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                <title>city development - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>सुरक्षित सड़क से स्वच्छता तक रहेगा फोकस, सुनील कोठारी- 300 साल पुराने जयपुर को नई पहचान देने का संकल्प</title>
                                    <description><![CDATA[जयपुर नगर निगम के नवनिर्वाचित महापौर सुनील कोठारी ने पदभार ग्रहण करते हुए शहर के विकास का विजन सामने रखा। स्वच्छता, सुंदरता के साथ सुरक्षित सड़कें, बेहतर नागरिक सुविधाएं और ऐतिहासिक विरासत के अनुरूप विकास को प्राथमिकता बताया। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/focus-will-be-from-safe-roads-to-cleanliness-sunil-kothari/article-166669"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-09/111200-x-600-px)100.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। नगर निगम जयपुर के नव निर्वाचित महापौर सुनील कोठारी ने पदभार ग्रहण करने के साथ ही शहर के विकास का अपना विजन सामने रखा। उन्होंने कहा कि जयपुर को केवल स्वच्छ और सुंदर बनाने तक सीमित नहीं रखा जाएगा, आमजन को सुरक्षित सड़कें, बेहतर नागरिक सुविधाएं और शहर की ऐतिहासिक विरासत के अनुरूप विकास देना प्राथमिकता होगी। उन्होंने कहा कि जयपुर के 300 साल पुराने गौरव को आगे बढ़ाते हुए अब नए जयपुर की दिशा में काम किया जाएगा। पदभार ग्रहण करने के बाद मीडिया से बातचीत में महापौर कोठारी ने सभी आमजन के साथ ही पार्टी के प्रत्येक कार्यकर्ता का आभार प्रकट करते हुए कहा कि शहर के विकास के लिए आमजन के साथ व्यापारियों, विभिन्न सामाजिक एवं व्यावसायिक संगठनों, सभी पार्षदों, निगम के अधिकारी-.कर्मचारियों के साथ राज्य और केन्द्र सरकार का सहयोग लिया जाएगा। सामूहिक प्रयासों से ही जयपुर को बेहतर शहर के रूप में विकसित किया जा सकता है।</p>
<p>महापौर ने कहा कि त्योहारों के सीजन को देखते हुए शहर की स्वच्छता व्यवस्था और सड़कों की स्थिति की जल्द समीक्षा की जाएगी। इसके लिए अधिकारियों के साथ बैठक कर विभिन्न क्षेत्रों में सामने आ रही समस्याओं को चिह्नित किया जाएगा और उनके समाधान के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। आमजन को आवागमन में परेशानी नहीं हो और सड़क दुर्घटनाओं की आशंका कम हो, इसके लिए सड़क सुरक्षा को भी प्राथमिकता में रखा जाएगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 26 Sep 2026 10:21:24 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur KD]]></dc:creator>
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                <title>कोटा में हर साल बलि चढ़ रहे 9 हजार पेड़ </title>
                                    <description><![CDATA[कोटा शहर  में पहले जहां घने जंगल और बाग हुआ करते थे। उनमें से पेड़ों की लगातार कटाई होने से उनकी संख्या कम हो गई है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/9-thousand-trees-are-being-sacrificed-every-year-in-kota/article-47911"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-06/kota-mein-har-saal-bali-chadh-rahe-9-hajar-ped...kota-news-06-06-2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। बरसात के सीजन में हर साल कोटा में लाखों पौधे तो लगाए जा रहे हैं। जबकि उनमें से अधिकतर पेड़ ही नहीं बन पा रहे। वहीं कोटा में हर साल मात्र दाह संस्कार के लिए ही करीब 9 हजार पेड़ों की बलि चढ़ाई जा रही है। जिससे एक तरफ लगातार पेड़ कट रहे हैं और दूसरी तरफ जंगल घट रहे हैं। कोटा शहर में जहां आबादी के साथ ही शहर का विकास व विस्तार हो रहा है। वहां लोगों की मौत का आंकड़ा भी लगातार बढ़ता जा रहा है। जानकारी के अनुसार कोटा में रोजाना करीब 20 से 25 लोगों की मौत हो रही है। महीने में यह संख्या करीब 750 और साल में 9 हजार के करीब पहुंचती है। इनमें से अधिकतर का दाह संस्कार हिन्दू रीति रिवाज के अनुसार मुक्तिधामों में लकड़ियों पर किया जा रहा है। एक शव के दाह संस्कार में 12 मन यानि करीब 5 क्विंटल लकड़ी का उपयोग हो रहा है। सामान्य तौर पर दाह  संस्कार में बबूल की लकड़ी का उपयोग किया जाता है। बबूल के एक सामान्य पेड़ में करीब 5 क्विंटल लकड़ी निकलती है। इस हिसाब से मात्र कोटा में ही जहां हजार साल 9 हजार लोगों की मौत हो रही है। उनका दाह संस्कार लकड़ी पर किया जा रहा है। ऐसे में कोटा में सिर्फ दाह संस्कार के लिए हर साल 9 हजार पेड़ों की बलि दी जा रही है। </p>
<p><strong>जीवन में पांच पेड का उपयोग करता है व्यक्ति</strong><br />माना जाता है कि एक व्यक्ति अपने जीवन में पांच पेड़ का उपयोग करता है। उसके दांह संस्कार के अलावा हलवाई के यहां भट्टी में जलाने, फर्नीचर बनाने और मकान समेत अन्य तरह से भी लकड़ी का उपयोग किया जा रहा है। ऐसे में कटने वाले पेड़ों की संख्या काफी अधिक है। जबकि कोटा में हर साल बरसात के सीजन में लाखों पौधे लगाए जा रहे हैं। जिनमें से गिनती के ही पौधे पेड़ बन पा रहे हैं। एक पौधे को पेड़ बनने में कई साल लगता है। </p>
<p><strong>पुराने शहर में हरियाली, नए कोटा में जगह खाली</strong><br />कोटा शहर  में पहले जहां घने जंगल और बाग हुआ करते थे। उनमें से पेड़ों की लगातार कटाई होने से उनकी संख्या कम हो गई है। वर्तमान में शहर में न तो घने जंगल बचे हैं और न ही घने बाग। स्टेशन से नयापुरा तक जरूर बागों में पेड़ अधिक है। साथ ही सड़क किनारे पुराने पेड़ होने से हरियाली दिख रही है। हालांकि यहां भी अधिकतर पेड़ पुराने होने से गिरकर टूट चुके हैं। पेड़ों की अधिकता के कारण अभी भी पुराने शहर में हरियाली नजर आ रही है। जबकि नए कोटा में एरोड्राम से महावीर नगर व आरकेपुरम श्रीनाथपुरम् तक पेड़ तो हैं लेकिन उनकी संख्या कम होने से सड़क किनारे छाया देखने से भी नहीं मिलती है। यही कारण है कि नए कोटा में पेड़ कम होने से यहां का तापमान पुराने शहर के तापमान से दो से तीन डिग्री अधिक ही रहता है।</p>
<p><strong>विद्युत व गैस आधािरत बने शवदाह गृह</strong><br />पेड़ों को कटने से बचाने के लिए कोटा में लम्बे समय से विद्युत शवदाह गृह शुरू करने की मांग की जा रही थी। जिसकी शुरुआत दस साल पहले 2013 में किशोरपुरा स्थित मुक्तिधाम में विद्युत शवदाह गृह बनाकर कर दी गई थी। लेकिन उसके बनने के बाद भी अभी तक लोगों में जागरूकता की कमी या धार्मिक आस्था आड़े आने से विद्युत शवदाह गृह में बहुत कम लोग अंतिम संस्कार करवा रहे हैं। अधिकतर अंतिम संस्कार लावारिस शवों के ही हो रहे हैं। कोटा में पहले जहां एक ही विद्युत शवदाह गृह था। वहीं अब इनकी संख्या बढ़कर दो हो गई है। दूसरा संजय नगर स्टेशन क्षेत्र स्थित मुक्तिधाम में हाल में ही शुरू हुआ है। जबकि आर.के. पुरम् स्थित मुक्तिधाम में सीएनजी गैस पर आधारित शवदाह गृह बनकर शुरू हो गया है। </p>
<p><strong>विद्युत शवदाह गृह में हर महीने 30 का औसत</strong><br />किशोरपुरा स्थित विद्युत शवदाह गृह को बने हुए दस साल का समय हो चुका है। लेकिन अभी भी उसमें दाह संस्कार की संख्या काफी कम है। जानकारी के अनुसार इस शवदाह गृह में हर महीने औसतन करूब 30 से 35 शवों का ही अंतिम संस्कार हो रहा है। हालांकि कोरोना काल में लकड़ियों के स्थान पर विद्युत शवदाह गृह में ही शवों का अंतिम संस्कार होने से उस समय एक ही दिन में कई शवों का दाह संस्कार हो रहा है। </p>
<p><strong>निगम पौधारोपण पर खर्च करेगा 8 करोड़ रुपए</strong><br />शहर में बरसात के सीजन में वन विभाग समेत अन्य विभाग व संस्थाएं पौधे लगाएंगे। नगर निगम कोटा उत्तर व कोटा दक्षिण की ओर से इस बार पौधारोपण के लिए वन विभाग को 8 करोड़ रुपए बजट दिया गया है। जिसमें वे भी पौधे लगाएंगे और शहर वासियों को निगम के माध्यम से नि:शुल्क पौधे बाटे जाएंगे।  इधर लोगों का कहना है कि सिर्फ पौधे लगाना ही पर्याप्त नहीं है। उनकी देखभाल कर पेड़ बनाना भी होगा। तभी पौधे लगाने का लाभ है। </p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br /> कोटा में हर दिन करीब 20 से 25 शवों का अंतिम संस्कार लड़की पर हो रहा है। हिन्दू संस्कूति के अनुसार लड़की पर दाह संस्कार करना अच्छा मानते हैं। एक शव के दाह संस्कार में करीब 5 क्विंटल लकड़ी लगती है। यह लकड़ी बबूल के एक सामान्य पेड़ से निकल जाती है। इस हिसाब से कोटा में हर साल दाह संस्कार में 9 हजार पेड़ों का उपयोग हो रहा है।  जबकि कोटा में विद्युत शवदाह गृह बन चुके हैं। हालांकि इनकी संख्या बढ़ाने व हर क्षेत्र या मुक्तिधाम में बनाने की आवश्यकता है। पेड़ों को बचाने के लिए उनकी कटाई कम और पौधारोपण अधिक करना होगा।  <br /><strong>- राजाराम जैन कर्मयोगी</strong></p>
<p>नगर निगम की ओर से वन विभाग को 8 करोड़ रुपए बजट दिया गया है। जिससे कोटा उत्तर व कोटा दक्षिण निगम में पौधारोपण किया जाएगा। सरकारी विभागों के अलावा लोग भी अपने स्तर पर पौधे लगा सकेंगे। पौधे बड़े होकर पेड़ बनें इसके लिए सभी को जिम्मेदारी दी जाती है। लेकिन नए कोटा क्षेत्र में चट्टान व पथरीला इलाका अधिक होने से यहां पौधों की सर्वाइवल दर काफी कम है। जिससे यहां पौधे तो लगते हैं लेकिन पनप कम पाते हैं और पेड़ नहीं बन जाते। जिससे नए कोटा में पेड़ों की संख्या कम दिखती है। <br /><strong>- ए.क्यू कुरैशी, एक्सईन नगर निगम कोटा दक्षिण</strong></p>
<p><strong>प्रकृति में संतुलन के लिए पेड़ होना आवश्यक</strong><br /> जिस तरह से जनसंख्या बढ़ रही है। शहर का विकास हो रहा है। ऐसे में पेड़ों की बलि भी दी जा रही है। विकास व दाह संस्कार के लिए पेड़ कट रहे हैं तो प्रकृति का संतुलन बिगड़ना स्वाभाविक है। ऐसे में प्रकृति का संतुलन बनाए रखने के लिए पेड़ों का होना आवश्यक है। इसके लिए पौधे लगाने के बाद उनकी इस तरह से देखभाल की जाए कि वह पेड़ बन सके। यह किसी एक की नहीं हर व्यक्ति की जिम्मेदारी है। <br /><strong>- राकेश नामा, दादाबाड़ी</strong></p>
<p><strong>विद्युत शवदाह गृह का हो अधिक उपयोग</strong><br /> जिस तरह से बड़े शहरों में अधिकतर दाह संस्कार विद्युत शवदाह गृह में हो रहे हैं। उसी तरह अब  कोटा में भी विद्युत  शवदाह बनने लगे हैं। ऐसे में अधिकतर लोगों को इनका उपयोग करना चाहिए। जब अधिक लोग उपयोग करेंगे तो विद्युत शवदाह गृहों की संख्या भी बढ़ेगी। इससे लकड़ी की बचत और पर्यावरण को भी खतरा कम होगा। <br /><strong>- संगीता जांगिड़, महावीर नगर तृतीय</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 06 Jun 2023 15:17:30 +0530</pubDate>
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                <title>पांच आवासीय और व्यवसायिक योजनाओं की लॉन्चिंग</title>
                                    <description><![CDATA[आमजन ,ट्रक मोटर रिपेयर, चार्टर्ड अकाउंटेंट, पशुपालको के लिए बनाई गई योजनाओं की लॉन्चिंग यूडीएच मंत्री शांति धारीवाल ने  सिविल लाइन आवास पर की ।  न्यास द्वारा लांच की गई पांचों योजनाओं में 3 हजार के करीब भूखंड है एवं योजनाएं जिन क्षेत्रों में विकसित की गई है वहां सभी आधारभूत एवं जन सुविधाएं उपलब्ध रहेंगी ।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/launching-of-five-residential-and-commercial-schemes/article-35894"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-01/10.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। नगरीय विकास एवं स्वायत्त शासन मंत्री शांति धारीवाल ने शनिवार को कोटा को एक और सौगात दी। मंत्री  धारीवाल की पहल पर कोटा नगर विकास न्यास ने आज पांच आवासीय एवं व्यवसायिक योजनाओं का पिटारा खोला। आमजन ,ट्रक मोटर रिपेयर, चार्टर्ड अकाउंटेंट, पशुपालको के लिए बनाई गई योजनाओं की लॉन्चिंग यूडीएच मंत्री शांति धारीवाल ने  सिविल लाइन आवास पर की । योजनाओं की लॉन्चिंग के मौके पर उन्होंने  कहा कि कोटा में रियायतो पर विभिन्न योजनाएं लागू कर आमजन एवं समाज विभिन्न तबकों को राहत प्रदान की गई है। इसी कड़ी में आज भी जिन योजनाओं की लॉन्चिंग की गई है सभी योजनाएं सुविधाओंयुक्त एवं नियमों के तहत राहत प्रदान करने वाली है। </p>
<p>योजना की लॉन्चिंग के मौके पर चार्टर्ड अकाउंटेंट एसोसिएशन एवं ट्रक मोटर रिपेयर यूनियन के पदाधिकारियों ने यूडीएच मंत्री शांति धारीवाल का आभार व्यक्त कर स्वागत सम्मान किया। न्यास द्वारा लांच की गई पांचों योजनाओं में 3 हजार के करीब भूखंड है एवं योजनाएं जिन क्षेत्रों में विकसित की गई है वहां सभी आधारभूत एवं जन सुविधाएं उपलब्ध रहेंगी । लॉन्चिंग के मौके पर न्यास ओएसडी आरडी मीणा, सचिव राजेश जोशी , उप सचिव मोहम्मद ताहिर,मुख्यलेखाधिकारी टीपी मीणा , नगर नियोजक महावीर मीणा सहित न्यास अधिकारी मौजूद रहे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/launching-of-five-residential-and-commercial-schemes/article-35894</link>
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                <pubDate>Sat, 28 Jan 2023 13:31:53 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>शहरों के समग्र विकास पर देना होगा ध्यान</title>
                                    <description><![CDATA[भारत की वर्तमान जनसंख्या का लगभग 31 प्रतिशत हिस्सा शहरों में बसता है और इनका सकल घरेलू उत्पाद में 63 प्रतिशत का योगदान है ऐसी उम्मीद की जा रही है कि वर्ष 2030 तक शहरी क्षेत्रों में भारत की आबादी का 40 प्रतिशत हिस्सा रहेगा और भारत के सकल घरेलू उत्पाद में उसका योगदान 75 प्रतिशत का होगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/the-focus-will-have-to-be-on-the-overall-development/article-24809"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-09/e1.jpg" alt=""></a><br /><p>अभी हाल ही में प्रधानमंत्री ने शहरी विकास का जिक्र करते हुए कहा था कि अगले 25 सालों के विजन के साथ शहरी विकास के रोडमैप पर कार्य करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा था कि सरकार का प्रयास है कि हमारे शहर समग्र जीवनशैली का हिस्सा बनें। दरअसल भारत की वर्तमान जनसंख्या का लगभग 31 प्रतिशत हिस्सा शहरों में बसता है और इनका सकल घरेलू उत्पाद में 63 प्रतिशत का योगदान है ऐसी उम्मीद की जा रही है कि वर्ष 2030 तक शहरी क्षेत्रों में भारत की आबादी का 40 प्रतिशत हिस्सा रहेगा और भारत के सकल घरेलू उत्पाद में उसका योगदान 75 प्रतिशत का होगा। इसलिए शहरी विकास के लिए अगले 25 साल का रोडमैप तैयार करना जरूरी है, लेकिन इसमें कई चुनौतियां भी हैं। दरअसल देश के विकास के लिए शहरों की भूमिका महत्वपूर्ण है। वैसे तो भारत कृषि प्रधान देश कहलाता है, क्योंकि भारत की जनसंख्या का दो तिहाई हिस्सा अभी भी गांवों में रहता है। लेकिन गांवों से खेतीबाड़ी से केवल 16 प्रतिशत जीडीपी ही आता है। ज्यादातर जीडीपी मुख्यतया सर्विस सेक्टर और इंडस्ट्रियल एक्टिविटी से आता है। वैसे भी हमारे देश में कृषि से पर्याप्त खाद्यान्न की उपज हो ही जाती है। इसलिए अब देश को आगे बढ़ाने के लिए शहरों की ओर ध्यान देना बहुत जरूरी है।</p>
<p>पुराने जमाने में आबादी कम हुआ करती थी। लोग छोटी-छोटी बस्तियों, गांवों में और कस्बों में रहा करते थे, लेकिन जैसे-जैसे दुनिया की आबादी में बढ़ोत्तरी होने लगी, बस्तियां गांवों में, गांव कस्बों में, कस्बे नगरों में और नगर महानगरों में तब्दील होने लगे। शहर विकास करते गए और एक बड़ी आबादी इस विकास में सहायक की भूमिका निभाती रही। शहरों में आबादी बढ़ने के साथ-साथ, उद्योगों का विकास, उन्नत व्यापार, लेखन कला का विकास, श्रम विभाजन और कुशल परिवहन व्यवस्था आदि कारकों ने शहरीकरण को बढ़ाने में काफी योगदान दिया है। उन्नत व्यापार शहरीकरण के आर्थिक महत्व को बताता है। व्यापार के द्वारा ही गांव से कच्चा माल और खाद्यान्न शहरों तक पहुंचता है और शहरों में बनने वाला सामान गांवों, कस्बों तक आता है। इसके अलावा शहरीकरण की प्रक्रिया में कई लोगों, मजदूरों का पलायन गांवों से शहरों की तरफ होता है। इसका बड़ा कारण ये है कि शहर लोगों को विनिर्माण और व्यवसायों के अलावा नौकरी, शिक्षा और मनोरंजन के बढ़ते अवसर भी प्रदान करते हैं। लिहाजा अब मौजूदा समय में भारतीय शहरों की स्थिति और उपयोगिता पर ध्यान देना जरूरी है।<br />शहरीकरण को भारत में आर्थिक विकास का एक प्रमुख चालक माना जाता है। भारत लगभग 2 दशकों से दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक रहा है। देश की आजादी के 100वें साल यानी 2047 तक दुनिया की शीर्ष 3 सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में भारत के शामिल होने की संभावना है। गौरतलब है कि मौजूदा समय में देश की लगभग 3 फीसद भूमि पर ही शहरों का कब्जा है, लेकिन देश के सकल घरेलू उत्पाद में 70 फीसद से अधिक का योगदान शहरों का ही है। ये आंकड़ा शहरों की आर्थिक उत्पादकता के स्तर को दर्शाता है। आंकड़ों के मुताबिक जहां 1901 में भारत में शहरी क्षेत्र में महज 2.5 मिलियन लोग रहते थे, जो जनसंख्या का 10.84 फीसद था। वहीं इसके 100 साल बाद शहरी आबादी लगभग 12 गुना बढ़ गई है। 2011 की जनगणना के मुताबिक, भारत में कुल 1210.2 मिलियन आबादी में से लगभग 377.1 मिलियन आबादी शहरी क्षेत्रों में निवास करती है। बीते दशक से शहरी क्षेत्रों की आबादी में  91.0 मिलियन की नेट बढ़ोतरी देखी गई है। देश की कुल आबादी की तुलना में शहरी आबादी का प्रतिशत 31.6 है। संयुक्त राष्टÑ ने अनुमान लगाया है कि 2050 तक 50 फीसदी भारत का शहरीकरण हो जाएगा, यानी भारत की आधी आबादी शहरों में निवास करेगी। अगर ऐसा हुआ तो यह एक बहुत बड़ा जनसांख्यिकीय बदलाव होगा। वायु प्रदूषण, शहरी बाढ़ और सूखा जैसी कई शहर केंद्रीय समस्याएं शहरी भारत के समग्र विकास में प्रमुख बाधाओं के रूप में तो मौजूद हैं ही, साथ ही शहरों में जमीन की कीमतें बहुत ज्यादा हैं, ट्रैफिक की समस्या है, शहरों में आज भी बहुत से लोग गंदी और मलिन बस्तियों में रहते हैं, जहां किसी भी तरह की आधारभूत सुविधाएं सुलभ नहीं हैं। शहरों में लोगों को साफ-सफाई कचरा प्रबंधन, अतिक्रमण आदि समस्याओं से जूझना पड़ता है। जब बरसात आती है तो शहरों में अक्सर जलभराव की समस्या उत्पन्न होती है, जिससे अक्सर जनजीवन अस्त-व्यस्त हो जाता है। बात चाहे दिल्ली, मुंबई, चेन्नई जैसे बड़े शहरों की हो या छोटे शहर की हो, सभी जगह यह समस्या आम है। शहरों में पानी की समस्या सबसे बड़ा मुद्दा है।</p>
<p><strong>- रंजना मिश्रा</strong><br /><strong>(ये लेखक के अपने विचार हैं)</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 29 Sep 2022 12:57:27 +0530</pubDate>
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