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                <title>tourist department - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>डिस्प्ले में सिक्के, हैंडीक्राफ्ट, पेंटिंग्स सहित 2600 से अधिक पुरा वस्तुओं का खजाना, 21 फरवरी को मनाया जाएगा 139वां स्थापना दिवस</title>
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                        <![CDATA[अल्बर्ट हॉल संग्रहालय में बनाई गई 18 विभिन्न गैलेरियों में पर्यटकों के अवलोकनार्थ 2600 से अधिक पुरा वस्तुएं प्रदर्शित हैं।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/here-the-treasure-of-more-than-2600-goods-including-coin/article-104754"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-02/257rtrer74.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। सालों पुराने कारपेट, पाषाण प्रतिमाएं, बंदूकें और तलवार पर्यटकों को सालों पुरानी यादों में ले जाती हैं। यहां आकर पर्यटक इन्हें निहारने में मशगूल हो जाते हैं। कहा जाए तो यहां डिस्प्ले में सिक्के, हैंडीक्राफ्ट, पेंटिंग्स सहित 2600 से अधिक पुरा वस्तुओं का खजाना है। ये सब देखने को मिलता है केन्द्रीय संग्रहालय अल्बर्ट हॉल में। बात की जाए संग्रहालय के निर्माण की तो 1887 में इसके भवन निर्माण और संग्रहालय की स्थापना में 5 लाख 10 हजार 036 रुपए का खर्चा आया था। जिसे 21 फरवरी, 1887 को संग्रहालय पर्यटकों के अवलोकनार्थ खोल दिया गया था। उस समय संग्रहालय में प्रदर्शित पुरा वस्तुओं को 4 श्रेणियों में विभक्त किया गया था। समय के साथ डिस्प्ले में बदलाव की मांग को देखते हुए साल 2007-2008 में संग्रहालय के जीर्णोद्धार और संरक्षण कार्य किया गया, जिसमें लगभग 7 करोड़ रुपए राशि का खर्चा हुआ। साथ ही प्रदर्शित पुरा वस्तुओं का दायरा भी बढ़ता गया। फरवरी, 2025 की बात करें तो संग्रहालय की 18 दीर्घाओं में 2600 से अधिक पुरा वस्तुएं पर्यटकों के अवलोकनार्थ प्रदर्शित हैं।</p>
<p><strong>अल्बर्ट हॉल साल 1887</strong><br />इस दौरान अल्बर्ट हॉल संग्रहालय की पुरा वस्तुओं को 4 श्रेणियों में विभक्त किया गया था। उस दौरान अल्बर्ट हॉल में भवन निर्माण और संग्रहालय स्थापना में कुल राशि 5,10,036 रुपए लगी थी। इस इमारत को बनाने में प्रमुख कारीगरों का नाम चन्द्र और तारा था। </p>
<p>शिल्प विषय<br />इतिहास विषय<br />शिक्षा विषय <br />अर्थ शास्त्र विषय।</p>
<p><strong>अल्बर्ट हॉल संग्रहालय साल 2025</strong><br />अल्बर्ट हॉल संग्रहालय में वर्तमान में 18 दीर्घाओं में ये पुरा वस्तुएं प्रदर्शित हैं। इससे पहले साल 2007-2008 में संग्रहालय के जीर्णोद्धार एवं संरक्षण कार्य किया गया था। जिसमें लगभग 7 करोड़ रुपए राशि का खर्चा हुआ था।  </p>
<p>कारपेट हॉल<br />अन्तरराष्ट्रीय दीर्घा <br />पॉर्टी दीर्घा <br />मूर्ति दीर्घा<br />हथियार दीर्घा <br />धातु दीर्घा <br />लाख सामग्री दीर्घा <br />पेंटिंग दीर्घा (प्रथम)<br />सिक्का दीर्घा <br />मार्बल कला दीर्घा <br />वेशभूषा दीर्घा <br />मिस्त्र कला दीर्घा <br />पेंटिंग दीर्घा (द्वितीय)<br />लकड़ी कला दीर्घा<br />आभूषण-हाथी दांत <br />वाद्य यंत्र दीर्घा<br />क्ले मॉडल <br />क्ले मॉडल योगासन।</p>
<p>अल्बर्ट हॉल संग्रहालय में पर्यटकों के अवलोकनार्थ विभिन्न पुरा वस्तुएं प्रदर्शित हैं। जहां लाखों की संख्या में देशी और विदेशी पर्यटक आते हैं। संग्रहालय का 139वां स्थापना दिवस मनाया जाएगा। <br />-डॉ. पंकज धरेन्द्र, निदेशक, पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग <br />अल्बर्ट हॉल संग्रहालय में बनाई गई 18 विभिन्न गैलेरियों में पर्यटकों के अवलोकनार्थ 2600 से अधिक पुरा वस्तुएं प्रदर्शित हैं। खासकर मिस्त्र की ममी पर्यटकों के आकर्षण का केन्द्र रहती है। <br />-महेन्द्र निम्हल, अधीक्षक, अल्बर्ट हॉल संग्रहालय </p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 19 Feb 2025 10:07:33 +0530</pubDate>
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