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                <title>saudi arabia - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>saudi arabia RSS Feed</description>
                
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                <title>रूस-सऊदी अरब ने ईरान तथा अरब देशों के बीच संबंधों को सामान्य बनाने का किया समर्थन, होर्मुज में जहाजों का आवागमन किया जाए बहाल : लावरोव</title>
                                    <description><![CDATA[रूस के विदेश मंत्री लावरोव और सऊदी समकक्ष फैसल बिन फरहान ने फोन पर वार्ता कर ईरान और अरब देशों के बीच संबंध सुधारने का समर्थन किया। दोनों नेताओं ने होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यापारिक जहाजों की सुरक्षित आवाजाही बहाल करने और क्षेत्रीय संकट के स्थायी राजनयिक समाधान पर जोर दिया, ताकि खाड़ी में शांति बनी रहे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/russia-saudi-arabia-support-normalization-of-relations-between-iran-and-arab/article-153245"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-06/sergey.png" alt=""></a><br /><p>मॉस्को। रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव और उनके सऊदी समकक्ष फैसल बिन फरहान अल सऊद के बीच फोन पर बातचीत में दोनों पक्षों ने ईरान और अरब राजतंत्रों के बीच संबंधों को सामान्य बनाने के प्रयासों का समर्थन किया। रूसी विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा, "ईरान और अरब देशों के बीच लंबे समय के लिए रिश्ते सुधारने और सामान्य बनाने की कोशिशें दोबारा शुरू करना सही माना गया है। "मंत्रियों ने इस बात पर जोर दिया कि होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों का आवागमन संघर्ष-पूर्व की स्थितियों में बहाल किया जाना चाहिये। उन्होंने यह भी कहा कि इस क्षेत्र के संकट के सभी पहलुओं के स्थायी और दीर्घकालिक समाधान निकालने के लिए जारी राजनयिक संपर्कों को बनाए रखा जाना चाहिये।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 09 May 2026 17:58:33 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>सऊदी अरब, कतर और तुर्की की यात्रा पर जाएंगे पाकिस्तानी पीएम शाहबाज शरीफ, राष्ट्रपति ट्रंप ने दिए नए घटनाक्रम सामने आने के संकेत   </title>
                                    <description><![CDATA[पाकिस्तान के पीएम शहबाज शरीफ सऊदी अरब, कतर और तुर्की की चार दिवसीय यात्रा पर जा रहे हैं। सऊदी अरब से $3 बिलियन की अतिरिक्त सहायता और पुराने कर्ज के विस्तार से पाकिस्तान के विदेशी मुद्रा भंडार को संजीवनी मिली है। यह दौरा आर्थिक स्थिरता और अमेरिका-ईरान वार्ता के बीच बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/pakistani-pm-shahbaz-sharif-will-visit-saudi-arabia-qatar-and/article-150537"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/pak-pm.png" alt=""></a><br /><p>इस्लामाबाद। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ सप्ताहांत में सऊदी अरब, कतर और तुर्की की चार दिवसीय यात्रा पर जायेंगे। पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय ने बुधवार को यह जानकारी दी। यह यात्रा अमेरिका-ईरान चर्चा के पहले दौर के बाद हो रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को संकेत दिया था कि 'अगले दो दिनों में' पाकिसतान में कुछ नये घटनाक्रम सामने आ सकते हैं। यह यात्राएं पाकिस्तान के लिए एक बड़ी वित्तीय मजबूती के साथ हो रही हैं। वॉशिंगटन में विश्व बैंक-आईएमएफ की स्प्रिंग मीटिंग्स के दौरान वित्त मंत्री मुहम्मद औरंगजेब ने कहा कि सऊदी अरब ने 3 अरब डॉलर की अतिरिक्त जमा राशि देने का वादा किया है और पिछली 5 अरब डॉलर की जमा राशि की अवधि भी बढ़ा दी है।</p>
<p>औरंगजेब ने कहा कि इस मदद से पाकिस्तान के विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूती मिलेगी, उसके बाहरी खाते सुदृढ़ होंगे और आईएमएफ समर्थित कार्यक्रम के अनुपालन में सहायता मिलेगी। सरकार का लक्ष्य चालू वित्त वर्ष के अंत तक लगभग 18 अरब डॉलर का भंडार रखना है, जो 3.3 महीने के आयात कवर के बराबर है। उन्होंने पाकिस्तान की हाल ही में किये गये 1.4 अरब डॉलर के यूरोबॉन्ड भुगतान का उल्लेख किया और इसे 'सामान्य घटना' करार दिया। उन्होंने आगामी विदेशी दायित्वों को पूरा करने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता को भी दोहराया। उन्होंने इस सहयोग को सुगम बनाने के लिए क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान और वित्त मंत्री मोहम्मद बिन अब्दुल्ला अल-जदान सहित सऊदी नेतृत्व के साथ-साथ पाकिस्तान की राजनीतिक और आर्थिक टीमों को भी श्रेय दिया।</p>
<p>वित्त मंत्री ने कहा कि सऊदी वित्तीय सहायता और आईएमएफ व विश्व बैंक जैसे संस्थानों से मिली अंतरराष्ट्रीय पहचान का संयुक्त प्रभाव पाकिस्तान को आर्थिक स्थिरता के लिए आत्मविश्वास और गति प्रदान करता है। उन्होंने फंडिंग के स्रोतों में विविधता लाने के लिए जारी पहलों की भी रूपरेखा पेश की, जिसमें 'ग्लोबल मीडियम-टर्म नोट' कार्यक्रम और 'पांडा बॉन्ड्स' जारी करने की योजना शामिल है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 15 Apr 2026 17:33:44 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>पश्चिम एशिया में बिगड़ते हालात पर की चर्चा: मोदी ने सऊदी अरब के शहजादे से की बात, ऊर्जा ठिकानों पर हमलों की निंदा की</title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान से फोन पर बातचीत की। दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष और ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर हमलों की कड़ी निंदा की। उन्होंने शिपिंग मार्गों की सुरक्षा और नेविगेशन की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने पर सहमति जताई, जो वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/discussed-the-deteriorating-situation-in-west-asia-modi-spoke-to/article-148285"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/modi1.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को सऊदी अरब के शहजादे और प्रधानमंत्री मोहम्मद बिन सलमान के साथ बातचीत की जिसमें पश्चिम एशिया में बिगड़ती स्थिति और उसके क्षेत्रीय स्थिरता तथा वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा पर व्यापक प्रभावों पर विशेष चर्चा हुई। मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि दोनों नेताओं ने संघर्ष से उत्पन्न स्थिति पर विचारों का आदान-प्रदान किया और महत्वपूर्ण अवसंरचना की सुरक्षा के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा, सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस और प्रधानमंत्री, प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान से बात की और पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष पर चर्चा की। प्रधानमंत्री ने ऊर्जा ठिकानों पर हमलों के खिलाफ भारत के दृढ़ रुख को दोहराया, जो क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच एक प्रमुख चिंता के रूप में उभरे हैं। मोदी ने कहा, मैंने क्षेत्रीय ऊर्जा अवसंरचना पर हमलों की भारत द्वारा निंदा को दोहराया।</p>
<p><strong>शिपिंग मार्गों को खुला रखने पर सहमत </strong></p>
<p>उन्होंने कहा, हम नेविगेशन की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने और शिपिंग मार्गों को खुला और सुरक्षित रखने की आवश्यकता पर सहमत हुए, उन्होंने खाड़ी क्षेत्र से जुड़े प्रमुख मार्गों को लेकर चिंताओं को उजागर किया, जिनसे होकर विश्व के तेल आपूर्ति का एक बड़ा हिस्सा गुजरता है। भारत अपने कच्चे तेल का एक बड़ा हिस्सा पश्चिम एशियाई देशों से आयात करता है और वह लगातार तनाव कम करने और महत्वपूर्ण आपूर्ति श्रृंखलाओं की सुरक्षा की मांग करता रहा है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 29 Mar 2026 09:43:58 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सऊदी की तेल रिफाइनरी पर हमला: भारी नुकसान का अनुमान, यूएई-कतर के तेल-गैस प्लांट पर भी ड्रोन अटैक</title>
                                    <description><![CDATA[ईरान-इजरायल संघर्ष के बीच सऊदी अरब, यूएई और कतर के तेल-गैस संयंत्रों पर भीषण हमले हुए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान को सख्त चेतावनी देते हुए कहा कि यदि कतर पर दोबारा हमला हुआ, तो अमेरिका ईरान के साउथ पार्स गैस फील्ड को तबाह कर देगा। सऊदी ने भी जवाबी कार्रवाई की पूरी ताकत होने की बात कही है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/attack-on-saudi-oil-refinery-huge-loss-estimated-drone-attack/article-147117"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/israel-oil.png" alt=""></a><br /><p>तेहरान। अमेरिका-इजराइल और ईरान जंग के बीच सऊदी अरब के यनबू पोर्ट पर स्थित सैमरेफ ऑयल रिफाइनरी पर हवाई हमला किया गया। इसके अलावा यूएई और कतर के तेल-गैस प्लांट रास लाफान औद्योगिक क्षेत्र पर भी ड्रोन हमले हुए हैं। इन हमलों से वहां की एलएनजी सुविधाओं को बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ है। सऊदी ने गुरुवार को ईरान को कड़ी चेतावनी दी है। सऊदी के विदेश मंत्री फैसल बिन फरहान अल सऊद ने कहा कि हमारे देश के पास ईरान को जवाब देने की पूरी ताकत है। हमारे सब्र का इम्तिहान न लें। इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान की चेतावनी दी कि अगर कतर पर दोबारा हमला हुआ तो वे उसका पूरा गैस फील्ड को उड़ा देंगे जो ईरान ने कभी सोचा नहीं होगा।</p>
<p><strong>हमें इजरायल के हमलों का पता नहीं था</strong></p>
<p>ट्रम्प ने साउथ पार्स गैस फील्ड पर इजरायल के हमले की पुष्टि करते हुए कहा कि पश्चिमी एशिया में जो कुछ भी हुआ है, उससे ‘गुस्से में आकर’ इजरायल ने हिंसक तरीके से ईरान के साउथ पार्स गैस फील्ड पर हिंसक हमला किया है। हैरानी की बात यह है कि अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि अमेरिका को इस हमले का पता नहीं था, न उन्हें इसका अंदाजा था कि ऐसा कुछ होने वाला है। इसके अलावा उन्होंने यह भी कहा कि और कतर भी इसमें शामिल नहीं था। मगर यह भी जोड़ा कि ईरान का कतर की एलएनजी गैस सुविधा के एक हिस्से पर हमला अनुचित और अन्यायपूर्ण था। </p>
<p><strong>इजरायल अब गैस क्षेत्र में हमले नहीं करेगा</strong></p>
<p><strong>साथ ही कहा: ईरान नहीं माना तो हम ऐसा हमला करेंगे, उसने सोचा भी नहीं होगा</strong></p>
<p>उन्होंने आश्वासन दिया कि इस अत्यंत महत्वपूर्ण और बहुमूल्य साउथ पार्स फील्ड में इजरायल अब कोई और हमले नहीं करेगा, हालांकि यह भी चेतावनी दी कि जब तक ईरान ‘मूर्खतापूर्ण ढंग से बेहद निर्दोष’ देश कतर पर हमला करने का फैसला नहीं करता। अगर ईरान ऐसा करता है तो अमेरिका, इजरायल की मदद या सहमति के बिना या उसके साथ‘पूरे साउथ पार्स गैस फील्ड को इतनी ताकत और शक्ति से उड़ा देगा जैसा ईरान ने पहले कभी नहीं देखा होगा।  </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 20 Mar 2026 09:02:44 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ईरान ने सऊदी में अमेरिकी दूतावास पर किया ड्रोन अटैक, कहा-जमीन पर तैनात सैनिकों की जरूरत नहीं</title>
                                    <description><![CDATA[सऊदी अरब की राजधानी रियाद में अमेरिकी दूतावास और रास तनुरा ऑयल रिफाइनरी को निशाना बनाकर ड्रोन हमले किए गए। रक्षा मंत्रालय ने 7 ड्रोन मार गिराए, हालांकि मलबे से मामूली आग लग गई। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी है, जबकि दूतावास ने नागरिकों के लिए सुरक्षा एडवाइजरी जारी की है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/iran-carried-out-drone-attack-on-us-embassy-in-saudi/article-145184"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/us.png" alt=""></a><br /><p>रियाद। सऊदी अरब के रियाद स्थिति अमेरिकी दूतावास पर मंगलवार सुबह ड्रोन से हमला किया गया, जिसके कारण हल्की आग लगी गनीमत रही कि कोई हताहत नहीं हुआ है। सऊदी गैजेट की रिपोर्ट के अनुसार, सऊदी अरब के रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता मेजर जनरल तुर्की अल-मलिकी ने कहा, "शुरुआती अनुमान के मुताबिक, रियाद में अमेरिकी दूतावास को ड्रोन से लक्षित किया गया है। इस घटना में हल्की आग लगी और इमारत को मामूली नुकसान हुआ।"</p>
<p>उन्होंने कहा कि रियाद के साउथ में स्थित प्रिंस सुल्तान एयर बेस के पास पांच ड्रोन को मार गिराया गया । इसके अलावा दो ड्रोन के जरिये पूर्वी प्रांत में रास तनुरा ऑयल रिफाइनरी पर हमला करने की कोशिश की गयी लेकिन मार गिराये गये ड्रोन का मलबा गिरने से रिफाइनरी में हल्की आग लग गई। किसी के घायल होने की कोई खबर नहीं है।</p>
<p>अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि अमेरिका जल्द ही ड्रोन हमले का जवाब देगा। रियाद में अमेरिकी दूतावास ने रियाद और जेद्दा में अमेरिकी नागरिकों के लिए एक परामर्श जारी किया है कि वे दूतावास परिसर से दूर रहें और घर के अंदर ही रहें।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 03 Mar 2026 18:05:37 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>तोशाखाना केस: इमरान-बुशरा को मिली 17-17 साल की सजा, कोर्ट ने जुर्माना भी लगाया</title>
                                    <description><![CDATA[पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान और बुशरा बीबी को तोशाखाना-2 भ्रष्टाचार केस में 17-17 साल की सजा और करोड़ों रुपए जुर्माना लगाया गया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/toshakhana-case-imran-bushra-got-17-years-imprisonment-court-also-imposed/article-142399"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/11-(700-x-400-px)-(630-x-400-px)-(1)7.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान और उनकी पत्नी बुशरा बीबी को अदालत ने तोशाखाना-2 भ्रष्टाचार मामले में दोषी ठहराते हुए 17-17 साल की सजा सुनाई है। यह मामला विदेशी सरकार से मिले महंगे तोहफों को नियमों के खिलाफ बेचने से जुड़ा है। दोनों पर करोड़ों रुपए का जुमार्ना भी लगाया गया है।</p>
<p><strong>क्या है मामला?</strong></p>
<p>रावलपिंडी की हाई-सिक्योरिटी अदियाला जेल में स्थित विशेष अदालत ने शनिवार को यह फैसला सुनाया। जज शाहरुख अरजुमंद ने इमरान खान और बुशरा बीबी को कुल 17 साल की सजा दी। अदालत ने उन्हें पाकिस्तानी दंड संहिता की धारा 409 (आपराधिक विश्वासघात) के तहत 10 साल और भ्रष्टाचार निरोधक कानून की अलग-अलग धाराओं में 7 साल की सजा सुनाई। इसके अलावा दोनों पर 1 करोड़ 64 लाख पाकिस्तानी रुपए का जुर्माना भी लगाया गया। अदालत ने उम्र और महिला होने को देखते हुए सजा में कुछ नरमी बरतने की बात कही। यह मामला 2021 में सऊदी अरब सरकार से मिले महंगे तोहफों से जुड़ा है। आरोप है कि इनमें महंगी घड़ियां, हीरे और सोने के गहनों के सेट शामिल थे, जिन्हें नियमों के अनुसार तोशाखाना में जमा नहीं किया गया। </p>
<p>सरकार का कहना है कि इन तोहफों की असली कीमत करीब 7 करोड़ रुपए थी, लेकिन उनका मूल्यांकन सिर्फ 58-59 लाख रुपए दिखाया गया। आरोप है कि इमरान खान और बुशरा बीबी ने इन्हें बेहद कम कीमत पर खरीदने की कोशिश की। तोशाखाना कैबिनेट डिवीजन के तहत आने वाला विभाग है, जहां विदेशी नेताओं और गणमान्य व्यक्तियों से मिले तोहफे जमा किए जाते हैं। तय नियमों के तहत इन्हें बाद में खरीदा जा सकता है।</p>
<p><strong>कोर्ट की कार्यवाही</strong></p>
<p>इस केस में कुल 21 गवाहों ने अदालत में बयान दिए। फैसले के समय इमरान खान और बुशरा बीबी दोनों अदालत में मौजूद थे। इमरान खान ने आरोपों को राजनीतिक साजिश बताते हुए खारिज किया। इससे पहले अक्टूबर 2024 में बुशरा बीबी और नवंबर में इमरान खान को इस केस में जमानत मिली थी। हालांकि, दोनों पहले से ही अल-कादिर ट्रस्ट केस में सजा काट रहे हैं। दोनों दोषी हाईकोर्ट में इस फैसले के खिलाफ अपील कर सकते हैं। इमरान खान अगस्त 2023 से जेल में हैं और उनसे मुलाकात पर पिछले एक महीने से रोक लगी हुई है। संयुक्त राष्ट्र ने भी उनकी जेल में हालत को लेकर चिंता जताई है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 09 Feb 2026 11:37:27 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>भारत-GCC मुक्त व्यापार समझौते की ओर बड़ा कदम, व्यापार और रणनीतिक रिश्तों को मिलेगी नई गति</title>
                                    <description><![CDATA[भारत ने गुरुवार को गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल (GCC) के साथ एक फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) के लिए टर्म्स ऑफ़ रेफरेंस पर साइन किए, ताकि 2004 से रुके हुए ट्रेड पैक्ट के लिए बातचीत फिर से शुरू हो सके।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/big-step-towards-india-gcc-free-trade-agreement-trade-and-strategic/article-142071"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/11-(700-x-400-px)-(630-x-400-px)-(10)4.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। भारत ने हाल ही में अमेरिका के साथ व्यापार समझौते किया, जिसके बाद अमेरिका ने अपने टेरिफ को 25 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया था और अब भारत ने एक और कदम बढ़ाया है। जानकारी के अनुसार, भारत ने गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल (GCC) के साथ मुक्त व्यापार समझौते (FTA) की दिशा में अहम प्रगति करते हुए गुरुवार को टर्म्स ऑफ़ रेफरेंस पर हस्ताक्षर कर दिए। इसके साथ ही वर्ष 2004 से रुकी हुई भारत-GCC व्यापार वार्ता को दोबारा औपचारिक रूप से शुरू करने का रास्ता साफ हो गया है। यह कदम न केवल आर्थिक बल्कि भू-राजनीतिक दृष्टि से भी भारत के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।</p>
<p>भारत और जीसीसी के बीच FTA वार्ता की शुरुआत 2004 में फ्रेमवर्क एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर के साथ हुई थी। इसके बाद 2006 और 2008 में दो दौर की बातचीत हुई, लेकिन 2011 में GCC ने वैश्विक स्तर पर सभी व्यापार वार्ताएं रोक दी थीं। नवंबर 2022 में GCC के सेक्रेटरी जनरल की भारत यात्रा के बाद इस प्रक्रिया में नई जान आई। अक्टूबर 2023 में GCC ने संशोधित टर्म्स ऑफ़ रेफरेंस साझा किए, जिन पर अब दोनों पक्षों की सहमति बन गई है।</p>
<p>GCC में सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), कतर, कुवैत, ओमान और बहरीन शामिल हैं। वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि इस समझौते से भारत और GCC देशों के बीच व्यापार, निवेश और रणनीतिक संबंध और मजबूत होंगे। इससे रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे, खाद्य और ऊर्जा सुरक्षा को बढ़ावा मिलेगा तथा वैश्विक स्तर पर भारत की आर्थिक स्थिति और सुदृढ़ होगी।</p>
<p>वित्त वर्ष 2024-25 में भारत-GCC द्विपक्षीय व्यापार 178.56 अरब डॉलर रहा, जो भारत के कुल वैश्विक व्यापार का लगभग 15.4 प्रतिशत है। इसमें भारत का निर्यात 56.87 अरब डॉलर और आयात 121.66 अरब डॉलर रहा। UAE के बाद सऊदी अरब भारत का दूसरा सबसे बड़ा GCC व्यापार साझेदार है।</p>
<p>विशेषज्ञों का मानना है कि यह FTA खाद्य प्रसंस्करण, बुनियादी ढांचा, पेट्रोकेमिकल्स, आईसीटी, ऊर्जा और विनिर्माण क्षेत्रों को बड़ा प्रोत्साहन देगा। साथ ही, कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस पर निर्भरता को संतुलित करने तथा निर्यात विविधीकरण में भी मदद करेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 05 Feb 2026 17:47:51 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सऊदी अरब ने किया यमन पर हवाई हमला, UAE से मिली हथियारों की खेप को बनाया निशाना</title>
                                    <description><![CDATA[सऊदी अरब ने मंगलवार को यमन के मुकल्ला बंदरगाह पर 'सीमित सैन्य अभियान' के तहत हवाई हमले किए। सऊदी अरब का दावा है कि ये हमले यूएई (UAE) के फुजैराह से आए उन जहाजों पर किए]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/saudi-arabia-launches-air-attack-on-yemen-targets-arms-consignment/article-137800"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/yaman-air-strik.png" alt=""></a><br /><p>सना। सऊदी अरब ने मंगलवार को यमन के मुकल्ला बंदरगाह पर 'सीमित सैन्य अभियान' के तहत हवाई हमले किए। सऊदी अरब का दावा है कि ये हमले यूएई (UAE) के फुजैराह से आए उन जहाजों पर किए गए, जो अलगाववादी साउदर्न ट्रांजिशनल काउंसिल (STC) के लिए भारी मात्रा में हथियार और लड़ाकू विमान लाए थे।</p>
<p>रियाद ने इसे अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए 'रेड लाइन' बताते हुए यूएई समर्थित बलों को 24 घंटे के भीतर विवादित क्षेत्रों से हटने की चेतावनी दी है। इस घटना से खाड़ी देशों के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया है और यमन में एक नया गृहयुद्ध भड़कने की आशंका है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 30 Dec 2025 16:55:09 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>यूएई समर्थित सेना का दक्षिण यमन पर पूर्ण अधिकार, सऊदी अरब को करारा झटका </title>
                                    <description><![CDATA[यूएई समर्थित सेना ने दक्षिण यमन के सभी आठ गवर्नरेट्स पर कब्जा कर लिया है, जिससे नए देश के गठन की संभावनाएं तेज हो गई हैं। सऊदी अरब ने अपने सैनिक वापस बुला लिए हैं, जबकि क्षेत्र में तनाव और भू-राजनीतिक हलचल बढ़ गई है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/uae-backed-armys-complete-control-over-south-yemen-a-blow-to/article-135276"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/1200-x-600-px)-(1200-x-600-px)1.png" alt=""></a><br /><p>सना। संयुक्त अरब अमीरात समर्थित सेना ने दक्षिण यमन पर पूरी तरह से कब्जा कर लिया है, जिसके बाद अब एक नए देश का ऐलान हो सकता है। ये एक बहुत बड़ा जियो-पॉलिटिकल भूकंप की तरह है, क्योंकि अब दक्षिण यमन आजादी का ऐलान कर सकता है और 1960 के बाद पहली बार यमन दो देशों में बंट जाएगा। पिछले हफ्ते सदर्न ट्रांजिशनल काउंसिल के करीब 10,000 सैनिक तेल के भंडार वाले क्षेत्र हद्रामौत गवर्नरेट में और बाद में ओमान की सीमा से लगे कम आबादी वाले माराह गवर्नरेट में घुस गए, जो पहले उनके कंट्रोल में नहीं था।</p>
<p><strong>सऊदी अरब के पैरों तले खिसकी जमीन</strong></p>
<p>सऊदी अरब के लिए ये घटना पैरों तले जमीन खिसकने जैसा है, जो पहले यमन में मुख्य बाहरी एक्टर था। सऊदी अरब ने अब दक्षिणी राजधानी अदन में प्रेसिडेंशियल पैलेस और एयरपोर्ट से भी अपने सैनिकों को वापस बुला लिया है। एक न्यूज चैनल की रिपोर्ट के मुताबिक, सऊदी अरब का दक्षिणी यमन से अपनी सेना को बुलाने का मतलब ये हुआ कि सऊदी अरब ने, मान्यता प्राप्त यमन सरकार के अंदर जिन सेनाओं का समर्थन किया था।</p>
<p><strong>एक अलग राज्य घोषित करना हो सकता है जोखिम भरा </strong></p>
<p>हालांकि, कई एक्सपर्ट्स का मानना है कि तत्काल दक्षिण यमन को एक अलग राज्य घोषित करना एक जोखिम भरा पॉलिटिकल कदम होगा, क्योंकि दूसरे देशों ने भी यह रास्ता चुना है, जिसमें वेस्टर्न सहारा भी शामिल है, लेकिन बाद में वो कामयाब नहीं हो पाए। जैसे मोरक्को से अलग होने के बाद वेस्टर्न सहारा ने सोचा था कि उसके पास डिप्लोमैटिक सपोर्ट है, लेकिन हकीकत में ऐसा नहीं हो पाया। इसीलिए शायद इस कदम को उठाने पर विचार कर सकता है कि वह मध्यावधि में उत्तरी यमन से आजादी के लिए किसी तरह का रेफरेंडम कराए। फिर भी अंत में उसका भविष्य संयुक्त अरब अमीरात के फैसले पर ही निर्भर करेगा।</p>
<p>आपको बता दें कि साल 2015 में यमन की राजधानी सना पर हूती विद्रोहियों के कब्जे के बाद दक्षिणी यमन में एक अस्थायी गठबंधन बना था, जिसमें सऊदी समर्थित इस्लाह पार्टी शामिल था। लेकिन यह गठबंधन शुरू से ही असहज था और अब यूएई समर्थित पार्टी की जीत हुई है। फिलहाल अब राष्ट्रपति रशाद अल-अलीमी, सऊदी अरब जाकर पश्चिमी राजनयिकों से समर्थन मांग रहे हैं और एसटीसी दक्षिण यमन को खाली करने की अपील कर रहे हैं, जिसे मानने से एसटीसी ने इनकार कर दिया है। </p>
<p><strong>दक्षिण यमन के सभी आठ गवर्नरेट्स पर कब्जा </strong></p>
<p>ऐसा पहली बार हुआ है जब एसटीसी ने दक्षिण यमन के उन सभी आठ गवर्नरेट्स पर कब्जा जमा लिया है, जो 1960 के दशक में स्वतंत्र दक्षिण यमन का हिस्सा थे। इस घटना के बाद पूरी संभावना है कि बहुत जल्द दक्षिणी यमन आजादी का ऐलान कर सकता है, जो सऊदी अरब के लिए बहुत बड़ा झटका होगा, जबकि यूएई के लिए बहुत बड़ी डिप्लोमेटिक जीत होगी। वहीं, ओमान सीमा पर भी तनाव काफी बढ़ गया है। हालांकि ओमान ने कुछ समय के लिए अपनी सीमा बंद कर दी थी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 09 Dec 2025 11:54:29 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सऊदी अरब हमारा बहुत अच्छा सहयोगी : एफ-35 लड़ाकू विमानों की बिक्री को देंगे मंजूरी, ट्रम्प ने कहा- अब्राहम समझौते में शामिल होने का भी कर रहे आग्रह </title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने घोषणा की कि क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान की व्हाइट हाउस यात्रा के दौरान सऊदी अरब को एफ-35 लड़ाकू विमानों की बिक्री को मंजूरी दी जाएगी। ट्रम्प अब्राहम समझौते में सऊदी की संभावित भागीदारी पर भी चर्चा करना चाहते हैं। हालांकि, इजरायल इस सौदे का विरोध कर रहा है और अमेरिकी कांग्रेस एफ-35 निर्यात लाइसेंस रोक सकती है।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/saudi-arabia-our-very-good-ally-will-approve-the-sale/article-132850"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-09/trump.png" alt=""></a><br /><p>वाशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि जब क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान व्हाइट हाउस आएंगे, तो वह सऊदी अरब को एफ-35 लड़ाकू विमानों की बिक्री को मंजूरी देंगे। यह सात वर्षों में क्राउन प्रिंस की पहली अमेरिका यात्रा है। ट्रम्प अमेरिका-सऊदी संबंधों को मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं और साथ ही वे क्राउन प्रिंस से अब्राहम समझौते में शामिल होने का भी आग्रह कर रहे हैं।  उन्नत युद्धक विमानों की बिक्री की दिशा में आगे बढ़ने संबंधी सवाल पर पत्रकारों के सवाल पर अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि हम ऐसा करेंगे।</p>
<p>ट्रम्प ने ओवल ऑफिस में कहा कि हम एफ-35 बेचेंगे और सऊदी अरब हमारा बहुत अच्छा सहयोगी हैं। दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय बातचीत ओवल ऑफिस में होगी। इसे हालांकि औपचारिक राजकीय यात्रा नहीं कहा जा रहा है, लेकिन इस कार्यक्रम में हरित प्रौद्योगिकी, डिजिटल अवसंरचना, जैव प्रौद्योगिकी और रक्षा क्षेत्र में सहयोग पर चर्चा के लिए एक प्रमुख निवेश मंच शामिल है।</p>
<p>ट्रम्प ने कहा कि वह सऊदी अरब के अब्राहम समझौते में शामिल होने पर चर्चा की उम्मीद करते हैं, जो  इजरायल और कई अरब देशों के बीच अमेरिका द्वारा मध्यस्थता वाला सामान्यीकरण समझौता है। उन्होंने कहा था कि अब्राहम समझौते पर हम चर्चा करेंगे। मुझे उम्मीद है कि सऊदी अरब जल्द ही अब्राहम समझौते में शामिल होगा। वर्तमान में इजरायल मध्य पूर्व का एकमात्र देश है जिसके पास एफ-35 विमान हैं। इनकी कीमत लगभग 10 करोड़ डॉलर प्रति विमान है और इन्हें विश्व के सबसे उन्नत लड़ाकू विमानों में से एक माना जाता है।</p>
<p>इजरायल वाशिंगटन और रियाद के बीच संभावित हथियार समझौते का विरोध करता है क्योंकि इजरायल की गुणात्मक सैन्य बढ़त को बनाए रखना अमेरिकी कानून में निहित है। अमेरिका दशकों से यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है कि इजरायल संभावित क्षेत्रीय विरोधियों पर अपनी बेहतर सैन्य क्षमता बनाए रखे। इस बीच सीएनएन की रिपोर्ट के अनुसार अमेरिकी कांग्रेस सऊदी अरब को एफ-35 के निर्यात लाइसेंस को रोक सकती है।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 18 Nov 2025 16:27:12 +0530</pubDate>
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                <title>सऊदी अरब ने चीन के लेजर डिफेंस सिस्टम को बताया महाघटिया, ड्रोन हमले टेस्ट के दौरान हुआ नाकाम</title>
                                    <description><![CDATA[ सऊदी अरब की सेना ने चीन के लेजर वेपन सिस्टम को महाघटिया कहा है। सऊदी अरब दुनिया के उन पहले देशों में से एक था, जिसने चीन लेजर गाइडेड एयर डिफेंस सिस्टम खरीदा था]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/saudi-arabia-told-chinas-laser-defense-system-failed-during-mahaghtia/article-126024"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-09/untitled-design-(1).png" alt=""></a><br /><p>रियाद। सऊदी अरब की सेना ने चीन के लेजर वेपन सिस्टम को महाघटिया कहा है। सऊदी अरब दुनिया के उन पहले देशों में से एक था, जिसने चीन लेजर गाइडेड एयर डिफेंस सिस्टम खरीदा था। सऊदी अरब हालांकि अमेरिकी पैट्रियट एयर डिफेंस सिस्टम भी इस्तेमाल करता है, लेकिन उसने चीन से लेजर गाइडेड एयर डिफेंस सिस्टम इसलिए खरीदा था ताकि ड्रोन स्वार्म हमले को नाकाम कर सके। इसीलिए उसने चीन की स्काईशील्ड इंटीग्रेटेड एंटी-ड्रोन सिस्टम खरीदा था, जो टेस्ट के दौरान बुरी तरह से नाकाम रहा है। सऊदी ने फरवरी 2024 में ये लेजर वेपन खरीदा था और अभी इसकी टेस्टिंग की गई है, जिसमें ये नाकाम हो गया है। चीन के इस लेजर एयर डिफेंस सिस्टम में ड्रोन रडार, जैमिंग व्हीकल्स और चीन इलेक्ट्रॉनिक्स टेक्नोलॉजी ग्रुप कॉपोर्रेशन का साइलेंट हंटर लेजर डायरेक्टेड एनर्जी वेपन शामिल है। शुरूआती टेस्ट के दौरान ड्रोन हमलों के सामने ये एयर डिफेंस सिस्टम बुरी तरह से नाकाम हो गया। ठीक वैसे ही जैसे भारतीय हमलों के समय पाकिस्तान में चीनी एयर डिफेंस सिस्टम टांय बोल गया था। जिसके बाद सऊदी अरब की सेना ने लेजर डिफेंस सिस्टम की क्षमता पर गंभीर सवाल उठाए हैं।</p>
<p><strong>रेगिस्तानी गर्मी के कारण लेजर फायरिंग क्षमता घटी'</strong><br />रिपोर्ट के मुताबिक टेस्ट के दौरान लेजर डिफेंस सिस्टम का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा, साइलेंट हंटर लेजर, ऑपरेशनल हालात में नाकाम हो गए। सऊदी अरब के एक पूर्व सैन्य अधिकारी, जिन्हें इस प्रोजेक्ट को संभालने की जिम्मेदारी दी गई थी, उन्होंने कहा है कि प्रदर्शन के दौरान जो क्षमताएं दिखाई गईं थीं, जैसा दावा किया गया था, असली तैनाती के दौरान वो काफी कम साबित हुई हैं। उन्होंने कहा कि कई बार एक ड्रोन को मारने के लिए लगातार 15 से 30 मिनट तक लगातार लेजर टारेगेटिंग करनी पड़ी और उतने समय में दुश्मन का ड्रोन एयर डिफेंस सिस्टम को ही ध्वस्त कर देगा। उन्होंने कहा कि सऊदी अरब में उड़ने वाली धूल और रेत ने लेजर डिफेंस सिस्टम के ऑप्टिकल ट्रैकिंग को नाकाम कर दिया और बीम की ताकत को कमजोर कर दिया। इसके अलावा रेगिस्तानी गर्मी में सिस्टम के ज्यादातर पावर कूलिंग को सोंख लिया, जिससे लेजर फायरिंग क्षमता घट गई। चीन का दावा रहा है कि उसका स्काई शील्ड लेजर एयर डिफेंस सिस्टम एंटी-ड्रोन रडार के साथ हार्ड किल और सॉफ्ट किल, दोनों तरह का ऑप्शन देती है। इसके हर एक बैटरी में चार व्हीकल होते हैं- एक 3डी टीडब्ल्यूए रडार, एक अएरअ ड्रोन-रोधी रडार- जिसमें तीन साइड-फेसिंग पैनल होते हैं, जो बिना घुमाव के 360-डिग्री कवरेज प्रदान करते हैं; दो जेएन1101 ड्रोन-रोधी जैमिंग वाहन, जिनमें अवरोधन और इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग दोनों क्षमताएं हैं। और साइलेंट हंटर लेजर डायरेक्टेड-एनर्जी वेपन, जो ड्रोनों को सीधे नष्ट करने के लिए बनाया गया है। यह रडार जैमिंग और लेजर दोनों इंटीग्रेट होकर एक ढाल बन जाते हैं। लेकिन सऊदी में ये नाकाम हो गया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 06 Sep 2025 12:37:51 +0530</pubDate>
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                <title>सऊदी में अमेरिका और रूस में शुरू हुई यूक्रेन युद्ध विराम के लिए बातचीत</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिका और रूस के अधिकारियों ने सऊदी अरब में यूक्रेन युद्ध मुद्दे पर बैठक की है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/negotiations-for-ukraine-ceasefire-in-saudi-and-russia-in-saudi/article-104790"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-02/257rtrer76.png" alt=""></a><br /><p>रियाद। अमेरिका और रूस के अधिकारियों ने सऊदी अरब में यूक्रेन युद्ध मुद्दे पर बैठक की है। रियाद में मंगलवार को हुई इस बैठक में रूस की तरफ से विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव और राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के विदेश नीति सलाहकार यूरी उशाकोव शामिल हुए। अमेरिका की ओर से विदेश मंत्री मार्को रुबियो, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार माइक वाल्ट्ज और पश्चिम एशिया के लिए डोनाल्ड ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विट्कॉफ बैठक में मौजूद रहे। यूक्रेन को इस बैठक में नहीं बुलाया गया है, जिस पर यूरोप की ओर से फिक्र जाहिर की गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, सऊदी अरब में यह बैठक यूक्रेन पर रूसी हमले के तीन साल बाद हो रही है। अमेरिका की शांति समझौते में भूमिका की वजह से इसे अहम माना जा रहा है। अमेरिकी विदेश विभाग और रूस के अधिकारियों में बातचीत राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच हाल ही में फोन पर चर्चा के बाद हो रही है। फोन पर दोनों नेताओं ने यूक्रेन पर तुरंत शांति वार्ता शुरू करने पर सहमति जताई थी।</p>
<p><strong>यूरोप और यूक्रेन की चिंता :</strong></p>
<p>रूस और अमेरिका इस बैठक के दो पक्ष हैं और सऊदी मध्यस्थ की भूमिका मे है। इस बातचीत में यूक्रेन को नहीं बुलाया गया है, जबकि यह बातचीत यूक्रेन और रूस के बीच चल रहे युद्ध को खत्म करने के उद्देश्य से हो रही है। यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने सोमवार को कहा कि अगर कीव भाग नहीं लेता है तो फिर उनका देश बैठक से निकले नतीजे को स्वीकार नहीं करेगा। यूरोपीय संघ को भी चर्चा में शामिल नहीं किया गया है। यूरोपीय नेताओं ने इस पर एतराज जताते हुए किसी भी शांति वार्ता में अपनी भागीदारी की जरूरत पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि एक निष्पक्ष और स्थायी शांति के लिए उनकी मौजूदगी जरूरी है। ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने अपने बयान में कहा कि यूक्रेन और रूस के बीच स्थायी शांति के लिए अमेरिका की सुरक्षा गारंटी जरूरी है।</p>
<p><strong>ट्रंप ने बदली है नीति :</strong></p>
<p>यह बैठक इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सत्ता में आने के बाद रूस को अलग-थलग करने की अमेरिकी नीति में बदलाव किया है। इससे पहले अमेरिका यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद उसे अलग-थलग करने की कोशिश कर रहा था। अब दोनों देश को शीर्ष अधिकारी मिले हैं। यह बातचीत डोनाल्ड ट्रंप और व्लादिमीर पुतिन के बीच बैठक का रास्ता भी खोल सकती है। पुतिन के विदेश नीति सलाहकार उशाकोव ने कहा कि यह बातचीत पूरी तरह से द्विपक्षीय है। इसमें यूक्रेनी अधिकारी शामिल नहीं हैं। डोनाल्ड ट्रंप ने हालांकि यूक्रेन को भरोसा दिया है कि उसको बातचीत में शामिल रखा जाएगा। हालांकि जिस तरह से रूस और अमेरिका ही बातचीत कर रहे हैं, उससे यूरोप और यूक्रेन चिंता में है। यूरोपीय देशों और यूक्रेन की नाराजगी का असर नाटो के भविष्य पर होने का भी अंदेशा कई एक्सपर्ट जता रहे हैं।</p>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Wed, 19 Feb 2025 11:47:56 +0530</pubDate>
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