा रहे हैं। हालांकि निगम अधिकारी व महापौर दावा तो करतेहैं कि रैकिंग में सुधार होगा लेकिन हो नहीं पा रहा है। </p>
<p><strong>पूरे साल सही तरीके से हो सफाई</strong><br />लोगों का कहना है कि केवल टीम को दिखाने और नम्बर बढ़ाने के लिए ही नहीं नगर निगम  पूरे साल इसी तरह से सफाई करवाए।  बल्लभबाड़ी निवासी गिरधारी लाल मालव का कहना है कि शहर की पॉश कॉलोनियों में ही जगह-जगहपर कचरे के ढेर दिनभर पड़े रहतेहैं। नगर निगम सही ढंग सेसफाई करवाए तो शहर साफ दिख सकता है। हालांकि लोगों को भीइस बारे में जागरूक होना पड़ेगा। गुमानपुरा निवासी रमेश खत्री का कहना है कि नगर निगम की ओर से विशेष अवसरों पर तो सफाई के लिए अभियान चलाकर पूरे संसाधन लगा दिए जाते हैं। या किसी वीआईपी केआने पर तो शहर में सफाई दिखने लगतीहै। लेकिन सामान्य दिनों में उतनीसफाई नजर नहीं आती। जबकि सफाई का काम नियमित हो तो अभियान चलाने  की जरूरत हीनहीं रहेगी।</p>
<p><strong>दस्तावेज अपलोड में तकनीकी टीम का अभाव</strong><br />नगर निगम को ओर से शहर को स्वच्छ बनाने संबंधी जो भीकाम व प्रयास किए जा रहे है। उनसे संबंधित दस्तावेजों को स्वच्छ भारत मिशन की वेबसाइड पर अपलोड करना होता है। नगर निगम  के पास तकनीकीटीम का अभाव होनेसे इस बार कोटा दक्षिण द्वारा यह काम निजी फर्म के माध्यम से कराया जाएगा।जिसके लिए करीब 5 लाख रुपए का टेंडर भी  जारी किया जाना है।  दस्तावेज अपलोड होने के बाद केन्द्रीय टीम द्वाार उसका भौतिक सत्यापन किया जाता है। </p>
<p><strong>इनका  कहना है</strong><br />नगर निगम की ओर से सफाई नियमित रूप से करवाईजा रही है। जहां शिकायत आतीहै वहां विशेष रूप से  जन स्वास्थ्य विभाग के माध्यम से स्वास्व्य निरीक्षक व जमादारों को कहकर सफाई करवा रहे हैं। सेक्टर दो को मॉडल सेक्टर के रूप में लेकर इसके 11 वार्डों में विशेष सफाई करवाई जाएगी। उसके बाद उसे पूरे क्षेत्र में लागू किया जाएगा। निगम केवल रैकिंग सुधार के लिए हीनहीं शहर को स्वच्छ व सुंदर बनाने केलिए सफाई करवाता है। <br /><strong>- राजीव अग्रवााल, महापौर नगर निगम कोटा दक्षिण</strong></p>
<p>शहर में नगर निगम की ओर से नियमित सफाई करवाई जा रहीहै। गत दिनों दस दिन का विशेष अभियान भी चलाया गया था। वर्तमान में भी सफाई पर विशेष ध्यान दिया जा रहाहै।जहां भी गंदगी होने व कचरा नहीं उठने कीशिकायतें आ रहीहैं तो उनका स्वयं मौके पर जाकर समाधान कराया जा रहा है। गीला सूखे कचरे को अलग करने केभी प्रयास जारीहै। नए आने वाले कचरे के निस्तारण के लिए ट्रेचिंग ग्राउंड में काम शुरू कर दिया है।  जिससे  रोजाना निकलने वाले कचरे को एकत्र ही नहीं होने दिया जाए। हालांकि लीगेसी वेस्ट के लिए बजट नहीं होने से  वह काम अटका हुआ है। <br /><strong>-अशोक त्यागी, आयुक्त, नगर निगम कोटा उत्तर </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 14 Nov 2024 14:46:25 +0530</pubDate>
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                <title>बेपरवाही: स्वच्छ भारत मिशन योजना की उड़ रही धज्जियां</title>
                                    <description><![CDATA[एक लंबे समय से नाली सफाई नहीं होने के कारण मोहल्ले में मच्छरों का प्रकोप दिनों दिन बढ़ता ही जा रहा है। वही नालियां जाम होने के कारण गंदा पानी सड़क पर फैल रहा है ।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/negligence--swachh-bharat-mission-scheme-is-being-flouted/article-92735"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-10/4427rtrer-(1)16.png" alt=""></a><br /><p> सांवतगढ़। हिंडोली उपखंड के ग्राम पंचायत सावंतगढ़ में सफाई व्यवस्था चरमराई हुई है। लंबे समय से नाली की सफाई नहीं हुई और सड़क पर गंदा पानी फैल रहा है। भले ही सरकारी तंत्र द्वारा स्वच्छ भारत मिशन योजना के तहत लाखों करोड़ों रुपए खर्च किए जा रहे हो लेकिन आज भी कई ग्रामीण इलाकों में सफाई व्यवस्था को लेकर ग्राम पंचायत प्रशासन गंभीर नजर नहीं आ रहा है। हिंडोलि उपखंड के ग्राम पंचायत मुख्यालय सांवतगढ़ में लंबे समय से नालियों की सफाई नहीं होने से ग्रामीणों में पंचायत प्रशासन के प्रति रोष व्याप्त है। ग्रामीणों का कहना है कि एक लंबे समय से नाली सफाई नहीं होने के कारण मोहल्ले में मच्छरों का प्रकोप दिनों दिन बढ़ता ही जा रहा है। वही नालियां जाम होने के कारण गंदा पानी सड़क पर फैल रहा है जिसकी दुर्गंध ने हमारा जीना दुश्वार कर रखा है। ग्राम पंचायत की नाकामी के कारण हमें भारी समस्या हो रही है लेकिन पंचायत इसको लेकर बिल्कुल  भी गंभीर नहीं है। कस्बे के बस स्टैंड, किराड मोहल्ला, मीणा मोहल्ला,महला पाडा,भीलवासीया सहित कस्बे में गंदा पानी जमा हो रहा है। यहां तक की ग्राम पंचायत कार्यालय और सीनियर सेकेंडरी विद्यालय के सामने से गुजर रही नाली भी कई महीनों से जाम पड़ी हुई है।</p>
<p>सफाई व्यवस्था को लेकर मोहल्ले में हालत खराब है और गांव में कहीं भी कचरा पात्र नहीं होने के कारण गंदगी के ढेर पड़े हुए हैं। ग्राम पंचायत को सफाई समय पर करवानी चाहिए।<br /><strong>-आशाराम नागर, महला पाडा सांवतगढ़।</strong></p>
<p>सरकार सफाई व्यवस्था को लेकर लाखों रुपए खर्च करती है लेकिन कस्बे में लंबे समय नाली सफाई नहीं होने से मच्छर पैदा हो गया है जिससे डेंगू मलेरिया जैसी बीमारियां होने का खतरा बना रहता है। <br /><strong>-रामप्रसाद किराड, किराड मोहल्ला सांवतगढ़।</strong></p>
<p>पिछले 5-6 महीने से नाली सफाई नहीं होने के कारण नाली का गंदा पानी सड़क पर फैल रहा है जिसकी दुर्गंध से मोहल्ले वासी परेशान है। पंचायत को समस्या को गंभीरता से लेना चाहिए। <br /><strong>-गणेश शर्मा, बाजार सांवतगढ़।</strong></p>
<p>नाली सफाई नियमित नहीं होने के कारण लोग डेंगू,मलेरिया जैसी बीमारियां के चपेट आ रहै है। पंचायत प्रशासन को समस्या को गंभीरता लेना चाहिए। <br /><strong>-शहजाद मोहम्मद, निमोद रोड सांवतगढ़।</strong></p>
<p>आगामी 20 अक्टूबर तक टेंडर प्रक्रिया पूरी हो जाएगी। जल्दी ही ग्रामीणों को समस्या से निजात दिलवा दी जाएगी।<br /><strong>-राकेश शर्मा, ब्लॉक कॉर्डिनेटर स्वच्छ भारत मिशन हिंडोली।</strong></p>
<p>नाली सफाई नहीं होने के कारण हुई गंदगी और दुर्गंध से डेंगू,मलेरिया, दस्त जैसी कई बीमारियां हो सकती है।<br /><strong>-गणेश कुमार मीणा, आयुष्मान आरोग्य केंद्र सांवतगढ़।</strong></p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />नाली सफाई की समस्या को लेकर 4 जुलाई को हुई जनसुनवाई में मेरे द्वारा जनसुनवाई अधिकारी को शिकायत दी गई थी लेकिन आज तक भी समस्या का समाधान नहीं हो पाया है।<br /><strong>-लटूरलाल बैरवा, उपसरपंच ग्राम पंचायत सांवतगढ़।</strong></p>
<p>नाली सफाई के लिए टेंडर होने बाकी है,टेंडर होते ही नाली सफाई नियमित करवा दी जाएगी।<br /><strong>-सरपंच रामसिंह मीणा, ग्राम पंचायत सांवतगढ़।</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बूंदी</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 10 Oct 2024 15:42:12 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>कागजों में ही चल रहा स्वच्छ भारत मिशन</title>
                                    <description><![CDATA[ ग्रामीणों ने इस मामले में संबंधित विभाग के अधिकारियों को गंभीरता से ध्यान देने तथा संबंधित लापरवाह सरपंच, ग्राम सेवक के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/baran/swachh-bharat-mission-is-running-only-on-paper/article-68532"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-01/kagazo-me-hi-chl-rha-swachh-bharat-mission...rajpur,-baran-news-29-01-2024.jpg" alt=""></a><br /><p>राजपुर। पंचायत समिति क्षेत्र की 36 ग्राम पंचायतों में 2021-22 में हर ग्राम पंचायत मुख्यालय पर सामुदायिक शौचालयों का निर्माण लाखों रुपए की लागत से करवाया गया था। ताकि ग्राम पंचायत क्षेत्र के लोगों को सार्वजनिक शौचालय लाभ मिल सके। लेकिन ग्राम पंचायत प्रशासन के उदासीन रवैये के चलते यह शौचालय ताले में बंद पड़े हुए हैं और गंदगी से अटे पड़े हैं। इसके चलते गांवों को ओडीएफ घोषित करने के बावजूद क्षेत्र वासियों को खुले में शौच के लिए जाना पड़ रहा है। ग्रामीणों को सार्वजनिक शौचालय का लाभ नहीं मिल रहा है। यह शौचालय शोपीस बनकर ग्राम पंचायत के कागजी रिकॉर्ड की शोभा बढ़ा रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि ग्राम पंचायत प्रशासन द्वारा सार्वजनिक शौचालय का निर्माण कराया गया था। लेकिन उनमें निर्माण के बाद से ही ताले लटके होने से यह शोपीस मात्र बने हुए हैं। सरकार द्वारा लाखों करोड़ों रुपए का बजट सार्वजनिक शौचालय का निर्माण करने के लिए दिया गया था। ताकि क्षेत्र के लोगों को सामुदायिक शौचालयों का लाभ मिल सके और खुले में शौच से मुक्ति मिल सके। स्वच्छ भारत मिशन को लेकर केंद्र सरकार का सपना भी सरकार हो सके। लेकिन ग्राम पंचायत सरपंच, सचिव के मनमाने रवैये के चलते ताले में बंद हैं। जब से निर्माण किया है तब से अभी तक क्षेत्र के लोगों को इनका उपयोग नहीं करने दिया है। अब यह देखने में ही बदसूरत और बदरंग नजर आने लगे हैं। इनके अंदर घास फूस झाड़ियां होगी हुई हैं। टंकी यहां खाली है। उनमें पानी भी नहीं भरा जाता है। ऐसे में अब ओडीएफ के नाम पर ग्राम पंचायतों खुले में शौच से मुक्ति का प्रमाण पत्र भले ही मिल गया हो, लेकिन स्थिति धरातल पर कुछ और ही नजर आ रही है। कई ग्राम पंचायत क्षेत्रों में तो सार्वजनिक शौचालय बस्ती से दूर एकांत में बनाए गए हैं। ताकि आमजन शौचायलयों का उपयोग नहीं कर सके। इनके निर्माण कर में भी घटिया सामग्री का उपयोग किया गया है। जिससे यह सार्वजनिक के शौचालय अंदर से क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। टाइल्स उखड़ी पड़ी हैं और नल टूटे हुए हैं। उनके निर्माण करने के बाद कार्य एजेंसी ने मोटी रकम निकालकर सार्वजनिक शौचालय निर्माण के नाम पर खानापूर्ति कर इतिश्री कर ली है। ग्रामीणों ने उच्चाधिकारियों से इन सार्वजनिक शौचालयों के निर्माण की जांच व ताले में बंद पड़े शौचालयों को खुलवाने की मांग की है। ताकि आमजन शौचालयों का उपयोग सके।</p>
<p><strong>जिम्मेदारों पर कार्यवाही करने की मांग </strong><br />खांडा सहरोल ग्राम पंचायत, राजपुर ग्राम पंचायत मुख्यालय, बेहटा ग्राम पंचायत, पीपलखेड़ी ग्राम पंचायत मुख्यालय, मुंडियर ग्राम पंचायत मुख्यालय सहित अन्य ग्राम पंचायत मुख्यालय पर भी यही हालात बने हुए हैं। सार्वजनिक शौचालय ताले में बंद हंै। गंदगी का आलम और सरकार के सरकारी बजट का दुरुपयोग धड़ले से किया गया है। ग्रामीणों ने इस मामले में संबंधित विभाग के अधिकारियों को गंभीरता से ध्यान देने तथा संबंधित लापरवाह सरपंच, ग्राम सेवक के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। </p>
<p>पंचायत प्रशासन द्वारा सार्वजनिक शौचालय का निर्माण दो वर्ष पहले कराया था। लेकिन इसमें ताला लगा रखा है। इसके चलते आमजन को लाभ नहीं मिल रहा है।<br /><strong>- राहुल सिंह, ग्रामीण, बेहटा</strong></p>
<p>सार्वजनिक शौचालय बना हुए हैं। लेकिन इनमें पानी नहीं है। निर्माण कार्य में घटिया सामग्री का उपयोग हुआ है। गंदगी से भरे पड़े हैं। ग्राम पंचायत प्रशासन को ध्यान देना चाहिए।<br /><strong>- रमेश चंद सहरिया, ग्रामीण, खांडा सहरोल</strong></p>
<p>सार्वजनिक शौचालय निर्माण के लिए सरकार ने लाखों रुपए का बजट दिया था। जिसको पंचायत प्रशासन द्वारा शौचालय निर्माण के नाम पर लीपापोती करके इतिश्री कर ली है। शौचालय घटिया निर्माण के चलते खंडहरों में तब्दील हो रहे हैं। प्रशासन को मामले की जांच करना चाहिए।<br /><strong>- राजकुमार, समाजसेवी   </strong></p>
<p>पंचायत समिति क्षेत्र की ग्राम पंचायतों में बने सार्वजनिक शौचालय ताले में बंद हैं। लोगों को इनका लाभ नहीं मिल रहा है। पंचायत प्रशासन ने ताले लगा रखे हैं। इस मामले को दिखवाकर उचित कार्रवाई की जाएगी।<br /><strong>- धन सिंह, विकास अधिकारी, पंचायत समिति शाहाबाद</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बारां</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 29 Jan 2024 17:09:31 +0530</pubDate>
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                <title>40 स्थानों पर रखवाए कचरा पात्र 18 महीने में हुए कबाड़ </title>
                                    <description><![CDATA[ग्राम पंचायत की ओर से कचरा डालने के लिए रखे कचरा पात्रों में भरे कचरे का निस्तारण नही किया गया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/baran/garbage-bins-kept-at-40-places-turned-into-junk-in-18-months/article-57276"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-09/gan-(1)2.png" alt=""></a><br /><p>किशनगंज। किशनगंज कस्बे के वार्डों, सरकारी कार्यालयों में कचरा संग्रहण करने के लिए ग्राम पंचायत की ओर से फरवरी 2022 की शुरूआत में स्वच्छ भारत मिशन के तहत 40 जगह कचरा पात्र रखे गए थे। जिसमे कचरा डालने के लिए दो-दो कचरा पात्र का सेट था जिनकी अनुमानित लागत 8000 रुपए थी। यह कचरा पात्र मोहल्ले वासियों के गीले व सूखे कचरा डालने के लिए रखे गए थे ताकि कचरे का निस्तारण किया जा सके। ग्राम पंचायत प्रशासन ने कचरा पात्रों रखवाने के बाद इनकी सुध नहीं लेने के चलते देखरेख के अभाव में कचरा पत्र खुद ही कबाड़ हो गए। जिससे ग्राम पंचायत ने कचरा पात्र योजना में सरकार को लाखो रुपए का चूना लगा दिया।</p>
<p><strong>गुस्साएं मौहल्लेवासियों ने ग्राम पंचायत में रख दिए थे कचरा पात्र</strong><br />ग्राम पंचायत की ओर से कचरा डालने के लिए रखे कचरा पात्रों में भरे कचरे का निस्तारण नही किया गया। जिससे कचरा सड़कों पर फैलने लगा है। कचरे के ढेरों में मवेशी विचरण कर रहे हैं। जिससे मौहल्ले वासियों को परेशानी होने लगी है। शिकायत के बाद भी कई दिनों तक ग्राम पंचायत द्वारा नही करवाया गया तो गुस्साए मौहल्ले वासियो ने कई कचरा पात्र  ग्रामपंचायत में जाकर रख दिए थे। जिसको लेकर ग्राम पंचायत सरपंच राधाकिशन मीणा ने कचरे के निस्तारण के लिए ग्रामीणों को जिम्मेदार ठहराया।</p>
<p><strong>पंचायत ने लगाया सरकार को लाखों का चूना</strong><br />किशनगंज ग्राम पंचायत द्वारा कस्बे में रखवाए गए कचरा पात्रों में भरे कचरे का निस्तारण नहीं करवाने के बाद लोगो ने कई कचरा पात्रों को वापस ग्राम पंचायत में लाकर रख दिया है। तो कई कचरा पात्र सार संभाल के अभाव में कचरे के ढेर पर हो कबाड़ हो गए। जिससे स्वच्छ भारत मिशन योजना के तहत रखे 40 कचरा पत्रों के कबाड़ हो जाने से सरकार को लाखों रुपए का नुकसान पहुंचा है। जिनका एक कचरा पात्र का अनुमानित खर्च 8000 रुपए था।</p>
<p><strong>कचरा पात्र की सुध नहीं ले रही पंचायत</strong><br />वार्ड पंच रामनिवास सुमन ने बताया कि ग्रामपंचायत किशनगंज द्वारा कस्बे के मोहल्लों ,सरकारी कार्यालयों में कचरे के संग्रहण के लिए कचरा पात्र रखवाए गए कचरा पात्रों के भर जाने के बाद शिकायत के बावजूद ग्राम पंचायत की ओर से ध्यान नहीं देने से कचरे से भर पात्र अब कबाड़ हो गए है। कस्बे में जगह-जगह लगे गंदगी के ढेर से आमजन को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। ग्राम पंचायत कबाड़ हुए कचरा पत्रों की भी सुध नहीं ले रही है।</p>
<p><strong>इनका कहना है </strong><br />प्रशासन द्वारा कचरा पात्रों में भरे कचरे का निस्तारण नही किया गया। जिससे कचरा सड़कों पर फैलने लगा था। कचरे के ढेरों में मवेशी विचरण कर रहे थे। जिससे मौहल्लेवासियों को समस्या का सामना करना पड़ रहा था, इसलिए गुस्साएं मौहल्लेवासियों ने कचरा पात्र ग्राम पंचायत में जाकर रख दिए थे। <br /><strong>- रामसिंह, मौहल्लावासी। </strong></p>
<p>ग्राम पंचायत द्वारा किशनगंज कस्बे में सूखे,गीले कचरे का निस्तारण करने के लिए कचरा पात्र रखवाए गए थे,जिनके कचरे का निस्तारण ग्रामीणों द्वारा करना था लेकिन ग्रामीणों ने कचरे का निस्तारण नहीं किया,कस्बे के लोगों ने कई कचरा पात्र ग्राम पंचायत कार्यालय किशनगंज में रखवा दिए। <br /><strong>- राधाकिशन मीणा, सरपंच, किशनगंज। </strong></p>
<p>कस्बे में ग्राम पंचायत द्वारा कचरा निस्तारण को लेकर कचरा पात्र रखवाए जाने,उनका उपयोग नही होने का मामला संज्ञान में आया है। पंचायत से जानकारी लेकर खामी होने पर उचित कार्यवाही की जाएगी।<br /><strong>- सत्यप्रकाश जोरवाल, विकास अधिकारी, किशनगंज। </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बारां</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 16 Sep 2023 17:23:33 +0530</pubDate>
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                <title>अपने शहर के हालातों को शहरवासी देंगे खुद रैंक</title>
                                    <description><![CDATA[नगर निगम कोटा उत्तर व दक्षिण में सिटीजन फीैडबैक का लिंक आते ही उसकी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/city-dwellers-will-give-their-own-rank-to-the-condition-of-their-city/article-51852"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-07/apne-sheher-k-halato-ko-sheherwasi-denge-khud-rank...kota-news-15-07-2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। अपने शहर के हालातों की रैंकिंग अब आप खुद कर सकेंगे।  स्वच्छ भारत मिशन के तहत इस साल होने वाले स्वच्छता सर्वेक्षण के लिए सिटीजन फीडबैक का लिंक जारी कर दिया गया है। जिसमें शहरवासी 15 अगस्त तक शहर की सफाई के बारे में फीडबैक दे सकेंगे। हर साल होने वाले स्वच्छता सर्वेक्षण के लिए केन्द्रीय शहरी विकास मंत्रालय की ओर से सिटीजन फीडबैक का लिंक जारी किया जाता है। वैसे यह हर साल जनवरी से मार्च के बीच जारी हो जाता है। लेकिन इस बार यह देरी से जारी किया गया है। नगर निगम कोटा उत्तर व दक्षिण में सिटीजन फीैडबैक का लिंक आते ही उसकी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। </p>
<p><strong>एक बार ही फीडबैक</strong><br />सिटीजन फीडबैक का जो लिंक जारी किया गया है। उसमें शहर का हर व्यक्ति अपने मोबाइल से आॅनलाइन फीडबैक दे सकता है। लेकिन एक मोबाइल नम्बर से एक बार ही फीैडबैक दिया जाएगा। एक मोबाइल में डबल सिम होने से दूसरे नम्बर से भी फीडबैक दिया जा सकता है।</p>
<p><strong>9 प्रश्नों के देने होंगे जवाब</strong><br />सिटीजन फीैडबैक का जो लिंक जारी किया गया है। उसमें व्यक्ति अपना मोबाइल नम्बर डालेगा। उसके बाद ओटीपी आएगा। उसे डालने के बाद आगे की प्रक्रिया शुरू होगी। उसमें शहर और सफाई से संबंधित 9 सवाल पूछे जा रहे हैं। जिनका हां या ना में जवाब देना है। जवाब पूरे होने पर उसे सबमिट करना है।ह्णसफाई कर्मचारियों व जमादारों से की शुरुआत नगर निगम कोटा उत्तर व कोटा दक्षिण ने शहर वासियों से फीडबैक लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। नगर निगम कोटा दक्षिण ने निगम के सफाई कर्मचारियों व जमादारों से स्वयं और अपने परिचित दस-दस लोगों से फीडबैक भरवाने का काम शुरु किया है। वहीं नगर निगम के कर्मचारियों से फीडबैक भरवाया जा रहा है।  </p>
<p><strong>केन्द्रीय टीम के आने  की बढ़ी संभावना</strong><br />स्वच्छता सर्वेक्षण के तहत सिटीजन फीडबैक का लिंक जारी होने के साथ ही अब केन्द्रीय टीम के कोटा आने की संभावना बढ़ गई है। हालांकि टीम को काफी समय पहले ही आना था। लेकिन इस बार टीम के आने में देरी हुई है। केन्द्रीय टीम कभी भी कोटा आकर शहर की सफाई और लोगों से बातचीत कर भौतिक सत्यापन कर सकती है। </p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />सिटीजन फीडबैक का लिंक जारी हो गया है। जिसे नगर निगम के कर्मचारियों व सफाई कर्मचारियों से भरवाया जा रहा है। साथ ही सभी को दस से बीच अन्य लोगों से भरवाने का लक्ष्य दिया गया है। जिससे अधिक से अधिक लोग इसमें अपना योगदान दे सके। इसके अलावा शिक्षण संस्थाओं व सामाजिक संस्थाओं व व्यापार संघों के माध्यम से भी लोगों को जागरूक कर फीडबैक दिलाया जाएगा। जिससे कोटा की रैकिंग  में सुधार हो सके। शहर वासियों को 15 अगस्त तक फीडबैक देना है। सर्वेक्षण में सिटीजन फीडबैक के भी 600 अंक है। <br /><strong>- राजेश डागा, कार्यवाहक आयुक्त नगर निगम कोटा दक्षिण </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 15 Jul 2023 17:50:58 +0530</pubDate>
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                <title>एक ही समय सुनाई दे रहा गाड़ी वाला आया कचरा निकाल...</title>
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/at-the-same-time--it-is-heard-that-the-driver-of-the-car-came-to-take-out-the-garbage/article-49661"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-06/630-400-size-(8)14.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। गाड़ी वाला आया कचरा निकाल....। यह गूंज हर व्यक्ति के कानों में पिछले कई सालों से सुनाई दे रही है। पहले यह सुबह-शाम दोनों समय सुनाई देती थी। लेकिन कुछ समय से यह एक ही समय सुबह सुनाई दे रही है। जिससे शाम के समय कई लोग सड़कों पर ही कचरा डाल रहे हैं। स्वच्छ भारत मिशन के तहत नगर निगम ने घर-घर कचरा संग्रहण अभियान शुरू किया था। इसके तहत पहले जहां लोग घरों से निकलने वाले कचरे को सड़क पर या नजदीकी कचरा पॉइंट पर डालते थे। उसके स्थान पर लोगों की इस आदत को बदलने के लिए उनके घरों से ही कचरा एकत्र किया जाने लगा। इसके लिए नगर निगम ने टिपर चलाए। ये टिपर निगम के सभी वार्डों में सुबह-शाम जाते थे और हर घर से कचरा एकत्र करते थे। टिपर के आने का लोगों को पता चल सके इसके लिए उसमें एक गाना बजाया गया। टिपर चालक वार्ड में जाते ही उस गाने को बजा देता है। जिससे लोग घरों से बाहर निकलकर डस्टबीन का कचरा उसमें डाल देते हैं। जिससे सड़क पर गंदगी नहीं फेले। इस मकसद से शुरू की गई घर-घर कचरा संग्रहण योजना चल तो रही है लेकिन वह एक ही समय काम कर रही है। जिससे शाम के समय टिपर वार्डो में नहीं जाने पर कई लोग सड़क पर ही कचरा डाल रहे हैं। </p>
<p><strong>यह है समय</strong><br />नगर निगम से प्राप्त जानकारी के अनुसार  घर-घर कचरा संग्रहण के तहत टिपर सुबह 7 से 10 और शाम को 3 से 5 के बीच में वार्डों में कचरा एकत्र करने जाते हैं। नियमानुसार टिपरों के लिए दोनों समय निर्धारित किया हुआ है। लेकिन वर्तमान में नगर निगम कोटा उत्तर हो या दक्षिण अधिकतर जगह पर सिर्फ एक ही समय सुबह टिपर वार्डों में कचरा एकत्र कर रहे हैं। </p>
<p><strong>दक्षिण में दो और उत्तर में हर वार्ड में तीन टिपर</strong><br />कोटा में एक नगर निगम के समय कुल 65 वार्ड थे। परिसीमन के बाद दो नगर निगम कोटा उत्तर व दक्षिण बनने पर वार्डों की संख्या ढाई गुना 150 हो गई। जिनमें से कोटा उत्तर में 70 व कोटा दक्षिण में 80 वार्ड बनाए गए।  नगर निगम द्वारा  घर-घर कचरा संग्रहण के लिए संचालित किए जा रहे टिपरों में भी भेदभाव हो रहा है। कोटा उत्तर के सभी 70 वार्डों में तीन-तीन टिपर संचालित हो रहे हैं। वहीं कोटा दक्षिण के सभी 80 वार्ड में मात्र दो-दो टिपर संचालित हो रहे हैं। जबकि कोटा उत्तर की तुलना में कोटा दक्षिण में कई वार्ड बड़े हैं।  नगर निगम ने कई जगह पर टिपर संचालन का ठेका दिया हुआ है। जबकि कई जगह पर निगम अपने स्तर पर टिपरों का संचालन कर रहा है। पहले निगम ने टिपर भी ठेके पर लिए हुए थे। जबकि वर्तमान में अधिकतर टिपर निगम ने खरीदे हैं। पहले जहां टिपर खुले हुए व छोटे थे। वहीं नए टिपर बड़े और ढके हुए हैं। </p>
<p><strong>गीला-सूखा कचरा एक साथ</strong><br />नए टिपरों में गीला और सूखा कचरा अलग-अलग डालने की सुविधा है। लेकिन इतने साल बाद भी अभी तक दोनों तरह का कचरा टिपरों में एक साथ ही डाला जा रहा है। इसके लिए घरों में भी दो डस्टबीन नहीं रखे जा रहे हैं।  </p>
<p><strong>एक समय में सभी नहीं डाल पाते कचरा</strong><br />कंसुआ निवासी सोनू सेन का कहना है कि टिपर पहले दोनों समय आते थे। अभी काफी सय से सिर्फ सुबह के समय ही आ रहे हैं। जिससे कई लोग शाम के समय निकलने वाले  कचरे को सड़क पर डाल रहे हैं। सुबह जिस समय टिपर आते हैं उस समय सभी घरों के लोग कचरा नहीं’ डाल पाते। कुछ लोग शाम को डालते हैं। थेगड़ा निवासी अरुण सिंह का कहना है कि टिपरों को दोनों समय वार्ड में आना चाहिए। शाम को नहीं आने से कुछ लोग सड़क पर कचरा डाल रहे हैं। यदि टिपर शाम को भी आएंगे तो थोड़ा कचरा भी सड़क पर नहीं डलेगा। बसंत विहार निवासी निहारिका गौतम का कहना है कि सुबह जिस समय टिपर आया है उस समय घर पर काम अधिक रहता है। जिससे कचरा नहीं डाल पाते। शाम को टिपर नहीं आता तो कचरा इकट्ठा होने पर पास के कचरा पॉइंट पर डालना मजबूरी हो जाती है। अगले दिन तक कचरा रखने पर दुर्गंध आने लगती है। </p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />वार्डों में घरों से कचरा एकत्र करने के लिए टिपरों को दोनों समय ही जाने का नियम है। <br />अधिकतर वार्डों में दोनों समय जा भी रहे हैं। कई वार्ड बड़े होने से हो सकता है समय अधिक लगने से एक ही बार में कचरा एकत्र हो रहा हो। इसकी जानकारी करवाई जाएगी। वैसे नए टेंडर में हर वार्ड में तीन-तीन टिपर संचालन की योजना है। <br /><strong>- राजीव अग्रवाल, महापौर, नगर निगम कोटा दक्षिण</strong></p>
<p>कोटा उत्तर निगम क्षेत्र के हर वार्ड में दोनों समय टिपर जा रहे हैं। किसी वार्ड में समय अधिक लगने पर एक ही समय जा सकते हैं। उन वार्डों से शिकायत आने पर टिपर भेजे जाते हैं। बुधवार को भाजपा पार्षद नंद किशोर मेवाड़ा की शिकायत पर कि एक ही समय टिपर आ रहा है तो दूसरे टिपर को भजा गया था। जिस वार्ड में शाम को नहीं जा रहे होंगे। वहां की जानकारी कर भिजवाए जाएंगे। <br /><strong>- मंजू मेहरा, महापौर, नगर निगम कोटा उत्तर </strong></p>
<p>नियम तो सुबह-शाम दोनों समय ही टिपरों को वार्ड में घरों से कचरा एकत्र करने का है। लेकिन अधिकतर घरों में सुबह के समय ही सफाई होती है। कचरा भी उसी समय में निकलता है। इस कारण से कई वार्डो में हो सकता है टिपर एक ही समय जा रहे होंगे। जिन वार्डो में शाम को टिपर नहीं जा रहे हैं तो वहां के लोगों को जागरूक होकर अगले दिन  ही कचरा टिपर में डालना चाहिए। न कि सड़क पर कचरा डालना चाहिए। इंदौर शहर  से बराबरी करने है तो लोगों को भी जागरुक होना पड़ेगा। <br /><strong>- पवन मीणा, अध्यक्ष, सफाई समिति, नगर निगम कोटा दक्षिण </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 22 Jun 2023 14:38:11 +0530</pubDate>
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