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                <title>rabi crop - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>rabi crop RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>असर खबर का : किसानों को राहत, चना खरीद की बढ़ाई अवधि</title>
                                    <description><![CDATA[खरीद अवधि 60 दिनों से बढ़कर 90 दिन की हुई।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/impact-of-news--relief-for-farmers--gram-procurement-period-extended/article-155358"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/1111200-x-600-px)128.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। रबी विपणन सीजन में किसानों को राहत देते हुए राज्य सरकार ने चने की समर्थन मूल्य पर खरीद की अवधि बढ़ा दी है। पहले यह खरीद 25 मई तक निर्धारित थी, लेकिन अब इसे बढ़ाकर 24 जून 2026 कर दिया गया है। इसके साथ ही खरीद अवधि 60 दिनों से बढ़कर 90 दिन की हो गई है। सरकार के इस निर्णय से उन किसानों को फायदा मिलेगा, जो अब तक अपनी उपज समर्थन मूल्य पर नहीं बेच पाए हैं। कोटा संभाग के चारों जिलों कोटा, बूंदी, बारां और झालावाड़ में खरीद केंद्रों पर सभी आवश्यक व्यवस्थाएं की गई हैं। संबंधित एजेंसियों की ओर से तौल, भंडारण, बारदाना, परिवहन और किसानों के पंजीकरण की व्यवस्थाएं पूरी रखी गई हैं। बावजूद इसके खरीद की रफ्तार बेहद धीमी बनी हुई है।</p>
<p><strong>अब तक केवल 18413 मीट्रिक टन की ही खरीद</strong><br />संभाग में चना खरीद का कुल लक्ष्य 66 हजार 400 मीट्रिक टन निर्धारित किया गया था, लेकिन अब तक केवल 18 हजार 413 मीट्रिक टन चने की ही खरीद हो सकी है। लक्ष्य की तुलना में यह आंकड़ा काफी कम माना जा रहा है। दूसरी ओर सरसों खरीद की स्थिति और भी चिांजनक है। संभाग में सरसों खरीद का लक्ष्य 97 हजार 150 मीट्रिक टन तय किया गया था, लेकिन अब तक एक भी मीट्रिक टन सरसों की खरीद नहीं हो पाई है। अधिकारियों के अनुसार खरीद केंद्रों पर सभी व्यवस्थाएं दुरुस्त हैं, लेकिन किसान समर्थन मूल्य पर सरसों बेचने के लिए केंद्रों तक नहीं पहुंच रहे हैं। इसका मुख्य कारण खुले बाजार और कृषि उपज मंडियों में सरसों के बेहतर दाम मिलना बताया जा रहा है। मंडियों में समर्थन मूल्य से अधिक कीमत मिलने के कारण किसान सीधे व्यापारियों को उपज बेच रहे हैं।</p>
<p><strong>नवज्योति ने प्रमुखता से उठाया था मामला</strong><br />चना खरीद को लेकर किसानों को हो रही परेशानी के सम्बंध में गत 29 अपै्रल को चना खरीद कर रहा चक्करघिन्नी शीर्षक से समाचार प्रकाशित किया गया था। समाचार में बताया था कि चना खरीद को लेकर इस बार एमएसपी का 90-60 का गणित किसानों के लिए नई चुनौती बन गया है। सरकार ने खरीद अवधि 90 दिन से घटाकर 60 दिन कर दी है, जिससे मंडियों में दबाव बढ़ने और किसानों को समय पर उपज बेचने में दिक्कतें आने लगी हैं। पूर्व के वर्षो में भी 90 दिन की अवधि के दौरान भी कई बार तकनीकी समस्याओं और धीमी प्रक्रिया के कारण किसानों को इंतजार करना पड़ता था। अब अवधि घटाकर 60 दिन करने से यह चुनौती और बढ़ सकती है। कम समय में अधिक खरीद का दबाव मंडियों और खरीद केंद्रों पर साफ दिखाई दे रहा है।</p>
<p>समर्थन मूल्य पर चना खरीद की अवधि कम करने से किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। अब सरकार की ओर से खरीद की अवधि वापस 90 दिन करने से काफी राहत मिलेगी।<br /><strong>- वीरेन्द्र सिंह, प्रगतिशील किसान</strong></p>
<p>रबी विपणन सीजन में किसानों को राहत देते हुए राज्य सरकार ने चने की समर्थन मूल्य पर खरीद की अवधि बढ़ा दी है। पहले यह खरीद 25 मई तक निर्धारित थी, लेकिन अब इसे बढ़ाकर 24 जून 2026 कर दिया गया है।<br /><strong>- विष्णु शर्मा, क्षेत्रीय अधिकारी, राजफैड</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 29 May 2026 12:57:36 +0530</pubDate>
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                <title>यूरिया की कालाबाजारी किसानों पर पड़ रही भारी </title>
                                    <description><![CDATA[क्षेत्र में सरसों की फसल में यूरिया खाद देने का समय चरम पर है। परंतु क्षेत्र में सहकारी अधिकारी व दुकानदारों ने यूरिया देने की जगह हाथ खड़े कर दिए हैं। सम्पूर्ण क्षेत्र में यूरिया की कमी हो जाने से किसान खाद के लिए रुके हुए हैं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/black-marketing-of-urea-is-falling-heavily-on-the-farmers/article-29209"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-11/urea-ki-kalabazari-kissano-par-pad-rahi-bhari..sangod-news-kota-10.11.2022.jpg" alt=""></a><br /><p> सांगोद। यूरिया की किल्लत से क्षेत्र के किसान बेहाल हैं। मार्केटिंग सोसायटी में यूरिया नहीं पहुंच पा रहा है। इसी का लाभ उठाकर प्राइवेट डीलर किसानों से मनमाने दाम वसूल रहे हैं। किसानों ने बताया कि प्राइवेट डीलरों के यहां यूरिया के ट्रक खाली होकर बिक भी रहे हैं। मजबूरन किसानों को 266 का यूरिया का कट्टा 300 रुपए से भी अधिक में खरीदना पड़ रहा है। साथ ही प्राइवेट डीलरों द्वारा यूरिया के साथ प्राइवेट कंपनियों का अटैचमेंट देकर किसानों की जेबें काटी जा रही हैं। उच्च कृषि अधिकारियों से किसानों द्वारा शिकायत करने पर अधिकारी लिखित में शिकायत मांग रहे हैं।</p>
<p>क्षेत्र में सरसों की फसल में यूरिया खाद देने का समय चरम पर है। परंतु क्षेत्र में सहकारी अधिकारी व दुकानदारों ने यूरिया देने की जगह हाथ खड़े कर दिए हैं। सम्पूर्ण क्षेत्र में यूरिया की कमी हो जाने से किसान खाद के लिए रुके हुए हैं। अधिक पैदावार बढ़ाने व उन्नत खेती के लिए उपयोग में लिए जाने वाले यूरिया की कमी हो जाने से क्षेत्रीय किसान चिंतित हैं। गौरतलब है कि रबी की फसल में खाद देने का समय आ चुका है एवं क्षेत्र में किसानों को यूरिया की जरूरत है। परंतु अधिकारियों नें स्टॉक खत्म बताकर हाथ खड़े कर दिए है। प्राइवेट डीलर भी किसानों को पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध नहीं करवा पा रहे हैं। क्षेत्र में यूरिया की त्राहि-त्राहि मची हुई है। क्षेत्र में यूरिया की किल्लत है तथा किसान प्राइवेट डीलरों के पास भटक रहे हैं तथा अपनी जेबे कटवा कर महंगे दामों में यूरिया खरीद रहे हैं। मार्केटिंग सोसायटी में भी यूरिया का पर्याप्त स्टॉक नहीं हो पाया है। जिससे मजबूरन किसानों को 266 रुपये के यूरिया के कट्टे को 300 रुपये से भी अधिक दामो में लेना पड़ रहा है। </p>
<p>प्राइवेट डीलरों के पास यूरिया खाद के लगातार ट्रक आ रहे हैं एवं कालाबाजारी जारी है। प्राइवेट डीलर किसानों से मनमाने दाम वसूल रहे हैं। कृषि विभाग के अधिकारियों ने आंखों पर पट्टी बांध रखी है। प्राइवेट डीलरों पर सख्त कार्रवाई करने की बजाए मार्केटिंग सोसायटी में यूरिया के आने का आश्वासन दे रहे हैं।<br /><strong>-नंदकिशोर मीणा, किसान</strong></p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br /> सहकारी में 1200 यूरिया के बैग आए है। लेकिन पोश मशीन के नही चलने के कारण वितरण नहीं किए गए है। वहीं बाजार रेट से अधिक यूरिया के  दाम वसूलने की कोई जानकारी नहीं है। अगर यूरिया के दाम ज्यादा वसूलने की किसानों द्वारा लिखित शिकायत की जाती है तो उचित कार्रवाई की जाएगी। <br /><strong>-आरएस नागर, अतिरिक्त चार्ज एडी, कृषि विभाग सांगोद</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 10 Nov 2022 16:14:46 +0530</pubDate>
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                <title>ग्रामीण क्षेत्रों में डीएपी खाद की किल्लत से सरसों की बुवाई प्रभावित</title>
                                    <description><![CDATA[सरसों की बुवाई के लिए  खाद बीज डीलरों के पास डीएपी खाद उपलब्ध नहीं है जिसके कारण उनकी सरसों की फसल की बुवाई समय पर नहीं हो पा रही है, इसके कारण परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है तथा उनकी बुवाई का कार्य प्रभावित हो रहा है, परंतु कृषि विभाग के द्वारा खाद आपूर्ति के लिए पर्याप्त इंतजाम नहीं किए गए हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bharatpur/mustard-sowing-affected-due-to-shortage-of-dap-fertilizer-in/article-24654"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-09/612.jpg" alt=""></a><br /><p>नांगलशेरपुर। पिछले दिनों क्षेत्र में हुई अच्छी बारिश के बाद किसान रबी सीजन में सरसों की फसल की बुवाई की तैयारियों में जुटे हैं, परंतु डीएपी खाद पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध नहीं होने के कारण किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सरसों की बुवाई समय पर नहीं हो पा रही है। श्रीमन गुर्जर, मेघराम, रामावतार सहित कई किसानों ने बताया कि सरसों की बुवाई के लिए  खाद बीज डीलरों के पास डीएपी खाद उपलब्ध नहीं है जिसके कारण उनकी सरसों की फसल की बुवाई समय पर नहीं हो पा रही है, इसके कारण परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है तथा उनकी बुवाई का कार्य प्रभावित हो रहा है, परंतु कृषि विभाग के द्वारा खाद आपूर्ति के लिए पर्याप्त इंतजाम नहीं किए गए हैं।</p>
<p>जानकारों की मानें तो पिछले दिनों क्षेत्र में हुई अच्छी बारिश से किसानों द्वारा सरसों बुवाई बिना सिंचाई के ही होना संभव हुआ है। इस वजह से सरसों का बुवाई क्षेत्रफल बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है जिसके कारण भी खाद की मांग बढ़ी है। इस संबंध में कृषि उपनिदेशक रामलाल जाट ने बताया कि जिले में इस सीजन में 11 हजार मेट्रिक टन खाद की मांग की गई थी जिस पर अब तक 6 हजार मेट्रिक टन खाद की आपूर्ति हो चुकी है तथा शेष आपूर्ति भी जल्द हो जाएगी। उन्होंने बताया कि यह सीजन दिसंबर तक चलता है। उन्होंने बताया कि इस समय किसान सरसों की बुवाई की तैयारियों में लगे हुए हैं, जरूरत के मुताबिक आपूर्ति हो रही है परंतु किसान जल्दबाजी में जरूरत से ज्यादा खाद खरीद कर रखना चाहते हैं। हम इस संबंध में किसानों को जागरूक कर रहे हैं कि सरसों की बुवाई की जरूरत के मुताबिक ही खाद वर्तमान में रखें अतिरिक्त खाद रखने से कालाबाजारी को बढ़ावा मिल जाता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>भरतपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 28 Sep 2022 12:03:58 +0530</pubDate>
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